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चूत चटायी का मजा

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

काफी दिन से मैं चाह रहा था कि अपने साथ घटी घटना को आप लोगों के साथ शेयर करूं. लेकिन टाइम नहीं मिल पाने के कारण मैं अपनी कहानी शेयर नहीं कर पा रहा था. तो आज टाइम निकाल कर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती सुनाने जा रहा हूं. यह मेरी पहली कहानी है अगर इसमें कोई त्रुटि हो तो मैं क्षमा चाहता हूं.

अब आप लोगों का ज्यादा समय नष्ट ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आता हूं।

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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बचपन की दोस्त की चूत फाड़ चुदाई

मैं दिल्ली का रहने वाला एक सामान्य लड़का हूं. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा शरीर भी औसत दर्जे का है. न तो मैं ज्यादा मोटा हूं और न ही पतला. मेरी बॉडी एथलेटिक है।

मेरे पास एक अच्छा लंड है जिसे मैंने कभी नहीं मापा है. जहां तक लंड के साइज की बात है तो यह किसी भी औरत, लड़की या प्यासी चूत को संतुष्ट कर सकता है इसलिए इसके बारे में मुझे चिंता करने की आवश्यकता नहीं हुई.

यह कहानी मेरे बचपन की दोस्त के बारे में है. उसने मुझे कभी दोस्त नहीं माना. मैं उसको अपनी अच्छी दोस्त मानता रहा लेकिन उसने फिर किसी और से शादी कर ली. समय के साथ मैं उसको भूल भी गया था.

फिर एक दिन वह मेरे घर आई. शुरू में तो देखने पर मैं उसको पहचान भी नहीं पाया. मैंने मां से पूछा तो वो मां को सारी कहानी बता चुकी थी. उसकी बात सुनने के बाद मुझे उसके बारे में याद आई.

उसने मुझे बाकी की कहानी सुनाई कि वह अपने पति के खिलाफ एक केस लड़ रही है और अपने पति से वह तलाक चाहती थी। मैंने उसकी पूरी बात सुनी और उसको सहजता से काम लेने की हिदायत दी. मुझसे मिलकर वो थोड़ा शांत हुई.

एक हफ्ते बाद में मैं उसके घर गया. उससे बात करने पर पता लगा कि उसको कोई जॉब चाहिए थी. उस दिन उससे काफी देर तक बातें होती रहीं. फिर हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगीं.

मुझे ऐसा लग रहा था कि उसको भी मेरे साथ बातें करना अच्छा लगता था. महीने भर तक हम दोनों फोन पर अक्सर ही बातें करते रहे. फिर ऐसे ही करते करते बात किस करने तक भी पहुंच गयी.

उस समय तक मैं वर्जिन था. मैंने इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि किस कैसे करते हैं. मैंने उसको बताया कि मुझे किस करना भी नहीं आता है.

वो बोली- इतने भी शरीफ मत बनो.
मैंने कहा- सच में, मेरी लाइफ में आज तक कोई लड़की नहीं आई है.
वो बोली- कोई बात नहीं, मैं तुम्हें किस करना सिखा दूंगी.

एक महीने के बाद मेरे मां और पापा का घूमने का प्रोग्राम बना. मैंने अपनी दोस्त को छोटी सी पार्टी के लिए बुलाया. जब हमारी पार्टी खत्म हो गयी तो वो मेरा मजाक बनाने लगी.

वो बोली- तुम तो बहुत डरपोक हो. लड़कियों से बात करना तुम्हारे बस की बात नहीं है.
मुझे उसकी बातों पर गुस्सा आने लगा. मैंने उससे कहा- मेरी शराफत को मेरी मेरी कमजोरी न समझे.
वो फिर भी मेरा मजाक बनाती रही.

मेरी मर्दानगी पर बात आई तो मैंने उसको पकड़ कर किस कर दिया. वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी.
फिर उसने भी मुझे गर्दन से पकड़ लिया और किस करने लगी. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे.

मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाह रहा था. मैंने उसको किस करके छोड़ दिया. फिर उसके बाद वो कई दिन तक मुझे चिढ़ाती रही.

उसके द्वारा किया जाने वाला ये उपहास मुझसे सहा न गया. मैंने उसको फिर से घर आने का न्यौता दिया. उस दिन भी इत्तेफाक से मैं घर पर अकेला ही था.

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी शायद मुझसे चाहती थी. इसीलिए मुझे बार बार सेक्स के लिए उकसा रही थी. मैं भी अब उसकी चूत को चोद देना चाहता था.

मैंने कई मिनट तक उसको किस किया. फिर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू कर दिया. उसके टॉप को उतारा और फिर उसकी पजामी को उतार दिया.

सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में वो काफी सेक्सी लग रही थी. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा दिया. वो भी यही चाहती थी. जैसे ही मैंने उसकी चूचियां दबाईं तो वो सिसकार उठी. फिर मैंने उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया. वो कसमसाने लगी.

उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया. मैंने पहली बार अपने सामने किसी लड़की की चूचियों को नंगी देखा था. मैंने उसकी नर्म मुलायम सी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. उनको प्यार से दबाकर देखने लगा.

मेरे लंड में जोश भरने लगा. अब मुझे सेक्स चढ़ रहा था. चूंकि मेरा यह पहला सेक्स था तो मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं था. उत्तेजना में ज्यादा कुछ सूझ भी नहीं रहा था.

कुछ देर तक मैं उसकी चूचियों को दबाता रहा और वो मजे से अपने दूधों को मेरे हाथों में दबवाती रही. फिर उसने मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को अपने दूधों पर रखवा दिया. मैं भी उसके दूधों को पीने लगा.

मुझे चूचियां पीने में बहुत मजा आ रहा था. पोर्न सेक्स वीडियो में देखते हुए मुठ तो कई बार मारी थी लेकिन असल में चूचियों को पीने का मजा कुछ अलग ही होता है.

मैं उसके निप्पलों को जोर से काटने लगा. उसकी चूचियों को चूस चूस कर मैंने एकदम से कड़क बना दिया. फिर मैंने उसको बेड पर लिटा लिया. उसकी पूरी बॉडी को किस करने लगा.

अब मेरा मन भी कर रहा था कि वो मेरे लंड को पकड़ ले. तभी उसने खुद ही कह दिया- अपने कपड़े नहीं उतारोगे क्या?
उसके कहते ही मैंने अपनी टीशर्ट और लोअर उतार दी. उसके सामने अंडरवियर में हो गया.

फिर मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया और उसकी चूचियों पर टूट पड़ा. मुझे बूब्स चूसने में सबसे ज्यादा मजा आ रहा था. फिर वो मेरे होंठों को पीने लगी.

उसने नीचे से मेरे लंड को पकड़ना चाहा. मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी मुठ मारने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसकी चूचियों से होते हुए उसकी नाभि पर किस करते हुए नीचे तक आ गया. फिर मैंने उसकी चूत की ओर रुख किया. उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत के आसपास के बाल साफ किये हुए थे.

मैं उसकी चूत को ध्यान से देख रहा था. मैंने चूत अपनी जिन्दगी में अपनी आंखों के सामने पहली बार देखी थी. मैं उसकी चूत के इर्द गिर्द चूमने लगा और वो एकदम से सिहर गयी.

फिर मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया. मैं उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उसकी चूत का रस बहुत ही मादक सा था. चूत की खुशबू पहली बार मैंने ली थी और स्वाद भी बहुत मस्त था.

कुछ देर तक उसकी चूत को चूसने और चाटने के बाद मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. लंड को चूत पर रखने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड को धकेला लेकिन लंड फिसल गया.

मुझे चुदाई का तजुरबा तो था ही नहीं, साथ ही उसकी चूत भी बहुत टाइट थी. मैंने फिर से कोशिश की लेकिन फिर भी लंड नहीं गया. एक दो बार में ही मेरे लंड को सुपारा लाल हो गया. वो भी बार बार उचक रही थी.

मैंने सोचा कि ऐसे बात नहीं बनेगी. मैंने तेल की शीशी ली और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा लिया. उसकी चूत के द्वार पर भी काफी सारा तेल मल दिया.

तेल लगाकर मैंने झटका मारा तो वो बेड पर ऊपर की ओर सरक गयी. मैंने उसको पकड़ लिया. फिर से नीचे लाकर उसकी चूत में फिर से लंड को घुसा दिया. वो चीखने को हुई लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया.

धीरे धीरे करके मैंने लंड को उसकी चूत में उतार दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया. कुछ देर का विराम देने के बाद मैंने फिर ऊपर नीचे होना शुरू किया. उसको भी अच्छा लगने लगा.

पहले तो मैं धीरे धीरे करता रहा और फिर मैंने स्पीड बढ़ाने की सोची. उसकी चूत में अब मैं तेजी के साथ धक्के लगाने लगा. चुदाई में मुझे गजब का मजा मिल रहा था. उसकी चूत काफी टाइट थी. शायद उसके पति के साथ उसके सेक्स संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे.

15 मिनट तक मैंने उसकी चूत को इसी पोज में चोदा. फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर लिया. अब वो आराम से लंड को अंदर ले रही थी. मुझे भी चुदाई में पूरा आनंद मिल रहा था. उसके बाद मैंने उसकी चूत में पीछे से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और तेज तेज उसकी चूत को चोदने लगा. वो गूं गूं की आवाज करने लगी मगर मुझे चुदाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि मैंने उसकी चूत फाड़ ही डाली.

आधे घंटे तक उसकी चूत चोदने के बाद मेरा पूरा बदन पसीने में भीग गया था और उसका हाल तो मुझसे भी बुरा था. उसके मुंह से अब तेज तेज आवाजें आ रही थीं उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिनमें दर्द और आनंद का मिला जुला सा रूप था.

चूंकि मेरा घर बाहरी एरिया में था इसलिए किसी को कुछ पता चलने का भी डर नहीं था. मैंने जमकर उसकी चूत चोदी. इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी जब मैं नहीं झड़ा तो मैंने उसको सीधी कर लिया. उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत में फिर से लंड दे दिया.

अगले दस मिनट तक फिर मैंने उसकी चूत को रगड़ा. वो बुरी तरह से थकी हुई लग रही थी. मुझे नहीं पता था कि औरत कितनी देर में झड़ती है. मगर मुझे लग रहा था कि इस दौरान वो 3-4 बार तो झड़ ही गई होगी.

फिर मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. उसकी चूत में वीर्य छोड़ने के बाद मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. वो जैसे बेसुध हो गयी थी.

उसके बाद वो उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. उससे सही से चला भी नहीं जा रहा था. फिर मैं उसको उसके घर तक छोड़ कर आया. इस तरह से मुझे बाद में पता चला कि मेरी टाइमिंग डेढ़ घंटे के करीब है.

उस दिन मैंने उसकी चुदाई की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली थी. वो रिकॉर्डिं करीब 45 मिनट की थी. अगर कोई लड़की उसको सुन ले तो उसकी चूत से पानी निकल जाये.

पहली चुदाई के बाद उस दिन मुझे भी थकान हो रही थी तो मैं घर वापस आकर सो गया. उसके बाद मैंने अपनी बचपन की दोस्त की चूत कई बार चोदी. उसको होटल में ले जाकर भी कई बार चोदा.

अब वो मेरे लंड से चुदने की आदी हो गयी थी.

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अपना लंड डाल दो

सभी लड़कियों और भाभियों को मेरा प्यार, उनकी चूतों को मेरा दुलार. मेरा नाम आयुष अग्रवाल है और मैं नैनीताल (उत्तराखंड) का रहने वाला हूं. मेरी उम्र अभी 25 वर्ष है और मैं अभी कुंवारा ही हूं. मेरे लंड का साइज 7 इंच है.

आप लोगों का समय खराब न करते हुए मैं सीधे मुद्दे पर आता हूं. मतलब मेरी सेक्स स्टोरी पर.

यह घटना आज से करीब 4 साल पहले की है. उस वक्त मैं नैनीताल में ही एक ऑफिस में जॉब किया करता था.

मेरे ऑफिस में वहां पर एक माही (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की भी जॉब करती थी, जो पहाड़ी थी. दोस्तो, पहाड़ी लड़की कैसी भी हो लेकिन वो दिखने में एकदम माल होती हैं. उनका रंग और फिगर कमाल का होता है. माही भी वैसी ही थी.

माही का फिगर 34-28-32 का था. उसको जो एक बार देख ले तो देखने वाला तो समझो पागल हुए बिना न रह पाये. ऐसे ही देखा देखी में मुझे भी उससे कब प्यार हो गया मुझे पता भी नहीं चला.

मैंने उसको ये बात बोलने की सोची. हिम्मत करके मैंने उसे अपने दिल की बात कही. वो गुस्सा तो नहीं हुई लेकिन वो हम दोनों के इस रिश्ते को दोस्ती से ज्यादा नहीं समझती थी.
मैंने उसको बहुत बार बोला कि मैं उसे बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड वाला प्यार करता हूं लेकिन वो हर बार बात को यही कर टाल देती थी कि हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.

मुझे ऐसा लगता था कि वो भी मुझे चाहती थी लेकिन वो खुल कर अपने प्यार को सामने नहीं लाना चाह रही थी इसलिए दोस्ती का बहाना बना देती थी. वो थोड़ी शर्मीली किस्म की थी. शायद उसको डर था कि कहीं उसके किसी घरवाले तक बात न पहुंच जाये.

ऐसे ही करते करते दिन बीत रहे थे. फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जिसे मैं कभी नहीं भूल पाया.

वह दिन था 31 दिसम्बर का. उस दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी होनी थी. वह अपनी एक सहेली के साथ रूम पर रहती थी.

माही की सहेली एक दिन पहले ही अपने घर चली गयी थी. माही अब रूम पर अकेली रहने वाली थी. मुझे उसकी चिंता हो रही थी. वैसे सच कहूं तो मैं उसको चोदना चाह रहा था. इसलिए मेरा मन बार बार उसके साथ रहने को कर रहा था.

मैंने माही को बोला भी कि तुम्हारी सहेली तो घर चली गयी है और तुम रूम पर अकेली रहोगी.
वो कहने लगी कि वो रह लेगी.
मैंने उसको चिंता जताई और कहा कि अगर उसको सही लगे तो एक रात के लिए मैं ही उसके रूम पर आ जाता हूं.
माही ने मना कर दिया.

ये सुन कर मेरा मुंह उतर गया. वो भी मेरा उदास चेहरा देख कर सोच में पड़ गयी थी. मैं दरअसल उसकी किसी बात का बुरा नहीं मानता था. बस उसके सामने नाराज होने का नाटक कर रहा था.

मेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर वो मान गयी. बाद में उसने मुझे अपने रूम पर आने के लिए परमिशन दे दी.
मैं खुश हो गया. मैं उसके साथ ही उसके रूम पर चला गया.

रूम पर जाकर उसने हम दोनों के लिए खाना बनाया. हम दोनों ने साथ में डिनर किया और फिर उसने हम दोनों के लिए दो बिस्तर लगा दिये. दो बिस्तर देख कर मेरा माथा ठनक गया. कहां मैं उसको चोदने की प्लानिंग कर रहा था और वो मेरे लिए अलग से बिस्तर लगा रही थी.

फिर कुछ बहाना बना कर मैं उसके पास ही लेट गया. उसके पूछने पर मैंने कह दिया कि मुझे रात में अकेले सोने की आदत नहीं है. मेरे ऐसा कहने पर उसने कुछ नहीं कहा. साथ ही मैंने ये भी बोल दिया कि अभी जब तक नींद नहीं आती तो एक ही बिस्तर पर लेट लेते हैं उसके बाद मैं अपने बिस्तर पर जाकर सो जाऊंगा. उसको मेरी बात से थोड़ी तसल्ली हो गयी.

कुछ देर तक हम दोनों ऑफिस की बातें करते रहे. उसने अपनी सहेली के बॉयफ्रेंड्स के बारे में भी बताया. ये सब सुन कर मेरा लंड भी मेरी पैंट में उठने लगा था. मगर मैंने ये माही को महसूस नहीं होने दिया.

बातें करते हुए उसको नींद आ गयी. जब उसने बोलना बंद कर दिया तो मैंने देखा कि वो सो चुकी है. उसकी नाइट ड्रेस में उसकी उभरी हुई चूचियां देख कर मेरा मन बहकने लगा. मैंने उसकी चूचियों पर हल्के से छूकर देखा. उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

फिर मैंने उसकी चूचियों को धीरे से दबा कर देखा. उसने तभी भी कोई रिएक्शन नहीं दिया. अब मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने उसकी दोनों चूचियों पर एक एक हाथ रख दिया.

धीरे धीरे उसकी चूचियों को दबाते हुए मैं मजा लेने लगा और मेरा लंड टन्न से खड़ा हो गया. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने उसकी नाइट टॉप में हाथ दे दिया. उसकी चूचियों को अंदर हाथ देकर दबाने लगा. मेरे हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबा रहे थे.

अचानक ही उसने एक गहरी सी सांस ली और वो दूसरी तरफ घूमने लगी. मेरे दिल में धक धक हो गयी. मुझे लगा कि शायद ये जाग गयी है. मैंने उसके करवट लेने से पहले ही अपने हाथ को बाहर खींच लिया.

उसके बाद मैंने थोड़ा इंतजार किया. जब एक दो मिनट तक कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने दोबारा से ट्राई करने की सोची. आप तो जानते ही हो दोस्तो, सामने जब जवान लड़की सो रही हो तो कंट्रोल करना कितना मुश्किल हो जाता है.

दो मिनट इंतजार करने के बाद जब मुझे सब कुछ सही लगा तो मैंने फिर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. अब मैं पहले से ज्यादा जोर से उसके बूब्स को सहला रहा था और मसल रहा था. ये भी भूल गया था कि वो मेरी दोस्त है.

जब मैंने तेजी के साथ उसकी चूचियों को दबाया तो वो जाग गयी. जैसे ही उसने देखा कि मैं उसके बूब्स को छेड़ रहा हूं तो वो उठ कर बैठ गयी. उसने अपने टॉप को देखा और उसको पेट पर फिर से नीचे कर लिया.

ये जान कर कि मैं उसको छेड़ रहा था उसने मेरी ओर गुस्से से देखा. मगर फिर उसने रोना शुरू कर दिया. मैं तो डर गया कि अब ये चिल्ला चिल्ला कर सबको बता देगी. मेरी गांड फट रही थी.

तभी मैंने बात को संभालते हुए कहा- सॉरी माही, ये सब गलती से हो गया. मुझसे रुका नहीं गया. मैं तुमको बहुत प्यार करता हूं. मैं तुम्हारा गलत फायदा नहीं उठाना चाहता हूं.
मेरी बात सुन कर उसे थोड़ी तसल्ली हुई.

बड़ी मुश्किल से उसको समझा बुझा कर मैंने चुप करवाया. फिर उसने मेरी ओर देखा और मैंने उसकी ओर देखा. हम दोनों के होंठ आपस में एक बार के लिए मिल गये. मगर पता नहीं एकदम से उसको क्या हुआ कि उसने मुझे पीछे धकेल दिया.

मगर अब तो मैं बेकाबू हो गया था. मैंने उसको फिर से पकड़ा और उसकी गर्दन को पकड़ कर जोर से उसके होंठों पर अपने होंठों से चूसने लगा. पहले तो वो छटपटाई मगर कुछ सेकेण्ड में ही उसको मजा आने लगा. अब वो मेरा साथ देने लगी.

धीरे धीरे उसके होंठों को चूसने का मजा लेते हुए मैं फिर से उसके चूचों को दबाने लगा. वो अब गर्म हो रही थी. वह हल्के से सिसकार करने लगी थी और मैं उसकी चूचियों को भींच रहा था.

उसके बाद मैंने उसकी नाईट ड्रेस को भी उसके हाथ ऊपर करके उतार दिया. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध दबाने लगा. एक तरफ से मैं उसकी चूचियों को दबा रहा था और दूसरी तरफ मैं उसके होंठों को चूस रहा था. उसके होंठ चूसते चूसते मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी.

माही की चूचियों को मैंने नंगी कर दिया. एक चूची को हाथ में लेकर दूसरी को अपने मुंह में ले लिया. आह्ह … जब उसकी चूची पर मुंह लगा तो मजा आ गया. मैं मस्ती में उसकी चूचियों को पीने लगा. कुछ ही देर में मैंने उसकी चूचियां चूस चूस कर लाल कर दीं.

अब उसके स्तन एकदम से कड़क हो गये थे. अब उसको मजा आ रहा था. थोड़ा दर्द भी हो रहा था उसे क्योंकि मैं काफी जोर से उसके बूब्स दबा और मसल रहा था. उसके निप्पल तन कर एकदम से टाइट हो गये थे.

ऐसे ही धीरे धीरे करके मैं उसके पूरे बदन को चूमने लगा. कभी उसके पेट पर तो कभी नाभि पर. कभी उसके कंधों पर तो कभी उसके गालों पर. ऐसा मन कर रहा था कि मैं उसको खा ही जाऊंगा.

उसकी गर्दन को चूसते हुए मेरा लंड उसकी चूत के बिल्कुल ऊपर था. मैंने उसके बदन को खूब चूसा और सहलाया. मेरा लंड बार बार उसकी चूत के छेद को टटोल रहा था. उसकी पैंटी के ऊपर रगड़ रहा था.

अब मुझसे रुका न गया और मैंने उसकी पैंटी निकाल दी. उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. उसकी चूत बाहर तक गीली दिख रही थी. मैंने उसकी चूत को सूंघा और फिर एक किस कर दी. किस करते ही वो सिहर सी गयी. उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया.

अपनी पैंट मैंने इसी बीच उतार ली और मैंने उसका हाथ अपने लंड पर लगवा दिया. वो हाथ को पहले तो हटाने लगी लेकिन फिर बाद में उसने मेरे लंड को पकड़ लिया. अब उसका हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा था.

मेरा मन कर रहा था कि उसके मुंह में लंड दे दूं. मैंने उसको उठाया और अपने लंड को उसके मुंह के सामने कर दिया. वो नखरा करने लगी. मगर मैंने हार नहीं मानी.

मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और तेजी के साथ उसकी चूत में उंगली करने लगा. माही के मुंह से जोर जोर की सिसकारियां निकलने लगीं. पूरा कमरा गर्म हो गया था. हम दोनों के जिस्मों में पसीना आने लगा था.

जब उससे रहा न गया तो वो उठी और उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. उसने मेरे होंठों को चूसा और मैंने उसकी चूत पर लंड को रगड़ दिया. फिर मैंने दोबारा से उसके मुंह के पास लंड को किया और उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया.

जब उसने मुंह में लंड लिया तो मुझे बहुत मजा आया. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसको अपना लंड चुसवाने लगा. अब मेरे मुंह से आह्ह … आह्ह करके सिसकारी निकल रही थी और जब लंड उसके मुंह में जा रहा था तो उसके मुंह में गूं-गूं की आवाज हो रही थी.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गये. मैंने उसकी चूत में जीभ दे दी और वो मेरे लंड को चूसने लगी. जल्दी ही वो काबू से बाहर हो गया. मेरा मन भी उसकी चुदाई करने के लिए मचल गया था.

वो बोली- आह्ह … अब रहा नहीं जा रहा आयुष, अब अंदर डाल दो.
मैंने कहा- क्या अंदर डाल दूं मेरी जान?
वो बोली- अपना वो डाल दो.
मैंने कहा- उसको क्या बोलते हैं, एक बार कहो तो.
वो बोली- अपना लंड डाल दो.

मैंने पूछा- कहां डाल दूं? अपना लंड।
वो बोली- मेरी चूत में अपना लंड डाल दो.
उसकी ये बात सुनकर मुझे चैन सा मिला. जो लड़की मुझे पहले मना कर रही थी अब वो ही मेरा लंड अपनी चूत में लेने के तड़प रही थी.

उसकी चूत पर लंड रख कर मैंने पूछा- पहले लिया है क्या जानू?
वो बोली- नहीं, बस उंगली से सहला देती थी.
मैंने कहा- ठीक है, तो फिर आज मैं तुम्हारी कुंवारी चूत का उद्घाटन करने जा रहूं. तैयार हो जाओ.
वो बोली- हां डालो, मैं तैयार हूं.

मैंने कहा- मगर कॉन्डम तो है ही नहीं.
वो बोली- ऐसे ही डाल दो.
मैंने कहा- ठीक है जान.

अपने लंड को मैंने उसकी कुंवारी चूत पर रखा और एक धक्का लगा दिया. चूत टाइट थी इसलिए पहली बार में लंड का सुपाड़ा अंदर न जाकर चूत पर से फिसल गया.

मैंने दोबारा से जोर का धक्का मारा तो लंड उसकी चूत में घुस गया. वो दर्द से चिल्ला उठी लेकिन मैंने तभी उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया. अब मैं रुक गया. उसकी चूत की पहली चुदाई थी इसलिए उसको इतना दर्द देना ठीक नहीं था.

कुछ देर रुक कर मैंने फिर से उसकी चूत में लंड को अंदर सरकाना शुरू किया. मैं उसके होंठों को चूस रहा था और उसकी चूत में नीचे से लंड को भी सरका रहा था. धीरे धीरे करके मैंने आधा लंड उसकी चूत में घुसा दिया था.

फिर मैंने एक झटका दिया और पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. वो एक बार फिर से उछली और मैंने उसके होंठों को दबा लिया. कुछ देर रुक कर मैंने फिर से लंड के धक्के चूत में लगाने शुरू किये. दो-तीन मिनट लगे उसका दर्द कम होने में. अब मैं धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा.

हम दोनों के बदन पूरे नंगे थे. मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत में धक्का दे रहा था और वो मेरे होंठों को चूस रही थी. कुछ ही देर में उसकी गांड ऊपर की ओर आने लगी. उसको चूत चुदवाने में अब मजा आ रहा था.

अब मैंने अपने धक्के तेज कर दिये और तेजी के साथ उसकी चूत को चोदने लगा. वो भी मस्त होकर चुदवाने लगी. तीन-चार मिनट में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत से पानी निकलने के कारण जब चूत में लंड जा रहा था तो रूम में पच-पच की आवाज होने लगी. अब मेरा लंड मलाई की तरह उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था.

मजे में सिसकारते हुए उसने कहा- आह्ह … चोद दो यार आज … अब तक ये चूत कुंवारी थी और मैं भी कुंवारी थी.
मैंने कहा- हां मेरी जान, मेरी नजर तो तेरी चूत पर बहुत पहले से थी.
उसने मेरे होंठों को चूसते हुए गांड ऊपर उठाना जारी रखा. मुझे भी उसकी टाइट सी चूत मारने में बहुत मजा आ रहा था.

दस मिनट के बाद वो एक बार फिर से झड़ गयी. अब मेरा माल भी निकलने को हो गया था. मैंने उसकी चूत में दो-चार धक्के तेजी के साथ लगाये और जब माल एकदम आने लगा तो मैंने जल्दी से लंड को निकाल कर उसके मुंह में दे दिया.

उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और एक दो बार चूसा था कि मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूटने लगी. मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा. झटके दे देकर मैंने अपना सारा माल उसके मुंह में गिरा दिया और वो उसे पी भी गयी.

फिर हम दोनों नंगे पड़े रहे. थोड़ी देर के बाद उसने खुद ही मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. फिर उसने बिना कहे ही मेरे लंड को मुंह में लेकर पांच मिनट तक चूसा और मेरा लंड फिर से अकड़ गया.

एक बार फिर से मैंने उसकी चूत मारी. अबकी बार मैंने उसको डॉगी स्टाइल में चोदा. कुतिया की तरह चोदने में बहुत मजा आया. उसने भी इस पोजीशन को बहुत इंजॉय किया.

उस रात मैंने तीन बार उसकी चूत चोदी. इस तरह से मैंने एक कुंवारी चूत चोद कर अपना नया साल मनाया. जब वो सुबह सोकर उठी तो उसके पूरे बदन पर लाल निशान हो गये थे. मैंने उसके बदन को जी भर कर चूसा था.

माही उस रात के बाद जैसे मेरी दीवानी सी हो गयी थी. उस दिन पहली जनवरी के दिन मैंने नैनीताल में मस्ती करते हुए फिर से उसकी चूत मारी. उसके बाद उसकी गांड की चुदाई भी की. दोस्तो, लड़की की गांड चुदाई का भी अपना ही मजा है.

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चूत ने पानी छोड़ दिया

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

मुझे समझ नहीं आता कि मुझे उससे मिलने जाना चाहिए या नहीं कृपया अपनी राय दें।

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पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी

मेरी प्रेम कहानी: मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं. मैं भी उन्हें प्यार करती हूँ. लेकिन शादी से पहले मुझे एक लड़के से प्यार हो गया था. उसे मैं भुला नहीं पायी.

मेरा नाम दिव्या है, मैं दिल्ली से हूं।
आज मेरी शादी को पूरा एक साल हो गया है. मेरे हस्बैंड मुझसे प्यार करते हैं, मैं भी उनसे प्यार करती हूं.

लेकिन आज यहां मैं आई हूं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की एक ख़ास घटना सुनाने को। यह मेरी प्रेम कहानी है शादी से पहले की.

उस समय का बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी. एक लड़का था जो हमेशा मुझे देखता था. जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो मुझे उसकी आंखों में मेरे लिए सच्चा प्यार झलकता था.

बहुत समय तक हमारे बीच यही चलता रहा। एक दूसरे से कुछ कहते नहीं थे … बस देख लिया करते थे। हम चाहते थे पास आना … पर डरते थे।
मैंने सोचा कि वह ही शुरुआत करेगा. पर उसने कुछ नहीं किया.

बहुत समय तक मैंने उसका इन्तजार किया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने ही कुछ सोचा, मैंने किसी बहाने उसके पास जाना था क्योंकि उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए सच्चा प्यार और भरोसा नजर आता था।

फिर एक दिन मैंने एक कागज पर अपना नंबर लिखा और कॉलेज जाते ही उसकी बेंच पर रख दिया. मैं जानती थी कि उसका कॉल जरूर आएगा.

और ऐसा ही हुआ. शाम को उसका कॉल आया. मैं अपने घर की छत पर उसके फोन का इन्तजार कर रही थी.
नया नंबर देखकर मैंने फोन उठाया और बहुत धीमी सी आवाज में हेलो बोली।

बस यही पहली शुरुआत थी हमारे प्यार की!

तब हमारे बीच बहुत सारी बातें हुई. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे; हम मिलने भी लगे।
एक दूसरे का हाथ थामे वह सड़क पर घूमना … प्यार भरी नजरों से एक दूसरे को देखना।

एक दिन मुझे बुखार हो गया। मैं उससे कॉल पर बात नहीं कर पाई। मैं जानती थी कि उसने मेरे फोन का बहुत इन्तजार किया होगा.

जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो मैंने उसको कॉल किया. उसने मुझसे सारी बातें पूछी, मेरी तबीयत … मेरे हालात।
मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिएँ.
उसने मुझसे कहा- बताओ कितने चाहिएँ?

मैंने कहा- सिर्फ दो हजार भेज दो.
उसने कहा- ठीक है, भेज रहा हूं. पर तुम अपना ध्यान रखना।

मेरा इतना ध्यान रखना सिर्फ उसको आता था.

कुछ दिनों बाद मैं ठीक हो गई, मैंने उसको कॉल किया और एक जगह मिलने के लिए बुलाया. मेरा मन उसको अपनी बांहों में भरने का कर रहा था. मैं जाकर सीधे उसके गले लग गई. मैं और वो एक दूसरे की बांहों में बहुत देर तक चिपके रहे।

आज मेरा उससे बहुत प्यार करने का मन कर रहा था. मैंने उससे कहा- आज मैं पूरा दिन फ्री हूं, चलो किसी होटल में चलते हैं.
उसने आंखें झुका कर हम्म ही कर दी.

अब इसे हम दोनों का प्यार कह लीजिए या प्यार में हुआ सेक्स! पर हम एक दूसरे को और नजदीक से जानना चाहते थे, एक दूसरे को टूट कर प्यार करना चाहते थे।

हमने एक होटल में रूम लिया और हम पूरा दिन वहां रहे। होटल में जाकर हम दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक गए.

मैंने धीरे धीरे उसकी शर्ट को उतारा, उसकी नंगी बालों वाली छाती पर अपने हाथों को फिराना शुरू किया. उसने आनन्द से आंखें बंद कर ली थी.

फिर मैंने उसके माथे पर किस किया और उसके सारे जिस्म पर किस करती चली गई. मुझे बस आज उसकी और मेरी एक नई कहानी बनानी थी.
हम दोनों प्यार में इतने डूबे थे।

फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. मेरे शर्ट और सलवार को धीरे-धीरे करके उतारा. मेरा सारा गोरा बदन उसके सामने था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में उसके सामने लेटी थी। उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया। मेरे सारे बदन पर अपनी उंगलियों फिर आई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और मेरे बूब्स को हल्के हल्के चूसने लगा. मैंने अपने हाथ को उसके सिर पर फिराना शुरू कर दिया. वो कभी कभी मेरी नंगी कमर पर भी अपना हाथ फिरा रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

यह पहली बार था कि मैं सेक्स कर रही थी, वरना आज तक सिर्फ सेक्स विडियो में ही देखा था।

फिर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। और अपना लंड मेरी कुंवारी बुर पर लगाने लगा. उसने थोड़ी कोशिश की अपने लंड को मेरी कसी बुर के अंदर डालने की!
पर लंड अंदर गया नहीं!

मैंने उससे कहा- बेबी, पहले मुंह से करो ना … गीली हो जाएगी तो फिर आराम से करना … तब चला जाएगा.
उसने ऐसे ही किया. मेरे बूब्स से किस करते करते नीचे मेरी बुर तक चला गया. वह मेरी सारी बुर को मुंह में लेकर चूसने लगा.

मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अच्छा भी लग रहा था. मैंने यह बुर चटायी का सीन वीडियो में देखा था तो मुझे भी एक बार करना भी था, इसलिए मैंने उससे बोला था.

मैं बेड पर बाल खोलकर लेटी थी और बस उसके नंगे जिस्म को देख कर आनंद ले रही थी. मैं कभी उसको देखती तो कभी बुर चटायी में मिलने वाले मजे के कारण आंखें बंद कर के लेट जाती.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको अपनी ओर खींचा. अब तक उसके मुख की लार से मेरी बुर पूरी गीली हो गई थी. उसका लंड भी प्रिकम छोड़ कर हल्का गीला हो गया था.

हम दोनों प्रेमी इस पोजीशन में आ चुके थे कि अब एक दूसरे में समा जाएं. वो मेरे ऊपर आक र अपने लंड को मेरी बुर के छेद पर सेट करने लगा और मैंने उसकी मदद की.
फिर उसने सीधा हल्के से धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पीछे की तरफ धकेला चाहा ताकि ज्यादा अंदर तक ना जा सके.

लेकिन धीरे-धीरे फिर मुझे मजा आने लगा. अब मैंने अपनी पूरी टांगें अपने प्रेमी के लंड के स्वागत में खोल दी थी और मैंने उसकी कोली भर ली।
वह भी ‘दिव्या दिव्या’ कर रहा था और मुझे बहुत प्यार कर रहा था.

हमने सिर्फ इसी पोजीशन में सेक्स किया और हम दोनों झड़ गए.

फिर हम दोनों ने अपने अंडर गारमेंट्स पहन लिए और ऐसे ही एक दूसरे के पास बैठ गए. बहुत सारी फिर प्यारी बातें की।

अबकी बार उसको मैंने बेड की तरफ धक्का दे दिया उसके लंड पर अपना हाथ फिराने लगी. मैंने पोर्न वीडियो में देखा था और उसी तरह मुझे एक बार लंड मुंह में लेना था.
फिर मैंने उसको मुंह से मजा दिलाया, मैंने उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. धीरे-धीरे मैं उसको मजा दिलाने लगी.
वह मेरे बालों पर और मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रहा था.

फिर से हम दोनों तैयार थे एक दूसरे में खोने के लिए। फिर वह पीछे की तरफ लेट गया और मुझे अपनी ओर खींचा. वह बेड पर सीधा लेट गया, मैं अपने घुटनों को मोड़कर उसके ऊपर जाकर बैठ गई. फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ऐसे ही किस करते करते कब उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे पता ही नहीं चला. बस मजा आ रहा था, पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी.

उसने मेरे बालों को पीछे से खोल दिया. मेरी नंगी कमर पर मेरे बाल बिखरे पड़े थे और मेरी कमर पर उसके हाथ चल रहे थे. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटा दिया और पीछे से मेरी चूत में ही लंड डाला. मेरे बालों को मेरे कंधे से हटाकर वहां किस करने लगा. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था … हम एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.

हमने इसी तरह मजा लिया. वह इसी तरह मेरी चूत में झड़ गया और मैं भी ऐसे ही उल्टी लेटे-लेटे झड़ रही थी तो मैंने बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह की आवाज को रोकने के लिए अपना मुंह बेड में धंसा दिया।

कुछ देर तक हम दो प्रेमी चुदाई के बाद वैसे ही तेज तेज सांसें भरते रहे. फिर मैंने हल्के से अपना चेहरा उसकी तरफ किया, उसने मेरे चेहरे पर किस किया.

उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर रखा था. झड़ने के बाद भी बहुत देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

बहुत समय बीत गया था तो अब मुझे घर जाना था. मेरी मम्मी पापा मेरी बाट देख रहे होंगे.
मैंने उससे कहा- डियर मुझे जाना होगा.
उसने कहा- ठीक है, जाओ. और मैं भी चलता हूं.

उसने मुझे घर के पास छोड़ दिया और वह भी अपने घर चला गया.

फिर हमने रात को कॉल पर बात की. उस पूरे दिन का नजारा हमारी आंखों के सामने घूम रहा था. उस पूरी रात हमने उस दिन के बारे में ही बात की कि हमने कैसे कैसे इंजॉय किया.

उस दिन सेक्स करने के बाद मैं भी और वह भी एक दूसरे के बहुत दीवाने हो गए थे. ऐसा लगता था जैसे अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे.

लेकिन हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ समय बाद मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया. कॉलेज कंप्लीट होते ही पापा ने मेरे लिए लड़का देख लिया. हमारे घर का माहौल कुछ ऐसा था कि मैं पापा की बात को कभी ना नहीं कह सकती थी.
जहां पापा ने चाहा … मुझे शादी करनी पड़ी.

आज मैं अपने हस्बैंड के साथ हूं … खुश हूं. पर शायद जैसे उसके साथ रहती वैसे नहीं।

प्यार तो करते हैं हम एक दूसरे को हस्बैंड वाइफ … लेकिन कुछ वैसा प्यार नहीं है जैसा उसके साथ था।

‘मैं शादी कर रही हूं.’ सुनते ही उसने सिर्फ एक बार मुझसे पूछा था कि यह सच है क्या?
फिर उसके बाद उसने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैं भी नहीं कर पाई।
किस मुंह से करती?

आज कभी किसी चीज की जरूरत होती है तो उसकी याद बहुत आती है। वो था जो मेरे लिए हमेशा खड़ा रहता था। आज पता नहीं कहां इस दुनिया की भीड़ में वह खो गया है.

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मेरी चूत में लंड डालकर मुझे खूब चोदा

मैंने छोटे शहर से बड़े शहर में आकर कॉलेज ज्वाइन किया तो मेरे अंदर जवानी का जोश था. पहले ही दिन एक बांके जवान लड़के से मुलाक़ात हुई और मैं उस पर मोहित हो गयी.

दोस्तो, उम्मीद करती हूँ कि आप सभी अच्छे और स्वस्थ होंगे.
मेरा नाम पल्लवी है और मैं अन्तर्वासना पर बहुत दिनों से कहानियाँ पढ़ रही हूँ और खुद भी कहानियाँ लिखना चाहती थी.

और आज मैं यह पहली कहानी लिख रही हूँ. उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आयेगी. यह मेरी पहली कहानी है इसीलिए अगर कोई गलती हो लिखने में तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा.

सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूं. मेरा नाम पल्लवी है, मेरी उम्र 21 साल है, मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 32-26-33 है. ये कहानी 2 साल पहले की है तब मेरी उम्र 19 साल थी, तभी मैंने अपनी 12वीं की परीक्षा पास की थी और क्यूंकि मेरा घर यूपी में पूर्वांचल के एक गाँव में है इसीलिए वहां कोई अच्छा कॉलेज न होने के कारण मैंने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अपनी बुआ, जो गोरखपुर में रहती हैं, के घर जाने का फैसला किया.

मई माह में 12वीं के रिजल्ट आने के बाद मैं बुआ के घर आ गयी और वह एक कॉलेज ज्वाइन कर लिया.

बुआ का घर 3 मंजिल का था. उसमें से मैंने सबसे ऊपर वाले मंजिल का कमरा ले लिया जो घर की छत पर ही था.

पहले दिन जब मैं दोपहर को बुआ के घर पहुंची तो बुआ ने मेरा सारा सामान कमरे में रखवा दिया. और क्यूंकि मैं भी थकी हुई थी लम्बे सफ़र के बाद तो रूम में जाकर कपड़े बदल कर शॉर्ट्स और टॉप पहना और बेड पर सो गयी.

मेरी नींद करीब शाम के 8 बजे खुली और अँधेरा हो चुका था. मैं अपने कमरे से बाहर निकली और और वहीं छत पर टहलने लगी.

तभी बगल वाले घर में, जिनकी छत मेरी छत से लगी हुई थी, उसमें एक आदमी आया वो करीब 6 फुट का था लम्बा चौड़ा … देखने में किसी जिम का ट्रेनर लग रहा था.

मैं अपने छत पर टहल रही थी और वो अपने छत पर टहल रहा था. और क्यूंकि मैंने शॉर्ट्स और टॉप पहना हुआ था और शॉर्ट्स भी काफी मुश्किल से मेरी गांड को छुपा पा रहे थे इसीलिए वो लगातार मेरी गांड और बूब्स देख रहा था.

वैसे तो मुझे कोई इस तरह देखे तो अच्छा नहीं लगता मगर मैं भी उसकी जानदार बॉडी को देख रही थी.

हम करीब आधा घंटा यों ही टहलते रहे.

8:30 बजे बुआ मुझे खाना खाने के लिए बुलाने छत पर आ गयी. उनके ऊपर आते ही उस आदमी ने बुआ को नमस्ते कहा.
तो बुआ ने भी नमस्ते की और पूछा- और अनिल कैसे हो?
तब मुझे पता चला कि उसका नाम अनिल है.

बुआ ने अनिल को मेरे बारे में बताया और कहा- यह मेरी भतीजी पल्लवी है, और यहाँ पढ़ने के लिए आई है.
उसने मुझसे हाथ मिलाया और कहने लगा- मैं भी उसी कॉलेज में पढ़ा हूँ. और अब चौराहे पर जो जिम है वो मेरा ही है.
मैंने कहा- ओह … आप जिम के ट्रेनर हैं क्या?
अनिल बोला- ट्रेनर भी हूँ और जिम का मालिक भी हूँ.

तभी बुआ ने कहा- हाँ … तभी तो इतनी बॉडी बना रखी है.
और सभी हंसने लगे.

तभी अनिल ने कहा- अगर कॉलेज में कोई दिक्कत हो या कोई हेल्प चाहिए हो तो मुझे बताना, मैं वहां के बारे में सब जानता हूँ.
मैंने कहा- वैसे मुझे वहां के सिलेबस, क्लासेज और टीचर्स के बारे में जानना था.
अनिल ने कहा- हाँ जरुर … अभी बताता हूँ.

लेकिन तभी बुआ ने हम दोनों को टोक दिया और कहा- जो बात करनी है, खाने के बाद करना. चलो पहले खाना खा लो. और अनिल जाओ तुम भी खाना खा लो.
तभी उसके घर के नीचे वाले कमरे से किसी औरत की आवाज़ आई- अनिल आओ खाना खा लो.

मैं बुआ के साथ नीचे जाने लगी तो मैंने उनसे पूछा- बुआ वो आवाज़ किसकी थी?
उन्होंने बताया- वो आवाज तो उसकी बीवी अंजलि की थी.
मैंने कहा- अच्छा उसकी शादी हो चुकी है.
बुआ ने कहा- हाँ, 9 साल हो गए शादी को उसकी.
मैंने कहा- क्या 9 साल तो वो कितने साल का है?
बुआ ने कहा- 35 साल का है. वैसे लगता 25 साल का है, है ना?
मैंने कहा- हां वो तो सही कहा आपने.
और फिर हम दोनों हंसने लगी.

खाना खाने और उसके बाद बुआ के साथ बर्तन धुलने के बाद मैं 10 बजे तक छत पर आ गयी और वहीं पर टहलने लगी.

कुछ देर बाद अनिल के घर से लड़ने की आवाज़ आने लगी और फिर अनिल ऊपर छत आ गया.
मैंने उससे कहा- क्या हुआ? घर में चिल्ला चिल्ली क्यों मची है?
तो अनिल ने कहा- कुछ नहीं बस रोजमर्रा की लड़ाई चल रही थी.
और फिर हम दोनों हंसने लगे.

तभी उसकी बीवी अंजलि ऊपर आ गयी और उसने कहा- मैं घर जा रही हूँ. और खुद खाना बनाओ और खाओ.
अनिल ने भी गुस्से में कहा- जो करना है, कर! अब निकल यहाँ से.

उसके बाद अंजलि वहां से चली गयी और घर चला गयी और अनिल वही खड़ा रहा.
मैंने कहा- अरे उसको रोकोगे नहीं क्या?
तो उसने कहा- अरे खुद आ जाएगी. उसका रोज़ का है ये! और तुम बताओ क्या हाल है, खाना खा लिया?
मैंने कहा- हाँ खा लिया.

अनिल ने कहा- अपना नंबर दो, मैं तुम्हें सिलेबस दे देता हूँ.
मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और अनिल ने मुझे सिलेबस भेज दिया.

मैंने उससे कहा- यार तुमने बॉडी बहुत अच्छी बनायी है.
अनिल ने उसके बाद अपनी शर्ट उतार दी और अपने सिक्स पैक दिखने लगा.

मैं छत की दीवार लांघ कर उसकी छत पर चली गयी और उसके सिक्स पैक छूकर देखने लगी.
अनिल ने कहा- कैसे लगे? बहुत मेहनत करने पर बनी है.
मैंने कहा- बहुत अच्छे हैं.

अनिल ने कहा- वैसे तुम्हारा फिगर भी लाजवाब है, शॉर्ट्स और टॉप में मस्त लगती हो.
मैंने कहा- रहने दो, मोटी हो रही हूँ यार.
तो उसने मुझे घुमाया और मेरे पीछे आ गया और पीछे से मेरे पेट पर हाथ फेरने लगा और पीछे से चिपक गया.

मुझे भी मजा आ रहा था और उसको कुछ नहीं कहा. अनिल पेट पर हाथ फेरते फेरते ऊपर मेरे बूब्स पर हाथ ले आया और बूब्स को मसलने लगा.

उसके बाद मेरे टॉप के अन्दर अपने हाथ डाला और मेरे निप्पल को अपनी दो उंगली से खूब जोर से मसलने लगा और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.
अनिल अपने लंड को मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से ही मेरी गांड पर घुसेड़ने लगा.

तभी बुआ की आवाज़ आने लगी तो मैं जल्दी से अपने छत पर आ गयी और अनिल ने भी तुरंत शर्ट डाल ली.

बुआ ऊपर आई मुझे पानी देने लगी और कहा- चलो, अब सो जाओ.
मैंने बुआ को गुड नाईट बोला और कमरे में सोने चली गयी.

अनिल ने भी बुआ को गुड नाईट बोला और सोने चला गया.

अगले दिन सुबह मेरा कॉलेज था और कॉलेज की ड्रेस नीला शर्ट और सफ़ेद सलवार पहन कर सिटी की लोकल बस पकड़ कर कॉलेज पहुँच गयी.

कॉलेज में मैं जब पहुंची तो क्लास में मैं सबसे ज्यादा सुन्दर थी. सब मुझे ही देख रहे थे. लड़के मेरे पीछे वाली सीट पर बैठ गए और अपनी आँखों से मेरे फिगर का एक्सरे करने लगे, मुझसे बात करने की कोशिश करने लगे.

करीब 3 बजे मेरी छुट्टी हुई और घर जाने के लिए कॉलेज से निकली और बस का इंतज़ार करने लगी.

कॉलेज के बाहर कुछ लड़के खड़े थे और कॉलेज से निकल रही हर लड़की का एक्सरे अपनी आँखों से कर रहे थे. जब करीब आधा घंटा बीत चुका था और बस अभी तक नहीं मिली थी मुझे और कॉलेज के सभी छात्र भी जा चुके थे.

तभी उन्ही लड़कों में से एक लड़का अपनी मोटरसाइकिल पर 2 लड़कों को बिठाये हुए मेरी तरफ आया और मेरे पास आकर गाड़ी रोक कर बोला- हेल्लो … मेरा नाम सुमित है. आपका नाम क्या है?
मैंने उसके सवाल का कुछ जवाब नहीं दिया तो सुमित ने कहा- क्या हुआ मैडम? सिर्फ नाम ही तो पूछा है यार … उसमें क्या दिक्कत है?
तो मैंने फिर मैंने गुस्से में कहा- मेरा नाम पल्लवी है कोई प्रॉब्लम?
सुमित ने कहा- अरे यार पल्लवी … क्या हुआ … इतना क्यूँ गुस्सा हो, क्या बात है कोई टेंशन?

मैंने कहा- यार, आधा घंटा हो गया बस का इंतज़ार करते … लेकिन बस नहीं आई. इसीलिए दिमाग ख़राब हो रहा है.
सुमित बोला- यार अभी तो 1:30 घंटे बाद बस आयेगी.
मैंने अचंभित होकर कहा- क्या सच बताओ यार … फिर तो बहुत लेट हो जायेगा यार.
सुमित बोला- टेंशन न लो मैं तुम्हें घर छोड़ दूंगा आओ बैठो.
मैंने कहा- रहने दो तुम्हारी बाइक पर वैसे ही जगह नहीं है. मैं कहाँ बैठूंगी.

सुमित मोटरसाइकिल से उतरा और अपने दोस्तों को जो पीछे बैठे थे उनसे बोला- अरे यार वो तो उतर जायेंगे तुम हां तो बोलो पहले. मैंने “हां” कह दी.
उसके बाद सुमित ने अपने दोस्तों को बाइक से गरियाते हुए कहा- उतरो बेहनचोदो!
और उसके दोस्त बेचारे उतर गए और कहने लगे- अच्छा बच्चू … लड़की मिली तो दोस्तों को भूल गए.

सुमित बोला- भक्क साले … मदद नाम की भी कोई चीज़ होती है.
और मैंने कहा- सही कहा सुमित ने!
मैं उसी बाइक पर बैठ गयी.

उसने एकदम से बाइक चलायी और मैं पीछे की तरफ धक्का लगा तभी मैंने उसकी कमर पकड़ ली और गिरते गिरते बच गयी. उसके बाद मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और उससे चिपक कर बैठ गयी. वो भी एक दम मदहोशी से गाडी चला रहा था बहुत तेज़ी से चला रहा था.

उसने मेरे बारे में सब पूछा कि ‘कहाँ से हो और क्या कर रही हो?’
मैंने सब बता दिया.
फिर मैंने उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो 29 साल का है और ठेकेदारी का काम करता है. उसका अब इस दुनिया में कोई नहीं है. इसीलिए या तो काम में व्यस्त रहता है या घूमता रहता है.

बात करते करते मैं घर के पास आ गयी थी और मैंने उसे घर से दूर ही रोक दिया और कहा- घर तक मत चलो, नहीं लोग गलत समझेंगे.
सुमित बोला- जैसा तुम कहो.
और उसने गाड़ी रोक दी.

मैं घर जाने लगी तभी वो बोला- कल सुबह कैसे जाओगी?
मैंने कहा- बस से जाऊँगी.
तो उसने कहा- ये बताओ अब हम फ्रेंड हैं न?
मैंने कहा- हां यार, ये भी कोई पूछने वाली बात है?

सुमित ने कहा- तो सुमित सिंह के होते हुए उसकी दोस्त बस से जाएगी मेरी क्या इज्ज़त रह जाएगी.
मैंने कहा- तो क्या करें, बताओ?
सुमित बोला- कुछ नहीं, बस अपना नंबर दो मुझे और सुबह कॉल कर देना. मैं तुम्हें यहीं मिलूँगा सुबह.
मैंने कहा- सच में, थैंक्स यार!
और उसको गले लगा लिया.

सुमित ने भी खूब जोर से मुझे गले लगा लिया. लगता है पहली बार किसी लड़की के गले लग रहा था. फिर उसके बाद उसका लंड खड़ा हो गया हो जो मुझे महसूस होने लगा.
हम दोनों अलग हो गए. फिर मैं अपने घर के लिए निकल गयी.

घर पहुँचने पर बुआ के साथ में बिजी हो गयी और शाम को खाना खाने के बाद करीब 10 बजे छत पर आ गयी.
उसी समय अनिल भी छत पर आ गया.

अनिल बोला- और पल्लवी, कॉलेज का पहला दिन कैसा गया?
मैंने कहा- न ज्यादा अच्छा न बेकार, तुम बताओ बीवी वापस आई या नहीं?
अनिल बोला- वो मादरचोद आना होगा तो आयेगी, मुझे उसकी जरूरत नहीं.

मैंने कहा- अच्छा मूड ऑफ न करो तुम अपना. ये बताओ मुझे तुम्हारा जिम ज्वाइन करना है चार्जेज क्या हैं?
अनिल बोला- अरे तुम्हें भी जिम ज्वाइन करना है क्या?
मैंने कहा- हां क्यूँ …. नहीं कर सकती क्या?
अनिल बोला- नहीं यार, ऐसी बात नहीं, चार्जेज वाली लिस्ट नीचे रखी है, आओ मैं तुम्हें दिखता हूँ.

मैं दीवार लांघ कर उसके घर चली गयी और नीचे उसने कमरे में जाकर उसने मुझे बेड पर बिठा दिया और लिस्ट देख कर कहा- 5000 रुपया प्रतिमाह.
तो मैंने कहा- यार, इतना तो मैं नहीं दे पाऊँगी.

मैंने वही शॉर्ट्स और टॉप पहना था जो उस दिन पहना था. अनिल मेरी जाँघों पे हाथ फेर रहा था. उसने कहा- अरे यार, ये तो दूसरे के लिए है. तुम्हारे लिये तो स्पेशल डिस्काउंट है.
ये बोलते हुए वो मेरे साथ बेड पर ही लेट गया और मेरे टॉप के अन्दर हाथ डालने लगा.

मुझे भी मज़ा आ रहा था तो मैंने कुछ कहा नहीं.
मैं बोली- अच्छा कितना डिस्काउंट दोगे मुझे?
अब उसका हाथ मेरे टॉप के अन्दर बूब्स तक पहुँच गया और मेरे निप्प्लेस को अपनी दो उंगली से दबाने लगा.

मैंने कहा- मुझे तो 100% डिस्काउंट चाहिए.
अनिल बोला- जैसा तुम कहो जानेमन!
और मुझे किस करने लगा.

मैं भी बहुत चुदासी थी. मैं उसके ऊपर चढ़ गयी और किस करने लगी. वो मेरे होंठ को ऐसे चूस रहा था जैसे उन्हें खा जायेगा.

उसका जोश देख कर मेरा जोश और भी बढ़ गया और उसे किस करते हुए उसके होंठ को अपने दांतों से काट लिया.
वो गुस्सा गया और बोला- रुक मादरचोद … आज तुझे ऐसा चोदूँगा कि जिंदगी भर याद रहेगा.

उसने मुझे पकड़े हुए उठाया और बेड पर पटक दिया और खुद नंगा हो गया. उसी बीच मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.

अनिल मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे बूब्स को चूसने लगा. और उसके बाद तो उसने मेरे निप्पल को इतनी जोर से काटा कि मेरी चीख निकल गयी.
मगर वो रुकने वाला था नहीं. लगता है उसे निप्पल से कुछ ज्यादा ही लगाव था. उसने करीब 20 मिनट तक मेरे निप्पल को काटा और चूसा.

उसके बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटा कर खुद उसके ऊपर आ गयी और उसके निप्पलों को मैंने चूसना शुरू किया. मैंने भी उसके निप्पलों को खूब काटा और उसके सिक्स पैक को अपनी जीभ से चाटा और फिर उसके लंड को चूसना शुरू किया.

मैं बता दूं उसका लंड 7 इंच का था, मेरे मुँह के अन्दर जा ही नहीं पा रहा था. पर किसी तरह मैंने उसे चूसना शुरू किया.

करीब 10 मिनट चूसने के बाद उसने फिर से मुझे उठाया और बेड पर पटक दिया. उसने मेरी टांगों को पकड़ के उन्हें फैलाया और फिर अपनी तरफ खींचा और अपना लंड मेरी चूत पर रखा और मुझसे पूछा- बता पहले कभी चुदी हो या सील पैक हो?
मैंने कहा- नहीं, अभी मैं वर्जिन हूँ.

मैं इतना बोली ही थी कि हरामी ने एकदम से पूरा लंड मेरे चूत में डाल दिया.
मैंने कहा- अरे मादरचोद, आराम से डालते.
अनिल बोला- मुझे तेरा ये दिन यादगार बनाना है.

मेरी चूत की सील टूट चुकी थी और उसके बेड पर उसका निशान भी लग चुका था.

उसके बाद अनिल मेरे ऊपर चढ़ मुझे बहुत चोदा और कुछ देर दर्द होने के बाद मुझे भी मज़ा आ रहा था.

5 मिनट वैसे ही चोदने के बाद उसने मुझे उठा लिया और खड़े होकर मुझे अपने ऊपर बिठा कर चोदने लगा. करीब 5 मिनट बाद वैसे ही चोदने के बाद उसने मुझे बेड पर उल्टा लेटा दिया और मेरे ऊपर पीछे से लेट गया.

उसके बाद उसने पीछे से मेरी चूत में लंड डालकर मुझे खूब चोदा. इसी बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी.

अब उसने मुझे उठाया और उठा कर डाइनिंग रूम में ले जाकर डाइनिंग टेबल पर बिठा दिया. उसने मेरी चूत में फिर से लंड डाल दिया और खूब जोर जोर से चोदने लगा.

फिर करीब 10 मिनट बाद वैसे ही चोदने के बाद वो भी झड़ गया और अपना पूरा पानी मेरी चूत के अन्दर ही डाल दिया.

उसके बाद हम दोनों किस करने लगे और कुछ देर किस करने के बाद मैंने अपने कपड़े पहने और अपने कमरे में आ गयी.

अपने कमरे में आने के बाद मैं सोने ही जा रही थी कि तभी मेरे मोबाइल पर सुमित का मेसेज आया.
उस मेसेज में क्या लिखा था और उसके बाद क्या क्या मस्ती की मैंने!

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बॉयफ्रेंड से पहली चुदाई का मज़ा

एक दिन बस में मेरी दोस्ती एक खूबसूरत लड़के से हुई. मैं उससे चुदाई करवाने की सोचने लगी पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता था. तो मैंने अपनी पहली चुदाई का मज़ा कैसे लिया?

दोस्तो, मेरा नाम प्रियल है और मेरी उम्र 19 साल है. मैं अन्तर्वासना की नियमित पाठिका हूं … और आज आपके सामने अपनी कहानी कहना चाहती हूं. यह कहानी एक सच्ची कहानी है जो मेरी आपबीती भी है. इस कहानी में आपको बताऊंगी के कैसे हमने सेक्स का मज़ा लिया.

बात 2 महीने पहले की है. मैं बस से जा रही थी. तभी बस रुकी और एक हॉट लड़का चढ़ने लगा. उसे देखकर मेरे मन में हलचल होने लगी. मैं उससे अपनी चूत चुदवाने की सोचने लगी. इसी के चलते मेरा हाथ कब मेरी चूत के ऊपर चला गया मुझे पता नहीं चला.

वैसे मैं एक बात बता दूं … मुझे पोर्न देखने शौक है और मैं पोर्न देखते हुए अपनी चूत को सहला लेती हूं. मैंने कभी लंड नहीं लिया. मैं चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूं पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता है.

अचानक बस रुक गई और मेरे सीट के बगल में जो औरत बैठी थी, उतरने लगी. वो लड़का मेरे बगल में बैठ गया. उसके स्पर्श से मैं सिहर उठी … मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी.

थोड़ी देर में वो मुझसे बात करने लगा. उसने अपना नाम पवन बताया. वो भी वहीं जा रहा था जहां मैं जा रही थी. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे.
सफर के दौरान हमने बहुत बातें की. फिर मेरा स्टेशन आ गया और मुझे उतारना पड़ा. पर पवन ख्याल मेरे दिमाग से जा नहीं रहा था. रात भर उसके बारे ही सोच रही थी.

फिर 1 महीने बाद एक दिन मैं बाज़ार गई थी. तभी पीछे से किसी ने आवाज़ दी. मैंने पीछे मुड़ के देखा तो वो पवन था.
मैं बहुत खुश हुई. फिर हमने साथ में गुपचुप खाया.

उसने मुझसे नंबर मांगा तो मैंने बिना रुके अपना नंबर दिया. उस दिन से हम लोग रोज बात करते. कभी कभी रात के 2-3 बज जाते. इसी तरह 1 महीना बीत गया. मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था क्योंकि मुझे उससे प्यार जो हो गया था.

फिर हमने एक दिन मिलने की सोची. मैं बहुत खुश हुई. मैने अपनी चूचों पर क्रीम से मालिश की और अपनी चूत के बाल साफ किये क्योंकि मुझे पता था पवन मुझे चोदना चाहता है. मैंने कई बार उसके लंड को मेरे सामने खड़ा होते हुए देखा है जिसे वो छुपाते हुए बहुत सेक्सी लगता है.

उसने मुझे रास्ते से पिक किया और बोला- कहां जाना है?
मैंने कहा- जहां आपकी मर्ज़ी!
फिर हम उसके दोस्त के घर गए जहां पहले से ही तैयारी पूरी हो चुकी थी.

उसने मुझे जूस दिया और स्वयं भी पीने लगा. बीच बीच में वो मुझे छू रहा था. मेरी तो चूत गीली हो रही थी.

तभी उसने जानबूझकर अपना जूस मेरे कपड़ों पर गिरा दिया. मैं उसके इरादे समझ रही थी. फिर मैं वॉशरूम चली गई. वो मेरे पीछे पीछे गया.
और जैसे ही मैं पलटी उसने मुझे जोर से किस कर दिया. मैंने उसे छुड़ाने का नाटक किया … फिर मैं खुद उसका साथ देने लगी.

उसके हाथ मेरे चूचे पर आ गए जिससे मेरी सिसकारियां निकल गई- उंह … आह … अय!

लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने पागलों की तरह किस किया. पवन का एक हाथ मेरे चूचे पर और दूसरा मेरी चूत के ऊपर था. मैं गर्म हो रही थी.
फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पे लेकर आया. उसने अपने कपड़े उतार दिए. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था.

उसका 8 इंच का लंड पूरा तन गया था. मैंने पहली बार किसी का लंड देखा था, वो भी इतना बड़ा!

फिर वो मेरे कपड़े निकालने लगा. उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. अब मैं भी उसके सामने नंगी थी. वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी. उसने अपना हाथ मेरे चूचों पर रखा और मसलने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी.

15 मिनट चूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह के सामने खड़ा कर दिया और चूसने को बोला.
मैंने मना कर दिया … तो उसने ज़िद की. मैंने उसका सुपारा मुंह के अंदर लिया. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैंने निकाल दिया.
वो कुछ न बोला और मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब जैसा मैंने पहले भी बताया था कि मुझे सेक्स से बहुत डर लगता है, तो मेरी सिसकारियां डर में बदल गई. मुझे पसीना आने लगा.
और जब वो अपने लंड को हिलाने लगा तो डर से मेरी पूरी तरह फट चुकी थी.

उसने अपना सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और हल्का सा धक्का लगाया. मेरी तो दर्द से हालात खराब हो गई.
मैंने जैसे तैसे करके उसे हटाया और कपड़े पहनने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगा- आई लवयू प्रियल … प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ!
मैंने सोचा कि अगर मैंने हां कर दी तो पवन मुझे चोदे बिना रुकेगा नहीं. और मेरी तो हालत खराब थी … मैंने उसे ना चाहते हुए भी मना कर दिया.
मैं वहां से सीधे अपने घर आ गई और उसके बारे में सोच कर रोने लगी.

दोस्तो, भले ही मैं उस दिन भाग के आ गई थी पर मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी. साथ ही मेरी चुदास भी बढ़ती जा रही थी. मैं मन ही मन अपने आप को गाली दे रही थी कि क्या जरूरत थी वहां से जाने की.
और ऊपर से पवन का वो चेहरा मेरी नज़रों के सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. उससे भी ज्यादा मुझे उसके लंड की याद सता रही थी.
मुझे रात भर नींद नहीं आई और मैं सिर्फ करवटें बदलते रह गई.

फिर जैसे तैसे रात कटी. मैंने सुबह उठ के देखा तो पवन का मेसेज आया था. उसमें लिखा था- आई एम् सॉरी प्रियल … प्लीज मुझसे बात करो … आई लव यू यार … मैं प्रॉमिस करता हूं कि आज के बाद आपको टच भी नहीं करूंगा … पर प्लीज़ मुझसे बात करो.

मेसेज पढ़ के मेरी आँखें भर आई … मन करने लगा कि अभी भाग के उसके पास जाऊं और गले से लिपट जाऊं.
पर मैं किस मुंह से उसके पास जाऊं, ये समझ नहीं आ रहा था.

एक दिन मैंने निश्चय कर ही लिया कि आज उसे प्रपोज कर के ही रहूंगी और अपनी चूत चुदवा कर रहूंगी.
मैं उससे मिलने चली गई. मैंने उसे एक होटल में बुलाया.

जैसे ही उसने मुझे देखा … बस देखता ही रह गया.
उस दिन मैंने टाइट जीन्स पहन रखी थी और सफ़ेद टॉप वो भी नाभि के ऊपर से … जिसमें मेरे चूचे साफ दिख रहे थे.

मुझे देख के उसका लन्ड आकार लेने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश कर रहा था.

फिर मैंने उसके पास जाकर बोला- क्या देख रहे?
वो थोड़ा शरमा गया और मुझे जोर से गले लगा लिया.

जैसे ही उसने मुझे गले लगाया … उसका लन्ड मेरी चूत से टकराने लगा. मेरी तो जान निकल गई … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
और शायद उसे भी ये समझ आ गया था. उसने अपना हाथ मेरे गान्ड पर रख दिया. मेरी सिसकारियां छूटने को हुई जिसे मैंने जैसे तैसे करके रोका.

फिर हम दोनों अन्दर गये. हम दोनों ने वहां खाना खाया. उसके इरादे ठीक नहीं लग रहे थे. मैं फिर से नर्वस हो रही थी. तभी उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. मैं एकदम सकपका गई. मेरा रोम-रोम तड़प उठा और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.

उसके एक मात्र स्पर्श से मैं गर्म हो चुकी थी. फिर उसने मुझसे प्यार भरी बातें की. मैंने उससे ऊपर कमरे में चलने को कहा. मुझे ये कहते हुए थोड़ा अटपटा लग रहा था पर मैं और कंट्रोल नहीं कर सकती थी.
उसने कहा- आप आगे चलो.
मैं आगे हो गई.

जब हम थोड़ी दूर चले गए, तब मैं जानबूझकर फिसल गई और पैर में मोच आने की नाटक करने लगी. उसने शायद ये भांप लिया था … उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और रूम में ले आया. उसने मुझे इस तरह उठाया था जिससे उसका लन्ड मेरी गान्ड को टच कर रहा था.
मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी.

मुझे बिस्तर में लिटा के वो जाने लगा.
मैं उसके इस व्यवहार से हैरान थी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. वो छुड़ाने लगा.

पर आज मैं पूरी तैयारी करके आई थी ऐसे बिना चुदवाये उसे कैसे जाने देती.

मैंने उसके हाथों को अपने चूचों पर रखा. वो मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखने लगा. मैं बिना समय गंवाए उसे किस करने लगी. मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया था.
थोड़ी देर तक तो वो मुझसे छूटने नाटक करने लगा … फिर खुद मेरा साथ देने लगा.

इसी तरह लगभग 10 मिनट के लंबी धुएँदार किस करने बाद उसने अचानक से मेरा हाथ छुड़ा लिया और मुझसे दूर हो गया.
मैं वापस उसे किस करने की कोशिश करने लगी. पर आज ना जाने उसे क्या हो गया था … उसने एक बार मुझे देखा और बिना कुछ बोले चला गया.
उसकी आँखों में कुछ नमी थी.

मैं पूरी उदास हो गई. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं उसकी खामोशी समझ नहीं पा रही थी कि उसने ऐसा क्यों किया. यह सोच सोच के मैं पागल हो रही थी.
मैं वहीं बिस्तर पे बैठ गई … पर रो रो के मेरा बुरा हाल हो गया था.
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है. मैं अब क्या करूं … सब मेरे हाथ से छूट रहा था.

मैंने पवन के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि उसके घर वालों ने उसे मुझसे दूर रहने के लिए कहा है क्योंकि मेरा स्टेटस और उसका स्टेटस अलग अलग है.
मैं ऊंचे खानदान से हूं और वो थोड़ा गरीब है. ऊपर से हम दोनों अलग अलग जाति के हैं इसलिए उसके घरवालों ने उसे मना किया है.

पर मुझे और मेरी फैमिली को इससे कोई फर्क नही पड़ता … उन्हें तो बस एक पढ़ा लिखा समझदार दामाद चाहिए जो उनकी बेटी को खुश रख सके. और मुझे तो पवन ही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ पति लगता है.

ये बात जानने के बाद मैं सीधा पवन के घर गई. पहले तो वो लोग चौंक गए. पर फिर उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.
मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने उनसे सीधी बात कह दी कि मैं उनके बेटे से प्यार करती हूं और उससे शादी करना चाहती हूं.

इस पर वे हैरान थे. उन्होंने अपनी मुश्किलें बताई.
मैंने उन्हें समझाया … अंत में वो लोग मान गए.

अब बारी पवन की थी … मैंने उसे रात में सोने के लिए अपने घर बुलाया क्योंकि मेरे घरवाले बाहर किसी की शादी में गए थे और दोपहर से पहले आने वाले नहीं थे.
मैंने सोच लिया था कि आज तो बात बनानी ही होगी.

पहले तो उसने मना किया फिर मेरे ज़ोर देने पर मान गया.
वो करीब 9 बजे के आसपास आया. मैं उसी का इंतज़ार कर रही थी.

फिर हमने खाना खाया.
उसने कहा- मेरा कमरा कहां है … मुझे सोना है नींद आ रही है. मेरा मूड खराब हो गया मैं उसे अपने कमरे में ले गई.

मैं- ये मेरा कमरा है और तुम मेरे साथ मेरे बेड पर सोने वाले हो.
पवन- नहीं, आप ये क्या कह रही … मैं ये नहीं कर सकता.
मैं- क्यों? क्या समस्या है इसमें?

पवन- ये ग़लत है. मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगा, आप यहां सो जाइए.
मैं- इसमें क्या ग़लत है बस सोने को बोल रही हूँ … मुझे चोदने को नहीं. तुम इतना रिएक्ट क्यों कर रहे हो?
पवन- वो … म् … म … म … मैं … व … वो!

मैं- तुम कह क्यों नहीं देते कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो … ऐसे चुप रहने से क्या होगा?
पवन- न … न … नहीं … अ … आप गलत समझ रही हैं.
मैं- अच्छा … तो तुम्हारी जबान क्यों लड़खड़ा रही है … बताओगे मुझे?
पवन- वो … म … मैं … अम … मैं जा रहा बाहर सोने आप भी सो जाओ.
मैं- नहीं … रुको.

वो जाने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
इससे पहले के वो मेरा हाथ छुड़ा पाता … मैंने उसे किस कर लिया वो मेरी पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश करता रहा पर मैं लगी रही. 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उसको छोड़ा.
वो सिर झुकाए हुए था.

मैंने उसका एक हाथ अपने बूब्स पर और दूसरा अपनी गांड पर रख दिया. वो कुछ बोल पाता इससे पहले मैंने उसे दोबारा किस करना चालू किया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी गांड पर सहलाना शुरु किया. मैं खुश हो गई मेरा काम जो बन गया था.

वो मुझे ज़ोर से किस करने लगा, मैं भी उसका साथ दे रही थी. फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और एक एक करके मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए. उसने मेरी चूत को सहलाना शुरु किया. मैं मदहोश होने लगी. मेरी मुंह से मादक सिसकारियां निकलने लगी- आह उम अह.
मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी इसलिए हमें बहुत मज़ा आ रहा था.

उसके बाद उसने अपनी जीभ मेरे चूत में डाला … वो अहसास मैं बयां नहीं कर सकती … मुझे जन्नत का सुख मिल रहा था.
उसने मुझे जीभ से चोदना जारी रखा. धीरे धीरे हम 69 की पोजिशन में आ गए. मैं पहली बार लंड चूस रही थी वो भी इतना बड़ा लौड़ा … लगभग 7-8 इंच का तो होगा ही!
मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मेरी जिंदगी का पहला अहसास था.

धीरे धीरे मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं उसके मुंह में ही झड़ गई. उसने मेरा सारा पानी पी लिया. मुझे ऐसी खुशी कभी नहीं मिली जो उस समय मिल रही थी.

अब बारी मेरी चूत की चुदाई की थी. उसने अपना लन्ड मेरी चूत पर रखा और रगड़ने लगा.
मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी. मैंने उससे कहा- अब देर मत करो पवन … जल्दी से डाल दो … मेरी जान निकल रही है … अब और मत तड़पा … अब बस चोद दे मुझे … बहुत दिन बाद मिला है.

उसने देर न करते हुए अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर से धक्का मारा. उसका आधा लंड मेरी चूत में चला गया.
मेरी तो चीख निकल गई. मुझे लगा कोई गर्म रॉड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया है. दर्द से मेरा हाल बेहाल हो गया.

फिर उसने अपना हाथ मेरे चूचियों पर रखा और मुझे किस करने लगा. जब मेरा दर्द कम हुआ तब उसने दोबारा धक्का मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना लन्ड आगे पीछे करना चालू किया.
फिर क्या … हम दोनों को जन्नत का सुख मिलने लगा.
ये उसका भी पहली बार ही था … वो बड़ी मस्ती से चुदाई कर रहा था.

पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था ‘आह … अम्म … हम … अह … अय … आह!’

वो धड़ाधड़ अपना लन्ड मेरी चूत में पेल रहा था. पूरा बेड हम दोनों के चुदाई से हिलने लगा.

इतनी धकापेल चुदाई के बाद मेरा होने वाला था. उसने ये भांप लिया और वो ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा. थोड़ी ही देर बाद मेरा पानी निकल गया जिसे उसने चाट कर साफ कर दिया.

फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लन्ड डाल दिया. मेरी आह निकल गई.

उसने गपागप लंड डालना शुरू किया. मेरी चूत गीली हो चुकी थी जिससे कुछ फच फच आवाजें भी आ रही थी.
मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी- चोदो मुझे पवन … और ज़ोर से चोदो … जान निकाल दे मेरी … आह … फॅक मी बेबी … और ज़ोर से चोदो … आह … अम्म … अह … उन्ह.

लगभग 15 मिनट के ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो झड़ने वाला था उसने मुझसे पूछा- कहां निकालूं?
मैंने कहा- चूत में ही निकाल दो.
क्योंकि मैं उसे फील करना चाहती थी.

8-10 शॉट लगाने के बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गया.

उसका गर्मागर्म वीर्य पाकर मेरी चूत खिल उठी थी. वो एहसास अभी भी मेरे दिमाग से निकल नहीं पा रहा … वो मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

उसने मुझे आई लव यू कहा और मेरा धन्यवाद करने लगा.
मैंने भी उसे आई लव यू टू कहा और इस अनोखे अहसास के लिए धन्यवाद दिया.
हम दोनों के चेहरे पर खुशी और सुकून झलक रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका लन्ड फिर से खड़ा होने लगा. इस तरह हमने उस रात 5 बार चुदाई की कभी बिस्तर में तो कभी सोफे पे.
हमने अलग अलग पोजिशन ट्राई किया और हमारी चुदाई रात भर चलती रही.

दोपहर में जाने से पहले उसने मुझे एक बार और चोदा.
इस तरह से हम दोनों ने चुदाई का पूरा पूरा मज़ा लिया.

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मेरा लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर

मैं अपनी पड़ोसन को चोद चुका था और खूब चोदता था. अब मेरी नजर उसकी बड़ी बेटी पर थी लेकिन कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था. फिर कैसे मैंने पड़ोसन की बेटियों को चोदा?

अपनी पड़ोसन की चुदाई करते हुए मुझे दो साल हो चुके थे.

तभी एक दिन रेखा ने बताया कि दिशा का ग्रेजुएशन हो गया है और आगे की पढ़ाई के लिए बंगलौर के क्राइस्ट कॉलेज से कॉल आई है. लेकिन मीतेश इंटरव्यू के लिए दिशा को भेजने को राजी नहीं है. मीतेश का कहना है कि इंटरव्यू क्लीयर नहीं हो पाया तो बीस हजार रुपये बिना मतलब के खर्च हो जायेंगे.
मैंने कहा- क्राइस्ट कॉलेज में मेरा कुछ जुगाड़ है तुम अगर चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ.

मीतेश से बात करने के बाद रेखा ने बताया कि मीतेश कह रहा था, अगर कपूर साहब जा रहे हैं तो तुम साथ जाकर क्या करोगी.
अंततः मैं और दिशा बंगलौर गये, वहां उसने इंटरव्यू क्लीयर कर लिया. उस दिन शुक्रवार था, सोमवार को एडमिशन की प्रक्रिया होनी थी इसलिए हमें दो दिन वहीं रुकना था. इंटरव्यू क्लीयर होने की खबर सुनकर रेखा बहुत खुश हुई.

शनिवार और रविवार ये दो दिन हमें घूम फिर कर गुजारने थे. शनिवार को घूमने के दौरान मैं दिशा को चोदने का प्रोग्राम बनाता रहा. रात का खाना खाकर हम लोग होटल के कमरे में लौटे तो मैं पलंग पर पसर गया और दिशा सोफे पर फैल गई. अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप चेक करते हुए दिशा बोली- अंकल, आपके सहयोग से मेरा एडमिशन हो रहा है, आपका एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी.

“हम अहसान को याद रखने या भूलने पर यकीन नहीं करते, हाथ के हाथ हिसाब करते हैं. तुमको अगर अहसान उतारना हो तो अभी उतार लो, मौका भी है और दस्तूर भी.”
“मैं आपका अहसान कैसे उतार सकती हूँ? आप आदेश करें?”
“कैसे उतारना है? पूरी रात पड़ी है, जैसे चाहो उतार लो.” इतना कहते हुए मैंने एक कुटिल मुस्कान दी.

मेरी कुटिल मुस्कान के जवाब में दिशा मुस्कुराते हुए बोली:
पापा, अगर आपको इसमें खुशी मिले तो मैं हाजिर हूँ. मेरे मुंह से पापा सुनकर आप हैरान न हों. पिछले दो साल से मैं और रिशा आपको पापा कहकर ही सम्बोधित करते हैं. हुआ यूं था कि एक दिन मम्मी के मोबाइल में मैंने आपके मैसेज देख लिये थे और मम्मी पर नजर रखे हुए थी. तभी एक रात मम्मी और आपकी बातचीत सुनी. आपने सुबह 11 बजे आने को कहा था.

अगले दिन डैडी दुकान चले गए और रिशा अपने स्कूल. इसके बाद सुबह 10 बजे मम्मी किचन में व्यस्त थी, मम्मी को बॉय कहकर मैं कॉलेज के लिए निकली. वास्तविकता यह थी कि मैं कॉलेज नहीं गई और दबे पांव ऊपर अपने कमरे में चली गई.

किचन का काम निपटा कर मम्मी नहाने चली गई. तभी आप आ गये, मम्मी तौलिया लपेटकर बाथरूम से निकली और दरवाजा खोला. आपने मम्मी को वहीं लॉबी में ही पकड़ लिया और चूमने लगे. मैं छिपकर सब देख रही थी. आप मम्मी को लेकर बेडरूम में चले गए. काफी देर बाद आप बेडरूम से निकले और बाथरूम में गये. उस समय आपके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.

यह सब देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. खुशी इसलिये हुई क्योंकि बीस साल मैं अपनी मां को तिल तिल मरते हुए देख रही थी, डैडी मम्मी की बिल्कुल केयर नहीं करते थे. मुझे खुशी थी कि मम्मी ने अपनी खुशी आपमें ढूंढ़ ली थी.

मैंने और रिशा ने मम्मी से बात की और उसके इस फैसले के साथ खड़े होते हुए आपको पापा मान लिया.

दिशा की बातें सुनकर मैं सन्न रह गया और उसे चोदने का विचार अपने दिमाग से निकाल दिया. तभी दिशा बेड पर आ गई और मुझसे चिपक कर बोली- पापा, मेरा एडमिशन कराने में सहयोग करके आपने जो अहसान किया है, उससे बहुत बड़ा अहसान आप मेरी मां को खुशी देकर कर चुके हैं. आपकी बांहों में रात गुजार कर मैं आप पर कोई उपकार नहीं करूंगी बल्कि आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी.

इतना कहकर दिशा ने अटैची से अपने कपड़े निकाले और बाथरूम चली गई. कुछ देर बाद दिशा बाथरूम से निकली. छोटी सी नेकर और टॉप पहने दिशा को देखकर मेरा दिमाग झन्ना गया.

करीब 21 साल की दिशा प्रीति जिंटा की कॉपी लग रही थी. नेकर से बाहर निकली उसकी जांघें मेरा लण्ड टनटना रही थीं. मैं यह याद भी नहीं करना चाहता था कि मेरी उम्र 62 साल है और दिशा की सिर्फ 21 साल.

मैं भी बाथरूम गया और शॉवर लेकर सिर्फ लोअर पहनकर आ गया.

दिशा अपने मोबाइल में मशगूल थी. दिशा के बगल में बैठ कर मैंने उसकी जांघों पर उंगलियां फेरीं तो दिशा ने मोबाइल रख दिया और ‘आई लव यू पापा’ कहकर मेरे सीने से लग गई.

मैंने दिशा का टॉप उतार दिया और संतरे के आकार की उसकी चूचियों से खेलने लगा. दिशा की चूची मुंह में लेकर मैं धीरे धीरे चूसने लगा. दिशा की नेकर का हूक खोलकर मैंने उसकी नेकर घुटनों तक खिसका दी और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

दिशा के होंठों पर होंठ रखकर मैंने दिशा को अपनी ओर खींचा तो अपनी नेकर को टांगों से अलग करते हुए दिशा मुझसे लिपट गई और मेरे बदन पर हाथ फेरने लगी. दिशा का हाथ मैंने अपने लण्ड पर रखा तो मेरा लण्ड अपनी मुठ्ठी में दबोच कर दिशा बोली- आई लव यू, पापा. मुझमें समा जाओ, पापा.

मैंने अपना लोअर उतार दिया और 69 की पोजीशन में आकर दिशा की चूत चाटने लगा. दिशा मेरे लण्ड का सुपारा चाटते हुए सॉफ्टी के मजे ले रही थी.

तभी मैंने दिशा को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर रख दिया. दिशा ने मेरे लण्ड का सुपारा सेट किया और उस पर बैठ गई. दिशा की कमर पकड़ कर मैंने उसे नीचे की ओर दबाया तो टप्प की आवाज हुई और मेरे लण्ड के सुपारे ने दिशा की चूत में जगह बना ली. दिशा ने और दबाव डाला तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया.

अपना लण्ड दिशा की चूत में बनाये रखते हुए हम पलट गये.
अब दिशा नीचे थी और मैं ऊपर. अपना लण्ड दिशा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने जोर से धक्का मारा तो दिशा की चूत की झिल्ली फट गई. चूत की झिल्ली फाड़ते हुए मेरा लण्ड दिशा की चूत की गहराई में उतर गया.

लण्ड को दिशा की चूत में फंसा कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. चूचियां चूसने से मेरे लण्ड में जोश बढ़ने लगा, मैंने चुदाई की तो दिशा की चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत गीली होने से मुझे आराम हो गया.

जब लण्ड को अन्दर बाहर करते काफी समय हो गया तो मैंने दिशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. चोदते चोदते दिशा की चूत का भुर्ता बन गया था लेकिन मेरा लण्ड पानी छोड़ने को तैयार नहीं था. दिशा की चूचियों को बेरहमी से मसलते हुए मैंने लाल कर दिया था. मेरे लण्ड का सुपारा फूलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है. पिचकारी छूटने पर मैं दिशा से लिपट गया.

उस रात मैंने दिशा को दो बार चोदा. अगले दिन रविवार था. शिलाजीत के कैप्सूल और वियाग्रा की गोली खाकर दिशा की जमकर चुदाई की. सोमवार को दिशा का एडमिशन करा कर उसको हॉस्टल में शिफ्ट करके मैं वापस लौट आया.

बंगलौर से वापस लौटकर अगले दिन मैं रेखा के घर गया तो रेखा ने बाहें फैला कर मेरा स्वागत किया.

दिशा की चुदाई का आनन्द लेने के बाद भी रेखा को चोदने का अलग ही मजा था. 100 किलो से भी अधिक वजन वाली भारी भरकम शरीर की मल्लिका रेखा जब नंगी होती तो हाथी का बच्चा लगती.

कई दिन बाद चुदने के कारण रेखा ने उछल उछल कर चुदवाया. रेखा को चोदने के बाद मेरे कहने पर रेखा चाय बना लाई. चाय की चुस्कियां लेते हुए रेखा ने बताया कि परसों रिशा का जन्मदिन है, वो 19 साल की हो जायेगी.

“तो चलो परसों गोल्डेन एप्पल में पार्टी करते हैं.”
“नहीं, घर पर ही केक काटेंगे.”

मेरे काफी जिद करने पर भी रेखा होटल में पार्टी करने पर राजी नहीं हुई. मेरे बहुत बार कहने पर रेखा इस बात पर राजी हुई कि आप रिशा को घुमाने ले जाना.

रिशा के जन्मदिन पर मैं और रिशा मॉल गये, घूमे फिरे, खाया पिया. मैंने रिशा को एक प्यारी सी ड्रेस भी खरीद दी. मॉल से लौटते समय मैंने रिशा से पूछा- कल तो तुम्हारा कॉलेज होगा?
रिशा के हाँ कहने पर मैंने उससे कहा- तुम्हारी आज की पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को है लेकिन डैडी को नहीं है. अब कल मेरी तरफ से फिर तुम्हारी पार्टी है और कल होने वाली पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को भी नहीं होनी चाहिये. यह एकदम सीक्रेट पार्टी होगी, बस हमारी और तुम्हारी. कल जब तुम कॉलेज के लिए निकलोगी तो मैं तुम्हें पिक कर लूंगा.

अगले दिन सुबह 9 बजे रिशा का फोन आया कि मैं घर से निकल चुकी हूँ.
मैंने जवाब दिया कि मैं लिबर्टी शोरूम के पास तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ.

कुछ ही देर में रिशा आई और मेरी कार में बैठ गई. मैंने कार ताज होटल की तरफ मोड़ दी जहां एक कमरा मैंने बुक करा रखा था.

होटल के कमरे में पहुंच कर मैंने केक ऑर्डर किया. करीब आधा घंटा तक इधर उधर की बातें करने में बीत गया, फिर केक आ गया.

रिशा का हाथ पकड़ कर मैंने केक कटवाया. मैंने रिशा को केक खिलाया और उसने मुझे. केक से क्रीम लेकर मैंने रिशा के गालों पर लगा दी. रिशा ने मिरर में खुद को देखा और हंस पड़ी. अपना मुंह साफ करने के लिए रिशा ने टॉवल उठाया तो मैंने उसे रोकते हुए कहा- बहुत महंगा केक है, इसे टॉवल से पोंछ कर बरबाद न करो, लाओ मैं चाट लेता हूँ.

रिशा को आगोश में लेकर मैं उसके गालों और गले पर लगा केक चाटने लगा. रिशा के गाल और गला साफ हो गये तो मैंने फिर से केक लगा दिया और चाटने लगा. जब रिशा के गले पर मैं अपनी जीभ फेरता तो वो गनगना जाती.

मैंने रिशा से कहा- मैंने तुम्हें कई बार गिफ्ट दिये हैं लेकिन तुमने कभी रिटर्न गिफ्ट नहीं दिया?
“मेरे पास ऐसा कुछ होता ही नहीं था कि मैं आपको दे सकूं!”
“अब तो है और तुम चाहो तो दे सकती हो.”
“मेरे पास ऐसा क्या है, जो मैं आपको गिफ्ट कर सकूं?”

तुम 19 साल की हो गई हो, बालिग हो. बालिग होने पर इस देश का कानून तुम्हें तमाम अधिकार देता है. एक अधिकार तुम्हारे पास है, अपना शरीर उस व्यक्ति को सौंपने का जिसे तुम प्यार करती हो. अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो आज मुझे रोकना मत. मैं यह सारा केक तुम्हारे बदन पर मल कर चाटना चाहता हूँ, तुम अपना टॉप उतार दो तो मैं यह केक तुम्हारी चूचियों पर मल कर चाट लूँ.”

मेरी बात सुनकर रिशा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया तो मैंने रिशा का टॉप और ब्रा उतार दी. 19 साल की दुबली पतली रिशा की चूचियां आलिया भट्ट की चूचियों जैसी थीं. छोटे छोटे संतरे जैसी चूचियों पर केक लगाकर मैंने चाटा तो रिशा के निप्पल टाइट हो गये.

दो तीन बार रिशा की चूचियों पर केक लगाकर चाटने के बाद मैंने रिशा की मिडी और पैन्टी उतारकर उसे नंगा कर दिया और उसकी नाभि से लेकर जांघों तक केक मल दिया. जांघों से चाटते चाटते मैं रिशा की चूत तक आ गया, फिर रिशा की नाभि से लेकर चूत तक आ गया. रिशा की चूत अब भी केक से ढकी हुई थी. रिशा की टांगें फैला कर मैं उसकी चूत चाटने लगा. चूत पर लगा केक जब साफ हो गया तो रिशा की चमकती चूत दिखने लगी.

अब मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये. अपने लण्ड को सहला कर लण्ड की खाल को आगे पीछे किया और उस पर केक मल दिया.

पना लण्ड रिशा के चेहरे के करीब ले जाकर मैंने रिशा से कहा- अब केक खाने की तुम्हारी बारी है.
रिशा मेरे लण्ड पर लगा केक चाटने लगी तो मैंने रिशा की चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

कच्ची कली को मसलने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हो चुका था. रिशा की चूत में ऊंगली चलाकर मैंने उसे भी चुदवाने के लिए तैयार कर दिया.

अपने बैग से कोल्ड क्रीम की शीशी और कॉण्डोम का पैकेट निकाल कर मैं बेड पर आ गया. अपना लण्ड रिशा के हाथ में देते हुए मैंने कहा- रिशा, ये तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट है, इसे अपने जिस्म में जाने दो. जब पहली बार यह तुम्हारे जिस्म में जायेगा तो हल्का सा दर्द होगा लेकिन बाद में बहुत आनन्द देगा, तुम्हें जन्नत का मजा देगा.

इसके बाद मैंने अपने लण्ड पर क्रीम लगाकर रिशा से लण्ड की मसाज करने को कहा और मैं उसकी चूत की मसाज करने लगा. जब मुझे लगा कि रिशा की चूत लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है तो अपने लण्ड के सुपारे पर क्रीम लगाकर मैंने रिशा की चूत के लब खोले.

रिशा की छोटी सी गुलाबी रंग की चूत देख कर मेरा लण्ड सलामी देने लगा. अपने लण्ड का सुपारा रिशा की चूत पर रखकर मैंने रिशा की नाजुक कमर पकड़ी और लण्ड को अन्दर धकेला.

रिशा की चूत काफी गीली हो चुकी थी और लण्ड पर क्रीम लगी हुई थी इसलिये पहले झटके में सुपारा और दूसरे झटके में आधे से ज्यादा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.
मैंने रिशा की जांघों और चूत के आसपास हाथ फेरते हुए धक्का मारा तो मेरा पूरा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.

चूत की झिल्ली फटने से जो दर्द हुआ रिशा बर्दाश्त कर गई. रिशा में गजब की हिम्मत थी. 50 किलो वजन की दुबली पतली रिशा 120 किलो वजन वाले भारी भरकम अंकल का लण्ड झेल गई थी और अंकल को अपने ऊपर लिटा कर चूम रही थी.

रिशा के ऊपर लेट कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. मेरा लण्ड रिशा की चूत में सेट हो चुका था और मैं चाहता था कि ताउम्र ऐसे ही पड़ा रहूँ. लेकिन ‘लण्ड है कि मानता नहीं’ कुछ ही देर में लण्ड ने अन्दर बाहर होना शुरू कर दिया.
पहली बार चूत में लण्ड जाने का दर्द अब रिशा के चेहरे से गायब हो चुका था.
रिशा के होंठों पर उंगली फेरते हुए मैंने पूछा- कैसा लग रहा है?

“जब से दीदी ने आपके और मम्मी के रिश्ते के बारे में बताया था, मैं यह नहीं समझ पा रही थी कि आपके सामने टांगें फैलाने में मम्मी को क्या मिलता है, मम्मी ऐसा क्यों करती है? आज मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया है. प्रकृति ने आदमी और औरत का शरीर इस तरह से बनाया है कि दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी करते हैं. इसमें जाति, धर्म, उम्र, रिश्ते जैसा कोई बन्धन नहीं होता. एक औरत जब बेड पर होती है तो उसके सामने सिर्फ एक मर्द होता है.”

“तुम बातें बहुत अच्छी कर लेती हो.” इतना कहकर मैंने अपने लण्ड की रफ्तार बढा़ई.

जब मुझे लगा कि मेरे डिस्चार्ज का समय करीब है तो मैंने अपना लण्ड रिशा की चूत से निकाला, लण्ड को टॉवल से साफ किया और उस पर कॉण्डोम चढ़ा दिया. अपने लण्ड पर कॉण्डोम चढ़ा कर मैं फिर से रिशा की चूत में घुस गया.

डॉटेड कॉण्डोम की रगड़ से रिशा सिसकारी भरने लगी. रिशा की सिसकारियां मेरे लण्ड में जोश भर रही थीं. अपने लण्ड की रफ्तार पर नियंत्रण रखते हुए मैंने चुदाई जारी रखी. मेरा लण्ड अकड़कर मूसल जैसा होने लगा और बहुत फंस कर अन्दर बाहर हो रहा था.

तभी मेरे लण्ड से फव्वारा फूटा. मैं निढाल होकर रिशा पर लुढ़क गया.

कुछ देर बाद हम अलग हुए और रिशा बाथरूम चली गई. रिशा बाथरूम से लौटी तो टांगें फैला कर चल रही थी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि हल्का सा दर्द है. मैंने रिशा को लिटा दिया और कोल्ड क्रीम से रिशा की जांघों और चूत की मसाज की. इसके बाद हमने कमरे में ही खाना मंगा लिया. कॉलेज से छुट्टी के समय तक रिशा घर पहुंच गई.

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