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मैं गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी

नमस्कार मैं 41 साल की औरत हूं मेरा नाम सुरभि है।  आज मैं आपको अपने सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं यह मेरी कहानी सच्ची कहानी है आज मैं इस कहानी में आपको यह बता रही हूँ  कि मेरा दामाद कैसे मुझे प्रेग्नेंट कर दिया मेरी बेटी तो प्रेग्नेंट है ही मैं भी 2 महीने की प्रेग्नेंट हूं। यह सब कब कैसे और क्यों हो गया वह मैं आपको सिलसिलेवार तरीके से कहानी के माध्यम से इस वेबसाइट पर लिख रही हूं ताकि मैं अपना मन हल्का कर सकूं।

मेरी बेटी आकांक्षा की शादी दिल्ली के एक अच्छे खानदान मैं हो गई। मेरे दामाद जी एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और बहुत बड़े पद पर हैं पैसे भी खूब  है उनके पास उनके माता-पिता उनके साथ नहीं रहते मेरे दामाद जी नोएडा में रहते हैं और उनके मम्मी-पापा दोनों दिल्ली में रहते हैं । उनकी एक बहन है वह विदेश में रहते हैं जो शादीशुदा है। वह अपने मम्मी पापा को 6 महीने के लिए अपने यहां बुला ली तो दामाद जी का  मन नहीं लगने लगा था शादी पिछले साल ही हुई थी और मेरी बिटिया आकांक्षा को भी मन था कि मैं कुछ दिन के लिए उसके पास जाकर रहूं मेरी बेटी भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है ।

तो मैं उन दोनों के आग्रह पर मैं बेटी दामाद  के पास ही चली गई। लखनऊ में सिर्फ आकांक्षा के पापा और मेरी छोटी बेटी नेहा रहने लगे मेरे पति भी बोले कि जाओ थोड़े दिन तक अपनी बेटी के साथ रहकर आओ तुम्हें अच्छा लगेगा मैं और नेहा दोनों यहां पर रह लेंगे कोई दिक्कत नहीं होगा। और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गई . दामाद जी मुझे स्टेशन पर लेने के लिए आए हैं बेटी भी साथ आए वह दोनों बहुत खुश हुए और फिर मैं नोएडा के लिए निकल गई जहां पर वह लोग रहते थे ।

समय बीतता गया हम तीनों ही एक-दूसरे से काफी घुलमिल गए थे दामाद जी बहुत अच्छे स्वभाव के थे तो हंसी मजाक करते थे।  उसके बाद मैं मेरी बेटी और मेरा  दामाद ऐसे रहने लगे, जैसे कि दोस्त हो, मुझे अपने दामाद का आदत बहुत अच्छा लगा।  कुछ दिनों के बाद मेरी बेटी आकांक्षा को ऑफिस काम के लिए बेंगलुरु जाना हुआ।  और जाना भी जरूरी था इसलिए मैं और दामाद जी उसको रुक भी नहीं पाए क्योंकि वह भी एक अच्छी कंपनी में काम करते हैं।  जब आकांक्षा चली गई तो हम दोनों को भी मन नहीं लगने लगा था मेरे दामाद जी भी काफी उदास रहने लगे थे और मैं भी उदास रहने लगी।

दोस्तों एक बात तो सही है रिश्ते चाहे कोई भी हो अगर दिल मिल रहा हूं दोस्तों के बीच कोई दीवार नहीं होता वही हाल हुआ मैं और दामाद जी ऐसे रहने लगे जैसे कि एक दूसरे का हमसफर हो  दोस्त हो।  धीरे-धीरे हम दोनों करीब आ गए 1 दिन में जब खाना बना रही थी तो पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रख।  वहां से शुरू हो गया हम दोनों की जिंदगी का पहला अध्याय।

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मैं किचन में रोटियां  बना रहे थे वह पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रखकर बात करने लगे मैं भी कुछ नहीं बोली मुझे उनका हाथ रखना अच्छा लगने लगा इससे मुझे लगा अपनेपन का एहसास तो मैं मना भी नहीं करी।  धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए मेरे सिर पर भी रख दिया फिर वह साइड से मुझे पकड़ दिए और रोटी में जो बेल रही थी उसको वह देखने लगे।

मैं सर झुका के रोटियां बेल रही थी।  तभी दामाद जी बोले कि मम्मी जी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो आप लगती ही नहीं हो कि मेरी मम्मी नहीं आप मेरी दोस्त की तरह लगती हो।  तो मैं भी बोल दे कि हां मैं दोस्त ही हूं तुम्हारी।  उसके बाद में बोली की  चलो खाना खा लेते हैं।   और हम दोनों खाना खाने के लिए बैठ गए।

इतना सब होने के बाद वह मुझे बार-बार घूर कर देख रहे थे कभी वह मेरी चूचियों की तरफ देखते तो कभी मेरी गांड की तरफ देखते कभी मेरे होंठ की तरफ देखते तो कभी मेरे पूरे बदन को निहारते , मैं सब समझ रही थी मैं समझ रही थी कि इनका मन कहीं और डोल रहा है।

पर उनका देखना मुझे भी अच्छा लगने लगा था मुझे लग रहा था आज कुछ होने वाला है क्योंकि मेरे मन में भी कुछ कुछ होने लगा था।

खाना खाकर मैं अपना कपड़े चेंज कि मैं नाइटी पहनी पर उस दिन ऐसा हुआ दोस्तों कि मैं अंदर कुछ नहीं पहनी थी मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि गर्मी ज्यादा थी इसलिए मुझे लगा कि आराम मिलेगा इसलिए मैं अंदर कुछ भी नहीं पहनी ना ब्रा न पेंटी।

मैं बेड पर लेट कर नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सेक्स कहानियां पढ़ने लगी थी।  एक हॉट कहानी  जो सास और दामाद की थी।  कहानी पढ़ते-पढ़ते लगा आज मेरे पास मौका है और अगर मुझे यह सुख मिल जाता है तो भी कोई बात नहीं।

असल में मेरे पति का उम्र भी हो गया था तो मेरी चुत ** कर नहीं पा रहे थे।  और मैं भी जवान थी तुम मुझे अभी लंड  चाहिए था।  पर मैं कहती कैसे कहानियां जैसे ही खत्म हुई थी मेरे कमरे में आ गए।  मैं जल्दी से अपने मोबाइल बंद की तुम मुझे देखकर कहने लगे कि मम्मी जी आज आप थकी लग रही हो।

तो मैं बोली हां सुबह से आज मैं काम कर रही थी इस वजह से थकान हो गया है।  तो मेरे दामाद से बेड पर बैठ गए और मेरे पैर को अपनी गोद में देखकर दबाने लगे मैं बोले नहीं नहीं ऐसा मत कीजिए आप मेरे पैर मत छुइए।  तो उन्होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं आपको तुम्हें पहले ही बोल चुका हूं कि आप मेरी दोस्त की तरह हो  तो आप भी बोले कि हां दोस्त मान सकते हो तो एक दोस्त दूसरे दोस्त की मदद क्यों नहीं करेगा।

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और वह मेरे पैर को दबाने लगे 10:15 मिनट हो दोनों पैर को मेरी दबाये और फिर नाइटी को ऊपर कर दिया।  जब जांघ  तक नहीं थी पहुंच गई तो मैं हाथ पकड़ कर रख दी उनको।  फिर उन्होंने मुझे कहा कि आप उलट जाओ मैं आपके पीठ दबा देता हूँ।  और मैं उलट गई।  वह मेरे पीछे दबाने लगे धीरे-धीरे चूतड़ दबाने लगे।  उसके बाद तो दोस्तों उनका हाथ मेरे जिस्म को टटोल रहा था।

मेरे चुत  से पानी निकलना शुरू हो गया था।  क्योंकि जब एक मर्द का हाथ लगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाए और मैं खुद काम होने लगे।  मैं सीधा हो गई और मैं उनको देखने लगे मेरी चूचियों को निहार रहे थे।  और धीरे-धीरे उनके कांपते हुए हाथ मेरी चूचियों को मसलने लगे।

मैं कुछ बोल नहीं पाई  मैं उनको नशीली निगाहों से देखने लगी।  उसके बाद तो दोस्तों में अपने बाहें फैला दी और वह मेरे बाहों में  सिमट गए।  अपना  होठ मेरे होंठ पर रख दिया और चूसने लगे। वह अपने हाथों से मेरे चूचियां दबा रहे थे और मेरे सोच को चोद रहे थे हम दोनों ही कामों को गए थे धीरे-धीरे उन्होंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और मेरे जिस्म को सहलाते  हुए मेरे नाइटी उतार दी।

मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां को देखकर वह पागल हो गए वह मेरे निप्पल को चूसने लगे एक हाथ से वह मेरे शरीर को टटोल रहे थे उन्होंने मेरे पैरों को अलग अलग किया मेरे होंठ को चूसते हुए मेरी एक हाथ से चूची को दबाते हुए और एक हाथ से मेरी चुत  पर हाथ फेरने लगे।

दोस्तों अब मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो गई थी मैं  सिसकारियां ले रही थी मैं अंगड़ाइयां ले रही थी।  उसके बाद मैंने तुरंत ही उनका लंबा मोटा सा लंड  पकड़ लिया।  पहले खूब हिलाई उसके बाद अपने मुंह में ले ली।   आइसक्रीम की तरह उनके लंड  को चूसने लगी।

अब मेरे चुत  से गर्म पानी निकलने लगा था।  मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई मैंने दोनों पैरों को फैला दिया और उनको नशीली आंखों से देखा और बोली थी आज मुझे चोद दो.  वह तुरंत ही मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए पहले तो उन्होंने खूब मेरी चुत  को चाहता।  फिर उन्होंने उंगली डाली।  गरम रस वह पी रहे थे उंगलियों में  लगा लगा कर।  उसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा।  अपना लंड  मेरी चुत  पर सेट किया।  और जोर से धक्का दे दिया दोस्तों पूरा का पूरा लंड  मेरी चुत  के अंदर चला गया।

मैं धन्य हो गई मोटे लंबे लंड  को अपने अंदर पाकर।  उसके बाद तो मैं हिला हिला कर  अपने गांड को उनके लंड  को चुत  के अंदर लेने लगे।  साथ में मैं उनके बदन को टटोल रही थी वह मेरी चूचियों को दबा रहे थे मुझे चूम रहे थे मुझे किस कर रहे थे।  मैं भी वही सब कर रही थी जो वह कर रहे थे।

जोर जोर से धक्के देने लगे मैं भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। उसके बाद तो कभी उलट कर कभी पलटकर कभी ऊपर से कभी नीचे से कभी बैठाकर कभी झुका कर कभी घोड़ी बनाकर कभी कुत्तिया बना कर।

कहीं खड़ा करके कभी लिटा कर कभी टेढ़ा  करके कभी साइड से।  वह मुझे करीब 2 घंटे तक चोदते रहे।  मैं बहुत ज्यादा थक गई थी और वह भी थक गए थे अब मेरे से सहा नहीं जा रहा था।  मुझे दर्द होने लगा था।  मेरी चूचियों को उन्होंने इतनी जोर जोर से दबाया कर उनकी उंगली का निशान मेरी चूचियों पर साफ साफ दिखाई दे  रहा था।

मैं बोली थी दामाद जी आज बस करो मेरी चुत  फट गई है।  आज के लिए इतना ही काफी है।  अब  तो मैं आपकी हूं आप मुझे जैसे चोदो जो करूं अब मैं आपकी  हूं।  फिर उन्होंने जल्दी-जल्दी धक्के देने लगे जोर-जोर से मुझे चोदने लगे मैं भी नीचे गांड घुमा घुमा कर चुदवाने लगी।

और फिर दोनों एक साथ चीखने लगे चिल्लाने लगे और एकदम से हम दोनों  एक साथ ही एक दूसरे को अपनी बांहों में पकड़ कर अपनी पूरी ताकत लगा दी वह ऊपर से धक्के दे रहे थे मैं नीचे से धक्के देने लगी।

उसके बाद उनका सारा बढ़िया मेरी चुत  के अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों  शाम तो हो गए।

उस दिन के बाद से हम दोनों ही एक पति पत्नी की तरह रहने लगे साथ नहाते थे साथ खाते थे साथ सोते थे।  उसके बाद 1 महीने मेरा  मेंस नहीं आया।  मैं भूल गई थी कि मेरा मेंस कब आया था।  उसके बाद में  प्रेगनेंसी टेस्ट की तो पता चला मैं प्रेग्नेंट हूं।  दोस्तों उधर मेरी बेटी भी  3 महीने की प्रेग्नेंट है।  और  मेरा भी दूसरा महीना चल रहा है।

जाने कि मैं भी अपने दामाद के बच्चे की मां बनने वाली हूं।  शायद मेरे लिए कैसा रहेगा क्या बुरा रहेगा वह तो मुझे नहीं पता पर मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा है अब देखिए जो होगा देखा जाएगा।

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मेरी गांड बड़ी होने की वजह

मेरा नाम निशु तिवारी है और मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली हूँ. मेरा रंग दूध सा गोरा है. मेरी उम्र 41 साल की है.
मेरी चुचियाँ 38-E नाप की हैं, जबकि मेरी कमर 30 की … और गांड 40 इंच की है.
मैं एक वर्किंग वूमेन हूँ और एक स्कूल में इंग्लिश की टीचर हूँ.

अभी भी मेरी जवानी मस्त हिलोरें मारती है. मेरे अंदर औरत की चुदाई की तमन्ना उफान पर है.

मैं अक्सर झीने कपड़े वाली साड़ी पहनती हूँ. इसके साथ मैं जो ब्लाउज पहनती हूँ, वो काफ़ी गहरे गले का रहता है.
मेरा ब्लाउज आगे से और पीछे से दोनों तरफ से काफी खुला सा रहता है, जिसमें मेरे मम्मे अच्छे ख़ासे दिखते हैं और सभी को कामुकता से भर देते हैं.

इस गहरे गले वाले ब्लाउज से मेरे मम्मों की क्लीवेज बड़ी ही दिलकश दिखती है. चूंकि मेरा ब्लाउज स्लीवलैस रहता है, तो ये और भी ज्यादा कामुकता बिखेरता है.

मैं साड़ी भी नाभि के नीचे बांधती हूँ, जिससे मेरी नाभि और पूरा पेट एकदम साफ दिखता है. मतलब ये कि साड़ी ब्लाउज पहनने से मेरे बदन का कमर तक का ज्यादातर हिस्सा साफ़ दिखता है.

मेरी गांड बड़ी होने की वजह से जब मैं कमर मटका कर चलती हूँ … तो पीछे से मैं और भी ज़्यादा सेक्सी दिखती हूँ.
जो भी मुझे एक बार मेरी इस हिलती हुई गांड को देख लेता है, तो बस देखते ही रह जाता है.

आज से 3-4 साल पहले मेरे पति का निधन हार्टअटैक से हो गया था. मेरी एक ही बेटी आरुषि है, जो तब जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी.

पति के गुज़र जाने के बाद शुरुआत के कुछ साल मेरे और मेरी बेटी के लिए बहुत मुश्किल के थे. हम दोनों इनकी मौत के सदमे से उभर भी नहीं पाए थे कि हमको पैसों की दिक्कत आने लगी थी. जिसके लिए मैंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया.

मैंने अपने इस काम की बदौलत एक साल पहले मेरी बेटी की शादी कर दी थी. ये सब मैंने अकेले के बल पर किया था और मैं अब अकेली ही अपना पेट पाल रही हूँ.

कुछ साल पति का सदमा. फिर घर और बेटी की ज़िम्मेदारी और उसकी शादी की. जिस वजह से मुझे कभी अपने लिए टाइम ही नहीं मिला.

लेकिन अब मुझे ये अकेलापन खाए जा रहा था. मैं रोज़ रात को अश्लील पिक्चर और अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ कर अपनी चूत में उंगली करके अपने आपको दिलासा दे रही थी.
लेकिन अब मुझसे ये झूठी सांत्वना चूत को रास नहीं आ रही थी.
अब मेरी चूत को एक असली लंड और एक मर्द की ज़रूरत थी.

मेरी चार पक्की सहेलियां हैं, जिनमें से एक का नाम आबिया है. वो भी मेरी ही उम्र की है.
दूसरी का नाम अनामिका ये 37 साल की है और तीसरी सुमेधा, जो 40 साल की और चौथी ममता है. ये 34 साल की है.

ये सब भी मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ाती हैं. इन सबसे मैं हर तरह की बात कर लेती हूं.

चूंकि इन सबके पति ढीले पोले हैं, इसलिए ये सब पैसे देकर लड़के बुलाती हैं और उनसे चुदवा कर अपनी भूख शांत करवा लेती हैं.

लेकिन अब इनका ये खेल बंद हो गया है क्योंकि जिस जगह से वो सब लड़के आते थे, उस पर एक दिन छापा पड़ गया था. तो अब ये सब भी मेरी तरह तड़पती रहती हैं.

एक दिन जब मैं अपने स्कूल से अपनी सहेलियों के साथ निकली, तो वो सब दूसरी तरफ को जाने लगीं. सड़क पर ट्रेफिक ज्यादा था तो वो सब सड़क के पार जाने के लिए कुछ पल रुक कर बात करने लगीं.

मैं रोड के इसी तरफ रुककर किसी ऑटो के रुकने का इंतजार करने लगी.

मैं ऑटो के इंतजार में थी और उसी समय मैंने देख लिया था कि सड़क की दूसरी तरफ एक 19 या 20 साल का बहुत स्मार्ट सा लड़का खड़ा था.

ममता ने मुझे इशारा करके दिखाया और बोली- काश ये लड़का मिल जाता, तो इसको अपनी सारी जवानी दे देती.

तब तक आबिया बोली- अबे यार, अब तुम जवान ही कहां रही हो.
इस पर सुमेधा बोली- अरे यार, अभी भी हम सब किसी 21-22 साल की लड़की से कम नहीं हैं, बस कोई मिले तो.

इतने में सड़क पर कुछ ट्रेफिक कम हुआ और मेरी सारी सहेलियां सड़क पार करके चली गईं.
तभी वो लड़का मेरी तरफ आ गया. शायद वो भी ऑटो लेने के लिए इस तरफ आ गया था.

मेरे साथ अब वो भी ऑटो का ही इंतज़ार कर रहा था. मैं वहां से उसी लड़के के बाजू में आकर खड़ी हो गयी.

कुछ देर बाद एक खाली ऑटो हमारे करीब रुकी, तो पहले मैं उसमें जाकर एक किनारे बैठ गयी और वो लड़का भी मेरी तरफ वाली सीट पर बैठ गया.
ये ऑटो छह सवारी वाली ऑटो थी.

जब ऑटो आगे चली, तो धीरे धीरे उसमें मेरे बीच में दो सवारी और आ गईं. उसमें से एक सवारी हमारी सीट पर बैठ गई और एक सामने वाली सीट पर बैठ गई. इस तरह आखिरकार वो लड़का मेरे ही बगल में को हो गया और सामने वाली सीट भर गई थी. अब मैं भी बस यही प्रार्थना कर रही थी कि इस तरफ भी कोई और आ जाए तो ये लड़का बिल्कुल मेरे पास आ जाएगा.

शायद ऊपर वाले ने मेरी ये बात सुन ली और तभी एक बूढ़ी और बहुत मोटी सी औरत चढ़ी, तो ऑटो वाला मुझसे बोला- आप ज़रा साइड हो जाइए, सवारी बैठने दीजिए.

मैं जानबूझकर और दब गई और वो लड़का भी अब एकदम मेरे बदन से सट गया.

जैसे ही वो औरत बैठी तो उसने और जगह ले ली. इससे उस लड़के मेरे सिर के पीछे से हाथ निकाल कर रख लिया और एकदम मेरे से लग कर बैठ गया.

ऑटो चली, तो कुछ देर बाद जब झटका लगा. इस झटके से उस लड़के का हाथ मेरी खुली हुई बांह पर लग गया. मुझे बड़ा अच्छा लगा.

फिर अगले झटके पर मैंने जानबूझ कर अपना हाथ थोड़ा उसके हाथ की तरफ कर दिया.
उसने भी मेरे हाथ से अपना हाथ सटा लिया.

इससे मुझे लगा कि ये लड़का शायद मेरे साथ कुछ करना चाह रहा है.

मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उठा लिया और सामने की खिड़की के पाइप को पकड़ लिया. इससे मेरी साड़ी का खुला हिस्सा उसके हाथ की तरफ आ गया था.

तीसरे झटके में उसका हाथ पहले मेरे बगल में पेट पर छुआ.
जब मैंने कोई विरोध नहीं किया, तो उसने अपना हाथ और अन्दर ले जाकर मेरी चुचियों से टकरा दिया.
उसका हाथ मेरी चूचियों से लगा तो मुझे भी मज़ा आने लगा.

इसी तरह वो अब हर झटके का फायदा ले रहा था और मेरी चूचियों से खेल रहा था.

कुछ देर तक चलने के बाद एक औरत और चढ़ी, तो ऑटो में जगह नहीं बची थी. ऑटो वाले ने उस लड़के को आगे बुला लिया, तो उसने अपना किराया वहीं दे दिया और मुझे देखने लगा.

एकाएक उसने मुझे ऑटो से उतरने का इशारा किया, तो मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूं.

ऑटो आगे बढ़ी, तो मैंने हल्का सा पीछे मुड़ कर देखा … तो वो मुझे बुला रहा था. मगर ऑटो आगे बढ़ गयी थी.

मगर कुछ दूर जाने के बाद मुझे लगा कि मुझे उतर जाना चाहिए था. शायद ये मेरा अच्छा मौका था, जो मैंने गंवा दिया.

मैंने तुरंत ऑटो रुकवाया और उसको पैसा देकर फिर उसी तरफ जाने वाली एक ऑटो पकड़ ली.

मैं उधर उतर गई, जिधर वो लड़का उतरा था. मैं उस लड़के को ढूँढते हुई जा रही थी कि कुछ दूर पर वो लड़का मुझे दिख गया.

उसने भी मुझे देख लिया था. वो लड़का हांफते हुए मेरे पास आया और बोला- मुझे तो लगा कि आप नहीं रुकोगी.
मैंने उससे पूछा- बताओ क्या काम है, जिसके लिए तुम मुझे बुला रहे थे?

लड़का- मुझे आपका नंबर चाहिए.
मैं- क्यों क्या काम है?

लड़का- क्योंकि आप मुझे अच्छी लगी इसी लिए.
मैं- अरे तुमको नहीं पता, मैं शादी शुदा हूँ और मेरी और तुम्हारी उम्र देखी है … पागल हो क्या तुम?

लड़का- अब देखो आप मुझे अच्छी लगीं, तो मैंने आपको बोल दिया. बस अब इसमें उम्र और इतना नहीं मतलब होता है.
इस वक्त हम दोनों जहां खड़े थे, उसी के पीछे एक गली थी.

मैंने उससे बोला कि तुम इस गली में आ जाओ, इसमें बात करते हैं.

शुरुआत में वो मुझे मक्खन लगाए जा रहा था और मैं भाव खा रही थी.

कुछ देर बाद वो बोला- ठीक है, आप मुझे आप अच्छी लगी थीं … लेकिन शायद मैं आपको अच्छा नहीं लगा. तो छोड़ो जाने दो, अब मैं जाता हूं.

इतना बोल कर वो जाने लगा, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको रोका.
वो मुस्कुराने लगा.

मैंने उससे बोला- देखो मुझे भी तुम अच्छे लगे और पसंद हो, लेकिन हम दोनों की उम्र इस तरह की नहीं है कि हम ये सब करें.

वो मेरे थोड़ा पास आया और उसने मेरी नंगी कमर पर पीछे से हाथ डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा और बोला- जब पसंद हूँ … तब बात करने में क्या दिक्कत है.

मैंने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम सत्यम बताया.

वो एक जवान लड़का था और अभी मैंने उसको अपना नाम नहीं बताया था. बस उस लड़के से मैं नंबर लेकर चली आयी.

दो दिन तक मुझे उसी का ख्याल आता रहा. मैंने अपने आपको बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन उसको मैंने मैसेज कर दिया और उसने मुझे तुरंत पहचान लिया.

इसके बाद हमारी थोड़ी बहुत बात हुई, तो मैंने उससे उसकी कुछ फोटो मांग लीं.
लेकिन उसको अपनी फोटो अभी नहीं दी.

उस दिन रात में मैं उसी की फ़ोटो के सामने नंगी होकर अपनी चूत में उंगली की, तो आज मुझे एक अलग ही मज़ा मिला.

फिर कुछ दिनों तक मेरी उससे ऐसे ही बात चलती रही. वह एक 19 साल का लड़का था, जो कॉलेज में पढ़ता था.

इसी तरह बात करते हुए एक दिन उसने कहा कि मुझे तुमको देखने का बहुत मन कर रहा है.
मैंने बोला- ठीक है, उस दिन जिस गली में हम मिले थे … उसी गली में मिल लिया जाए!

उसने कहा- उस गली के आगे एक छोटा गार्डन है, जहां कोई आता जाता नहीं है. वहीं चला जाए और कुछ देर बैठ कर बात की जाए.
उसकी बात पर मैं भी राजी हो गई.

दो दिन के बाद वह अपने कॉलेज से जल्दी निकल आया और मेरी छुट्टी होने के बाद हम दोनों साथ में ऑटो से बैठ कर आए.
आज वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे चिपककर बैठा था और मेरी बांहों को सहला रहा था.

मैंने उसे रोका और उसका हाथ हटा दिया. यदि मैं नहीं हटाती तो शायद वो मेरी चूचियों को ही मसलना शुरू कर देता.

उस जगह पहुंचने के बाद हम दोनों उतरे और उसी गली से होकर उस गार्डन में आ गए. वो बहुत सुनसान इलाका था एकदम सन्नाटा था, वहां कोई आता जाता नहीं था.

उस गार्डन का दरवाजा बंद था, जिसको सत्यम ने खोला और मुझे अन्दर करके उसमें कुंडी लगा दी. हम दोनों एक पेड़ की आड़ में पत्थर पर बैठ गए.

वह मुझसे प्यार भरी बातें कर रहा था और मेरा हाल चाल पूछ रहा था. एकाएक बात करते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, जिससे मुझे भी अन्दर अन्दर गुदगुदी होने लगी, लेकिन मैंने सत्यम को यह चीज पता नहीं चलने दी.

फिर कुछ देर के बाद जब मैं जाने लगी तो सत्यम बोला- एक बार गले तो लगा लो.
मैंने हंस कर उसको गले से लगा लिया.

इससे मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां उसके सीने से चिपक गईं. उसने भी अपना हाथ पीछे करके मुझे पीठ और कमर से कसके जकड़ लिया.
इससे मुझे एक अलग ही सुरूर चढ़ने लगा तो मैंने अपना चेहरा उठा दिया.

उसका मुँह मेरे ही सामने था. मैंने अपने आपको बहुत रोका … लेकिन मेरे होंठ उसके होंठ पर छू गए और बिना रुके मैं उसके नर्म नाजुक गुलाबी होंठों को चूसने लगी.
वह भी मेरा बराबरी से साथ देने लगा. कुछ देर एक दूसरे को चूमने के बाद मैं उससे अलग हुई और घर चली आई.

आज उस लड़के के साथ जो हुआ था, उससे मेरे मन को बहुत प्रसन्नता मिली थी. अब हम दोनों खुली खुली बात करने लगे.

फिर एक दिन मेरी सहेली से मैंने अपनी यह बात बताई, तो वह बोली- निशु, तू तो बड़ी हरामी निकली. इतने दिनों से अकेले अकेले मजा ले रही थी और हम सबको आज बता रही हो.

उन लोगों ने मेरे मोबाइल पर उसकी फोटो देखी और सबने अपने अपने नंबर पर उसकी डिटेल ले ली.

तभी ममता बोली- क्या उसके साथ खाली चुम्मा चाटी ही करती रहोगी या आगे भी कुछ करोगी?
मैं बोली- यार तुम सब तो इस खेल में खिलाड़ी हो. मैं अभी इस खेल में नहीं हूं. मैंने उस लड़के को अभी अपना नाम तक नहीं बताया, मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं वह लड़का ऐसा वैसा ना निकले. कहीं मेरी पूरे समाज में बदनामी न हो जाए.

तब तक अनामिका बोल पड़ी- क्या तू पागल है? अगर ऐसा वैसा लड़का होता, तो इतनी बार मिलने पर तेरी चूचियां दबा देता. लेकिन उसने अब तक ऐसा कुछ नहीं किया. इसका मतलब वह लड़का ऐसा वैसा नहीं है. एक 19 साल का जवान लड़का तुझे मिला है यानि कि अभी उसकी पूरी जवानी तेरी है. तू जिस तरह चाहे, उसको अपने लिए इस्तेमाल कर सकती है. तू समझ ले कि तुझे एक चिकना लौंडा मिला है. तू उस पर जितना हाथ फ़ेरेगी, वह उतना ही तेरे लिए होता जाएगा. फिर तू तो घर पर अकेली ही रहती है, ले जा किसी दिन दोपहर में उसको अपने कमरे में और चैक कर उसका सामान कैसा है और कैसी परफॉर्मेंस देता है.

इस तरह से उन लोगों ने मुझे काफी उत्तेजित कर दिया और उसी वक्त मुझे सत्यम को फोन मिलाने को बोला.

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मेरा गदराया हुआ बदन

मेरा नाम रशिली है, कानपूर देहात की रहने वाली हु, मेरी उम्र २२ साल की है, लंड का स्वाद अपने पति से ही मिला वो भी उतना नहीं जितना मैं चाहती थी, मन भटकता था चाहती थी किसी किसी पडोश के लड़के से ही चुदवा लू पर डरती थी कही वो ब्लैकमेल ना करे इसलिए मन मार के रह गयी, मेरे दिमाग में एक विचार आया क्यों ना मैं ससुर से ही चुदवा लू, बूढ़े को भी तो बूर का मजा चाहिए क्यों की सास का देहांत हुए करीब १० साल हो गया था, तो मैंने अपने ससुर पे डोरे डालने लगी.

एक दिन ससुर का तबियत ख़राब हो गया था मैंने उनके लिए तेल गरम कर के पुरे शरीर में मालिश की उनके पुरे जिस्म को मैंने अपने हाथ से टटोला और ब्लाउज का ऊपर का हुक खोल के राखी ताकि वो मेरे गदराये हुए चूचियों को निहार सके हुआ भी ऐसा ही, ससुर ने तिरछी नज़र से खूब निहारा मैं मन ही मन खुश हुई, फिर कुछ ऐसी भी हरकत मैंने की जिससे मेरी चूची उनके हाथ को छुआ, मैं उनके हाव् भाव से समझ रही थी की वो ये सब नहीं चाह रहे थे, उनकी नियत ख़राब नहीं थी पर मैं चुदवाने के लिए व्याकुल थी.

मैंने दूसरे दिन आँगन में चापाकल पे नह रही थी और मैंने जानबूझ कर वही टाइम चुना जब वो खेत से घर आते है, बाहर का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया, और मैंने अपने ब्लाउज और ब्रा को खोल के नहाने लगी, पेटीकोट कमर पे ही बंधा था, चुचिया यु ही खुला था, मैं रगड़ रगड़ के नहाने लगी, उस दिन कुछ ज्यादा ही नही क्यों की ससुर देर से आये थे, जब वो दरवाजे के अंदर आये वो हैरान हो गए और मैं भी झूठ मुठ की परेशान हो गयी, वो मुझे नंगे देख लिए, मेरा गदराया हुआ बदन किसी के भी होश उड़ाने के लिए तैयार था, वो शरमाते हुए कमरे में चले गए और मैं भी कपडे पहन ली, मैं तिरछी निगाह से देखि तो उनके धोती फुला हुआ था शायद उनका लंड खड़ा हो गया था.

इस तरह से कई दिन हो गए पर मौक़ा नहीं मिला चुदवाने के लिए, एक दिन मैंने रात के करीब २ बजे पेट दर्द का बहाना बनाई और रोने लगी, मेरे ससुर परेशान हो गए कोई डॉक्टर भी नज़दीक में नहीं था, सुबह ही कुछ हो सकता था, मैंने कहा पिताजी आप चिंता ना करो पहले भी कई बार ऐसा हुआ था मेरी माँ गरम सर्सो का तेल मेरे पेट पे मालिश कर देती थी तो छूट जाता था, मैंने कराहते हुए बोली. पिताजी फ़ौरन ही रसोई में गए और चूल्हे से गरम तेल कर के ले आये, मैंने लगाने को कोशिश की पर मैं चाहती थी की वो लगाए, मैंने कहा मैं नहीं लगा पाउंगी, अगर आप लगा दे तो अच्छा हो जाएगा, उनके हाथ कापने लगे बोले बेटी मैं कैसे?

मैंने कहा कोई बात नहीं मैं किसी को नहीं बताउंगी, वो तैयार हो गए और मेरे पेट पे मालिश करने लगे, उसी वक्त मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और आँख बंद कर ली वो मेरे पेट पे तेल लगाते रहे और मेरी चूचियों को निहारते रहे, आकिहार मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने कहा, आप मुझे वो सुख दो जो आपका बेटा नहीं दिया अगर आप मना करोगे तो पुरे गाँव में बात फैलाडुंगी की जब मैं सो रही थी उस समय आपने मेरे साथ गलत हरकत किया, मेरे ससुर परेशान हो गए बोले नहीं नहीं ये सब गलत है मैं नहीं कर सकता, उसी समय मैंने कहा मैं अभी घर से बहार चली जाऊूँगी और चिल्लाऊंगी की आपने मेरी इज्जत लूट ली. उन्होंने बोला ठीक है जो तुम चाहो.

मैंने अपने ब्लाउज को उतार दिया और उनको अपने बाहों में ले ली, मैंने सबसे पहले उनको अपना दूध पिलाया फिर मैंने उनको अपना बूर चाटने के लिए कहा करीब १० मिनट बूर चटवाने के बाद मैं काफी कामुक हो गयी थी मेरे दांत पीस रहे थे, बूर से पानी निकल रहा था चूचियाँ टाइट हो चुकी थी, मैंने अपने ससुर का लंड अपने मुह में लेके मलाई बर्फ की तरफ चूसने लगी धीरे धीरे उनका लंड काफी बड़ा और टाइट हो गया फिर मैंने उनके लंड को पकड़ कर बूर के मुह पे रखी और मैंने उनसे पेल देने के लिए कहा,

फिर क्या था उस बूढ़े में जान आ गया वो झटके पे झटके दे रहा था मैं भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, उसने मुझे गांड भी मार और बूर का तो सत्यानाश कर दिया था उस दिन पर मैं खुश थी क्यों की मेरी वासना की आग को कुछ शांति मिली | करीब ४ महीने से वो मेरे साथ ही सोते है, अब तो मेरे पेट में २ महीने का बच्चा भी है वो भी ससुर का. आशा करती हु की आपको मेरी आपबीती अच्छी लगी होगी,

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इतना बढियां लण्ड रोज़ रोज़ नहीं मिलता

देखो अब्बू मैं किसी जरुरी काम से बाहर जा रही हूँ . तब तक तुम आंटी की बिटिया चोदो .इसका नाम है मिस फ़िज़ा . यह जिस काम से आयी है वो मैंने कर दिया है . इस समय आंटी भी घर पर नहीं है . यह अपने घर जाकर बोर होगी, बिचारी ? इसलिए तुम बड़े मजे से इसे यहीं चोदो . मैं अभी आती हूँ . फ़िज़ा चुदवाने में बड़ी मस्त लड़की है . लौड़ा बड़ा मन लगाकर पीती है और अपनी गांड उठा उठा कर मस्ती से लण्ड पेलवाती है . अब्बू इसे चोद कर तेरे लण्ड को बड़ा मज़ा आएगा ? हां एक बात जरुर है की फ़िज़ा को गन्दी गन्दी बातें करने का और गाली बकने का बड़ा शौक है . उसका बिलकुल बुरा न मानना ?
ऐसा कह कर मैं बाहर चली गयी . वहाँ मुझे अचानक रुखसाना आंटी मिल गयी . रुखसाना फ़िज़ा की अम्मी है . मैंने आंटी से साफ साफ कह दिया की फ़िज़ा मेरे घर में मेरे अब्बू से चुदवा रही है . आंटी बड़ी खुश हुई वह बोली अरी मेरी रानी खुशबू तुमने यह बहुत अच्छा किया ? तेरे अब्बू जैसा लण्ड जब उसे मिलेगा तो उसे ज्यादा मज़ा आएगा और वह चुदाने में और एक्सपर्ट हो जायेगी . मुझे तो तेरे अब्बू का लौड़ा बहुत पसंद है . मैं जब रात को सोती हूँ तो सपने में भी तेरे अब्बू का लौड़ा देखती रहती हूँ . मैंने कहा हाय अल्ला, इतना प्यारा लगता है तुम्हे मेरे अब्बू का लण्ड ? तो फिर मेरे घर ही आ जाया करो और मेरे अब्बू के साथ ही सोया करो . वह बोली अरे ऐसा नहीं हो सकता बेटी ? मेरे घर में मेरी बेटी भी है ? मैंने पूंछा आंटी यह बताओ की फ़िज़ा तुमसे इतना खुल कैसे गयी ? उसकी शर्म कहाँ गायब हो गयी . उसकी हिचक कैसे ख़तम की तुमने आंटी ?

आंटी ने कहा :- सुनो खुशबू मैं तुम्हे सुनाती हूँ कि मैंने उसकी शर्म कैसे ख़तम की ?
फ़िज़ा इस समय २३ साल की हो गयी है . यह बात पिछले साल की है जब वह २२ साल की थी . मैंने एक दिन उसे घर में अकेले ब्लू फ़िल्म देखती हुई देख लिया था . मैंने देखा की फ़िज़ा अपने सारे कपडे उतार कर सोफे पर एकदम नंगी बैठी हुई है . मैंने पहली बार उसे बिना किसी कपड़ों के देखा . मैंने देखा की उसकी जांघें मोटी हो गयी है, उसकी बाहें गुन्दाज़ हो गयी है, उसके चूतड़ बड़े बड़े हो गये है, उसकी चूंचियों का साईज़ बढ़ गया है .निपल्स गुलाबी और खूबसूरत हो गये है, उसकी जाँघों के बीच में उभरी हुई मस्त जवानी बड़ी मनमोहक हो गयी है . उसमे घनी घनी काली काली झांटें उग आयी है . मैं समझ गयी की फ़िज़ा को अब लण्ड की बेहद जरुरत है . वह पूरी तरह जवान हो गयी है . मैंने उसे बिलकुल डिस्टर्ब नहीं किया और टी वी पर चल रही ब्लू फ़िल्म मैं भी बड़ी देर तक देखती रही . उसके बड़े बड़े लण्ड देख कर मैं भी गरम हो गयी . मेरे भी मुंह से लार टपकने लगी . फिज़ा का एक हाथ अपनी चूंची पर था और दूसरा चूत पर . ऊँगली बार बार चूत के अंदर का मज़ा ले रही थी . पहले तो मेरा मन हुआ की मैं भी अंदर घुस जाऊं लेकिन मैं वापस चली आयी .
मैंने यह बात अपनी ख़ास दोस्त आलिया को बताई . उसने कहा यार रुखसाना देखो अब तेरी बेटी सायानी हो गयी है . उसे जवानी का मज़ा लेने दो .मैंने कहा यही मैं भी चाहती हूँ पर जब घर में केवल हम दो लोग ही है तो छुप छुप कर कब तक मज़ा लेगी वो और मज़ा लूंगी मैं ? उसने कहा हां बात तो तुम्हारी ठीक है . अच्छा कल मैं तेरे घर आती हूँ और उसके सामने तुमसे खूब गन्दी गन्दी और अश्लील बातें करती हूँ . उसकी शर्म लिहाज़ सब मिटाना होगा . उसका संकोच और उसकी झिझक सब दूर करना होगा ?
दूसरे दिन मैं किचेन में काम कर रही थी . मेरे बगल में फ़िज़ा चावल बीन रही थी . इतने में आलिया आ गयी .

वह बोली :- क्या कर रही है तू भोसड़ी की रुखसाना ?
मैंने कहा :- अपनी झांटें बना रही हूँ बहन चोद ? अरे तुम्हे दिखाई नहीं पड़ता की मैं खाना बना रही हूँ . फिर तू पूंछती क्यों है माँ की लौड़ी, आलिया ?
तुम झांटें बनाओ चाहे अपनी गांड मराओ मुझे क्या ? मैं क्यों तेरी परवाह करूँ ?
आज क्या तेरा लड़ने का मूड है क्या बुर चोदी आलिया ?
मैं क्यों लडूंगी यार ? मैं तो तुमसे सीधे सीधे पूंछ रही हूँ ? तू ही ऊट पटांग जबाब दे रही है .
अच्छा बता कल किससे मरवाई तूने ?
इतने में फ़िज़ा उठ कर जाने लगी तो आलिया बोली अरी फ़िज़ा तू मादर चोद कहाँ जा रही है ?
फ़िज़ा बोली – मुझे शर्म आ रही है आंटी ?
आलिया बोली – अच्छा जब तू बहन चोद नंगी नंगी ब्लू फ़िल्म देखती है तब तुझे शर्म नहीं आती ? जब तू अपनी सहेलियों को गाली देती है , तब तुझे शर्म नहीं आती ? देख फ़िज़ा अब तू जवान हो गयी है . अब शरम वरम छोड़ दे और जवानी का पूरा मज़ा ले ? मैं जिस दिन जवान हुई थी उसी दिन शर्म की माँ चोद दी थी मैंने . संकोच, झिझक, डर सब मैंने गांड में घुसेड़ दिया था . मैं उसी दिन से पकड़ने लगी थी लण्ड और पेलने लगी थी अपनी चूत में लण्ड ? चल तू भी बैठ यहाँ हमारे सामने, मादर चोद और खुल कर बातें कर हम लोगों से ? कहीं जाने की जरुरत नहीं है .
मैंने कहा अच्छा फ़िज़ा लो थोड़े आलू छील दो ? वह आलू छीलने लगी .
आलिया आगे बोली :- यार रुखसाना तुम जुम्मन को जानती हो ? कितना बदमास है साला गांडू कही का ?
मैंने कहा :- क्या हुआ यार इतना नाराज़ क्यों हो उससे ?
वह बोली :- अरे उस दिन साले ने मेरी चूंची पकड़ ली . मैंने भी उसके लण्ड पर हाथ मार दिया . उसकी हिम्मत बढ़ गयी . वह मेरे कान में बोला भाभी बुर दो न मुझे अपनी ?
मैंने कहा :- अबे भोसड़ी के जुम्मन, बुर क्या यहीं सबके सामने लेगा ? घर में आना तब ले जाना मेरी बुर ?
वह बोला :- भाभी इंकार न करना . मैं कल जरुर आऊंगा .
मैंने (रुखसाना) पूंछा :- तो फिर आया वो तेरी बुर लेने ?
आलिया बोली :- हां यार आया न साला और आखिर कार बुर लेकर ही गया ? बड़ा हरामी है बहन चोद ?
तब तक फ़िज़ा बोली :- अरे आंटी उसकी बेटी भी हरामी है ?
आलिया बोली :- क्यों क्या करती है वो ? क्यों हरामी कहती हो उसे ?
फ़िज़ा ने बताया :- वह ससुरी लड़कों के लण्ड की फ़ोटो अपनी मोबाईल में रखती है और सबको दिखाती है ? यही नहीं सबके लण्ड की नाप भी लिख लेती है ? किसका कितना बड़ा है लण्ड ? यह सब अपने मोबाईल में रखती है . गाली बकने में बड़ी तेज है ? लड़के उसकी गालियां सुनने के लिए उसके आगे पीछे घूमते रहते है .

आलिया बोली :- तो फिर चुदाने में भी तेज होगी, ससुरी ?
फ़िज़ा बोली :- पता नहीं पर एक बात और सुनी है मैंने उसके बारे में ? बुरा नहीं मानना आंटी ? मुझे बताने में शर्म आ रही है ? झिझक हो रही है मुझे कहने में ?
आलिया बोली :- तुम खुल कर बताओ न ? शर्माने की कोई जरुरत नहीं है . ये देखो मेरा भोसड़ा ( आलिया ने अपना पेटीकोट उठा कर फ़िज़ा को अपना भोसड़ा दिखा दिया ) देखो मुझे कहीं शर्म आ रही है ?
फ़िज़ा मुस्कराने लगी . फिर वह बोली :- आंटी, मेरे कॉलेज की लड़कियां कहती है की जुम्मन की बेटी अपनी माँ चुदाने में बड़ी तेज है ?
आलियां बोली :- अरे इसमें शर्माने की क्या जरुरत है ? मेरी बेटी भी अपनी माँ चुदाती है ? तुम भी अपनी माँ चुदाना ? जितना मन हो उतना चुदाना ? घर में चुदाना बाहर चुदाना ?
सबकी हंसी छूट गयी .
रुखसाना आंटी बोली :- खुशबू, मेरी बेटी फ़िज़ा उसी दिन से मुझसे बिलकुल खुल गयी . मुझसे गालियों से बात करने लगी .गन्दी से गन्दी अश्लील बातें करने लगी . यहाँ तक की आजकल वह मेरे भोसड़ा में लण्ड भी घुसेड़ देती है . मैं भी कम नहीं हूँ . मैं भी उसकी चूत में पेल देती हूँ लण्ड ?
मैं बोली :- अरी आंटी अब मैं चलती हूँ . शायद मेरा अब्बू तेरी बेटी चोद चुका होगा ?
मैं जब घर पहुंची तो मुझे बेड रूम से कुछ आवाजें सुनायी पड़ी . हाय अंकल बड़ा मस्त लौड़ा है तेरा ? बड़ा मोटा है बहन चोद ? खूब मज़ा आ रहा है मुझे चुदाने में ? पूरा पेल दो लौड़ा साले को ? तेरे लण्ड की माँ का भोसड़ा साला कितना मज़ा देता है ? ये तो मादर चोद मेरी माँ की बुर चोदता है . तेज तेज चोदो अंकल ? गांड से जोर लगा के चोदो ? ओ हां ओहो, उई हाय रब्बा उई माँ कितना बेरहम है तेरा लण्ड अंकल ? मैं समझ गयी कि फ़िज़ा अभी चुदवा रही है . मैं कमरे में घुस गयी .
मैंने कहा :- अरी फ़िज़ा तू कब से चुदा रही है, भोसड़ी वाली ?
वह बोली :- अरे दीदी, तुम्हारे जाते ही मैंने अंकल का लौड़ा खोला तो देखा कि इसकी झांटें बड़ी बड़ी हो गयी है . मैं पहले इसे बाथ रूम ले गयी और कर झांटें बनाई , फिर नहलाया धुलाया और फिर बेड पर लायी . लण्ड में निखार आ गया था . मुझे बड़ा प्यार लगा लण्ड और मैं चूसने लगी . मैं बड़ी मस्त होती जा रही थी . इतने में अब्बू बोला :- अरी खुशबू , फ़िज़ा बिलकुल अपनी अम्मी की तरह ही लौड़ा चूसती है . मैंने कई बार कहा कि अब मुझे चोदने दो पर ये बोली नहीं अंकल अभी और चूस लेने दो लण्ड ? चाट लेने दो लण्ड ? इतना बढियां लण्ड रोज़ रोज़ नहीं मिलता चूसने को ? फिर चुदाऊंगी ? इसने अभी कुछ देर पहले ही चुदाना शुरू किया . थोड़ी देर में अब्बू बोला यार फ़िज़ा अब मैं निकलने वाला हूँ .
बस तभी रुखसाना आंटी आ गयी . उधर फ़िज़ा लण्ड पकड़ कर मुठ्ठ मारने लगी . इधर आंटी भी कूद पड़ी लौड़े पर . लण्ड ने जैसे ही पिचकारी फ़िज़ा के मुंह में मारी तो उसका कुछ हिस्सा आंटी ने भी कैच कर लिया . फिर दोनों ने मिलकर लौड़ा खूब चाटा और मैं देख कर तृप्त हो गयी .
एक दिन मेरी खाला मुमताज़ अपने मियां के साथ आ गयी . उनके साथ उनकी बेटी ज़िया भी थी . वे लोग पिछले १० साल से अमेरिका में रह रहे है . मैं उन्हें १० साल के बाद आज देख रही हूँ . मेरे अब्बू बहुत खुश हो गए . खाला मुझे देख कर अब्बू से बोली ओ’ मई गॉड ये खुशबू तो बहुत बड़ी हो गयी है बहन चोद जीजू . उस समय १३ साल कि थी जब मैं यहाँ से गयी थी . अब तो मासा अल्ला बड़ी खूबसूरत निकल आयी है . अब्बू बोला और ज़िया भी बहुत सुन्दर है मम्मू (खाला का घर का नाम मम्मू है )हमने फ़ौरन ड्रिंक्स का इंतज़ाम किया . मैंने देखा की सबसे ज्यादा शराब ज़िया पी रही थी .
दो पैग शराब पीने के बाद खाला बोली :- खुशबू को शराब पीने का बड़ा शौक है . इसको बहन चोद शराब के साथ लण्ड पीने का भी शौक है खुशबू ? मैं मना करती हूँ पर ये मानती नहीं भोसड़ी वाली ?
ज़िया बोली :- दीदी मुझे एक और शौक है . वह मेरी अम्मी नहीं बता रही है . पूंछो न इससे बहन चोद ?
तब तक खाला बोली :- हां इसे माँ चुदाने का भी शौक है . हर जगह माँ चुदवाती रहती है अपनी ?
ज़िया बोली :- दीदी मैं क्या करूँ ? मेरे कॉलेज की सभी लड़कियां अपनी माँ चुदवाती है . इसलिए मैं भी चुदाने लगी अपनी माँ ? वहाँ तो गांड मारने और मराने का भी चलन है . मैं भी वही करती हूँ . और तुम्हे अम्मी जो नहीं बता रही है वो मैं बताती हूँ . अम्मी को अपनी बेटी चुदाने का शौक है . मुझे सबका लौड़ा पकड़ाती रहती है

सभी लोग नशे आ गये . अचानक खाला अंदर गयीं और थोड़ी देर के बाद अब्बू भी अंदर चला गया . मैं उनके आने का इंतज़ार करती रही पर वे काफी देर तक नहीं आये . तब मैंने ज़िया से कहा जा ज़रा देख कर आ न वे लोग क्या कर रहे है ? वह गयी और फ़ौरन मेरे पास आकर बोली वाओ दीदी जानती हो क्या हो रहा है वहाँ ? मेरी अम्मी खालू का लौड़ा चूस रही है . लौड़ा देख कर मेरा भी मन हो गया है . मेरी चूत में आग लग गयी है दीदी ? मैं तेरे अब्बू का लौड़ा चूसने जा रही हूँ . तुम यहाँ मेरे अब्बू का लौड़ा चूसो ?
वह चली गयी और इधर मेरी भी चूत भड़क उठी . मैं आगे बढ़ी और खालू के कपडे खोल डाले . उसका टन टनाता हुआ लण्ड पकड़ लिया . उसने मेरे सारे कपडे एक एक करके उतार फेंकें ? मैं भी हो गयी मादर चोद नंगी ? इतने में लण्ड फुफकार मारने लगा . मैंने कहा वाओ तेरा लौड़ा तो मेरे अब्बू के लौड़े के टक्कर है खालू . आज मैं तेरा लण्ड चोदूँगी और तेरे लण्ड की माँ चोदूँगी ?
बस फिर क्या मैं इधर खालू से चुदाने लगी और उधर खाला और उसकी बेटी ज़िया मेरे अब्बू से चुदाने लगी . –

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मेरी चूत चाटने लगा

ये चुदाई की कहानियाँ तब की है जब में ग्रॅजुयेशन पास करके नौकरी ढूँढ रही थी.. मेरा फिगर 33-32-34 है और में दिखने में बहुत सुंदर और सेक्सी लगती हूँ और मेरे बूब्स बहुत सेक्सी और बड़े बड़े है। वैसे मेरे दोस्त कहते है कि में एक आईटम हूँ। अब में आपको स्टोरी सुनाती हूँ जो मेरे साथ घटी एक घटना है। दोस्तों मैंने अपनी पूरी पढ़ाई एक अच्छे कॉलेज से पास की और घर में पैसों की प्रॉब्लम्स की वजह से में आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई और मैंने एक अच्छी नौकरी ढूँढनी शुरू कर दी। फिर उन दिनों मेरा कज़िन अजीत हमारे घर आया। वो मुझसे उम्र में 2 साल बड़े है और उन्होंने अपना MBA पूरा किया है और उन्हें नयी नयी एक अच्छी सी नौकरी मिली थी और वो दिल्ली जा रहे थे। तभी मेरे घरवालों ने कहा कि वो मुझे भी अपने साथ ले जाए ताकि में एक बड़े शहर में अपने लिए एक अच्छी नौकरी ढूँढ सकूँ।

फिर में भी उनके साथ दिल्ली आ गयी और मैंने नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी.. लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी मुझे नौकरी नहीं मिली.. क्योंकि मेरी पड़ाई ज़्यादा अच्छी नहीं थी। फिर एक दिन में अपने भैया के घर पर बैठ कर सोच रही थी कि अब मुझे अपने घर चले जाना चाहिए उसी वक़्त डोर बेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि भैया आए थे और साथ में उनका बॉस भी था.. उनकी उम्र कोई 35-40 साल के बीच की होगी और दिखने में ठीक था। भैया ने अंदर आते ही बोला कि ये मेरी छोटी बहन है और ये एक नौकरी ढूँढ रही है.. उनका बॉस मुझे घूर घूर कर देख रहा था। उसकी नज़र मेरे बूब्स पर ही अटकी थी। तभी मैंने देखा कि वो बार बार मुझे देखकर अपनी पेंट पर हाथ लगा रहा था और भैया अंदर अपने कंप्यूटर से कुछ प्रिंट आउट्स ले रहे थे। उन्होंने अंदर से ही आवाज़ दी और कहा कि हमारे लिए दो कप चाय बना दो। तभी में चाय बनाने किचन में चली गयी तभी उनका बॉस मेरे पीछे किचन में आ गया और उसने मेरी गांड को हल्के से छू दिया मैंने पीछे मुड़कर उसे घूर दिया वो घबरा कर बोले कि मुझे एक ग्लास पानी चाहिए.. मैंने उसे पानी दे दिया। फिर वो बाहर चला गया में अंदर किचन में ये सोच रही थी कि शायद ये मुझे कोई नौकरी दे दे और अगर ऐसा है तो उनको खुश करने में मेरा क्या जाता है? फिर मैंने चाय बनाकर बाहर जाने से पहले अपने टॉप के दो बटन खोल दिया ताकि जब में चाय देने के लिए नीचे झुकूं तो उसे मेरे बूब्स आसानी से साफ साफ नज़र आए और मैंने वैसा ही किया। जब मैंने चाय दी तो उसे मेरे बूब्स दिखे और में हल्का सा मुस्कुरा दी..

जिससे उसे ग्रीन सिग्नल मिल गया उसने बैठकर चाय पी। फिर मेरे भैया भी अपना काम खत्म करके आ गये। फिर वो दोनों बाहर निकल गये लेकिन जाते जाते मैंने फिर से उन्हे एक हल्की सी स्माईल दे दी। फिर दूसरे दिन सुबह सुबह भैया के ऑफीस जाने के एक घंटे के बाद भैया का फोन आया कि उन्हें कुछ काम से बाहर जाना होगा और आज मुझे इंटरव्यू के लिए अकेले ही जाना होगा और वो ऑफीस से गाड़ी भेज देंगे। तभी मैंने कहा कि आप कब तक वापस आओगे? तो उन्होंने कहा कि अगर काम जल्दी ही खत्म हो गया तो आज ही आ जाऊंगा। फिर मैंने इंटरव्यू के लिए एक सुंदर सी साड़ी निकाली और नहाकर पहन ली। इतने में डोर बेल बजी तभी मुझे लगा कि ड्राइवर होगा इसलिए मैंने दरवाज़ा खोला और मैंने देखा कि सामने भैया के बॉस खड़े है और उनके हाथ में एक पॅकेट था.. जिसमे शायद खाने की कोई चीज़ होगी। तभी मैंने उनसे पूछा कि आप यहाँ कैसे? भैया तो आज बाहर गये हुए है।

बॉस : में इसलिए ही तो आया हूँ।
में : क्या मतलब में समझी नहीं?
बॉस : तुम अकेले इंटरव्यू देने जाओगी इसलिए मैंने सोचा कि में तुम्हे छोड़ दूँ और फिर मुझे कल से ही बहुत भूख लगी है इसलिए खाने को कुछ चीज़े ले ली आओ हम साथ में खाते है फिर इंटरव्यू देने चलेंगे। वैसे तुम्हे कैसा नौकरी चाहिए?
में : कोई भी अभी मुझे नौकरी की बहुत ज़रूरत है।
बॉस : अगर तुम चाहो तो में तुम्हे नौकरी दे सकता हूँ लेकिन पहले तुम्हे मुझे इंटरव्यू देना होगा।
में : कौन सी नौकरी है?
बॉस : में बहुत दिनों से एक पर्सनल सेक्रेटरी ढूँढ रहा हूँ और तुम तो बहुत होशियार, समझदार और सुंदर भी हो काश कि मेरी बीवी तुम्हारी तरह सुंदर होती।
में : (मुस्कुराते हुए) क्या मुझे नौकरी मिल सकती है?
बॉस : लेकिन तुम्हे पहले इंटरव्यू पास करना होगा.. क्या तुम तैयार हो?
में : हाँ में तैयार हूँ लेकिन सेलेरी क्या होगी?
बॉस : अगर तुम पास हो गयी तो बहुत अच्छी सेलेरी मिलेगी।
में : हाँ में तैयार हूँ। बॉस : तो तुम यहाँ पर आकर सोफे पर बैठो। फिर वो मेरे पास में आकर बैठ गये और मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोले कि तुम अपने बारे में कुछ बताओ। फिर में अपने बारे में बताने लगी तो वो बोले कि ये सब नहीं में जो पूछ रहा हूँ वो बताओ।

मैंने उनसे पूछा क्या? बॉस : तुम ये बताओ कि तुम्हारा साईज़ क्या है? तभी में हैरान हो गयी.. लेकिन तब तक में समझ गयी थी कि वो मुझसे क्या चाहता है? में भी सोचने लगी कि अगर इन सब के बदले वो मुझे एक अच्छी सी सेलेरी वाली नौकरी दे दे तो मुझे क्या प्रॉब्लम है? और मैंने शरमाते हुए कह दिया कि 32. बॉस : वाउ अगला सवाल क्या तुम इस नौकरी के लिए कुछ भी कर सकती हो? में : हाँ सर में सब कुछ कर सकती हूँ। बॉस : तो फिर तुम जाओ और दरवाजा बंद कर दो। तभी मैंने उठकर दरवाज़ा बंद कर दिया और अंदर आ कर उसके सामने बैठ गयी। वो मेरे पास आ गया और पीछे से उसने मेरी पीठ पर एक किस कर दिया मैंने कहा कि ये क्या कर रहे हो? बॉस : वही कर रहा हूँ जो एक आदमी और एक औरत के बीच होता है और ये मत कहना की तुम ऐसा कुछ करना नहीं चाहती हो.. तुझे भी तो खुजली हो रही है। में : ये ग़लत है हम ऐसा नहीं कर सकते। बॉस : सही और ग़लत का फ़ैसला हम क्यों करे.. अभी तो वो करो जो हमे आज करना चाहिए।

में : लेकिन सर कोई आ गया तो? और कहीं भैया को पता चल गया तो? बॉस : अरे तेरा भैया मेरा एक नौकर है ज़्यादा बोलेगा तो प्रमोशन देकर चुप करवा दूँगा। साला खुद लेकर आएगा तुझे चुदवाने के लिए। तू तो बस अब मेरी प्यास बुझा दे मेरी जान। साली में तो पहले दिन से ही तड़प रहा हूँ तुझे चोदने के लिए.. चल आज मेरी रांड बन जा। में : लेकिन सर ये सब कुछ बिल्कुल ग़लत है। फिर ये सब कहते कहते उसने मेरे होंठो पर अपने होंट रख दिया और वो पागलो की तरह मुझे चूमने लगा और पागलो की तरह मेरे कपड़े खुलवाने लगा। में और भी उसका साथ देने लगी। फिर मैंने धीरे से पूछा कि सर मेरी सेलेरी कितनी होगी? वो हंस कर बोला अगर आज में खुश हो गया तो 20-25 हजार रूपय तो दे ही दूँगा। लेकिन फिर तुझे हमेशा मेरी रांड बनकर रहना होगा.. बोलो मंजूर है? में : हाँ सर मुझे मंजूर है। बॉस : अब और मत तड़पा.. आ जाओ मेरी प्यास भुझा दो मेरी रानी और उन्होंने मुझे गोद में उठाकर बेड पर लेटा दिया। वो मेरे पूरे शरीर को चूम रहे थे और में उनका साथ पूरा पूरा दे रही थी.. धीरे धीरे उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे पूरा नंगा कर दिया। में बिल्कुल नंगी उनके नीचे लेटी हुई थी और मैंने अपने दोनों हाथो से अपने बूब्स छुपा लिए। फिर उन्होंने मेरे दोनों हाथ हटाकर मेरे बूब्स जोर ज़ोर से चूसने लगे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उसने मेरी चूत पर अपना हाथ रखा और उसे मसलने लगा और थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना अंडरवियर उतार कर मुझे अपना लंड दिखाया जो पहले से ही खड़ा था तभी मेरे तो होश ही उड़ गये। फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुहं में डाल दिया और खुद मेरी चूत चाटने लगा। में आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी। मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि में बता नहीं सकती। तभी थोड़ी देर बाद में झड़ गयी और उन्होंने पूरा रस पी लिया। तभी उन्होंने कहा कि मेरी जान अभी तो तेरी चुदाई बाकी है चल तैयार हो जा अपनी चुदाई के लिए साली रांड आज तुझे मज़ा चखाता हूँ। आज तेरी सारी गर्मी निकालता हूँ और हाँ तुझे कभी कभी हमारे ग्राहकों के साथ भी सोना पड़ेगा। उनको भी अपनी चूत का रस पिलाना होगा.. साली तेरे बूब्स तो बड़े मस्त है। तू तो असली माल है कहाँ छुपकर बैठी थी और फिर वो मेरे ऊपर चड़ गये और मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक झटके से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। तभी में ज़ोर से चिल्लाई और उन्होंने मेरा मुहं बंद कर दिया और थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। में ज़ोर और ज़ोर और ज़ोर चिल्लाने लगी.. बॉस ने कहा कि साली तू तो बहुत बड़ी वाली रांड

फिर उन्होंने स्पीड बढ़ाकर मेरी चुदाई शुरू की और उधर मेरी चूत चुदाई में व्यस्त थी.. लेकिन मुझे बहुत दर्द भी हो रहा था और वो बस चुदाई पर ध्यान दे रहे थे। उनकी स्पीड कम होने का नाम नहीं ले रही थी और वो आज मेरी चूत को फाड़ देना चाहते थे। फिर करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम लोग एक साथ झड़ गये। फिर उन्होंने मुझे कई बार चोदा और मेरी चूत को पूरा फाड़कर भोसड़ा बना दिया और फिर अपने एक फ्रेंड की कंपनी में नौकरी दिलाई और वहाँ पर उस फ्रेंड ने भी मेरा पूरा मज़ा लिया और वो दोनों मिलकर बारी बारी से मेरी चुदाई करते रहे और फिर ऐसे ही मेरी चुदाई के साथ साथ मेरी नौकरी भी चलती रही ।

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मैं प्यासी औरत हूँ

दोस्तो, आप सभी को मेरा नमस्कार, मेरा नाम सुनीता है. मैं थोड़ी प्यासी औरत हूँ. वैसे मेरे पति तो मुझे चोदते ही हैं लेकिन मुझे और ज्यादा चुदवाने का मन करता है. मेरा अन्दर बहुत सेक्स है. मेरे पति जब भी मुझे चोदते हैं तो वो जल्दी झड़ जाते हैं जबकि मैं और सेक्स के लिए तड़पती रहती हूँ.
मेरी सेक्स की तड़प ने ही मुझे अपनी चूत में उंगली करने के लिए मजबूर कर दिया और मैं अपनी चूत में उंगली करके अपनी चूत को शांत करती हूँ. मेरा मन जब नहीं लगता है तो कभी कभी अन्तर्वासना सेक्स कहानियां पढ़ती हूँ जिससे मुझे बहुत अच्छा लगता है.

मैं आप अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ जो मेरे और मेरे देवर की है.
जब पति से चुदकर मेरी चूत को शांति नहीं मिली तो मैं अपने देवर से अपनी चूत शांत करवाने लगी. वो भी क्या दिन थे जब मैं अविवाहिता थी तो मुझे बहुत लंड मिलते थे चुदवाने के लिए … लेकिन ससुराल में तो डर लगता है. किसी का लंड अपनी चूत में लेने से! अगर मेरे ससुराल वालों को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी.
वैसे मैं मौका देख कर किसी न किसी को पटा लेती हूँ और उससे चुदवा लेती हूँ. ज्यादातर लोग तो मुझे ही पटाते हैं मुझे चोदने के लिए. और मैं भी अपने जिस्म का बहुत ध्यान रखती हूँ.

मेरे पति थोड़ा पैसा भी कम कमाते हैं और मेरा देवर मेरे पति से ज्यादा पैसा कमाता है. वैसे मुझे यह पता था कि मेरा देवर मुझे शुरू से ही पसंद करता था क्योंकि वो हमेशा मेरे लिए कुछ न कुछ बाजार से लाता रहता था, मुझे त्योहार पर उपहार भी देता था.
मैं अपने देवर को कभी गलत नजरिये से नहीं देखती थी. मैं भी अपने देवर को बहुत मानती थी. मेरे पति मुझे अच्छे से नहीं चोद पाते थे या मैं ही थोड़ा ज्यादा चुदासी थी कि मुझे अपने पति के लंड के अलावा भी दूसरे के लंड से चुदवाने का मन करता था.

मैं अपने देवर से पहले से ज्यादा बातें करने लगी. मैं जब भी अपने देवर को सुबह में चाय देने जाती थी तो उनका खड़ा लंड देखती थी.

एक दिन देवर ने मुझे उनका खड़ा लंड देखते हुए देख लिया और बोले- भाभी क्या हुआ, आपको कुछ चाहिए?
मेरे देवर अपने लंड की तरफ देख कर मुझसे बातें कर रहे थे. मेरे देवर ने पहली बार मुझसे डबल मीनिंग में बात की थी.

अब तो उसी दिन से हम दोनों लोग गंदे गंदे मजाक करने लगे. अब तो मेरे पति जब जॉब करने जाते थे तो मैं घर का सारा काम करके अपने रूम में आराम से सोती थी. दोपहर में मेरा यही काम था कि मैं दोपहर में सोती थी.

एक दिन मैं दोपहर में अपने रूम में सो रही थी. उस दिन मेरे देवर अपने जॉब पर नहीं गए थे. मैं सोते समय अपनी साड़ी खोल एक ब्लाउज और पेटीकोट में सोती हूँ. इससे मुझे सोने में आराम रहता है और नींद भी अच्छी आती है. मैं रात को भी ब्लाउज और पेटीकोट में ही सोती हूँ.
मैं अपने रूम में दोपहर को सो रही थी और मेरी पेटीकोट मेरे जांघों तक आ गयी थी. मेरी पेंटी दिख रही थी और मैं सो रही थी. मेरा देवर मेरे कमर में आकर मेरी पेंटी को देख रहे थे. मैं जब थोड़ा नींद में उठी तो देखा कि मेरा देवर मेरी पेंटी को बहुत ध्यान से देख रहा है.

मैंने अपने देवर की तरफ देखा तो मेरा देवर मुझे देख कर मुस्कुराने लगा और बोलने लगा- भाभी, आप सोते समय बहुत सेक्सी लगती हो. आप कभी मेरे साथ भी सो लिया करिए.
मैं अपने देवर की डबल मीनिंग बात समझ गयी. मैं समझ गयी कि मेरा देवर भी मुझे चोदना चाहता है. मेरी उभरे हुए चुचे और बड़ी गांड जो थोड़ी सी उभरी हुई है.

मेरा देवर मेरे जिस्म को देख कर दीवाना हो गया. मेरा देवर मेरे जिस्म की तारीफ करने लगा- भाभी आप बहुत सुन्दर हो. भईया तो आपको खूब रात में प्यार करते होंगे.
मैं यह बात सुनकर थोड़ा उदास हो गयी क्योंकि मुझे अपने पति से चुदाई का सुख नहीं मिल पाता था जैसा मैं चाहती थी. वैसा मेरा पति मुझे नहीं चोदता था.

मेरे देवर मेरे पास आया और बोला- भाभी क्या बात है. आप मुझे बताओ मैं हूँ न आपकी सहायता करने के लिए!
मैंने अपने देवर को बताया- मेरे पति को अब ज्यादा मुझमे रूचि नहीं है. मेरे पति अब मुझसे ज्यादा प्यार नहीं करते हैं जैसा वो पहले करते थे.

मेरा देवर यह बात सुनकर बोला- भाभी मैं हूँ ना आपका देवर … मैं आपसे प्यार करूँगा.
मैं और मेरा देवर हम दोनों लोग एक दूसरे से नज़रें मिलाकर बात कर रहे थे. मेरा देवर मुझे देख कर थोड़ा हवस भरी नजरों से मुझसे बातें कर रहा था.

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बेकाबू जवानी की मजबूरी

कॉलेज के सेकंड ईयर के एग्जाम खत्म होने के बाद मैं घर में ही थी. मुझे घर में बहुत बोरियत लग रही थी.

एक दिन में सुबह न्यूज़ पेपर पढ़ रही थी, तो उस न्यूज़ पेपर में एक पंपलेट निकला जो स्विमिंग क्लासेज को लेकर था. उसे पढ़कर मेरे मन में आया क्यों न मैं स्विमिंग क्लासेज जॉइन कर लूं, इससे मेरा टाइम भी पास हो जाएगा और मैं स्विमिंग भी सीख लूंगी.

बस मैंने मम्मी से पूछा कि मुझे स्विमिंग सीखनी है … ये एक पंपलेट निकला है … क्या मैं इसे ज्वाइन कर लूं?
मम्मी ने भी हां कर दी.

अगले दिन मैं उस स्विमिंग इंस्टीटूट में अपना एड्मिशन करवाने के लिए गई. वहां रिसेप्शन पर एक लड़की बैठी थी. मेरी उससे सारी बातें हुईं. उसने मुझे स्विमिंग फीस के बारे में बताया. उसके साथ मेरी कुछ और भी बहुत सारी बातें हुईं. मैंने अपना एड्मिशन करवा लिया.

मैंने उससे टाइमिंग पूछा, तो उसने मुझे दोपहर में दो से चार की टाइमिंग बताते हुए कहा कि ये टाइमिंग लड़कियों के लिए है. इसके लिए स्विमिंग ट्रेनर भी एक लड़की ही है.

ये सुनकर मेरा तो जैसे दिल ही टूट गया था. सच कहूं दोस्तो … तो मैं ये स्विमिंग क्लासेज नए लंड की तलाश में ही जॉइन कर रही थी कि कहीं से मुझे कोई नया लंड मिल जाए, पर मुझे ये नहीं पता था कि इसमें सच में कोई लंड मिल जाएगा.

मुझे अगले दिन से स्विमिंग ड्रेस साथ लेकर आने के लिए कहा गया.

जब स्विमिंग ड्रेस की बात सामने आई तो मैंने सोचा कि क्यों न स्विमिंग ड्रेस ले ली जाए.

मैं उधर से सीधे मार्किट चली गई. मैंने एक स्विमिंग ड्रेस ली और घर आ गई. अगले दिन से मुझे स्विमिंग के लिए जाना था, पर वहां लड़के तो होने नहीं वाले थे, फिर भी मैं एक्साईटिड थी.

अगले दिन मैं समय से पहले घर से निकली. स्विमिंग इंस्टिट्यूट मेरे घर से थोड़ा दूर था, तो मैं एक ऑटो लेकर स्विमिंग इंस्टिट्यूट की ओर निकली और कुछ समय बाद वहां पहुंच गई.

रिसेप्शनिस्ट ने मुझे स्विमिंग पूल की तरफ ले गई और उसने मुझे मेरी स्विमिंग ट्रेनर से मिलवाया. मेरी उस ट्रेनर से थोड़ी बातचीत हुई. फिर उसने मुझसे कहा- जाओ … आप चेंज करके आओ.
उसने मुझे चेंजिंग रूम का रास्ता बताया, तो मैं चेंज करने चली गई.

जब मैं चेंज करके बाहर आई, तो मुझे ट्रेनर ने कहा- चलिए अब आप पूल में आ जाइए.
मैं पूल में चली गयी.

ट्रेनर ने मुझसे कहा- पहले आप अपना पैर चलना सीख लीजिये, ये किनारा पकड़ कर अपने शरीर को ऊपर उठाइए और पानी में पैर चलाइए.
मैं पैर चलाने लगी.
ट्रेनर ने कहा कि मुझे कुछ दिन ऐसे ही प्रैक्टिस करनी होगी. ट्रेनर ने कुछ और प्रैक्टिस रोज करने के लिए भी कहा.

कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा. मेरी दो से चार की टाइमिंग में बहुत ही कम लोग आते थे. सिर्फ 3-4 लड़कियां ही थीं. उनमें से एक लड़की से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई. उसका नाम शेफाली था, वो शादीशुदा थी और काफी अमीर घराने की लगती थी.

देखते ही देखते हम दोनों काफी अच्छी सहेलियां बन गईं. वो मुझे स्विमिंग सीखने में काफी मदद करती थी. उसे काफी अच्छी स्विमिंग आती थी.

एक दिन मैंने उससे पूछा- आपको तो इतनी अच्छी स्विमिंग आती है, तो फिर भी आप यहां सीखने क्यों आती हैं?
इस पर उसने मुझे बताया- मैं यहां सीखने नहीं, सिर्फ स्विमिंग के लिए ही आती हूं. मेरे हस्बैंड पूरा दिन ऑफिस में होते हैं … तो मैं घर में बोर होती हूं. इसलिए यहां मैं स्विमिंग के लिए आती हूं. स्विमिंग से बॉडी फिट रहती है … बस इसलिए.

मैंने पूछा- आपके हस्बैंड क्या करते हैं?
उसने बताया- वो एक बहुत बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.
इसी तरह की कुछ और बातचीत के बाद हम दोनों जुदा हो गयी.

एक दिन मैं स्विमिंग इंस्टिट्यूट से घर जाने के लिए निकली और ऑटो के लिए इन्तजार कर रही थी कि तभी शेफाली अपनी कार लेकर आई.
उसने मुझसे कहा- चलो मैं तुम्हें ड्राप कर देती हूं.
मैंने उसे मना किया.
उसने मुझसे पूछा- अच्छा ये तो बताओ तुम्हारा घर किस तरफ है?
मैंने उसे अपने घर की लोकेशन बताई, तो उसने कहा कि मैं भी तो उसी तरफ से आती हूँ … चलो मैं तुम्हें ड्राप कर दूंगी.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी कार में बैठ गई. उसने मुझे बताया कि उसका घर भी मेरे घर से करीब दो किलोमीटर और आगे है.
मैं उसे शुक्रिया कहने लगी.

इस पर उसने कहा- अब से तुम ऑटो से मत आया करो. मैं ही तुमको रोज लेने आ जाऊंगी … और छोड़ भी दूंगी.

इसी तरह उसके साथ मेरी गहरी छनने लगी.

दिन बीतने लगे. अब तो कभी कभी मैं उसे अपने घर भी ले आती मम्मी से मिलाती और अपने कमरे में ले जाकर उससे काफी देर तक बातें करती रहती.

एक दिन वो मुझे लेने नहीं आई, तो मैंने उसे फोन किया. उसने मुझे बताया कि आज मेरी कार खराब हो गई है … लेकिन तुम चिंता मत करो … मैं अपने हस्बैंड के साथ आ रही हूँ.

करीब 15-20 मिनट के बाद वो आई. कार उसके हस्बैंड चला रहे थे.

तब पहली बार मैंने शेफाली के हस्बैंड को देखा था. शेफाली का हस्बैंड बहुत ही स्मार्ट था. बड़ी ही स्ट्रांग पर्सनैलिटी थी. उसकी उम्र करीब 30 साल की होगी. वो बहुत ही हॉट लग रहा था. उसने ग्रे कलर का थ्री-पीस समर सूट पहन हुआ था. उसे देख कर मेरी तो चूत मचल उठी थी.

वो दोनों कार से नीचे उतरे. शेफाली ने मुझे अपने हस्बैंड से मिलवाया.

शेफाली- अंकुश ये रोमा है, मैंने तुम्हें बताया था न कि ये मेरे साथ स्विमिंग के लिए जाती है.
अंकुश- हैलो रोमा … नाइस टू मीट यू.
मैं- हैलो सर.
अंकुश- डोंट कॉल मी सर, जस्ट कॉल मी अंकुश.
मैं- ओके अंकुश.

हमारी ऐसे ही कुछ नार्मल सी बातें हुईं. फिर शेफाली ने कहा- चलो रोमा, स्विमिंग का टाइम हो रहा है. हम वैसे ही लेट हो गए हैं.
अंकुश- शेफाली अभी मेरी एक मीटिंग है. मैं चार बजे तुम दोनों को लेने के लिए आ जाऊंगा.
शेफाली- ओके हनी.

अंकुश हम दोनों को छोड़ कर जा चुका था, पर मेरे मन में उसी का चेहरा सामने आ रहा था.

फिर शाम चार बजे अंकुश हमें लेने भी आया.

अब तो कभी कभी अंकुश ही हमें स्विमिंग के लिए छोड़ने और लेने आता था.

कुछ दिन ऐसे ही और निकल गए.

फिर एक दिन संडे को शेफाली मेरे घर आई और उसने मुझसे कहा- चलो स्विमिंग के लिए चलते हैं.
हालांकि संडे को स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता था तो मैंने उससे कहा- शेफाली तुम भूल रही हो, आज संडे है. आज स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता है.

उसने कहा कि हां मुझे याद है, पर संडे के दिन स्विमिंग इंस्टीट्यूट में फैमिली अलॉउड होती है … और आज अंकुश भी हमारे साथ स्विमिंग के लिए चल रहा है. वो नीचे कार में इन्तजार कर रहा है. तुम जल्दी से तैयार हो कर आ जाओ.

ये सुन कर कि अंकुश भी स्विमिंग के लिए आ रहा है, मैं बहुत खुश हो गई. मैं जल्दी से तैयार होकर बाहर आई और कार में बैठ गई.
फिर हम स्विमिंग इंस्टीट्यूट पहुंचे.

उधर हम तीनों चेंजिंग रूम की तरफ बढ़े. जेन्ट्स ओर लेडीज चेंजिंग रूम दोनों अगल बगल में ही थे. मैं और शेफाली लेडीज चेंजिंग रूम की तरफ बढ़ गए और अंकुश अपना बैग लिए जेन्ट्स में चल गया.

चूंकि आज संडे होने की वजह सिर्फ फैमिली ही अलाउड रहती थीं. मगर तब भी आज स्विमिंग पूल में ज्यादा कोई नहीं थे. बस तीन कपल और एक फैमिली थी, जिनके साथ दो बच्चे थे.

हम तीन थे, मैं और शेफाली तो चेंज करके पूल में उतर गए थे, पर मुझे अंकुश अभी तक दिखाई नहीं दिया था.

मैं उसी की तरफ मतलब जेन्ट्स के चेंजिंग रूम की ओर नजरें गड़ाए हुए थी.

जैसे ही वो निकला, तो मैं उसे देखती ही रह गई. अंकुश सुपर हॉट लग रहा था. उसका गठीला बदन देख कर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था. उसने सिर्फ एक छोटी सी स्विमिंग वाली अंडरवियर ही पहने हुई थी, जिसमें से उसका उभरा हुआ बड़ा सा लंड अलग से ही दिखाई दे रहा था.

मैं तो उसे देखते दखते ही पूल के किनारे बैठी बैठी पूल में गिर पड़ी. मुझे गिरता देख शेफाली जोर जोर से हंसने लगी. मुझे भी हंसी आ गई.

फिर अंकुश भी पूल में उतरा और स्विमिंग करता हुआ हमारे पास आ गया.
मैं- अरे आपको तो काफी अच्छी स्विमिंग आती है.
अंकुश- जी हां … मैंने स्विमिंग में कभी मेडल्स भी जीते हैं और शेफाली को भी तो स्विमिंग मैंने ही सिखाई है.

शेफाली- हां रोमा, मुझे स्विमिंग अंकुश ने ही सिखाई है.
मैं- तो अंकुश जी मुझे भी सिखा दीजिए.

अंकुश- अरे तुम तो यहां स्विमिंग सीखने के लिए ही आती हो न … तो यहां के ट्रेनर ने अब तक तुम्हें तैरना नहीं सिखाया क्या?
मैं- हां वो ट्रेनर सिखाती तो है, पर मुझे तो लगता है कि उसे खुद ही ठीक से स्विमिंग नहीं आती है. मुझे तो शेफाली ही थोड़ा बहुत सिखा रही है.
अंकुश- ये तो गलत बात है. ट्रेनर को तो ठीक से सिखाना चाहिए. चलो कोई बात नहीं मैं आपको सिखा देता हूं.

तब अंकुश ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे पानी में उतारा और मुझे पानी में अच्छे से पैर चलना सिखाया, तो मैं पूल की वाल पकड़ कर पैर चलाने लगी. अब अंकुश ने मेरे पेट को सहारा दिया. शायद अंकुश को संकोच हो रहा था, पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था. मैं तो बस पैर चलाने में मस्त थी.

कुछ देर बाद मैंने अंकुश से कहा- प्लीज़, अब तुम मुझे फ्लोट करना सिखाओ न.
अंकुश ने मेरी तरफ देखा और जोर जोर से हंसने लगा. वो हंसते हुए कहने लगा कि इस स्विमिंग ड्रेस में या तो तुम फ्लोट कर सकती हो … या तो ये तुम्हारी स्विमिंग ड्रेस … दोनों एक साथ नहीं.

मैंने नाराज होते हुए कहा- क्यों क्या बुराई है इस ड्रेस में!
अंकुश बोला- सॉरी रोमा मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा रहा हूं … पर तुम्हारी ड्रेस ही इतनी बड़ी है कि तुम चाह कर भी इस ड्रेस में फ्लोटिंग नहीं कर पाओगी. स्विमिंग के लिए स्विमिंग ड्रेस जितनी छोटी होती है, उस ड्रेस में उतना ही स्विमिंग करना आसान होता है. जब मैं शेफाली को स्विमिंग सिखाता था, तो वो भी इतनी ही बड़ी ड्रेस पहनती थी. फिर मैंने उसे ये बिकिनी स्टाइल की टू-पीस स्विमिंग ड्रेस दिलाई थी. ये बहुत फ्री रहती है … इसमें स्विमिंग करना आसान होता है.

इस पर शेफाली बोली- रोमा, अंकुश ठीक बोल रहे हैं. पहले मुझसे भी स्विमिंग करते नहीं बनता था, पर अब देखो मैं भी काफी अच्छी स्विमिंग कर लेती हूं.

वहां 2-3 कपल भी थे, जो अपनी मस्ती कर रहे थे. फिर अचानक अंकुश को पता नहीं क्या सूझी, उसने शेफाली को पकड़ कर पूल में खींच लिया और वो दोनों मस्ती करने लगे.

उन दोनों की मस्ती कोई ऐसी वैसी मस्ती नहीं थी. वे दोनों एकदम कामुकता से भरी हुई मस्ती करने लगे थे. कभी अंकुश शेफाली की दोनों टांगों में हाथ डाल कर उसे ऊपर उठा देता तो कभी शेफाली खुद को बचाने के लिए अंकुश के शरीर का सहारा लेने के लिए उसके लंड को पकड़ ले रही थी.

उन दोनों की मस्ती देख कर मेरी चुत में तो मानो आग लग गई थी. मुझे अब किसी भी तरह अंकुश का लंड अपनी चुत में लेने का दिल करने लगा था. मगर ये सब कैसे होगा, ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.

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बारिश और मेरी चुत चुदाई

मेरा नाम मनीषा है मेरी उम्र 22 है! यह मेरी पहली चुदाई कहानी है. मैं इस साईट पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी है! दोस्तों आम तौर पर सब लोग यही मानते है कि सेक्स को लेकर लड़को में बहुत जोश होता है! यह बात एकदम सही है,  लेकिन यह बात भी मान लीजिए कि लडकियों में भी सेक्स को लेकर उतना ही जोश होता है! पर हम लड़को को पता नहीं लगने देते! मेरी सभी दोस्त इस साईट की कहानियों को पढ़कर बहुत मज़े लेती है!

आज में आप सभी से जो कहानी शेयर कर रही हूँ………..

चरम सुख और उत्तेजना अपनी पार्टनर को दीजिए जिसकी वो हकदार है

इससे बस यही साबित होता है कि एक लड़का और एक लड़की के बीच सिर्फ़ एक ही रिश्ता हो सकता है और वो आप सभी जानते होंगे.

लीजिए में अपनी कहानी पर आती हूँ! दोस्तों यह पिछले साल बरसात के दिनों की बात है! हमारे कॉलेज की छुट्टी हुई और अचानक मौसम खराब हो गया और जोरों से बारिश होने लगी! में कुछ देर तो कॉलेज में रुकी और एक घंटे तक में वहाँ पर खड़ी रही. लेकिन बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और अब धीरे धीरे रात भी होने को थी. तो में बारिश में भीगते भीगते अपने घर पर आ गयी!

घर पर पहुंचते पहुंचते मुझे 7 बज गए थे और बहुत अंधेरा भी हो चुका था और उस समय घर पर लाईट भी नहीं आ रही थी! मैं दरवाजा बजाया तो मेरा छोटा भाई रमेश दरवाजे पर आया और उसने दरवाजा खोला………..

वो मुझसे दो साल छोटा था!

रमेश :- आप तो बिल्कुल भींग गई हो

में :- तो में क्या करती रेनकोट ले जाना भूल गई थी.. क्या तू एक काम करेगा?

रमेश :- हाँ दीदी!

में :- तू मेरे लिए चाय बना दे..  मुझे बहुत ठंड लग रही है!

रमेश :- ठीक है……….. में अभी बनाकर लाता हूँ!

फिर में अपने कमरे में चली गई………..

बाहर मौसम अब ठीक हो चुका था………..

लेकिन हवा तेज़ चल रही थी और में मोमबत्ती जलाकर अपने रूम तक गयी………..

लेकिन रूम तक जाते जाते मोमबत्ती बुझ गई और फिर में बाथरूम में कपड़े चेंज करने गई और मैं एक एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिए! तभी मुझे याद आया कि मैं टावल तो लिया ही नहीं………..

तो मैं बाथरूम के दरवाजे को हल्का सा खोला और देखा कि ज्यादा अंधेरे में बाहर कुछ भी नहीं दिख रहा था! फिर में धीरे धीरे अलमारी की ओर जाने लगी जो कि दरवाजे के बिल्कुल पास थी और में अलमीरा के पास पहुंच गई थी………..

तभी अचानक तेज लाईट के कारण मेरी आखें बंद हो गयी………..

लेकिन जब मैं आंखे खोली तो में सहम गई………..

मेरा भाई मेरे सामने खड़ा है एक हाथ में चाय का कप और दूसरे में बुझी हुई मोमबत्ती लेकर! मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूं और वो मेरे 34 साईज के चूचियो को तो कभी मेरी नंगी बुर को देख रहा था………..

मानो जैसे उसकी लाटरी लग गयी हो! मैं एक हाथ से बुर और एक हाथ से चूचियो को छुपा लिया और उसे डाटते हुए बोली कि रमेश हट जा और फिर में दौड़ते हुए बाथरूम में चली गई!

रमेश :- सॉरी दीदी ( वो चाय लाया था ) मुझे माफ़ करना वो मोमबत्ती हवा से बुझ गई और में यह चाय टेबल पर रख देता हूँ और फिर वो चला गया………..

लेकिन पता नहीं क्यों मुझे गुस्सा सा आ रहा था?

फिर मैं सोचा कि इसमें उसकी क्या ग़लती थी! में भी तो जवान हूँ बहुत खूबसूरत हूँ भला 34 इंच के चूचियो गोरा रंग 26 इंच की कमर 34 इंच की गांड को देखकर कोई भी पागल हो सकता है! फिर ऐसे ही मैं अपने आप को कांच में देखा………..

में सच में क़यामत लग रही थी तो मैं बुर के भीगे बालों पर हल्का हल्का हाथ फेरा तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा! फिर मैं सलवार सूट पहन लिया और फिर में किचन में आ गयी………..

लेकिन में अपने भाई से आंख भी नहीं मिला पा रही थी और उसे बार बार अनदेखा कर रही थी और वो भी बहुत उत्सुकता महसूस कर रहा था! फिर मैं ही आगे होकर उससे बात शुरू की………..

में :- क्या पापा ऑफिस गए है?

रमेश :- हाँ उनका नाईट शिफ्ट है और वो कल सुबह आएँगे……….. लेकिन सॉरी दीदी वो में आपके कमरे में!

में :- कोई बात नहीं……….. कभी कभी हो जाता है और उसमें तुम्हारी कोई ग़लती नहीं थी……….. लेकिन अब तुम आगे से ध्यान रखना ठीक है और अब भूख लगी है तो चलो किचन में खाना बना लेते है!

रमेश :- हाँ ठीक है दीदी!

दोस्तों मेरे परिवार में हम तीन लोग ही रहते थे! इसलिए घर का सभी काम हम लोग मिल बाँटकर करते थे………..

फिर हम इधर उधर की बातें करते करते खाना बनाने लगे! तभी अचानक से मेरी गांड रमेश से टकरा गयी और मुझे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ? तो मैं पीछे मुड़कर देखा तो उसके पजामे में उसका कामदेव (लंड) तंबू बनकर खड़ा हुआ है! लेकिन इस बात से वो बिल्कुल अंजान होने की कोशिश कर रहा था! तो मैं भी अनदेखा कर दिया………..

तो इससे उसकी हिम्मत और बढ़ गई और कुछ देर के बाद उसने फिर से मेरी गांड में अपना कामदेव (लंड) सटाया! फिर में कुछ दूर जाकर खड़ी हो गयी……….. वो भी मेरे और करीब आ गया! तभी मैं गौर किया कि वो मेरे चूचियो को अपनी तिरछी तिरछी निगाहों से देख रहा था………..

क्योंकि मैं दुपट्टा हटा रखा था तो मेरे चूचियो का पूरा आकार साफ साफ नज़र आ रहा था! फिर कुछ देर में खाना बनकर तैयार हो गया और फिर हम करीब 9 बजे खाना खाने बैठे………..

हम टीवी देखकर खाना खा रहे थे तो अचानक उसने मुझसे पूछा कि………..

रमेश :- दीदी क्या आपसे एक बात कहूँ?

में :- हाँ क्यों नहीं……….. बोलो ना!

रमेश :- आप बहुत सुंदर हो!

उसकी आवाज़ आज मुझे कुछ अलग सी लग रही थी!

रमेश :- वो आज आपको बिना कपड़ो के देखा तो मुझे पता चला कि आप कितनी सुंदर हो?

में :- अपनी बकवास बंद कर नहीं तो में एक थप्पड़ लगाऊँगी और चुपचाप खाना खा!

फिर वो कुछ नहीं बोला और हम खाना खाकर टीवी देखने लगे करीब आधे घंटे बाद मैं उससे चेनल चेंज करने को कहा……….. क्योंकि मुझे सीरियल देखना था……….. लेकिन उसने साफ साफ मना कर दिया और वो टीवी देखने लगा रिमोट उसके पास में था! तो मैं झटके से रिमोट उठा लिया और चेनल चेंज कर दिया और रिमोट सोफे पर रखकर उस पर बैठ गयी!

रमेश :- रिमोट मुझे देती है या नहीं!

में :- नहीं दूँगी!

रमेश :- प्लीज़ दो ना मुझे टीवी पर कुछ देखना है!

में :- में नहीं दे रही और तुम्हें जो करना है कर लो!

दोस्तों ये कहानी आप अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम पर पड़ रहे है!
कुछ देर वो चुप बैठा फिर अचानक उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड पर रख दिया और मुझे अपनी ओर खींच लिया में बहुत हैरान थी और में एक झटके में उसकी गोद में आ गई थी! फिर उसने रिमोट ले लिया………..

लेकिन मुझे नहीं छोड़ा में अब भी उसकी गोद में ही थी और में उससे छूटने की कोशिश कर रही थी……….. उसने मुझे बहुत मजबूती से पकड़ रखा था!

में :- रमेश यह क्या कर रहे हो?

रमेश :- अभी आपने ही तो कहा था ना जो करना है करो लो!

में :- बेशरम आने दो पापा को में तुम्हारी……….. मैं उसकी नाक पर ज़ोर से मारा तो उसने मुझे छोड़ दिया और में जैसे तैसे सोफे से उठी और दुपट्टा लेकर वहाँ से जाने लगी! तभी उसने मुझे पीछे से मेरी कमर को पकड़ कर सोफे पर पटक दिया! मेरी तो चीख निकल गई और उसने बिना समय गवाएं मेरे मुहं पर रुमाल बाँध दिया और फिर मेरे दुपट्टे से मेरे हाथ बाँध दिए! अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि में क्या करूं और वो पूरी तरह से पागल हो गया था! में उससे छुटने की पूरी कोशिश कर रही थी और में अपने पैर से उसे दूर कर रही थी! फिर मेरा एक पैर उसके कामदेव (लंड) पर जाकर लगा तो वो दर्द के मारे वहीं पर बैठ गया और मुझे मौका मिला……….. में सोफे से उठी……….. लेकिन उसने मुझे पकड़ लिया और फिर सोफे पर पटक दिया!

रमेश :- साली तू बहुत लात चलाती है रुक जा!

में रमेश के मुहं से यह सब सुनकर बहुत हैरान थी और मुझे अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था! फिर उसने मेरे दोनों पैरों को पकड़कर फैला दिया और वो खुद मेरे ऊपर लेट गया एक हाथ से उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने लगा और दूसरे हाथ से वो मेरे चूचियो को मसलने लगा! उसने मेरी सलवार को नीचे किया और अपनी पेंट और अंडरवियर को नीचे करके अपना कामदेव (लंड) बाहर निकाला लिया! फिर वो मेरीचड्डीमें अपना एक हाथ डालकर मेरी बुर को सहलाने लगा और में उससे छूटने की कोशिश कर रही थी! मेरा सर सोफे से नीचे लटक रहा था और में पूरी ताक़त लगाने के बावजूद भी हिल नहीं पा रही थी! उसने मेरीचड्डीको साईड से हटाकर कामदेव (लंड) का टोपा मेरी बुर में रख दिया………..

में लाचारी से उसकी ओर देख रही थी! फिर उसने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका आधा कामदेव (लंड) मेरी बुर में घुस गया……….. मेरी तो जान ही निकल गयी! फिर दूसरा झटका दिया और पूरा का पूरा कामदेव (लंड) अंदर! अब में दर्द से मरी जा रही थी और मेरी दोनों आँखों से गरम गरम आंसू निकल रहे थे और वो कामदेव (लंड) को ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था और अब मैं विरोध करना बंद कर दिया! वो भी मुझे चोदने का मज़ा लेने लगा………..

मैं अपनी दोनों आखें बंद कर ली……….. लेकिन आंसू नहीं रुके……….. इतना दर्द मुझे कभी नहीं हुआ!

फिर उसने मेरा शर्ट खोलना चाहा……….. लेकिन मेरे दोनों हाथ बंधे होने के कारण वो सिर्फ़ कंधे तक ही मेरा शर्ट खोल पाया! वो मेरी गर्दन, कंधे, गाल और पीठ पर किस करता रहा! में लगभग बेहोश हो चुकी थी……….. तभी वो बहुत घबरा गया और उसने मेरा मुहं खोल दिया……….. लेकिन मैं कोई हलचल नहीं की! फिर उसने पानी लाकर मेरे मुहं पर मारा तो मुझे थोड़ा होश आया और मैं उससे कहा कि प्लीज़ मुझे खोल दो तुम्हें जो करना है कर लो………..

लेकिन धीरे धीरे! वो बहुत खुश हो गया और मुझे किस करने लगा! फिर उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और उसका कामदेव (लंड) 6 इंच का बिल्कुल तना हुआ था और उस पर मेरी बुर का खून लगा हुआ था! तो उसने रुमाल से खून को साफ किया और कामदेव (लंड) को मेरे होठों पर रख दिया! मैं मुहं हटा लिया……….. लेकिन उसने दोनों हाथ से मेरे मुहं को पकड़ लिया और कहा कि प्लीज़ ले लो ना……….. नहीं तो मुझे फिर से ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी! अब मेरे पास कोई और रास्ता भी नहीं था……….. मैं होंठ को हल्के से खोला और उसके कामदेव (लंड) के टोपे को मुहं में लिया और फिर में उसके कामदेव (लंड) को धीरे धीरे चूसने लगी और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी!

फिर दो तीन बार ऐसा करने के बाद उसने मेरे मुहं में पूरा कामदेव (लंड) घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा……….. उसे तो मानो जन्नत ही मिल गयी हो और तीन मिनट के बाद उसने मुझे सोफे से उठाया और मेरे हाथ खोल दिए और मेरे कपड़े खोलने लगा और देखते ही देखते में बिल्कुल नंगी हो गई! और उसने मेरी बुर के खून को साफ किया! फिर वो सोफे पर बैठ गया और मुझे अपनी गोद में बैठने को बोला……….. लेकिन में वहीं पर खड़ी रही! तो उसने मेरा हाथ खींचकर मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और फिर उसने मुझे किस करना चाहा……….. लेकिन मैं दूसरी ओर अपना मुहं मोड़ लिया! फिर वो मेरे चूचियो को चूसने और सहलाने लगा! मेरे मुँह से आहें निकलने लगी! वो कभी चूचियो पर किस करता……….. कभी कमर को सहलाता तो कभी मेरी गांड को सहलाता और में कहे जा रही थी अह्ह्ह प्लीज़ रमेश आआहहा आ प्लीज़ नहीं ऐसा मत करो! फिर उसने मौका देखकर अपना कामदेव (लंड) मेरी बुर में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा……….. लेकिन इस बार मुझे दर्द थोड़ा कम हुआ!

फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद उसने एकदम से अपनी स्पीड बढ़ा दी और मेरी कमर को पकड़ कर धक्के देने लगा! फिर कुछ देर बाद वो बहुत थक गया था और शायद उसका वीर्य निकल चुका था और वो अपनी दोनों आंखे बंद करके बस मेरी कमर को सहला रहा था! मेरी सांसे बहुत तेज चल रही थी और मैं उसकी ओर देखा और फिर मैं उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और में खुद अपनी बुर के झटके उसके कामदेव (लंड) पर मारने लगी! तभी वो तो बहुत चकित रह गया और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और हम एक दूसरे को किस करने लगे! फिर पूरी रात हमने सेक्स किया !!

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मेरी चुदाई

शुरू से जवान होने तक मेरी बहुत सारी ऐसी यादें हैं जिनके बारे में मुझे पता नहीं था कि मैं खेल खेल में ही, अनजाने में सेक्स सीख रही थी. वो सब खेल ही थे, जो हम सबको सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं.

हम इस साइट पर हैं और हम सब यंग हो गए हैं इसी लिए इस साइट पर हैं. हम सब जानते हैं कि सेक्स करने की उम्र और सेक्स के लिए दोनों तरफ की कोशिश जरूरी होती है. आप और मैं सेक्स के बारे में काफी कुछ जानते हैं. इस साइट पर कमेंट पढ़ने के बाद मुझे लगा कि कुछ लोग तो ज्यादा ही जानते हैं.

मुझे लगता है कि मैं जो कहानी आपको बताऊंगी, उससे आप सब कुछ गलत नहीं सोचेंगे और उसका कोई गलत मतलब नहीं निकालेंगे.

मैं मेरठ से एक शादीशुदा महिला हूं. अभी 25 वर्ष की हूँ. इससे ज्यादा और डिटेल्स देने की जरूरत नहीं होगी. या शायद मैं अपनी निजी जानकारी इससे अधिक दे भी नहीं सकती हूँ.

मेरी सोच सेक्स की समझ में बारे में आपसे अलग हो सकती है. मुझे लगता है कि हम कम उम्र से सेक्स के बारे में सीखते हैं. सेक्स करने की उम्र और जिस्म की गर्मी तक हम इंतजार करना चाहिए. छोटी उम्र में सेक्स करने से शरीर में बीमारी हो सकती है और अंग खराब हो सकते हैं. हमें इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

हम सब सेक्स करते हैं और किसी वीडियो से या किसी दोस्त की बात सुन कर या अब इस साइट पर पढ़ कर सेक्स करने के नई तरीके को जानने लगे हैं. पर क्या ये वीडियो या दोस्त हमें सेक्स करना सिखाते हैं. या हम कहीं और से सीखते हैं. एक बार इस बारे में आप सोचना और कमेंट करके अपनी राय देना.

मैं अपनी बात करूं, तो शुरू से जवान होने तक बहुत सारी ऐसी यादें हैं, जिनके बारे में मुझे पता नहीं था और खेल खेल में ही अनजाने में सेक्स सीख रही थी. अब जवान होने पर समझ आया कि वो सब खेल ही थे, जो हम सबको सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं.

ऐसे ही कुछ खेल या सेक्सी खेल के बारे में मैं आपसे शेयर कर रही हूं.

मैं एक बार भाई और मम्मी के साथ अपने मामा के यहां गई थी. वहां मामा के और कुछ पड़ोस के लड़के लड़कियां भी थी. जिनके साथ हम दोनों भाई बहन खेलते थे.

हम सब कभी डॉक्टर का खेल खेल कर चूतड़ पर सुई लगाते और डॉक्टर की तरह ही रगड़ कर मज़े करते थे. कभी कभी तो छोटे से लंड से ही इंजेक्शन लगाया जाता था. पर उस समय हम सब की उम्र एक समान ही थी, जिससे सेक्स तो नहीं होता था. बस हमारा खेल होता था.

कभी घर बनाकर उसमें कुछ लोग मम्मी पापा का किरदार करते और उनकी शादी होती. फिर एक दूसरे के ऊपर लेट कर सेक्स करने की कोशिश करते. ऐसा हम में से कई लोग ने किया होगा. शायद आप भी उस समय में ये सब करते रहे होंगे. हम सेक्स करते हुए अपने अंगों को जबरस्ती सेक्स करने की कोशिश में रगड़ते थे, पर होता कुछ नहीं था.

कई बार मैंने देखा कि हम उंगली से पकड़ कर छोटे से लंड को चूत में डालने की कोशिश करते थे, पर किसी भी लड़के का लंड चूत में जाता ही नहीं था. बिल्कुल छोटा सा नुन्नू जैसे लंड को साथ की लड़कियों की चूत के छेद के बाहर ही रगड़ते हुए मज़े लेते रहते थे. मेरे मामा की बेटी को ये करना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि वो हम सब से थोड़ी बड़ी थी.

मुझे एक और बात याद आती है. जब कोई लड़की पेशाब करती या लड़का पेशाब करता, तो हम एक दूसरे के अंगों को ध्यान से देखते कि हमारा ऐसा नहीं है. कभी कभी तो हाथ में पकड़ कर, हाथ से सहला कर देखते और एक दूसरे से पूछते कि तेरी सूसू मेरे जैसी क्यों नहीं है. तो दूसरा लड़का बोलता कि तेरी अभी उगी नहीं है. थोड़े दिन बाद तेरी भी सूसू बड़ी हो जाएगी. पर आज तक किसी भी लड़की का बड़ा नहीं हुआ क्योंकि असलियत में वो चूत थी, लंड नहीं.

ये सोच कर कभी कभी हंस देती हूं कि मेरी सूसू अभी तक बड़ी नहीं हुई है. हां चूत लंड जैसी कैसे बड़ी हो सकती है, वो तो सही से फ़ैल गई है. और सेक्स भी मजे से करती है.

एक और खेल हमने बहुत खेला था, जिसमें हम सब लड़कियां नंगी होकर कुत्ते की तरह हाथ और घुटने से चलती थीं और लड़के पीछे से नंगे होकर हमारे चूत और चूतड़ के छेद को जीभ से चूसते थे. हम लड़कियां, गुदगुदी होने पर आगे सरक जातीं. वो फिर से चाटते और फिर कुत्ते की तरह ऊपर चढ़ कर लंड अन्दर डालने की कोशिश करते. सच में इस खेल में बहुत मज़ा आता था.

मुझे बहुत बार की हुई ऐसी ही घटनाओं में याद है कि जब रात में हम सब सोते, तो मम्मी हमारे पास से उठ जाती थीं और पापा के पास लेट जाती थीं. वो समझते थे कि उनकी औलादें सो जाते हैं, पर हम उनकी सभी हरकतों पर ध्यान देते थे. कैसे वो किस करते हैं, चूची चूसते हैं और पापा मम्मी के ऊपर चढ़ कर उनकी चुदाई करते हैं.

मैंने कई बार तो मामी को मामा का लंड मुँह में चूसते हुए भी देखा था. मेरे मामा की संतानों ने भी ये देखा था. उसी को याद करते हुए हम दिन में खेलते हुए वैसे ही एक दूसरे की सूसू को चूसते थे और मज़े करते थे. पर उस समय इन सब बातों का पता नहीं था.

और एक खेल तो सबने खेला ही होगा. छुप्पन छुपाई वाला (हाइड एंड सीक). उस खेल में किसी के साथ कोने में छिपना और एक दूसरे के शरीर पर हाथ रगड़ना. चूची दबाना. लंड का किसी लड़की के हाथ में पकड़ा कर मज़े लेना. कभी कभी तो सेक्स करने के लिए अन्दर डाला.

अगर मैं ज्यादा बात करूं, तो सभी लड़के अपनी सेक्स की शुरुआत एक दूसरे की गांड मारने से ही करते हैं. अब भी और लड़कियां एक दूसरे की चूची दबा कर, या चूत चूस कर अपने जीवन के सेक्स की शुरुआत करते हैं.

मैंने भी जब अपनी जवान होते शरीर को महसूस किया, तो मामा की बेटी के साथ ही चूची दबा कर मस्ती की थी. पर ज्यादा जोर नहीं दिया था, क्योंकि घर वालों के बीच में समय नहीं मिलता था. प्राइवेसी की बहुत प्रॉब्लम होती थी. घर वाले भी हम पर ध्यान रखते थे. मगर ये सब करके बहुत अच्छा लगता था. ये बिल्कुल एडवेंचर की तरह ही था.

जब मैं जवान होने लगी, तो मम्मी, बुआजी, मामी सब बड़ी लेडीज ने मुझे मेरे शरीर में होने वाले बदलाव (पीरियड्स) के बारे में कई बार समझाया था.

मेरे चूची के उभार मैंने हर दिन महसूस किए हैं. कब वो नींबू की तरह छोटे छोटे थे. फिर संतरे बने और अब तो 34 साइज के हो गए हैं.

मेरे साथ पढ़ने वाली फ्रेंड्स के चूचे और चूतड़ देख कर मैं अजीब सा महसूस करती थी कि वो भी अब जवान हो गई हैं.

अपनी चूत पर आने वाले हल्के बाल और उन छोटे छोटे से बालों में टॉयलेट करते हुए चुत को सहलाना, फिर उन बालों की सफाई करना. फिर वो बाल घने और काले हो गए. बहुत मन होता था कि ये सब किसी लड़के के साथ किया जाए.. पर कभी हिम्मत नहीं हुई.

कई बार हमने सुना होगा कि वो वहां सेक्स करते पकड़े गए, उनकी पिटाई हुई. शायद इसीलिए हम सबको, घर वाले अच्छे से रहना सिखाते थे. कहीं कुछ बदनामी ना हो जाए.

मैंने अपने ही घर में बड़े भाई को भाभी के साथ कमरे में घुसते देखा. कमरे के अन्दर क्या चल रहा होगा, मैं ये भी जानती थी.

पड़ोस की आंटी कई बार मम्मी के पास बैठ कर सेक्स की बातें करती थीं. तो मम्मी मुझे वहां से जाने के लिए बोल देती थीं.
पर मैं उनकी बातों को छुप कर सुनती थी.
आप में कई लड़कियां भी ऐसे ही सुनती रही होंगी.

मम्मी और आंटियां बहुत खुल कर एक दूसरे से सेक्स डिस्कस करती थीं और अपनी चुदाई के बारे में भी बताती थीं.

एक बार आंटी ने मम्मी को बताया कि रात में अंकल ने उन्हें घोड़ी बना कर उनकी गांड में लंड पेल दिया. उन्हें बहुत दर्द हुआ. पर अब वो सोच रही हैं कि आज रात अंकल से बोल कर गांड में ही लंड डलवाएंगी.

काल्पनिकता की बात अलग है. यहां तो कहानी में सब साले भाई, बहन, मां पापा, दीदी, बुआ, मामी, चाची, चाचा, मामा पता नहीं किस किस रिश्ते में चुदाई कर देते हैं. पर ऐसा सच में नहीं होता है. और ऐसा सोचने से प्रॉब्लम हो जाती है. क्योंकि हमारे संस्कार हमें ये सब करने की इजाजत नहीं देते. हमारे देश में संस्कारों का बहुत महत्व है और होना भी चाहिए.

पर सच तो ये है कि हम अपनी उम्र के हिसाब से अपने शरीर की जरूरत पूरी करने के चक्कर में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बनाते हैं और कभी कभी तो किसी दूर के रिश्ते जैसे भाभी जीजा कजिन से भी चुदाई कर लेते हैं.

अब 2020 में तो बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड आम बात हो गई है. शादी से पहले ही लड़के लड़कियां अपनी प्यास बुझाते हैं. स्कूल, कॉलेज, पार्क, बस, रेल, शादी जहां भी जाते हैं, बस नई दोस्त बनाने की कोशिश करते हैं. असलियत में हम एक दूसरे में सेक्स ढूंढते हैं.

पर मुझे मालूम है कि मैंने पहली बार सेक्स अपने पति से ही सुहागरात में किया था. हमारी शादी लव मैरिज तो नहीं, पर मैं अपने पति को शादी से पहले ही जानती थी. फिर उनकी जॉब आर्मी में लग गई और हमारी शादी हो गई.

शादी की तैयारी के समय मेरे मामा बुआ की बेटियां आई हुई थीं. वो सब शादीशुदा थीं और उनकी संतानें भी थे. उन सबको सेक्स का अच्छा एक्सपीरिएंस हो चुका था.

उन्होंने मुझे अपनी सुहागरात की कहानी सुनाई. कैसे उन्होंने अपनी चूत में पहला लंड लिया और उनके पति उन्हें किस किस पोजिशन में चोदते हैं. हम सबने इन बातों का बहुत मज़ा लिया और अपने पुराने सब सेक्सी खेल याद किए.

बुआ जी की बेटी ने बताया कि वो शादी से पहले उंगली डाल कर अपना पानी निकालती थी.
तो मामा की बेटी बोली कि तूने हमको नहीं सिखाया, नहीं तो हम सब साथ में ही मज़े लेते.

इस तरह हंसते खेलते मेरी शादी हो गई. पति आर्मी में जॉब करता है. उसका अच्छा खासा शरीर है.. बिल्कुल पहलवान की तरह.

पर हमारी सुहागरात की कहानी बिल्कुल अलग है. हम दोनों किस्मत से पहली बार सेक्स कर रहे थे और हम दोनों को ही ज्यादा नॉलेज नहीं थी. मेरे हसबैंड ने मेरी चूत को पहली ही बार बुरी तरह चोदा. मैं तो बहुत देर तक रोई और पूरी रात सो भी नहीं पाई थी. कमरे में कोई दवाई भी नहीं थी दर्द कम करने की.

फिर सुबह जब हमने दोबारा सेक्स किया. तब मुझे अच्छा लगा और हमने सुबह दो बार चुदाई की.

अब तो मैं हसबैंड के छुट्टी आने का वेट करती हूं और फिर हम दोनों दबा कर चुदाई करते हैं. एक दिन में 3-4 बार से कम में आत्मा को शान्ति ही नहीं मिलती है.

कभी कभी तो वीडियो कॉल करते हुए भी मज़े ले लेते हैं. पर अब भी जब सेक्स करती हूं, तो अपने पुराने समय की वो सब बातें याद आती हैं.

मेरी तरह आपने कई ऐसे खेल खेले होंगे, मुझे कमेंट करके जरूर बताएं. मुझे आप सबके खेल के बारे में जान कर अच्छा लगेगा कि आपने किस के साथ, कब ऐसे खेल खेले, जो सेक्स से जुड़े हुए थे.

ये कोई मेरी सेक्स कहानी नहीं थी, मगर इसमें जीवन का सच्चा सेक्स छिपा था.

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