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वो मुझे चोदने लगा

मेरा नाम निशा है और मैं 22 साल की हूं. मेरी हाईट 5.5 फीट है और मेरा रंग गोरा है. मेरा फिगर 35-28-34 है और मैं दिखने में बहुत सेक्सी हूं.

यह बात 4 साल पुरानी है जब मैं 12वीं में थी. मेरी क्लास के सारे लड़के मेरे बूब्स दबाने के लिए मरे जाते थे.

उन सबसे अलग मेरी क्लास में एक हैंडसम लड़का था. उसकी पर्सेनेलिटी बहुत अच्छी थी. मैं उसको देखा करती थी. उसकी पैंट में उसका लंड भी दिखता रहता था.

कई बार चलते हुए या क्लास में बैठे हुए भी उसका लंड दिखाई देता था. मेरी क्लास की अन्य लड़कियां भी उसको देखा करती थीं. उसकी पैंट की ओर उसके लंड को भी चोर नजर से देखती रहती थीं.

एक दिन टीचर ने हमारी सीट बदलवा दी और इत्तेफाक से उस लड़के की सीट मेरी सीट के पीछे ही आ गयी.

पीछे आकर बैठने के बाद वो बड़बड़ाता हुआ उसको गाली देने लगा- साली रंडी ने सीट बदलवा दी … इसकी मां की … साली ने सारा मूड खराब कर दिया.
मैं पीछे मुड़कर देखने लगी तो वो थोड़ा चुप हुआ.

फिर मैं बोली- ऐसे गाली मत दे उनको, टीचर है वो!
वो बोला- तुझे बड़ी लगी हुई है उसकी इज्जत की?
मैंने कहा- तो ठीक है, और गाली दे … अगर उसने सुन लिया तो तेरी खैर नहीं.

फिर वो चुप हो गया. उसके बाद उसने गाली नहीं दी.

बीच बीच में वो मुझसे बात करता रहा. मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं भी उसको पसंद करती थी.

फिर बातों ही बातों में उसने मुझसे पूछा- तेरा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने जवाब दिया- हां है.
वो बोला- फिर तो तूने उसके साथ किया भी होगा?
मैंने अन्जान बनते हुए कहा- क्या?

फिर वो बेशर्म होकर बोला- सेक्स.
मैं बोली- नहीं, मैंने कभी नहीं किया.
उसने कहा- तो फिर तेरे इतने बड़े (बूब्स) कैसे हैं?

मैं हंसकर बोली- पता नहीं.
उसके बाद मैंने उससे बात नहीं की क्योंकि टीचर देख रही थी.
फिर वो भी आराम से बैठ गया.

तभी लंच का समय हो गया. लंच के बाद हमारा खेल का पीरियड था लेकिन मुझे लंच के बाद पेट में हल्का दर्द होने लगा था.

मैंने टीचर को ये बात बताई.
वो बोली- ठीक है, तो तुम प्लेग्राऊंड में मत जाना.

जब पीरियड शुरू हुआ तो क्लास के सारे स्टूडेंट नीचे चले गये. मैं कमरे में अकेली बैठी रही.

क्लास खाली देखकर मैं बेंच पर लेट गयी क्योंकि मुझे बैठने में दिक्कत हो रही थी.

मैं आंखें बंद करके लेटी हुई थी कि अचानक से किसी ने मेरी चूची को सहला दिया.
मैं सकपका गयी और एकदम से उठी तो सामने वही लफंगा खड़ा हुआ था.
वो मेरा चेहरा देखकर हंसने लगा.

गुस्सा होते हुए मैंने कहा- पागल है क्या तू, क्या कर रहा था ये?
उस पर जैसे मेरे गुस्से का फर्क ही नहीं पड़ा.

वैसे तो मैं भी उसको पसंद करती थी लेकिन उसने बिना पूछे मुझे छू लिया इसलिए मैं नाराज थी.

वो बोला- तूने मेरी बात का जवाब नहीं दिया था तब.
मैंने कहा- कौन सी बात?
वो बोला- यही कि … तेरे इतने बड़े कैसे हो गये?

मैं बोली- उससे पहले तू ये बता कि तू क्लास में कैसे आ गया?
उसने कहा- मेरे भी पेट में दर्द है, मैं हम दोनों का दर्द मिटाने आया हूं.

मैं जान गयी कि ये उसने जानबूझकर किया है. उसने मेरी और टीचर की बातों को सुन लिया था.

फिर वो मेरे पास आ गया और मेरे हाथ को सहलाने लगा.
वो बोला- यार, एक बार तेरे टच करने का बहुत मन कर रहा है मेरा. बहुत बड़े हैं तेरे.

मैं मना करने लगी. मगर वो कहां मानने वाला था.

वो मेरे बहुत पास आ बैठा. मैं भी उसको पसंद करती थी. उसने आकर मेरी चूचियों को छूना और धीरे से सहलाना शुरू कर दिया.
मैंने भी उसका मन रखा और उसको कुछ नहीं कहा.

उस टाइम सर्दियां थीं तो मैंने स्वेटर पहना हुआ था. स्वेटर के नीचे से उसका हाथ आया और वो मेरे बूब्स को दबाने लगा.

मुझे शर्म आने लगी तो मैंने उसका हाथ हटा दिया.
मैं वहां से उठकर दूसरे बेंच पर जा बैठी.

मुझे खुद पर गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि मैं उसके चक्कर में अपने पहले वाले बॉयफ्रेंड को भी धोखा दे रही थी.
मगर वो मेरे बॉयफ्रेंड से देखने में कहीं ज्यादा अच्छा था और मैं उसको रोक नहीं पा रही थी.

वो फिर से मेरे पास आ गया और बोला- छू तो लिये मैंने, एक बार अब दिखा भी दे तेरे बूब्स?
मैंने कहा- नहीं. कोई आ जायेगा.
वो बोला- कोई नहीं आयेगा.

फिर उसने समीज समेत मेरे कुर्ते को उठा दिया और मेरी चूची नंगी हो गयी.
उसने नंगी चूचियों को हाथों में भरा और जोर से दबा दिया.

मैं एकदम से उठ गयी.

इतने में ही क्लास के दूसरे छात्र भी आ गये. मैं अपनी सीट पर आ गयी. वो भी अपनी सीट पर आ बैठा.
उसने चुपके से मेरे कान में कहा- कल आयेगी क्या?
मैं बोली- हां, आऊंगी.

उसने कहा- ठीक है, तो फिर कल तुम काली ब्रा और काली ही पैंटी पहन कर आना.
फिर वो वहां से हटकर अपनी सीट पर चला गया.

अगले दिन जब मैं स्कूल पहुंची तो वो पहले से ही क्लास में बैठा हुआ था.
मैं अपनी सीट पर जाती उससे पहले वो वहां बैठ गया.

फिर मैं शर्मा कर बोली- क्या? ये क्या है, मुझे बैठने दे.

वो बोला- आज का क्या प्लान है? अगर तू हां करे तो कुछ करते हैं आज?
फिर वो खड़ा हुआ और धीमे से मेरे कान में बोला- आज लायब्रेरी का पीरियड है. अगर कुछ मूड हो तो बताना.

फिर अचानक से उसने मेरे गाल पर किस कर दी और अपने हाथ से मेरी गान्ड पर हाथ फेर कर चला गया.
मैं वहां 2 मिनट तक शॉक में ही खड़ी थी. तभी क्लास में बाकी बच्चे भी आना शुरू हो गये.

उसके बाद क्लास शुरू हो गयी. सब अपनी अपनी सीट पर बैठे थे.
वो मेरे पीछे ही था. वो बार बार अपना हाथ मेरी गांड पर लगा रहा था. मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

उस दिन मैं शॉल लेकर आई थी. उसने इसी का फायदा उठाया और नीचे ही नीचे मेरी शॉल में हाथ देकर मेरी चूचियों तक पहुंच गया.
उसने एक दो बार मेरी चूची दबा दी और मैं असहज हो गयी क्योंकि क्लास में बाकी स्टूडेंट्स भी थे.

पहले एक दो पीरियड वो ऐसे ही करता रहा. फिर म्यूजिक का पीरियड आया तो ज्यादार बच्चे वहां चले गये.
मैं और वो वहीं क्लास में रह गये.

हमारे साथ ही 4-5 छात्र और भी थे क्लास में. वो सब अपना अपना समूह बनाकर गपशप में लग गये.

अब वो मेरी सीट पर मेरे साथ ही आ बैठा क्योंकि मेरे साथ बैठी लड़की भी म्यूजिक क्लास में चली गयी थी.

उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा.
मैंने शॉल ओढ़ा था तो कुछ दिख नहीं रहा था.

उसका हाथ धीरे धीरे मेरे सूट के नीचे मेरी नाभि तक पहुंच गया.
मुझे सिरहन हो रही थी.

फिर उसने मेरी सलवार में हाथ दे दिया और मेरी चड्डी के अंदर हाथ देते हुए मेरी चूत को छू लिया.

चूत पर हाथ लगते ही मुझे करंट सा लगा. मैं एकदम से सिहर गयी.
मगर उसने उसी वक्त मेरी चूत को जोर से रगड़ते हुए सहला दिया.
मैं कामुक होने लगी और वो मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब मेरी जांघें अपने आप ही खुलकर उसके हाथ को अच्छी तरह से रास्ता देने लगीं ताकि उसकी उंगलियां मेरी चूत में और अंदर तक जा सकें.
उसने पूरी उंगली घुसा दी और मुझे बहुत मजा आने लगा.

मेरी सांसें तेजी से चलने लगीं और मैंने उसकी जांघ को कस कर पकड़ लिया.
वो अब और तेजी से उंगली चलाने लगा और फिर मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई.
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

अच्छा हुआ कि मैंने अपने बैग में एक अतिरिक्त कपड़ा रखा हुआ था. मैंने कपड़ा निकाला और धीरे से शॉल के नीचे ही अपनी सलवार में कपड़ा डालकर अपनी चूत का पानी पौंछ दिया.

वो अब उठकर अपने दोस्त के पास चला गया और हाथ धुलवाने लगा.
मेरी चूत के रस में उसका हाथ भी गीला हो गया था. हाथ धुलते हुए वो मेरी तरफ देख रहा था और मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी.

उसके बाद लंच हुआ और फिर लाइब्रेरी का पीरियड आ गया.
सब बच्चे जाने लगे.

वो मेरे पास आया और बोला- चलेगी क्या?
मैंने कहा- कहां चलना है?
वो बोला- तू चल तो सही … मैं बताता हूं.

हम दोनों लाइब्रेरी न जाकर दूसरी तरफ चले गये.
वो मुझे लड़कों के वॉशरूम में ले गया.

वहां जाते ही हम दोनों एक वॉशरूम में घुस गये और दरवाजा बंद कर दिया.

मैंने कहा- कोई आ गया तो?
वो बोला- कोई नहीं आयेगा.

फिर उसने अपनी जेब से कॉन्डम निकाला.
मैं कॉन्डम देखकर चौंक गयी.
वो बोला- ऐसे क्या देख रही है, मेरी नजर तुझपर पहले दिन से ही थी. अब जाकर तू हाथ आयी है.

उसके बाद उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया.
उसका लंड पहले से ही तनाव में था. मैंने उसका लंड पकड़ लिया और वो कॉन्डम का रैपर फाड़ने लगा.

फिर उसने अपनी पैंट खोली और नीचे से सरका कर नंगा हो गया. मगर पैंट उसकी टांगों में ही फंसी रही.

उसने मुझे सलवार खोलने को कहा.
मैंने शॉल उतार कर एक तरफ रखा और फिर अपनी सलवार खोल दी.
उसने मेरी पैंटी नीचे कर दी. अपना लंड मेरी चूत पर लगाकर वो मुझसे लिपट गया.

मुझे किस करने लगा और नीचे ही नीचे मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा.

अब मैं एकदम से गर्म होने लगी. उसके होंठ मेरे होंठों पर और उसका लंड मेरी चूत पर कहर ढहा रहे थे.

उसने मेरा कुर्ता ऊपर किया और काली ब्रा निकाल कर फिर मेरी चूचियों को पीने लगा.

मैं पागल होने लगी. उसकी जीभ मेरे निप्पलों पर जादू कर रही थी. मेरे निप्पल तन गये और अब मैंने उसके सिर को चूचियों पर दबाना शुरू कर दिया.

फिर वो नीचे बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.
मैं बदहवास सी होने लगी. मेरी चूत में बहुत मजा आ रहा था.
पहली बार मैं किसी लड़के से चूत चटवाने का मजा ले रही थी मैं क्योंकि मेरे पहले बॉयफ्रेंड ने कभी मेरी चूत नहीं चाटी थी.

अब कुछ देर चाटने के बाद वो उठा और मुझे लंड चूसने के लिए कहने लगा.
मैंने मना कर दिया क्योंकि उस वक्त लंड मुझे बहुत गंदा लगता था.

फिर उसने अपने लंड पर कॉन्डम पहन लिया.
उसके बाद उसने लंड को मेरी चूत पर रख दिया और जोर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

फिर उसने मेरी टांग हल्की सी उठाई और एक धक्का लगा दिया.
उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में उतर गया.

मेरी आह्ह … निकल गयी और मैं उससे लिपट गयी.
वो मेरी पीठ को सहलाने लगा और फिर मेरी गर्दन और गालों को चूमने लगा.

फिर उसने दूसरा धक्का दे दिया और इससे पहले कि मैं चिल्लाती उसने मेरे मुंह को अपने होंठों से बंद कर दिया.
मेरी चीख अंदर ही रह गयी.

फिर उसने धीरे धीरे पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
मेरी आंखों से आंसू गिरने लगे.
वो मुझे चोदने लगा.
मुझे दर्द होता रहा लेकिन वो चोदता गया.

फिर कुछ देर बाद मुझे चुदने का मजा आने लगा और धीरे धीरे दर्द कम हो गया.
अब मैं भी मजा लेकर चुदने लगी.
मैंने उसको कस कर पकड़ लिया और अपनी चूत के धक्के भी बदले में लगाने लगी.

अब मैं खुद उसके होंठों को चूस रही थी.
वो भी मशीन की तरह मेरी चूत को पेलने में लगा हुआ था.

उसने 20 मिनट तक मेरी चूत वहीं वॉशरूम में चोदी.
मैं झड़ चुकी थी.

फिर वो अचानक से रुक गया. उसने लंड बाहर निकाला और कॉन्डम उतार दिया. उसको उसने नीचे टॉयलेट सीट में डालकर फ्लश कर दिया.

फिर उसने मेरे हाथ में लंड दे दिया और हिलाने को कहा.

मैं उसका लंड हिलाने लगी और दो मिनट बाद उसके लंड से सफेद वीर्य निकला. उसकी कई पिचकारी छूटी और फिर वो शांत होता चला गया.
मेरा हाथ उसके माल में सन गया.

उसके बाद उसने अपने लंड को धोया और मैंने अपना हाथ धो लिया.
फिर मैंने भी अपने कपड़े सही किये.

अब उसने धीरे से बाहर की ओर झांका. उसने मुझे निकलने का इशारा किया.

मैं निकली और चुपके से अपनी क्लास में चली गयी.

कुछ देर के बाद वो भी आ गया.

मैं काफी थकी हुई महसूस कर रही थी. मैं वहीं बेंच पर लेटकर सो गयी.

उस दिन के बाद अक्सर हम क्लास में मस्ती करने लगे. जब क्लास में कोई न होता तो वो मुझे चूसने लगता और मेरे बूब्स दबा देता था. मैं उसके लंड की मुठ मार देती थी.

अपने पुराने बॉयफ्रेंड को मैंने फिर छोड़ ही दिया. मैं अपने नये बॉयफ्रेंड के साथ मजे लेने लगी.

अभी भी हम दोनों बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड हैं और एक दूसरे के साथ पूरा मजा करते हैं और एक दूसरे की फंतासी भी पूरी करते हैं.

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मेरी पहली सील पैक चूत की चुदाई

मेरा फिगर 30-28-30 है। मैं 20 साल की हूं और चुदने के लिए बेचैन भी हूं। मैं आपको अपनी पहली चूत मराई की कहानी बताने जा रही हूं। मैं जो भी बताने जा रही हूं यह बिल्कुल एक सच्ची घटना है।

कुछ दिन पहले की बात है कि मैं हॉस्टल से अपने घर जा रही थी। मेरी बड़ी बहन की शादी तय हो गई थी। बहुत सारे दोस्त आ रहे थे और मैंने भी अपने कुछ दोस्तों को बुलाया हुआ था।

उनमें एक दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड समीर भी था। वो शादी से दो दिन पहले ही आ गया था। अभी तक मेरी सील पैक चूत की चुदाई नहीं हुई थी। समीर का लंड भी मैंने अभी तक नहीं चखा था।

जब वो शादी में आ गया तो मुझसे अपने रहने का कमरा पूछने लगा।
मैंने उसको मेरा कमरा दिखा दिया। मैं दीदी के पास सोने वाली थी।

उसके बाद मैंने उसको हग किया और किस किया। फिर हम दोनों अपने अपने रूम में सोने चले गये।

रात को मेरी नींद खुल गयी। मुझे कुछ आवाजें आ रही थी। जब मैंने उठकर देखा तो मेरी आंखें फटी रह गयीं. मेरे मामा और मामी दोनों चुदाई में लगे हुए थे. मेरी मामी नीचे नंगी लेटी हुई थी और मामा मेरी मामी की चूत में लंड डाल रहे थे।

मामी मस्त होकर सेक्स के मजे वाली आवाजें निकाल रही थी।

ये देखकर मैं भी गर्म होने लगी. मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने वहीं पर अपनी पैंटी के अंदर हाथ डाल लिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।
मामी की चुदाई देखते हुए मैं चूत को सहला रही थी।

फिर मैंने तेजी से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

जब जब मामा का लंड मामी की चूत में जा रहा था तो मैं उनके लंड को अपनी चूत में जाता हुआ महसूस कर रही थी।
मैं सोच रही थी कि कोई मेरी चूत में भी ऐसे लंड डाल दे।

अब मामा तेजी से मामी को चोद रहे थे. मैं भी जोर से अपनी चूत को सहला रही थी।
इतने में ही मेरी चूत से एकदम पानी निकल गया। मेरी जांघें पूरी गीली हो गयीं।
मैं फिर वहां से वापस आ गयी.

मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत को साफ किया और बेड पर आकर लेट गयी. उसके बाद मैं लेटी रही और सोचती रही।
मैं सोच रही थी कि काश कोई लंड मेरी चूत के लिए भी होता। मैं समीर के बारे में सोचने लगी। समीर का लंड मैंने नहीं लिया था।

ऐसे ही सोचते हुए मुझे नींद आ गयी.

फिर जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं मामी की चुदाई के बारे में ही सोच रही थी.
मेरा मन समीर से मिलने का कर रहा था। मैं उसके रूम में चली गयी।

मैं जब वहां पहुंची तो वह नहाकर बाहर आया था। उसने अपनी टांगों पर तौलिया लपेटा हुआ था. वो शायद अपना अंडरवियर ढूंढ रहा था।
फिर मैंने देखा कि उसका तौलिया बेड में अटक गया और खुलकर नीचे गिर गया। वो एकदम से नंगा हो गया.

उसने जल्दी से यहां वहां देखा और तौलिया लपेट लिया. फिर वो पलटा तो पीछे मैं खड़ी दिख गयी।
उसने पूछा- तुम कब आईं?

मैं बोली- मैं बस अभी आई हूँ।
वो बोला- कुछ देखा तो नहीं?
मैं बोली- नहीं।

ये बोलकर फिर मैं उसको तैयार होने के लिए कहकर वापस आ गयी।

मैंने समीर का लंड देख लिया था। उसका लंड 7 इंच के करीब था और 3 इंच का मोटा था। मैं उसका लंड लेना चाह रही थी।

फिर दोपहर में सब लोग शॉपिंग के लिए जाने लगे। मुझे भी चलने के लिए कहा लेकिन मैंने बीमारी का बहाना बनाकर मना कर दिया. मैं वहीं रुक गयी।

उन सबके जाने के बाद मैं समीर के रूम में गयी।
वो लेटा हुआ था.

मैं उसके बेड पर चली गयी और उसके ऊपर लेटकर उसको किस करने लगी। वो भी मुझे किस करने लगा।

फिर उसने मुझे हटाते हुए कहा कि कोई देख लेगा।
मैंने बोला- कोई नहीं देखेगा, सब लोग मार्केट में गये हुए हैं.

उसके बाद हम दोनों फिर से किस करने लगे। उसका हाथ मेरी पैंटी पर गया तो वो गीली हो गयी थी।
वो मेरी चूत को सहलाने लगा।

उसके ऐसे बर्ताव से मैं गर्म हो गयी थी और चुदना चाहती थी।

उसके बाद उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया.
मैं नाटक करने लगी कि कोई आ जायेगा।

वो कहने लगा कि मुझे पता है तू चुदना चाह रही है। ज्यादा नाटक मत कर!
फिर उसने मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और मेरे बूब्स को चूसने लगा।

मैं भी उसको चूची चुसवाने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था. पहली बार मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरे बूब्स को चूसा था।

फिर वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरी गांड को भी दबाने लगा.
मुझे मजा आ रहा था लेकिन दर्द भी हो रहा था।

उसका लंड उसकी पैंट को फाड़ने वाला था। मुझे उसके लंड का तनाव साफ महसूस हो रहा था।

वो मुझे सब जगह से चूमने चूसने लगा। मैं यही चाह रही थी. मुझे समीर के साथ बहुत मजा आ रहा था. उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। मेरे भी कपड़े उसने उतरवा दिये।

मैं बेड पर उसके सामने बिना ब्रा के लेटी थी। वो अंडरवियर में था औऱ मेरे ऊपर लेटकर मेरे बूब्स को पीने लगा. मैं अपने चूचे उसको पिलाने लगी।

फिर उसने मेरी चूत पर लंड लगाना शुरू कर दिया।

मुझे मजा आ रहा था। मैं चाहती थी कि वो लंड को जल्दी से मेरी सील पैक चूत के अंदर डाल दे.
मगर उसके लंड पर अंडरवियर था और मेरी चूत पर पैंटी थी।

वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबा रहा था। मेरे बूब्स लाल हो गये थे। मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था। दर्द भी हो रहा था।

फिर उसने मेरी पैंटी में हाथ देकर मेरी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया। मैं मचलने लगी।

वो मेरी चूत में उंगली से चोदने लगा।

मैं उसके होंठों को चूसने लगी। उसके लंड को पकड़ने लगी।

वो बोला- रुक जा साली रंडी, तेरी चूत में यही लौड़ा पेलना है मुझे। मुझे पता है कि तू मेरा लंड लेना चाह रही है।
मैं उसको किस करती रही और उसके लंड को पकड़ कर हिलाती रही।

उसके लंड को चूत पर लगवाकर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था.
वो तेजी से मेरी चूत में उंगली को अंदर बाहर किये जा रहा था.
मैं पागल हुई जा रही थी।

फिर मेरी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया. मेरी चूत पूरी बह निकली।
मुझे बहुत मजा आया।

अब वो मेरी चूत में जीभ से चाटने लगा और मैं पागल होने लगी।
मैं बोली- आज डाल दे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

वो बोला- हां मुझे पता था साली, आ गयी तू लाइन पर! आज तेरी चूत को चोद दूंगा. फाड़ दूंगा इसको साली। बहुत मन है तुझे लंड लेने का। मैं तुझे आज पूरा लंड दूंगा। तू याद करेगी।

फिर वो अपने लंड पर तेल लगाने लगा.
मैं खुश हो रही थी और डर भी लग रहा था।
मेरी चूत को आज लंड मिलने वाला था लेकिन डर लग रहा था कि समीर का लंड मेरी चूत की क्या हालत करेगा।

उसने मेरी चूत पर भी तेल लगा दिया। फिर उसने मेरी सील पैक चूत पर निशाना लगा दिया. उसने लंड को चूत पर रखा और धक्का देने लगा।

उसका थोड़ा सा लंड ही गया था कि मैं चिल्ला पड़ी- आईई … आह्ह … निकाल इसे … आह्ह … ऊई मां … मेरी चूत … फट गयी … आह्ह … निकाल ले समीर … आह्ह बहुत दर्द हो रहा है मेरी चूत में!

समीर ने मेरी एक न सुनी और मेरी चूत में लंड को डालता चला गया।
उसका पूरा लंड घुसते ही मैं तड़पने लगी।
वो मेरे होंठों को अपने मुंह से चूसने लगा। मेरी आवाजें अंदर ही दब गयीं।

फिर उसने मेरे होंठों से होंठों को हटा लिया और मेरे मुंह पर हाथ रख दिया. वो जोर जोर से मेरी चूत में लंड के धक्के लगाने लगा।
मैं दर्द से तड़प रही थी और रो रही थी।

मेरी चूत से खून निकलने लगा था. समीर मेरी चूत में लंड को पेलता ही जा रहा था।
दस मिनट तक मैं दर्द में कराहती रही और वो मुझे चोदता रहा।

फिर मुझे भी मजा आने लगा. मेरा दर्द चला गया और मैं उसका साथ देने लगी।
अब मैं समीर के लंड से चुदने का मजा ले रही थी.

वो हांफ रहा था. उसके पूरे बदन में पसीना आ गया था।
मैं उसको चूमने लगी और अपनी गांड को उठा उठाकर चुदवाने लगी।

फिर वो और स्पीड से चोदने लगा.
मैंने उसको कस कर पकड़ लिया और फिर मैं झड़ने लगी।

उसके लंड से चुदते हुए मैं झड़ गयी। मुझे बहुत मजा आया लेकिन समीर चोदता ही रहा।

वो मुझे बीस मिनट तक लगातार चोदता रहा। अब वो मेरी चूत को फाड़ने में लगा हुआ था.

मेरी चूत में जलन हो रही थी लेकिन समीर नहीं रुक रहा था।
मैं उसको पीछे धकेलना चाह रही थी।

वो चोदते हुए बोला- साली, जब लंड लेने का मन कर रहा था तब नहीं सोचा कि दर्द भी होगा चुदने में? आज मैं तेरी चूत को फाड़ता रहूंगा। मैं तेरी चूत की प्यास मिटा दूंगा।
ये बोलकर वो फिर से चोदने लगा.

मैं उसके लंड को अपनी चूत में बर्दाश्त करती रही।

फिर उसका निकलने को हो गया. वो बोला- कहां गिराना है?
मैं बोली- अंदर नहीं गिराना है।

जब तक वो लंड को बाहर निकालने की सोचता तब तक उसके लंड से माल छूट गया और उसका माल मेरी चूत में गिर गया।
मैंने गुस्सा होकर कहा- ये क्या किया कुत्ते?
वो बोला- कुछ नहीं होगा. दवाई खा लेना।

फिर वो मेरे ऊपर ही लेट गया.
मुझे अब उस पर प्यार आ रहा था.

वो मुझे चूमने लगा.
और मैं भी उसको चूमने लगी।

वो बोला- अब दर्द नहीं हो रहा है ना?
मैं बोली- जलन हो रही है।

वो लंड को डाले हुए ही मेरे ऊपर लेट गया.
हम दोनों दस मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। उसका लंड मेरी चूत में ही सिकुड़ कर बाहर आ गया था। अब वो उठ गया. मेरी चूत की हालत बहुत बुरी हो गयी थी।

चूत पर खून लगा था और समीर के लंड का माल भी बाहर आ रहा था. मैं उठी तो मेरी चूत में जलन हो रही थी. मैं मुश्किल से बाथरूम में गयी और चूत को साफ किया. समीर ने मेरी मदद की।

फिर उसने मुझे नहलाया। उसके बाद नहाते हुए उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. वो मेरी गीली चूचियों को वहीं पर पीने लगा और मैं भी फिर से गर्म हो गयी. समीर ने मुझे बाथरूम में ही चोद दिया।

इस तरह से उस दिन समीर ने दो बार मेरी चुदाई की। उसके बाद हम दोनों तैयार हो गये. मैं अपने रूम में आ गयी। उस दिन मेरी पहली चुदाई हुई थी।

मेरी कुंवारी चूत की चुदाई होने के बाद मैंने अपनी वर्जिनिटी खो दी थी। उसके बाद फिर मैं शादी के दिन भी चुदी। दीदी की सुहागरात के दिन ही मेरी भी सुहागरात हो गयी। अब मैं कुंवारी नहीं रह गयी थी।

दीदी की शादी के बाद समीर वहां से चला गया.
फिर मैं समीर से कई बार चुदी और अभी भी चुदवाती रहती हूं.

इस तरह से मैंने अपनी पहली चुदाई करवाई।

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मेरी गांड बड़ी होने की वजह

मेरा नाम निशु तिवारी है और मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली हूँ. मेरा रंग दूध सा गोरा है. मेरी उम्र 41 साल की है.
मेरी चुचियाँ 38-E नाप की हैं, जबकि मेरी कमर 30 की … और गांड 40 इंच की है.
मैं एक वर्किंग वूमेन हूँ और एक स्कूल में इंग्लिश की टीचर हूँ.

अभी भी मेरी जवानी मस्त हिलोरें मारती है. मेरे अंदर औरत की चुदाई की तमन्ना उफान पर है.

मैं अक्सर झीने कपड़े वाली साड़ी पहनती हूँ. इसके साथ मैं जो ब्लाउज पहनती हूँ, वो काफ़ी गहरे गले का रहता है.
मेरा ब्लाउज आगे से और पीछे से दोनों तरफ से काफी खुला सा रहता है, जिसमें मेरे मम्मे अच्छे ख़ासे दिखते हैं और सभी को कामुकता से भर देते हैं.

इस गहरे गले वाले ब्लाउज से मेरे मम्मों की क्लीवेज बड़ी ही दिलकश दिखती है. चूंकि मेरा ब्लाउज स्लीवलैस रहता है, तो ये और भी ज्यादा कामुकता बिखेरता है.

मैं साड़ी भी नाभि के नीचे बांधती हूँ, जिससे मेरी नाभि और पूरा पेट एकदम साफ दिखता है. मतलब ये कि साड़ी ब्लाउज पहनने से मेरे बदन का कमर तक का ज्यादातर हिस्सा साफ़ दिखता है.

मेरी गांड बड़ी होने की वजह से जब मैं कमर मटका कर चलती हूँ … तो पीछे से मैं और भी ज़्यादा सेक्सी दिखती हूँ.
जो भी मुझे एक बार मेरी इस हिलती हुई गांड को देख लेता है, तो बस देखते ही रह जाता है.

आज से 3-4 साल पहले मेरे पति का निधन हार्टअटैक से हो गया था. मेरी एक ही बेटी आरुषि है, जो तब जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी.

पति के गुज़र जाने के बाद शुरुआत के कुछ साल मेरे और मेरी बेटी के लिए बहुत मुश्किल के थे. हम दोनों इनकी मौत के सदमे से उभर भी नहीं पाए थे कि हमको पैसों की दिक्कत आने लगी थी. जिसके लिए मैंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया.

मैंने अपने इस काम की बदौलत एक साल पहले मेरी बेटी की शादी कर दी थी. ये सब मैंने अकेले के बल पर किया था और मैं अब अकेली ही अपना पेट पाल रही हूँ.

कुछ साल पति का सदमा. फिर घर और बेटी की ज़िम्मेदारी और उसकी शादी की. जिस वजह से मुझे कभी अपने लिए टाइम ही नहीं मिला.

लेकिन अब मुझे ये अकेलापन खाए जा रहा था. मैं रोज़ रात को अश्लील पिक्चर और अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ कर अपनी चूत में उंगली करके अपने आपको दिलासा दे रही थी.
लेकिन अब मुझसे ये झूठी सांत्वना चूत को रास नहीं आ रही थी.
अब मेरी चूत को एक असली लंड और एक मर्द की ज़रूरत थी.

मेरी चार पक्की सहेलियां हैं, जिनमें से एक का नाम आबिया है. वो भी मेरी ही उम्र की है.
दूसरी का नाम अनामिका ये 37 साल की है और तीसरी सुमेधा, जो 40 साल की और चौथी ममता है. ये 34 साल की है.

ये सब भी मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ाती हैं. इन सबसे मैं हर तरह की बात कर लेती हूं.

चूंकि इन सबके पति ढीले पोले हैं, इसलिए ये सब पैसे देकर लड़के बुलाती हैं और उनसे चुदवा कर अपनी भूख शांत करवा लेती हैं.

लेकिन अब इनका ये खेल बंद हो गया है क्योंकि जिस जगह से वो सब लड़के आते थे, उस पर एक दिन छापा पड़ गया था. तो अब ये सब भी मेरी तरह तड़पती रहती हैं.

एक दिन जब मैं अपने स्कूल से अपनी सहेलियों के साथ निकली, तो वो सब दूसरी तरफ को जाने लगीं. सड़क पर ट्रेफिक ज्यादा था तो वो सब सड़क के पार जाने के लिए कुछ पल रुक कर बात करने लगीं.

मैं रोड के इसी तरफ रुककर किसी ऑटो के रुकने का इंतजार करने लगी.

मैं ऑटो के इंतजार में थी और उसी समय मैंने देख लिया था कि सड़क की दूसरी तरफ एक 19 या 20 साल का बहुत स्मार्ट सा लड़का खड़ा था.

ममता ने मुझे इशारा करके दिखाया और बोली- काश ये लड़का मिल जाता, तो इसको अपनी सारी जवानी दे देती.

तब तक आबिया बोली- अबे यार, अब तुम जवान ही कहां रही हो.
इस पर सुमेधा बोली- अरे यार, अभी भी हम सब किसी 21-22 साल की लड़की से कम नहीं हैं, बस कोई मिले तो.

इतने में सड़क पर कुछ ट्रेफिक कम हुआ और मेरी सारी सहेलियां सड़क पार करके चली गईं.
तभी वो लड़का मेरी तरफ आ गया. शायद वो भी ऑटो लेने के लिए इस तरफ आ गया था.

मेरे साथ अब वो भी ऑटो का ही इंतज़ार कर रहा था. मैं वहां से उसी लड़के के बाजू में आकर खड़ी हो गयी.

कुछ देर बाद एक खाली ऑटो हमारे करीब रुकी, तो पहले मैं उसमें जाकर एक किनारे बैठ गयी और वो लड़का भी मेरी तरफ वाली सीट पर बैठ गया.
ये ऑटो छह सवारी वाली ऑटो थी.

जब ऑटो आगे चली, तो धीरे धीरे उसमें मेरे बीच में दो सवारी और आ गईं. उसमें से एक सवारी हमारी सीट पर बैठ गई और एक सामने वाली सीट पर बैठ गई. इस तरह आखिरकार वो लड़का मेरे ही बगल में को हो गया और सामने वाली सीट भर गई थी. अब मैं भी बस यही प्रार्थना कर रही थी कि इस तरफ भी कोई और आ जाए तो ये लड़का बिल्कुल मेरे पास आ जाएगा.

शायद ऊपर वाले ने मेरी ये बात सुन ली और तभी एक बूढ़ी और बहुत मोटी सी औरत चढ़ी, तो ऑटो वाला मुझसे बोला- आप ज़रा साइड हो जाइए, सवारी बैठने दीजिए.

मैं जानबूझकर और दब गई और वो लड़का भी अब एकदम मेरे बदन से सट गया.

जैसे ही वो औरत बैठी तो उसने और जगह ले ली. इससे उस लड़के मेरे सिर के पीछे से हाथ निकाल कर रख लिया और एकदम मेरे से लग कर बैठ गया.

ऑटो चली, तो कुछ देर बाद जब झटका लगा. इस झटके से उस लड़के का हाथ मेरी खुली हुई बांह पर लग गया. मुझे बड़ा अच्छा लगा.

फिर अगले झटके पर मैंने जानबूझ कर अपना हाथ थोड़ा उसके हाथ की तरफ कर दिया.
उसने भी मेरे हाथ से अपना हाथ सटा लिया.

इससे मुझे लगा कि ये लड़का शायद मेरे साथ कुछ करना चाह रहा है.

मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उठा लिया और सामने की खिड़की के पाइप को पकड़ लिया. इससे मेरी साड़ी का खुला हिस्सा उसके हाथ की तरफ आ गया था.

तीसरे झटके में उसका हाथ पहले मेरे बगल में पेट पर छुआ.
जब मैंने कोई विरोध नहीं किया, तो उसने अपना हाथ और अन्दर ले जाकर मेरी चुचियों से टकरा दिया.
उसका हाथ मेरी चूचियों से लगा तो मुझे भी मज़ा आने लगा.

इसी तरह वो अब हर झटके का फायदा ले रहा था और मेरी चूचियों से खेल रहा था.

कुछ देर तक चलने के बाद एक औरत और चढ़ी, तो ऑटो में जगह नहीं बची थी. ऑटो वाले ने उस लड़के को आगे बुला लिया, तो उसने अपना किराया वहीं दे दिया और मुझे देखने लगा.

एकाएक उसने मुझे ऑटो से उतरने का इशारा किया, तो मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूं.

ऑटो आगे बढ़ी, तो मैंने हल्का सा पीछे मुड़ कर देखा … तो वो मुझे बुला रहा था. मगर ऑटो आगे बढ़ गयी थी.

मगर कुछ दूर जाने के बाद मुझे लगा कि मुझे उतर जाना चाहिए था. शायद ये मेरा अच्छा मौका था, जो मैंने गंवा दिया.

मैंने तुरंत ऑटो रुकवाया और उसको पैसा देकर फिर उसी तरफ जाने वाली एक ऑटो पकड़ ली.

मैं उधर उतर गई, जिधर वो लड़का उतरा था. मैं उस लड़के को ढूँढते हुई जा रही थी कि कुछ दूर पर वो लड़का मुझे दिख गया.

उसने भी मुझे देख लिया था. वो लड़का हांफते हुए मेरे पास आया और बोला- मुझे तो लगा कि आप नहीं रुकोगी.
मैंने उससे पूछा- बताओ क्या काम है, जिसके लिए तुम मुझे बुला रहे थे?

लड़का- मुझे आपका नंबर चाहिए.
मैं- क्यों क्या काम है?

लड़का- क्योंकि आप मुझे अच्छी लगी इसी लिए.
मैं- अरे तुमको नहीं पता, मैं शादी शुदा हूँ और मेरी और तुम्हारी उम्र देखी है … पागल हो क्या तुम?

लड़का- अब देखो आप मुझे अच्छी लगीं, तो मैंने आपको बोल दिया. बस अब इसमें उम्र और इतना नहीं मतलब होता है.
इस वक्त हम दोनों जहां खड़े थे, उसी के पीछे एक गली थी.

मैंने उससे बोला कि तुम इस गली में आ जाओ, इसमें बात करते हैं.

शुरुआत में वो मुझे मक्खन लगाए जा रहा था और मैं भाव खा रही थी.

कुछ देर बाद वो बोला- ठीक है, आप मुझे आप अच्छी लगी थीं … लेकिन शायद मैं आपको अच्छा नहीं लगा. तो छोड़ो जाने दो, अब मैं जाता हूं.

इतना बोल कर वो जाने लगा, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको रोका.
वो मुस्कुराने लगा.

मैंने उससे बोला- देखो मुझे भी तुम अच्छे लगे और पसंद हो, लेकिन हम दोनों की उम्र इस तरह की नहीं है कि हम ये सब करें.

वो मेरे थोड़ा पास आया और उसने मेरी नंगी कमर पर पीछे से हाथ डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा और बोला- जब पसंद हूँ … तब बात करने में क्या दिक्कत है.

मैंने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम सत्यम बताया.

वो एक जवान लड़का था और अभी मैंने उसको अपना नाम नहीं बताया था. बस उस लड़के से मैं नंबर लेकर चली आयी.

दो दिन तक मुझे उसी का ख्याल आता रहा. मैंने अपने आपको बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन उसको मैंने मैसेज कर दिया और उसने मुझे तुरंत पहचान लिया.

इसके बाद हमारी थोड़ी बहुत बात हुई, तो मैंने उससे उसकी कुछ फोटो मांग लीं.
लेकिन उसको अपनी फोटो अभी नहीं दी.

उस दिन रात में मैं उसी की फ़ोटो के सामने नंगी होकर अपनी चूत में उंगली की, तो आज मुझे एक अलग ही मज़ा मिला.

फिर कुछ दिनों तक मेरी उससे ऐसे ही बात चलती रही. वह एक 19 साल का लड़का था, जो कॉलेज में पढ़ता था.

इसी तरह बात करते हुए एक दिन उसने कहा कि मुझे तुमको देखने का बहुत मन कर रहा है.
मैंने बोला- ठीक है, उस दिन जिस गली में हम मिले थे … उसी गली में मिल लिया जाए!

उसने कहा- उस गली के आगे एक छोटा गार्डन है, जहां कोई आता जाता नहीं है. वहीं चला जाए और कुछ देर बैठ कर बात की जाए.
उसकी बात पर मैं भी राजी हो गई.

दो दिन के बाद वह अपने कॉलेज से जल्दी निकल आया और मेरी छुट्टी होने के बाद हम दोनों साथ में ऑटो से बैठ कर आए.
आज वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे चिपककर बैठा था और मेरी बांहों को सहला रहा था.

मैंने उसे रोका और उसका हाथ हटा दिया. यदि मैं नहीं हटाती तो शायद वो मेरी चूचियों को ही मसलना शुरू कर देता.

उस जगह पहुंचने के बाद हम दोनों उतरे और उसी गली से होकर उस गार्डन में आ गए. वो बहुत सुनसान इलाका था एकदम सन्नाटा था, वहां कोई आता जाता नहीं था.

उस गार्डन का दरवाजा बंद था, जिसको सत्यम ने खोला और मुझे अन्दर करके उसमें कुंडी लगा दी. हम दोनों एक पेड़ की आड़ में पत्थर पर बैठ गए.

वह मुझसे प्यार भरी बातें कर रहा था और मेरा हाल चाल पूछ रहा था. एकाएक बात करते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, जिससे मुझे भी अन्दर अन्दर गुदगुदी होने लगी, लेकिन मैंने सत्यम को यह चीज पता नहीं चलने दी.

फिर कुछ देर के बाद जब मैं जाने लगी तो सत्यम बोला- एक बार गले तो लगा लो.
मैंने हंस कर उसको गले से लगा लिया.

इससे मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां उसके सीने से चिपक गईं. उसने भी अपना हाथ पीछे करके मुझे पीठ और कमर से कसके जकड़ लिया.
इससे मुझे एक अलग ही सुरूर चढ़ने लगा तो मैंने अपना चेहरा उठा दिया.

उसका मुँह मेरे ही सामने था. मैंने अपने आपको बहुत रोका … लेकिन मेरे होंठ उसके होंठ पर छू गए और बिना रुके मैं उसके नर्म नाजुक गुलाबी होंठों को चूसने लगी.
वह भी मेरा बराबरी से साथ देने लगा. कुछ देर एक दूसरे को चूमने के बाद मैं उससे अलग हुई और घर चली आई.

आज उस लड़के के साथ जो हुआ था, उससे मेरे मन को बहुत प्रसन्नता मिली थी. अब हम दोनों खुली खुली बात करने लगे.

फिर एक दिन मेरी सहेली से मैंने अपनी यह बात बताई, तो वह बोली- निशु, तू तो बड़ी हरामी निकली. इतने दिनों से अकेले अकेले मजा ले रही थी और हम सबको आज बता रही हो.

उन लोगों ने मेरे मोबाइल पर उसकी फोटो देखी और सबने अपने अपने नंबर पर उसकी डिटेल ले ली.

तभी ममता बोली- क्या उसके साथ खाली चुम्मा चाटी ही करती रहोगी या आगे भी कुछ करोगी?
मैं बोली- यार तुम सब तो इस खेल में खिलाड़ी हो. मैं अभी इस खेल में नहीं हूं. मैंने उस लड़के को अभी अपना नाम तक नहीं बताया, मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं वह लड़का ऐसा वैसा ना निकले. कहीं मेरी पूरे समाज में बदनामी न हो जाए.

तब तक अनामिका बोल पड़ी- क्या तू पागल है? अगर ऐसा वैसा लड़का होता, तो इतनी बार मिलने पर तेरी चूचियां दबा देता. लेकिन उसने अब तक ऐसा कुछ नहीं किया. इसका मतलब वह लड़का ऐसा वैसा नहीं है. एक 19 साल का जवान लड़का तुझे मिला है यानि कि अभी उसकी पूरी जवानी तेरी है. तू जिस तरह चाहे, उसको अपने लिए इस्तेमाल कर सकती है. तू समझ ले कि तुझे एक चिकना लौंडा मिला है. तू उस पर जितना हाथ फ़ेरेगी, वह उतना ही तेरे लिए होता जाएगा. फिर तू तो घर पर अकेली ही रहती है, ले जा किसी दिन दोपहर में उसको अपने कमरे में और चैक कर उसका सामान कैसा है और कैसी परफॉर्मेंस देता है.

इस तरह से उन लोगों ने मुझे काफी उत्तेजित कर दिया और उसी वक्त मुझे सत्यम को फोन मिलाने को बोला.

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जोर से चोदो

दोस्तो, मेरा नाम आदित्य है और मुझे घर में सब आदी कह कर बुलाते हैं। मैं 21 साल का हूं और बी.फार्मा. के तीसरे वर्ष में हूं. जब से मैंने जवानी में कदम रखा है मुझे बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक रहा है. मैं जिम करता हूं तो मेरी बॉडी अच्छी बनी हुई है.

मगर ये तो हुई मेरे शौक की बात. अब मैं आपको एक राज की बताता हूं. बनाने वाले ने मुझे एक खास तोहफा दिया है. वो तोहफा है मेरे लंड का साइज़. जी हां दोस्तो, मेरे लंड का साइज 8 इंच से कुछ ज्यादा ही है. इतना बड़ा लंड मिलना वाकई किस्मत की बात है.

जब मेरा लंड पूरे तनाव में होता है तो उसकी मोटाई 3 इंच हो जाती है. इतना मोटा और लम्बा लंड लेकर कोई भी लड़की तो क्या एक से एक चुदक्कड़ औरत भी खुश हो जायेगी. मगर मैं जो कहानी आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो किसी अन्जान की नहीं बल्कि मेरी ही भाभी की कहानी है.

मेरी भाभी का नाम सलोनी है. घर में मेरी भाभी को सब सुलु कह कर पुकारते हैं. मैं भी अपनी भाभी को सुलु भाभी कह कर बुलाता हूं. यह बात तब की है जब मेरी भाभी सुलु दूसरी बार अपनी ससुराल यानि कि हमारे घर पर आई थी.

इससे पहले कि मैं भाभी की चोदाई कहानी को आगे बढ़ाऊं मैं आपको अपने भाई का परिचय भी दे देता हूं. मेरा भाई मुझसे उम्र में तीन साल बड़ा है. उसके लंड का साइज 6 इंच के करीब है. अब आप ये सोच रहे होंगे कि मुझे उसके लंड का साइज कैसे पता चल गया.

अगर आप कहानी को आगे पढ़ेंगे तो आपको भी पता लग जायेगा कि मेरे भाई के लंड के बारे में मुझे कैसे पता लगा. इसलिए अभी मैं इस बात को यहीं खत्म कर देता हूं और अपनी भाभी के बारे में आपको बताता हूं.

मेरी भाभी की उम्र 22 साल है. वो एक गजब के शरीर की मालकिन है. उसका फिगर इतना मस्त है कि मुझे अपने भाई से जलन होने लगी थी कि कैसी माल हाथ लगी है उनको. एकदम फिट और गजब की शेप वाले बदन की मालकिन. कभी कभी मेरा मन करने लगता था भाभी की चोदाई करने का!
पढ़ाई में उसने स्नातक किया हुआ है.

उसका गोरा बदन, गोल चूचे और बाहर निकली हुई मस्त सी गांड को देख कर तो पहले दिन ही मेरा लंड पानी छोड़ने लगा था. मगर अभी वो घर में नई दुल्हन थी तो मैं बस अपने अंदर की प्यास को लौड़ा हिला कर ही शांत कर लेता था. शादी से पहले भाभी जीन्स और टॉप वगैरह भी पहनती थी लेकिन शादी के बाद ज्यादातर साड़ी या सूट में ही रहने लगी थी.

मगर साड़ी में भी वो गजब की सेक्सी दिखती थी. कई बार जब मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं रहते थे तो वो जीन्स और टॉप भी पहन लेती थी. मैंने उसको बस एक बार ही इस तरह के लिबास में देखा था. उस दिन उसके चूचों की शेप को देख कर मुझे तुरंत जाकर बाथरूम में मुठ मारनी पड़ी थी.

आप समझ ही गये होंगे कि कितनी मस्त गोलाई वाले चूचे होंगे उसके. फिर एक दिन मेरी किस्मत भी मुझ पर मेहरबान हो ही गई. भाई को दो या तीन दिन के लिए किसी काम से बेंगलुरू जाना पड़ रहा था. वो तीन दिन के बाद ही आने वाले थे. यहां तक तो सब ठीक था लेकिन किस्मत की बात ये हुई कि उसी दिन मेरे नाना की तबियत बिगड़ गई.

मेरी मां और पापा नाना का हाल-चाल जानने के लिए गांव में चले गये. वो दोनों भी अगले दिन वापस आने वाले थे. मगर गांव में जाने के बाद मां का फोन आया कि उनको अभी एक-दो दिन का वक्त और लगने वाला है. इसलिए मां अब दो-तीन दिन तक नहीं आने वाली थी.

अब घर में मैं और भाभी ही रह गये थे. मैं भी थोड़ा मजाकिया किस्म का बंदा हूं तो भाभी और मेरे बीच में मजाक हो जाता था. भाभी भी मेरे साथ काफी कम्फर्टेबल फील करती थी. जब घर में कोई नहीं था तो पहली रात को तो सब कुछ ठीक रहा. अब तक मेरे मन में भी चुदाई का प्लान करने का विचार नहीं आया था.

अगली सुबह उठ कर मैं बाथरूम में नहाने के लिए चला गया. घर में भाभी और मेरे अलावा कोई नहीं था. मैं जानता था कि घर में भाभी और मेरे अलावा कोई नहीं है. उस वक्त भाभी भी अपने कमरे में थी इसलिए मैंने बाथरूम का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था.

मगर यहां पर एक बात यह भी थी कि भाभी को नहीं पता था कि मैं उठ गया हूं. उनके लिए तो मैं अभी सो रहा था. भाभी रोज सुबह मुझे उठाने के लिए मेरे कमरे में आती थी. मैं बाथरूम में था. मुझे नहीं पता था कि भाभी एकदम से मेरे कमरे में आ जायेगी.

मैं नंगा होकर बाथरूम में नहा रहा था. अपनी ही मस्ती में था. मुझे अंदर गये हुए काफी देर हो चुकी थी. शायद भाभी ने मुझे आवाज भी दी होगी लेकिन मुझे पानी के शोर के कारण कुछ सुनाई ही नहीं दिया. फिर भाभी मेरे बेड के पास आ गई. मेरे बेड के पास आने पर बाथरूम के अंदर का नजारा साफ दिखाई देता था.

भाभी ने मुझे नहाते हुए देख लिया. उस वक्त मैं अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मसल रहा था. जब मेरी नजर भाभी पर पड़ी तो मैं एकदम से सकपका गया. मैंने तुरंत बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया. मुझे नहीं पता भाभी ने मेरे शरीर में क्या क्या देखा और कितनी देर देखा. लेकिन जब मैंने उनको देखा तो मैंने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया था.

उसके बाद मैं नहा कर बाहर आ गया. मैंने नाश्ता किया और मैं तैयार होकर अपने कॉलेज चला गया. जब मैं वापस आया तो दोपहर के तीन बज चुके थे. वापस आने के बाद मैंने नोटिस किया कि भाभी का अंदाज कुछ बदला बदला सा लग रहा था.

शाम को खाना खाते समय भाभी ने कहा कि रात को तुम मेरे कमरे में आकर ही पढ़ाई कर लेना. मुझे अकेले डर लगता है. तुम्हारे भैया भी घर में नहीं हैं और मां जी भी गांव में हैं.
मैंने कहा- ठीक है भाभी. मैं आपके रूम में आकर ही पढ़ाई कर लूंगा.

रात के 9 बजे के करीब मैं भाभी के रूम में चला गया और अपनी किताब लेकर बैठ गया. फिर कुछ देर पढ़ाई करने के बाद भाभी और मैं बातें करने लगे. बातें करते करते बात बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड तक पहुंच गई. मैं भाभी के साथ काफी खुल गया था इसलिए भाभी के साथ इस तरह की बातें करने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी और भाभी का व्यवहार भी काफी दोस्ताना था.

फिर भाभी ने पूछा- कितनी गर्लफ्रेंड बना रखी हैं तुमने कॉलेज में?
मैंने कहा- एक ही थी भाभी, उससे भी ब्रेक-अप हो गया है. अब तो मैं बिल्कुल अकेला हूं.
वो बोली- तो फिर उसके बाद कोई दूसरी नहीं मिली?
मैंने कहा- नहीं, अभी तक तो नहीं मिली.

वो बोली- तो फिर बना लो कोई दूसरी. तुम तो जवान हो काफी.
मैंने कहा- आपके जैसी कोई कहां मिलेगी.
वो बोली- ओह्ह, तो मेरे जैसी चाहिए!
मैं बोला- जी!

फिर वो बोली- देखो, मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो नहीं बन सकती लेकिन फ्रेंड जरूर बन सकती हूं.
मैं बोला- सोच लो भाभी, मैं अपनी दोस्तों के साथ बहुत मस्करी करता हूं. कहीं बाद में आप शिकायत करने लगो.
वो बोली- नहीं करूंगी. मगर जरा अपने भैया और मम्मी पापा के सामने ख्याल रखना. कहीं वे गलत न सोचने लग जायें.

मैंने कहा- ठीक है. मैं ख्याल रखूंगा. तो आज से हम फ्रेंड्स?
मैंने भाभी की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा.
भाभी ने अपना हाथ मेरे हाथ में दे दिया और हमने हाथ मिला लिया. भाभी के कोमल हाथों को छूकर मैंने उनको छेड़ना शुरू कर दिया और उनके हाथों को दबाने लगा.

सुलु भाभी ने अपना हाथ वापस खींच लिया और बोली- अब रात काफी हो गई है. हम लोगों को सोना चाहिए.
मैंने कहा- थोड़ी देर और पढ़ लेता हूं भाभी. अभी मुझे नींद नहीं आ रही है.
वो बोली- ठीक है, तुम पढ़ाई करो. तब तक मैं कपड़े चेंज करके आती हूं.

कुछ देर के बाद भाभी टी-शर्ट और लोअर पहन कर आ गई. उस लिबास में भाभी के चूचे एकदम मस्त तरीके से उभर कर दिख रहे थे. पहली बार मैंने भाभी को एक हवस भरी चुदाई करने की नजर से देखा था उस दिन. वो आकर मेरे पास बेड पर लेट गई और टीवी देखने लगी.

भाभी टीवी में मग्न थी तो फिर मुझे भी अब नींद आने लगी थी. कुछ देर के बाद मैं भी उठ कर अपने कमरे में चला गया. रात काफी हो चुकी थी और सुबह उठ कर मुझे कॉलेज भी जाना था. मैं अपने कमरे में जाकर सो गया. उस दिन मैं अपने लंड को सहलाकर सो गया.

अगली सुबह भाभी ने मेरे कमरे में आकर मुझे जगाया. जब वो मुझे जगा रही थी तो झुकी होने के कारण उसके चूचों के क्लिवेज ब्लाउज के अंदर से साफ दिखाई दे रहे थे. फिर वो पलट कर जाने लगी. जब दरवाजे के पास पहुंच गई तो मैंने उनको आवाज देकर कहा- भाभी, आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो. भाभी पलट कर मुस्कराई और फिर अपनी गांड मटकाते हुए चली गई.

उसके बाद मैं फ्रेश होकर नाश्ता करने के लिए चला गया. उस वक्त भाभी किचन में बर्तन सेट कर रही थी. मैंने टेबल पड़ा हुआ अखबार उठा कर भाभी की गांड पर मार दिया.
भाभी बोली- ये क्या बद्तमीजी है?
मैं बोला- मैंने आपको कल भी बताया था कि अगर मुझसे दोस्ती करोगी तो आपको ये सब बर्दाश्त करना पड़ेगा.

फिर वो बोली- हां, मैं तो ये भूल ही गई थी.
मैंने कहा- अब नाश्ता तो दे दो भाभी, बहुत भूख लगी है.
भाभी मेरे लिए नाश्ता लेकर आ गई और हमने साथ में बैठ कर ही नाश्ता किया.
मेरी नजर भाभी के सुन्दर चेहरे से फिसल कर उसके गले के नीचे उसकी चूचियों को टटोल रही थी.

अचानक भाभी बोली- आज मुझे बाजार से सामान लाने के लिए तुम्हारी जरूरत है. तुम चल सकते हो क्या?
मैं बोला- भाभी, वैसे मुझे कॉलेज जाना था लेकिन अगर आपको जरूरी काम है तो फिर मैं आज कॉलेज की छुट्टी कर लेता हूं.
यह सुन कर भाभी मुस्कराने लगी. फिर बोली- ठीक है, मैं भी नहा धोकर तैयार हो जाती हूं.

जब भाभी तैयार हो चुकी उसने मुझे आवाज दी. मैं उसके कमरे में गया तो देखता ही रह गया. उसने सफेद टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहनी हुई थी.
मैंने कहा- भाभी आप तो बिल्कुल हीरोइन लग रही हो इन कपड़ों में।
भाभी बोली- हां, मम्मी पापा घर पर नहीं है तो इसलिए पहन लिया मैंने. अब चलो. हमें देर हो रही है.

वो पूछने लगी- कैसे जायेंगे हम?
मैंने कहा- स्कूटी पर.
वो बोली- चलायेगा कौन?
मैंने कहा- आज आप चलाओगी.
वो बोली- ठीक है.

उसके बाद हम शॉपिंग के लिए निकल गये. रास्ते में मैंने भाभी के कंधे पर हाथ रख लिया और फिर उनकी कमर पर हाथ रख लिया. भाभी ने कुछ नहीं बोला. उसके बाद मैं हिम्मत करके भाभी की कमर को भी सहलाने लगा. तब भी भाभी ने कुछ नहीं कहा. अब मुझे यकीन हो गया था कि भाभी को कोई प्रॉब्लम नहीं है.

बाजार जाकर हमने शॉपिंग की और फिर दोपहर तक वापस आ गये. हम दोनों ही थक गये थे.
भाभी बोली- मैं अपने कमरे में सोने के लिए जा रही हूं. शाम को मम्मी-पापा भी आने वाले हैं.
मैंने सोचा कि उनके आने से पहले भाभी के साथ थोड़ी सी मस्ती कर ली जाये. क्योंकि उसके बाद मौका नहीं मिल पाता.

मैंने कहा- भाभी, मैं भी आपके रूम में ही आपके साथ लेट जाता हूं.
वो बोली- ठीक है चलो.
अंदर जाकर भाभी ने ड्रेस बदल ली. उसने लोअर पहन ली और घर वाली टी-शर्ट पहन ली. उसमें उसके बदन की शेप मस्त लग रही थी. फिर वो बेड पर आकर लेट गई.
भाभी ठीक मेरी बगल में लेटी हुई थी. कुछ देर के बाद ही उनको नींद आ गई.

जब हमें लेटे हुए थोड़ा वक्त बीत गया तो मैंने देखा कि भाभी की टी-शर्ट पेट के ऊपर से हट गई है. उनका गोरा बदन दिखने लगा था. उसको देखते ही मेरे अंदर सेक्स जागने लगा. मैंने हल्के हाथ से भाभी के पेट को छूकर देखा. भाभी नींद में थी. फिर मैंने भाभी की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. उसने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी थी इसलिए उसके चूचे मेरे सामने नंगे हो गये.

सुलु भाभी के नंगे चूचे देख कर मेरा लंड फटने को हो गया. मैं अपने हाथों को रोक नहीं पाया और भाभी के गोरे चूचों को छू कर देखने लगा. भाभी के नर्म चूचे हाथ में लेकर पूरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा. मैंने अब भाभी के बूब्स पर दबाव देना शुरू कर दिया. भाभी की आंखें अभी भी बंद थीं.

उसके बाद अचानक से भाभी ने करवट ली और उसकी गांड मेरी तरफ हो गई. मेरा लंड तो पहले से तना हुआ था. मैंने धीरे से सोई हुई भाभी की गांड पर अपना तना हुआ लंड लगा दिया. धीरे-धीरे लंड को भाभी की गांड पर रगड़ने लगा. बहुत मजा आने लगा. हर पल मेरी हवस बढ़ रही थी.

अपने तने हुए लंड को मैंने भाभी की गांड से चिपका दिया. आगे हाथ ले जाकर उसकी चूचियों को दबाने लगा. अभी भी भाभी सो रही थी या फिर हो सकता है कि सोने का नाटक कर रही थी. मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था और भाभी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होते देख मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी.

मैं डरते हुए ही उनके चूचे दबा रहा था.
फिर भाभी एकदम से उठ कर बोली- करना है तो सही से कर ले. मैं मना कर रही हूं क्या?
मैं सुन कर हैरान हो गया लेकिन साथ ही खुश भी. मेरे मन की मुराद जैसे पूरी हो गई. मैंने भाभी की टी-शर्ट को निकाल कर उसको ऊपर से पूरी नंगी कर दिया.

उसके चूचों को मुंह में लेकर पीने लगा. उसके बाद मैंने भाभी की लोअर को भी निकाल दिया. उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. भाभी की चूत गीली हो चुकी थी. मैंने भाभी की चूत में उंगली डाल दी. अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा और अब भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.

काफी देर तक मैं सुलु भाभी की चूत में उंगली करता रहा और उसकी चूत ने एकदम से पानी छोड़ दिया और मेरा पूरा हाथ भाभी की चूत के रस में भीग गया. उसके बाद मैंने अपने कपड़े निकाल कर एक तरफ डाल दिये और नंगा होकर भाभी के बूब्स को पीने लगा. मेरा लंड तन कर फटने वाला था. भाभी की गीली चूत मेरे लंड पर टच हो रही थी. मेरा लंड चूत से लगने के बाद कहीं अंदर घुसना चाह रहा था.

अगर मैं चाहता तो भाभी की चूत में उसी वक्त लंड को डाल देता लेकिन अभी मैं भाभी के जिस्म के और मजे लेना चाह रहा था. मैंने उठ कर भाभी को बैठने के लिए कहा. मेरे कहने पर भाभी बैठ गई. उसके बैठने के बाद मैंने देखा कि उसके चूचे एकदम से टाइट होकर नुकीले हो चुके थे.

भाभी के तने हुए चूचों को दबाते हुए मैंने उनको फिर से मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा. भाभी तेज सिसकारियां लेते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी. अब मेरा लंड बुरी तरह से तड़पने लगा. मैंने भाभी के मुंह के पास लंड को कर दिया और चूसने के लिए कहा. मगर भाभी ने मना कर दिया.

बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद सुलु भाभी ने मेरे लंड के टोपे को मुंह में लिया और चूसने लगी. इतना लम्बा लंड भाभी के मुंह में आधा ही आ रहा था. मैंने एक धक्का देकर भाभी के गले तक लंड को उतार दिया. भाभी की सांस रुकने लगी और वो मुझे पीछे धकेलने लगी.

भाभी की हालत देख कर मैंने वापस से लंड को आधा बाहर निकाल लिया और भाभी अब मजे लेकर मेरे लंड को चूसने लगी. दस मिनट तक मैं भाभी को लंड चुसवाने का मजा लेता रहा. फिर एकदम से मेरा कंट्रोल छूट गया और मैंने भाभी के मुंह को अपने माल से भर दिया.

उसके बाद मैंने उसको वापस लिटा दिया और उसकी चूत में जीभ देकर तेजी से अंदर बाहर करने लगा. भाभी तड़पने लगी. मेरी जीभ पूरी की पूरी भाभी की चूत में अंदर जाकर उसको मजा दे रही थी. भाभी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं और वो बार-बार अपनी टांगों को मेरी गर्दन पर लपेट रही थी.

फिर वो बोली- बस आदी … अब रहा नहीं जा रहा. मेरी चूत में अपना लम्बा और मोटा लंड घुसा दो.
अब तक मेरा लंड भी दोबारा से तनाव में आना शुरू हो गया था. मैंने फिर से भाभी के मुंह में लंड को दे दिया और 2 मिनट चुसवाने के बाद मेरा लंड पूरे जोश में आ गया.

अपना लन्ड भाभी की चूत पर सेट किया और धीरे से एक धक्का दिया तो मेरे लन्ड का सुपारा भाभी की चूत में चला गया जिससे भाभी को दर्द होने लगा.
भाभी बोली- आदी धीरे करो, तुम्हारे भाई का लन्ड छोटा और पतला है. तुम्हारा लंड मेरी चूत को फाड़ देगा और तुम्हारे भाई को भी पता लग जायेगा कि मैं किसी मोटे लंड से चूत चुदवा रही हूं.

एक बार तो मैं रुका लेकिन फिर मुझसे रहा न गया. मैंने एक झटका और दिया तो मेरा लन्ड भाभी की चूत में आधा चला गया और भाभी के मुंह से चीख निकल गयी. मैं भाभी की आवाज को अंदर दबाने के लिए उसके होंठों को चूसने लगा. कुछ पल रुकने के बाद मैंने फिर से धक्का मारा तो मेरा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ अंदर समा गया.

दर्द के कारण सुलु भाभी की आंखों से आंसू निकल आये. चूत में लंड को फंसा कर मैंने भाभी को चूमना शुरू कर दिया. जब भाभी नॉर्मल हो गई तो मैंने चूत में धक्के लगाना शुरू किया. कुछ ही देर के बाद भाभी का दर्द मजे में बदल गया. अब वो अपनी गांड को हिला-हिलाकर मेरे लंड से चुदने लगी. उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आदी चोदो मुझे और जोर से चोदो।

इस तरह करीब 20 मिनट तक मैं भाभी की चोदाई करता रहा. इस बीच भाभी 2 बार झड़ गयी और मैंने भी अपना माल भाभी भी की चूत में ही गिरा दिया. मैं बुरी तरह थक गया था. मैं भाभी के ऊपर लेट कर ही सो गया. शाम को 6 बजे नींद खुली तो मैंने देखा कि मैं भाभी के बेड पर नंगा ही सोया हुआ था और भाभी भी कमरे में नहीं थी।

उठ कर मैंने कपड़े पहने और फ्रेश होकर हॉल में गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर के बाद भाभी चाय लेकर आ गई. वो शर्म के मारे नजर भी नहीं मिला पा रही थी. उसके कुछ देर के बाद मम्मी और पापा भी आ गये. फिर अगले दिन भैया भी आ गये.

इस दौरान हम देवर-भाभी के बीच में कुछ नहीं हो पाया. फिर पंद्रह दिन के बाद भाभी अपने मायके चली गयी. उसके कई महीनों के बाद मुझे भाभी की चूत की चोदाई का मौका मिला. मेरे लंड से खुश होकर भाभी ने अपनी छोटी बहन की चूत भी मुझसे चुदवाई. वह कहानी मैं आपको अगली बार बताऊंगा.

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मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी

मेरा नाम ममता है और मैं एक 37 वर्षीय शादीशुदा महिला हूँ. मैं गुरुग्राम में टीचर के तौर पर कार्य करती हूं. मेरी लम्बाई 5 फीट 5 इंच है और शरीर भरा हुआ है. मेरी फीगर 36-34-40 की है. मेरी गांड बहुत भारी है क्योंकि मेरे पति ने मेरी चूत से ज्यादा मेरी गांड बजाई है.

मेरे पति को गांड मारने का इतना शौक है कि उसने अपने ऑफिस की कई महिलाओं की गांड चुदाई कर रखी है. ये बात मुझे तब पता लगी जब एक दिन हमारा बहुत बुरा झगड़ा हो गया था. उसके बाद हमारे रिश्ते में बहुत ज्यादा खराबी आ गयी.

अब मैं काफी परेशान रहने लगी थी. अपनी ड्यूटी के दौरान भी उदास ही रहती थी. अपने काम को भी मैं ठीक से नहीं कर पा रही थी. अभी दो महीने पहले ही हमारे स्कूल में एक नया अध्यापक ट्रांसफर होकर आया था.

उसका नाम है मनोहर। वो स्कूल में अर्थशास्त्र के टीचर हैं. उनकी उम्र 29 साल और हाइट 5.5 फीट है मगर शरीर एकदम सुडौल और बनावट एकदम कसरती है. वो जितना आकर्षक दिखते हैं उतना ही सुन्दर पढ़ाते भी हैं.

धीरे धीरे मेरी उनसे ऑफिशियल कामों को लेकर बात होने लगी. कुछ ही समय के अंदर हम दोनों में दोस्ती हो गयी और धीरे धीरे हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गये. उसका एक कारण यह भी था कि वो अपने परिवार से दूर यहां पर अकेले रहते थे.

एक बार उन्होंने शाम में मुझे मिलने के लिए पूछा. मैंने अपने हस्बैंड का बहाना लेकर मिलने से मना कर दिया. अगले दिन फिर उन्होंने बातों ही बातों में कह दिया कि ममता तुम मुझे बहुत सुन्दर लगती हो. मैं आपको सिर्फ अपनी एक अच्छी दोस्त के नाते ही कॉफी पर बुला रहा था.

अपनी मजूबरी पर मेरा गला भर आया और आंखों में आंसू लिये मैं बोली- मनोहर, मेरे पति मुझ पर बहुत शक करते हैं. हमारे बीच के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे हैं, न तो शारीरिक तौर पर और न ही पारिवारिक तौर पर. हम पति पत्नी के झगड़े का असर अब हमारे बच्चों पर भी पड़ने लगा है.

उन्होंने बड़े अपनेपन से मुझसे पूरी बात पूछी तो मैंने अपनी पति के नाजायज़ संबंधों और मेरे साथ उनके द्वारा की जाने वाली मेरी मार-पिटाई के बारे में बताया. मनोहर ने मुझे सांत्वना देते हुए कहा कि अगर मैं इस अत्याचार के खिलाफ कुछ कदम उठाना चाहती हूँ तो वो मेरा साथ देने के लिए तैयार हैं.

उसके हिम्मत देने के बाद मार्च के महीने में एग्जाम के टाइम मैंने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा दिया जिसके बदले में मेरे पति मनीष ने मुझे घर से निकाल दिया. उस दिन मैं बहुत रो रही थी. पूरे स्कूल के स्टाफ में मेरे ही बारे में चर्चा हो रही थी.

मनोहर ने मुझे स्कूल टाइम के बाद अपने साथ में चलने के लिए कहा. मेरे मना करने के बाद भी वो जोर देकर मुझे अपने घर ले गया. मैं सोच रही थी कि शायद ये मेरी मजबूरी का फायदा उठाने की सोच रहा है. मगर मुझे उसकी इन्सानियत का पता तब लगा जब उसने मुझे अपने हाथ से खाना बना कर खिलाया.

उसके घर में एक ही बेड था. उसने मुझे बेड पर सोने के लिए कहा और खुद ज़मीन पर सो गया. उस दिन मुझे अपने पति मनीष और मनोहर के व्यक्तित्व का अंतर मालूम चला. मैंने पाया कि मनोहर एक अच्छा दोस्त ही नहीं बल्कि एक अच्छा इन्सान भी है.

ऐसे ही एक सप्ताह गुजर गया. मेरे पति मनीष ने इस एक हफ्ते के दौरान न तो मुझे कभी फोन किया और न ही मेरे स्कूल में आकर मुझसे मिलने की ही कोशिश की. अब कुछ दिन मैंने और इंतजार किया. फिर मुझे अपने बच्चों की फिक्र होने लगी.

मनोहर मुझे मेरे बच्चों से मिलवाने के लिए उनके स्कूल में ही ले गया. वहां मेरे बच्चों ने मुझे बताया कि पापा आपके नहीं होने के बाद से एक दूसरी आंटी को घर में बुला रहे हैं. वो आंटी पापा के साथ ही सोती है.

बच्चों के मुंह से ये बातें सुन कर मेरा दिमाग खराब हो गया. मैंने उसी क्षण निर्णय ले लिया कि अब मैं भी किसी की परवाह नहीं करूंगी. मनोहर और मैं उसके बाद घर आ गये.

उस शाम को मैंने मनोहर से कहा कि आज का खाना मैं बना दूंगी.
मनोहर मान गया. हमने खाना बनाया और दोनों ने साथ में खाया और फिर बैठ कर बातें करने लगे. फिर वो बर्तन उठा कर धोने के लिए चला गया.

जब वो बर्तन धोकर वापस आ गया तो मैंने पूछा- तुम शादी क्यों नहीं कर लेते मनोहर?
वो हंसते हुए बोला- अगर मैं शादी करूंगा तो मेरा हाल भी तुम्हारे जैसा ही हो जायेगा. जिस तरह से पति के होते हुए भी फिलहाल मैं तुम्हें संभाल रहा हूं वैसे ही शादी के बाद कोई दूसरी औरत फिर मुझे भी ऐसे ही संभाल रही होती.

उसकी इस बात पर हम दोनों हँस दिये. कुछ देर बैठ कर बातें करने के दौरान दोनों में हँसी मजाक काफी हुआ. फिर हम सोने की तैयारी करने लगे.
मैंने मनोहर से कहा- आओ, तुम भी बेड पर ही सो जाओ.

मनोहर ने मेरे पास सोने से मना कर दिया. वो कहने लगा कि औरत और मर्द के बीच में थोड़ी सी दूरी ही रहे तो अच्छा होता है.
मैंने कहा- अब तो दूरियां खत्म हो जानी चाहिएं. जो भी होगा वह हम दोनों की इच्छा से ही होगा. मैं तुम्हें जबरदस्ती अपने साथ सोने के लिए नहीं कह रही हूं. मगर चूंकि मैं एक औरत हूं और मेरी वजह से तुम्हें जमीन पर सोना पड़े, ये मुझे अच्छा नहीं लगता.

मेरे कहने पर मनोहर मान गया. उस दिन के बाद से मनोहर और मैं साथ में एक ही बेड पर सोने लगे. मगर पहल दोनों में से किसी की ओर से नहीं हो रही थी. कुछ दिन ऐसे ही बीत गये.

एक दिन मुझे लेटे लेटे नींद नहीं आ रही थी. मैं करवट बदल कर लेटी तो देखा कि मनोहर का लंड तना हुआ था. उसकी लोअर को उसके लंड ने ऊपर उठा रखा था. फिर उसने भी करवट बदल ली.

मेरे अंदर बेचैनी सी हो गयी थी. मैं मनोहर को काफी दिन पहले से ही पसंद करती थी. कुछ पल के बाद उसने फिर से करवट ली और उसका लंड वैसा का वैसा तना हुआ था. बार बार उसकी लोअर को ऊपर उछाल रहा था.

मनोहर को बार बार करवटें बदलता हुआ देख कर मैं बोली- क्या हुआ मनोहर?
उसने मेरी ओर देखा और फिर अपने तने हुए लंड की ओर देखा तो उसकी आंखें शर्म से नीचे हो गयीं.
आगे से पहल करते हुए मैंने पूछा- तुम्हें मेरे साथ लेट कर मेरे लिए कुछ फील हो रहा है क्या?

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. बस लेटा रहा.
मैं बोली- देखो मनोहर, मैं एक साइंस टीचर हूं. मैं अच्छी तरह जानती हूं कि जब मर्द और औरत के जिस्मों के बीच में इतना कम फासला हो तो इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक है.

मनोहर बोला- ममता, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. आपको देखकर मुझे अपनी माशूका की याद आ गयी.
मैंने कहा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी थी? तुमने कभी बताया भी नहीं मुझे.

वो बोला- कभी इस विषय पर बात करने का माहौल ही नहीं बना.
मैंने कहा- अब तो माहौल भी है. अब तो बता दो अपनी प्रेम कहानी?
फिर मनोहर ने अपनी सारी स्टोरी मुझे बताई कि कैसे उसको एक लड़की से प्यार था, जिसका नाम भूमि था और दो साल पहले उनका ब्रेक अप हो गया. उसके बाद से उसकी जिन्दगी में कोई लड़की नहीं आई और उसने किसी दूसरी लड़की को अपने करीब आने भी नहीं दिया.

मैं उसके साफ दिल प्यार से बहुत प्रभावित हुई और मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया.
मैं बोली- कोई बात नहीं, जो हुआ उसको याद करके अब कोई फायदा नहीं है. मैं ही तुम्हारे लिये तुम्हारी भूमि बन जाती हूं.

उसके बाद हम दोनों अलग हो गये और सोने लगे. अगली सुबह हम उठे और तैयार होकर स्कूल जाने लगे. फिर दिन भर स्कूल में काम रहा.
छुट्टी के समय उसके निकलने से पहले मैंने उसको कहा- घर आते हुए एक मेडिकल स्टोर से कॉन्डम का एक पैकेट ले आना.

वो मेरी ओर देख कर मुस्कराने लगा. उसके बाद मैं आ गयी और कुछ देर के बाद मनोहर भी आ गया. हम दोनों ने खाना खाया और फिर बिस्तर पर लेट कर बातें करने लगे.

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तो भूमि के साथ तुम क्या क्या करते थे?
वो बोला- क्या मतलब?
मैंने कहा- ज्यादा बनो मत. तुम जानते हो कि मैं सेक्स के बारे में पूछ रही हूं.

वो बोला- पहले तो भूमि अपने चूचे पिलाती थी और फिर चूत भी चुसवाती थी. उसके बाद वो मेरा हथियार अपनी चूत में लगा कर अंदर ले लेती और चुदवाती थी. आगे से चुदवाने के बाद फिर पीछे भी लेती थी. तब जाकर उसको और मुझे शांति मिलती थी.

मन ही मन मैं खुश हो गयी कि चोदू किस्म का जवान लौंडा फंस गया है. इसके साथ तो मैं भी फिर से जवान हो जाऊंगी. मैंने देखा कि उसका लंड उसकी लोअर में फनफना रहा था.

मैंने मनोहर के सीने पर अपने कोमल हाथ से फिराते हुए कहा- तुम्हें मेरी चूचियां कैसी लगती हैं?
वो बोला- मैं तो पहले दिन से ही आपको पसंद करता हूं लेकिन फिर पता चला कि आप शादीशुदा हैं इसलिए कभी कुछ कहा नहीं.

उसकी छाती के निप्पलों को छेड़ते हुए मैंने कहा- अब तो मेरे पति भी मुझसे कोसों दूर जा चुके हैं, अब किसलिए इतनी दूरी बना रखी है.
उसने मेरी चूचियों को छेड़ कर कहा- दूरी कहां है, पास में ही तो हूं.

इतना बोल कर हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और दोनों के होंठ मिल गये. दोनों एक दूसरे के होंठों के रस को एक दूसरे के मुंह से खींचने लगे. उसका लंड मेरी जांघों में चुभ रहा था. उसने मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए अपनी टांग मुझे पर चढ़ा ली थी. मैं भी उसके जिस्म से लिपटने लगी थी.

जल्दी ही दोनों गर्म हो गये और उठ कर मैंने अपनी मैक्सी और ब्रा को नीचे कर लिया. मनोहर के सामने मेरी चूची नंगी हो गयी. मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी नंगी चूचियों पर रखवा दिया और उसने मेरी दोनों चूचियों को दबा कर देखा. उसको मेरी चूची काफी मस्त लगीं और वो उनको मुंह लगा कर पीने लगा.

मनोहर को मैं भी पसंद करती थी इसलिए जब उसके होंठ मेरी चूचियों को चूस रहे थे तो मुझे भी उस पर बेपनाह प्यार आ रहा था. मैं मदहोश होकर उसके बालों में हाथ फिरा रही थी. उससे चूचियां चुसवाते हुए ऐसा लगने लगा था कि मेरी जवानी फिर से जवान हो रही है.

फिर मनोहर ने अपने सारे कपड़े निकाल दिये और मेरे बदन से लिपटने लगा. उसके बदन पर केवल एक अंडरवियर था और मेरे बदन पर मेरी चूत पर पहनी हुई मेरी पैंटी. मनोहर मेरी पैंटी को ऊपर से ही मसलने लगा था. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. मैं भी उसके लौड़े को ऊपर से ही सहला रही थी.

फिर उसने मुझे प्यार से नीचे लिटा लिया और हल्के हल्के चुम्बन देने लगा. पहले मेरे गालों पर, फिर गर्दन पर, फिर चूचियों पर, फिर पेट से होता हुआ नाभि पर और फिर मेरी पैंटी की इलास्टिक तक पहुंच गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने काफी समय से अपनी सेक्स की भूख को दबा कर रखा हुआ था.

फिर उसने मेरी पैंटी को किस करना शुरू कर दिया. मैं मस्त होने लगी. शायद मनोहर मेरी चूत को चाटना चाह रहा था. उसने मेरी पैंटी को खींच कर निकाल दिया. जैसे ही उसने पैंटी उतारी तो मेरी चूत नहीं दिखी बल्कि पैंटी के नीचे बालों का एक घोंसला उसको दिखा.

वो थोड़ा निराश हो गया.
वो बोला- बाल बहुत ज्यादा बढ़ गये हैं आपकी चूत पर. इसकी सफाई करनी पड़ेगी.
उसके बाद उठ कर वो अपना ट्रिमर ले आया और मेरी चूत की सफाई करने लगा.

दो मिनट में ही उसने मेरी चूत को साफ कर दिया.
मैं बोली- ये मेरी चूत के पहरेदार सैनिक थे. अब मेरी चूत सुरक्षित नहीं रही. इस पर हमला हो सकता है.
उसने कहा- अब सैनिक मारे गये हैं. अब इस रानी को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.

उसने मेरी चूत को धोया और फिर कपड़े से पौंछ कर मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को जोर जोर से जीभ देकर चाटने लगा.

मैं दो मिनट में ही पगला गयी. मेरी चूत तपने लगी. मनोहर अभी भी मेरी चूत को तेज तेज जीभ चलाते हुए चूस-चाट रहा था.

फिर उसने मेरी चूत में उंगली दे दी और मेरी चूत में उंगली करने लगा. वो तेजी से उंगली चलाने लगा. उसके बाद फिर से मेरी चूत में जीभ देकर चोदने लगा.

अब मुझसे भी बर्दाश्त न हुआ और मैं भी उठ कर उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी और उसके होंठों को चूसने लगी. मैंने उसे लिटा लिया और उसकी टांगों की ओर मुंह करके लेट गयी. मेरी चूत उसके मुंह पर जा लगी और मैंने उसके लंड को मुंह में भर लिया.

दोनों 69 की पोजीशन में हो गये और एक दूसरे को चूसने और चाटने लगे. उसका लंड चूसते हुए अब चूत चुसवाने में और ज्यादा मजा आने लगा मुझे. मनोहर भी पूरा मदहोश हो रहा था.
दस मिनट में उसने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया और मैं झड़ गयी. मेरा सारा शरीर ढीला पड़ गया.

मनोहर ने मुझे उठाया और कहा- बाथरूम में जाकर चूत को साफ कर लो.
जब मैं अपनी चूत को धोकर वापस आई तो मनोहर अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ा कर बैठा हुआ था.

मैं आकर बेड पर लेट गयी.
मनोहर ने मेरी टांगें फैला दीं और उनके बीच में बैठ गया. वो मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

मनोहर का लंड 6 इंच लम्बा और करीब करीब ढाई इंच मोटा था. मनोहर मेरे कंधों के पास हाथ रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मैं अपने हाथ में उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी और मनोहर मेरे होंठों को चूम रहा था.

अब मैंने मनोहर का लंड अपनी चूत में डाल लिया और एक झटके में ही सारा लंड अंदर चला गया और मनोहर जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा. दो मिनट बाद हमने पोजीशन बदल ली और अब मैं मनोहर के ऊपर बैठ कर लंड की सवारी कर रही थी.

मनोहर अपने हाथों में भर कर मेरे बड़े बड़े चूचे दबा रहा था और बीच बीच में मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. एक जवान मर्द से चुदाई करवा कर मुझे बहुत मजा आ रहा था. अपने पति के साथ मुझे सेक्स में इतना मजा कभी नहीं आया.

पांच मिनट के बाद हमने फिर से पोजीशन बदल ली. इस बार मनोहर ने मुझे उठाया और हम दोनों एक दूसरे की ओर मुंह करके बेड से नीचे जमीन पर खड़े हो गये. मनोहर ने मुझसे एक पैर बेड पर रखने के लिए कहा जिससे कि वो मेरी चूत में लंड डाल सके.

मैंने ऐसा ही किया और मनोहर ने मेरी चूत में फिर से अपना लंड पेल दिया. वो मुझे खड़ी खड़ी चोदने लगा.

मैंने भी उसकी पीठ को नोंचना खरोंचना शुरू कर दिया. मेरी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपकी हुई थीं और वो मेरी गांड को भींच भींच कर मेरी चूत में लंड को अंदर तक ठोक रहा था. हर ठोक के साथ मेरे मुंह से आह्ह-आहह् की आवाजें आ रही थी. लंड की ठुकाई से होने वाले उस दर्द में बहुत मजा मिला रहा था मुझे.

चार-पांच मिनट के बाद मनोहर ने मुझे कुतिया बनने को कहा और पीछे से मेरी चूत में लंड पेलने लगा. पांच सात मिनट तक मेरी चूत में जबरदस्त तरीके से झटके लगते रहे. उसके बाद एक बार फिर से मेरा पानी निकल गया. मगर मनोहर का लंड अभी भी वैसे ही खड़ा हुआ था.

मनोहर ने मुझसे कहा- ममता यार, किसी तरह तुम भी मेरा पानी निकालो.
मैं बोली- हाथ से हिला कर निकाल देती हूं.
वो बोला- नहीं, मैं तुम्हारी गांड में निकालना चाहता हूं. अपनी गांड चोदने दो मुझे.

मैं गांड चुदवाने के लिए तैयार हो गयी. मैं फिर से कुतिया बन गयी. मनोहर ने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और मैंने अपने हाथों से दोनों चूतड़ फैला दिये. फिर मनोहर ने अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया.

अपने पति से मैं अपनी गांड पहले भी काफी बार चुदवा चुकी थी. मगर मनोहर का लंड मेरे पति से मोटा था. उसका लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयी. मगर मैं दर्द को बर्दाश्त कर गयी. मनोहर मेरी चूचियों को दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी गांड में लंड चलाने लगा.

दो मिनट के अंदर ही मुझे मजा आने लगा और फिर जैसे ही उसने स्पीड पकड़ी तो उसके लंड से निकल रहे कामरस से मेरी गांड भी चिकनी हो गयी और क्रीम की चिकनाहट के साथ मिलने से गांड पच-पच की आवाज करने लगी.

मनोहर बोला- मुझे ये आवाज बहुत अच्छी लगती है. जब मैं अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई करता था तो ऐसे ही आवाजें आती थी. भूमि को भी मेरे लंड से चुद कर बहुत मजा आता था.
उसके बाद मनोहर तेजी से धक्के मारने लगा और दो मिनट के बाद उसने तीन चार जोरदार झटकों के साथ अपना माल मेरी गांड में कॉन्डम के अंदर छोड़ दिया.

जब लंड बाहर निकाला तो कॉन्डम में काफी सारा माल भरा हुआ था. उसके माल की इतनी मात्रा देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर ये मेरी चूत में छूट जाता तो मुझे गर्भवती बना देता और मैं मनोहर के बच्चे की मां बन जाती.

हम दोनों पूरी तरह से थक गये थे और लेट गये. उसके बाद हमने सुबह सुबह उठ कर एक बार फिर से चुदाई की. सुबह की चुदाई करने के बाद मूड बहुत ही फ्रेश हो गया. बहुत दिनों के बाद मुझे इतना फ्रेश और हल्का फील हो रहा था.

इस तरह मनोहर के साथ मेरी चुदाई का सीन अभी तक चल रहा है. अब हम दोनों सोच रहे हैं कि एक साथ कानूनी रूप से लिविंग रिलेशन में रहना शुरू कर दें.

मैं इंतजार कर रही हूं कि जैसे ही मेरे पति के साथ मेरे तलाक का फैसला आ जायेगा, मैं उसी दिन से मनोहर के साथ खुले रूप से रहना शुरू कर दूंगी.

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मेरी सील टूट चुकी थी

हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

वो रास्ते में बोला- यार, मेरा मन शांत नहीं हुआ.
उसकी बात सुनकर मुझे भी चुदास भरने लगी. मैंने फिर भी उससे कहा- क्यों … मजा नहीं आया क्या?
वो बोला- पानी भर तो निकला है, ऐसा तो मैं मुठ मार कर भी निकाल लेता हूँ.
मैंने कहा- तो फिर क्या चाहते हो?
वो बोला- चलो एक दोस्त के फ्लैट में चलते हैं.
मैंने कहा- कोई परेशानी तो नहीं होगी न?
वो बोला- मैं पहले उससे बात कर लेता हूँ.
मैंने कहा- उसको फ्लैट से जाने की कह देना … तभी ठीक रहेगा.
उसने कहा- ठीक है.

उसने फोन पर अपने दोस्त से बात की, दोस्त ने हामी भर दी और वो बोला कि आ जा … मैं कुछ देर में वैसे भी जाने वाला हूँ.
अब मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझसे पूछा- अब तो ठीक है?
मैंने मुस्कुरा कर हां कर दी. हम दोनों उसके फ्लैट की तरफ चल दिया.

उसके फ्लैट में पहुँच कर उसके दोस्त ने पानी वगैरह दिया और बोला- यार, मुझे जाना है. तू ये चाभी ले ले और बंद करके बाहर एक जगह छिपा कर रख देना.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने उसको हां कहा और उसका दोस्त फ्लैट से चला गया.

दोस्त के जाते ही उसने फ्लैट का दरवाजा बंद किया और मुझे पकड़ कर मेरी चूची मसलने लगा. अब मैं भी बिंदास हो गई थी.

उसने मेरे कपड़ों को हाथ लगाया, तो मैंने उससे कहा- मैं उतार देती हूँ … मेरे पास यही ड्रेस है … तुम्हारी जल्दीबाजी में कहीं फट न जाए.
वो हंसने लगा और बोला- फटना तो है ही.
मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा- फटना मतलब … मैं उतार तो रही हूँ.
वो फिर हंसने लगा.

मैं समझ गई और उसकी छाती पर प्यार से मुक्का मारने लगी. मैंने कहा- उसको फड़वाने के लिए ही तो तेरे साथ आई हूँ. आई लव यू जान.
उसने भी मुझे अपनी बांहों में भरा और मेरे होंठ चूमते हुए मुझसे कहा- आई लव यू टू मेरी जान.
यह कह कर वो मेरे कपड़े उतारने लगा.

कुछ ही पलों में उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था. वो मेरी चूची को चूसने और चूमने लगा. मैं मस्त हो गई और उसके सर को अपनी छाती से दबाते हुए उसको अपना दूध पिलाने लगी.

वो मुझे चूमते चूमते बिस्तर पर ले आया और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया. मैं भी बेतहाशा चूम रही थी. उसका साथ मुझे बड़ा ही मस्त लग रहा था.

फिर वो मुझे चूमते चाटते हुए नीचे को होने लगा. उसने मेरी चूत को सहलाया और अपनी जीभ रखने लगा. मुझे उसकी जुबान का टच बहुत ही गर्म लगा और मैंने एकदम से सिहर उठी. वो मेरी चूत चाटने लगा.

तभी मुझे उसका लंड देखने मन किया. मैंने उसके लंड को हाथ लगाया और बोली- मुझे तुम्हारा देखना है.
वो बोला- क्या देखना है?
मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से मसला और कहा- इसको.
वो मुझे ठिठोली करने लगा- पैन्ट को क्या देखना है?
मैंने कहा- पैन्ट को नहीं, इसके अन्दर जो है, उसको देखना है.
वो बोला- पैन्ट के अन्दर तो चड्डी है. तुमको चड्डी देखना है?

मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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मेरी देसी चूत

मेरा नाम डिम्पल है और मैं 28 साल की हूं. मेरा फिगर 36-30-36 का है. मेरी शादी भी हो चुकी है. आज मैं आपको अपनी जिन्दगी का एक अनछुआ लम्हा बताने जा रही हूं. मेरे एक फ्रेंड के कहने पर मैं ये वाकया आपके साथ बांट रही हूं.

ये घटना अब तक मेरे मन को कचोट रही थी. मैंने आज तक इसके बारे में किसी से जिक्र नहीं किया था. आज मेरा बहुत मन किया मैं इसको आप लोगों को बताऊं.

मैं इस साइट पर बिल्कुल नयी हूं. अगर मुझसे यह कहानी लिखने में कोई गलती हो जाये तो मुझे माफ करें.
अब मैं अपनी कहानी की शुरूआत करती हूं.

शादी से पहले ही मैं तीन लड़कों के साथ सम्भोग का सुख ले चुकी थी. इसलिए मैं उन तीनों के बारे में आपको एक एक करके बताऊंगी. आप थोडा़ सा धैर्य रखें.

मैं बहुत ही इज्जतदार फैमिली से हूं. 12 वीं तक तो मेरी पढ़ाई भी वैसे ही हुई जैसे कि सब लोग करते हैं अपने लोकल एरिया में. मैंने भी अपना स्कूल अपने गांव में ही पूरा किया.

उसके बाद आगे की पढ़ाई का सवाल था. मेरे मां-पापा मुझ पर काफी भरोसा करते थे. मैंने आज तक कोई गलत काम नहीं किया था और हमेशा अपनी इज्जत को बरकरार रखा. इसी भरोसे पापा ने मुझे पटना सिटी भेजने का फैसला किया.

पटना के एक अच्छे कॉलेज में मेरा एडमिशन हुआ और मैं वहीं पर हॉस्टल में रहने लगी. शुरू शुरू में सब कुछ ठीक चल रहा था. मैं भी पढ़ाई में मन लगा रही थी. मगर मैं जवान भी हो रही थी इसलिए कभी कभी नजर भटक जाया करती थी.

फिर मेरी मुलाकात कॉलेज के एक लड़के से हुई. उसका रियल नाम मैं यहां पर नहीं बता सकती हूं. मैं उसको सुमित नाम दे रही हूं.
सुमित देखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम था.

एक दिन कुछ लड़के मुझे और मेरी सहेलियों को परेशान कर रहे थे. सुमित पास आया और उसने उन लड़कों को डांट कर भगा दिया. उस दिन के बाद से मैं उसको अच्छा मानने लगी.

मेरी अभी तक उससे बात नहीं हुई थी. बस एक बार हैलो हुई थी. उसके बाद जब कभी भी वो मेरे सामने होता था तो मैं उसको स्माइल करके निकल जाया करती थी. वो भी बदले में स्माइल से जवाब देता था.

इस तरह से धीरे धीरे हम दोनों की फ्रेंडशिप बढ़ने लगी.

एक दिन उसने मुझे उसके साथ घूमने चलने का ऑफर दिया. मैं सोच नहीं पाई कि उसको क्या जवाब दूं. एकदम से किसी के इतने करीब जाने में मुझे डर लग रहा था. मैं जब गांव में थी तो लड़कों से बच कर रहती और मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड भी नहीं था.

सुमित को मैंने मना कर दिया. मैं इसके लिए कम्फर्टेबल नहीं थी. घरवालों से मुझे बहुत डर लगता था. अगर मेरे साथ कुछ भी गलत हुआ तो मेरे घरवालों का विश्वास टूट जाता.

मेरे मना करने पर सुमित ने मेरी बात का बुरा भी नहीं माना.
वो बोला- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारी इच्छा नहीं है तो रहने देते हैं. मैंने तो इसलिए पूछा था कि तुम पटना में नयी हो इसलिए तुम्हें शहर दिखा ले आता हूं.

वैसे मेरा बहुत मन करता था सुमित से बात करने के लिए. मगर मैं खुद को कंट्रोल करके रख रही थी. अब हम दोनों की दोस्ती आगे बढ़ रही थी.
सुमित ने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर मांगा. मैंने कह दिया कि मैं मोबाइल फोन नहीं रखती हूं.

वो बोला- तो फिर घर पर कैसे बात करती हो?
मैंने कहा- हॉस्टल के नम्बर पर बात हो जाती है.
वो बोला- ओह्ह, ठीक है.

इस तरह से वक्त बीतता गया और फिर मेरा बर्थडे आ गया. मेरे बर्थडे गिफ्ट के रूप में उसने मुझे एक मोबाइल फोन दिया.
मैंने वह फोन का गिफ्ट लेने से मना कर दिया.
मगर वो जिद करने लगा; कहने लगा कि अगर मोबाइल नहीं लिया तो वो मुझसे बात नहीं करेगा.
उसकी जिद के आगे मुझे मानना पड़ा और मैंने मोबाइल ले लिया.

मेरे पास मोबाइल आने के बाद रोज सुमित का फोन आता था. वो रोज मुझसे बातें करने लगा और मुझे भी उसके साथ बातें करना अच्छा लग रहा था.

उससे बात होते होते पता नहीं कब हमारी ये दोस्ती प्यार में बदल गयी. फिर एक दिन उसने मुझे प्रपोज भी कर दिया. सुमित से मेरा लगाव काफी बढ़ चुका था इसलिए मैं भी उसको मना नहीं कर पाई.
इस तरह हम दोनों ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बन गये.

उसके बाद रोज उससे घंटों बातें होने लगीं. रात रात भर उसके साथ मैं फोन पर बातें करती रहती थी. कॉलेज में भी उसके साथ टाइम स्पेंड किया करती थी. मगर अभी तक हम दोनों कहीं बाहर नहीं गये थे.

एक दिन उसने बोला कि चलो घूमने चलते हैं. मैं भी पटना में इतने दिनों से रह रही थी लेकिन अभी तक कहीं घूमी नहीं थी. इसलिए मैंने चलने के लिए हां कर दी.

मैं अपने साथ अपनी रूम मेट को भी ले गयी. हमने बाहर काफी अच्छा वक्त बिताया और मस्ती की. उसके बाद हम फिर से हॉस्टल लौट कर आ गये. कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा.

एक रात की बात है कि हम दोनों फोन पर बातें कर रहे थे. बात करते हुए सुमित थोड़ा नॉटी होने लगा. एक दो बार मना करने के बाद मेरा भी मन करने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

उस दिन के बाद से हम दोनों काफी खुलने लगे थे. अक्सर वो फोन पर मुझसे सेक्स चैट किया करता था. मैं भी उसको मना नहीं करती थी. अब हम दोनों के बीच में वो सब बातें होने लगी थीं जो एक नॉर्मल ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के बीच में होती है. हम दोनों के बीच में भी वो सब होने लगा.

फिर एक दिन उसने चिड़ियाघर में घूमने के लिए बोला. हम दोनों ज़ू में घूमने के लिए गये. इस बार केवल मैं और सुमित ही थे. मैंने उस दिन सलवार और सूट पहना हुआ था. उसके ऊपर एक दुपट्टा डाला हुआ था.

मैंने कभी जीन्स नहीं पहनी थी और न ही मैं ब्रा पहनती थी क्योंकि उस वक्त मेरे मम्में इतने बड़े नहीं थे कि उनको थामने के लिए मुझे ब्रा की जरूरत पड़े. अब मैं सुमित के साथ काफी ज्यादा कंफर्टेबल हो गयी थी.

सुमित ने मेरे हाथ को अपने हाथ में थाम रखा था और हम दोनों साथ में चलते हुए ज़ू में घूम रहे थे. काफी देर चलने के बाद हम दोनों एक जगह जाकर बैठ गये.

उस जगह पर काफी सुनसान सा था. हम दोनों एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे. हम दोनों बातें कर रहे थे कि बीच में ही सुमित ने एक किस की डिमांड कर दी.
मैं आनाकानी करने लगी.
काफी जोर देने के बाद मैं गाल पर किस देने के लिए राजी हुई.
सुमित मेरे होंठों पर किस करना चाहता था. मगर आखिर में उसने मेरे गाल पर ही हल्का सा किस किया.

फिर वो मेरी गोद में अपना सिर रख कर लेट गया. बात करते करते उसने मेरे पेट पर सूट के ऊपर से ही चूमना शुरू कर दिया. कभी मेरे पेट पर उंगली घुमाने लगा. मैंने भी उसको रोकने की कोशिश नहीं की क्योंकि अगर मैं कुछ हरकत करती तो किसी को पता चल जाता. इसलिए वो जो करता रहा मैंने करने दिया.

सुमित ने फिर धीरे से मेरे शर्ट को साइड से हटा लिया और मेरे नंगे पेट के बीच में मेरी नाभि पर किस कर दिया. मेरे बदन में जैसे चीटियां रेंगने लगी और मैं उत्तेजित होने लगी. मैं उसको रोकने लगी मगर वो रुक नहीं रहा था. फिर मैंने उसे हटाया और अपनी कुर्ती ठीक कर ली और अपने पेट के नंगे पार्ट को ढक लिया.

कुछ देर वो चुपचाप बैठा रहा. मेरा ध्यान उसकी पैंट में बनी गोल और लम्बी सी डंडे के आकार की आकृति पर गया. उसकी जिप के पास में एक लम्बा सा खीरे जैसा कुछ उठा हुआ था. शायद ये उसका सेक्स ऑर्गन था. मैंने पहली बार किसी लड़के के लिंग को ऐसे इतने करीब से उठा हुआ देखा था.

अपने ही खयालों में मैं बैठी थी कि तभी सुमित ने मेरी चूचियों पर हाथ रख कर उनको दबा दिया. उस वक्त मेरी चूची अमरूद जैसी ही थी. दो-तीन बार उसने ऐसा ही किया और मैं भी एक्साइटेड हो गयी.

यह सब कुछ मेरे साथ पहली बार हो रहा था. मगर मैं कुछ भी जाहिर नहीं कर रही थी. फिर उसने ई-पॉड निकाला और कुछ फनी वीडियो मुझे दिखाने लगा. बीच बीच में उसने उसके अंदर पोर्न वीडियो भी डाले हुए थे. उसने मुझे भी वो पोर्न वीडियो दिखा दिये.

मैंने पहली बार सेक्स वीडियो देखा था. उसमें मैंने देखा कि एक लड़की एक लड़के के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी.
सुमित बोला- तुम भी ऐसा करना चाहोगी?
मैंने मना कर दिया.

मगर फिर वो जिद करने लगा.
मैं बोली- मैं मुंह में नहीं लूंगी, हां बस हाथ में पकड़ सकती हूं.
मेरे हां करने पर उसके चेहरे पर एक हवस दिखाई देने लगी.

हम दोनों फिर थोड़ा और अंदर चले गये. वहां पर दूर दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था. वैसे भी दोपहर का टाइम हो चुका था. वहां पर ऐसे समय पर हमारे जैसे कपल ही ज्यादा रहते हैं.

उसके बाद सुमित ने अपना औजार अपनी पैंट से बाहर निकाल लिया. मैं उसके टूल को देखती ही रह गयी. मुझे काफी घबराहट हो रही थी. मैंने पहली बार लिंग ऐसे अपनी आंखों के सामने देखा था.

सुमित ने मुझे उसका लंड पकड़ने के लिये कहा. मैं शरमा रही थी. मगर फिर मैंने कांपते हाथ से उसके लंड को पकड़ लिया. उसका लंड काफी गर्म था. उसको हाथ में भर कर मैं उसे हिलाने लगी.
वो सिसकारते हुए बोला- आह्ह… डिम्पल डार्लिंग, एक बार इसको मुंह में भी ले लो.

मैंने उसको मना कर दिया. उसके बाद सुमित मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फिराने लगा. वो मेरी सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करने लगा. मैं मना करने लगी कि कोई देख लेगा.
वो बोला- दूर दूर तक यहां पर कोई भी नहीं है.
मैं आसपास देखने लगी तो सच में वहां पर कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था.

इतने में ही सुमित ने मेरी सलवार का नाड़ा खींच दिया. नाड़ा खुलते ही मेरी सलवार नीचे सरक गयी क्योंकि मैं खड़ी हुई थी.
मैंने कहा- नहीं, ये सही नहीं है सुमित.
वो बोला- जान, बस एक बार दर्शन करने दो मुझे इसके.

मैं मना करती रही लेकिन वो मानने वाला नहीं था. मैं उसकी जिद को पूरा करने के लिए मान गयी. मेरे हां करते ही वो घुटनों के बल बैठ गया और मेरी पैंटी को नीचे करने लगा. उसने मेरी पैंटी को खींच दिया और मेरी चूत को देखने लगा.

फिर मैं सलवार ऊपर खींचने लगी लेकिन उसने इसी बीच मेरी चूत पर होंठों से किस कर दिया. डर के मारे मैंने एकदम से सलवार ऊपर कर ली और बोली- चलो अब. यहां पर कोई देख लेगा.
मैंने अपनी सलवार का नाड़ा बांध लिया था.

उस दिन के बाद से जब भी मैं उससे कॉलेज में मिलती थी तो मौका पाकर वो मेरे मम्मों को दबा देता था या फिर हाथ से मसल देता था. बार बार ऐसा करने से मेरी चूचियों का साइज अब धीरे धीरे बढ़ने लगा था जो कि मैं साफ साफ नोटिस कर पा रही थी.

सुमित ने कई बार मुझे उसके रूम पर बुलाने की कोशिश की. मगर मैं टालती रही. मैं जानती थी कि अगर वो पार्क में इतना कुछ कर सकता है, कॉलेज टाइम में भी मेरी चूची पकड़ सकता है तो फिर अगर मैं अकेले में मिली तो वो बहुत कुछ कर देगा. इसलिए मैंने टाल दिया. मैं बार बार उसको मना कर देती थी.

कुछ दिन के बाद इस बात को लेकर हम दोनों का झगड़ा भी होने लगा. वो कहता था कि मैं उसको प्यार ही नहीं करती हूं, उस पर भरोसा ही नहीं करती हूं.

मैं बोली- देखो, तुम ऊपर से कुछ भी कर लो लेकिन उससे ज्यादा तो मैं शादी के बाद ही करने दूंगी. मैं शादी से पहले ये सब नहीं करना चाहती हूं. ये सब गलत है अभी.

इस तरह वक्त बीत रहा था. मैं उसको मौका नहीं दे रही थी. इसी बीच मेरी बड़ी दीदी की शादी होने लगी. लड़का यानि कि मेरा होने वाला जीजा पटना में ही जॉब करता था. फिर शादी के बाद मेरी दीदी पटना में ही रहने के लिए आ गयी.

बीच बीच में टाइम निकाल कर मैं भी दीदी के पास चली जाया करती थी मिलने के लिए. एक बार मैं दीदी के यहां पर गयी हुई थी. रात को काफी लेट हो गयी थी इसलिए मैं हॉस्टल में नहीं आई और रात में वहीं पर रुक गयी.

मेरी दीदी और जीजा का रूम साथ में ही था. वो साथ वाले रूम में ही सोये हुए थे. रात में काफी टाइम के बाद मेरी आंख खुली. मेरे कानों में कुछ आवाजें आईं.

उत्सुक होकर मैं देखने के लिए उठी कि ये कैसी आवाजें आ रही हैं इतनी रात में. मैं दीवार पर कान लगा कर सुनने लगी. वो अजीब सी आवाजें थीं.

फिर मैंने खिड़की के छेद से देखा तो दीदी और जीजा का प्रोग्राम चल रहा था. मेरे जीजा ने मेरी दीदी को नंगी किया हुआ था और वो खुद भी नंगे थे. जीजा ने दीदी की टांगों को उठा कर कंधे पर टांगा हुआ था और वो दीदी की चूत में अपना लिंग घुसा रहे थे.

दीदी के मुंह से मस्ती भरी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं और वह अपनी मोटी मोटी चूचियों को मसलते हुए आह्ह आह्ह करते हुए जीजू के लंड को अपनी चूत में ले रही थी.

दीदी की चूत में जीजा का मोटा लंड घुसते हुए देख कर मेरी धड़कन धक धक होने लगी. ये सब हो क्या रहा था. मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी. ऐसा नहीं था कि मुझे मर्द और औरत के बीच के शारीरिक रिश्ते के बारे में नहीं पता था, मगर मेरी आंखों के सामने ऐसा कुछ पहली बार मैं होते हुए देख रही थी.

फिर जीजू ने दीदी को उठने के लिए कहा. दीदी उठ गयी और जीजू नीचे लेट गये. दीदी फिर जीजू के ऊपर अपनी चूत खोल कर लंड पर बैठने लगी. दीदी ने धीरे धीरे बैठते हुए जीजा का लंड अपनी चूत में ले लिया.

लंड अंदर उतारने के बाद वो जीजा के लंड पर उछलने लगी. जीजा भी उसकी चूत में नीचे से लंड के धक्के लगाने लगे. जीजू दीदी की चूचियों को अपने हाथों से जोर जोर से दबा रहे थे. जीजू के हाथों में दीदी के मोटे मोटे चूचे उछल रहे थे.

ये सब देख कर मेरा गला सूखने लगा मगर मेरी चूत में गीलापन होने लगा. फिर जीजू ने उनको घोड़ी बना लिया और पीछे से उनकी चूत को पेलने लगे. दस मिनट हो गये थे चुदाई चलते हुए. मेरे पैर भारी हो रहे थे. मुझसे खड़ा नहीं रहा जा रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे शरीर में ताकत नहीं बची है.

फिर मैंने देखा कि जीजू ने एकदम से अपनी स्पीड बढ़ा दी और वो फिर रुकते चले गये और दीदी के ऊपर ढेर हो गये. फिर वो साइड में होकर लेट गये. दोनों हांफ रहे थे.

अब मैं वहां से साइड हो गयी. मैं अपने रूम में आकर लेट गयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ ये क्या हो रहा है. मेरी धड़कन बहुत तेजी से चल रही थी. मेरी सांस फूल सी गयी थी. पूरा बदन कांप रहा था. मगर एक एक्साइटमेंट भी थी, कुछ मदहोश कर देने वाली सी फीलिंग आ रही थी इसलिए वो सब मुझे अच्छा भी लग रहा था. मैंने चूत को कपड़ों के ऊपर से छूकर देखा तो मेरी चूत का गीलापन कपड़े तक आ चुका था.

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आह चोद दे साले कमीने

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू श्रीवास्तव है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ. मेरी उम्र 34 साल है. मेरी साइज़ 36-32-38 की है. मेरा बदन पूरा भरा हुआ है. मेरे घर में मैं और मेरे नामर्द पति और मेरे दो बच्चे रहते हैं. मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं. वो मुझे बिस्तर में खुश नहीं कर पाते हैं.

एक दिन की बात मेरे पति ऑफिस गए थे और मैं नहा कर कपड़े ही पहन रही थी कि इतने में एक सब्जी वाला बाहर मेरे दरवाजे पर आवाज़ दे रहा था.
“मैडम सब्जी ले लो … हरी ताज़ी सब्जी है.”

मैंने साड़ी पहन कर बाहर जाकर देखा तो एक बड़ा मस्त मर्द सब्जी बेच रहा था. इसे मैंने पहले कभी अपने एरिया में नहीं देखा था. शायद नया सब्जी वाला था.

मैंने इधर-उधर देख कर उसको अपने पास बुलाया.
वो करीब आया तो मैंने पूछा- भैया आपकी उसका क्या रेट है?

मेरी इस दो अर्थी बात सुनकर वो मुझे ध्यान से देखने लगा. वो मैडम से सीधे भाभी पर आया और बोला- भाभी जी, आपके लिए तो सब रेट कम ही हैं.. आप तो बस बोलो कि क्या लोगी.
मैंने इठलाते हुए अपने चूचे हिलाए और बोला कहा- बड़े बड़े से वो दे दो.
वो बोला- क्या दे दूँ बड़े बड़े से?
मैंने- आलू दे दो … दो किलो.

उसने भी अपनी लुंगी में अपना लंड जरा सा सहलाया और मेरी तरफ देखता हुआ बोला- कैसे लोगी भाभी जी?
मैंने मन ने सोचा कि कह दूँ कि जैसे तुम देना चाहो.
फिर मैंने पूछा- कैसे लोगी से … तुम्हारा क्या मतलब है भैया?
वो बोला- मतलब कुछ डलिया वगैरह में लोगी.. या मैं थैली में दे दूँ?
मैंने कहा- थैली में ही दे दो.

उसने आलू तौल दिए, मैंने उससे आलू ले लिए. उससे आलू लेते वक्त मैं जरा झुक गई, जिससे उसको मेरे गहरे गले वाले ब्लाउज में से मेरी मस्त चूचियों की भरपूर झलक दिख गई. मेरी निगाह उसकी लुंगी पर थी, उसकी लुंगी ने उठना शुरू कर दिया था.
फिर मैंने उसको ध्यान से देखा. वो एक 40 साल का हट्टा-कट्टा पहलवान टाइप का मर्द दिख रहा था.

उससे सब्जी लेकर मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो मुझसे बोला- भाभी जी पैसे?
मैंने कहा- भैया अभी अन्दर से लाकर देती हूँ.
वो बोला- ठीक है.
मैं अन्दर जाने लगी, तभी मैंने पलट कर देखा, वो मेरे पिछवाड़े को बड़ी मस्त निगाहों से देख रहा था.
मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर चली गई.

जब मैं वापस आई, तो मैंने देखा कि उसकी कामुक नज़र मेरे गदराए हुए जिस्म पर टिकी थीं और वो मेरे मम्मों को बड़ी ध्यान से देख रहा था.

मैंने उसको पैसे दिये और अन्दर जाने के लिए मुड़ी तो उसी समय न जाने कैसे मेरे पैर में मोच आ गई और मैं वहीं गिर पड़ी. मुझे गिरता देख कर वो सब्जी वाला मुझे उठाने लगा. मैंने उसको मना किया, लेकिन वो नहीं माना. वो मुझे उठा कर घर के अन्दर ले आया. जब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था, उस वक़्त मैंने महसूस किया था कि उसका फौलादी लंड मेरी गांड के ऊपरी हिस्से में मतलब मेरी कमर को टच कर रहा है. उसने मुझे कसके पकड़ा हुआ था.

वो मुझे बेड के नजदीक लाया और मुझे बड़े हौले से बेड पर लिटा दिया. फिर वो मुझसे बोला- भाभी जी … मूव किधर रखी है, बता दीजिए … मैं आपके पैर में मूव लगा देता हूँ.
मैंने उससे बोला- तुम रहने दो … तुम बाहर चले जाओ, तुम्हारा ठेला बाहर खड़ा है … मैं अपने आप मूव लगा लूँगी.
वो बोला- नहीं … आपको दर्द है … मैं आपको इस हालत में ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकता … मेरे ठेले की चिंता आप न करें.

मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो खुद से सामने की टेबल पर रखी मूव उठा लाया और मेरी साड़ी को थोड़ा ऊपर करके पैर में मूव लगाने लगा.

उसके हाथों में बड़ी नफासत थी … मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा. उसके हाथों से थोड़ी ही देर में मुझे आराम मिल गया और मैं पैर फैला कर लेट गई. वो अब और भी अच्छे से मेरे पैर की मालिश करने लगा.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि वो साड़ी को कुछ और ऊपर कर रहा था. अब वो अपना हाथ मेरी जांघों तक ले जा रहा. मैं आंखें खोल कर उठ कर बैठ गई.

पहले तो मैंने सोचा कि शायद ये मालिश से भी कुछ आगे बढ़ेगा, तो हो सकता है कि आज मुझे शान्ति मिल जाए.

मैं उसकी मर्दाना छाती देख कर बड़ी चुदासी हुई जा रही थी. साथ ही मेरा दिमाग काम करने लगा था कि कैसे भी करके इसे फंसाना ही है. ये मुझे मस्त चोद सकता है. मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि अगर आज ये सैट हो गया तो इसके लंड की चुदाई से मेरी चुत की आग शांत हो जाएगी जो आज तक मेरे पति नहीं कर पाए थे.

मैंने उससे कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?
वो बोला- भाभी जी … मैं मालिश कर रहा हूँ.
मैं बोली- मोच तो नीचे वाले हिस्से में आई थी, तो तुम ऊपर क्यों मालिश कर रहे हो?
वो बोला- अरे मोच को मालिश करने के बाद पूरे पैर को अच्छे से मालिश करना पड़ता है … नहीं तो दर्द नहीं जाएगा.
मैं बोली- तुम रहने दो … अब जाओ. मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही मुझे सहला रहे हो.
वो बोला- नहीं भाभी जी, मैं आपकी मालिश कर रहा हूँ.

मैंने उसे उकसाया- कहीं तुम मुझे अकेली पाकर मेरे साथ गलत काम तो नहीं कर दोगे.
ये कहते हुए मैंने उठने की कोशिश की और अपना पल्लू ढलक जाने दिया. मेरे गहरे गले के ब्लाउज से उसको मेरी अधनंगी चूचियां गर्म करने लगी थीं. मैं देख रही थी कि उसका लंड फूलने लगा था.

वो मेरी चूचियों की तरफ देख कर बोला- अगर आप मुझसे कुछ गलत काम करने के लिए कहेंगी, तो मैं जरूर कर दूंगा. वैसे आप अपनी गेंदें दिखा कर मुझे भड़का रही हैं.
मैंने पूछा- गेंदें मतलब?
वो लंड सहला कर मुझसे बोला- भाभी जी गेंदें नहीं समझती हो. मैं आपके दूधों की बात कर रहा हूँ.

यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे सीने से लगा कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया. साथ ही मेरी साड़ी भी खींच दी थी. हालांकि मेरी साड़ी अब भी मेरे बदन से लिपटी हुई थी. मैं समझ गई कि लंड काबू में आ गया है. अब मैंने नाटक करना शुरू किया.

“ये क्या कर रहे हो तुम … इधर से चले जाओ तुम!”
वो- एक तो तेरे लिए इतनी मेहनत की और बिना कुछ दिए बोल रही हो कि अब जाओ.
मैं घबरा कर बोली- ये तुम क्या बोल रहे हो … तुम तुम्हारा दिमाग़ खराब है क्या?
वो बोला- हां तुझे देख कर मेरा दिमाग़ और हालत दोनों खराब हो गए हैं. अब तुझे पहले जी भर कर चोदूंगा, फिर मेरा दिमाग सही होगा.

मैंने उसको भगाने की कोशिश की नौटंकी की लेकिन मैं नाकामयाब रही.

वो मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. पहले तो उसने मेरी साड़ी पूरी तरह से खींच कर मेरे जिस्म से अलग कर दी. मैं उसके सामने रोने का ड्रामा रही थी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो.

लेकिन उसकी आंखों में अलग ही चमक थी. वो मुझको देख कर बोला- साली तुम चुदासी औरतें ऐसे गांड मटका मटका कर चलती हो कि हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता होता. जब चोदने की बारी आती है, तो साली नखरे दिखाने लगती हो … एकमद चुप रह साली रंडी … आज तेरी चुत का मैं भोसड़ा बना दूँगा. आज अपने फौलादी लंड से तेरी चुत के चिथड़े उड़ा दूँगा … तू बस आज देखती जा.

उसने मेरी साड़ी तो खींच ही दी थी. अब मैं उसके सामने ब्लाउज पेटीकोट में रह गई थी.

मुझे इस हालत में देख कर वो अपना लौड़ा सहला कर बोला- साली कितनी बड़ी रांड लग रही है तू … तेरी चुचियां कितनी बड़ी हैं. आज में इनका सारा रस पी जाऊंगा.

मैं उसके सामने छोड़ देने की कहती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था. उसने एक झटके में मेरा साया भी फाड़ कर अलग कर दिया और अगले झपट्टे में मेरा ब्लाउज भी मेरी चुचियों का साथ छोड़ चुका था. अब मैं उसके सामने ब्रा और पेंटी में थी और उसे मना कर रही थी.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और मेरा सामने पूरा नंगा हो गया. उसका लंड देख कर मैं हैरान हो गई. मैंने आज तक जीवन में कभी लंड के इतना बड़ा होने की कल्पना ही नहीं की थी. उसका 8 इंच लंबा था और गोलाई में 3 इंच मोटा था. मुझे तो ऐसा लगा कि ये तो गधे का लंड लगवा कर पैदा हुआ है और आज तो यह कमीना मेरी चुत को सचमुच फाड़ ही देगा.

उसने मेरी तरफ आते हुए मेरी मेरी ब्रा और पेंटी को उतार फेंका और मेरी चूचियों को तेज़ी से दबाने लगा.

मेरी धीरे से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी और मैं उससे कहती रही- मुझे छोड़ दो प्लीज़.
लेकिन वो मुझसे बोला- चुप साली कमीनी … आज बस तू मेरे लंड का मजा ले … मैं तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा … चुप रह रंडी कहीं की.

थोड़ी देर बाद मेरा विरोध कम होने लगा और मैं उसके सामने शांत होने लगी. मुझे भी मजा आने लगा था.

वो मेरे मम्मों को अपनी बड़ी बड़ी हथेलियों में भींच कर पूरी दम से मसल और रगड़ रहा था. वो इतनी तेज़ी से मेरे मम्मों का मलीदा बना रहा था, जैसे कोई राक्षस हो. वो मेरे ऊपर लदा हुआ था और मैं अपने नीचे उसका लंड महसूस कर रही थी.

कोई 15 मिनट बाद वो मम्मों को अच्छे से रगड़ने के बाद मुझसे बोला- चल साली रंडी … मेरा लंड मुँह में लेकर इसे चूस.

पहले तो मैंने मना किया लेकिन उसने जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. थोड़ी देर में उसके लंड का साइज़ और भी ज्यादा बढ़ने लगा और मुँह से बाहर आने लगा. जब उसका लंड अच्छे से बड़ा हो गया तब उसने अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल लिया.

मैं उसके पूरी तरह से खड़े लंड को देख कर गहरा गई लेकिन मुझे मेरी चुत की आग लगातार गर्म कर रही थी.

वो लंड को मेरी चुत पर ले गया और सुपारा घिसते हुए बोला- साली रंडी कितनी मस्त है तेरी चुत … लगता है तेरा पति तुझे अच्छे चोद नहीं पाता … चल कोई बात नहीं … आज मैं इसको भोसड़ा बना दूँगा … तू चिंता मत कर.

वो अपना लंबा लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया. उसने मेरी तरफ देखा मैं घबरा कर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. मुझे मालूम था कि जैसे ही इसका लंड अन्दर जाएगा मेरी चुत एक कबाड़खाना बन जाएगी.
लेकिन चुत की सारी आग भी ठंडी करवाने की ललक मुझे उसके लंड से चुदवाने के लिए उकसा रही थी.

उसने लंड चुत पर रख कर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. उसका लंड मेरी चुत में अन्दर घुसा और उसी पल मेरे मुँह से एक चीख निकल पड़ी- अया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … मर गई.
वो मुझे डांटता हुआ बोला- चुप साली रंडी … अभी थोड़ी देर में तुझको भी मजा आने लगेगा.

इसके बाद उसने एक और धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी चुत के अन्दर चला गया. मैं फिर से दर्द से चीख उठी- आह मर गई … प्लीज़ प्लीज़ … अब रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है … आ … अया … अया.

वो कमीना मेरी एक ना सुनने वाला था. दूसरे ही पल उसने एक और धक्का दे मारा. इस बार उसका लंड पूरा मेरी चुत में चला गया. मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था. क्योंकि पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड अपनी चुत में लिया था.

वो थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रुका रहा. फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. अब मुझे भी दर्द कम होने लगा था और मैं मजे लेने लगी थी. वो अब अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल कर चुदाई कर रहा था. वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को अब भी जानवरों की तरह रगड़ रहा था.
मुझे मजा आने लगा और मेरे मुँह से आनन्द भरी सिसकारियां निकलने लगी थी- आह … ससस्स … आहह. … सस्सस्स.

फिर वो मुझसे बोला- साली रंडी पहले तो नखरे दिखा रही थी और अब लंड के मज़े ले रही है. आज तू देख … तेरी चुत का में गड्डा बना दूँगा.
तब मैं बोली- चोद कमीने … और ज़ोर से चोद … फाड़ दे मेरी चुत को मादरचोद … आज मुझे रगड़ रगड़ कर चोद ताकि मैं 2 दिन तक सही से चल ना पाऊं.
वो धक्के देते हुए बोला- साली रंडी आज तुझको ऐसे ही चोदूंगा … तू देखती जा बस … आज के बाद तू मुझसे ही चुदाएगी रोज … ले रंडी ले.

और उसने धक्कों की स्पीड तेज़ कर कर दी और मेरे मुँह से ‘स्सा … आ … अया … इस्स … इस्स्स्स.’ की आवाज़ तेज़ी से आने लगी और मैं कमर उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी. मैं भी चुदाई की जन्नत की सैर का मजा लेने लगी- आह चोद दे साले कमीने … आ … आह … ऐसे … ही … पेल पूरा … हां … ऐसे चोद मादरचोद मुझे … फाड़ दे मेरी चुत को!

कोई 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गया और ढेर हो गया. इस बीच मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

वो मुझसे बोला- बता मेरी जान … मजा आया कि नहीं?
मैं उसे चूमते हुए बोली- बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा.

फिर दस मिनट के बाद उसका लंड वैसे ही तन गया और मुझे इस बार अपने ऊपर बैठने को बोला. वो बेड पर चित लेट गया. मैं उसके खड़े लंड के ऊपर चुत फंसा कर बैठ गई. मैंने उसके मूसल लंड को अपने अन्दर ले लिया.

अब वो मुझे हवा में उठा उठा कर चोद रहा था. अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहा था.

मुझे उसके लंड से चुदने में बहुत मजा आ रहा था. मैं लगातार 20 मिनट तक ऐसे ही चुदती रही. फिर हम दोनों झड़ गए और ऐसे ही 20 मिनट तक पड़े रहे. आज उसने मुझे जन्नत की सैर करवा दी थी. आज मैं बहुत खुश थी.

मैं उससे बोली- तुम मुझे ऐसे ही रोज चोदा करो … मेरा नामर्द पति कुछ नहीं कर पाता.
वो मेरी चूची दबा कर बोला- तू चिंता मत मेरी रांड … मैं अब तेरी चुत को भोसड़ा बना दूँगा. मैं अपने साथ अपने दोस्तों से भी तुझे चुदवाऊंगा और तेरी चुत को चबूतरा बना दूँगा.

उसकी बात से मैं पहले तो डर गई और बोली- नहीं तुम अकेले ही आना … किसी और को मत लाना … कहीं मेरे पति को पता चल गया, तो उन्हें बहुत गुस्सा आएगा.
वो बोला- साली रांड मुझसे चुदवा रही है, तब तेरा पति क्या तेरी आरती उतारेगा. होने दो भोसड़ी वाले को गुस्सा. अब चुपचाप जो मैं बोलूं, वही करना. मैं जिसको भी तेरी चुत चुदाई के लिए लाऊंगा, तुम बस उससे अपनी चुत चुदवा लेना.

मैं एक बार को तो खुश हो गई कि अब तो बदल बदल कर लंड मिलेंगे.

वो कहता जा रहा था- जो भी तुमको चोदना चाहेगा … उससे हजार रूपए भी वसूल लेना. समझो अब तुम मेरी रंडी हो गई हो.
मैं कुछ नहीं बोली और वो मुझे किस करके चला गया.

फिर बाद में वो अपने दोस्तों को लाता और वो लोग मुझे रंडी बना कर चोद देते.

कुछ ही दिनों में सब्जी वाले और उसके दोस्तों ने मेरी चुत का भोसड़ा बना दिया. उनका जब भी मन होता, वे आ जाते और मुझे चोद कर चले जाते. मुझे भी लम्बे लम्बे बड़े बड़े लंड से चुदने में मजा आने लगा था. मैं बहुत खुश रहती थी. मैं समझती हूँ कि एक नामर्द की बीवी को सही मायने में औरत होने की ख़ुशी इन्हीं लोगों से चुदने से मिलती थी.

मैं चुद चुद कर इन लोगों की रंडी बन गई थी … मेरे पति को अब तक पता नहीं चला था.

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भाई के दोस्त को पटाकर चूत चुदवा ली

सेक्सी जवान लड़की की कुंवारी चूत में जब लंड लेने की ललक लगती है तो वो वासना पूरी करने का हरसंभव जुगाड़ करने लगती है. ऐसी ही एक हॉट गर्ल ने क्या किया?

जवानी के जोश में अक्सर हो जाता है जैसा कि आलिया के साथ भी हुआ. आलिया एक 19 साल की बहुत ही खूबसूरत लड़की है. देखने में बिल्कुल पोर्न स्टार वैलेरी के जैसी लगती है. उसके 36 के बूब्स 38 के हिप्स अगर कोई बूढ़ा भी देख ले तो उसका लंड भी खड़ा होने पर मजबूर हो जाये.

आलिया दिल्ली यूनिवर्सिटी में बी.ए. की स्टूडेंट है जो कि स्वभाव से बहुत ही चंचल है. वह अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती करती है. उसके परिवार में उसके पापा और मॉम के अलावा उसका एक बड़ा भाई भी है.
उसके पिता जी का अपना एक बिजनेस है जो अच्छा चल रहा है. उसकी मां भी बिजनेस में हेल्प करवाती है. उसका भाई वरुण अभी पढ़ाई कर रहा है जो कि देहरादून में रहता है.

चूंकि ये लोग बहुत पैसे वाले थे तो इनके घर में हर तरह की सुख सुविधा मौजूद थी. आलिया के घर में एक जिम भी है. आप सोच सकते हैं कि घर में ही जिम भी बनाया गया है तो कितनी पैसे वाली पार्टी होगी.

बिंदास होने के बाद भी हॉट गर्ल आलिया ने अभी तक सेक्स नहीं किया था. उसके दिमाग में अभी तक ऐसे ख्याल आये ही नहीं थे. वो अपने दोस्तों के साथ ही मस्ती में बिजी रहती थी. उसको अच्छी अच्छी ड्रेस पहनने का शौक था.

आलिया को उसके कॉलेज के कई लड़के प्रपोज भी कर चुके थे लेकिन आलिया किसी को घास नहीं डालती थी. ऐसा नहीं था कि उसको अपने जिस्म या हुस्न पर घमंड था लेकिन वो हमेशा दोस्त बनाना पसंद करती थी.

उस दिन रविवार था. आलिया अपने रूम में शॉर्टस में सो रही थी. फिर अचानक डोर बेल बजी तो उसकी मां ने दरवाजा खोला तो दरवाजे पर वरूण खड़ा हुआ था.

सात महीने के बाद वरूण अपने घर लौटा था. मां उसको देख कर खुश हो गयी. फिर वरूण आलिया को सरप्राइज़ देने के लिए गया. आलिया के रूम का दरवाजा खुला हुआ था. वो नींद में थी.

आलिया की टीशर्ट ऊपर उठी हुई थी और उसके शार्ट्स में से उसकी लाल रंग की पैंटी उसकी गांड पर चढ़ी हुई दिख रही थी. वरूण की नजर जब आलिया पर गयी तो उस गोरे संगमरमर जैसे सफेद बदन पर उसकी नजर फिसलने लगी. उससे भी ज्यादा आलिया की लाल पैंटी कहर बरपा रही थी.
पहली बार वरूण का ध्यान अपनी बहन के जिस्म पर इस तरह से गया था. उसने इतनी हॉट लड़की आज तक नहीं देखी थी.

आलिया को आहट सी सुनाई दी तो उसकी आंख खुली. वरूण को सामने खड़ा देख कर वो चौंक गयी- भैया! आप?
वो पहले तो खुशी से उछल पड़ी और उसको गले से लगा लिया. फिर उसके साथ लड़ने लगी.

आलिया बोली- क्या भाई? इतने दिन के बाद शक्ल दिखा रहे हो? जाओ मैं आपसे बात नहीं करूंगी.
वरूण- यार मेरे एग्जाम्स थे. इसलिए आना पॉसीबल नहीं था. अब मैं हर महीने तुझसे मिलने के लिए आया करूंगा. ये रूठना छोड़ा और देख मैं तेरे लिए क्या लेकर आया हूं मेरे बच्चे!
तभी वरूण ने अपने बैग से एक सेक्सी सी ड्रेस निकाल कर आलिया को दी.

आलिया खुश हो गयी. मगर वरूण सच में हैरान था कि उसकी बहन बहुत ही सेक्सी हो गयी है.
एक दिन आलिया अपने भाई वरूण का मोबाइल चेक कर रही थी. उसके दिमाग में पता नहीं क्या आया कि वो वरूण के मोबाइल की हिस्ट्री चेक करने लगी.

हिस्ट्री में उसने पाया कि उसके भाई के फोन में अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट लिंक खुला हुआ था. उसमें वो हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ने लगी. आलिया के लिए सेक्स स्टोरी जैसा साहित्य एकदम से नया था. उसने कभी सेक्स कहानी के बारे में नहीं पढ़ा था.

कहानी पढ़ते हुए उसे एक कहानी ऐसी भी मिली जिसमें एक लड़की अपने भाई और उसके दोस्तों के साथ सेक्स करती है. आलिया को इस तरह की कहानी पढ़ कर काफी बुरा लगा और उसने मोबाइल वहीं पर बंद कर दिया.

उसके बाद वो जिम में जाकर एक्सरसाइज करने लगी. मगर जिम करने में भी उसका मन नहीं लग रहा था. इतने में ही वरूण भी आ गया. वरूण उसको जिम करने में हेल्प करने लगा और उसको जिम के टिप्स देने लगा.

भाई-बहन की सेक्स स्टोरी पढ़ने के बाद अब आलिया के मन में एक उथल पुथल मच गयी थी. जब वरूण उसके साथ जिम में था तो आलिया के मन में उस वक्त भी ऐसे ही ख्याल आ रहे थे कि पता नहीं उसका भाई उसके बदन को किस नजर से देख रहा होगा. पता नहीं वो भी अपनी बहन के साथ सेक्स करना तो नहीं चाह रहा?

जाहिर सी बात थी कि भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ने के बाद हॉट गर्ल के मन में इस तरह के ख्याल आना लाजमी था. उसका दिमाग उसका साथ नहीं दे पा रहा था.

वो असमंजस में थी कि इसके बारे में कैसे पता करे. अब आलिया इस बात की जांच करना चाह रही थी कि उसका भाई उसके बारे में क्या सोच रहा है. वो जानना चाहती थी कि वरूण के दिल में क्या है.

इसलिए वरुण का ध्यान खींचने के लिए वो बोली- भैया, मेरे बटक (चूतड़) काफी बड़े हो गये हैं. कोई ऐसी एक्सरसाइज बताओ जिससे मैं अपने बटक्स को मेंटेन कर सकूं.

आलिया जानबूझ कर वरूण को उकसाना चाहती थी. वो ऐसा इसलिए बोल रही थी कि वरूण ही कुछ पहल करे. मगर वरूण ने आलिया को नॉर्मल एक्सरसाइज ही बताई. बताते हुए भी वरूण ने अपनी बहन के बदन को ज्यादा टच करने की कोशिश नहीं की.

तब आलिया को लगने लगा कि उसका भाई अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स स्टोरी साइट पर शायद टाइम पास करने के लिए कहानियां पढ़ता है. वो दिल का अच्छा लड़का है. अपनी बहन के बारे में ऐसा नहीं सोचेगा.

आलिया खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका दिमाग अब भी उसका साथ नहीं दे रहा था. उसके मन में हलचल थी. अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उस दिन आलिया ने रात भर अन्तर्वासना की गर्म सेक्सी कहानियां पढ़ीं.

कहानी पढ़ते हुए ही हॉट गर्ल आलिया की कुंवारी चूत गीली होने लगी थी. उस दिन पहली बार आलिया के मन में चुदाई का मजा लेने का ख्याल आया. जब से उसने सेक्स स्टोरी पढ़ना शुरू किया था अब वो मर्दों के साथ सम्भोग का आनंद लेने के लिए उत्सुक सी रहने लगी थी.

जवान लड़की की कुंवारी चूत अब अपने अंदर लंड लेने के लिए मचलने लगी थी. ऐसे ही एक महीना बीत गया था. अब वरूण भी हॉस्टल में जा चुका था. उसके जाने के बाद अब आलिया घर में अकेली सी हो गयी थी.

फिर उसने एक ऑनलाइन साइट से एक डिल्डो मंगवा लिया. फिर उसने रात को अन्तर्वासना साइट खोली और अपनी चूत में उंगली से सहलाने लगी. उसकी कुंवारी चूत मचलने लगी.

कुछ कहानियां पढ़ने तक आलिया की चूत काफी गर्म हो गयी थी. उसकी चूत से पानी चूने लगा. उसने अपनी चूत का पानी उंगली पर लगाया और उसको चाट कर देखा. उसको अलग ही अहसास हुआ और उसके जिस्म में कामुकता हिलौरियां लेने लगी. अब उसका मन ऐसा कर रहा था कि वो अपनी चूत में कोई लंड ले ले.

उसने अपना डिल्डो निकाला और कहानी पढ़ते हुए चूत में लेने लगी. उसकी चूत को मजा आने लगा. वो धीरे धीरे अपनी स्पीड तेज करने लगी. जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे उसका हाथ उसकी चूत में डिल्डो को तेजी से अंदर बाहर करने लगा था.

आलिया ने अपने शॉर्ट्स को पूरा निकाल दिया और अपनी पैंटी को भी नीचे करके अपनी टांगों से अलग कर दिया. अब वो अपनी टांगों को फैला कर लेट गयी और चूत को खोल कर डिल्डो को चूत में लेने लगी.

उसकी कुंवारी चूत की फांकों को खोल कर डिल्डो उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. आलिया की चूत ऊपर उठ कर आने लगी थी. अब आलिया ने एक हाथ से डिल्डो लेते हुए दूसरे हाथ से फोन को नीचे रख कर दूसरे हाथ को फ्री कर लिया.

अब आलिया का दूसरा हाथ उसकी मोटी मोटी तनी हुई चूचियों को दबाने लगा. आलिया को बहुत मजा आ रहा था ये सब करने में. फिर उसने अपने टॉप को उतार दिया और पूरी नंगी होकर लेट गयी.

आलिया का जिस्म तपने लगा था. उसकी चूत में तेजी से डिल्डो अंदर बाहर हो रहा था. वो अपनी चूची के निप्पलों को उंगलियों में भींच कर मसल रही थी. अब उसके हाथ की स्पीड और तेज हो गयी.

तेजी से डिल्डो लेते हुए आलिया के बदन में एक लहर सी उठी और उसकी चूत से पहला स्खलन हुआ. आलिया की चूत ने डिल्डो को अपने रस में भिगो दिया. आलिया ने उस रस लगे डिल्डो को अपने मुंह में लेकर चाट लिया.

डिल्डो पर लगे कुंवारी चूत के रस को चाटते हुए वो उसको लंड का रस समझ कर अपनी प्यास को शांत करने की कोशिश कर रही थी. लंड के रस का स्वाद लेना अब उसके लिए और भी जरूरी हो गया था.

डिल्डो से चूत की चुदाई करने में आलिया को बहुत मजा आया. इस आनंद से वो अब तक अन्जान थी. डिल्डो को चूत में लेकर वो जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. अब रोज ही डिल्डो से मन बहलाना आलिया की आदत बन गयी.

अब आलम ये था कि आलिया सेक्स के बारे में और ज्यादा देखने और पढ़ने लगी थी. जिस साइट से उसने डिल्डो ऑर्डर किया था उसी साइट पर वो सेक्स से संबंधित और भी उपकरण खोजती रहती थी. अब आलिया का ज्यादातर समय मोबाइल पोर्न वीडियो और सेक्सी वीडियो क्लिप साइट्स देखने में व्यतीत होता था.

पोर्न फिल्म देखना भी अब आलिया की आदत बन चुकी थी. अब रात में उसको उसकी तन्हाई चैन से लेटने नहीं देती थी. उसकी चूत अब डिल्डो से भी संतुष्ट नहीं हो रही थी और वो अपनी कुंवारी चूत में अब असली लंड का मजा लेना चाहती थी.

कॉलेज में आलिया के एग्जाम्स खत्म हो चुके थे. उसके दिमाग में एक आइडिया आया. उसने सोचा कि अगर मैं अपने ही कॉलेज में किसी लड़के का लंड लूंगी तो वह अपने दोस्तों को भी इस बारे में बतायेगा. फिर उसके दोस्त भी उसकी चूत मारने की कोशिश करेंगे.

वो लड़कों की आदत से भली भांति परिचित थी. उसने सोचा कि कॉलेज के लड़के को पटाने में रिस्क है. पूरे कॉलेज में बदनामी होगी और इमेज का कचरा हो जायेगा वो अलग.

इसलिए उसने एक दूसरा प्लान बनाया. उसके मन में विचार आया कि वरूण का दोस्त रोहित जयपुर में रह कर पढ़ाई कर रहा है. रोहित कई बार वरूण के घर भी आ चुका था और आलिया की फैमिली रोहित से परिचित थी.

सुबह नाश्ते की टेबल पर आलिया ने अपने मॉम डैड से कहा कि वो जयपुर में एक महीने का कोर्स करना चाह रही है. आलिया के माता पिता भी खुश हो गये कि चलो अच्छा है कि बेटी अपने खाली समय का सही उपयोग करना चाह रही है. अगर फ्री समय को अच्छे काम में लगायेगी तो कोई हर्ज नहीं है.

मगर उसके पापा के सामने एक समस्या थी.
वो बोले- बेटी तू वहां पर ऐसे अकेली कैसे रहेगी? हमारा तो वहां पर कोई रिश्तेदार भी नहीं है कि हम तुझे उसके भरोसे ही वहां पर छोड़ दें. तू जवान हो रही है, तेरी फिक्र होगी हमें.

आलिया बोली- आपको इसकी इतनी फिक्र करने की जरूरत नहीं है. जयपुर में रोहित भैया भी रहते हैं. वो अपना अलग फ्लैट लेकर रहते हैं. मैं उनके साथ ही रह लूंगी. वो मुझे अपनी बहन ही मानते हैं.

पापा ने रोहित का नाम सुना तो उनको भी थोड़ी तसल्ली हुई. रोहित के नाम पर मॉम डैड ने आलिया को परमिशन दे दी. हॉट गर्ल आलिया भी मन ही मन खुश हो रही थी कि उसकी चूत को अब लंड जल्दी ही मिल जायेगा.

उसने फिर जयपुर में एडमिशन ले लिया. जल्दी ही जयपुर जाने का दिन भी आ गया. आलिया जयपुर के लिए निकल पड़ी. चूंकि वरूण से पहले ही फोन पर बात हो चुकी थी तो उसने रोहित को बोल दिया था कि वो उसकी बहन का ख्याल रखे.

आलिया के पहुंचने से पहले ही रोहित ने उसके लिए इंतजाम कर दिये थे. रोहित के साथ ही उसका एक दोस्त निखिल भी फ्लैट पर रहता था. उसका फ्लैट दो रूम का सेट था. मगर फ्लैट में बाथरूम केवल एक ही था.

बाथरूम कुछ ऐसे बना हुआ था कि दोनों रूम के साथ में बीच में अटैच था. एक तरफ से एक रूम का दरवाजा बाथरूम में खुलता था और दूसरी ओर से दूसरे रूम का दरवाजा बाथरूम में खुलता था.

शाम के करीब 7 बजे के आसपास ट्रेन जयपुर पहुंच गयी थी. आलिया के आने की खबर रोहित को मिल चुकी थी इसलिए वो तय समय पर आलिया को लेने के लिए स्टेशन पर पहुंच गया था.

आलिया ने उस दिन ब्लू कलर की जीन्स पहनी थी और उस पर एक सफेद रंग का टॉप पहना हुआ था. उस ड्रेस में आलिया एकदम से सेक्स बॉम्ब लग रही थी. वैसे भी आलिया अब जवानी के चरम पर थी इसलिए उसके बदन में एक अलग ही आकर्षण आ गया था.

इसलिए जब रोहित ने आलिया को देखा तो उसकी नजर भी आलिया के बदन को ऊपर से नीचे तक नापने लगी. रोहित उसको देखता ही रह गया.

आलिया भी रोहित के बारे में ऐसा ही सोच रही थी. वो आई ही थी रोहित को पटाने के लिए. मगर रोहित को देख कर लग रहा था कि आलिया को अपने मकसद को अंजाम देने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

उसके बाद वो दोनों फ्लैट पर आ गये.

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