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मेरी कुंवारी बुर

मेरा नाम दिव्या है, मैं दिल्ली से हूं।
आज मेरी शादी को पूरा एक साल हो गया है. मेरे हस्बैंड मुझसे प्यार करते हैं, मैं भी उनसे प्यार करती हूं.

लेकिन आज यहां मैं आई हूं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की एक ख़ास घटना सुनाने को। यह मेरी प्रेम कहानी है शादी से पहले की.

उस समय का बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी. एक लड़का था जो हमेशा मुझे देखता था. जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो मुझे उसकी आंखों में मेरे लिए सच्चा प्यार झलकता था.

बहुत समय तक हमारे बीच यही चलता रहा। एक दूसरे से कुछ कहते नहीं थे … बस देख लिया करते थे। हम चाहते थे पास आना … पर डरते थे।
मैंने सोचा कि वह ही शुरुआत करेगा. पर उसने कुछ नहीं किया.

बहुत समय तक मैंने उसका इन्तजार किया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने ही कुछ सोचा, मैंने किसी बहाने उसके पास जाना था क्योंकि उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए सच्चा प्यार और भरोसा नजर आता था।

फिर एक दिन मैंने एक कागज पर अपना नंबर लिखा और कॉलेज जाते ही उसकी बेंच पर रख दिया. मैं जानती थी कि उसका कॉल जरूर आएगा.

और ऐसा ही हुआ. शाम को उसका कॉल आया. मैं अपने घर की छत पर उसके फोन का इन्तजार कर रही थी.
नया नंबर देखकर मैंने फोन उठाया और बहुत धीमी सी आवाज में हेलो बोली।

बस यही पहली शुरुआत थी हमारे प्यार की!

तब हमारे बीच बहुत सारी बातें हुई. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे; हम मिलने भी लगे।
एक दूसरे का हाथ थामे वह सड़क पर घूमना … प्यार भरी नजरों से एक दूसरे को देखना।

एक दिन मुझे बुखार हो गया। मैं उससे कॉल पर बात नहीं कर पाई। मैं जानती थी कि उसने मेरे फोन का बहुत इन्तजार किया होगा.

जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो मैंने उसको कॉल किया. उसने मुझसे सारी बातें पूछी, मेरी तबीयत … मेरे हालात।
मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिएँ.
उसने मुझसे कहा- बताओ कितने चाहिएँ?

मैंने कहा- सिर्फ दो हजार भेज दो.
उसने कहा- ठीक है, भेज रहा हूं. पर तुम अपना ध्यान रखना।

मेरा इतना ध्यान रखना सिर्फ उसको आता था.

कुछ दिनों बाद मैं ठीक हो गई, मैंने उसको कॉल किया और एक जगह मिलने के लिए बुलाया. मेरा मन उसको अपनी बांहों में भरने का कर रहा था. मैं जाकर सीधे उसके गले लग गई. मैं और वो एक दूसरे की बांहों में बहुत देर तक चिपके रहे।

आज मेरा उससे बहुत प्यार करने का मन कर रहा था. मैंने उससे कहा- आज मैं पूरा दिन फ्री हूं, चलो किसी होटल में चलते हैं.
उसने आंखें झुका कर हम्म ही कर दी.

अब इसे हम दोनों का प्यार कह लीजिए या प्यार में हुआ सेक्स! पर हम एक दूसरे को और नजदीक से जानना चाहते थे, एक दूसरे को टूट कर प्यार करना चाहते थे।

हमने एक होटल में रूम लिया और हम पूरा दिन वहां रहे। होटल में जाकर हम दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक गए.

मैंने धीरे धीरे उसकी शर्ट को उतारा, उसकी नंगी बालों वाली छाती पर अपने हाथों को फिराना शुरू किया. उसने आनन्द से आंखें बंद कर ली थी.

फिर मैंने उसके माथे पर किस किया और उसके सारे जिस्म पर किस करती चली गई. मुझे बस आज उसकी और मेरी एक नई कहानी बनानी थी.
हम दोनों प्यार में इतने डूबे थे।

फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. मेरे शर्ट और सलवार को धीरे-धीरे करके उतारा. मेरा सारा गोरा बदन उसके सामने था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में उसके सामने लेटी थी। उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया। मेरे सारे बदन पर अपनी उंगलियों फिर आई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और मेरे बूब्स को हल्के हल्के चूसने लगा. मैंने अपने हाथ को उसके सिर पर फिराना शुरू कर दिया. वो कभी कभी मेरी नंगी कमर पर भी अपना हाथ फिरा रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

यह पहली बार था कि मैं सेक्स कर रही थी, वरना आज तक सिर्फ सेक्स विडियो में ही देखा था।

फिर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। और अपना लंड मेरी कुंवारी बुर पर लगाने लगा. उसने थोड़ी कोशिश की अपने लंड को मेरी कसी बुर के अंदर डालने की!
पर लंड अंदर गया नहीं!

मैंने उससे कहा- बेबी, पहले मुंह से करो ना … गीली हो जाएगी तो फिर आराम से करना … तब चला जाएगा.
उसने ऐसे ही किया. मेरे बूब्स से किस करते करते नीचे मेरी बुर तक चला गया. वह मेरी सारी बुर को मुंह में लेकर चूसने लगा.

मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अच्छा भी लग रहा था. मैंने यह बुर चटायी का सीन वीडियो में देखा था तो मुझे भी एक बार करना भी था, इसलिए मैंने उससे बोला था.

मैं बेड पर बाल खोलकर लेटी थी और बस उसके नंगे जिस्म को देख कर आनंद ले रही थी. मैं कभी उसको देखती तो कभी बुर चटायी में मिलने वाले मजे के कारण आंखें बंद कर के लेट जाती.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको अपनी ओर खींचा. अब तक उसके मुख की लार से मेरी बुर पूरी गीली हो गई थी. उसका लंड भी प्रिकम छोड़ कर हल्का गीला हो गया था.

हम दोनों प्रेमी इस पोजीशन में आ चुके थे कि अब एक दूसरे में समा जाएं. वो मेरे ऊपर आक र अपने लंड को मेरी बुर के छेद पर सेट करने लगा और मैंने उसकी मदद की.
फिर उसने सीधा हल्के से धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पीछे की तरफ धकेला चाहा ताकि ज्यादा अंदर तक ना जा सके.

लेकिन धीरे-धीरे फिर मुझे मजा आने लगा. अब मैंने अपनी पूरी टांगें अपने प्रेमी के लंड के स्वागत में खोल दी थी और मैंने उसकी कोली भर ली।
वह भी ‘दिव्या दिव्या’ कर रहा था और मुझे बहुत प्यार कर रहा था.

हमने सिर्फ इसी पोजीशन में सेक्स किया और हम दोनों झड़ गए.

फिर हम दोनों ने अपने अंडर गारमेंट्स पहन लिए और ऐसे ही एक दूसरे के पास बैठ गए. बहुत सारी फिर प्यारी बातें की।

अबकी बार उसको मैंने बेड की तरफ धक्का दे दिया उसके लंड पर अपना हाथ फिराने लगी. मैंने पोर्न वीडियो में देखा था और उसी तरह मुझे एक बार लंड मुंह में लेना था.
फिर मैंने उसको मुंह से मजा दिलाया, मैंने उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. धीरे-धीरे मैं उसको मजा दिलाने लगी.
वह मेरे बालों पर और मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रहा था.

फिर से हम दोनों तैयार थे एक दूसरे में खोने के लिए। फिर वह पीछे की तरफ लेट गया और मुझे अपनी ओर खींचा. वह बेड पर सीधा लेट गया, मैं अपने घुटनों को मोड़कर उसके ऊपर जाकर बैठ गई. फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ऐसे ही किस करते करते कब उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे पता ही नहीं चला. बस मजा आ रहा था, पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी.

उसने मेरे बालों को पीछे से खोल दिया. मेरी नंगी कमर पर मेरे बाल बिखरे पड़े थे और मेरी कमर पर उसके हाथ चल रहे थे. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटा दिया और पीछे से मेरी चूत में ही लंड डाला. मेरे बालों को मेरे कंधे से हटाकर वहां किस करने लगा. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था … हम एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.

हमने इसी तरह मजा लिया. वह इसी तरह मेरी चूत में झड़ गया और मैं भी ऐसे ही उल्टी लेटे-लेटे झड़ रही थी तो मैंने बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह की आवाज को रोकने के लिए अपना मुंह बेड में धंसा दिया।

कुछ देर तक हम दो प्रेमी चुदाई के बाद वैसे ही तेज तेज सांसें भरते रहे. फिर मैंने हल्के से अपना चेहरा उसकी तरफ किया, उसने मेरे चेहरे पर किस किया.

उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर रखा था. झड़ने के बाद भी बहुत देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

बहुत समय बीत गया था तो अब मुझे घर जाना था. मेरी मम्मी पापा मेरी बाट देख रहे होंगे.
मैंने उससे कहा- डियर मुझे जाना होगा.
उसने कहा- ठीक है, जाओ. और मैं भी चलता हूं.

उसने मुझे घर के पास छोड़ दिया और वह भी अपने घर चला गया.

फिर हमने रात को कॉल पर बात की. उस पूरे दिन का नजारा हमारी आंखों के सामने घूम रहा था. उस पूरी रात हमने उस दिन के बारे में ही बात की कि हमने कैसे कैसे इंजॉय किया.

उस दिन सेक्स करने के बाद मैं भी और वह भी एक दूसरे के बहुत दीवाने हो गए थे. ऐसा लगता था जैसे अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे.

लेकिन हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ समय बाद मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया. कॉलेज कंप्लीट होते ही पापा ने मेरे लिए लड़का देख लिया. हमारे घर का माहौल कुछ ऐसा था कि मैं पापा की बात को कभी ना नहीं कह सकती थी.
जहां पापा ने चाहा … मुझे शादी करनी पड़ी.

आज मैं अपने हस्बैंड के साथ हूं … खुश हूं. पर शायद जैसे उसके साथ रहती वैसे नहीं।

प्यार तो करते हैं हम एक दूसरे को हस्बैंड वाइफ … लेकिन कुछ वैसा प्यार नहीं है जैसा उसके साथ था।

‘मैं शादी कर रही हूं.’ सुनते ही उसने सिर्फ एक बार मुझसे पूछा था कि यह सच है क्या?
फिर उसके बाद उसने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैं भी नहीं कर पाई।
किस मुंह से करती?

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मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो

दोस्तो, मेरा नाम शोनू है. मेरी उम्र 22 साल है. मैं ग्रेजुएशन कर रही हूँ. मेरा बदन बहुत गोरा है और मेरा साईज कुछ यूं है बड़े बड़े 34 इंच के मम्मे हैं. लचीली सी कमर 30 इंच की है और पीछे थिरकती हुई बड़ी सी गांड 36 इंच की है. जिसे देख कर लड़कों के लंड खड़े हो जाते हैं.

पहले तो मैं एक सीधी लड़की थी, पर अब मैं एक रंडी बन गई हूँ. मुझे लड़कों के बड़े बड़े लंड चूत में लेने की आदत पड़ गई है.

ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में थी. तब मेरी उम्र 19 साल थी. मेरा बहुत ही खूबसूरत और कसा हुआ बदन है. मेरे बड़े बड़े मम्मे और बड़ी गांड मेरी मचलती जवानी को साफ जाहिर कर रहे थे.

मुझे क्लास में कई लड़कों ने प्रपोज भी किया था, पर मैंने किसी को भाव नहीं दिया.

कुछ दिन बीते और मेरी 12 वीं कक्षा की परीक्षा शुरू हो गई.

पहला पेपर शुरू हुआ, तो वहां मेरा रोल नंबर एक लड़के के पीछे था … जिसका नाम शिबू था. वह बहुत ही स्मार्ट और खूबसूरत था. उसका कसा हुआ बदन और फिट बॉडी पर सारी लड़कियां फ़िदा थीं.
सब उसे देखतीं, पर वो किसी को नहीं देखता था.

मेरा भी दिल उस पर आ गया था. मैं सोचने लगी कि इससे कैसे बात शुरू करूं … पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

अब दूसरे पेपर का दिन आया, तो मैंने सोचा कि आज तो इससे बात करके ही रहूंगी.

उस दिन मैंने रेड कलर में बड़े गले का टॉप पहना हुआ था, जिसमें से मेरे 36 इंच के चूचे साफ नजर आ रहे थे. मैंने पेपर के दौरान ही उससे पेंसिल मांगी. उसने मुझे पीछे मुड़ कर देखा और उसकी नजर मेरे मम्मों पर जा पड़ी. मैं कुछ ज्यादा ही झुक कर बैठी थी तो उसे मेरे मम्मे साफ़ दिखने लगे थे. वो मेरे दूध देखता ही रह गया.

उसने मुझे देखा और पेन्सिल दे दी.

अब इसके बाद मैंने हर पेपर में उससे बात की और आखिरी में हमने एक दूसरे के नम्बर ले लिए. वो भी मेरी तरफ आकर्षित हो गया था. ऐसा कैसे हुआ ये मुझे समझ नहीं आया.

खैर … हम दोनों में धीरे धीरे प्यार हो गया और हमने अकेले में मिल कर सेक्स कर लिया.
इसके बाद तो उसने मुझे कई बार चोदा.

मुझे भी उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा था. उसी के साथ मुझे सिगरेट और शराब की आदत भी लग गई थी. मेरे बिंदास स्वभाव को देख कर वो भी मेरे साथ खूब मजे लेता था.

फिर एक दिन शिबु और मैं ड्रिंक कर रहे थे. एक बार चुदाई हो चुकी थी और मैं एक सिगरेट पी रही थी.

तभी शिबु ने मुझसे कहा- शोनू क्या हम दोनों ग्रुप चुदाई करें?
मैंने साफ मना कर दिया.
वो बोला- जान ग्रुप चुदाई में बहुत मजा आता है … मान जाओ ना!

उसके बहुत मनाने के बाद मैंने उससे हां कर दी. वह बहुत खुश हुआ.

मैंने उससे पूछा- ग्रुप में कौन कौन रहेगा?
तो उसने कहा- मेरे 3 दोस्त और उनकी गर्लफ्रेंड रहेंगी … हम सब बहुत मस्त चुदाई करेंगे.
मैंने भी कहा- हां बाबू … चोद लेना … मुझे भी जम कर चुदने का मन है.

ये तय हो गया तो शिबु प्लान बनाने लगा.

फिर उस दिन की बात है, जब मुझे पता ही नहीं था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. तब भी मैं ये मान चुकी थी कि मेरी चूत के लिए कुछ और लंड भी मिलने वाले हैं.

हमारी ग्रुप चुदाई एक होटल में होनी तय हुई थी. मैंने उस दिन ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी थी. ऊपर एक बहुत ही खुला और चुस्त सा सलवार सूट पहना था … जिसमें मैं एकदम रंडी लग रही थी.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझे अपनी बाइक पर बिठाया और मुझसे बोला- आह जान आज तो मस्त माल लग रही हो. तुम्हें तो आज मेरे दोस्त बहुत चोदेंगे.
उसकी बात से मैं शरमा गई.

कुछ ही देर में हम दोनों उस होटल के कमरे में पहुंच गए, जहां उसके 3 दोस्त हमारा इंतजार कर रहे थे.

राज, हरि, विशाल ये तीनों दोस्त मेरी जवानी देख कर एकदम से हॉट हो गए. वो तीनों मुझे ऐसे देख रहे थे, जैसे मुझे अभी ही पकड़ कर चोद देंगे. उनकी आंखों में चूत चुदाई की हवस साफ दिखाई दे रही थी.

मैंने उनसे पूछा- आप लोगों की गर्लफ्रेंड कहां हैं?
तो उन्होंने कहा- वो आज नहीं आएंगी.
मैंने पूछा- फिर हम चुदाई कैसे करेंगे?
राज बोला- चुदाई तो होगी भाभी …
मैं- कैसे?
हरि- भाभी हम सब मिलकर आपके साथ xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.

ये सुनकर मैं बहुत डर गई- क्या मतलब है तुम्हारा?

मैंने अपने शिबु की तरफ देखा. शिबु मुस्कुरा दिया. मैं समझ गई कि यह इनकी कोई चाल है.

मैं वहां से जाने लगी, तभी शिबु ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और गले में किस करने लगा.

वो बोला- बेबी मान जाओ ना प्लीज. आई लव यू जान.

शिबु बहुत जिद करने लगा. मैं भी क्या करती. उसके प्यार के लिए मैं मान गई तो वो सभी बहुत खुश हुए. हमारे बीच हंसी मजाक चलने लगा. दारू की बोतल खुल गई और सभी ने ड्रिंक करना शुरू कर दिया.

फिर शिबू मुझे पकड़ कर मेरे बड़े बड़े मम्मों को दबाने लगा. मुझे चार लौंडों के सामने अपने दूध दबवाने में बहुत शर्म आ रही थी.

फिर थोड़ी ही देर में दारू के असर से मेरी जवानी की गर्मी बाहर आने लगी. मुझे आज कुछ अलग सा लग रहा था. मैंने शिबु की तरफ देखा तो उसने आंख मार दी. मैं समझ गई कि इसने मेरे गिलास में कोई उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा डाली है.

खैर … मैं तो चुदने को आई ही थी. शिबू मेरे मम्मों को दबा रहा था और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

‘आहह … ऊऊहह …’

शिबू ने मुझे बेड पर बैठा दिया और उसके दोस्त कुर्सी लगा कर सामने बैठ गए. शिबू ने मेरा कुर्ता निकाल दिया और मेरे चूचे काली ब्रा में उन सबके सामने आ गए. शिबू मेरे पीछे आया और मेरी काली ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

मुझे भी मजा आने लगा था.

फिर वो तीनों उठ कर पास आ गए और हरि ने मेरी ब्रा खींच दी. ब्रा हटते ही मेरे चूचे उछल कर बाहर उन सबके सामने आ गए.

उन सबने बारी बारी से मेरे मम्मों पर हाथ फेरने शुरू किए. इतने लोगों के हाथ मेरे बूब्स पर थे … इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उन सबके लंड भी खड़े हो चुके थे.

हरि मेरे नरम नरम मम्मों को सहलाते हुए बोला- शिबु क्या मस्त माल है तेरी गर्लफ्रेंड … आज ये मस्त मजा देगी.
शिबु- हां भाई, एकदम रंडी की तरह है.

अपने प्रेमी के मुँह से ये सुन कर मुझे अजीब लगा. शिबु ने आज तक मुझे कभी ऐसा शब्द नहीं बोला था.

मैंने भी नशे में सोचा कि आज तो मैं वैसे भी रंडी बनने वाली हूँ … कह लेने दो.

हरि- भाभी, आप बहुत सेक्सी हो … आपको चोदने में बहुत मजा आएगा.
मैं कुछ नहीं बोली.

शिबु- आओ मेरी रंडी शोनू … मेरा लौड़ा मुँह में ले लो.

मैंने भी सब के सामने बिना हिचकिचाहट के मेरे शिबु का पेन्ट निकाला और चड्डी में हाथ डाल कर उसके 6 इंच का लंड पकड़ कर हिलाने लगी. लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया. शिबु को बहुत मजा आने लगा.

शिबु- आहह … मेरी रंडी क्या लंड चूसती हो … मजा आ जाता है.
विशाल- भाभी जी हमारा भी लंड चूस लो.
मैं- हां देवर जी … सब लाइन में खड़े हो जाओ … सबको मस्त कर दूंगी.

मेरी बात सुनकर वो तीनों लाइन में खड़े हो गए और मैं शिबु का लंड छोड़ कर उन तीनों के पैंट निकालने लगी.

उनके लंड खड़े थे … सबसे पहले मैंने हरि की पैंट उतारी, तो मैं दंग रह गई. उसका लंड उसकी चड्डी में बहुत बड़ा दिख रहा था. जब मैंने उसकी चड्डी निकाली, तो उसका मूसल लंड देख आकर मैं डर गई. उसका लंड करीब 8-9 इंच का था और काफी मोटा.

हरि के बाद विशाल और राज की पैंट उतारी तो उन सबके लंड भी बहुत बड़े बड़े थे … मेरे शिबु से सभी के लंड काफी बड़े थे.

राज- भाभी आज आप हमारी रंडी बनने वाली हो … पता है न आपको!
मैं- हां, मेरा शिबू मुझे रंडी बनाना चाहता है … तो मैं भी रंडी बनने को तैयार हूं.

उन चारों ने मेरी सलवार निकाल दी और सभी मुझ पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े. शिबु मेरी ब्लैक पैंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा. हरि और राज मेरे बूब्स चूसने लगे और विशाल ने मेरी गांड पर काटना और चूमना शुरू कर दिया.

मैं चार मर्दों के बीच अकेली रांड सी पागल हुई जा रही थी. मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी थीं- आआहहह इस्स … उन्हह.
xxx ग्रुप सेक्स में मुझे बहुत आनन्द मिल रहा था.

उन चारों ने मुझे घुटने के बल बैठा दिया और सब मेरे पास आकर खड़े हो गए. सबसे पहले विशाल अपना 8 इंच का लंड मेरे मुँह के सामने ले आया. मैंने उसका लंड पकड़ा और चूसने लगी. उसका लंड एकदम लॉलीपॉप की तरह रसीला था और उसेक लंड से निकलते प्रीकम कोई चाटने में मुझे भी बहुत मजा रहा था.

मैंने विशाल का पूरा लंड अन्दर ले लिया और मस्ती से चूसने लगी.

विशाल- आआआह … क्या लंड चूसती है शिबु तेरी रंडी भाभी..

उसके बाद हरि और राज ने अपने 9-9 इंच के मोटे मोटे लंड मेरे दोनों हाथ में दे दिए और शिबु मुझे ये सब करते हुए देख रहा था.

मैं भी उसे देख देख कर उन तीनों के लंड के साथ खेलने लगी.

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद विशाल ने मेरे मुँह में ही अपना पानी डाल दिया. उसका स्वाद अजीब था … पहले मैंने कभी भी लंड का रस नहीं पिया था.

वो झड़ते हुए बोला- आंह पी जा मेरा पानी रंडी!

मैंने नाक बंद की और उसके लंड का पूरा पानी पी गई. वे सब बारी बारी से मेरे मुँह में लंड डालने के बाद रस छोड़ने लगे. मेरा मुँह दुखने लगा था.

इसके बाद फिर से दारू और सिगरेट का दौर चलने लगा. मुझे भी दारू पीने की चुल्ल हो रही थी. मैं अब बहुत अधिक चुदासी हो गई थी.

जब मैंने उन सबके लंड सहलाए तो दुबारा से लंड खड़े हो गए. वो तीनों मुझे पलंग पर ले गए. सामने मेरा शिबु शराब पीते हुए सब देख कर अपना लंड हिला रहा था.

मुझे बिस्तर पर लेटा दिया गया. विशाल ने मेरी पैंटी निकाल दी. हरि मुझे चूमने लगा और राज मेरे मम्मों से खेल रहा था.

अचानक से विशाल ने मेरी चूत में उंगली डाल दी … मुझे बहुत मजा आने लगा. वह अपनी उंगली मेरी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था.

इधर हरि का मुँह मेरे मुँह में था. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. वो मुझे भूखे शेर की तरह मेरे मुँह में मुँह डाल कर चाट रहा था. मैं भी उसका सिर दोनों हाथों से पकड़ कर उसका साथ देने लगी.

राज भी मेरे बड़े मम्मों को खूब काटते सहलाते हुए मुझे मजा देने लगा था.

फिर राज मेरी चूत के पास गया … जहां विशाल लगा था. उसने विशाल को हटा कर अपना मुँह मेरी चूत में लगा दिया.

मेरी वासना भरी सिसकारियां निकलने लगीं- आहह उन्ह … अह … मजा रहा मुझे … ऐसे ही चूसो मेरी चूत.

उधर हरि मेरे मम्मों से खेल रहा था और विशाल ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया था.

शिबु- शोनू मेरी रांड मजा आ रहा है न तुझे!
मैं- हां भड़वे, बहुत मजा आ रहा है.
शिबू- अभी और मजा आएगा … रुक जा बहन की लौड़ी … तेरी फुद्दी की चटनी बनने वाली है.
राज- अब सब लोग हटो … इस रंडी की चुदाई पहले मैं करूंगा.

उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड डालने लगा. जब वह मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा, तो मुझे बहुत मजा आ रहा था. उसने अपना लंड जोर से मेरी चूत पेल डाला. उसका टोपी ही अन्दर गई थी कि मैं जोर से चिल्लाई दी.

‘ऊ … मर गई … साले हरामी धीरे पेल मादरचोद … आह … फाड़ दी कुत्ते … निकालो इसे … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.’

पर उसने मेरी एक नहीं सुनी. बल्कि एक और जोर का धक्का लगा दिया. मुझे ऐसा लगा मानो मेरी चूत पूरी फ़ट गई हो. मेरी आंख से आंसू आने लगे थे.

मैं- आआहह … उन्ह … रुक जा साले … मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मुझे जाने दो … मैं मर जाऊँगी.

इतने में शिबु ने आगे आकर मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और बोला- रंडी मादरचोदी … तेरी मां का भोसड़ा … अभी तो बहुत मजे ले रही थी … अब क्या हुआ कुत्ती..!

कुछ देर ऐसे ही चुदने के बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मेरा दर्द अब मजे में बदल गया और मैं जोर जोर से सिसकारियां भरने लगी- आहहहह उन्ह..ह और जोर से चोदो मुझे आहह … बहुत मजा रहा है … आह चोदो अपनी रंडी को … ऐसे ही.

कुछ ही देर में मैं झड़ गई.

मेरे झड़ने के बाद हरि ने मुझे एक पैग पिलाया, जिससे मुझे राहत मिल गई.

उसके बाद राज मेरी चूत में लंड डाल कर जोर जोर से धक्का मारने लगा. बाकी सब अपने लंड हिला रहे थे. दस मिनट बाद राज भी मेरी चूत में ही झड़ गया और दूर हट गया. मैं अभी नहीं झड़ी थी … मुझे राज पर गुस्सा आने लगा था.

हरि- कुतिया … कैसा लगा तुझे इतना बड़ा लंड लेकर … आज तक तो तू तेरे शिबू का ही 6 इंच का लंड लेती थी.
मैं- बहुत मजा आया भोसड़ी के … चल अब तू आजा चोद दे भड़वे मुझे रंडी की तरह.

मेरी गालियां सुनकर उसे गुस्सा आ गया- भड़वा बोलेगी साली … कुतिया छिनाल … तेरी मां का भोसड़ा … रुक रंडी अभी बताता हूं.

अब उसने मुझे सीधा लेटा दिया और अपना लंड एक ही झटके में मेरी चूत में पूरा डाल दिया.
मैं दर्द के मारे तड़फ गई- आह … नहीं धीरे कर ले … अब नहीं बोलूंगी … आहह … आहहहह … मर गई … आहहह.

लेकिन हरि जोर जोर से पूरी स्पीड में मेरी चुदाई कर रहा था और मैं दर्द से मरी जा रही थी. इसी बीच मेरी चूत का दो बार पानी निकल गया था. फिर वो लंड निकाल कर सीधा लेट गया.

हरि- चल रंडी … आ मेरे लंड के ऊपर बैठ जा.

मैं भी गांड हिलाते हुए जाकर उसके लंड पर बैठ गई. मैंने उसके मोटे लंड को अपनी चूत पर टिका लिया और नीचे बैठने लगी. मुझे ऐसे में चुदने में बहुत मजा रहा था. मैं पूरा लंड चूत में लेकर जोर जोर से अपनी चूत मरवाने लगी थी.

‘आआह … आआहह..’

मैं हरि के लंड पर ऊपर नीचे होने लगी. उसने मुझे अपनी छाती की तरफ खींचा तो मेरी गांड पीछे से खुल गई.

तभी पीछे से विशाल आया और उसने मुझे हरि के ऊपर सीधा लेटा दिया. हरि का लंड अभी भी मेरी चूत में था.

विशाल- देखो तो साली की क्या मस्त गांड है … रंडी की गांड मारने में कितना मजा आएगा.

मैं डर गई.

मैं- नहीं नहीं विशाल प्लीज गांड में नहीं … बहुत दर्द होगा.

पर वो नहीं माना और उसने मेरी कमर को कसके पकड़ लिया. मैं झटपटाने लगी … पर नीचे से हरि ने भी मेरे हाथ पकड़ लिए.

वे सब हंसने लगे.

फिर विशाल ने मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश करने लगा. पर मेरी गांड का छेद बहुत छोटा था. उसने जबरदस्ती लंड गांड में घुसाने की कोशिश की और उसके लंड की टोपी गांड में अन्दर गुस गई.

मैं दर्द से कंप उठी. मैं रोई चिल्लाई- आंह … नहीं मेरी गांड मत मारो.

मगर वो लंड डालता ही गया.

मैं- विशाल मेरी गांड बहुत छोटी है … प्लीज ज्यादा जोर मत लगाओ … तुम्हें गांड मारनी ही है न तो मेरे बैग मैं एक क्रीम रखी है … वो लगा लो.

तब शिबु ने मेरे बैग से क्रीम निकाल कर विशाल को दे दी. विशाल ने अपनी उंगली से क्रीम मेरी गांड में अन्दर तक लगा दी और अपने लंड पर भी लगा ली.

अब वो फिर से अपने लंड को मेरी गांड में डालने लगा. अब लंड थोड़ा आसानी से गांड में घुस रहा था, पर उसका लंड इतना मोटा था कि मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

वो मेरी गांड में लंड डालने की स्पीड बढ़ाने लगा. नीचे से हरि भी अपना लंड मेरी चूत में डाल रहा था. मेरी गांड और चूत दोनों एक साथ चुद रही थीं.

कुछ देर के दर्द के बाद मुझे भी अब मजा आने लगा था.
मैं मुस्कुराते हुए चिल्लाने लगी- अंह उन्ह … आह … हहहह हह … चोदो मुझे … और जोर से चोद दो … आह बना दो आज मुझे रंडी … मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो … आआहह ऊऊऊहह …

मैं जोर जोर से चिल्लाकर सैंडविच चुदाई के मजे ले रही थी. तभी राज आया और उसने सामने से मेरे मुँह में लंड दे दिया. अब मेरे सारे छेदों में लंड था.

शिबू- अब बन गई मेरी शोनू रंडी … तुझे मैं ऐसे ही चुदता हुआ देखना चाहता था … तुझे मैं बाजारू रंडी बना दूंगा.

मैं भी उसकी बातें सुन कर और मजे से चुदवा रही थी.

कोई बीस मिनट बाद मैं बहुत थक चुकी थी. सबके सब झड़ने वाले थे … तो जोर जोर से धक्के मारने लगे थे. मैं फिर से झड़ गई थी. मेरी चूत से पानी बहने लगा था. तभी हरि मेरी चूत में झड़ गया.

उसके बाद राज मेरे मुँह में झड़ गया. मैं उसका पूरा पानी पी गई. थोड़ी ही देर में विशाल भी मेरी गांड में ही झड़ गया.

हम सब बहुत थक चुके थे, तो ऐसे ही लेट गए.

थोड़ी देर बाद सब उठे और सबने दारू के पैग लगाए और मुझे एक बार फिर से चोदना शुरू कर दिया.

इस बार मुझे xxx ग्रुप सेक्स में बहुत मजा आ रहा था.

शिबु ने भी मेरी गांड मारी और सबने अपना अपना पानी मेरे ऊपर गिराया. फिर हम साथ में नहाए और तैयार हो गए. सबने घर जाते समय मुझे होंठों पर किस की.

हरि बोला- रंडी अब जब भी मौका मिलेगा … हम ऐसे ही xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.
मैंने भी कहा- तुम जब बुलाओगे तब अपनी गांड और चूत लेकर आ जाऊंगी.

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उसका लन्ड मेरे मुंह में था

दोस्तो, मेरा नाम परिधि सारस्वत है और मैं दिल्ली से हूं।

इससे पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देती हूं। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा हैं और शरीर भरा पूरा है। मेरा फिगर 33-28-33 का है। मतलब लड़कों की भाषा में मैं एक शानदार माल हूं।

तो चलिए अब आते हैं कहानी पर।

यह बात आज से लगभग 2 साल पहले की है। राहुल नाम का लड़का हमारा पड़ोसी है। हमारे परिवारों के बीच काफी आना – जाना है। स्कूल के समय में भी मैं और राहुल एक ही स्कूल में थे।

हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन हमारे बीच कभी भी ऐसा – वैसा कुछ नहीं था। हम दोनों आपस में खूब बातें करते थे और मज़े करते थे। मुझे भी राहुल के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था।
वो लगभग रोज मेरे घर पर आता था और कई बार मैं भी उसके घर पर चली जाती थी। लेकिन इससे हमारे परिवार को कभी भी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्कूल के बाद हम दोनों ने अलग – अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।

एक दिन मेरी कॉलेज की छुट्टी थी और मेरी नानी की तबियत खराब हो गई थी। तो मेरे मम्मी – पापा नानी से मिलने के लिए चले गए। अब मैं घर पर अकेली रह गई थी।

कुछ देर तो मैं टाइम पास करती रही लेकिन फिर मैं भी बोर होने लग गई। तो मैंने सोचा कि क्यों न राहुल को बुला लिया जाए। इससे मेरा टाइम पास भी हो जाएगा और स्कूल की पुरानी यादें भी ताजा हो जायेंगी।

तो मैंने राहुल को फोन किया कि मैं आज घर पर अकेली हूं और बोर हो रही हूं। तुम मेरे घर पर आ जाओ और फिर गप्पे मारेंगे।
उसने कहा- ठीक है, मैं 15-20 मिनट में आता हूं।
मैं अब राहुल का इंतजार करने लगी।

लगभग 15 मिनट बाद घर की डोर बेल बजी। मुझे पता था कि राहुल है तो मैं गई और गेट खोल दिया और राहुल को अंदर बुला लिया।
राहुल अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया।

फिर मैं उसके लिए पानी लाने किचन में चली गई। मैंने उस दिन गहरे गले का टॉप पहना था।

जैसे ही पानी देने झुकी तो मैंने देखा कि राहुल की नजरें टॉप के अंदर झांक रही है।
मैंने ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए जल्दी से उसे पानी दिया और उसके बगल में सोफे पर बैठ गई।

फिर उसने वही पुरानी स्कूल कि बातें शुरू कर दी और हम दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर कुछ देर बाद मैंने ही उससे पूछ लिया- ओय हीरो … कोई गर्लफ्रेंड वगेरह बनाई क्या?
तो वो बोला- नहीं यार … और तूने?
मैंने भी कहा- नहीं।

फिर वो मज़ाक करते हुए बोला- तो तू ही बन जा मेरी गर्लफ्रेंड।
तो मैंने भी हंसते हुए कह दिया- तेरी गर्लफ्रेंड बनेगी मेरी जूती।

वो मज़ाक-मज़ाक में मुझे तकिए से मारने लग गया और मैं भी उसे तकिए से मारने लग गई।

इसी बीच मुझे एहसास हुआ कि वो खेलते – खेलते मेरे बूब्स छू रहा है।
मज़ा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए उसे खुद से दूर कर दिया।
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप बैठ गया।

फिर शाम को मेरे मम्मी – पापा आ गए और सब कुछ पहले की तरह चलना शुरू हो गया। मैं भी कॉलेज जाने लग गई। इस बीच मेरी राहुल से बहुत ही कम बात हुई या यूं कहें बात हुई ही नहीं।
बस ऐसे ही 2 महीने बीत गए पता ही नहीं चला।

अब मेरा एक पेपर भी आ गया था लेकिन ये पेपर जयपुर था। पापा को ऑफिस का काम था तो पापा बोले- मैं तो नहीं जा सकता हूं.
तो मम्मी बोली- अकेले नहीं जाना है।

अब बहुत सोच – विचार के बाद ये तय हुआ कि पापा राहुल के घरवालों से बात करेंगे कि राहुल मुझे जयपुर पेपर दिलवा कर ले आए।

तो पापा ने अगले दिन राहुल के पापा से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं। राहुल की भी छुट्टियां चल रही हैं। वो घर पर फ्री ही रहता है। वो परिधि के साथ जयपुर चला जाएगा।
तो अब तय हो चुका था कि राहुल मेरे साथ जयपुर जा रहा है।

मैं अब ये सोच रही थी कि उस दिन के बाद अब मैं कैसे राहुल से बात करूंगी? शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही कह दिया था।
खैर जो होगा देखा जायेगा।

पापा ने कहा- तुम दोनों ट्रेन से चले जाना, सेफ भी रहेगा।

लेकिन उन दिनों जयपुर जाने वाली ट्रेन काफी लेट चल रही थी। तो सबने मिलकर ये फैसला किया कि हम स्लीपर बस से जयपुर जाएंगे।
पापा ने हमारी डबल स्लीपर की टिकट बुक करवा दी थी।

अगले दिन शाम को पापा हम दोनों को बस में बैठा आए। मैं खिड़की की और बैठी थी और राहुल मेरे बगल में ही बैठ गया।

मुझे बस में नींद नहीं आ रही थी तो मैं फोन देखते हुए टाइम पास कर रही थी।
तभी राहुल ने पूछा- पेपर की तैयारी कैसी है?
तो मैंने कहा- ठीक – ठाक ही है।

इस प्रकार हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें शुरू हो गई थी।

कुछ देर बाद मैं फोन बन्द करके सो गई। हालांकि मुझे नींद नहीं आ रही थी बस मैंने आँखें बन्द की हुए थी।
उधर राहुल भी सो गया था।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि राहुल का हाथ मुझे टच कर रहा है।
मैंने सोचा कि जगह कम है इसलिए हो सकता है। मैंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं बस दूसरी ओर मुंह करके लेट गई।

फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि राहुल का हाथ मेरी कमर पर है लेकिन मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उसका हाथ धीरे – धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया। अब उसका हाथ मेरी गान्ड पर था। वो मेरी गान्ड पर गोल – गोल हाथ घुमा रहा था। शायद उसे लगा कि मैं सो गई हूं।

लेकिन अब मुझे भी उसका टच अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद वो मुझसे सटकर चिपक गया और सोने का नाटक करने लग गया।
मैंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर लाया और धीरे – धीरे मेरे बूब्स मसलने लगा। अब मेरे अंदर की भी अन्तर्वासना जाग चुकी थी। मेरे निपल्स खड़े होने लग गए थे और मैं अपनी सिसकारियां बड़ी मुश्किल से रोक रही थी।

धीरे – धीरे उसने अपने हाथ का दवाब बढ़ा दिया और अपने दूसरा हाथ मेरी चूत के उपर ले आया और मेरी चूत सहलाने लग गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड को छू रहा था। मेरी गान्ड उसके लन्ड के कड़कपन को महसूस कर रही थी.

अब तक उसे भी पता चल गया था कि मैं बस सोने का नाटक कर रही हूं।
वो मेरे बूब्स को जोर से मसलते हुए बोला- परिधि आई लव यू!
तो मैं भी बोल उठी- आई लव यू।

अब तो उसे खुली छूट मिल चुकी थी। अब वो जोर – जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरी चूत सहला रहा था। मेरी भी सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थी। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे चूत के दाने को सहलाने लगा।

मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उसका लन्ड मसलने लग गई थी। फिर उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ा और मेरे होंठ चूमने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लग गयी।

फिर उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट भी निकाल दी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लग गया और मेरी चूत में उंगली करने लगा। मैंने भी उसकी शर्ट और पैंट निकाल कर उसे एकदम नंगा कर दिया और उसका लन्ड आगे – पीछे करने लगी।

उसका लन्ड काफी बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें ऊपर की ओर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। अब तो मैं आपे से बाहर हो गई थी। वो लगातार मेरी चूत के दाने को चाट रहा था और मैं उसके सिर को जोर – जोर से दबा रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरी चूत में से गर्म – गर्म लावा निकलने लगा और राहुल उसे पी भी गया।

अब मैं शांत हो चुकी थी लेकिन उसने मेरी चूत को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म होने लग गई।

अब वो मेरे ऊपर आ गया और अपना बड़ा लन्ड मेरे होंठों के पास ले आया। वो अपने लन्ड से मेरे होटों को टच करने लगा तो मैं समझ गई और मैंने अपना मुंह खोल दिया। अब उसका लन्ड मेरे मुंह में था और मैं जोर – जोर से उसका लन्ड चूस रही थी।

उसका पूरा लन्ड गीला हो चुका था। अब राहुल ने अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला और उसे मेरी चूत पर मसलने लग गया।
तो मेरा बहुत ही बुरा हाल था। मैंने उसे आंखों से इशारा किया और उसने अपने लन्ड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे अचानक दर्द हुआ।

मैंने उसे वहीं रोक दिया।

फिर वो मेरे निप्पल सहलाने लगा और होंठ चूसने लग गया।

अचानक ही उसने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में था।
मेरी आंखों से आंसू निकलने लग गए थे लेकिन वो मेरे होंठ चूस रहा था इसलिए मैं चीख नहीं सकी।

अब उसने धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया. फिर मुझे भी मज़ा आने लग गया। मैं भी उसका साथ देने लग गई। वो कभी मेरे बूब्स चूसता तो कभी होंठ।
लगभग 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।

फिर जयपुर पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया. हमने रात को होटल के कमरे में एक बार और चुदाई की.

हम दोनों का ही मन था कि हम पूरी रात चुदाई करते रहें लेकिन अगले दिन मैंने पेपर देना था तो सोना भी जरूरी था.

और सुबह उठ कर मैं तैयार होकर पेपर देने गयी.

पेपर के बाद हमने होटल छोड़ दिया और बस से वापस दिल्ली आ गए।

उसके बाद से मुझे भी अपनी चुदाई में मजा आने लगा था, मुझे चुदाई की लत लग गयी थी. राहुल तो हर वक्त मुझे चोदने को तैयार रहता था. तो हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते थे।

एक बार राहुल ने मेरी गान्ड भी मारी थी। लेकिन वो कहानी किसी और दिन।

फिर राहुल के पापा का ट्रान्सफर रांची हो गया। तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।

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मेरा जिस्म

मेरे दोस्तो, मेरा नाम सिया है। मेरा बदन काफ़ी खूबसूरत है, रंग गोरा है और उभार भरा भी। मैंने हमेशा से ही अपने शरीर का बहुत ख्याल रखा है।
अपने शरीर को सुंदर और स्वस्थ रखने के लिए मैं सब कुछ करती रही हूँ। मेरे शरीर बहुत लुभावना है यही कारण है कि सभी हमेशा मेरी तरफ़ आकर्षित रहते रहे हैं।

मेरे पीछे हमेशा से ही सभी लड़के दीवाने रहे हैं। कईयों ने मुझे प्रोपोज़ भी किया। मैं भी अब तक कई लड़कों के साथ रिश्ते में रह चुकी हूँ. जो मुझे पसंद आये और उनमें से कई के साथ सेक्स भी कर चुकी हूँ।

अब तक मैं सेक्स के काफ़ी अनुभव कर चुकी हूँ. मुझे इसमें बहुत मज़ा आता है। आज मैं आप लोगों को अपने कई किस्सों में से एक किस्सा बताने जा रही हूँ जो बेहद यादगार है।

मैं पहली बार यहाँ अपनी सेक्सी स्टोरी इन हिंदी लिख रही हूँ।

यह बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में थी। मैं एक विवेक नाम के लड़के से बात किया करती थी जो मुंबई में रहता था। हम काफ़ी वक्त तक एक-दूसरे से बात करते थे।

हम पहली बार तब मिले थे जब वो मेरे पड़ोस में अपने रिश्तेदारों के घर आया था। पहले हम एक-दूसरे के ज्यादा करीब नहीं आए थे.

मेरी पड़ोस की सहेली जो कि उसकी बहन लगती थी उसकी वजह से हम मिले और हमारी दोस्ती हुई। फिर हम एक साथ घूमने लगे, बातें करने लगे और हम करीब होते गए।
तब से ही हम फोन पर भी बात करने लगे।

वो मुझसे उम्र में थोड़ा बड़ा था पर हमें कोई दिक्कत नहीं थी। जब हम मिले थे तब मैं उस वक्त बारहवीं में थी और उसकी पढ़ाई खत्म होने वाली थी. वो अपने होटल और रेस्टोरेंट के बिजनेस को आगे बढ़ाने वाला था।

कुछ दिन बाद वो वापस चला गया. फिर हम सिर्फ फोन पर बात करने लगे।

एक दिन बात करते हुए उसने मुझे मिलने के लिए पूछा. हम बहुत वक्त से नहीं मिले थे।
मैंने उसे कहा कि वो मेरे पास आ जाए.
तो उसने कहा कि वो नहीं आएगा बल्कि मैं उसके पास आऊँ।

उसकी पढ़ाई खत्म हो गई थी और अब वो बिजनेस सँभालता था।

तो मैं उससे मिलने उसके पास चली गई।

मेरे मम्मी-पापा मुझे कुछ करने से रोकते नहीं थे. पर फिर भी उनकी तसल्ली के लिए मैंने उन्हें कह दिया कि मैं कालेज ट्रिप पर जा रही हूँ.
और मेरी सहेलियों से कहा कि वो सब संभाल लें।

फिर मैं विवेक के पास चली गई। वो मुझे लेने एयरपोर्ट आया। हम एक-दूसरे को देखते ही जोड़ से गले लग गए।

वो मुझे लेकर अपने एक होटल ले गया और मुझे एक शानदार सा कमरा रहने के लिए दिया।

उसने बताया कि ये उसके सभी होटलों में सबसे शानदार कमरा है. इसे उसने मेरे लिए स्पेशल सजाया है।
वो कमरा बहुत खूबसूरत था और साथ ही वहाँ कई गिफ्ट थे जो वो मेरे लिए लाया था।

उसने मुझे स्पेशली एक वेस्टर्न शोर्ट ड्रेस दी। फिर उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और हम किस करने लगे।
किस करते हुए ही उसने मुझे उठा लिया और बेड पर ले गया।

हमने एक-दूसरे को जकड़ रखा था। काफ़ी देर तक हम लिपटे रहे और एक-दूसरे के साथ जीभ और होंठों से खेलते रहे।

काफ़ी देर तक किस करने के बाद उसने मुझे आराम करने कहा और कहा कि शाम को मैं उसकी दी ड्रेस में तैयार रहूँ।
फिर मैंने थोड़ा लंच किया और थोड़ी देर आराम किया।

शाम को मैं उसी ड्रेस को पहन कर तैयार हो गई।

थोड़ी देर में विवेक आया. वो तो मुझे बस देखता ही रह गया।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो वो मेरी तारीफ़ करने लगा।

फिर उसने मुझे फूल दिये, मैंने फूल ले लिये। फिर वो मुझे अपने साथ टैरेस पर ले कर गया.
मुझे कुछ समझ नहीं आया कि वो मुझे टैरेस पर क्यों ले जा रहा है।

पर मैंने वहाँ जाकर देखा कि विवेक ने वहाँ पर बहुत तैयारी की है। मैं ये सब देख कर बहुत हैरान थी और बहुत खुश भी।
वहाँ ऊपर से नज़ारा बहुत खूबसूरत था।

हमने डिनर किया. वहाँ काफ़ी रोमांटिक म्यूजिक बज रहा था जिस पर हमने साथ में डांस किया।
फिर उसने मुझे ड्रिंक दिया और हम नज़ारे देखने लगे और उस वक्त का मज़ा लेने लगे।

कुछ देर बाद उसने अचानक मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और टैरेस की दूसरी तरफ़ ले गया.
वहाँ उसने और भी तैयारी की थी. मुझे देखते ही सब समझ में आ गया।

वहाँ एक बड़ा सा बेड था और बहुत खूबसूरत सजावट थी।
मुझे ऐसा लगा कि जैसे आज मेरी सुहागरात की चुदाई कहानी लिखी जायेगी!

वो मुझे बेड पर ले गया और मुझे चूमने लगा. वो पूरे जोश में लग रहा था। वो धीरे-धीरे मेरे पूरे शरीर को चूमने लगा।

मुझे चूमते हुए वो मेरे कपड़े भी उतारने लगा। फिर वो मेरे बूब्ज़ चूसने लगा। मेरे बूब्ज़ देख कर तो वो पागल ही हो गया था. वो कभी मेरे बूब्ज़ को कभी आराम से सहलाता, चूमता और कभी जोर से दबा देता।

इन सब में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं जैसे अपना हनीमून मना रही थी. मैं उसका पूरा साथ दे रही थी।
जोश में मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन तोड़ दिये और शर्ट उतार दी।

फिर उसने मेरे पूरे कपड़े उतार दिये सिर्फ पैंटी को छोड़कर!
और वो धीरे-धीरे मेरे बदन को चूमता और चाटता हुआ नीचे बढ़ता गया।

वो मेरे पेट और नाभि को चाटने लगा. ये सब मुझे पागल कर रहे थे। वो मेरी जांघों से होता हुआ मेरे पैरों तक पहुँच गया और मेरे पैरों की उँगलियाँ चूसने लगा।

फिर वो मेरे जांघों को सहलाने लगा और फिर मेरी टाँगों को खोल कर मेरी चूत के आसपास चूमने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा।

मेरी पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी।

फिर उसने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी चूत पर उँगलियाँ टहलाने लगा. फिर मेरी चूत को उसने अपने मुँह में भर लिया और उसे चाटने लगा।
वो अपनी जीभ से मेरी चूत को अंदर से चाटने लगा।

फिर उसने अपनी एक उँगली भी मेरी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा।

मैं अपना आपा खो चुकी थी. मैं पूरे उफ़ान पर थी. मेरे मुँह से बस सिसकारियाँ और आहें निकल रही थी। मैंने अपने पंजों से उसके सर को अपनी चूत में पूरा जकड़ लिया।

थोड़ी ही देर में मेरी चूत से पानी झड़ गया और मैं निढाल हो गई।
मेरे शरीर में जैसे कोई ताकत नहीं थी।

पर विवेक का जोश कहीं नहीं गया था. वो अब भी मेरे जिस्म को चूम रहा था।

उसने मुझे उल्टा किया और मेरे बदन को पीछे से चूमने लगा. और फिर मेरी गाँड चाटने लगा।

कुछ देर तक ऐसे ही मेरे पूरे बदन और बूब्ज़ को चूमता रहा. और फिर मुझे बांहों में जकड़ कर मेरे होठों को चूमने लगा।

धीरे-धीरे मेरा भी जोश लोटने लगा और मैं भी उसे चूमने लगी।

अब मेरी बारी थी. मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ कर उसे चूमने लगी। फिर उसका जिस्म चूमते हुए मैं नीचे गई और उसका पैंट उतार दिया। उसके अंडरवियर के अंदर लंड का उभार मुझे नशा दिला रहा था।
मैंने ऊपर से ही उसके लंड को काटना और चाटना शुरु कर दिया।

उसका लंड मुझे काफ़ी दमदार लग रहा था।

फिर मैंने उसका अंडरवियर उतारा तो उसका लंड एकदम सलामी देने खड़ा हो गया। उस वक्त तक मैंने इतना अच्छा लंड नहीं देखा था। मुझे तो उस लंड से प्यार हो गया। मैंने उसे चूसना शुरु कर दिया, उसका टेस्ट भी बहुत अच्छा था।

मैं उसके लंड और बाल्स को चूस रही और वो सिसकारियाँ भर रहा था।

फिर वो जोश में आ के मेरे मुँह को ही चूत की तरह चोदने लगा। वो अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड को पूरा मेरे मुँह में धकेलने लगा। उसका लंड मेरे गले के अंदर तक जा रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करने के बाद उसने मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ दिया।

फिर कुछ देर हम पड़े रहे और किस करते रहे।

कुछ ही देर में उसका लंड फिर से तन के खड़ा हो गया। मुझे समझ आ गया कि अब मेरी चूत की खैर नहीं।

वो उठा. उसने मेरी टाँगों को खोल दिया. फिर मेरी चूत पर उँगलियाँ फेरने लगा।
फिर उसने मुझे उठा के एक किस किया. और तुरंत ही अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर अंदर-बाहर करने लगा. इस तरह उसने मेरे मुँह से अपना लंड गीला कर लिया.

तब मेरी टाँगें खींचकर उसने मेरी चूत पर थूका. फिर लंड टिका कर जोर से धक्का मारा और अपना लगभग आधा लंड अंदर डाल दिया।
इस अचानक और जोरदार वार से मेरी हालत खराब हो गई. मेरे मुँह से जोरदार चीँख निकल गई।

उसने मुझे पूरी तरह से जकड़ लिया और अपने होंठों से मेरे होंठों कैद कर लिया।

अभी तक मैं पहले वार से उभरी भी नहीं थी. उसने फिर एक जोरदार झटका देकर अपना पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया।

मैं उसकी बांहों में बेबस पड़ी थी और चाह के भी कुछ नहीं कर पा रही थी।

उसका बड़ा सा लंड मेरी चूत चीरता हुआ अंदर चला गया. मैं दर्द से तड़प रही थी पर कुछ नहीं कर पा रही थी।
मेरी चीख भी उसके होंठों तले दबी रह गई।
मैंने उससे पहले इतना बड़ा कभी नहीं लिया था।

फिर उसने आराम से धीरे-धीरे लंड बाहर निकलना शुरु किया तो मेरी जान में जान आने लगी.
पर लंड निकालते ही उसने फिर अपना लंड पूरी ताकत से अंदर डाल दिया।

अब मेरी हालत और बुरी हो गई। मेरी आँखों से आँसू आ गए।

उसने फिर तीन-चार बार ऐसा किया. फिर मुझे अच्छा लगने लगा। अब मैं भी उसका साथ देने लगी।

धीरे-धीरे उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी और मुझे तेज़ी से चोदने लगा। वो बेड भी अपनी उछाल की वजह से हमारी चुदाई में मदद कर रहा था। उसका लंड मेरी चूत में काफ़ी अंदर तक जा रहा था जितना अंदर पहले कोई नहीं पहुँचा था।

मैं इतने में झड़ गई. पर वो अभी भी लगा हुआ था।

फिर उसको नीचे लिटा के मैंने उसके ऊपर बैठ के घुड़सवारी की. उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना के चोदा।

फिर उसने मुझे उल्टा लिटाया और मेरे नीचे तकिया रख दिया. उसने मेरी गांड ऊँची की और पीछे से मेरी चूत चोदने लगा।

मैं उस बेड और विवेक के लंड के बीच फंस गई थी. विवेक पूरी ताकत से मेरी चूत को चीर रहा था. और वो बेड की उछाल जो मुझे वापस लंड की तरफ़ धकेल रही थी।

इस तरह मैं कई बार झड़ गई और वो भी मेरे अंदर ही झड़ गया।

पूरी रात हमने कई बार चुदाई की. उसने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदा।

सुहागरात की चुदाई के बाद न जाने कब हमारी आँख लग गई।

सुबह सूरज की चमकती रोशनी से मेरी आँख खुली। दिन निकल आया था. हम खुले टैरेस पर बिना कपड़ों के सो रहे थे. पर ऊँची बिल्डिंग होने की वजह से किसी के देखने का डर नहीं था।

विवेक मेरे ऊपर सोया हुआ था और अभी भी उसका लंड काफ़ी सख्त था. उसके लंड का सर अभी भी मेरी चूत में था।

मैंने उसे किस कर के उठाया. उसने मुझे भी किस करना शुरु कर दिया और लंड हल्के से अंदर-बाहर करने लगा।

कुछ दस-पंद्रह मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में उठा कर कमरे में ले गया।

रात भर की चुदाई के बाद मेरा जिस्म दर्द से टूट रहा था।

फिर हम साथ में नहाए और कुछ खा पीकर के कुछ देर सो गये।

मैं वहाँ पाँच दिन रही और इस बिना शादी के हनीमून के दौरान हमने खूब सेक्स किया.

साथ ही उसने मुझे पूरा शहर घुमाया. हमने नाइट पार्टी की, क्लब और बार वगैरा गये और बहुत मस्ती की।

ये मेरे यादगार पलों में से एक है।

आखिरी दिन मेरे लौटने से पहले भी हम कमरे के दरवाजे से लग कर एक-दूसरे से लिपट कर काफ़ी वक्त तक किस करते रहें।

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मेरी गीली चूत

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम अक़्सा है और मैं महाराष्ट्र की रहने वाली हूँ. यह मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स स्टोरी हिंदी में है. मैं इस वक़्त 21 साल की हूँ और मेरी शादी अभी हाल ही में हो गयी है. मेरा फिगर 36-26-36 का है और मैं काफी गोरी भी हूँ.

ये बात तब की है, जब मैं पढ़ती थी. मेरे घर में मम्मी पापा, बड़ी बहन और बड़ा भाई है. पर ये कहानी मेरे चचेरे भाई शिजू की है. वो मुझसे 3 साल बड़ा है और मेरे ही साथ पढ़ता था. पढ़ने के बाद हम साथ में घर वापस आते. हम दोनों घर पर ही खेलते थे.

मेरा घर काफी बड़ा है और मैं शुरू से ही लड़कों के साथ खेलती आई हूँ. जब सब लोग एक जगह जमा हो जाते, तो हम लोग छुपन छुपाई खेलते थे. उसमें शिजू के अलावा मेरी एक सहेली नाज़ भी थी. कुछ और लड़के भी हमारे खेल में शामिल होते थे. किसी एक की बारी छिप हुए बाकी को ढूँढने की आती थी और बाकी सब लोग छुप जाते थे.

शिजू हमेशा मेरे पास ही छिपता था और छिपने के बाद वो मेरे साथ मेरे दूध दबाना … मुझे उल्टा लिटाना, मेरे ऊपर चढ़ जाना. मेरी टांगें फैलाकर सलवार के ऊपर से खुद को घिसना … उसका हमेशा का काम था.

उसके इन सब कामों में मुझे भी बहुत मज़ा आता था, इसीलिए मैं उसे मना भी नहीं करती थी.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त भी मेरे मम्मे बाकी लड़कियों से काफी बड़े थे. जिनको शिजू दबाता ही रहता था.

मेरा कुछ न बोलना, उसकी हिम्मत बढ़ने का बहुत बड़ा कारण था. वो मुझे नीचे लिटाकर मेरी सलवार निकालकर मेरी चूत को चाटने भी लगा था. इसमें तो मुझे और भी सुकून मिलता था.

कई दिन तक चूत चाटने के बाद अब वो मुझे भी अपना लौड़ा चूसने के लिए कहने लगा था. पहले पहल तो मैंने मना किया, पर बाद में कुछ दिन बाद मैं भी उसका लंड चूसने लगी. हम दोनों खुद ब खुद सिस्टी नाइन का पोज सीख गए थे. शायद ये कुदरत ही सब सिखा देती है.

मैं उसके लंड की तरफ अपना मुँह कर देती और वो मेरी चुत पर अपना मुँह लगा कर जीभ से मेरी चुत को मस्ती से खूब चाटता. मेरी चूत को काफी देर देर तक चाटने के बाद उसने मुझे इससे आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया था.

जब उसकी जीभ मेरी चुत को गरम कर देती थी, तो मुझे खुद उसके लंड की जरूरत होने लगती और मैं सीधे होकर उसका लंड पकड़ने लगती.

वो मेरी सलवार को मेरी टांगों से पूरी निकालकर अलग कर देता और मेरी चूत में अपना लंड चुभाने लगता. मुझे उसके लंड से एक अलग सी तकलीफ होती, लेकिन उस टाइम मैंने उसे कभी पूरा लंड अपनी चुत के अन्दर डालने नहीं दिया.

सब कुछ ऐसे ही चलता रहा. वो मुझे एक औरत की तरह दबाता और मसलता रहा. मेरे सगे भी ने मेरे साथ फर्स्ट टाइम सेक्स … आधा अधूरा ही सही करके मेरी वासना की आग भड़कायी.

एक दिन हम ऐसे ही पलंग के नीचे छुपे थे, तब एक असलम नाम के लड़के ने ये सब देख लिया, वो इस समय राज दे रहा था, मतलब इस समय उसकी बारी सभी छिपे हुए को खोजने की थी. जब असलम ने हमको देखा, उस वक़्त मेरी सलवार निकली हुई थी और शिजू मेरी चूत चाट रहा था.

उसे देखकर मैं डर गई और खुद को छिपाने की कोशिश करने लगी. वो मेरे पास आकर मेरे मम्मों को दबाने लगा. शिजू ने भी उससे कुछ नहीं कहा. एक तरह से वे दोनों मेरे साथ मजा लेने लगे थे.

मैं भी चुप होकर उन दोनों से अपने मम्मों को मिंजवाती रही. उन दोनों ने मेरा कोई विरोध नहीं देखा, तो वे दोनों खुल कर मुझे ऐसे ही दबाते और मसलते रहे. अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. एक तरह से ये हो गया था कि अब मैं उन दोनों के लिए एक जुगाड़ बन गई थी.

मुझे भी चूंकि मजा आने लगा था, तो मैंने भी कुछ कहना ठीक नहीं समझा. अब हम तीनों हमेशा साथ में छुप जाते और वो दोनों मुझे पागलों की तरह मसलते दबाते रहते.

ऐसा कुछ टाइम तक चला. इस बीच उन दोनों ने मेरी चुत में लंड पेलने की कोशिश भी की, मगर वो मैंने नहीं होने दिया.

फिर मैं गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आ गयी. नानी के घर पर मेरी बहुत सारी सहेलियां थीं.

हम सब नानी के घर के पीछे के खेत में खेलते थे. हमारे बीच में सिर्फ एक लड़का अरबाज था और बाकी बहुत सारी लड़कियां थीं. वहां पर हम आपा बाजी वाला खेल खेलते थे. अरबाज मेरा या कभी मेरी सहेली का दूल्हा बनता और उसके साथ सोना और उसके लंड को छूना … बस इतना ही चलता रहा.

फिर एक दिन मैं खेत में खेलने के लिए गयी, तब वहां पर एक भाईजान थे. उनका नाम मोहसिन था. मोहसिन भाई मुझे हमेशा चिढ़ाया और छेड़ा करते थे. वो उसी एरिया में रहते थे.

एक दिन मैं उनके पास गई, वो एक झाड़ से टिक कर बैठे थे. उन्होंने कुछ देर बैठने के बाद मुझे अपनी गोदी में बैठने के लिए कहा … मैं झट से बैठ गयी. वो मुझे सहलाते हुए प्यार करने लगे. फिर वो मुझसे आगे पीछे होने के लिए कह रहे थे … तो मैं होने लगी. इसमें एक मस्त रगड़ हो रही थी. जिससे मुझे भी मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला. भाई का लंड कुछ 6 या 7 इंच लंबा रहा होगा. मैं लंड देखने लगी तो उन्होंने मुझे हाथ में लंड पकड़ा दिया. मुझे लंड सहलाने मजा आता था, तो मैं उनके लंड को सहलाने लगी. भाई का लंड खड़ा हो गया.

अब उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी और मुझे लिटा दिया. फिर भाई ने अपनी टांगें सीधी की और मुझे अपने मुँह की तरफ मुँह करके अपने ऊपर बिठा लिया. इससे मेरी नंगी चूत उनके लंड से टकराने लगी. मुझे गर्मी चढ़ने लगी.

भाई भी अपने नंगे लंड के ऊपर मेरी चुत लगाने लगे. इस पोजीशन में मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था. मैं खुद अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए अपनी चुत को जोर जोर से भाई के लंड पर घिसती गयी.

नीचे लंड चुत की घिसाई चल रही थी और ऊपर भाई मुझे चूम रहे थे. मैंने भी उनके मुँह को चूमा, तो भाई ने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिया. वो मुझे किस करने लगे.

मेरे होंठों को भाई के होंठों का स्वाद मिला तो मैं मदमस्त हो गई और मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया.

अब भाई मेरी चुत पर लंड रगड़ रहे थे, मेरे होंठों को मस्ती से चूस रहे थे और अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहे थे. मैं एकदम से चुदासी हो गई थी.

इतने प्यार से अब तक मुझे किसी ने गरम नहीं किया था. साथ के लौंडे तो अब तक मेरी चूचियों या मेरे चूतड़ों का भरता ही बनाते रहे थे. मैं आज खुद को भुला चुकी थी और भाई के साथ मस्ती करने में सब कुछ बिसरा चुकी थी.

कुछ देर बाद उन्होंने मेरे चूतड़ों को पकड़ कर मुझे जोर जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

इससे मेरी चुत एकदम से भट्टी सी तपने लगी थी. मैं सोच रही थी कि आज यदि भाई मेरी चुत में लंड पेलेंगे, तो मैं लंड अन्दर ले ही लूंगी. फर्स्ट टाइम सेक्स का मजा लूंगी.

मगर ऐसा नहीं हुआ … मेरी चुत से लंड की रगड़ से कुछ ही देर बाद उनके लंड से कुछ सफेद सा रस निकल गया. वो पूरा चीकट सा रस उनके पैरों पर … और मेरी चुत की हल्की हल्की झांटों में लग गया था.

भाई के लंड से पानी निकलते ही वो एकदम से थक से गए और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगे. मैं भी उनकी छाती से चिपक कर मजा लेने लगी.

फिर कुछ पल बाद वो उठने को हुए, तो मैं भी उठ गई और मैंने अपनी सलवार पहन ली. कपड़े ठीक करके मैंने भाई को देखा और मुस्कुरा कर घर चली गयी.

फिर एक दिन मैं अपने मुँह बोले मामू के घर गयी. उनका घर नानी के घर से कुछ थोड़ा दूर ही था. मैं वहां पर गई तो उनके घर पर कोई नहीं था.

मेरे ये मामू कुछ 23 या 24 साल के थे. मैं उनके घर खेल रही थी. वो अपने पलंग पर लेटे हुए थे. तभी उन्हें पता नहीं क्या हुआ … उन्होंने मुझे पास बुलाया और अपने ऊपर बिठा लिया. मैं उस वक़्त ठीक उनके लंड के ऊपर बैठी थी. वो मुझे आगे पीछे करने लगे. न उन्होंने अपने कपड़े उतारे थे … न मेरे, बस ऐसे ही कुछ देर अपने लंड पर मुझे हिलाते रहे.

मेरी चूचियां उनको मस्त कर रही थीं. मुझे भी उनका लंड अपनी चुत में गड़ता सा महसूस हो नरहा था. मैं खिलखिलाते हुए मामू के लंड पर कूद रही थी.

उन्होंने मुझसे पूछा- मजा आ रहा है?
मैं हां कहा.
तो बोले- अभी और मजा आएगा.

ये कह कर अपने पलंग पर ही मामू ने मुझे अपने नीचे उल्टा लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गए. फिर मामू ने मेरी गांड के ऊपर अपना लंड पेंट के ऊपर से रगड़ना चालू कर दिया. कुछ देर लंड घिसने के बाद वो मेरे ऊपर अपना पूरा वजन डाल कर थम से गए. शायद मामू झड़ गए थे.

जब मुझे उनके वजन से तकलीफ हुई, तो मैं कोशिश करके मामू के नीचे से निकली और वहां से घर चली गयी.

इस तरह कई लोगों ने मुझे अपने लंड के नीचे दबाया था. मुझे वो सब ठीक तरह से याद भी नहीं है कि किस किस ने मेरे जिस्म के साथ ऊपर ऊपर से खेला था.

फिर मैं एग्जाम के बाद अपनी खाला के घर गयी. वहां पर मुझे एक लड़का समीर दिखा, जो कि बहुत ही खूबसूरत था. वो मुझसे उम्र में 4-5 साल बड़ा था. पर मैं भी भरी पूरी छमिया बन चुकी थी, ये सब मेरे जिस्म के साथ हुई छेड़छाड़ के कारण हुआ था.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त मेरी बॉडी किसी भी तरह से समीर के जिस्म के लिए कमसिन लड़की जैसी नहीं थी. उस वक़्त मेरे बूब्स 32 के हो गए थे और गांड कुछ 34 की थी. वो लड़का समीर भी जैसे मेरा दीवाना हो गया था.

फिर ऐसे ही कुछ दिन एक दूसरे को देखने के बाद उसने मुझे अपना नंबर दिया. मुझे भी समझ आ गया था कि समीर मुझे प्यार करना चाहता है.

अब चूंकि मुझे भी अपने जिस्म की आग सताने लगी थी और मैं अब किसी से भी अपने जिस्म को हाथ टच नहीं करने देती थी. तो मेरे जिस्म में किसी मर्द के हाथ की जरूरत महसूस होने लगी थी.

मुझे समीर अपने लिए मस्त लड़का लगा था, तो मैं अपने घर जाने के बाद अपने घर के मोबाइल से उसे कॉल करने लगी.
हमारे बीच इश्क शुरू हो गया था. कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा.

फिर उसने मुझसे मिलने की ज़िद की और मैंने उसे अपने गांव बुला लिया.

जिस दिन वो मेरे गांव आया, उस दिन मैंने कॉलेज की छुट्टी मार दी और उसके साथ चली गयी.

घूमते घूमते उसने गाड़ी एक खेत की तरफ ले ली और खेत के बीचों बीच एक छोटे से गड्डे जैसी खाई में हम दोनों चले गए. हम दोनों के जिस्म में जिस्म की आग लपलपा रही थी.

उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मैं बह गई. वो मेरे मम्मों को दबाने लगा और मैं मस्त होने लगी. आज बहुत दिन बाद किसी ने मेरे मम्मों को मसला था तो मेरे मम्मे एकदम से कड़क हो उठे.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उसने मेरा दुपट्टा नीचे बिछा दिया और उसके ऊपर मुझे लिटा दिया. मैं नीचे से पूरी गीली हो गयी थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

फिर उसने मेरी सलवार निकाली और खुद की पैंट निकाल दी. उसका लंड कुछ 6 इंच लंबा होगा और 3 इंच मोटा था. इतना मोटा लंड मैंने आज पहली बार देखा था. उसने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत पर लंड लगा कर अन्दर डालने की कोशिश करने लगा था.

मैं भी आज फर्स्ट टाइम सेक्स करती हुई चूत में लंड ले लेना चाहती थी. उसका लंड चूत में लेते समय मुझे एक मीठा सा दर्द हो रहा था. काफी कोशिशों के बाद भी उसका लंड चुत में अन्दर नहीं गया.

फिर उसने अपने लंड के टोपे पर थूक लगाया और मेरी चूत पर भी अपना थूक लगा कर लंड सैट कर दिया.
अभी मैं कुछ समझ पाती, समीर ने पूरी ताकत से झटका दे मारा.

उसका आधा लंड चूत के अन्दर चला गया और मैं मछली की तरह फड़फाड़ने लगी. मैं उसे अपने ऊपर से धक्का देकर हटाने लगी, पर उसने मेरी एक न सुनी … और जोर जोर से झटके मारने लगा. कुछ देर की चुदाई के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं बस उसके लंड के झटकों को सहने लगी.

फिर उसने मेरी चीख पुकार कम होते देखी, तो अब उसने मेरी टांगें पकड़ लीं और झटके पर झटके मारने लगा. कुछ देर बाद मुझे अपनी चुत में मजा आने लगा और मैंने अपनी टांगें हवा में उठा दीं.

कोई बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद समीर ने मेरे अन्दर ही अपना लंड झाड़ दिया. फर्स्ट टाइम सेक्स से मुझे बड़ा सुकून मिला. इस तरह से मैं समीर के लंड से अपनी चुत की सील तुड़वा बैठी.

फिर समीर ने मुझे बहुत दिनों तक चोदा और मैंने और उसने शादी कर ली.

समीर आज मेरा शौहर है और वो एक रंगीन किस्म का आदमी है. वो मुझे बहुत चोदता है. उसका लंड अभी 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा हो गया है. वो रोज़ मुझे 2 या 3 बार चोदता है. पर अब वो चाहता है कि हम कुछ अलग तरीके का सेक्स करें … जैसे अदला-बदली, थ्री-सम … या ग्रुप सेक्स. पर मैं उसके साथ चुदाई करते समय किसी और का नाम लूं … इसी में सुख ले लेती हूँ.

मैंने उसे अपने शुरू से जवानी तक के सारे सेक्स के किस्से बताए, वो सुनकर वो बहुत ही कामुक हो जाता है. फिर वो मेरे साथ भयंकर वाला सेक्स करता है.

वो चाहता है कि मैं किसी औऱ से चुदूं … पर अभी तक हमें कोई भरोसे का कोई कपल या आदमी नहीं मिला है. जब ऐसा होगा तब मैं आपको अपनी उस चुदाई का अनुभव एक सेक्स कहानी के माध्यम से लिखूंगी.

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जोर से चोदो

दोस्तो, मेरा नाम आदित्य है और मुझे घर में सब आदी कह कर बुलाते हैं। मैं 21 साल का हूं और बी.फार्मा. के तीसरे वर्ष में हूं. जब से मैंने जवानी में कदम रखा है मुझे बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक रहा है. मैं जिम करता हूं तो मेरी बॉडी अच्छी बनी हुई है.

मगर ये तो हुई मेरे शौक की बात. अब मैं आपको एक राज की बताता हूं. बनाने वाले ने मुझे एक खास तोहफा दिया है. वो तोहफा है मेरे लंड का साइज़. जी हां दोस्तो, मेरे लंड का साइज 8 इंच से कुछ ज्यादा ही है. इतना बड़ा लंड मिलना वाकई किस्मत की बात है.

जब मेरा लंड पूरे तनाव में होता है तो उसकी मोटाई 3 इंच हो जाती है. इतना मोटा और लम्बा लंड लेकर कोई भी लड़की तो क्या एक से एक चुदक्कड़ औरत भी खुश हो जायेगी. मगर मैं जो कहानी आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो किसी अन्जान की नहीं बल्कि मेरी ही भाभी की कहानी है.

मेरी भाभी का नाम सलोनी है. घर में मेरी भाभी को सब सुलु कह कर पुकारते हैं. मैं भी अपनी भाभी को सुलु भाभी कह कर बुलाता हूं. यह बात तब की है जब मेरी भाभी सुलु दूसरी बार अपनी ससुराल यानि कि हमारे घर पर आई थी.

इससे पहले कि मैं भाभी की चोदाई कहानी को आगे बढ़ाऊं मैं आपको अपने भाई का परिचय भी दे देता हूं. मेरा भाई मुझसे उम्र में तीन साल बड़ा है. उसके लंड का साइज 6 इंच के करीब है. अब आप ये सोच रहे होंगे कि मुझे उसके लंड का साइज कैसे पता चल गया.

अगर आप कहानी को आगे पढ़ेंगे तो आपको भी पता लग जायेगा कि मेरे भाई के लंड के बारे में मुझे कैसे पता लगा. इसलिए अभी मैं इस बात को यहीं खत्म कर देता हूं और अपनी भाभी के बारे में आपको बताता हूं.

मेरी भाभी की उम्र 22 साल है. वो एक गजब के शरीर की मालकिन है. उसका फिगर इतना मस्त है कि मुझे अपने भाई से जलन होने लगी थी कि कैसी माल हाथ लगी है उनको. एकदम फिट और गजब की शेप वाले बदन की मालकिन. कभी कभी मेरा मन करने लगता था भाभी की चोदाई करने का!
पढ़ाई में उसने स्नातक किया हुआ है.

उसका गोरा बदन, गोल चूचे और बाहर निकली हुई मस्त सी गांड को देख कर तो पहले दिन ही मेरा लंड पानी छोड़ने लगा था. मगर अभी वो घर में नई दुल्हन थी तो मैं बस अपने अंदर की प्यास को लौड़ा हिला कर ही शांत कर लेता था. शादी से पहले भाभी जीन्स और टॉप वगैरह भी पहनती थी लेकिन शादी के बाद ज्यादातर साड़ी या सूट में ही रहने लगी थी.

मगर साड़ी में भी वो गजब की सेक्सी दिखती थी. कई बार जब मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं रहते थे तो वो जीन्स और टॉप भी पहन लेती थी. मैंने उसको बस एक बार ही इस तरह के लिबास में देखा था. उस दिन उसके चूचों की शेप को देख कर मुझे तुरंत जाकर बाथरूम में मुठ मारनी पड़ी थी.

आप समझ ही गये होंगे कि कितनी मस्त गोलाई वाले चूचे होंगे उसके. फिर एक दिन मेरी किस्मत भी मुझ पर मेहरबान हो ही गई. भाई को दो या तीन दिन के लिए किसी काम से बेंगलुरू जाना पड़ रहा था. वो तीन दिन के बाद ही आने वाले थे. यहां तक तो सब ठीक था लेकिन किस्मत की बात ये हुई कि उसी दिन मेरे नाना की तबियत बिगड़ गई.

मेरी मां और पापा नाना का हाल-चाल जानने के लिए गांव में चले गये. वो दोनों भी अगले दिन वापस आने वाले थे. मगर गांव में जाने के बाद मां का फोन आया कि उनको अभी एक-दो दिन का वक्त और लगने वाला है. इसलिए मां अब दो-तीन दिन तक नहीं आने वाली थी.

अब घर में मैं और भाभी ही रह गये थे. मैं भी थोड़ा मजाकिया किस्म का बंदा हूं तो भाभी और मेरे बीच में मजाक हो जाता था. भाभी भी मेरे साथ काफी कम्फर्टेबल फील करती थी. जब घर में कोई नहीं था तो पहली रात को तो सब कुछ ठीक रहा. अब तक मेरे मन में भी चुदाई का प्लान करने का विचार नहीं आया था.

अगली सुबह उठ कर मैं बाथरूम में नहाने के लिए चला गया. घर में भाभी और मेरे अलावा कोई नहीं था. मैं जानता था कि घर में भाभी और मेरे अलावा कोई नहीं है. उस वक्त भाभी भी अपने कमरे में थी इसलिए मैंने बाथरूम का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था.

मगर यहां पर एक बात यह भी थी कि भाभी को नहीं पता था कि मैं उठ गया हूं. उनके लिए तो मैं अभी सो रहा था. भाभी रोज सुबह मुझे उठाने के लिए मेरे कमरे में आती थी. मैं बाथरूम में था. मुझे नहीं पता था कि भाभी एकदम से मेरे कमरे में आ जायेगी.

मैं नंगा होकर बाथरूम में नहा रहा था. अपनी ही मस्ती में था. मुझे अंदर गये हुए काफी देर हो चुकी थी. शायद भाभी ने मुझे आवाज भी दी होगी लेकिन मुझे पानी के शोर के कारण कुछ सुनाई ही नहीं दिया. फिर भाभी मेरे बेड के पास आ गई. मेरे बेड के पास आने पर बाथरूम के अंदर का नजारा साफ दिखाई देता था.

भाभी ने मुझे नहाते हुए देख लिया. उस वक्त मैं अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मसल रहा था. जब मेरी नजर भाभी पर पड़ी तो मैं एकदम से सकपका गया. मैंने तुरंत बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया. मुझे नहीं पता भाभी ने मेरे शरीर में क्या क्या देखा और कितनी देर देखा. लेकिन जब मैंने उनको देखा तो मैंने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया था.

उसके बाद मैं नहा कर बाहर आ गया. मैंने नाश्ता किया और मैं तैयार होकर अपने कॉलेज चला गया. जब मैं वापस आया तो दोपहर के तीन बज चुके थे. वापस आने के बाद मैंने नोटिस किया कि भाभी का अंदाज कुछ बदला बदला सा लग रहा था.

शाम को खाना खाते समय भाभी ने कहा कि रात को तुम मेरे कमरे में आकर ही पढ़ाई कर लेना. मुझे अकेले डर लगता है. तुम्हारे भैया भी घर में नहीं हैं और मां जी भी गांव में हैं.
मैंने कहा- ठीक है भाभी. मैं आपके रूम में आकर ही पढ़ाई कर लूंगा.

रात के 9 बजे के करीब मैं भाभी के रूम में चला गया और अपनी किताब लेकर बैठ गया. फिर कुछ देर पढ़ाई करने के बाद भाभी और मैं बातें करने लगे. बातें करते करते बात बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड तक पहुंच गई. मैं भाभी के साथ काफी खुल गया था इसलिए भाभी के साथ इस तरह की बातें करने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी और भाभी का व्यवहार भी काफी दोस्ताना था.

फिर भाभी ने पूछा- कितनी गर्लफ्रेंड बना रखी हैं तुमने कॉलेज में?
मैंने कहा- एक ही थी भाभी, उससे भी ब्रेक-अप हो गया है. अब तो मैं बिल्कुल अकेला हूं.
वो बोली- तो फिर उसके बाद कोई दूसरी नहीं मिली?
मैंने कहा- नहीं, अभी तक तो नहीं मिली.

वो बोली- तो फिर बना लो कोई दूसरी. तुम तो जवान हो काफी.
मैंने कहा- आपके जैसी कोई कहां मिलेगी.
वो बोली- ओह्ह, तो मेरे जैसी चाहिए!
मैं बोला- जी!

फिर वो बोली- देखो, मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो नहीं बन सकती लेकिन फ्रेंड जरूर बन सकती हूं.
मैं बोला- सोच लो भाभी, मैं अपनी दोस्तों के साथ बहुत मस्करी करता हूं. कहीं बाद में आप शिकायत करने लगो.
वो बोली- नहीं करूंगी. मगर जरा अपने भैया और मम्मी पापा के सामने ख्याल रखना. कहीं वे गलत न सोचने लग जायें.

मैंने कहा- ठीक है. मैं ख्याल रखूंगा. तो आज से हम फ्रेंड्स?
मैंने भाभी की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा.
भाभी ने अपना हाथ मेरे हाथ में दे दिया और हमने हाथ मिला लिया. भाभी के कोमल हाथों को छूकर मैंने उनको छेड़ना शुरू कर दिया और उनके हाथों को दबाने लगा.

सुलु भाभी ने अपना हाथ वापस खींच लिया और बोली- अब रात काफी हो गई है. हम लोगों को सोना चाहिए.
मैंने कहा- थोड़ी देर और पढ़ लेता हूं भाभी. अभी मुझे नींद नहीं आ रही है.
वो बोली- ठीक है, तुम पढ़ाई करो. तब तक मैं कपड़े चेंज करके आती हूं.

कुछ देर के बाद भाभी टी-शर्ट और लोअर पहन कर आ गई. उस लिबास में भाभी के चूचे एकदम मस्त तरीके से उभर कर दिख रहे थे. पहली बार मैंने भाभी को एक हवस भरी चुदाई करने की नजर से देखा था उस दिन. वो आकर मेरे पास बेड पर लेट गई और टीवी देखने लगी.

भाभी टीवी में मग्न थी तो फिर मुझे भी अब नींद आने लगी थी. कुछ देर के बाद मैं भी उठ कर अपने कमरे में चला गया. रात काफी हो चुकी थी और सुबह उठ कर मुझे कॉलेज भी जाना था. मैं अपने कमरे में जाकर सो गया. उस दिन मैं अपने लंड को सहलाकर सो गया.

अगली सुबह भाभी ने मेरे कमरे में आकर मुझे जगाया. जब वो मुझे जगा रही थी तो झुकी होने के कारण उसके चूचों के क्लिवेज ब्लाउज के अंदर से साफ दिखाई दे रहे थे. फिर वो पलट कर जाने लगी. जब दरवाजे के पास पहुंच गई तो मैंने उनको आवाज देकर कहा- भाभी, आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो. भाभी पलट कर मुस्कराई और फिर अपनी गांड मटकाते हुए चली गई.

उसके बाद मैं फ्रेश होकर नाश्ता करने के लिए चला गया. उस वक्त भाभी किचन में बर्तन सेट कर रही थी. मैंने टेबल पड़ा हुआ अखबार उठा कर भाभी की गांड पर मार दिया.
भाभी बोली- ये क्या बद्तमीजी है?
मैं बोला- मैंने आपको कल भी बताया था कि अगर मुझसे दोस्ती करोगी तो आपको ये सब बर्दाश्त करना पड़ेगा.

फिर वो बोली- हां, मैं तो ये भूल ही गई थी.
मैंने कहा- अब नाश्ता तो दे दो भाभी, बहुत भूख लगी है.
भाभी मेरे लिए नाश्ता लेकर आ गई और हमने साथ में बैठ कर ही नाश्ता किया.
मेरी नजर भाभी के सुन्दर चेहरे से फिसल कर उसके गले के नीचे उसकी चूचियों को टटोल रही थी.

अचानक भाभी बोली- आज मुझे बाजार से सामान लाने के लिए तुम्हारी जरूरत है. तुम चल सकते हो क्या?
मैं बोला- भाभी, वैसे मुझे कॉलेज जाना था लेकिन अगर आपको जरूरी काम है तो फिर मैं आज कॉलेज की छुट्टी कर लेता हूं.
यह सुन कर भाभी मुस्कराने लगी. फिर बोली- ठीक है, मैं भी नहा धोकर तैयार हो जाती हूं.

जब भाभी तैयार हो चुकी उसने मुझे आवाज दी. मैं उसके कमरे में गया तो देखता ही रह गया. उसने सफेद टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहनी हुई थी.
मैंने कहा- भाभी आप तो बिल्कुल हीरोइन लग रही हो इन कपड़ों में।
भाभी बोली- हां, मम्मी पापा घर पर नहीं है तो इसलिए पहन लिया मैंने. अब चलो. हमें देर हो रही है.

वो पूछने लगी- कैसे जायेंगे हम?
मैंने कहा- स्कूटी पर.
वो बोली- चलायेगा कौन?
मैंने कहा- आज आप चलाओगी.
वो बोली- ठीक है.

उसके बाद हम शॉपिंग के लिए निकल गये. रास्ते में मैंने भाभी के कंधे पर हाथ रख लिया और फिर उनकी कमर पर हाथ रख लिया. भाभी ने कुछ नहीं बोला. उसके बाद मैं हिम्मत करके भाभी की कमर को भी सहलाने लगा. तब भी भाभी ने कुछ नहीं कहा. अब मुझे यकीन हो गया था कि भाभी को कोई प्रॉब्लम नहीं है.

बाजार जाकर हमने शॉपिंग की और फिर दोपहर तक वापस आ गये. हम दोनों ही थक गये थे.
भाभी बोली- मैं अपने कमरे में सोने के लिए जा रही हूं. शाम को मम्मी-पापा भी आने वाले हैं.
मैंने सोचा कि उनके आने से पहले भाभी के साथ थोड़ी सी मस्ती कर ली जाये. क्योंकि उसके बाद मौका नहीं मिल पाता.

मैंने कहा- भाभी, मैं भी आपके रूम में ही आपके साथ लेट जाता हूं.
वो बोली- ठीक है चलो.
अंदर जाकर भाभी ने ड्रेस बदल ली. उसने लोअर पहन ली और घर वाली टी-शर्ट पहन ली. उसमें उसके बदन की शेप मस्त लग रही थी. फिर वो बेड पर आकर लेट गई.
भाभी ठीक मेरी बगल में लेटी हुई थी. कुछ देर के बाद ही उनको नींद आ गई.

जब हमें लेटे हुए थोड़ा वक्त बीत गया तो मैंने देखा कि भाभी की टी-शर्ट पेट के ऊपर से हट गई है. उनका गोरा बदन दिखने लगा था. उसको देखते ही मेरे अंदर सेक्स जागने लगा. मैंने हल्के हाथ से भाभी के पेट को छूकर देखा. भाभी नींद में थी. फिर मैंने भाभी की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. उसने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी थी इसलिए उसके चूचे मेरे सामने नंगे हो गये.

सुलु भाभी के नंगे चूचे देख कर मेरा लंड फटने को हो गया. मैं अपने हाथों को रोक नहीं पाया और भाभी के गोरे चूचों को छू कर देखने लगा. भाभी के नर्म चूचे हाथ में लेकर पूरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा. मैंने अब भाभी के बूब्स पर दबाव देना शुरू कर दिया. भाभी की आंखें अभी भी बंद थीं.

उसके बाद अचानक से भाभी ने करवट ली और उसकी गांड मेरी तरफ हो गई. मेरा लंड तो पहले से तना हुआ था. मैंने धीरे से सोई हुई भाभी की गांड पर अपना तना हुआ लंड लगा दिया. धीरे-धीरे लंड को भाभी की गांड पर रगड़ने लगा. बहुत मजा आने लगा. हर पल मेरी हवस बढ़ रही थी.

अपने तने हुए लंड को मैंने भाभी की गांड से चिपका दिया. आगे हाथ ले जाकर उसकी चूचियों को दबाने लगा. अभी भी भाभी सो रही थी या फिर हो सकता है कि सोने का नाटक कर रही थी. मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था और भाभी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होते देख मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी.

मैं डरते हुए ही उनके चूचे दबा रहा था.
फिर भाभी एकदम से उठ कर बोली- करना है तो सही से कर ले. मैं मना कर रही हूं क्या?
मैं सुन कर हैरान हो गया लेकिन साथ ही खुश भी. मेरे मन की मुराद जैसे पूरी हो गई. मैंने भाभी की टी-शर्ट को निकाल कर उसको ऊपर से पूरी नंगी कर दिया.

उसके चूचों को मुंह में लेकर पीने लगा. उसके बाद मैंने भाभी की लोअर को भी निकाल दिया. उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. भाभी की चूत गीली हो चुकी थी. मैंने भाभी की चूत में उंगली डाल दी. अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा और अब भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.

काफी देर तक मैं सुलु भाभी की चूत में उंगली करता रहा और उसकी चूत ने एकदम से पानी छोड़ दिया और मेरा पूरा हाथ भाभी की चूत के रस में भीग गया. उसके बाद मैंने अपने कपड़े निकाल कर एक तरफ डाल दिये और नंगा होकर भाभी के बूब्स को पीने लगा. मेरा लंड तन कर फटने वाला था. भाभी की गीली चूत मेरे लंड पर टच हो रही थी. मेरा लंड चूत से लगने के बाद कहीं अंदर घुसना चाह रहा था.

अगर मैं चाहता तो भाभी की चूत में उसी वक्त लंड को डाल देता लेकिन अभी मैं भाभी के जिस्म के और मजे लेना चाह रहा था. मैंने उठ कर भाभी को बैठने के लिए कहा. मेरे कहने पर भाभी बैठ गई. उसके बैठने के बाद मैंने देखा कि उसके चूचे एकदम से टाइट होकर नुकीले हो चुके थे.

भाभी के तने हुए चूचों को दबाते हुए मैंने उनको फिर से मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा. भाभी तेज सिसकारियां लेते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी. अब मेरा लंड बुरी तरह से तड़पने लगा. मैंने भाभी के मुंह के पास लंड को कर दिया और चूसने के लिए कहा. मगर भाभी ने मना कर दिया.

बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद सुलु भाभी ने मेरे लंड के टोपे को मुंह में लिया और चूसने लगी. इतना लम्बा लंड भाभी के मुंह में आधा ही आ रहा था. मैंने एक धक्का देकर भाभी के गले तक लंड को उतार दिया. भाभी की सांस रुकने लगी और वो मुझे पीछे धकेलने लगी.

भाभी की हालत देख कर मैंने वापस से लंड को आधा बाहर निकाल लिया और भाभी अब मजे लेकर मेरे लंड को चूसने लगी. दस मिनट तक मैं भाभी को लंड चुसवाने का मजा लेता रहा. फिर एकदम से मेरा कंट्रोल छूट गया और मैंने भाभी के मुंह को अपने माल से भर दिया.

उसके बाद मैंने उसको वापस लिटा दिया और उसकी चूत में जीभ देकर तेजी से अंदर बाहर करने लगा. भाभी तड़पने लगी. मेरी जीभ पूरी की पूरी भाभी की चूत में अंदर जाकर उसको मजा दे रही थी. भाभी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं और वो बार-बार अपनी टांगों को मेरी गर्दन पर लपेट रही थी.

फिर वो बोली- बस आदी … अब रहा नहीं जा रहा. मेरी चूत में अपना लम्बा और मोटा लंड घुसा दो.
अब तक मेरा लंड भी दोबारा से तनाव में आना शुरू हो गया था. मैंने फिर से भाभी के मुंह में लंड को दे दिया और 2 मिनट चुसवाने के बाद मेरा लंड पूरे जोश में आ गया.

अपना लन्ड भाभी की चूत पर सेट किया और धीरे से एक धक्का दिया तो मेरे लन्ड का सुपारा भाभी की चूत में चला गया जिससे भाभी को दर्द होने लगा.
भाभी बोली- आदी धीरे करो, तुम्हारे भाई का लन्ड छोटा और पतला है. तुम्हारा लंड मेरी चूत को फाड़ देगा और तुम्हारे भाई को भी पता लग जायेगा कि मैं किसी मोटे लंड से चूत चुदवा रही हूं.

एक बार तो मैं रुका लेकिन फिर मुझसे रहा न गया. मैंने एक झटका और दिया तो मेरा लन्ड भाभी की चूत में आधा चला गया और भाभी के मुंह से चीख निकल गयी. मैं भाभी की आवाज को अंदर दबाने के लिए उसके होंठों को चूसने लगा. कुछ पल रुकने के बाद मैंने फिर से धक्का मारा तो मेरा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ अंदर समा गया.

दर्द के कारण सुलु भाभी की आंखों से आंसू निकल आये. चूत में लंड को फंसा कर मैंने भाभी को चूमना शुरू कर दिया. जब भाभी नॉर्मल हो गई तो मैंने चूत में धक्के लगाना शुरू किया. कुछ ही देर के बाद भाभी का दर्द मजे में बदल गया. अब वो अपनी गांड को हिला-हिलाकर मेरे लंड से चुदने लगी. उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आदी चोदो मुझे और जोर से चोदो।

इस तरह करीब 20 मिनट तक मैं भाभी की चोदाई करता रहा. इस बीच भाभी 2 बार झड़ गयी और मैंने भी अपना माल भाभी भी की चूत में ही गिरा दिया. मैं बुरी तरह थक गया था. मैं भाभी के ऊपर लेट कर ही सो गया. शाम को 6 बजे नींद खुली तो मैंने देखा कि मैं भाभी के बेड पर नंगा ही सोया हुआ था और भाभी भी कमरे में नहीं थी।

उठ कर मैंने कपड़े पहने और फ्रेश होकर हॉल में गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर के बाद भाभी चाय लेकर आ गई. वो शर्म के मारे नजर भी नहीं मिला पा रही थी. उसके कुछ देर के बाद मम्मी और पापा भी आ गये. फिर अगले दिन भैया भी आ गये.

इस दौरान हम देवर-भाभी के बीच में कुछ नहीं हो पाया. फिर पंद्रह दिन के बाद भाभी अपने मायके चली गयी. उसके कई महीनों के बाद मुझे भाभी की चूत की चोदाई का मौका मिला. मेरे लंड से खुश होकर भाभी ने अपनी छोटी बहन की चूत भी मुझसे चुदवाई. वह कहानी मैं आपको अगली बार बताऊंगा.

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मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं। यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें।

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.
अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.

कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!
मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?
वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.
फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.
वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.
वो बोला- जी. ठीक है.
कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?
वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.
मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.
फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.
वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.

अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.
वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.
मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.
वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?
वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.
मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.

आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.
मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.
वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.
मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.
वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.
मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.

उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.
उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.

उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.
वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.
मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

दोस्तो, ये थी मेरी अपनी रियल सेक्स स्टोरी. आपको यह सेक्सी लड़की की चुदाई स्टोरी पढ़ने में मजा आया होगा. मुझे जरूर बतायें. अगर आप लोगों ने सही रेस्पोन्स दिया तो मैं आगे भी आप लोगों के लिए अपनी आपबीती लेकर आती रहूंगी.

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मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी

मेरा नाम ममता है और मैं एक 37 वर्षीय शादीशुदा महिला हूँ. मैं गुरुग्राम में टीचर के तौर पर कार्य करती हूं. मेरी लम्बाई 5 फीट 5 इंच है और शरीर भरा हुआ है. मेरी फीगर 36-34-40 की है. मेरी गांड बहुत भारी है क्योंकि मेरे पति ने मेरी चूत से ज्यादा मेरी गांड बजाई है.

मेरे पति को गांड मारने का इतना शौक है कि उसने अपने ऑफिस की कई महिलाओं की गांड चुदाई कर रखी है. ये बात मुझे तब पता लगी जब एक दिन हमारा बहुत बुरा झगड़ा हो गया था. उसके बाद हमारे रिश्ते में बहुत ज्यादा खराबी आ गयी.

अब मैं काफी परेशान रहने लगी थी. अपनी ड्यूटी के दौरान भी उदास ही रहती थी. अपने काम को भी मैं ठीक से नहीं कर पा रही थी. अभी दो महीने पहले ही हमारे स्कूल में एक नया अध्यापक ट्रांसफर होकर आया था.

उसका नाम है मनोहर। वो स्कूल में अर्थशास्त्र के टीचर हैं. उनकी उम्र 29 साल और हाइट 5.5 फीट है मगर शरीर एकदम सुडौल और बनावट एकदम कसरती है. वो जितना आकर्षक दिखते हैं उतना ही सुन्दर पढ़ाते भी हैं.

धीरे धीरे मेरी उनसे ऑफिशियल कामों को लेकर बात होने लगी. कुछ ही समय के अंदर हम दोनों में दोस्ती हो गयी और धीरे धीरे हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गये. उसका एक कारण यह भी था कि वो अपने परिवार से दूर यहां पर अकेले रहते थे.

एक बार उन्होंने शाम में मुझे मिलने के लिए पूछा. मैंने अपने हस्बैंड का बहाना लेकर मिलने से मना कर दिया. अगले दिन फिर उन्होंने बातों ही बातों में कह दिया कि ममता तुम मुझे बहुत सुन्दर लगती हो. मैं आपको सिर्फ अपनी एक अच्छी दोस्त के नाते ही कॉफी पर बुला रहा था.

अपनी मजूबरी पर मेरा गला भर आया और आंखों में आंसू लिये मैं बोली- मनोहर, मेरे पति मुझ पर बहुत शक करते हैं. हमारे बीच के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे हैं, न तो शारीरिक तौर पर और न ही पारिवारिक तौर पर. हम पति पत्नी के झगड़े का असर अब हमारे बच्चों पर भी पड़ने लगा है.

उन्होंने बड़े अपनेपन से मुझसे पूरी बात पूछी तो मैंने अपनी पति के नाजायज़ संबंधों और मेरे साथ उनके द्वारा की जाने वाली मेरी मार-पिटाई के बारे में बताया. मनोहर ने मुझे सांत्वना देते हुए कहा कि अगर मैं इस अत्याचार के खिलाफ कुछ कदम उठाना चाहती हूँ तो वो मेरा साथ देने के लिए तैयार हैं.

उसके हिम्मत देने के बाद मार्च के महीने में एग्जाम के टाइम मैंने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा दिया जिसके बदले में मेरे पति मनीष ने मुझे घर से निकाल दिया. उस दिन मैं बहुत रो रही थी. पूरे स्कूल के स्टाफ में मेरे ही बारे में चर्चा हो रही थी.

मनोहर ने मुझे स्कूल टाइम के बाद अपने साथ में चलने के लिए कहा. मेरे मना करने के बाद भी वो जोर देकर मुझे अपने घर ले गया. मैं सोच रही थी कि शायद ये मेरी मजबूरी का फायदा उठाने की सोच रहा है. मगर मुझे उसकी इन्सानियत का पता तब लगा जब उसने मुझे अपने हाथ से खाना बना कर खिलाया.

उसके घर में एक ही बेड था. उसने मुझे बेड पर सोने के लिए कहा और खुद ज़मीन पर सो गया. उस दिन मुझे अपने पति मनीष और मनोहर के व्यक्तित्व का अंतर मालूम चला. मैंने पाया कि मनोहर एक अच्छा दोस्त ही नहीं बल्कि एक अच्छा इन्सान भी है.

ऐसे ही एक सप्ताह गुजर गया. मेरे पति मनीष ने इस एक हफ्ते के दौरान न तो मुझे कभी फोन किया और न ही मेरे स्कूल में आकर मुझसे मिलने की ही कोशिश की. अब कुछ दिन मैंने और इंतजार किया. फिर मुझे अपने बच्चों की फिक्र होने लगी.

मनोहर मुझे मेरे बच्चों से मिलवाने के लिए उनके स्कूल में ही ले गया. वहां मेरे बच्चों ने मुझे बताया कि पापा आपके नहीं होने के बाद से एक दूसरी आंटी को घर में बुला रहे हैं. वो आंटी पापा के साथ ही सोती है.

बच्चों के मुंह से ये बातें सुन कर मेरा दिमाग खराब हो गया. मैंने उसी क्षण निर्णय ले लिया कि अब मैं भी किसी की परवाह नहीं करूंगी. मनोहर और मैं उसके बाद घर आ गये.

उस शाम को मैंने मनोहर से कहा कि आज का खाना मैं बना दूंगी.
मनोहर मान गया. हमने खाना बनाया और दोनों ने साथ में खाया और फिर बैठ कर बातें करने लगे. फिर वो बर्तन उठा कर धोने के लिए चला गया.

जब वो बर्तन धोकर वापस आ गया तो मैंने पूछा- तुम शादी क्यों नहीं कर लेते मनोहर?
वो हंसते हुए बोला- अगर मैं शादी करूंगा तो मेरा हाल भी तुम्हारे जैसा ही हो जायेगा. जिस तरह से पति के होते हुए भी फिलहाल मैं तुम्हें संभाल रहा हूं वैसे ही शादी के बाद कोई दूसरी औरत फिर मुझे भी ऐसे ही संभाल रही होती.

उसकी इस बात पर हम दोनों हँस दिये. कुछ देर बैठ कर बातें करने के दौरान दोनों में हँसी मजाक काफी हुआ. फिर हम सोने की तैयारी करने लगे.
मैंने मनोहर से कहा- आओ, तुम भी बेड पर ही सो जाओ.

मनोहर ने मेरे पास सोने से मना कर दिया. वो कहने लगा कि औरत और मर्द के बीच में थोड़ी सी दूरी ही रहे तो अच्छा होता है.
मैंने कहा- अब तो दूरियां खत्म हो जानी चाहिएं. जो भी होगा वह हम दोनों की इच्छा से ही होगा. मैं तुम्हें जबरदस्ती अपने साथ सोने के लिए नहीं कह रही हूं. मगर चूंकि मैं एक औरत हूं और मेरी वजह से तुम्हें जमीन पर सोना पड़े, ये मुझे अच्छा नहीं लगता.

मेरे कहने पर मनोहर मान गया. उस दिन के बाद से मनोहर और मैं साथ में एक ही बेड पर सोने लगे. मगर पहल दोनों में से किसी की ओर से नहीं हो रही थी. कुछ दिन ऐसे ही बीत गये.

एक दिन मुझे लेटे लेटे नींद नहीं आ रही थी. मैं करवट बदल कर लेटी तो देखा कि मनोहर का लंड तना हुआ था. उसकी लोअर को उसके लंड ने ऊपर उठा रखा था. फिर उसने भी करवट बदल ली.

मेरे अंदर बेचैनी सी हो गयी थी. मैं मनोहर को काफी दिन पहले से ही पसंद करती थी. कुछ पल के बाद उसने फिर से करवट ली और उसका लंड वैसा का वैसा तना हुआ था. बार बार उसकी लोअर को ऊपर उछाल रहा था.

मनोहर को बार बार करवटें बदलता हुआ देख कर मैं बोली- क्या हुआ मनोहर?
उसने मेरी ओर देखा और फिर अपने तने हुए लंड की ओर देखा तो उसकी आंखें शर्म से नीचे हो गयीं.
आगे से पहल करते हुए मैंने पूछा- तुम्हें मेरे साथ लेट कर मेरे लिए कुछ फील हो रहा है क्या?

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. बस लेटा रहा.
मैं बोली- देखो मनोहर, मैं एक साइंस टीचर हूं. मैं अच्छी तरह जानती हूं कि जब मर्द और औरत के जिस्मों के बीच में इतना कम फासला हो तो इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक है.

मनोहर बोला- ममता, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. आपको देखकर मुझे अपनी माशूका की याद आ गयी.
मैंने कहा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी थी? तुमने कभी बताया भी नहीं मुझे.

वो बोला- कभी इस विषय पर बात करने का माहौल ही नहीं बना.
मैंने कहा- अब तो माहौल भी है. अब तो बता दो अपनी प्रेम कहानी?
फिर मनोहर ने अपनी सारी स्टोरी मुझे बताई कि कैसे उसको एक लड़की से प्यार था, जिसका नाम भूमि था और दो साल पहले उनका ब्रेक अप हो गया. उसके बाद से उसकी जिन्दगी में कोई लड़की नहीं आई और उसने किसी दूसरी लड़की को अपने करीब आने भी नहीं दिया.

मैं उसके साफ दिल प्यार से बहुत प्रभावित हुई और मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया.
मैं बोली- कोई बात नहीं, जो हुआ उसको याद करके अब कोई फायदा नहीं है. मैं ही तुम्हारे लिये तुम्हारी भूमि बन जाती हूं.

उसके बाद हम दोनों अलग हो गये और सोने लगे. अगली सुबह हम उठे और तैयार होकर स्कूल जाने लगे. फिर दिन भर स्कूल में काम रहा.
छुट्टी के समय उसके निकलने से पहले मैंने उसको कहा- घर आते हुए एक मेडिकल स्टोर से कॉन्डम का एक पैकेट ले आना.

वो मेरी ओर देख कर मुस्कराने लगा. उसके बाद मैं आ गयी और कुछ देर के बाद मनोहर भी आ गया. हम दोनों ने खाना खाया और फिर बिस्तर पर लेट कर बातें करने लगे.

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तो भूमि के साथ तुम क्या क्या करते थे?
वो बोला- क्या मतलब?
मैंने कहा- ज्यादा बनो मत. तुम जानते हो कि मैं सेक्स के बारे में पूछ रही हूं.

वो बोला- पहले तो भूमि अपने चूचे पिलाती थी और फिर चूत भी चुसवाती थी. उसके बाद वो मेरा हथियार अपनी चूत में लगा कर अंदर ले लेती और चुदवाती थी. आगे से चुदवाने के बाद फिर पीछे भी लेती थी. तब जाकर उसको और मुझे शांति मिलती थी.

मन ही मन मैं खुश हो गयी कि चोदू किस्म का जवान लौंडा फंस गया है. इसके साथ तो मैं भी फिर से जवान हो जाऊंगी. मैंने देखा कि उसका लंड उसकी लोअर में फनफना रहा था.

मैंने मनोहर के सीने पर अपने कोमल हाथ से फिराते हुए कहा- तुम्हें मेरी चूचियां कैसी लगती हैं?
वो बोला- मैं तो पहले दिन से ही आपको पसंद करता हूं लेकिन फिर पता चला कि आप शादीशुदा हैं इसलिए कभी कुछ कहा नहीं.

उसकी छाती के निप्पलों को छेड़ते हुए मैंने कहा- अब तो मेरे पति भी मुझसे कोसों दूर जा चुके हैं, अब किसलिए इतनी दूरी बना रखी है.
उसने मेरी चूचियों को छेड़ कर कहा- दूरी कहां है, पास में ही तो हूं.

इतना बोल कर हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और दोनों के होंठ मिल गये. दोनों एक दूसरे के होंठों के रस को एक दूसरे के मुंह से खींचने लगे. उसका लंड मेरी जांघों में चुभ रहा था. उसने मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए अपनी टांग मुझे पर चढ़ा ली थी. मैं भी उसके जिस्म से लिपटने लगी थी.

जल्दी ही दोनों गर्म हो गये और उठ कर मैंने अपनी मैक्सी और ब्रा को नीचे कर लिया. मनोहर के सामने मेरी चूची नंगी हो गयी. मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी नंगी चूचियों पर रखवा दिया और उसने मेरी दोनों चूचियों को दबा कर देखा. उसको मेरी चूची काफी मस्त लगीं और वो उनको मुंह लगा कर पीने लगा.

मनोहर को मैं भी पसंद करती थी इसलिए जब उसके होंठ मेरी चूचियों को चूस रहे थे तो मुझे भी उस पर बेपनाह प्यार आ रहा था. मैं मदहोश होकर उसके बालों में हाथ फिरा रही थी. उससे चूचियां चुसवाते हुए ऐसा लगने लगा था कि मेरी जवानी फिर से जवान हो रही है.

फिर मनोहर ने अपने सारे कपड़े निकाल दिये और मेरे बदन से लिपटने लगा. उसके बदन पर केवल एक अंडरवियर था और मेरे बदन पर मेरी चूत पर पहनी हुई मेरी पैंटी. मनोहर मेरी पैंटी को ऊपर से ही मसलने लगा था. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. मैं भी उसके लौड़े को ऊपर से ही सहला रही थी.

फिर उसने मुझे प्यार से नीचे लिटा लिया और हल्के हल्के चुम्बन देने लगा. पहले मेरे गालों पर, फिर गर्दन पर, फिर चूचियों पर, फिर पेट से होता हुआ नाभि पर और फिर मेरी पैंटी की इलास्टिक तक पहुंच गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने काफी समय से अपनी सेक्स की भूख को दबा कर रखा हुआ था.

फिर उसने मेरी पैंटी को किस करना शुरू कर दिया. मैं मस्त होने लगी. शायद मनोहर मेरी चूत को चाटना चाह रहा था. उसने मेरी पैंटी को खींच कर निकाल दिया. जैसे ही उसने पैंटी उतारी तो मेरी चूत नहीं दिखी बल्कि पैंटी के नीचे बालों का एक घोंसला उसको दिखा.

वो थोड़ा निराश हो गया.
वो बोला- बाल बहुत ज्यादा बढ़ गये हैं आपकी चूत पर. इसकी सफाई करनी पड़ेगी.
उसके बाद उठ कर वो अपना ट्रिमर ले आया और मेरी चूत की सफाई करने लगा.

दो मिनट में ही उसने मेरी चूत को साफ कर दिया.
मैं बोली- ये मेरी चूत के पहरेदार सैनिक थे. अब मेरी चूत सुरक्षित नहीं रही. इस पर हमला हो सकता है.
उसने कहा- अब सैनिक मारे गये हैं. अब इस रानी को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.

उसने मेरी चूत को धोया और फिर कपड़े से पौंछ कर मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को जोर जोर से जीभ देकर चाटने लगा.

मैं दो मिनट में ही पगला गयी. मेरी चूत तपने लगी. मनोहर अभी भी मेरी चूत को तेज तेज जीभ चलाते हुए चूस-चाट रहा था.

फिर उसने मेरी चूत में उंगली दे दी और मेरी चूत में उंगली करने लगा. वो तेजी से उंगली चलाने लगा. उसके बाद फिर से मेरी चूत में जीभ देकर चोदने लगा.

अब मुझसे भी बर्दाश्त न हुआ और मैं भी उठ कर उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी और उसके होंठों को चूसने लगी. मैंने उसे लिटा लिया और उसकी टांगों की ओर मुंह करके लेट गयी. मेरी चूत उसके मुंह पर जा लगी और मैंने उसके लंड को मुंह में भर लिया.

दोनों 69 की पोजीशन में हो गये और एक दूसरे को चूसने और चाटने लगे. उसका लंड चूसते हुए अब चूत चुसवाने में और ज्यादा मजा आने लगा मुझे. मनोहर भी पूरा मदहोश हो रहा था.
दस मिनट में उसने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया और मैं झड़ गयी. मेरा सारा शरीर ढीला पड़ गया.

मनोहर ने मुझे उठाया और कहा- बाथरूम में जाकर चूत को साफ कर लो.
जब मैं अपनी चूत को धोकर वापस आई तो मनोहर अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ा कर बैठा हुआ था.

मैं आकर बेड पर लेट गयी.
मनोहर ने मेरी टांगें फैला दीं और उनके बीच में बैठ गया. वो मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

मनोहर का लंड 6 इंच लम्बा और करीब करीब ढाई इंच मोटा था. मनोहर मेरे कंधों के पास हाथ रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मैं अपने हाथ में उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी और मनोहर मेरे होंठों को चूम रहा था.

अब मैंने मनोहर का लंड अपनी चूत में डाल लिया और एक झटके में ही सारा लंड अंदर चला गया और मनोहर जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा. दो मिनट बाद हमने पोजीशन बदल ली और अब मैं मनोहर के ऊपर बैठ कर लंड की सवारी कर रही थी.

मनोहर अपने हाथों में भर कर मेरे बड़े बड़े चूचे दबा रहा था और बीच बीच में मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. एक जवान मर्द से चुदाई करवा कर मुझे बहुत मजा आ रहा था. अपने पति के साथ मुझे सेक्स में इतना मजा कभी नहीं आया.

पांच मिनट के बाद हमने फिर से पोजीशन बदल ली. इस बार मनोहर ने मुझे उठाया और हम दोनों एक दूसरे की ओर मुंह करके बेड से नीचे जमीन पर खड़े हो गये. मनोहर ने मुझसे एक पैर बेड पर रखने के लिए कहा जिससे कि वो मेरी चूत में लंड डाल सके.

मैंने ऐसा ही किया और मनोहर ने मेरी चूत में फिर से अपना लंड पेल दिया. वो मुझे खड़ी खड़ी चोदने लगा.

मैंने भी उसकी पीठ को नोंचना खरोंचना शुरू कर दिया. मेरी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपकी हुई थीं और वो मेरी गांड को भींच भींच कर मेरी चूत में लंड को अंदर तक ठोक रहा था. हर ठोक के साथ मेरे मुंह से आह्ह-आहह् की आवाजें आ रही थी. लंड की ठुकाई से होने वाले उस दर्द में बहुत मजा मिला रहा था मुझे.

चार-पांच मिनट के बाद मनोहर ने मुझे कुतिया बनने को कहा और पीछे से मेरी चूत में लंड पेलने लगा. पांच सात मिनट तक मेरी चूत में जबरदस्त तरीके से झटके लगते रहे. उसके बाद एक बार फिर से मेरा पानी निकल गया. मगर मनोहर का लंड अभी भी वैसे ही खड़ा हुआ था.

मनोहर ने मुझसे कहा- ममता यार, किसी तरह तुम भी मेरा पानी निकालो.
मैं बोली- हाथ से हिला कर निकाल देती हूं.
वो बोला- नहीं, मैं तुम्हारी गांड में निकालना चाहता हूं. अपनी गांड चोदने दो मुझे.

मैं गांड चुदवाने के लिए तैयार हो गयी. मैं फिर से कुतिया बन गयी. मनोहर ने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और मैंने अपने हाथों से दोनों चूतड़ फैला दिये. फिर मनोहर ने अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया.

अपने पति से मैं अपनी गांड पहले भी काफी बार चुदवा चुकी थी. मगर मनोहर का लंड मेरे पति से मोटा था. उसका लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयी. मगर मैं दर्द को बर्दाश्त कर गयी. मनोहर मेरी चूचियों को दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी गांड में लंड चलाने लगा.

दो मिनट के अंदर ही मुझे मजा आने लगा और फिर जैसे ही उसने स्पीड पकड़ी तो उसके लंड से निकल रहे कामरस से मेरी गांड भी चिकनी हो गयी और क्रीम की चिकनाहट के साथ मिलने से गांड पच-पच की आवाज करने लगी.

मनोहर बोला- मुझे ये आवाज बहुत अच्छी लगती है. जब मैं अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई करता था तो ऐसे ही आवाजें आती थी. भूमि को भी मेरे लंड से चुद कर बहुत मजा आता था.
उसके बाद मनोहर तेजी से धक्के मारने लगा और दो मिनट के बाद उसने तीन चार जोरदार झटकों के साथ अपना माल मेरी गांड में कॉन्डम के अंदर छोड़ दिया.

जब लंड बाहर निकाला तो कॉन्डम में काफी सारा माल भरा हुआ था. उसके माल की इतनी मात्रा देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर ये मेरी चूत में छूट जाता तो मुझे गर्भवती बना देता और मैं मनोहर के बच्चे की मां बन जाती.

हम दोनों पूरी तरह से थक गये थे और लेट गये. उसके बाद हमने सुबह सुबह उठ कर एक बार फिर से चुदाई की. सुबह की चुदाई करने के बाद मूड बहुत ही फ्रेश हो गया. बहुत दिनों के बाद मुझे इतना फ्रेश और हल्का फील हो रहा था.

इस तरह मनोहर के साथ मेरी चुदाई का सीन अभी तक चल रहा है. अब हम दोनों सोच रहे हैं कि एक साथ कानूनी रूप से लिविंग रिलेशन में रहना शुरू कर दें.

मैं इंतजार कर रही हूं कि जैसे ही मेरे पति के साथ मेरे तलाक का फैसला आ जायेगा, मैं उसी दिन से मनोहर के साथ खुले रूप से रहना शुरू कर दूंगी.

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मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी

ये बात तब की है, जब मैं 19 साल का था और बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, हमारे स्कूल में एक शिक्षिका हुआ करती थीं. जिनका नाम था ज्योत्सना.

दोस्तो, पहले मैं आपको मैडम के फिगर के बारे में बता देता हूँ. मैडम का फिगर 34-30-36 का था … वो बड़े गजब की माल लगती थीं. उनके बड़े ही तीखे नैन नक्श और मदमस्त जिस्म को देख कर उन्हें काम की मूर्ति कहा जा सकता था.

जब वो चलती थीं, तो उनके छत्तीस इंच के चूतड़ ऐसे मटकते थे कि बस ज़ोर से पकड़ कर मसल ही डालो सालों को … और अपना खड़ा लंड सीधा बिना झटके के अन्दर उतार दो.

दूसरी तरफ मैडम भी कुछ कम नहीं थीं. उन्हें स्कूल के लड़कों के इन इरादों का अच्छे से पता था, तभी वो जानबूझकर लड़कों को देखते ही अपनी चाल बदल देती थीं. उनकी चाल देख कर ही लौंडे समझ जाते थे कि मैडम जानबूझ कर गांड हिला रही हैं.
मगर प्रिंसीपल सर के डर के कारण कोई भी उनसे कुछ नहीं कह पाता था.

प्रिंसीपल सर का डर क्यों था ये आपको इस सेक्स कहानी में आगे पता चल जाएगा.

वो जब काले रंग के सूट में स्कूल आती थीं, तो मन करता था कि उसी वक़्त पकड़ कर मैडम को चोद दूं. … पर कर नहीं पाया. फिर कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ ओता चला गया. मुझे मालूम ही नहीं था मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

गर्मियों का मौसम था, स्कूल की छुट्टी हुई ही थी. सारे टीचर अपना अपना बैग आदि समेट करके अपने घरों को जाने के लिए तैयार हो रहे थे. उसी समय मुझे प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनाई दी. वो ज्योत्सना मैडम को अपने केबिन में बुला रहे थे.

दरअसल हमारा स्कूल इतना बड़ा नहीं था कि अगर प्रिंसीपल किसी को भी बुलाएं और हम तक आवाज़ ना पहुंचे. अभी मैंने कुछ दिनों से लगातार ध्यान दिया हुआ था कि जैसे ही स्कूल खत्म होता था, ज्योत्सना मैडम के लिए प्रिंसीपल सर का बुलावा आ जाता था.

उस दिन मैंने सोचा कि आज तो मामला क्या है … ये जानने के बाद ही घर जाऊंगा. कुछ कुछ उड़ती हुई बातें भी मुझे उनके कमरे में झाँकने के लिए मजबूर कर रही थीं.

चूंकि सर और मैडम की आशिकी के चर्चे मेरे स्कूल में दाखिला लेने से पहले से ही चले आ रहे थे. बस उस दिन मैंने मन बना लिया.

प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनते ही मैडम जी ने अपना पर्स उठाया और उनके चेंबर में चली गईं. मैंने शुरू में बाहर रह कर ही इंतजार करना ठीक समझा और इंतजार करने के लिए बाहर पड़ी बेंच पर बैठ गया. इस दौरान मेरे कान कमरे में से आने वाली हर आवाज पर लगे हुए थे, मगर अन्दर से एक सुई गिरने तक की आवाज नहीं आ रही थी.

मैडम को प्रिंसीपल सर के कमरे में गए हुए एक घण्टा होने को आया पर अब तक ना मैडम बाहर आई थीं और ना ही प्रिंसीपल सर.

मैंने अन्तर्वासना पर पहले भी ऐसी अनेक कहानियां पढ़ी हुई थीं … इसलिए मुझे समझते हुए ज़रा भी देर नहीं लगी कि अन्दर क्या चल रहा होगा.

थोड़ी देर और इंतजार करने के बाद मैंने अपनी कॉपी खोने की शिकायत लिखवाने का बहाना करके प्रिंसीपल के कमरे जाने का मन बना लिया और मैं उनके कमरे तक पहुंच भी गया, पर उधर ना ही प्रिंसीपल सर नज़र आए और ना ही मैडम नज़र आईं. मैं कमरा खाली देख कर भौंचक्का था. मुझे लगा कि शायद ये दोनों पीछे के रास्ते से निकल कर कहीं चले गए हैं और बाद में रूम में आ जाएंगे.

मगर उस दिन काफी देर हो चुकी थी तो मैं स्कूल से वापस आ गया, पर मैं इन बातों से इतना भी अंजान नहीं था कि मैं समझ ना सकूँ कि मैडम और सर कहां चले गए होंगे.

अगले दिन जब मैं स्कूल में ज्योत्सना मैडम से मिला, तो उस दिन के बाद से मैंने उन्हें घूर कर देखना शुरू कर दिया.

मैडम भी मेरे बदले बदले तेवर को समझ सकती थीं. चूंकि मैं स्कूल का प्रेसीडेंट था, जिस वजह से स्कूल की प्रार्थना से लेकर स्कूल के नोटिस आदि तक सभी के लिए प्रिंसीपल सर सीधे मेरा नाम ही सुनिश्चित करते थे.

ऐसे ही देखते देखते स्कूल का वार्षिक समारोह का दिन आ गया. पूरा स्कूल सज-धज कर तैयार था. सारे बच्चे, टीचर, उस दिन सभी सज-धज कर आए थे.
आप समझ ही सकते हैं कि मैं किसकी तरफ इशारा कर रहा हूँ.

ज्योत्सना मैडम ने लंबा सा गाउन डाला था, वो भी सुर्ख लाल रंग का, जिसमें से उनके चुचे लगभग बाहर को निकलने को हो रहे थे. मैंने कई बार नोटिस किया कि प्रिंसीपल सर और मैडम के बीच आज बात बिल्कुल भी नहीं हो रही थी.

मैंने कारण जानने के लिए मैडम को टटोलने की कोशिश की, पर मैडम ने अपना मुँह नहीं खोला. उनके इस बर्ताव से मेरा आश्चर्य सातवें आसमान पर था कि आज मैडम इतना मस्त माल लग रही थीं और प्रिंसीपल सर कुछ घास ही नहीं डाल रहे हैं.

मैंने सोचा अपने संयम पर काबू रखने में ही भलाई है. वक़्त आने पर अपने संयम का सही फायदा मिल कर रहेगा. बस ये सोच कर मैं प्रोग्राम की बाकी तैयारियों में लग गया.

उस दिन छह सात प्रोग्राम्स के बाद वार्षिकोत्सव समाप्ति की ओर चला ही था और प्रिंसीपल सर उठ कर चले गए थे. तभी मेरे मन में एक उपाए सूझा. मैंने बाहर जाकर देखा तो पाया कि प्रिंसीपल सर प्रोग्राम को खत्म करने के बाद के कामों में लगे हुए थे और उनको अभी एक घंटा लग सकता था.

ये देख कर मेरे दिमाग में एक खतरनाक आईडिया आ गया. मैंने अपने एक साथी को ये कह कर मैडम के पास भेज दिया कि प्रिंसीपल सर ने आपको अपने ऑफिस में बुलाया है, उन्हें आपसे कुछ जरूरी काम है.

जितनी देर में मेरा साथी मैडम को ये बात बताता … उतनी देर में मैं प्रिंसीपल सर के ऑफिस में चला गया और कमरे की लाइट्स ऑफ करके मैं दरवाजे के पीछे छिप गया.

दो मिनट ही बीते होंगे कि मैंने किसी के आने की आहट सुनी. कुछ ही पलों में ज्योत्सना मैडम ऑफिस के अन्दर आ चुकी थीं. जैसे वो अन्दर आईं, मैंने झट से दरवाजा बंद करके उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने में लग गया.

मैडम की आवाज़ आई- सर, आज सारा कुछ यहीं कर लेंगे … या उसी वाले कमरे में चलेंगे.

किसी दूसरे कमरे का नाम सुन कर मेरा दिमाग़ ठनका और मुझे समझ में आ गया कि उस दिन जब मैं शिकायत के बहाने से आया था, तब मुझे इस ऑफिस में कोई क्यों नहीं मिला था.

मैडम ने दुबारा आवाज़ लगाई- सर अंदर वाले कमरे में चलो न.

मैंने ये सुनते ही मैडम को आगे की तरफ़ टेबल पर झुका कर उनकी ड्रेस ऊपर करके अपना लंड उनके चूतड़ों की दरार के बीच के छेद पर लगा दिया. जब तक वो कुछ सोच पातीं, इतनी देर में मेरा आधा लंड टीचर की गांड के अन्दर प्रवेश कर चुका था.

वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी थीं और कह रही थीं- आह सर आपको ये शौक कब चढ़ गया … कल तक तो आप बस चुत मार कर ही शांत हो जाते थे … आह आज शुरुआत ही इतनी ख़तरनाक है … क्या इरादे हैं आज हमारे प्रिंसीपल सर के..!

मैडम की बातें सुनकर मुझे मजा आने लगा था और मेरा जोश बढ़ भी रहा था. मैंने मैडम की गांड मारना चालू रखा और पन्द्रह मिनट की धक्कम पेलाई में मैंने मैडम की गांड में ही अपना वीर्य डाल दिया. जैसे ही मैं थोड़ा पीछे को हुआ, मैडम ने घूम कर मेरी ओर रूख़ कर लिया और वो मुझे देख कर सन्न रह गईं. मैं उनके सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए दुबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा था.

तभी मैडम ने मुझ पर चिल्ला कर कहा- अरे राज … ये क्या कर रहे हो तुम … और तुम अन्दर कब आए?
मैंने उन्हें सारा सीन समझाया और कहा- मैडम देखो … मुझे आपके साथ वही सब कुछ करना है, जो आप प्रिंसीपल सर के साथ हर रोज करती हो. अगर आप राजी राजी करोगी, तो आपके लिए सही है. नहीं तो स्कूल इतना बड़ा भी नहीं है कि आपके कारनामे किसी से छिपे रह जाएं. बात फ़ैल जायेगी तो आपकी ही ज्यादा बदनामी होगी.

इतना कहते ही मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसको मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगीं.
वो कहने लगीं- मैं तो कब से तुझसे चुदना चाह रही थी. तू ही गंडफट था तो मैं क्या करती. तूने कभी मुझे दाना ही नहीं डाला.

मुझे समझ आ गया कि मैडम मस्त हो गई हैं और फिर से मजा देंगी. अब मैंने मैडम के दूध मसलने शुरू कर दिए.

मैडम बोलीं- यार राज, मेरा गाउन खराब हो जाएगा. इस पर सिलवटें पड़ जायेंगी.
मैंने कहा- तो गाउन को उतार दो ना मैडम … आपके पक्के आशिक को आज पूरी नंगी मैडम चोदने का मन है.

मैडम ने गाउन उतार दिया और ब्रा पैंटी में आ गई’. मैंने अगले ही पल उनकी ब्रा पैंटी भी हटा दी और कमरे में एक छोटी लाईट जला दी. मैडम इतना चुदने के बाद अब भी मस्त माल थीं. मैं उनके एक दूध को चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.

मैडम बोलीं- मुझे लंड ठीक से चूसने दे.
मैंने उनके दूध छोड़े और लंड से उनके मुँह को चोदना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में मैंने दुबारा अपना सारा माल मैडम के मुँह में डाल दिया.

इसके बाद मैंने मैडम को टेबल के ऊपर बिठाया और उनकी चूत चाटने लगा. दस मिनट के अन्दर ही उनकी चूत चुदने को तैयार थी.

मैडम ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थीं- राज आह … अब तो अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. मेरी चूत पानी छोड़ रही है लंड हड़पने के लिए. इसका पेट भर दो अपने गर्म लंड से.

पर मैं आज उनको तड़पा तड़पा कर मजा देना चाहता था. सो मैंने उन्हें ऐसे कुछ मिनट और तड़पाया. फिर अपना सात इंच का लंड उनकी चूत में एक बार में ही उतार दिया.

मैडम की गीली चूत चौड़ी हो गयी और मजे के कारण उनकी आह निकल गई और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

टीचर मैडम के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थी. मैडम प्रिंसीपल को भी गालियाँ निकाल रही थी. कह रही थी – मादरचोद कुत्ता साला … रोज मुझे चुदाई के लिए दफ्तर में बुला लेता है. पर उससे होता जाता कुछ नहीं! दो मिनट पुच पुच करके झड़ जाता है. मुझे तो नौकरी करनी है तो मजबूरी में उसके नीचे लेटना पड़ता है. नहीं तो ऐसे चूहे को तो मैं अपना मूत भी ना पिलाऊँ.

लगभग बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा. फिर उन्होंने मुझे होठों पर किस किया और चुदाई के लिए थैंक्स कहा.
मैडम ने कहा- आज गांड और चूत मरवा कर मजा आ गया.

वो कहने लगीं- अब आज से साले प्रिंसीपल की माँ की चुत … आज के बाद मुझे जब भी मेरी चूत लंड मांगेगी, मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी.

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मेरी सील टूट चुकी थी

हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

वो रास्ते में बोला- यार, मेरा मन शांत नहीं हुआ.
उसकी बात सुनकर मुझे भी चुदास भरने लगी. मैंने फिर भी उससे कहा- क्यों … मजा नहीं आया क्या?
वो बोला- पानी भर तो निकला है, ऐसा तो मैं मुठ मार कर भी निकाल लेता हूँ.
मैंने कहा- तो फिर क्या चाहते हो?
वो बोला- चलो एक दोस्त के फ्लैट में चलते हैं.
मैंने कहा- कोई परेशानी तो नहीं होगी न?
वो बोला- मैं पहले उससे बात कर लेता हूँ.
मैंने कहा- उसको फ्लैट से जाने की कह देना … तभी ठीक रहेगा.
उसने कहा- ठीक है.

उसने फोन पर अपने दोस्त से बात की, दोस्त ने हामी भर दी और वो बोला कि आ जा … मैं कुछ देर में वैसे भी जाने वाला हूँ.
अब मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझसे पूछा- अब तो ठीक है?
मैंने मुस्कुरा कर हां कर दी. हम दोनों उसके फ्लैट की तरफ चल दिया.

उसके फ्लैट में पहुँच कर उसके दोस्त ने पानी वगैरह दिया और बोला- यार, मुझे जाना है. तू ये चाभी ले ले और बंद करके बाहर एक जगह छिपा कर रख देना.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने उसको हां कहा और उसका दोस्त फ्लैट से चला गया.

दोस्त के जाते ही उसने फ्लैट का दरवाजा बंद किया और मुझे पकड़ कर मेरी चूची मसलने लगा. अब मैं भी बिंदास हो गई थी.

उसने मेरे कपड़ों को हाथ लगाया, तो मैंने उससे कहा- मैं उतार देती हूँ … मेरे पास यही ड्रेस है … तुम्हारी जल्दीबाजी में कहीं फट न जाए.
वो हंसने लगा और बोला- फटना तो है ही.
मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा- फटना मतलब … मैं उतार तो रही हूँ.
वो फिर हंसने लगा.

मैं समझ गई और उसकी छाती पर प्यार से मुक्का मारने लगी. मैंने कहा- उसको फड़वाने के लिए ही तो तेरे साथ आई हूँ. आई लव यू जान.
उसने भी मुझे अपनी बांहों में भरा और मेरे होंठ चूमते हुए मुझसे कहा- आई लव यू टू मेरी जान.
यह कह कर वो मेरे कपड़े उतारने लगा.

कुछ ही पलों में उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था. वो मेरी चूची को चूसने और चूमने लगा. मैं मस्त हो गई और उसके सर को अपनी छाती से दबाते हुए उसको अपना दूध पिलाने लगी.

वो मुझे चूमते चूमते बिस्तर पर ले आया और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया. मैं भी बेतहाशा चूम रही थी. उसका साथ मुझे बड़ा ही मस्त लग रहा था.

फिर वो मुझे चूमते चाटते हुए नीचे को होने लगा. उसने मेरी चूत को सहलाया और अपनी जीभ रखने लगा. मुझे उसकी जुबान का टच बहुत ही गर्म लगा और मैंने एकदम से सिहर उठी. वो मेरी चूत चाटने लगा.

तभी मुझे उसका लंड देखने मन किया. मैंने उसके लंड को हाथ लगाया और बोली- मुझे तुम्हारा देखना है.
वो बोला- क्या देखना है?
मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से मसला और कहा- इसको.
वो मुझे ठिठोली करने लगा- पैन्ट को क्या देखना है?
मैंने कहा- पैन्ट को नहीं, इसके अन्दर जो है, उसको देखना है.
वो बोला- पैन्ट के अन्दर तो चड्डी है. तुमको चड्डी देखना है?

मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

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