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मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो

दोस्तो, मेरा नाम शोनू है. मेरी उम्र 22 साल है. मैं ग्रेजुएशन कर रही हूँ. मेरा बदन बहुत गोरा है और मेरा साईज कुछ यूं है बड़े बड़े 34 इंच के मम्मे हैं. लचीली सी कमर 30 इंच की है और पीछे थिरकती हुई बड़ी सी गांड 36 इंच की है. जिसे देख कर लड़कों के लंड खड़े हो जाते हैं.

पहले तो मैं एक सीधी लड़की थी, पर अब मैं एक रंडी बन गई हूँ. मुझे लड़कों के बड़े बड़े लंड चूत में लेने की आदत पड़ गई है.

ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में थी. तब मेरी उम्र 19 साल थी. मेरा बहुत ही खूबसूरत और कसा हुआ बदन है. मेरे बड़े बड़े मम्मे और बड़ी गांड मेरी मचलती जवानी को साफ जाहिर कर रहे थे.

मुझे क्लास में कई लड़कों ने प्रपोज भी किया था, पर मैंने किसी को भाव नहीं दिया.

कुछ दिन बीते और मेरी 12 वीं कक्षा की परीक्षा शुरू हो गई.

पहला पेपर शुरू हुआ, तो वहां मेरा रोल नंबर एक लड़के के पीछे था … जिसका नाम शिबू था. वह बहुत ही स्मार्ट और खूबसूरत था. उसका कसा हुआ बदन और फिट बॉडी पर सारी लड़कियां फ़िदा थीं.
सब उसे देखतीं, पर वो किसी को नहीं देखता था.

मेरा भी दिल उस पर आ गया था. मैं सोचने लगी कि इससे कैसे बात शुरू करूं … पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

अब दूसरे पेपर का दिन आया, तो मैंने सोचा कि आज तो इससे बात करके ही रहूंगी.

उस दिन मैंने रेड कलर में बड़े गले का टॉप पहना हुआ था, जिसमें से मेरे 36 इंच के चूचे साफ नजर आ रहे थे. मैंने पेपर के दौरान ही उससे पेंसिल मांगी. उसने मुझे पीछे मुड़ कर देखा और उसकी नजर मेरे मम्मों पर जा पड़ी. मैं कुछ ज्यादा ही झुक कर बैठी थी तो उसे मेरे मम्मे साफ़ दिखने लगे थे. वो मेरे दूध देखता ही रह गया.

उसने मुझे देखा और पेन्सिल दे दी.

अब इसके बाद मैंने हर पेपर में उससे बात की और आखिरी में हमने एक दूसरे के नम्बर ले लिए. वो भी मेरी तरफ आकर्षित हो गया था. ऐसा कैसे हुआ ये मुझे समझ नहीं आया.

खैर … हम दोनों में धीरे धीरे प्यार हो गया और हमने अकेले में मिल कर सेक्स कर लिया.
इसके बाद तो उसने मुझे कई बार चोदा.

मुझे भी उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा था. उसी के साथ मुझे सिगरेट और शराब की आदत भी लग गई थी. मेरे बिंदास स्वभाव को देख कर वो भी मेरे साथ खूब मजे लेता था.

फिर एक दिन शिबु और मैं ड्रिंक कर रहे थे. एक बार चुदाई हो चुकी थी और मैं एक सिगरेट पी रही थी.

तभी शिबु ने मुझसे कहा- शोनू क्या हम दोनों ग्रुप चुदाई करें?
मैंने साफ मना कर दिया.
वो बोला- जान ग्रुप चुदाई में बहुत मजा आता है … मान जाओ ना!

उसके बहुत मनाने के बाद मैंने उससे हां कर दी. वह बहुत खुश हुआ.

मैंने उससे पूछा- ग्रुप में कौन कौन रहेगा?
तो उसने कहा- मेरे 3 दोस्त और उनकी गर्लफ्रेंड रहेंगी … हम सब बहुत मस्त चुदाई करेंगे.
मैंने भी कहा- हां बाबू … चोद लेना … मुझे भी जम कर चुदने का मन है.

ये तय हो गया तो शिबु प्लान बनाने लगा.

फिर उस दिन की बात है, जब मुझे पता ही नहीं था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. तब भी मैं ये मान चुकी थी कि मेरी चूत के लिए कुछ और लंड भी मिलने वाले हैं.

हमारी ग्रुप चुदाई एक होटल में होनी तय हुई थी. मैंने उस दिन ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी थी. ऊपर एक बहुत ही खुला और चुस्त सा सलवार सूट पहना था … जिसमें मैं एकदम रंडी लग रही थी.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझे अपनी बाइक पर बिठाया और मुझसे बोला- आह जान आज तो मस्त माल लग रही हो. तुम्हें तो आज मेरे दोस्त बहुत चोदेंगे.
उसकी बात से मैं शरमा गई.

कुछ ही देर में हम दोनों उस होटल के कमरे में पहुंच गए, जहां उसके 3 दोस्त हमारा इंतजार कर रहे थे.

राज, हरि, विशाल ये तीनों दोस्त मेरी जवानी देख कर एकदम से हॉट हो गए. वो तीनों मुझे ऐसे देख रहे थे, जैसे मुझे अभी ही पकड़ कर चोद देंगे. उनकी आंखों में चूत चुदाई की हवस साफ दिखाई दे रही थी.

मैंने उनसे पूछा- आप लोगों की गर्लफ्रेंड कहां हैं?
तो उन्होंने कहा- वो आज नहीं आएंगी.
मैंने पूछा- फिर हम चुदाई कैसे करेंगे?
राज बोला- चुदाई तो होगी भाभी …
मैं- कैसे?
हरि- भाभी हम सब मिलकर आपके साथ xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.

ये सुनकर मैं बहुत डर गई- क्या मतलब है तुम्हारा?

मैंने अपने शिबु की तरफ देखा. शिबु मुस्कुरा दिया. मैं समझ गई कि यह इनकी कोई चाल है.

मैं वहां से जाने लगी, तभी शिबु ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और गले में किस करने लगा.

वो बोला- बेबी मान जाओ ना प्लीज. आई लव यू जान.

शिबु बहुत जिद करने लगा. मैं भी क्या करती. उसके प्यार के लिए मैं मान गई तो वो सभी बहुत खुश हुए. हमारे बीच हंसी मजाक चलने लगा. दारू की बोतल खुल गई और सभी ने ड्रिंक करना शुरू कर दिया.

फिर शिबू मुझे पकड़ कर मेरे बड़े बड़े मम्मों को दबाने लगा. मुझे चार लौंडों के सामने अपने दूध दबवाने में बहुत शर्म आ रही थी.

फिर थोड़ी ही देर में दारू के असर से मेरी जवानी की गर्मी बाहर आने लगी. मुझे आज कुछ अलग सा लग रहा था. मैंने शिबु की तरफ देखा तो उसने आंख मार दी. मैं समझ गई कि इसने मेरे गिलास में कोई उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा डाली है.

खैर … मैं तो चुदने को आई ही थी. शिबू मेरे मम्मों को दबा रहा था और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

‘आहह … ऊऊहह …’

शिबू ने मुझे बेड पर बैठा दिया और उसके दोस्त कुर्सी लगा कर सामने बैठ गए. शिबू ने मेरा कुर्ता निकाल दिया और मेरे चूचे काली ब्रा में उन सबके सामने आ गए. शिबू मेरे पीछे आया और मेरी काली ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

मुझे भी मजा आने लगा था.

फिर वो तीनों उठ कर पास आ गए और हरि ने मेरी ब्रा खींच दी. ब्रा हटते ही मेरे चूचे उछल कर बाहर उन सबके सामने आ गए.

उन सबने बारी बारी से मेरे मम्मों पर हाथ फेरने शुरू किए. इतने लोगों के हाथ मेरे बूब्स पर थे … इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उन सबके लंड भी खड़े हो चुके थे.

हरि मेरे नरम नरम मम्मों को सहलाते हुए बोला- शिबु क्या मस्त माल है तेरी गर्लफ्रेंड … आज ये मस्त मजा देगी.
शिबु- हां भाई, एकदम रंडी की तरह है.

अपने प्रेमी के मुँह से ये सुन कर मुझे अजीब लगा. शिबु ने आज तक मुझे कभी ऐसा शब्द नहीं बोला था.

मैंने भी नशे में सोचा कि आज तो मैं वैसे भी रंडी बनने वाली हूँ … कह लेने दो.

हरि- भाभी, आप बहुत सेक्सी हो … आपको चोदने में बहुत मजा आएगा.
मैं कुछ नहीं बोली.

शिबु- आओ मेरी रंडी शोनू … मेरा लौड़ा मुँह में ले लो.

मैंने भी सब के सामने बिना हिचकिचाहट के मेरे शिबु का पेन्ट निकाला और चड्डी में हाथ डाल कर उसके 6 इंच का लंड पकड़ कर हिलाने लगी. लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया. शिबु को बहुत मजा आने लगा.

शिबु- आहह … मेरी रंडी क्या लंड चूसती हो … मजा आ जाता है.
विशाल- भाभी जी हमारा भी लंड चूस लो.
मैं- हां देवर जी … सब लाइन में खड़े हो जाओ … सबको मस्त कर दूंगी.

मेरी बात सुनकर वो तीनों लाइन में खड़े हो गए और मैं शिबु का लंड छोड़ कर उन तीनों के पैंट निकालने लगी.

उनके लंड खड़े थे … सबसे पहले मैंने हरि की पैंट उतारी, तो मैं दंग रह गई. उसका लंड उसकी चड्डी में बहुत बड़ा दिख रहा था. जब मैंने उसकी चड्डी निकाली, तो उसका मूसल लंड देख आकर मैं डर गई. उसका लंड करीब 8-9 इंच का था और काफी मोटा.

हरि के बाद विशाल और राज की पैंट उतारी तो उन सबके लंड भी बहुत बड़े बड़े थे … मेरे शिबु से सभी के लंड काफी बड़े थे.

राज- भाभी आज आप हमारी रंडी बनने वाली हो … पता है न आपको!
मैं- हां, मेरा शिबू मुझे रंडी बनाना चाहता है … तो मैं भी रंडी बनने को तैयार हूं.

उन चारों ने मेरी सलवार निकाल दी और सभी मुझ पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े. शिबु मेरी ब्लैक पैंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा. हरि और राज मेरे बूब्स चूसने लगे और विशाल ने मेरी गांड पर काटना और चूमना शुरू कर दिया.

मैं चार मर्दों के बीच अकेली रांड सी पागल हुई जा रही थी. मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी थीं- आआहहह इस्स … उन्हह.
xxx ग्रुप सेक्स में मुझे बहुत आनन्द मिल रहा था.

उन चारों ने मुझे घुटने के बल बैठा दिया और सब मेरे पास आकर खड़े हो गए. सबसे पहले विशाल अपना 8 इंच का लंड मेरे मुँह के सामने ले आया. मैंने उसका लंड पकड़ा और चूसने लगी. उसका लंड एकदम लॉलीपॉप की तरह रसीला था और उसेक लंड से निकलते प्रीकम कोई चाटने में मुझे भी बहुत मजा रहा था.

मैंने विशाल का पूरा लंड अन्दर ले लिया और मस्ती से चूसने लगी.

विशाल- आआआह … क्या लंड चूसती है शिबु तेरी रंडी भाभी..

उसके बाद हरि और राज ने अपने 9-9 इंच के मोटे मोटे लंड मेरे दोनों हाथ में दे दिए और शिबु मुझे ये सब करते हुए देख रहा था.

मैं भी उसे देख देख कर उन तीनों के लंड के साथ खेलने लगी.

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद विशाल ने मेरे मुँह में ही अपना पानी डाल दिया. उसका स्वाद अजीब था … पहले मैंने कभी भी लंड का रस नहीं पिया था.

वो झड़ते हुए बोला- आंह पी जा मेरा पानी रंडी!

मैंने नाक बंद की और उसके लंड का पूरा पानी पी गई. वे सब बारी बारी से मेरे मुँह में लंड डालने के बाद रस छोड़ने लगे. मेरा मुँह दुखने लगा था.

इसके बाद फिर से दारू और सिगरेट का दौर चलने लगा. मुझे भी दारू पीने की चुल्ल हो रही थी. मैं अब बहुत अधिक चुदासी हो गई थी.

जब मैंने उन सबके लंड सहलाए तो दुबारा से लंड खड़े हो गए. वो तीनों मुझे पलंग पर ले गए. सामने मेरा शिबु शराब पीते हुए सब देख कर अपना लंड हिला रहा था.

मुझे बिस्तर पर लेटा दिया गया. विशाल ने मेरी पैंटी निकाल दी. हरि मुझे चूमने लगा और राज मेरे मम्मों से खेल रहा था.

अचानक से विशाल ने मेरी चूत में उंगली डाल दी … मुझे बहुत मजा आने लगा. वह अपनी उंगली मेरी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था.

इधर हरि का मुँह मेरे मुँह में था. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. वो मुझे भूखे शेर की तरह मेरे मुँह में मुँह डाल कर चाट रहा था. मैं भी उसका सिर दोनों हाथों से पकड़ कर उसका साथ देने लगी.

राज भी मेरे बड़े मम्मों को खूब काटते सहलाते हुए मुझे मजा देने लगा था.

फिर राज मेरी चूत के पास गया … जहां विशाल लगा था. उसने विशाल को हटा कर अपना मुँह मेरी चूत में लगा दिया.

मेरी वासना भरी सिसकारियां निकलने लगीं- आहह उन्ह … अह … मजा रहा मुझे … ऐसे ही चूसो मेरी चूत.

उधर हरि मेरे मम्मों से खेल रहा था और विशाल ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया था.

शिबु- शोनू मेरी रांड मजा आ रहा है न तुझे!
मैं- हां भड़वे, बहुत मजा आ रहा है.
शिबू- अभी और मजा आएगा … रुक जा बहन की लौड़ी … तेरी फुद्दी की चटनी बनने वाली है.
राज- अब सब लोग हटो … इस रंडी की चुदाई पहले मैं करूंगा.

उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड डालने लगा. जब वह मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा, तो मुझे बहुत मजा आ रहा था. उसने अपना लंड जोर से मेरी चूत पेल डाला. उसका टोपी ही अन्दर गई थी कि मैं जोर से चिल्लाई दी.

‘ऊ … मर गई … साले हरामी धीरे पेल मादरचोद … आह … फाड़ दी कुत्ते … निकालो इसे … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.’

पर उसने मेरी एक नहीं सुनी. बल्कि एक और जोर का धक्का लगा दिया. मुझे ऐसा लगा मानो मेरी चूत पूरी फ़ट गई हो. मेरी आंख से आंसू आने लगे थे.

मैं- आआहह … उन्ह … रुक जा साले … मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मुझे जाने दो … मैं मर जाऊँगी.

इतने में शिबु ने आगे आकर मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और बोला- रंडी मादरचोदी … तेरी मां का भोसड़ा … अभी तो बहुत मजे ले रही थी … अब क्या हुआ कुत्ती..!

कुछ देर ऐसे ही चुदने के बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मेरा दर्द अब मजे में बदल गया और मैं जोर जोर से सिसकारियां भरने लगी- आहहहह उन्ह..ह और जोर से चोदो मुझे आहह … बहुत मजा रहा है … आह चोदो अपनी रंडी को … ऐसे ही.

कुछ ही देर में मैं झड़ गई.

मेरे झड़ने के बाद हरि ने मुझे एक पैग पिलाया, जिससे मुझे राहत मिल गई.

उसके बाद राज मेरी चूत में लंड डाल कर जोर जोर से धक्का मारने लगा. बाकी सब अपने लंड हिला रहे थे. दस मिनट बाद राज भी मेरी चूत में ही झड़ गया और दूर हट गया. मैं अभी नहीं झड़ी थी … मुझे राज पर गुस्सा आने लगा था.

हरि- कुतिया … कैसा लगा तुझे इतना बड़ा लंड लेकर … आज तक तो तू तेरे शिबू का ही 6 इंच का लंड लेती थी.
मैं- बहुत मजा आया भोसड़ी के … चल अब तू आजा चोद दे भड़वे मुझे रंडी की तरह.

मेरी गालियां सुनकर उसे गुस्सा आ गया- भड़वा बोलेगी साली … कुतिया छिनाल … तेरी मां का भोसड़ा … रुक रंडी अभी बताता हूं.

अब उसने मुझे सीधा लेटा दिया और अपना लंड एक ही झटके में मेरी चूत में पूरा डाल दिया.
मैं दर्द के मारे तड़फ गई- आह … नहीं धीरे कर ले … अब नहीं बोलूंगी … आहह … आहहहह … मर गई … आहहह.

लेकिन हरि जोर जोर से पूरी स्पीड में मेरी चुदाई कर रहा था और मैं दर्द से मरी जा रही थी. इसी बीच मेरी चूत का दो बार पानी निकल गया था. फिर वो लंड निकाल कर सीधा लेट गया.

हरि- चल रंडी … आ मेरे लंड के ऊपर बैठ जा.

मैं भी गांड हिलाते हुए जाकर उसके लंड पर बैठ गई. मैंने उसके मोटे लंड को अपनी चूत पर टिका लिया और नीचे बैठने लगी. मुझे ऐसे में चुदने में बहुत मजा रहा था. मैं पूरा लंड चूत में लेकर जोर जोर से अपनी चूत मरवाने लगी थी.

‘आआह … आआहह..’

मैं हरि के लंड पर ऊपर नीचे होने लगी. उसने मुझे अपनी छाती की तरफ खींचा तो मेरी गांड पीछे से खुल गई.

तभी पीछे से विशाल आया और उसने मुझे हरि के ऊपर सीधा लेटा दिया. हरि का लंड अभी भी मेरी चूत में था.

विशाल- देखो तो साली की क्या मस्त गांड है … रंडी की गांड मारने में कितना मजा आएगा.

मैं डर गई.

मैं- नहीं नहीं विशाल प्लीज गांड में नहीं … बहुत दर्द होगा.

पर वो नहीं माना और उसने मेरी कमर को कसके पकड़ लिया. मैं झटपटाने लगी … पर नीचे से हरि ने भी मेरे हाथ पकड़ लिए.

वे सब हंसने लगे.

फिर विशाल ने मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश करने लगा. पर मेरी गांड का छेद बहुत छोटा था. उसने जबरदस्ती लंड गांड में घुसाने की कोशिश की और उसके लंड की टोपी गांड में अन्दर गुस गई.

मैं दर्द से कंप उठी. मैं रोई चिल्लाई- आंह … नहीं मेरी गांड मत मारो.

मगर वो लंड डालता ही गया.

मैं- विशाल मेरी गांड बहुत छोटी है … प्लीज ज्यादा जोर मत लगाओ … तुम्हें गांड मारनी ही है न तो मेरे बैग मैं एक क्रीम रखी है … वो लगा लो.

तब शिबु ने मेरे बैग से क्रीम निकाल कर विशाल को दे दी. विशाल ने अपनी उंगली से क्रीम मेरी गांड में अन्दर तक लगा दी और अपने लंड पर भी लगा ली.

अब वो फिर से अपने लंड को मेरी गांड में डालने लगा. अब लंड थोड़ा आसानी से गांड में घुस रहा था, पर उसका लंड इतना मोटा था कि मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

वो मेरी गांड में लंड डालने की स्पीड बढ़ाने लगा. नीचे से हरि भी अपना लंड मेरी चूत में डाल रहा था. मेरी गांड और चूत दोनों एक साथ चुद रही थीं.

कुछ देर के दर्द के बाद मुझे भी अब मजा आने लगा था.
मैं मुस्कुराते हुए चिल्लाने लगी- अंह उन्ह … आह … हहहह हह … चोदो मुझे … और जोर से चोद दो … आह बना दो आज मुझे रंडी … मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो … आआहह ऊऊऊहह …

मैं जोर जोर से चिल्लाकर सैंडविच चुदाई के मजे ले रही थी. तभी राज आया और उसने सामने से मेरे मुँह में लंड दे दिया. अब मेरे सारे छेदों में लंड था.

शिबू- अब बन गई मेरी शोनू रंडी … तुझे मैं ऐसे ही चुदता हुआ देखना चाहता था … तुझे मैं बाजारू रंडी बना दूंगा.

मैं भी उसकी बातें सुन कर और मजे से चुदवा रही थी.

कोई बीस मिनट बाद मैं बहुत थक चुकी थी. सबके सब झड़ने वाले थे … तो जोर जोर से धक्के मारने लगे थे. मैं फिर से झड़ गई थी. मेरी चूत से पानी बहने लगा था. तभी हरि मेरी चूत में झड़ गया.

उसके बाद राज मेरे मुँह में झड़ गया. मैं उसका पूरा पानी पी गई. थोड़ी ही देर में विशाल भी मेरी गांड में ही झड़ गया.

हम सब बहुत थक चुके थे, तो ऐसे ही लेट गए.

थोड़ी देर बाद सब उठे और सबने दारू के पैग लगाए और मुझे एक बार फिर से चोदना शुरू कर दिया.

इस बार मुझे xxx ग्रुप सेक्स में बहुत मजा आ रहा था.

शिबु ने भी मेरी गांड मारी और सबने अपना अपना पानी मेरे ऊपर गिराया. फिर हम साथ में नहाए और तैयार हो गए. सबने घर जाते समय मुझे होंठों पर किस की.

हरि बोला- रंडी अब जब भी मौका मिलेगा … हम ऐसे ही xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.
मैंने भी कहा- तुम जब बुलाओगे तब अपनी गांड और चूत लेकर आ जाऊंगी.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी

कॉलेज लाइफ में खूब लंड लिये. कॉलेज के बाद लंड नहीं मिला. मेरी सहेली ने सगे भाई बहन का सेक्स सुझाया. मैंने क्या किया? भाई बहन की चुदाई की कहानी में पढ़ें.

दोस्तो, मेरा नाम पारुल है. मैं 22 वर्ष की हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं- मम्मी-पापा, मैं और मेरा बड़ा भाई विक्रांत. जिसकी उम्र 24 वर्ष है.

अब मैं अपनी मुद्दे की बात पर आती हूँ. आज मैं आप सबको बताना चाहती हूँ कि 20 की उम्र के बाद लड़का हो, चाहे लड़की सभी को शारीरिक संतुष्टि के लिए सेक्स चाहिए होता है. यह भाई बहन की चुदाई की कहानी इसी सच्चाई को कहती है.

आगे बढ़ने से पहले मैं अपने बारे में आपको बता देती हूं. मेरा फिगर 34 28 36 का है. मेरे कॉलेज और गांव के लड़के सभी मुझ पर मरते थे. अपनी स्कूल लाइफ में भी लड़कों के साथ मैंने काफी मजे किये हैं.

उसके बाद कॉलेज में आने के बाद मैंने 2 लड़कों को पटा लिया और उनके साथ भी बहुत मस्ती की. मूवी देखते समय भी मैं अपनी चूची दबवाती थी. लड़कों को जवान लड़की की चूची बहुत ज्यादा आकर्षित करती हैं और चूचियों से खेलना और उनको दबाना वो बहुत पसंद करते हैं.

अपने बूब्स दबवा दबवा कर मैंने 34 के करवा लिये थे. सभी लड़कियां ऐसे ही बूब्स चाहती हैं.
जब मेरी कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो गयी तो मैं घर पर रहने लगी. अब मेरे बूब्स के साथ खेलने वाला कोई नहीं रह गया था मेरे पास.

एक दिन मैंने अपनी सहेली सपना को ये बात बताई. उसने मुझे मेरे भाई को पटाने का आइडिया दिया. सपना कहने लगी कि उसने भी अपने भाई को पटा रखा है और वो अपने भाई के साथ खूब मजे करती है. घर में ही उसको मस्त लंड मिल गया है.

सपना की बातें मुझे उत्तेजित करने लगी. मैंने अपने भाई को पटाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया. काम थोड़ा मुश्किल था लेकिन इतना भी नहीं कि मैं कर ही न सकूं. मैं देखने में बहुत ज्यादा सेक्सी हूं इसलिए मेरे लिए आसान था.

किसी भी लड़की को अपने भाई को पटाने में मुश्किल इसलिए होती है क्योंकि भाई-बहन के रिश्ते में हमें शर्म आती है. वरना सेक्स तो लड़के भी करना चाहते हैं जैसे कि हम लड़कियां चाहती हैं. लड़के पटा पटा कर मुझे लाइफ में इतना तजुरबा तो हो गया था कि मैं लड़कों की कमजोरी जान चुकी थी.

अब मुझे लंड चाहिए था. वो भी अपने ही भाई का लंड.

मेरे पापा की दुकान है और मेरी मां घर पर ही रहती है. हम लोग मिडल क्लास परिवार से हैं. मेरा भाई कॉलेज के थर्ड इयर में पढ़ रहा था उस वक्त. यह बात आज से साल भर पहले की ही है.

मेरे और विक्रांत के एग्जाम खत्म हो चुके थे. हम लोग अब घर पर ही रहते थे. पापा सुबह दुकान पर चले जाते थे. मां घर के काम में लगी रहती थी.

घर में मैं बोर हो रही थी और कॉलेज के लड़कों के साथ की हुई मस्ती की यादें मुझे परेशान करने लगीं. मैं अपनी सहेली सपना और उसके भाई के सेक्स रिश्तों के बारे में सोचने लगी. मैंने सपना को फोन किया और उससे कहा कि मैं भी अपने भाई को पटाना चाहती हूं.

सपना ने मुझे कुछ टिप्स दिये. मैं उसके सुझाव सुन कर खुश हो गयी. मुझे लगने लगा कि मैं भी अपने भाई को पटा सकती हूं. अगले दिन से मैंने उसकी बताई बातों पर अमल करना शुरू कर दिया.

पहला दिन:
पहली सीख के तौर पर मैंने डीप गोल गले के टॉप्स के साथ स्कर्ट या जीन्स पहनना शुरू किया. उस दिन जब सुबह विक्रांत बेड पर लेटा हुआ था तो मैं उसके रूम में झाड़ू लेकर पहुंच गयी. उसके सामने झुक कर झाड़ू देने लगी.

मेरा प्लान कामयाब भी हो रहा था. विक्रांत मुझे नोटिस कर रहा था. मैं भी जानबूझ कर अपने चूचे हिला रही थी. ये सब होने के बाद मैं बाहर आ गयी.

फिर दोपहर में मुझे पैसे चाहिए थे. मैं भाई के पास जाकर पैसे मांगने लगी और मजाक करते हुए उसकी पीठ पर चढ़ गयी. मैंने अपने बड़े बड़े बूब्स उसकी पीठ पर टच किये. उसने भी मुझे पीछे हाथ लाकर कस कर पकड़ लिया. जैसा सपना ने बताया था वैसा ही हो रहा था.

दूसरा दिन:
विक्रांत ड्राइंग रूम में बैठ कर टीवी देख रहा था. मैंने उसके सामने झुक कर बातें करना शुरू किया. जैसे जैसे मेरे बूब्स के दर्शन उसको हो रहे थे उसका लंड उसके शॉर्ट्स में उठने लगा था. मैं ये सब साफ नोटिस कर पा रही थी.

उसी रात को हम लोग टीवी देख रहे थे और मम्मी किचन में खाना बना रही थी. तभी अचानक लाइट चली गयी और अंधेरा हो गया. मेरे मन में एक तरकीब सूझी और मैं अपना मोबाइल ढूंढने लग गयी.

अंधेरे का फायदा उठा कर मैंने अपने भाई की जांघों के बीच में हाथ मारा और मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसने बोला कुछ नहीं लेकिन मुझे हटाने के लिए उसने मुझे भी हाथ मारा और मेरे बूब्स को छेड़ दिया. ये उसकी तरफ से पहला इशारा था.

तीसरा दिन:
तीसरे दिन मैं पढ़ाई कर रही थी. तभी विक्रांत बोला कि कुछ समझ नहीं आ रहा हो तो पूछ लेना. फिर मैंने भी मौका देख कर बोल दिया कि भाई एक थ्यौरी समझा दो.

उस दिन उसने मेरी गोद से नोटबुक उठाये बिना ही मेरी गोद में रखे हुए मुझे थ्यौरी समझाने लगा. वो बीच बीच में मेरी जांघ और चूत पर भी टच करने की कोशिश कर रहा था. मुझे भी अच्छा लग रहा था लेकिन डर भी था कि कहीं मां न आ जाये.

उसने मुझे थ्यौरी बता दी और दूसरे रूम में चला गया. मैंने उसको फिर से बुलाया और कहा- एक सवाल और भी है.
इस बार सवाल समझाते हुए विक्रांत ने मेरे बूब्स को कई बार टच किया. जब उससे रुका न गया तो उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. मुझे अच्छा लगने लगा.

मेरा भाई मेरे बूब्स दबा कर मजा ले रहा था और मैं भी गर्म हो रही थी. मैंने भी उसको रोका नहीं और वो भी नहीं रुका. फिर कुछ देर के बाद मां के आने की आहट हुई और हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर नॉर्मल हो गये.

अब विक्रांत मेरे जाल में पूरी तरह से फंस चुका था.

उसी दिन फिर शाम को मां खेत में चली गयी. हम भाई-बहन घर में अकेले थे. मैं अपने और विक्रांत के लिए रसोई में मैगी बनाने चली गयी.

पीछे से आकर विक्रांत ने मुझे हग कर लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा. मुझे भी बहुत मजा आने लगा. मैंने भी पीछे मुड़कर विक्रांत के होंठों को चूम लिया.

और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ये मेरे भाई के साथ मेरा पहला किस था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. हम दोनों काफी देर तक किस करते रहे.

फिर वो मुझे उठा कर बेड पर ले गया. हमने बहुत देर तक किस किया. उसके बाद विक्रांत ने मेरी टीशर्ट को उतार दिया. मैं ब्रा में रह गयी. विक्रांत मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी एक एक चूची को दबाते हुए चाटने लगा. मेरी ब्रा गीली होने लगी.

विक्रांत जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मैं सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … विक्रांत कोई आ जायेगा. बस करो … आह्हह… ओहह … रुको.
मगर विक्रांत नहीं रुक रहा था.

फिर उसने मेरी जीन्स भी निकाल दी. अब मैं ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. उसके बाद उसने मेरे बूब्स को नंगा कर दिया और पीने लगा. मुझे मजा आने लगा. मैं उसके बालों को सहलाने लगी.

मेरे चूचे पीने के बाद उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी. मेरे भाई के सामने मेरी चूत नंगी हो गयी. मुझे अलग ही रोमांच मिल रहा था उसके सामने नंगी होकर. वो मेरी चूत को चाटने और चूसने लगा.

मैं तड़प उठी. सपना के बारे में सोचने लगी कि वो सच में बहुत मजा लेती होगी अपने भाई के साथ! क्योंकि विक्रांत के साथ मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

हम दोनों ने काफी देर तक मजे किये लेकिन चुदाई नहीं हो पाई क्योंकि मम्मी के आने का डर था.

घर में चुदाई का मौका नहीं मिल पा रहा था. इसलिए हम दोनों ने कॉलेज का बहाना करने का सोचा.

कॉलेज खुलने के बाद हम दोनों घर से कॉलेज के लिए काम कह कर निकले लेकिन हमें कहीं और ही जाना था.
हम सीधे एक होटल में पहुंचे. वहां पर हमने रूम बुक किया. वहां सुबह 10 बजे पहुंच गये थे हम.

जैसे ही हम रूम में पहुंचे तो मैं विक्रांत की गोद में कूद गयी. उसने भी मुझे लपक लिया. उसके हाथ मेरे चूतड़ों को भींच रहे थे. हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गये थे.

कुछ देर के बाद जब भाई से रुका न गया तो उसने मुझे बेड पर पटक लिया. मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा. उसने मेरे टॉप को निकाल कर मेरे बूब्स को मुंह में ले लिया.

मेरा हाथ अपने आप ही विक्रांत की पैंट में घुस गया था. मेरा हाथ उसके अंडरवियर को टटोल रहा था. मैं उसके लंड को देखना चाह रही थी. मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसका लंड बहुत मोटा और लकड़ी की तरह एकदम से सख्त हो गया था.

बहुत दिनों के बाद मुझे लंड का टच मिला था. कॉलेज के लड़कों के लंड से खेलने के बाद अब भाई का लंड पकड़ना बहुत मजा दे रहा था. विक्रांत मेरी चूचियों को मसल मसल कर पी रहा था. उसके बाद विक्रांत ने मुझे पूरी नंगी कर दिया. वो मुझे निहारने लगा. मैंने भी उसको अपनी जवानी के खूब दर्शन करवाये.

विक्रांत ने मेरी चूत को छेड़ा तो मैं सिहर गयी. मैंने उसके सिर को नीचे की ओर दबाने लगी. वो मेरा इशारा समझ गया और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मस्ती में खो गयी. पागल होने लगी.

न जाने इन लड़कों को चूत चाटने में क्या मजा आता है. विक्रांत पागलों की तरह मेरी चूत तो पी रहा था.
बड़ी मुश्किल से मैंने उसको रोक कर कहा- मेरी जान … अब मेरी चूत को अपने लंड का स्वाद चखा दे. मैं और इंतजार नहीं कर सकती हूं अब.

उसने हां करते हुए बैग से कॉन्डम निकाल कर मुझे दे दिया. मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी. पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मुझे एक दो पल लंड का स्वाद थोड़ा अजीब लगा मगर फिर मजा आने लगा.

विक्रांत भी मजे से अपना लंड चुसवाने लगा. उसे भी लग रहा होगा कि उसकी बहन कितनी बड़ी रंडी है. अपने भाई के लंड को खा जाना चाहती है. मगर मुझे लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था.

पांच मिनट में ही विक्रांत मेरे मुंह में ही झड़ गया. हम रुक गये. हम दोनों फिर से किस करने लगे. मैं उसके लंड को सहलाते हुए खड़ा करने की कोशिश करने लगी. वो भी मेरी चूचियों और चूत से खेलने लगा.

कुछ देर के बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. उसने अपने लंड को हाथ से सहलाते हुए कॉन्डम लगाया. फिर मेरी चूत पर लंड को रख कर एक झटका मारा. एक ही झटके में आधा लंड अंदर चला गया. एक बार चीख तो निकली लेकिन मजा भी गजब का मिल गया.

बहुत दिनों के बाद मेरी चूत में लंड फंसा था. मैं स्वर्ग में थी. फिर विक्रांत ने मेरी चूत में लंड को चलाना शुरू कर दिया. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलनी चालू हो गयीं- आह्ह… आईई … आहह … आऊऊ … ओह्ह … करके मैं भाई के लंड से चुदने लगी.

झटके लगाते हुए भाई ने पूरा लंड अंदर दे दिया था. उसके झटके अब हर पल तेज हो रहे थे. मैं अपनी चूचियों को दबाने लगी. अपने ही हाथ निप्पलों को मसलने लगी. विक्रांत ने देखा तो उसने मेरी चूचियों को कस कर भींच दिया और मेरी चूत ने उसके लंड को भींच लिया.

वो तेजी से मेरी चूत को पेलने लगा और मजे में मेरी आंखें बंद होने लगीं. मैं भाई के लंड से चुद कर सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. 15 मिनट तक विक्रांत ने मेरी चूत को इसी स्पीड से चोदा और फिर हम दोनों साथ में ही झड़ गये.

उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गये और वहां पर रोमान्स करते हुए हमने एक बार फिर से बाथरूम सेक्स किया और भाई बहन की चुदाई का मजा लिया. मैंने बाथरूम में एक बार फिर से विक्रांत के लंड का माल पीया. उसने मेरी चूत का रस चाटा. हम दोनों बहुत खुश हो गये थे एक दूसरे को पाकर.

फिर हम दोनों वहां से घर आ गये. उस दिन के बाद से मेरे भाई और मेरे बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया. हम दोनों सप्ताह में एक या दो बार होटल में जरूर जाते हैं और चुदाई करते हैं. यदि घर पर भी मौका मिलता है तो हम भाई बहन का सेक्स का अवसर नहीं छोड़ते हैं.

इस कहानी के माध्यम से मैंने आपको यही बताना चाहा है कि जिन्दगी का असली मजा सेक्स में ही है. चाहे वो ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदाई हो या फिर अपने ही सगे भाई के साथ चुदाई हो. चुदाई में ही असली मजा है.

उस दिन मैंने सपना को थैंक्स बोला. उसने ही मुझे ये रास्ता बताया था.
दोस्तो, मुझे लिखना थोड़ा कम आता है. मैं कोई लेखिका नहीं हूं लेकिन अपनी भाई बहन की चुदाई की कहानी बताने के लिए लिखना पड़ा. गलती हुई हो तो इग्नोर करें.

अगर आप में से भी कोई भाई बहन का सेक्स का सोच रहा है तो मुझे जरूर बतायें. मैं आपकी मदद करूंगी. इसमें कुछ गलत भी नहीं है क्योंकि ये दोनों की सहमति से ही होता है. वैसे भी सेक्स एक प्राकृतिक जरूरत है और ये पूरी होनी ही चाहिए.

अपनी बात खत्म करने से पहले मैं जाते जाते कुछ टिप्स दे देती हूं. ताकि आपको अपने भाई को पटाने में आसानी हो.

टिप 1- जब आप दिन में नहाने जाओ तो एक ऐसे समय पर जाओ जब आपके घर में आपके और आपके भाई के अलावा कोई न हो. आप बाथरूम में ब्रा और पैंटी लेकर मत जाओ और फिर अंदर जाकर उसे अपने भाई से बहाना करके मंगवाओ. जब वो देने आये तो दरवाजा हल्का खुला छोड़ दो और उसको अपने जिस्म के नजारे दिखाओ. इससे उसे एक ग्रीन सिग्नल मिलेगा और उसका लंड चूत के लिए तड़प उठेगा.

टिप 2- नहाने के बाद आप इस्तेमाल की गयी ब्रा और पैंटी को धोना नहीं. उसको बिना धोये हुए बाथरूम में इस तरह से रख दो कि अगर कोई छुए तो तुम्हें पता लग जाये कि उनको छेड़ा गया है.

मेरा तजुरबा है कि लड़के अक्सर लड़कियों की ब्रा और पैंटी से खेलते हैं. ऐसे ही आप 2-3 दिन करना. आपको पता लग जायेगा कि वो आपकी ब्रा और पैंटी से खेलता कब है. अगर वो ब्रा और पैंटी से खेले तो इसका मतलब है कि वो भी आपके साथ मजे करना चाहता है.

दोस्तो, मेरे पास भाई बहन का सेक्स के ऐसे बहुत सारे टिप्स हैं. आप मुझे अपने सुझाव भेजें और यदि इस काम में सहायता चाहिए तो मैं आपको गाइड करने के लिए तैयार हूं.

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