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वो मेरी चूचियों को काटते हुए चोदने लगा

हैलो, मेरा नाम रिजवाना है। मेरी उम्र 40 साल है. मैं एक शादीशुदा औरत हूं. हमारी ज्वाइंट फैमिली थी और घर में मेरे और मेरे शौहर व बेटे के अलावा मेरा जेठ, जेठानी, उसकी बेटी और बेटा भी रहते थे.
मेरी शादी के बाद से ही मेरे शौहर ज्यादातर काम की वजह से बाहर ही रहते थे।

अब मैं आपको अपने बारे में बता दूं कि मेरा रंग गोरा है. मेरा साइज 38-32-36 का है.

बच्चा होने के बाद मेरे शौहर मुझे वो मजा नहीं दे रहे थे जो पहले दिया करते थे. अब उनको भी मेरी चूत में कम मजा आने लगा था. वो चुदाई भी कम करने लगे थे. मैं अब अक्सर प्यासी ही रहती थी.

वैसे भी मेरे शौहर ज्यादा समय तो काम के कारण बाहर ही रहते थे. जब घर में होते तब भी ज्यादा चुदाई नहीं करते थे.

जब मेरा मन चूत में उंगली करने का करता तो मैं अपने जेठ और जेठानी की चुदाई देखा करती थी. मैं उनकी चुदाई देखकर अपनी चूत में उंगली किया करती थी.

उनकी चुदाई देखने के लिए मैं देर रात तक जागा करती थी. मेरे शौहर के मुकाबले मेरे जेठ का लंड ज्यादा लम्बा और मोटा था और उसके शरीर में ताकत भी काफी ज्यादा थी।

कई बार मैंने अपने जेठ को पटाने की कोशिश भी की थी. उसकी बीवी यानि कि मेरी जेठानी उससे बहुत खुश रहती थी. इसलिए वो मेरी तरफ ज्यादा ध्यान भी नहीं देता था.

फिर ऐसे ही वक्त गुजरने लगा और हम दोनों के बच्चे बड़े होने लगे. मेरी चूत को मैं जैसे तैसे करके शांत करती रही. कभी गाजर मूली से काम चलाती तो कभी उंगली या बेलन से।

हमारी जवानी ढलने लगी और बच्चों में जवानी आने लगी.
मेरे जेठ का बेटा अब 19 साल का हो गया था. मेरा बेटा भी उसी की उम्र का हो गया था.

मेरी चूत की आग अभी भी वैसे ही जलती रहती थी.

मेरे जेठ की जवानी भी ढल गयी थी मगर अब घर में कई जवान बच्चे हो गये थे.

एक बार की बात है कि मेरी जेठानी उसके मायके में गयी हुई थी. उसकी बेटी भी साथ में गयी थी. जबकि उसका बेटा समर घर में ही था. वो मुझे चाची कहता था.
इधर मेरा बेटा अपने पिता के साथ ही कुछ दिन के लिए बाहर चला गया था.

मेरा जेठ सुबह जाता था और शाम को घर लौटता था. घर में मैं और समर ही रहते थे. मैं ही उसके लिए खाना बनाती थी. उसके कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं.

समर की आदत थी कि वो अक्सर वो जब नहाने के लिए जाता था तो तौलिया भूल जाता था. फिर वो अपनी अम्मी को आवाज लगाता था.

उस दिन भी ऐसा ही हुआ।
वो नहाने गया लेकिन तौलिया नहीं ले गया. उसकी अम्मी तो घर में थी नहीं तो उसने मुझे आवाज लगाई- चाची, मेरा तौलिया ला दो.

मैं उसका तौलिया लेकर गयी. उसने दरवाजा खोला और तौलिया ले लिया. उसने अपने लंड के सामने अपनी लोअर लगा रखी थी.
जैसे ही वो दरवाजा बंद करने लगा तो उसकी लोअर हाथ से छूटकर गिर गयी.

मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी तो वहीं ठहर गयी. उसका लंड बहुत ही लम्बा और मोटा था जो किसी खीरे की तरह उसकी जांघों के बीच में लटक रहा था.

मुझे वो लंड देखते ही ये सोचते देर न लगी कि इसका लंड तो इसके बाप से भी ज्यादा आगे निकल गया है.
मेरे जेठ का लंड भी बहुत मोटा-लम्बा था. मगर समर का लंड तो अभी से इतना लम्बा और मोटा हो गया था.

मैं वहीं पर ठिठक सी गयी और नजर वहां से हटी ही नहीं.
समर अपने लंड को तौलिया से ढकते हुए बोला- चाची जाइये. मैंने तौलिया ले लिया है.

उसने जब मेरा नाम लिया तो मुझे होश सा आया और मैं वहां से आ गयी.
मगर अब मेरी चूत में जबरदस्त खुजली होने लगी थी.

जेठानी का जवान बेटा घर में अकेला था. उसकी जवानी भी चुदाई के लिए तड़प रही होगी. उसको भी चूत चोदने की ललक मची होगी … क्यों न मैं अपनी चूत की प्यास उसी के लंड से ही बुझा लूं?

अब मेरे दिमाग में हर वक्त समर का लंड ही घूम रहा था. उसका मोटा लम्बा बैंगन जैसा लंड मैंने देख लिया था और मुझे अब किसी भी वक्त चैन नहीं था. मैं बस उसके लंड को अपनी चूत में चखना चाह रही थी.

अब मैंने समर को चेक करने का सोचा कि देखती हूं कि ये क्या सोचता है मेरे बारे में?

जब मैं नहाने के लिए गयी तो मैं जानबूझकर अपने कपड़े वहीं बाहर ही छोड़ गयी.

नहाने के बाद मैंने उसे आवाज लगाई.
फिर वो मेरे कपड़े लेकर आ गया.

मैंने उससे नये कपड़े ले लिये पर अपने उतारे हुए कपड़े उसे दे दिये, कहा कि वाशिंग मशीन में डाल दे.
मेरे पुराने पहने हुए कपड़ों में मेरी ब्रा और पैंटी भी थी.
मैंने जानबूझकर उसको वो पैंटी और ब्रा दी थी.

फिर मैंने उसके सामने दरवाजा बंद कर लिया मगर अंदर से लॉक नहीं किया.
मैं जाते हुए चुपके से उसको देखने लगी.

वो मेरी ब्रा और पैंटी को सूंघता हुआ जा रहा था और अपने लंड को सहला रहा था.
मुझे पता चल गया कि वो भी चूत के लिए प्यासा है. अब मेरा काम बहुत आसान था.

उस दिन तो मुझे फिर मौका नहीं मिला लेकिन उसने अपना मौका नहीं छोड़ा.
बाद में मैंने देखा कि मशीन में पड़ी उस पैंटी पर उसके लंड का माल लगा हुआ था और उसके लंड के माल की खुशबू भी आ रही थी उसमें से!

फिर अगले दिन मैंने वही किया.
मैं जानबूझकर अपने कपड़े भूल गयी. कुछ देर बाद मैंने दरवाजा खोल दिया. मैंने आधा दरवाजा खोला था ताकि उसको ये लगे कि दरवाजा अपने आप ही हल्का सा खुल गया है.
मैंने समर को मेरे कपड़े लाने के लिए कहा.

मैं अपनी गांड को उसकी ओर करके नहाने लगी. मैं जानती थी कि बाहर से वो मुझे देख सकता था. मैं नहाती रही और वो कुछ नहीं बोला.

फिर मैं अचानक से उसकी तरफ घूमी तो वो दूसरी ओर घूम गया और एकदम से बोला- चाची … ये … ये आपके कपड़े लीजिये.
मैंने दरवाजा ढालकर मुस्कराकर कपड़े उसके हाथ से ले लिये. मैंने उसको अपनी गांड के दर्शन करवा दिये थे और उसने वो पूरा नजारा लिया.

अगले दिन तकरीबन 10 बजे वो उठकर चाय पी रहा था। तब मैं उसके सामने झुक झुककर झाड़ू पौंछा लगा रही थी.
मैंने देखा कि वो घूर घूरकर मेरे चूचों को देख रहा था.

तो मैंने उससे कहा- समर, मुझे आजकल रात में डरावने सपने आते हैं. मैं अकेली हूं और डर जाती हूं. अपने पापा से बोलकर तुम आज मेरे रूम में ही सो जाना. नहीं तो मैं रातभर जागती रहूंगी.

वो बोला- ठीक है चाची. मैं सो जाऊंगा.
अब मेरा काम हो गया था. आज मैं किसी भी हाल में रात को उसका लंड अपनी चूत में लेने वाली थी.

फिर वो रात को शॉर्ट्स पहन कर मेरे रूम में आया.
वो पूछने लगा- मैं कहां सोऊंगा?
मैं बोली- मेरे बेड पर ही सो जाना. तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो. तुम्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए मेरे साथ एक ही बेड पर सोने में?

वो बोला- हां, बिल्कुल चाची, मुझे क्या तकलीफ हो सकती है. मैं सो जाऊंगा इसी बेड पर।

मैं कपड़े चेंज करने के लिए बाथरूम में चली गई.
मुझे पता था कि समर को लाल रंग बहुत अच्छा लगता है इसलिए मैंने लाल रंग की ब्रा-पैंटी और मैक्सी पहनी।

जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो वो मुझे देखता रह गया।

फिर मैं उसके पास जाकर बैठ गयी. वो टीवी देख रहा था. मैं भी टीवी देखने लगी.

मैं बीच बीच में उसके साथ बातें करने लगी. मैंने पूछा- समर कोई लड़की है तुम्हारी जिन्दगी में?
वो बोला- नहीं चाची, मेरी जिन्दगी में तो अभी कोई नहीं है.
ये कहते हुए भी उसकी नजर मेरे चूचों पर ही जा रही थी.

मैंने अपने चूचों को उसके सामने ही हाथों से एडजस्ट किया.
ऐसा करते ही उसने मेरे चूचों से नजर हटा ली.
मैं बोली- अरे शर्मा क्यों रहा है तू … अगर मन कर रहा है तो देख ले. मैं एक औरत हूं और तू एक जवान मर्द है … ये सब तो आम सी बात है.

वो शर्मा गया. फिर मैं उसके पास आकर बैठ गयी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगी.
मैं बोली- अगर तेरे दिल में कुछ बात है तो तू मुझसे बेझिझक कह सकता है. मैं किसी को नहीं कहूंगी. मुझे तू अपनी दोस्त ही मान ले.

इस पर भी वो कुछ नहीं बोला.
मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में लिये हुए ही अपना हाथ उसके शॉर्ट्स के ऊपर उसके लंड की जगह पर टिका दिया और मेरा हाथ ठीक उसके लंड पर जा टिका.

कुछ ही पलों के अंदर उसके लंड में आ रहा तनाव मुझे अपने हाथ पर महसूस होने लगा.
देखते ही देखते उसका लंड नीचे ही नीचे तन गया और मेरे हाथ पर दबाव बढ़ाने लगा.

उसकी सांसें तेज हो गयी थीं. वो अपने तनाव को रोक नहीं पा रहा था क्योंकि मेरी चूचियों की घाटी भी उसके सामने ही खुली हुई थी.
मैं बोली- तेरा मन कर रहा है ना?
वो कुछ नहीं बोल पा रहा था.

फिर मैंने उसका लंड अपने हाथ में उसके शॉर्ट्स के ऊपर से पकड़ लिया. उसका लंड हाथ में लेते ही मेरी चूत में तो खलबली मच गयी. इतना मोटा ताजा लंड था और वो भी एक 19 साल के जवान लड़के का।

मैं उसके लंड को सहलाने लगी और बोली- मुझे पता है तू मुझे चाहता है. तू शर्मा मत. कल मैंने तुझे मेरी पैंटी को सूँघते हुए देख लिया था.
उसने हैरानी से मेरी तरफ देखा और फिर मैं उसके करीब सरक गयी.

उसके दोनों हाथों को मैंने अपनी कमर पर लपेटा और उसकी गोद में जाकर उसके होंठों पर होंठों रखकर उसे किस करने लगी.
पहले तो उसने साथ नहीं दिया और शर्माता रहा.

फिर मैंने उसके हाथ अपने चूचों पर रखवा दिये और धीरे धीरे वो उनको दबाने लगा. अब उसके होंठ भी खुल गये और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे. वो मेरे पूरे बदन पर हाथ फिरा रहा था और मैंने उसके शॉर्ट्स में हाथ डालकर उसके लंड को पकड़ लिया था.

अब मैंने अपनी मैक्सी खोल दी. मैं उसके सामने लाल ब्रा पैंटी में थी.

वो मेरी चूचियों पर टूट पड़ा. नया नया जवान हुआ था और उससे इंतजार नहीं हो रहा था.

फिर उसने मेरी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाया. मेरी चूत को हाथ से सहलाया.
मेरी चूत पहले से ही गीली होना शुरू हो गयी थी.

फिर मैंने अपनी ब्रा उतार डाली. अब वो मेरे मम्मों को चूसने लगा बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह। बीच बीच में वो निप्पलों को काट भी लेता था।

तब हम दोनों पूरे नंगे हो गए। मैं उसका लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी।

वो बोला- मुंह में नहीं लोगी मेरी जान … मुंह में ले लो ना … एक बार इसको अपने मुंह की गर्मी दे दो. आज तक मैंने किसी के मुंह में लंड नहीं दिया है.

मैं बोली- ये तो है ही चूसने लायक. इसको कौन नहीं चूसना चाहेगी. ऐसा मोटा ताजा रसीला लंड बहुत ही कम मर्दों के पास होता है. तुम उन्हीं में से एक हो।

ये कहते ही मैं उसके लंड पर झुक गयी और उसके लंड को मुंह में पूरा भरकर चूसने लगी.
मैंने अपने शौहर का लंड बहुत चूसा था लेकिन कभी इतना बड़ा लंड मुंह में नहीं लिया था.

समर का लंड मेरे मुंह में समा भी नहीं रहा था. मैं उसे मुंह में लेने लगी. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
वो मेरे बाल पकड़ कर लंड को धकेलने लगा.
मैं पूरा लंड गले तक लेने की खुद ही कोशिश कर रही थी.

मगर समर को अभी भी चैन नहीं था; वो मेरे बालों को खींचते हुए पूरे लंड को अंदर धकेल देना चाहता जबकि उसका लंड पहले ही मेरे गले में जाकर फंसा हुआ था.

दम मिनट तक किसी तरह मैंने उसका लंड चूसा और मेरी हालत खराब हो गयी. फिर उसने मुझे जोर से धक्का देकर पटक लिया.

मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि जेठ के लंड से चुदाई का सपना आज उसका बेटा पूरा करेगा. मैं जानती थी कि समर आज मेरी चूत को फाड़कर रख देगा और मैं भी यही चाहती थी.

फिर उसने मेरी टांगों को पकड़ कर फैला दिया. उसने मेरी दोनों टांगों के बीच उसका मुंह डाला और मेरी चूत को बेतहाशा चूसने और चाटने लगा.

मेरे मुंह से एकदम से सीत्कार फूट पड़े- आह्ह … आह्ह … ओह्ह … समर … मेरे बच्चे … ओह्ह … यही तो चाहती थी मैं … आह्ह … हाह्ह … हाये … ओह्ह … स्स्स … आह्ह और जोर से चूस … आह्ह … मेरी चूत की प्यास मिटा दे … आह्ह … चोद दे … फाड़ दे … आह्ह।

उसके चाटने की वजह से मेरी चूत एकदम से धधक उठी. मैंने मुश्किल से कंट्रोल किया नहीं तो उस रात मैं समर को अपनी चूत में ही घुसा लेती.
मैं बोली- बस कर … अब चोद दे … अपने मोटे लंड से मेरी चूत फाड़ दे … चोद मुझे जल्दी.

वो बोला- हां चाची, मैं आपकी चूत का भोसड़ा कर दूंगा आज!
फिर उसने मुझे कुत्तिया की तरह खड़ी कर दिया और मेरी चूत पर उसका लंड सेट करने लगा।

लंड लगाकर उसने मेरी कमर से मुझे पकड़ लिया और एक जोर का धक्का दे मारा.
उसका लंड मेरी चूत में आधा जा घुसा.

मेरी तो बांछें खिल गयीं. इतने सालों के बाद कोई दमदार लंड चूत में गया था.

फिर उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया और मैंने अपनी चूत को पूरी तरह से ढीली छोड़ दिया ताकि उसका लंड जितना हो सके मेरी चूत में आ सके.
उसने दो तीन झटकों में पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया था.

उसका लंड मुझे मेरे पेट में चोट करता हुआ अलग से महसूस हो रहा था. मेरी चूत की दीवारें चरमरा गयी थीं लेकिन ऐसा सुकून मिल रहा था जो जन्नत में भी नसीब न हो.

चूत को केवल लंड चाहिए होता है. मेरी चूत को समर का लंड मिल गया था. लंड इतना दमदार था कि मेरी चूत से खुशी के आंसू गिरने लगे थे.
मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और वो पच पच की आवाज के साथ समर के लंड से चुद रही थी.

उसने दस मिनट तक मुझे कुतिया बनाकर चोदा.
फिर उसने मुझे बेड के नीचे धकेल दिया; मुझे दीवार के साथ ले गया और मेरी एक टांग उठाकर अपनी कमर पर रखवा ली और नीचे से अपना लंड मेरी चूत में चढ़ा दिया.

नीचे ही नीचे धक्के देते हुए वो मेरी चूत में लंड को नापने लगा. मेरी चूचियां उसके हर धक्के के साथ फुटबाल की तरह उछल जाती थीं.
मेरी चूत अंदर तक तृप्त हो रही थी.

फिर वो मेरी चूचियों को काटते हुए चोदने लगा.
अब मुझसे रुका न गया और मैं झर झर झरने की तरह कामरस की धारा बहाने लगी.
मेरी चूत का रस पच पच … होती चुदाई के साथ ही मेरी जांघों पर बह निकला.

अब समर ने मुझे बेड की ओर धक्का मारा और झुकाकर पीछे से मेरी चूत में लंड दे दिया.
वो पीछे से मुझे चोदने लगा. मेरा सिर बेड से टकराते हुए धम धम कर रहा था. मगर वो मुझे चोदे जा रहा था.

उसका लंड अब मुझे चूत में बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं दर्द से कराहने लगी थी.
फिर पांच मिनट तक किसी तरह मैंने उसको बर्दाश्त किया और वो भी मेरी चूत में झड़ता हुआ मेरे ऊपर लेट गया.

इस घमासान चुदाई के बाद मेरा अंग अंग समर को दुआ दे रहा था. ऐसी चुदाई न जाने कितने सालों के बाद हुई थी.
मैं तो समर की दीवानी हो गयी.

उसके बाद हम दोनों ऐसे ही नंगे लिपट कर सो गये.

तीन चार दिनों तक जब तक कि मेरा बेटा वापस न आ गया मैं अपने जेठ के बेटे से खूब चुदी.
हम दोनों ने खूब इंजॉय किया.

फिर सबके आने के बाद भी हम स्टोर रूम में चुदाई कर लेते थे.

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मेरी चूत की प्यास

सभी दोस्तो को मेरा हैलो। मेरा नाम ज्योति है. मैं अपनी ससुर बहू सेक्स स्टोरी बता रही हूँ. मजा लें.

मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं. घर पर सिर्फ मेरे पति, मैं, हमारा एक बच्चा और मेरे ससुर रहते हैं. हमारा घर दो बी.एच.के. का है जिसमें दो बेडरूम, एक हॉल, एक किचन है.

मेरे ससुर गवर्नमेंट जॉब पर हैं और उनकी उम्र पचपन के करीब है. मगर वो दिखने में 45 से ज्यादा के नहीं लगते हैं. अगर मैं अपने बारे में बात करूं तो मेरी शादी के समय मैं काफी स्लिम थी. मगर शादी और बच्चा होने के बाद मेरे शरीर में काफी बदलाव आ गये.

अब मेरा शरीर काफी फूल गया और मेरा फिगर 38-32-36 का हो गया. मेरे बाल मेरी कमर तक आते हैं. मेरी गांड काफी मस्त है और मेरे बूब्स का तो कहना ही क्या. मेरी ब्रा उनको संभाल नहीं पाती है.

जहां तक मेरी सेक्स लाइफ की बात है तो वो एकदम से नीरस हो चुकी थी. मेरे पति ने भी अब मेरे अंदर रूचि लेना करीब करीब बंद ही कर दिया था.

मगर मैं तो सेक्स के लिए हमेशा ही तैयार रहती थी. अपने पति से उम्मीद करती थी कि वो मेरी चूत को अपने लंड का स्पर्श देकर मेरी प्यास को शांत करेंगे लेकिन मेरी उम्मीद केवल एक उम्मीद ही बन कर रह गयी थी.

ऐसे में मैं आप लोगों से पूछना चाहती हूं कि मैं भला अपने आपको कब तक रोक कर रखती और कब तक अपने आप को शांत रख पाती?
मैंने अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए बहुत दिमाग दौड़ाया.

पड़ोसी का जवान लड़का, दूध वाला, गली का धोबी आदि सबके बारे में सोचा लेकिन कोई ऐसा मिल ही नहीं रहा था कि मेरी चूत को लंड का सुख दे सके. मैं काफी उदास और खिझी खिझी रहने लगी थी.

एक दिन मैं सुबह काम कर रही थी. मैं झाड़ू लगाती हुई अपने ससुर के कमरे में पहुंची तो वो उस वक्त अपने बेड पर सो रहे थे. उन्होंने रूम का दरवाजा खुला रखा हुआ था और मैंने उनको जगाना ठीक नहीं समझा. मैं नहीं चाहती थी कि उनकी नींद खराब हो.

मैंने देखा कि उन्होंने टांगों में कुछ नहीं पहना हुआ था. न धोती और न कोई पजामा. केवल अपने अंडरवियर को पहने हुए सो रहे थे. उनके अंडरवियर के फूले हुए भाग ने मेरा ध्यान खींच लिया.

उनका लिंग उनके ढीले कच्छे से एक ओर निकल कर बाहर झांक रहा था. मैंने गौर से उनके लिंग के अग्रभाग को देखा. उनका सुपारा गाजर के रंग का था. लिंग का रंग गहरा सांवला था. देखने में काफी रसीला लग रहा था इसलिए नजर भी वहीं पर जैसे चिपक रही थी बार बार.

मेरी चूत में सरसरी सी दौड़ने लगी. मगर मैं कुछ कर नहीं सकती थी इसलिए झाड़ू लगा कर बाहर आ गयी. बहुत कोशिश की मैंने कि ससुर के खयाल को मन से निकाल दूं. मगर ससुर का मोटा लिंग जिसके दर्शन मैंने सुबह सुबह किये थे उसके खयाल मन से नहीं निकल रहे थे.

बहुत सोच विचार के बाद आखिर मैं इसी निष्कर्ष पर पहुंची कि मेरी चूत की प्यास को ससुर के लंड से ही शांत करवाऊंगी.
अगले ही दिन से मैंने इसके लिए अपनी प्लानिंग भी शुरू कर दी.

अब मैं अपने ससुर के सामने अपने बदन की नुमाइश करने लगी थी. उनको अपनी कमर ज्यादा से ज्यादा दिखाने की कोशिश करती थी. मुझे नहीं पता कि वो ध्यान भी दे रहे थे या नहीं! लेकिन मैं बार बार उनके सामने जाती रहती थी.

भी तक मुझे ऐसा कोई सिग्नल ससुर की तरफ से नहीं मिला था जिससे मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे जिस्म में कुछ रूचि ले रहे हैं.

ये पैंतरा फेल होने के बाद मैंने सोचा कि उनको अपने क्लीवेज दिखाऊंगी. एक रोज जब मैं उनको दोपहर का खाना परोसने गयी तो मैंने पहले से ही अपने ब्लाउज का एक बटन खोल लिया. मैंने अपने बूब्स को हल्का सा बाहर कर लिया ताकि मेरी चूचियों की घाटी ससुर जी को आसानी से नजर आ जाये.

जब मैं सामने से खाना परोस रही थी तो मैंने घूँघट डाल लिया था. मैं सामने झुक कर खाना डालने लगी तो देखा कि उनकी नजर मेरी चूचियों की घाटी में झांक रही थी. जब तक मैं वापस सीधी न हो गयी तब तक वो मेरी चूचियों को ताड़ते रहे.

फिर दोबारा जब खाना दिया तो मैं कुछ ज्यादा ही नीचे झुक गयी और मैंने ससुर जी को अपनी चूचियों के दर्शन जी भर कर करवा दिये. अब वो मेरे जाल में फंस गये थे. तीर सही निशाने पर लगा था.

अब मैं कई बार दिन में उनसे जानबूझकर टकराने लगी ताकि उनके अंदर हवस के शोले भड़का सकूं.

एक एक करके दिन बीत रहे थे ससुर बहू सेक्स के लिए मेरी तड़प अब और तेज होती जा रही थी.

एक दिन मेरे पति मेरे बेटे को लेकर हमारी रिश्तेदारी में गये हुए थे. उस दिन घर पर मेरे ससुर जी और मैं अकेले थे.

उस दिन मैंने सोच लिया था कि आज की रात ससुर जी का लंड अपनी चूत में किसी भी तरह ले ही लूंगी. आज से ज्यादा अच्छा मौका ससुर बहू सेक्स का फिर नहीं मिलेगा.

एक बार ससुर को मेरी चूत की लत लग गयी तो फिर मेरे लिये अपनी चूत चुदवाने की राह बिल्कुल आसान हो जायेगी.

रात को मैंने ससुर जी को खाना दिया और फिर नहाने के लिए मैं बाथरूम में घुस गयी. मैंने अंदर जाकर अपने बालों को गीला किया. फिर साया पहन कर बाहर आ गयी. मैंने साया अपने बूब्स तक ऊंचा बांध रखा और नीचे घुटनों तक था.

अब मैं ससुर के आने का इंतजार कर रही थी. मैं जानती थी कि खाना खाने के बाद वो हाथ धोने के लिए इधर ही आयेंगे इसलिए मैं अपनी बारी का इंतजार करने लगी. मैंने सोच रखा था कि मुझे क्या करना है. मैं बाथरूम के दरवाजे को हल्का सा खोल कर देख रही थी.

जब वो मुझे आते हुए दिखाई दिये तो मैं बाथरूम से बाहर निकल कर दूसरी ओर घूम गयी. ससुर की ओर मेरी पीठ थी दरवाजे की ओर मेरा मुंह हो गया. जैसे ही वो करीब पहुंचे मैं घूम कर उनकी तरफ हो गयी और मेरी चूचियां उनकी छाती से टकरा गईं.

मैंने चौंकने का नाटक किया और वहां से घबरा कर भाग गयी. ससुर जी समझ नहीं पाये कि ये अचानक से क्या हो गया. मैं अपने रूम में छुपकर उनको देखने लगी. वो अभी भी उस घटना के बारे में सोच रहे थे.

फिर वो सोचते हुए ही हाथ धोकर वापस अपने रूम की ओर चले गये. अब मैंने दो पीस वाला एक जालीदार गाउन पहना और अपने बालों को संवार कर लिपस्टिक लगाई और 10.30 बजे के करीब उनके रूम की ओर चली. मुझे पता था कि वो इस समय तक सो जाते हैं.

मैं उनके रूम में पहुंची तो देखा कि वो सामने बेड पर सो रहे थे. उनकी टांगें फैली हुई थीं और उनके कच्छे में उनका नागराज तना हुआ था. शायद मेरे साथ हुई घटना के बारे में सोचकर ही तन रहा था. सपने में वो शायद मुझे ही चोद रहे होंगे.

अब मेरे पास अनुमान लगाने का समय नहीं था. मेरी चूत की आग अब मुझे खुद ही पहल करने के लिए आगे धकेल रही थी. मैं चुपचाप जाकर बेड पर बैठ गयी.

मैंने देखा कि उनके लिंग में झटके लग रहे थे. तड़पता लिंग देख कर ही मेरी चूत में पानी रिसना शुरू हो गया.

मैंने धीरे से ससुर के कच्छे को नीचे खींच दिया. उनका मोटा लम्बा 8 इंची लम्बाई वाला सांवला लिंग मेरे सामने तन कर खड़ा था. देखते ही मेरी हवस भभक गयी. मैंने उनके लिंग को हाथ में पकड़ा तो पूरे बदन में करंट दौड़ने लगा.

उनके लिंग को पकड़ कर मैंने दबा कर देखा. मेरे ससुर का लंड इस उम्र में भी इतना दमदार होगा मैंने इसका अंदाजा भी नहीं लगाया था. लिंग की शाफ्ट इतनी टाइट थी कि लग रहा था जैसे मैंने किसी रॉड को पकड़ रखा है.

ससुर के लंड के गहरे गुलाबी सुपारे से कामरस की एक बूंद अब बाहर निकल कर उनके मूतने वाले छेद पर आकर बैठ गयी थी.
मैंने नीचे झुक कर अपनी जीभ निकाली और उस बूंद को अपनी जीभ से चाट लिया.

उनका कामरस मुंह लगा तो मैं पागल हो गयी. मैंने अगले ही पल उनके लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

ससुर जी की टांगें अब हरकत में आ गयीं और पहले से ज्यादा फैल गयीं. कुछ पल तो मैं उनके लिंग को चूसती रही और फिर उनके हाथ मेरे सिर पर आ गये.

वो मेरे सिर को अपने लिंग पर दबाने लगे. ससुर का लंड मेरे गले में उतरने लगा. बहुत मजा आ रहा था. उनके चेहरे को देख कर नहीं लग रहा था कि वो जाग चुके हैं इसलिए मैं बेधड़क उनके लिंग को चूस रही थी.

फिर एकदम से उन्होंने आंखें खोलीं और हड़बड़ा गये.
अपनी टांगों को पीछे खींचते हुए बोले- बहू तुम? ये क्या कर रही हो? ये गलत है.
मैंने उनके लिंग को हाथ में लेकर सहलाते हुए कहा- कुछ गलत नहीं है ससुर जी, आप मजा लो. बस जो हो रहा है होने दो.

मैंने सोचा अभी लोहा गर्म है, जैसे चाहूं मोड़ सकती हूं. मैंने तुरंत अपने गाउन को नीचे कर दिया और उनके घुटनों के बीच में आकर बैठ गयी. मैंने उनके हाथों को अपनी चूचियों पर रखवा दिया और अपने ही हाथों से दबवाने लगी.

कुछ देर तो वो सोचते रहे कि क्या करें, आगे बढें या पीछे हट जायें? मगर कब तक खुद को रोक कर रखते? उनके लिंग में लग रहे लगातार झटके उनको आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहे थे.

फिर उन्होंने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. मैं समझ गयी कि अब ससुर का लिंग मेरी चूत की सवारी करने के लिए तैयार है.
वो जोर से मेरी चूचियों को भींचते हुए बोले- चल आज मैं तुझे बताता हूं कि मर्द को छेड़ने का अंजाम क्या होता है, आज तेरी शरारत की सजा मैं तुझे जरूर दूंगा.

मैं बोली- मैं तो कब से तैयार हूं बाबूजी, आप जो चाहे सजा दे लो. आपकी सजा में ही मजा है.

फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया. फिर अपनी कमीज उठाई और मेरे दोनों हाथ बेड पर बांध दिये.

वो मेरे बगल में लेटे और मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे. फिर मेरी चूचियों को दबाने और मसलने लगे. फिर मेरी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगे. एक को चूसने के बाद दूसरी को मुंह में भर लिया और पहली को दबाने लगे.

इतने में ही मेरी चूत बिल्कुल गीली हो गयी थी. अब वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगे और नीचे की ओर मेरे पेट को चूमते हुए बढ़ने लगे. मेरी नाभि को चूम कर मेरी चूत की ओर बढ़ रहे थे. मेरी चूत में आग लगी हुई थी.

जैसे ही ससुर ने मेरी चूत पर अपने होंठ रखे तो मेरी चूत की आग और भड़क गयी. मैंने उनके सिर को अपनी चूत में दबा लिया और जोर जोर से अपनी चूत को उनके मुंह पर रगड़ने लगी. मेरी चूत की प्यास को देख कर वो मेरी चूत में जीभ से चोदने लगे और मैं पागल होने लगी.

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैं बोली- बस ससुर जी … आह्ह … अब मेरी चूत में अपना नागराज डाल दो. मैं अब और नहीं रुक सकती हूं. मेरी चूत की चुदाई कर दो बाबूजी, नहीं तो मैं मर जाऊंगी. आपके लंड के बिना मैं मर जाऊंगी बाबूजी, जल्दी से मेरी चूत को चोद दो … आह्ह … जल्दी।

वो उठे और अपना लंड मेरी मुनिया पर रगड़ने लगे.
मैं बोली- बाबूजी जल्दी करो, ये खेलने का समय नहीं है, मैं चुदना चाहती हूं.
वो बोले- हां मेरी रंडी बहू, रुक तेरी चूत की प्यास आज मैं अच्छे से बुझा दूंगा. अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा.

उन्होंने मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक जोर का झटका दे मारा. मेरी चूत की हालत पहले ही पानी पानी हो रही थी. बाबूजी का लंड भी चुदाई के लिए गीला होकर बिल्कुल तैयार था. जैसे ही झटका मारा उनके 8 इंची लंड का मोटा सुपारा मेरी चूत में फंस गया.

मेरी चीख निकल गयी.
पति का लंड इतना मोटा नहीं था और बहुत दिनों से मेरी चुदाई भी नहीं हो पा रही थी. इसलिए बाबूजी का मोटा लंड मैं झेल नहीं पायी और चिल्लाने लगी.
उन्होंने तभी एक और झटका मारा और पूरा लंड मेरी चूत में उतर गया.

बाबूजी ने मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी चूत में हल्के हल्के लंड को चलाना शुरू कर दिया.

अब धीरे धीरे मुझे भी लंड लेकर मजा आने लगा.
मैंने बाबूजी का साथ देना शुरू किया और अब ससुर बहू दोनों ही एक दूसरे से नंगे लिपटे हुए एक दूसरे को चूमते हुए सेक्स का मजा देने और लेने लगे.

अब मेरे मुंह से भी सिसकारियां निकल रही थीं. अब उनकी स्पीड धीरे धीरे बढ़ने लगी. जोर जोर से झटके लगाते हुए वो मेरी चूत की ठुकाई करने लगे और मुझे ससुर के लंड से चुद कर पूरा मजा आने लगा.

मैंने अब आनंद के मारे उनके होंठों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया. उनका लंड मेरी चूत में चोद चोद कर मेरी चूत की खुजली मिटा रहा था और मैं उनकी पीठ को नोंचने लगी थी. मेरी चूत में लंड से जो मजा मिल रहा था उसके मारे मेरी आंखें भारी होने लगी थी.

बाबूजी के चोदने की स्पीड अब और तेज होती जा रही थी. मैंने अब अपने दोनों पैरों को हवा में उठा लिया. बाबूजी का लंड अब और गहराई तक मेरी चूत को ठोकने लगा. पूरे रूम में फच फच की आवाज होने लगी.

मेरी चूत में एक तूफान सा उठा हुआ था. अब मैं झड़ने के करीब पहुंच रही थी.
वो बोले- मेरा पानी भी निकलने वाला है.

फिर वो मेरे मुंह पर हाथ रख कर मुझे जोर जोर से पेलने लगे. बीस-पच्चीस झटकों के बाद बाबूजी के लंड और मेरी चूत ने एक साथ पानी छोड़ दिया. हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर झड़ने लगे. दोनों के बदन में झटके लग रहे थे.

उसके बाद बाबूजी मेरे ऊपर गिर गये. हम दोनों शांत हो गये थे. मैं भी शांत हो गयी थी और बाबूजी मेरी चूचियों में मुंह देकर लेटे हुए थे. कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे. उसके बाद वो उठे और बाथरूम में चले गये.

मैं भी उठने लगी तो मुझसे चला भी नहीं गया. पहली बार जिन्दगी में इतनी जबरदस्त चुदाई हुई थी.

मैं कराहने लगी तो वो नंगे ही बाहर आये. उनका लंड उनकी जांघों के बीच में इधर उधर झूल रहा था. मन कर रहा था एक बार फिर से उनके लंड को मुंह में ले लूं.

फिर वो मेरे पास आये और मुझे सहारा देने लगे. वो मेरे साथ बाथरूम में गये और फिर मुझे सहारा देकर बाहर ले आये. हम दोनों फिर से बेड पर लेट गये.

मैं अपने ससुर की बांहों में थी. वो मेरी चूत में उंगली देकर लेट गये और मैंने उनके लंड को हाथ में भर लिया. मैं बहुत थक गयी थी. मुझे कब नींद आई मुझे कुछ पता नहीं चला. उसके बाद सुबह ही मेरी आंख खुली.

सुबह मैं बेड में बाबूजी के साथ नंगी पड़ी हुई थी. वो उठे और फिर मेरे लिये चाय बना कर ले आये.
मैंने बेड में चाय पी और फिर वो बोले कि उठ कर फ्रश हो जाओ.

उस दिन के बाद उनके और मेरे बीच में सेक्स संबंध स्थापित हो गये. उन्होंने बोल दिया था कि जब भी उनकी जरूरत हो तो मैं उनको बुला लिया करूं. उस दिन के बाद से जब भी मेरा मन हुआ मैं अपने ससुर बहू सेक्स से अपनी चूत की प्यास को बुझवाने लगी. मुझे घर में एक दमदार लंड मिल गया था.

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मेरी गीली चूत

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम अक़्सा है और मैं महाराष्ट्र की रहने वाली हूँ. यह मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स स्टोरी हिंदी में है. मैं इस वक़्त 21 साल की हूँ और मेरी शादी अभी हाल ही में हो गयी है. मेरा फिगर 36-26-36 का है और मैं काफी गोरी भी हूँ.

ये बात तब की है, जब मैं पढ़ती थी. मेरे घर में मम्मी पापा, बड़ी बहन और बड़ा भाई है. पर ये कहानी मेरे चचेरे भाई शिजू की है. वो मुझसे 3 साल बड़ा है और मेरे ही साथ पढ़ता था. पढ़ने के बाद हम साथ में घर वापस आते. हम दोनों घर पर ही खेलते थे.

मेरा घर काफी बड़ा है और मैं शुरू से ही लड़कों के साथ खेलती आई हूँ. जब सब लोग एक जगह जमा हो जाते, तो हम लोग छुपन छुपाई खेलते थे. उसमें शिजू के अलावा मेरी एक सहेली नाज़ भी थी. कुछ और लड़के भी हमारे खेल में शामिल होते थे. किसी एक की बारी छिप हुए बाकी को ढूँढने की आती थी और बाकी सब लोग छुप जाते थे.

शिजू हमेशा मेरे पास ही छिपता था और छिपने के बाद वो मेरे साथ मेरे दूध दबाना … मुझे उल्टा लिटाना, मेरे ऊपर चढ़ जाना. मेरी टांगें फैलाकर सलवार के ऊपर से खुद को घिसना … उसका हमेशा का काम था.

उसके इन सब कामों में मुझे भी बहुत मज़ा आता था, इसीलिए मैं उसे मना भी नहीं करती थी.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त भी मेरे मम्मे बाकी लड़कियों से काफी बड़े थे. जिनको शिजू दबाता ही रहता था.

मेरा कुछ न बोलना, उसकी हिम्मत बढ़ने का बहुत बड़ा कारण था. वो मुझे नीचे लिटाकर मेरी सलवार निकालकर मेरी चूत को चाटने भी लगा था. इसमें तो मुझे और भी सुकून मिलता था.

कई दिन तक चूत चाटने के बाद अब वो मुझे भी अपना लौड़ा चूसने के लिए कहने लगा था. पहले पहल तो मैंने मना किया, पर बाद में कुछ दिन बाद मैं भी उसका लंड चूसने लगी. हम दोनों खुद ब खुद सिस्टी नाइन का पोज सीख गए थे. शायद ये कुदरत ही सब सिखा देती है.

मैं उसके लंड की तरफ अपना मुँह कर देती और वो मेरी चुत पर अपना मुँह लगा कर जीभ से मेरी चुत को मस्ती से खूब चाटता. मेरी चूत को काफी देर देर तक चाटने के बाद उसने मुझे इससे आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया था.

जब उसकी जीभ मेरी चुत को गरम कर देती थी, तो मुझे खुद उसके लंड की जरूरत होने लगती और मैं सीधे होकर उसका लंड पकड़ने लगती.

वो मेरी सलवार को मेरी टांगों से पूरी निकालकर अलग कर देता और मेरी चूत में अपना लंड चुभाने लगता. मुझे उसके लंड से एक अलग सी तकलीफ होती, लेकिन उस टाइम मैंने उसे कभी पूरा लंड अपनी चुत के अन्दर डालने नहीं दिया.

सब कुछ ऐसे ही चलता रहा. वो मुझे एक औरत की तरह दबाता और मसलता रहा. मेरे सगे भी ने मेरे साथ फर्स्ट टाइम सेक्स … आधा अधूरा ही सही करके मेरी वासना की आग भड़कायी.

एक दिन हम ऐसे ही पलंग के नीचे छुपे थे, तब एक असलम नाम के लड़के ने ये सब देख लिया, वो इस समय राज दे रहा था, मतलब इस समय उसकी बारी सभी छिपे हुए को खोजने की थी. जब असलम ने हमको देखा, उस वक़्त मेरी सलवार निकली हुई थी और शिजू मेरी चूत चाट रहा था.

उसे देखकर मैं डर गई और खुद को छिपाने की कोशिश करने लगी. वो मेरे पास आकर मेरे मम्मों को दबाने लगा. शिजू ने भी उससे कुछ नहीं कहा. एक तरह से वे दोनों मेरे साथ मजा लेने लगे थे.

मैं भी चुप होकर उन दोनों से अपने मम्मों को मिंजवाती रही. उन दोनों ने मेरा कोई विरोध नहीं देखा, तो वे दोनों खुल कर मुझे ऐसे ही दबाते और मसलते रहे. अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. एक तरह से ये हो गया था कि अब मैं उन दोनों के लिए एक जुगाड़ बन गई थी.

मुझे भी चूंकि मजा आने लगा था, तो मैंने भी कुछ कहना ठीक नहीं समझा. अब हम तीनों हमेशा साथ में छुप जाते और वो दोनों मुझे पागलों की तरह मसलते दबाते रहते.

ऐसा कुछ टाइम तक चला. इस बीच उन दोनों ने मेरी चुत में लंड पेलने की कोशिश भी की, मगर वो मैंने नहीं होने दिया.

फिर मैं गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आ गयी. नानी के घर पर मेरी बहुत सारी सहेलियां थीं.

हम सब नानी के घर के पीछे के खेत में खेलते थे. हमारे बीच में सिर्फ एक लड़का अरबाज था और बाकी बहुत सारी लड़कियां थीं. वहां पर हम आपा बाजी वाला खेल खेलते थे. अरबाज मेरा या कभी मेरी सहेली का दूल्हा बनता और उसके साथ सोना और उसके लंड को छूना … बस इतना ही चलता रहा.

फिर एक दिन मैं खेत में खेलने के लिए गयी, तब वहां पर एक भाईजान थे. उनका नाम मोहसिन था. मोहसिन भाई मुझे हमेशा चिढ़ाया और छेड़ा करते थे. वो उसी एरिया में रहते थे.

एक दिन मैं उनके पास गई, वो एक झाड़ से टिक कर बैठे थे. उन्होंने कुछ देर बैठने के बाद मुझे अपनी गोदी में बैठने के लिए कहा … मैं झट से बैठ गयी. वो मुझे सहलाते हुए प्यार करने लगे. फिर वो मुझसे आगे पीछे होने के लिए कह रहे थे … तो मैं होने लगी. इसमें एक मस्त रगड़ हो रही थी. जिससे मुझे भी मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला. भाई का लंड कुछ 6 या 7 इंच लंबा रहा होगा. मैं लंड देखने लगी तो उन्होंने मुझे हाथ में लंड पकड़ा दिया. मुझे लंड सहलाने मजा आता था, तो मैं उनके लंड को सहलाने लगी. भाई का लंड खड़ा हो गया.

अब उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी और मुझे लिटा दिया. फिर भाई ने अपनी टांगें सीधी की और मुझे अपने मुँह की तरफ मुँह करके अपने ऊपर बिठा लिया. इससे मेरी नंगी चूत उनके लंड से टकराने लगी. मुझे गर्मी चढ़ने लगी.

भाई भी अपने नंगे लंड के ऊपर मेरी चुत लगाने लगे. इस पोजीशन में मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था. मैं खुद अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए अपनी चुत को जोर जोर से भाई के लंड पर घिसती गयी.

नीचे लंड चुत की घिसाई चल रही थी और ऊपर भाई मुझे चूम रहे थे. मैंने भी उनके मुँह को चूमा, तो भाई ने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिया. वो मुझे किस करने लगे.

मेरे होंठों को भाई के होंठों का स्वाद मिला तो मैं मदमस्त हो गई और मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया.

अब भाई मेरी चुत पर लंड रगड़ रहे थे, मेरे होंठों को मस्ती से चूस रहे थे और अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहे थे. मैं एकदम से चुदासी हो गई थी.

इतने प्यार से अब तक मुझे किसी ने गरम नहीं किया था. साथ के लौंडे तो अब तक मेरी चूचियों या मेरे चूतड़ों का भरता ही बनाते रहे थे. मैं आज खुद को भुला चुकी थी और भाई के साथ मस्ती करने में सब कुछ बिसरा चुकी थी.

कुछ देर बाद उन्होंने मेरे चूतड़ों को पकड़ कर मुझे जोर जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

इससे मेरी चुत एकदम से भट्टी सी तपने लगी थी. मैं सोच रही थी कि आज यदि भाई मेरी चुत में लंड पेलेंगे, तो मैं लंड अन्दर ले ही लूंगी. फर्स्ट टाइम सेक्स का मजा लूंगी.

मगर ऐसा नहीं हुआ … मेरी चुत से लंड की रगड़ से कुछ ही देर बाद उनके लंड से कुछ सफेद सा रस निकल गया. वो पूरा चीकट सा रस उनके पैरों पर … और मेरी चुत की हल्की हल्की झांटों में लग गया था.

भाई के लंड से पानी निकलते ही वो एकदम से थक से गए और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगे. मैं भी उनकी छाती से चिपक कर मजा लेने लगी.

फिर कुछ पल बाद वो उठने को हुए, तो मैं भी उठ गई और मैंने अपनी सलवार पहन ली. कपड़े ठीक करके मैंने भाई को देखा और मुस्कुरा कर घर चली गयी.

फिर एक दिन मैं अपने मुँह बोले मामू के घर गयी. उनका घर नानी के घर से कुछ थोड़ा दूर ही था. मैं वहां पर गई तो उनके घर पर कोई नहीं था.

मेरे ये मामू कुछ 23 या 24 साल के थे. मैं उनके घर खेल रही थी. वो अपने पलंग पर लेटे हुए थे. तभी उन्हें पता नहीं क्या हुआ … उन्होंने मुझे पास बुलाया और अपने ऊपर बिठा लिया. मैं उस वक़्त ठीक उनके लंड के ऊपर बैठी थी. वो मुझे आगे पीछे करने लगे. न उन्होंने अपने कपड़े उतारे थे … न मेरे, बस ऐसे ही कुछ देर अपने लंड पर मुझे हिलाते रहे.

मेरी चूचियां उनको मस्त कर रही थीं. मुझे भी उनका लंड अपनी चुत में गड़ता सा महसूस हो नरहा था. मैं खिलखिलाते हुए मामू के लंड पर कूद रही थी.

उन्होंने मुझसे पूछा- मजा आ रहा है?
मैं हां कहा.
तो बोले- अभी और मजा आएगा.

ये कह कर अपने पलंग पर ही मामू ने मुझे अपने नीचे उल्टा लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गए. फिर मामू ने मेरी गांड के ऊपर अपना लंड पेंट के ऊपर से रगड़ना चालू कर दिया. कुछ देर लंड घिसने के बाद वो मेरे ऊपर अपना पूरा वजन डाल कर थम से गए. शायद मामू झड़ गए थे.

जब मुझे उनके वजन से तकलीफ हुई, तो मैं कोशिश करके मामू के नीचे से निकली और वहां से घर चली गयी.

इस तरह कई लोगों ने मुझे अपने लंड के नीचे दबाया था. मुझे वो सब ठीक तरह से याद भी नहीं है कि किस किस ने मेरे जिस्म के साथ ऊपर ऊपर से खेला था.

फिर मैं एग्जाम के बाद अपनी खाला के घर गयी. वहां पर मुझे एक लड़का समीर दिखा, जो कि बहुत ही खूबसूरत था. वो मुझसे उम्र में 4-5 साल बड़ा था. पर मैं भी भरी पूरी छमिया बन चुकी थी, ये सब मेरे जिस्म के साथ हुई छेड़छाड़ के कारण हुआ था.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त मेरी बॉडी किसी भी तरह से समीर के जिस्म के लिए कमसिन लड़की जैसी नहीं थी. उस वक़्त मेरे बूब्स 32 के हो गए थे और गांड कुछ 34 की थी. वो लड़का समीर भी जैसे मेरा दीवाना हो गया था.

फिर ऐसे ही कुछ दिन एक दूसरे को देखने के बाद उसने मुझे अपना नंबर दिया. मुझे भी समझ आ गया था कि समीर मुझे प्यार करना चाहता है.

अब चूंकि मुझे भी अपने जिस्म की आग सताने लगी थी और मैं अब किसी से भी अपने जिस्म को हाथ टच नहीं करने देती थी. तो मेरे जिस्म में किसी मर्द के हाथ की जरूरत महसूस होने लगी थी.

मुझे समीर अपने लिए मस्त लड़का लगा था, तो मैं अपने घर जाने के बाद अपने घर के मोबाइल से उसे कॉल करने लगी.
हमारे बीच इश्क शुरू हो गया था. कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा.

फिर उसने मुझसे मिलने की ज़िद की और मैंने उसे अपने गांव बुला लिया.

जिस दिन वो मेरे गांव आया, उस दिन मैंने कॉलेज की छुट्टी मार दी और उसके साथ चली गयी.

घूमते घूमते उसने गाड़ी एक खेत की तरफ ले ली और खेत के बीचों बीच एक छोटे से गड्डे जैसी खाई में हम दोनों चले गए. हम दोनों के जिस्म में जिस्म की आग लपलपा रही थी.

उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मैं बह गई. वो मेरे मम्मों को दबाने लगा और मैं मस्त होने लगी. आज बहुत दिन बाद किसी ने मेरे मम्मों को मसला था तो मेरे मम्मे एकदम से कड़क हो उठे.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उसने मेरा दुपट्टा नीचे बिछा दिया और उसके ऊपर मुझे लिटा दिया. मैं नीचे से पूरी गीली हो गयी थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

फिर उसने मेरी सलवार निकाली और खुद की पैंट निकाल दी. उसका लंड कुछ 6 इंच लंबा होगा और 3 इंच मोटा था. इतना मोटा लंड मैंने आज पहली बार देखा था. उसने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत पर लंड लगा कर अन्दर डालने की कोशिश करने लगा था.

मैं भी आज फर्स्ट टाइम सेक्स करती हुई चूत में लंड ले लेना चाहती थी. उसका लंड चूत में लेते समय मुझे एक मीठा सा दर्द हो रहा था. काफी कोशिशों के बाद भी उसका लंड चुत में अन्दर नहीं गया.

फिर उसने अपने लंड के टोपे पर थूक लगाया और मेरी चूत पर भी अपना थूक लगा कर लंड सैट कर दिया.
अभी मैं कुछ समझ पाती, समीर ने पूरी ताकत से झटका दे मारा.

उसका आधा लंड चूत के अन्दर चला गया और मैं मछली की तरह फड़फाड़ने लगी. मैं उसे अपने ऊपर से धक्का देकर हटाने लगी, पर उसने मेरी एक न सुनी … और जोर जोर से झटके मारने लगा. कुछ देर की चुदाई के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं बस उसके लंड के झटकों को सहने लगी.

फिर उसने मेरी चीख पुकार कम होते देखी, तो अब उसने मेरी टांगें पकड़ लीं और झटके पर झटके मारने लगा. कुछ देर बाद मुझे अपनी चुत में मजा आने लगा और मैंने अपनी टांगें हवा में उठा दीं.

कोई बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद समीर ने मेरे अन्दर ही अपना लंड झाड़ दिया. फर्स्ट टाइम सेक्स से मुझे बड़ा सुकून मिला. इस तरह से मैं समीर के लंड से अपनी चुत की सील तुड़वा बैठी.

फिर समीर ने मुझे बहुत दिनों तक चोदा और मैंने और उसने शादी कर ली.

समीर आज मेरा शौहर है और वो एक रंगीन किस्म का आदमी है. वो मुझे बहुत चोदता है. उसका लंड अभी 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा हो गया है. वो रोज़ मुझे 2 या 3 बार चोदता है. पर अब वो चाहता है कि हम कुछ अलग तरीके का सेक्स करें … जैसे अदला-बदली, थ्री-सम … या ग्रुप सेक्स. पर मैं उसके साथ चुदाई करते समय किसी और का नाम लूं … इसी में सुख ले लेती हूँ.

मैंने उसे अपने शुरू से जवानी तक के सारे सेक्स के किस्से बताए, वो सुनकर वो बहुत ही कामुक हो जाता है. फिर वो मेरे साथ भयंकर वाला सेक्स करता है.

वो चाहता है कि मैं किसी औऱ से चुदूं … पर अभी तक हमें कोई भरोसे का कोई कपल या आदमी नहीं मिला है. जब ऐसा होगा तब मैं आपको अपनी उस चुदाई का अनुभव एक सेक्स कहानी के माध्यम से लिखूंगी.

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मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं। यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें।

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.
अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.

कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!
मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?
वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.
फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.
वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.
वो बोला- जी. ठीक है.
कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?
वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.
मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.
फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.
वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.

अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.
वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.
मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.
वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?
वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.
मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.

आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.
मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.
वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.
मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.
वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.
मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.

उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.
उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.

उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.
वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.
मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

दोस्तो, ये थी मेरी अपनी रियल सेक्स स्टोरी. आपको यह सेक्सी लड़की की चुदाई स्टोरी पढ़ने में मजा आया होगा. मुझे जरूर बतायें. अगर आप लोगों ने सही रेस्पोन्स दिया तो मैं आगे भी आप लोगों के लिए अपनी आपबीती लेकर आती रहूंगी.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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मैं एक लंडखोर लड़की हूँ

आप सभी को मेरा नमस्कार. मैं अंजलि शाह हूँ. मैं अपने कॉलेज की एक दिलकश हसीना हूँ और मुझे चोदने के लिए लौंडों की लाइन लगी रहती है. मैं भी एक लंडखोर लड़की हूँ और मुझे एक ही लंड से चुदने में मजा नहीं आता है. इसलिए मैं ज्यादा दिन एक लंड से बंधी नहीं रहती हूँ.

मेरी सेक्स कहानी में चुत चुदाई का रस कुछ यूं है कि पिछले साल हमारे कॉलेज में दीवाली के अवसर पर बीस अक्टूबर को एक कार्यक्रम किया जा रहा था, जिसमें मुझे लहंगा चोली पहन कर एक आइटम डांस करना था.

मैंने 16 तारीख तक बहुत कोशिश की कि बना बनाया मिल जाए, पर नहीं मिला.

मैंने मॉम से कहा, तो मॉम ने कपड़ा लाकर दिया और कहा- कल मोहन भाई के पास जाकर नाप दे आना, वो दो दिन में सिल देगा.
मैंने मॉम से कहा- ठीक है.

मोहन भाई शहर का एक बड़ा मशहूर लेडीज टेलर था, मगर वो जरा टेढ़े मिजाज का टेलर था.

अगले दिन मैं डेढ़ बजे मोहन टेलर की दुकान पर गई. उसकी दुकान बड़ी थी. काफी कारीगर काम करते थे.

जब मैं गई तब दुकान पर लंच टाईम हुआ था, तो सब लोग जा रहे थे. मैंने उस समय एक शर्ट और जींस पहनी थी. मैंने उसको लहंगा चोली सिलने की बात कही.

इस पर मोहन भाई ने मुझे देखते हुए कहा- इन कपड़ों में लहंगा चोली का नाप नहीं होता.
मैंने कहा- मोहन भाई प्लीज. मॉम ने कहा था कि आप सिल दोगे.
उसने कहा- ठीक है … तुम अन्दर जाओ और ट्रायल रूम के बाहर वाले कमरे में बैठो … मैं वहीं आता हूं.

मैं अन्दर गई. उस रूम में एक लम्बा सोफ़ा पड़ा था. थोड़ी देर में मैंने शटर गिरने की आवाज सुनी और अगले ही पल मोहन भाई कमरे में आ गया.

मोहन भाई 30-32 साल का रहा होगा. उसने कहा- ये सब मैं तेरी मां की वजह से कर रहा हूं … वरना वापस भेज देता.
मैंने राहत की सांस ली और शुक्रिया की नजरों से टेलर मास्टर को देखा.

उसने पूछा- कैसा लहंगा चोली सिलवाना है?
मैंने कहा- बैक लैस चोली डोरी के साथ और लहंगा कूल्हों से टाइट और नीचे घेरा वाला सिलवाना है.
उसने कहा- बैकलैस में ब्रा नहीं पहन सकते और इन कपड़ों में नाप नहीं हो सकता.
मैंने कहा- प्लीज मोहन भाई कुछ करो … मुझे 20 तारीख को पहनना है.

उसने कहा- ठीक है … अपनी शर्ट उतारो.
मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- क्या क्या … नाप लेना है … शर्ट में नाप नहीं लिया जा सकता.

मैं कुछ सोचने लगी.
तो उसने कड़क आवाज में कहा- दो दिन में चाहिये या नहीं!
मैंने कहा- हां हां दो दिन में ही चाहिए … ठीक है, मैं शर्ट उतारती हूँ.

ये कह कर मैंने शर्ट उतार दी. अन्दर ब्रा थी.

उसने मेरे दूध देखते हुए पूछा- बैकलैस चोली चाहिए न!
मैंने कहा- हां.
तो उसने कहा- ब्रा भी उतारो.
मैंने ‘नहीं..’ कहा … तो उसने गुस्से से कहा- भग बहन की लौड़ी यहां से … बड़ी आई … मोहन भाई को चूतिया समझ रही है.

उसकी इस बात से मैं डर गई और मैंने जल्दी से ब्रा उतार दी.

वो मेरे संतरों को भेड़िये की नजरों से देखने लगा. फिर उसने मेरे मम्मों को पकड़ा और इंची टेप से नाप लेने लगा. उसने कहा- तेरे दूध छोटे हैं … चोली में पैड लगेंगे, पूरी गोलाई हाथ से नापनी पड़ेगी.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने मेरे उल्टे हाथ की तरफ की चुची के चारों और इंची टेप लगाया … और चूची को नापा. फिर इसी तरह से सीधे हाथ की चुची की नाप ली.

उसने कहा- ब्रा लैस चोली में चूचुक खड़े होते हैं … वर्ना फिटिंग सही नहीं आती.
मेरे दोनों चूचुक तो दबे से थे.
उसने कहा- इन्हें रगड़ कर खड़ा करो.

अब तक मुझे इस खेल में सनसनी होने लगी थी. मुझे मोहन से चुदने की इच्छा होने लगी थी.

मेरे रगड़ने के बाद भी वो खड़े नहीं हुए. तो उसने मेरे चुची को कसके पकड़ा और दबा दिया. मेरे निप्पल फिर भी खड़े नहीं हुए.

वो मेरे पास आया और मेरे एक चूचुक को मुँह में लेकर चूसने लगा … मुझे बेहद चुदास सी फील हुई और मेरे चूचुक खड़े हो गए. हालांकि मैं मोहन की इस हरकत से एकदम से शॉक थी, पर न जाने क्यों मैंने उससे कुछ बोला नहीं.

फिर उसने कहा- अब तेरे लहंगे का नाप लेना है … जींस उतारो.
मैंने मना किया.
उसने कहा- तेरी मां की चूत … उतार साली, नहीं तो ऐसे ही भगा दूंगा.
मैंने जल्दी से जींस उतार दी.

जींस उतरते ही मैं केवल काले रंग की कच्छी में मोहन के सामने खड़ी थी.

उसने मेरा नाप लेना शुरू किया.

उसने कहा- तेरी गांड तो बहुत मोटी है.
मुझे बेहद सनसनी हो रही थी और मेरी चुत में रस आना शुरू हो गया था.

उसने मेरी कच्छी पर गीला निशान देखा और कहा- साली तेरी बुर तो पानी छोड़ रही है … देखूं तो सही.

ये कहते हुए उसने मेरी कच्छी नीचे खींच दी और अपना हाथ मेरी चूत पर डाल दिया.

मैं एकदम से गनगना उठी.

उसने मेरी चुत मसलते हुए कहा- बहन की लौड़ी … तू तो पका हुआ माल है.

ये कह कर उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया. चुत पर मर्द का मुँह लगते ही मैं तो सातवें आसमान पर पहुंच गई.

कुछ देर चुत चूसने के बाद वो खड़ा हुआ और मेरे एक चूचुक को मुँह में लेकर जोर से काटा.
मैंने उसे धक्का दे दिया.
उसने गुस्से में कहा- बहन की चूत, अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूं.

उसने अपना पजामा ढीला किया और उतार दिया. आठ इंच का काला लंड मेरे सामने हिनहिना रहा था. उसने मेरे बाल पकड़े और मुझे नीचे बिठाते हुए कहा- तेरी मां की चूत साली रंडी … चल मेरे लंड को मुँह में डाल.

मैंने टेलर मास्टर का लंड अपने मुँह में डाला और चूसने लगी. वो मस्ती से कराहें भरने लगा.
थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद उसने कहा- अब उधर चल सोफे पर साली बहन की लौड़ी … कुतिया बन जा.

मुझे भी अब चुदवाने की चुल्ल हो उठी थी. मैं जल्दी से उल्टी होकर कुतिया बन गई. उसने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और एक ही झटके में पूरा अन्दर तक पेल दिया.
मेरी चीख निकल गई. मैंने भी गाली बकना शुरू कर दी और उससे कहा- आह भैनचोद … मेरी चूत फाड़ दी मादरचोद … साले आराम के डाल.

उसने मेरे चूतड़ों पर दो चमाट खींच कर जड़ दिए और बोला- मां की लौड़ी … ऐसे ही लंड झेल.

उसने बेरहमी से लंड चुत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. वो बहुत तेज स्पीड से मुझे चोदने लगा. पांच मिनट में ही मेरी चुत से एक बार पानी निकल गया.

उसने मेरी चूत से लंड निकाला और आगे आकर मुँह में डाल दिया. वो लंड चुसवाते हुए मेरी गांड के छेद में उंगली करने लगा.

मैं उसका मोटा लंड चूसती रही. फिर उसने लंड मुँह से निकाला और पीछे आकर बहुत सारा थूक मेरी गांड के छेद पर थूक दिया. जब तक मैं सम्भलती, उसने एक ही झटके में मेरी गांड में लंड डाल दिया और गांड ठोकने लगा.

मैं कॉलेज में आगे पीछे दोनों तरफ से लंड ले चुकी थी, इसलिए मुझे चुत गांड मरवाने में कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन आठ इंच का मोटा लंड आज मैं पहली बार अपनी चुत गांड में ले रही थी. इससे मुझे दर्द होने लगा था.

साथ ही मेरी गांड कम चुदी होने की वजह से काफी टाइट थी, जिस वजह से मुझे काफी दर्द हो रहा था.

कुछ धक्कों के बाद मेरी गांड ने टेलर के मोटे लंड को झेल लिया था और अब मुझे गांड मराने में मजा आने लगा था. उसने मेरे दूध पकड़ कर मेरी गांड दबाकर चोदनी शुरू कर दी. कुछ ही देर में उसका सारा पानी मेरी गांड में ही निकल गया.

उसने अपना लंड गांड से निकाला और मेरे मुँह में देकर कहा- जल्दी से लंड साफ कर और कपड़े पहन ले.

मैंने लंड चूसा तो मुझे मोहन के माल का बड़ा मस्त स्वाद मिला. इसके बाद कपड़े पहनने के लिए अपनी ब्रा पैंटी उठाई, तो उसने कहा- अपनी ब्रा और कच्छी मुझको दे दे और भाग जा.

मैंने पूछा- लहंगा चोली कब दोगे?
उसने कहा- कल ट्रायल के लिए 12 बजे के करीब तेरे घर पर आऊंगा.
मैंने कहा- कल तो मैं कॉलेज जाऊंगी और कोई घर पर नहीं होगा.
उसने कहा- मां की लौड़ी कल कॉलेज मत जाना … वर्ना लहंगा चोली नहीं मिलेगा.

मैंने हां में सर हिला दिया और घर आ गई.

मोहन के मोटे लंड ने मेरी चुत और गांड को बड़ा सुकून दिया था. मैं अपनी चुदाई को याद करते हुए अपनी चुत मसल रही थी.

अगले दिन मैं कॉलेज नहीं गई क्योंकि मुझे पता था आज मोहन भाई ट्रायल के लिए आएगा. साथ ही मुझे ये भी पता था कि ट्रायल के बहाने वो मुझे चोदने के लिए भी आएगा.

मैं घर पर ज्यादा कपड़े नहीं पहनती हूं इसलिए मैंने बिना ब्रा के एक स्लीवलैस छोटा सा टॉप पहना था और छोटा सा लोअर, जो सिर्फ़ कूल्हे तक का था. घर में मैं कच्छी नहीं पहनती हूं.

मोहन भाई ने 12 बजे का टाईम दिया था. मॉम ऑफिस गई थीं और भाई बहन स्कूल में थे. मैं अकेली ही घर पर मोहन का इन्तजार कर रही थी.

तभी 11 बजे डोरबेल बजी. मैंने घड़ी देखी, तो अभी मोहन भाई के आने का टाइम नहीं हुआ था. मुझे लगा पता नहीं कौन आया होगा.

मैंने दरवाजा खोला, तो मोहन भाई ही आया था और उसके साथ एक 25-26 साल का युवक भी था.

मोहन भाई ने कहा- ये मेरा छोटा भाई चमन है. इसको फिटिंग के बारे में सिखाना था, इसलिए साथ ले आया.
उसने मुझे मेरा लहंगा चोली पकड़ाया और कहा- इसे पहन कर आओ और नीचे कुछ मत पहनना, वर्ना फिटिंग का पता नहीं चलेगा.

मैं अपने कमरे में गई और लहंगा चोली पहना. मैंने लहंगा तो पहन लिया, पर चोली की डोरी नहीं बंध सकी. मैं चोली पकड़े पकड़े बाहर आई और कहा- मोहन भाई, इसकी डोरी नहीं बंध रही है.

मोहन भाई ने चमन को डोरी बांधने को कहा और उसने आराम से बाँध दी.

मैंने कहा- मोहन भाई, फिटिंग ठीक नहीं लग रही.
उसने कहा- ऐसे पता नहीं चलेगा. कहीं फुल साइज़ आइना है क्या?
मैंने कहा- हां मेरे बेडरूम में है.
उसने कहा- चलो वहीं चलते हैं. तभी असली फिटिंग का पता चलेगा.
मैंने असली फिटिंग का मतलब समझते हुए कहा- ठीक है.

हम मेरे बेडरूम में आ गए. मोहन मेरे सामने खड़ा हो गया और कहा- आगे को झुको.

मैंने उसको देखा, तो उसने कहा- फिटिंग देखनी है.

मैं आगे झुक गई. उसने मेरे सामने आकर देखा, मेरी चुचियां बाहर आ रही थीं.

उसने गला 14 इंच का बनाया था.

उसने कहा- चोली तो ढीली लगती है.

मैं खड़ी होने लगी, तो उसने रोक दिया और चमन को बुलाया. चमन को सामने खड़ा करके कहा- देखो आगे से चोली ढीली होती है, तो पूरे चुचे साफ़ दिखते हैं.

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लंबे लंड लेने का बड़ा शौक

दोस्तो, मैं शिवानी I मेरे भाई का लंड आठ इंच का था. अपने भाई के लंड से कई बार चुदवा लेने से मेरी फिगर भी भरने लगी थी और मेरा जिस्म मस्त हो गया था.

कॉलेज में मेरी सहेलियां मुझे छेड़ने लगी थीं कि ऐसा क्या लेने लगी हो, जिससे तेरा जिस्म भरने लगा है.

इस पर मेरी एक सहेली मुझे छेड़ते हुए बोली- लगता है जलेबी शीरा पी गई.
उसकी बात मेरी समझ में नहीं आई मगर बाकी की सहेलियां जो कुछ चुदक्कड़ किस्म की थीं, हंसने लगीं.

मैंने उस सहेली से पूछा- जलेबी शीरा पी लेती है, तो इसमें हंसने की क्या बात है?
वो और जोर से हंसने लगी.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था.
तभी एक सहेली ने मुझसे कहा- तू बिल्कुल चूतियम सल्फेट है … अबे जलेबी शीरा पीने का मतलब भी नहीं समझती है.
मैंने उसकी तरफ देख कर कहा- अगर मैं समझ गई होती, तो पूछती ही क्यों … बता न जलेबी शीरा पीने से क्या मतलब होता है?
तभी एक दूसरी चुदक्कड़ सहेली ने मेरी चूची दबाई और कहा- आह मेरी जलेबी बाई … तूने किसके लंड का शीरा पी लिया … जो तेरे इतने कड़क मम्मे हो गए.

उसकी बात सुनते ही मुझे समझ आ गया कि कमीनी की जलेबी शीरा पीने की बात का क्या मतलब हुआ.

वैसे साली सही ही तो कह रही थी कि मेरी चुत ने भाई के लंड का शीरा पी लिया था इसलिए तो मेरी चूचियां भरने लगी थीं. चुदाई के वक्त मेरा भाई मेरी चूचियों को खूब चूसता है, जिस वजह से मेरे दूध फलने फूलने लगे थे.

मैं हंस दी और वहां से अपनी एक पक्की सहेली के साथ क्लास की तरफ बढ़ गई. मेरी इस सहेली का नाम तान्या था. वो कॉलेज में मेरी बेस्ट फ्रेंड है.

उसने मुझसे कहा- ये लड़कियाँ इतनी गंदी बातें करती हैं कि मेरी तो चुत में पानी ही आ जाता है.
मैंने उससे पूछा- तेरी चुत में पानी आ गया है … तो अब तू क्या करेगी?

वो मेरी तरफ देख कर हंसने लगी. मैंने हंस मत कुतिया … बता न कि चुत के पानी का क्या करेगी?
पहले तो वो बोली- क्या करूंगी, बाथरूम में जाकर उंगली करके पूरा शीरा निकाल लूंगी और सूसू करके वापस आ जाऊंगी.
मैंने उसकी चूची दबाते हुए कहा- कमीनी शीरा तो लंड से निकलता है … तेरी चुत से शीरा कैसे निकलेगा.

वो हंसने लगी और बातों ही बातों में उसने मुझे बताया- मैं भी शीरा ले लेती हूँ.
मैंने आंख मार कर उससे पूछा- तू किसका शीरा लेती है?
वो मेरी चूची दबाते हुए बोली- साली, अभी तू ही तो कह रही थी कि शीरा तो लंड से निकलता है, तो मैं भी लंड का शीरा ही लेती हूँ.
मैंने अपना सर पीटते हुए पूछा- अरी मूरख ये तो मालूम है कि लंड का शीरा लेती है … लेकिन किसके लंड का शीरा लेती है, ये तो बता?

पहले तो वो आनाकानी करने लगी. फिर मुझे कसम देते हुए बोली- किसी से कहना मत!
मैंने उसके सर पर हाथ रखा कि तू मेरी सबसे पक्की सहेली है, मैं किसी से नहीं कहूँगी. अब तू जल्दी बता कि किसका लंड लेती है?
उसने मुझे बताया- मैं अपने भाई का लंड लेती हूँ.

मैं उसकी बात सुनकर अवाक थी.

वो मेरी तरफ देख कर बोली- अब तू बता कि तू किसका शीरा लेती है?
मैंने भी दबी जुबान में बता दिया- मैं भी अपने भाई के लंड का शीरा लेती हूँ.

वो मेरी शक्ल देखने लगी. एक पल के लिए हम दोनों की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी. मगर अगले ही पल हम दोनों हंस पड़ी और एक दूसरी से लिपट गई. वो मुझे ऐसे चूमने लगी, जैसे हम दो रंडियां अपनी चुदाई की बात से खुश हो रही हों.

इस तरह हम दोनों ने ओपन होते ही एक दूसरे को सब बता दिया.

तान्या ने अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में ली हुई थी. उसने मुझे अपने भाई के लंड की फोटो दिखाते हुए कहा- ये मेरे भाई के लंड की फोटो है … तेरे भाई का लंड कैसा है?
मैं भी अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में रखे थी. मैंने भी उसको अपने भाई के लंड की पिक दिखाई.

मेरे भाई का आठ इंच का मोटा लंड देख कर तान्या बोली- वाओ तेरे भैया का लंड तो बड़ा मस्त है … मुझे भी इस लंड को अपनी चुत में लेना है … प्लीज़ तू कुछ जुगाड़ कर न!
मैंने उससे बोला- मैं भाई से बात करके बताती हूँ.

अब इधर मैं आपको थोड़ा तान्या के बारे में बता देती हूँ. तान्या का फिगर बड़े कमाल का है उसके फिगर का साइज़ 32-28-34 का था. वो एकदम दूध के जैसे गोरी थी और उसे लंबे लंबे लंड लेने का बड़ा शौक था. साथ ही वो गंदी गंदी बातें करने में मानो एक्सपर्ट थी. साली एक लाइन में दस गाली निकालती थी.

साथ ही वो मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड भी थी. अब तो हम दोनों के बीच में अपने भाइयों से चुदने का राज भी साझा हो गया था, तो हम दोनों एक दूसरे के पक्के राजदार बन गयी थी.

उस दिन उसने मुझे क्लास से बाहर खींचा और मुझे वाशरूम की तरफ ले आई. उधर उसने मुझसे कहा- चल कुतिया आज हम दोनों अन्दर चल कर लेस्बो करती हैं.

मैंने कहा- साली मरवाएगी क्या? जानती भी है … कोई लड़का आ गया तो क्या होगा?
वो बोली- साली तेरी इतनी गांड फटती है … मुझे आज ही मालूम हुआ है. भोसड़ी वाली … सभी जगह लेडीज जेंट्स टॉयलेट अलग अलग होते हैं. और तेरी मर्जी हो तो चल मैं तो जेंट्स टॉयलेट में चल कर भी तेरे साथ लेस्बियन करने को रेडी हूँ. कोई आ भी गया तो उसके लंड को भी मजा दे दूंगी.

मैंने उसकी बात सुनकर माथा पीट लिया कि किस कमीनी से दोस्ती कर ली.

खैर वो नहीं मानी और लेडिज टॉयलेट में जाकर उसने मेरी चुत में उंगली की, मेरे दूध मसले और मैंने भी उसकी चुत में उंगली करके एक दूसरे का पानी निकलवा दिया. फिर सूसू करके मैं अपनी पैंटी और सलवार ऊपर करने लगी, तो देखा उसने अपने बैग में से एक सिगरेट निकाली और लाईटर से जला कर कश लेने लगी. उसने अभी भी अपनी चुत नंगी खोल रखी थी.

मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसने मुझे आंख मारी और मेरी तरफ सिगरेट बढ़ा दी.

मैंने भी कामवासना के मद में उसके हाथ से सिगरेट लेकर अपने होंठों में लगा ली और एक कश खींचा … मगर मुझे खांसी आ गई और वो हंसने लगी. उसने अपनी चड्डी और सलवार ऊपर की और मुझे सिगरेट पीने का तरीका बताने लगी.

दोस्तो, ये कॉलेज ही होता है, जिधर हर तरह का ज्ञान दोस्तों के द्वारा मिलता है. खैर … हम दोनों बाथरूम में मस्ती करने के बाद वापस आ गयी.

शाम को मैं घर आ गई. उस समय मेरा भाई अपने रूम में था. मैं फ्रेश होकर भाई के पास गई और भाई को अपनी बांहों में लेकर उसे किस किया.

उसने भी मुझे अपनी बांहों में कस लिया. वो इस समय सिर्फ एक फ्रेंची में था. मैंने उसकी चड्डी में हाथ डालकर उसके लंड को हाथ में ले लिया. भाई मेरी इस हरकत से गर्म होने लगा और मेरी चूचियां मसलने लगा.

कुछ ही देर में मैंने भाई को बिल्कुल गर्म कर दिया.
भाई ने अपना आठ इंच का लंड बाहर निकाल लिया और बोला- चल तू बड़ी गर्म होकर आई है … पहले सेक्स कर लेते हैं.

मैं बोली- भाई अभी घर पर सब हैं, रात तो अपनी है ही मेरी जान.

मगर भाई नहीं माना. उसने जिद करके अपना लंड मेरे मुँह में दे ही दिया.

मैं बैठ कर उसका लंड चूसने लगी. मेरे अन्दर आज पहले से ही सेक्स का खुमार चढ़ा था … लंड चूसने से और नशा छा गया. मैं ज़ोर ज़ोर से भाई का लंड चूस रही थी. तभी किसी के आने के आवाज़ आई, तो मैं झट से अलग हो गई और भाई ने सब ठीक कर लिया. हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बात करने लगे.

मेरा मन भी अब उससे चुदने को करने लगा था. भाई का लंड तो ले नहीं सकती थी … तो बाथरूम में जाकर मैंने अपने आपको शांत किया.

जैसे जैसे रात गहरी होती गई … सब सो गए. मैं सबसे छिप कर भाई का लंड चुत में लेने के लिए अपने भाई के पास आ गई. मेरा भाई अब तक सो चुका था.

मैंने उसके कमरे के दरवाजे को धीरे से बंद किया और सिटकनी लगा कर घूम गई. मैं इस समय बहुत चुदासी हो रही थी. मैंने जल्दी से अपने ऊपरी कपड़े उतार कर एक तरफ फेंक दिए. मैं अब ब्रा और पैंटी में रह गई थी. मैंने भाई के पास जाकर उसका लोअर खींच कर उतार दिया. साथ साथ में उसका अंडरवियर भी खिंचा चला आया. मैंने देखा कि भाई का सोया हुआ लंड भी मस्त लग रहा था. मैं भाई के लंड को चूसने लगी. लंड चूसते समय भाई को गीला गीला सा लगा तो उसकी आंखें खुल गईं.

भाई मुझे गाली देते हुए बोला- भैन की लौड़ी … साली आ गई अपने आदमी के पास लंड लेने.

मैं हंस दी और उसका लंड चूसने लगी. धीरे धीरे भाई का लंड एकदम खड़ा हो गया. पूरा फूल कर लंड अपनी औकात में आ गया. मैं जल्दी से अपनी चड्डी और ब्रा उतार कर भाई के लंड के ऊपर आकर अपनी चुत में लेने लगी.

मैं अपने भाई का पूरा लंड अन्दर ले गई, तो भाई बोला- साली बड़ी जल्दी लंड खा गई … किसी और का भी लेने लग गई क्या?
मैं हंस दी और बोली- भाई मेरी चुत के लिए तो आपका लंड ही बहुत है.

ये बोल कर मैं अपनी भैया के मोटे लंड से चुदने लगी.

‘आआह … आआहह … भाई चोदो ज़ोर से चोदो … बड़ा मजा आ रहा है.’

पूरे रूम में पट् फट् की आवाज़ आ रही थी.

‘आह बसस्स भाई … बहुत अन्दर तक जा रहा है … आह मैं मर जाऊंगी … आह धीरे..’
मेरी बात सुनकर भाई मुझे और ज़ोर से चोदने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने मुझको डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और ज़ोर से पीछे से लंड पेल कर मुझे चोदने लगा.

बीस मिनट की चुदाई के बाद भाई ने अपना सारा लंड रस मेरी चुत में छोड़ दिया.

वो अपने लंड की पिचकारियां मेरी चुत में छोड़ते हुए बोला- आआहह … मज़ा आ गया यार. … कल तेरी गांड मारूंगा.

मैं बोली- भाई नहीं … गांड नहीं … उधर बहुत दर्द होता है.
भाई बोला- नहीं मेरी बहना … मैं प्यार से तेरी गांड मारूंगा.
मैं बोली- यहां नहीं … मैं दिल्ली आऊंगी … तब मार लेना.

भाई ने मुझको किस किया. मैं भाई की बांहों में नंगी ही लेट गई.

मुझे अपनी फ्रेंड की बात याद थी.

मैंने भाई को बताया कि मेरी एक फ्रेंड आपसे चुदवाना चाहती है.

भाई ने मेरी सहेली के बारे में मुझसे बात की और उसका फिगर कैसा है, ये सब पूछा.

मैंने तान्या के सेक्सी शरीर की बात भाई को बताई, तो भाई का लंड तान्या की चुदाई करने के लिए खड़ा हो गया.
वो बोला- ठीक है … कब चुदवाएगी तान्या. मैं बोली- जब आप बोलो.

तान्या की चुत मिलने का सुनते ही भाई ने कहा- उसकी चुदाई पहली फुर्सत करूंगा. मगर अभी तेरी एक बार फिर से लेने का मन हो गया है.
मैं भी अपने भाई के लंड से दुबारा चुदने को बेचैन हो गई थी.

इस बार भाई से सुपरफास्ट और बहुत हार्ड तरीके से मेरी चुत चुदाई कर डाली. उसने इतनी स्पीड में चुदाई की थी कि मेरी चुत भी दर्द करने लगी थी.

भाई बोला- यार तान्या को जल्दी चुदवाना … तेरी बात सुनकर मेरे लंड में आग लग गई है.
मैं थोड़ी दुखी हो गई.

वो बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- तान्या के बाद आप मुझको तो चोदोगे नहीं?
भाई बोला- अरे नहीं यार … तान्या को एक बार खुश कर देता हूँ. उसके बाद मैं तो तेरा ही हूँ. जब तू बोलेगी तब तुझे चोद दूंगा.
मैं बोली- ओके भाई.

मैं कपड़े पहन कर अपने रूम में चली गई. सुबह कॉलेज में मैंने तान्या को रात की चुदाई के बारे में सब बता दिया.

वो गाली देते हुए बोली- साली अकेली ही चुद कर आ गई भोसड़ी वाली. मेरी चुत का क्या होगा?
मैं बोली- मर मत. … भाई से बात हो गई है … तू बता तुझे उससे कब चुदना है.
वो बोली- कल ही बुला ले.
मैंने कहा- किधर चुदेगी?
वो बोली- हां यार … ये तो दिक्कत है … उसे कहाँ बुला लूं … मादरचोद कोई प्लेस भी नहीं है.

मैं उसकी तरफ देखने लगी.
वो बोली- होटल में चली जाऊंगी.
मैंने ओके कह दिया और घर आ गई.

घर आकर मैंने भाई को बता दिया और कल उसके साथ चलने का कहा.
भाई भी राजी हो गया.

अगले दिन मैंने तान्या को भाई से मिलवाया, तो दोनों बिना किसी की शर्म के ऐसे मिल रहे थे … जैसे दोनों पहले ही एक दूसरे जानते हों.
थोड़ी देर में मैं कॉलेज आ गई.

अब आगे की स्टोरी तान्या से सुनिए.

हैलो मैं तान्या … मैं शिवानी के भाई के साथ होटल के रूम में आ गई. ये रूम मैंने ही बुक किया था. कमरे में जाते ही मैं शिवानी के भाई से चिपक गई. पागलों के जैसे उसको किस करने लगी. वो भी गर्म हो गया और मेरा पूरा साथ दे रहा था. मेरे चूचे दबा रहा था. वो दो तीन मिनट में ही पूरा पागल हो गया.

उसने धीरे धीरे करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, मैंने उसके कपड़े हटा दिए.

उसका आठ इंच कर खड़ा लंड देख कर मेरी तो गांड फट गई. मैं उससे बोली- कैसे जाएगा … ये तो बहुत मोटा और लंबा है.
वो बोला- तू मेरा कमाल देख … इस लंड को तो तू उछल उछल कर चुत में लेगी.
मैं हंस दी.

उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगा. मैं पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी ‘आआहह … आआहह … चाटो … डियर मज़ा आ रहा है … आआह..’

कुछ देर मैं भी उसका लंड चूसने लगी. फिर मैंने उससे कहा- अब नहीं रहा जा रहा … मुझे चोद दो प्लीज़.

उसने मुझे बिस्तर में चित्त लेटा दिया और मेरी टांगें ऊपर करके लंड चुत की फांकों में सैट कर दिया. उसके मलंद का सुपारा एकदम दहक रहा था. उसने मेरी चुत में लंड का एक शॉट मारा … तो उसका आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया

मेरी मैया चुद गई … ऐसा लगा जैसे किसी ने गर्म सलाख चुत में ठांस दी हो. मेरी दर्द से भरी तेज चीख निकल गई- आआहह … आआहह … निकालो.

और मेरी आँखों से आंसू निकल गए. मैंने इतना मोटा लंड अब तक नहीं लिया था. हालांकि मेरे भाई का लंड भी सात इंच का है … लेकिन शिवानी के भाई का लंड मोटा बहुत था.

थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हुआ तो वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.
मैं भी ‘आआहह … आआहह..’ करके चुद रही थी. वो ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदे जा रहा था.

कोई बीस मिनट की चुदाई में मेरी जान निकल गई. उसने मेरी चुत में ही सारा रस छोड़ दिया और मेरे ऊपर लेट गया.
थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटा रहा. फिर बोला- तेरी लेने में मज़ा आ गया.
मैं उसको किस करने लगी.

उस दिन उसने मुझको तीन बार चोदा. शाम को घर आकर मैंने शिवानी को फोन पर सब बता दिया और सो गई.

तो दोस्तो, मेरी सहेली तान्या मेरे भाई से चुद कर खुश हो गई थी. भाई को भी उसे चोदने में मज़ा आ गया था.

भाई ने घर आकर मुझे गले से लगाया और बोला- सच में तान्या बड़ी टेस्टी थी … आज उसकी चूत लेने में बड़ा मज़ा आया.

मैंने कहा- उसकी तो ले ली … मेरी कब लोगे?
भाई- तुम्हारी कल लूंगा … कल तुमको और भी मस्त चोदूंगा.

उस दिन के बाद मैं और तान्या भाई से चुद रही हैं. तान्या और मैं अपने भाई से एक साथ भी चुद चुकी हैं. तान्या के भाई से भी मैं चुद चुकी हूँ. हम चारों ने एक बार ग्रुप सेक्स भी किया है. वो सारी बातें अगली मदमस्त सेक्स कहानी में लिखूंगी. लव यू फ्रेंड्स आप भी चोदते रहिए और लड़कियों तुम सब भी चुदती रहो. जवानी एक बार ही आती है … इसके पूरे मजे लो.

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मेरी चूत की सील

हेलो दोस्तो, कैसे हो?
मैं सोनिया राजस्थान से!

आज मैं एक बार फिर लाई हूँ अपनी सच्ची कहानी … जिसे पढ़कर आपका लंड खड़ा हो जायेगा.

मेरा एक बड़ा भाई जिसका नाम हेमराज है लोग प्यार से उन्हें हेमू कहते हैं … काफी स्मार्ट और हट्टे-कट्टे!

एक बार जब भाई गाँव आए हुए थे तो मैं बाथरूम में नहाने गयी और कुण्डी लगाना भूल गयी. मैं हमेशा नंगी नहाती हूँ, उस दिन भी नंगी थी.
और इतने में अचानक भैया अंदर आ गये; मुझे नंगी देखकर हक्के बक्के रहे गये.

मैं शर्म से लाल पीली थी क्यूंकि अभी तक नंगी मुझे मेरे बॉयफ्रेंड ने ही देखा था.

उस दिन के बाद भैया का नजरिया ही बदल गया.

एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे फोन करके कहा कि मैं अपनी मम्मी की साड़ी और ब्लाउज पहन कर उनको फोटो भेजूं … और उपर से अपने बूब्स दिखाऊं.
तो मैंने मम्मी की साड़ी और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन ली. उसके बाद मम्मी के कपड़ों में ही बाहर चौक में झाड़ू लगाने लग गयी.
जैसे ही मैं झाड़ू मार रही थी, उतने में भाई आ गए और सामने कुर्सी पर बैठ गये.

मेरा ब्लाउज ढीला होने के कारण मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर से साफ़ दिखने लग गयी यहाँ तक कि मेरे चुचियों के भूरे रंग के निप्पल भी दिख रहे थे.
मैंने तिरछी नजर देखा तो भाई बड़े गौर से देख रहे थे.

मैं समझ गयी कि भाई अब मेरी चूत बजाने के लिए उतावले हो रहे हैं. अब वो हर दिन में वासना की नज़र से देखने लग गये. मैं सब समझ रही थी … मन तो मेरा भी हो रहा था पर हिम्मत नहीं हुई ना उनकी और न मेरी!
अगले दिन भाई शहर चले गये जॉब के लिए!

6 महीने के बाद भाई ने फोन किया और कहा- मैं कल कुछ काम से गाँव वाले बाज़ार आ रहा हूँ, मुझे तुझसे मिलना है.
हमारे गाँव 15 किलोमीटर की दूरी पर ही बाज़ार है और वहीं मेरा कॉलेज भी. मैं तब बी ए सेकेंड इयर में थी.
मैंने कहा- ठीक है भाई!
भाई ने कहा- वहीं होटल में कमरा ले लेना. हम वहीं बैठ कर खाना खायेंगे और आराम भी करेंगे.
मैंने कहा- ठीक है भाई!

अगले दिन मैं बाज़ार चली गयी. पहले मैं कॉलेज गयी और उसके बाद आई और होटल में रूम बुक करने गयी. पर मुझे कहीं भी रूम नहीं मिला. मैं दो घंटे तक पूरे बाज़ार में रूम ढूंढती रही पर कहीं नहीं मिला.
सुबह के 10 चुके थे.

इतने में भाई भी आ गये.
मैंने भाई से कहा- कहीं भी रूम नहीं मिला.
तो भाई ने कहा- कोई बात नहीं.

फिर हमने एक दुकान में चाय पी और पकौड़े खाए.
उसके बाद हमने बाज़ार में ऐसी जगह तलाशनी शुरू की जहाँ कोई आता जाता ना हो. पर ऐसी जगह कहीं नहीं मिली.

फिर भाई की नज़र सामने की पहाड़ी पर पड़ी … वहां से एक रास्ता था जो ऊपर किसी गाँव की तरफ जा रहा था.
भाई ने कहा- चल वहां चलते हैं, वहां कोई नहीं आएगा.

मैं भाई की बातों को समझ चुकी थी कि आज मैं अपने भाई से चुदने वाली हूँ.
मेरा भी बहुत मन था अपनी चूत में लंड लेने का; दो महीने से बॉयफ्रेंड नहीं चोदा नहीं था.

हम दोनों भाई बहन उस पहाड़ी की तरफ चले गये … वहीं जाकर एक झाड़ी के सहारे बैठ गये. झाड़ी भी रास्ते के किनारे थी यानि आने जाने सभी हम साफ़ देख सकते थे.
पर क्या करते … और कुछ नहीं था … हम वहीं बैठ गये.

मैं उसने दिन हल्के नारंगी का कुर्ता और सफ़ेद रंग का सलवार पहन रखा था और भाई ने नीले रंग की कमीज और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी.

मेरा कुर्ता बहुत टाइट था जिसकी वजह से मेरी चूची उपर से दिख रही थी. बैठे बैठे भाई की नजर मेरी चूची पर पड़ती और बातें करते.

अब वो बड़े गौर से देखने लग गये.
मैंने कहा- क्या देख रहे हो भाई?
भाई ने कहा- कुछ नहीं.
मैंने कहा- कुछ तो देख रहे हो?
तो इस बार भाई ने हिम्मत करके कह ही दिया- तेरे सीने को देख रहा हूँ.

मैंने कहा- ऐसा क्या है मेरे सीने में?
तो भाई ने कहा- तेरे सीने ने ही तो मुझे पागल बना रखा है.
मैंने कहा- पर ऐसा क्या है?

तो भाई की झिझक अब कम हो चुकी थी, भाई ने कहा- तेरी कोमल और बड़ी बड़ी चूचियां जिनमें मुझे डूब जाने का मन कर रहा है.
मुझे थोड़ी सी शर्म आई मगर मैं फिर भी मुस्कुरा दी.

भाई की हिम्मत बढ़ गयी … अब भाई ने कहा- सोनिया तेरी इन चुचियों में ऐसा क्या जादू है … कितनी सेक्सी और हॉट हैं … मुझे इनको छूने का मन कर रहा है.
मैं कुछ ना बोली और आँखें नीचे कर ली.

उसके बाद भाई आगे बढ़ा और मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरी चूची पर हाथ रख दिया. पहली बार अपने भाई का हाथ अपने चुचियों पर महसूस करके बहुत अच्छा लग रहा था. एक अलग से हलचल हो रही थी, शरीर में एक कम्पन थी. ये अहसास बहुत अलग था.

उसके बाद भाई ने धीरे धीरे मेरी चूचियां मसलना शुरू किया. धीरे धीरे मेरा जोश भी बढ़ने लगा.
अबकी बार भाई ने अपने हाथ मेरे कुरते के अन्दर डाल कर मेरी चूचियां दबाना शुरू कर दिया. मैंने अपनी आँखें बंद कर दी.

इतने में उस रास्ते दो औरत और एक मर्द गुजरे तो भाई ने झट से अपना हाथ हटा लिया. शायद उन लोगों ने नहीं देखा.

उनके जाने के बाद भाई ने दोनों हाथ मेरे गालों पर रख कर मेरे फूल से ओंठ चूसना शुरू किया. मेरे गुलाब जैसे ओंठों को भाई ने खूब चूसे. मैंने भी उन्हें किस करना शुरू किया.

अब भाई खड़े हुए और मैं वहीं पत्थर पर बैठी रही. भाई ने अपनी जींस की जिप खोली और अपना अपना तनतनाता लंड बाहर निकाला.
ओह माय गॉड … क्या लंड था इतना मोटा और बड़ा तो मेरे बॉयफ्रेंड का भी नहीं था!

भाई ने लंड बाहर निकाला, कहा- सोनिया मेरा लंड चूस न!
मैंने भी बिना देरी किये भाई का लंड हाथ में लिया और मुंह में डाला पर ओ मुंह में गया ही नहीं.

फिर मैंने आगे का हिस्सा ही बस मुंह में डालकर उस मस्त लंड को चाटने और चूसने लग गयी.

अपने बॉयफ्रेंड का लंड तो मैंने कई बार चूसा था पर आज जो मजा जो आनंद भाई के लंड चूसने में आ रहा है वो कभी नहीं आया.
सच में क्या लंड था भाई का … ऐसे ही लंड की तो तलाश थी … ऐसा लंड जब मेरी चूत में जाएगा तो मुझे दुनिया का हर आनंद मिल जाएगा. अब तो मैं जल्दी से भाई का लंड अपनी चूत में लेने के लिय मचल रही थी.

काफी देर तक मैंने भाई का लंड ऐसे ही चूसा. इतने में उस रास्ते से एक अंकल और आंटी गुजरे. मैंने झट से भाई के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला. शायद उन्होंने भी हमें नहीं देखा.
उस रास्ते में हम ये करने को मजबूर थे क्यूंकि कहीं भी कोई रूम नहीं मिला.

उन लोगों के जाने के बाद भाई ने कहा- सोनिया ज्यादा समय नहीं … लोग आ जा रहे हैं. बस तू सलवार नीचे कर … मैं तुझसे अब चोदना चाहता हूँ.

मैंने कहा- भाई ऐसे कैसे? कितने लोग आ जा रहे हैं. दिक्कत हो जाएगी.
भाई ने कहा- सच कह कि तू चुदना नहीं चाहती.
मैंने कहा- भाई, कौन पागल लड़की होगी जो इतने मस्त लंड से चुदना नहीं चाहेगी?
तो भाई ने कहा- चुद ले और टेंशन ना ले. कोई आएगा तब की तब देख लेंगे.

तो मैंने भाई से कहा- तुम मुझे नंगी करोगे क्या यहाँ बीच रास्ते में?
भाई ने कहा- नहीं बस तेरी सलवार थोड़ा नीचे सरकाऊंगा और तेरी कच्छी को एक तरफ करके लंड डालूँगा.
फिर मैंने हामी भरी.

भाई ने मुझे खड़ा किया और पहले तो मुझे सीने से लगाया और कहा- सोनिया, मैं तुझे उसी दिन से चोदने के मूड में हूँ जब मैंने तुझे बाथरूम में नंगी देखा था … तेरे ये हसीन जिस्म देख कर मैं बहक गया. जब तेरा खुद का भाई ही बहक गया था तो सोच बाकियों का क्या हाल होता होगा.

उसके बाद मैंने भाई को खूब किस किया.

फिर भाई ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और घुटनों तक सरका दिया और मेरा कुर्ता ऊपर करके मेरी मासूम ही चूचियां बाहर निकाल दी.
अब भाई ने कहा- सोनिया, एक टांग नीचे रख और एक टांग पत्थर पर!
फिर मैंने ऐसा ही किया.

भाई नीचे से आये और मेरी चूत में अपनी जीभ डालकर चाटने लग गये.

“उईइ माँ …” मेरे मुंह से यही निकला. क्या आनंद था वो क्या पल था वो … ऐसा पल हर लड़की के जीवन में आये.
भाई कुछ देर तक मेरी चूत ऐसे ही चाटते रहे.

उसके बाद भाई ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी. जैसे ही भाई ने चूत में उंगली डाली मुझे पेशाब आने लगा.
मैंने भाई को कहा- हटो मुझे पेशाब आ रहा है.
भाई ने कहा- यही तो मैं चाहता था. तू पेशाब मेरे मुंह में कर दे.

मैंने कहा- ये क्या बोल रहे हो भाई?
भाई ने कहा- सुंदर और हॉट लड़कियों का पेशाब पीने में बहुत मजा आता है.

तो मैंने सारा पेशाब भाई के मुंह के अंदर कर दिया. भाई कहने लगे- सोनिया, तेरा पेशाब भी तो तेरे जैसा मस्त है. वाह … मेरी बहना बहुत मजा आ रहा है … तू भी कभी मेरा पेशाब पी कर देखना.
मैंने कहा- ठीक है भाई … फिर कभी!

फिर भाई ने मेरी कच्छी को एक तरफ सरका के अपना लंड मेरी चूत में डालने का प्रयास किया. पहली बार में लंड फिसल के दूसरी तरफ गया.
भाई ने कहा- सोनिया, अपने भाई का लंड अपने कोमल हाथों से पकड़कर अपनी मासूम सी चूत में घुसा न!

मैंने भाई का लंड अपने हाथों लेकर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और भाई को कहा- धक्का मारो.
भाई ने एक ही झटके में सारा लंड अंदर पेल दिया.

मेरी चूत की सील तो मेरे बॉयफ्रेंड तोड़ दी थी. फिर भी मुझे बहुत दर्द हुआ. मैंने भाई से कहा- भाई दर्द हो रहा है.
तो वो ठहर गये.

कुछ देर रुकने के बाद भाई फिर से हल्के हल्के धक्के मारने लग गये.
मैंने कहा- भाई, अब दर्द महसूस नहीं हो रहा है.
कुछ देर बाद भाई की धक्कों की स्पीड बढ़ गयी.

भाई के हर धक्के से मेरी सिसकारी निकल रही थी- आहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह … चोदो और जोर से चोदो भाई … आहह हहह!
इस तरह मैं लगातार सिसकारियां ले रही थी.

भाई भी किसी माहिर खिलाड़ी की तरह अपनी छोटी बहन की चूत चोदे जा रहे थे.

मैं बहुत गर्म हो चुकी थी और भूल गयी थी कि मैं बीच रास्ते में अपने भाई से चुद रही हूँ … मैं सिसकारियां लेने लगी और भाई से कहने लगी- भाई चोदो ना आज अपनी सोनिया बहन को … चोद-चोद के आज मेरी चूत फाड़ दो.

मुझे अपने बड़े भाई के लंड से चुदने में कितना मजा आ रहा था आह हह … मैं बोली- भाई, आप तो बहुत मस्त मजा देते हो. चूत चाट कर भी और अपने लंड से चुदाई का भी!
फिर वो तेजी के साथ मेरी चूत में धक्के लगाने लगे … मुझे दुनिया का हर आनंद अनुभव हो रहा था … मैं कहने लगी- भाई, अब कोई भी आएगा तो अपना लंड बाहर मत निकालना, बस चोदते रहना अपनी बहन को!

भाई मुझे जोरों से चोद रहे थे. मेरी चूची दबा दबा कर उन्होंने लाल कर दिए. भाई कहने लगे- सोनिया, ऐसी चुदाई के लिए कब से तरस गया था … आज अपनी सोनिया बहन को चोद चोदकर रांड बना दूंगा.
मैं भी सेक्स के मजे में कहने लगी- हाँ भाई, आज से मैं आपकी रखैल हूँ … बना दो आज मुझे रांड … बना दो आज खूब चोदकर अपनी बहन को माँ … आज बीच रास्ते में आपकी बहन चुदकर माँ बनना चाहती है … आहहह उम्म्ह!

मेरी आवाजें तेज हो गयी थी और भाई की भी … हम भूल गये थे कि हम पब्लिक प्लेस में चुदाई कर रहे हैं.
भाई मुझे पेले जा रहे थे और मैं भी अपने भाई से पिलती रही.

इतने में वहां से एक सुंदर सी नयी नवेली दुल्हन और उसके साथ एक बुड्डा था या तो उसका पति रहा होगा या ससुर … हमने सच में अनदेखा कर दिया और चुदाई के सागर में गोते लगाते रहे. भाई उनके सामने ही मुझे चोदने में लगे रहे.( उसके बाद क्या हुआ, उन्होंने क्या कहा ये सब अगली कहानी में लिखूंगी)

मैं झड़ने लगी. मगर भैया अभी नहीं रुके. उन्होंने अगले पन्द्रह मिनट तक मेरी चूत को रगड़ा … खूब रगड़ा … जैसे कोई एक रंडी की चूत बजाता है भाई ने भी मेरी चूत ऐसी ही बजाई वो भी खुले में!
भाई पूरी स्पीड में अपनी बहन की चूत में लंड फंसा कर धक्के मारे जा रहे थे.

और फिर उनका वीर्य निकलने को हुआ तो उन्होंने पूछा- कहां गिराना है?
मैंने कह दिया- आह्ह … भैया, मेरी चूत में ही गिरा दो … बना दो आज अपनी सोनिया बहन को माँ!

उसके बाद भैया ने तीन-चार जोर के धक्के मारे और मेरी चूत में झड़ने लगे. उन्होंने सारा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिया. मुझे भैया का लंड अपनी चूत में लेकर बहुत मजा आया.

भाई ने कुछ देर अपना लंड मेरी चूत में ऐसे ही रखा, उसके बाद जबा लंड बाहर निकाला तो मैंने भाई का गीला लंड चाट चाट के साफ कर दिया.
उसके बाद भाई ने मुझे गये लगाया और मेरे ओंठ चूसे.

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भाई के दोस्त को पटाकर चूत चुदवा ली

सेक्सी जवान लड़की की कुंवारी चूत में जब लंड लेने की ललक लगती है तो वो वासना पूरी करने का हरसंभव जुगाड़ करने लगती है. ऐसी ही एक हॉट गर्ल ने क्या किया?

जवानी के जोश में अक्सर हो जाता है जैसा कि आलिया के साथ भी हुआ. आलिया एक 19 साल की बहुत ही खूबसूरत लड़की है. देखने में बिल्कुल पोर्न स्टार वैलेरी के जैसी लगती है. उसके 36 के बूब्स 38 के हिप्स अगर कोई बूढ़ा भी देख ले तो उसका लंड भी खड़ा होने पर मजबूर हो जाये.

आलिया दिल्ली यूनिवर्सिटी में बी.ए. की स्टूडेंट है जो कि स्वभाव से बहुत ही चंचल है. वह अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती करती है. उसके परिवार में उसके पापा और मॉम के अलावा उसका एक बड़ा भाई भी है.
उसके पिता जी का अपना एक बिजनेस है जो अच्छा चल रहा है. उसकी मां भी बिजनेस में हेल्प करवाती है. उसका भाई वरुण अभी पढ़ाई कर रहा है जो कि देहरादून में रहता है.

चूंकि ये लोग बहुत पैसे वाले थे तो इनके घर में हर तरह की सुख सुविधा मौजूद थी. आलिया के घर में एक जिम भी है. आप सोच सकते हैं कि घर में ही जिम भी बनाया गया है तो कितनी पैसे वाली पार्टी होगी.

बिंदास होने के बाद भी हॉट गर्ल आलिया ने अभी तक सेक्स नहीं किया था. उसके दिमाग में अभी तक ऐसे ख्याल आये ही नहीं थे. वो अपने दोस्तों के साथ ही मस्ती में बिजी रहती थी. उसको अच्छी अच्छी ड्रेस पहनने का शौक था.

आलिया को उसके कॉलेज के कई लड़के प्रपोज भी कर चुके थे लेकिन आलिया किसी को घास नहीं डालती थी. ऐसा नहीं था कि उसको अपने जिस्म या हुस्न पर घमंड था लेकिन वो हमेशा दोस्त बनाना पसंद करती थी.

उस दिन रविवार था. आलिया अपने रूम में शॉर्टस में सो रही थी. फिर अचानक डोर बेल बजी तो उसकी मां ने दरवाजा खोला तो दरवाजे पर वरूण खड़ा हुआ था.

सात महीने के बाद वरूण अपने घर लौटा था. मां उसको देख कर खुश हो गयी. फिर वरूण आलिया को सरप्राइज़ देने के लिए गया. आलिया के रूम का दरवाजा खुला हुआ था. वो नींद में थी.

आलिया की टीशर्ट ऊपर उठी हुई थी और उसके शार्ट्स में से उसकी लाल रंग की पैंटी उसकी गांड पर चढ़ी हुई दिख रही थी. वरूण की नजर जब आलिया पर गयी तो उस गोरे संगमरमर जैसे सफेद बदन पर उसकी नजर फिसलने लगी. उससे भी ज्यादा आलिया की लाल पैंटी कहर बरपा रही थी.
पहली बार वरूण का ध्यान अपनी बहन के जिस्म पर इस तरह से गया था. उसने इतनी हॉट लड़की आज तक नहीं देखी थी.

आलिया को आहट सी सुनाई दी तो उसकी आंख खुली. वरूण को सामने खड़ा देख कर वो चौंक गयी- भैया! आप?
वो पहले तो खुशी से उछल पड़ी और उसको गले से लगा लिया. फिर उसके साथ लड़ने लगी.

आलिया बोली- क्या भाई? इतने दिन के बाद शक्ल दिखा रहे हो? जाओ मैं आपसे बात नहीं करूंगी.
वरूण- यार मेरे एग्जाम्स थे. इसलिए आना पॉसीबल नहीं था. अब मैं हर महीने तुझसे मिलने के लिए आया करूंगा. ये रूठना छोड़ा और देख मैं तेरे लिए क्या लेकर आया हूं मेरे बच्चे!
तभी वरूण ने अपने बैग से एक सेक्सी सी ड्रेस निकाल कर आलिया को दी.

आलिया खुश हो गयी. मगर वरूण सच में हैरान था कि उसकी बहन बहुत ही सेक्सी हो गयी है.
एक दिन आलिया अपने भाई वरूण का मोबाइल चेक कर रही थी. उसके दिमाग में पता नहीं क्या आया कि वो वरूण के मोबाइल की हिस्ट्री चेक करने लगी.

हिस्ट्री में उसने पाया कि उसके भाई के फोन में अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट लिंक खुला हुआ था. उसमें वो हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ने लगी. आलिया के लिए सेक्स स्टोरी जैसा साहित्य एकदम से नया था. उसने कभी सेक्स कहानी के बारे में नहीं पढ़ा था.

कहानी पढ़ते हुए उसे एक कहानी ऐसी भी मिली जिसमें एक लड़की अपने भाई और उसके दोस्तों के साथ सेक्स करती है. आलिया को इस तरह की कहानी पढ़ कर काफी बुरा लगा और उसने मोबाइल वहीं पर बंद कर दिया.

उसके बाद वो जिम में जाकर एक्सरसाइज करने लगी. मगर जिम करने में भी उसका मन नहीं लग रहा था. इतने में ही वरूण भी आ गया. वरूण उसको जिम करने में हेल्प करने लगा और उसको जिम के टिप्स देने लगा.

भाई-बहन की सेक्स स्टोरी पढ़ने के बाद अब आलिया के मन में एक उथल पुथल मच गयी थी. जब वरूण उसके साथ जिम में था तो आलिया के मन में उस वक्त भी ऐसे ही ख्याल आ रहे थे कि पता नहीं उसका भाई उसके बदन को किस नजर से देख रहा होगा. पता नहीं वो भी अपनी बहन के साथ सेक्स करना तो नहीं चाह रहा?

जाहिर सी बात थी कि भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ने के बाद हॉट गर्ल के मन में इस तरह के ख्याल आना लाजमी था. उसका दिमाग उसका साथ नहीं दे पा रहा था.

वो असमंजस में थी कि इसके बारे में कैसे पता करे. अब आलिया इस बात की जांच करना चाह रही थी कि उसका भाई उसके बारे में क्या सोच रहा है. वो जानना चाहती थी कि वरूण के दिल में क्या है.

इसलिए वरुण का ध्यान खींचने के लिए वो बोली- भैया, मेरे बटक (चूतड़) काफी बड़े हो गये हैं. कोई ऐसी एक्सरसाइज बताओ जिससे मैं अपने बटक्स को मेंटेन कर सकूं.

आलिया जानबूझ कर वरूण को उकसाना चाहती थी. वो ऐसा इसलिए बोल रही थी कि वरूण ही कुछ पहल करे. मगर वरूण ने आलिया को नॉर्मल एक्सरसाइज ही बताई. बताते हुए भी वरूण ने अपनी बहन के बदन को ज्यादा टच करने की कोशिश नहीं की.

तब आलिया को लगने लगा कि उसका भाई अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स स्टोरी साइट पर शायद टाइम पास करने के लिए कहानियां पढ़ता है. वो दिल का अच्छा लड़का है. अपनी बहन के बारे में ऐसा नहीं सोचेगा.

आलिया खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका दिमाग अब भी उसका साथ नहीं दे रहा था. उसके मन में हलचल थी. अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उस दिन आलिया ने रात भर अन्तर्वासना की गर्म सेक्सी कहानियां पढ़ीं.

कहानी पढ़ते हुए ही हॉट गर्ल आलिया की कुंवारी चूत गीली होने लगी थी. उस दिन पहली बार आलिया के मन में चुदाई का मजा लेने का ख्याल आया. जब से उसने सेक्स स्टोरी पढ़ना शुरू किया था अब वो मर्दों के साथ सम्भोग का आनंद लेने के लिए उत्सुक सी रहने लगी थी.

जवान लड़की की कुंवारी चूत अब अपने अंदर लंड लेने के लिए मचलने लगी थी. ऐसे ही एक महीना बीत गया था. अब वरूण भी हॉस्टल में जा चुका था. उसके जाने के बाद अब आलिया घर में अकेली सी हो गयी थी.

फिर उसने एक ऑनलाइन साइट से एक डिल्डो मंगवा लिया. फिर उसने रात को अन्तर्वासना साइट खोली और अपनी चूत में उंगली से सहलाने लगी. उसकी कुंवारी चूत मचलने लगी.

कुछ कहानियां पढ़ने तक आलिया की चूत काफी गर्म हो गयी थी. उसकी चूत से पानी चूने लगा. उसने अपनी चूत का पानी उंगली पर लगाया और उसको चाट कर देखा. उसको अलग ही अहसास हुआ और उसके जिस्म में कामुकता हिलौरियां लेने लगी. अब उसका मन ऐसा कर रहा था कि वो अपनी चूत में कोई लंड ले ले.

उसने अपना डिल्डो निकाला और कहानी पढ़ते हुए चूत में लेने लगी. उसकी चूत को मजा आने लगा. वो धीरे धीरे अपनी स्पीड तेज करने लगी. जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे उसका हाथ उसकी चूत में डिल्डो को तेजी से अंदर बाहर करने लगा था.

आलिया ने अपने शॉर्ट्स को पूरा निकाल दिया और अपनी पैंटी को भी नीचे करके अपनी टांगों से अलग कर दिया. अब वो अपनी टांगों को फैला कर लेट गयी और चूत को खोल कर डिल्डो को चूत में लेने लगी.

उसकी कुंवारी चूत की फांकों को खोल कर डिल्डो उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. आलिया की चूत ऊपर उठ कर आने लगी थी. अब आलिया ने एक हाथ से डिल्डो लेते हुए दूसरे हाथ से फोन को नीचे रख कर दूसरे हाथ को फ्री कर लिया.

अब आलिया का दूसरा हाथ उसकी मोटी मोटी तनी हुई चूचियों को दबाने लगा. आलिया को बहुत मजा आ रहा था ये सब करने में. फिर उसने अपने टॉप को उतार दिया और पूरी नंगी होकर लेट गयी.

आलिया का जिस्म तपने लगा था. उसकी चूत में तेजी से डिल्डो अंदर बाहर हो रहा था. वो अपनी चूची के निप्पलों को उंगलियों में भींच कर मसल रही थी. अब उसके हाथ की स्पीड और तेज हो गयी.

तेजी से डिल्डो लेते हुए आलिया के बदन में एक लहर सी उठी और उसकी चूत से पहला स्खलन हुआ. आलिया की चूत ने डिल्डो को अपने रस में भिगो दिया. आलिया ने उस रस लगे डिल्डो को अपने मुंह में लेकर चाट लिया.

डिल्डो पर लगे कुंवारी चूत के रस को चाटते हुए वो उसको लंड का रस समझ कर अपनी प्यास को शांत करने की कोशिश कर रही थी. लंड के रस का स्वाद लेना अब उसके लिए और भी जरूरी हो गया था.

डिल्डो से चूत की चुदाई करने में आलिया को बहुत मजा आया. इस आनंद से वो अब तक अन्जान थी. डिल्डो को चूत में लेकर वो जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. अब रोज ही डिल्डो से मन बहलाना आलिया की आदत बन गयी.

अब आलम ये था कि आलिया सेक्स के बारे में और ज्यादा देखने और पढ़ने लगी थी. जिस साइट से उसने डिल्डो ऑर्डर किया था उसी साइट पर वो सेक्स से संबंधित और भी उपकरण खोजती रहती थी. अब आलिया का ज्यादातर समय मोबाइल पोर्न वीडियो और सेक्सी वीडियो क्लिप साइट्स देखने में व्यतीत होता था.

पोर्न फिल्म देखना भी अब आलिया की आदत बन चुकी थी. अब रात में उसको उसकी तन्हाई चैन से लेटने नहीं देती थी. उसकी चूत अब डिल्डो से भी संतुष्ट नहीं हो रही थी और वो अपनी कुंवारी चूत में अब असली लंड का मजा लेना चाहती थी.

कॉलेज में आलिया के एग्जाम्स खत्म हो चुके थे. उसके दिमाग में एक आइडिया आया. उसने सोचा कि अगर मैं अपने ही कॉलेज में किसी लड़के का लंड लूंगी तो वह अपने दोस्तों को भी इस बारे में बतायेगा. फिर उसके दोस्त भी उसकी चूत मारने की कोशिश करेंगे.

वो लड़कों की आदत से भली भांति परिचित थी. उसने सोचा कि कॉलेज के लड़के को पटाने में रिस्क है. पूरे कॉलेज में बदनामी होगी और इमेज का कचरा हो जायेगा वो अलग.

इसलिए उसने एक दूसरा प्लान बनाया. उसके मन में विचार आया कि वरूण का दोस्त रोहित जयपुर में रह कर पढ़ाई कर रहा है. रोहित कई बार वरूण के घर भी आ चुका था और आलिया की फैमिली रोहित से परिचित थी.

सुबह नाश्ते की टेबल पर आलिया ने अपने मॉम डैड से कहा कि वो जयपुर में एक महीने का कोर्स करना चाह रही है. आलिया के माता पिता भी खुश हो गये कि चलो अच्छा है कि बेटी अपने खाली समय का सही उपयोग करना चाह रही है. अगर फ्री समय को अच्छे काम में लगायेगी तो कोई हर्ज नहीं है.

मगर उसके पापा के सामने एक समस्या थी.
वो बोले- बेटी तू वहां पर ऐसे अकेली कैसे रहेगी? हमारा तो वहां पर कोई रिश्तेदार भी नहीं है कि हम तुझे उसके भरोसे ही वहां पर छोड़ दें. तू जवान हो रही है, तेरी फिक्र होगी हमें.

आलिया बोली- आपको इसकी इतनी फिक्र करने की जरूरत नहीं है. जयपुर में रोहित भैया भी रहते हैं. वो अपना अलग फ्लैट लेकर रहते हैं. मैं उनके साथ ही रह लूंगी. वो मुझे अपनी बहन ही मानते हैं.

पापा ने रोहित का नाम सुना तो उनको भी थोड़ी तसल्ली हुई. रोहित के नाम पर मॉम डैड ने आलिया को परमिशन दे दी. हॉट गर्ल आलिया भी मन ही मन खुश हो रही थी कि उसकी चूत को अब लंड जल्दी ही मिल जायेगा.

उसने फिर जयपुर में एडमिशन ले लिया. जल्दी ही जयपुर जाने का दिन भी आ गया. आलिया जयपुर के लिए निकल पड़ी. चूंकि वरूण से पहले ही फोन पर बात हो चुकी थी तो उसने रोहित को बोल दिया था कि वो उसकी बहन का ख्याल रखे.

आलिया के पहुंचने से पहले ही रोहित ने उसके लिए इंतजाम कर दिये थे. रोहित के साथ ही उसका एक दोस्त निखिल भी फ्लैट पर रहता था. उसका फ्लैट दो रूम का सेट था. मगर फ्लैट में बाथरूम केवल एक ही था.

बाथरूम कुछ ऐसे बना हुआ था कि दोनों रूम के साथ में बीच में अटैच था. एक तरफ से एक रूम का दरवाजा बाथरूम में खुलता था और दूसरी ओर से दूसरे रूम का दरवाजा बाथरूम में खुलता था.

शाम के करीब 7 बजे के आसपास ट्रेन जयपुर पहुंच गयी थी. आलिया के आने की खबर रोहित को मिल चुकी थी इसलिए वो तय समय पर आलिया को लेने के लिए स्टेशन पर पहुंच गया था.

आलिया ने उस दिन ब्लू कलर की जीन्स पहनी थी और उस पर एक सफेद रंग का टॉप पहना हुआ था. उस ड्रेस में आलिया एकदम से सेक्स बॉम्ब लग रही थी. वैसे भी आलिया अब जवानी के चरम पर थी इसलिए उसके बदन में एक अलग ही आकर्षण आ गया था.

इसलिए जब रोहित ने आलिया को देखा तो उसकी नजर भी आलिया के बदन को ऊपर से नीचे तक नापने लगी. रोहित उसको देखता ही रह गया.

आलिया भी रोहित के बारे में ऐसा ही सोच रही थी. वो आई ही थी रोहित को पटाने के लिए. मगर रोहित को देख कर लग रहा था कि आलिया को अपने मकसद को अंजाम देने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

उसके बाद वो दोनों फ्लैट पर आ गये.

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मेरी चुत चाटने लगा

मेरे भाई का लंड आठ इंच का था. अपने भाई के लंड से कई बार चुदवा लेने से मेरी फिगर भी भरने लगी थी और मेरा जिस्म मस्त हो गया था.

कॉलेज में मेरी सहेलियां मुझे छेड़ने लगी थीं कि ऐसा क्या लेने लगी हो, जिससे तेरा जिस्म भरने लगा है.

इस पर मेरी एक सहेली मुझे छेड़ते हुए बोली- लगता है जलेबी शीरा पी गई.
उसकी बात मेरी समझ में नहीं आई मगर बाकी की सहेलियां जो कुछ चुदक्कड़ किस्म की थीं, हंसने लगीं.

मैंने उस सहेली से पूछा- जलेबी शीरा पी लेती है, तो इसमें हंसने की क्या बात है?
वो और जोर से हंसने लगी.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था.
तभी एक सहेली ने मुझसे कहा- तू बिल्कुल चूतियम सल्फेट है … अबे जलेबी शीरा पीने का मतलब भी नहीं समझती है.
मैंने उसकी तरफ देख कर कहा- अगर मैं समझ गई होती, तो पूछती ही क्यों … बता न जलेबी शीरा पीने से क्या मतलब होता है?
तभी एक दूसरी चुदक्कड़ सहेली ने मेरी चूची दबाई और कहा- आह मेरी जलेबी बाई … तूने किसके लंड का शीरा पी लिया … जो तेरे इतने कड़क मम्मे हो गए.

उसकी बात सुनते ही मुझे समझ आ गया कि कमीनी की जलेबी शीरा पीने की बात का क्या मतलब हुआ.

वैसे साली सही ही तो कह रही थी कि मेरी चुत ने भाई के लंड का शीरा पी लिया था इसलिए तो मेरी चूचियां भरने लगी थीं. चुदाई के वक्त मेरा भाई मेरी चूचियों को खूब चूसता है, जिस वजह से मेरे दूध फलने फूलने लगे थे.

मैं हंस दी और वहां से अपनी एक पक्की सहेली के साथ क्लास की तरफ बढ़ गई. मेरी इस सहेली का नाम तान्या था. वो कॉलेज में मेरी बेस्ट फ्रेंड है.

उसने मुझसे कहा- ये लड़कियाँ इतनी गंदी बातें करती हैं कि मेरी तो चुत में पानी ही आ जाता है.
मैंने उससे पूछा- तेरी चुत में पानी आ गया है … तो अब तू क्या करेगी?

वो मेरी तरफ देख कर हंसने लगी. मैंने हंस मत कुतिया … बता न कि चुत के पानी का क्या करेगी?
पहले तो वो बोली- क्या करूंगी, बाथरूम में जाकर उंगली करके पूरा शीरा निकाल लूंगी और सूसू करके वापस आ जाऊंगी.
मैंने उसकी चूची दबाते हुए कहा- कमीनी शीरा तो लंड से निकलता है … तेरी चुत से शीरा कैसे निकलेगा.

वो हंसने लगी और बातों ही बातों में उसने मुझे बताया- मैं भी शीरा ले लेती हूँ.
मैंने आंख मार कर उससे पूछा- तू किसका शीरा लेती है?
वो मेरी चूची दबाते हुए बोली- साली, अभी तू ही तो कह रही थी कि शीरा तो लंड से निकलता है, तो मैं भी लंड का शीरा ही लेती हूँ.
मैंने अपना सर पीटते हुए पूछा- अरी मूरख ये तो मालूम है कि लंड का शीरा लेती है … लेकिन किसके लंड का शीरा लेती है, ये तो बता?

पहले तो वो आनाकानी करने लगी. फिर मुझे कसम देते हुए बोली- किसी से कहना मत!
मैंने उसके सर पर हाथ रखा कि तू मेरी सबसे पक्की सहेली है, मैं किसी से नहीं कहूँगी. अब तू जल्दी बता कि किसका लंड लेती है?
उसने मुझे बताया- मैं अपने भाई का लंड लेती हूँ.

मैं उसकी बात सुनकर अवाक थी.

वो मेरी तरफ देख कर बोली- अब तू बता कि तू किसका शीरा लेती है?
मैंने भी दबी जुबान में बता दिया- मैं भी अपने भाई के लंड का शीरा लेती हूँ.

वो मेरी शक्ल देखने लगी. एक पल के लिए हम दोनों की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी. मगर अगले ही पल हम दोनों हंस पड़ी और एक दूसरी से लिपट गई. वो मुझे ऐसे चूमने लगी, जैसे हम दो रंडियां अपनी चुदाई की बात से खुश हो रही हों.

इस तरह हम दोनों ने ओपन होते ही एक दूसरे को सब बता दिया.

तान्या ने अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में ली हुई थी. उसने मुझे अपने भाई के लंड की फोटो दिखाते हुए कहा- ये मेरे भाई के लंड की फोटो है … तेरे भाई का लंड कैसा है?
मैं भी अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में रखे थी. मैंने भी उसको अपने भाई के लंड की पिक दिखाई.

मेरे भाई का आठ इंच का मोटा लंड देख कर तान्या बोली- वाओ तेरे भैया का लंड तो बड़ा मस्त है … मुझे भी इस लंड को अपनी चुत में लेना है … प्लीज़ तू कुछ जुगाड़ कर न!
मैंने उससे बोला- मैं भाई से बात करके बताती हूँ.

अब इधर मैं आपको थोड़ा तान्या के बारे में बता देती हूँ. तान्या का फिगर बड़े कमाल का है उसके फिगर का साइज़ 32-28-34 का था. वो एकदम दूध के जैसे गोरी थी और उसे लंबे लंबे लंड लेने का बड़ा शौक था. साथ ही वो गंदी गंदी बातें करने में मानो एक्सपर्ट थी. साली एक लाइन में दस गाली निकालती थी.

साथ ही वो मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड भी थी. अब तो हम दोनों के बीच में अपने भाइयों से चुदने का राज भी साझा हो गया था, तो हम दोनों एक दूसरे के पक्के राजदार बन गयी थी.

उस दिन उसने मुझे क्लास से बाहर खींचा और मुझे वाशरूम की तरफ ले आई. उधर उसने मुझसे कहा- चल कुतिया आज हम दोनों अन्दर चल कर लेस्बो करती हैं.

मैंने कहा- साली मरवाएगी क्या? जानती भी है … कोई लड़का आ गया तो क्या होगा?
वो बोली- साली तेरी इतनी गांड फटती है … मुझे आज ही मालूम हुआ है. भोसड़ी वाली … सभी जगह लेडीज जेंट्स टॉयलेट अलग अलग होते हैं. और तेरी मर्जी हो तो चल मैं तो जेंट्स टॉयलेट में चल कर भी तेरे साथ लेस्बियन करने को रेडी हूँ. कोई आ भी गया तो उसके लंड को भी मजा दे दूंगी.

मैंने उसकी बात सुनकर माथा पीट लिया कि किस कमीनी से दोस्ती कर ली.

खैर वो नहीं मानी और लेडिज टॉयलेट में जाकर उसने मेरी चुत में उंगली की, मेरे दूध मसले और मैंने भी उसकी चुत में उंगली करके एक दूसरे का पानी निकलवा दिया. फिर सूसू करके मैं अपनी पैंटी और सलवार ऊपर करने लगी, तो देखा उसने अपने बैग में से एक सिगरेट निकाली और लाईटर से जला कर कश लेने लगी. उसने अभी भी अपनी चुत नंगी खोल रखी थी.

मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसने मुझे आंख मारी और मेरी तरफ सिगरेट बढ़ा दी.

मैंने भी कामवासना के मद में उसके हाथ से सिगरेट लेकर अपने होंठों में लगा ली और एक कश खींचा … मगर मुझे खांसी आ गई और वो हंसने लगी. उसने अपनी चड्डी और सलवार ऊपर की और मुझे सिगरेट पीने का तरीका बताने लगी.

दोस्तो, ये कॉलेज ही होता है, जिधर हर तरह का ज्ञान दोस्तों के द्वारा मिलता है. खैर … हम दोनों बाथरूम में मस्ती करने के बाद वापस आ गयी.

शाम को मैं घर आ गई. उस समय मेरा भाई अपने रूम में था. मैं फ्रेश होकर भाई के पास गई और भाई को अपनी बांहों में लेकर उसे किस किया.

उसने भी मुझे अपनी बांहों में कस लिया. वो इस समय सिर्फ एक फ्रेंची में था. मैंने उसकी चड्डी में हाथ डालकर उसके लंड को हाथ में ले लिया. भाई मेरी इस हरकत से गर्म होने लगा और मेरी चूचियां मसलने लगा.

कुछ ही देर में मैंने भाई को बिल्कुल गर्म कर दिया.
भाई ने अपना आठ इंच का लंड बाहर निकाल लिया और बोला- चल तू बड़ी गर्म होकर आई है … पहले सेक्स कर लेते हैं.

मैं बोली- भाई अभी घर पर सब हैं, रात तो अपनी है ही मेरी जान.

मगर भाई नहीं माना. उसने जिद करके अपना लंड मेरे मुँह में दे ही दिया.

मैं बैठ कर उसका लंड चूसने लगी. मेरे अन्दर आज पहले से ही सेक्स का खुमार चढ़ा था … लंड चूसने से और नशा छा गया. मैं ज़ोर ज़ोर से भाई का लंड चूस रही थी. तभी किसी के आने के आवाज़ आई, तो मैं झट से अलग हो गई और भाई ने सब ठीक कर लिया. हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बात करने लगे.

मेरा मन भी अब उससे चुदने को करने लगा था. भाई का लंड तो ले नहीं सकती थी … तो बाथरूम में जाकर मैंने अपने आपको शांत किया.

जैसे जैसे रात गहरी होती गई … सब सो गए. मैं सबसे छिप कर भाई का लंड चुत में लेने के लिए अपने भाई के पास आ गई. मेरा भाई अब तक सो चुका था.

मैंने उसके कमरे के दरवाजे को धीरे से बंद किया और सिटकनी लगा कर घूम गई. मैं इस समय बहुत चुदासी हो रही थी. मैंने जल्दी से अपने ऊपरी कपड़े उतार कर एक तरफ फेंक दिए. मैं अब ब्रा और पैंटी में रह गई थी. मैंने भाई के पास जाकर उसका लोअर खींच कर उतार दिया. साथ साथ में उसका अंडरवियर भी खिंचा चला आया. मैंने देखा कि भाई का सोया हुआ लंड भी मस्त लग रहा था. मैं भाई के लंड को चूसने लगी. लंड चूसते समय भाई को गीला गीला सा लगा तो उसकी आंखें खुल गईं.

भाई मुझे गाली देते हुए बोला- भैन की लौड़ी … साली आ गई अपने आदमी के पास लंड लेने.

मैं हंस दी और उसका लंड चूसने लगी. धीरे धीरे भाई का लंड एकदम खड़ा हो गया. पूरा फूल कर लंड अपनी औकात में आ गया. मैं जल्दी से अपनी चड्डी और ब्रा उतार कर भाई के लंड के ऊपर आकर अपनी चुत में लेने लगी.

मैं अपने भाई का पूरा लंड अन्दर ले गई, तो भाई बोला- साली बड़ी जल्दी लंड खा गई … किसी और का भी लेने लग गई क्या?
मैं हंस दी और बोली- भाई मेरी चुत के लिए तो आपका लंड ही बहुत है.

ये बोल कर मैं अपनी भैया के मोटे लंड से चुदने लगी.

‘आआह … आआहह … भाई चोदो ज़ोर से चोदो … बड़ा मजा आ रहा है.’

पूरे रूम में पट् फट् की आवाज़ आ रही थी.

‘आह बसस्स भाई … बहुत अन्दर तक जा रहा है … आह मैं मर जाऊंगी … आह धीरे..’
मेरी बात सुनकर भाई मुझे और ज़ोर से चोदने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने मुझको डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और ज़ोर से पीछे से लंड पेल कर मुझे चोदने लगा.

बीस मिनट की चुदाई के बाद भाई ने अपना सारा लंड रस मेरी चुत में छोड़ दिया.

वो अपने लंड की पिचकारियां मेरी चुत में छोड़ते हुए बोला- आआहह … मज़ा आ गया यार. … कल तेरी गांड मारूंगा.

मैं बोली- भाई नहीं … गांड नहीं … उधर बहुत दर्द होता है.
भाई बोला- नहीं मेरी बहना … मैं प्यार से तेरी गांड मारूंगा.
मैं बोली- यहां नहीं … मैं दिल्ली आऊंगी … तब मार लेना.

भाई ने मुझको किस किया. मैं भाई की बांहों में नंगी ही लेट गई.

मुझे अपनी फ्रेंड की बात याद थी.

मैंने भाई को बताया कि मेरी एक फ्रेंड आपसे चुदवाना चाहती है.

भाई ने मेरी सहेली के बारे में मुझसे बात की और उसका फिगर कैसा है, ये सब पूछा.

मैंने तान्या के सेक्सी शरीर की बात भाई को बताई, तो भाई का लंड तान्या की चुदाई करने के लिए खड़ा हो गया.
वो बोला- ठीक है … कब चुदवाएगी तान्या. मैं बोली- जब आप बोलो.

तान्या की चुत मिलने का सुनते ही भाई ने कहा- उसकी चुदाई पहली फुर्सत करूंगा. मगर अभी तेरी एक बार फिर से लेने का मन हो गया है.
मैं भी अपने भाई के लंड से दुबारा चुदने को बेचैन हो गई थी.

इस बार भाई से सुपरफास्ट और बहुत हार्ड तरीके से मेरी चुत चुदाई कर डाली. उसने इतनी स्पीड में चुदाई की थी कि मेरी चुत भी दर्द करने लगी थी.

भाई बोला- यार तान्या को जल्दी चुदवाना … तेरी बात सुनकर मेरे लंड में आग लग गई है.
मैं थोड़ी दुखी हो गई.

वो बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- तान्या के बाद आप मुझको तो चोदोगे नहीं?
भाई बोला- अरे नहीं यार … तान्या को एक बार खुश कर देता हूँ. उसके बाद मैं तो तेरा ही हूँ. जब तू बोलेगी तब तुझे चोद दूंगा.
मैं बोली- ओके भाई.

मैं कपड़े पहन कर अपने रूम में चली गई. सुबह कॉलेज में मैंने तान्या को रात की चुदाई के बारे में सब बता दिया.

वो गाली देते हुए बोली- साली अकेली ही चुद कर आ गई भोसड़ी वाली. मेरी चुत का क्या होगा?
मैं बोली- मर मत. … भाई से बात हो गई है … तू बता तुझे उससे कब चुदना है.
वो बोली- कल ही बुला ले.
मैंने कहा- किधर चुदेगी?
वो बोली- हां यार … ये तो दिक्कत है … उसे कहाँ बुला लूं … मादरचोद कोई प्लेस भी नहीं है.

मैं उसकी तरफ देखने लगी.
वो बोली- होटल में चली जाऊंगी.
मैंने ओके कह दिया और घर आ गई.

घर आकर मैंने भाई को बता दिया और कल उसके साथ चलने का कहा.
भाई भी राजी हो गया.

अगले दिन मैंने तान्या को भाई से मिलवाया, तो दोनों बिना किसी की शर्म के ऐसे मिल रहे थे … जैसे दोनों पहले ही एक दूसरे जानते हों.
थोड़ी देर में मैं कॉलेज आ गई.

अब आगे की स्टोरी तान्या से सुनिए.

हैलो मैं तान्या … मैं शिवानी के भाई के साथ होटल के रूम में आ गई. ये रूम मैंने ही बुक किया था. कमरे में जाते ही मैं शिवानी के भाई से चिपक गई. पागलों के जैसे उसको किस करने लगी. वो भी गर्म हो गया और मेरा पूरा साथ दे रहा था. मेरे चूचे दबा रहा था. वो दो तीन मिनट में ही पूरा पागल हो गया.

उसने धीरे धीरे करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, मैंने उसके कपड़े हटा दिए.

उसका आठ इंच कर खड़ा लंड देख कर मेरी तो गांड फट गई. मैं उससे बोली- कैसे जाएगा … ये तो बहुत मोटा और लंबा है.
वो बोला- तू मेरा कमाल देख … इस लंड को तो तू उछल उछल कर चुत में लेगी.
मैं हंस दी.

उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगा. मैं पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी ‘आआहह … आआहह … चाटो … डियर मज़ा आ रहा है … आआह..’

कुछ देर मैं भी उसका लंड चूसने लगी. फिर मैंने उससे कहा- अब नहीं रहा जा रहा … मुझे चोद दो प्लीज़.

उसने मुझे बिस्तर में चित्त लेटा दिया और मेरी टांगें ऊपर करके लंड चुत की फांकों में सैट कर दिया. उसके मलंद का सुपारा एकदम दहक रहा था. उसने मेरी चुत में लंड का एक शॉट मारा … तो उसका आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया

मेरी मैया चुद गई … ऐसा लगा जैसे किसी ने गर्म सलाख चुत में ठांस दी हो. मेरी दर्द से भरी तेज चीख निकल गई- आआहह … आआहह … निकालो.

और मेरी आँखों से आंसू निकल गए. मैंने इतना मोटा लंड अब तक नहीं लिया था. हालांकि मेरे भाई का लंड भी सात इंच का है … लेकिन शिवानी के भाई का लंड मोटा बहुत था.

थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हुआ तो वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.
मैं भी ‘आआहह … आआहह..’ करके चुद रही थी. वो ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदे जा रहा था.

कोई बीस मिनट की चुदाई में मेरी जान निकल गई. उसने मेरी चुत में ही सारा रस छोड़ दिया और मेरे ऊपर लेट गया.
थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटा रहा. फिर बोला- तेरी लेने में मज़ा आ गया.
मैं उसको किस करने लगी.

उस दिन उसने मुझको तीन बार चोदा. शाम को घर आकर मैंने शिवानी को फोन पर सब बता दिया और सो गई.

तो दोस्तो, मेरी सहेली तान्या मेरे भाई से चुद कर खुश हो गई थी. भाई को भी उसे चोदने में मज़ा आ गया था.

भाई ने घर आकर मुझे गले से लगाया और बोला- सच में तान्या बड़ी टेस्टी थी … आज उसकी चूत लेने में बड़ा मज़ा आया.

मैंने कहा- उसकी तो ले ली … मेरी कब लोगे?
भाई- तुम्हारी कल लूंगा … कल तुमको और भी मस्त चोदूंगा.

उस दिन के बाद मैं और तान्या भाई से चुद रही हैं. तान्या और मैं अपने भाई से एक साथ भी चुद चुकी हैं. तान्या के भाई से भी मैं चुद चुकी हूँ. हम चारों ने एक बार ग्रुप सेक्स भी किया है. वो सारी बातें अगली मदमस्त सेक्स कहानी में लिखूंगी. लव यू फ्रेंड्स आप भी चोदते रहिए और लड़कियों तुम सब भी चुदती रहो. जवानी एक बार ही आती है … इसके पूरे मजे लो.

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