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मैं गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी

नमस्कार मैं 41 साल की औरत हूं मेरा नाम सुरभि है।  आज मैं आपको अपने सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं यह मेरी कहानी सच्ची कहानी है आज मैं इस कहानी में आपको यह बता रही हूँ  कि मेरा दामाद कैसे मुझे प्रेग्नेंट कर दिया मेरी बेटी तो प्रेग्नेंट है ही मैं भी 2 महीने की प्रेग्नेंट हूं। यह सब कब कैसे और क्यों हो गया वह मैं आपको सिलसिलेवार तरीके से कहानी के माध्यम से इस वेबसाइट पर लिख रही हूं ताकि मैं अपना मन हल्का कर सकूं।

मेरी बेटी आकांक्षा की शादी दिल्ली के एक अच्छे खानदान मैं हो गई। मेरे दामाद जी एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और बहुत बड़े पद पर हैं पैसे भी खूब  है उनके पास उनके माता-पिता उनके साथ नहीं रहते मेरे दामाद जी नोएडा में रहते हैं और उनके मम्मी-पापा दोनों दिल्ली में रहते हैं । उनकी एक बहन है वह विदेश में रहते हैं जो शादीशुदा है। वह अपने मम्मी पापा को 6 महीने के लिए अपने यहां बुला ली तो दामाद जी का  मन नहीं लगने लगा था शादी पिछले साल ही हुई थी और मेरी बिटिया आकांक्षा को भी मन था कि मैं कुछ दिन के लिए उसके पास जाकर रहूं मेरी बेटी भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है ।

तो मैं उन दोनों के आग्रह पर मैं बेटी दामाद  के पास ही चली गई। लखनऊ में सिर्फ आकांक्षा के पापा और मेरी छोटी बेटी नेहा रहने लगे मेरे पति भी बोले कि जाओ थोड़े दिन तक अपनी बेटी के साथ रहकर आओ तुम्हें अच्छा लगेगा मैं और नेहा दोनों यहां पर रह लेंगे कोई दिक्कत नहीं होगा। और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गई . दामाद जी मुझे स्टेशन पर लेने के लिए आए हैं बेटी भी साथ आए वह दोनों बहुत खुश हुए और फिर मैं नोएडा के लिए निकल गई जहां पर वह लोग रहते थे ।

समय बीतता गया हम तीनों ही एक-दूसरे से काफी घुलमिल गए थे दामाद जी बहुत अच्छे स्वभाव के थे तो हंसी मजाक करते थे।  उसके बाद मैं मेरी बेटी और मेरा  दामाद ऐसे रहने लगे, जैसे कि दोस्त हो, मुझे अपने दामाद का आदत बहुत अच्छा लगा।  कुछ दिनों के बाद मेरी बेटी आकांक्षा को ऑफिस काम के लिए बेंगलुरु जाना हुआ।  और जाना भी जरूरी था इसलिए मैं और दामाद जी उसको रुक भी नहीं पाए क्योंकि वह भी एक अच्छी कंपनी में काम करते हैं।  जब आकांक्षा चली गई तो हम दोनों को भी मन नहीं लगने लगा था मेरे दामाद जी भी काफी उदास रहने लगे थे और मैं भी उदास रहने लगी।

दोस्तों एक बात तो सही है रिश्ते चाहे कोई भी हो अगर दिल मिल रहा हूं दोस्तों के बीच कोई दीवार नहीं होता वही हाल हुआ मैं और दामाद जी ऐसे रहने लगे जैसे कि एक दूसरे का हमसफर हो  दोस्त हो।  धीरे-धीरे हम दोनों करीब आ गए 1 दिन में जब खाना बना रही थी तो पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रख।  वहां से शुरू हो गया हम दोनों की जिंदगी का पहला अध्याय।

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मैं किचन में रोटियां  बना रहे थे वह पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रखकर बात करने लगे मैं भी कुछ नहीं बोली मुझे उनका हाथ रखना अच्छा लगने लगा इससे मुझे लगा अपनेपन का एहसास तो मैं मना भी नहीं करी।  धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए मेरे सिर पर भी रख दिया फिर वह साइड से मुझे पकड़ दिए और रोटी में जो बेल रही थी उसको वह देखने लगे।

मैं सर झुका के रोटियां बेल रही थी।  तभी दामाद जी बोले कि मम्मी जी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो आप लगती ही नहीं हो कि मेरी मम्मी नहीं आप मेरी दोस्त की तरह लगती हो।  तो मैं भी बोल दे कि हां मैं दोस्त ही हूं तुम्हारी।  उसके बाद में बोली की  चलो खाना खा लेते हैं।   और हम दोनों खाना खाने के लिए बैठ गए।

इतना सब होने के बाद वह मुझे बार-बार घूर कर देख रहे थे कभी वह मेरी चूचियों की तरफ देखते तो कभी मेरी गांड की तरफ देखते कभी मेरे होंठ की तरफ देखते तो कभी मेरे पूरे बदन को निहारते , मैं सब समझ रही थी मैं समझ रही थी कि इनका मन कहीं और डोल रहा है।

पर उनका देखना मुझे भी अच्छा लगने लगा था मुझे लग रहा था आज कुछ होने वाला है क्योंकि मेरे मन में भी कुछ कुछ होने लगा था।

खाना खाकर मैं अपना कपड़े चेंज कि मैं नाइटी पहनी पर उस दिन ऐसा हुआ दोस्तों कि मैं अंदर कुछ नहीं पहनी थी मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि गर्मी ज्यादा थी इसलिए मुझे लगा कि आराम मिलेगा इसलिए मैं अंदर कुछ भी नहीं पहनी ना ब्रा न पेंटी।

मैं बेड पर लेट कर नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सेक्स कहानियां पढ़ने लगी थी।  एक हॉट कहानी  जो सास और दामाद की थी।  कहानी पढ़ते-पढ़ते लगा आज मेरे पास मौका है और अगर मुझे यह सुख मिल जाता है तो भी कोई बात नहीं।

असल में मेरे पति का उम्र भी हो गया था तो मेरी चुत ** कर नहीं पा रहे थे।  और मैं भी जवान थी तुम मुझे अभी लंड  चाहिए था।  पर मैं कहती कैसे कहानियां जैसे ही खत्म हुई थी मेरे कमरे में आ गए।  मैं जल्दी से अपने मोबाइल बंद की तुम मुझे देखकर कहने लगे कि मम्मी जी आज आप थकी लग रही हो।

तो मैं बोली हां सुबह से आज मैं काम कर रही थी इस वजह से थकान हो गया है।  तो मेरे दामाद से बेड पर बैठ गए और मेरे पैर को अपनी गोद में देखकर दबाने लगे मैं बोले नहीं नहीं ऐसा मत कीजिए आप मेरे पैर मत छुइए।  तो उन्होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं आपको तुम्हें पहले ही बोल चुका हूं कि आप मेरी दोस्त की तरह हो  तो आप भी बोले कि हां दोस्त मान सकते हो तो एक दोस्त दूसरे दोस्त की मदद क्यों नहीं करेगा।

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और वह मेरे पैर को दबाने लगे 10:15 मिनट हो दोनों पैर को मेरी दबाये और फिर नाइटी को ऊपर कर दिया।  जब जांघ  तक नहीं थी पहुंच गई तो मैं हाथ पकड़ कर रख दी उनको।  फिर उन्होंने मुझे कहा कि आप उलट जाओ मैं आपके पीठ दबा देता हूँ।  और मैं उलट गई।  वह मेरे पीछे दबाने लगे धीरे-धीरे चूतड़ दबाने लगे।  उसके बाद तो दोस्तों उनका हाथ मेरे जिस्म को टटोल रहा था।

मेरे चुत  से पानी निकलना शुरू हो गया था।  क्योंकि जब एक मर्द का हाथ लगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाए और मैं खुद काम होने लगे।  मैं सीधा हो गई और मैं उनको देखने लगे मेरी चूचियों को निहार रहे थे।  और धीरे-धीरे उनके कांपते हुए हाथ मेरी चूचियों को मसलने लगे।

मैं कुछ बोल नहीं पाई  मैं उनको नशीली निगाहों से देखने लगी।  उसके बाद तो दोस्तों में अपने बाहें फैला दी और वह मेरे बाहों में  सिमट गए।  अपना  होठ मेरे होंठ पर रख दिया और चूसने लगे। वह अपने हाथों से मेरे चूचियां दबा रहे थे और मेरे सोच को चोद रहे थे हम दोनों ही कामों को गए थे धीरे-धीरे उन्होंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और मेरे जिस्म को सहलाते  हुए मेरे नाइटी उतार दी।

मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां को देखकर वह पागल हो गए वह मेरे निप्पल को चूसने लगे एक हाथ से वह मेरे शरीर को टटोल रहे थे उन्होंने मेरे पैरों को अलग अलग किया मेरे होंठ को चूसते हुए मेरी एक हाथ से चूची को दबाते हुए और एक हाथ से मेरी चुत  पर हाथ फेरने लगे।

दोस्तों अब मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो गई थी मैं  सिसकारियां ले रही थी मैं अंगड़ाइयां ले रही थी।  उसके बाद मैंने तुरंत ही उनका लंबा मोटा सा लंड  पकड़ लिया।  पहले खूब हिलाई उसके बाद अपने मुंह में ले ली।   आइसक्रीम की तरह उनके लंड  को चूसने लगी।

अब मेरे चुत  से गर्म पानी निकलने लगा था।  मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई मैंने दोनों पैरों को फैला दिया और उनको नशीली आंखों से देखा और बोली थी आज मुझे चोद दो.  वह तुरंत ही मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए पहले तो उन्होंने खूब मेरी चुत  को चाहता।  फिर उन्होंने उंगली डाली।  गरम रस वह पी रहे थे उंगलियों में  लगा लगा कर।  उसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा।  अपना लंड  मेरी चुत  पर सेट किया।  और जोर से धक्का दे दिया दोस्तों पूरा का पूरा लंड  मेरी चुत  के अंदर चला गया।

मैं धन्य हो गई मोटे लंबे लंड  को अपने अंदर पाकर।  उसके बाद तो मैं हिला हिला कर  अपने गांड को उनके लंड  को चुत  के अंदर लेने लगे।  साथ में मैं उनके बदन को टटोल रही थी वह मेरी चूचियों को दबा रहे थे मुझे चूम रहे थे मुझे किस कर रहे थे।  मैं भी वही सब कर रही थी जो वह कर रहे थे।

जोर जोर से धक्के देने लगे मैं भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। उसके बाद तो कभी उलट कर कभी पलटकर कभी ऊपर से कभी नीचे से कभी बैठाकर कभी झुका कर कभी घोड़ी बनाकर कभी कुत्तिया बना कर।

कहीं खड़ा करके कभी लिटा कर कभी टेढ़ा  करके कभी साइड से।  वह मुझे करीब 2 घंटे तक चोदते रहे।  मैं बहुत ज्यादा थक गई थी और वह भी थक गए थे अब मेरे से सहा नहीं जा रहा था।  मुझे दर्द होने लगा था।  मेरी चूचियों को उन्होंने इतनी जोर जोर से दबाया कर उनकी उंगली का निशान मेरी चूचियों पर साफ साफ दिखाई दे  रहा था।

मैं बोली थी दामाद जी आज बस करो मेरी चुत  फट गई है।  आज के लिए इतना ही काफी है।  अब  तो मैं आपकी हूं आप मुझे जैसे चोदो जो करूं अब मैं आपकी  हूं।  फिर उन्होंने जल्दी-जल्दी धक्के देने लगे जोर-जोर से मुझे चोदने लगे मैं भी नीचे गांड घुमा घुमा कर चुदवाने लगी।

और फिर दोनों एक साथ चीखने लगे चिल्लाने लगे और एकदम से हम दोनों  एक साथ ही एक दूसरे को अपनी बांहों में पकड़ कर अपनी पूरी ताकत लगा दी वह ऊपर से धक्के दे रहे थे मैं नीचे से धक्के देने लगी।

उसके बाद उनका सारा बढ़िया मेरी चुत  के अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों  शाम तो हो गए।

उस दिन के बाद से हम दोनों ही एक पति पत्नी की तरह रहने लगे साथ नहाते थे साथ खाते थे साथ सोते थे।  उसके बाद 1 महीने मेरा  मेंस नहीं आया।  मैं भूल गई थी कि मेरा मेंस कब आया था।  उसके बाद में  प्रेगनेंसी टेस्ट की तो पता चला मैं प्रेग्नेंट हूं।  दोस्तों उधर मेरी बेटी भी  3 महीने की प्रेग्नेंट है।  और  मेरा भी दूसरा महीना चल रहा है।

जाने कि मैं भी अपने दामाद के बच्चे की मां बनने वाली हूं।  शायद मेरे लिए कैसा रहेगा क्या बुरा रहेगा वह तो मुझे नहीं पता पर मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा है अब देखिए जो होगा देखा जाएगा।

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मेरी गांड फाड़ दी

असल में मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी शादी एक बड़े घर में हुआ है शादी करवाने वाली मेरी सौतेली माँ है। उसने पांच लाख लेकर मेरी शादी करवाई है। तो आपको समझ आ गया होगा। या तो मैं अपने ससुराल से भाग जाऊं या जो हो रहा है उसी का फायदा उठाऊं और ज़िंदगी जिऊँ। दोस्तों इसी कसमकस में सोची की शायद मुझे यही सही रहेगा की मैं ससुराल में ही रहूं। अगर मैं भाग जाती हूँ तो यहाँ मुझे तीन चोद रहा है। पता नहीं कितने लोगों के बिस्तर को गर्म करना होगा हालात से लड़कर और जीने के लिए। और रही बात वापस हरियाणा जाने की जहाँ एक चुड़क्कड़ सौतेली माँ हो वो मुझे वह भी बेचेगी। तो बार बार और कई लोगों से बिकने से अच्छा है की एक घर में ही चुदवा लूँ।

अब मैं आपको अपनी पूरी कहानी बता रही हूँ।

शादी के बाद मैं अपने ससुराल आ गई। रात में पति ने मेरे साथ खूब रंगरेलियां मनाई मैं भी खूब गांड उठा उठा कर चुदवाई। रात में मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया। मेरी गांड फाड़ दी थी चुत मार कर। मैं भी तैस में आ गई और खूब कूदी उसके लंड पर और खूब मजे ली पूरी रात। पर जब वो ठंढा पड़ा और मैं कपडे पहन ली तब वो मुझे रूल समझाने लगा की मेरे घर का क्या रूल है। उसने एक बात बोला की तुम कभी भी मेरे पापा को और मेरे भाई को नाराज नहीं करोगी ? मैं भी तैस में आकर पूछ ली। नाराज क्या ? क्या वो मेरी चूत मांगेगे तो वो भी देनी पड़ेगी। तो मेरा पति बोला हां सब कुछ।

मेरी सास नहीं है। वो पहले ही चल बसी शायद तीन तीनो ने चोद चोद कर ऊपर पहुंचा दिया था। 50 साल की उम्र के बच्चा होने वाला था। शायद इन तीनो का ही काम होगा, मैं इसके बारे में कुछ पूछी नहीं। मुझे लगा जो भी कह रहा है मेरा पति मान लेते हैं। आगे देखा जाएगा क्या करने है। पहले तो सौतेली माँ से ही मेरा पाला छूटा यही कम नहीं थी। रही बात ससुर का वो देख लुंगी और रही बात देवर का तो मजे लुंगी।

सुबह मेरा पति अपने ड्यूटी पर चला गया क्यों की उसे जाना जरुरी था। देवर भी उठा और वो भी चला गया अपने काम कर रह गया घर में बूढा। मैं नहाने गई बाथरूम में। नहा कर जैसे बाहर आई और अपने कमरे में गई तो बूढा मेरी पलंग पर बैठा था। मैं पूछी की बाबूजी आप यहाँ? तो वो बोला क्यों नहीं बहुरानी ये घर ऐसा है कोई भी कही जा सकता है। एक चीज को हम लोग बाँट कर खाते हैं। एक की शादी हो गई अब आप एक की नहीं हो हम तीनो की हो।

मैं सनझ गई, रात को जो मेरा पति बोला था वही हुआ। ससुर मुझे चोदने के लिए तैयार था। मैं बोली अभी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। रात भर उन्होंने मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया है। दर्द कर रहा है। तो उन्होंने बोला इसका मैं ख्याल रखूंगा। मैं अभी नहीं चोदता हूँ। मैं तुम्हारी चूत में तेल लगा देता हूँ ताकि दर्द ख़तम हो जाये। मैं मना की पर उन्होंने कहा नहीं नहीं मुझे ये दर्द पसंद नहीं। मैं आता हूँ तेल गरम करके।

तब तक मैं बाल झाड़ कर सिंदूर रही थी तभी ससुर जी। सरसों का गरम तेल ले आये और मुझे बोले लेट जा। मैं लेट गई। उन्होंने पेटीकोट ऊपर कर दिया। और पेंटी उतार दी। दोनों पैरों को फैला दिया और पहले चूत को सहला कर देखा और मुस्कराने लगे। बोले भगवान् में मेरी सुन ली। मैं भगवान् से माँगा रहा था की मुझे ऐसी बहू देना जिसके चूत में बाल नहीं हो। और ऐसा ही हुआ क्लीन है तुम्हरी चूत।

उसके बाद वो तेल लगाने लगे। करीब पांच मिनट तक तेल लगाए मेरी चूत गीली होने लगी। चूचियां भी तन गई थी। मुझे ऐसा लग रहा था इनसे चुद जाऊं। तभी उन्होंने कह दिया बहु हौले हौले घुसाऊ। मैं बोली ठीक है।

उन्होंने तुरंत धोती खोला और नीला अंडरवियर जो लाइन बाला होता है। खोल दिया और लैंड को हिलाने लगे और उसमे भी उन्होंने तेल लगा लिया और फिर से मेरी चूत में तेल लगा लिया और चूत पर लंड लगा कर घुसाने लगे। पर उनका लौड़ा घुस नहीं रहा था क्यों की दम नहीं था। खड़ा सही से नहीं हो रहा था। फिर उन्होंने हिलाया और फिर मेरी मुँह में दे दिया जब मैं थोड़े देर तक अपने मुँह में ली तो उनका लौड़ा मोटा और लंबा हो गया।

अब वो मेरी चूत में घुसा दिए और करीब दस मिनट तक चोदे और सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिए। मैं प्यासी ही थी अभी दर्द तो ख़तम हो गया था। अब दर्द नहीं हो रहा था। बाबूजी खेत चले गए। मैं सो गई क्यों की रात में चुदवा रही थी।

करीब तीन बजे नींद खुली वो भी जब घर का दरवाजा कोई पीट रहा था। जाकर खोली तो देखि देवर जी थे।

वो अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिए। और मुझे अपनी बाहों में ले लिए। मैं भी खुश खुश उनके बाहों में समा गई। क्यों की देवर जी को मैं पसंद करती थी वो मेरे लायक थे। वो मेरे होठ को चूसने लगे चूचियां दबाने लगे। मैं भी उनको किस करने लगी सहलाने लगी।

वो मुझे बैडरूम में लेकर आये और मेरी ब्लाउज खोल दिए मैं खुद ही ब्रा खोल दी पेटीकोट भी उतार दी। ये सब देखकर बोले मुझे बहुत ख़ुशी हुई आप मेरे घर के कायदे कानून को बिना झिझक के अपना लिए हैं। आप रानी बनकर रहेंगे इस घर में।

और वो मेरे ऊपर टूट पड़े मेरी चूचियां पिने लगे। दबाने लगे। होठ चूसने लगे। और फिर उन्होंने मेरी गांड चाटी और फिर चूत चाटने लगे। मैं बोली बस करो ऐसे चाटना अभी मुझे चोद दो। क्यों की ससुर जी मुझे गरम कर के चले गए। वो बोले अच्छा बाबूजी मजा ले लिए तो मैं बोली हां वो मुझे चोद दिए। तो देवर जी बोले और मैं ही पीछे रह गया।

और उन्होंने में टांग को अलग अलग किया और मोटा लौड़ा मेरी चूत पर लगा कर पेल दिया। अब मुझे दर्द होने लगा था क्यों की देवर का लौड़ा काफी मोटा और लंबा था। वो चोदना शुरू किये तो मैं पानी पानी हो गई। खूब चोदा उठा पर पटक कर ऊपर से निचे से बैठ कर खड़े होकर। करीब एक घंटे तक उन्होंने चोदा मुझे आखिर उनका भी गिर गया।

उन्होंने अपने जेब से एक सोने का चेन निकाला और मुझे दे दिया और बोले ये मेरे तरफ से।

दोस्तों पहले तो सात दिन तक मुझे काफी दर्द हुआ था। क्यों की मेरी चूत नाजुक थी। पर अब मैं तैयार हो गई है तीन मर्द से चुदने को तो अब कोई बात नहीं है। खूब चुद रही हूँ मजे ले रही हूँ। मैं अपनी दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने जा रही हूँ। आप जरूर पढियेगा।

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मेरा गदराया हुआ बदन

मेरा नाम रशिली है, कानपूर देहात की रहने वाली हु, मेरी उम्र २२ साल की है, लंड का स्वाद अपने पति से ही मिला वो भी उतना नहीं जितना मैं चाहती थी, मन भटकता था चाहती थी किसी किसी पडोश के लड़के से ही चुदवा लू पर डरती थी कही वो ब्लैकमेल ना करे इसलिए मन मार के रह गयी, मेरे दिमाग में एक विचार आया क्यों ना मैं ससुर से ही चुदवा लू, बूढ़े को भी तो बूर का मजा चाहिए क्यों की सास का देहांत हुए करीब १० साल हो गया था, तो मैंने अपने ससुर पे डोरे डालने लगी.

एक दिन ससुर का तबियत ख़राब हो गया था मैंने उनके लिए तेल गरम कर के पुरे शरीर में मालिश की उनके पुरे जिस्म को मैंने अपने हाथ से टटोला और ब्लाउज का ऊपर का हुक खोल के राखी ताकि वो मेरे गदराये हुए चूचियों को निहार सके हुआ भी ऐसा ही, ससुर ने तिरछी नज़र से खूब निहारा मैं मन ही मन खुश हुई, फिर कुछ ऐसी भी हरकत मैंने की जिससे मेरी चूची उनके हाथ को छुआ, मैं उनके हाव् भाव से समझ रही थी की वो ये सब नहीं चाह रहे थे, उनकी नियत ख़राब नहीं थी पर मैं चुदवाने के लिए व्याकुल थी.

मैंने दूसरे दिन आँगन में चापाकल पे नह रही थी और मैंने जानबूझ कर वही टाइम चुना जब वो खेत से घर आते है, बाहर का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया, और मैंने अपने ब्लाउज और ब्रा को खोल के नहाने लगी, पेटीकोट कमर पे ही बंधा था, चुचिया यु ही खुला था, मैं रगड़ रगड़ के नहाने लगी, उस दिन कुछ ज्यादा ही नही क्यों की ससुर देर से आये थे, जब वो दरवाजे के अंदर आये वो हैरान हो गए और मैं भी झूठ मुठ की परेशान हो गयी, वो मुझे नंगे देख लिए, मेरा गदराया हुआ बदन किसी के भी होश उड़ाने के लिए तैयार था, वो शरमाते हुए कमरे में चले गए और मैं भी कपडे पहन ली, मैं तिरछी निगाह से देखि तो उनके धोती फुला हुआ था शायद उनका लंड खड़ा हो गया था.

इस तरह से कई दिन हो गए पर मौक़ा नहीं मिला चुदवाने के लिए, एक दिन मैंने रात के करीब २ बजे पेट दर्द का बहाना बनाई और रोने लगी, मेरे ससुर परेशान हो गए कोई डॉक्टर भी नज़दीक में नहीं था, सुबह ही कुछ हो सकता था, मैंने कहा पिताजी आप चिंता ना करो पहले भी कई बार ऐसा हुआ था मेरी माँ गरम सर्सो का तेल मेरे पेट पे मालिश कर देती थी तो छूट जाता था, मैंने कराहते हुए बोली. पिताजी फ़ौरन ही रसोई में गए और चूल्हे से गरम तेल कर के ले आये, मैंने लगाने को कोशिश की पर मैं चाहती थी की वो लगाए, मैंने कहा मैं नहीं लगा पाउंगी, अगर आप लगा दे तो अच्छा हो जाएगा, उनके हाथ कापने लगे बोले बेटी मैं कैसे?

मैंने कहा कोई बात नहीं मैं किसी को नहीं बताउंगी, वो तैयार हो गए और मेरे पेट पे मालिश करने लगे, उसी वक्त मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और आँख बंद कर ली वो मेरे पेट पे तेल लगाते रहे और मेरी चूचियों को निहारते रहे, आकिहार मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने कहा, आप मुझे वो सुख दो जो आपका बेटा नहीं दिया अगर आप मना करोगे तो पुरे गाँव में बात फैलाडुंगी की जब मैं सो रही थी उस समय आपने मेरे साथ गलत हरकत किया, मेरे ससुर परेशान हो गए बोले नहीं नहीं ये सब गलत है मैं नहीं कर सकता, उसी समय मैंने कहा मैं अभी घर से बहार चली जाऊूँगी और चिल्लाऊंगी की आपने मेरी इज्जत लूट ली. उन्होंने बोला ठीक है जो तुम चाहो.

मैंने अपने ब्लाउज को उतार दिया और उनको अपने बाहों में ले ली, मैंने सबसे पहले उनको अपना दूध पिलाया फिर मैंने उनको अपना बूर चाटने के लिए कहा करीब १० मिनट बूर चटवाने के बाद मैं काफी कामुक हो गयी थी मेरे दांत पीस रहे थे, बूर से पानी निकल रहा था चूचियाँ टाइट हो चुकी थी, मैंने अपने ससुर का लंड अपने मुह में लेके मलाई बर्फ की तरफ चूसने लगी धीरे धीरे उनका लंड काफी बड़ा और टाइट हो गया फिर मैंने उनके लंड को पकड़ कर बूर के मुह पे रखी और मैंने उनसे पेल देने के लिए कहा,

फिर क्या था उस बूढ़े में जान आ गया वो झटके पे झटके दे रहा था मैं भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, उसने मुझे गांड भी मार और बूर का तो सत्यानाश कर दिया था उस दिन पर मैं खुश थी क्यों की मेरी वासना की आग को कुछ शांति मिली | करीब ४ महीने से वो मेरे साथ ही सोते है, अब तो मेरे पेट में २ महीने का बच्चा भी है वो भी ससुर का. आशा करती हु की आपको मेरी आपबीती अच्छी लगी होगी,

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आह चोद दे साले कमीने

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू श्रीवास्तव है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ. मेरी उम्र 34 साल है. मेरी साइज़ 36-32-38 की है. मेरा बदन पूरा भरा हुआ है. मेरे घर में मैं और मेरे नामर्द पति और मेरे दो बच्चे रहते हैं. मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं. वो मुझे बिस्तर में खुश नहीं कर पाते हैं.

एक दिन की बात मेरे पति ऑफिस गए थे और मैं नहा कर कपड़े ही पहन रही थी कि इतने में एक सब्जी वाला बाहर मेरे दरवाजे पर आवाज़ दे रहा था.
“मैडम सब्जी ले लो … हरी ताज़ी सब्जी है.”

मैंने साड़ी पहन कर बाहर जाकर देखा तो एक बड़ा मस्त मर्द सब्जी बेच रहा था. इसे मैंने पहले कभी अपने एरिया में नहीं देखा था. शायद नया सब्जी वाला था.

मैंने इधर-उधर देख कर उसको अपने पास बुलाया.
वो करीब आया तो मैंने पूछा- भैया आपकी उसका क्या रेट है?

मेरी इस दो अर्थी बात सुनकर वो मुझे ध्यान से देखने लगा. वो मैडम से सीधे भाभी पर आया और बोला- भाभी जी, आपके लिए तो सब रेट कम ही हैं.. आप तो बस बोलो कि क्या लोगी.
मैंने इठलाते हुए अपने चूचे हिलाए और बोला कहा- बड़े बड़े से वो दे दो.
वो बोला- क्या दे दूँ बड़े बड़े से?
मैंने- आलू दे दो … दो किलो.

उसने भी अपनी लुंगी में अपना लंड जरा सा सहलाया और मेरी तरफ देखता हुआ बोला- कैसे लोगी भाभी जी?
मैंने मन ने सोचा कि कह दूँ कि जैसे तुम देना चाहो.
फिर मैंने पूछा- कैसे लोगी से … तुम्हारा क्या मतलब है भैया?
वो बोला- मतलब कुछ डलिया वगैरह में लोगी.. या मैं थैली में दे दूँ?
मैंने कहा- थैली में ही दे दो.

उसने आलू तौल दिए, मैंने उससे आलू ले लिए. उससे आलू लेते वक्त मैं जरा झुक गई, जिससे उसको मेरे गहरे गले वाले ब्लाउज में से मेरी मस्त चूचियों की भरपूर झलक दिख गई. मेरी निगाह उसकी लुंगी पर थी, उसकी लुंगी ने उठना शुरू कर दिया था.
फिर मैंने उसको ध्यान से देखा. वो एक 40 साल का हट्टा-कट्टा पहलवान टाइप का मर्द दिख रहा था.

उससे सब्जी लेकर मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो मुझसे बोला- भाभी जी पैसे?
मैंने कहा- भैया अभी अन्दर से लाकर देती हूँ.
वो बोला- ठीक है.
मैं अन्दर जाने लगी, तभी मैंने पलट कर देखा, वो मेरे पिछवाड़े को बड़ी मस्त निगाहों से देख रहा था.
मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर चली गई.

जब मैं वापस आई, तो मैंने देखा कि उसकी कामुक नज़र मेरे गदराए हुए जिस्म पर टिकी थीं और वो मेरे मम्मों को बड़ी ध्यान से देख रहा था.

मैंने उसको पैसे दिये और अन्दर जाने के लिए मुड़ी तो उसी समय न जाने कैसे मेरे पैर में मोच आ गई और मैं वहीं गिर पड़ी. मुझे गिरता देख कर वो सब्जी वाला मुझे उठाने लगा. मैंने उसको मना किया, लेकिन वो नहीं माना. वो मुझे उठा कर घर के अन्दर ले आया. जब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था, उस वक़्त मैंने महसूस किया था कि उसका फौलादी लंड मेरी गांड के ऊपरी हिस्से में मतलब मेरी कमर को टच कर रहा है. उसने मुझे कसके पकड़ा हुआ था.

वो मुझे बेड के नजदीक लाया और मुझे बड़े हौले से बेड पर लिटा दिया. फिर वो मुझसे बोला- भाभी जी … मूव किधर रखी है, बता दीजिए … मैं आपके पैर में मूव लगा देता हूँ.
मैंने उससे बोला- तुम रहने दो … तुम बाहर चले जाओ, तुम्हारा ठेला बाहर खड़ा है … मैं अपने आप मूव लगा लूँगी.
वो बोला- नहीं … आपको दर्द है … मैं आपको इस हालत में ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकता … मेरे ठेले की चिंता आप न करें.

मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो खुद से सामने की टेबल पर रखी मूव उठा लाया और मेरी साड़ी को थोड़ा ऊपर करके पैर में मूव लगाने लगा.

उसके हाथों में बड़ी नफासत थी … मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा. उसके हाथों से थोड़ी ही देर में मुझे आराम मिल गया और मैं पैर फैला कर लेट गई. वो अब और भी अच्छे से मेरे पैर की मालिश करने लगा.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि वो साड़ी को कुछ और ऊपर कर रहा था. अब वो अपना हाथ मेरी जांघों तक ले जा रहा. मैं आंखें खोल कर उठ कर बैठ गई.

पहले तो मैंने सोचा कि शायद ये मालिश से भी कुछ आगे बढ़ेगा, तो हो सकता है कि आज मुझे शान्ति मिल जाए.

मैं उसकी मर्दाना छाती देख कर बड़ी चुदासी हुई जा रही थी. साथ ही मेरा दिमाग काम करने लगा था कि कैसे भी करके इसे फंसाना ही है. ये मुझे मस्त चोद सकता है. मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि अगर आज ये सैट हो गया तो इसके लंड की चुदाई से मेरी चुत की आग शांत हो जाएगी जो आज तक मेरे पति नहीं कर पाए थे.

मैंने उससे कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?
वो बोला- भाभी जी … मैं मालिश कर रहा हूँ.
मैं बोली- मोच तो नीचे वाले हिस्से में आई थी, तो तुम ऊपर क्यों मालिश कर रहे हो?
वो बोला- अरे मोच को मालिश करने के बाद पूरे पैर को अच्छे से मालिश करना पड़ता है … नहीं तो दर्द नहीं जाएगा.
मैं बोली- तुम रहने दो … अब जाओ. मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही मुझे सहला रहे हो.
वो बोला- नहीं भाभी जी, मैं आपकी मालिश कर रहा हूँ.

मैंने उसे उकसाया- कहीं तुम मुझे अकेली पाकर मेरे साथ गलत काम तो नहीं कर दोगे.
ये कहते हुए मैंने उठने की कोशिश की और अपना पल्लू ढलक जाने दिया. मेरे गहरे गले के ब्लाउज से उसको मेरी अधनंगी चूचियां गर्म करने लगी थीं. मैं देख रही थी कि उसका लंड फूलने लगा था.

वो मेरी चूचियों की तरफ देख कर बोला- अगर आप मुझसे कुछ गलत काम करने के लिए कहेंगी, तो मैं जरूर कर दूंगा. वैसे आप अपनी गेंदें दिखा कर मुझे भड़का रही हैं.
मैंने पूछा- गेंदें मतलब?
वो लंड सहला कर मुझसे बोला- भाभी जी गेंदें नहीं समझती हो. मैं आपके दूधों की बात कर रहा हूँ.

यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे सीने से लगा कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया. साथ ही मेरी साड़ी भी खींच दी थी. हालांकि मेरी साड़ी अब भी मेरे बदन से लिपटी हुई थी. मैं समझ गई कि लंड काबू में आ गया है. अब मैंने नाटक करना शुरू किया.

“ये क्या कर रहे हो तुम … इधर से चले जाओ तुम!”
वो- एक तो तेरे लिए इतनी मेहनत की और बिना कुछ दिए बोल रही हो कि अब जाओ.
मैं घबरा कर बोली- ये तुम क्या बोल रहे हो … तुम तुम्हारा दिमाग़ खराब है क्या?
वो बोला- हां तुझे देख कर मेरा दिमाग़ और हालत दोनों खराब हो गए हैं. अब तुझे पहले जी भर कर चोदूंगा, फिर मेरा दिमाग सही होगा.

मैंने उसको भगाने की कोशिश की नौटंकी की लेकिन मैं नाकामयाब रही.

वो मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. पहले तो उसने मेरी साड़ी पूरी तरह से खींच कर मेरे जिस्म से अलग कर दी. मैं उसके सामने रोने का ड्रामा रही थी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो.

लेकिन उसकी आंखों में अलग ही चमक थी. वो मुझको देख कर बोला- साली तुम चुदासी औरतें ऐसे गांड मटका मटका कर चलती हो कि हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता होता. जब चोदने की बारी आती है, तो साली नखरे दिखाने लगती हो … एकमद चुप रह साली रंडी … आज तेरी चुत का मैं भोसड़ा बना दूँगा. आज अपने फौलादी लंड से तेरी चुत के चिथड़े उड़ा दूँगा … तू बस आज देखती जा.

उसने मेरी साड़ी तो खींच ही दी थी. अब मैं उसके सामने ब्लाउज पेटीकोट में रह गई थी.

मुझे इस हालत में देख कर वो अपना लौड़ा सहला कर बोला- साली कितनी बड़ी रांड लग रही है तू … तेरी चुचियां कितनी बड़ी हैं. आज में इनका सारा रस पी जाऊंगा.

मैं उसके सामने छोड़ देने की कहती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था. उसने एक झटके में मेरा साया भी फाड़ कर अलग कर दिया और अगले झपट्टे में मेरा ब्लाउज भी मेरी चुचियों का साथ छोड़ चुका था. अब मैं उसके सामने ब्रा और पेंटी में थी और उसे मना कर रही थी.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और मेरा सामने पूरा नंगा हो गया. उसका लंड देख कर मैं हैरान हो गई. मैंने आज तक जीवन में कभी लंड के इतना बड़ा होने की कल्पना ही नहीं की थी. उसका 8 इंच लंबा था और गोलाई में 3 इंच मोटा था. मुझे तो ऐसा लगा कि ये तो गधे का लंड लगवा कर पैदा हुआ है और आज तो यह कमीना मेरी चुत को सचमुच फाड़ ही देगा.

उसने मेरी तरफ आते हुए मेरी मेरी ब्रा और पेंटी को उतार फेंका और मेरी चूचियों को तेज़ी से दबाने लगा.

मेरी धीरे से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी और मैं उससे कहती रही- मुझे छोड़ दो प्लीज़.
लेकिन वो मुझसे बोला- चुप साली कमीनी … आज बस तू मेरे लंड का मजा ले … मैं तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा … चुप रह रंडी कहीं की.

थोड़ी देर बाद मेरा विरोध कम होने लगा और मैं उसके सामने शांत होने लगी. मुझे भी मजा आने लगा था.

वो मेरे मम्मों को अपनी बड़ी बड़ी हथेलियों में भींच कर पूरी दम से मसल और रगड़ रहा था. वो इतनी तेज़ी से मेरे मम्मों का मलीदा बना रहा था, जैसे कोई राक्षस हो. वो मेरे ऊपर लदा हुआ था और मैं अपने नीचे उसका लंड महसूस कर रही थी.

कोई 15 मिनट बाद वो मम्मों को अच्छे से रगड़ने के बाद मुझसे बोला- चल साली रंडी … मेरा लंड मुँह में लेकर इसे चूस.

पहले तो मैंने मना किया लेकिन उसने जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. थोड़ी देर में उसके लंड का साइज़ और भी ज्यादा बढ़ने लगा और मुँह से बाहर आने लगा. जब उसका लंड अच्छे से बड़ा हो गया तब उसने अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल लिया.

मैं उसके पूरी तरह से खड़े लंड को देख कर गहरा गई लेकिन मुझे मेरी चुत की आग लगातार गर्म कर रही थी.

वो लंड को मेरी चुत पर ले गया और सुपारा घिसते हुए बोला- साली रंडी कितनी मस्त है तेरी चुत … लगता है तेरा पति तुझे अच्छे चोद नहीं पाता … चल कोई बात नहीं … आज मैं इसको भोसड़ा बना दूँगा … तू चिंता मत कर.

वो अपना लंबा लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया. उसने मेरी तरफ देखा मैं घबरा कर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. मुझे मालूम था कि जैसे ही इसका लंड अन्दर जाएगा मेरी चुत एक कबाड़खाना बन जाएगी.
लेकिन चुत की सारी आग भी ठंडी करवाने की ललक मुझे उसके लंड से चुदवाने के लिए उकसा रही थी.

उसने लंड चुत पर रख कर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. उसका लंड मेरी चुत में अन्दर घुसा और उसी पल मेरे मुँह से एक चीख निकल पड़ी- अया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … मर गई.
वो मुझे डांटता हुआ बोला- चुप साली रंडी … अभी थोड़ी देर में तुझको भी मजा आने लगेगा.

इसके बाद उसने एक और धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी चुत के अन्दर चला गया. मैं फिर से दर्द से चीख उठी- आह मर गई … प्लीज़ प्लीज़ … अब रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है … आ … अया … अया.

वो कमीना मेरी एक ना सुनने वाला था. दूसरे ही पल उसने एक और धक्का दे मारा. इस बार उसका लंड पूरा मेरी चुत में चला गया. मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था. क्योंकि पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड अपनी चुत में लिया था.

वो थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रुका रहा. फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. अब मुझे भी दर्द कम होने लगा था और मैं मजे लेने लगी थी. वो अब अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल कर चुदाई कर रहा था. वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को अब भी जानवरों की तरह रगड़ रहा था.
मुझे मजा आने लगा और मेरे मुँह से आनन्द भरी सिसकारियां निकलने लगी थी- आह … ससस्स … आहह. … सस्सस्स.

फिर वो मुझसे बोला- साली रंडी पहले तो नखरे दिखा रही थी और अब लंड के मज़े ले रही है. आज तू देख … तेरी चुत का में गड्डा बना दूँगा.
तब मैं बोली- चोद कमीने … और ज़ोर से चोद … फाड़ दे मेरी चुत को मादरचोद … आज मुझे रगड़ रगड़ कर चोद ताकि मैं 2 दिन तक सही से चल ना पाऊं.
वो धक्के देते हुए बोला- साली रंडी आज तुझको ऐसे ही चोदूंगा … तू देखती जा बस … आज के बाद तू मुझसे ही चुदाएगी रोज … ले रंडी ले.

और उसने धक्कों की स्पीड तेज़ कर कर दी और मेरे मुँह से ‘स्सा … आ … अया … इस्स … इस्स्स्स.’ की आवाज़ तेज़ी से आने लगी और मैं कमर उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी. मैं भी चुदाई की जन्नत की सैर का मजा लेने लगी- आह चोद दे साले कमीने … आ … आह … ऐसे … ही … पेल पूरा … हां … ऐसे चोद मादरचोद मुझे … फाड़ दे मेरी चुत को!

कोई 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गया और ढेर हो गया. इस बीच मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

वो मुझसे बोला- बता मेरी जान … मजा आया कि नहीं?
मैं उसे चूमते हुए बोली- बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा.

फिर दस मिनट के बाद उसका लंड वैसे ही तन गया और मुझे इस बार अपने ऊपर बैठने को बोला. वो बेड पर चित लेट गया. मैं उसके खड़े लंड के ऊपर चुत फंसा कर बैठ गई. मैंने उसके मूसल लंड को अपने अन्दर ले लिया.

अब वो मुझे हवा में उठा उठा कर चोद रहा था. अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहा था.

मुझे उसके लंड से चुदने में बहुत मजा आ रहा था. मैं लगातार 20 मिनट तक ऐसे ही चुदती रही. फिर हम दोनों झड़ गए और ऐसे ही 20 मिनट तक पड़े रहे. आज उसने मुझे जन्नत की सैर करवा दी थी. आज मैं बहुत खुश थी.

मैं उससे बोली- तुम मुझे ऐसे ही रोज चोदा करो … मेरा नामर्द पति कुछ नहीं कर पाता.
वो मेरी चूची दबा कर बोला- तू चिंता मत मेरी रांड … मैं अब तेरी चुत को भोसड़ा बना दूँगा. मैं अपने साथ अपने दोस्तों से भी तुझे चुदवाऊंगा और तेरी चुत को चबूतरा बना दूँगा.

उसकी बात से मैं पहले तो डर गई और बोली- नहीं तुम अकेले ही आना … किसी और को मत लाना … कहीं मेरे पति को पता चल गया, तो उन्हें बहुत गुस्सा आएगा.
वो बोला- साली रांड मुझसे चुदवा रही है, तब तेरा पति क्या तेरी आरती उतारेगा. होने दो भोसड़ी वाले को गुस्सा. अब चुपचाप जो मैं बोलूं, वही करना. मैं जिसको भी तेरी चुत चुदाई के लिए लाऊंगा, तुम बस उससे अपनी चुत चुदवा लेना.

मैं एक बार को तो खुश हो गई कि अब तो बदल बदल कर लंड मिलेंगे.

वो कहता जा रहा था- जो भी तुमको चोदना चाहेगा … उससे हजार रूपए भी वसूल लेना. समझो अब तुम मेरी रंडी हो गई हो.
मैं कुछ नहीं बोली और वो मुझे किस करके चला गया.

फिर बाद में वो अपने दोस्तों को लाता और वो लोग मुझे रंडी बना कर चोद देते.

कुछ ही दिनों में सब्जी वाले और उसके दोस्तों ने मेरी चुत का भोसड़ा बना दिया. उनका जब भी मन होता, वे आ जाते और मुझे चोद कर चले जाते. मुझे भी लम्बे लम्बे बड़े बड़े लंड से चुदने में मजा आने लगा था. मैं बहुत खुश रहती थी. मैं समझती हूँ कि एक नामर्द की बीवी को सही मायने में औरत होने की ख़ुशी इन्हीं लोगों से चुदने से मिलती थी.

मैं चुद चुद कर इन लोगों की रंडी बन गई थी … मेरे पति को अब तक पता नहीं चला था.

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उनका लंड मेरी चूत में चला गया।

हैलो दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है और मैं शामली की रहने वाली हूँ.. मैं अक्सर यहाँ हिंदी सेक्स कहानी और भैया से चुदाई कहानी पढ़ने आती हु..  आज आपके साथ मैं अपनी सच्ची कहानी बाँटने जा रही हूँ। सबसे पहले मैं आपको आपने बारे मैं बता दूँ.. मेरा फिगर 34-30-34 है। हम 3 बहनें और 1 भाई हैं। एक बहन मुझसे बड़ी है और एक मुझसे छोटी है.. भाई सबसे छोटा है।

यह बात आज से 3 साल पहले की है। जब मैं अपनी बुआजी के यहाँ घूमने गई थी और बुआजी बीमार भी थीं.. तो मैं वहाँ एक महीना रहने के लिए आई थी।

ठंड के दिन थे.. जनवरी का महीना था।

वहाँ मेरे भैया यानि की बुआजी के लड़के थे.. जो मुझे देख कर बहुत खुश हुए।

उनका नाम सचिन है.. वो मुझे अपनी सबसे अच्छी बहन मानते थे और मुझे बहुत प्यार करते थे।

जब मैं बुआ के घर पहुँच गई तो फूफा जी बुआ को हस्पताल दिखाने ले गए और उनको वहीं भरती कर देना पड़ा और वो घर वापस नहीं आ पाईं और उस रात को घर में सिर्फ हम दोनों ही थे, वो भी अकेले..

रात को खाना खा कर जब हम दोनों सोने चल दिए तो भैया ने कहा- दो बिस्तर की क्या जरूरत है.. आज एक बिस्तर में ही सो जाते हैं।

तो हम दोनों एक बिस्तर में ही लेट गए।

भैया को कपड़े निकाल कर सोने की आदत है.. तो वो कपड़े निकाल कर मेरे पास आ कर लेट गए।

मुझे बहुत अजीब सा लगा.. क्योंकि मैं आज तक किसी लड़के के साथ ऐसे नहीं लेटी थी।

भैया मेरी पढ़ाई के बारे में पूछने लगे और अपनी पढ़ाई के बारे में बताने लगे।

थोड़ी दर बात करने के बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं भैया से कह कर सोने लगी।

वे भी सोने लगे।

अभी कुछ ही देर हुई होगी कि भैया का लंड मेरे पीछे मेरी गाण्ड में घुसने तो तैयार सा लगा।

तो मैंने अपने हाथ से हटाने के बहाने उसे छू कर देखा.. तो वो बहुत मोटा और लंबा था और गरम भी हो रहा था।

भैया भी अभी तक सोए नहीं थे।

जैसे ही मैंने उनके लंड को छुआ तो उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मुझे चुम्बन करने लगे।

मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि ये सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था।

मैं भी उनको चुम्बन करने लगी।

भैया ने पूछा- तेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड है क्या?

तो मैंने मना कर दिया। वैसे भी मेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड था भी नहीं..

भैया मुझे चुम्बन करते रहे, वे कभी गालों पर चूमते, कभी मेरे होंठों पर.. कभी पेट पर..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत गीली हो गई थी।

थोड़ी देर बाद भैया ने मेरी सलवार में अपना हाथ डाल दिया। मुझसे भी रहा नहीं गया तो मैंने भी उनके अंडरवियर में हाथ डाल दिया।

फिर भैया ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैन्टी नीचे करके मेरी चूत को चाटने लगे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर भैया ने मुझसे कमीज उतारने को कहा तो मैंने बिना देर किए अपना कमीज उतार दिया और ब्रा भी उतार दी।

अब मैं बिल्कुल नंगी भैया की बाँहों में थी। वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और पी भी रहे थे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर बाद भैया अपना लंड हाथों में लेकर बोले- अब इसे अपने मुँह में ले ले।

मैंने कभी ऐसा किया नहीं था तो मैंने मना कर दिया।

उन्होंने अपनी कसम दी.. तो मैंने उनका लंड अपने मुँह में ले लिया।

थोड़ी देर चुसवाने के बाद उन्होंने अपना सारा माल मेरे मुँह में निकाल दिया।

फिर हम थोड़ी देर चुम्बन करते रहे।

चूमा-चाटी के बाद भैया का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो मेरी चूत पर लवड़ा रख कर मुझसे बोले- मुझे होंठों से चुम्बन कर और नीचे अपनी जाँघों को ढीला कर..

मैंने ऐसा ही किया.. कुछ पलों तक चुम्बन करने के बाद उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा उनका आधा लंड मेरी चूत में चला गया।

मुझे बहुत दर्द हुआ.. मेरी चीख निकल जाती.. अगर भैया के होंठ मेरे होंठों में ना चिपके होते।

मेरी चूत से खून भी निकल रहा था..
इससे पहले मुझे थोड़ा आराम मिलता.. कि भैया ने एक और धक्का मारा.. अब पूरे का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।

फिर थोड़ी देर बाद जब मैं सामान्य हुई तो उन्होंने मुझसे पूछ कर धक्के मारने शुरू कर दिए।

करीब 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैं और भैया एक साथ झड़ गए।

भैया ने अपना लंड और मेरी चूत मेरी पैन्टी से साफ़ की और मुझे दर्द की गोली ला कर दी।

उस रात भैया ने मुझे 3 बार चोदा.. चुदाई करने के बाद हम नंगे ही सो गए।

बुआजी दो दिन बाद आईं.. इन दो दिनों में हमने खूब मज़े किए।

एक बार तो मैं दिन में रसोई में भी चुदी…

उस दिन के बाद भैया मेरे लवर बन गए और भी एक साल बाद मैं दोबारा बुआजी के घर गई तो बुआजी और फूफाजी कहीं बाहर चले गए तो भैया ने मेरी माँग भर दी और मुझे अपनी घरवाली बना लिया.. वे मुझे साड़ी पहनाने लगे।

मुझे साड़ी पहना कर उन्होंने मुझसे कहा- आज हमारी सुहागरात है।

हमने सुहागरात मनाई।

आज भी हम दोनों सब के सामने भाई-बहन हैं और अकेले में पति-पत्नी की तरह रहते हैं।

अब मेरे भैया मेरी जान बन गए हैं।

मैंने उनका नाम प्यार में ‘जानू’ रखा है। हमें जब भी मौका मिलता है चुदाई जरूर करते हैं।

तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। कैसी लगी आपको..

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दारुबाज पति ने लॉक डाउन में दोस्तों से चुदवाया

दोस्तों कई रिश्ते ऐसे होते हैं जिसपर भरोसा होता है की वो जो भी करेगा भले के लिए करेगा पर कई बार ये बचाने वाला ही कई बार बेच देता है। ऐसा ही मेरे साथ आजकल हो रहा है। घर में खाने को नहीं है पति को दारू भी रोजाना चाहिए घर में राशन नहीं है। पति ने कहा आजकल मेरा काम नहीं चल रहा है। इसलिए अब तेरे पर ही आशा है। ये सब कहकर मुझे फंसा दिया और सौंप दिया अपने दोस्तों को। अब मेरी चुदाई रोज हो रही है। आह आह की आवाज और पलंग टूटने की आवाज शायद उसको भी सुनाई पड़ता होगा। क्यों की मैं कमरे में चुदती हूँ और वो बाहर सोया रहता है।

आप खुद सोचिये किसी की बीवी कमरे में आह आह आह ओह्ह ओह्ह ओह्ह और जोर से और जोर से चोदो कहे और उसका पति ये सब चुपचाप सुनता रहे उसको आप क्या कहेंगे।

दोस्तों एक बात और मैं आपको बता देना चाहती हूँ। ये सब मज़बूरी में उठाया गया कदम था पर ये मज़बूरी अब मुझे अच्छी लगने लगी है। मैं खुश हूँ चुद कर। क्यों की जब इसमें मजे आने लगे और मेरी जरुरत भी पूरी होने लगे और खुद मैं भी मजे करूँ तो क्या बुराई है।

अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ और बताती हूँ कैसे क्या हुआ।

रमेश गुर्जर मेरे पति के दोस्त हैं। बहुत पैसे वाले हैं। मेरा पति एक छोटी सी नौकरी करता है। आजकल काम बंद है तो घर पर ही है मालिक ने पैसे भी नहीं दिए मेरी कोई बच्चा अभी तक नहीं है शादी के तीन साल हो गए हैं। हॉट हूँ सुन्दर हूँ और ज्यादा उम्र भी नहीं हुआ है कम उम्र में शादी हो गई है। पर पति की उम्र ज्यादा है आजतक कभी भी वो मुझे चुदाई में खुश नहीं कर पाया जब तक मैं गरम होती हूँ तब तक वो ठंढा हो चुका होता है।

लॉक डाउन में रमेश जी मेरे घर का काफी ख़याल रखे हैं। पति को भरपूर मदद किये है। पति को दारु से लेकर घर के खर्चे और घर किराये तक का सभी का इंतज़ाम उन्होंने किया और नकद भी मदद किया।

रमेश जी की शादी इसी साल हुई है पर बीवी अब उनके साथ नहीं है पुराने यार के साथ भाग गई है। और मेरे पति को मदद करने का कारन शायद मैं हूँ। उनकी निगाहों जालिमो वाली मेरे ऊपर हमेशा से ही रहा है पर करीब नहीं आये शायद वो लम्बे रेस का घोडा बनना चाहते हैं इसलिए सब कुछ धीरे धीरे कर रहे हैं।

एक दिन उन्होंने पति को अपनी जाल में फंसा लिया और मुझे सौंपने के लिए राजी कर कर लिया। मेरे पति को भी शायद इसकी जरुरत थी। मेरे पति को भी लगता था की मैं भाग जाउंगी क्यों की वो ना मेरे खर्चे पूरा कर पा रहा था ना तो मेरी चुदाई कर पा रहा था। इसलिए सेफ साइड से वो रमेश जी को मेरी ज़िंदगी में घुसाना चाह रहा था। ताकि मैं भी रह जाऊं और सब काम भी हो जायेगा और आजकल का समय भी गुजर जाये।

एक दिन पति को खूब दारु पिलाया उन्होंने देर रात तक मेरे यहाँ भी रहे जब मेरा पति उलट गया पी कर तब वो मेरे करीब आ गए। और मेरा हाथ पकड़ लिए। और कहने लगे मैं वो सारी ख़ुशी आपको दूंगा जो आपके पति नहीं दे पाए और सच तो ये है की मैं उनको भी आगे बढ़ाऊंगा। आप इसको गलत मत लेना। पर मैं आपको बहुत चाहता हूँ और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ। पहले तो लगा की शायद ये गलत है पर सोची की गलत क्या है इसमें ? मुझे वो सारी खुशियां मिल जाएगी तो मैं भी राजी हो गई।

मैं चुप रह गई और अपने आँचल को निचे कर दी बड़ी बड़ी चूचियां गोल गोल और टाइट। होठ मेरे फड़फड़ा रहे थे मेरी साँसे तेज हो रही थी। ऐसा लग रहा था आज मेरी सुहागरात है। दोस्तों मैं डर भी रही थी और खुश भी थी। ये मौक़ा मैं खोना भी नहीं चाहती थी। पर एक कोने में ये भी बात था की ये गलत है। ये सब सोचते सोचते सोचते लेट गई।

रमेश जी दरवाजा बंद कर दिए मेरा पति बरामदे पर सो गया था पी कर। रमेश जी मेरे करीब आये और ब्लाउज का हुक खोलने लगे और एक ऊँगली को मेरे होठ पर फिराने लगे। मेरे रोम रोम सिहर रहे थे। अजीब सा लग रहा था कंठ सुख रहे थे। उन्होंने ब्लाउज का बटन खोल दिया मैं साइड उल्ट गई वो हुक ब्रा का भी खोल दिए मैं ब्रा खुद से उतार दी और निचे गिरा दी।

मेरी चूच ऐसी है जैसे किसी अठारह साल की लड़की का हो। ऐसा लगता है जैसे आजतक किसी ने टच नहीं किया हो। गुर्जर मेरी चूच देखकर ही फ़िदा हो गया। वो तो टूट पड़ा चूच पर पीने लगा दबाने लगा खेलने लगा। फिर मैं साडी निचे फेंक दी और पेटीकोट का नाडा खोल दिया। बाकी पेंटी तो रमेश जी खुद उतार दिए। और मेरी चूत की बाल को चाटने लगे और चूत में जीभ घुसाने लगे। मैं तर बतर होने लगी। पसीन निकलने लगे मेरे माथे से।

चूत गीली हो गई। अब वो अपने सारे कपडे उतार दिए। अपना मोटा लौड़ा मेरी दोनों चूचियों के बिच रगड़ने लगे फिर वो मेरी मुँह में दे दिया। करीब दो मिनट में ही उनका लौड़ा मोटा और करीब आठ इंच लंबा हो गया।

अब वो चुदाई के लिए तैयार थे और मैं भी अपनी चुदाई के लिए तैयार थी। मैं दोनों पैरों को अलग अलग कर दी। वो बिच में आ गए अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के बीचोबीच रखे और जोर से घुसा दिए। मैं तकिये को जोर से पकड़ ली। फरफरा गई दर्द से। कहा तीन इंच का छोटा लंड मेरे पति का और आज आठ इंच का लैंड और तीन इंच मोटा। पहली बार गया।

दो तीन चोट उन्होंने मारा और फिर चूत भी गीली हो गई थी। अब लौड़ा अंदर बाहर होने लगा। मैं आह आह करने लगी। करंट लग रहा था पुरे शरीर में। आज मुझे असली मर्द मिला था। लॉक डाउन में तो मेरी मनोकामना पूर्ण हो रही थी। और घर में खुशियां भी आ रही थी।

अब वो जोर जोर से चोदने लगे और मैं भी अपनी वासना की आग बुझाने लगी शर्म छोड़कर। मैं खुद ही चूचियां दबाती उनको किस करती। उनके छाती को सहलाती और चुदवाती। मैं काफी जोश में आ गई थी। इसलिए आवाज तेज हो गई और कहने लगी चोदो मुझे चोदो खूब चोदो। मैं चाहती हूँ मेरे बच्चे का बाप भी आप ही बनो। आह आह आह आह घुसाओ पूरा और घुसाओ। कितना मोटा लौड़ा है आपका गुर्जर जी मजा आ गया आज मेरी प्यास बुझ गई है।

आप मुझे रोजाना चोदना और मेरे घर पर भी ध्यान रखना पति को भी खुश रखना ताकि वो सौंपे आपको और आप मुझे खूब चोदो ऐसे ही चोदो मेरी रात आप ही रोजाना रंगीन करो। मैं आपको प्रेमिका आपकी रखैल बन्ना चाहती हूँ। अब मैं आपकी हूँ आप चाहे तो चूत मारो या गांड मैं मना नहीं करुँगी। और आह आह आह करने लगी।

तभी मेरा पति जग गया दरवाजा खटखटा कर बोला। धीरे बोल ले बाहर तक आवाज आ रही है। पर मैं कहा रुकने वाली मैं बोली सो जा तू। आज मुझे अपनी गर्मी बुझा लेने दे।

दोस्तों फिर उन्होंने उलट कर पलट कर खड़ा कर के निचे बैठा के ऊपर लेके खूब चोदा और मैं भी खूब चुदवाई। करीब रात के ढाई बज गए थे। फिर हम दोनों एक साथ ही नंगे सो गए।

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मैं लंड की प्यासी हूँ

दोस्तों आज मैं आपको अपनी व्यथा सुनाने जा रही हूँ। मुझे लंड चूसने की आदत है। और मुझे ऐसा कोई मर्द नहीं मिला जो मुझे २ घंटे तक चोद सकते। मैं लंड की प्यासी हूँ चुदाई की प्यासी हूँ। मैं क्या करूँ समझ नहीं आता है। जब तक चुदती नहीं हूँ तब तक मुझे मन नहीं लगता है। जी घबराने लगता है और चूत में खुजली होने लगती है।

आज मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रही हूँ। पति तो चोद सकता नहीं है तो कैसे अपनी प्यास कुमार जी से मिटा रही हूँ। और मैं कैसे उनको मजबूर कर देती हूँ चुदाई की लिए और क्या क्या करती हूँ जब वो मुझे चोदते हैं आपको पूरी कहानी बताने जा रही हूँ।

मेरे प्यार दोस्तों, मेरी शादी के आठ साल हो गए। मैं लव मैरिज की हूँ। शादी तक मुझे ऐसा नहीं लगता है यानी मैं ज्यादा चुड़क्कड़ स्वाभाव की नहीं थी पर इधर जब से इंटरनेट की दुनिया में कदम रखी हूँ तब से मैं बैचैन हूँ अपनी चुदाई को लेकर।

जब से मुझे पोर्न का चस्का लगा और जब से सेक्स कहानियां पढ़ने लगी हूँ तब से मेरी चूत गीली की गीली ही रहती है। और कोई चोदने वाला नहीं है। चुदाई तो अभी भी मेरी रोज होती है पर ऐसे मर्द की तलाश ही जो मुझे खुश कर सके मुझे चोद सके.

पति से आजतक संतुष्ट नहीं हुई तो। मैं अपने फ्लैट के निचे ही एक आदमी है हॉट और सेक्सी। उनसे मैं इंटरनेट मार्केटिंग सिखने के बहाने मैं जाने लगी पति भी मुझे जाने को कह दिए। उनके यहाँ उनकी पत्नी है वो स्कूल जाती है पढ़ने तो घर में होती नहीं है वो चार बजे आती है। मेरे पति भी दस बजे चले जाते हैं तो मैं भी फ्री हो जाती हूँ।

और कुमार जी का घर से ही काम है तो घर पर ही रहते हैं तो मेरे लिए तो ये सब अच्छा हुआ और मैं उनके यहाँ सिखने जाने लगी। धीरे धीरे बात आगे बढ़ी और मेरे जिस्म तक पहुंच गई। जिस्म तक पहुंचने में देर नहीं लगने का ये भी कारन था, की मैं खुद ही चुदाई की प्यासी तो मुझे तो लंड चूसने को मिलना चाहिए था। और चूत की गर्मी को शांत करने चाहिए थे। इसलिए मैं भी जल्द ही उनके करीब आ गई।

एक दिन की बात है। मेरे पति बाहर गए थे यानी दिल्ली से बाहर। और कुमार जी की पत्नी भी सरकारी काम से बाहर गई थी दो दिन के लिए। यानी कोई डर की बात नहीं था की कोई आ जायेगा।

बस ये दिन मेरे लिए बेहतरीन था। सुबह दस बजे उनके यहाँ गई तो वो नहा ही रहे थे। दरवाजा खुला हुआ था तो मैं अंदर चली गई। वो नहा कर आये। निचे तौलिया लपेटे थे, बदन पर कपडे नहीं थे। ऊपर से खुशबु डेनिम साबुन की मैं निहारने लगी और मेरे मन में उनको पानी की इच्छा होने लगी। वो मेरे करीब आने लगे और मेरी धड़कन तेज होने लगी।

वो मेरे करीब आ गए करीब से मेरे होठ को निहारने लगे। मेरे होठ लड़खड़ाने लगे। हिलने लगे मेरी नजरें झुकने ही वाली थी की वो मेरी ठुड्ढी को निचे से सपोर्ट देकर मुझे अपने और देखने को मजबूर करने लगे।

मैं रह नहीं पाई क्यों की मैं खो गई थी अपने आप में। मैं अपना होठ आगे कर दी और आँखे बंद कर ली। उन्होंने मेरे बाले पीछे से पकड़ लिए और अपने करीब ले आये मुझे मेरी साँसे तेज हो गई थी उनकी भी साँसे तेज तेज चल रही थी और फिर मेरे होठ को अपने मुँह में ले लिए और चूसने लगे।

मेरी गुलाबी होठ उनके मुँह में था मेरी साँसे तेज हो गई थी। आँखे बंद थी मैंने भी अपना हाथ उनके सर के पीछे लगाया और फिर उनके होठ को चूसने लगी। करीब पांच मिनट में ही हम दोनों वाइल्ड हो गए। उन्होंने मुझे पलंग पर लिटा दिया।

ऊपर चढ़ गए मेरे होठ को चूसते हुए अपने दोनों हाथों में मेरी दोनों हाथों की उँगलियों को जकड लिया और पीछे के तरफ कर दिया हम दोनों के हाथ लॉक हो चुके थे मुझे चूम रहे थे।

तभी उन्होंने मुझे बैठाया और मेरे कपडे उतारने लगे. मैं भी कुछ नहीं बोली उन्होने मेरी कुर्ती उतार दिया और मेरी ब्रा भी खोल दिया। उनका तौलिया खुल गया था वो मैं उनके लंड को देख पा रही थी सांप की तरह फनफना रहा था। मोटा और करीब आठ इंच लंबा। मैं देख कर पानी पानी हो गई। पहली बार इतने मोटे और लम्बे लंड को देख रही थी।

दोस्तों मैं खुद ही अपने से निचे के लेग्गिंग्स को उतार दी और चड्ढी भी खोल दी। दूधिया जिस्म जिसपर गोल गोल सुन्दर दो चूचियां। गोरे बदन पर काले काले बाल मेरी चूत पर ऐसा लग रहा था रेगिस्तान में घांस उग गया हो। दोस्तों उन्होंने मेरे जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया और मेरे होठ से लेकर मेरे पैर के अंगूठे तक चूमने लगे।

अब बर्दास्त नहीं हो पा रहा था तो खुद ही अपने पैरों को अलग अलग कर ली वो निचे हो गए अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया। और जोर से पेल दिया पूरा लौड़ा मेरी चूत के अंदर चला गया इससे कहते है देसी चुदाई दोस्तों मैं मजे में थी अंग अंग अंगड़ाइयां ले रही थी और वो हौले हौले धक्के देने लग। मैं आह आह आह आह आह कर रही थी होठ मेरे सुख रहे थे। मैं चुदाई का आनंद लेने लगी।

वो जोर जोर से देने लगे मेरा पूरा बदन हिल रहा था उनके जोर जोर से झटके से। मैं चुद रही थी उनको निहार रही थी अपनी चूचियां खुद ही दबा रही थी। दोस्तों फिर क्या था मैं जैसे जैसे कहती गई वो वैसे वैसे चोदते गए। कभी आगे से कभी पीछे से कभी खड़ा कर के कभी बैठ कर कभी मैं ऊपर कभी वो ऊपर।

दोस्तों पानी पानी हो गई। खूब चोदा उन्होंने।

अब दूसरे दिन से सीखना गया तेल लेने। उनके घर पहुंचते ही वाइल्ड तरीके से एक दूसरे को चूमने लगती। और फिर बिस्तर तक पहुंच जाती। दिन भर उनके बाहों में सोये रहती। मेरा समय होता है और मैं वापस अपने घर आ जाती।

अब उनकी बीवी भी आ गई है। तो उतना समय नहीं मिल पाता है फिर भी उन्हें सरकारी काम से अब भी जाना पड़ रहा है। जब वो बाहर रहती है तब तक मैं उनको अपनी जिस्म सौंपते रहती हूँ।

पर दोस्तों अब मुझे वह से भी पूरा नहीं हो पा रहा है। मैं ऐसे मर्द की तलाश में हूँ जो मुझे दिन भर चोदे देखिये अब मेरी मनोकामना कब पूर्ण होती है।

अपनी दूसरी कहानी जल्द ही आपको सुनाने वाली हूँ तब तक आप और भी कहानियां पढ़िए, मजे कीजिये मूठ मारिये।

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मेरी चूत को अपने जीभ से चाटने लगे

 मैं दिल्ली में रहती हूँ, आज मैं आपको अपनी चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ। क्यों की मैं भी  रोजाना नई नई सेक्स कहानियां पढ़ती हूँ। यही एक वेबसाइट है जहाँ पर हॉट सेक्स स्टोरी होती है।

मेरी उम्र 19 साल है। मुझे चुदने का बहुत मन करता था पर चुदती कहाँ? क्यों की आजकल लोग ब्लैकमेल भी करते हैं। रात रात भर कई बार नींद नहीं आती थी चूत सहलताती थी तो कभी चूचियां खुद ही दबोचती मसलती पर इससे कुछ भी नहीं होता है उलटे सेक्सी और कामुक हो जाती थी और फिर रात भर सपने में कोई चोद रहा होता था तो तकिये को दबा के सो जाया करती थी। जब कॉलेज जाती थी तो मेरी सहेलियां कहानी सुनाती थी। मेरा बॉय फ्रेंड आज पार्क में चोदा तो मेट्रो में किस किया तो कभी कहती थी आज होटल में जा रही हूँ चूत की खुजली ख़तम करने के लिए।

ये सब कहानी जब सुनती थी की कैसे उसका बॉय फ्रेंड उसको चोदता है चूमता है गांड मारता है चूचियां दबाता है तब और भी कामुक हो जाती थी और फिर मुझे भी चुदने का मन करने लगता था। मुझे एक उपाय सूझी। मेरे पड़ोस में एक भैया रहते थे। उनकी बीवी गाँव गई थी क्यों की वो प्रेग्नेंट हो गई थी। मैं उनके यहाँ गई क्यों की वो कंप्यूटर इंजीनियर हैं। मैं उनको अपना लैपटॉप दिखाई क्यों की मेरा लैपटॉप काम नहीं कर रहा था। उन्होंने ठीक कर दिया।

फिर मैं बराबर उनके यहाँ जाने लगी। कभी लैपटॉप ठीक कराने, कभी सॉफ्टवेयर डलवाने, तो कभी कुछ पूछने। मेरा इरादा तो कुछ और था पर कामयाब नहीं हो पा रही थी। सोचती थी कही वो मना कर दिया तो क्या होगा।

एक दिन की बात है। मेरे मम्मी पापा और भाई दोनों मामा जी के यहाँ हरिद्वार गए थे। मैं घर पर अकेली थी। मैं रात के करीब 9 बजे उनके यहाँ लैपटॉप लेकर पहुंच गई। और ये भी ध्यान में रखी की कोई रस्ते में देख ना ले। मैं उनके घर पहुंच गई और भगवान् ने भी मेरा साथ दिया उस समय बिजली चली गई थी। तो रस्ते में अँधेरा थे मैं अँधेरे में ही उनके घर पहुंच गई। वो उस समय मोबाइल पर गाने सुन रहे थे और मोमवत्ती जल रही थी।

मैं पहुंची उनके यहाँ तो वो उठकर खड़े हो गए और बोले लाइट नहीं है। देखो कब आती है। तो मैं बोली कोई बात नहीं मैं इंतज़ार कर लेती हूँ और मैं उनके बेड पर बैठ गई। इधर उधर की बातचीत होने लगी। और फिर पढ़ी को लेकर चर्चा चलने लगा। मैं बात करते करते इमोशनल हो गई की मैं नीट की तैयारी करना चाहती थी पर पापा ने मुझे नहीं कहा और फिर रोने लगी। वो मेरे पास आपकर बैठ गए। मैं कुछ ज्यादा ही एक्टिंग करने लगी की मैं बहुत दुखी हूँ और सिसकने लगी। वो मुझे चुप कराने लगे। और धीरे धीरे वो मेरे पीठ को सहलाने लगे। मुझे नहीं पता क्या चल रहा था उनके मन में पर हां ये तो सही थी की उस समय वो मुझे सांत्वना दे रहे थे।

तभी मैं उनके तरफ देखी वो भी मुझे देखे और फिर मैं उनका हाथ पकड़ ली और अपनी उँगलियाँ उनके उँगलियों में फंसा दी। उनका होठ मेरे होठ के तरफ बढ़ा और मैं भी अपना होठ बढ़ाई उसके बाद मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और उन्होंने अपने होठ से मेरे गुलाबी होठ पर मुहर लगा दी। फिर क्या था दोस्तों मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी धड़कन बढ़ गई थी। उनका हाथ मेरे बूब्स पर जैसे पड़ा मैं सिहर गई। उन्होंने हौले हौले से बूब्स को दबाने लगे। मैं तो तार तार हो गई थी। इतनी जल्दी मेरी चूत गीली हो गई समझ में नहीं आया। दोस्तों मेरे होठ लाल हो गए थे चूचियां बड़ी और टाइट हो गई थी।

मेरे पुरे बदन में सिहरन हो गई थी। मैं अपने सीने से उनको दबोच ली। और वो मेरे ऊपर चढ़ गए। मैं अपना बाल खोल दी और वो मेरे होठ को चूसते हुए अपने हाथों से मेरे जिस्म को टटोल रहे थे। मैं पागल हो रही थी यही चाहती थी। सपने इसी के देखे थे मैंने। आज डर भी नहीं था मेरे घर में कोई नहीं था। आज आराम से चुदवा सकती थी और मेरे सपने पुरे हो रहे थे।

दोस्तों कुछ ही देर में हम दोनों कामुकता की हद को पार हो गए और एक दूसरे के जिस्म को टटोलते हुए हम दोनों कपडे उतार दिए। मेरी जवानी अब चुदने को तैयार थी। मेरा गोरा बदन बेड पर संगमरमर की तरह चमक रही थी। मेरी नशीली आँखे वासना से भरी हुई थी मैं खुद से भी अपने चूचियों को दबा रही थी और अपने निप्पल को ऊँगली से मसल रही थी। उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अलग अलग कर दिया और बिच में बैठ कर मेरी चूत निहारने लगे। उन्होंने ऊँगली से छुआ चूत गीली हो चुकी थी। गीली चूत से पानी ऊँगली में लगाया उन्होंने और फिर ऊँगली को अपने मुँह में डाला। और उनके मुँह से एक ही शब्द निकला “गजब”

मैं मुस्कुरा उठी और सरमा गई। दोस्तों फिर उन्होंने एक सिसकारी ली और फिर मेरी चूत को अपने जीभ से चाटने लगे। मैं सिहर रही थी मेरे बदन में गुदगुदी हो रही थी। मैं मचल रही थी। वो मेरी चूत को चाटते ही जा रहे थे। मेरे मुँह से आह आह आह की आवाज निकलने लगी और वो भी बड़े आराम से मेरी चूत से निकलने वाली पानी को चाट रहे थे।

फिर उन्होंने ऊपर चढ़ कर मेरे बूब्स को पीना शुरू किया मुझे दर्द भी हो रहा था और अच्छा भी लग रहा था। फिर उन्होंने अपना जीभ मेरे मुँह में डाल दिया और मैं उनके जीभ को चूसने लगी। दोस्तों मेरा पूरा बदन गरम हो गया था। मैं सपनों में थी। मेरी साँसे और धड़कन धीरे धीरे और भी ज्यादा होने लगी थी। मेरी चूच ऊपर निचे हो रही थी जब मैं साँसे लेती और छोड़ती तब।

उसमे बाद उन्होंने अपना लौड़ा निकाल मेरे मुँह में डाल दिया और मैं उनके लौड़े को अपने जीभ से चाटने लगी। फिर मैं पुरे मुँह में लेती और निकालती। वो अब आह अब उफ़ उफ़ उफ़ करने लगे ये मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उसके बाद फिर वो निचे चले गए और मैं टांग फैला दी बिच में वो लौड़ा सेट किये मेरी चूत पर और फिर जोर से झटके दिए पूरा लौड़ा मेरी चूत में समा गया।

फिर वो मेरी चूचियों को सहलाते हुए जोर जोर से चोदने लगे। मैं भी जोश म आ चुकी थी वो मेरी चूत को फाड़ रहे थे और मैं फड़वा रही थी। दोस्तों मैं अब अपना कमर उठा उठा कर धक्के निचे से दे रही थी और वो ऊपर से जोर जोर से फच फच कर चोद रहे थे। मेरे बाल बिखरे पड़े थे मेरी काजल फ़ैल चुकी थी। नशीली आँखे अब लाल हो गई थी और मैं फुल मूड में आ गई थी। अपनी नाख़ून से उनके पीठ पर कई निशान बना चुकी थी वो मेरे चूच पर अपने दांत का निशान भी छोड़ चुके थे यानी लव बाईट दोनों तरफ से दे चुके थे।

करीब एक घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर सो गए और एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे।

दोस्तों उस दिन के बाद से हम दोनों को जब भी मौक़ा मिलता चुदाई कर ही लेते हैं। अब मैं लंड की भूखी नहीं हूँ पर हां मुझे अब अलग अलग तरीके का लंड चाहिए। अब उसका भी इंतज़ाम कर रही हूँ आशा करती हूँ जल्द ही मुझे ये भी नसीब होगा।

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