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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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मेरा बदन

हेलो, मेरा नाम सोनाली है I मेरे बूब्स का साइज 32 और मेरे हिप्स का साइज 36 है मैं एकदम भरे हुए जिस्म की औरत हूं।
मुझे देखते ही सब मुझसे अट्रैक्ट हो जाते हैं और मुझे चोदने की ख्याल अपने मन में लाने लगते हैं.

मुझे एक व्यक्ति जिनकी उम्र 40 साल के आसपास रही होगी उनका ईमेल आया वह बहुत ही मैच्योर व्यक्ति थे। उनकी बातों से ही उनका अच्छापन, भलमानसत साफ झलक रहा था. उनकी ईमेल पर मुझसे बहुत अच्छी तरीके से बात हुई. फिर मैंने उन्हें हैंग आउट पर आने को कहा फिर हमारी हैंग आउट पर बात होने लगी.

उस दिन मेरी थोड़ी तबीयत खराब थी. आप समझ रहे हैं ना … लड़कियों की तबीयत हर महीने खराब हो जाती है. उस दिन मेरी तबीयत उसी तरह से खराब थी. मतलब लाल झंडी आई हुई थी.

मैंने उनसे कहा कि आज मेरी तबियत ख़राब है, बाद में बात करूंगी.

उन्होंने मेरी मजबूरी समझी और कहा- ठीक है सोनाली।
मुझे भी लगा कि वे अच्छे इंसान हैं.

फिर मैंने उन्हें एक दिन अपने पास मिलने के लिए बुलाया.
तो उन्होंने मुझसे कहा कि अभी तो मुझे टाइम नहीं है। जैसे ही मैं फ्री होता हूं मैं आपको बताता हूं, मैं आ जाऊंगा.

फिर उनकी और मेरी कॉल पर बात होती रही.

एक दिन उन्होंने मुझसे कहा- सोनाली जी, आप मेरे पास आ सकती हैं क्या?
मैंने उनसे कहा- ठीक है. बताइए कहां आना है मुझे?

और मैं उनके पास मिलने के लिए चली गई. उनकी उम्र 40-42 साल के आसपास रही होगी, थोड़े मोटे से थे लेकिन इंसान बहुत अच्छे थे। इसलिए उनके पास उनसे मिलने के लिए चली भी गई थी.

फिर वे मेरे पास आकर बैठे. उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और मेरे हाथ पर अपनी उंगलियां फिराने लगे.
मैं भी उनकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.

फिर वे मेरे बालों में अपनी उंगलियां फिराने लगे और मेरे होठों पर किस करने लगे. मैंने भी अपने हाथ उनके कंधों पर रख लिए थे और मैं उनके होंठ चूसने लगी.
हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे और एक दूसरे में इस तरह से खो गए हमें पता ही नहीं चला कि हमने कब एक दूसरे के कपड़े उतार दिए. तब हम एक दूसरे के बदन को चूम चाट रहे थे।

यह सब करने से मेरी वासना जाग उठी थी तो फिर मैं उनका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. उन्हें भी बहुत मजा आ रहा था. वे भी अपना लंड अपने हाथ में पकड़ कर मेरे मुंह में डालने लगे। थूक का लार मेरे होंठ और उनके लंड से चिपका पड़ा था।

फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर सीधा लेटा दिया और मेरी जांघें फैला दी. मुझे अच्छा तो लग रहा था लेकिन वो इस तरह से मेरी नंगी चूत को घूर रहे थे कि मुझे शर्म आने लगी. मैंने उन्हें रोका तो नहीं पर मैंने अपनी आँखें बंद कर ली.

उन्होंने अपनी उंगली मेरी चूत की दरार पर फिराई तो मेरा पूरा बदन झनझना गया. फिर उन्गोने मेरी चलित को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच में लेकर मसला तो मेरी सिसकारी निकालने लगी और मेरे चूतड़ अपने आप ही ऊपर को उठाने लगे.
अब तक मेरी चूत कामवासना से पानी छोड़ कर गीली हो चुकी थी और लंड लंड पुकार रही थी.

लेकिन जब मैंने उन्हें देखा कि वे तो मेरी नंगी चूत से खेलने में ही लगे हुए हैं तो मैंने अलसी और कामुकता भारी आवाजा में कहा- अब ऊपर भी आ जाओ ना.

उन्होंने मुस्कुरा कर मेरी आँखों में देखा तो मैं फिर शर्म से पानी पानी होने लगी.

मेरी कामुकता को भाम्प कर वे मेरी नंगी जाँघों के बीच में आये और अपना लंड मेरी चूत की दरार में रगड़ने लगे. अब मुझे गुस्सा आने लगा था कि ये मेरी चूत में अपना लंड घुसा क्यों नहीं रहे हैं.
आखिअर मैंने अपने कूल्हे ऊपर को उचकाये तो उनके लंड का सुपारा मेरी चूत के छेद में फंस गया.
आह … मजा आ गया था मुझे.

मेरी सिसकारी सुन कर उन्होंने एक धक्का लगा कर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया. और साथ ही बहुत तेज तेज धक्के मार मारने लगे.
तेज धक्कों से मुझे दर्द होने लगा, मैं चिल्लाने लगी.

मैंने उनसे कहा- प्लीज आराम से करिए!
फिर वे मुझे मजा दिलाने लगे. मेरे स्तनों पर वे अपना हाथ फिराने लगे.

फिर हमने बहुत देर तक ऐसे ही चुदाई की. उसके बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. वे मेरी कमर पर किस करने लगे और मेरे हिप्स पर मारने लगे. उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हारी कमर बड़ी गोरी है. एकदम चिकनी हो तुम! तुम्हारे पूरे शरीर पर कहीं भी बाल नहीं हैं. इतने बड़े बड़े बूब्स और साथ में चिकनी चूत और एक औरत चोदने में मजा आ रहा है.

मैंने भी हम्म कहकर उनके सवाल का जवाब दिया।

उन्होंने मुझसे कहा कि आज मैं तुम्हें बहुत चोदूंगा.
मैंने कहा- आप मुझे बहुत अच्छे लगे हैं, आप मुझे जितना मर्जी चोद लीजिए।

मेरी ऐसी गरम बातें सुनकर फिर उनको मजा आने लगा. उन्होंने मुझसे कहा- मैं अपने लंड का पानी तुम्हारे मुंह पर गिराना चाहता हूं.
तो मैं घुटनों के बल नीचे बैठ गई और वे अपने लंड से मेरे चेहरे पर मुठ मारने लगे और सारा पानी मेरे गोर चेहरे पर गिरा दिया।

फिर मैंने एक तौलिये से से अपना चेहरा साफ किया और ऐसे ही उनके पास आके बैठ गई।
हम दोनों ऐसे ही बेड पर नंगे लेट गए।

थोड़ी देर बाद उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा. अबकी बार उन्होंने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर लिया और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मेरी कमर को पकड़ कर आगे पीछे हिलाने लगे.
कुछ देर ऐसे ही करने के बाद फिर हम बेड पर आ गए. उन्होंने मुझे पेट के बल लेटा कर पीछे चूतड़ों की दरार से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया।

वे मुझे बहुत तेज तेज चोदने लगे. मैं उनके धक्कों का साथ पता नहीं कैसे-कैसे दे रही थी. मुझे ही पता है कि मैं उनके झटके कैसे झेल रही थी. पर अंदर ही अंदर मुझे मजा भी खूब आ रहा था.

और तभी उन्होंने मुझसे कहा- मैं इस बार तुम्हारी चूत में ही झड़ने वाला हूं.
मैंने उससे कहा- नहीं, आप अंदर नहीं करना क्योंकि हमने कंडोम नहीं लगाया था.
उन्होंने मुझसे कहा- नहीं, मुझे तो तुम्हारी प्यारी सी चूत के अंदर ही करना है और मुझे मजा आने वाला है.

मैंने उनसे कहा- ठीक है, कर लीजिए.

और उन्होंने मेरी चूत में ही अपना सारा गरम गरम पानी छोड़ दिया। मुझे उनका पानी अपने अंदर खूब महसूस हुआ।

करीब 1 घंटे में वह दो बार झड़ गए थे फिर हमारी कुछ देर तक ऐसे ही बैठ कर बातें होती रही।

एक डेढ़ घंटे बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया और उन्होंने मुझसे कहा- प्लीज मेरे लंड को एक बार सक करो!
और मैं उनका लंड फिर से एक बार अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.

जब मैं उनका लंड चूस रही थी तो उन्होंने मुझसे कहा- सोनाली, मुझे तुम्हारी गांड मारनी है.
मैंने कहा- नहीं, मैंने आज तक नहीं पीछे से नहीं मरवायी है।
मुझे गांड शब्द का इस्तेमाल करने में शर्म सी महसूस हुई.

उन्होंने मुझसे कहा- प्लीज, एक बार ट्राई करो ना!
मैंने उनसे कहा- ठीक है.

फिर वे एक लोशन लेकर आए और उन्होंने उसको मेरी गांड के छेद पर मल दिया और अपने लंड पर भी लगा लिया. फिर मेरी गांड के छेद पर लगाकर अपना सारा लंड एक ही झटके में मेरी गांड में उतार दिया।

मेरी तो जैसे चीख निकल गई मेरी आंखों में हल्के से आंसू भी आ गए थे।

फिर वे बहुत धीरे धीरे धक्के लगाने लगे और अपने हाथ से मेरी चूत को मलने लगे. मेरी चूत के दाने पर अपना हाथ फिराने लगे तो फिर मुझे थोड़ी सी राहत महसूस हुई और मुझे मजा आने लगा.
तब उन्होंने अपने धक्के की स्पीड थोड़ी सी तेज कर दी और मेरी गांड को भी जमकर चोदने लगे.

बहुत देर तक चोदने के बाद अब मेरी गांड खुल चुकी थी.

तब उन्होंने मुझसे फिर से अपना लंड चूसने को कहा.
मैं गांड से निकला हुआ लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। अजीब सी गंध आ रही थी लेकिन इन सब बातों में एक अजीब सा मजा था.

और फिर उन्होंने मुझे पेट के बल लेटा लिया और पीछे से कभी लंड मेरी गांड में डालते तो कभी मेरी चूत में डालते।
वे बहुत देर तक ऐसे ही मेरी चूत और गांड की चुदाई करते रहे.

फिर उन्होंने मुझे सीधी लिटा लिया और मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगे, मेरे जिस्म का चाटने लगे, काटने लगे, चूसने लगे. उन्होंने मेरे सारे जिस्म को लाल कर दिया था. मेरे बूब्स को चूस चूस कर भी उन्होंने लाल कर दिया था.

मेरे बाल खुल गए थे. आज मुझे पहली बार चुदाई में ऐसा महसूस हुआ कि जैसे आज से पहले मैं चुदी ही नहीं हूँ. इस जोरदार चुदाई में बहुत मजा आया मुझे.

उन्होंने मुझसे कहा- तुम बहुत सेक्सी हो. मेरा मन करता है कि तुम्हें खा जाऊं.
फिर वे पूछने लगे- तुम्हें भी रोज चुदने की आदत होगी?
मैंने उन्हें हम्म कहकर कर जवाब दिया।

अब उन्होंने फिर से मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझसे कहा- अब मैं तुम्हें मजा दिलाऊंगा. क्योंकि अगर मैं तुम्हें पहले ही मजा दिला देता तो तुम मुझे मजा नहीं दिलवाती. जैसे तुम अब चुदी हो तुम फिर वैसे नहीं चुदवाती।

इसलिए वह मेरी चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगे और आराम आराम से मेरे सारे जिस्म को चाटने लगे.

मेरा तो जैसे अब झड़ने का पूरा मन कर रहा था क्योंकि एक चुदने की हवस भी अब खत्म हो गई थी और अंदर कहीं ना कहीं मैं थक सी भी गई थी. अब मुझे चुद के झड़ के बस सोना था.

और मुझे धीरे-धीरे मजा आने लगा. मैंने अपने हाथों से उनके कंधों को पकड़ लिया और अपनी टांगों को उनके चूतड़ के ऊपर रख दिया. वे अंदर तक अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे।

मेरा बदन अकड़ने लगा था, मुझे मजा आने वाला था. मेरा मुंह खुल रहा था और मैं अपने मुंह से सांसें ले रही थी.

और मुझे मजा आ गया. जैसे ही मुझे पूरा मजा आया, मैंने अपना दांत हल्के से उनके कंधे पर गड़ा दिए और तेज तेज धक्के मारने लगी।

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आह चोद दे साले कमीने

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू श्रीवास्तव है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ. मेरी उम्र 34 साल है. मेरी साइज़ 36-32-38 की है. मेरा बदन पूरा भरा हुआ है. मेरे घर में मैं और मेरे नामर्द पति और मेरे दो बच्चे रहते हैं. मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं. वो मुझे बिस्तर में खुश नहीं कर पाते हैं.

एक दिन की बात मेरे पति ऑफिस गए थे और मैं नहा कर कपड़े ही पहन रही थी कि इतने में एक सब्जी वाला बाहर मेरे दरवाजे पर आवाज़ दे रहा था.
“मैडम सब्जी ले लो … हरी ताज़ी सब्जी है.”

मैंने साड़ी पहन कर बाहर जाकर देखा तो एक बड़ा मस्त मर्द सब्जी बेच रहा था. इसे मैंने पहले कभी अपने एरिया में नहीं देखा था. शायद नया सब्जी वाला था.

मैंने इधर-उधर देख कर उसको अपने पास बुलाया.
वो करीब आया तो मैंने पूछा- भैया आपकी उसका क्या रेट है?

मेरी इस दो अर्थी बात सुनकर वो मुझे ध्यान से देखने लगा. वो मैडम से सीधे भाभी पर आया और बोला- भाभी जी, आपके लिए तो सब रेट कम ही हैं.. आप तो बस बोलो कि क्या लोगी.
मैंने इठलाते हुए अपने चूचे हिलाए और बोला कहा- बड़े बड़े से वो दे दो.
वो बोला- क्या दे दूँ बड़े बड़े से?
मैंने- आलू दे दो … दो किलो.

उसने भी अपनी लुंगी में अपना लंड जरा सा सहलाया और मेरी तरफ देखता हुआ बोला- कैसे लोगी भाभी जी?
मैंने मन ने सोचा कि कह दूँ कि जैसे तुम देना चाहो.
फिर मैंने पूछा- कैसे लोगी से … तुम्हारा क्या मतलब है भैया?
वो बोला- मतलब कुछ डलिया वगैरह में लोगी.. या मैं थैली में दे दूँ?
मैंने कहा- थैली में ही दे दो.

उसने आलू तौल दिए, मैंने उससे आलू ले लिए. उससे आलू लेते वक्त मैं जरा झुक गई, जिससे उसको मेरे गहरे गले वाले ब्लाउज में से मेरी मस्त चूचियों की भरपूर झलक दिख गई. मेरी निगाह उसकी लुंगी पर थी, उसकी लुंगी ने उठना शुरू कर दिया था.
फिर मैंने उसको ध्यान से देखा. वो एक 40 साल का हट्टा-कट्टा पहलवान टाइप का मर्द दिख रहा था.

उससे सब्जी लेकर मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो मुझसे बोला- भाभी जी पैसे?
मैंने कहा- भैया अभी अन्दर से लाकर देती हूँ.
वो बोला- ठीक है.
मैं अन्दर जाने लगी, तभी मैंने पलट कर देखा, वो मेरे पिछवाड़े को बड़ी मस्त निगाहों से देख रहा था.
मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर चली गई.

जब मैं वापस आई, तो मैंने देखा कि उसकी कामुक नज़र मेरे गदराए हुए जिस्म पर टिकी थीं और वो मेरे मम्मों को बड़ी ध्यान से देख रहा था.

मैंने उसको पैसे दिये और अन्दर जाने के लिए मुड़ी तो उसी समय न जाने कैसे मेरे पैर में मोच आ गई और मैं वहीं गिर पड़ी. मुझे गिरता देख कर वो सब्जी वाला मुझे उठाने लगा. मैंने उसको मना किया, लेकिन वो नहीं माना. वो मुझे उठा कर घर के अन्दर ले आया. जब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था, उस वक़्त मैंने महसूस किया था कि उसका फौलादी लंड मेरी गांड के ऊपरी हिस्से में मतलब मेरी कमर को टच कर रहा है. उसने मुझे कसके पकड़ा हुआ था.

वो मुझे बेड के नजदीक लाया और मुझे बड़े हौले से बेड पर लिटा दिया. फिर वो मुझसे बोला- भाभी जी … मूव किधर रखी है, बता दीजिए … मैं आपके पैर में मूव लगा देता हूँ.
मैंने उससे बोला- तुम रहने दो … तुम बाहर चले जाओ, तुम्हारा ठेला बाहर खड़ा है … मैं अपने आप मूव लगा लूँगी.
वो बोला- नहीं … आपको दर्द है … मैं आपको इस हालत में ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकता … मेरे ठेले की चिंता आप न करें.

मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो खुद से सामने की टेबल पर रखी मूव उठा लाया और मेरी साड़ी को थोड़ा ऊपर करके पैर में मूव लगाने लगा.

उसके हाथों में बड़ी नफासत थी … मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा. उसके हाथों से थोड़ी ही देर में मुझे आराम मिल गया और मैं पैर फैला कर लेट गई. वो अब और भी अच्छे से मेरे पैर की मालिश करने लगा.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि वो साड़ी को कुछ और ऊपर कर रहा था. अब वो अपना हाथ मेरी जांघों तक ले जा रहा. मैं आंखें खोल कर उठ कर बैठ गई.

पहले तो मैंने सोचा कि शायद ये मालिश से भी कुछ आगे बढ़ेगा, तो हो सकता है कि आज मुझे शान्ति मिल जाए.

मैं उसकी मर्दाना छाती देख कर बड़ी चुदासी हुई जा रही थी. साथ ही मेरा दिमाग काम करने लगा था कि कैसे भी करके इसे फंसाना ही है. ये मुझे मस्त चोद सकता है. मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि अगर आज ये सैट हो गया तो इसके लंड की चुदाई से मेरी चुत की आग शांत हो जाएगी जो आज तक मेरे पति नहीं कर पाए थे.

मैंने उससे कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?
वो बोला- भाभी जी … मैं मालिश कर रहा हूँ.
मैं बोली- मोच तो नीचे वाले हिस्से में आई थी, तो तुम ऊपर क्यों मालिश कर रहे हो?
वो बोला- अरे मोच को मालिश करने के बाद पूरे पैर को अच्छे से मालिश करना पड़ता है … नहीं तो दर्द नहीं जाएगा.
मैं बोली- तुम रहने दो … अब जाओ. मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही मुझे सहला रहे हो.
वो बोला- नहीं भाभी जी, मैं आपकी मालिश कर रहा हूँ.

मैंने उसे उकसाया- कहीं तुम मुझे अकेली पाकर मेरे साथ गलत काम तो नहीं कर दोगे.
ये कहते हुए मैंने उठने की कोशिश की और अपना पल्लू ढलक जाने दिया. मेरे गहरे गले के ब्लाउज से उसको मेरी अधनंगी चूचियां गर्म करने लगी थीं. मैं देख रही थी कि उसका लंड फूलने लगा था.

वो मेरी चूचियों की तरफ देख कर बोला- अगर आप मुझसे कुछ गलत काम करने के लिए कहेंगी, तो मैं जरूर कर दूंगा. वैसे आप अपनी गेंदें दिखा कर मुझे भड़का रही हैं.
मैंने पूछा- गेंदें मतलब?
वो लंड सहला कर मुझसे बोला- भाभी जी गेंदें नहीं समझती हो. मैं आपके दूधों की बात कर रहा हूँ.

यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे सीने से लगा कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया. साथ ही मेरी साड़ी भी खींच दी थी. हालांकि मेरी साड़ी अब भी मेरे बदन से लिपटी हुई थी. मैं समझ गई कि लंड काबू में आ गया है. अब मैंने नाटक करना शुरू किया.

“ये क्या कर रहे हो तुम … इधर से चले जाओ तुम!”
वो- एक तो तेरे लिए इतनी मेहनत की और बिना कुछ दिए बोल रही हो कि अब जाओ.
मैं घबरा कर बोली- ये तुम क्या बोल रहे हो … तुम तुम्हारा दिमाग़ खराब है क्या?
वो बोला- हां तुझे देख कर मेरा दिमाग़ और हालत दोनों खराब हो गए हैं. अब तुझे पहले जी भर कर चोदूंगा, फिर मेरा दिमाग सही होगा.

मैंने उसको भगाने की कोशिश की नौटंकी की लेकिन मैं नाकामयाब रही.

वो मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. पहले तो उसने मेरी साड़ी पूरी तरह से खींच कर मेरे जिस्म से अलग कर दी. मैं उसके सामने रोने का ड्रामा रही थी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो.

लेकिन उसकी आंखों में अलग ही चमक थी. वो मुझको देख कर बोला- साली तुम चुदासी औरतें ऐसे गांड मटका मटका कर चलती हो कि हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता होता. जब चोदने की बारी आती है, तो साली नखरे दिखाने लगती हो … एकमद चुप रह साली रंडी … आज तेरी चुत का मैं भोसड़ा बना दूँगा. आज अपने फौलादी लंड से तेरी चुत के चिथड़े उड़ा दूँगा … तू बस आज देखती जा.

उसने मेरी साड़ी तो खींच ही दी थी. अब मैं उसके सामने ब्लाउज पेटीकोट में रह गई थी.

मुझे इस हालत में देख कर वो अपना लौड़ा सहला कर बोला- साली कितनी बड़ी रांड लग रही है तू … तेरी चुचियां कितनी बड़ी हैं. आज में इनका सारा रस पी जाऊंगा.

मैं उसके सामने छोड़ देने की कहती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था. उसने एक झटके में मेरा साया भी फाड़ कर अलग कर दिया और अगले झपट्टे में मेरा ब्लाउज भी मेरी चुचियों का साथ छोड़ चुका था. अब मैं उसके सामने ब्रा और पेंटी में थी और उसे मना कर रही थी.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और मेरा सामने पूरा नंगा हो गया. उसका लंड देख कर मैं हैरान हो गई. मैंने आज तक जीवन में कभी लंड के इतना बड़ा होने की कल्पना ही नहीं की थी. उसका 8 इंच लंबा था और गोलाई में 3 इंच मोटा था. मुझे तो ऐसा लगा कि ये तो गधे का लंड लगवा कर पैदा हुआ है और आज तो यह कमीना मेरी चुत को सचमुच फाड़ ही देगा.

उसने मेरी तरफ आते हुए मेरी मेरी ब्रा और पेंटी को उतार फेंका और मेरी चूचियों को तेज़ी से दबाने लगा.

मेरी धीरे से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी और मैं उससे कहती रही- मुझे छोड़ दो प्लीज़.
लेकिन वो मुझसे बोला- चुप साली कमीनी … आज बस तू मेरे लंड का मजा ले … मैं तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा … चुप रह रंडी कहीं की.

थोड़ी देर बाद मेरा विरोध कम होने लगा और मैं उसके सामने शांत होने लगी. मुझे भी मजा आने लगा था.

वो मेरे मम्मों को अपनी बड़ी बड़ी हथेलियों में भींच कर पूरी दम से मसल और रगड़ रहा था. वो इतनी तेज़ी से मेरे मम्मों का मलीदा बना रहा था, जैसे कोई राक्षस हो. वो मेरे ऊपर लदा हुआ था और मैं अपने नीचे उसका लंड महसूस कर रही थी.

कोई 15 मिनट बाद वो मम्मों को अच्छे से रगड़ने के बाद मुझसे बोला- चल साली रंडी … मेरा लंड मुँह में लेकर इसे चूस.

पहले तो मैंने मना किया लेकिन उसने जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. थोड़ी देर में उसके लंड का साइज़ और भी ज्यादा बढ़ने लगा और मुँह से बाहर आने लगा. जब उसका लंड अच्छे से बड़ा हो गया तब उसने अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल लिया.

मैं उसके पूरी तरह से खड़े लंड को देख कर गहरा गई लेकिन मुझे मेरी चुत की आग लगातार गर्म कर रही थी.

वो लंड को मेरी चुत पर ले गया और सुपारा घिसते हुए बोला- साली रंडी कितनी मस्त है तेरी चुत … लगता है तेरा पति तुझे अच्छे चोद नहीं पाता … चल कोई बात नहीं … आज मैं इसको भोसड़ा बना दूँगा … तू चिंता मत कर.

वो अपना लंबा लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया. उसने मेरी तरफ देखा मैं घबरा कर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. मुझे मालूम था कि जैसे ही इसका लंड अन्दर जाएगा मेरी चुत एक कबाड़खाना बन जाएगी.
लेकिन चुत की सारी आग भी ठंडी करवाने की ललक मुझे उसके लंड से चुदवाने के लिए उकसा रही थी.

उसने लंड चुत पर रख कर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. उसका लंड मेरी चुत में अन्दर घुसा और उसी पल मेरे मुँह से एक चीख निकल पड़ी- अया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … मर गई.
वो मुझे डांटता हुआ बोला- चुप साली रंडी … अभी थोड़ी देर में तुझको भी मजा आने लगेगा.

इसके बाद उसने एक और धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी चुत के अन्दर चला गया. मैं फिर से दर्द से चीख उठी- आह मर गई … प्लीज़ प्लीज़ … अब रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है … आ … अया … अया.

वो कमीना मेरी एक ना सुनने वाला था. दूसरे ही पल उसने एक और धक्का दे मारा. इस बार उसका लंड पूरा मेरी चुत में चला गया. मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था. क्योंकि पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड अपनी चुत में लिया था.

वो थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रुका रहा. फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. अब मुझे भी दर्द कम होने लगा था और मैं मजे लेने लगी थी. वो अब अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल कर चुदाई कर रहा था. वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को अब भी जानवरों की तरह रगड़ रहा था.
मुझे मजा आने लगा और मेरे मुँह से आनन्द भरी सिसकारियां निकलने लगी थी- आह … ससस्स … आहह. … सस्सस्स.

फिर वो मुझसे बोला- साली रंडी पहले तो नखरे दिखा रही थी और अब लंड के मज़े ले रही है. आज तू देख … तेरी चुत का में गड्डा बना दूँगा.
तब मैं बोली- चोद कमीने … और ज़ोर से चोद … फाड़ दे मेरी चुत को मादरचोद … आज मुझे रगड़ रगड़ कर चोद ताकि मैं 2 दिन तक सही से चल ना पाऊं.
वो धक्के देते हुए बोला- साली रंडी आज तुझको ऐसे ही चोदूंगा … तू देखती जा बस … आज के बाद तू मुझसे ही चुदाएगी रोज … ले रंडी ले.

और उसने धक्कों की स्पीड तेज़ कर कर दी और मेरे मुँह से ‘स्सा … आ … अया … इस्स … इस्स्स्स.’ की आवाज़ तेज़ी से आने लगी और मैं कमर उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी. मैं भी चुदाई की जन्नत की सैर का मजा लेने लगी- आह चोद दे साले कमीने … आ … आह … ऐसे … ही … पेल पूरा … हां … ऐसे चोद मादरचोद मुझे … फाड़ दे मेरी चुत को!

कोई 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गया और ढेर हो गया. इस बीच मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

वो मुझसे बोला- बता मेरी जान … मजा आया कि नहीं?
मैं उसे चूमते हुए बोली- बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा.

फिर दस मिनट के बाद उसका लंड वैसे ही तन गया और मुझे इस बार अपने ऊपर बैठने को बोला. वो बेड पर चित लेट गया. मैं उसके खड़े लंड के ऊपर चुत फंसा कर बैठ गई. मैंने उसके मूसल लंड को अपने अन्दर ले लिया.

अब वो मुझे हवा में उठा उठा कर चोद रहा था. अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहा था.

मुझे उसके लंड से चुदने में बहुत मजा आ रहा था. मैं लगातार 20 मिनट तक ऐसे ही चुदती रही. फिर हम दोनों झड़ गए और ऐसे ही 20 मिनट तक पड़े रहे. आज उसने मुझे जन्नत की सैर करवा दी थी. आज मैं बहुत खुश थी.

मैं उससे बोली- तुम मुझे ऐसे ही रोज चोदा करो … मेरा नामर्द पति कुछ नहीं कर पाता.
वो मेरी चूची दबा कर बोला- तू चिंता मत मेरी रांड … मैं अब तेरी चुत को भोसड़ा बना दूँगा. मैं अपने साथ अपने दोस्तों से भी तुझे चुदवाऊंगा और तेरी चुत को चबूतरा बना दूँगा.

उसकी बात से मैं पहले तो डर गई और बोली- नहीं तुम अकेले ही आना … किसी और को मत लाना … कहीं मेरे पति को पता चल गया, तो उन्हें बहुत गुस्सा आएगा.
वो बोला- साली रांड मुझसे चुदवा रही है, तब तेरा पति क्या तेरी आरती उतारेगा. होने दो भोसड़ी वाले को गुस्सा. अब चुपचाप जो मैं बोलूं, वही करना. मैं जिसको भी तेरी चुत चुदाई के लिए लाऊंगा, तुम बस उससे अपनी चुत चुदवा लेना.

मैं एक बार को तो खुश हो गई कि अब तो बदल बदल कर लंड मिलेंगे.

वो कहता जा रहा था- जो भी तुमको चोदना चाहेगा … उससे हजार रूपए भी वसूल लेना. समझो अब तुम मेरी रंडी हो गई हो.
मैं कुछ नहीं बोली और वो मुझे किस करके चला गया.

फिर बाद में वो अपने दोस्तों को लाता और वो लोग मुझे रंडी बना कर चोद देते.

कुछ ही दिनों में सब्जी वाले और उसके दोस्तों ने मेरी चुत का भोसड़ा बना दिया. उनका जब भी मन होता, वे आ जाते और मुझे चोद कर चले जाते. मुझे भी लम्बे लम्बे बड़े बड़े लंड से चुदने में मजा आने लगा था. मैं बहुत खुश रहती थी. मैं समझती हूँ कि एक नामर्द की बीवी को सही मायने में औरत होने की ख़ुशी इन्हीं लोगों से चुदने से मिलती थी.

मैं चुद चुद कर इन लोगों की रंडी बन गई थी … मेरे पति को अब तक पता नहीं चला था.

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