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मेरी चूत की प्यास

सभी दोस्तो को मेरा हैलो। मेरा नाम ज्योति है. मैं अपनी ससुर बहू सेक्स स्टोरी बता रही हूँ. मजा लें.

मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं. घर पर सिर्फ मेरे पति, मैं, हमारा एक बच्चा और मेरे ससुर रहते हैं. हमारा घर दो बी.एच.के. का है जिसमें दो बेडरूम, एक हॉल, एक किचन है.

मेरे ससुर गवर्नमेंट जॉब पर हैं और उनकी उम्र पचपन के करीब है. मगर वो दिखने में 45 से ज्यादा के नहीं लगते हैं. अगर मैं अपने बारे में बात करूं तो मेरी शादी के समय मैं काफी स्लिम थी. मगर शादी और बच्चा होने के बाद मेरे शरीर में काफी बदलाव आ गये.

अब मेरा शरीर काफी फूल गया और मेरा फिगर 38-32-36 का हो गया. मेरे बाल मेरी कमर तक आते हैं. मेरी गांड काफी मस्त है और मेरे बूब्स का तो कहना ही क्या. मेरी ब्रा उनको संभाल नहीं पाती है.

जहां तक मेरी सेक्स लाइफ की बात है तो वो एकदम से नीरस हो चुकी थी. मेरे पति ने भी अब मेरे अंदर रूचि लेना करीब करीब बंद ही कर दिया था.

मगर मैं तो सेक्स के लिए हमेशा ही तैयार रहती थी. अपने पति से उम्मीद करती थी कि वो मेरी चूत को अपने लंड का स्पर्श देकर मेरी प्यास को शांत करेंगे लेकिन मेरी उम्मीद केवल एक उम्मीद ही बन कर रह गयी थी.

ऐसे में मैं आप लोगों से पूछना चाहती हूं कि मैं भला अपने आपको कब तक रोक कर रखती और कब तक अपने आप को शांत रख पाती?
मैंने अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए बहुत दिमाग दौड़ाया.

पड़ोसी का जवान लड़का, दूध वाला, गली का धोबी आदि सबके बारे में सोचा लेकिन कोई ऐसा मिल ही नहीं रहा था कि मेरी चूत को लंड का सुख दे सके. मैं काफी उदास और खिझी खिझी रहने लगी थी.

एक दिन मैं सुबह काम कर रही थी. मैं झाड़ू लगाती हुई अपने ससुर के कमरे में पहुंची तो वो उस वक्त अपने बेड पर सो रहे थे. उन्होंने रूम का दरवाजा खुला रखा हुआ था और मैंने उनको जगाना ठीक नहीं समझा. मैं नहीं चाहती थी कि उनकी नींद खराब हो.

मैंने देखा कि उन्होंने टांगों में कुछ नहीं पहना हुआ था. न धोती और न कोई पजामा. केवल अपने अंडरवियर को पहने हुए सो रहे थे. उनके अंडरवियर के फूले हुए भाग ने मेरा ध्यान खींच लिया.

उनका लिंग उनके ढीले कच्छे से एक ओर निकल कर बाहर झांक रहा था. मैंने गौर से उनके लिंग के अग्रभाग को देखा. उनका सुपारा गाजर के रंग का था. लिंग का रंग गहरा सांवला था. देखने में काफी रसीला लग रहा था इसलिए नजर भी वहीं पर जैसे चिपक रही थी बार बार.

मेरी चूत में सरसरी सी दौड़ने लगी. मगर मैं कुछ कर नहीं सकती थी इसलिए झाड़ू लगा कर बाहर आ गयी. बहुत कोशिश की मैंने कि ससुर के खयाल को मन से निकाल दूं. मगर ससुर का मोटा लिंग जिसके दर्शन मैंने सुबह सुबह किये थे उसके खयाल मन से नहीं निकल रहे थे.

बहुत सोच विचार के बाद आखिर मैं इसी निष्कर्ष पर पहुंची कि मेरी चूत की प्यास को ससुर के लंड से ही शांत करवाऊंगी.
अगले ही दिन से मैंने इसके लिए अपनी प्लानिंग भी शुरू कर दी.

अब मैं अपने ससुर के सामने अपने बदन की नुमाइश करने लगी थी. उनको अपनी कमर ज्यादा से ज्यादा दिखाने की कोशिश करती थी. मुझे नहीं पता कि वो ध्यान भी दे रहे थे या नहीं! लेकिन मैं बार बार उनके सामने जाती रहती थी.

भी तक मुझे ऐसा कोई सिग्नल ससुर की तरफ से नहीं मिला था जिससे मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे जिस्म में कुछ रूचि ले रहे हैं.

ये पैंतरा फेल होने के बाद मैंने सोचा कि उनको अपने क्लीवेज दिखाऊंगी. एक रोज जब मैं उनको दोपहर का खाना परोसने गयी तो मैंने पहले से ही अपने ब्लाउज का एक बटन खोल लिया. मैंने अपने बूब्स को हल्का सा बाहर कर लिया ताकि मेरी चूचियों की घाटी ससुर जी को आसानी से नजर आ जाये.

जब मैं सामने से खाना परोस रही थी तो मैंने घूँघट डाल लिया था. मैं सामने झुक कर खाना डालने लगी तो देखा कि उनकी नजर मेरी चूचियों की घाटी में झांक रही थी. जब तक मैं वापस सीधी न हो गयी तब तक वो मेरी चूचियों को ताड़ते रहे.

फिर दोबारा जब खाना दिया तो मैं कुछ ज्यादा ही नीचे झुक गयी और मैंने ससुर जी को अपनी चूचियों के दर्शन जी भर कर करवा दिये. अब वो मेरे जाल में फंस गये थे. तीर सही निशाने पर लगा था.

अब मैं कई बार दिन में उनसे जानबूझकर टकराने लगी ताकि उनके अंदर हवस के शोले भड़का सकूं.

एक एक करके दिन बीत रहे थे ससुर बहू सेक्स के लिए मेरी तड़प अब और तेज होती जा रही थी.

एक दिन मेरे पति मेरे बेटे को लेकर हमारी रिश्तेदारी में गये हुए थे. उस दिन घर पर मेरे ससुर जी और मैं अकेले थे.

उस दिन मैंने सोच लिया था कि आज की रात ससुर जी का लंड अपनी चूत में किसी भी तरह ले ही लूंगी. आज से ज्यादा अच्छा मौका ससुर बहू सेक्स का फिर नहीं मिलेगा.

एक बार ससुर को मेरी चूत की लत लग गयी तो फिर मेरे लिये अपनी चूत चुदवाने की राह बिल्कुल आसान हो जायेगी.

रात को मैंने ससुर जी को खाना दिया और फिर नहाने के लिए मैं बाथरूम में घुस गयी. मैंने अंदर जाकर अपने बालों को गीला किया. फिर साया पहन कर बाहर आ गयी. मैंने साया अपने बूब्स तक ऊंचा बांध रखा और नीचे घुटनों तक था.

अब मैं ससुर के आने का इंतजार कर रही थी. मैं जानती थी कि खाना खाने के बाद वो हाथ धोने के लिए इधर ही आयेंगे इसलिए मैं अपनी बारी का इंतजार करने लगी. मैंने सोच रखा था कि मुझे क्या करना है. मैं बाथरूम के दरवाजे को हल्का सा खोल कर देख रही थी.

जब वो मुझे आते हुए दिखाई दिये तो मैं बाथरूम से बाहर निकल कर दूसरी ओर घूम गयी. ससुर की ओर मेरी पीठ थी दरवाजे की ओर मेरा मुंह हो गया. जैसे ही वो करीब पहुंचे मैं घूम कर उनकी तरफ हो गयी और मेरी चूचियां उनकी छाती से टकरा गईं.

मैंने चौंकने का नाटक किया और वहां से घबरा कर भाग गयी. ससुर जी समझ नहीं पाये कि ये अचानक से क्या हो गया. मैं अपने रूम में छुपकर उनको देखने लगी. वो अभी भी उस घटना के बारे में सोच रहे थे.

फिर वो सोचते हुए ही हाथ धोकर वापस अपने रूम की ओर चले गये. अब मैंने दो पीस वाला एक जालीदार गाउन पहना और अपने बालों को संवार कर लिपस्टिक लगाई और 10.30 बजे के करीब उनके रूम की ओर चली. मुझे पता था कि वो इस समय तक सो जाते हैं.

मैं उनके रूम में पहुंची तो देखा कि वो सामने बेड पर सो रहे थे. उनकी टांगें फैली हुई थीं और उनके कच्छे में उनका नागराज तना हुआ था. शायद मेरे साथ हुई घटना के बारे में सोचकर ही तन रहा था. सपने में वो शायद मुझे ही चोद रहे होंगे.

अब मेरे पास अनुमान लगाने का समय नहीं था. मेरी चूत की आग अब मुझे खुद ही पहल करने के लिए आगे धकेल रही थी. मैं चुपचाप जाकर बेड पर बैठ गयी.

मैंने देखा कि उनके लिंग में झटके लग रहे थे. तड़पता लिंग देख कर ही मेरी चूत में पानी रिसना शुरू हो गया.

मैंने धीरे से ससुर के कच्छे को नीचे खींच दिया. उनका मोटा लम्बा 8 इंची लम्बाई वाला सांवला लिंग मेरे सामने तन कर खड़ा था. देखते ही मेरी हवस भभक गयी. मैंने उनके लिंग को हाथ में पकड़ा तो पूरे बदन में करंट दौड़ने लगा.

उनके लिंग को पकड़ कर मैंने दबा कर देखा. मेरे ससुर का लंड इस उम्र में भी इतना दमदार होगा मैंने इसका अंदाजा भी नहीं लगाया था. लिंग की शाफ्ट इतनी टाइट थी कि लग रहा था जैसे मैंने किसी रॉड को पकड़ रखा है.

ससुर के लंड के गहरे गुलाबी सुपारे से कामरस की एक बूंद अब बाहर निकल कर उनके मूतने वाले छेद पर आकर बैठ गयी थी.
मैंने नीचे झुक कर अपनी जीभ निकाली और उस बूंद को अपनी जीभ से चाट लिया.

उनका कामरस मुंह लगा तो मैं पागल हो गयी. मैंने अगले ही पल उनके लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

ससुर जी की टांगें अब हरकत में आ गयीं और पहले से ज्यादा फैल गयीं. कुछ पल तो मैं उनके लिंग को चूसती रही और फिर उनके हाथ मेरे सिर पर आ गये.

वो मेरे सिर को अपने लिंग पर दबाने लगे. ससुर का लंड मेरे गले में उतरने लगा. बहुत मजा आ रहा था. उनके चेहरे को देख कर नहीं लग रहा था कि वो जाग चुके हैं इसलिए मैं बेधड़क उनके लिंग को चूस रही थी.

फिर एकदम से उन्होंने आंखें खोलीं और हड़बड़ा गये.
अपनी टांगों को पीछे खींचते हुए बोले- बहू तुम? ये क्या कर रही हो? ये गलत है.
मैंने उनके लिंग को हाथ में लेकर सहलाते हुए कहा- कुछ गलत नहीं है ससुर जी, आप मजा लो. बस जो हो रहा है होने दो.

मैंने सोचा अभी लोहा गर्म है, जैसे चाहूं मोड़ सकती हूं. मैंने तुरंत अपने गाउन को नीचे कर दिया और उनके घुटनों के बीच में आकर बैठ गयी. मैंने उनके हाथों को अपनी चूचियों पर रखवा दिया और अपने ही हाथों से दबवाने लगी.

कुछ देर तो वो सोचते रहे कि क्या करें, आगे बढें या पीछे हट जायें? मगर कब तक खुद को रोक कर रखते? उनके लिंग में लग रहे लगातार झटके उनको आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहे थे.

फिर उन्होंने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. मैं समझ गयी कि अब ससुर का लिंग मेरी चूत की सवारी करने के लिए तैयार है.
वो जोर से मेरी चूचियों को भींचते हुए बोले- चल आज मैं तुझे बताता हूं कि मर्द को छेड़ने का अंजाम क्या होता है, आज तेरी शरारत की सजा मैं तुझे जरूर दूंगा.

मैं बोली- मैं तो कब से तैयार हूं बाबूजी, आप जो चाहे सजा दे लो. आपकी सजा में ही मजा है.

फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया. फिर अपनी कमीज उठाई और मेरे दोनों हाथ बेड पर बांध दिये.

वो मेरे बगल में लेटे और मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे. फिर मेरी चूचियों को दबाने और मसलने लगे. फिर मेरी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगे. एक को चूसने के बाद दूसरी को मुंह में भर लिया और पहली को दबाने लगे.

इतने में ही मेरी चूत बिल्कुल गीली हो गयी थी. अब वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगे और नीचे की ओर मेरे पेट को चूमते हुए बढ़ने लगे. मेरी नाभि को चूम कर मेरी चूत की ओर बढ़ रहे थे. मेरी चूत में आग लगी हुई थी.

जैसे ही ससुर ने मेरी चूत पर अपने होंठ रखे तो मेरी चूत की आग और भड़क गयी. मैंने उनके सिर को अपनी चूत में दबा लिया और जोर जोर से अपनी चूत को उनके मुंह पर रगड़ने लगी. मेरी चूत की प्यास को देख कर वो मेरी चूत में जीभ से चोदने लगे और मैं पागल होने लगी.

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैं बोली- बस ससुर जी … आह्ह … अब मेरी चूत में अपना नागराज डाल दो. मैं अब और नहीं रुक सकती हूं. मेरी चूत की चुदाई कर दो बाबूजी, नहीं तो मैं मर जाऊंगी. आपके लंड के बिना मैं मर जाऊंगी बाबूजी, जल्दी से मेरी चूत को चोद दो … आह्ह … जल्दी।

वो उठे और अपना लंड मेरी मुनिया पर रगड़ने लगे.
मैं बोली- बाबूजी जल्दी करो, ये खेलने का समय नहीं है, मैं चुदना चाहती हूं.
वो बोले- हां मेरी रंडी बहू, रुक तेरी चूत की प्यास आज मैं अच्छे से बुझा दूंगा. अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा.

उन्होंने मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक जोर का झटका दे मारा. मेरी चूत की हालत पहले ही पानी पानी हो रही थी. बाबूजी का लंड भी चुदाई के लिए गीला होकर बिल्कुल तैयार था. जैसे ही झटका मारा उनके 8 इंची लंड का मोटा सुपारा मेरी चूत में फंस गया.

मेरी चीख निकल गयी.
पति का लंड इतना मोटा नहीं था और बहुत दिनों से मेरी चुदाई भी नहीं हो पा रही थी. इसलिए बाबूजी का मोटा लंड मैं झेल नहीं पायी और चिल्लाने लगी.
उन्होंने तभी एक और झटका मारा और पूरा लंड मेरी चूत में उतर गया.

बाबूजी ने मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी चूत में हल्के हल्के लंड को चलाना शुरू कर दिया.

अब धीरे धीरे मुझे भी लंड लेकर मजा आने लगा.
मैंने बाबूजी का साथ देना शुरू किया और अब ससुर बहू दोनों ही एक दूसरे से नंगे लिपटे हुए एक दूसरे को चूमते हुए सेक्स का मजा देने और लेने लगे.

अब मेरे मुंह से भी सिसकारियां निकल रही थीं. अब उनकी स्पीड धीरे धीरे बढ़ने लगी. जोर जोर से झटके लगाते हुए वो मेरी चूत की ठुकाई करने लगे और मुझे ससुर के लंड से चुद कर पूरा मजा आने लगा.

मैंने अब आनंद के मारे उनके होंठों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया. उनका लंड मेरी चूत में चोद चोद कर मेरी चूत की खुजली मिटा रहा था और मैं उनकी पीठ को नोंचने लगी थी. मेरी चूत में लंड से जो मजा मिल रहा था उसके मारे मेरी आंखें भारी होने लगी थी.

बाबूजी के चोदने की स्पीड अब और तेज होती जा रही थी. मैंने अब अपने दोनों पैरों को हवा में उठा लिया. बाबूजी का लंड अब और गहराई तक मेरी चूत को ठोकने लगा. पूरे रूम में फच फच की आवाज होने लगी.

मेरी चूत में एक तूफान सा उठा हुआ था. अब मैं झड़ने के करीब पहुंच रही थी.
वो बोले- मेरा पानी भी निकलने वाला है.

फिर वो मेरे मुंह पर हाथ रख कर मुझे जोर जोर से पेलने लगे. बीस-पच्चीस झटकों के बाद बाबूजी के लंड और मेरी चूत ने एक साथ पानी छोड़ दिया. हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर झड़ने लगे. दोनों के बदन में झटके लग रहे थे.

उसके बाद बाबूजी मेरे ऊपर गिर गये. हम दोनों शांत हो गये थे. मैं भी शांत हो गयी थी और बाबूजी मेरी चूचियों में मुंह देकर लेटे हुए थे. कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे. उसके बाद वो उठे और बाथरूम में चले गये.

मैं भी उठने लगी तो मुझसे चला भी नहीं गया. पहली बार जिन्दगी में इतनी जबरदस्त चुदाई हुई थी.

मैं कराहने लगी तो वो नंगे ही बाहर आये. उनका लंड उनकी जांघों के बीच में इधर उधर झूल रहा था. मन कर रहा था एक बार फिर से उनके लंड को मुंह में ले लूं.

फिर वो मेरे पास आये और मुझे सहारा देने लगे. वो मेरे साथ बाथरूम में गये और फिर मुझे सहारा देकर बाहर ले आये. हम दोनों फिर से बेड पर लेट गये.

मैं अपने ससुर की बांहों में थी. वो मेरी चूत में उंगली देकर लेट गये और मैंने उनके लंड को हाथ में भर लिया. मैं बहुत थक गयी थी. मुझे कब नींद आई मुझे कुछ पता नहीं चला. उसके बाद सुबह ही मेरी आंख खुली.

सुबह मैं बेड में बाबूजी के साथ नंगी पड़ी हुई थी. वो उठे और फिर मेरे लिये चाय बना कर ले आये.
मैंने बेड में चाय पी और फिर वो बोले कि उठ कर फ्रश हो जाओ.

उस दिन के बाद उनके और मेरे बीच में सेक्स संबंध स्थापित हो गये. उन्होंने बोल दिया था कि जब भी उनकी जरूरत हो तो मैं उनको बुला लिया करूं. उस दिन के बाद से जब भी मेरा मन हुआ मैं अपने ससुर बहू सेक्स से अपनी चूत की प्यास को बुझवाने लगी. मुझे घर में एक दमदार लंड मिल गया था.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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वो मेरी चूत को चाटने लगा

मैं नीतू गुप्ता एक खूबसूरत औरत हु, औरत तो इसलिए कह रही हु क्यों की मैं शादी शुदा हु, पर मुझे आजतक सेक्स में कभी भी संतुष्टि नहीं हो पाई, जब कोई पुरुष को अपने पत्नी से संतुष्टि नहीं मिल पाती है तो वो कही और जाके चोद के आ जाता है, जितना जेब में पैसा होता है उसके अनुसार उसको वैसा माल मिल जाता है पर एक औरत को अगर उसके पति से चुदाई में संतुष्टि नहीं मिलती है तो क्या करे, उसको तो इज्जत का भी परवाह है,और समाज का भी डर इस वजह से वो या तो किसी सगे संबंघी या तो कोई आसपास का इंसान, उसी के साथ सेक्स सम्बन्ध बनाती है. मैं भी वही किया. मैं 28 साल की हु मेरे शादी हुए तीन साल हो गए है,

मेरा पति बहुत बड़ा बुजीनेस्स में है, काफी बड़ा कारोबार है दिल्ली में, वो अक्सर इंडिया से बाहर ही रहता है इस सिलसिले में, मेरे सास और ससुर दोनों बंगलुरु में रहते है अपने छोटे बेटे के पास. मैं अपने पति के व्यापर में ही हाथ बटाती हु, और पति जब बाहर होता है तब ऑफिस और फैक्ट्री का देखरेख करती हु, मेरा पति आज तक मुझे संतुष्ट नहीं किया है एक तो उसका लंड सिर्फ २ इंच का है और पांच मिनट में ही स्खलित हो जाता है मैं हमेशा प्यासी की प्यासी ही रह जाती हु, बात पिछले संडे की है, मेरा पति दस दिन के लिए बाहर गया और ऑफिस में तीन दिन की छुट्टी हो गई।पति का फ़ोन आया की तुम दो दिन के लिए गोवा चले जाओ क्यों की गोवा में एक फैक्ट्री का काम सुरु करना है इसवजह से गोवा सरकार से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना है, मैं तैयार हो गई मैं अपने साथ मेरा अपना ड्राइवर करण को ले गयी. करण को ले जाने का कारण ये था की मेरे पति करण पे बहुत बिस्वास करते है, और वो काफी ईमानदार है, उस टाइम तक मेरे मन में कोई भी ख्याल नहीं आया था की मैं इसे यूज करुँगी. गोवा पहुंच गई, होटल में दो कमरे लिए एक तो अपने लिए और एक ड्राइवर करण के लिए, शाम को गोवा के बीच का सैर करके आई और डिनर की, और फिर मैं बार में व्हिस्की पिने चली गई,करण भी साथ था, वो बस मेरी आवभगत में लगा हुआ था यस माम यास माम, मैंने करण को भी ऑफर की वो भी ले ले, पर वो मेरी इज्जत कर रहा था कह रहा था नहीं मैडम मैं नहीं लूंगा. पर मैंने उससे कहा कोई बात नहीं ले लो, बाहर है चलता है, मैं जानती हु तुम मेरा इज्जत बहुत करता है पर मैं कह रही हु. उसके बाद करण भी पिने लगा, साला वो तो एक के बाद एक पूरा पि लिया, मैं भी काफी पि ली थी, मैं तो म्यूजिक पे थिरकने लगी, करण वही खड़ा खड़ा देख रहा था, करण भी काफी सुन्दर और जवान लड़का करीब २५ साल का था, देखने में काफी स्मार्ट था,

ड्राइवर तो था पर बहुत ही स्मार्ट था इसी वजह से मेरे पति भी उसको बाहर ले जाते थे, मैंने करण को बुलाई की मेरे साथ डांस करने के लिए,वो काफी पिया हुआ था वो वही से मंद मंद मुस्कुरा रहा था, मैं पास आ गई और उसका हाथ पकड़ के ले आई, हम दोनों डीजे पे थिरकने लगे, वो मेरी कमरे पे हाथ रखा था और मैं भी उसके बाहों में बाह डाल के डांस कर रही थी.उसके बाद तो वो खुल गया वो मुझे अपने में समेट के अपनी ले में आ गया, मेरी चुचिया उसके सीने से चिपक रही थी, उसके बाद मैंने उसके होठ पे एक किश कर ली, और दोनों वह से निकल पड़े, और अपने कमरे में आये करण बोला गुड नाईट मैडम, पर मैंने उसके कॉलर को पकड़ के उसको अंदर कर लिया अपने कमरे में और बोली गुड नाईट कैसे होगा जो तुमने मेरे जिस्म में आग लगा दिया उसको कौन बुझाएगा।वो अंदर आके कहने लगा नहीं मैडम साहब को पता चल जायेगा तो मुझे नौकरी से निकाल देंगे और मैं ये नहीं चाहता, मुझे अपनी बहन की शादी करनी है, ऐसे में अपनी नौकरी खोना नहीं चाहता, पिछली बार भी मुझे इसी वजह से नौकरी से निकाल दिया गया क्यों की साहब की बेटी मुझसे चुदवाती थी.मैंने कहा अगर तुमने मना किया तो मैं तुम्हे नौकरी से निकाल दूंगी, फिर क्या था वो चुपचाप हो गया, मैंने उसके शर्ट को निकाल दिया, और और बेड पे धक्का देके गिरा दी, मैंने फिर अपने एक एक कपडे उतार दिए, और मैं ड्राइवर के ऊपर बैठ गई, चुदवाई का लंड पूरा खड़ा हो चूका था और मेरी गांड के दरार में सेट हो गया था, मैंने उसके होठ को चूमने लगी, चुदवाई मेरी चूचियों को दबाने लगा, मेरी चूत से पानी निकलने लगा, करण काफी वाइल्ड हो गया था, वो मुझे निचे धक्का दे दिया और मेरी चूत को चाटने लगा, मैंने भी उसके बाल को सहलाने लगी, ड्राइवर मेरी चूचियों को दोनों हाथो से दबा रहा था, और चूत का पानी चाट रहा था. मैंने तो बस आआह आआआह आआअह आआअह करण आआअह क्या चूस रहे हो मुझे ऐसे ही चूसते रहो, तुम्हारा साहब तो आज तक मेरी चूत को मुह नहीं लगाया, वो तो मुझे ले भी नहीं सकता है सही तरीके से मैं तो सेक्स की भूखी हु, मेरी भूख तुम शांत कर दो, आआह करण करण का नाक और गाल में मेरे चूत का पानी लग गया था, पूरा मुझ चिपचिपा हो गया था, मैंने चुदवाई को खीच के ऊपर ले आई और पैर फैला दी, मैंने कहा करण अब बर्दास्त नहीं हो रहा है, मुझे चोद दो। अपना मोटा काला सा लंड करीब ९ इंच का होगा मेरी चूत के ऊपर रख के अंदर डाल दिया, मेरा चूत काफी चिकनी हो चुकी थी पानी निकल रहा था पूरा गरम हो गया था, उसके बाद तो क्या बताऊँ यार जबरदस्त तरीके से वो मुझे चोदने लगा. फिर तो वो चोदते चोदते भद्दी भद्दी गालियां भी दे रहा था, कह रहा था चुद साली आज मैं तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दूंगा, मैं भी कह रही थी आज मैं अपनी चूत और गांड फड़वाने के लिए तैयार हु मेरे राजा आज तू मुझे शांत कर दे. औरऔर फिर करीब १ घंटे तक अलग अलग तरीके से मुझे चोदा और दोनों एक साथ खल्लाश हो गए, फिर थोड़े देर बाद फिर से वो मेरा गांड मारने लगा, और इस तरह से हरेक एक घंटे के अंतराल में वो मुझे कभी चोद रहा था कभी गांड मार रहा था, मैं खूब चुदी वो दोनों दिन गोवा में, मजा आ गया था ज़िंदगी का, अब तो मैं करण को कभी कभी घर पे भी रोक लेती हु, और रात रात चुदवाती हु, क्या करूँ मुझे तो अपनी भूख शांत करनी ही थी चाहे पति करे या तो कोई और, क्या करती पति चोद नहीं सकता इस वजह से मैंने ये कदम उठाया

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बिना कंडोम की चुदाई

मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में रहता हु, मैं आपको शहर का नाम नहीं बताऊंगा क्यों की मैं अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहता, मेरे घर में मैं मेरी बहन सरिता दीदी मेरे पापा और मेरी माँ है. पापा को ढाबा है जीटी रोड पर वो अक्सर ढाबा में ही रहते है और वही सोते है. ये जो चुदाई की शुरुआत है वो तब की है जब मेरी माँ नानी घर गयी थी क्यों की नानी की तबियत ख़राब थी, हम घर में दोनों भाई बहन थे, मैं २१ साल का हु और मेरी बहन २६ साल की है. उसके लिए काफी लड़का ढूढ़ रहे है पर अभी तक कोई काबिल नहीं मिला है.जब से उसके लिए लड़का ढूंढने का काम शुरू हुआ था तब से वो ना जाने किस ख्वाब में रहने लगी, देर रात तक जागती, कभी कभी उसका पलंग से आवाज आने लगता, मैंने धीरे धीरे नोटिस करना चालू किया की वो आखिर रात में करती क्या है की जोर जोर से पलंग हिलता और आवाज आती. मुझे ऐसा लगने लगा की वो शायद अपने चूत में कुछ डालती है और थोड़े देर में शांत होती है और फिर सो जाती है.ये सारे कारनामा हम रोज रोज देखते थे, क्यों की हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे, पर अलग अलग पलंग पर सोते थे, कुछ दिन बाद मैंने नोटिस किया की वो रात में अपनी पेंटी और ब्रा खोल कर सोने लगी. क्यों की उसकी चूचियां साफ़ साफ़ नजर आती थी उसकी नाईटी से, बड़ी बड़ी सॉलिड सॉलिड, दोस्तों मेरा भी मन ख़राब होने लगा, अपनी बहन की इस हरकत से, है भी बहूत ही हॉट, सरिता दीदी की साइज ३६-२४- ३६ है, दोस्तों किसी का भी दिमाग ख़राब हो जाये उसके चूतड़ को पीछे से देखकर और आगे से उनकी चूचियों को देखकर, बड़े बड़े लंबे लंबे बाल गुलाबी होठ, लंबी और गोरी जबरदस्त दिखती है. जब वो काजल और होठ को गुलाबी रंग से रंगती है तब तो वो सेक्स की देबि लगती है.

दोस्तों ऐसे ही दिन बीतने लगा. मैं भी रात में मजे लेने लगी. अब मैं भी अपनी आँख अपनी बहन को देखकर सेकने लगा. उस दिन की बात है जब माँ नानी के यहाँ गई थी. रात के करीब ११ बजे थे गर्मी का दिन था. वो हल्का सा बेडशीट ओढे थी. मैं सोने का नाटक करने लगा. तभी फिर से उसका पलंग हिलने लगा. फिर करीब दस मिनट में ही शांत हो गई. मैं समझ गया की मेरी दीदी आज भी अपने चूत में शायद बैगन पेल रही है. तभी वो उठी, उसकी चुचिया साफ़ साफ़ टाइट दिख रही थी. निप्पल भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. जब वो उठी और बाथरूम के तरफ जाने लगी. उसकी चूतड़ हिलोरे मारते हुए चलने लगी. गजब की लग रही थी बाल निचे तक थे खुला हुआ, मैं तो मर गया दोस्तों, मेरा लंड खड़ा हो गया, ऐसा लग रहा था की मैं चोद दू,तभी वो वापस आने लगी. मैं चुपचापहो गया, शांत हो गया पर मेरा लंड शांत नहीं था, वो तम्बू बना कर खड़ा था. सरिता दीदी जैसे ही आई बोली आलोक तुम जाग रहे हो. मैं कुछ भी नहीं बोला, वो फिर से बोली तू जाग रहे हो. मैं फिर भी चुप था. उसने फिर से कहा मैं सब समझ रही हु, तुम क्या देख रहे थे, तुम्हे शर्म नहीं आई एक जवान बहन को रात में ऐसे घूरते हुए. मैंने जाग गया, मैं डर गया था की पता नहीं वो माँ से तो नहीं कह देगी, तभी वो मेरे पलंग पर बैठ गई और मेरा लौड़ा पकड़ ली. मेरा लौड़ा काफी मोटा और तना हुआ था. वो भी ये है सबूत मुझे घूरने का, मैंने कहा सॉरी दीदी, गलती हो गई अब ऐसा नहीं होगा.ये चुदाई की कहानियाँ,रियल सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।वो मेरे ऊपर चढ़ गई. और मेरा पेंटी निचे कर दिया. और मेरे लंड को पकड़ कर बोली, इसका कीमत तुम्हे चुकानी पड़ेगी. मैंने कहा कैसी कीमत, उसने अपने सारे कपडे उतार दिए, दोस्तों पहले तो मेरा लंड थोड़ा डर से छोटा भी हो गया था पर, जैसे उसने कपडे उतारी, मेरा लंड तो और भी मोटा और लंबा हो गया, मैंने कहा ये क्या कर रही हो दीदी मैंने तुम्हारा भाई हु, तो वो बोली जब भाई बहन की चूचियां और गांड को घूर रहा हो तब वो भाई नहीं बचता है. वो बॉय फ्रेंड हो जाता है. मैंने कहा पर मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा, तो वो बोली नहीं कर देख मैं क्या करती हु, मैं माँ और पापा को बोलूंगी की जब मैं सो रही थी तब तुम मेरे प्राइवेट पार्ट को सहला रहा था. दोस्तों मैं डर गया, बहूत ही ज्यादा डर गया.

उसने कहा जैसा मैं कहती हु, वैसा कर मैं कुछ भी नही बोलूंगी और मेरी दीदी मेरे लंड को अपने मुह में लेके चूसने लगी. धीरे थोड़े देर बाद वो ऊपर आ गई और मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे होठ को चूसने लगी. दोस्तों मैं बहूत ही ज्यादा कामुक हो गया था. और जब दीदी ने अपनी चूचियां मेरे मुह में दी. और बोली ले चूस, मैं अपने बहन की चूचियों को चूसने लगा, मेरे तन बदन में आग लग गई. और मैंने जोर जोर से अपनी बहन की चुचिओं को पिने लगा और दबाने लगा. थोड़े देर बाद वो मेरे मुह के पास बैठ गई उसके चूत मेरे मुह के पास था. उसने कहा मेरे चूत की पानी को अपने जीभ से साफ़ कर और पि जा.दोस्तों मैंने अपने बहन की चूत को चाटने लगा. वो अपने चूत से नमकीन पानी निकाल रही थी और मैं तुरंत ही चट कर जा रहा था. वो आह आह आह आह आह कर रही थी. और मैं दोनों हाथो से चूचियों को मसल रहा था और जीभ से चूत को चाट रहा था. उसके थोड़े देर बाद वो निचे हो गई और मेरा लंड जो की अब करीब नौ इंच का हो गया था मेरा लंड पकड़ कर अपने चूत पे रख कर बैठ गई. दोस्तों मेरा लंड पूरा उसके चूत के अंदर समा गया. अब वो जोर जोर से बैठने लगी और उठने लगी. लंड अंदर बाहर जा रहा था और मेरी बहन के मुह से सिर्फ आह आह आह आह आह निकल रहा था। वो खूब जोर जोर से चुदवाने लगी. फिर वो निचे हो गई और मैं ऊपर हो गया और फिर मैंने उसके दोनों पेअर को अपने कंधे पर रख कर, जोर जोर से उसके चूत में अपने लंड को डालने लगा. इस तरह से वो मुझे रात भर मेरे से अलग अलग पोजीशन में चुदवाने लगी. उसके फिर मेरे साथ ही नंगे ही सो गई.दोस्तों दूसरे दिन मेरी दीदी मुझे २०० रूपये दी और बोली कंडोम ले आना, मैंने कंडोम शाम को बाजार से कंडोम भी लेके आ गया. रात में फिर से वो मुझेसे चुदवाने के लिए अपने सारे कपडे उतार दी. और मेरा भी कपडे उतार दी. और फिर से चुदवाने लगी, जब हम दोनों झड़ गए तो मैंने कहा दीदी ये सब गलत हो रहा था. उसने कहा क्या गलत हो रहा है. जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती तुम मुझे ऐसे ही चोदते रहो, नहीं तो मैं मम्मी को क्या क्या बताउंगी तुम्हे समझ भी नहीं आएगा और बे मतलब में बदनाम हो जायेगा.दोस्तों उसके बाद वो मझसे बिना कंडोम के ही चुदवाने लगी. कहती है की कंडोम में मजा नहीं आता है. दोस्तों अब मैं क्या बताऊँ आपको मुझे डर है की कही वो प्रेग्नेंट ना हो जाये, अब मैं रोज रोज अपने बहन को चोदता हु और वो मुझसे खूब मजे लेती है अलग अलग पोजीशन में.

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मैं झड़ गयी

मैं भारी पूरी जवान हो चुकी थी. सभी लोग ड्रिंक्स ले रहे थे, मैने भी एक बियर लिट ही हालाँकि मुझे पीना पसंद नही है पर सबका साथ देना था. वैसे भी मुझे बोहोट जल्दी चढ़ जाती है. मेरी बुआ की ननंद का बेटा जो की मुझसे करीब 10 साल बड़ा है, भी वहाँ था. वो मर्चेंट नेवी मे काम करते है. उनकी हाइट 5.10” थी और बोहोट गातीला बदन था. उन्होने मुझे करीब 6 साल बाद देखा था, मैने एक नूडल स्ट्रॅप टॉप पहना था स्कर्ट के साथ जो की मेरे बूब्स को पूरी तरह दिखा रहा था. वो काफ़ी देर से मुझे चोर नज़रो से देख रहे थे,मैने धीर्रे से पूछा क्या देख रहे हो भैया पहचाना नही क्या? वो चौक गये, बोले शारी तू कितनी बड़ी हो गयी है पहचान ही नही आती. हमारी बातो का सिलसिला निकल चला था. शोर के कारण हम एक दूसरे के बोहोट कर्रेब हो कर बात कर रहे थे. अपनी लंबाई का फयडा उठा कर वो मेरे बूब्स को बड़ी आराम से देख पा रहे थे. हम दोनो एक दूसरे की तरफ होकर बैठे थे और हमारे चेहरे बोहोट करीब थे , इतने करीब की मैं उनकी साँसे महसूस कर सकती थी. वो बातो बातो मे मुजसे बिल्कुल सात कर बैठ गये और अपना एक हाथ मे कंधे पर रख लिया.

वो मुझे धीरे धीरे अपनी तरफ खीच रहे थे. तेज़ बजता म्यूज़िक, धीमी रोशनी और कुछ शराब का असर, हम सब कुछ भूलते जा रहे थे. मेरे हाथ उनकी थाइस पे थे और उनका हाथ मेरे कंधे से होकर अब मेरे बूब्स के करीब था. मैने अपना सर उनके कंधे पर यू रखा की हमारे हूँठ एक दूसरे के बिल्कुल करीब हो गये. मुझपर बियर से ज़्यादा भैया का नशा छा रहा था. उन्होने मेरे माथे पे एक किस करते हुए मेरे बूब्स हल्के से दबा दिए.मैने चिहुनकते हुए कहा भैया यहाँ कोई देख लेगा. ये सुनकर वो मुस्कुरा दिए और कहा की यहाँ नही तो और कहाँ? मैने सरक कर खुद को उनसे लिप्ताते हुए उनके कानो मे कहा आप बस जल्दी से यहाँ से निकालने का प्लान बनाओ. वो कहने लगे बोहोट बदमाश हो गयी है तू शारी, और मेरे गालो पे किस कर दिया. मैं मस्ती मे इतरते हुए उन्हे डॅन्स फ्लोर पे ले गयी, स्लो म्यूज़िक तो नई था पर हम क्लोज़ डॅन्स कर रहे थे. वो मेरी पीठ से लग के खड़े थे और उनके हाथ मेरे शरीर पर रेंग रहे थे. मैने उनसे चिपकते हुए अपनी गंद उनके खड़े लंड पे टीका दी.ऐसा लग रहा था की उनका लंड पंत फाड़ के बाहर आ जाएगा. उन्होने मेरी कमर मे हाथ डालकर कासके पकड़ लिया और अपना लंड मेरी गंद पे रगड़ने लगे. धीरे धीरे उनका एक हाथ मेरे बूब्स मसालने लगा. मैं इतनी गर्म हो चुकी थी वहीं सबके सामने उनका लंड अपनी छूट मे पिलवा लेती. मैने अपनी गंद ज़ोरो से उनके लंड पे रगड़नी शुरू कर दी और धीरे से एक हाथ उनके लंड पे फेरने लगी, उन्होने कस के मेरे बूब्स मसालने शुरू कर दिए. मैं समझ गयी की वो भी छोड़ने को मचल रहे हैं. उनका एक हाथ मेरे बूब्स और दूसरा मेरे पंत के उपर से छूट से खेल रहा था. अंधेरे के कारण कोई ह्यूम देख नही पा रहा था. उन्होने मुझे अपनी तरफ पलटा कर कहा- अब और नही रुक सकता शारी, कहीं चल नही तो यहीं कुछ कर दूँगा. मैने मस्ती मे अपने हाथ उनकी गार्डेन मे डाल कर कहा-ना मेरे प्यारे भैया, यहाँ नही बुआ के घर मिलो 15 मीं मे. और अपने होंठ उनके होंठो से लगा के बिना किस किए हट गयी. मैं पागल सी हुई जा रही थी और उनका भी यही हाल था.मेरी छूट से तो पानी राइज़ जर रहा था, मुझे डार्ट हा कहीं पंत के उपर से दिखने ना लगे. मैं धीरे से मौका देख कर वहाँ से बुआ के घर आ गयी, जो की होटेल के पास ही था. वहाँ पे मैं और मेरी एक कज़िन एक ही कमरे को शेर करते थे, पर सब लोग होटेल मे थे इसलिए किसी को पता चलने का दर ही नही था. घर पोोचते ही मैने भैया को पीयेच कर दिया की वो सीधे उपर वेल गेस्ट रूम मे आ जाए. उनके आने के पहले मे रूम मे धीमी रोशनी कर दी और जल्दी से अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ एक गांजी पहें ली. तभी दरवाज़ा खुला, भैया थे.

मैं दरवाज़े के पीछे छुपी थी, उनके आते ही पीछे से आके मैने उनके लंड को रगड़ना शुरू कर दिया. वो मुझे खीच के बेड पे ले गये. मुझे ऐसे गांजी मे देख के पागल हुए जा रहे थे. मेरे बूब्स पे टूट पड़े, उन्हे दबाते, उन्हे चूस्ते, उन्हे काटते जा रहे थे.. इतना मज़ा तो कभी नही आया मुझे.. मैने धीरे से उनकी शर्ट निकल दी और उन्होने मुझे गांजी से आज़ाद कर दिया.. भाई का एक हाथ मेरी चिकनी चूत पे चल रहा था.वो धीरे से उसमे उंगली करने लगे.. मुझसे रहा नही जा रहा था, मैं उछाल उछाल के उंगली से ही छुड़वाने लगी. वो मेरे निपल्स पर काट रहे थे और मुझे उंगली से छोड़ रहे थे. थोड़ी देर मे ही मेरा पानी छ्छूट गया, मैने उन्हे बेड पे लिटाया और उनकी जीन्स निकल दी. उनके उपर बैठ के मैं उन्हे पागलो की तरफ चूम रही थे. होंठो पे, गले पे, चेस्ट पे, नाभि पे और फिर अंडरवेर के उपर से ही मैने उनके लंड को धीरे से काट लिया.उन्होने झट से लंड निकल के मेरे मूह मे एक मोटी सी धार छ्चोड़ दी. वो भी झाड़ गये थे. पर उनका लंड अभी भी कड़क था. मैने उसे मूह मे लेके चूसना शुरू किया. कभी जीभ से छत लेती, कभी उसे गले तक अंदर ले जाती, कभी टोपे को कस के चुस्ती, तो कभी अंदो को चुस्ती. थोड़ी देर मे ही वो फिर तनटना गया. उन्होने कहा अब चढ़ भी जा. मैने उनके बात सुनके उसे अपनी छूट पे रखा और टोपे को अपने दाने पे रगड़ने लगी.आप ये चुदाई रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
भाई ने मेरा हाथ हटा के अपने 7इंच ले लंड को एक झटके मे मेरी छूट मे घुसा दिया. फिर तो मैने उचक उचक के छुड़वाना शुरू कर दिया. मैने उन्हे बैठा लिया ताकि लंड छूट के अंदर तक जाए, मुझे ऐसे चूड़ने मे बड़ा मज़ा आता है. वो मेरे बूब्स चूसे जा रहे थे और मैं हिल हिल के चुड रही थी. थोड़ी देर मे उन्होने मुझे नीचे लिटाया और मेरे छूट को छोड़ना शुरू कर दिया… मैं मस्ती ना जाने क्या क्या बक रही थी.भैया और ज़ोर से छोड़ो, फाड़ तो मेरी छूट, मेरी छूट का भोसड़ा बना दो.. आआहह… कितना प्यारा लॉडा है तुम्हारा… और ज़ोर से… अंदर तक छोड़ो… आअहह….. ज़ोर से मारो… और ज़ोर से… अपनी बहें को अननी रंडी बना लो.. जी भर के छोड़ो… आआहह….वो पूरी ताक़त से अपना लंड मेरी छूट मे मार रहे थे. मैने झड़ने वाली थी. मैने कहा छोड़ो मैं झड़ने वाली हूँ.. और छोड़ो मेरे भैया.. अपनी बहें को झाड़ दो मेरे भैया.. छोड़ो.. आअहह….. और मैं झड़ गयी..मैं उठकर घुटनो के बाल हो गयी. वो मुझे पीछे से कुत्ते की तरह छोड़ रहे थे.. अपने भी खड़ने वेल थे, कहने लगे ले कुटिया बन के अपने भाई का लंड ले.. सारा अपनी छूट मे ले ले… आअहह… तेरी छूट तो अब मैं रोज़ छोड़ूँगा… ले ले सारा पानी…उन्होने सारा माल मेरी पीठ पे निकल दिया. और वहीं पस्त हो के लेट गये.थोड़ी देर लेटने के बाद कपड़े पहेने और जाने लगे. मुझे एक बड़ी सी किस देते हुए मेरे बूब्स मसल कर कहा. मैं अपने दोस्त के फ्लॅट पे रुका हूँ वो बाहर गया है. कल वहीं मिलेंगे. अब तो तेरी गंद भी मारूँगा. मैने मिलने का वाडा करके विदा ली.अगर 

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मैं बिल्कुल तैयार थी उनका लंड अंदर लेने के लिए

आकाश और मोहित ने चोद चोद कर मेरी चूत सुजा दी थी जिस कारण से मेरी और ज्यादा चुदवा पाने की हिम्मत नहीं बची थी।

जब मैं आकाश की चुदाई में मग्न थी तो मोहित भी हमें देखने लगा था और इसी लापरवाही के चलते कब हमारे इंग्लिश के टीचर आकर हमारी चुदाई देखने लगे, हम तीनों को खुद नहीं पता चला।

हमने जब देखा तो उनके हाथ में मोबाइल था और हमारे टीचर हमारा वीडियो बना रहे थे।

हम तीनों के होश उड़ गए जब हमने देखा कि हमें टीचर ने देख लिया।

हमने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और अपने आप को ठीक करके सर के सामने रोने गिड़गिड़ाने लगे- सर, प्लीज किसी को मत बताइएगा, सर गलती हो गई, प्लीज सर हमसे गलती हो गई।

लेकिन जब कोई एक जवान खूबसूरत लड़की की चूत देख लेता है तो अच्छे अच्छों की भी नजर फिसल जाती है। वही मेरे साथ भी हुआ मेरी डबल रोटी के जैसे फूली हुई चूत देखकर किसी का भी मन डोल जाए।

शायद सर भी मेरी चूत फाड़ने का जुगाड़ देख चुके थे लेकिन उन्होंने उस समय यह बिल्कुल नहीं महसूस होने दिया।

हमारे टीचर ने हम तीनों को डांटते हुए बोला- यह बात ऐसे खत्म नहीं होगी।
तुम लोगों ने एक क्लास में ऐसी घिनौनी हरकत करके यहां की मर्यादा को ठेस पहुंचाया है।
हम तीनों बहुत ज्यादा डर चुके थे इसलिए सर के सामने सर झुकाए खड़े थे।

मेरी आंखों में तो आंसू भी बह रहे थे कि पता नहीं अब क्या होगा। कहीं यह बात मेरे घर में ना पहुंच जाए।

सर ने आकाश और मोहित को बहुत डांटा और उन्हें धमकी भी दी कि अगर आइंदा से ऐसा कुछ भी तुमने किया तो मैं तुम लोगों के घर तक यह वीडियो जरूर पहुंचा दूंगा।

उन दोनों ने सर से प्रॉमिस किया की आगे से अब इस प्रकार की कोई भी हरकत नहीं करेंगे।
सर ने उन दोनों को धमकी देकर छोड़ दिया और वे दोनों वहां से तुरंत चले गए।

उसके बाद से उन दोनों ने ना मुझे कभी घूरा और ना ही मुझे कभी लाइन मारी।

एक दिन जब मैं स्कूल पहुंची तो हमारे हमारे इंग्लिश टीचर सर क्लास में आए और बोले- पायल, तुम मेरे कैबिन में आओ।
मैं घबरा गई कि अब क्या हो गया क्योंकि मैं उन सब को उस दिन की घटना के बाद से देखकर घबरा जाती थी।

मैं डरी सहमी सर के केबिन में पहुंची। सर का कैबिन बिल्कुल अलग और एकांत में बना हुआ था जहां बिना उनकी परमिशन के कोई नहीं जा सकता था।

जब मैं केबिन के अंदर पहुंची तो सर अपना कुछ काम कर रहे थे।
“जी सर, क्या बात है?” मैं बोली।

सर ने पहले तो मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा और अपने लोड़े को हाथों से सेट करते हुए बोले-
पायल, मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी जो तुम लोग उस दिन कर रहे थे. लेकिन अब तुमने अगर गलती की है तो गलती की सजा तो मिलनी ही चाहिए। क्योंकि जब तक कोई सजा नहीं मिलती गलती दोबारा भी होती है।

मैं सर झुकाए जो कि खड़ी हुई थी बोली- जी सर क्या सजा है मेरे लिए? लेकिन प्लीज घर में मत बताइएगा आप जो कहोगे मैं करूंगी।

मैंने तो बहुत साधारण तरीके से यह बात बोली थी लेकिन सर ने मेरी इस बात को दूसरे मतलब में ले जाकर बोले- जो बोलूंगा वह करोगी?
मैं समझ गई कि लगता है अब फिर से मुझे अपनी चूत फड़वानी पड़ेगी तो मैं बोली- जी सर, जो बोलोगे वही करूंगी।

सर बोले- मैं भी तुम्हें चोदना चाहता हूं। तुम्हारी जैसी कच्ची कली को मैं भी फूल बनाना चाहता हूं।
मैं रोती हुई बोली- सर प्लीज ऐसा मत करिए। मुझसे गलती हो गई। मैं बहक गई थी इसलिए ऐसा हो गया। आइंदा से मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी। सर प्लीज मुझे माफ कर दो।

सर का लंड तो पहले ही फूल चुका था। वे मेरी बात बिल्कुल भी सुनने के मूड में नहीं थे।
उन्होंने बोला- पायल, या तो मुझसे अपनी चूत चुदवा लो या फिर मैं यह बात तुम्हारे घर में बता दूं। तुम्हारे पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं और कोई विकल्प नहीं है।

जब मैं जान गई कि अब मेरे पास और कोई रास्ता नहीं बचा। मुझे इन्हीं में से कोई विकल्प चुनना ही पड़ेगा।
अगर घर में बताने वाला विकल्प चुनती तो मेरा बाहर आना जाना और मेरी आजादी सब बंद हो जाती। और मेरे घरवाले मेरी इस उम्र में शादी भी कर देते जिसके लिए मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी क्योंकि मुझे अभी बहुत सारे लौड़ों का मजा लेना था।

लेकिन सच बताऊं तो कहीं ना कहीं मेरी चूत में भी आग लगने लग गई थी कि चलो इसी बहाने एक और नया लंड चूसने को तो मिलेगा।
मैंने सर को दुखी भाव में बोला- ओके सर, मैं चूत चुदवाने के लिए तैयार हूं लेकिन आपको प्रॉमिस करना पड़ेगा कि आप वह वीडियो मेरे सामने पूरी तरह से डिलीट कर दोगे।
सर ने तुरंत मुझसे प्रॉमिस किया और बोले- कल मैं घर में अकेला हूं इसलिए कल मैं स्कूल नहीं आऊंगा और तुम भी घर से स्कूल के बहाने निकलकर मेरे घर आ जाना।
मैं भी तुरंत राजी हो गई।

जब स्कूल खत्म होने के बाद शाम को मैं घर पहुंची तो मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर सारे कपड़े उतार के पहले अपनी चूत को क्लीन शेव किया और थोड़ी देर निहारती रही।
और यह सोचती रही कि कल यही चूत फट कर फिर से भोसड़ा बनने वाली है।

लेकिन कहीं ना कहीं चुदाई के बारे में सोच कर मेरी चूत में सुरसुरी उठने लग गई थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं रसोई से एक मूली लेकर वहीं बाथरूम में अपनी चूत में डालने लगी।

10 मिनट तक मूली से चोदने के बाद जब मेरी चूत से पानी बहा, तब जाकर मुझे शांति मिली और मैं आकर कमरे में चूत पसार कर सो गई।

दूसरे दिन मैं बहुत खुश थी और अच्छे से तैयार हुई। मैंने एक सेट पेंटी और ब्रा एक्स्ट्रा अपने बैग में डालकर अच्छे से परफ्यूम लगाकर सर के घर की तरफ चल दी।

जब मैं टीचर के घर के पास पहुंची तो देखा सर दरवाजे के पास ही लगे सोफे पर बैठे मेरा इंतजार कर रहे हैं।
मैं जैसे ही घर के अंदर घुसी सर ने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया और मुझे अपने सीने से चिपका लिया।

मुझे सीने से चिपकने का तो पता नहीं लेकिन उनका ताना हुआ लंड मेरी चूत में जरूर महसूस हो गया कि सर तो बिल्कुल भरे बैठे हैं।

सर ने मुझे बिठाया और मुझे पानी दिया। मैं भी पानी पी कर सोफे पर बैठ गई।

2 मिनट तक सर मेरे बगल में बैठकर पहले मुझसे बातें करते रहे और फिर बोले- तो क्या तैयारी करके आई हो चुदने के लिए?

मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी पेंटी के अंदर घुसा दिया।

सर समझ गए कि मैं अपनी चूत बिल्कुल चिकनी करके आई हूं। उन्होंने तुरंत अपने होंठ मेरे होठों से चिपका दिये और मेरे होंठ चूसते चूसते अपनी गोद में उठाया, अपने मास्टर बेडरूम में ले जाकर पटक दिया।

सर तुरंत मेरे ऊपर आ गए और मुझे किस करने लग गए साथ में मेरी चूचियां भी दबाते रहे। उन्होंने मेरी चूची के काले दाने को ऐसे मसला कि मेरी पूरे शरीर में कम्पकपी सी मचने लगी।

मेरी चूत से पानी बहने लगा और मेरा मन करने लगा कि तुरंत लंड में बैठ जाऊं लेकिन तुरंत चोदने का मजा भी बेकार होता है इसलिए मैंने थोड़ा सब्र रखना सही समझा। क्योंकि थोड़ी देर बाद मेरी चूत का भोसड़ा बनने ही वाला था इसलिए मैंने आराम से करना सही समझा।

किस करने के बाद सर ने मेरी शर्ट उतार दी और ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियां दबाने लगे। दबाते दबाते वह इतने जोश में आ गए कि उन्होंने मेरी ब्रा उतारने के बजाय खींचकर फाड़ दी और मेरी चूचियों को नंगी कर दिया।

जब टीचर ने मेरी गोरी चूचियां देखी तो वे पागल हो गये और उन्हें जोर जोर से चूसने लगे। मैं इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि मैंने बिस्तर को मुट्ठी में भींच लिया।

5 मिनट चूची चूसने के बाद उन्होंने मेरी स्कर्ट ऊपर उठाई और पेंटी खींचकर फाड़ दी।

सर मेरी छोटी सी चूत देखकर इतने जोश में आ गए कि मेरे चूत में उंगली के बजाय मुंह से चूसने लगे और मेरे दाने को दांतों से काटने लगे।

मुझे इतना मजा आ रहा था जैसे मैं किसी जन्नत में पहुंच गई। मेरे पूरे शरीर में गूजबम्स आने लगे और मेरे शरीर में कंपकपी सी उठने लगी।
मैं सर की खोपड़ी पकड़कर अपनी चूत में दबाने लगी। सर ने अपनी पूरी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी।

मैंने सर से पूछा- सर इससे पहले आपने कितनी बार चुदाई कर रखी है?
टीचर से मैंने यह बात इसलिए पूछी थी क्योंकि सर अविवाहित थे।

सर बोले- तुमसे पहले भी मैं अंजलि और मधु की चूत की सील तोड़ चुका हूं।

अंजलि का नाम सुनते ही मैं भौचक्की रह गई क्योंकि वह तो क्लास की टॉपर थी और इतना एटीट्यूड दिखाती थी जैसे उनसे बड़ी पवित्र लड़की पूरे स्कूल में कोई नहीं है।
प्यार का नाम सुनते ही वह ऐसे उचक जाती थी जैसे किसी ने उसकी गांड में मिर्च लगा दी हो।
अब मुझे पता चला कि वह कुतिया तो मुझसे पहले ही अपनी चूत फड़वा कर टहल रही है।

खैर मैं अपनी कहानी पर आती हूं.

उसके बाद मैंने टीचर को बोला- सर, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्लीज जल्दी से अपना लौड़ा निकालो और मुझे चूसने दो।
सर ने कहा- इसमें देरी किस बात की … मेरा लंड तुम खुद ही निकाल कर चूस लो।

मैंने भी देर ना करते हुए तुरंत सर की शर्ट और पैन्ट उतार दिए। उनकी चड्डी के ऊपर से ही उनका लंड बिल्कुल सांप की तरह फनफना रहा था। मैंने जैसे ही उनकी चड्डी नीचे की कि उनका लण्ड फुफकार मारते हुए बाहर निकला और मेरे आंखों के सामने झूलने लगा।

सर की चड्डी उतार कर मैंने एक तरफ फेंकी और उनका मोटा लंड लेकर तुरंत मुंह में भर लिया। उनका लंड इतना मोटा और तगड़ा था कि मेरे मुंह में पूरा आ नहीं पा रहा था। मुझे उनका लंड चूसने में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं क्या बताऊं।

तभी मेरे मन में ख्याल आया कि कुछ अलग किया जाए तो मैं तुरंत उठी और उनकी रसोई की तरफ गई। वहां फ्रिज में देखा कि चॉकलेट रखी हुई है. मैं तुरंत चॉकलेट लेकर आई और उनके लंड के चारों तरफ लगाकर उसे चूसने लगी।

कभी-कभी बीच-बीच में मैं उनके लंड के टोपे में भी अपनी जीभ फिराने लगी।
ऐसे में सर को बहुत मजा आ रहा था।

जब लंड चूसते चूसते लगभग 15 मिनट हो चुके तो सर से रहा नहीं गया और मुझे तुरंत अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया।

सर ने मेरी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और अपना 8 इंच का लंड मेरी चूत में रखकर थोड़ा सा धक्का मारा।

मैंने पूरी चादर अपने हाथों में समेट ली और मेरे मुंह से जोर की चीख निकल गई- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ हहहह. हाय बाप रे … मैं मर गई, सर बहुत तेज दर्द हो रहा है. प्लीज बाहर निकालो।

सर यह सब सुनने के बिल्कुल भी मूड में नहीं थे। उन्होंने मुझे मेरे कंधों से पकड़ा और दूसरा धक्का तेजी से मार दिया। उनका लगभग आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत में घप्प से जड़ तक घुस गया। मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और आंसू बहने लगे।

लेकिन मुझे पता था कि अब मेरी चूत का अचार तो बनना ही है इसलिए चीखने चिल्लाने का कोई मतलब नहीं है।
मैं भी बस लेटे लेटे दर्द सहती रही और टांगें चौड़ी करके कोशिश करती रही कि उनका लंड आराम से मेरी चूत के अंदर तक घुस सके।

सर ने मेरे दर्द को समझते हुए 2 मिनट इंतजार किया और थोड़ा सा चूत में थूक डालकर 2 मिनट बाद तीसरा धक्का मारा. यह धक्का इतना तेज था कि उनका पूरा लंड जड़ तक मेरी चूत में समा गया।

मेरी जांघें बिल्कुल टाइट हो गई और मैंने सर को बहुत कस कर पकड़ कर बस दबा लिया और थोड़ी देर शांत लेटी रही।

5 मिनट बाद जब मुझे आराम मिला तो मैंने सर को कहा- अब जल्दी से चोद कर भोसड़ा बना दो।
सर यह सुनकर हंस दिए और तुरंत धक्के मारने शुरू कर दिए।

पहले तो उनके झटके बहुत सामान्य थे लेकिन दो-चार मिनट बाद ही उन्होंने इतनी तेज तेज धक्के मारने शुरू किए कि मैं बेड में 4 इंच ऊपर उछल जा रही थी।
मैं सर के सामने ऐसे चूत फैला कर लेटी थी जैसे कोई सांड के आगे छोटा सा गाय का बछड़ा।

सर के हर धक्के के साथ में मैं ऊपर उचट जाती थी और मेरे मुंह से चीख निकल जाती थी।

20 मिनट तक लगातार धक्कापेल चुदाई के बाद जब मुझे आराम मिला और मैंने चुदाई का मजा लेना शुरू किया तो मैं भी नीचे से धक्के मारने लगी।

सर को यह सब देख कर बहुत मजा आने लगा और सर ने तुरंत मुझे घोड़ी बना दिया। मैं उनके बेड के सिर वाले हिस्से को पकड़ कर घोड़ी बन गई। सर ने थोड़ा सा हाथ में थूक लेकर मेरी गांड के छेद पर लगा दिया और थोड़ा मेरी चूत में लगाया।

मुझे लगा शायद गलती से गांड में लग गया इसलिए मैंने कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया और शांत घोड़ी बनी रही और लंड घुसने का इंतजार करती रही. तभी सर ने अपने लोड़े को हाथ से पकड़ा और चूत के छेद में लगा दिया।

मैं बिल्कुल तैयार थी उनका लंड अंदर लेने के लिए!

कि तभी सब कुछ बदल गया और मेरे प्राण निकलते निकलते बचे.
क्योंकि सर ने तुरंत उस लंड को चूत से हटाकर गांड में रख दिया और बिना 1 सेकंड गंवाए हुए पूरी जोर का धक्का मार दिया।
उनका आधा लंड मेरी गांड में चीरता हुआ घुस गया।

मेरी जोर की चीख निकल गई ‘उउउईईई ईई ईईई … मांआआ आआ …’ और मैं बिस्तर में गिर गई और बेहोश हो गई।
2 मिनट बाद जब मैं होश में आई तो मेरी गांड में बहुत तेज दर्द हो रहा था और सर अपना लंड घुसेड कर वहीं पर खड़े हुए मुस्कुरा रहे थे।

मैंने सर को कहा- सर प्लीज बाहर निकाल लो। मैं इससे ज्यादा दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।
लेकिन मेरे टीचर तो पूरे हैवानों की तरह डटे रहे और उन्होंने धीरे धीरे धक्के मारने भी चालू कर दिए। मैं वहीं खड़ी चिल्लाती रही और वह मेरी गांड का छेद फाड़ते रहे।

5 मिनट तक में उनका पूरा लंड मेरी गांड में समा गया और मुझे मजा आने लगा।
अब तो मैं भी जी भर के पीछे धक्के मार मार के उनका लंड पूरा अंदर तक लेती रही और चुदाई के मजे लेने लगी।

धक्के मारते मरवाते जब हम दोनों थक गए तो मैंने कहा- सर, अब कोई दूसरी पोजीशन ट्राई करते हैं।
सर ने मेरी गान्ड से अपना मूसल लन्ड बाहर निकाल लिया।

जब मैंने सर का लंड देखा तो मेरी गांड का खून उनके लंड पर लगा हुआ था और मेरी गान्ड में जलन होने लगी थी।
मैं वहीं पर अपना पिछवाड़ा दबा कर बैठ गई।

तब तक सर बाहर से एक कुर्सी लेकर आए और उसमें बैठ गए। मैं भी अपनी चूत फैलाकर सर के लंड को हाथों से पकड़ कर अपनी चूत में डाल कर बैठ गई।

यह पोजीशन इतनी खतरनाक थी उनका पूरा लंड मेरे अंदर तक घुस गया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ लेकिन मैंने वह दर्द बर्दाश्त कर लिया और उनके गर्दन को पकड़कर अपने धक्के मारने शुरू कर दिए।
कमरे में बस मेरी चीखों की ही आवाज गूंज रही थी ‘आआआ आहह … ऊऊहह … उउम्म्म … पट पट पट!’

सर के लंड में इतना दम था कि आधे घंटे लगातार चोदने के बाद भी उनके लंड में कोई ढीलापन नहीं आया।

अब सर ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और नीचे से लौड़ा सेट करके मेरी चूत में डाल दिया और ऊपर नीचे करने लगे।

उस समय मुझे ऐसे लग रहा था कि सर ने कोई डंबल उठा कर अपने मसल्स बना रहे हो।

टीचर ने मुझे उस पोजीशन में 15 मिनट तक चोदा। इस दौरान मेरा दो बार चूत का पानी बह चुका था।

चूत चोदते चोदते जब सर थक गए तो उन्होंने अपने लंड निकाल कर तुरंत मेरे पीछे वाले छेद में सेट कर दिया और उस में धक्के मारने शुरू कर दिए।

मैं आप सबको एक बात तो बताना चाहूंगी कि चूत चुदाई से भी ज्यादा मजा तो गांड मरवाने में आता है। मुझे गांड मरवाने में इतना मजा आ रहा था कि मन कर रहा था दो तीन लंड और एक साथ अपने गांड में डलवा लूं।

मैं बस मजे लेती रही और सर मुझे वही चोदते रहे।

गांड चुदवाते चुदवाते मेरा चूत का पानी बह गया और मैंने सर को कहा- सर, अब और ज्यादा नहीं चुद सकती। मेरी चूत और गान्ड दोनों में ही जलन होने लगी है।

कहीं ना कहीं सर का भी हो ही गया था तो उन्होंने तुरंत मुझे बिस्तर में पटका और बोले- बस मेरी रानी, 10 मिनट में मेरा भी होने वाला है।

मैंने भी सोचा जब 1 घंटे से चुद ही रही हूं तो 10 मिनट और सही। और मैं भी तुरंत अपनी टांग फैला कर बिस्तर में लेट गई और बोली- सर चोदो अब।
सर ने अपना लंड हाथ से पकड़ कर मेरी चूत में रखा और एक झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया।
मैं तो बस आंखें बंद करके मजे लेटी रही।

10 मिनट तक सर ने मुझे ऐसे ही चोदा और जब पानी निकलने वाला हुआ तो उन्होंने कहा- बेबी कहां निकालूं?
क्योंकि 2 दिन पहले ही आकाश और मोहित की चुदाई के बाद मैंने दवा ली थी जो कि 3 दिन तक अपना असर दिखाती है तो मुझे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं थी इसलिए मैं बोली- सर, अपना पानी मेरी चूत के अंदर ही छोड़ो क्योंकि चुदाई का मजा तो तभी आता है जब लंड का पानी चूत के अंदर छूटे।

और मैं अपनी मेहनत की चुदाई को बर्बाद नहीं होने देना चाहती थी इसलिए मैं चुदाई का हर एक मजा लेना चाह रही थी।

2 मिनट चोदने के बाद जब सर ने अपना पानी छोड़ा तो उनका गर्म लावा मेरी चूत में भर गया।

मुझे इतना मजा आया कि बस मैंने सर को तेजी से दबा लिया और वैसे ही लेटी रही। दस मिनट तक सर अपना लंड मेरी चूत के अंदर डालकर मेरे ऊपर लेटे रहे और उनके लंड का एक-एक बूंद मेरी चूत में भर गया।

10 मिनट बाद जब सर उठे तो देखा मेरी चूत से खून और उनके लंड का पानी साथ बह रहे थे। और चादर गीली हो गयी थी। उनके लंड से बहुत ज्यादा पानी निकला था।

मैंने टीचर के लंड को हाथ में लेकर चूसना शुरू कर दिया; 5 मिनट तक चूसा और उसके बाद सर जाकर मेरे लिए जूस बनाया और पिलाया।

मेरी उठकर चल पाने की हिम्मत नहीं थी इसलिए मैं अपनी भोसड़ा बन चुकी चूत को लेकर लेटी रही।

लेकिन अभी एक और घटना घट गई। शायद मेरी किस्मत में ही चूत फड़वाना लिखा था।

सर का एक दोस्त जो कि मेरा ही पड़ोसी भी था और मुझे जानता भी था, कब अंदर आ गया और हमारी चुदाई देख ले गया हमें पता नहीं चला।

जूस पीने के बाद जब वह अचानक मेरे सामने आया तो हम दोनों के होश उड़ गए।

क्योंकि यह पहले भी कई बार मुझे लाइन मार चुका है और मैं कोई भाव नहीं देती थी और अब तो शायद अपनी चूत ही देनी पड़े।
उसने सर को एक दूसरे कमरे में ले जाकर कुछ बात की।
मैं नहीं सुन पाई क्योंकि मैं दूसरे कमरे में थी.

उसके बाद जब सर वापस आए तो मुझसे पूछने लगे- रानी, एक गड़बड़ हो गई है। मेरा दोस्त शुभम भी तुम्हें चोदना चाहता है और बोल रहा है कि अगर नहीं चुदी तो मैं सब को बता दूंगा।

क्या तुम प्लीज़ एक और राउंड चुदवा सकती हो?
वह बोल रहा है कि मुझे भी चोदना है वरना मैं सबको बता दूंगा।

क्योंकि मैं इतना ज्यादा चुद चुकी थी की और ज्यादा चुदवाने की हिम्मत नहीं थी तो मैंने मना कर दिया।

लेकिन तभी शुभम अंदर आया और मुझे गाली देने लगा
और बोला- मैं चाहूं तो अभी जाकर तुम्हारा तमाशा बना दूं।
इतना सुन कर मैं डर गई

इसलिए मैं बोली- ओके … लेकिन थोड़ी देर रुकने के बाद!
क्योंकि अभी अभी चुदी हूं तो चूत में जलन हो रही है।
उसने बोला- ठीक है।

1 घंटे बाद जब मुझे थोड़ा आराम मिला तो शुभम अंदर आया। मैं पहले से ही अन्दर नंगी लेटी थी सो उसने तुरंत मेरी चुदाई शुरू कर दी। उसने भी मुझे 1 घंटे तक पटक-पटक कर इतना चोदा कि ना तो मैं चलने लायक बची थी और ना ही बैठने लायक क्योंकि मेरे पिछवाड़े में भी बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था।

मेरी चूत का भोसड़ा बना कर शुभम वहां से चला गया और बोला- रण्डी, अब तो तेरी चूत मेरी। जब कहूंगा तब तुझे चूत चुदवानी पड़ेगी मुझसे।

खैर मैंने उसकी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

मैं बस पीठ के बल थोड़ी देर वहीं लेटी रही और जब स्कूल से घर जाने का समय हुआ तो तब तक मुझे थोड़ा थोड़ा आराम मिल चुका था।

मुझे पता था कि मेरे साथ यह सब होने वाला है इसलिए मैं एक सेट एक्स्ट्रा ब्रा और पेंटी लेकर आई हुई थी। मैंने उन्हें निकाला और पहन कर जाने को तैयार हो गई।

मैंने सर से वहीं पर अपना वीडियो डिलीट करवाया और वहां से अपने घर आ गई।

घर आते ही मैं तुरंत बाथरूम में घुसी और अपनी चूत को अच्छे से धोया। धोने के बाद देखा कि मेरी चूत की हालत बुरी तरह से खराब हो गई थी।
पूरी चूत खुल गई थी और ऐसे लग रहा था जैसे कोई चूहे का बिल हो।

मैं ऐसे ही नंगी जाकर अपने बिस्तर पर चूत पसार कर लेट गई और कब आंख लग गई मुझे पता नहीं चला।

उसके 2 महीने बाद मेरे एग्जाम हो गए और मैंने अपना स्कूल बदल दिया।

क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं इस स्कूल में और रही तो जल्दी ही मेरे वीडियोज़ लोगों के फोन में आ जाएंगे।

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उनका लंड मेरी चूत में चला गया।

हैलो दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है और मैं शामली की रहने वाली हूँ.. मैं अक्सर यहाँ हिंदी सेक्स कहानी और भैया से चुदाई कहानी पढ़ने आती हु..  आज आपके साथ मैं अपनी सच्ची कहानी बाँटने जा रही हूँ। सबसे पहले मैं आपको आपने बारे मैं बता दूँ.. मेरा फिगर 34-30-34 है। हम 3 बहनें और 1 भाई हैं। एक बहन मुझसे बड़ी है और एक मुझसे छोटी है.. भाई सबसे छोटा है।

यह बात आज से 3 साल पहले की है। जब मैं अपनी बुआजी के यहाँ घूमने गई थी और बुआजी बीमार भी थीं.. तो मैं वहाँ एक महीना रहने के लिए आई थी।

ठंड के दिन थे.. जनवरी का महीना था।

वहाँ मेरे भैया यानि की बुआजी के लड़के थे.. जो मुझे देख कर बहुत खुश हुए।

उनका नाम सचिन है.. वो मुझे अपनी सबसे अच्छी बहन मानते थे और मुझे बहुत प्यार करते थे।

जब मैं बुआ के घर पहुँच गई तो फूफा जी बुआ को हस्पताल दिखाने ले गए और उनको वहीं भरती कर देना पड़ा और वो घर वापस नहीं आ पाईं और उस रात को घर में सिर्फ हम दोनों ही थे, वो भी अकेले..

रात को खाना खा कर जब हम दोनों सोने चल दिए तो भैया ने कहा- दो बिस्तर की क्या जरूरत है.. आज एक बिस्तर में ही सो जाते हैं।

तो हम दोनों एक बिस्तर में ही लेट गए।

भैया को कपड़े निकाल कर सोने की आदत है.. तो वो कपड़े निकाल कर मेरे पास आ कर लेट गए।

मुझे बहुत अजीब सा लगा.. क्योंकि मैं आज तक किसी लड़के के साथ ऐसे नहीं लेटी थी।

भैया मेरी पढ़ाई के बारे में पूछने लगे और अपनी पढ़ाई के बारे में बताने लगे।

थोड़ी दर बात करने के बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं भैया से कह कर सोने लगी।

वे भी सोने लगे।

अभी कुछ ही देर हुई होगी कि भैया का लंड मेरे पीछे मेरी गाण्ड में घुसने तो तैयार सा लगा।

तो मैंने अपने हाथ से हटाने के बहाने उसे छू कर देखा.. तो वो बहुत मोटा और लंबा था और गरम भी हो रहा था।

भैया भी अभी तक सोए नहीं थे।

जैसे ही मैंने उनके लंड को छुआ तो उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मुझे चुम्बन करने लगे।

मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि ये सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था।

मैं भी उनको चुम्बन करने लगी।

भैया ने पूछा- तेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड है क्या?

तो मैंने मना कर दिया। वैसे भी मेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड था भी नहीं..

भैया मुझे चुम्बन करते रहे, वे कभी गालों पर चूमते, कभी मेरे होंठों पर.. कभी पेट पर..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत गीली हो गई थी।

थोड़ी देर बाद भैया ने मेरी सलवार में अपना हाथ डाल दिया। मुझसे भी रहा नहीं गया तो मैंने भी उनके अंडरवियर में हाथ डाल दिया।

फिर भैया ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैन्टी नीचे करके मेरी चूत को चाटने लगे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर भैया ने मुझसे कमीज उतारने को कहा तो मैंने बिना देर किए अपना कमीज उतार दिया और ब्रा भी उतार दी।

अब मैं बिल्कुल नंगी भैया की बाँहों में थी। वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और पी भी रहे थे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर बाद भैया अपना लंड हाथों में लेकर बोले- अब इसे अपने मुँह में ले ले।

मैंने कभी ऐसा किया नहीं था तो मैंने मना कर दिया।

उन्होंने अपनी कसम दी.. तो मैंने उनका लंड अपने मुँह में ले लिया।

थोड़ी देर चुसवाने के बाद उन्होंने अपना सारा माल मेरे मुँह में निकाल दिया।

फिर हम थोड़ी देर चुम्बन करते रहे।

चूमा-चाटी के बाद भैया का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो मेरी चूत पर लवड़ा रख कर मुझसे बोले- मुझे होंठों से चुम्बन कर और नीचे अपनी जाँघों को ढीला कर..

मैंने ऐसा ही किया.. कुछ पलों तक चुम्बन करने के बाद उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा उनका आधा लंड मेरी चूत में चला गया।

मुझे बहुत दर्द हुआ.. मेरी चीख निकल जाती.. अगर भैया के होंठ मेरे होंठों में ना चिपके होते।

मेरी चूत से खून भी निकल रहा था..
इससे पहले मुझे थोड़ा आराम मिलता.. कि भैया ने एक और धक्का मारा.. अब पूरे का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।

फिर थोड़ी देर बाद जब मैं सामान्य हुई तो उन्होंने मुझसे पूछ कर धक्के मारने शुरू कर दिए।

करीब 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैं और भैया एक साथ झड़ गए।

भैया ने अपना लंड और मेरी चूत मेरी पैन्टी से साफ़ की और मुझे दर्द की गोली ला कर दी।

उस रात भैया ने मुझे 3 बार चोदा.. चुदाई करने के बाद हम नंगे ही सो गए।

बुआजी दो दिन बाद आईं.. इन दो दिनों में हमने खूब मज़े किए।

एक बार तो मैं दिन में रसोई में भी चुदी…

उस दिन के बाद भैया मेरे लवर बन गए और भी एक साल बाद मैं दोबारा बुआजी के घर गई तो बुआजी और फूफाजी कहीं बाहर चले गए तो भैया ने मेरी माँग भर दी और मुझे अपनी घरवाली बना लिया.. वे मुझे साड़ी पहनाने लगे।

मुझे साड़ी पहना कर उन्होंने मुझसे कहा- आज हमारी सुहागरात है।

हमने सुहागरात मनाई।

आज भी हम दोनों सब के सामने भाई-बहन हैं और अकेले में पति-पत्नी की तरह रहते हैं।

अब मेरे भैया मेरी जान बन गए हैं।

मैंने उनका नाम प्यार में ‘जानू’ रखा है। हमें जब भी मौका मिलता है चुदाई जरूर करते हैं।

तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। कैसी लगी आपको..

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बारिश और मेरी चुत चुदाई

मेरा नाम मनीषा है मेरी उम्र 22 है! यह मेरी पहली चुदाई कहानी है. मैं इस साईट पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी है! दोस्तों आम तौर पर सब लोग यही मानते है कि सेक्स को लेकर लड़को में बहुत जोश होता है! यह बात एकदम सही है,  लेकिन यह बात भी मान लीजिए कि लडकियों में भी सेक्स को लेकर उतना ही जोश होता है! पर हम लड़को को पता नहीं लगने देते! मेरी सभी दोस्त इस साईट की कहानियों को पढ़कर बहुत मज़े लेती है!

आज में आप सभी से जो कहानी शेयर कर रही हूँ………..

चरम सुख और उत्तेजना अपनी पार्टनर को दीजिए जिसकी वो हकदार है

इससे बस यही साबित होता है कि एक लड़का और एक लड़की के बीच सिर्फ़ एक ही रिश्ता हो सकता है और वो आप सभी जानते होंगे.

लीजिए में अपनी कहानी पर आती हूँ! दोस्तों यह पिछले साल बरसात के दिनों की बात है! हमारे कॉलेज की छुट्टी हुई और अचानक मौसम खराब हो गया और जोरों से बारिश होने लगी! में कुछ देर तो कॉलेज में रुकी और एक घंटे तक में वहाँ पर खड़ी रही. लेकिन बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और अब धीरे धीरे रात भी होने को थी. तो में बारिश में भीगते भीगते अपने घर पर आ गयी!

घर पर पहुंचते पहुंचते मुझे 7 बज गए थे और बहुत अंधेरा भी हो चुका था और उस समय घर पर लाईट भी नहीं आ रही थी! मैं दरवाजा बजाया तो मेरा छोटा भाई रमेश दरवाजे पर आया और उसने दरवाजा खोला………..

वो मुझसे दो साल छोटा था!

रमेश :- आप तो बिल्कुल भींग गई हो

में :- तो में क्या करती रेनकोट ले जाना भूल गई थी.. क्या तू एक काम करेगा?

रमेश :- हाँ दीदी!

में :- तू मेरे लिए चाय बना दे..  मुझे बहुत ठंड लग रही है!

रमेश :- ठीक है……….. में अभी बनाकर लाता हूँ!

फिर में अपने कमरे में चली गई………..

बाहर मौसम अब ठीक हो चुका था………..

लेकिन हवा तेज़ चल रही थी और में मोमबत्ती जलाकर अपने रूम तक गयी………..

लेकिन रूम तक जाते जाते मोमबत्ती बुझ गई और फिर में बाथरूम में कपड़े चेंज करने गई और मैं एक एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिए! तभी मुझे याद आया कि मैं टावल तो लिया ही नहीं………..

तो मैं बाथरूम के दरवाजे को हल्का सा खोला और देखा कि ज्यादा अंधेरे में बाहर कुछ भी नहीं दिख रहा था! फिर में धीरे धीरे अलमारी की ओर जाने लगी जो कि दरवाजे के बिल्कुल पास थी और में अलमीरा के पास पहुंच गई थी………..

तभी अचानक तेज लाईट के कारण मेरी आखें बंद हो गयी………..

लेकिन जब मैं आंखे खोली तो में सहम गई………..

मेरा भाई मेरे सामने खड़ा है एक हाथ में चाय का कप और दूसरे में बुझी हुई मोमबत्ती लेकर! मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूं और वो मेरे 34 साईज के चूचियो को तो कभी मेरी नंगी बुर को देख रहा था………..

मानो जैसे उसकी लाटरी लग गयी हो! मैं एक हाथ से बुर और एक हाथ से चूचियो को छुपा लिया और उसे डाटते हुए बोली कि रमेश हट जा और फिर में दौड़ते हुए बाथरूम में चली गई!

रमेश :- सॉरी दीदी ( वो चाय लाया था ) मुझे माफ़ करना वो मोमबत्ती हवा से बुझ गई और में यह चाय टेबल पर रख देता हूँ और फिर वो चला गया………..

लेकिन पता नहीं क्यों मुझे गुस्सा सा आ रहा था?

फिर मैं सोचा कि इसमें उसकी क्या ग़लती थी! में भी तो जवान हूँ बहुत खूबसूरत हूँ भला 34 इंच के चूचियो गोरा रंग 26 इंच की कमर 34 इंच की गांड को देखकर कोई भी पागल हो सकता है! फिर ऐसे ही मैं अपने आप को कांच में देखा………..

में सच में क़यामत लग रही थी तो मैं बुर के भीगे बालों पर हल्का हल्का हाथ फेरा तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा! फिर मैं सलवार सूट पहन लिया और फिर में किचन में आ गयी………..

लेकिन में अपने भाई से आंख भी नहीं मिला पा रही थी और उसे बार बार अनदेखा कर रही थी और वो भी बहुत उत्सुकता महसूस कर रहा था! फिर मैं ही आगे होकर उससे बात शुरू की………..

में :- क्या पापा ऑफिस गए है?

रमेश :- हाँ उनका नाईट शिफ्ट है और वो कल सुबह आएँगे……….. लेकिन सॉरी दीदी वो में आपके कमरे में!

में :- कोई बात नहीं……….. कभी कभी हो जाता है और उसमें तुम्हारी कोई ग़लती नहीं थी……….. लेकिन अब तुम आगे से ध्यान रखना ठीक है और अब भूख लगी है तो चलो किचन में खाना बना लेते है!

रमेश :- हाँ ठीक है दीदी!

दोस्तों मेरे परिवार में हम तीन लोग ही रहते थे! इसलिए घर का सभी काम हम लोग मिल बाँटकर करते थे………..

फिर हम इधर उधर की बातें करते करते खाना बनाने लगे! तभी अचानक से मेरी गांड रमेश से टकरा गयी और मुझे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ? तो मैं पीछे मुड़कर देखा तो उसके पजामे में उसका कामदेव (लंड) तंबू बनकर खड़ा हुआ है! लेकिन इस बात से वो बिल्कुल अंजान होने की कोशिश कर रहा था! तो मैं भी अनदेखा कर दिया………..

तो इससे उसकी हिम्मत और बढ़ गई और कुछ देर के बाद उसने फिर से मेरी गांड में अपना कामदेव (लंड) सटाया! फिर में कुछ दूर जाकर खड़ी हो गयी……….. वो भी मेरे और करीब आ गया! तभी मैं गौर किया कि वो मेरे चूचियो को अपनी तिरछी तिरछी निगाहों से देख रहा था………..

क्योंकि मैं दुपट्टा हटा रखा था तो मेरे चूचियो का पूरा आकार साफ साफ नज़र आ रहा था! फिर कुछ देर में खाना बनकर तैयार हो गया और फिर हम करीब 9 बजे खाना खाने बैठे………..

हम टीवी देखकर खाना खा रहे थे तो अचानक उसने मुझसे पूछा कि………..

रमेश :- दीदी क्या आपसे एक बात कहूँ?

में :- हाँ क्यों नहीं……….. बोलो ना!

रमेश :- आप बहुत सुंदर हो!

उसकी आवाज़ आज मुझे कुछ अलग सी लग रही थी!

रमेश :- वो आज आपको बिना कपड़ो के देखा तो मुझे पता चला कि आप कितनी सुंदर हो?

में :- अपनी बकवास बंद कर नहीं तो में एक थप्पड़ लगाऊँगी और चुपचाप खाना खा!

फिर वो कुछ नहीं बोला और हम खाना खाकर टीवी देखने लगे करीब आधे घंटे बाद मैं उससे चेनल चेंज करने को कहा……….. क्योंकि मुझे सीरियल देखना था……….. लेकिन उसने साफ साफ मना कर दिया और वो टीवी देखने लगा रिमोट उसके पास में था! तो मैं झटके से रिमोट उठा लिया और चेनल चेंज कर दिया और रिमोट सोफे पर रखकर उस पर बैठ गयी!

रमेश :- रिमोट मुझे देती है या नहीं!

में :- नहीं दूँगी!

रमेश :- प्लीज़ दो ना मुझे टीवी पर कुछ देखना है!

में :- में नहीं दे रही और तुम्हें जो करना है कर लो!

दोस्तों ये कहानी आप अन्तर्वासना पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम पर पड़ रहे है!
कुछ देर वो चुप बैठा फिर अचानक उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड पर रख दिया और मुझे अपनी ओर खींच लिया में बहुत हैरान थी और में एक झटके में उसकी गोद में आ गई थी! फिर उसने रिमोट ले लिया………..

लेकिन मुझे नहीं छोड़ा में अब भी उसकी गोद में ही थी और में उससे छूटने की कोशिश कर रही थी……….. उसने मुझे बहुत मजबूती से पकड़ रखा था!

में :- रमेश यह क्या कर रहे हो?

रमेश :- अभी आपने ही तो कहा था ना जो करना है करो लो!

में :- बेशरम आने दो पापा को में तुम्हारी……….. मैं उसकी नाक पर ज़ोर से मारा तो उसने मुझे छोड़ दिया और में जैसे तैसे सोफे से उठी और दुपट्टा लेकर वहाँ से जाने लगी! तभी उसने मुझे पीछे से मेरी कमर को पकड़ कर सोफे पर पटक दिया! मेरी तो चीख निकल गई और उसने बिना समय गवाएं मेरे मुहं पर रुमाल बाँध दिया और फिर मेरे दुपट्टे से मेरे हाथ बाँध दिए! अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि में क्या करूं और वो पूरी तरह से पागल हो गया था! में उससे छुटने की पूरी कोशिश कर रही थी और में अपने पैर से उसे दूर कर रही थी! फिर मेरा एक पैर उसके कामदेव (लंड) पर जाकर लगा तो वो दर्द के मारे वहीं पर बैठ गया और मुझे मौका मिला……….. में सोफे से उठी……….. लेकिन उसने मुझे पकड़ लिया और फिर सोफे पर पटक दिया!

रमेश :- साली तू बहुत लात चलाती है रुक जा!

में रमेश के मुहं से यह सब सुनकर बहुत हैरान थी और मुझे अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था! फिर उसने मेरे दोनों पैरों को पकड़कर फैला दिया और वो खुद मेरे ऊपर लेट गया एक हाथ से उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने लगा और दूसरे हाथ से वो मेरे चूचियो को मसलने लगा! उसने मेरी सलवार को नीचे किया और अपनी पेंट और अंडरवियर को नीचे करके अपना कामदेव (लंड) बाहर निकाला लिया! फिर वो मेरीचड्डीमें अपना एक हाथ डालकर मेरी बुर को सहलाने लगा और में उससे छूटने की कोशिश कर रही थी! मेरा सर सोफे से नीचे लटक रहा था और में पूरी ताक़त लगाने के बावजूद भी हिल नहीं पा रही थी! उसने मेरीचड्डीको साईड से हटाकर कामदेव (लंड) का टोपा मेरी बुर में रख दिया………..

में लाचारी से उसकी ओर देख रही थी! फिर उसने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका आधा कामदेव (लंड) मेरी बुर में घुस गया……….. मेरी तो जान ही निकल गयी! फिर दूसरा झटका दिया और पूरा का पूरा कामदेव (लंड) अंदर! अब में दर्द से मरी जा रही थी और मेरी दोनों आँखों से गरम गरम आंसू निकल रहे थे और वो कामदेव (लंड) को ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था और अब मैं विरोध करना बंद कर दिया! वो भी मुझे चोदने का मज़ा लेने लगा………..

मैं अपनी दोनों आखें बंद कर ली……….. लेकिन आंसू नहीं रुके……….. इतना दर्द मुझे कभी नहीं हुआ!

फिर उसने मेरा शर्ट खोलना चाहा……….. लेकिन मेरे दोनों हाथ बंधे होने के कारण वो सिर्फ़ कंधे तक ही मेरा शर्ट खोल पाया! वो मेरी गर्दन, कंधे, गाल और पीठ पर किस करता रहा! में लगभग बेहोश हो चुकी थी……….. तभी वो बहुत घबरा गया और उसने मेरा मुहं खोल दिया……….. लेकिन मैं कोई हलचल नहीं की! फिर उसने पानी लाकर मेरे मुहं पर मारा तो मुझे थोड़ा होश आया और मैं उससे कहा कि प्लीज़ मुझे खोल दो तुम्हें जो करना है कर लो………..

लेकिन धीरे धीरे! वो बहुत खुश हो गया और मुझे किस करने लगा! फिर उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और उसका कामदेव (लंड) 6 इंच का बिल्कुल तना हुआ था और उस पर मेरी बुर का खून लगा हुआ था! तो उसने रुमाल से खून को साफ किया और कामदेव (लंड) को मेरे होठों पर रख दिया! मैं मुहं हटा लिया……….. लेकिन उसने दोनों हाथ से मेरे मुहं को पकड़ लिया और कहा कि प्लीज़ ले लो ना……….. नहीं तो मुझे फिर से ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी! अब मेरे पास कोई और रास्ता भी नहीं था……….. मैं होंठ को हल्के से खोला और उसके कामदेव (लंड) के टोपे को मुहं में लिया और फिर में उसके कामदेव (लंड) को धीरे धीरे चूसने लगी और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी!

फिर दो तीन बार ऐसा करने के बाद उसने मेरे मुहं में पूरा कामदेव (लंड) घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा……….. उसे तो मानो जन्नत ही मिल गयी हो और तीन मिनट के बाद उसने मुझे सोफे से उठाया और मेरे हाथ खोल दिए और मेरे कपड़े खोलने लगा और देखते ही देखते में बिल्कुल नंगी हो गई! और उसने मेरी बुर के खून को साफ किया! फिर वो सोफे पर बैठ गया और मुझे अपनी गोद में बैठने को बोला……….. लेकिन में वहीं पर खड़ी रही! तो उसने मेरा हाथ खींचकर मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और फिर उसने मुझे किस करना चाहा……….. लेकिन मैं दूसरी ओर अपना मुहं मोड़ लिया! फिर वो मेरे चूचियो को चूसने और सहलाने लगा! मेरे मुँह से आहें निकलने लगी! वो कभी चूचियो पर किस करता……….. कभी कमर को सहलाता तो कभी मेरी गांड को सहलाता और में कहे जा रही थी अह्ह्ह प्लीज़ रमेश आआहहा आ प्लीज़ नहीं ऐसा मत करो! फिर उसने मौका देखकर अपना कामदेव (लंड) मेरी बुर में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा……….. लेकिन इस बार मुझे दर्द थोड़ा कम हुआ!

फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद उसने एकदम से अपनी स्पीड बढ़ा दी और मेरी कमर को पकड़ कर धक्के देने लगा! फिर कुछ देर बाद वो बहुत थक गया था और शायद उसका वीर्य निकल चुका था और वो अपनी दोनों आंखे बंद करके बस मेरी कमर को सहला रहा था! मेरी सांसे बहुत तेज चल रही थी और मैं उसकी ओर देखा और फिर मैं उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और में खुद अपनी बुर के झटके उसके कामदेव (लंड) पर मारने लगी! तभी वो तो बहुत चकित रह गया और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और हम एक दूसरे को किस करने लगे! फिर पूरी रात हमने सेक्स किया !!

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