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मैं गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी

नमस्कार मैं 41 साल की औरत हूं मेरा नाम सुरभि है।  आज मैं आपको अपने सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं यह मेरी कहानी सच्ची कहानी है आज मैं इस कहानी में आपको यह बता रही हूँ  कि मेरा दामाद कैसे मुझे प्रेग्नेंट कर दिया मेरी बेटी तो प्रेग्नेंट है ही मैं भी 2 महीने की प्रेग्नेंट हूं। यह सब कब कैसे और क्यों हो गया वह मैं आपको सिलसिलेवार तरीके से कहानी के माध्यम से इस वेबसाइट पर लिख रही हूं ताकि मैं अपना मन हल्का कर सकूं।

मेरी बेटी आकांक्षा की शादी दिल्ली के एक अच्छे खानदान मैं हो गई। मेरे दामाद जी एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और बहुत बड़े पद पर हैं पैसे भी खूब  है उनके पास उनके माता-पिता उनके साथ नहीं रहते मेरे दामाद जी नोएडा में रहते हैं और उनके मम्मी-पापा दोनों दिल्ली में रहते हैं । उनकी एक बहन है वह विदेश में रहते हैं जो शादीशुदा है। वह अपने मम्मी पापा को 6 महीने के लिए अपने यहां बुला ली तो दामाद जी का  मन नहीं लगने लगा था शादी पिछले साल ही हुई थी और मेरी बिटिया आकांक्षा को भी मन था कि मैं कुछ दिन के लिए उसके पास जाकर रहूं मेरी बेटी भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है ।

तो मैं उन दोनों के आग्रह पर मैं बेटी दामाद  के पास ही चली गई। लखनऊ में सिर्फ आकांक्षा के पापा और मेरी छोटी बेटी नेहा रहने लगे मेरे पति भी बोले कि जाओ थोड़े दिन तक अपनी बेटी के साथ रहकर आओ तुम्हें अच्छा लगेगा मैं और नेहा दोनों यहां पर रह लेंगे कोई दिक्कत नहीं होगा। और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गई . दामाद जी मुझे स्टेशन पर लेने के लिए आए हैं बेटी भी साथ आए वह दोनों बहुत खुश हुए और फिर मैं नोएडा के लिए निकल गई जहां पर वह लोग रहते थे ।

समय बीतता गया हम तीनों ही एक-दूसरे से काफी घुलमिल गए थे दामाद जी बहुत अच्छे स्वभाव के थे तो हंसी मजाक करते थे।  उसके बाद मैं मेरी बेटी और मेरा  दामाद ऐसे रहने लगे, जैसे कि दोस्त हो, मुझे अपने दामाद का आदत बहुत अच्छा लगा।  कुछ दिनों के बाद मेरी बेटी आकांक्षा को ऑफिस काम के लिए बेंगलुरु जाना हुआ।  और जाना भी जरूरी था इसलिए मैं और दामाद जी उसको रुक भी नहीं पाए क्योंकि वह भी एक अच्छी कंपनी में काम करते हैं।  जब आकांक्षा चली गई तो हम दोनों को भी मन नहीं लगने लगा था मेरे दामाद जी भी काफी उदास रहने लगे थे और मैं भी उदास रहने लगी।

दोस्तों एक बात तो सही है रिश्ते चाहे कोई भी हो अगर दिल मिल रहा हूं दोस्तों के बीच कोई दीवार नहीं होता वही हाल हुआ मैं और दामाद जी ऐसे रहने लगे जैसे कि एक दूसरे का हमसफर हो  दोस्त हो।  धीरे-धीरे हम दोनों करीब आ गए 1 दिन में जब खाना बना रही थी तो पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रख।  वहां से शुरू हो गया हम दोनों की जिंदगी का पहला अध्याय।

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मैं किचन में रोटियां  बना रहे थे वह पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रखकर बात करने लगे मैं भी कुछ नहीं बोली मुझे उनका हाथ रखना अच्छा लगने लगा इससे मुझे लगा अपनेपन का एहसास तो मैं मना भी नहीं करी।  धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए मेरे सिर पर भी रख दिया फिर वह साइड से मुझे पकड़ दिए और रोटी में जो बेल रही थी उसको वह देखने लगे।

मैं सर झुका के रोटियां बेल रही थी।  तभी दामाद जी बोले कि मम्मी जी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो आप लगती ही नहीं हो कि मेरी मम्मी नहीं आप मेरी दोस्त की तरह लगती हो।  तो मैं भी बोल दे कि हां मैं दोस्त ही हूं तुम्हारी।  उसके बाद में बोली की  चलो खाना खा लेते हैं।   और हम दोनों खाना खाने के लिए बैठ गए।

इतना सब होने के बाद वह मुझे बार-बार घूर कर देख रहे थे कभी वह मेरी चूचियों की तरफ देखते तो कभी मेरी गांड की तरफ देखते कभी मेरे होंठ की तरफ देखते तो कभी मेरे पूरे बदन को निहारते , मैं सब समझ रही थी मैं समझ रही थी कि इनका मन कहीं और डोल रहा है।

पर उनका देखना मुझे भी अच्छा लगने लगा था मुझे लग रहा था आज कुछ होने वाला है क्योंकि मेरे मन में भी कुछ कुछ होने लगा था।

खाना खाकर मैं अपना कपड़े चेंज कि मैं नाइटी पहनी पर उस दिन ऐसा हुआ दोस्तों कि मैं अंदर कुछ नहीं पहनी थी मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि गर्मी ज्यादा थी इसलिए मुझे लगा कि आराम मिलेगा इसलिए मैं अंदर कुछ भी नहीं पहनी ना ब्रा न पेंटी।

मैं बेड पर लेट कर नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सेक्स कहानियां पढ़ने लगी थी।  एक हॉट कहानी  जो सास और दामाद की थी।  कहानी पढ़ते-पढ़ते लगा आज मेरे पास मौका है और अगर मुझे यह सुख मिल जाता है तो भी कोई बात नहीं।

असल में मेरे पति का उम्र भी हो गया था तो मेरी चुत ** कर नहीं पा रहे थे।  और मैं भी जवान थी तुम मुझे अभी लंड  चाहिए था।  पर मैं कहती कैसे कहानियां जैसे ही खत्म हुई थी मेरे कमरे में आ गए।  मैं जल्दी से अपने मोबाइल बंद की तुम मुझे देखकर कहने लगे कि मम्मी जी आज आप थकी लग रही हो।

तो मैं बोली हां सुबह से आज मैं काम कर रही थी इस वजह से थकान हो गया है।  तो मेरे दामाद से बेड पर बैठ गए और मेरे पैर को अपनी गोद में देखकर दबाने लगे मैं बोले नहीं नहीं ऐसा मत कीजिए आप मेरे पैर मत छुइए।  तो उन्होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं आपको तुम्हें पहले ही बोल चुका हूं कि आप मेरी दोस्त की तरह हो  तो आप भी बोले कि हां दोस्त मान सकते हो तो एक दोस्त दूसरे दोस्त की मदद क्यों नहीं करेगा।

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और वह मेरे पैर को दबाने लगे 10:15 मिनट हो दोनों पैर को मेरी दबाये और फिर नाइटी को ऊपर कर दिया।  जब जांघ  तक नहीं थी पहुंच गई तो मैं हाथ पकड़ कर रख दी उनको।  फिर उन्होंने मुझे कहा कि आप उलट जाओ मैं आपके पीठ दबा देता हूँ।  और मैं उलट गई।  वह मेरे पीछे दबाने लगे धीरे-धीरे चूतड़ दबाने लगे।  उसके बाद तो दोस्तों उनका हाथ मेरे जिस्म को टटोल रहा था।

मेरे चुत  से पानी निकलना शुरू हो गया था।  क्योंकि जब एक मर्द का हाथ लगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाए और मैं खुद काम होने लगे।  मैं सीधा हो गई और मैं उनको देखने लगे मेरी चूचियों को निहार रहे थे।  और धीरे-धीरे उनके कांपते हुए हाथ मेरी चूचियों को मसलने लगे।

मैं कुछ बोल नहीं पाई  मैं उनको नशीली निगाहों से देखने लगी।  उसके बाद तो दोस्तों में अपने बाहें फैला दी और वह मेरे बाहों में  सिमट गए।  अपना  होठ मेरे होंठ पर रख दिया और चूसने लगे। वह अपने हाथों से मेरे चूचियां दबा रहे थे और मेरे सोच को चोद रहे थे हम दोनों ही कामों को गए थे धीरे-धीरे उन्होंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और मेरे जिस्म को सहलाते  हुए मेरे नाइटी उतार दी।

मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां को देखकर वह पागल हो गए वह मेरे निप्पल को चूसने लगे एक हाथ से वह मेरे शरीर को टटोल रहे थे उन्होंने मेरे पैरों को अलग अलग किया मेरे होंठ को चूसते हुए मेरी एक हाथ से चूची को दबाते हुए और एक हाथ से मेरी चुत  पर हाथ फेरने लगे।

दोस्तों अब मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो गई थी मैं  सिसकारियां ले रही थी मैं अंगड़ाइयां ले रही थी।  उसके बाद मैंने तुरंत ही उनका लंबा मोटा सा लंड  पकड़ लिया।  पहले खूब हिलाई उसके बाद अपने मुंह में ले ली।   आइसक्रीम की तरह उनके लंड  को चूसने लगी।

अब मेरे चुत  से गर्म पानी निकलने लगा था।  मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई मैंने दोनों पैरों को फैला दिया और उनको नशीली आंखों से देखा और बोली थी आज मुझे चोद दो.  वह तुरंत ही मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए पहले तो उन्होंने खूब मेरी चुत  को चाहता।  फिर उन्होंने उंगली डाली।  गरम रस वह पी रहे थे उंगलियों में  लगा लगा कर।  उसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा।  अपना लंड  मेरी चुत  पर सेट किया।  और जोर से धक्का दे दिया दोस्तों पूरा का पूरा लंड  मेरी चुत  के अंदर चला गया।

मैं धन्य हो गई मोटे लंबे लंड  को अपने अंदर पाकर।  उसके बाद तो मैं हिला हिला कर  अपने गांड को उनके लंड  को चुत  के अंदर लेने लगे।  साथ में मैं उनके बदन को टटोल रही थी वह मेरी चूचियों को दबा रहे थे मुझे चूम रहे थे मुझे किस कर रहे थे।  मैं भी वही सब कर रही थी जो वह कर रहे थे।

जोर जोर से धक्के देने लगे मैं भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। उसके बाद तो कभी उलट कर कभी पलटकर कभी ऊपर से कभी नीचे से कभी बैठाकर कभी झुका कर कभी घोड़ी बनाकर कभी कुत्तिया बना कर।

कहीं खड़ा करके कभी लिटा कर कभी टेढ़ा  करके कभी साइड से।  वह मुझे करीब 2 घंटे तक चोदते रहे।  मैं बहुत ज्यादा थक गई थी और वह भी थक गए थे अब मेरे से सहा नहीं जा रहा था।  मुझे दर्द होने लगा था।  मेरी चूचियों को उन्होंने इतनी जोर जोर से दबाया कर उनकी उंगली का निशान मेरी चूचियों पर साफ साफ दिखाई दे  रहा था।

मैं बोली थी दामाद जी आज बस करो मेरी चुत  फट गई है।  आज के लिए इतना ही काफी है।  अब  तो मैं आपकी हूं आप मुझे जैसे चोदो जो करूं अब मैं आपकी  हूं।  फिर उन्होंने जल्दी-जल्दी धक्के देने लगे जोर-जोर से मुझे चोदने लगे मैं भी नीचे गांड घुमा घुमा कर चुदवाने लगी।

और फिर दोनों एक साथ चीखने लगे चिल्लाने लगे और एकदम से हम दोनों  एक साथ ही एक दूसरे को अपनी बांहों में पकड़ कर अपनी पूरी ताकत लगा दी वह ऊपर से धक्के दे रहे थे मैं नीचे से धक्के देने लगी।

उसके बाद उनका सारा बढ़िया मेरी चुत  के अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों  शाम तो हो गए।

उस दिन के बाद से हम दोनों ही एक पति पत्नी की तरह रहने लगे साथ नहाते थे साथ खाते थे साथ सोते थे।  उसके बाद 1 महीने मेरा  मेंस नहीं आया।  मैं भूल गई थी कि मेरा मेंस कब आया था।  उसके बाद में  प्रेगनेंसी टेस्ट की तो पता चला मैं प्रेग्नेंट हूं।  दोस्तों उधर मेरी बेटी भी  3 महीने की प्रेग्नेंट है।  और  मेरा भी दूसरा महीना चल रहा है।

जाने कि मैं भी अपने दामाद के बच्चे की मां बनने वाली हूं।  शायद मेरे लिए कैसा रहेगा क्या बुरा रहेगा वह तो मुझे नहीं पता पर मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा है अब देखिए जो होगा देखा जाएगा।

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मेरी गांड फाड़ दी

असल में मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी शादी एक बड़े घर में हुआ है शादी करवाने वाली मेरी सौतेली माँ है। उसने पांच लाख लेकर मेरी शादी करवाई है। तो आपको समझ आ गया होगा। या तो मैं अपने ससुराल से भाग जाऊं या जो हो रहा है उसी का फायदा उठाऊं और ज़िंदगी जिऊँ। दोस्तों इसी कसमकस में सोची की शायद मुझे यही सही रहेगा की मैं ससुराल में ही रहूं। अगर मैं भाग जाती हूँ तो यहाँ मुझे तीन चोद रहा है। पता नहीं कितने लोगों के बिस्तर को गर्म करना होगा हालात से लड़कर और जीने के लिए। और रही बात वापस हरियाणा जाने की जहाँ एक चुड़क्कड़ सौतेली माँ हो वो मुझे वह भी बेचेगी। तो बार बार और कई लोगों से बिकने से अच्छा है की एक घर में ही चुदवा लूँ।

अब मैं आपको अपनी पूरी कहानी बता रही हूँ।

शादी के बाद मैं अपने ससुराल आ गई। रात में पति ने मेरे साथ खूब रंगरेलियां मनाई मैं भी खूब गांड उठा उठा कर चुदवाई। रात में मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया। मेरी गांड फाड़ दी थी चुत मार कर। मैं भी तैस में आ गई और खूब कूदी उसके लंड पर और खूब मजे ली पूरी रात। पर जब वो ठंढा पड़ा और मैं कपडे पहन ली तब वो मुझे रूल समझाने लगा की मेरे घर का क्या रूल है। उसने एक बात बोला की तुम कभी भी मेरे पापा को और मेरे भाई को नाराज नहीं करोगी ? मैं भी तैस में आकर पूछ ली। नाराज क्या ? क्या वो मेरी चूत मांगेगे तो वो भी देनी पड़ेगी। तो मेरा पति बोला हां सब कुछ।

मेरी सास नहीं है। वो पहले ही चल बसी शायद तीन तीनो ने चोद चोद कर ऊपर पहुंचा दिया था। 50 साल की उम्र के बच्चा होने वाला था। शायद इन तीनो का ही काम होगा, मैं इसके बारे में कुछ पूछी नहीं। मुझे लगा जो भी कह रहा है मेरा पति मान लेते हैं। आगे देखा जाएगा क्या करने है। पहले तो सौतेली माँ से ही मेरा पाला छूटा यही कम नहीं थी। रही बात ससुर का वो देख लुंगी और रही बात देवर का तो मजे लुंगी।

सुबह मेरा पति अपने ड्यूटी पर चला गया क्यों की उसे जाना जरुरी था। देवर भी उठा और वो भी चला गया अपने काम कर रह गया घर में बूढा। मैं नहाने गई बाथरूम में। नहा कर जैसे बाहर आई और अपने कमरे में गई तो बूढा मेरी पलंग पर बैठा था। मैं पूछी की बाबूजी आप यहाँ? तो वो बोला क्यों नहीं बहुरानी ये घर ऐसा है कोई भी कही जा सकता है। एक चीज को हम लोग बाँट कर खाते हैं। एक की शादी हो गई अब आप एक की नहीं हो हम तीनो की हो।

मैं सनझ गई, रात को जो मेरा पति बोला था वही हुआ। ससुर मुझे चोदने के लिए तैयार था। मैं बोली अभी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। रात भर उन्होंने मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया है। दर्द कर रहा है। तो उन्होंने बोला इसका मैं ख्याल रखूंगा। मैं अभी नहीं चोदता हूँ। मैं तुम्हारी चूत में तेल लगा देता हूँ ताकि दर्द ख़तम हो जाये। मैं मना की पर उन्होंने कहा नहीं नहीं मुझे ये दर्द पसंद नहीं। मैं आता हूँ तेल गरम करके।

तब तक मैं बाल झाड़ कर सिंदूर रही थी तभी ससुर जी। सरसों का गरम तेल ले आये और मुझे बोले लेट जा। मैं लेट गई। उन्होंने पेटीकोट ऊपर कर दिया। और पेंटी उतार दी। दोनों पैरों को फैला दिया और पहले चूत को सहला कर देखा और मुस्कराने लगे। बोले भगवान् में मेरी सुन ली। मैं भगवान् से माँगा रहा था की मुझे ऐसी बहू देना जिसके चूत में बाल नहीं हो। और ऐसा ही हुआ क्लीन है तुम्हरी चूत।

उसके बाद वो तेल लगाने लगे। करीब पांच मिनट तक तेल लगाए मेरी चूत गीली होने लगी। चूचियां भी तन गई थी। मुझे ऐसा लग रहा था इनसे चुद जाऊं। तभी उन्होंने कह दिया बहु हौले हौले घुसाऊ। मैं बोली ठीक है।

उन्होंने तुरंत धोती खोला और नीला अंडरवियर जो लाइन बाला होता है। खोल दिया और लैंड को हिलाने लगे और उसमे भी उन्होंने तेल लगा लिया और फिर से मेरी चूत में तेल लगा लिया और चूत पर लंड लगा कर घुसाने लगे। पर उनका लौड़ा घुस नहीं रहा था क्यों की दम नहीं था। खड़ा सही से नहीं हो रहा था। फिर उन्होंने हिलाया और फिर मेरी मुँह में दे दिया जब मैं थोड़े देर तक अपने मुँह में ली तो उनका लौड़ा मोटा और लंबा हो गया।

अब वो मेरी चूत में घुसा दिए और करीब दस मिनट तक चोदे और सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिए। मैं प्यासी ही थी अभी दर्द तो ख़तम हो गया था। अब दर्द नहीं हो रहा था। बाबूजी खेत चले गए। मैं सो गई क्यों की रात में चुदवा रही थी।

करीब तीन बजे नींद खुली वो भी जब घर का दरवाजा कोई पीट रहा था। जाकर खोली तो देखि देवर जी थे।

वो अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिए। और मुझे अपनी बाहों में ले लिए। मैं भी खुश खुश उनके बाहों में समा गई। क्यों की देवर जी को मैं पसंद करती थी वो मेरे लायक थे। वो मेरे होठ को चूसने लगे चूचियां दबाने लगे। मैं भी उनको किस करने लगी सहलाने लगी।

वो मुझे बैडरूम में लेकर आये और मेरी ब्लाउज खोल दिए मैं खुद ही ब्रा खोल दी पेटीकोट भी उतार दी। ये सब देखकर बोले मुझे बहुत ख़ुशी हुई आप मेरे घर के कायदे कानून को बिना झिझक के अपना लिए हैं। आप रानी बनकर रहेंगे इस घर में।

और वो मेरे ऊपर टूट पड़े मेरी चूचियां पिने लगे। दबाने लगे। होठ चूसने लगे। और फिर उन्होंने मेरी गांड चाटी और फिर चूत चाटने लगे। मैं बोली बस करो ऐसे चाटना अभी मुझे चोद दो। क्यों की ससुर जी मुझे गरम कर के चले गए। वो बोले अच्छा बाबूजी मजा ले लिए तो मैं बोली हां वो मुझे चोद दिए। तो देवर जी बोले और मैं ही पीछे रह गया।

और उन्होंने में टांग को अलग अलग किया और मोटा लौड़ा मेरी चूत पर लगा कर पेल दिया। अब मुझे दर्द होने लगा था क्यों की देवर का लौड़ा काफी मोटा और लंबा था। वो चोदना शुरू किये तो मैं पानी पानी हो गई। खूब चोदा उठा पर पटक कर ऊपर से निचे से बैठ कर खड़े होकर। करीब एक घंटे तक उन्होंने चोदा मुझे आखिर उनका भी गिर गया।

उन्होंने अपने जेब से एक सोने का चेन निकाला और मुझे दे दिया और बोले ये मेरे तरफ से।

दोस्तों पहले तो सात दिन तक मुझे काफी दर्द हुआ था। क्यों की मेरी चूत नाजुक थी। पर अब मैं तैयार हो गई है तीन मर्द से चुदने को तो अब कोई बात नहीं है। खूब चुद रही हूँ मजे ले रही हूँ। मैं अपनी दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने जा रही हूँ। आप जरूर पढियेगा।

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मेरा गदराया हुआ बदन

मेरा नाम रशिली है, कानपूर देहात की रहने वाली हु, मेरी उम्र २२ साल की है, लंड का स्वाद अपने पति से ही मिला वो भी उतना नहीं जितना मैं चाहती थी, मन भटकता था चाहती थी किसी किसी पडोश के लड़के से ही चुदवा लू पर डरती थी कही वो ब्लैकमेल ना करे इसलिए मन मार के रह गयी, मेरे दिमाग में एक विचार आया क्यों ना मैं ससुर से ही चुदवा लू, बूढ़े को भी तो बूर का मजा चाहिए क्यों की सास का देहांत हुए करीब १० साल हो गया था, तो मैंने अपने ससुर पे डोरे डालने लगी.

एक दिन ससुर का तबियत ख़राब हो गया था मैंने उनके लिए तेल गरम कर के पुरे शरीर में मालिश की उनके पुरे जिस्म को मैंने अपने हाथ से टटोला और ब्लाउज का ऊपर का हुक खोल के राखी ताकि वो मेरे गदराये हुए चूचियों को निहार सके हुआ भी ऐसा ही, ससुर ने तिरछी नज़र से खूब निहारा मैं मन ही मन खुश हुई, फिर कुछ ऐसी भी हरकत मैंने की जिससे मेरी चूची उनके हाथ को छुआ, मैं उनके हाव् भाव से समझ रही थी की वो ये सब नहीं चाह रहे थे, उनकी नियत ख़राब नहीं थी पर मैं चुदवाने के लिए व्याकुल थी.

मैंने दूसरे दिन आँगन में चापाकल पे नह रही थी और मैंने जानबूझ कर वही टाइम चुना जब वो खेत से घर आते है, बाहर का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया, और मैंने अपने ब्लाउज और ब्रा को खोल के नहाने लगी, पेटीकोट कमर पे ही बंधा था, चुचिया यु ही खुला था, मैं रगड़ रगड़ के नहाने लगी, उस दिन कुछ ज्यादा ही नही क्यों की ससुर देर से आये थे, जब वो दरवाजे के अंदर आये वो हैरान हो गए और मैं भी झूठ मुठ की परेशान हो गयी, वो मुझे नंगे देख लिए, मेरा गदराया हुआ बदन किसी के भी होश उड़ाने के लिए तैयार था, वो शरमाते हुए कमरे में चले गए और मैं भी कपडे पहन ली, मैं तिरछी निगाह से देखि तो उनके धोती फुला हुआ था शायद उनका लंड खड़ा हो गया था.

इस तरह से कई दिन हो गए पर मौक़ा नहीं मिला चुदवाने के लिए, एक दिन मैंने रात के करीब २ बजे पेट दर्द का बहाना बनाई और रोने लगी, मेरे ससुर परेशान हो गए कोई डॉक्टर भी नज़दीक में नहीं था, सुबह ही कुछ हो सकता था, मैंने कहा पिताजी आप चिंता ना करो पहले भी कई बार ऐसा हुआ था मेरी माँ गरम सर्सो का तेल मेरे पेट पे मालिश कर देती थी तो छूट जाता था, मैंने कराहते हुए बोली. पिताजी फ़ौरन ही रसोई में गए और चूल्हे से गरम तेल कर के ले आये, मैंने लगाने को कोशिश की पर मैं चाहती थी की वो लगाए, मैंने कहा मैं नहीं लगा पाउंगी, अगर आप लगा दे तो अच्छा हो जाएगा, उनके हाथ कापने लगे बोले बेटी मैं कैसे?

मैंने कहा कोई बात नहीं मैं किसी को नहीं बताउंगी, वो तैयार हो गए और मेरे पेट पे मालिश करने लगे, उसी वक्त मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और आँख बंद कर ली वो मेरे पेट पे तेल लगाते रहे और मेरी चूचियों को निहारते रहे, आकिहार मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने कहा, आप मुझे वो सुख दो जो आपका बेटा नहीं दिया अगर आप मना करोगे तो पुरे गाँव में बात फैलाडुंगी की जब मैं सो रही थी उस समय आपने मेरे साथ गलत हरकत किया, मेरे ससुर परेशान हो गए बोले नहीं नहीं ये सब गलत है मैं नहीं कर सकता, उसी समय मैंने कहा मैं अभी घर से बहार चली जाऊूँगी और चिल्लाऊंगी की आपने मेरी इज्जत लूट ली. उन्होंने बोला ठीक है जो तुम चाहो.

मैंने अपने ब्लाउज को उतार दिया और उनको अपने बाहों में ले ली, मैंने सबसे पहले उनको अपना दूध पिलाया फिर मैंने उनको अपना बूर चाटने के लिए कहा करीब १० मिनट बूर चटवाने के बाद मैं काफी कामुक हो गयी थी मेरे दांत पीस रहे थे, बूर से पानी निकल रहा था चूचियाँ टाइट हो चुकी थी, मैंने अपने ससुर का लंड अपने मुह में लेके मलाई बर्फ की तरफ चूसने लगी धीरे धीरे उनका लंड काफी बड़ा और टाइट हो गया फिर मैंने उनके लंड को पकड़ कर बूर के मुह पे रखी और मैंने उनसे पेल देने के लिए कहा,

फिर क्या था उस बूढ़े में जान आ गया वो झटके पे झटके दे रहा था मैं भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, उसने मुझे गांड भी मार और बूर का तो सत्यानाश कर दिया था उस दिन पर मैं खुश थी क्यों की मेरी वासना की आग को कुछ शांति मिली | करीब ४ महीने से वो मेरे साथ ही सोते है, अब तो मेरे पेट में २ महीने का बच्चा भी है वो भी ससुर का. आशा करती हु की आपको मेरी आपबीती अच्छी लगी होगी,

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