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वो मुझे चोदने लगा

मेरा नाम निशा है और मैं 22 साल की हूं. मेरी हाईट 5.5 फीट है और मेरा रंग गोरा है. मेरा फिगर 35-28-34 है और मैं दिखने में बहुत सेक्सी हूं.

यह बात 4 साल पुरानी है जब मैं 12वीं में थी. मेरी क्लास के सारे लड़के मेरे बूब्स दबाने के लिए मरे जाते थे.

उन सबसे अलग मेरी क्लास में एक हैंडसम लड़का था. उसकी पर्सेनेलिटी बहुत अच्छी थी. मैं उसको देखा करती थी. उसकी पैंट में उसका लंड भी दिखता रहता था.

कई बार चलते हुए या क्लास में बैठे हुए भी उसका लंड दिखाई देता था. मेरी क्लास की अन्य लड़कियां भी उसको देखा करती थीं. उसकी पैंट की ओर उसके लंड को भी चोर नजर से देखती रहती थीं.

एक दिन टीचर ने हमारी सीट बदलवा दी और इत्तेफाक से उस लड़के की सीट मेरी सीट के पीछे ही आ गयी.

पीछे आकर बैठने के बाद वो बड़बड़ाता हुआ उसको गाली देने लगा- साली रंडी ने सीट बदलवा दी … इसकी मां की … साली ने सारा मूड खराब कर दिया.
मैं पीछे मुड़कर देखने लगी तो वो थोड़ा चुप हुआ.

फिर मैं बोली- ऐसे गाली मत दे उनको, टीचर है वो!
वो बोला- तुझे बड़ी लगी हुई है उसकी इज्जत की?
मैंने कहा- तो ठीक है, और गाली दे … अगर उसने सुन लिया तो तेरी खैर नहीं.

फिर वो चुप हो गया. उसके बाद उसने गाली नहीं दी.

बीच बीच में वो मुझसे बात करता रहा. मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं भी उसको पसंद करती थी.

फिर बातों ही बातों में उसने मुझसे पूछा- तेरा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने जवाब दिया- हां है.
वो बोला- फिर तो तूने उसके साथ किया भी होगा?
मैंने अन्जान बनते हुए कहा- क्या?

फिर वो बेशर्म होकर बोला- सेक्स.
मैं बोली- नहीं, मैंने कभी नहीं किया.
उसने कहा- तो फिर तेरे इतने बड़े (बूब्स) कैसे हैं?

मैं हंसकर बोली- पता नहीं.
उसके बाद मैंने उससे बात नहीं की क्योंकि टीचर देख रही थी.
फिर वो भी आराम से बैठ गया.

तभी लंच का समय हो गया. लंच के बाद हमारा खेल का पीरियड था लेकिन मुझे लंच के बाद पेट में हल्का दर्द होने लगा था.

मैंने टीचर को ये बात बताई.
वो बोली- ठीक है, तो तुम प्लेग्राऊंड में मत जाना.

जब पीरियड शुरू हुआ तो क्लास के सारे स्टूडेंट नीचे चले गये. मैं कमरे में अकेली बैठी रही.

क्लास खाली देखकर मैं बेंच पर लेट गयी क्योंकि मुझे बैठने में दिक्कत हो रही थी.

मैं आंखें बंद करके लेटी हुई थी कि अचानक से किसी ने मेरी चूची को सहला दिया.
मैं सकपका गयी और एकदम से उठी तो सामने वही लफंगा खड़ा हुआ था.
वो मेरा चेहरा देखकर हंसने लगा.

गुस्सा होते हुए मैंने कहा- पागल है क्या तू, क्या कर रहा था ये?
उस पर जैसे मेरे गुस्से का फर्क ही नहीं पड़ा.

वैसे तो मैं भी उसको पसंद करती थी लेकिन उसने बिना पूछे मुझे छू लिया इसलिए मैं नाराज थी.

वो बोला- तूने मेरी बात का जवाब नहीं दिया था तब.
मैंने कहा- कौन सी बात?
वो बोला- यही कि … तेरे इतने बड़े कैसे हो गये?

मैं बोली- उससे पहले तू ये बता कि तू क्लास में कैसे आ गया?
उसने कहा- मेरे भी पेट में दर्द है, मैं हम दोनों का दर्द मिटाने आया हूं.

मैं जान गयी कि ये उसने जानबूझकर किया है. उसने मेरी और टीचर की बातों को सुन लिया था.

फिर वो मेरे पास आ गया और मेरे हाथ को सहलाने लगा.
वो बोला- यार, एक बार तेरे टच करने का बहुत मन कर रहा है मेरा. बहुत बड़े हैं तेरे.

मैं मना करने लगी. मगर वो कहां मानने वाला था.

वो मेरे बहुत पास आ बैठा. मैं भी उसको पसंद करती थी. उसने आकर मेरी चूचियों को छूना और धीरे से सहलाना शुरू कर दिया.
मैंने भी उसका मन रखा और उसको कुछ नहीं कहा.

उस टाइम सर्दियां थीं तो मैंने स्वेटर पहना हुआ था. स्वेटर के नीचे से उसका हाथ आया और वो मेरे बूब्स को दबाने लगा.

मुझे शर्म आने लगी तो मैंने उसका हाथ हटा दिया.
मैं वहां से उठकर दूसरे बेंच पर जा बैठी.

मुझे खुद पर गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि मैं उसके चक्कर में अपने पहले वाले बॉयफ्रेंड को भी धोखा दे रही थी.
मगर वो मेरे बॉयफ्रेंड से देखने में कहीं ज्यादा अच्छा था और मैं उसको रोक नहीं पा रही थी.

वो फिर से मेरे पास आ गया और बोला- छू तो लिये मैंने, एक बार अब दिखा भी दे तेरे बूब्स?
मैंने कहा- नहीं. कोई आ जायेगा.
वो बोला- कोई नहीं आयेगा.

फिर उसने समीज समेत मेरे कुर्ते को उठा दिया और मेरी चूची नंगी हो गयी.
उसने नंगी चूचियों को हाथों में भरा और जोर से दबा दिया.

मैं एकदम से उठ गयी.

इतने में ही क्लास के दूसरे छात्र भी आ गये. मैं अपनी सीट पर आ गयी. वो भी अपनी सीट पर आ बैठा.
उसने चुपके से मेरे कान में कहा- कल आयेगी क्या?
मैं बोली- हां, आऊंगी.

उसने कहा- ठीक है, तो फिर कल तुम काली ब्रा और काली ही पैंटी पहन कर आना.
फिर वो वहां से हटकर अपनी सीट पर चला गया.

अगले दिन जब मैं स्कूल पहुंची तो वो पहले से ही क्लास में बैठा हुआ था.
मैं अपनी सीट पर जाती उससे पहले वो वहां बैठ गया.

फिर मैं शर्मा कर बोली- क्या? ये क्या है, मुझे बैठने दे.

वो बोला- आज का क्या प्लान है? अगर तू हां करे तो कुछ करते हैं आज?
फिर वो खड़ा हुआ और धीमे से मेरे कान में बोला- आज लायब्रेरी का पीरियड है. अगर कुछ मूड हो तो बताना.

फिर अचानक से उसने मेरे गाल पर किस कर दी और अपने हाथ से मेरी गान्ड पर हाथ फेर कर चला गया.
मैं वहां 2 मिनट तक शॉक में ही खड़ी थी. तभी क्लास में बाकी बच्चे भी आना शुरू हो गये.

उसके बाद क्लास शुरू हो गयी. सब अपनी अपनी सीट पर बैठे थे.
वो मेरे पीछे ही था. वो बार बार अपना हाथ मेरी गांड पर लगा रहा था. मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

उस दिन मैं शॉल लेकर आई थी. उसने इसी का फायदा उठाया और नीचे ही नीचे मेरी शॉल में हाथ देकर मेरी चूचियों तक पहुंच गया.
उसने एक दो बार मेरी चूची दबा दी और मैं असहज हो गयी क्योंकि क्लास में बाकी स्टूडेंट्स भी थे.

पहले एक दो पीरियड वो ऐसे ही करता रहा. फिर म्यूजिक का पीरियड आया तो ज्यादार बच्चे वहां चले गये.
मैं और वो वहीं क्लास में रह गये.

हमारे साथ ही 4-5 छात्र और भी थे क्लास में. वो सब अपना अपना समूह बनाकर गपशप में लग गये.

अब वो मेरी सीट पर मेरे साथ ही आ बैठा क्योंकि मेरे साथ बैठी लड़की भी म्यूजिक क्लास में चली गयी थी.

उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा.
मैंने शॉल ओढ़ा था तो कुछ दिख नहीं रहा था.

उसका हाथ धीरे धीरे मेरे सूट के नीचे मेरी नाभि तक पहुंच गया.
मुझे सिरहन हो रही थी.

फिर उसने मेरी सलवार में हाथ दे दिया और मेरी चड्डी के अंदर हाथ देते हुए मेरी चूत को छू लिया.

चूत पर हाथ लगते ही मुझे करंट सा लगा. मैं एकदम से सिहर गयी.
मगर उसने उसी वक्त मेरी चूत को जोर से रगड़ते हुए सहला दिया.
मैं कामुक होने लगी और वो मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब मेरी जांघें अपने आप ही खुलकर उसके हाथ को अच्छी तरह से रास्ता देने लगीं ताकि उसकी उंगलियां मेरी चूत में और अंदर तक जा सकें.
उसने पूरी उंगली घुसा दी और मुझे बहुत मजा आने लगा.

मेरी सांसें तेजी से चलने लगीं और मैंने उसकी जांघ को कस कर पकड़ लिया.
वो अब और तेजी से उंगली चलाने लगा और फिर मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई.
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

अच्छा हुआ कि मैंने अपने बैग में एक अतिरिक्त कपड़ा रखा हुआ था. मैंने कपड़ा निकाला और धीरे से शॉल के नीचे ही अपनी सलवार में कपड़ा डालकर अपनी चूत का पानी पौंछ दिया.

वो अब उठकर अपने दोस्त के पास चला गया और हाथ धुलवाने लगा.
मेरी चूत के रस में उसका हाथ भी गीला हो गया था. हाथ धुलते हुए वो मेरी तरफ देख रहा था और मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी.

उसके बाद लंच हुआ और फिर लाइब्रेरी का पीरियड आ गया.
सब बच्चे जाने लगे.

वो मेरे पास आया और बोला- चलेगी क्या?
मैंने कहा- कहां चलना है?
वो बोला- तू चल तो सही … मैं बताता हूं.

हम दोनों लाइब्रेरी न जाकर दूसरी तरफ चले गये.
वो मुझे लड़कों के वॉशरूम में ले गया.

वहां जाते ही हम दोनों एक वॉशरूम में घुस गये और दरवाजा बंद कर दिया.

मैंने कहा- कोई आ गया तो?
वो बोला- कोई नहीं आयेगा.

फिर उसने अपनी जेब से कॉन्डम निकाला.
मैं कॉन्डम देखकर चौंक गयी.
वो बोला- ऐसे क्या देख रही है, मेरी नजर तुझपर पहले दिन से ही थी. अब जाकर तू हाथ आयी है.

उसके बाद उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया.
उसका लंड पहले से ही तनाव में था. मैंने उसका लंड पकड़ लिया और वो कॉन्डम का रैपर फाड़ने लगा.

फिर उसने अपनी पैंट खोली और नीचे से सरका कर नंगा हो गया. मगर पैंट उसकी टांगों में ही फंसी रही.

उसने मुझे सलवार खोलने को कहा.
मैंने शॉल उतार कर एक तरफ रखा और फिर अपनी सलवार खोल दी.
उसने मेरी पैंटी नीचे कर दी. अपना लंड मेरी चूत पर लगाकर वो मुझसे लिपट गया.

मुझे किस करने लगा और नीचे ही नीचे मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा.

अब मैं एकदम से गर्म होने लगी. उसके होंठ मेरे होंठों पर और उसका लंड मेरी चूत पर कहर ढहा रहे थे.

उसने मेरा कुर्ता ऊपर किया और काली ब्रा निकाल कर फिर मेरी चूचियों को पीने लगा.

मैं पागल होने लगी. उसकी जीभ मेरे निप्पलों पर जादू कर रही थी. मेरे निप्पल तन गये और अब मैंने उसके सिर को चूचियों पर दबाना शुरू कर दिया.

फिर वो नीचे बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.
मैं बदहवास सी होने लगी. मेरी चूत में बहुत मजा आ रहा था.
पहली बार मैं किसी लड़के से चूत चटवाने का मजा ले रही थी मैं क्योंकि मेरे पहले बॉयफ्रेंड ने कभी मेरी चूत नहीं चाटी थी.

अब कुछ देर चाटने के बाद वो उठा और मुझे लंड चूसने के लिए कहने लगा.
मैंने मना कर दिया क्योंकि उस वक्त लंड मुझे बहुत गंदा लगता था.

फिर उसने अपने लंड पर कॉन्डम पहन लिया.
उसके बाद उसने लंड को मेरी चूत पर रख दिया और जोर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

फिर उसने मेरी टांग हल्की सी उठाई और एक धक्का लगा दिया.
उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में उतर गया.

मेरी आह्ह … निकल गयी और मैं उससे लिपट गयी.
वो मेरी पीठ को सहलाने लगा और फिर मेरी गर्दन और गालों को चूमने लगा.

फिर उसने दूसरा धक्का दे दिया और इससे पहले कि मैं चिल्लाती उसने मेरे मुंह को अपने होंठों से बंद कर दिया.
मेरी चीख अंदर ही रह गयी.

फिर उसने धीरे धीरे पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
मेरी आंखों से आंसू गिरने लगे.
वो मुझे चोदने लगा.
मुझे दर्द होता रहा लेकिन वो चोदता गया.

फिर कुछ देर बाद मुझे चुदने का मजा आने लगा और धीरे धीरे दर्द कम हो गया.
अब मैं भी मजा लेकर चुदने लगी.
मैंने उसको कस कर पकड़ लिया और अपनी चूत के धक्के भी बदले में लगाने लगी.

अब मैं खुद उसके होंठों को चूस रही थी.
वो भी मशीन की तरह मेरी चूत को पेलने में लगा हुआ था.

उसने 20 मिनट तक मेरी चूत वहीं वॉशरूम में चोदी.
मैं झड़ चुकी थी.

फिर वो अचानक से रुक गया. उसने लंड बाहर निकाला और कॉन्डम उतार दिया. उसको उसने नीचे टॉयलेट सीट में डालकर फ्लश कर दिया.

फिर उसने मेरे हाथ में लंड दे दिया और हिलाने को कहा.

मैं उसका लंड हिलाने लगी और दो मिनट बाद उसके लंड से सफेद वीर्य निकला. उसकी कई पिचकारी छूटी और फिर वो शांत होता चला गया.
मेरा हाथ उसके माल में सन गया.

उसके बाद उसने अपने लंड को धोया और मैंने अपना हाथ धो लिया.
फिर मैंने भी अपने कपड़े सही किये.

अब उसने धीरे से बाहर की ओर झांका. उसने मुझे निकलने का इशारा किया.

मैं निकली और चुपके से अपनी क्लास में चली गयी.

कुछ देर के बाद वो भी आ गया.

मैं काफी थकी हुई महसूस कर रही थी. मैं वहीं बेंच पर लेटकर सो गयी.

उस दिन के बाद अक्सर हम क्लास में मस्ती करने लगे. जब क्लास में कोई न होता तो वो मुझे चूसने लगता और मेरे बूब्स दबा देता था. मैं उसके लंड की मुठ मार देती थी.

अपने पुराने बॉयफ्रेंड को मैंने फिर छोड़ ही दिया. मैं अपने नये बॉयफ्रेंड के साथ मजे लेने लगी.

अभी भी हम दोनों बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड हैं और एक दूसरे के साथ पूरा मजा करते हैं और एक दूसरे की फंतासी भी पूरी करते हैं.

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मेरी पहली सील पैक चूत की चुदाई

मेरा फिगर 30-28-30 है। मैं 20 साल की हूं और चुदने के लिए बेचैन भी हूं। मैं आपको अपनी पहली चूत मराई की कहानी बताने जा रही हूं। मैं जो भी बताने जा रही हूं यह बिल्कुल एक सच्ची घटना है।

कुछ दिन पहले की बात है कि मैं हॉस्टल से अपने घर जा रही थी। मेरी बड़ी बहन की शादी तय हो गई थी। बहुत सारे दोस्त आ रहे थे और मैंने भी अपने कुछ दोस्तों को बुलाया हुआ था।

उनमें एक दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड समीर भी था। वो शादी से दो दिन पहले ही आ गया था। अभी तक मेरी सील पैक चूत की चुदाई नहीं हुई थी। समीर का लंड भी मैंने अभी तक नहीं चखा था।

जब वो शादी में आ गया तो मुझसे अपने रहने का कमरा पूछने लगा।
मैंने उसको मेरा कमरा दिखा दिया। मैं दीदी के पास सोने वाली थी।

उसके बाद मैंने उसको हग किया और किस किया। फिर हम दोनों अपने अपने रूम में सोने चले गये।

रात को मेरी नींद खुल गयी। मुझे कुछ आवाजें आ रही थी। जब मैंने उठकर देखा तो मेरी आंखें फटी रह गयीं. मेरे मामा और मामी दोनों चुदाई में लगे हुए थे. मेरी मामी नीचे नंगी लेटी हुई थी और मामा मेरी मामी की चूत में लंड डाल रहे थे।

मामी मस्त होकर सेक्स के मजे वाली आवाजें निकाल रही थी।

ये देखकर मैं भी गर्म होने लगी. मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने वहीं पर अपनी पैंटी के अंदर हाथ डाल लिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।
मामी की चुदाई देखते हुए मैं चूत को सहला रही थी।

फिर मैंने तेजी से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

जब जब मामा का लंड मामी की चूत में जा रहा था तो मैं उनके लंड को अपनी चूत में जाता हुआ महसूस कर रही थी।
मैं सोच रही थी कि कोई मेरी चूत में भी ऐसे लंड डाल दे।

अब मामा तेजी से मामी को चोद रहे थे. मैं भी जोर से अपनी चूत को सहला रही थी।
इतने में ही मेरी चूत से एकदम पानी निकल गया। मेरी जांघें पूरी गीली हो गयीं।
मैं फिर वहां से वापस आ गयी.

मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत को साफ किया और बेड पर आकर लेट गयी. उसके बाद मैं लेटी रही और सोचती रही।
मैं सोच रही थी कि काश कोई लंड मेरी चूत के लिए भी होता। मैं समीर के बारे में सोचने लगी। समीर का लंड मैंने नहीं लिया था।

ऐसे ही सोचते हुए मुझे नींद आ गयी.

फिर जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं मामी की चुदाई के बारे में ही सोच रही थी.
मेरा मन समीर से मिलने का कर रहा था। मैं उसके रूम में चली गयी।

मैं जब वहां पहुंची तो वह नहाकर बाहर आया था। उसने अपनी टांगों पर तौलिया लपेटा हुआ था. वो शायद अपना अंडरवियर ढूंढ रहा था।
फिर मैंने देखा कि उसका तौलिया बेड में अटक गया और खुलकर नीचे गिर गया। वो एकदम से नंगा हो गया.

उसने जल्दी से यहां वहां देखा और तौलिया लपेट लिया. फिर वो पलटा तो पीछे मैं खड़ी दिख गयी।
उसने पूछा- तुम कब आईं?

मैं बोली- मैं बस अभी आई हूँ।
वो बोला- कुछ देखा तो नहीं?
मैं बोली- नहीं।

ये बोलकर फिर मैं उसको तैयार होने के लिए कहकर वापस आ गयी।

मैंने समीर का लंड देख लिया था। उसका लंड 7 इंच के करीब था और 3 इंच का मोटा था। मैं उसका लंड लेना चाह रही थी।

फिर दोपहर में सब लोग शॉपिंग के लिए जाने लगे। मुझे भी चलने के लिए कहा लेकिन मैंने बीमारी का बहाना बनाकर मना कर दिया. मैं वहीं रुक गयी।

उन सबके जाने के बाद मैं समीर के रूम में गयी।
वो लेटा हुआ था.

मैं उसके बेड पर चली गयी और उसके ऊपर लेटकर उसको किस करने लगी। वो भी मुझे किस करने लगा।

फिर उसने मुझे हटाते हुए कहा कि कोई देख लेगा।
मैंने बोला- कोई नहीं देखेगा, सब लोग मार्केट में गये हुए हैं.

उसके बाद हम दोनों फिर से किस करने लगे। उसका हाथ मेरी पैंटी पर गया तो वो गीली हो गयी थी।
वो मेरी चूत को सहलाने लगा।

उसके ऐसे बर्ताव से मैं गर्म हो गयी थी और चुदना चाहती थी।

उसके बाद उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया.
मैं नाटक करने लगी कि कोई आ जायेगा।

वो कहने लगा कि मुझे पता है तू चुदना चाह रही है। ज्यादा नाटक मत कर!
फिर उसने मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और मेरे बूब्स को चूसने लगा।

मैं भी उसको चूची चुसवाने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था. पहली बार मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरे बूब्स को चूसा था।

फिर वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरी गांड को भी दबाने लगा.
मुझे मजा आ रहा था लेकिन दर्द भी हो रहा था।

उसका लंड उसकी पैंट को फाड़ने वाला था। मुझे उसके लंड का तनाव साफ महसूस हो रहा था।

वो मुझे सब जगह से चूमने चूसने लगा। मैं यही चाह रही थी. मुझे समीर के साथ बहुत मजा आ रहा था. उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। मेरे भी कपड़े उसने उतरवा दिये।

मैं बेड पर उसके सामने बिना ब्रा के लेटी थी। वो अंडरवियर में था औऱ मेरे ऊपर लेटकर मेरे बूब्स को पीने लगा. मैं अपने चूचे उसको पिलाने लगी।

फिर उसने मेरी चूत पर लंड लगाना शुरू कर दिया।

मुझे मजा आ रहा था। मैं चाहती थी कि वो लंड को जल्दी से मेरी सील पैक चूत के अंदर डाल दे.
मगर उसके लंड पर अंडरवियर था और मेरी चूत पर पैंटी थी।

वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबा रहा था। मेरे बूब्स लाल हो गये थे। मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था। दर्द भी हो रहा था।

फिर उसने मेरी पैंटी में हाथ देकर मेरी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया। मैं मचलने लगी।

वो मेरी चूत में उंगली से चोदने लगा।

मैं उसके होंठों को चूसने लगी। उसके लंड को पकड़ने लगी।

वो बोला- रुक जा साली रंडी, तेरी चूत में यही लौड़ा पेलना है मुझे। मुझे पता है कि तू मेरा लंड लेना चाह रही है।
मैं उसको किस करती रही और उसके लंड को पकड़ कर हिलाती रही।

उसके लंड को चूत पर लगवाकर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था.
वो तेजी से मेरी चूत में उंगली को अंदर बाहर किये जा रहा था.
मैं पागल हुई जा रही थी।

फिर मेरी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया. मेरी चूत पूरी बह निकली।
मुझे बहुत मजा आया।

अब वो मेरी चूत में जीभ से चाटने लगा और मैं पागल होने लगी।
मैं बोली- आज डाल दे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

वो बोला- हां मुझे पता था साली, आ गयी तू लाइन पर! आज तेरी चूत को चोद दूंगा. फाड़ दूंगा इसको साली। बहुत मन है तुझे लंड लेने का। मैं तुझे आज पूरा लंड दूंगा। तू याद करेगी।

फिर वो अपने लंड पर तेल लगाने लगा.
मैं खुश हो रही थी और डर भी लग रहा था।
मेरी चूत को आज लंड मिलने वाला था लेकिन डर लग रहा था कि समीर का लंड मेरी चूत की क्या हालत करेगा।

उसने मेरी चूत पर भी तेल लगा दिया। फिर उसने मेरी सील पैक चूत पर निशाना लगा दिया. उसने लंड को चूत पर रखा और धक्का देने लगा।

उसका थोड़ा सा लंड ही गया था कि मैं चिल्ला पड़ी- आईई … आह्ह … निकाल इसे … आह्ह … ऊई मां … मेरी चूत … फट गयी … आह्ह … निकाल ले समीर … आह्ह बहुत दर्द हो रहा है मेरी चूत में!

समीर ने मेरी एक न सुनी और मेरी चूत में लंड को डालता चला गया।
उसका पूरा लंड घुसते ही मैं तड़पने लगी।
वो मेरे होंठों को अपने मुंह से चूसने लगा। मेरी आवाजें अंदर ही दब गयीं।

फिर उसने मेरे होंठों से होंठों को हटा लिया और मेरे मुंह पर हाथ रख दिया. वो जोर जोर से मेरी चूत में लंड के धक्के लगाने लगा।
मैं दर्द से तड़प रही थी और रो रही थी।

मेरी चूत से खून निकलने लगा था. समीर मेरी चूत में लंड को पेलता ही जा रहा था।
दस मिनट तक मैं दर्द में कराहती रही और वो मुझे चोदता रहा।

फिर मुझे भी मजा आने लगा. मेरा दर्द चला गया और मैं उसका साथ देने लगी।
अब मैं समीर के लंड से चुदने का मजा ले रही थी.

वो हांफ रहा था. उसके पूरे बदन में पसीना आ गया था।
मैं उसको चूमने लगी और अपनी गांड को उठा उठाकर चुदवाने लगी।

फिर वो और स्पीड से चोदने लगा.
मैंने उसको कस कर पकड़ लिया और फिर मैं झड़ने लगी।

उसके लंड से चुदते हुए मैं झड़ गयी। मुझे बहुत मजा आया लेकिन समीर चोदता ही रहा।

वो मुझे बीस मिनट तक लगातार चोदता रहा। अब वो मेरी चूत को फाड़ने में लगा हुआ था.

मेरी चूत में जलन हो रही थी लेकिन समीर नहीं रुक रहा था।
मैं उसको पीछे धकेलना चाह रही थी।

वो चोदते हुए बोला- साली, जब लंड लेने का मन कर रहा था तब नहीं सोचा कि दर्द भी होगा चुदने में? आज मैं तेरी चूत को फाड़ता रहूंगा। मैं तेरी चूत की प्यास मिटा दूंगा।
ये बोलकर वो फिर से चोदने लगा.

मैं उसके लंड को अपनी चूत में बर्दाश्त करती रही।

फिर उसका निकलने को हो गया. वो बोला- कहां गिराना है?
मैं बोली- अंदर नहीं गिराना है।

जब तक वो लंड को बाहर निकालने की सोचता तब तक उसके लंड से माल छूट गया और उसका माल मेरी चूत में गिर गया।
मैंने गुस्सा होकर कहा- ये क्या किया कुत्ते?
वो बोला- कुछ नहीं होगा. दवाई खा लेना।

फिर वो मेरे ऊपर ही लेट गया.
मुझे अब उस पर प्यार आ रहा था.

वो मुझे चूमने लगा.
और मैं भी उसको चूमने लगी।

वो बोला- अब दर्द नहीं हो रहा है ना?
मैं बोली- जलन हो रही है।

वो लंड को डाले हुए ही मेरे ऊपर लेट गया.
हम दोनों दस मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। उसका लंड मेरी चूत में ही सिकुड़ कर बाहर आ गया था। अब वो उठ गया. मेरी चूत की हालत बहुत बुरी हो गयी थी।

चूत पर खून लगा था और समीर के लंड का माल भी बाहर आ रहा था. मैं उठी तो मेरी चूत में जलन हो रही थी. मैं मुश्किल से बाथरूम में गयी और चूत को साफ किया. समीर ने मेरी मदद की।

फिर उसने मुझे नहलाया। उसके बाद नहाते हुए उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. वो मेरी गीली चूचियों को वहीं पर पीने लगा और मैं भी फिर से गर्म हो गयी. समीर ने मुझे बाथरूम में ही चोद दिया।

इस तरह से उस दिन समीर ने दो बार मेरी चुदाई की। उसके बाद हम दोनों तैयार हो गये. मैं अपने रूम में आ गयी। उस दिन मेरी पहली चुदाई हुई थी।

मेरी कुंवारी चूत की चुदाई होने के बाद मैंने अपनी वर्जिनिटी खो दी थी। उसके बाद फिर मैं शादी के दिन भी चुदी। दीदी की सुहागरात के दिन ही मेरी भी सुहागरात हो गयी। अब मैं कुंवारी नहीं रह गयी थी।

दीदी की शादी के बाद समीर वहां से चला गया.
फिर मैं समीर से कई बार चुदी और अभी भी चुदवाती रहती हूं.

इस तरह से मैंने अपनी पहली चुदाई करवाई।

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सेक्स का मज़ा

दोस्तो, मेरा नाम प्रियल है और मेरी उम्र 19 साल है. यह कहानी एक सच्ची कहानी है जो मेरी आपबीती भी है. इस कहानी में आपको बताऊंगी के कैसे हमने सेक्स का मज़ा लिया.

बात 2 महीने पहले की है. मैं बस से जा रही थी. तभी बस रुकी और एक हॉट लड़का चढ़ने लगा. उसे देखकर मेरे मन में हलचल होने लगी. मैं उससे अपनी चूत चुदवाने की सोचने लगी. इसी के चलते मेरा हाथ कब मेरी चूत के ऊपर चला गया मुझे पता नहीं चला.

वैसे मैं एक बात बता दूं … मुझे पोर्न देखने शौक है और मैं पोर्न देखते हुए अपनी चूत को सहला लेती हूं. मैंने कभी लंड नहीं लिया. मैं चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूं पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता है.

अचानक बस रुक गई और मेरे सीट के बगल में जो औरत बैठी थी, उतरने लगी. वो लड़का मेरे बगल में बैठ गया. उसके स्पर्श से मैं सिहर उठी … मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी.

थोड़ी देर में वो मुझसे बात करने लगा. उसने अपना नाम पवन बताया. वो भी वहीं जा रहा था जहां मैं जा रही थी. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे.
सफर के दौरान हमने बहुत बातें की. फिर मेरा स्टेशन आ गया और मुझे उतारना पड़ा. पर पवन ख्याल मेरे दिमाग से जा नहीं रहा था. रात भर उसके बारे ही सोच रही थी.

फिर 1 महीने बाद एक दिन मैं बाज़ार गई थी. तभी पीछे से किसी ने आवाज़ दी. मैंने पीछे मुड़ के देखा तो वो पवन था.
मैं बहुत खुश हुई. फिर हमने साथ में गुपचुप खाया.

उसने मुझसे नंबर मांगा तो मैंने बिना रुके अपना नंबर दिया. उस दिन से हम लोग रोज बात करते. कभी कभी रात के 2-3 बज जाते. इसी तरह 1 महीना बीत गया. मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था क्योंकि मुझे उससे प्यार जो हो गया था.

फिर हमने एक दिन मिलने की सोची. मैं बहुत खुश हुई. मैने अपनी चूचों पर क्रीम से मालिश की और अपनी चूत के बाल साफ किये क्योंकि मुझे पता था पवन मुझे चोदना चाहता है. मैंने कई बार उसके लंड को मेरे सामने खड़ा होते हुए देखा है जिसे वो छुपाते हुए बहुत सेक्सी लगता है.

उसने मुझे रास्ते से पिक किया और बोला- कहां जाना है?
मैंने कहा- जहां आपकी मर्ज़ी!
फिर हम उसके दोस्त के घर गए जहां पहले से ही तैयारी पूरी हो चुकी थी.

उसने मुझे जूस दिया और स्वयं भी पीने लगा. बीच बीच में वो मुझे छू रहा था. मेरी तो चूत गीली हो रही थी.

तभी उसने जानबूझकर अपना जूस मेरे कपड़ों पर गिरा दिया. मैं उसके इरादे समझ रही थी. फिर मैं वॉशरूम चली गई. वो मेरे पीछे पीछे गया.
और जैसे ही मैं पलटी उसने मुझे जोर से किस कर दिया. मैंने उसे छुड़ाने का नाटक किया … फिर मैं खुद उसका साथ देने लगी.

उसके हाथ मेरे चूचे पर आ गए जिससे मेरी सिसकारियां निकल गई- उंह … आह … अय!

लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने पागलों की तरह किस किया. पवन का एक हाथ मेरे चूचे पर और दूसरा मेरी चूत के ऊपर था. मैं गर्म हो रही थी.
फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पे लेकर आया. उसने अपने कपड़े उतार दिए. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था.

उसका 8 इंच का लंड पूरा तन गया था. मैंने पहली बार किसी का लंड देखा था, वो भी इतना बड़ा!

फिर वो मेरे कपड़े निकालने लगा. उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. अब मैं भी उसके सामने नंगी थी. वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी. उसने अपना हाथ मेरे चूचों पर रखा और मसलने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी.

15 मिनट चूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह के सामने खड़ा कर दिया और चूसने को बोला.
मैंने मना कर दिया … तो उसने ज़िद की. मैंने उसका सुपारा मुंह के अंदर लिया. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैंने निकाल दिया.
वो कुछ न बोला और मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब जैसा मैंने पहले भी बताया था कि मुझे सेक्स से बहुत डर लगता है, तो मेरी सिसकारियां डर में बदल गई. मुझे पसीना आने लगा.
और जब वो अपने लंड को हिलाने लगा तो डर से मेरी पूरी तरह फट चुकी थी.

उसने अपना सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और हल्का सा धक्का लगाया. मेरी तो दर्द से हालात खराब हो गई.
मैंने जैसे तैसे करके उसे हटाया और कपड़े पहनने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगा- आई लवयू प्रियल … प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ!
मैंने सोचा कि अगर मैंने हां कर दी तो पवन मुझे चोदे बिना रुकेगा नहीं. और मेरी तो हालत खराब थी … मैंने उसे ना चाहते हुए भी मना कर दिया.
मैं वहां से सीधे अपने घर आ गई और उसके बारे में सोच कर रोने लगी.

दोस्तो, भले ही मैं उस दिन भाग के आ गई थी पर मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी. साथ ही मेरी चुदास भी बढ़ती जा रही थी. मैं मन ही मन अपने आप को गाली दे रही थी कि क्या जरूरत थी वहां से जाने की.
और ऊपर से पवन का वो चेहरा मेरी नज़रों के सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. उससे भी ज्यादा मुझे उसके लंड की याद सता रही थी.
मुझे रात भर नींद नहीं आई और मैं सिर्फ करवटें बदलते रह गई.

फिर जैसे तैसे रात कटी. मैंने सुबह उठ के देखा तो पवन का मेसेज आया था. उसमें लिखा था- आई एम् सॉरी प्रियल … प्लीज मुझसे बात करो … आई लव यू यार … मैं प्रॉमिस करता हूं कि आज के बाद आपको टच भी नहीं करूंगा … पर प्लीज़ मुझसे बात करो.

मेसेज पढ़ के मेरी आँखें भर आई … मन करने लगा कि अभी भाग के उसके पास जाऊं और गले से लिपट जाऊं.
पर मैं किस मुंह से उसके पास जाऊं, ये समझ नहीं आ रहा था.

एक दिन मैंने निश्चय कर ही लिया कि आज उसे प्रपोज कर के ही रहूंगी और अपनी चूत चुदवा कर रहूंगी.
मैं उससे मिलने चली गई. मैंने उसे एक होटल में बुलाया.

जैसे ही उसने मुझे देखा … बस देखता ही रह गया.
उस दिन मैंने टाइट जीन्स पहन रखी थी और सफ़ेद टॉप वो भी नाभि के ऊपर से … जिसमें मेरे चूचे साफ दिख रहे थे.

मुझे देख के उसका लन्ड आकार लेने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश कर रहा था.

फिर मैंने उसके पास जाकर बोला- क्या देख रहे?
वो थोड़ा शरमा गया और मुझे जोर से गले लगा लिया.

जैसे ही उसने मुझे गले लगाया … उसका लन्ड मेरी चूत से टकराने लगा. मेरी तो जान निकल गई … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
और शायद उसे भी ये समझ आ गया था. उसने अपना हाथ मेरे गान्ड पर रख दिया. मेरी सिसकारियां छूटने को हुई जिसे मैंने जैसे तैसे करके रोका.

फिर हम दोनों अन्दर गये. हम दोनों ने वहां खाना खाया. उसके इरादे ठीक नहीं लग रहे थे. मैं फिर से नर्वस हो रही थी. तभी उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. मैं एकदम सकपका गई. मेरा रोम-रोम तड़प उठा और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.

उसके एक मात्र स्पर्श से मैं गर्म हो चुकी थी. फिर उसने मुझसे प्यार भरी बातें की. मैंने उससे ऊपर कमरे में चलने को कहा. मुझे ये कहते हुए थोड़ा अटपटा लग रहा था पर मैं और कंट्रोल नहीं कर सकती थी.
उसने कहा- आप आगे चलो.
मैं आगे हो गई.

जब हम थोड़ी दूर चले गए, तब मैं जानबूझकर फिसल गई और पैर में मोच आने की नाटक करने लगी. उसने शायद ये भांप लिया था … उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और रूम में ले आया. उसने मुझे इस तरह उठाया था जिससे उसका लन्ड मेरी गान्ड को टच कर रहा था.
मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी.

मुझे बिस्तर में लिटा के वो जाने लगा.
मैं उसके इस व्यवहार से हैरान थी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. वो छुड़ाने लगा.

पर आज मैं पूरी तैयारी करके आई थी ऐसे बिना चुदवाये उसे कैसे जाने देती.

मैंने उसके हाथों को अपने चूचों पर रखा. वो मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखने लगा. मैं बिना समय गंवाए उसे किस करने लगी. मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया था.
थोड़ी देर तक तो वो मुझसे छूटने नाटक करने लगा … फिर खुद मेरा साथ देने लगा.

इसी तरह लगभग 10 मिनट के लंबी धुएँदार किस करने बाद उसने अचानक से मेरा हाथ छुड़ा लिया और मुझसे दूर हो गया.
मैं वापस उसे किस करने की कोशिश करने लगी. पर आज ना जाने उसे क्या हो गया था … उसने एक बार मुझे देखा और बिना कुछ बोले चला गया.
उसकी आँखों में कुछ नमी थी.

मैं पूरी उदास हो गई. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं उसकी खामोशी समझ नहीं पा रही थी कि उसने ऐसा क्यों किया. यह सोच सोच के मैं पागल हो रही थी.
मैं वहीं बिस्तर पे बैठ गई … पर रो रो के मेरा बुरा हाल हो गया था.
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है. मैं अब क्या करूं … सब मेरे हाथ से छूट रहा था.

मैंने पवन के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि उसके घर वालों ने उसे मुझसे दूर रहने के लिए कहा है क्योंकि मेरा स्टेटस और उसका स्टेटस अलग अलग है.
मैं ऊंचे खानदान से हूं और वो थोड़ा गरीब है. ऊपर से हम दोनों अलग अलग जाति के हैं इसलिए उसके घरवालों ने उसे मना किया है.

पर मुझे और मेरी फैमिली को इससे कोई फर्क नही पड़ता … उन्हें तो बस एक पढ़ा लिखा समझदार दामाद चाहिए जो उनकी बेटी को खुश रख सके. और मुझे तो पवन ही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ पति लगता है.

ये बात जानने के बाद मैं सीधा पवन के घर गई. पहले तो वो लोग चौंक गए. पर फिर उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.
मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने उनसे सीधी बात कह दी कि मैं उनके बेटे से प्यार करती हूं और उससे शादी करना चाहती हूं.

इस पर वे हैरान थे. उन्होंने अपनी मुश्किलें बताई.
मैंने उन्हें समझाया … अंत में वो लोग मान गए.

अब बारी पवन की थी … मैंने उसे रात में सोने के लिए अपने घर बुलाया क्योंकि मेरे घरवाले बाहर किसी की शादी में गए थे और दोपहर से पहले आने वाले नहीं थे.
मैंने सोच लिया था कि आज तो बात बनानी ही होगी.

पहले तो उसने मना किया फिर मेरे ज़ोर देने पर मान गया.
वो करीब 9 बजे के आसपास आया. मैं उसी का इंतज़ार कर रही थी.

फिर हमने खाना खाया.
उसने कहा- मेरा कमरा कहां है … मुझे सोना है नींद आ रही है. मेरा मूड खराब हो गया मैं उसे अपने कमरे में ले गई.

मैं- ये मेरा कमरा है और तुम मेरे साथ मेरे बेड पर सोने वाले हो.
पवन- नहीं, आप ये क्या कह रही … मैं ये नहीं कर सकता.
मैं- क्यों? क्या समस्या है इसमें?

पवन- ये ग़लत है. मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगा, आप यहां सो जाइए.
मैं- इसमें क्या ग़लत है बस सोने को बोल रही हूँ … मुझे चोदने को नहीं. तुम इतना रिएक्ट क्यों कर रहे हो?
पवन- वो … म् … म … म … मैं … व … वो!

मैं- तुम कह क्यों नहीं देते कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो … ऐसे चुप रहने से क्या होगा?
पवन- न … न … नहीं … अ … आप गलत समझ रही हैं.
मैं- अच्छा … तो तुम्हारी जबान क्यों लड़खड़ा रही है … बताओगे मुझे?
पवन- वो … म … मैं … अम … मैं जा रहा बाहर सोने आप भी सो जाओ.
मैं- नहीं … रुको.

वो जाने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
इससे पहले के वो मेरा हाथ छुड़ा पाता … मैंने उसे किस कर लिया वो मेरी पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश करता रहा पर मैं लगी रही. 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उसको छोड़ा.
वो सिर झुकाए हुए था.

मैंने उसका एक हाथ अपने बूब्स पर और दूसरा अपनी गांड पर रख दिया. वो कुछ बोल पाता इससे पहले मैंने उसे दोबारा किस करना चालू किया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी गांड पर सहलाना शुरु किया. मैं खुश हो गई मेरा काम जो बन गया था.

वो मुझे ज़ोर से किस करने लगा, मैं भी उसका साथ दे रही थी. फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और एक एक करके मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए. उसने मेरी चूत को सहलाना शुरु किया. मैं मदहोश होने लगी. मेरी मुंह से मादक सिसकारियां निकलने लगी- आह उम अह.
मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी इसलिए हमें बहुत मज़ा आ रहा था.

उसके बाद उसने अपनी जीभ मेरे चूत में डाला … वो अहसास मैं बयां नहीं कर सकती … मुझे जन्नत का सुख मिल रहा था.
उसने मुझे जीभ से चोदना जारी रखा. धीरे धीरे हम 69 की पोजिशन में आ गए. मैं पहली बार लंड चूस रही थी वो भी इतना बड़ा लौड़ा … लगभग 7-8 इंच का तो होगा ही!
मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मेरी जिंदगी का पहला अहसास था.

धीरे धीरे मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं उसके मुंह में ही झड़ गई. उसने मेरा सारा पानी पी लिया. मुझे ऐसी खुशी कभी नहीं मिली जो उस समय मिल रही थी.

अब बारी मेरी चूत की चुदाई की थी. उसने अपना लन्ड मेरी चूत पर रखा और रगड़ने लगा.
मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी. मैंने उससे कहा- अब देर मत करो पवन … जल्दी से डाल दो … मेरी जान निकल रही है … अब और मत तड़पा … अब बस चोद दे मुझे … बहुत दिन बाद मिला है.

उसने देर न करते हुए अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर से धक्का मारा. उसका आधा लंड मेरी चूत में चला गया.
मेरी तो चीख निकल गई. मुझे लगा कोई गर्म रॉड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया है. दर्द से मेरा हाल बेहाल हो गया.

फिर उसने अपना हाथ मेरे चूचियों पर रखा और मुझे किस करने लगा. जब मेरा दर्द कम हुआ तब उसने दोबारा धक्का मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना लन्ड आगे पीछे करना चालू किया.
फिर क्या … हम दोनों को जन्नत का सुख मिलने लगा.
ये उसका भी पहली बार ही था … वो बड़ी मस्ती से चुदाई कर रहा था.

पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था ‘आह … अम्म … हम … अह … अय … आह!’

वो धड़ाधड़ अपना लन्ड मेरी चूत में पेल रहा था. पूरा बेड हम दोनों के चुदाई से हिलने लगा.

इतनी धकापेल चुदाई के बाद मेरा होने वाला था. उसने ये भांप लिया और वो ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा. थोड़ी ही देर बाद मेरा पानी निकल गया जिसे उसने चाट कर साफ कर दिया.

फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लन्ड डाल दिया. मेरी आह निकल गई.

उसने गपागप लंड डालना शुरू किया. मेरी चूत गीली हो चुकी थी जिससे कुछ फच फच आवाजें भी आ रही थी.
मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी- चोदो मुझे पवन … और ज़ोर से चोदो … जान निकाल दे मेरी … आह … फॅक मी बेबी … और ज़ोर से चोदो … आह … अम्म … अह … उन्ह.

लगभग 15 मिनट के ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो झड़ने वाला था उसने मुझसे पूछा- कहां निकालूं?
मैंने कहा- चूत में ही निकाल दो.
क्योंकि मैं उसे फील करना चाहती थी.

8-10 शॉट लगाने के बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गया.

उसका गर्मागर्म वीर्य पाकर मेरी चूत खिल उठी थी. वो एहसास अभी भी मेरे दिमाग से निकल नहीं पा रहा … वो मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

उसने मुझे आई लव यू कहा और मेरा धन्यवाद करने लगा.
मैंने भी उसे आई लव यू टू कहा और इस अनोखे अहसास के लिए धन्यवाद दिया.
हम दोनों के चेहरे पर खुशी और सुकून झलक रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका लन्ड फिर से खड़ा होने लगा. इस तरह हमने उस रात 5 बार चुदाई की कभी बिस्तर में तो कभी सोफे पे.
हमने अलग अलग पोजिशन ट्राई किया और हमारी चुदाई रात भर चलती रही.

दोपहर में जाने से पहले उसने मुझे एक बार और चोदा.
इस तरह से हम दोनों ने चुदाई का पूरा पूरा मज़ा लिया.

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मेरी कुंवारी बुर

मेरा नाम दिव्या है, मैं दिल्ली से हूं।
आज मेरी शादी को पूरा एक साल हो गया है. मेरे हस्बैंड मुझसे प्यार करते हैं, मैं भी उनसे प्यार करती हूं.

लेकिन आज यहां मैं आई हूं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की एक ख़ास घटना सुनाने को। यह मेरी प्रेम कहानी है शादी से पहले की.

उस समय का बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी. एक लड़का था जो हमेशा मुझे देखता था. जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो मुझे उसकी आंखों में मेरे लिए सच्चा प्यार झलकता था.

बहुत समय तक हमारे बीच यही चलता रहा। एक दूसरे से कुछ कहते नहीं थे … बस देख लिया करते थे। हम चाहते थे पास आना … पर डरते थे।
मैंने सोचा कि वह ही शुरुआत करेगा. पर उसने कुछ नहीं किया.

बहुत समय तक मैंने उसका इन्तजार किया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने ही कुछ सोचा, मैंने किसी बहाने उसके पास जाना था क्योंकि उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए सच्चा प्यार और भरोसा नजर आता था।

फिर एक दिन मैंने एक कागज पर अपना नंबर लिखा और कॉलेज जाते ही उसकी बेंच पर रख दिया. मैं जानती थी कि उसका कॉल जरूर आएगा.

और ऐसा ही हुआ. शाम को उसका कॉल आया. मैं अपने घर की छत पर उसके फोन का इन्तजार कर रही थी.
नया नंबर देखकर मैंने फोन उठाया और बहुत धीमी सी आवाज में हेलो बोली।

बस यही पहली शुरुआत थी हमारे प्यार की!

तब हमारे बीच बहुत सारी बातें हुई. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे; हम मिलने भी लगे।
एक दूसरे का हाथ थामे वह सड़क पर घूमना … प्यार भरी नजरों से एक दूसरे को देखना।

एक दिन मुझे बुखार हो गया। मैं उससे कॉल पर बात नहीं कर पाई। मैं जानती थी कि उसने मेरे फोन का बहुत इन्तजार किया होगा.

जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो मैंने उसको कॉल किया. उसने मुझसे सारी बातें पूछी, मेरी तबीयत … मेरे हालात।
मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिएँ.
उसने मुझसे कहा- बताओ कितने चाहिएँ?

मैंने कहा- सिर्फ दो हजार भेज दो.
उसने कहा- ठीक है, भेज रहा हूं. पर तुम अपना ध्यान रखना।

मेरा इतना ध्यान रखना सिर्फ उसको आता था.

कुछ दिनों बाद मैं ठीक हो गई, मैंने उसको कॉल किया और एक जगह मिलने के लिए बुलाया. मेरा मन उसको अपनी बांहों में भरने का कर रहा था. मैं जाकर सीधे उसके गले लग गई. मैं और वो एक दूसरे की बांहों में बहुत देर तक चिपके रहे।

आज मेरा उससे बहुत प्यार करने का मन कर रहा था. मैंने उससे कहा- आज मैं पूरा दिन फ्री हूं, चलो किसी होटल में चलते हैं.
उसने आंखें झुका कर हम्म ही कर दी.

अब इसे हम दोनों का प्यार कह लीजिए या प्यार में हुआ सेक्स! पर हम एक दूसरे को और नजदीक से जानना चाहते थे, एक दूसरे को टूट कर प्यार करना चाहते थे।

हमने एक होटल में रूम लिया और हम पूरा दिन वहां रहे। होटल में जाकर हम दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक गए.

मैंने धीरे धीरे उसकी शर्ट को उतारा, उसकी नंगी बालों वाली छाती पर अपने हाथों को फिराना शुरू किया. उसने आनन्द से आंखें बंद कर ली थी.

फिर मैंने उसके माथे पर किस किया और उसके सारे जिस्म पर किस करती चली गई. मुझे बस आज उसकी और मेरी एक नई कहानी बनानी थी.
हम दोनों प्यार में इतने डूबे थे।

फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. मेरे शर्ट और सलवार को धीरे-धीरे करके उतारा. मेरा सारा गोरा बदन उसके सामने था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में उसके सामने लेटी थी। उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया। मेरे सारे बदन पर अपनी उंगलियों फिर आई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और मेरे बूब्स को हल्के हल्के चूसने लगा. मैंने अपने हाथ को उसके सिर पर फिराना शुरू कर दिया. वो कभी कभी मेरी नंगी कमर पर भी अपना हाथ फिरा रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

यह पहली बार था कि मैं सेक्स कर रही थी, वरना आज तक सिर्फ सेक्स विडियो में ही देखा था।

फिर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। और अपना लंड मेरी कुंवारी बुर पर लगाने लगा. उसने थोड़ी कोशिश की अपने लंड को मेरी कसी बुर के अंदर डालने की!
पर लंड अंदर गया नहीं!

मैंने उससे कहा- बेबी, पहले मुंह से करो ना … गीली हो जाएगी तो फिर आराम से करना … तब चला जाएगा.
उसने ऐसे ही किया. मेरे बूब्स से किस करते करते नीचे मेरी बुर तक चला गया. वह मेरी सारी बुर को मुंह में लेकर चूसने लगा.

मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अच्छा भी लग रहा था. मैंने यह बुर चटायी का सीन वीडियो में देखा था तो मुझे भी एक बार करना भी था, इसलिए मैंने उससे बोला था.

मैं बेड पर बाल खोलकर लेटी थी और बस उसके नंगे जिस्म को देख कर आनंद ले रही थी. मैं कभी उसको देखती तो कभी बुर चटायी में मिलने वाले मजे के कारण आंखें बंद कर के लेट जाती.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको अपनी ओर खींचा. अब तक उसके मुख की लार से मेरी बुर पूरी गीली हो गई थी. उसका लंड भी प्रिकम छोड़ कर हल्का गीला हो गया था.

हम दोनों प्रेमी इस पोजीशन में आ चुके थे कि अब एक दूसरे में समा जाएं. वो मेरे ऊपर आक र अपने लंड को मेरी बुर के छेद पर सेट करने लगा और मैंने उसकी मदद की.
फिर उसने सीधा हल्के से धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पीछे की तरफ धकेला चाहा ताकि ज्यादा अंदर तक ना जा सके.

लेकिन धीरे-धीरे फिर मुझे मजा आने लगा. अब मैंने अपनी पूरी टांगें अपने प्रेमी के लंड के स्वागत में खोल दी थी और मैंने उसकी कोली भर ली।
वह भी ‘दिव्या दिव्या’ कर रहा था और मुझे बहुत प्यार कर रहा था.

हमने सिर्फ इसी पोजीशन में सेक्स किया और हम दोनों झड़ गए.

फिर हम दोनों ने अपने अंडर गारमेंट्स पहन लिए और ऐसे ही एक दूसरे के पास बैठ गए. बहुत सारी फिर प्यारी बातें की।

अबकी बार उसको मैंने बेड की तरफ धक्का दे दिया उसके लंड पर अपना हाथ फिराने लगी. मैंने पोर्न वीडियो में देखा था और उसी तरह मुझे एक बार लंड मुंह में लेना था.
फिर मैंने उसको मुंह से मजा दिलाया, मैंने उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. धीरे-धीरे मैं उसको मजा दिलाने लगी.
वह मेरे बालों पर और मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रहा था.

फिर से हम दोनों तैयार थे एक दूसरे में खोने के लिए। फिर वह पीछे की तरफ लेट गया और मुझे अपनी ओर खींचा. वह बेड पर सीधा लेट गया, मैं अपने घुटनों को मोड़कर उसके ऊपर जाकर बैठ गई. फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ऐसे ही किस करते करते कब उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे पता ही नहीं चला. बस मजा आ रहा था, पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी.

उसने मेरे बालों को पीछे से खोल दिया. मेरी नंगी कमर पर मेरे बाल बिखरे पड़े थे और मेरी कमर पर उसके हाथ चल रहे थे. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटा दिया और पीछे से मेरी चूत में ही लंड डाला. मेरे बालों को मेरे कंधे से हटाकर वहां किस करने लगा. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था … हम एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.

हमने इसी तरह मजा लिया. वह इसी तरह मेरी चूत में झड़ गया और मैं भी ऐसे ही उल्टी लेटे-लेटे झड़ रही थी तो मैंने बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह की आवाज को रोकने के लिए अपना मुंह बेड में धंसा दिया।

कुछ देर तक हम दो प्रेमी चुदाई के बाद वैसे ही तेज तेज सांसें भरते रहे. फिर मैंने हल्के से अपना चेहरा उसकी तरफ किया, उसने मेरे चेहरे पर किस किया.

उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर रखा था. झड़ने के बाद भी बहुत देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

बहुत समय बीत गया था तो अब मुझे घर जाना था. मेरी मम्मी पापा मेरी बाट देख रहे होंगे.
मैंने उससे कहा- डियर मुझे जाना होगा.
उसने कहा- ठीक है, जाओ. और मैं भी चलता हूं.

उसने मुझे घर के पास छोड़ दिया और वह भी अपने घर चला गया.

फिर हमने रात को कॉल पर बात की. उस पूरे दिन का नजारा हमारी आंखों के सामने घूम रहा था. उस पूरी रात हमने उस दिन के बारे में ही बात की कि हमने कैसे कैसे इंजॉय किया.

उस दिन सेक्स करने के बाद मैं भी और वह भी एक दूसरे के बहुत दीवाने हो गए थे. ऐसा लगता था जैसे अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे.

लेकिन हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ समय बाद मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया. कॉलेज कंप्लीट होते ही पापा ने मेरे लिए लड़का देख लिया. हमारे घर का माहौल कुछ ऐसा था कि मैं पापा की बात को कभी ना नहीं कह सकती थी.
जहां पापा ने चाहा … मुझे शादी करनी पड़ी.

आज मैं अपने हस्बैंड के साथ हूं … खुश हूं. पर शायद जैसे उसके साथ रहती वैसे नहीं।

प्यार तो करते हैं हम एक दूसरे को हस्बैंड वाइफ … लेकिन कुछ वैसा प्यार नहीं है जैसा उसके साथ था।

‘मैं शादी कर रही हूं.’ सुनते ही उसने सिर्फ एक बार मुझसे पूछा था कि यह सच है क्या?
फिर उसके बाद उसने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैं भी नहीं कर पाई।
किस मुंह से करती?

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मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो

दोस्तो, मेरा नाम शोनू है. मेरी उम्र 22 साल है. मैं ग्रेजुएशन कर रही हूँ. मेरा बदन बहुत गोरा है और मेरा साईज कुछ यूं है बड़े बड़े 34 इंच के मम्मे हैं. लचीली सी कमर 30 इंच की है और पीछे थिरकती हुई बड़ी सी गांड 36 इंच की है. जिसे देख कर लड़कों के लंड खड़े हो जाते हैं.

पहले तो मैं एक सीधी लड़की थी, पर अब मैं एक रंडी बन गई हूँ. मुझे लड़कों के बड़े बड़े लंड चूत में लेने की आदत पड़ गई है.

ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में थी. तब मेरी उम्र 19 साल थी. मेरा बहुत ही खूबसूरत और कसा हुआ बदन है. मेरे बड़े बड़े मम्मे और बड़ी गांड मेरी मचलती जवानी को साफ जाहिर कर रहे थे.

मुझे क्लास में कई लड़कों ने प्रपोज भी किया था, पर मैंने किसी को भाव नहीं दिया.

कुछ दिन बीते और मेरी 12 वीं कक्षा की परीक्षा शुरू हो गई.

पहला पेपर शुरू हुआ, तो वहां मेरा रोल नंबर एक लड़के के पीछे था … जिसका नाम शिबू था. वह बहुत ही स्मार्ट और खूबसूरत था. उसका कसा हुआ बदन और फिट बॉडी पर सारी लड़कियां फ़िदा थीं.
सब उसे देखतीं, पर वो किसी को नहीं देखता था.

मेरा भी दिल उस पर आ गया था. मैं सोचने लगी कि इससे कैसे बात शुरू करूं … पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

अब दूसरे पेपर का दिन आया, तो मैंने सोचा कि आज तो इससे बात करके ही रहूंगी.

उस दिन मैंने रेड कलर में बड़े गले का टॉप पहना हुआ था, जिसमें से मेरे 36 इंच के चूचे साफ नजर आ रहे थे. मैंने पेपर के दौरान ही उससे पेंसिल मांगी. उसने मुझे पीछे मुड़ कर देखा और उसकी नजर मेरे मम्मों पर जा पड़ी. मैं कुछ ज्यादा ही झुक कर बैठी थी तो उसे मेरे मम्मे साफ़ दिखने लगे थे. वो मेरे दूध देखता ही रह गया.

उसने मुझे देखा और पेन्सिल दे दी.

अब इसके बाद मैंने हर पेपर में उससे बात की और आखिरी में हमने एक दूसरे के नम्बर ले लिए. वो भी मेरी तरफ आकर्षित हो गया था. ऐसा कैसे हुआ ये मुझे समझ नहीं आया.

खैर … हम दोनों में धीरे धीरे प्यार हो गया और हमने अकेले में मिल कर सेक्स कर लिया.
इसके बाद तो उसने मुझे कई बार चोदा.

मुझे भी उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा था. उसी के साथ मुझे सिगरेट और शराब की आदत भी लग गई थी. मेरे बिंदास स्वभाव को देख कर वो भी मेरे साथ खूब मजे लेता था.

फिर एक दिन शिबु और मैं ड्रिंक कर रहे थे. एक बार चुदाई हो चुकी थी और मैं एक सिगरेट पी रही थी.

तभी शिबु ने मुझसे कहा- शोनू क्या हम दोनों ग्रुप चुदाई करें?
मैंने साफ मना कर दिया.
वो बोला- जान ग्रुप चुदाई में बहुत मजा आता है … मान जाओ ना!

उसके बहुत मनाने के बाद मैंने उससे हां कर दी. वह बहुत खुश हुआ.

मैंने उससे पूछा- ग्रुप में कौन कौन रहेगा?
तो उसने कहा- मेरे 3 दोस्त और उनकी गर्लफ्रेंड रहेंगी … हम सब बहुत मस्त चुदाई करेंगे.
मैंने भी कहा- हां बाबू … चोद लेना … मुझे भी जम कर चुदने का मन है.

ये तय हो गया तो शिबु प्लान बनाने लगा.

फिर उस दिन की बात है, जब मुझे पता ही नहीं था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. तब भी मैं ये मान चुकी थी कि मेरी चूत के लिए कुछ और लंड भी मिलने वाले हैं.

हमारी ग्रुप चुदाई एक होटल में होनी तय हुई थी. मैंने उस दिन ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी थी. ऊपर एक बहुत ही खुला और चुस्त सा सलवार सूट पहना था … जिसमें मैं एकदम रंडी लग रही थी.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझे अपनी बाइक पर बिठाया और मुझसे बोला- आह जान आज तो मस्त माल लग रही हो. तुम्हें तो आज मेरे दोस्त बहुत चोदेंगे.
उसकी बात से मैं शरमा गई.

कुछ ही देर में हम दोनों उस होटल के कमरे में पहुंच गए, जहां उसके 3 दोस्त हमारा इंतजार कर रहे थे.

राज, हरि, विशाल ये तीनों दोस्त मेरी जवानी देख कर एकदम से हॉट हो गए. वो तीनों मुझे ऐसे देख रहे थे, जैसे मुझे अभी ही पकड़ कर चोद देंगे. उनकी आंखों में चूत चुदाई की हवस साफ दिखाई दे रही थी.

मैंने उनसे पूछा- आप लोगों की गर्लफ्रेंड कहां हैं?
तो उन्होंने कहा- वो आज नहीं आएंगी.
मैंने पूछा- फिर हम चुदाई कैसे करेंगे?
राज बोला- चुदाई तो होगी भाभी …
मैं- कैसे?
हरि- भाभी हम सब मिलकर आपके साथ xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.

ये सुनकर मैं बहुत डर गई- क्या मतलब है तुम्हारा?

मैंने अपने शिबु की तरफ देखा. शिबु मुस्कुरा दिया. मैं समझ गई कि यह इनकी कोई चाल है.

मैं वहां से जाने लगी, तभी शिबु ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और गले में किस करने लगा.

वो बोला- बेबी मान जाओ ना प्लीज. आई लव यू जान.

शिबु बहुत जिद करने लगा. मैं भी क्या करती. उसके प्यार के लिए मैं मान गई तो वो सभी बहुत खुश हुए. हमारे बीच हंसी मजाक चलने लगा. दारू की बोतल खुल गई और सभी ने ड्रिंक करना शुरू कर दिया.

फिर शिबू मुझे पकड़ कर मेरे बड़े बड़े मम्मों को दबाने लगा. मुझे चार लौंडों के सामने अपने दूध दबवाने में बहुत शर्म आ रही थी.

फिर थोड़ी ही देर में दारू के असर से मेरी जवानी की गर्मी बाहर आने लगी. मुझे आज कुछ अलग सा लग रहा था. मैंने शिबु की तरफ देखा तो उसने आंख मार दी. मैं समझ गई कि इसने मेरे गिलास में कोई उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा डाली है.

खैर … मैं तो चुदने को आई ही थी. शिबू मेरे मम्मों को दबा रहा था और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

‘आहह … ऊऊहह …’

शिबू ने मुझे बेड पर बैठा दिया और उसके दोस्त कुर्सी लगा कर सामने बैठ गए. शिबू ने मेरा कुर्ता निकाल दिया और मेरे चूचे काली ब्रा में उन सबके सामने आ गए. शिबू मेरे पीछे आया और मेरी काली ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

मुझे भी मजा आने लगा था.

फिर वो तीनों उठ कर पास आ गए और हरि ने मेरी ब्रा खींच दी. ब्रा हटते ही मेरे चूचे उछल कर बाहर उन सबके सामने आ गए.

उन सबने बारी बारी से मेरे मम्मों पर हाथ फेरने शुरू किए. इतने लोगों के हाथ मेरे बूब्स पर थे … इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उन सबके लंड भी खड़े हो चुके थे.

हरि मेरे नरम नरम मम्मों को सहलाते हुए बोला- शिबु क्या मस्त माल है तेरी गर्लफ्रेंड … आज ये मस्त मजा देगी.
शिबु- हां भाई, एकदम रंडी की तरह है.

अपने प्रेमी के मुँह से ये सुन कर मुझे अजीब लगा. शिबु ने आज तक मुझे कभी ऐसा शब्द नहीं बोला था.

मैंने भी नशे में सोचा कि आज तो मैं वैसे भी रंडी बनने वाली हूँ … कह लेने दो.

हरि- भाभी, आप बहुत सेक्सी हो … आपको चोदने में बहुत मजा आएगा.
मैं कुछ नहीं बोली.

शिबु- आओ मेरी रंडी शोनू … मेरा लौड़ा मुँह में ले लो.

मैंने भी सब के सामने बिना हिचकिचाहट के मेरे शिबु का पेन्ट निकाला और चड्डी में हाथ डाल कर उसके 6 इंच का लंड पकड़ कर हिलाने लगी. लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया. शिबु को बहुत मजा आने लगा.

शिबु- आहह … मेरी रंडी क्या लंड चूसती हो … मजा आ जाता है.
विशाल- भाभी जी हमारा भी लंड चूस लो.
मैं- हां देवर जी … सब लाइन में खड़े हो जाओ … सबको मस्त कर दूंगी.

मेरी बात सुनकर वो तीनों लाइन में खड़े हो गए और मैं शिबु का लंड छोड़ कर उन तीनों के पैंट निकालने लगी.

उनके लंड खड़े थे … सबसे पहले मैंने हरि की पैंट उतारी, तो मैं दंग रह गई. उसका लंड उसकी चड्डी में बहुत बड़ा दिख रहा था. जब मैंने उसकी चड्डी निकाली, तो उसका मूसल लंड देख आकर मैं डर गई. उसका लंड करीब 8-9 इंच का था और काफी मोटा.

हरि के बाद विशाल और राज की पैंट उतारी तो उन सबके लंड भी बहुत बड़े बड़े थे … मेरे शिबु से सभी के लंड काफी बड़े थे.

राज- भाभी आज आप हमारी रंडी बनने वाली हो … पता है न आपको!
मैं- हां, मेरा शिबू मुझे रंडी बनाना चाहता है … तो मैं भी रंडी बनने को तैयार हूं.

उन चारों ने मेरी सलवार निकाल दी और सभी मुझ पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े. शिबु मेरी ब्लैक पैंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा. हरि और राज मेरे बूब्स चूसने लगे और विशाल ने मेरी गांड पर काटना और चूमना शुरू कर दिया.

मैं चार मर्दों के बीच अकेली रांड सी पागल हुई जा रही थी. मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी थीं- आआहहह इस्स … उन्हह.
xxx ग्रुप सेक्स में मुझे बहुत आनन्द मिल रहा था.

उन चारों ने मुझे घुटने के बल बैठा दिया और सब मेरे पास आकर खड़े हो गए. सबसे पहले विशाल अपना 8 इंच का लंड मेरे मुँह के सामने ले आया. मैंने उसका लंड पकड़ा और चूसने लगी. उसका लंड एकदम लॉलीपॉप की तरह रसीला था और उसेक लंड से निकलते प्रीकम कोई चाटने में मुझे भी बहुत मजा रहा था.

मैंने विशाल का पूरा लंड अन्दर ले लिया और मस्ती से चूसने लगी.

विशाल- आआआह … क्या लंड चूसती है शिबु तेरी रंडी भाभी..

उसके बाद हरि और राज ने अपने 9-9 इंच के मोटे मोटे लंड मेरे दोनों हाथ में दे दिए और शिबु मुझे ये सब करते हुए देख रहा था.

मैं भी उसे देख देख कर उन तीनों के लंड के साथ खेलने लगी.

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद विशाल ने मेरे मुँह में ही अपना पानी डाल दिया. उसका स्वाद अजीब था … पहले मैंने कभी भी लंड का रस नहीं पिया था.

वो झड़ते हुए बोला- आंह पी जा मेरा पानी रंडी!

मैंने नाक बंद की और उसके लंड का पूरा पानी पी गई. वे सब बारी बारी से मेरे मुँह में लंड डालने के बाद रस छोड़ने लगे. मेरा मुँह दुखने लगा था.

इसके बाद फिर से दारू और सिगरेट का दौर चलने लगा. मुझे भी दारू पीने की चुल्ल हो रही थी. मैं अब बहुत अधिक चुदासी हो गई थी.

जब मैंने उन सबके लंड सहलाए तो दुबारा से लंड खड़े हो गए. वो तीनों मुझे पलंग पर ले गए. सामने मेरा शिबु शराब पीते हुए सब देख कर अपना लंड हिला रहा था.

मुझे बिस्तर पर लेटा दिया गया. विशाल ने मेरी पैंटी निकाल दी. हरि मुझे चूमने लगा और राज मेरे मम्मों से खेल रहा था.

अचानक से विशाल ने मेरी चूत में उंगली डाल दी … मुझे बहुत मजा आने लगा. वह अपनी उंगली मेरी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था.

इधर हरि का मुँह मेरे मुँह में था. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. वो मुझे भूखे शेर की तरह मेरे मुँह में मुँह डाल कर चाट रहा था. मैं भी उसका सिर दोनों हाथों से पकड़ कर उसका साथ देने लगी.

राज भी मेरे बड़े मम्मों को खूब काटते सहलाते हुए मुझे मजा देने लगा था.

फिर राज मेरी चूत के पास गया … जहां विशाल लगा था. उसने विशाल को हटा कर अपना मुँह मेरी चूत में लगा दिया.

मेरी वासना भरी सिसकारियां निकलने लगीं- आहह उन्ह … अह … मजा रहा मुझे … ऐसे ही चूसो मेरी चूत.

उधर हरि मेरे मम्मों से खेल रहा था और विशाल ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया था.

शिबु- शोनू मेरी रांड मजा आ रहा है न तुझे!
मैं- हां भड़वे, बहुत मजा आ रहा है.
शिबू- अभी और मजा आएगा … रुक जा बहन की लौड़ी … तेरी फुद्दी की चटनी बनने वाली है.
राज- अब सब लोग हटो … इस रंडी की चुदाई पहले मैं करूंगा.

उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड डालने लगा. जब वह मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा, तो मुझे बहुत मजा आ रहा था. उसने अपना लंड जोर से मेरी चूत पेल डाला. उसका टोपी ही अन्दर गई थी कि मैं जोर से चिल्लाई दी.

‘ऊ … मर गई … साले हरामी धीरे पेल मादरचोद … आह … फाड़ दी कुत्ते … निकालो इसे … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.’

पर उसने मेरी एक नहीं सुनी. बल्कि एक और जोर का धक्का लगा दिया. मुझे ऐसा लगा मानो मेरी चूत पूरी फ़ट गई हो. मेरी आंख से आंसू आने लगे थे.

मैं- आआहह … उन्ह … रुक जा साले … मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मुझे जाने दो … मैं मर जाऊँगी.

इतने में शिबु ने आगे आकर मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और बोला- रंडी मादरचोदी … तेरी मां का भोसड़ा … अभी तो बहुत मजे ले रही थी … अब क्या हुआ कुत्ती..!

कुछ देर ऐसे ही चुदने के बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मेरा दर्द अब मजे में बदल गया और मैं जोर जोर से सिसकारियां भरने लगी- आहहहह उन्ह..ह और जोर से चोदो मुझे आहह … बहुत मजा रहा है … आह चोदो अपनी रंडी को … ऐसे ही.

कुछ ही देर में मैं झड़ गई.

मेरे झड़ने के बाद हरि ने मुझे एक पैग पिलाया, जिससे मुझे राहत मिल गई.

उसके बाद राज मेरी चूत में लंड डाल कर जोर जोर से धक्का मारने लगा. बाकी सब अपने लंड हिला रहे थे. दस मिनट बाद राज भी मेरी चूत में ही झड़ गया और दूर हट गया. मैं अभी नहीं झड़ी थी … मुझे राज पर गुस्सा आने लगा था.

हरि- कुतिया … कैसा लगा तुझे इतना बड़ा लंड लेकर … आज तक तो तू तेरे शिबू का ही 6 इंच का लंड लेती थी.
मैं- बहुत मजा आया भोसड़ी के … चल अब तू आजा चोद दे भड़वे मुझे रंडी की तरह.

मेरी गालियां सुनकर उसे गुस्सा आ गया- भड़वा बोलेगी साली … कुतिया छिनाल … तेरी मां का भोसड़ा … रुक रंडी अभी बताता हूं.

अब उसने मुझे सीधा लेटा दिया और अपना लंड एक ही झटके में मेरी चूत में पूरा डाल दिया.
मैं दर्द के मारे तड़फ गई- आह … नहीं धीरे कर ले … अब नहीं बोलूंगी … आहह … आहहहह … मर गई … आहहह.

लेकिन हरि जोर जोर से पूरी स्पीड में मेरी चुदाई कर रहा था और मैं दर्द से मरी जा रही थी. इसी बीच मेरी चूत का दो बार पानी निकल गया था. फिर वो लंड निकाल कर सीधा लेट गया.

हरि- चल रंडी … आ मेरे लंड के ऊपर बैठ जा.

मैं भी गांड हिलाते हुए जाकर उसके लंड पर बैठ गई. मैंने उसके मोटे लंड को अपनी चूत पर टिका लिया और नीचे बैठने लगी. मुझे ऐसे में चुदने में बहुत मजा रहा था. मैं पूरा लंड चूत में लेकर जोर जोर से अपनी चूत मरवाने लगी थी.

‘आआह … आआहह..’

मैं हरि के लंड पर ऊपर नीचे होने लगी. उसने मुझे अपनी छाती की तरफ खींचा तो मेरी गांड पीछे से खुल गई.

तभी पीछे से विशाल आया और उसने मुझे हरि के ऊपर सीधा लेटा दिया. हरि का लंड अभी भी मेरी चूत में था.

विशाल- देखो तो साली की क्या मस्त गांड है … रंडी की गांड मारने में कितना मजा आएगा.

मैं डर गई.

मैं- नहीं नहीं विशाल प्लीज गांड में नहीं … बहुत दर्द होगा.

पर वो नहीं माना और उसने मेरी कमर को कसके पकड़ लिया. मैं झटपटाने लगी … पर नीचे से हरि ने भी मेरे हाथ पकड़ लिए.

वे सब हंसने लगे.

फिर विशाल ने मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश करने लगा. पर मेरी गांड का छेद बहुत छोटा था. उसने जबरदस्ती लंड गांड में घुसाने की कोशिश की और उसके लंड की टोपी गांड में अन्दर गुस गई.

मैं दर्द से कंप उठी. मैं रोई चिल्लाई- आंह … नहीं मेरी गांड मत मारो.

मगर वो लंड डालता ही गया.

मैं- विशाल मेरी गांड बहुत छोटी है … प्लीज ज्यादा जोर मत लगाओ … तुम्हें गांड मारनी ही है न तो मेरे बैग मैं एक क्रीम रखी है … वो लगा लो.

तब शिबु ने मेरे बैग से क्रीम निकाल कर विशाल को दे दी. विशाल ने अपनी उंगली से क्रीम मेरी गांड में अन्दर तक लगा दी और अपने लंड पर भी लगा ली.

अब वो फिर से अपने लंड को मेरी गांड में डालने लगा. अब लंड थोड़ा आसानी से गांड में घुस रहा था, पर उसका लंड इतना मोटा था कि मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

वो मेरी गांड में लंड डालने की स्पीड बढ़ाने लगा. नीचे से हरि भी अपना लंड मेरी चूत में डाल रहा था. मेरी गांड और चूत दोनों एक साथ चुद रही थीं.

कुछ देर के दर्द के बाद मुझे भी अब मजा आने लगा था.
मैं मुस्कुराते हुए चिल्लाने लगी- अंह उन्ह … आह … हहहह हह … चोदो मुझे … और जोर से चोद दो … आह बना दो आज मुझे रंडी … मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो … आआहह ऊऊऊहह …

मैं जोर जोर से चिल्लाकर सैंडविच चुदाई के मजे ले रही थी. तभी राज आया और उसने सामने से मेरे मुँह में लंड दे दिया. अब मेरे सारे छेदों में लंड था.

शिबू- अब बन गई मेरी शोनू रंडी … तुझे मैं ऐसे ही चुदता हुआ देखना चाहता था … तुझे मैं बाजारू रंडी बना दूंगा.

मैं भी उसकी बातें सुन कर और मजे से चुदवा रही थी.

कोई बीस मिनट बाद मैं बहुत थक चुकी थी. सबके सब झड़ने वाले थे … तो जोर जोर से धक्के मारने लगे थे. मैं फिर से झड़ गई थी. मेरी चूत से पानी बहने लगा था. तभी हरि मेरी चूत में झड़ गया.

उसके बाद राज मेरे मुँह में झड़ गया. मैं उसका पूरा पानी पी गई. थोड़ी ही देर में विशाल भी मेरी गांड में ही झड़ गया.

हम सब बहुत थक चुके थे, तो ऐसे ही लेट गए.

थोड़ी देर बाद सब उठे और सबने दारू के पैग लगाए और मुझे एक बार फिर से चोदना शुरू कर दिया.

इस बार मुझे xxx ग्रुप सेक्स में बहुत मजा आ रहा था.

शिबु ने भी मेरी गांड मारी और सबने अपना अपना पानी मेरे ऊपर गिराया. फिर हम साथ में नहाए और तैयार हो गए. सबने घर जाते समय मुझे होंठों पर किस की.

हरि बोला- रंडी अब जब भी मौका मिलेगा … हम ऐसे ही xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.
मैंने भी कहा- तुम जब बुलाओगे तब अपनी गांड और चूत लेकर आ जाऊंगी.

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उसका लन्ड मेरे मुंह में था

दोस्तो, मेरा नाम परिधि सारस्वत है और मैं दिल्ली से हूं।

इससे पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देती हूं। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा हैं और शरीर भरा पूरा है। मेरा फिगर 33-28-33 का है। मतलब लड़कों की भाषा में मैं एक शानदार माल हूं।

तो चलिए अब आते हैं कहानी पर।

यह बात आज से लगभग 2 साल पहले की है। राहुल नाम का लड़का हमारा पड़ोसी है। हमारे परिवारों के बीच काफी आना – जाना है। स्कूल के समय में भी मैं और राहुल एक ही स्कूल में थे।

हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन हमारे बीच कभी भी ऐसा – वैसा कुछ नहीं था। हम दोनों आपस में खूब बातें करते थे और मज़े करते थे। मुझे भी राहुल के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था।
वो लगभग रोज मेरे घर पर आता था और कई बार मैं भी उसके घर पर चली जाती थी। लेकिन इससे हमारे परिवार को कभी भी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्कूल के बाद हम दोनों ने अलग – अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।

एक दिन मेरी कॉलेज की छुट्टी थी और मेरी नानी की तबियत खराब हो गई थी। तो मेरे मम्मी – पापा नानी से मिलने के लिए चले गए। अब मैं घर पर अकेली रह गई थी।

कुछ देर तो मैं टाइम पास करती रही लेकिन फिर मैं भी बोर होने लग गई। तो मैंने सोचा कि क्यों न राहुल को बुला लिया जाए। इससे मेरा टाइम पास भी हो जाएगा और स्कूल की पुरानी यादें भी ताजा हो जायेंगी।

तो मैंने राहुल को फोन किया कि मैं आज घर पर अकेली हूं और बोर हो रही हूं। तुम मेरे घर पर आ जाओ और फिर गप्पे मारेंगे।
उसने कहा- ठीक है, मैं 15-20 मिनट में आता हूं।
मैं अब राहुल का इंतजार करने लगी।

लगभग 15 मिनट बाद घर की डोर बेल बजी। मुझे पता था कि राहुल है तो मैं गई और गेट खोल दिया और राहुल को अंदर बुला लिया।
राहुल अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया।

फिर मैं उसके लिए पानी लाने किचन में चली गई। मैंने उस दिन गहरे गले का टॉप पहना था।

जैसे ही पानी देने झुकी तो मैंने देखा कि राहुल की नजरें टॉप के अंदर झांक रही है।
मैंने ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए जल्दी से उसे पानी दिया और उसके बगल में सोफे पर बैठ गई।

फिर उसने वही पुरानी स्कूल कि बातें शुरू कर दी और हम दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर कुछ देर बाद मैंने ही उससे पूछ लिया- ओय हीरो … कोई गर्लफ्रेंड वगेरह बनाई क्या?
तो वो बोला- नहीं यार … और तूने?
मैंने भी कहा- नहीं।

फिर वो मज़ाक करते हुए बोला- तो तू ही बन जा मेरी गर्लफ्रेंड।
तो मैंने भी हंसते हुए कह दिया- तेरी गर्लफ्रेंड बनेगी मेरी जूती।

वो मज़ाक-मज़ाक में मुझे तकिए से मारने लग गया और मैं भी उसे तकिए से मारने लग गई।

इसी बीच मुझे एहसास हुआ कि वो खेलते – खेलते मेरे बूब्स छू रहा है।
मज़ा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए उसे खुद से दूर कर दिया।
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप बैठ गया।

फिर शाम को मेरे मम्मी – पापा आ गए और सब कुछ पहले की तरह चलना शुरू हो गया। मैं भी कॉलेज जाने लग गई। इस बीच मेरी राहुल से बहुत ही कम बात हुई या यूं कहें बात हुई ही नहीं।
बस ऐसे ही 2 महीने बीत गए पता ही नहीं चला।

अब मेरा एक पेपर भी आ गया था लेकिन ये पेपर जयपुर था। पापा को ऑफिस का काम था तो पापा बोले- मैं तो नहीं जा सकता हूं.
तो मम्मी बोली- अकेले नहीं जाना है।

अब बहुत सोच – विचार के बाद ये तय हुआ कि पापा राहुल के घरवालों से बात करेंगे कि राहुल मुझे जयपुर पेपर दिलवा कर ले आए।

तो पापा ने अगले दिन राहुल के पापा से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं। राहुल की भी छुट्टियां चल रही हैं। वो घर पर फ्री ही रहता है। वो परिधि के साथ जयपुर चला जाएगा।
तो अब तय हो चुका था कि राहुल मेरे साथ जयपुर जा रहा है।

मैं अब ये सोच रही थी कि उस दिन के बाद अब मैं कैसे राहुल से बात करूंगी? शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही कह दिया था।
खैर जो होगा देखा जायेगा।

पापा ने कहा- तुम दोनों ट्रेन से चले जाना, सेफ भी रहेगा।

लेकिन उन दिनों जयपुर जाने वाली ट्रेन काफी लेट चल रही थी। तो सबने मिलकर ये फैसला किया कि हम स्लीपर बस से जयपुर जाएंगे।
पापा ने हमारी डबल स्लीपर की टिकट बुक करवा दी थी।

अगले दिन शाम को पापा हम दोनों को बस में बैठा आए। मैं खिड़की की और बैठी थी और राहुल मेरे बगल में ही बैठ गया।

मुझे बस में नींद नहीं आ रही थी तो मैं फोन देखते हुए टाइम पास कर रही थी।
तभी राहुल ने पूछा- पेपर की तैयारी कैसी है?
तो मैंने कहा- ठीक – ठाक ही है।

इस प्रकार हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें शुरू हो गई थी।

कुछ देर बाद मैं फोन बन्द करके सो गई। हालांकि मुझे नींद नहीं आ रही थी बस मैंने आँखें बन्द की हुए थी।
उधर राहुल भी सो गया था।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि राहुल का हाथ मुझे टच कर रहा है।
मैंने सोचा कि जगह कम है इसलिए हो सकता है। मैंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं बस दूसरी ओर मुंह करके लेट गई।

फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि राहुल का हाथ मेरी कमर पर है लेकिन मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उसका हाथ धीरे – धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया। अब उसका हाथ मेरी गान्ड पर था। वो मेरी गान्ड पर गोल – गोल हाथ घुमा रहा था। शायद उसे लगा कि मैं सो गई हूं।

लेकिन अब मुझे भी उसका टच अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद वो मुझसे सटकर चिपक गया और सोने का नाटक करने लग गया।
मैंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर लाया और धीरे – धीरे मेरे बूब्स मसलने लगा। अब मेरे अंदर की भी अन्तर्वासना जाग चुकी थी। मेरे निपल्स खड़े होने लग गए थे और मैं अपनी सिसकारियां बड़ी मुश्किल से रोक रही थी।

धीरे – धीरे उसने अपने हाथ का दवाब बढ़ा दिया और अपने दूसरा हाथ मेरी चूत के उपर ले आया और मेरी चूत सहलाने लग गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड को छू रहा था। मेरी गान्ड उसके लन्ड के कड़कपन को महसूस कर रही थी.

अब तक उसे भी पता चल गया था कि मैं बस सोने का नाटक कर रही हूं।
वो मेरे बूब्स को जोर से मसलते हुए बोला- परिधि आई लव यू!
तो मैं भी बोल उठी- आई लव यू।

अब तो उसे खुली छूट मिल चुकी थी। अब वो जोर – जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरी चूत सहला रहा था। मेरी भी सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थी। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे चूत के दाने को सहलाने लगा।

मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उसका लन्ड मसलने लग गई थी। फिर उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ा और मेरे होंठ चूमने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लग गयी।

फिर उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट भी निकाल दी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लग गया और मेरी चूत में उंगली करने लगा। मैंने भी उसकी शर्ट और पैंट निकाल कर उसे एकदम नंगा कर दिया और उसका लन्ड आगे – पीछे करने लगी।

उसका लन्ड काफी बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें ऊपर की ओर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। अब तो मैं आपे से बाहर हो गई थी। वो लगातार मेरी चूत के दाने को चाट रहा था और मैं उसके सिर को जोर – जोर से दबा रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरी चूत में से गर्म – गर्म लावा निकलने लगा और राहुल उसे पी भी गया।

अब मैं शांत हो चुकी थी लेकिन उसने मेरी चूत को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म होने लग गई।

अब वो मेरे ऊपर आ गया और अपना बड़ा लन्ड मेरे होंठों के पास ले आया। वो अपने लन्ड से मेरे होटों को टच करने लगा तो मैं समझ गई और मैंने अपना मुंह खोल दिया। अब उसका लन्ड मेरे मुंह में था और मैं जोर – जोर से उसका लन्ड चूस रही थी।

उसका पूरा लन्ड गीला हो चुका था। अब राहुल ने अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला और उसे मेरी चूत पर मसलने लग गया।
तो मेरा बहुत ही बुरा हाल था। मैंने उसे आंखों से इशारा किया और उसने अपने लन्ड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे अचानक दर्द हुआ।

मैंने उसे वहीं रोक दिया।

फिर वो मेरे निप्पल सहलाने लगा और होंठ चूसने लग गया।

अचानक ही उसने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में था।
मेरी आंखों से आंसू निकलने लग गए थे लेकिन वो मेरे होंठ चूस रहा था इसलिए मैं चीख नहीं सकी।

अब उसने धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया. फिर मुझे भी मज़ा आने लग गया। मैं भी उसका साथ देने लग गई। वो कभी मेरे बूब्स चूसता तो कभी होंठ।
लगभग 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।

फिर जयपुर पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया. हमने रात को होटल के कमरे में एक बार और चुदाई की.

हम दोनों का ही मन था कि हम पूरी रात चुदाई करते रहें लेकिन अगले दिन मैंने पेपर देना था तो सोना भी जरूरी था.

और सुबह उठ कर मैं तैयार होकर पेपर देने गयी.

पेपर के बाद हमने होटल छोड़ दिया और बस से वापस दिल्ली आ गए।

उसके बाद से मुझे भी अपनी चुदाई में मजा आने लगा था, मुझे चुदाई की लत लग गयी थी. राहुल तो हर वक्त मुझे चोदने को तैयार रहता था. तो हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते थे।

एक बार राहुल ने मेरी गान्ड भी मारी थी। लेकिन वो कहानी किसी और दिन।

फिर राहुल के पापा का ट्रान्सफर रांची हो गया। तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।

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चूत चटायी का मजा

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

काफी दिन से मैं चाह रहा था कि अपने साथ घटी घटना को आप लोगों के साथ शेयर करूं. लेकिन टाइम नहीं मिल पाने के कारण मैं अपनी कहानी शेयर नहीं कर पा रहा था. तो आज टाइम निकाल कर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती सुनाने जा रहा हूं. यह मेरी पहली कहानी है अगर इसमें कोई त्रुटि हो तो मैं क्षमा चाहता हूं.

अब आप लोगों का ज्यादा समय नष्ट ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आता हूं।

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

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मेरी सील टूट चुकी थी

हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

वो रास्ते में बोला- यार, मेरा मन शांत नहीं हुआ.
उसकी बात सुनकर मुझे भी चुदास भरने लगी. मैंने फिर भी उससे कहा- क्यों … मजा नहीं आया क्या?
वो बोला- पानी भर तो निकला है, ऐसा तो मैं मुठ मार कर भी निकाल लेता हूँ.
मैंने कहा- तो फिर क्या चाहते हो?
वो बोला- चलो एक दोस्त के फ्लैट में चलते हैं.
मैंने कहा- कोई परेशानी तो नहीं होगी न?
वो बोला- मैं पहले उससे बात कर लेता हूँ.
मैंने कहा- उसको फ्लैट से जाने की कह देना … तभी ठीक रहेगा.
उसने कहा- ठीक है.

उसने फोन पर अपने दोस्त से बात की, दोस्त ने हामी भर दी और वो बोला कि आ जा … मैं कुछ देर में वैसे भी जाने वाला हूँ.
अब मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझसे पूछा- अब तो ठीक है?
मैंने मुस्कुरा कर हां कर दी. हम दोनों उसके फ्लैट की तरफ चल दिया.

उसके फ्लैट में पहुँच कर उसके दोस्त ने पानी वगैरह दिया और बोला- यार, मुझे जाना है. तू ये चाभी ले ले और बंद करके बाहर एक जगह छिपा कर रख देना.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने उसको हां कहा और उसका दोस्त फ्लैट से चला गया.

दोस्त के जाते ही उसने फ्लैट का दरवाजा बंद किया और मुझे पकड़ कर मेरी चूची मसलने लगा. अब मैं भी बिंदास हो गई थी.

उसने मेरे कपड़ों को हाथ लगाया, तो मैंने उससे कहा- मैं उतार देती हूँ … मेरे पास यही ड्रेस है … तुम्हारी जल्दीबाजी में कहीं फट न जाए.
वो हंसने लगा और बोला- फटना तो है ही.
मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा- फटना मतलब … मैं उतार तो रही हूँ.
वो फिर हंसने लगा.

मैं समझ गई और उसकी छाती पर प्यार से मुक्का मारने लगी. मैंने कहा- उसको फड़वाने के लिए ही तो तेरे साथ आई हूँ. आई लव यू जान.
उसने भी मुझे अपनी बांहों में भरा और मेरे होंठ चूमते हुए मुझसे कहा- आई लव यू टू मेरी जान.
यह कह कर वो मेरे कपड़े उतारने लगा.

कुछ ही पलों में उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था. वो मेरी चूची को चूसने और चूमने लगा. मैं मस्त हो गई और उसके सर को अपनी छाती से दबाते हुए उसको अपना दूध पिलाने लगी.

वो मुझे चूमते चूमते बिस्तर पर ले आया और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया. मैं भी बेतहाशा चूम रही थी. उसका साथ मुझे बड़ा ही मस्त लग रहा था.

फिर वो मुझे चूमते चाटते हुए नीचे को होने लगा. उसने मेरी चूत को सहलाया और अपनी जीभ रखने लगा. मुझे उसकी जुबान का टच बहुत ही गर्म लगा और मैंने एकदम से सिहर उठी. वो मेरी चूत चाटने लगा.

तभी मुझे उसका लंड देखने मन किया. मैंने उसके लंड को हाथ लगाया और बोली- मुझे तुम्हारा देखना है.
वो बोला- क्या देखना है?
मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से मसला और कहा- इसको.
वो मुझे ठिठोली करने लगा- पैन्ट को क्या देखना है?
मैंने कहा- पैन्ट को नहीं, इसके अन्दर जो है, उसको देखना है.
वो बोला- पैन्ट के अन्दर तो चड्डी है. तुमको चड्डी देखना है?

मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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बचपन की दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी.

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