Redirecting in 20 seconds...

मैंने उनके लंड को चूसा

मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं.

मेरी हाईट 5 फीट है और फिगर 33-28-34 है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं. मेरी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी.

बीते दिसंबर की एक रात को मुझे तेज प्यास लगी. आप जानते होंगे कि सर्दी में या तो प्यास लगती नहीं और लगती है तो फिर प्यास कितनी जोर से लगती है.

ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी मैं जल्दी से उठी रसोई में जाने लगी. मेरा ध्यान ससुर के कमरे की ओर गया तो मैंने पाया कि उनके रूम की लाइट जल रही थी.
मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?

उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे.
उनका लन्ड करीब 7 इंच का था। इतना बड़ा लंड मैंने कभी किसी मर्द का नहीं देखा था.

मैं आपको उनके बारे में बता दूं कि वो उम्र में 55 साल के करीब हैं. उनकी हाइट 6 फीट है.

मेरी सास की मृत्यु बहुत समय पहले हो गयी थी. शायद इसी वजह से ससुर जी का लंड इतना बेताब लग रहा था.

वो आंखें बंद किये लगातार अपने हाथ को अपने लंड पर चला रहे थे.
ये नजारा देखकर मैं तो सन्न रह गयी.
मगर मेरी नजर भी मेरे ससुर के लंड से हट नहीं रही थी. मेरे पति का लंड उनके लंड से कम था.

उनका लंड देखकर मेरे अंदर भी चुदास सी जागने लगी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी.

फिर मैं रसोई से पानी लेकर अपने कमरे में चली गयी. अब मुझे भी लंड चाहिए था तो मैंने पति को जगाया और उनको गर्म करने की कोशिश करने लगी.

मैंने पति के लंड को ऊपर से ही सहलाया. उनका हाथ मेरी चूत पर रखवाया और सहलवाने लगी.
थोड़ी देर में उनका लंड खड़ा होने लगा. फिर मैंने उनके लंड को चूसा और चुदाई के लिए पूरा तैयार कर दिया.

पति ने मेरी चूत में लंड डाला और चोदने लगे. उनका लंड 6 इंच के करीब था. मैं चुदाई का मजा लेने लगी.

मगर दिमाग में ससुर का लंड अभी भी घूम रहा था. उनका लंड बहुत मोटा था.

पति ने मुझे पांच मिनट तक चोदा और फिर वो झड़ गये. मुझे लंड तो मिल गया लेकिन वो संतुष्टि वाली चुदाई नहीं हुई. फिर भी मैंने पति को ज्यादा नहीं कहा क्योंकि वो नींद में थे और मैं भी अब सोना चाहती थी.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पति ने कहा कि वो जॉब करने दिल्ली जाने वाले हैं.
वो कहने लगे कि पहले वो वहां पर जम लेंगे और उसके बाद मुझे भी वहीं बुला लेंगे. मैं ये सोचकर परेशान हो रही थी.

मुझे पति के बिना कैसे चुदाई का मजा मिलने वाला था. 4 जनवरी को मेरे पति दिल्ली चले गये.

उनके जाने के बाद मेरा मन सूना हो गया.
एक दो दिन तो मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर ससुर का लंड मेरे दिमाग में घूमने लगा.

मैं उनका लंड देख चुकी थी और जब से मैंने उनका मोटा लंड देखा था मैं उसको अपनी चूत में लेने का सपना भी देख रही थी.
अब मैं किसी तरह ससुर जी का लंड खड़ा करके उनको खुद चुदाई के लिए तैयार करना चाहती थी.

इसके लिए मैंने बाजार से कुछ नये कपड़े ले लिये. नाइटी, पैंटी और ब्रा के सेट लिये. सेक्सी वाली नाइट ड्रेस ली ताकि अपने बदन को दिखाकर मैं ससुर जी के लौड़े की प्यास को और ज्यादा बढा़ सकूं.

शाम को जब मैं घर आयी तो मैंने जल्दी जल्दी खाना बनाया.

ससुर जी को भूख लगी तो वो बोले- बहू खाना लगा दो.
मैंने उनको बैठने को कहा और बोली- अभी लगा देती हूं.

मैं अपनी साड़ी बदल कर आ गयी और मैंने वो नयी ड्रेस पहनी जो मैं बाजार से लायी थी.

जब मैं खाना लेकर उनके पास पहुंची तो उनकी नजर मेरे बदन पर पड़ी और वहीं पर ठहर गयी.
इससे पहले मेरे ससुर ने मुझे इतने ध्यान से नहीं देखा था.

वो लगातार मुझे देख रहे थे और मैं खुश हो रही थी कि मेरा प्लान काम कर रहा है. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे.

ससुर ने खाना खाया और फिर वो सोने के लिए चले गये.

मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरे बदन की गर्मी मुझे चैन से लेटने नहीं दे रही थी.
आज मैंने ससुर की आंखों में मेरे जिस्म के लिए हवस भी देख ली थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

मैं फिर सोचते सोचते सो गयी.

मगर उस दिन के बाद से मैं किसी न किसी तरह अपने बदन और उसके उभार दिखाकर अपने ससुर को तड़पाने लगी.
वो अब अक्सर मेरी चूचियों और मेरी गांड को ताड़ते रहते थे.

कुछ दिन बीत गये. फिर 9 जनवरी की रात आयी.
उस रात को मैंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी जो चूचियों पर से जालीदार थी. उसको देखकर तो मेरे ससुर की आंखें ही फैल गयीं. वो जैसे पागल से हुए जा रहे थे.

उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया और थोड़ा सा ही खाकर रूम में चले गये.
मैंने भी जल्दी से काम खत्म किया और सोने के लिए जाने लगी.
मगर मेरा मन बेचैन था.

आज ससुर जी बहुत उतावले थे. मैं एक बार उनकी हालत देखना चाहती थी.

इसलिए मैंने दूध गर्म किया और उनके कमरे की ओर चल दी.
मैंने अंदर देखा तो वो लंड को लगातार हिला रहे थे और बार बार कह रहे थे- चूस साली मेरे लंड को … साली नेहा … चूस इसे.

ऐसे कहते हुए वो अपने लंड की मुठ मार रहे थे.
मैं बहुत उत्तेजित हो गयी उनकी ये हालत देखकर.

उसके बाद मैंने दरवाजा खटखटाया तो वो संभल गये. उन्होंने अपना लंड अंदर पजामे में किया और ढक लिया.

मगर जब मैं अंदर गयी तो तब भी उनके पजामे में वो लंड तना हुआ ऐसे ही उछल रहा था. उनके माथे पर पसीना आ गया था.

मैंने उनके लंड की ओर देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी और शर्माते हुए गिलास को उनके बेड के पास रख दिया.

जब मैं जाने लगी तो ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- कुछ देर बैठ जा बहू.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं पापा? ये सब ठीक नहीं है.

इस बात पर उनको गुस्सा आ गया और मेरा हाथ अपनी ओर खींचकर मुझे अपने पास बिठाते हुए बोले- साली रण्डी, जब से तेरा पति गया है तभी से तेरा नाटक देख रहा हूं. आज तुझे चोद चोद कर सब तेरी नौटंकी दूर कर दूंगा.

ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे ऊपर आ चढ़े.
वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों में मुंह मारने लगे. मेरी गर्दन को चूमने लगे.

पहले तो मैंने दिखावटी विरोध किया लेकिन फिर हार मानने का नाटक करके मैं आराम से लेट गयी.
फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगे लेकिन मैंने मुंह नहीं खोला. फिर वो मेरी चूचियों को दबाने लगे तो मेरी आह्ह निकल गयी और मेरे होंठ खुल गये.

इस मौके का फायदा उठाकर वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैं भी अंदर ही अंदर उनका साथ देने लगी लेकिन मैं ये नहीं दिखाया कि मुझे मजा आ रहा है.
मैं बस न चुदवाने का नाटक सा करती रही.

मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.
मैं अब सिसकारने लगी थी.

वो बोले- हां, साली रंडी, मैं जानता था कि तू ये सब नाटक चुदने के लिए ही कर रही है. मैं आज तेरी चूत को फाड़ दूंगा.
ये बोलकर मेरे ससुर ने मेरी नाइटी फाड़ डाली और मेरी चूचियों को जोर जोर से पीने लगे.

उनके मुंह की पकड़ इतनी तेज थी कि मेरे मुंह से जोर जोर की आहें निकलने लगीं.
मैं अपनी चुदास को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

इतने में ही ससुर का एक हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत में हल्का गीलापन आने लगा था. वो मेरी चूत को जोर जोर से रगड़ने लगे.

मेरी चूत में पानी आने लगा और वो चूत में उंगली से कुरेदने लगे.
मैं भी पागल सी हो रही थी अब.

इतने में ही ससुर ने अपने पजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में दे दिया.
उनका लंड मेरे मुंह में फंस गया और वो धक्के देते हुए बोले- चूस साली … यही है तेरा सपना … चूस ले इसे. चूस साली कुतिया।
मेरे मुंह में उनका लंड पूरा फंस गया था और मेरे गले में अटक गया था. मुझसे सांस नहीं ली जा रही थी लेकिन वो मेरे मुंह को चोदे जा रहे थे.

काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था.

फिर उन्होंने मुझे उल्टी तरफ लिटा दिया और मेरी गांड ऊपर आ गयी.
वो मेरी गांड में मुंह देकर चाटने लगे.

मैं डर गयी कि कहीं ये अपने इस मोटे मूसल को मेरी गांड में न धकेल दें. मैं उनका लंड गांड में नहीं ले सकती थी.

वो मेरी गांड को लगातार चाटे जा रहे थे. मुझे मजा भी आ रहा था लेकिन साथ में डर भी बना हुआ था.

इससे पहले मैंने कभी भी अपनी गांड नहीं चुदवाई थी. कई बार मेरे पति मेरी गांड में लंड देने की कोशिश करते थे लेकिन मैं मना कर देती थी.
अभी तक मेरी गांड कुंवारी ही थी.

उसके बाद वो मेरी चूत भी चाटने लगे तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी. वो मेरी चूत को चाटते हुए मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और मुझे अब बहुत मजा आ रहा था.
दोनों तरफ से मजा मिल रहा था.

कुछ देर तक वो मेरी चूत को काट काटकर खाते रहे.
मैं भी पानी छोड़ती रही और चुदने के लिए मचल उठी.

अब ससुर जी से भी नहीं रुका गया तो उन्होंने अचानक से मेरी चूत पर लंड रखा और एक धक्का दे दिया.
उनके लंड की चोट से मेरी जान निकल गयी.
एक बार में ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया उनके मोटे लंड ने.

उन्होंने मेरे मुंह पर थप्पड़ मारा और चुप रहने के लिए कहा.
मैं चुप हो गयी.

अब वो मुझे चोदने लगे. मैं तो बेहाल होने लगी.

कुछ देर तक तो लंड नहीं लिया गया लेकिन फिर जब चूत खुलने लगी तो मुझे मजा आने लगा.
अब मैं आराम से चुदवाने लगी.

लेकिन ससुर जी की स्पीड बढ़ रही थी. वो लगातार तेज तेज चोदे जा रहे थे.

बीस मिनट की चुदाई में मैं दो बार झड़ गयी. वो अभी भी मुझे तेजी से चोद रहे थे.

फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह पर उनके वीर्य की पिचकारी एकदम से आकर लगी.

कई बार उनके लंड से वीर्य की पिचकारी लगी और मेरा पूरा चेहरा सन गया.
मुझे मजा आ गया.
इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी.

झड़ने के बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गये.

हम दोनों फिर 69 में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.

कुछ देर की चुसाई के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. अब उन्होंने लंड पर तेल लगा लिया. मेरी चूत और गांड पर दोनों जगह तेल लगा दिया.

उसके बाद मुझे पेट की तरफ सुला दिया और नीचे तकिया लगा दिया.
फिर वो मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे.

मैं आह्ह आह्ह करते हुए चुदने लगी.

मगर अचानक से उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर तकिया लगा दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ.

जब एक जोर का झटका लगा तो मेरी जान निकल गयी.
मैं जोर से चीखी लेकिन मेरी आवाज तकिया के नीचे ही दब गयी.

ससुर का लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द से छटपटाने लगी.
मगर ससुर ने लंड को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल दिया.

वो मेरी गांड में धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे मगर मैं दर्द में तड़प रही थी.

मैं दर्द से रोने लगी तो वो बोले- साली … तेरी गान्ड कब से मारना चाह रहा था. आज तो फ़ाड़ डालूंगा इसे मैं!

अब मैं बेहोश होने वाली थी कि एक थप्पड़ जोर से मुंह पर उन्होंने मारा और फिर गांड में लंड को धकेलने लगे.
उसके बाद वो मेरी गांड को चोदने लगे.

धीरे धीरे मेरी गांड खुली और मैं चुदवाने लगी.
पांच मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में दे दिया.
मैं फिर से उनका लंड चूसने लगी.

फिर ससुर ने मेरे मुंह में ही अपना माल गिरा दिया. मैंने उस माल को पी लिया.

उनकी चुदाई से मेरी चूत और गांड दोनों ही फट गयी थी. मगर मुझे चुदाई में मजा भी बहुत मिला.
उन्होंने मेरी चूत और गांड पर मलहम लगाया और मेरा दर्द कम करने की कोशिश की.

अगले 2 दिन तक मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.

फिर उसके 20 दिन के बाद मेरा जन्मदिन था. मेरे जन्मदिन पर भी मेरे ससुर ने मुझे चुदाई का तोहफा दिया.
मगर उस दिन उनके साथ उनका एक दोस्त भी था.
उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदा.

9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं. पहली बार ससुर के लंड से चुदाई और उनका मोटा लंड आज भी जब मैं सोचती हूं तो मेरी चूत गीली हो जाती है.

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मैंने उनका मोटा लंड देखा था

मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं.

मेरी हाईट 5 फीट है और फिगर 33-28-34 है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं. मेरी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी.

बीते दिसंबर की एक रात को मुझे तेज प्यास लगी. आप जानते होंगे कि सर्दी में या तो प्यास लगती नहीं और लगती है तो फिर प्यास कितनी जोर से लगती है.

ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी मैं जल्दी से उठी रसोई में जाने लगी. मेरा ध्यान ससुर के कमरे की ओर गया तो मैंने पाया कि उनके रूम की लाइट जल रही थी.
मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?

उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे.
उनका लन्ड करीब 7 इंच का था। इतना बड़ा लंड मैंने कभी किसी मर्द का नहीं देखा था.

मैं आपको उनके बारे में बता दूं कि वो उम्र में 55 साल के करीब हैं. उनकी हाइट 6 फीट है.

मेरी सास की मृत्यु बहुत समय पहले हो गयी थी. शायद इसी वजह से ससुर जी का लंड इतना बेताब लग रहा था.

वो आंखें बंद किये लगातार अपने हाथ को अपने लंड पर चला रहे थे.
ये नजारा देखकर मैं तो सन्न रह गयी.
मगर मेरी नजर भी मेरे ससुर के लंड से हट नहीं रही थी. मेरे पति का लंड उनके लंड से कम था.

उनका लंड देखकर मेरे अंदर भी चुदास सी जागने लगी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी.

फिर मैं रसोई से पानी लेकर अपने कमरे में चली गयी. अब मुझे भी लंड चाहिए था तो मैंने पति को जगाया और उनको गर्म करने की कोशिश करने लगी.

मैंने पति के लंड को ऊपर से ही सहलाया. उनका हाथ मेरी चूत पर रखवाया और सहलवाने लगी.
थोड़ी देर में उनका लंड खड़ा होने लगा. फिर मैंने उनके लंड को चूसा और चुदाई के लिए पूरा तैयार कर दिया.

पति ने मेरी चूत में लंड डाला और चोदने लगे. उनका लंड 6 इंच के करीब था. मैं चुदाई का मजा लेने लगी.

मगर दिमाग में ससुर का लंड अभी भी घूम रहा था. उनका लंड बहुत मोटा था.

पति ने मुझे पांच मिनट तक चोदा और फिर वो झड़ गये. मुझे लंड तो मिल गया लेकिन वो संतुष्टि वाली चुदाई नहीं हुई. फिर भी मैंने पति को ज्यादा नहीं कहा क्योंकि वो नींद में थे और मैं भी अब सोना चाहती थी.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पति ने कहा कि वो जॉब करने दिल्ली जाने वाले हैं.
वो कहने लगे कि पहले वो वहां पर जम लेंगे और उसके बाद मुझे भी वहीं बुला लेंगे. मैं ये सोचकर परेशान हो रही थी.

मुझे पति के बिना कैसे चुदाई का मजा मिलने वाला था. 4 जनवरी को मेरे पति दिल्ली चले गये.

उनके जाने के बाद मेरा मन सूना हो गया.
एक दो दिन तो मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर ससुर का लंड मेरे दिमाग में घूमने लगा.

मैं उनका लंड देख चुकी थी और जब से मैंने उनका मोटा लंड देखा था मैं उसको अपनी चूत में लेने का सपना भी देख रही थी.
अब मैं किसी तरह ससुर जी का लंड खड़ा करके उनको खुद चुदाई के लिए तैयार करना चाहती थी.

इसके लिए मैंने बाजार से कुछ नये कपड़े ले लिये. नाइटी, पैंटी और ब्रा के सेट लिये. सेक्सी वाली नाइट ड्रेस ली ताकि अपने बदन को दिखाकर मैं ससुर जी के लौड़े की प्यास को और ज्यादा बढा़ सकूं.

शाम को जब मैं घर आयी तो मैंने जल्दी जल्दी खाना बनाया.

ससुर जी को भूख लगी तो वो बोले- बहू खाना लगा दो.
मैंने उनको बैठने को कहा और बोली- अभी लगा देती हूं.

मैं अपनी साड़ी बदल कर आ गयी और मैंने वो नयी ड्रेस पहनी जो मैं बाजार से लायी थी.

जब मैं खाना लेकर उनके पास पहुंची तो उनकी नजर मेरे बदन पर पड़ी और वहीं पर ठहर गयी.
इससे पहले मेरे ससुर ने मुझे इतने ध्यान से नहीं देखा था.

वो लगातार मुझे देख रहे थे और मैं खुश हो रही थी कि मेरा प्लान काम कर रहा है. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे.

ससुर ने खाना खाया और फिर वो सोने के लिए चले गये.

मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरे बदन की गर्मी मुझे चैन से लेटने नहीं दे रही थी.
आज मैंने ससुर की आंखों में मेरे जिस्म के लिए हवस भी देख ली थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

मैं फिर सोचते सोचते सो गयी.

मगर उस दिन के बाद से मैं किसी न किसी तरह अपने बदन और उसके उभार दिखाकर अपने ससुर को तड़पाने लगी.
वो अब अक्सर मेरी चूचियों और मेरी गांड को ताड़ते रहते थे.

कुछ दिन बीत गये. फिर 9 जनवरी की रात आयी.
उस रात को मैंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी जो चूचियों पर से जालीदार थी. उसको देखकर तो मेरे ससुर की आंखें ही फैल गयीं. वो जैसे पागल से हुए जा रहे थे.

उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया और थोड़ा सा ही खाकर रूम में चले गये.
मैंने भी जल्दी से काम खत्म किया और सोने के लिए जाने लगी.
मगर मेरा मन बेचैन था.

आज ससुर जी बहुत उतावले थे. मैं एक बार उनकी हालत देखना चाहती थी.

इसलिए मैंने दूध गर्म किया और उनके कमरे की ओर चल दी.
मैंने अंदर देखा तो वो लंड को लगातार हिला रहे थे और बार बार कह रहे थे- चूस साली मेरे लंड को … साली नेहा … चूस इसे.

ऐसे कहते हुए वो अपने लंड की मुठ मार रहे थे.
मैं बहुत उत्तेजित हो गयी उनकी ये हालत देखकर.

उसके बाद मैंने दरवाजा खटखटाया तो वो संभल गये. उन्होंने अपना लंड अंदर पजामे में किया और ढक लिया.

मगर जब मैं अंदर गयी तो तब भी उनके पजामे में वो लंड तना हुआ ऐसे ही उछल रहा था. उनके माथे पर पसीना आ गया था.

मैंने उनके लंड की ओर देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी और शर्माते हुए गिलास को उनके बेड के पास रख दिया.

जब मैं जाने लगी तो ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- कुछ देर बैठ जा बहू.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं पापा? ये सब ठीक नहीं है.

इस बात पर उनको गुस्सा आ गया और मेरा हाथ अपनी ओर खींचकर मुझे अपने पास बिठाते हुए बोले- साली रण्डी, जब से तेरा पति गया है तभी से तेरा नाटक देख रहा हूं. आज तुझे चोद चोद कर सब तेरी नौटंकी दूर कर दूंगा.

ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे ऊपर आ चढ़े.
वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों में मुंह मारने लगे. मेरी गर्दन को चूमने लगे.

पहले तो मैंने दिखावटी विरोध किया लेकिन फिर हार मानने का नाटक करके मैं आराम से लेट गयी.
फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगे लेकिन मैंने मुंह नहीं खोला. फिर वो मेरी चूचियों को दबाने लगे तो मेरी आह्ह निकल गयी और मेरे होंठ खुल गये.

इस मौके का फायदा उठाकर वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैं भी अंदर ही अंदर उनका साथ देने लगी लेकिन मैं ये नहीं दिखाया कि मुझे मजा आ रहा है.
मैं बस न चुदवाने का नाटक सा करती रही.

मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.
मैं अब सिसकारने लगी थी.

वो बोले- हां, साली रंडी, मैं जानता था कि तू ये सब नाटक चुदने के लिए ही कर रही है. मैं आज तेरी चूत को फाड़ दूंगा.
ये बोलकर मेरे ससुर ने मेरी नाइटी फाड़ डाली और मेरी चूचियों को जोर जोर से पीने लगे.

उनके मुंह की पकड़ इतनी तेज थी कि मेरे मुंह से जोर जोर की आहें निकलने लगीं.
मैं अपनी चुदास को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

इतने में ही ससुर का एक हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत में हल्का गीलापन आने लगा था. वो मेरी चूत को जोर जोर से रगड़ने लगे.

मेरी चूत में पानी आने लगा और वो चूत में उंगली से कुरेदने लगे.
मैं भी पागल सी हो रही थी अब.

इतने में ही ससुर ने अपने पजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में दे दिया.
उनका लंड मेरे मुंह में फंस गया और वो धक्के देते हुए बोले- चूस साली … यही है तेरा सपना … चूस ले इसे. चूस साली कुतिया।
मेरे मुंह में उनका लंड पूरा फंस गया था और मेरे गले में अटक गया था. मुझसे सांस नहीं ली जा रही थी लेकिन वो मेरे मुंह को चोदे जा रहे थे.

काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था.

फिर उन्होंने मुझे उल्टी तरफ लिटा दिया और मेरी गांड ऊपर आ गयी.
वो मेरी गांड में मुंह देकर चाटने लगे.

मैं डर गयी कि कहीं ये अपने इस मोटे मूसल को मेरी गांड में न धकेल दें. मैं उनका लंड गांड में नहीं ले सकती थी.

वो मेरी गांड को लगातार चाटे जा रहे थे. मुझे मजा भी आ रहा था लेकिन साथ में डर भी बना हुआ था.

इससे पहले मैंने कभी भी अपनी गांड नहीं चुदवाई थी. कई बार मेरे पति मेरी गांड में लंड देने की कोशिश करते थे लेकिन मैं मना कर देती थी.
अभी तक मेरी गांड कुंवारी ही थी.

उसके बाद वो मेरी चूत भी चाटने लगे तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी. वो मेरी चूत को चाटते हुए मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और मुझे अब बहुत मजा आ रहा था.
दोनों तरफ से मजा मिल रहा था.

कुछ देर तक वो मेरी चूत को काट काटकर खाते रहे.
मैं भी पानी छोड़ती रही और चुदने के लिए मचल उठी.

अब ससुर जी से भी नहीं रुका गया तो उन्होंने अचानक से मेरी चूत पर लंड रखा और एक धक्का दे दिया.
उनके लंड की चोट से मेरी जान निकल गयी.
एक बार में ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया उनके मोटे लंड ने.

उन्होंने मेरे मुंह पर थप्पड़ मारा और चुप रहने के लिए कहा.
मैं चुप हो गयी.

अब वो मुझे चोदने लगे. मैं तो बेहाल होने लगी.

कुछ देर तक तो लंड नहीं लिया गया लेकिन फिर जब चूत खुलने लगी तो मुझे मजा आने लगा.
अब मैं आराम से चुदवाने लगी.

लेकिन ससुर जी की स्पीड बढ़ रही थी. वो लगातार तेज तेज चोदे जा रहे थे.

बीस मिनट की चुदाई में मैं दो बार झड़ गयी. वो अभी भी मुझे तेजी से चोद रहे थे.

फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह पर उनके वीर्य की पिचकारी एकदम से आकर लगी.

कई बार उनके लंड से वीर्य की पिचकारी लगी और मेरा पूरा चेहरा सन गया.
मुझे मजा आ गया.
इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी.

झड़ने के बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गये.

हम दोनों फिर 69 में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.

कुछ देर की चुसाई के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. अब उन्होंने लंड पर तेल लगा लिया. मेरी चूत और गांड पर दोनों जगह तेल लगा दिया.

उसके बाद मुझे पेट की तरफ सुला दिया और नीचे तकिया लगा दिया.
फिर वो मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे.

मैं आह्ह आह्ह करते हुए चुदने लगी.

मगर अचानक से उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर तकिया लगा दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ.

जब एक जोर का झटका लगा तो मेरी जान निकल गयी.
मैं जोर से चीखी लेकिन मेरी आवाज तकिया के नीचे ही दब गयी.

ससुर का लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द से छटपटाने लगी.
मगर ससुर ने लंड को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल दिया.

वो मेरी गांड में धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे मगर मैं दर्द में तड़प रही थी.

मैं दर्द से रोने लगी तो वो बोले- साली … तेरी गान्ड कब से मारना चाह रहा था. आज तो फ़ाड़ डालूंगा इसे मैं!

अब मैं बेहोश होने वाली थी कि एक थप्पड़ जोर से मुंह पर उन्होंने मारा और फिर गांड में लंड को धकेलने लगे.
उसके बाद वो मेरी गांड को चोदने लगे.

धीरे धीरे मेरी गांड खुली और मैं चुदवाने लगी.
पांच मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में दे दिया.
मैं फिर से उनका लंड चूसने लगी.

फिर ससुर ने मेरे मुंह में ही अपना माल गिरा दिया. मैंने उस माल को पी लिया.

उनकी चुदाई से मेरी चूत और गांड दोनों ही फट गयी थी. मगर मुझे चुदाई में मजा भी बहुत मिला.
उन्होंने मेरी चूत और गांड पर मलहम लगाया और मेरा दर्द कम करने की कोशिश की.

अगले 2 दिन तक मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.

फिर उसके 20 दिन के बाद मेरा जन्मदिन था. मेरे जन्मदिन पर भी मेरे ससुर ने मुझे चुदाई का तोहफा दिया.
मगर उस दिन उनके साथ उनका एक दोस्त भी था.
उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदा.

9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं. पहली बार ससुर के लंड से चुदाई और उनका मोटा लंड आज भी जब मैं सोचती हूं तो मेरी चूत गीली हो जाती है.

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मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी

ये बात तब की है, जब मैं 19 साल का था और बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, हमारे स्कूल में एक शिक्षिका हुआ करती थीं. जिनका नाम था ज्योत्सना.

दोस्तो, पहले मैं आपको मैडम के फिगर के बारे में बता देता हूँ. मैडम का फिगर 34-30-36 का था … वो बड़े गजब की माल लगती थीं. उनके बड़े ही तीखे नैन नक्श और मदमस्त जिस्म को देख कर उन्हें काम की मूर्ति कहा जा सकता था.

जब वो चलती थीं, तो उनके छत्तीस इंच के चूतड़ ऐसे मटकते थे कि बस ज़ोर से पकड़ कर मसल ही डालो सालों को … और अपना खड़ा लंड सीधा बिना झटके के अन्दर उतार दो.

दूसरी तरफ मैडम भी कुछ कम नहीं थीं. उन्हें स्कूल के लड़कों के इन इरादों का अच्छे से पता था, तभी वो जानबूझकर लड़कों को देखते ही अपनी चाल बदल देती थीं. उनकी चाल देख कर ही लौंडे समझ जाते थे कि मैडम जानबूझ कर गांड हिला रही हैं.
मगर प्रिंसीपल सर के डर के कारण कोई भी उनसे कुछ नहीं कह पाता था.

प्रिंसीपल सर का डर क्यों था ये आपको इस सेक्स कहानी में आगे पता चल जाएगा.

वो जब काले रंग के सूट में स्कूल आती थीं, तो मन करता था कि उसी वक़्त पकड़ कर मैडम को चोद दूं. … पर कर नहीं पाया. फिर कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ ओता चला गया. मुझे मालूम ही नहीं था मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

गर्मियों का मौसम था, स्कूल की छुट्टी हुई ही थी. सारे टीचर अपना अपना बैग आदि समेट करके अपने घरों को जाने के लिए तैयार हो रहे थे. उसी समय मुझे प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनाई दी. वो ज्योत्सना मैडम को अपने केबिन में बुला रहे थे.

दरअसल हमारा स्कूल इतना बड़ा नहीं था कि अगर प्रिंसीपल किसी को भी बुलाएं और हम तक आवाज़ ना पहुंचे. अभी मैंने कुछ दिनों से लगातार ध्यान दिया हुआ था कि जैसे ही स्कूल खत्म होता था, ज्योत्सना मैडम के लिए प्रिंसीपल सर का बुलावा आ जाता था.

उस दिन मैंने सोचा कि आज तो मामला क्या है … ये जानने के बाद ही घर जाऊंगा. कुछ कुछ उड़ती हुई बातें भी मुझे उनके कमरे में झाँकने के लिए मजबूर कर रही थीं.

चूंकि सर और मैडम की आशिकी के चर्चे मेरे स्कूल में दाखिला लेने से पहले से ही चले आ रहे थे. बस उस दिन मैंने मन बना लिया.

प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनते ही मैडम जी ने अपना पर्स उठाया और उनके चेंबर में चली गईं. मैंने शुरू में बाहर रह कर ही इंतजार करना ठीक समझा और इंतजार करने के लिए बाहर पड़ी बेंच पर बैठ गया. इस दौरान मेरे कान कमरे में से आने वाली हर आवाज पर लगे हुए थे, मगर अन्दर से एक सुई गिरने तक की आवाज नहीं आ रही थी.

मैडम को प्रिंसीपल सर के कमरे में गए हुए एक घण्टा होने को आया पर अब तक ना मैडम बाहर आई थीं और ना ही प्रिंसीपल सर.

मैंने अन्तर्वासना पर पहले भी ऐसी अनेक कहानियां पढ़ी हुई थीं … इसलिए मुझे समझते हुए ज़रा भी देर नहीं लगी कि अन्दर क्या चल रहा होगा.

थोड़ी देर और इंतजार करने के बाद मैंने अपनी कॉपी खोने की शिकायत लिखवाने का बहाना करके प्रिंसीपल के कमरे जाने का मन बना लिया और मैं उनके कमरे तक पहुंच भी गया, पर उधर ना ही प्रिंसीपल सर नज़र आए और ना ही मैडम नज़र आईं. मैं कमरा खाली देख कर भौंचक्का था. मुझे लगा कि शायद ये दोनों पीछे के रास्ते से निकल कर कहीं चले गए हैं और बाद में रूम में आ जाएंगे.

मगर उस दिन काफी देर हो चुकी थी तो मैं स्कूल से वापस आ गया, पर मैं इन बातों से इतना भी अंजान नहीं था कि मैं समझ ना सकूँ कि मैडम और सर कहां चले गए होंगे.

अगले दिन जब मैं स्कूल में ज्योत्सना मैडम से मिला, तो उस दिन के बाद से मैंने उन्हें घूर कर देखना शुरू कर दिया.

मैडम भी मेरे बदले बदले तेवर को समझ सकती थीं. चूंकि मैं स्कूल का प्रेसीडेंट था, जिस वजह से स्कूल की प्रार्थना से लेकर स्कूल के नोटिस आदि तक सभी के लिए प्रिंसीपल सर सीधे मेरा नाम ही सुनिश्चित करते थे.

ऐसे ही देखते देखते स्कूल का वार्षिक समारोह का दिन आ गया. पूरा स्कूल सज-धज कर तैयार था. सारे बच्चे, टीचर, उस दिन सभी सज-धज कर आए थे.
आप समझ ही सकते हैं कि मैं किसकी तरफ इशारा कर रहा हूँ.

ज्योत्सना मैडम ने लंबा सा गाउन डाला था, वो भी सुर्ख लाल रंग का, जिसमें से उनके चुचे लगभग बाहर को निकलने को हो रहे थे. मैंने कई बार नोटिस किया कि प्रिंसीपल सर और मैडम के बीच आज बात बिल्कुल भी नहीं हो रही थी.

मैंने कारण जानने के लिए मैडम को टटोलने की कोशिश की, पर मैडम ने अपना मुँह नहीं खोला. उनके इस बर्ताव से मेरा आश्चर्य सातवें आसमान पर था कि आज मैडम इतना मस्त माल लग रही थीं और प्रिंसीपल सर कुछ घास ही नहीं डाल रहे हैं.

मैंने सोचा अपने संयम पर काबू रखने में ही भलाई है. वक़्त आने पर अपने संयम का सही फायदा मिल कर रहेगा. बस ये सोच कर मैं प्रोग्राम की बाकी तैयारियों में लग गया.

उस दिन छह सात प्रोग्राम्स के बाद वार्षिकोत्सव समाप्ति की ओर चला ही था और प्रिंसीपल सर उठ कर चले गए थे. तभी मेरे मन में एक उपाए सूझा. मैंने बाहर जाकर देखा तो पाया कि प्रिंसीपल सर प्रोग्राम को खत्म करने के बाद के कामों में लगे हुए थे और उनको अभी एक घंटा लग सकता था.

ये देख कर मेरे दिमाग में एक खतरनाक आईडिया आ गया. मैंने अपने एक साथी को ये कह कर मैडम के पास भेज दिया कि प्रिंसीपल सर ने आपको अपने ऑफिस में बुलाया है, उन्हें आपसे कुछ जरूरी काम है.

जितनी देर में मेरा साथी मैडम को ये बात बताता … उतनी देर में मैं प्रिंसीपल सर के ऑफिस में चला गया और कमरे की लाइट्स ऑफ करके मैं दरवाजे के पीछे छिप गया.

दो मिनट ही बीते होंगे कि मैंने किसी के आने की आहट सुनी. कुछ ही पलों में ज्योत्सना मैडम ऑफिस के अन्दर आ चुकी थीं. जैसे वो अन्दर आईं, मैंने झट से दरवाजा बंद करके उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने में लग गया.

मैडम की आवाज़ आई- सर, आज सारा कुछ यहीं कर लेंगे … या उसी वाले कमरे में चलेंगे.

किसी दूसरे कमरे का नाम सुन कर मेरा दिमाग़ ठनका और मुझे समझ में आ गया कि उस दिन जब मैं शिकायत के बहाने से आया था, तब मुझे इस ऑफिस में कोई क्यों नहीं मिला था.

मैडम ने दुबारा आवाज़ लगाई- सर अंदर वाले कमरे में चलो न.

मैंने ये सुनते ही मैडम को आगे की तरफ़ टेबल पर झुका कर उनकी ड्रेस ऊपर करके अपना लंड उनके चूतड़ों की दरार के बीच के छेद पर लगा दिया. जब तक वो कुछ सोच पातीं, इतनी देर में मेरा आधा लंड टीचर की गांड के अन्दर प्रवेश कर चुका था.

वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी थीं और कह रही थीं- आह सर आपको ये शौक कब चढ़ गया … कल तक तो आप बस चुत मार कर ही शांत हो जाते थे … आह आज शुरुआत ही इतनी ख़तरनाक है … क्या इरादे हैं आज हमारे प्रिंसीपल सर के..!

मैडम की बातें सुनकर मुझे मजा आने लगा था और मेरा जोश बढ़ भी रहा था. मैंने मैडम की गांड मारना चालू रखा और पन्द्रह मिनट की धक्कम पेलाई में मैंने मैडम की गांड में ही अपना वीर्य डाल दिया. जैसे ही मैं थोड़ा पीछे को हुआ, मैडम ने घूम कर मेरी ओर रूख़ कर लिया और वो मुझे देख कर सन्न रह गईं. मैं उनके सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए दुबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा था.

तभी मैडम ने मुझ पर चिल्ला कर कहा- अरे राज … ये क्या कर रहे हो तुम … और तुम अन्दर कब आए?
मैंने उन्हें सारा सीन समझाया और कहा- मैडम देखो … मुझे आपके साथ वही सब कुछ करना है, जो आप प्रिंसीपल सर के साथ हर रोज करती हो. अगर आप राजी राजी करोगी, तो आपके लिए सही है. नहीं तो स्कूल इतना बड़ा भी नहीं है कि आपके कारनामे किसी से छिपे रह जाएं. बात फ़ैल जायेगी तो आपकी ही ज्यादा बदनामी होगी.

इतना कहते ही मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसको मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगीं.
वो कहने लगीं- मैं तो कब से तुझसे चुदना चाह रही थी. तू ही गंडफट था तो मैं क्या करती. तूने कभी मुझे दाना ही नहीं डाला.

मुझे समझ आ गया कि मैडम मस्त हो गई हैं और फिर से मजा देंगी. अब मैंने मैडम के दूध मसलने शुरू कर दिए.

मैडम बोलीं- यार राज, मेरा गाउन खराब हो जाएगा. इस पर सिलवटें पड़ जायेंगी.
मैंने कहा- तो गाउन को उतार दो ना मैडम … आपके पक्के आशिक को आज पूरी नंगी मैडम चोदने का मन है.

मैडम ने गाउन उतार दिया और ब्रा पैंटी में आ गई’. मैंने अगले ही पल उनकी ब्रा पैंटी भी हटा दी और कमरे में एक छोटी लाईट जला दी. मैडम इतना चुदने के बाद अब भी मस्त माल थीं. मैं उनके एक दूध को चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.

मैडम बोलीं- मुझे लंड ठीक से चूसने दे.
मैंने उनके दूध छोड़े और लंड से उनके मुँह को चोदना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में मैंने दुबारा अपना सारा माल मैडम के मुँह में डाल दिया.

इसके बाद मैंने मैडम को टेबल के ऊपर बिठाया और उनकी चूत चाटने लगा. दस मिनट के अन्दर ही उनकी चूत चुदने को तैयार थी.

मैडम ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थीं- राज आह … अब तो अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. मेरी चूत पानी छोड़ रही है लंड हड़पने के लिए. इसका पेट भर दो अपने गर्म लंड से.

पर मैं आज उनको तड़पा तड़पा कर मजा देना चाहता था. सो मैंने उन्हें ऐसे कुछ मिनट और तड़पाया. फिर अपना सात इंच का लंड उनकी चूत में एक बार में ही उतार दिया.

मैडम की गीली चूत चौड़ी हो गयी और मजे के कारण उनकी आह निकल गई और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

टीचर मैडम के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थी. मैडम प्रिंसीपल को भी गालियाँ निकाल रही थी. कह रही थी – मादरचोद कुत्ता साला … रोज मुझे चुदाई के लिए दफ्तर में बुला लेता है. पर उससे होता जाता कुछ नहीं! दो मिनट पुच पुच करके झड़ जाता है. मुझे तो नौकरी करनी है तो मजबूरी में उसके नीचे लेटना पड़ता है. नहीं तो ऐसे चूहे को तो मैं अपना मूत भी ना पिलाऊँ.

लगभग बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा. फिर उन्होंने मुझे होठों पर किस किया और चुदाई के लिए थैंक्स कहा.
मैडम ने कहा- आज गांड और चूत मरवा कर मजा आ गया.

वो कहने लगीं- अब आज से साले प्रिंसीपल की माँ की चुत … आज के बाद मुझे जब भी मेरी चूत लंड मांगेगी, मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी.

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मेरा बदन

हेलो, मेरा नाम सोनाली है I मेरे बूब्स का साइज 32 और मेरे हिप्स का साइज 36 है मैं एकदम भरे हुए जिस्म की औरत हूं।
मुझे देखते ही सब मुझसे अट्रैक्ट हो जाते हैं और मुझे चोदने की ख्याल अपने मन में लाने लगते हैं.

मुझे एक व्यक्ति जिनकी उम्र 40 साल के आसपास रही होगी उनका ईमेल आया वह बहुत ही मैच्योर व्यक्ति थे। उनकी बातों से ही उनका अच्छापन, भलमानसत साफ झलक रहा था. उनकी ईमेल पर मुझसे बहुत अच्छी तरीके से बात हुई. फिर मैंने उन्हें हैंग आउट पर आने को कहा फिर हमारी हैंग आउट पर बात होने लगी.

उस दिन मेरी थोड़ी तबीयत खराब थी. आप समझ रहे हैं ना … लड़कियों की तबीयत हर महीने खराब हो जाती है. उस दिन मेरी तबीयत उसी तरह से खराब थी. मतलब लाल झंडी आई हुई थी.

मैंने उनसे कहा कि आज मेरी तबियत ख़राब है, बाद में बात करूंगी.

उन्होंने मेरी मजबूरी समझी और कहा- ठीक है सोनाली।
मुझे भी लगा कि वे अच्छे इंसान हैं.

फिर मैंने उन्हें एक दिन अपने पास मिलने के लिए बुलाया.
तो उन्होंने मुझसे कहा कि अभी तो मुझे टाइम नहीं है। जैसे ही मैं फ्री होता हूं मैं आपको बताता हूं, मैं आ जाऊंगा.

फिर उनकी और मेरी कॉल पर बात होती रही.

एक दिन उन्होंने मुझसे कहा- सोनाली जी, आप मेरे पास आ सकती हैं क्या?
मैंने उनसे कहा- ठीक है. बताइए कहां आना है मुझे?

और मैं उनके पास मिलने के लिए चली गई. उनकी उम्र 40-42 साल के आसपास रही होगी, थोड़े मोटे से थे लेकिन इंसान बहुत अच्छे थे। इसलिए उनके पास उनसे मिलने के लिए चली भी गई थी.

फिर वे मेरे पास आकर बैठे. उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और मेरे हाथ पर अपनी उंगलियां फिराने लगे.
मैं भी उनकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.

फिर वे मेरे बालों में अपनी उंगलियां फिराने लगे और मेरे होठों पर किस करने लगे. मैंने भी अपने हाथ उनके कंधों पर रख लिए थे और मैं उनके होंठ चूसने लगी.
हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे और एक दूसरे में इस तरह से खो गए हमें पता ही नहीं चला कि हमने कब एक दूसरे के कपड़े उतार दिए. तब हम एक दूसरे के बदन को चूम चाट रहे थे।

यह सब करने से मेरी वासना जाग उठी थी तो फिर मैं उनका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. उन्हें भी बहुत मजा आ रहा था. वे भी अपना लंड अपने हाथ में पकड़ कर मेरे मुंह में डालने लगे। थूक का लार मेरे होंठ और उनके लंड से चिपका पड़ा था।

फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर सीधा लेटा दिया और मेरी जांघें फैला दी. मुझे अच्छा तो लग रहा था लेकिन वो इस तरह से मेरी नंगी चूत को घूर रहे थे कि मुझे शर्म आने लगी. मैंने उन्हें रोका तो नहीं पर मैंने अपनी आँखें बंद कर ली.

उन्होंने अपनी उंगली मेरी चूत की दरार पर फिराई तो मेरा पूरा बदन झनझना गया. फिर उन्गोने मेरी चलित को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच में लेकर मसला तो मेरी सिसकारी निकालने लगी और मेरे चूतड़ अपने आप ही ऊपर को उठाने लगे.
अब तक मेरी चूत कामवासना से पानी छोड़ कर गीली हो चुकी थी और लंड लंड पुकार रही थी.

लेकिन जब मैंने उन्हें देखा कि वे तो मेरी नंगी चूत से खेलने में ही लगे हुए हैं तो मैंने अलसी और कामुकता भारी आवाजा में कहा- अब ऊपर भी आ जाओ ना.

उन्होंने मुस्कुरा कर मेरी आँखों में देखा तो मैं फिर शर्म से पानी पानी होने लगी.

मेरी कामुकता को भाम्प कर वे मेरी नंगी जाँघों के बीच में आये और अपना लंड मेरी चूत की दरार में रगड़ने लगे. अब मुझे गुस्सा आने लगा था कि ये मेरी चूत में अपना लंड घुसा क्यों नहीं रहे हैं.
आखिअर मैंने अपने कूल्हे ऊपर को उचकाये तो उनके लंड का सुपारा मेरी चूत के छेद में फंस गया.
आह … मजा आ गया था मुझे.

मेरी सिसकारी सुन कर उन्होंने एक धक्का लगा कर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया. और साथ ही बहुत तेज तेज धक्के मार मारने लगे.
तेज धक्कों से मुझे दर्द होने लगा, मैं चिल्लाने लगी.

मैंने उनसे कहा- प्लीज आराम से करिए!
फिर वे मुझे मजा दिलाने लगे. मेरे स्तनों पर वे अपना हाथ फिराने लगे.

फिर हमने बहुत देर तक ऐसे ही चुदाई की. उसके बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. वे मेरी कमर पर किस करने लगे और मेरे हिप्स पर मारने लगे. उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हारी कमर बड़ी गोरी है. एकदम चिकनी हो तुम! तुम्हारे पूरे शरीर पर कहीं भी बाल नहीं हैं. इतने बड़े बड़े बूब्स और साथ में चिकनी चूत और एक औरत चोदने में मजा आ रहा है.

मैंने भी हम्म कहकर उनके सवाल का जवाब दिया।

उन्होंने मुझसे कहा कि आज मैं तुम्हें बहुत चोदूंगा.
मैंने कहा- आप मुझे बहुत अच्छे लगे हैं, आप मुझे जितना मर्जी चोद लीजिए।

मेरी ऐसी गरम बातें सुनकर फिर उनको मजा आने लगा. उन्होंने मुझसे कहा- मैं अपने लंड का पानी तुम्हारे मुंह पर गिराना चाहता हूं.
तो मैं घुटनों के बल नीचे बैठ गई और वे अपने लंड से मेरे चेहरे पर मुठ मारने लगे और सारा पानी मेरे गोर चेहरे पर गिरा दिया।

फिर मैंने एक तौलिये से से अपना चेहरा साफ किया और ऐसे ही उनके पास आके बैठ गई।
हम दोनों ऐसे ही बेड पर नंगे लेट गए।

थोड़ी देर बाद उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा. अबकी बार उन्होंने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर लिया और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मेरी कमर को पकड़ कर आगे पीछे हिलाने लगे.
कुछ देर ऐसे ही करने के बाद फिर हम बेड पर आ गए. उन्होंने मुझे पेट के बल लेटा कर पीछे चूतड़ों की दरार से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया।

वे मुझे बहुत तेज तेज चोदने लगे. मैं उनके धक्कों का साथ पता नहीं कैसे-कैसे दे रही थी. मुझे ही पता है कि मैं उनके झटके कैसे झेल रही थी. पर अंदर ही अंदर मुझे मजा भी खूब आ रहा था.

और तभी उन्होंने मुझसे कहा- मैं इस बार तुम्हारी चूत में ही झड़ने वाला हूं.
मैंने उससे कहा- नहीं, आप अंदर नहीं करना क्योंकि हमने कंडोम नहीं लगाया था.
उन्होंने मुझसे कहा- नहीं, मुझे तो तुम्हारी प्यारी सी चूत के अंदर ही करना है और मुझे मजा आने वाला है.

मैंने उनसे कहा- ठीक है, कर लीजिए.

और उन्होंने मेरी चूत में ही अपना सारा गरम गरम पानी छोड़ दिया। मुझे उनका पानी अपने अंदर खूब महसूस हुआ।

करीब 1 घंटे में वह दो बार झड़ गए थे फिर हमारी कुछ देर तक ऐसे ही बैठ कर बातें होती रही।

एक डेढ़ घंटे बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया और उन्होंने मुझसे कहा- प्लीज मेरे लंड को एक बार सक करो!
और मैं उनका लंड फिर से एक बार अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.

जब मैं उनका लंड चूस रही थी तो उन्होंने मुझसे कहा- सोनाली, मुझे तुम्हारी गांड मारनी है.
मैंने कहा- नहीं, मैंने आज तक नहीं पीछे से नहीं मरवायी है।
मुझे गांड शब्द का इस्तेमाल करने में शर्म सी महसूस हुई.

उन्होंने मुझसे कहा- प्लीज, एक बार ट्राई करो ना!
मैंने उनसे कहा- ठीक है.

फिर वे एक लोशन लेकर आए और उन्होंने उसको मेरी गांड के छेद पर मल दिया और अपने लंड पर भी लगा लिया. फिर मेरी गांड के छेद पर लगाकर अपना सारा लंड एक ही झटके में मेरी गांड में उतार दिया।

मेरी तो जैसे चीख निकल गई मेरी आंखों में हल्के से आंसू भी आ गए थे।

फिर वे बहुत धीरे धीरे धक्के लगाने लगे और अपने हाथ से मेरी चूत को मलने लगे. मेरी चूत के दाने पर अपना हाथ फिराने लगे तो फिर मुझे थोड़ी सी राहत महसूस हुई और मुझे मजा आने लगा.
तब उन्होंने अपने धक्के की स्पीड थोड़ी सी तेज कर दी और मेरी गांड को भी जमकर चोदने लगे.

बहुत देर तक चोदने के बाद अब मेरी गांड खुल चुकी थी.

तब उन्होंने मुझसे फिर से अपना लंड चूसने को कहा.
मैं गांड से निकला हुआ लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। अजीब सी गंध आ रही थी लेकिन इन सब बातों में एक अजीब सा मजा था.

और फिर उन्होंने मुझे पेट के बल लेटा लिया और पीछे से कभी लंड मेरी गांड में डालते तो कभी मेरी चूत में डालते।
वे बहुत देर तक ऐसे ही मेरी चूत और गांड की चुदाई करते रहे.

फिर उन्होंने मुझे सीधी लिटा लिया और मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगे, मेरे जिस्म का चाटने लगे, काटने लगे, चूसने लगे. उन्होंने मेरे सारे जिस्म को लाल कर दिया था. मेरे बूब्स को चूस चूस कर भी उन्होंने लाल कर दिया था.

मेरे बाल खुल गए थे. आज मुझे पहली बार चुदाई में ऐसा महसूस हुआ कि जैसे आज से पहले मैं चुदी ही नहीं हूँ. इस जोरदार चुदाई में बहुत मजा आया मुझे.

उन्होंने मुझसे कहा- तुम बहुत सेक्सी हो. मेरा मन करता है कि तुम्हें खा जाऊं.
फिर वे पूछने लगे- तुम्हें भी रोज चुदने की आदत होगी?
मैंने उन्हें हम्म कहकर कर जवाब दिया।

अब उन्होंने फिर से मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझसे कहा- अब मैं तुम्हें मजा दिलाऊंगा. क्योंकि अगर मैं तुम्हें पहले ही मजा दिला देता तो तुम मुझे मजा नहीं दिलवाती. जैसे तुम अब चुदी हो तुम फिर वैसे नहीं चुदवाती।

इसलिए वह मेरी चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगे और आराम आराम से मेरे सारे जिस्म को चाटने लगे.

मेरा तो जैसे अब झड़ने का पूरा मन कर रहा था क्योंकि एक चुदने की हवस भी अब खत्म हो गई थी और अंदर कहीं ना कहीं मैं थक सी भी गई थी. अब मुझे चुद के झड़ के बस सोना था.

और मुझे धीरे-धीरे मजा आने लगा. मैंने अपने हाथों से उनके कंधों को पकड़ लिया और अपनी टांगों को उनके चूतड़ के ऊपर रख दिया. वे अंदर तक अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे।

मेरा बदन अकड़ने लगा था, मुझे मजा आने वाला था. मेरा मुंह खुल रहा था और मैं अपने मुंह से सांसें ले रही थी.

और मुझे मजा आ गया. जैसे ही मुझे पूरा मजा आया, मैंने अपना दांत हल्के से उनके कंधे पर गड़ा दिए और तेज तेज धक्के मारने लगी।

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अलीज़ा की गांड

ब्यूटी पार्लर की आड़ में मैं कालगर्ल का धंधा भी कर लेती थी. एक नयी पुलिस वाली की भारती हुई और वो मेरे काम में रुकावट बनने लगी. तो मैंने उसका इलाज कैसे किया?

हाय मेरे दोस्तो, मैं आपकी अंजलि … मुझे फ्री सेक्स कहानी पर आप सभी से मिलना बहुत अच्छा लगा. मुझे आप लोगों के ईमेल मिले, लेकिन मैं सभी को जवाब नहीं कर सकी … सॉरी!

आज की ये सेक्स कहानी एक पुलिस वाली पर है कि कैसे उसने चुत चुदवाई और मेरी सैटिंग बन गई.

मैं जहां रहती हूँ, वहां के एक मकान में एक फैमिली रहने आयी. वो एक यादव फैमिली थी. उस फैमिली में 3 लोग रहते थे. यादव जी, उनकी पत्नी और बेटी. यादव जी की बेटी 23 साल की थी. यादव जी पुलिस में कांस्टेबल थे.

लेकिन अचानक हार्ट अटैक के कारण यादव जी की डेथ हो गई. अब उनकी बेटी और पत्नी अकेली बची थीं. यादव जी की पत्नी पहले से ही काफी बीमार रहती थी. इसलिए घर चलाने की जिम्मेदारी यादव जी की बेटी अलीज़ा पर आ गई.

अलीज़ा ने पुलिस में भर्ती होने के लिए एग्जाम दिया हुआ था. लेकिन जब रिजल्ट आया तो उसे निराशा हाथ लगी. मगर पिता की मृत्यु के चलते उसकी अनुकम्पा नियुक्ति का प्रार्थनापत्र स्वीकार हो गया और उसे भी एक कांस्टेबल की पोस्ट मिल गई.

अलीज़ा के मन में इस पोस्ट से संतुष्टि नहीं हुई, वो पुलिस विभाग में किसी बड़े पद के सपने देखती थी.

इससे पहले इस सेक्स कहानी को रूप दिया जाए, उससे पहले मैं आपको अलीज़ा के बारे में बता देती हूँ. अलीज़ा की उम्र 23 साल की थी. उसका फिगर 34-28-36 का था. उसे देख कर कोई कामुक हो जाए, ऐसी मस्त सुन्दरी थी वो. उसे देख कर किसी का भी मन उसे चोदने का हो जाए.

जब अलीज़ा पुलिस वर्दी में घर से निकलती, तो बड़ी ज़बरदस्त लगती थी. पीछे से उसकी गांड ऐसे ठुमकती थी, जैसे चुदवाने की चाह में कोई लौंडिया गांड मटका रही हो. अब आप लोग अलीज़ा की खूबसूरत जवानी को समझ गए होंगे कि कितनी वो कितनी सेक्सी और हॉट दिखती होगी.

अलीज़ा थी तो एक कांस्टेबल, लेकिन वो रौब इतना दिखाती थी, जैसे पुलिस इंस्पेक्टर हो.

आपको तो मालूम ही है कि मेरा पार्लर लड़कियों को मसाज के लिए ट्रेनिंग देता है. उसी की आड़ में मुझे बिजनेस भी मिल जाता है. एक दिन इसी बात को लेकर अलीज़ा ने मुझसे लड़ाई की. तब मैंने सोच लिया कि इसे मजे चखा कर ही रहूंगी.

मैं हमारे एरिया के एक एमएलए से मिली. उस एमएलए का नाम रोशन लाल था. उसका दबदबा भी बहुत था. मैं रोशन लाल से मिली और उसे अलीज़ा के बारे में बताया. रोशन लाल को मैं कई बार आइटम सप्लाई कर चुकी थी, तो वो मेरी बात मानता था.

रोशन लाल बोला- अरे अंजलि डार्लिंग, तेरा काम हो जाएगा, तू जा और सो जा. अभी जरा इलेक्शन आ रहे हैं. इलेक्शन के बाद तेरा काम हो जाएगा.
मैंने रोशन लाल को कुछ पैसे दिए, वो पैसे उसने मना करते करते रख लिए.

आप सब तो जानते ही हैं कि पैसा हर किसी को अच्छा लगता है और पैसे से ही हर काम चलता है.

कुछ समय बाद इलेक्शन हो चुके थे. तो मैंने रोशन लाल को फोन किया और उससे बोली- रोशन लाल इलेक्शन हो चुके हैं … अलीज़ा से कब बदला लेगा?
रोशन लाल बोला- मैं अभी दिल्ली जा रहा हूँ … तब तक इलेक्शन रिजल्ट आ जाएगा.

फिर वो दिन भी आ गया. इलेक्शन में रोशन लाल इस बार भी जीत गया और दिल्ली से आ गया था. उसने अलीज़ा की खबर ली और वो जिस थाने में थी, वहां से उसका ट्रांसफर करवा दिया.

इस बार रोशन लाल ने अलीज़ा की ड्यूटी अपने फार्महाउस पर लगवा दी, इधर वो मीटिंग करता था और सबको पार्टी देता था.

दूसरे दिन रोशन लाल मुझसे बोला- फार्महाउस आ जाना, कल से अलीज़ा की ड्यूटी वहीं करवा दी है.
मैंने कहा- ठीक किया साली को इधर से हटवा दिया.
रोशन लाल हंस कर बोला- अब मैं अलीज़ा की मां चोद दूंगा!
मैंने हैरान होकर कहा- वो कैसे?
रोशन लाल बोला- तू खुद आ कर देख ले ना … तू अन्दर रूम में रहना, रूम में सीसी टीवी कैमरा लगा है. तू इधर से ही अच्छे से उसकी मां चुदते देख लेगी.
मैं बोली- ठीक है, मैं आती हूँ.

फिर मैं रोशन लाल के फार्महाउस पहुंच गई और अन्दर जहां उसके ऑफिस में सीसी टीवी रूम था, वहां बैठ गई. मैं टीवी में देख रही थी कि रोशन लाल कब आएगा और अलीज़ा से बदला लेगा. इतने में अलीज़ा भी फ़ार्म पर आ गई. अलीज़ा वर्दी में थी. उसकी चुस्त वर्दी की वजह से उसके मम्मे एकदम उभर रहे थे और गांड एकदम टाईट थी.

लगभग दो घंटे बाद रोशन लाल आया.

कुछ देर बाद रोशन लाल ने अलीज़ा को अन्दर बुलाया. मैं सब कुछ सीसी टीवी से देख रही थी. मुझे उसकी आवाज भी आ रही थी. ये आवाज रोशन लाल के रूम से सुनाई दे रही थी.

रोशन लाल- और सुना अलीज़ा कैसी है?
अलीज़ा- जी सर … मैं ठीक हूँ.
रोशन लाल- मैंने सुना है कि तू कांस्टेबल से ऊपर की पोस्टिंग चाहती है.
अलीज़ा- जी सर, ये मेरा सपना है … काश सच हो जाए.
रोशन लाल- अरे तेरा सपना कितना सा है … ये तो बड़े आराम से हो सकता है. मैं करवा सकता हूँ लेकिन …

ये सब रोशन लाल अपने लंड मसलते हुए बोला था.

अलीज़ा- जी सर … करवा दो प्लीज़ … मैं कुछ भी कर सकती हूँ.
रोशन लाल- कुछ भी का मतलब समझती है न … अलीज़ा सोच ले तू क्या बोल रही है?

रोशन लाल ये कहते हुए फिर से अपने लंड पर हाथ घुमाया.

अलीज़ा हंस कर बोली- हां सर मैं समझती हूँ.

ये कहते हुए वो रोशन लाल की गोद में बैठ गई. अलीज़ा ने अपनी गांड रोशन लाल के लंड से टच कर दी और बोली- अब बोलो सर जी?

रोशन लाल ने ऊपर से पीछे हाथ डाल कर उसके मस्त बुब्बुओं को दबाना शुरू कर दिया. अलीज़ा ‘सीई … आ. … सीई … उफ्फ..’ की सिसकारी भर रही थी.

फिर रोशन लाल ने अलीज़ा की टोपी हटा दी और अलीज़ा के बाल खोल दिए. रोशन लाल अलीज़ा के बालों को सूंघने लगा. उसके बालों में सुगंध थी.

रोशन लाल लम्बी सांस भर कर खूशबू का मजा लेते हुए बोला- आह क्या मस्त जुल्फें हैं तेरी अलीज़ा जान.

मैं ये सब सीसी टीवी से देख रही थी. मुझे भी सनसनी होने लगी. मेरे सामने एक मर्द अलीज़ा जैसी सुन्दरी के साथ खेल रहा था.

कुछ पल बाद रोशन लाल ने अलीज़ा की शर्ट उतार दी. अलीज़ा ने अन्दर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी. वो अभी भी पैंट पहने हुए थी. रोशन लाल ने अलीज़ा को उठाया और आगे की ओर करके वो अलीज़ा के दूध दबाने लगा. साथ ही वो अपना एक हाथ अलीज़ा की चूत पर घुमाने लगा.

अलीज़ा मस्ती में ‘सीई … अहह … सीई … ऊ उह्ह … रोशन लाल जी … आज आप खूब एंजॉय कर लो … मगर मुझे पोस्टिंग हर हाल में चाहिए.

रोशन लाल ने यह सुनते ही अलीज़ा की ब्रा फाड़ दी और बोला- भोसड़ी वाली मादरचोदी … आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा.

इतना बोल कर रोशन लाल ने अब अलीज़ा की पैंट भी उतार दी. अलीज़ा की पैंट के साथ ही उसकी पैंटी भी निकल गई थी. अब अलीज़ा एकदम नंगी हो गई थी. रोशन लाल ने नंगी अलीज़ा को अपनी गोद में उठा कर सोफ़े पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोल दिया. उसके सामने अलीज़ा की चूत खुली पड़ी थी. वो अलीज़ा की चुत चाटने लगा.

रोशन लाल अलीज़ा की चुत पर ऊपर से नीचे तक जीभ फेरता हुआ कहने लगा- आह … क्या मस्त चूत है बहन की लौड़ी की … आह आज तो तेरी चुत को मस्त कर दूंगा.

ये बोल कर रोशन लाल अपनी पूरी जीभ चुत में डाल कर चाटने लगा. अलीज़ा मस्ती से मादक सिसकारियां भरने लगी थी.
उसकी गांड खुद ब खुद रोशन लाल के मुँह पर उठती जा रही थी. जिससे रोशन लाल भी अलीज़ा की चुत को खूब चाटने लगा.
कुछ ही पलों में अलीज़ा झड़ गई.

अलीज़ा की चूत मलाई से सं गई थी. जिसे रोशन लाल मस्ती से चाटता गया. इससे अलीज़ा की चुत एकदम चिकनी हो गई थी.

अब रोशन लाल ने अपने कपड़े उतार दिए और अलीज़ा के सीने पर बैठ गया.
रोशन लाल गुर्रा कर बोला- चल लंड हिला भोसड़ी की.

अलीज़ा ने रोशन लाल का लंड हिलाना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों में रोशन लाल का लंड खड़ा हो चुका था. मैं सीसीटीवी से देख रही थी. मुझे उसका लंड लगभग 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा दिख रहा था.

इसके बाद रोशन लाल ने अपना लंड अलीज़ा के होंठों पर रखा और अपना टोपा अलीज़ा के होंठों पर फेरने लगा. अलीज़ा ने अपने होंठ भींच रखे थे, शायद वो लंड चूसना नहीं चाह रही थी. मगर रोशन लाल ने उसके दोनों गाल दबा कर लंड को अलीज़ा के मुँह में घुसेड़ दिया.

अब अलीज़ा ने भी लंड पकड़ कर मुँह में चूसना चालू कर दिया. कोई 5 से 7 मिनट बाद रोशन लाल अलीज़ा के मुँह को मस्ती से चोदने लगा. वो अपना लंड पूरा अन्दर बाहर करने लगा था. रोशन लाल अलीज़ा रंडी के मुँह की चुदाई जम कर करने लगा. कुछ मिनट बाद रोशन लाल के लंड का पानी निकल गया और उसने सारा अलीज़ा के मुँह में ही छोड़ दिया. अलीज़ा भी जोश में थी, उसने रोशन लाल के लंड का पूरा पी लिया.

अब रोशन लाल ने उससे पूछा- पहले चुदी है या नहीं?
अलीज़ा मुस्कुरा कर बोली- जब मैं ट्रेनिंग में गई थी, तो वहां जो ट्रेनिंग ऑफिसर था … वो सारी लड़कियों को चोदता था. उसी ने मुझे भी चोदा था.

रोशन लाल ने हम्म की आवाज निकाली और अलीज़ा से फिर से लंड खड़ा करने को कहा.

अलीज़ा फिर से रोशन लाल का लंड हिलाने लगी. कोई 5 मिनट में फिर से रोशन लाल का लौड़ा खड़ा हो चुका.

अब रोशन लाल ने अलीज़ा को सोफ़े पर सीधा लेटा दिया और अपना लंड चूत पर सैट करके एक धक्का दे दिया. उसका पूरा लंड सरसराता हुआ चुत के अन्दर घुसता चला गया.

अलीज़ा एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी- आह मर गई … आआहह … मेरी फट गई … आह फाड़ दी चूतिए ने.

यह सुन कर रोशन लाल ने लंड फिर से बाहर निकाला और बिना देर किए फिर से अन्दर पेल डाला. अलीज़ा की चिल्लपौं को अनसुना करते हुए वो लंड चुत में अन्दर-बाहर करने लगा.

थोड़ी देर बाद अलीज़ा भी अपनी गांड उठा कर लंड से चुदवाने लगी. ये देख कर रोशन लाल भी जोर जोर से ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

लगभग 20 से 25 मिनट बाद रोशन लाल ने लंड चुत से बाहर निकाला और सोफ़े पर बैठ गया. मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी खड़ा था.

रोशन लाल अलीज़ा से बोला- चल रंडी … लंड पर बैठ और उछल उछल कर मजे दे. आज तुझे दरोगा बना कर ही छोडूंगा.

ये सुनकर अलीज़ा गांड मटकाते हुए उठी और रोशन लाल के सीने की तरफ मुँह करके बैठ गई. फिर उसने लंड को अपनी चुत में सैट किया और पूरा लंड चूत में ले लिया.

लंड अन्दर लेते ही उसकी एक बार सीत्कार निकली और वो अगले ही पल गांड उछाल उछाल कर रोशन लाल को मजे देने लगी.

रोशन लाल अलीज़ा की गांड पकड़े हुए उसकी चुत में लंड पेल रहा था. रोशन लाल अलीज़ा के दूध चूसता हुआ चुदाई का मजा ले रहा था. साथ ही वो अलीज़ा की गांड में भी उंगली डाल रहा था.

वो अलीज़ा को इसी पोज दस मिनट तक चोदता रहा. अलीज़ा अब थक गई थी और वो अपनी तरफ से जरा भी उछल कूद नहीं कर रही थी.

फिर रोशन लाल ने अलीज़ा को फिर से सोफ़े पर सीधा लेटा दिया और जोर जोर से ठोकने लगा.
अलीज़ा समझ गई कि रोशन लाल अब लंड का पानी छोड़ने वाला हो गया है. ये समझते ही अलीज़ा रोशन लाल से बोली- रोशन लाल, अपना पानी चूत में नहीं, बाहर छोड़ना.

लेकिन रोशन लाल कहां सुनने वाला था. वो बस धकापेल चोदता रहा. उसने अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी थी.

फिर रोशन लाल ने एकदम से एक करारा झटका दिया और लंड का पूरा पानी अलीज़ा की चूत में फेंकने लगा. वो अलीज़ा के ऊपर लेट गया था ताकि पानी बाहर ना निकलने पाए.

दो मिनट बाद रोशन लाल ने लंड बाहर निकाला, तब तक अलीज़ा की चूत में पानी घुस चुका था.

अलीज़ा तनिक गुस्सा हुए बोली- तुमने पानी अन्दर क्यों डाला?
रोशन लाल बोला- मादरचोदी पोस्टिंग करवाना है ना … तो ज्यादा चुदुर चुदुर नहीं कर.
अलीज़ा चुप हो गई.

रोशन लाल कुछ देर अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. अलीज़ा भी अपनी हांफी ठीक कर रही थी.
कुछ देर बाद रोशन लाल बोला- चल अब उल्टी लेट जा रांड … अब तेरी गांड का नम्बर है.

रोशन लाल के मुँह से ये सुन कर तो मैं भी सकते में आ गई. उधर अलीज़ा भी बिना चूं-चपड़ किए उल्टी लेट गई थी.

रोशन लाल ने अपने खड़े लंड सहला कर गांड मारने के लिए रेडी किया और अलीज़ा की गांड में लंड डालने लगा.

अलीज़ा लंड गांड में लेते ही चीख उठी- आह मर गई … रोशन लाल जी आपका लौड़ा है या लोहा की रॉड है.

रोशन लाल ने उसकी कोई परवाह नहीं की और उसकी मखमली गांड मारने लगा. रोशन लाल का लंड अलीज़ा की गांड में जाते समय बड़ी आवाज कर रहा था. कमरे में से ‘घप्पा घप्प … घप्पा घप्प..’ की आवाज आ रही थी.

कुछ देर बाद रोशन लाल का पानी फिर से छूटा और उसने पूरा पानी अलीज़ा की गांड में ही छोड़ दिया. अलीज़ा भी झड़ चुकी थी.

रोशन लाल ने पूरे दो बार अलीज़ा की चुदाई की और बैठ कर सिगरेट फूंकने लगा. उधर अलीज़ा मरी कुतिया सी कुनमुना रही थी.

तभी रोशन लाल के पास किसी का फोन आया, तो वो कपड़े पहन कर चला गया. उसके जाते ही अलीज़ा बाथरूम में चली गई और उधर नहा कर उसने अपनी वर्दी पहन ली.

जब वो रूम के बाहर निकली, तो उसने मुझे देखा.

अलीज़ा मुझे देख कर चौंक गई और बोली- अंजलि तू यहां?
मैं बोली- क्यों बहुत रौब झाड़ती थी ना … तूने मुझसे लड़ाई की थी … उस वक्त भी मैं तुझसे बोली थी कि तुझे छोडूँगी नहीं … मैंने सब देख लिया कि रोशन लाल तुझे कैसे रगड़ा है.

मैंने उसे सीसी टीवी वाली बात बताई और बोली- देख … मुझे सब मालूम है कि कैसे रोशन लाल तुझे चोद रहा था.
अलीज़ा मेरे पैर पकड़ कर बोली- अंजलि जी … प्लीज़ मुझे माफ कर दो, ये बात आप किसी से मत कहना, आप जो बोलोगी … मैं करूंगी.
मैं बोली- ठीक है … मैं तुझे माफ़ भी कर सकती हूँ … और तुझे किसी बड़ी पोस्ट पर भी सैट करवा सकती हूँ. लेकिन तू मेरा कहना माने तो!
अलीज़ा बोली- क्या काम!

मैं बोली- मुकेश जी को जानती है … जो डीएसपी हैं. बस तू उन्हें खुश कर दे. वो तुझे ऊंची पोस्ट पर सैट करवा सकते हैं और इस बात के लिए रोशन लाल उनसे तेरी सिफारिश भी कर देगा.

यह सुन कर अलीज़ा पहले तो गुस्सा हो गई और बोली कि मैं कोई ऐसी वैसी रंडी नहीं हूँ … पुलिस वाली हूँ.
मैं बोली- अरे वो मुकेश जी भी डीएसपी हैं. वैसे भी तू रोशन लाल के साथ चुद चुकी है … अब क्या शर्माना. तुम हां कर दोगी तो तुम्हारा ही काम बन जाएगा.

अलीज़ा बोली- तुम मुझसे बदला ले रही हो या मेरी मदद कर रही हो?
मैंने कहा- तेरी मदद इसलिए कर रही हूँ कि तू मेरे धंधे में सरदर्द न बने बल्कि मेरी मदद करे.

अलीज़ा ये सुनकर मेरी बात मान गई.

मैंने मुकेश जी को फोन किया- हैलो डीएसपी मुकेश जी से बात हो रही है?
मुकेश- हां जी … अंजलि जी बोलिये. मेरे से कुछ काम था या कुछ नयी माल सैट की है?
मैं- डीएसपी साहब माल ही के लिए फोन किया है … बड़ी हॉट है … कितना दोगे?
मुकेश- आप आधे घंटे में उसे उसी वाले होटल में पहुंचा दो … फिर देखता हूं.

उनका ये कहना था कि मैं समझ गई कि कौन से होटल के लिए कह रहे हैं.
मैंने फोन रख दिया और अलीज़ा से बोली- चल होटल चलते हैं.

हम लोग जब तक होटल पहुंचे, तब तक मुकेश जी होटल पहुंच चुके थे.
मैंने होटल में आकर मुकेश जी को कॉल किया- डीएसपी साहब किस रूम में आना है?
मुकेश- अपना वही 308 नम्बर है.

फिर मैं उस रूम में गई. मुकेश जी सिर्फ अंडरवियर में बैठे सिगरेट फूंक रहे थे … सामने व्हिस्की की बोतल और गिलास बना रखा था.

वो अलीज़ा को देख कर चौंक गए- अरे अंजलि जी … ये अलीज़ा यहां क्या कर रही है?
मैं बोली- अरे मुकेश जी यह तो आपके विभाग का ही माल है.
मुकेश जी बोले- ये क्या मज़ाक है?
मैं बोली- ये मज़ाक नहीं है. आज आपकी ही पुलिस वाली आपके नीचे होगी. ये आज आपसे चुदवाएगी.

मुकेश ने अलीज़ा की तरफ देखा, तो अलीज़ा बोली- जी सर मैं रेडी हूँ.
मुकेश- ओके ठीक है … मुझे भूख मिटानी है … चल आ जा.

मैंने अलीज़ा को छोड़ दिया और मुकेश ने खींच कर अलीज़ा को अपनी गोद में ले लिया. साथ ही मुकेश ने मुझे इशारा किया. मैं उनका इशारा समझ गई और टेबल पर रखे पर्स से बीस हजार रूपए निकाल कर मुकेश जी को दिखाते हुए कमरे से जाने का पूछा.

मुकेश ने आंख दबा कर हां कर दिया और मैं पैसे लेकर बाहर चली गई.

अलीज़ा और मुकेश जी उस कमरे में लगभग चार घंटे रुके और उन दोनों की मस्त चुदाई लीला चली.

एक पुलिस वाली, रंडी के जैसे चुद गई और अब अलीज़ा का प्रमोशन भी हो गया. अलीज़ा की अब एएसआई के पद पर पोस्टिंग हो गई है … लेकिन अलीज़ा अब लंड के बिना नहीं रह पाती है.

अब तो लंड की भूख होने पर अलीज़ा सीनियर जूनियर भी नहीं देखती है, उसे जो भा जाता है, उसी से चुदवा लेती है. उसने कई बार तो थाणे में बंद अपराधियों के लंड से भी अपनी चुत की खुजली मिटाई है.

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