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मेरी सील टूट चुकी थी

हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

वो रास्ते में बोला- यार, मेरा मन शांत नहीं हुआ.
उसकी बात सुनकर मुझे भी चुदास भरने लगी. मैंने फिर भी उससे कहा- क्यों … मजा नहीं आया क्या?
वो बोला- पानी भर तो निकला है, ऐसा तो मैं मुठ मार कर भी निकाल लेता हूँ.
मैंने कहा- तो फिर क्या चाहते हो?
वो बोला- चलो एक दोस्त के फ्लैट में चलते हैं.
मैंने कहा- कोई परेशानी तो नहीं होगी न?
वो बोला- मैं पहले उससे बात कर लेता हूँ.
मैंने कहा- उसको फ्लैट से जाने की कह देना … तभी ठीक रहेगा.
उसने कहा- ठीक है.

उसने फोन पर अपने दोस्त से बात की, दोस्त ने हामी भर दी और वो बोला कि आ जा … मैं कुछ देर में वैसे भी जाने वाला हूँ.
अब मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझसे पूछा- अब तो ठीक है?
मैंने मुस्कुरा कर हां कर दी. हम दोनों उसके फ्लैट की तरफ चल दिया.

उसके फ्लैट में पहुँच कर उसके दोस्त ने पानी वगैरह दिया और बोला- यार, मुझे जाना है. तू ये चाभी ले ले और बंद करके बाहर एक जगह छिपा कर रख देना.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने उसको हां कहा और उसका दोस्त फ्लैट से चला गया.

दोस्त के जाते ही उसने फ्लैट का दरवाजा बंद किया और मुझे पकड़ कर मेरी चूची मसलने लगा. अब मैं भी बिंदास हो गई थी.

उसने मेरे कपड़ों को हाथ लगाया, तो मैंने उससे कहा- मैं उतार देती हूँ … मेरे पास यही ड्रेस है … तुम्हारी जल्दीबाजी में कहीं फट न जाए.
वो हंसने लगा और बोला- फटना तो है ही.
मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा- फटना मतलब … मैं उतार तो रही हूँ.
वो फिर हंसने लगा.

मैं समझ गई और उसकी छाती पर प्यार से मुक्का मारने लगी. मैंने कहा- उसको फड़वाने के लिए ही तो तेरे साथ आई हूँ. आई लव यू जान.
उसने भी मुझे अपनी बांहों में भरा और मेरे होंठ चूमते हुए मुझसे कहा- आई लव यू टू मेरी जान.
यह कह कर वो मेरे कपड़े उतारने लगा.

कुछ ही पलों में उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था. वो मेरी चूची को चूसने और चूमने लगा. मैं मस्त हो गई और उसके सर को अपनी छाती से दबाते हुए उसको अपना दूध पिलाने लगी.

वो मुझे चूमते चूमते बिस्तर पर ले आया और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया. मैं भी बेतहाशा चूम रही थी. उसका साथ मुझे बड़ा ही मस्त लग रहा था.

फिर वो मुझे चूमते चाटते हुए नीचे को होने लगा. उसने मेरी चूत को सहलाया और अपनी जीभ रखने लगा. मुझे उसकी जुबान का टच बहुत ही गर्म लगा और मैंने एकदम से सिहर उठी. वो मेरी चूत चाटने लगा.

तभी मुझे उसका लंड देखने मन किया. मैंने उसके लंड को हाथ लगाया और बोली- मुझे तुम्हारा देखना है.
वो बोला- क्या देखना है?
मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से मसला और कहा- इसको.
वो मुझे ठिठोली करने लगा- पैन्ट को क्या देखना है?
मैंने कहा- पैन्ट को नहीं, इसके अन्दर जो है, उसको देखना है.
वो बोला- पैन्ट के अन्दर तो चड्डी है. तुमको चड्डी देखना है?

मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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मैं एक लंडखोर लड़की हूँ

आप सभी को मेरा नमस्कार. मैं अंजलि शाह हूँ. मैं अपने कॉलेज की एक दिलकश हसीना हूँ और मुझे चोदने के लिए लौंडों की लाइन लगी रहती है. मैं भी एक लंडखोर लड़की हूँ और मुझे एक ही लंड से चुदने में मजा नहीं आता है. इसलिए मैं ज्यादा दिन एक लंड से बंधी नहीं रहती हूँ.

मेरी सेक्स कहानी में चुत चुदाई का रस कुछ यूं है कि पिछले साल हमारे कॉलेज में दीवाली के अवसर पर बीस अक्टूबर को एक कार्यक्रम किया जा रहा था, जिसमें मुझे लहंगा चोली पहन कर एक आइटम डांस करना था.

मैंने 16 तारीख तक बहुत कोशिश की कि बना बनाया मिल जाए, पर नहीं मिला.

मैंने मॉम से कहा, तो मॉम ने कपड़ा लाकर दिया और कहा- कल मोहन भाई के पास जाकर नाप दे आना, वो दो दिन में सिल देगा.
मैंने मॉम से कहा- ठीक है.

मोहन भाई शहर का एक बड़ा मशहूर लेडीज टेलर था, मगर वो जरा टेढ़े मिजाज का टेलर था.

अगले दिन मैं डेढ़ बजे मोहन टेलर की दुकान पर गई. उसकी दुकान बड़ी थी. काफी कारीगर काम करते थे.

जब मैं गई तब दुकान पर लंच टाईम हुआ था, तो सब लोग जा रहे थे. मैंने उस समय एक शर्ट और जींस पहनी थी. मैंने उसको लहंगा चोली सिलने की बात कही.

इस पर मोहन भाई ने मुझे देखते हुए कहा- इन कपड़ों में लहंगा चोली का नाप नहीं होता.
मैंने कहा- मोहन भाई प्लीज. मॉम ने कहा था कि आप सिल दोगे.
उसने कहा- ठीक है … तुम अन्दर जाओ और ट्रायल रूम के बाहर वाले कमरे में बैठो … मैं वहीं आता हूं.

मैं अन्दर गई. उस रूम में एक लम्बा सोफ़ा पड़ा था. थोड़ी देर में मैंने शटर गिरने की आवाज सुनी और अगले ही पल मोहन भाई कमरे में आ गया.

मोहन भाई 30-32 साल का रहा होगा. उसने कहा- ये सब मैं तेरी मां की वजह से कर रहा हूं … वरना वापस भेज देता.
मैंने राहत की सांस ली और शुक्रिया की नजरों से टेलर मास्टर को देखा.

उसने पूछा- कैसा लहंगा चोली सिलवाना है?
मैंने कहा- बैक लैस चोली डोरी के साथ और लहंगा कूल्हों से टाइट और नीचे घेरा वाला सिलवाना है.
उसने कहा- बैकलैस में ब्रा नहीं पहन सकते और इन कपड़ों में नाप नहीं हो सकता.
मैंने कहा- प्लीज मोहन भाई कुछ करो … मुझे 20 तारीख को पहनना है.

उसने कहा- ठीक है … अपनी शर्ट उतारो.
मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- क्या क्या … नाप लेना है … शर्ट में नाप नहीं लिया जा सकता.

मैं कुछ सोचने लगी.
तो उसने कड़क आवाज में कहा- दो दिन में चाहिये या नहीं!
मैंने कहा- हां हां दो दिन में ही चाहिए … ठीक है, मैं शर्ट उतारती हूँ.

ये कह कर मैंने शर्ट उतार दी. अन्दर ब्रा थी.

उसने मेरे दूध देखते हुए पूछा- बैकलैस चोली चाहिए न!
मैंने कहा- हां.
तो उसने कहा- ब्रा भी उतारो.
मैंने ‘नहीं..’ कहा … तो उसने गुस्से से कहा- भग बहन की लौड़ी यहां से … बड़ी आई … मोहन भाई को चूतिया समझ रही है.

उसकी इस बात से मैं डर गई और मैंने जल्दी से ब्रा उतार दी.

वो मेरे संतरों को भेड़िये की नजरों से देखने लगा. फिर उसने मेरे मम्मों को पकड़ा और इंची टेप से नाप लेने लगा. उसने कहा- तेरे दूध छोटे हैं … चोली में पैड लगेंगे, पूरी गोलाई हाथ से नापनी पड़ेगी.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने मेरे उल्टे हाथ की तरफ की चुची के चारों और इंची टेप लगाया … और चूची को नापा. फिर इसी तरह से सीधे हाथ की चुची की नाप ली.

उसने कहा- ब्रा लैस चोली में चूचुक खड़े होते हैं … वर्ना फिटिंग सही नहीं आती.
मेरे दोनों चूचुक तो दबे से थे.
उसने कहा- इन्हें रगड़ कर खड़ा करो.

अब तक मुझे इस खेल में सनसनी होने लगी थी. मुझे मोहन से चुदने की इच्छा होने लगी थी.

मेरे रगड़ने के बाद भी वो खड़े नहीं हुए. तो उसने मेरे चुची को कसके पकड़ा और दबा दिया. मेरे निप्पल फिर भी खड़े नहीं हुए.

वो मेरे पास आया और मेरे एक चूचुक को मुँह में लेकर चूसने लगा … मुझे बेहद चुदास सी फील हुई और मेरे चूचुक खड़े हो गए. हालांकि मैं मोहन की इस हरकत से एकदम से शॉक थी, पर न जाने क्यों मैंने उससे कुछ बोला नहीं.

फिर उसने कहा- अब तेरे लहंगे का नाप लेना है … जींस उतारो.
मैंने मना किया.
उसने कहा- तेरी मां की चूत … उतार साली, नहीं तो ऐसे ही भगा दूंगा.
मैंने जल्दी से जींस उतार दी.

जींस उतरते ही मैं केवल काले रंग की कच्छी में मोहन के सामने खड़ी थी.

उसने मेरा नाप लेना शुरू किया.

उसने कहा- तेरी गांड तो बहुत मोटी है.
मुझे बेहद सनसनी हो रही थी और मेरी चुत में रस आना शुरू हो गया था.

उसने मेरी कच्छी पर गीला निशान देखा और कहा- साली तेरी बुर तो पानी छोड़ रही है … देखूं तो सही.

ये कहते हुए उसने मेरी कच्छी नीचे खींच दी और अपना हाथ मेरी चूत पर डाल दिया.

मैं एकदम से गनगना उठी.

उसने मेरी चुत मसलते हुए कहा- बहन की लौड़ी … तू तो पका हुआ माल है.

ये कह कर उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया. चुत पर मर्द का मुँह लगते ही मैं तो सातवें आसमान पर पहुंच गई.

कुछ देर चुत चूसने के बाद वो खड़ा हुआ और मेरे एक चूचुक को मुँह में लेकर जोर से काटा.
मैंने उसे धक्का दे दिया.
उसने गुस्से में कहा- बहन की चूत, अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूं.

उसने अपना पजामा ढीला किया और उतार दिया. आठ इंच का काला लंड मेरे सामने हिनहिना रहा था. उसने मेरे बाल पकड़े और मुझे नीचे बिठाते हुए कहा- तेरी मां की चूत साली रंडी … चल मेरे लंड को मुँह में डाल.

मैंने टेलर मास्टर का लंड अपने मुँह में डाला और चूसने लगी. वो मस्ती से कराहें भरने लगा.
थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद उसने कहा- अब उधर चल सोफे पर साली बहन की लौड़ी … कुतिया बन जा.

मुझे भी अब चुदवाने की चुल्ल हो उठी थी. मैं जल्दी से उल्टी होकर कुतिया बन गई. उसने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और एक ही झटके में पूरा अन्दर तक पेल दिया.
मेरी चीख निकल गई. मैंने भी गाली बकना शुरू कर दी और उससे कहा- आह भैनचोद … मेरी चूत फाड़ दी मादरचोद … साले आराम के डाल.

उसने मेरे चूतड़ों पर दो चमाट खींच कर जड़ दिए और बोला- मां की लौड़ी … ऐसे ही लंड झेल.

उसने बेरहमी से लंड चुत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. वो बहुत तेज स्पीड से मुझे चोदने लगा. पांच मिनट में ही मेरी चुत से एक बार पानी निकल गया.

उसने मेरी चूत से लंड निकाला और आगे आकर मुँह में डाल दिया. वो लंड चुसवाते हुए मेरी गांड के छेद में उंगली करने लगा.

मैं उसका मोटा लंड चूसती रही. फिर उसने लंड मुँह से निकाला और पीछे आकर बहुत सारा थूक मेरी गांड के छेद पर थूक दिया. जब तक मैं सम्भलती, उसने एक ही झटके में मेरी गांड में लंड डाल दिया और गांड ठोकने लगा.

मैं कॉलेज में आगे पीछे दोनों तरफ से लंड ले चुकी थी, इसलिए मुझे चुत गांड मरवाने में कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन आठ इंच का मोटा लंड आज मैं पहली बार अपनी चुत गांड में ले रही थी. इससे मुझे दर्द होने लगा था.

साथ ही मेरी गांड कम चुदी होने की वजह से काफी टाइट थी, जिस वजह से मुझे काफी दर्द हो रहा था.

कुछ धक्कों के बाद मेरी गांड ने टेलर के मोटे लंड को झेल लिया था और अब मुझे गांड मराने में मजा आने लगा था. उसने मेरे दूध पकड़ कर मेरी गांड दबाकर चोदनी शुरू कर दी. कुछ ही देर में उसका सारा पानी मेरी गांड में ही निकल गया.

उसने अपना लंड गांड से निकाला और मेरे मुँह में देकर कहा- जल्दी से लंड साफ कर और कपड़े पहन ले.

मैंने लंड चूसा तो मुझे मोहन के माल का बड़ा मस्त स्वाद मिला. इसके बाद कपड़े पहनने के लिए अपनी ब्रा पैंटी उठाई, तो उसने कहा- अपनी ब्रा और कच्छी मुझको दे दे और भाग जा.

मैंने पूछा- लहंगा चोली कब दोगे?
उसने कहा- कल ट्रायल के लिए 12 बजे के करीब तेरे घर पर आऊंगा.
मैंने कहा- कल तो मैं कॉलेज जाऊंगी और कोई घर पर नहीं होगा.
उसने कहा- मां की लौड़ी कल कॉलेज मत जाना … वर्ना लहंगा चोली नहीं मिलेगा.

मैंने हां में सर हिला दिया और घर आ गई.

मोहन के मोटे लंड ने मेरी चुत और गांड को बड़ा सुकून दिया था. मैं अपनी चुदाई को याद करते हुए अपनी चुत मसल रही थी.

अगले दिन मैं कॉलेज नहीं गई क्योंकि मुझे पता था आज मोहन भाई ट्रायल के लिए आएगा. साथ ही मुझे ये भी पता था कि ट्रायल के बहाने वो मुझे चोदने के लिए भी आएगा.

मैं घर पर ज्यादा कपड़े नहीं पहनती हूं इसलिए मैंने बिना ब्रा के एक स्लीवलैस छोटा सा टॉप पहना था और छोटा सा लोअर, जो सिर्फ़ कूल्हे तक का था. घर में मैं कच्छी नहीं पहनती हूं.

मोहन भाई ने 12 बजे का टाईम दिया था. मॉम ऑफिस गई थीं और भाई बहन स्कूल में थे. मैं अकेली ही घर पर मोहन का इन्तजार कर रही थी.

तभी 11 बजे डोरबेल बजी. मैंने घड़ी देखी, तो अभी मोहन भाई के आने का टाइम नहीं हुआ था. मुझे लगा पता नहीं कौन आया होगा.

मैंने दरवाजा खोला, तो मोहन भाई ही आया था और उसके साथ एक 25-26 साल का युवक भी था.

मोहन भाई ने कहा- ये मेरा छोटा भाई चमन है. इसको फिटिंग के बारे में सिखाना था, इसलिए साथ ले आया.
उसने मुझे मेरा लहंगा चोली पकड़ाया और कहा- इसे पहन कर आओ और नीचे कुछ मत पहनना, वर्ना फिटिंग का पता नहीं चलेगा.

मैं अपने कमरे में गई और लहंगा चोली पहना. मैंने लहंगा तो पहन लिया, पर चोली की डोरी नहीं बंध सकी. मैं चोली पकड़े पकड़े बाहर आई और कहा- मोहन भाई, इसकी डोरी नहीं बंध रही है.

मोहन भाई ने चमन को डोरी बांधने को कहा और उसने आराम से बाँध दी.

मैंने कहा- मोहन भाई, फिटिंग ठीक नहीं लग रही.
उसने कहा- ऐसे पता नहीं चलेगा. कहीं फुल साइज़ आइना है क्या?
मैंने कहा- हां मेरे बेडरूम में है.
उसने कहा- चलो वहीं चलते हैं. तभी असली फिटिंग का पता चलेगा.
मैंने असली फिटिंग का मतलब समझते हुए कहा- ठीक है.

हम मेरे बेडरूम में आ गए. मोहन मेरे सामने खड़ा हो गया और कहा- आगे को झुको.

मैंने उसको देखा, तो उसने कहा- फिटिंग देखनी है.

मैं आगे झुक गई. उसने मेरे सामने आकर देखा, मेरी चुचियां बाहर आ रही थीं.

उसने गला 14 इंच का बनाया था.

उसने कहा- चोली तो ढीली लगती है.

मैं खड़ी होने लगी, तो उसने रोक दिया और चमन को बुलाया. चमन को सामने खड़ा करके कहा- देखो आगे से चोली ढीली होती है, तो पूरे चुचे साफ़ दिखते हैं.

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लंबे लंड लेने का बड़ा शौक

दोस्तो, मैं शिवानी I मेरे भाई का लंड आठ इंच का था. अपने भाई के लंड से कई बार चुदवा लेने से मेरी फिगर भी भरने लगी थी और मेरा जिस्म मस्त हो गया था.

कॉलेज में मेरी सहेलियां मुझे छेड़ने लगी थीं कि ऐसा क्या लेने लगी हो, जिससे तेरा जिस्म भरने लगा है.

इस पर मेरी एक सहेली मुझे छेड़ते हुए बोली- लगता है जलेबी शीरा पी गई.
उसकी बात मेरी समझ में नहीं आई मगर बाकी की सहेलियां जो कुछ चुदक्कड़ किस्म की थीं, हंसने लगीं.

मैंने उस सहेली से पूछा- जलेबी शीरा पी लेती है, तो इसमें हंसने की क्या बात है?
वो और जोर से हंसने लगी.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था.
तभी एक सहेली ने मुझसे कहा- तू बिल्कुल चूतियम सल्फेट है … अबे जलेबी शीरा पीने का मतलब भी नहीं समझती है.
मैंने उसकी तरफ देख कर कहा- अगर मैं समझ गई होती, तो पूछती ही क्यों … बता न जलेबी शीरा पीने से क्या मतलब होता है?
तभी एक दूसरी चुदक्कड़ सहेली ने मेरी चूची दबाई और कहा- आह मेरी जलेबी बाई … तूने किसके लंड का शीरा पी लिया … जो तेरे इतने कड़क मम्मे हो गए.

उसकी बात सुनते ही मुझे समझ आ गया कि कमीनी की जलेबी शीरा पीने की बात का क्या मतलब हुआ.

वैसे साली सही ही तो कह रही थी कि मेरी चुत ने भाई के लंड का शीरा पी लिया था इसलिए तो मेरी चूचियां भरने लगी थीं. चुदाई के वक्त मेरा भाई मेरी चूचियों को खूब चूसता है, जिस वजह से मेरे दूध फलने फूलने लगे थे.

मैं हंस दी और वहां से अपनी एक पक्की सहेली के साथ क्लास की तरफ बढ़ गई. मेरी इस सहेली का नाम तान्या था. वो कॉलेज में मेरी बेस्ट फ्रेंड है.

उसने मुझसे कहा- ये लड़कियाँ इतनी गंदी बातें करती हैं कि मेरी तो चुत में पानी ही आ जाता है.
मैंने उससे पूछा- तेरी चुत में पानी आ गया है … तो अब तू क्या करेगी?

वो मेरी तरफ देख कर हंसने लगी. मैंने हंस मत कुतिया … बता न कि चुत के पानी का क्या करेगी?
पहले तो वो बोली- क्या करूंगी, बाथरूम में जाकर उंगली करके पूरा शीरा निकाल लूंगी और सूसू करके वापस आ जाऊंगी.
मैंने उसकी चूची दबाते हुए कहा- कमीनी शीरा तो लंड से निकलता है … तेरी चुत से शीरा कैसे निकलेगा.

वो हंसने लगी और बातों ही बातों में उसने मुझे बताया- मैं भी शीरा ले लेती हूँ.
मैंने आंख मार कर उससे पूछा- तू किसका शीरा लेती है?
वो मेरी चूची दबाते हुए बोली- साली, अभी तू ही तो कह रही थी कि शीरा तो लंड से निकलता है, तो मैं भी लंड का शीरा ही लेती हूँ.
मैंने अपना सर पीटते हुए पूछा- अरी मूरख ये तो मालूम है कि लंड का शीरा लेती है … लेकिन किसके लंड का शीरा लेती है, ये तो बता?

पहले तो वो आनाकानी करने लगी. फिर मुझे कसम देते हुए बोली- किसी से कहना मत!
मैंने उसके सर पर हाथ रखा कि तू मेरी सबसे पक्की सहेली है, मैं किसी से नहीं कहूँगी. अब तू जल्दी बता कि किसका लंड लेती है?
उसने मुझे बताया- मैं अपने भाई का लंड लेती हूँ.

मैं उसकी बात सुनकर अवाक थी.

वो मेरी तरफ देख कर बोली- अब तू बता कि तू किसका शीरा लेती है?
मैंने भी दबी जुबान में बता दिया- मैं भी अपने भाई के लंड का शीरा लेती हूँ.

वो मेरी शक्ल देखने लगी. एक पल के लिए हम दोनों की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी. मगर अगले ही पल हम दोनों हंस पड़ी और एक दूसरी से लिपट गई. वो मुझे ऐसे चूमने लगी, जैसे हम दो रंडियां अपनी चुदाई की बात से खुश हो रही हों.

इस तरह हम दोनों ने ओपन होते ही एक दूसरे को सब बता दिया.

तान्या ने अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में ली हुई थी. उसने मुझे अपने भाई के लंड की फोटो दिखाते हुए कहा- ये मेरे भाई के लंड की फोटो है … तेरे भाई का लंड कैसा है?
मैं भी अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में रखे थी. मैंने भी उसको अपने भाई के लंड की पिक दिखाई.

मेरे भाई का आठ इंच का मोटा लंड देख कर तान्या बोली- वाओ तेरे भैया का लंड तो बड़ा मस्त है … मुझे भी इस लंड को अपनी चुत में लेना है … प्लीज़ तू कुछ जुगाड़ कर न!
मैंने उससे बोला- मैं भाई से बात करके बताती हूँ.

अब इधर मैं आपको थोड़ा तान्या के बारे में बता देती हूँ. तान्या का फिगर बड़े कमाल का है उसके फिगर का साइज़ 32-28-34 का था. वो एकदम दूध के जैसे गोरी थी और उसे लंबे लंबे लंड लेने का बड़ा शौक था. साथ ही वो गंदी गंदी बातें करने में मानो एक्सपर्ट थी. साली एक लाइन में दस गाली निकालती थी.

साथ ही वो मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड भी थी. अब तो हम दोनों के बीच में अपने भाइयों से चुदने का राज भी साझा हो गया था, तो हम दोनों एक दूसरे के पक्के राजदार बन गयी थी.

उस दिन उसने मुझे क्लास से बाहर खींचा और मुझे वाशरूम की तरफ ले आई. उधर उसने मुझसे कहा- चल कुतिया आज हम दोनों अन्दर चल कर लेस्बो करती हैं.

मैंने कहा- साली मरवाएगी क्या? जानती भी है … कोई लड़का आ गया तो क्या होगा?
वो बोली- साली तेरी इतनी गांड फटती है … मुझे आज ही मालूम हुआ है. भोसड़ी वाली … सभी जगह लेडीज जेंट्स टॉयलेट अलग अलग होते हैं. और तेरी मर्जी हो तो चल मैं तो जेंट्स टॉयलेट में चल कर भी तेरे साथ लेस्बियन करने को रेडी हूँ. कोई आ भी गया तो उसके लंड को भी मजा दे दूंगी.

मैंने उसकी बात सुनकर माथा पीट लिया कि किस कमीनी से दोस्ती कर ली.

खैर वो नहीं मानी और लेडिज टॉयलेट में जाकर उसने मेरी चुत में उंगली की, मेरे दूध मसले और मैंने भी उसकी चुत में उंगली करके एक दूसरे का पानी निकलवा दिया. फिर सूसू करके मैं अपनी पैंटी और सलवार ऊपर करने लगी, तो देखा उसने अपने बैग में से एक सिगरेट निकाली और लाईटर से जला कर कश लेने लगी. उसने अभी भी अपनी चुत नंगी खोल रखी थी.

मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसने मुझे आंख मारी और मेरी तरफ सिगरेट बढ़ा दी.

मैंने भी कामवासना के मद में उसके हाथ से सिगरेट लेकर अपने होंठों में लगा ली और एक कश खींचा … मगर मुझे खांसी आ गई और वो हंसने लगी. उसने अपनी चड्डी और सलवार ऊपर की और मुझे सिगरेट पीने का तरीका बताने लगी.

दोस्तो, ये कॉलेज ही होता है, जिधर हर तरह का ज्ञान दोस्तों के द्वारा मिलता है. खैर … हम दोनों बाथरूम में मस्ती करने के बाद वापस आ गयी.

शाम को मैं घर आ गई. उस समय मेरा भाई अपने रूम में था. मैं फ्रेश होकर भाई के पास गई और भाई को अपनी बांहों में लेकर उसे किस किया.

उसने भी मुझे अपनी बांहों में कस लिया. वो इस समय सिर्फ एक फ्रेंची में था. मैंने उसकी चड्डी में हाथ डालकर उसके लंड को हाथ में ले लिया. भाई मेरी इस हरकत से गर्म होने लगा और मेरी चूचियां मसलने लगा.

कुछ ही देर में मैंने भाई को बिल्कुल गर्म कर दिया.
भाई ने अपना आठ इंच का लंड बाहर निकाल लिया और बोला- चल तू बड़ी गर्म होकर आई है … पहले सेक्स कर लेते हैं.

मैं बोली- भाई अभी घर पर सब हैं, रात तो अपनी है ही मेरी जान.

मगर भाई नहीं माना. उसने जिद करके अपना लंड मेरे मुँह में दे ही दिया.

मैं बैठ कर उसका लंड चूसने लगी. मेरे अन्दर आज पहले से ही सेक्स का खुमार चढ़ा था … लंड चूसने से और नशा छा गया. मैं ज़ोर ज़ोर से भाई का लंड चूस रही थी. तभी किसी के आने के आवाज़ आई, तो मैं झट से अलग हो गई और भाई ने सब ठीक कर लिया. हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बात करने लगे.

मेरा मन भी अब उससे चुदने को करने लगा था. भाई का लंड तो ले नहीं सकती थी … तो बाथरूम में जाकर मैंने अपने आपको शांत किया.

जैसे जैसे रात गहरी होती गई … सब सो गए. मैं सबसे छिप कर भाई का लंड चुत में लेने के लिए अपने भाई के पास आ गई. मेरा भाई अब तक सो चुका था.

मैंने उसके कमरे के दरवाजे को धीरे से बंद किया और सिटकनी लगा कर घूम गई. मैं इस समय बहुत चुदासी हो रही थी. मैंने जल्दी से अपने ऊपरी कपड़े उतार कर एक तरफ फेंक दिए. मैं अब ब्रा और पैंटी में रह गई थी. मैंने भाई के पास जाकर उसका लोअर खींच कर उतार दिया. साथ साथ में उसका अंडरवियर भी खिंचा चला आया. मैंने देखा कि भाई का सोया हुआ लंड भी मस्त लग रहा था. मैं भाई के लंड को चूसने लगी. लंड चूसते समय भाई को गीला गीला सा लगा तो उसकी आंखें खुल गईं.

भाई मुझे गाली देते हुए बोला- भैन की लौड़ी … साली आ गई अपने आदमी के पास लंड लेने.

मैं हंस दी और उसका लंड चूसने लगी. धीरे धीरे भाई का लंड एकदम खड़ा हो गया. पूरा फूल कर लंड अपनी औकात में आ गया. मैं जल्दी से अपनी चड्डी और ब्रा उतार कर भाई के लंड के ऊपर आकर अपनी चुत में लेने लगी.

मैं अपने भाई का पूरा लंड अन्दर ले गई, तो भाई बोला- साली बड़ी जल्दी लंड खा गई … किसी और का भी लेने लग गई क्या?
मैं हंस दी और बोली- भाई मेरी चुत के लिए तो आपका लंड ही बहुत है.

ये बोल कर मैं अपनी भैया के मोटे लंड से चुदने लगी.

‘आआह … आआहह … भाई चोदो ज़ोर से चोदो … बड़ा मजा आ रहा है.’

पूरे रूम में पट् फट् की आवाज़ आ रही थी.

‘आह बसस्स भाई … बहुत अन्दर तक जा रहा है … आह मैं मर जाऊंगी … आह धीरे..’
मेरी बात सुनकर भाई मुझे और ज़ोर से चोदने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने मुझको डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और ज़ोर से पीछे से लंड पेल कर मुझे चोदने लगा.

बीस मिनट की चुदाई के बाद भाई ने अपना सारा लंड रस मेरी चुत में छोड़ दिया.

वो अपने लंड की पिचकारियां मेरी चुत में छोड़ते हुए बोला- आआहह … मज़ा आ गया यार. … कल तेरी गांड मारूंगा.

मैं बोली- भाई नहीं … गांड नहीं … उधर बहुत दर्द होता है.
भाई बोला- नहीं मेरी बहना … मैं प्यार से तेरी गांड मारूंगा.
मैं बोली- यहां नहीं … मैं दिल्ली आऊंगी … तब मार लेना.

भाई ने मुझको किस किया. मैं भाई की बांहों में नंगी ही लेट गई.

मुझे अपनी फ्रेंड की बात याद थी.

मैंने भाई को बताया कि मेरी एक फ्रेंड आपसे चुदवाना चाहती है.

भाई ने मेरी सहेली के बारे में मुझसे बात की और उसका फिगर कैसा है, ये सब पूछा.

मैंने तान्या के सेक्सी शरीर की बात भाई को बताई, तो भाई का लंड तान्या की चुदाई करने के लिए खड़ा हो गया.
वो बोला- ठीक है … कब चुदवाएगी तान्या. मैं बोली- जब आप बोलो.

तान्या की चुत मिलने का सुनते ही भाई ने कहा- उसकी चुदाई पहली फुर्सत करूंगा. मगर अभी तेरी एक बार फिर से लेने का मन हो गया है.
मैं भी अपने भाई के लंड से दुबारा चुदने को बेचैन हो गई थी.

इस बार भाई से सुपरफास्ट और बहुत हार्ड तरीके से मेरी चुत चुदाई कर डाली. उसने इतनी स्पीड में चुदाई की थी कि मेरी चुत भी दर्द करने लगी थी.

भाई बोला- यार तान्या को जल्दी चुदवाना … तेरी बात सुनकर मेरे लंड में आग लग गई है.
मैं थोड़ी दुखी हो गई.

वो बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- तान्या के बाद आप मुझको तो चोदोगे नहीं?
भाई बोला- अरे नहीं यार … तान्या को एक बार खुश कर देता हूँ. उसके बाद मैं तो तेरा ही हूँ. जब तू बोलेगी तब तुझे चोद दूंगा.
मैं बोली- ओके भाई.

मैं कपड़े पहन कर अपने रूम में चली गई. सुबह कॉलेज में मैंने तान्या को रात की चुदाई के बारे में सब बता दिया.

वो गाली देते हुए बोली- साली अकेली ही चुद कर आ गई भोसड़ी वाली. मेरी चुत का क्या होगा?
मैं बोली- मर मत. … भाई से बात हो गई है … तू बता तुझे उससे कब चुदना है.
वो बोली- कल ही बुला ले.
मैंने कहा- किधर चुदेगी?
वो बोली- हां यार … ये तो दिक्कत है … उसे कहाँ बुला लूं … मादरचोद कोई प्लेस भी नहीं है.

मैं उसकी तरफ देखने लगी.
वो बोली- होटल में चली जाऊंगी.
मैंने ओके कह दिया और घर आ गई.

घर आकर मैंने भाई को बता दिया और कल उसके साथ चलने का कहा.
भाई भी राजी हो गया.

अगले दिन मैंने तान्या को भाई से मिलवाया, तो दोनों बिना किसी की शर्म के ऐसे मिल रहे थे … जैसे दोनों पहले ही एक दूसरे जानते हों.
थोड़ी देर में मैं कॉलेज आ गई.

अब आगे की स्टोरी तान्या से सुनिए.

हैलो मैं तान्या … मैं शिवानी के भाई के साथ होटल के रूम में आ गई. ये रूम मैंने ही बुक किया था. कमरे में जाते ही मैं शिवानी के भाई से चिपक गई. पागलों के जैसे उसको किस करने लगी. वो भी गर्म हो गया और मेरा पूरा साथ दे रहा था. मेरे चूचे दबा रहा था. वो दो तीन मिनट में ही पूरा पागल हो गया.

उसने धीरे धीरे करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, मैंने उसके कपड़े हटा दिए.

उसका आठ इंच कर खड़ा लंड देख कर मेरी तो गांड फट गई. मैं उससे बोली- कैसे जाएगा … ये तो बहुत मोटा और लंबा है.
वो बोला- तू मेरा कमाल देख … इस लंड को तो तू उछल उछल कर चुत में लेगी.
मैं हंस दी.

उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगा. मैं पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी ‘आआहह … आआहह … चाटो … डियर मज़ा आ रहा है … आआह..’

कुछ देर मैं भी उसका लंड चूसने लगी. फिर मैंने उससे कहा- अब नहीं रहा जा रहा … मुझे चोद दो प्लीज़.

उसने मुझे बिस्तर में चित्त लेटा दिया और मेरी टांगें ऊपर करके लंड चुत की फांकों में सैट कर दिया. उसके मलंद का सुपारा एकदम दहक रहा था. उसने मेरी चुत में लंड का एक शॉट मारा … तो उसका आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया

मेरी मैया चुद गई … ऐसा लगा जैसे किसी ने गर्म सलाख चुत में ठांस दी हो. मेरी दर्द से भरी तेज चीख निकल गई- आआहह … आआहह … निकालो.

और मेरी आँखों से आंसू निकल गए. मैंने इतना मोटा लंड अब तक नहीं लिया था. हालांकि मेरे भाई का लंड भी सात इंच का है … लेकिन शिवानी के भाई का लंड मोटा बहुत था.

थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हुआ तो वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.
मैं भी ‘आआहह … आआहह..’ करके चुद रही थी. वो ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदे जा रहा था.

कोई बीस मिनट की चुदाई में मेरी जान निकल गई. उसने मेरी चुत में ही सारा रस छोड़ दिया और मेरे ऊपर लेट गया.
थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटा रहा. फिर बोला- तेरी लेने में मज़ा आ गया.
मैं उसको किस करने लगी.

उस दिन उसने मुझको तीन बार चोदा. शाम को घर आकर मैंने शिवानी को फोन पर सब बता दिया और सो गई.

तो दोस्तो, मेरी सहेली तान्या मेरे भाई से चुद कर खुश हो गई थी. भाई को भी उसे चोदने में मज़ा आ गया था.

भाई ने घर आकर मुझे गले से लगाया और बोला- सच में तान्या बड़ी टेस्टी थी … आज उसकी चूत लेने में बड़ा मज़ा आया.

मैंने कहा- उसकी तो ले ली … मेरी कब लोगे?
भाई- तुम्हारी कल लूंगा … कल तुमको और भी मस्त चोदूंगा.

उस दिन के बाद मैं और तान्या भाई से चुद रही हैं. तान्या और मैं अपने भाई से एक साथ भी चुद चुकी हैं. तान्या के भाई से भी मैं चुद चुकी हूँ. हम चारों ने एक बार ग्रुप सेक्स भी किया है. वो सारी बातें अगली मदमस्त सेक्स कहानी में लिखूंगी. लव यू फ्रेंड्स आप भी चोदते रहिए और लड़कियों तुम सब भी चुदती रहो. जवानी एक बार ही आती है … इसके पूरे मजे लो.

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मेरी देसी चूत

मेरा नाम डिम्पल है और मैं 28 साल की हूं. मेरा फिगर 36-30-36 का है. मेरी शादी भी हो चुकी है. आज मैं आपको अपनी जिन्दगी का एक अनछुआ लम्हा बताने जा रही हूं. मेरे एक फ्रेंड के कहने पर मैं ये वाकया आपके साथ बांट रही हूं.

ये घटना अब तक मेरे मन को कचोट रही थी. मैंने आज तक इसके बारे में किसी से जिक्र नहीं किया था. आज मेरा बहुत मन किया मैं इसको आप लोगों को बताऊं.

मैं इस साइट पर बिल्कुल नयी हूं. अगर मुझसे यह कहानी लिखने में कोई गलती हो जाये तो मुझे माफ करें.
अब मैं अपनी कहानी की शुरूआत करती हूं.

शादी से पहले ही मैं तीन लड़कों के साथ सम्भोग का सुख ले चुकी थी. इसलिए मैं उन तीनों के बारे में आपको एक एक करके बताऊंगी. आप थोडा़ सा धैर्य रखें.

मैं बहुत ही इज्जतदार फैमिली से हूं. 12 वीं तक तो मेरी पढ़ाई भी वैसे ही हुई जैसे कि सब लोग करते हैं अपने लोकल एरिया में. मैंने भी अपना स्कूल अपने गांव में ही पूरा किया.

उसके बाद आगे की पढ़ाई का सवाल था. मेरे मां-पापा मुझ पर काफी भरोसा करते थे. मैंने आज तक कोई गलत काम नहीं किया था और हमेशा अपनी इज्जत को बरकरार रखा. इसी भरोसे पापा ने मुझे पटना सिटी भेजने का फैसला किया.

पटना के एक अच्छे कॉलेज में मेरा एडमिशन हुआ और मैं वहीं पर हॉस्टल में रहने लगी. शुरू शुरू में सब कुछ ठीक चल रहा था. मैं भी पढ़ाई में मन लगा रही थी. मगर मैं जवान भी हो रही थी इसलिए कभी कभी नजर भटक जाया करती थी.

फिर मेरी मुलाकात कॉलेज के एक लड़के से हुई. उसका रियल नाम मैं यहां पर नहीं बता सकती हूं. मैं उसको सुमित नाम दे रही हूं.
सुमित देखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम था.

एक दिन कुछ लड़के मुझे और मेरी सहेलियों को परेशान कर रहे थे. सुमित पास आया और उसने उन लड़कों को डांट कर भगा दिया. उस दिन के बाद से मैं उसको अच्छा मानने लगी.

मेरी अभी तक उससे बात नहीं हुई थी. बस एक बार हैलो हुई थी. उसके बाद जब कभी भी वो मेरे सामने होता था तो मैं उसको स्माइल करके निकल जाया करती थी. वो भी बदले में स्माइल से जवाब देता था.

इस तरह से धीरे धीरे हम दोनों की फ्रेंडशिप बढ़ने लगी.

एक दिन उसने मुझे उसके साथ घूमने चलने का ऑफर दिया. मैं सोच नहीं पाई कि उसको क्या जवाब दूं. एकदम से किसी के इतने करीब जाने में मुझे डर लग रहा था. मैं जब गांव में थी तो लड़कों से बच कर रहती और मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड भी नहीं था.

सुमित को मैंने मना कर दिया. मैं इसके लिए कम्फर्टेबल नहीं थी. घरवालों से मुझे बहुत डर लगता था. अगर मेरे साथ कुछ भी गलत हुआ तो मेरे घरवालों का विश्वास टूट जाता.

मेरे मना करने पर सुमित ने मेरी बात का बुरा भी नहीं माना.
वो बोला- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारी इच्छा नहीं है तो रहने देते हैं. मैंने तो इसलिए पूछा था कि तुम पटना में नयी हो इसलिए तुम्हें शहर दिखा ले आता हूं.

वैसे मेरा बहुत मन करता था सुमित से बात करने के लिए. मगर मैं खुद को कंट्रोल करके रख रही थी. अब हम दोनों की दोस्ती आगे बढ़ रही थी.
सुमित ने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर मांगा. मैंने कह दिया कि मैं मोबाइल फोन नहीं रखती हूं.

वो बोला- तो फिर घर पर कैसे बात करती हो?
मैंने कहा- हॉस्टल के नम्बर पर बात हो जाती है.
वो बोला- ओह्ह, ठीक है.

इस तरह से वक्त बीतता गया और फिर मेरा बर्थडे आ गया. मेरे बर्थडे गिफ्ट के रूप में उसने मुझे एक मोबाइल फोन दिया.
मैंने वह फोन का गिफ्ट लेने से मना कर दिया.
मगर वो जिद करने लगा; कहने लगा कि अगर मोबाइल नहीं लिया तो वो मुझसे बात नहीं करेगा.
उसकी जिद के आगे मुझे मानना पड़ा और मैंने मोबाइल ले लिया.

मेरे पास मोबाइल आने के बाद रोज सुमित का फोन आता था. वो रोज मुझसे बातें करने लगा और मुझे भी उसके साथ बातें करना अच्छा लग रहा था.

उससे बात होते होते पता नहीं कब हमारी ये दोस्ती प्यार में बदल गयी. फिर एक दिन उसने मुझे प्रपोज भी कर दिया. सुमित से मेरा लगाव काफी बढ़ चुका था इसलिए मैं भी उसको मना नहीं कर पाई.
इस तरह हम दोनों ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बन गये.

उसके बाद रोज उससे घंटों बातें होने लगीं. रात रात भर उसके साथ मैं फोन पर बातें करती रहती थी. कॉलेज में भी उसके साथ टाइम स्पेंड किया करती थी. मगर अभी तक हम दोनों कहीं बाहर नहीं गये थे.

एक दिन उसने बोला कि चलो घूमने चलते हैं. मैं भी पटना में इतने दिनों से रह रही थी लेकिन अभी तक कहीं घूमी नहीं थी. इसलिए मैंने चलने के लिए हां कर दी.

मैं अपने साथ अपनी रूम मेट को भी ले गयी. हमने बाहर काफी अच्छा वक्त बिताया और मस्ती की. उसके बाद हम फिर से हॉस्टल लौट कर आ गये. कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा.

एक रात की बात है कि हम दोनों फोन पर बातें कर रहे थे. बात करते हुए सुमित थोड़ा नॉटी होने लगा. एक दो बार मना करने के बाद मेरा भी मन करने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

उस दिन के बाद से हम दोनों काफी खुलने लगे थे. अक्सर वो फोन पर मुझसे सेक्स चैट किया करता था. मैं भी उसको मना नहीं करती थी. अब हम दोनों के बीच में वो सब बातें होने लगी थीं जो एक नॉर्मल ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के बीच में होती है. हम दोनों के बीच में भी वो सब होने लगा.

फिर एक दिन उसने चिड़ियाघर में घूमने के लिए बोला. हम दोनों ज़ू में घूमने के लिए गये. इस बार केवल मैं और सुमित ही थे. मैंने उस दिन सलवार और सूट पहना हुआ था. उसके ऊपर एक दुपट्टा डाला हुआ था.

मैंने कभी जीन्स नहीं पहनी थी और न ही मैं ब्रा पहनती थी क्योंकि उस वक्त मेरे मम्में इतने बड़े नहीं थे कि उनको थामने के लिए मुझे ब्रा की जरूरत पड़े. अब मैं सुमित के साथ काफी ज्यादा कंफर्टेबल हो गयी थी.

सुमित ने मेरे हाथ को अपने हाथ में थाम रखा था और हम दोनों साथ में चलते हुए ज़ू में घूम रहे थे. काफी देर चलने के बाद हम दोनों एक जगह जाकर बैठ गये.

उस जगह पर काफी सुनसान सा था. हम दोनों एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे. हम दोनों बातें कर रहे थे कि बीच में ही सुमित ने एक किस की डिमांड कर दी.
मैं आनाकानी करने लगी.
काफी जोर देने के बाद मैं गाल पर किस देने के लिए राजी हुई.
सुमित मेरे होंठों पर किस करना चाहता था. मगर आखिर में उसने मेरे गाल पर ही हल्का सा किस किया.

फिर वो मेरी गोद में अपना सिर रख कर लेट गया. बात करते करते उसने मेरे पेट पर सूट के ऊपर से ही चूमना शुरू कर दिया. कभी मेरे पेट पर उंगली घुमाने लगा. मैंने भी उसको रोकने की कोशिश नहीं की क्योंकि अगर मैं कुछ हरकत करती तो किसी को पता चल जाता. इसलिए वो जो करता रहा मैंने करने दिया.

सुमित ने फिर धीरे से मेरे शर्ट को साइड से हटा लिया और मेरे नंगे पेट के बीच में मेरी नाभि पर किस कर दिया. मेरे बदन में जैसे चीटियां रेंगने लगी और मैं उत्तेजित होने लगी. मैं उसको रोकने लगी मगर वो रुक नहीं रहा था. फिर मैंने उसे हटाया और अपनी कुर्ती ठीक कर ली और अपने पेट के नंगे पार्ट को ढक लिया.

कुछ देर वो चुपचाप बैठा रहा. मेरा ध्यान उसकी पैंट में बनी गोल और लम्बी सी डंडे के आकार की आकृति पर गया. उसकी जिप के पास में एक लम्बा सा खीरे जैसा कुछ उठा हुआ था. शायद ये उसका सेक्स ऑर्गन था. मैंने पहली बार किसी लड़के के लिंग को ऐसे इतने करीब से उठा हुआ देखा था.

अपने ही खयालों में मैं बैठी थी कि तभी सुमित ने मेरी चूचियों पर हाथ रख कर उनको दबा दिया. उस वक्त मेरी चूची अमरूद जैसी ही थी. दो-तीन बार उसने ऐसा ही किया और मैं भी एक्साइटेड हो गयी.

यह सब कुछ मेरे साथ पहली बार हो रहा था. मगर मैं कुछ भी जाहिर नहीं कर रही थी. फिर उसने ई-पॉड निकाला और कुछ फनी वीडियो मुझे दिखाने लगा. बीच बीच में उसने उसके अंदर पोर्न वीडियो भी डाले हुए थे. उसने मुझे भी वो पोर्न वीडियो दिखा दिये.

मैंने पहली बार सेक्स वीडियो देखा था. उसमें मैंने देखा कि एक लड़की एक लड़के के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी.
सुमित बोला- तुम भी ऐसा करना चाहोगी?
मैंने मना कर दिया.

मगर फिर वो जिद करने लगा.
मैं बोली- मैं मुंह में नहीं लूंगी, हां बस हाथ में पकड़ सकती हूं.
मेरे हां करने पर उसके चेहरे पर एक हवस दिखाई देने लगी.

हम दोनों फिर थोड़ा और अंदर चले गये. वहां पर दूर दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था. वैसे भी दोपहर का टाइम हो चुका था. वहां पर ऐसे समय पर हमारे जैसे कपल ही ज्यादा रहते हैं.

उसके बाद सुमित ने अपना औजार अपनी पैंट से बाहर निकाल लिया. मैं उसके टूल को देखती ही रह गयी. मुझे काफी घबराहट हो रही थी. मैंने पहली बार लिंग ऐसे अपनी आंखों के सामने देखा था.

सुमित ने मुझे उसका लंड पकड़ने के लिये कहा. मैं शरमा रही थी. मगर फिर मैंने कांपते हाथ से उसके लंड को पकड़ लिया. उसका लंड काफी गर्म था. उसको हाथ में भर कर मैं उसे हिलाने लगी.
वो सिसकारते हुए बोला- आह्ह… डिम्पल डार्लिंग, एक बार इसको मुंह में भी ले लो.

मैंने उसको मना कर दिया. उसके बाद सुमित मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फिराने लगा. वो मेरी सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करने लगा. मैं मना करने लगी कि कोई देख लेगा.
वो बोला- दूर दूर तक यहां पर कोई भी नहीं है.
मैं आसपास देखने लगी तो सच में वहां पर कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था.

इतने में ही सुमित ने मेरी सलवार का नाड़ा खींच दिया. नाड़ा खुलते ही मेरी सलवार नीचे सरक गयी क्योंकि मैं खड़ी हुई थी.
मैंने कहा- नहीं, ये सही नहीं है सुमित.
वो बोला- जान, बस एक बार दर्शन करने दो मुझे इसके.

मैं मना करती रही लेकिन वो मानने वाला नहीं था. मैं उसकी जिद को पूरा करने के लिए मान गयी. मेरे हां करते ही वो घुटनों के बल बैठ गया और मेरी पैंटी को नीचे करने लगा. उसने मेरी पैंटी को खींच दिया और मेरी चूत को देखने लगा.

फिर मैं सलवार ऊपर खींचने लगी लेकिन उसने इसी बीच मेरी चूत पर होंठों से किस कर दिया. डर के मारे मैंने एकदम से सलवार ऊपर कर ली और बोली- चलो अब. यहां पर कोई देख लेगा.
मैंने अपनी सलवार का नाड़ा बांध लिया था.

उस दिन के बाद से जब भी मैं उससे कॉलेज में मिलती थी तो मौका पाकर वो मेरे मम्मों को दबा देता था या फिर हाथ से मसल देता था. बार बार ऐसा करने से मेरी चूचियों का साइज अब धीरे धीरे बढ़ने लगा था जो कि मैं साफ साफ नोटिस कर पा रही थी.

सुमित ने कई बार मुझे उसके रूम पर बुलाने की कोशिश की. मगर मैं टालती रही. मैं जानती थी कि अगर वो पार्क में इतना कुछ कर सकता है, कॉलेज टाइम में भी मेरी चूची पकड़ सकता है तो फिर अगर मैं अकेले में मिली तो वो बहुत कुछ कर देगा. इसलिए मैंने टाल दिया. मैं बार बार उसको मना कर देती थी.

कुछ दिन के बाद इस बात को लेकर हम दोनों का झगड़ा भी होने लगा. वो कहता था कि मैं उसको प्यार ही नहीं करती हूं, उस पर भरोसा ही नहीं करती हूं.

मैं बोली- देखो, तुम ऊपर से कुछ भी कर लो लेकिन उससे ज्यादा तो मैं शादी के बाद ही करने दूंगी. मैं शादी से पहले ये सब नहीं करना चाहती हूं. ये सब गलत है अभी.

इस तरह वक्त बीत रहा था. मैं उसको मौका नहीं दे रही थी. इसी बीच मेरी बड़ी दीदी की शादी होने लगी. लड़का यानि कि मेरा होने वाला जीजा पटना में ही जॉब करता था. फिर शादी के बाद मेरी दीदी पटना में ही रहने के लिए आ गयी.

बीच बीच में टाइम निकाल कर मैं भी दीदी के पास चली जाया करती थी मिलने के लिए. एक बार मैं दीदी के यहां पर गयी हुई थी. रात को काफी लेट हो गयी थी इसलिए मैं हॉस्टल में नहीं आई और रात में वहीं पर रुक गयी.

मेरी दीदी और जीजा का रूम साथ में ही था. वो साथ वाले रूम में ही सोये हुए थे. रात में काफी टाइम के बाद मेरी आंख खुली. मेरे कानों में कुछ आवाजें आईं.

उत्सुक होकर मैं देखने के लिए उठी कि ये कैसी आवाजें आ रही हैं इतनी रात में. मैं दीवार पर कान लगा कर सुनने लगी. वो अजीब सी आवाजें थीं.

फिर मैंने खिड़की के छेद से देखा तो दीदी और जीजा का प्रोग्राम चल रहा था. मेरे जीजा ने मेरी दीदी को नंगी किया हुआ था और वो खुद भी नंगे थे. जीजा ने दीदी की टांगों को उठा कर कंधे पर टांगा हुआ था और वो दीदी की चूत में अपना लिंग घुसा रहे थे.

दीदी के मुंह से मस्ती भरी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं और वह अपनी मोटी मोटी चूचियों को मसलते हुए आह्ह आह्ह करते हुए जीजू के लंड को अपनी चूत में ले रही थी.

दीदी की चूत में जीजा का मोटा लंड घुसते हुए देख कर मेरी धड़कन धक धक होने लगी. ये सब हो क्या रहा था. मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी. ऐसा नहीं था कि मुझे मर्द और औरत के बीच के शारीरिक रिश्ते के बारे में नहीं पता था, मगर मेरी आंखों के सामने ऐसा कुछ पहली बार मैं होते हुए देख रही थी.

फिर जीजू ने दीदी को उठने के लिए कहा. दीदी उठ गयी और जीजू नीचे लेट गये. दीदी फिर जीजू के ऊपर अपनी चूत खोल कर लंड पर बैठने लगी. दीदी ने धीरे धीरे बैठते हुए जीजा का लंड अपनी चूत में ले लिया.

लंड अंदर उतारने के बाद वो जीजा के लंड पर उछलने लगी. जीजा भी उसकी चूत में नीचे से लंड के धक्के लगाने लगे. जीजू दीदी की चूचियों को अपने हाथों से जोर जोर से दबा रहे थे. जीजू के हाथों में दीदी के मोटे मोटे चूचे उछल रहे थे.

ये सब देख कर मेरा गला सूखने लगा मगर मेरी चूत में गीलापन होने लगा. फिर जीजू ने उनको घोड़ी बना लिया और पीछे से उनकी चूत को पेलने लगे. दस मिनट हो गये थे चुदाई चलते हुए. मेरे पैर भारी हो रहे थे. मुझसे खड़ा नहीं रहा जा रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे शरीर में ताकत नहीं बची है.

फिर मैंने देखा कि जीजू ने एकदम से अपनी स्पीड बढ़ा दी और वो फिर रुकते चले गये और दीदी के ऊपर ढेर हो गये. फिर वो साइड में होकर लेट गये. दोनों हांफ रहे थे.

अब मैं वहां से साइड हो गयी. मैं अपने रूम में आकर लेट गयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ ये क्या हो रहा है. मेरी धड़कन बहुत तेजी से चल रही थी. मेरी सांस फूल सी गयी थी. पूरा बदन कांप रहा था. मगर एक एक्साइटमेंट भी थी, कुछ मदहोश कर देने वाली सी फीलिंग आ रही थी इसलिए वो सब मुझे अच्छा भी लग रहा था. मैंने चूत को कपड़ों के ऊपर से छूकर देखा तो मेरी चूत का गीलापन कपड़े तक आ चुका था.

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चूत ने पानी छोड़ दिया

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

मुझे समझ नहीं आता कि मुझे उससे मिलने जाना चाहिए या नहीं कृपया अपनी राय दें।

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मेरी चूत की सील

हेलो दोस्तो, कैसे हो?
मैं सोनिया राजस्थान से!

आज मैं एक बार फिर लाई हूँ अपनी सच्ची कहानी … जिसे पढ़कर आपका लंड खड़ा हो जायेगा.

मेरा एक बड़ा भाई जिसका नाम हेमराज है लोग प्यार से उन्हें हेमू कहते हैं … काफी स्मार्ट और हट्टे-कट्टे!

एक बार जब भाई गाँव आए हुए थे तो मैं बाथरूम में नहाने गयी और कुण्डी लगाना भूल गयी. मैं हमेशा नंगी नहाती हूँ, उस दिन भी नंगी थी.
और इतने में अचानक भैया अंदर आ गये; मुझे नंगी देखकर हक्के बक्के रहे गये.

मैं शर्म से लाल पीली थी क्यूंकि अभी तक नंगी मुझे मेरे बॉयफ्रेंड ने ही देखा था.

उस दिन के बाद भैया का नजरिया ही बदल गया.

एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे फोन करके कहा कि मैं अपनी मम्मी की साड़ी और ब्लाउज पहन कर उनको फोटो भेजूं … और उपर से अपने बूब्स दिखाऊं.
तो मैंने मम्मी की साड़ी और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन ली. उसके बाद मम्मी के कपड़ों में ही बाहर चौक में झाड़ू लगाने लग गयी.
जैसे ही मैं झाड़ू मार रही थी, उतने में भाई आ गए और सामने कुर्सी पर बैठ गये.

मेरा ब्लाउज ढीला होने के कारण मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर से साफ़ दिखने लग गयी यहाँ तक कि मेरे चुचियों के भूरे रंग के निप्पल भी दिख रहे थे.
मैंने तिरछी नजर देखा तो भाई बड़े गौर से देख रहे थे.

मैं समझ गयी कि भाई अब मेरी चूत बजाने के लिए उतावले हो रहे हैं. अब वो हर दिन में वासना की नज़र से देखने लग गये. मैं सब समझ रही थी … मन तो मेरा भी हो रहा था पर हिम्मत नहीं हुई ना उनकी और न मेरी!
अगले दिन भाई शहर चले गये जॉब के लिए!

6 महीने के बाद भाई ने फोन किया और कहा- मैं कल कुछ काम से गाँव वाले बाज़ार आ रहा हूँ, मुझे तुझसे मिलना है.
हमारे गाँव 15 किलोमीटर की दूरी पर ही बाज़ार है और वहीं मेरा कॉलेज भी. मैं तब बी ए सेकेंड इयर में थी.
मैंने कहा- ठीक है भाई!
भाई ने कहा- वहीं होटल में कमरा ले लेना. हम वहीं बैठ कर खाना खायेंगे और आराम भी करेंगे.
मैंने कहा- ठीक है भाई!

अगले दिन मैं बाज़ार चली गयी. पहले मैं कॉलेज गयी और उसके बाद आई और होटल में रूम बुक करने गयी. पर मुझे कहीं भी रूम नहीं मिला. मैं दो घंटे तक पूरे बाज़ार में रूम ढूंढती रही पर कहीं नहीं मिला.
सुबह के 10 चुके थे.

इतने में भाई भी आ गये.
मैंने भाई से कहा- कहीं भी रूम नहीं मिला.
तो भाई ने कहा- कोई बात नहीं.

फिर हमने एक दुकान में चाय पी और पकौड़े खाए.
उसके बाद हमने बाज़ार में ऐसी जगह तलाशनी शुरू की जहाँ कोई आता जाता ना हो. पर ऐसी जगह कहीं नहीं मिली.

फिर भाई की नज़र सामने की पहाड़ी पर पड़ी … वहां से एक रास्ता था जो ऊपर किसी गाँव की तरफ जा रहा था.
भाई ने कहा- चल वहां चलते हैं, वहां कोई नहीं आएगा.

मैं भाई की बातों को समझ चुकी थी कि आज मैं अपने भाई से चुदने वाली हूँ.
मेरा भी बहुत मन था अपनी चूत में लंड लेने का; दो महीने से बॉयफ्रेंड नहीं चोदा नहीं था.

हम दोनों भाई बहन उस पहाड़ी की तरफ चले गये … वहीं जाकर एक झाड़ी के सहारे बैठ गये. झाड़ी भी रास्ते के किनारे थी यानि आने जाने सभी हम साफ़ देख सकते थे.
पर क्या करते … और कुछ नहीं था … हम वहीं बैठ गये.

मैं उसने दिन हल्के नारंगी का कुर्ता और सफ़ेद रंग का सलवार पहन रखा था और भाई ने नीले रंग की कमीज और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी.

मेरा कुर्ता बहुत टाइट था जिसकी वजह से मेरी चूची उपर से दिख रही थी. बैठे बैठे भाई की नजर मेरी चूची पर पड़ती और बातें करते.

अब वो बड़े गौर से देखने लग गये.
मैंने कहा- क्या देख रहे हो भाई?
भाई ने कहा- कुछ नहीं.
मैंने कहा- कुछ तो देख रहे हो?
तो इस बार भाई ने हिम्मत करके कह ही दिया- तेरे सीने को देख रहा हूँ.

मैंने कहा- ऐसा क्या है मेरे सीने में?
तो भाई ने कहा- तेरे सीने ने ही तो मुझे पागल बना रखा है.
मैंने कहा- पर ऐसा क्या है?

तो भाई की झिझक अब कम हो चुकी थी, भाई ने कहा- तेरी कोमल और बड़ी बड़ी चूचियां जिनमें मुझे डूब जाने का मन कर रहा है.
मुझे थोड़ी सी शर्म आई मगर मैं फिर भी मुस्कुरा दी.

भाई की हिम्मत बढ़ गयी … अब भाई ने कहा- सोनिया तेरी इन चुचियों में ऐसा क्या जादू है … कितनी सेक्सी और हॉट हैं … मुझे इनको छूने का मन कर रहा है.
मैं कुछ ना बोली और आँखें नीचे कर ली.

उसके बाद भाई आगे बढ़ा और मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरी चूची पर हाथ रख दिया. पहली बार अपने भाई का हाथ अपने चुचियों पर महसूस करके बहुत अच्छा लग रहा था. एक अलग से हलचल हो रही थी, शरीर में एक कम्पन थी. ये अहसास बहुत अलग था.

उसके बाद भाई ने धीरे धीरे मेरी चूचियां मसलना शुरू किया. धीरे धीरे मेरा जोश भी बढ़ने लगा.
अबकी बार भाई ने अपने हाथ मेरे कुरते के अन्दर डाल कर मेरी चूचियां दबाना शुरू कर दिया. मैंने अपनी आँखें बंद कर दी.

इतने में उस रास्ते दो औरत और एक मर्द गुजरे तो भाई ने झट से अपना हाथ हटा लिया. शायद उन लोगों ने नहीं देखा.

उनके जाने के बाद भाई ने दोनों हाथ मेरे गालों पर रख कर मेरे फूल से ओंठ चूसना शुरू किया. मेरे गुलाब जैसे ओंठों को भाई ने खूब चूसे. मैंने भी उन्हें किस करना शुरू किया.

अब भाई खड़े हुए और मैं वहीं पत्थर पर बैठी रही. भाई ने अपनी जींस की जिप खोली और अपना अपना तनतनाता लंड बाहर निकाला.
ओह माय गॉड … क्या लंड था इतना मोटा और बड़ा तो मेरे बॉयफ्रेंड का भी नहीं था!

भाई ने लंड बाहर निकाला, कहा- सोनिया मेरा लंड चूस न!
मैंने भी बिना देरी किये भाई का लंड हाथ में लिया और मुंह में डाला पर ओ मुंह में गया ही नहीं.

फिर मैंने आगे का हिस्सा ही बस मुंह में डालकर उस मस्त लंड को चाटने और चूसने लग गयी.

अपने बॉयफ्रेंड का लंड तो मैंने कई बार चूसा था पर आज जो मजा जो आनंद भाई के लंड चूसने में आ रहा है वो कभी नहीं आया.
सच में क्या लंड था भाई का … ऐसे ही लंड की तो तलाश थी … ऐसा लंड जब मेरी चूत में जाएगा तो मुझे दुनिया का हर आनंद मिल जाएगा. अब तो मैं जल्दी से भाई का लंड अपनी चूत में लेने के लिय मचल रही थी.

काफी देर तक मैंने भाई का लंड ऐसे ही चूसा. इतने में उस रास्ते से एक अंकल और आंटी गुजरे. मैंने झट से भाई के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला. शायद उन्होंने भी हमें नहीं देखा.
उस रास्ते में हम ये करने को मजबूर थे क्यूंकि कहीं भी कोई रूम नहीं मिला.

उन लोगों के जाने के बाद भाई ने कहा- सोनिया ज्यादा समय नहीं … लोग आ जा रहे हैं. बस तू सलवार नीचे कर … मैं तुझसे अब चोदना चाहता हूँ.

मैंने कहा- भाई ऐसे कैसे? कितने लोग आ जा रहे हैं. दिक्कत हो जाएगी.
भाई ने कहा- सच कह कि तू चुदना नहीं चाहती.
मैंने कहा- भाई, कौन पागल लड़की होगी जो इतने मस्त लंड से चुदना नहीं चाहेगी?
तो भाई ने कहा- चुद ले और टेंशन ना ले. कोई आएगा तब की तब देख लेंगे.

तो मैंने भाई से कहा- तुम मुझे नंगी करोगे क्या यहाँ बीच रास्ते में?
भाई ने कहा- नहीं बस तेरी सलवार थोड़ा नीचे सरकाऊंगा और तेरी कच्छी को एक तरफ करके लंड डालूँगा.
फिर मैंने हामी भरी.

भाई ने मुझे खड़ा किया और पहले तो मुझे सीने से लगाया और कहा- सोनिया, मैं तुझे उसी दिन से चोदने के मूड में हूँ जब मैंने तुझे बाथरूम में नंगी देखा था … तेरे ये हसीन जिस्म देख कर मैं बहक गया. जब तेरा खुद का भाई ही बहक गया था तो सोच बाकियों का क्या हाल होता होगा.

उसके बाद मैंने भाई को खूब किस किया.

फिर भाई ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और घुटनों तक सरका दिया और मेरा कुर्ता ऊपर करके मेरी मासूम ही चूचियां बाहर निकाल दी.
अब भाई ने कहा- सोनिया, एक टांग नीचे रख और एक टांग पत्थर पर!
फिर मैंने ऐसा ही किया.

भाई नीचे से आये और मेरी चूत में अपनी जीभ डालकर चाटने लग गये.

“उईइ माँ …” मेरे मुंह से यही निकला. क्या आनंद था वो क्या पल था वो … ऐसा पल हर लड़की के जीवन में आये.
भाई कुछ देर तक मेरी चूत ऐसे ही चाटते रहे.

उसके बाद भाई ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी. जैसे ही भाई ने चूत में उंगली डाली मुझे पेशाब आने लगा.
मैंने भाई को कहा- हटो मुझे पेशाब आ रहा है.
भाई ने कहा- यही तो मैं चाहता था. तू पेशाब मेरे मुंह में कर दे.

मैंने कहा- ये क्या बोल रहे हो भाई?
भाई ने कहा- सुंदर और हॉट लड़कियों का पेशाब पीने में बहुत मजा आता है.

तो मैंने सारा पेशाब भाई के मुंह के अंदर कर दिया. भाई कहने लगे- सोनिया, तेरा पेशाब भी तो तेरे जैसा मस्त है. वाह … मेरी बहना बहुत मजा आ रहा है … तू भी कभी मेरा पेशाब पी कर देखना.
मैंने कहा- ठीक है भाई … फिर कभी!

फिर भाई ने मेरी कच्छी को एक तरफ सरका के अपना लंड मेरी चूत में डालने का प्रयास किया. पहली बार में लंड फिसल के दूसरी तरफ गया.
भाई ने कहा- सोनिया, अपने भाई का लंड अपने कोमल हाथों से पकड़कर अपनी मासूम सी चूत में घुसा न!

मैंने भाई का लंड अपने हाथों लेकर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और भाई को कहा- धक्का मारो.
भाई ने एक ही झटके में सारा लंड अंदर पेल दिया.

मेरी चूत की सील तो मेरे बॉयफ्रेंड तोड़ दी थी. फिर भी मुझे बहुत दर्द हुआ. मैंने भाई से कहा- भाई दर्द हो रहा है.
तो वो ठहर गये.

कुछ देर रुकने के बाद भाई फिर से हल्के हल्के धक्के मारने लग गये.
मैंने कहा- भाई, अब दर्द महसूस नहीं हो रहा है.
कुछ देर बाद भाई की धक्कों की स्पीड बढ़ गयी.

भाई के हर धक्के से मेरी सिसकारी निकल रही थी- आहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह … चोदो और जोर से चोदो भाई … आहह हहह!
इस तरह मैं लगातार सिसकारियां ले रही थी.

भाई भी किसी माहिर खिलाड़ी की तरह अपनी छोटी बहन की चूत चोदे जा रहे थे.

मैं बहुत गर्म हो चुकी थी और भूल गयी थी कि मैं बीच रास्ते में अपने भाई से चुद रही हूँ … मैं सिसकारियां लेने लगी और भाई से कहने लगी- भाई चोदो ना आज अपनी सोनिया बहन को … चोद-चोद के आज मेरी चूत फाड़ दो.

मुझे अपने बड़े भाई के लंड से चुदने में कितना मजा आ रहा था आह हह … मैं बोली- भाई, आप तो बहुत मस्त मजा देते हो. चूत चाट कर भी और अपने लंड से चुदाई का भी!
फिर वो तेजी के साथ मेरी चूत में धक्के लगाने लगे … मुझे दुनिया का हर आनंद अनुभव हो रहा था … मैं कहने लगी- भाई, अब कोई भी आएगा तो अपना लंड बाहर मत निकालना, बस चोदते रहना अपनी बहन को!

भाई मुझे जोरों से चोद रहे थे. मेरी चूची दबा दबा कर उन्होंने लाल कर दिए. भाई कहने लगे- सोनिया, ऐसी चुदाई के लिए कब से तरस गया था … आज अपनी सोनिया बहन को चोद चोदकर रांड बना दूंगा.
मैं भी सेक्स के मजे में कहने लगी- हाँ भाई, आज से मैं आपकी रखैल हूँ … बना दो आज मुझे रांड … बना दो आज खूब चोदकर अपनी बहन को माँ … आज बीच रास्ते में आपकी बहन चुदकर माँ बनना चाहती है … आहहह उम्म्ह!

मेरी आवाजें तेज हो गयी थी और भाई की भी … हम भूल गये थे कि हम पब्लिक प्लेस में चुदाई कर रहे हैं.
भाई मुझे पेले जा रहे थे और मैं भी अपने भाई से पिलती रही.

इतने में वहां से एक सुंदर सी नयी नवेली दुल्हन और उसके साथ एक बुड्डा था या तो उसका पति रहा होगा या ससुर … हमने सच में अनदेखा कर दिया और चुदाई के सागर में गोते लगाते रहे. भाई उनके सामने ही मुझे चोदने में लगे रहे.( उसके बाद क्या हुआ, उन्होंने क्या कहा ये सब अगली कहानी में लिखूंगी)

मैं झड़ने लगी. मगर भैया अभी नहीं रुके. उन्होंने अगले पन्द्रह मिनट तक मेरी चूत को रगड़ा … खूब रगड़ा … जैसे कोई एक रंडी की चूत बजाता है भाई ने भी मेरी चूत ऐसी ही बजाई वो भी खुले में!
भाई पूरी स्पीड में अपनी बहन की चूत में लंड फंसा कर धक्के मारे जा रहे थे.

और फिर उनका वीर्य निकलने को हुआ तो उन्होंने पूछा- कहां गिराना है?
मैंने कह दिया- आह्ह … भैया, मेरी चूत में ही गिरा दो … बना दो आज अपनी सोनिया बहन को माँ!

उसके बाद भैया ने तीन-चार जोर के धक्के मारे और मेरी चूत में झड़ने लगे. उन्होंने सारा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिया. मुझे भैया का लंड अपनी चूत में लेकर बहुत मजा आया.

भाई ने कुछ देर अपना लंड मेरी चूत में ऐसे ही रखा, उसके बाद जबा लंड बाहर निकाला तो मैंने भाई का गीला लंड चाट चाट के साफ कर दिया.
उसके बाद भाई ने मुझे गये लगाया और मेरे ओंठ चूसे.

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पहली चुदाई

मैं 18+ गर्ल हो गयी थी पर फिर भी मैं पड़ोस के लड़के लड़कियों के साथ लुकाछिपी खेलती थी. मैं सेक्स के बारे में जानती थी और इसका मजा लेना चाहती थी. जब मुझे मौक़ा मिला तो …

दोस्तो, मेरा नाम राधिका है. मैं 24 साल की हूं. मैं पंजाब के एक शहर में रहती हूँ. मेरे घर में मां, पापा, और मेरा छोटा भाई रहते हैं. मेरा फिगर 30-30-32 है

तो चलिए कहानी बताती हूं. बात कुछ साल पहले की है जब मैं 18+ गर्ल बनी थी.
मैं शाम के समय अपने पड़ोस के लड़कों के साथ खेल रही थी. हम लोग तीन लड़कियां और 5 लड़के थे. उसमें एक का नाम था मनु. मनु दिखने में ठीक ठाक था, गोरा रंग, शरीर पर बाल ही बाल थे.

खेलते खेलते अंधेरा ज्यादा हो गया. हम लुका छिपी खेल रहे थे. मनु की बारी थी हम सब को ढूंढने की. पहले भी हम खेलते थे लेकिन वो शाम अलग ही थी. गर्मी ज्यादा होने के कारण सभी के कपड़े गीले हो गये थे. गर्मी में मैं सिर्फ कमीज सलवार पहनती थी.

उस शाम जब अंधेरा कुछ ज्यादा हो गया तो मैं घर जाने के लिए खेल छोड़ कर जाने लगी. तभी अंधेरे में मुझे ठोकर लगी और मैं गिर गयी. उस समय मनु ने मुझे देख लिया ओर आकर पकड़ लिया।
तभी बाकी दोस्त भी आ गये. मनु की बहन ने उसको पीछे से मारा तो उसका कंटरोल खो गया और वो मेरे ऊपर गिर गया. खुद को संभालते हुए मैंने उसके हाथ पकड़ लिए जिसकी वजह से उसका मुँह मेरे मुँह के पास और उसके हाथ मेरे चूची से लग गये.

जैसे कि पहले बताया गर्मी की वजह से मेरे कपड़े भीग गये थे और मैंने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी तो मनु के हाथ लगाते ही मेरी चूचियां दब गयी और मुझे गुदगुदी होने लगी.

मेरी चूची दबाते ही उसका लंड खड़ा होने लगा. वो मेरी जांघ से लगा हुआ था जिसे मैंने बड़ा होते हुए महसूस किया. तो मैंने उसको अपने ऊपर से उठाने के लिए जोर लगाया.
तो उसने उठते हुए अपना दाहिना हाथ मेरी चूची पे रख के उसे दबा दिया.

उसका तना हुआ लंड उसकी गुलाबी अंडरवियर से साफ दिख रहा था. आपको बता दूं कि मनु घर में सिलाई किए अंडरवियर पहनता था, जिसकी वजह से मुझे उसके लंड का स्पर्श पास से महसूस हुआ.

उस समय मैं घर चली गयी और खाना खाकर सोने के लिए गयी. और बिस्तर पर मुझे वो सब याद आया तो मैंने खुद से अपनी चूची दबाई. तो मुझे सब सामान्य महसूस हुआ.
मेरा फिगर उस समय 28-28-30 था.

अगले दिन से मनु मुझे अलग नजर से देखने लगा और ज्यादा से ज्यादा समय मेरे साथ रहने लगा. अब तो उसने मेरी पढ़ाई में भी सहायता करनी शुरु की. पढ़ाई में सहायता करने से मैं भी उसके साथ ज्यादा खुल गई और उसके घर भी आने जाने लगी. मनु घर पर केवल पतली बनियान और अंडरवियर में ही रहता था जिसकी वजह से मुझे बहुत बार उसका लंड दिख जाता. पर उस समय मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख्याल नहीं था.

एक बार उसके परिवार वाले बाहर गये हुए थे और मुझे मैथ का एक प्रश्न समझ नहीं आ रहा था. मैं उसके घर गयी तो दरवाज़ा खुला था.

मैं अंदर गयी तो बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी. शायद वो नहा रहा था. मैं वहीं बैठकर इंतज़ार करने लगी. तभी बाथरूम से कुछ बदली हुई आवाज आने लगी वो जोर जोर से आह उह हम्म मम्म आहह की आवाज़ कर रहा था.
उस समय भी मेरे मन में सेक्स का कुछ नहीं आया.

इतने में उसकी माँ आ गई और उनकी आवाज आई तो मैं बाहर चली गई. और इतने में मनु भी बाहर आ गया.
उसने मुझसे पूछा- इस समय यहाँ?
तो मैंने कहा- कुछ समझना था!

वो मेरे पास आया और समझाने लगा. साथ ही वो कभी अपने हाथ से मेरे हाथ को छू देता, कभी अपनी टांग मेरी टांग से लगा देता.
हमारे में ये सब पहले भी होता था इसलिए मैंने कुछ नहीं किया. इस बार उसका हाथ मेरी चूची से लग गया जिससे उसका लंड आकार में आने लगा.
मैंने देखा तो उसको चिढ़ाते हुए उसके लंड को छूने लगी.
पर उसने मना कर दिया.

उसके बाद मेरे घर से मेरा भाई मुझे बुलाने आ गया तो मैं घर चली गयी.

अगले दिन होली थी तो सभी पड़ोस के लड़के लड़कियां साथ में खेलते थे. उस दिन मैंने सफेद टाप पहना था और साथ में जींस कैपरी जो मेरी सिर्फ जांघों तक थी.
हम सब होली खेलने लगे जिससे मेरे सारे कपड़े रंगों से भर गए.

गली में सब लोग थे पर मनु नहीं था. उसकी बहन ने बताया कि वो घर में छुप के बैठा है.
तो मैं उसके घर गयी. वो बाहर ही खुले में नहा रहा था. उसने सिर्फ कछा पहना था और पूरा भीगा हुआ था. उसके बाल उसके शरीर से ऐसे चिपके हुए थे जैसे किसी चीज को मक्खी.
उसके गीले अंडरवियर से उसके लंड के घने बाल साफ दिख रहे थे.

पर मुझे तो उसको रंगना था तो मैं उसके पास जाने लगी.
तभी पानी में मेरा पैर फिसल गया और मैं उसके ऊपर गिर गई.

मैं इस तरह से गिरी कि मेरा हाथ उसके लंड पर लग गया और वहीं रह गया. मेरे छूते ही वो खड़ा होने लगा. पर मैंने खड़ी होते हुए उसके लंड को दबा दिया जिससे मेरे रंग वाले हाथ का छाप उसके लंड पर छप गई.

तो उसने भी बदला लेने के लिए अपने रंग से रंगना चाहा.
मैं भागने लगी तो उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया. उसने इतना जोर से पकड़ा कि अब उसका खड़ा लंड मुझे चुभने लगा और उसके हाथ मेरी चूचियों पर थे. उसने उनको जोर से दबा दिया और बोला- अब हिसाब बराबर हो गया.

उसके हाथ की छाप मेरे सीने पर छप गयी तो उसने साफ करने के लिए मेरे पे पानी डाल दिया जिससे मेरे गीले टाप से मेरे निप्पल दिखने लगे. वो तो मेरे सीने को देखता ही रह गया.
इतने में उसकी बहन आ गई तो मैं उसके साथ चली गई.

अगले दिन मेरे घर वालों को भाई का इलाज करवाने बाहर जाना था तो मेरी परिवार वाले मनु के घर पर बोल के गये थे कि मैं उनके घर पर रह लूंगी कुछ दिन!

मैं रात को उनके घर चली गई. तो वहाँ पता चला कि उसकी बहन अपने मामा के घर गई है और उसके ममी पापा बंगलौर जा रहे थे जरूरी काम से. उसकी मम्मी ने खाना बना के रखा हुआ था.
मनु मुझे खाना परोसने लगा.

उसने दाल का बर्तन मुझ पर गिरा दिया जिससे मेरे सारे कपड़े खराब हो गए. तो उसकी मम्मी ने बोला- राधिका, तू नहा कर रिया के कपड़े पहन ले.
तो मैं नहाने चली गई और उसके मम्मी पापा भी चले गए.

नहा कर जब मैं कपड़े पहनने लगी तो वो मुझे फिट आ नहीं रहे थे. उसकी शमीज तो किसी तरह पहन ली पर उसकी पजामी मुझे आ नहीं रही थी.

बाथरूम में मनु का वो रंग वाला अंडरवियर पड़ा था जिस पर उसका माल निकाले का दाग था. मैं वही पहन के बाहर आ गई. उसकी बहन की शमीज से भी मेरे आधे चूचे दिख रहे थे.

मुझे ऐसे देख वो चौंक गया तो मैंने कहा- तुम्हारी वजह से ही हुआ सब! और रिया के कपड़े आ नहीं रहे थे इस लिए तेरी अंडर वियर पहन ली.
उसके बाद हम आचार के साथ खाना खाकर एक साथ एक ही कमरे में सोने चले गए.

रात को बातें की तो उसने कहा- राधिका, मुझे एक बात बताओ.
मैं- क्या?
मनु- मेरा ये खड़ा क्यों हो जाता है?

मैं- मुझे नहीं पता!
यह कह कर मैं सो गयी.

मैं नाराज ना हो जाऊँ … यह सोच कर वो भी सो गया. हम दोनों एक ही बेड पर थे जिससे मेरी टांग उसकी टांग से छू जाती और उसके बाल मुझे गुदगुदी करते. क्योंकि वो भी बनियान और कच्छे में सोया हुआ था.

रात के करीब 2-3 बजे लाईट चली गई तो मैं जाग गई और मनु की तरफ से आवाज आ रही थी. मैंने फोन की लाईट से देखा तो उसका कच्छा उतरा हुआ था और वो आंखें बंद करके अपने लंड को सहला रहा था.
मुझे कुछ होने लगा और मैं फोन बंद करके उसकी ओर मुड़ गई और अपनी गोरी नंगी टांग उसकी लात पर रख के अपने लात से उसका लंड दबा दिया.
वो सिहर उठा.

फिर मनु ने अपनी कमर को उठा के अपना लंड मेरी लात से दबा दिया. उसने मुझे 2-3 बार हिलाया पर मैं सोने का नाटक कर रही थी और नहीं उठी. मैंने अपनी जांघ से उसका लंड फिर से दबा दिया.

इस बार उसका माल निकल गया और मेरी जांघ गीली हो गई, पर मैं वैसे ही लेटी रही.

थोड़ी देर बाद मनु ने करवट बदली और वो मेरी ओर मुड़ा. तो मैं भी करवट बदलते हुए उसकी ओर मुड़ी और अपनी जांघ उसके ऊपर रख ली. अपना एक हाथ उसकी जांघों के बीच लंड के पास रख लिया. मेरी उंगलियां उसकी झांटों में चली गई और मेरा हाथ उसके तन रहे लंड को महसूस कर रहा था. तो मैंने अपना हाथ जोर से वहां रख लिया.

उसने भी कोई विरोध नहीं किया और अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगा. मैं भी बीच में अपना हाथ इधर उधर कर रही थी पर उसके बाल ही मेरे हाथ आते, वो समझ रहा था कि मैं सो रही हूं.

फिर वो मेरी ओर खिसका और मेरा हाथ अपने लंड के नीचे दबा लिया. इस वक्त उसका लंड लोहे की तरह सख्त हो गया था.

अब इससे पहले कि वो कुछ और करता … लाईट आ गई हवा आने से मैंने खुद को हिलाया तो वो डर गया कि मैं जाग रही हूँ. वो जल्दी से अलग होकर बाथरूम में चला गया और करीब पंद्रह बाद बाहर आया.

मैं समझ गयी कि उसने क्या किया होगा. पर मैं बेखोफ थी क्योंकि मेरे पास 2 रातें और थी उससे चुदने के लिए और उसको तैयार करने के लिए!

उसके बाद मनु बाहर आकर सो गया और अगले दिन सुबह मैं अपने घर आ गई.

मैंने अपने कपड़े उतारे और नहाने के लिए जाने लगी तो मुझे वो रात याद आ गई तो मैं वही बेड पर लेट गई. फिर मैंने अपने आप को शीशे में देखा और अपनी चूत पर हाथ रख के सहलाने लगी. 18+ गर्ल इन हालत में और क्या कर सकती थी? कुछ समय बाद मैं झड़ गई.

फिर मुझे ख्याल आया कि क्यों ना मैं अभी मनु के घर चली जाऊँ और उसके साथ वक्त बिताऊँ. तो मैं जल्दी से नहाने गई और नहा कर नंगी ही बाहर आ गई. मैंने बिना ब्रा पहने सफेद रंग की टाप पहनी जिसमें से मेरे चूचे की शेप और साईज दिख रहा था. और नीचे बिना पैंटी के ही घर पर बनाया हुआ निकर पहन लिया जो मेरी जांघों तक आ रहा था और काफी पतला भी था.

मैंने उसके घर जाकर बैल बजाई तो वो जल्दी से भाग के आया.वो सिर्फ तौलिये में लिपटा हुआ था. शायद वो नहाने जा रहा था.
मुझे देख कर वो बोला- अभी यहां कैसे?
तो मैंने पढ़ाई का बहाना करते बोला- मुझे कुछ समझना है.

उसने मुझे हाल में बैठाया और नहाने चला गया.

करीब 15 मिनट बाद वो बाहर आया तो उसका बदन थोड़ा गीला था और उसके बदन के बाल चिपके हुए थे. उसने ढीली बनियान और खुला अंडरवियर पहना हुआ था.

वो मेरे पास आकर बैठा और मुझे पढ़ाने लगा. उसकी जांघ मेरी झांघ को छू रही थी.
मेरे मन में मस्ती सूझी, मैंने उसको बोला- मनु, तेरे शरीर पर इतने बाल क्यों हैं?
पहले तो वो मेरी और देखने लगा, फिर बोला- सब के ऐसे ही होते हैं.

मैं- कहाँ? मेरे तो नहीं है?
मनु- रे पगली, लड़कों के ऐसे ही होते हैं, तेरे भाई के तो इससे भी ज्यादा हैं.
मैं- ठीक है.

उसके बाद वो मुझे पढ़ाने लगा. मैंने कापी से कुछ समझते हुए अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया.

तभी लाईट गई और रूम में गर्मी होने लगी. धीरे धीरे हम भीगने लगे पसीने से!
तो मैंने उसको कहा- कुछ ठंडा मिलेगा? गर्मी लग रही है.

वो शरबत बनाने रसोई में गया. रसोई में तो वैसे भी ज्यादा गर्मी होती है तो वो पूरा भीग गया. जब वो वापस आया तो उसके चेहरे से पसीना टपक रहा था.

गर्मी की वजह से मेरा भी बुरा हाल था, मेरे भी कपड़े भीग गए थे.
जब वो मुझे शरबत देने लगा तो वो देखता ही रह गया. मेरी टाप अब ट्रासपेरंट हो गई और मेरी चूचियाँ साफ दिख रही थी.

उसका लंड खड़ा होने लगा.

किताब एक तरफ रख के मैंने उसको अपने पास बुलाया तो मेरी नंगी जांघें देख के उसका खड़ा लंड और तन गया और उसकी अंडरवियर से बाहर आने को हुआ.
मैंने गुस्सा होने का नाटक किया तो उसने खुद को संभाला और सॉरी बोलने लगा.
तो मैंने कहा- सॉरी तो ठीक है. पर ये क्या है?
मैंने उसके लंड की ओर इशारा करते हुए कहा.

वो शरम से झुक गया और हड़बड़ा कर शरबत मेरे ऊपर गिरा दिया. बर्फ से मुझे ठंडा अहसास हुआ.

मैंने उसको पास बिठाया और कहा- ये सब कुदरती है. तुम भी इंसान हो और ऊपर से लड़के तो किसी भी 18+ गर्ल को ऐसी हालत में देख कर किसी का भी खड़ा हो जाएगा.
ऐसा कहते हुए मैंने अपनी लात उसकी लात से लगा दी.

ऐसा करते ही उसका लंड जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगा और फिर मेरे सामने ही उसका माल निकल गया और उसके कपड़े गंदे हो गए.
मुझे ये देखकर अच्छा लगा.
वो शर्मिंदा होकर बैठ गया.

मैंने उसको कहा- मुझे नहाना है.
मेरे पास कपड़े नहीं थे तो मैंने उसके कपड़े मांगे.

पहले तो उसने मना किया.
फिर मैंने कहा- रात तक यहीं तो रहना है, तब तक ये सूख जायेंगे. और कल रात भी तो तेरे कपड़े पहने थे.
तो उसने दे दिए.

मैं वो लेकर नहाने गयी. उसके कपड़े मुझे ढीले थे पर मैंने पहन लिए. उसकी बनियान मेरी छाती को काफी खुली थी पर उसका अंडरवियर मुझे फिट बैठा.

मैंने रात वाला अहसास फिर से लेना था इसीलिए मैंने उसको पास नहीं आने दिया. फिर हमने नूडल्ज़ खाए और बत्ती बंद करके सोने लगे.
मैंने मनु को बोला- मैं एक बार सो जाती हूँ तो सीधा सुबह उठती हूँ.
मैंने यह जानबूझ कर कहा ताकि वो रात को दोबारा वो सब कर सके.

ऐसा ही हुआ. 12 बजे के करीब जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मनु ने सारे कपड़े उतारे हुए थे. वो मेरे बगल में नंगा पड़ा था.
कल की तरह फिर से नींद में हिलने का बहाना करते हुए मैंने अपनी जांघ उसके लंड पर रख दी. उसका लंड आग की तरह तप रहा था.

मनु मेरी ओर घूमा और मैंने अपनी जांघ हटाते हुए अपना हाथ उसकी जाँघों में घुसा दिया और अपनी उंगलियों को उसके लंड और झांटों की ओर किया.

वो अपनी कमर हिलाने लगा और उसने अपना हाथ सीधा मेरी चूत पर रख दिया. उसने अपना मुँह मेरी चूचियों में घुसा लिया.
मैंने अपना हाथ उसके लंड पर दबा दिया तो उसके लंड का पानी निकल गया. मेरा पूरा हाथ भीग गया पर मैंने अपना हाथ लगाए रखा.

मेरी चूत भी अब गर्म होने लगी और मैंने भी अपना पानी छोड़ दिया.

फिर हम दोनों उठ गए. उसने देर ना करते हुए मेरे कपड़े खीच के फाड़ दिए और मुझे अपनी गोद में बिठाकर चूसने लगा. साथ में उसने मेरी चूचियां जोर से दबा दी. मेरे मुँह से जोर से आह निकली पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ा.

थोड़ी देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और मुझे नीचे चुभने लगा.

उसने मुझे गोद में उठाया और अपने बाथरूम के बाथटब में ले गया. उसने कुते की तरह जोर से मेरी चुत चाटी और अपनी उंगलियां तेल लगा के मेरी चुत में घुसा दी. दर्द से मेरी जोर से चीख निकल गई और मेरा पानी बाहर आने लगा.

फिर उसने देर ना करते हुए अपने लंड पर तेल लगाया और मेरी 18+ चूत पे रख के जोरदार धक्का लगाया.
दर्द के मारे मेरी तेज आवाज में चीख निकली.

उसने पानी का नल खोल दिया. अब टब में पानी भरने लगा. मैं कुछ देर बाद शांत हुई तो उसने एक धक्का और लगाया. उसका पूरा लंड मेरी चुत में घुस गया और 18+ गर्ल की सील टूटने से टब का पानी खून से लाल हो गया.

फिर 2 मिनट बाद वो मुझे चोदने लगा और 15 मिनट चोदता रहा. इस बीच मैं एक बार झड़ गई. और फिर उसने अपना पानी मेरे अंदर निकाल दिया.
उस रात उसने मुझे 3 बार चोदा.

उसके बाद मेरे परिवार वाले और उसके परिवार वाले अगले दिन आ गए.

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पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी

मेरी प्रेम कहानी: मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं. मैं भी उन्हें प्यार करती हूँ. लेकिन शादी से पहले मुझे एक लड़के से प्यार हो गया था. उसे मैं भुला नहीं पायी.

मेरा नाम दिव्या है, मैं दिल्ली से हूं।
आज मेरी शादी को पूरा एक साल हो गया है. मेरे हस्बैंड मुझसे प्यार करते हैं, मैं भी उनसे प्यार करती हूं.

लेकिन आज यहां मैं आई हूं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की एक ख़ास घटना सुनाने को। यह मेरी प्रेम कहानी है शादी से पहले की.

उस समय का बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी. एक लड़का था जो हमेशा मुझे देखता था. जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो मुझे उसकी आंखों में मेरे लिए सच्चा प्यार झलकता था.

बहुत समय तक हमारे बीच यही चलता रहा। एक दूसरे से कुछ कहते नहीं थे … बस देख लिया करते थे। हम चाहते थे पास आना … पर डरते थे।
मैंने सोचा कि वह ही शुरुआत करेगा. पर उसने कुछ नहीं किया.

बहुत समय तक मैंने उसका इन्तजार किया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने ही कुछ सोचा, मैंने किसी बहाने उसके पास जाना था क्योंकि उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए सच्चा प्यार और भरोसा नजर आता था।

फिर एक दिन मैंने एक कागज पर अपना नंबर लिखा और कॉलेज जाते ही उसकी बेंच पर रख दिया. मैं जानती थी कि उसका कॉल जरूर आएगा.

और ऐसा ही हुआ. शाम को उसका कॉल आया. मैं अपने घर की छत पर उसके फोन का इन्तजार कर रही थी.
नया नंबर देखकर मैंने फोन उठाया और बहुत धीमी सी आवाज में हेलो बोली।

बस यही पहली शुरुआत थी हमारे प्यार की!

तब हमारे बीच बहुत सारी बातें हुई. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे; हम मिलने भी लगे।
एक दूसरे का हाथ थामे वह सड़क पर घूमना … प्यार भरी नजरों से एक दूसरे को देखना।

एक दिन मुझे बुखार हो गया। मैं उससे कॉल पर बात नहीं कर पाई। मैं जानती थी कि उसने मेरे फोन का बहुत इन्तजार किया होगा.

जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो मैंने उसको कॉल किया. उसने मुझसे सारी बातें पूछी, मेरी तबीयत … मेरे हालात।
मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिएँ.
उसने मुझसे कहा- बताओ कितने चाहिएँ?

मैंने कहा- सिर्फ दो हजार भेज दो.
उसने कहा- ठीक है, भेज रहा हूं. पर तुम अपना ध्यान रखना।

मेरा इतना ध्यान रखना सिर्फ उसको आता था.

कुछ दिनों बाद मैं ठीक हो गई, मैंने उसको कॉल किया और एक जगह मिलने के लिए बुलाया. मेरा मन उसको अपनी बांहों में भरने का कर रहा था. मैं जाकर सीधे उसके गले लग गई. मैं और वो एक दूसरे की बांहों में बहुत देर तक चिपके रहे।

आज मेरा उससे बहुत प्यार करने का मन कर रहा था. मैंने उससे कहा- आज मैं पूरा दिन फ्री हूं, चलो किसी होटल में चलते हैं.
उसने आंखें झुका कर हम्म ही कर दी.

अब इसे हम दोनों का प्यार कह लीजिए या प्यार में हुआ सेक्स! पर हम एक दूसरे को और नजदीक से जानना चाहते थे, एक दूसरे को टूट कर प्यार करना चाहते थे।

हमने एक होटल में रूम लिया और हम पूरा दिन वहां रहे। होटल में जाकर हम दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक गए.

मैंने धीरे धीरे उसकी शर्ट को उतारा, उसकी नंगी बालों वाली छाती पर अपने हाथों को फिराना शुरू किया. उसने आनन्द से आंखें बंद कर ली थी.

फिर मैंने उसके माथे पर किस किया और उसके सारे जिस्म पर किस करती चली गई. मुझे बस आज उसकी और मेरी एक नई कहानी बनानी थी.
हम दोनों प्यार में इतने डूबे थे।

फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. मेरे शर्ट और सलवार को धीरे-धीरे करके उतारा. मेरा सारा गोरा बदन उसके सामने था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में उसके सामने लेटी थी। उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया। मेरे सारे बदन पर अपनी उंगलियों फिर आई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और मेरे बूब्स को हल्के हल्के चूसने लगा. मैंने अपने हाथ को उसके सिर पर फिराना शुरू कर दिया. वो कभी कभी मेरी नंगी कमर पर भी अपना हाथ फिरा रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

यह पहली बार था कि मैं सेक्स कर रही थी, वरना आज तक सिर्फ सेक्स विडियो में ही देखा था।

फिर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। और अपना लंड मेरी कुंवारी बुर पर लगाने लगा. उसने थोड़ी कोशिश की अपने लंड को मेरी कसी बुर के अंदर डालने की!
पर लंड अंदर गया नहीं!

मैंने उससे कहा- बेबी, पहले मुंह से करो ना … गीली हो जाएगी तो फिर आराम से करना … तब चला जाएगा.
उसने ऐसे ही किया. मेरे बूब्स से किस करते करते नीचे मेरी बुर तक चला गया. वह मेरी सारी बुर को मुंह में लेकर चूसने लगा.

मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अच्छा भी लग रहा था. मैंने यह बुर चटायी का सीन वीडियो में देखा था तो मुझे भी एक बार करना भी था, इसलिए मैंने उससे बोला था.

मैं बेड पर बाल खोलकर लेटी थी और बस उसके नंगे जिस्म को देख कर आनंद ले रही थी. मैं कभी उसको देखती तो कभी बुर चटायी में मिलने वाले मजे के कारण आंखें बंद कर के लेट जाती.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको अपनी ओर खींचा. अब तक उसके मुख की लार से मेरी बुर पूरी गीली हो गई थी. उसका लंड भी प्रिकम छोड़ कर हल्का गीला हो गया था.

हम दोनों प्रेमी इस पोजीशन में आ चुके थे कि अब एक दूसरे में समा जाएं. वो मेरे ऊपर आक र अपने लंड को मेरी बुर के छेद पर सेट करने लगा और मैंने उसकी मदद की.
फिर उसने सीधा हल्के से धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पीछे की तरफ धकेला चाहा ताकि ज्यादा अंदर तक ना जा सके.

लेकिन धीरे-धीरे फिर मुझे मजा आने लगा. अब मैंने अपनी पूरी टांगें अपने प्रेमी के लंड के स्वागत में खोल दी थी और मैंने उसकी कोली भर ली।
वह भी ‘दिव्या दिव्या’ कर रहा था और मुझे बहुत प्यार कर रहा था.

हमने सिर्फ इसी पोजीशन में सेक्स किया और हम दोनों झड़ गए.

फिर हम दोनों ने अपने अंडर गारमेंट्स पहन लिए और ऐसे ही एक दूसरे के पास बैठ गए. बहुत सारी फिर प्यारी बातें की।

अबकी बार उसको मैंने बेड की तरफ धक्का दे दिया उसके लंड पर अपना हाथ फिराने लगी. मैंने पोर्न वीडियो में देखा था और उसी तरह मुझे एक बार लंड मुंह में लेना था.
फिर मैंने उसको मुंह से मजा दिलाया, मैंने उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. धीरे-धीरे मैं उसको मजा दिलाने लगी.
वह मेरे बालों पर और मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रहा था.

फिर से हम दोनों तैयार थे एक दूसरे में खोने के लिए। फिर वह पीछे की तरफ लेट गया और मुझे अपनी ओर खींचा. वह बेड पर सीधा लेट गया, मैं अपने घुटनों को मोड़कर उसके ऊपर जाकर बैठ गई. फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ऐसे ही किस करते करते कब उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे पता ही नहीं चला. बस मजा आ रहा था, पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी.

उसने मेरे बालों को पीछे से खोल दिया. मेरी नंगी कमर पर मेरे बाल बिखरे पड़े थे और मेरी कमर पर उसके हाथ चल रहे थे. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटा दिया और पीछे से मेरी चूत में ही लंड डाला. मेरे बालों को मेरे कंधे से हटाकर वहां किस करने लगा. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था … हम एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.

हमने इसी तरह मजा लिया. वह इसी तरह मेरी चूत में झड़ गया और मैं भी ऐसे ही उल्टी लेटे-लेटे झड़ रही थी तो मैंने बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह की आवाज को रोकने के लिए अपना मुंह बेड में धंसा दिया।

कुछ देर तक हम दो प्रेमी चुदाई के बाद वैसे ही तेज तेज सांसें भरते रहे. फिर मैंने हल्के से अपना चेहरा उसकी तरफ किया, उसने मेरे चेहरे पर किस किया.

उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर रखा था. झड़ने के बाद भी बहुत देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

बहुत समय बीत गया था तो अब मुझे घर जाना था. मेरी मम्मी पापा मेरी बाट देख रहे होंगे.
मैंने उससे कहा- डियर मुझे जाना होगा.
उसने कहा- ठीक है, जाओ. और मैं भी चलता हूं.

उसने मुझे घर के पास छोड़ दिया और वह भी अपने घर चला गया.

फिर हमने रात को कॉल पर बात की. उस पूरे दिन का नजारा हमारी आंखों के सामने घूम रहा था. उस पूरी रात हमने उस दिन के बारे में ही बात की कि हमने कैसे कैसे इंजॉय किया.

उस दिन सेक्स करने के बाद मैं भी और वह भी एक दूसरे के बहुत दीवाने हो गए थे. ऐसा लगता था जैसे अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे.

लेकिन हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ समय बाद मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया. कॉलेज कंप्लीट होते ही पापा ने मेरे लिए लड़का देख लिया. हमारे घर का माहौल कुछ ऐसा था कि मैं पापा की बात को कभी ना नहीं कह सकती थी.
जहां पापा ने चाहा … मुझे शादी करनी पड़ी.

आज मैं अपने हस्बैंड के साथ हूं … खुश हूं. पर शायद जैसे उसके साथ रहती वैसे नहीं।

प्यार तो करते हैं हम एक दूसरे को हस्बैंड वाइफ … लेकिन कुछ वैसा प्यार नहीं है जैसा उसके साथ था।

‘मैं शादी कर रही हूं.’ सुनते ही उसने सिर्फ एक बार मुझसे पूछा था कि यह सच है क्या?
फिर उसके बाद उसने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैं भी नहीं कर पाई।
किस मुंह से करती?

आज कभी किसी चीज की जरूरत होती है तो उसकी याद बहुत आती है। वो था जो मेरे लिए हमेशा खड़ा रहता था। आज पता नहीं कहां इस दुनिया की भीड़ में वह खो गया है.

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मेरी चूत की चुदाई

मेरी चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे पहली बार अपनी चूत और गांड चुदवाई? शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज का! मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था.

मेरा नाम रश्मि है। मैं दिल्ली में रहती हूं 28 साल की औरत हूं मेरी शादी हो चुकी है।

यह कहानी मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी है अंतर्वासना पर जब मेरी शादी नहीं हुई थी मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम का मैं कैसे उसे अपनी चूत और गांड चुदवाती थी आज मैं वही आपको बताऊंगी मेरा बॉयफ्रेंड मेरी सारी ख्वाहिश पूरी करता था तो मैं भी उस पर जान छिड़कती थी।

तब मेरी उम्र 21 साल के आसपास थी मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था मैं वासना से एकदम भरी हुई रहती थी उसने मुझे पटा लिया.
मुझे खुद भी पता नहीं चला कि कब मैं उस उससे पट गई और उसकी बातों में आ गई क्योंकि वह बातें इतनी अच्छी-अच्छी करता था मेरी उससे फोन पर घंटों बात होती थी.

एक बार उसने मुझे होटल में मिलने के लिए कहा. शुरू में मुझे बहुत डर लग रहा था तो मैंने मना कर दिया. लेकिन बाद में फिर हम उसकी ज्यादा जिद करने पर मैं मान गई और हम दोनों साथ में एक होटल में गए.

वहां रूम में जाकर वह मेरे होठों पर चिपक गया, मुझे किस करने लगा. मैं तो गर्म होने लगी थी मेरी कामवासना धीरे धीरे जागने लगी थी.

वो स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना हाथ फिरा रहा था और मेरे होंठों पर किस कर रहा था. वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे उरोज दबा रहा था.

अब तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा यार मुझे जी भर कर चोदे. मैं हर तरह से तैयार थी उससे चुदवाने के लिए!

फिर धीरे-धीरे उसने मेरी स्कर्ट उतार दी, मैं सिर्फ उसके सामने पेंटी में. थी मेरी नंगी जांगे उसके सामने थी वह मेरी जांघों पर किस करने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.

मैंने मजे में अपनी टांगें ऊपर उठा ली और उसके बालों पर हाथ फिराने लगी. मेरी उम्र ही ऐसी थी कि जब वासना जोर मारने लगती है. मैं भी कामुकता से भरी हुई थी.
फिर मैंने खुद अपने कमीज़ उतार दी और अपनी ब्रा भी।

मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और उसे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया. वह मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से कामुकता भरी आवाजें निकल रही थी. दो-तीन साल से इतनी बुरी तरह से मेरा चुदने का मन कर रहा था कि मैं ही जानती थी।

फिर मैंने उसको बेड के दूसरी तरफ धक्का दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगी. लेकिन मेरा मन लंड चूसने का कर रहा था इसलिए मैंने थोड़ी सी पैन्ट को नीचे उतारकर और उसके निक्कर में से उसके लंड को निकाल कर सीधा उसका लंड चूसने लगी.
मेरे यार के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
उसके आधे कपड़े निकले हुए थे, पूरे भी अभी नहीं उतरे थे।
लेकिन मैं पूरी नंगी थी.

मैंने अपने यार के लंड को चूस चूस कर इतना गीला कर दिया था कि उसने मुझे धक्का देकर बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों को हल्की सी ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया.

मैं चीखने लगी और अपने दांतों को उसकी गर्दन पर गड़ाने लगी. मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया और पूरा मजा आने लगा।
मैंने उसकी कमर पर अपने नाखून गड़ा दिए. वह भी मेरी कोली भरकर मुझे जमकर चोद रहा था और इसी पोज में मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

मैं बहुत चिल्लाई जब मुझे मजा आया. मैंने अपने आप को उससे चिपका लिया और उसकी बांहों में सिमट कर रह गई. लेकिन वह मुझे ऐसे ही चोदता रहा.

मेरे झड़ने के बाद मैंने उसको काफी मना किया कि अब मेरी चूत की चुदाई ना करे … लेकिन वह नहीं माना.
मैंने अपने हाथों से उसको हटाना चाहा लेकिन वह नहीं हटा.

तो मैं निढाल होकर बेड पर लेट गई और अपने बदन को टाइट करके उसके धक्कों का सामना करने लगी.

10 मिनट के बाद मुझे फिर से मजा आने लगा और फिर से मैं उसका साथ देने लगी. उसने मुझे अब की बार घोड़ी बना लिया, पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरे बाल पकड़कर मुझे खूब चोदा.
इस अवस्था में मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं बहुत चिल्लाई भी लेकिन वह नहीं हटा और उसे मजा आने लगा तो उसने कहा- बेबी बताओ अपना वीर्य कहां निकालूं?
मैंने उससे कहा- अंदर ही निकाल दो, मुझे आपके बच्चे की मां बनना है.

और उसने ऐसे घोड़ी बने बने ही मेरी चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. गर्म गर्म माल मेरे अंदर जाकर लग रहा था, मुझे महसूस हो रहा था उसका वीर्य, उसका पानी!

फिर वह हट गया. मैं भी थक कर लेट गई, वीर्य मेरी चूत से निकलकर बाहर बहने लगा. हमने कपड़े से अपने अपने यौन अंगों को साफ किया और एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही नंगे चिपके रहे.

फिर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा.

मैंने भी अपने दोनों हाथों से उसके लंड की मालिश की थूक से! और फिर मैं उसका लंड चूसने लगी.

वह ऊपर से मेरे सिर को दबाता तो मैं पूरा लंड उसका मुंह में ले लेती. लेकिन सांस ना आने के कारण फिर मैं जल्दी से बाहर निकाल लेती. हम दोनों इतनी गंदी तरह से सेक्स कर रहे थे क्योंकि हम दूसरे को बुरी तरह से चोदना चाहते थे.

फिर उसने मुझे दोबारा से घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगा. उसने उंगली से मेरी गांड को धीरे-धीरे गीला कर दिया.
मेरी गांड इतनी गीली हो गई कि बहुत ज्यादा! मैं जानती थी कि अब मेरी गांड की चुदवाने की बारी है।

तो उसने अपनी पूरी उंगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी. मुझे बहुत दर्द हुआ.
मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं बेबी, वहां नहीं!

लेकिन वह धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहा, कभी जीभ से चाटता, बार-बार कभी उंगली कभी चाटना!
इस वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर उसने मुझे पेट के बल लेटा कर क्रीम अपने लंड पर लगा कर मेरी गांड में लंड डाल दिया. मैं बहुत चिल्लाई लेकिन उसने मेरी नहीं सुनी.

लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

उस दिन पूरे दिन होटल में उसने मुझे बहुत चूसा मेरे कामुक बदन को … उसके दबाने काटने से मेरा सारा बदन लाल हो गया था. और मेरी चूत और मेरी गांड में उसने अपना वीर्य भर दिया था.
हम दोनों ने खूब मजे किए फिर उस दिन … उसने मुझे बहुत चोदा. मेरी गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया.

फिर एक बार मैंने उसके ऊपर राइडिंग की. मेरे बूब्स उसके मुंह में और मैंने उसके ऊपर बैठकर बहुत धक्के लगाए. वह मेरे हिप्स पर बहुत तेज मारता भी था बीच-बीच में … जिससे मुझे बहुत मजा आता था.

उस दिन होटल में हम दोनों ने अपनी पूरी वासना निकाली; वहां पर उस दिन हम चार-पांच बार सेक्स किया और बहुत मजे किए.

यह थी मेरी शादी से पहले की चुदाई की कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ … जिससे मैं चुदवाती थी.

लेकिन अब तो मेरी शादी हो चुकी है और उसकी भी!
अब वह मुझ से बात नहीं करता क्योंकि उसकी वाइफ उस पर शक करती है. और हम चाहते भी हैं कि हमारे रास्ते अलग अलग रहें.

लेकिन मेरा फिर से मन भी करता है कि कोई ऐसा मेरी लाइफ में फिर से आए जो अच्छा हो, सच्चा हो और मेरे लिए हमेशा खड़ा रहे!

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