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मेरा लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर

मैं अपनी पड़ोसन को चोद चुका था और खूब चोदता था. अब मेरी नजर उसकी बड़ी बेटी पर थी लेकिन कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था. फिर कैसे मैंने पड़ोसन की बेटियों को चोदा?

अपनी पड़ोसन की चुदाई करते हुए मुझे दो साल हो चुके थे.

तभी एक दिन रेखा ने बताया कि दिशा का ग्रेजुएशन हो गया है और आगे की पढ़ाई के लिए बंगलौर के क्राइस्ट कॉलेज से कॉल आई है. लेकिन मीतेश इंटरव्यू के लिए दिशा को भेजने को राजी नहीं है. मीतेश का कहना है कि इंटरव्यू क्लीयर नहीं हो पाया तो बीस हजार रुपये बिना मतलब के खर्च हो जायेंगे.
मैंने कहा- क्राइस्ट कॉलेज में मेरा कुछ जुगाड़ है तुम अगर चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ.

मीतेश से बात करने के बाद रेखा ने बताया कि मीतेश कह रहा था, अगर कपूर साहब जा रहे हैं तो तुम साथ जाकर क्या करोगी.
अंततः मैं और दिशा बंगलौर गये, वहां उसने इंटरव्यू क्लीयर कर लिया. उस दिन शुक्रवार था, सोमवार को एडमिशन की प्रक्रिया होनी थी इसलिए हमें दो दिन वहीं रुकना था. इंटरव्यू क्लीयर होने की खबर सुनकर रेखा बहुत खुश हुई.

शनिवार और रविवार ये दो दिन हमें घूम फिर कर गुजारने थे. शनिवार को घूमने के दौरान मैं दिशा को चोदने का प्रोग्राम बनाता रहा. रात का खाना खाकर हम लोग होटल के कमरे में लौटे तो मैं पलंग पर पसर गया और दिशा सोफे पर फैल गई. अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप चेक करते हुए दिशा बोली- अंकल, आपके सहयोग से मेरा एडमिशन हो रहा है, आपका एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी.

“हम अहसान को याद रखने या भूलने पर यकीन नहीं करते, हाथ के हाथ हिसाब करते हैं. तुमको अगर अहसान उतारना हो तो अभी उतार लो, मौका भी है और दस्तूर भी.”
“मैं आपका अहसान कैसे उतार सकती हूँ? आप आदेश करें?”
“कैसे उतारना है? पूरी रात पड़ी है, जैसे चाहो उतार लो.” इतना कहते हुए मैंने एक कुटिल मुस्कान दी.

मेरी कुटिल मुस्कान के जवाब में दिशा मुस्कुराते हुए बोली:
पापा, अगर आपको इसमें खुशी मिले तो मैं हाजिर हूँ. मेरे मुंह से पापा सुनकर आप हैरान न हों. पिछले दो साल से मैं और रिशा आपको पापा कहकर ही सम्बोधित करते हैं. हुआ यूं था कि एक दिन मम्मी के मोबाइल में मैंने आपके मैसेज देख लिये थे और मम्मी पर नजर रखे हुए थी. तभी एक रात मम्मी और आपकी बातचीत सुनी. आपने सुबह 11 बजे आने को कहा था.

अगले दिन डैडी दुकान चले गए और रिशा अपने स्कूल. इसके बाद सुबह 10 बजे मम्मी किचन में व्यस्त थी, मम्मी को बॉय कहकर मैं कॉलेज के लिए निकली. वास्तविकता यह थी कि मैं कॉलेज नहीं गई और दबे पांव ऊपर अपने कमरे में चली गई.

किचन का काम निपटा कर मम्मी नहाने चली गई. तभी आप आ गये, मम्मी तौलिया लपेटकर बाथरूम से निकली और दरवाजा खोला. आपने मम्मी को वहीं लॉबी में ही पकड़ लिया और चूमने लगे. मैं छिपकर सब देख रही थी. आप मम्मी को लेकर बेडरूम में चले गए. काफी देर बाद आप बेडरूम से निकले और बाथरूम में गये. उस समय आपके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.

यह सब देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. खुशी इसलिये हुई क्योंकि बीस साल मैं अपनी मां को तिल तिल मरते हुए देख रही थी, डैडी मम्मी की बिल्कुल केयर नहीं करते थे. मुझे खुशी थी कि मम्मी ने अपनी खुशी आपमें ढूंढ़ ली थी.

मैंने और रिशा ने मम्मी से बात की और उसके इस फैसले के साथ खड़े होते हुए आपको पापा मान लिया.

दिशा की बातें सुनकर मैं सन्न रह गया और उसे चोदने का विचार अपने दिमाग से निकाल दिया. तभी दिशा बेड पर आ गई और मुझसे चिपक कर बोली- पापा, मेरा एडमिशन कराने में सहयोग करके आपने जो अहसान किया है, उससे बहुत बड़ा अहसान आप मेरी मां को खुशी देकर कर चुके हैं. आपकी बांहों में रात गुजार कर मैं आप पर कोई उपकार नहीं करूंगी बल्कि आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी.

इतना कहकर दिशा ने अटैची से अपने कपड़े निकाले और बाथरूम चली गई. कुछ देर बाद दिशा बाथरूम से निकली. छोटी सी नेकर और टॉप पहने दिशा को देखकर मेरा दिमाग झन्ना गया.

करीब 21 साल की दिशा प्रीति जिंटा की कॉपी लग रही थी. नेकर से बाहर निकली उसकी जांघें मेरा लण्ड टनटना रही थीं. मैं यह याद भी नहीं करना चाहता था कि मेरी उम्र 62 साल है और दिशा की सिर्फ 21 साल.

मैं भी बाथरूम गया और शॉवर लेकर सिर्फ लोअर पहनकर आ गया.

दिशा अपने मोबाइल में मशगूल थी. दिशा के बगल में बैठ कर मैंने उसकी जांघों पर उंगलियां फेरीं तो दिशा ने मोबाइल रख दिया और ‘आई लव यू पापा’ कहकर मेरे सीने से लग गई.

मैंने दिशा का टॉप उतार दिया और संतरे के आकार की उसकी चूचियों से खेलने लगा. दिशा की चूची मुंह में लेकर मैं धीरे धीरे चूसने लगा. दिशा की नेकर का हूक खोलकर मैंने उसकी नेकर घुटनों तक खिसका दी और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

दिशा के होंठों पर होंठ रखकर मैंने दिशा को अपनी ओर खींचा तो अपनी नेकर को टांगों से अलग करते हुए दिशा मुझसे लिपट गई और मेरे बदन पर हाथ फेरने लगी. दिशा का हाथ मैंने अपने लण्ड पर रखा तो मेरा लण्ड अपनी मुठ्ठी में दबोच कर दिशा बोली- आई लव यू, पापा. मुझमें समा जाओ, पापा.

मैंने अपना लोअर उतार दिया और 69 की पोजीशन में आकर दिशा की चूत चाटने लगा. दिशा मेरे लण्ड का सुपारा चाटते हुए सॉफ्टी के मजे ले रही थी.

तभी मैंने दिशा को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर रख दिया. दिशा ने मेरे लण्ड का सुपारा सेट किया और उस पर बैठ गई. दिशा की कमर पकड़ कर मैंने उसे नीचे की ओर दबाया तो टप्प की आवाज हुई और मेरे लण्ड के सुपारे ने दिशा की चूत में जगह बना ली. दिशा ने और दबाव डाला तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया.

अपना लण्ड दिशा की चूत में बनाये रखते हुए हम पलट गये.
अब दिशा नीचे थी और मैं ऊपर. अपना लण्ड दिशा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने जोर से धक्का मारा तो दिशा की चूत की झिल्ली फट गई. चूत की झिल्ली फाड़ते हुए मेरा लण्ड दिशा की चूत की गहराई में उतर गया.

लण्ड को दिशा की चूत में फंसा कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. चूचियां चूसने से मेरे लण्ड में जोश बढ़ने लगा, मैंने चुदाई की तो दिशा की चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत गीली होने से मुझे आराम हो गया.

जब लण्ड को अन्दर बाहर करते काफी समय हो गया तो मैंने दिशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. चोदते चोदते दिशा की चूत का भुर्ता बन गया था लेकिन मेरा लण्ड पानी छोड़ने को तैयार नहीं था. दिशा की चूचियों को बेरहमी से मसलते हुए मैंने लाल कर दिया था. मेरे लण्ड का सुपारा फूलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है. पिचकारी छूटने पर मैं दिशा से लिपट गया.

उस रात मैंने दिशा को दो बार चोदा. अगले दिन रविवार था. शिलाजीत के कैप्सूल और वियाग्रा की गोली खाकर दिशा की जमकर चुदाई की. सोमवार को दिशा का एडमिशन करा कर उसको हॉस्टल में शिफ्ट करके मैं वापस लौट आया.

बंगलौर से वापस लौटकर अगले दिन मैं रेखा के घर गया तो रेखा ने बाहें फैला कर मेरा स्वागत किया.

दिशा की चुदाई का आनन्द लेने के बाद भी रेखा को चोदने का अलग ही मजा था. 100 किलो से भी अधिक वजन वाली भारी भरकम शरीर की मल्लिका रेखा जब नंगी होती तो हाथी का बच्चा लगती.

कई दिन बाद चुदने के कारण रेखा ने उछल उछल कर चुदवाया. रेखा को चोदने के बाद मेरे कहने पर रेखा चाय बना लाई. चाय की चुस्कियां लेते हुए रेखा ने बताया कि परसों रिशा का जन्मदिन है, वो 19 साल की हो जायेगी.

“तो चलो परसों गोल्डेन एप्पल में पार्टी करते हैं.”
“नहीं, घर पर ही केक काटेंगे.”

मेरे काफी जिद करने पर भी रेखा होटल में पार्टी करने पर राजी नहीं हुई. मेरे बहुत बार कहने पर रेखा इस बात पर राजी हुई कि आप रिशा को घुमाने ले जाना.

रिशा के जन्मदिन पर मैं और रिशा मॉल गये, घूमे फिरे, खाया पिया. मैंने रिशा को एक प्यारी सी ड्रेस भी खरीद दी. मॉल से लौटते समय मैंने रिशा से पूछा- कल तो तुम्हारा कॉलेज होगा?
रिशा के हाँ कहने पर मैंने उससे कहा- तुम्हारी आज की पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को है लेकिन डैडी को नहीं है. अब कल मेरी तरफ से फिर तुम्हारी पार्टी है और कल होने वाली पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को भी नहीं होनी चाहिये. यह एकदम सीक्रेट पार्टी होगी, बस हमारी और तुम्हारी. कल जब तुम कॉलेज के लिए निकलोगी तो मैं तुम्हें पिक कर लूंगा.

अगले दिन सुबह 9 बजे रिशा का फोन आया कि मैं घर से निकल चुकी हूँ.
मैंने जवाब दिया कि मैं लिबर्टी शोरूम के पास तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ.

कुछ ही देर में रिशा आई और मेरी कार में बैठ गई. मैंने कार ताज होटल की तरफ मोड़ दी जहां एक कमरा मैंने बुक करा रखा था.

होटल के कमरे में पहुंच कर मैंने केक ऑर्डर किया. करीब आधा घंटा तक इधर उधर की बातें करने में बीत गया, फिर केक आ गया.

रिशा का हाथ पकड़ कर मैंने केक कटवाया. मैंने रिशा को केक खिलाया और उसने मुझे. केक से क्रीम लेकर मैंने रिशा के गालों पर लगा दी. रिशा ने मिरर में खुद को देखा और हंस पड़ी. अपना मुंह साफ करने के लिए रिशा ने टॉवल उठाया तो मैंने उसे रोकते हुए कहा- बहुत महंगा केक है, इसे टॉवल से पोंछ कर बरबाद न करो, लाओ मैं चाट लेता हूँ.

रिशा को आगोश में लेकर मैं उसके गालों और गले पर लगा केक चाटने लगा. रिशा के गाल और गला साफ हो गये तो मैंने फिर से केक लगा दिया और चाटने लगा. जब रिशा के गले पर मैं अपनी जीभ फेरता तो वो गनगना जाती.

मैंने रिशा से कहा- मैंने तुम्हें कई बार गिफ्ट दिये हैं लेकिन तुमने कभी रिटर्न गिफ्ट नहीं दिया?
“मेरे पास ऐसा कुछ होता ही नहीं था कि मैं आपको दे सकूं!”
“अब तो है और तुम चाहो तो दे सकती हो.”
“मेरे पास ऐसा क्या है, जो मैं आपको गिफ्ट कर सकूं?”

तुम 19 साल की हो गई हो, बालिग हो. बालिग होने पर इस देश का कानून तुम्हें तमाम अधिकार देता है. एक अधिकार तुम्हारे पास है, अपना शरीर उस व्यक्ति को सौंपने का जिसे तुम प्यार करती हो. अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो आज मुझे रोकना मत. मैं यह सारा केक तुम्हारे बदन पर मल कर चाटना चाहता हूँ, तुम अपना टॉप उतार दो तो मैं यह केक तुम्हारी चूचियों पर मल कर चाट लूँ.”

मेरी बात सुनकर रिशा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया तो मैंने रिशा का टॉप और ब्रा उतार दी. 19 साल की दुबली पतली रिशा की चूचियां आलिया भट्ट की चूचियों जैसी थीं. छोटे छोटे संतरे जैसी चूचियों पर केक लगाकर मैंने चाटा तो रिशा के निप्पल टाइट हो गये.

दो तीन बार रिशा की चूचियों पर केक लगाकर चाटने के बाद मैंने रिशा की मिडी और पैन्टी उतारकर उसे नंगा कर दिया और उसकी नाभि से लेकर जांघों तक केक मल दिया. जांघों से चाटते चाटते मैं रिशा की चूत तक आ गया, फिर रिशा की नाभि से लेकर चूत तक आ गया. रिशा की चूत अब भी केक से ढकी हुई थी. रिशा की टांगें फैला कर मैं उसकी चूत चाटने लगा. चूत पर लगा केक जब साफ हो गया तो रिशा की चमकती चूत दिखने लगी.

अब मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये. अपने लण्ड को सहला कर लण्ड की खाल को आगे पीछे किया और उस पर केक मल दिया.

पना लण्ड रिशा के चेहरे के करीब ले जाकर मैंने रिशा से कहा- अब केक खाने की तुम्हारी बारी है.
रिशा मेरे लण्ड पर लगा केक चाटने लगी तो मैंने रिशा की चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

कच्ची कली को मसलने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हो चुका था. रिशा की चूत में ऊंगली चलाकर मैंने उसे भी चुदवाने के लिए तैयार कर दिया.

अपने बैग से कोल्ड क्रीम की शीशी और कॉण्डोम का पैकेट निकाल कर मैं बेड पर आ गया. अपना लण्ड रिशा के हाथ में देते हुए मैंने कहा- रिशा, ये तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट है, इसे अपने जिस्म में जाने दो. जब पहली बार यह तुम्हारे जिस्म में जायेगा तो हल्का सा दर्द होगा लेकिन बाद में बहुत आनन्द देगा, तुम्हें जन्नत का मजा देगा.

इसके बाद मैंने अपने लण्ड पर क्रीम लगाकर रिशा से लण्ड की मसाज करने को कहा और मैं उसकी चूत की मसाज करने लगा. जब मुझे लगा कि रिशा की चूत लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है तो अपने लण्ड के सुपारे पर क्रीम लगाकर मैंने रिशा की चूत के लब खोले.

रिशा की छोटी सी गुलाबी रंग की चूत देख कर मेरा लण्ड सलामी देने लगा. अपने लण्ड का सुपारा रिशा की चूत पर रखकर मैंने रिशा की नाजुक कमर पकड़ी और लण्ड को अन्दर धकेला.

रिशा की चूत काफी गीली हो चुकी थी और लण्ड पर क्रीम लगी हुई थी इसलिये पहले झटके में सुपारा और दूसरे झटके में आधे से ज्यादा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.
मैंने रिशा की जांघों और चूत के आसपास हाथ फेरते हुए धक्का मारा तो मेरा पूरा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.

चूत की झिल्ली फटने से जो दर्द हुआ रिशा बर्दाश्त कर गई. रिशा में गजब की हिम्मत थी. 50 किलो वजन की दुबली पतली रिशा 120 किलो वजन वाले भारी भरकम अंकल का लण्ड झेल गई थी और अंकल को अपने ऊपर लिटा कर चूम रही थी.

रिशा के ऊपर लेट कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. मेरा लण्ड रिशा की चूत में सेट हो चुका था और मैं चाहता था कि ताउम्र ऐसे ही पड़ा रहूँ. लेकिन ‘लण्ड है कि मानता नहीं’ कुछ ही देर में लण्ड ने अन्दर बाहर होना शुरू कर दिया.
पहली बार चूत में लण्ड जाने का दर्द अब रिशा के चेहरे से गायब हो चुका था.
रिशा के होंठों पर उंगली फेरते हुए मैंने पूछा- कैसा लग रहा है?

“जब से दीदी ने आपके और मम्मी के रिश्ते के बारे में बताया था, मैं यह नहीं समझ पा रही थी कि आपके सामने टांगें फैलाने में मम्मी को क्या मिलता है, मम्मी ऐसा क्यों करती है? आज मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया है. प्रकृति ने आदमी और औरत का शरीर इस तरह से बनाया है कि दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी करते हैं. इसमें जाति, धर्म, उम्र, रिश्ते जैसा कोई बन्धन नहीं होता. एक औरत जब बेड पर होती है तो उसके सामने सिर्फ एक मर्द होता है.”

“तुम बातें बहुत अच्छी कर लेती हो.” इतना कहकर मैंने अपने लण्ड की रफ्तार बढा़ई.

जब मुझे लगा कि मेरे डिस्चार्ज का समय करीब है तो मैंने अपना लण्ड रिशा की चूत से निकाला, लण्ड को टॉवल से साफ किया और उस पर कॉण्डोम चढ़ा दिया. अपने लण्ड पर कॉण्डोम चढ़ा कर मैं फिर से रिशा की चूत में घुस गया.

डॉटेड कॉण्डोम की रगड़ से रिशा सिसकारी भरने लगी. रिशा की सिसकारियां मेरे लण्ड में जोश भर रही थीं. अपने लण्ड की रफ्तार पर नियंत्रण रखते हुए मैंने चुदाई जारी रखी. मेरा लण्ड अकड़कर मूसल जैसा होने लगा और बहुत फंस कर अन्दर बाहर हो रहा था.

तभी मेरे लण्ड से फव्वारा फूटा. मैं निढाल होकर रिशा पर लुढ़क गया.

कुछ देर बाद हम अलग हुए और रिशा बाथरूम चली गई. रिशा बाथरूम से लौटी तो टांगें फैला कर चल रही थी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि हल्का सा दर्द है. मैंने रिशा को लिटा दिया और कोल्ड क्रीम से रिशा की जांघों और चूत की मसाज की. इसके बाद हमने कमरे में ही खाना मंगा लिया. कॉलेज से छुट्टी के समय तक रिशा घर पहुंच गई.

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मेरी चुदाई

शुरू से जवान होने तक मेरी बहुत सारी ऐसी यादें हैं जिनके बारे में मुझे पता नहीं था कि मैं खेल खेल में ही, अनजाने में सेक्स सीख रही थी. वो सब खेल ही थे, जो हम सबको सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं.

हम इस साइट पर हैं और हम सब यंग हो गए हैं इसी लिए इस साइट पर हैं. हम सब जानते हैं कि सेक्स करने की उम्र और सेक्स के लिए दोनों तरफ की कोशिश जरूरी होती है. आप और मैं सेक्स के बारे में काफी कुछ जानते हैं. इस साइट पर कमेंट पढ़ने के बाद मुझे लगा कि कुछ लोग तो ज्यादा ही जानते हैं.

मुझे लगता है कि मैं जो कहानी आपको बताऊंगी, उससे आप सब कुछ गलत नहीं सोचेंगे और उसका कोई गलत मतलब नहीं निकालेंगे.

मैं मेरठ से एक शादीशुदा महिला हूं. अभी 25 वर्ष की हूँ. इससे ज्यादा और डिटेल्स देने की जरूरत नहीं होगी. या शायद मैं अपनी निजी जानकारी इससे अधिक दे भी नहीं सकती हूँ.

मेरी सोच सेक्स की समझ में बारे में आपसे अलग हो सकती है. मुझे लगता है कि हम कम उम्र से सेक्स के बारे में सीखते हैं. सेक्स करने की उम्र और जिस्म की गर्मी तक हम इंतजार करना चाहिए. छोटी उम्र में सेक्स करने से शरीर में बीमारी हो सकती है और अंग खराब हो सकते हैं. हमें इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

हम सब सेक्स करते हैं और किसी वीडियो से या किसी दोस्त की बात सुन कर या अब इस साइट पर पढ़ कर सेक्स करने के नई तरीके को जानने लगे हैं. पर क्या ये वीडियो या दोस्त हमें सेक्स करना सिखाते हैं. या हम कहीं और से सीखते हैं. एक बार इस बारे में आप सोचना और कमेंट करके अपनी राय देना.

मैं अपनी बात करूं, तो शुरू से जवान होने तक बहुत सारी ऐसी यादें हैं, जिनके बारे में मुझे पता नहीं था और खेल खेल में ही अनजाने में सेक्स सीख रही थी. अब जवान होने पर समझ आया कि वो सब खेल ही थे, जो हम सबको सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं.

ऐसे ही कुछ खेल या सेक्सी खेल के बारे में मैं आपसे शेयर कर रही हूं.

मैं एक बार भाई और मम्मी के साथ अपने मामा के यहां गई थी. वहां मामा के और कुछ पड़ोस के लड़के लड़कियां भी थी. जिनके साथ हम दोनों भाई बहन खेलते थे.

हम सब कभी डॉक्टर का खेल खेल कर चूतड़ पर सुई लगाते और डॉक्टर की तरह ही रगड़ कर मज़े करते थे. कभी कभी तो छोटे से लंड से ही इंजेक्शन लगाया जाता था. पर उस समय हम सब की उम्र एक समान ही थी, जिससे सेक्स तो नहीं होता था. बस हमारा खेल होता था.

कभी घर बनाकर उसमें कुछ लोग मम्मी पापा का किरदार करते और उनकी शादी होती. फिर एक दूसरे के ऊपर लेट कर सेक्स करने की कोशिश करते. ऐसा हम में से कई लोग ने किया होगा. शायद आप भी उस समय में ये सब करते रहे होंगे. हम सेक्स करते हुए अपने अंगों को जबरस्ती सेक्स करने की कोशिश में रगड़ते थे, पर होता कुछ नहीं था.

कई बार मैंने देखा कि हम उंगली से पकड़ कर छोटे से लंड को चूत में डालने की कोशिश करते थे, पर किसी भी लड़के का लंड चूत में जाता ही नहीं था. बिल्कुल छोटा सा नुन्नू जैसे लंड को साथ की लड़कियों की चूत के छेद के बाहर ही रगड़ते हुए मज़े लेते रहते थे. मेरे मामा की बेटी को ये करना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि वो हम सब से थोड़ी बड़ी थी.

मुझे एक और बात याद आती है. जब कोई लड़की पेशाब करती या लड़का पेशाब करता, तो हम एक दूसरे के अंगों को ध्यान से देखते कि हमारा ऐसा नहीं है. कभी कभी तो हाथ में पकड़ कर, हाथ से सहला कर देखते और एक दूसरे से पूछते कि तेरी सूसू मेरे जैसी क्यों नहीं है. तो दूसरा लड़का बोलता कि तेरी अभी उगी नहीं है. थोड़े दिन बाद तेरी भी सूसू बड़ी हो जाएगी. पर आज तक किसी भी लड़की का बड़ा नहीं हुआ क्योंकि असलियत में वो चूत थी, लंड नहीं.

ये सोच कर कभी कभी हंस देती हूं कि मेरी सूसू अभी तक बड़ी नहीं हुई है. हां चूत लंड जैसी कैसे बड़ी हो सकती है, वो तो सही से फ़ैल गई है. और सेक्स भी मजे से करती है.

एक और खेल हमने बहुत खेला था, जिसमें हम सब लड़कियां नंगी होकर कुत्ते की तरह हाथ और घुटने से चलती थीं और लड़के पीछे से नंगे होकर हमारे चूत और चूतड़ के छेद को जीभ से चूसते थे. हम लड़कियां, गुदगुदी होने पर आगे सरक जातीं. वो फिर से चाटते और फिर कुत्ते की तरह ऊपर चढ़ कर लंड अन्दर डालने की कोशिश करते. सच में इस खेल में बहुत मज़ा आता था.

मुझे बहुत बार की हुई ऐसी ही घटनाओं में याद है कि जब रात में हम सब सोते, तो मम्मी हमारे पास से उठ जाती थीं और पापा के पास लेट जाती थीं. वो समझते थे कि उनकी औलादें सो जाते हैं, पर हम उनकी सभी हरकतों पर ध्यान देते थे. कैसे वो किस करते हैं, चूची चूसते हैं और पापा मम्मी के ऊपर चढ़ कर उनकी चुदाई करते हैं.

मैंने कई बार तो मामी को मामा का लंड मुँह में चूसते हुए भी देखा था. मेरे मामा की संतानों ने भी ये देखा था. उसी को याद करते हुए हम दिन में खेलते हुए वैसे ही एक दूसरे की सूसू को चूसते थे और मज़े करते थे. पर उस समय इन सब बातों का पता नहीं था.

और एक खेल तो सबने खेला ही होगा. छुप्पन छुपाई वाला (हाइड एंड सीक). उस खेल में किसी के साथ कोने में छिपना और एक दूसरे के शरीर पर हाथ रगड़ना. चूची दबाना. लंड का किसी लड़की के हाथ में पकड़ा कर मज़े लेना. कभी कभी तो सेक्स करने के लिए अन्दर डाला.

अगर मैं ज्यादा बात करूं, तो सभी लड़के अपनी सेक्स की शुरुआत एक दूसरे की गांड मारने से ही करते हैं. अब भी और लड़कियां एक दूसरे की चूची दबा कर, या चूत चूस कर अपने जीवन के सेक्स की शुरुआत करते हैं.

मैंने भी जब अपनी जवान होते शरीर को महसूस किया, तो मामा की बेटी के साथ ही चूची दबा कर मस्ती की थी. पर ज्यादा जोर नहीं दिया था, क्योंकि घर वालों के बीच में समय नहीं मिलता था. प्राइवेसी की बहुत प्रॉब्लम होती थी. घर वाले भी हम पर ध्यान रखते थे. मगर ये सब करके बहुत अच्छा लगता था. ये बिल्कुल एडवेंचर की तरह ही था.

जब मैं जवान होने लगी, तो मम्मी, बुआजी, मामी सब बड़ी लेडीज ने मुझे मेरे शरीर में होने वाले बदलाव (पीरियड्स) के बारे में कई बार समझाया था.

मेरे चूची के उभार मैंने हर दिन महसूस किए हैं. कब वो नींबू की तरह छोटे छोटे थे. फिर संतरे बने और अब तो 34 साइज के हो गए हैं.

मेरे साथ पढ़ने वाली फ्रेंड्स के चूचे और चूतड़ देख कर मैं अजीब सा महसूस करती थी कि वो भी अब जवान हो गई हैं.

अपनी चूत पर आने वाले हल्के बाल और उन छोटे छोटे से बालों में टॉयलेट करते हुए चुत को सहलाना, फिर उन बालों की सफाई करना. फिर वो बाल घने और काले हो गए. बहुत मन होता था कि ये सब किसी लड़के के साथ किया जाए.. पर कभी हिम्मत नहीं हुई.

कई बार हमने सुना होगा कि वो वहां सेक्स करते पकड़े गए, उनकी पिटाई हुई. शायद इसीलिए हम सबको, घर वाले अच्छे से रहना सिखाते थे. कहीं कुछ बदनामी ना हो जाए.

मैंने अपने ही घर में बड़े भाई को भाभी के साथ कमरे में घुसते देखा. कमरे के अन्दर क्या चल रहा होगा, मैं ये भी जानती थी.

पड़ोस की आंटी कई बार मम्मी के पास बैठ कर सेक्स की बातें करती थीं. तो मम्मी मुझे वहां से जाने के लिए बोल देती थीं.
पर मैं उनकी बातों को छुप कर सुनती थी.
आप में कई लड़कियां भी ऐसे ही सुनती रही होंगी.

मम्मी और आंटियां बहुत खुल कर एक दूसरे से सेक्स डिस्कस करती थीं और अपनी चुदाई के बारे में भी बताती थीं.

एक बार आंटी ने मम्मी को बताया कि रात में अंकल ने उन्हें घोड़ी बना कर उनकी गांड में लंड पेल दिया. उन्हें बहुत दर्द हुआ. पर अब वो सोच रही हैं कि आज रात अंकल से बोल कर गांड में ही लंड डलवाएंगी.

काल्पनिकता की बात अलग है. यहां तो कहानी में सब साले भाई, बहन, मां पापा, दीदी, बुआ, मामी, चाची, चाचा, मामा पता नहीं किस किस रिश्ते में चुदाई कर देते हैं. पर ऐसा सच में नहीं होता है. और ऐसा सोचने से प्रॉब्लम हो जाती है. क्योंकि हमारे संस्कार हमें ये सब करने की इजाजत नहीं देते. हमारे देश में संस्कारों का बहुत महत्व है और होना भी चाहिए.

पर सच तो ये है कि हम अपनी उम्र के हिसाब से अपने शरीर की जरूरत पूरी करने के चक्कर में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बनाते हैं और कभी कभी तो किसी दूर के रिश्ते जैसे भाभी जीजा कजिन से भी चुदाई कर लेते हैं.

अब 2020 में तो बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड आम बात हो गई है. शादी से पहले ही लड़के लड़कियां अपनी प्यास बुझाते हैं. स्कूल, कॉलेज, पार्क, बस, रेल, शादी जहां भी जाते हैं, बस नई दोस्त बनाने की कोशिश करते हैं. असलियत में हम एक दूसरे में सेक्स ढूंढते हैं.

पर मुझे मालूम है कि मैंने पहली बार सेक्स अपने पति से ही सुहागरात में किया था. हमारी शादी लव मैरिज तो नहीं, पर मैं अपने पति को शादी से पहले ही जानती थी. फिर उनकी जॉब आर्मी में लग गई और हमारी शादी हो गई.

शादी की तैयारी के समय मेरे मामा बुआ की बेटियां आई हुई थीं. वो सब शादीशुदा थीं और उनकी संतानें भी थे. उन सबको सेक्स का अच्छा एक्सपीरिएंस हो चुका था.

उन्होंने मुझे अपनी सुहागरात की कहानी सुनाई. कैसे उन्होंने अपनी चूत में पहला लंड लिया और उनके पति उन्हें किस किस पोजिशन में चोदते हैं. हम सबने इन बातों का बहुत मज़ा लिया और अपने पुराने सब सेक्सी खेल याद किए.

बुआ जी की बेटी ने बताया कि वो शादी से पहले उंगली डाल कर अपना पानी निकालती थी.
तो मामा की बेटी बोली कि तूने हमको नहीं सिखाया, नहीं तो हम सब साथ में ही मज़े लेते.

इस तरह हंसते खेलते मेरी शादी हो गई. पति आर्मी में जॉब करता है. उसका अच्छा खासा शरीर है.. बिल्कुल पहलवान की तरह.

पर हमारी सुहागरात की कहानी बिल्कुल अलग है. हम दोनों किस्मत से पहली बार सेक्स कर रहे थे और हम दोनों को ही ज्यादा नॉलेज नहीं थी. मेरे हसबैंड ने मेरी चूत को पहली ही बार बुरी तरह चोदा. मैं तो बहुत देर तक रोई और पूरी रात सो भी नहीं पाई थी. कमरे में कोई दवाई भी नहीं थी दर्द कम करने की.

फिर सुबह जब हमने दोबारा सेक्स किया. तब मुझे अच्छा लगा और हमने सुबह दो बार चुदाई की.

अब तो मैं हसबैंड के छुट्टी आने का वेट करती हूं और फिर हम दोनों दबा कर चुदाई करते हैं. एक दिन में 3-4 बार से कम में आत्मा को शान्ति ही नहीं मिलती है.

कभी कभी तो वीडियो कॉल करते हुए भी मज़े ले लेते हैं. पर अब भी जब सेक्स करती हूं, तो अपने पुराने समय की वो सब बातें याद आती हैं.

मेरी तरह आपने कई ऐसे खेल खेले होंगे, मुझे कमेंट करके जरूर बताएं. मुझे आप सबके खेल के बारे में जान कर अच्छा लगेगा कि आपने किस के साथ, कब ऐसे खेल खेले, जो सेक्स से जुड़े हुए थे.

ये कोई मेरी सेक्स कहानी नहीं थी, मगर इसमें जीवन का सच्चा सेक्स छिपा था.

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