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बचपन की दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी.

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अपना लंड डाल दो

सभी लड़कियों और भाभियों को मेरा प्यार, उनकी चूतों को मेरा दुलार. मेरा नाम आयुष अग्रवाल है और मैं नैनीताल (उत्तराखंड) का रहने वाला हूं. मेरी उम्र अभी 25 वर्ष है और मैं अभी कुंवारा ही हूं. मेरे लंड का साइज 7 इंच है.

आप लोगों का समय खराब न करते हुए मैं सीधे मुद्दे पर आता हूं. मतलब मेरी सेक्स स्टोरी पर.

यह घटना आज से करीब 4 साल पहले की है. उस वक्त मैं नैनीताल में ही एक ऑफिस में जॉब किया करता था.

मेरे ऑफिस में वहां पर एक माही (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की भी जॉब करती थी, जो पहाड़ी थी. दोस्तो, पहाड़ी लड़की कैसी भी हो लेकिन वो दिखने में एकदम माल होती हैं. उनका रंग और फिगर कमाल का होता है. माही भी वैसी ही थी.

माही का फिगर 34-28-32 का था. उसको जो एक बार देख ले तो देखने वाला तो समझो पागल हुए बिना न रह पाये. ऐसे ही देखा देखी में मुझे भी उससे कब प्यार हो गया मुझे पता भी नहीं चला.

मैंने उसको ये बात बोलने की सोची. हिम्मत करके मैंने उसे अपने दिल की बात कही. वो गुस्सा तो नहीं हुई लेकिन वो हम दोनों के इस रिश्ते को दोस्ती से ज्यादा नहीं समझती थी.
मैंने उसको बहुत बार बोला कि मैं उसे बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड वाला प्यार करता हूं लेकिन वो हर बार बात को यही कर टाल देती थी कि हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.

मुझे ऐसा लगता था कि वो भी मुझे चाहती थी लेकिन वो खुल कर अपने प्यार को सामने नहीं लाना चाह रही थी इसलिए दोस्ती का बहाना बना देती थी. वो थोड़ी शर्मीली किस्म की थी. शायद उसको डर था कि कहीं उसके किसी घरवाले तक बात न पहुंच जाये.

ऐसे ही करते करते दिन बीत रहे थे. फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जिसे मैं कभी नहीं भूल पाया.

वह दिन था 31 दिसम्बर का. उस दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी होनी थी. वह अपनी एक सहेली के साथ रूम पर रहती थी.

माही की सहेली एक दिन पहले ही अपने घर चली गयी थी. माही अब रूम पर अकेली रहने वाली थी. मुझे उसकी चिंता हो रही थी. वैसे सच कहूं तो मैं उसको चोदना चाह रहा था. इसलिए मेरा मन बार बार उसके साथ रहने को कर रहा था.

मैंने माही को बोला भी कि तुम्हारी सहेली तो घर चली गयी है और तुम रूम पर अकेली रहोगी.
वो कहने लगी कि वो रह लेगी.
मैंने उसको चिंता जताई और कहा कि अगर उसको सही लगे तो एक रात के लिए मैं ही उसके रूम पर आ जाता हूं.
माही ने मना कर दिया.

ये सुन कर मेरा मुंह उतर गया. वो भी मेरा उदास चेहरा देख कर सोच में पड़ गयी थी. मैं दरअसल उसकी किसी बात का बुरा नहीं मानता था. बस उसके सामने नाराज होने का नाटक कर रहा था.

मेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर वो मान गयी. बाद में उसने मुझे अपने रूम पर आने के लिए परमिशन दे दी.
मैं खुश हो गया. मैं उसके साथ ही उसके रूम पर चला गया.

रूम पर जाकर उसने हम दोनों के लिए खाना बनाया. हम दोनों ने साथ में डिनर किया और फिर उसने हम दोनों के लिए दो बिस्तर लगा दिये. दो बिस्तर देख कर मेरा माथा ठनक गया. कहां मैं उसको चोदने की प्लानिंग कर रहा था और वो मेरे लिए अलग से बिस्तर लगा रही थी.

फिर कुछ बहाना बना कर मैं उसके पास ही लेट गया. उसके पूछने पर मैंने कह दिया कि मुझे रात में अकेले सोने की आदत नहीं है. मेरे ऐसा कहने पर उसने कुछ नहीं कहा. साथ ही मैंने ये भी बोल दिया कि अभी जब तक नींद नहीं आती तो एक ही बिस्तर पर लेट लेते हैं उसके बाद मैं अपने बिस्तर पर जाकर सो जाऊंगा. उसको मेरी बात से थोड़ी तसल्ली हो गयी.

कुछ देर तक हम दोनों ऑफिस की बातें करते रहे. उसने अपनी सहेली के बॉयफ्रेंड्स के बारे में भी बताया. ये सब सुन कर मेरा लंड भी मेरी पैंट में उठने लगा था. मगर मैंने ये माही को महसूस नहीं होने दिया.

बातें करते हुए उसको नींद आ गयी. जब उसने बोलना बंद कर दिया तो मैंने देखा कि वो सो चुकी है. उसकी नाइट ड्रेस में उसकी उभरी हुई चूचियां देख कर मेरा मन बहकने लगा. मैंने उसकी चूचियों पर हल्के से छूकर देखा. उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

फिर मैंने उसकी चूचियों को धीरे से दबा कर देखा. उसने तभी भी कोई रिएक्शन नहीं दिया. अब मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने उसकी दोनों चूचियों पर एक एक हाथ रख दिया.

धीरे धीरे उसकी चूचियों को दबाते हुए मैं मजा लेने लगा और मेरा लंड टन्न से खड़ा हो गया. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने उसकी नाइट टॉप में हाथ दे दिया. उसकी चूचियों को अंदर हाथ देकर दबाने लगा. मेरे हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबा रहे थे.

अचानक ही उसने एक गहरी सी सांस ली और वो दूसरी तरफ घूमने लगी. मेरे दिल में धक धक हो गयी. मुझे लगा कि शायद ये जाग गयी है. मैंने उसके करवट लेने से पहले ही अपने हाथ को बाहर खींच लिया.

उसके बाद मैंने थोड़ा इंतजार किया. जब एक दो मिनट तक कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने दोबारा से ट्राई करने की सोची. आप तो जानते ही हो दोस्तो, सामने जब जवान लड़की सो रही हो तो कंट्रोल करना कितना मुश्किल हो जाता है.

दो मिनट इंतजार करने के बाद जब मुझे सब कुछ सही लगा तो मैंने फिर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. अब मैं पहले से ज्यादा जोर से उसके बूब्स को सहला रहा था और मसल रहा था. ये भी भूल गया था कि वो मेरी दोस्त है.

जब मैंने तेजी के साथ उसकी चूचियों को दबाया तो वो जाग गयी. जैसे ही उसने देखा कि मैं उसके बूब्स को छेड़ रहा हूं तो वो उठ कर बैठ गयी. उसने अपने टॉप को देखा और उसको पेट पर फिर से नीचे कर लिया.

ये जान कर कि मैं उसको छेड़ रहा था उसने मेरी ओर गुस्से से देखा. मगर फिर उसने रोना शुरू कर दिया. मैं तो डर गया कि अब ये चिल्ला चिल्ला कर सबको बता देगी. मेरी गांड फट रही थी.

तभी मैंने बात को संभालते हुए कहा- सॉरी माही, ये सब गलती से हो गया. मुझसे रुका नहीं गया. मैं तुमको बहुत प्यार करता हूं. मैं तुम्हारा गलत फायदा नहीं उठाना चाहता हूं.
मेरी बात सुन कर उसे थोड़ी तसल्ली हुई.

बड़ी मुश्किल से उसको समझा बुझा कर मैंने चुप करवाया. फिर उसने मेरी ओर देखा और मैंने उसकी ओर देखा. हम दोनों के होंठ आपस में एक बार के लिए मिल गये. मगर पता नहीं एकदम से उसको क्या हुआ कि उसने मुझे पीछे धकेल दिया.

मगर अब तो मैं बेकाबू हो गया था. मैंने उसको फिर से पकड़ा और उसकी गर्दन को पकड़ कर जोर से उसके होंठों पर अपने होंठों से चूसने लगा. पहले तो वो छटपटाई मगर कुछ सेकेण्ड में ही उसको मजा आने लगा. अब वो मेरा साथ देने लगी.

धीरे धीरे उसके होंठों को चूसने का मजा लेते हुए मैं फिर से उसके चूचों को दबाने लगा. वो अब गर्म हो रही थी. वह हल्के से सिसकार करने लगी थी और मैं उसकी चूचियों को भींच रहा था.

उसके बाद मैंने उसकी नाईट ड्रेस को भी उसके हाथ ऊपर करके उतार दिया. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध दबाने लगा. एक तरफ से मैं उसकी चूचियों को दबा रहा था और दूसरी तरफ मैं उसके होंठों को चूस रहा था. उसके होंठ चूसते चूसते मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी.

माही की चूचियों को मैंने नंगी कर दिया. एक चूची को हाथ में लेकर दूसरी को अपने मुंह में ले लिया. आह्ह … जब उसकी चूची पर मुंह लगा तो मजा आ गया. मैं मस्ती में उसकी चूचियों को पीने लगा. कुछ ही देर में मैंने उसकी चूचियां चूस चूस कर लाल कर दीं.

अब उसके स्तन एकदम से कड़क हो गये थे. अब उसको मजा आ रहा था. थोड़ा दर्द भी हो रहा था उसे क्योंकि मैं काफी जोर से उसके बूब्स दबा और मसल रहा था. उसके निप्पल तन कर एकदम से टाइट हो गये थे.

ऐसे ही धीरे धीरे करके मैं उसके पूरे बदन को चूमने लगा. कभी उसके पेट पर तो कभी नाभि पर. कभी उसके कंधों पर तो कभी उसके गालों पर. ऐसा मन कर रहा था कि मैं उसको खा ही जाऊंगा.

उसकी गर्दन को चूसते हुए मेरा लंड उसकी चूत के बिल्कुल ऊपर था. मैंने उसके बदन को खूब चूसा और सहलाया. मेरा लंड बार बार उसकी चूत के छेद को टटोल रहा था. उसकी पैंटी के ऊपर रगड़ रहा था.

अब मुझसे रुका न गया और मैंने उसकी पैंटी निकाल दी. उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. उसकी चूत बाहर तक गीली दिख रही थी. मैंने उसकी चूत को सूंघा और फिर एक किस कर दी. किस करते ही वो सिहर सी गयी. उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया.

अपनी पैंट मैंने इसी बीच उतार ली और मैंने उसका हाथ अपने लंड पर लगवा दिया. वो हाथ को पहले तो हटाने लगी लेकिन फिर बाद में उसने मेरे लंड को पकड़ लिया. अब उसका हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा था.

मेरा मन कर रहा था कि उसके मुंह में लंड दे दूं. मैंने उसको उठाया और अपने लंड को उसके मुंह के सामने कर दिया. वो नखरा करने लगी. मगर मैंने हार नहीं मानी.

मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और तेजी के साथ उसकी चूत में उंगली करने लगा. माही के मुंह से जोर जोर की सिसकारियां निकलने लगीं. पूरा कमरा गर्म हो गया था. हम दोनों के जिस्मों में पसीना आने लगा था.

जब उससे रहा न गया तो वो उठी और उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. उसने मेरे होंठों को चूसा और मैंने उसकी चूत पर लंड को रगड़ दिया. फिर मैंने दोबारा से उसके मुंह के पास लंड को किया और उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया.

जब उसने मुंह में लंड लिया तो मुझे बहुत मजा आया. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसको अपना लंड चुसवाने लगा. अब मेरे मुंह से आह्ह … आह्ह करके सिसकारी निकल रही थी और जब लंड उसके मुंह में जा रहा था तो उसके मुंह में गूं-गूं की आवाज हो रही थी.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गये. मैंने उसकी चूत में जीभ दे दी और वो मेरे लंड को चूसने लगी. जल्दी ही वो काबू से बाहर हो गया. मेरा मन भी उसकी चुदाई करने के लिए मचल गया था.

वो बोली- आह्ह … अब रहा नहीं जा रहा आयुष, अब अंदर डाल दो.
मैंने कहा- क्या अंदर डाल दूं मेरी जान?
वो बोली- अपना वो डाल दो.
मैंने कहा- उसको क्या बोलते हैं, एक बार कहो तो.
वो बोली- अपना लंड डाल दो.

मैंने पूछा- कहां डाल दूं? अपना लंड।
वो बोली- मेरी चूत में अपना लंड डाल दो.
उसकी ये बात सुनकर मुझे चैन सा मिला. जो लड़की मुझे पहले मना कर रही थी अब वो ही मेरा लंड अपनी चूत में लेने के तड़प रही थी.

उसकी चूत पर लंड रख कर मैंने पूछा- पहले लिया है क्या जानू?
वो बोली- नहीं, बस उंगली से सहला देती थी.
मैंने कहा- ठीक है, तो फिर आज मैं तुम्हारी कुंवारी चूत का उद्घाटन करने जा रहूं. तैयार हो जाओ.
वो बोली- हां डालो, मैं तैयार हूं.

मैंने कहा- मगर कॉन्डम तो है ही नहीं.
वो बोली- ऐसे ही डाल दो.
मैंने कहा- ठीक है जान.

अपने लंड को मैंने उसकी कुंवारी चूत पर रखा और एक धक्का लगा दिया. चूत टाइट थी इसलिए पहली बार में लंड का सुपाड़ा अंदर न जाकर चूत पर से फिसल गया.

मैंने दोबारा से जोर का धक्का मारा तो लंड उसकी चूत में घुस गया. वो दर्द से चिल्ला उठी लेकिन मैंने तभी उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया. अब मैं रुक गया. उसकी चूत की पहली चुदाई थी इसलिए उसको इतना दर्द देना ठीक नहीं था.

कुछ देर रुक कर मैंने फिर से उसकी चूत में लंड को अंदर सरकाना शुरू किया. मैं उसके होंठों को चूस रहा था और उसकी चूत में नीचे से लंड को भी सरका रहा था. धीरे धीरे करके मैंने आधा लंड उसकी चूत में घुसा दिया था.

फिर मैंने एक झटका दिया और पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. वो एक बार फिर से उछली और मैंने उसके होंठों को दबा लिया. कुछ देर रुक कर मैंने फिर से लंड के धक्के चूत में लगाने शुरू किये. दो-तीन मिनट लगे उसका दर्द कम होने में. अब मैं धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा.

हम दोनों के बदन पूरे नंगे थे. मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत में धक्का दे रहा था और वो मेरे होंठों को चूस रही थी. कुछ ही देर में उसकी गांड ऊपर की ओर आने लगी. उसको चूत चुदवाने में अब मजा आ रहा था.

अब मैंने अपने धक्के तेज कर दिये और तेजी के साथ उसकी चूत को चोदने लगा. वो भी मस्त होकर चुदवाने लगी. तीन-चार मिनट में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत से पानी निकलने के कारण जब चूत में लंड जा रहा था तो रूम में पच-पच की आवाज होने लगी. अब मेरा लंड मलाई की तरह उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था.

मजे में सिसकारते हुए उसने कहा- आह्ह … चोद दो यार आज … अब तक ये चूत कुंवारी थी और मैं भी कुंवारी थी.
मैंने कहा- हां मेरी जान, मेरी नजर तो तेरी चूत पर बहुत पहले से थी.
उसने मेरे होंठों को चूसते हुए गांड ऊपर उठाना जारी रखा. मुझे भी उसकी टाइट सी चूत मारने में बहुत मजा आ रहा था.

दस मिनट के बाद वो एक बार फिर से झड़ गयी. अब मेरा माल भी निकलने को हो गया था. मैंने उसकी चूत में दो-चार धक्के तेजी के साथ लगाये और जब माल एकदम आने लगा तो मैंने जल्दी से लंड को निकाल कर उसके मुंह में दे दिया.

उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और एक दो बार चूसा था कि मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूटने लगी. मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा. झटके दे देकर मैंने अपना सारा माल उसके मुंह में गिरा दिया और वो उसे पी भी गयी.

फिर हम दोनों नंगे पड़े रहे. थोड़ी देर के बाद उसने खुद ही मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. फिर उसने बिना कहे ही मेरे लंड को मुंह में लेकर पांच मिनट तक चूसा और मेरा लंड फिर से अकड़ गया.

एक बार फिर से मैंने उसकी चूत मारी. अबकी बार मैंने उसको डॉगी स्टाइल में चोदा. कुतिया की तरह चोदने में बहुत मजा आया. उसने भी इस पोजीशन को बहुत इंजॉय किया.

उस रात मैंने तीन बार उसकी चूत चोदी. इस तरह से मैंने एक कुंवारी चूत चोद कर अपना नया साल मनाया. जब वो सुबह सोकर उठी तो उसके पूरे बदन पर लाल निशान हो गये थे. मैंने उसके बदन को जी भर कर चूसा था.

माही उस रात के बाद जैसे मेरी दीवानी सी हो गयी थी. उस दिन पहली जनवरी के दिन मैंने नैनीताल में मस्ती करते हुए फिर से उसकी चूत मारी. उसके बाद उसकी गांड की चुदाई भी की. दोस्तो, लड़की की गांड चुदाई का भी अपना ही मजा है.

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मेरी चूत की सील

हेलो दोस्तो, कैसे हो?
मैं सोनिया राजस्थान से!

आज मैं एक बार फिर लाई हूँ अपनी सच्ची कहानी … जिसे पढ़कर आपका लंड खड़ा हो जायेगा.

मेरा एक बड़ा भाई जिसका नाम हेमराज है लोग प्यार से उन्हें हेमू कहते हैं … काफी स्मार्ट और हट्टे-कट्टे!

एक बार जब भाई गाँव आए हुए थे तो मैं बाथरूम में नहाने गयी और कुण्डी लगाना भूल गयी. मैं हमेशा नंगी नहाती हूँ, उस दिन भी नंगी थी.
और इतने में अचानक भैया अंदर आ गये; मुझे नंगी देखकर हक्के बक्के रहे गये.

मैं शर्म से लाल पीली थी क्यूंकि अभी तक नंगी मुझे मेरे बॉयफ्रेंड ने ही देखा था.

उस दिन के बाद भैया का नजरिया ही बदल गया.

एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे फोन करके कहा कि मैं अपनी मम्मी की साड़ी और ब्लाउज पहन कर उनको फोटो भेजूं … और उपर से अपने बूब्स दिखाऊं.
तो मैंने मम्मी की साड़ी और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन ली. उसके बाद मम्मी के कपड़ों में ही बाहर चौक में झाड़ू लगाने लग गयी.
जैसे ही मैं झाड़ू मार रही थी, उतने में भाई आ गए और सामने कुर्सी पर बैठ गये.

मेरा ब्लाउज ढीला होने के कारण मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर से साफ़ दिखने लग गयी यहाँ तक कि मेरे चुचियों के भूरे रंग के निप्पल भी दिख रहे थे.
मैंने तिरछी नजर देखा तो भाई बड़े गौर से देख रहे थे.

मैं समझ गयी कि भाई अब मेरी चूत बजाने के लिए उतावले हो रहे हैं. अब वो हर दिन में वासना की नज़र से देखने लग गये. मैं सब समझ रही थी … मन तो मेरा भी हो रहा था पर हिम्मत नहीं हुई ना उनकी और न मेरी!
अगले दिन भाई शहर चले गये जॉब के लिए!

6 महीने के बाद भाई ने फोन किया और कहा- मैं कल कुछ काम से गाँव वाले बाज़ार आ रहा हूँ, मुझे तुझसे मिलना है.
हमारे गाँव 15 किलोमीटर की दूरी पर ही बाज़ार है और वहीं मेरा कॉलेज भी. मैं तब बी ए सेकेंड इयर में थी.
मैंने कहा- ठीक है भाई!
भाई ने कहा- वहीं होटल में कमरा ले लेना. हम वहीं बैठ कर खाना खायेंगे और आराम भी करेंगे.
मैंने कहा- ठीक है भाई!

अगले दिन मैं बाज़ार चली गयी. पहले मैं कॉलेज गयी और उसके बाद आई और होटल में रूम बुक करने गयी. पर मुझे कहीं भी रूम नहीं मिला. मैं दो घंटे तक पूरे बाज़ार में रूम ढूंढती रही पर कहीं नहीं मिला.
सुबह के 10 चुके थे.

इतने में भाई भी आ गये.
मैंने भाई से कहा- कहीं भी रूम नहीं मिला.
तो भाई ने कहा- कोई बात नहीं.

फिर हमने एक दुकान में चाय पी और पकौड़े खाए.
उसके बाद हमने बाज़ार में ऐसी जगह तलाशनी शुरू की जहाँ कोई आता जाता ना हो. पर ऐसी जगह कहीं नहीं मिली.

फिर भाई की नज़र सामने की पहाड़ी पर पड़ी … वहां से एक रास्ता था जो ऊपर किसी गाँव की तरफ जा रहा था.
भाई ने कहा- चल वहां चलते हैं, वहां कोई नहीं आएगा.

मैं भाई की बातों को समझ चुकी थी कि आज मैं अपने भाई से चुदने वाली हूँ.
मेरा भी बहुत मन था अपनी चूत में लंड लेने का; दो महीने से बॉयफ्रेंड नहीं चोदा नहीं था.

हम दोनों भाई बहन उस पहाड़ी की तरफ चले गये … वहीं जाकर एक झाड़ी के सहारे बैठ गये. झाड़ी भी रास्ते के किनारे थी यानि आने जाने सभी हम साफ़ देख सकते थे.
पर क्या करते … और कुछ नहीं था … हम वहीं बैठ गये.

मैं उसने दिन हल्के नारंगी का कुर्ता और सफ़ेद रंग का सलवार पहन रखा था और भाई ने नीले रंग की कमीज और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी.

मेरा कुर्ता बहुत टाइट था जिसकी वजह से मेरी चूची उपर से दिख रही थी. बैठे बैठे भाई की नजर मेरी चूची पर पड़ती और बातें करते.

अब वो बड़े गौर से देखने लग गये.
मैंने कहा- क्या देख रहे हो भाई?
भाई ने कहा- कुछ नहीं.
मैंने कहा- कुछ तो देख रहे हो?
तो इस बार भाई ने हिम्मत करके कह ही दिया- तेरे सीने को देख रहा हूँ.

मैंने कहा- ऐसा क्या है मेरे सीने में?
तो भाई ने कहा- तेरे सीने ने ही तो मुझे पागल बना रखा है.
मैंने कहा- पर ऐसा क्या है?

तो भाई की झिझक अब कम हो चुकी थी, भाई ने कहा- तेरी कोमल और बड़ी बड़ी चूचियां जिनमें मुझे डूब जाने का मन कर रहा है.
मुझे थोड़ी सी शर्म आई मगर मैं फिर भी मुस्कुरा दी.

भाई की हिम्मत बढ़ गयी … अब भाई ने कहा- सोनिया तेरी इन चुचियों में ऐसा क्या जादू है … कितनी सेक्सी और हॉट हैं … मुझे इनको छूने का मन कर रहा है.
मैं कुछ ना बोली और आँखें नीचे कर ली.

उसके बाद भाई आगे बढ़ा और मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरी चूची पर हाथ रख दिया. पहली बार अपने भाई का हाथ अपने चुचियों पर महसूस करके बहुत अच्छा लग रहा था. एक अलग से हलचल हो रही थी, शरीर में एक कम्पन थी. ये अहसास बहुत अलग था.

उसके बाद भाई ने धीरे धीरे मेरी चूचियां मसलना शुरू किया. धीरे धीरे मेरा जोश भी बढ़ने लगा.
अबकी बार भाई ने अपने हाथ मेरे कुरते के अन्दर डाल कर मेरी चूचियां दबाना शुरू कर दिया. मैंने अपनी आँखें बंद कर दी.

इतने में उस रास्ते दो औरत और एक मर्द गुजरे तो भाई ने झट से अपना हाथ हटा लिया. शायद उन लोगों ने नहीं देखा.

उनके जाने के बाद भाई ने दोनों हाथ मेरे गालों पर रख कर मेरे फूल से ओंठ चूसना शुरू किया. मेरे गुलाब जैसे ओंठों को भाई ने खूब चूसे. मैंने भी उन्हें किस करना शुरू किया.

अब भाई खड़े हुए और मैं वहीं पत्थर पर बैठी रही. भाई ने अपनी जींस की जिप खोली और अपना अपना तनतनाता लंड बाहर निकाला.
ओह माय गॉड … क्या लंड था इतना मोटा और बड़ा तो मेरे बॉयफ्रेंड का भी नहीं था!

भाई ने लंड बाहर निकाला, कहा- सोनिया मेरा लंड चूस न!
मैंने भी बिना देरी किये भाई का लंड हाथ में लिया और मुंह में डाला पर ओ मुंह में गया ही नहीं.

फिर मैंने आगे का हिस्सा ही बस मुंह में डालकर उस मस्त लंड को चाटने और चूसने लग गयी.

अपने बॉयफ्रेंड का लंड तो मैंने कई बार चूसा था पर आज जो मजा जो आनंद भाई के लंड चूसने में आ रहा है वो कभी नहीं आया.
सच में क्या लंड था भाई का … ऐसे ही लंड की तो तलाश थी … ऐसा लंड जब मेरी चूत में जाएगा तो मुझे दुनिया का हर आनंद मिल जाएगा. अब तो मैं जल्दी से भाई का लंड अपनी चूत में लेने के लिय मचल रही थी.

काफी देर तक मैंने भाई का लंड ऐसे ही चूसा. इतने में उस रास्ते से एक अंकल और आंटी गुजरे. मैंने झट से भाई के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला. शायद उन्होंने भी हमें नहीं देखा.
उस रास्ते में हम ये करने को मजबूर थे क्यूंकि कहीं भी कोई रूम नहीं मिला.

उन लोगों के जाने के बाद भाई ने कहा- सोनिया ज्यादा समय नहीं … लोग आ जा रहे हैं. बस तू सलवार नीचे कर … मैं तुझसे अब चोदना चाहता हूँ.

मैंने कहा- भाई ऐसे कैसे? कितने लोग आ जा रहे हैं. दिक्कत हो जाएगी.
भाई ने कहा- सच कह कि तू चुदना नहीं चाहती.
मैंने कहा- भाई, कौन पागल लड़की होगी जो इतने मस्त लंड से चुदना नहीं चाहेगी?
तो भाई ने कहा- चुद ले और टेंशन ना ले. कोई आएगा तब की तब देख लेंगे.

तो मैंने भाई से कहा- तुम मुझे नंगी करोगे क्या यहाँ बीच रास्ते में?
भाई ने कहा- नहीं बस तेरी सलवार थोड़ा नीचे सरकाऊंगा और तेरी कच्छी को एक तरफ करके लंड डालूँगा.
फिर मैंने हामी भरी.

भाई ने मुझे खड़ा किया और पहले तो मुझे सीने से लगाया और कहा- सोनिया, मैं तुझे उसी दिन से चोदने के मूड में हूँ जब मैंने तुझे बाथरूम में नंगी देखा था … तेरे ये हसीन जिस्म देख कर मैं बहक गया. जब तेरा खुद का भाई ही बहक गया था तो सोच बाकियों का क्या हाल होता होगा.

उसके बाद मैंने भाई को खूब किस किया.

फिर भाई ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और घुटनों तक सरका दिया और मेरा कुर्ता ऊपर करके मेरी मासूम ही चूचियां बाहर निकाल दी.
अब भाई ने कहा- सोनिया, एक टांग नीचे रख और एक टांग पत्थर पर!
फिर मैंने ऐसा ही किया.

भाई नीचे से आये और मेरी चूत में अपनी जीभ डालकर चाटने लग गये.

“उईइ माँ …” मेरे मुंह से यही निकला. क्या आनंद था वो क्या पल था वो … ऐसा पल हर लड़की के जीवन में आये.
भाई कुछ देर तक मेरी चूत ऐसे ही चाटते रहे.

उसके बाद भाई ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी. जैसे ही भाई ने चूत में उंगली डाली मुझे पेशाब आने लगा.
मैंने भाई को कहा- हटो मुझे पेशाब आ रहा है.
भाई ने कहा- यही तो मैं चाहता था. तू पेशाब मेरे मुंह में कर दे.

मैंने कहा- ये क्या बोल रहे हो भाई?
भाई ने कहा- सुंदर और हॉट लड़कियों का पेशाब पीने में बहुत मजा आता है.

तो मैंने सारा पेशाब भाई के मुंह के अंदर कर दिया. भाई कहने लगे- सोनिया, तेरा पेशाब भी तो तेरे जैसा मस्त है. वाह … मेरी बहना बहुत मजा आ रहा है … तू भी कभी मेरा पेशाब पी कर देखना.
मैंने कहा- ठीक है भाई … फिर कभी!

फिर भाई ने मेरी कच्छी को एक तरफ सरका के अपना लंड मेरी चूत में डालने का प्रयास किया. पहली बार में लंड फिसल के दूसरी तरफ गया.
भाई ने कहा- सोनिया, अपने भाई का लंड अपने कोमल हाथों से पकड़कर अपनी मासूम सी चूत में घुसा न!

मैंने भाई का लंड अपने हाथों लेकर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और भाई को कहा- धक्का मारो.
भाई ने एक ही झटके में सारा लंड अंदर पेल दिया.

मेरी चूत की सील तो मेरे बॉयफ्रेंड तोड़ दी थी. फिर भी मुझे बहुत दर्द हुआ. मैंने भाई से कहा- भाई दर्द हो रहा है.
तो वो ठहर गये.

कुछ देर रुकने के बाद भाई फिर से हल्के हल्के धक्के मारने लग गये.
मैंने कहा- भाई, अब दर्द महसूस नहीं हो रहा है.
कुछ देर बाद भाई की धक्कों की स्पीड बढ़ गयी.

भाई के हर धक्के से मेरी सिसकारी निकल रही थी- आहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह … चोदो और जोर से चोदो भाई … आहह हहह!
इस तरह मैं लगातार सिसकारियां ले रही थी.

भाई भी किसी माहिर खिलाड़ी की तरह अपनी छोटी बहन की चूत चोदे जा रहे थे.

मैं बहुत गर्म हो चुकी थी और भूल गयी थी कि मैं बीच रास्ते में अपने भाई से चुद रही हूँ … मैं सिसकारियां लेने लगी और भाई से कहने लगी- भाई चोदो ना आज अपनी सोनिया बहन को … चोद-चोद के आज मेरी चूत फाड़ दो.

मुझे अपने बड़े भाई के लंड से चुदने में कितना मजा आ रहा था आह हह … मैं बोली- भाई, आप तो बहुत मस्त मजा देते हो. चूत चाट कर भी और अपने लंड से चुदाई का भी!
फिर वो तेजी के साथ मेरी चूत में धक्के लगाने लगे … मुझे दुनिया का हर आनंद अनुभव हो रहा था … मैं कहने लगी- भाई, अब कोई भी आएगा तो अपना लंड बाहर मत निकालना, बस चोदते रहना अपनी बहन को!

भाई मुझे जोरों से चोद रहे थे. मेरी चूची दबा दबा कर उन्होंने लाल कर दिए. भाई कहने लगे- सोनिया, ऐसी चुदाई के लिए कब से तरस गया था … आज अपनी सोनिया बहन को चोद चोदकर रांड बना दूंगा.
मैं भी सेक्स के मजे में कहने लगी- हाँ भाई, आज से मैं आपकी रखैल हूँ … बना दो आज मुझे रांड … बना दो आज खूब चोदकर अपनी बहन को माँ … आज बीच रास्ते में आपकी बहन चुदकर माँ बनना चाहती है … आहहह उम्म्ह!

मेरी आवाजें तेज हो गयी थी और भाई की भी … हम भूल गये थे कि हम पब्लिक प्लेस में चुदाई कर रहे हैं.
भाई मुझे पेले जा रहे थे और मैं भी अपने भाई से पिलती रही.

इतने में वहां से एक सुंदर सी नयी नवेली दुल्हन और उसके साथ एक बुड्डा था या तो उसका पति रहा होगा या ससुर … हमने सच में अनदेखा कर दिया और चुदाई के सागर में गोते लगाते रहे. भाई उनके सामने ही मुझे चोदने में लगे रहे.( उसके बाद क्या हुआ, उन्होंने क्या कहा ये सब अगली कहानी में लिखूंगी)

मैं झड़ने लगी. मगर भैया अभी नहीं रुके. उन्होंने अगले पन्द्रह मिनट तक मेरी चूत को रगड़ा … खूब रगड़ा … जैसे कोई एक रंडी की चूत बजाता है भाई ने भी मेरी चूत ऐसी ही बजाई वो भी खुले में!
भाई पूरी स्पीड में अपनी बहन की चूत में लंड फंसा कर धक्के मारे जा रहे थे.

और फिर उनका वीर्य निकलने को हुआ तो उन्होंने पूछा- कहां गिराना है?
मैंने कह दिया- आह्ह … भैया, मेरी चूत में ही गिरा दो … बना दो आज अपनी सोनिया बहन को माँ!

उसके बाद भैया ने तीन-चार जोर के धक्के मारे और मेरी चूत में झड़ने लगे. उन्होंने सारा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिया. मुझे भैया का लंड अपनी चूत में लेकर बहुत मजा आया.

भाई ने कुछ देर अपना लंड मेरी चूत में ऐसे ही रखा, उसके बाद जबा लंड बाहर निकाला तो मैंने भाई का गीला लंड चाट चाट के साफ कर दिया.
उसके बाद भाई ने मुझे गये लगाया और मेरे ओंठ चूसे.

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मेरी चूत में लंड डालकर मुझे खूब चोदा

मैंने छोटे शहर से बड़े शहर में आकर कॉलेज ज्वाइन किया तो मेरे अंदर जवानी का जोश था. पहले ही दिन एक बांके जवान लड़के से मुलाक़ात हुई और मैं उस पर मोहित हो गयी.

दोस्तो, उम्मीद करती हूँ कि आप सभी अच्छे और स्वस्थ होंगे.
मेरा नाम पल्लवी है और मैं अन्तर्वासना पर बहुत दिनों से कहानियाँ पढ़ रही हूँ और खुद भी कहानियाँ लिखना चाहती थी.

और आज मैं यह पहली कहानी लिख रही हूँ. उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आयेगी. यह मेरी पहली कहानी है इसीलिए अगर कोई गलती हो लिखने में तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा.

सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूं. मेरा नाम पल्लवी है, मेरी उम्र 21 साल है, मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 32-26-33 है. ये कहानी 2 साल पहले की है तब मेरी उम्र 19 साल थी, तभी मैंने अपनी 12वीं की परीक्षा पास की थी और क्यूंकि मेरा घर यूपी में पूर्वांचल के एक गाँव में है इसीलिए वहां कोई अच्छा कॉलेज न होने के कारण मैंने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अपनी बुआ, जो गोरखपुर में रहती हैं, के घर जाने का फैसला किया.

मई माह में 12वीं के रिजल्ट आने के बाद मैं बुआ के घर आ गयी और वह एक कॉलेज ज्वाइन कर लिया.

बुआ का घर 3 मंजिल का था. उसमें से मैंने सबसे ऊपर वाले मंजिल का कमरा ले लिया जो घर की छत पर ही था.

पहले दिन जब मैं दोपहर को बुआ के घर पहुंची तो बुआ ने मेरा सारा सामान कमरे में रखवा दिया. और क्यूंकि मैं भी थकी हुई थी लम्बे सफ़र के बाद तो रूम में जाकर कपड़े बदल कर शॉर्ट्स और टॉप पहना और बेड पर सो गयी.

मेरी नींद करीब शाम के 8 बजे खुली और अँधेरा हो चुका था. मैं अपने कमरे से बाहर निकली और और वहीं छत पर टहलने लगी.

तभी बगल वाले घर में, जिनकी छत मेरी छत से लगी हुई थी, उसमें एक आदमी आया वो करीब 6 फुट का था लम्बा चौड़ा … देखने में किसी जिम का ट्रेनर लग रहा था.

मैं अपने छत पर टहल रही थी और वो अपने छत पर टहल रहा था. और क्यूंकि मैंने शॉर्ट्स और टॉप पहना हुआ था और शॉर्ट्स भी काफी मुश्किल से मेरी गांड को छुपा पा रहे थे इसीलिए वो लगातार मेरी गांड और बूब्स देख रहा था.

वैसे तो मुझे कोई इस तरह देखे तो अच्छा नहीं लगता मगर मैं भी उसकी जानदार बॉडी को देख रही थी.

हम करीब आधा घंटा यों ही टहलते रहे.

8:30 बजे बुआ मुझे खाना खाने के लिए बुलाने छत पर आ गयी. उनके ऊपर आते ही उस आदमी ने बुआ को नमस्ते कहा.
तो बुआ ने भी नमस्ते की और पूछा- और अनिल कैसे हो?
तब मुझे पता चला कि उसका नाम अनिल है.

बुआ ने अनिल को मेरे बारे में बताया और कहा- यह मेरी भतीजी पल्लवी है, और यहाँ पढ़ने के लिए आई है.
उसने मुझसे हाथ मिलाया और कहने लगा- मैं भी उसी कॉलेज में पढ़ा हूँ. और अब चौराहे पर जो जिम है वो मेरा ही है.
मैंने कहा- ओह … आप जिम के ट्रेनर हैं क्या?
अनिल बोला- ट्रेनर भी हूँ और जिम का मालिक भी हूँ.

तभी बुआ ने कहा- हाँ … तभी तो इतनी बॉडी बना रखी है.
और सभी हंसने लगे.

तभी अनिल ने कहा- अगर कॉलेज में कोई दिक्कत हो या कोई हेल्प चाहिए हो तो मुझे बताना, मैं वहां के बारे में सब जानता हूँ.
मैंने कहा- वैसे मुझे वहां के सिलेबस, क्लासेज और टीचर्स के बारे में जानना था.
अनिल ने कहा- हाँ जरुर … अभी बताता हूँ.

लेकिन तभी बुआ ने हम दोनों को टोक दिया और कहा- जो बात करनी है, खाने के बाद करना. चलो पहले खाना खा लो. और अनिल जाओ तुम भी खाना खा लो.
तभी उसके घर के नीचे वाले कमरे से किसी औरत की आवाज़ आई- अनिल आओ खाना खा लो.

मैं बुआ के साथ नीचे जाने लगी तो मैंने उनसे पूछा- बुआ वो आवाज़ किसकी थी?
उन्होंने बताया- वो आवाज तो उसकी बीवी अंजलि की थी.
मैंने कहा- अच्छा उसकी शादी हो चुकी है.
बुआ ने कहा- हाँ, 9 साल हो गए शादी को उसकी.
मैंने कहा- क्या 9 साल तो वो कितने साल का है?
बुआ ने कहा- 35 साल का है. वैसे लगता 25 साल का है, है ना?
मैंने कहा- हां वो तो सही कहा आपने.
और फिर हम दोनों हंसने लगी.

खाना खाने और उसके बाद बुआ के साथ बर्तन धुलने के बाद मैं 10 बजे तक छत पर आ गयी और वहीं पर टहलने लगी.

कुछ देर बाद अनिल के घर से लड़ने की आवाज़ आने लगी और फिर अनिल ऊपर छत आ गया.
मैंने उससे कहा- क्या हुआ? घर में चिल्ला चिल्ली क्यों मची है?
तो अनिल ने कहा- कुछ नहीं बस रोजमर्रा की लड़ाई चल रही थी.
और फिर हम दोनों हंसने लगे.

तभी उसकी बीवी अंजलि ऊपर आ गयी और उसने कहा- मैं घर जा रही हूँ. और खुद खाना बनाओ और खाओ.
अनिल ने भी गुस्से में कहा- जो करना है, कर! अब निकल यहाँ से.

उसके बाद अंजलि वहां से चली गयी और घर चला गयी और अनिल वही खड़ा रहा.
मैंने कहा- अरे उसको रोकोगे नहीं क्या?
तो उसने कहा- अरे खुद आ जाएगी. उसका रोज़ का है ये! और तुम बताओ क्या हाल है, खाना खा लिया?
मैंने कहा- हाँ खा लिया.

अनिल ने कहा- अपना नंबर दो, मैं तुम्हें सिलेबस दे देता हूँ.
मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और अनिल ने मुझे सिलेबस भेज दिया.

मैंने उससे कहा- यार तुमने बॉडी बहुत अच्छी बनायी है.
अनिल ने उसके बाद अपनी शर्ट उतार दी और अपने सिक्स पैक दिखने लगा.

मैं छत की दीवार लांघ कर उसकी छत पर चली गयी और उसके सिक्स पैक छूकर देखने लगी.
अनिल ने कहा- कैसे लगे? बहुत मेहनत करने पर बनी है.
मैंने कहा- बहुत अच्छे हैं.

अनिल ने कहा- वैसे तुम्हारा फिगर भी लाजवाब है, शॉर्ट्स और टॉप में मस्त लगती हो.
मैंने कहा- रहने दो, मोटी हो रही हूँ यार.
तो उसने मुझे घुमाया और मेरे पीछे आ गया और पीछे से मेरे पेट पर हाथ फेरने लगा और पीछे से चिपक गया.

मुझे भी मजा आ रहा था और उसको कुछ नहीं कहा. अनिल पेट पर हाथ फेरते फेरते ऊपर मेरे बूब्स पर हाथ ले आया और बूब्स को मसलने लगा.

उसके बाद मेरे टॉप के अन्दर अपने हाथ डाला और मेरे निप्पल को अपनी दो उंगली से खूब जोर से मसलने लगा और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.
अनिल अपने लंड को मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से ही मेरी गांड पर घुसेड़ने लगा.

तभी बुआ की आवाज़ आने लगी तो मैं जल्दी से अपने छत पर आ गयी और अनिल ने भी तुरंत शर्ट डाल ली.

बुआ ऊपर आई मुझे पानी देने लगी और कहा- चलो, अब सो जाओ.
मैंने बुआ को गुड नाईट बोला और कमरे में सोने चली गयी.

अनिल ने भी बुआ को गुड नाईट बोला और सोने चला गया.

अगले दिन सुबह मेरा कॉलेज था और कॉलेज की ड्रेस नीला शर्ट और सफ़ेद सलवार पहन कर सिटी की लोकल बस पकड़ कर कॉलेज पहुँच गयी.

कॉलेज में मैं जब पहुंची तो क्लास में मैं सबसे ज्यादा सुन्दर थी. सब मुझे ही देख रहे थे. लड़के मेरे पीछे वाली सीट पर बैठ गए और अपनी आँखों से मेरे फिगर का एक्सरे करने लगे, मुझसे बात करने की कोशिश करने लगे.

करीब 3 बजे मेरी छुट्टी हुई और घर जाने के लिए कॉलेज से निकली और बस का इंतज़ार करने लगी.

कॉलेज के बाहर कुछ लड़के खड़े थे और कॉलेज से निकल रही हर लड़की का एक्सरे अपनी आँखों से कर रहे थे. जब करीब आधा घंटा बीत चुका था और बस अभी तक नहीं मिली थी मुझे और कॉलेज के सभी छात्र भी जा चुके थे.

तभी उन्ही लड़कों में से एक लड़का अपनी मोटरसाइकिल पर 2 लड़कों को बिठाये हुए मेरी तरफ आया और मेरे पास आकर गाड़ी रोक कर बोला- हेल्लो … मेरा नाम सुमित है. आपका नाम क्या है?
मैंने उसके सवाल का कुछ जवाब नहीं दिया तो सुमित ने कहा- क्या हुआ मैडम? सिर्फ नाम ही तो पूछा है यार … उसमें क्या दिक्कत है?
तो मैंने फिर मैंने गुस्से में कहा- मेरा नाम पल्लवी है कोई प्रॉब्लम?
सुमित ने कहा- अरे यार पल्लवी … क्या हुआ … इतना क्यूँ गुस्सा हो, क्या बात है कोई टेंशन?

मैंने कहा- यार, आधा घंटा हो गया बस का इंतज़ार करते … लेकिन बस नहीं आई. इसीलिए दिमाग ख़राब हो रहा है.
सुमित बोला- यार अभी तो 1:30 घंटे बाद बस आयेगी.
मैंने अचंभित होकर कहा- क्या सच बताओ यार … फिर तो बहुत लेट हो जायेगा यार.
सुमित बोला- टेंशन न लो मैं तुम्हें घर छोड़ दूंगा आओ बैठो.
मैंने कहा- रहने दो तुम्हारी बाइक पर वैसे ही जगह नहीं है. मैं कहाँ बैठूंगी.

सुमित मोटरसाइकिल से उतरा और अपने दोस्तों को जो पीछे बैठे थे उनसे बोला- अरे यार वो तो उतर जायेंगे तुम हां तो बोलो पहले. मैंने “हां” कह दी.
उसके बाद सुमित ने अपने दोस्तों को बाइक से गरियाते हुए कहा- उतरो बेहनचोदो!
और उसके दोस्त बेचारे उतर गए और कहने लगे- अच्छा बच्चू … लड़की मिली तो दोस्तों को भूल गए.

सुमित बोला- भक्क साले … मदद नाम की भी कोई चीज़ होती है.
और मैंने कहा- सही कहा सुमित ने!
मैं उसी बाइक पर बैठ गयी.

उसने एकदम से बाइक चलायी और मैं पीछे की तरफ धक्का लगा तभी मैंने उसकी कमर पकड़ ली और गिरते गिरते बच गयी. उसके बाद मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और उससे चिपक कर बैठ गयी. वो भी एक दम मदहोशी से गाडी चला रहा था बहुत तेज़ी से चला रहा था.

उसने मेरे बारे में सब पूछा कि ‘कहाँ से हो और क्या कर रही हो?’
मैंने सब बता दिया.
फिर मैंने उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो 29 साल का है और ठेकेदारी का काम करता है. उसका अब इस दुनिया में कोई नहीं है. इसीलिए या तो काम में व्यस्त रहता है या घूमता रहता है.

बात करते करते मैं घर के पास आ गयी थी और मैंने उसे घर से दूर ही रोक दिया और कहा- घर तक मत चलो, नहीं लोग गलत समझेंगे.
सुमित बोला- जैसा तुम कहो.
और उसने गाड़ी रोक दी.

मैं घर जाने लगी तभी वो बोला- कल सुबह कैसे जाओगी?
मैंने कहा- बस से जाऊँगी.
तो उसने कहा- ये बताओ अब हम फ्रेंड हैं न?
मैंने कहा- हां यार, ये भी कोई पूछने वाली बात है?

सुमित ने कहा- तो सुमित सिंह के होते हुए उसकी दोस्त बस से जाएगी मेरी क्या इज्ज़त रह जाएगी.
मैंने कहा- तो क्या करें, बताओ?
सुमित बोला- कुछ नहीं, बस अपना नंबर दो मुझे और सुबह कॉल कर देना. मैं तुम्हें यहीं मिलूँगा सुबह.
मैंने कहा- सच में, थैंक्स यार!
और उसको गले लगा लिया.

सुमित ने भी खूब जोर से मुझे गले लगा लिया. लगता है पहली बार किसी लड़की के गले लग रहा था. फिर उसके बाद उसका लंड खड़ा हो गया हो जो मुझे महसूस होने लगा.
हम दोनों अलग हो गए. फिर मैं अपने घर के लिए निकल गयी.

घर पहुँचने पर बुआ के साथ में बिजी हो गयी और शाम को खाना खाने के बाद करीब 10 बजे छत पर आ गयी.
उसी समय अनिल भी छत पर आ गया.

अनिल बोला- और पल्लवी, कॉलेज का पहला दिन कैसा गया?
मैंने कहा- न ज्यादा अच्छा न बेकार, तुम बताओ बीवी वापस आई या नहीं?
अनिल बोला- वो मादरचोद आना होगा तो आयेगी, मुझे उसकी जरूरत नहीं.

मैंने कहा- अच्छा मूड ऑफ न करो तुम अपना. ये बताओ मुझे तुम्हारा जिम ज्वाइन करना है चार्जेज क्या हैं?
अनिल बोला- अरे तुम्हें भी जिम ज्वाइन करना है क्या?
मैंने कहा- हां क्यूँ …. नहीं कर सकती क्या?
अनिल बोला- नहीं यार, ऐसी बात नहीं, चार्जेज वाली लिस्ट नीचे रखी है, आओ मैं तुम्हें दिखता हूँ.

मैं दीवार लांघ कर उसके घर चली गयी और नीचे उसने कमरे में जाकर उसने मुझे बेड पर बिठा दिया और लिस्ट देख कर कहा- 5000 रुपया प्रतिमाह.
तो मैंने कहा- यार, इतना तो मैं नहीं दे पाऊँगी.

मैंने वही शॉर्ट्स और टॉप पहना था जो उस दिन पहना था. अनिल मेरी जाँघों पे हाथ फेर रहा था. उसने कहा- अरे यार, ये तो दूसरे के लिए है. तुम्हारे लिये तो स्पेशल डिस्काउंट है.
ये बोलते हुए वो मेरे साथ बेड पर ही लेट गया और मेरे टॉप के अन्दर हाथ डालने लगा.

मुझे भी मज़ा आ रहा था तो मैंने कुछ कहा नहीं.
मैं बोली- अच्छा कितना डिस्काउंट दोगे मुझे?
अब उसका हाथ मेरे टॉप के अन्दर बूब्स तक पहुँच गया और मेरे निप्प्लेस को अपनी दो उंगली से दबाने लगा.

मैंने कहा- मुझे तो 100% डिस्काउंट चाहिए.
अनिल बोला- जैसा तुम कहो जानेमन!
और मुझे किस करने लगा.

मैं भी बहुत चुदासी थी. मैं उसके ऊपर चढ़ गयी और किस करने लगी. वो मेरे होंठ को ऐसे चूस रहा था जैसे उन्हें खा जायेगा.

उसका जोश देख कर मेरा जोश और भी बढ़ गया और उसे किस करते हुए उसके होंठ को अपने दांतों से काट लिया.
वो गुस्सा गया और बोला- रुक मादरचोद … आज तुझे ऐसा चोदूँगा कि जिंदगी भर याद रहेगा.

उसने मुझे पकड़े हुए उठाया और बेड पर पटक दिया और खुद नंगा हो गया. उसी बीच मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.

अनिल मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे बूब्स को चूसने लगा. और उसके बाद तो उसने मेरे निप्पल को इतनी जोर से काटा कि मेरी चीख निकल गयी.
मगर वो रुकने वाला था नहीं. लगता है उसे निप्पल से कुछ ज्यादा ही लगाव था. उसने करीब 20 मिनट तक मेरे निप्पल को काटा और चूसा.

उसके बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटा कर खुद उसके ऊपर आ गयी और उसके निप्पलों को मैंने चूसना शुरू किया. मैंने भी उसके निप्पलों को खूब काटा और उसके सिक्स पैक को अपनी जीभ से चाटा और फिर उसके लंड को चूसना शुरू किया.

मैं बता दूं उसका लंड 7 इंच का था, मेरे मुँह के अन्दर जा ही नहीं पा रहा था. पर किसी तरह मैंने उसे चूसना शुरू किया.

करीब 10 मिनट चूसने के बाद उसने फिर से मुझे उठाया और बेड पर पटक दिया. उसने मेरी टांगों को पकड़ के उन्हें फैलाया और फिर अपनी तरफ खींचा और अपना लंड मेरी चूत पर रखा और मुझसे पूछा- बता पहले कभी चुदी हो या सील पैक हो?
मैंने कहा- नहीं, अभी मैं वर्जिन हूँ.

मैं इतना बोली ही थी कि हरामी ने एकदम से पूरा लंड मेरे चूत में डाल दिया.
मैंने कहा- अरे मादरचोद, आराम से डालते.
अनिल बोला- मुझे तेरा ये दिन यादगार बनाना है.

मेरी चूत की सील टूट चुकी थी और उसके बेड पर उसका निशान भी लग चुका था.

उसके बाद अनिल मेरे ऊपर चढ़ मुझे बहुत चोदा और कुछ देर दर्द होने के बाद मुझे भी मज़ा आ रहा था.

5 मिनट वैसे ही चोदने के बाद उसने मुझे उठा लिया और खड़े होकर मुझे अपने ऊपर बिठा कर चोदने लगा. करीब 5 मिनट बाद वैसे ही चोदने के बाद उसने मुझे बेड पर उल्टा लेटा दिया और मेरे ऊपर पीछे से लेट गया.

उसके बाद उसने पीछे से मेरी चूत में लंड डालकर मुझे खूब चोदा. इसी बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी.

अब उसने मुझे उठाया और उठा कर डाइनिंग रूम में ले जाकर डाइनिंग टेबल पर बिठा दिया. उसने मेरी चूत में फिर से लंड डाल दिया और खूब जोर जोर से चोदने लगा.

फिर करीब 10 मिनट बाद वैसे ही चोदने के बाद वो भी झड़ गया और अपना पूरा पानी मेरी चूत के अन्दर ही डाल दिया.

उसके बाद हम दोनों किस करने लगे और कुछ देर किस करने के बाद मैंने अपने कपड़े पहने और अपने कमरे में आ गयी.

अपने कमरे में आने के बाद मैं सोने ही जा रही थी कि तभी मेरे मोबाइल पर सुमित का मेसेज आया.
उस मेसेज में क्या लिखा था और उसके बाद क्या क्या मस्ती की मैंने!

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मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी

कॉलेज लाइफ में खूब लंड लिये. कॉलेज के बाद लंड नहीं मिला. मेरी सहेली ने सगे भाई बहन का सेक्स सुझाया. मैंने क्या किया? भाई बहन की चुदाई की कहानी में पढ़ें.

दोस्तो, मेरा नाम पारुल है. मैं 22 वर्ष की हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं- मम्मी-पापा, मैं और मेरा बड़ा भाई विक्रांत. जिसकी उम्र 24 वर्ष है.

अब मैं अपनी मुद्दे की बात पर आती हूँ. आज मैं आप सबको बताना चाहती हूँ कि 20 की उम्र के बाद लड़का हो, चाहे लड़की सभी को शारीरिक संतुष्टि के लिए सेक्स चाहिए होता है. यह भाई बहन की चुदाई की कहानी इसी सच्चाई को कहती है.

आगे बढ़ने से पहले मैं अपने बारे में आपको बता देती हूं. मेरा फिगर 34 28 36 का है. मेरे कॉलेज और गांव के लड़के सभी मुझ पर मरते थे. अपनी स्कूल लाइफ में भी लड़कों के साथ मैंने काफी मजे किये हैं.

उसके बाद कॉलेज में आने के बाद मैंने 2 लड़कों को पटा लिया और उनके साथ भी बहुत मस्ती की. मूवी देखते समय भी मैं अपनी चूची दबवाती थी. लड़कों को जवान लड़की की चूची बहुत ज्यादा आकर्षित करती हैं और चूचियों से खेलना और उनको दबाना वो बहुत पसंद करते हैं.

अपने बूब्स दबवा दबवा कर मैंने 34 के करवा लिये थे. सभी लड़कियां ऐसे ही बूब्स चाहती हैं.
जब मेरी कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो गयी तो मैं घर पर रहने लगी. अब मेरे बूब्स के साथ खेलने वाला कोई नहीं रह गया था मेरे पास.

एक दिन मैंने अपनी सहेली सपना को ये बात बताई. उसने मुझे मेरे भाई को पटाने का आइडिया दिया. सपना कहने लगी कि उसने भी अपने भाई को पटा रखा है और वो अपने भाई के साथ खूब मजे करती है. घर में ही उसको मस्त लंड मिल गया है.

सपना की बातें मुझे उत्तेजित करने लगी. मैंने अपने भाई को पटाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया. काम थोड़ा मुश्किल था लेकिन इतना भी नहीं कि मैं कर ही न सकूं. मैं देखने में बहुत ज्यादा सेक्सी हूं इसलिए मेरे लिए आसान था.

किसी भी लड़की को अपने भाई को पटाने में मुश्किल इसलिए होती है क्योंकि भाई-बहन के रिश्ते में हमें शर्म आती है. वरना सेक्स तो लड़के भी करना चाहते हैं जैसे कि हम लड़कियां चाहती हैं. लड़के पटा पटा कर मुझे लाइफ में इतना तजुरबा तो हो गया था कि मैं लड़कों की कमजोरी जान चुकी थी.

अब मुझे लंड चाहिए था. वो भी अपने ही भाई का लंड.

मेरे पापा की दुकान है और मेरी मां घर पर ही रहती है. हम लोग मिडल क्लास परिवार से हैं. मेरा भाई कॉलेज के थर्ड इयर में पढ़ रहा था उस वक्त. यह बात आज से साल भर पहले की ही है.

मेरे और विक्रांत के एग्जाम खत्म हो चुके थे. हम लोग अब घर पर ही रहते थे. पापा सुबह दुकान पर चले जाते थे. मां घर के काम में लगी रहती थी.

घर में मैं बोर हो रही थी और कॉलेज के लड़कों के साथ की हुई मस्ती की यादें मुझे परेशान करने लगीं. मैं अपनी सहेली सपना और उसके भाई के सेक्स रिश्तों के बारे में सोचने लगी. मैंने सपना को फोन किया और उससे कहा कि मैं भी अपने भाई को पटाना चाहती हूं.

सपना ने मुझे कुछ टिप्स दिये. मैं उसके सुझाव सुन कर खुश हो गयी. मुझे लगने लगा कि मैं भी अपने भाई को पटा सकती हूं. अगले दिन से मैंने उसकी बताई बातों पर अमल करना शुरू कर दिया.

पहला दिन:
पहली सीख के तौर पर मैंने डीप गोल गले के टॉप्स के साथ स्कर्ट या जीन्स पहनना शुरू किया. उस दिन जब सुबह विक्रांत बेड पर लेटा हुआ था तो मैं उसके रूम में झाड़ू लेकर पहुंच गयी. उसके सामने झुक कर झाड़ू देने लगी.

मेरा प्लान कामयाब भी हो रहा था. विक्रांत मुझे नोटिस कर रहा था. मैं भी जानबूझ कर अपने चूचे हिला रही थी. ये सब होने के बाद मैं बाहर आ गयी.

फिर दोपहर में मुझे पैसे चाहिए थे. मैं भाई के पास जाकर पैसे मांगने लगी और मजाक करते हुए उसकी पीठ पर चढ़ गयी. मैंने अपने बड़े बड़े बूब्स उसकी पीठ पर टच किये. उसने भी मुझे पीछे हाथ लाकर कस कर पकड़ लिया. जैसा सपना ने बताया था वैसा ही हो रहा था.

दूसरा दिन:
विक्रांत ड्राइंग रूम में बैठ कर टीवी देख रहा था. मैंने उसके सामने झुक कर बातें करना शुरू किया. जैसे जैसे मेरे बूब्स के दर्शन उसको हो रहे थे उसका लंड उसके शॉर्ट्स में उठने लगा था. मैं ये सब साफ नोटिस कर पा रही थी.

उसी रात को हम लोग टीवी देख रहे थे और मम्मी किचन में खाना बना रही थी. तभी अचानक लाइट चली गयी और अंधेरा हो गया. मेरे मन में एक तरकीब सूझी और मैं अपना मोबाइल ढूंढने लग गयी.

अंधेरे का फायदा उठा कर मैंने अपने भाई की जांघों के बीच में हाथ मारा और मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसने बोला कुछ नहीं लेकिन मुझे हटाने के लिए उसने मुझे भी हाथ मारा और मेरे बूब्स को छेड़ दिया. ये उसकी तरफ से पहला इशारा था.

तीसरा दिन:
तीसरे दिन मैं पढ़ाई कर रही थी. तभी विक्रांत बोला कि कुछ समझ नहीं आ रहा हो तो पूछ लेना. फिर मैंने भी मौका देख कर बोल दिया कि भाई एक थ्यौरी समझा दो.

उस दिन उसने मेरी गोद से नोटबुक उठाये बिना ही मेरी गोद में रखे हुए मुझे थ्यौरी समझाने लगा. वो बीच बीच में मेरी जांघ और चूत पर भी टच करने की कोशिश कर रहा था. मुझे भी अच्छा लग रहा था लेकिन डर भी था कि कहीं मां न आ जाये.

उसने मुझे थ्यौरी बता दी और दूसरे रूम में चला गया. मैंने उसको फिर से बुलाया और कहा- एक सवाल और भी है.
इस बार सवाल समझाते हुए विक्रांत ने मेरे बूब्स को कई बार टच किया. जब उससे रुका न गया तो उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. मुझे अच्छा लगने लगा.

मेरा भाई मेरे बूब्स दबा कर मजा ले रहा था और मैं भी गर्म हो रही थी. मैंने भी उसको रोका नहीं और वो भी नहीं रुका. फिर कुछ देर के बाद मां के आने की आहट हुई और हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर नॉर्मल हो गये.

अब विक्रांत मेरे जाल में पूरी तरह से फंस चुका था.

उसी दिन फिर शाम को मां खेत में चली गयी. हम भाई-बहन घर में अकेले थे. मैं अपने और विक्रांत के लिए रसोई में मैगी बनाने चली गयी.

पीछे से आकर विक्रांत ने मुझे हग कर लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा. मुझे भी बहुत मजा आने लगा. मैंने भी पीछे मुड़कर विक्रांत के होंठों को चूम लिया.

और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ये मेरे भाई के साथ मेरा पहला किस था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. हम दोनों काफी देर तक किस करते रहे.

फिर वो मुझे उठा कर बेड पर ले गया. हमने बहुत देर तक किस किया. उसके बाद विक्रांत ने मेरी टीशर्ट को उतार दिया. मैं ब्रा में रह गयी. विक्रांत मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी एक एक चूची को दबाते हुए चाटने लगा. मेरी ब्रा गीली होने लगी.

विक्रांत जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मैं सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … विक्रांत कोई आ जायेगा. बस करो … आह्हह… ओहह … रुको.
मगर विक्रांत नहीं रुक रहा था.

फिर उसने मेरी जीन्स भी निकाल दी. अब मैं ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. उसके बाद उसने मेरे बूब्स को नंगा कर दिया और पीने लगा. मुझे मजा आने लगा. मैं उसके बालों को सहलाने लगी.

मेरे चूचे पीने के बाद उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी. मेरे भाई के सामने मेरी चूत नंगी हो गयी. मुझे अलग ही रोमांच मिल रहा था उसके सामने नंगी होकर. वो मेरी चूत को चाटने और चूसने लगा.

मैं तड़प उठी. सपना के बारे में सोचने लगी कि वो सच में बहुत मजा लेती होगी अपने भाई के साथ! क्योंकि विक्रांत के साथ मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

हम दोनों ने काफी देर तक मजे किये लेकिन चुदाई नहीं हो पाई क्योंकि मम्मी के आने का डर था.

घर में चुदाई का मौका नहीं मिल पा रहा था. इसलिए हम दोनों ने कॉलेज का बहाना करने का सोचा.

कॉलेज खुलने के बाद हम दोनों घर से कॉलेज के लिए काम कह कर निकले लेकिन हमें कहीं और ही जाना था.
हम सीधे एक होटल में पहुंचे. वहां पर हमने रूम बुक किया. वहां सुबह 10 बजे पहुंच गये थे हम.

जैसे ही हम रूम में पहुंचे तो मैं विक्रांत की गोद में कूद गयी. उसने भी मुझे लपक लिया. उसके हाथ मेरे चूतड़ों को भींच रहे थे. हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गये थे.

कुछ देर के बाद जब भाई से रुका न गया तो उसने मुझे बेड पर पटक लिया. मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा. उसने मेरे टॉप को निकाल कर मेरे बूब्स को मुंह में ले लिया.

मेरा हाथ अपने आप ही विक्रांत की पैंट में घुस गया था. मेरा हाथ उसके अंडरवियर को टटोल रहा था. मैं उसके लंड को देखना चाह रही थी. मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसका लंड बहुत मोटा और लकड़ी की तरह एकदम से सख्त हो गया था.

बहुत दिनों के बाद मुझे लंड का टच मिला था. कॉलेज के लड़कों के लंड से खेलने के बाद अब भाई का लंड पकड़ना बहुत मजा दे रहा था. विक्रांत मेरी चूचियों को मसल मसल कर पी रहा था. उसके बाद विक्रांत ने मुझे पूरी नंगी कर दिया. वो मुझे निहारने लगा. मैंने भी उसको अपनी जवानी के खूब दर्शन करवाये.

विक्रांत ने मेरी चूत को छेड़ा तो मैं सिहर गयी. मैंने उसके सिर को नीचे की ओर दबाने लगी. वो मेरा इशारा समझ गया और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मस्ती में खो गयी. पागल होने लगी.

न जाने इन लड़कों को चूत चाटने में क्या मजा आता है. विक्रांत पागलों की तरह मेरी चूत तो पी रहा था.
बड़ी मुश्किल से मैंने उसको रोक कर कहा- मेरी जान … अब मेरी चूत को अपने लंड का स्वाद चखा दे. मैं और इंतजार नहीं कर सकती हूं अब.

उसने हां करते हुए बैग से कॉन्डम निकाल कर मुझे दे दिया. मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी. पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मुझे एक दो पल लंड का स्वाद थोड़ा अजीब लगा मगर फिर मजा आने लगा.

विक्रांत भी मजे से अपना लंड चुसवाने लगा. उसे भी लग रहा होगा कि उसकी बहन कितनी बड़ी रंडी है. अपने भाई के लंड को खा जाना चाहती है. मगर मुझे लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था.

पांच मिनट में ही विक्रांत मेरे मुंह में ही झड़ गया. हम रुक गये. हम दोनों फिर से किस करने लगे. मैं उसके लंड को सहलाते हुए खड़ा करने की कोशिश करने लगी. वो भी मेरी चूचियों और चूत से खेलने लगा.

कुछ देर के बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. उसने अपने लंड को हाथ से सहलाते हुए कॉन्डम लगाया. फिर मेरी चूत पर लंड को रख कर एक झटका मारा. एक ही झटके में आधा लंड अंदर चला गया. एक बार चीख तो निकली लेकिन मजा भी गजब का मिल गया.

बहुत दिनों के बाद मेरी चूत में लंड फंसा था. मैं स्वर्ग में थी. फिर विक्रांत ने मेरी चूत में लंड को चलाना शुरू कर दिया. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलनी चालू हो गयीं- आह्ह… आईई … आहह … आऊऊ … ओह्ह … करके मैं भाई के लंड से चुदने लगी.

झटके लगाते हुए भाई ने पूरा लंड अंदर दे दिया था. उसके झटके अब हर पल तेज हो रहे थे. मैं अपनी चूचियों को दबाने लगी. अपने ही हाथ निप्पलों को मसलने लगी. विक्रांत ने देखा तो उसने मेरी चूचियों को कस कर भींच दिया और मेरी चूत ने उसके लंड को भींच लिया.

वो तेजी से मेरी चूत को पेलने लगा और मजे में मेरी आंखें बंद होने लगीं. मैं भाई के लंड से चुद कर सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. 15 मिनट तक विक्रांत ने मेरी चूत को इसी स्पीड से चोदा और फिर हम दोनों साथ में ही झड़ गये.

उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गये और वहां पर रोमान्स करते हुए हमने एक बार फिर से बाथरूम सेक्स किया और भाई बहन की चुदाई का मजा लिया. मैंने बाथरूम में एक बार फिर से विक्रांत के लंड का माल पीया. उसने मेरी चूत का रस चाटा. हम दोनों बहुत खुश हो गये थे एक दूसरे को पाकर.

फिर हम दोनों वहां से घर आ गये. उस दिन के बाद से मेरे भाई और मेरे बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया. हम दोनों सप्ताह में एक या दो बार होटल में जरूर जाते हैं और चुदाई करते हैं. यदि घर पर भी मौका मिलता है तो हम भाई बहन का सेक्स का अवसर नहीं छोड़ते हैं.

इस कहानी के माध्यम से मैंने आपको यही बताना चाहा है कि जिन्दगी का असली मजा सेक्स में ही है. चाहे वो ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदाई हो या फिर अपने ही सगे भाई के साथ चुदाई हो. चुदाई में ही असली मजा है.

उस दिन मैंने सपना को थैंक्स बोला. उसने ही मुझे ये रास्ता बताया था.
दोस्तो, मुझे लिखना थोड़ा कम आता है. मैं कोई लेखिका नहीं हूं लेकिन अपनी भाई बहन की चुदाई की कहानी बताने के लिए लिखना पड़ा. गलती हुई हो तो इग्नोर करें.

अगर आप में से भी कोई भाई बहन का सेक्स का सोच रहा है तो मुझे जरूर बतायें. मैं आपकी मदद करूंगी. इसमें कुछ गलत भी नहीं है क्योंकि ये दोनों की सहमति से ही होता है. वैसे भी सेक्स एक प्राकृतिक जरूरत है और ये पूरी होनी ही चाहिए.

अपनी बात खत्म करने से पहले मैं जाते जाते कुछ टिप्स दे देती हूं. ताकि आपको अपने भाई को पटाने में आसानी हो.

टिप 1- जब आप दिन में नहाने जाओ तो एक ऐसे समय पर जाओ जब आपके घर में आपके और आपके भाई के अलावा कोई न हो. आप बाथरूम में ब्रा और पैंटी लेकर मत जाओ और फिर अंदर जाकर उसे अपने भाई से बहाना करके मंगवाओ. जब वो देने आये तो दरवाजा हल्का खुला छोड़ दो और उसको अपने जिस्म के नजारे दिखाओ. इससे उसे एक ग्रीन सिग्नल मिलेगा और उसका लंड चूत के लिए तड़प उठेगा.

टिप 2- नहाने के बाद आप इस्तेमाल की गयी ब्रा और पैंटी को धोना नहीं. उसको बिना धोये हुए बाथरूम में इस तरह से रख दो कि अगर कोई छुए तो तुम्हें पता लग जाये कि उनको छेड़ा गया है.

मेरा तजुरबा है कि लड़के अक्सर लड़कियों की ब्रा और पैंटी से खेलते हैं. ऐसे ही आप 2-3 दिन करना. आपको पता लग जायेगा कि वो आपकी ब्रा और पैंटी से खेलता कब है. अगर वो ब्रा और पैंटी से खेले तो इसका मतलब है कि वो भी आपके साथ मजे करना चाहता है.

दोस्तो, मेरे पास भाई बहन का सेक्स के ऐसे बहुत सारे टिप्स हैं. आप मुझे अपने सुझाव भेजें और यदि इस काम में सहायता चाहिए तो मैं आपको गाइड करने के लिए तैयार हूं.

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