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सील पैक चुत

मैं गौरव तीस वर्ष का एक जवान शादीशुदा आदमी हूँ.
ये टॉयलेट सेक्स कहानी मेरी शादी के एक साल बाद की ही है.

मेरी बीवी की एक सहेली थी, जिसका नाम अनुराधा था.
अनुराधा मुझे जीजा जी कहती थी. उसकी अभी शादी नहीं हुई थी.

उसका बदन गोरा, चेहरा गोल, छाती पर फूले और कसे हुए दो हाहाकारी मम्मे थे. उसके मम्मों का साइज़ बत्तीस इंच का था.
अनुराधा की गोरी कमर का साइज़ अट्ठाईस इंच और उभरे हुए मुलायम चूतड़ों का साइज़ चौंतीस इंच था.

जब भी मैं उसको देखता था, तो मेरा लंड तनकर खड़ा हो जाता था.

शादी के बाद जब भी मैं बीवी के पीहर जाता था, तो वो मुझसे मिलने आ जाया करती थी.

फिर कुछ ऐसा हुआ कि मेरी जॉब मेरी ससुराल के गांव में ही लग गई; मैं उधर ही रहने लगा.
अब अनुराधा अक्सर मुझसे मिलने आ जाया करती थी.

उसकी नशीली नजरें मुझे सदा ही उत्तेजित करती रहती थीं. मैं उसे किसी तरह चोदने के बहाने ढूँढता रहता था लेकिन मैं अभी तक उसे चोद नहीं पाया था.

एक बार गांव में सालाना मेला लगा था.
मेरी बीवी मुझसे मेले में ले चलने के लिए ज़िद करने लगी.

मैं उसे शाम को मेले में ले गया.

वहां पर हम लोग अभी घूम ही रहे थे कि तभी वहां अनुराधा दिख गयी.
वो भी अपने छोटे भाई के साथ मेले में आयी थी.

उसे देखते ही मेरे बदन में सिहरन सी उठने लगी और मेरे मन में कामवासना की आग धीरे धीरे भड़कने लगी क्योंकि वो उस दिन इतना सज-धज कर आयी थी जैसे वो मुझसे कह रही हो कि अब मैं उसके बदन की प्यास बुझा ही दूं.

उसकी चंचल निगाहें मुझे समझ आ रही थीं कि लौंडिया चुदने को मचल रही है.

उस दिन उसने सफ़ेद रंग की कसी हुई कुर्ती पहनी थी. उसका गला आगे पीछे दोनों तरफ से गहरा होने के कारण उसकी गोरी पीठ लगभग दिख रही थी और आगे उसकी कसी हुई चूचियों के उभार साफ़ दिख रहे थे.
जिससे वो और भी कामुक दिख रही थी.

उसने नीचे लाल रंग की कसी हुई लैगी पहनी थी जो बहुत ही चुस्त थी.

अपने होंठों पर उसने लाल लिपस्टिक लगायी थी जो कि मेरे औज़ार को बाहर आने पर मजबूर कर रही थी.
उसकी गोरी उंगलियों के नाखूनों पर लाल रंग की नेलपॉलिश लगी थी.

उसने मेरे करीब आते हुए मुझसे इठला कर कहा- चलिए न जीजा जी, मौत का कुआं देखते हैं.
मैंने कहा- हां चलो.

मेरी बीवी का भी मौत के कुंए की कलाबाजी देखने का मन था.
हम सब मौत के कुएं की तरफ़ चल दिए.

वहां पर पहले से ही काफी भीड़ थी.
मैंने भीड़ देख कर कहा- रुको, मैं टिकट लेकर आता हूँ.

वो सब वहीं रुक गए और मैं टिकट खिड़की से टिकट लेने लगा.

किसी तरह से टिकट लेने के बाद मैंने कहा- अब चलो चलते हैं.

मौत के कुएं में ऊपर जाने के लिए सीढ़ी बनी थी. मेरे आगे आगे अनुराधा और उसके भाई सीढ़ी चढ़ने लगे. मैं और मेरी बीवी उनके पीछे चलने लगे.

थोड़ा चढ़ने पर ही हवा से उसकी कुर्ती उड़ने लगी और मेरी नजर उसके हिलते हुए चूतड़ों पर टिक गयी.
सच में क्या कामुक नजारा था.

अनुराधा की मटकती गांड किसी भी मर्द को वासना से पागल कर देने के लिए काफी थी.

यदि अनुराधा इस समय सन्नाटे में होती, तो शायद मैं उसे उधर ही पटक कर चोद देता!

उसके हिलते चूतड़ों पर चिपकी हुई कसी लैगी में से उसकी पैंटी की लकीरें साफ़ दिख रही थीं.
मुझे देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी पैंटी अभी फट कर बाहर आ जाएगी.

मैं किसी तरह से अपना लंड दबाए ऊपर पहुंच गया.
हम सभी के ऊपर आते ही शो शुरू हो गया.

सभी लोग शो का मज़ा ले रहे थे लेकिन मैं अपनी सुधबुध खो चुका था; मेरे दिमाग़ में बस उसके कसे हुए चूतड़ ही घूम रहे थे.

बीस मिनट बाद शो खत्म हुआ, लेकिन मेरे कामुक मन की कामुकता शांत नहीं हो रही थी.

अब लोगों की भीड़ नीचे उतर रही थी. आगे अनुराधा थी, मैं उसके ठीक पीछे था. मैंने ठान लिया था कि आज इसके चूतड़ों को छूना ही है.

वो एक जीने पर खड़ी हो गयी क्योंकि आगे बहुत भीड़ थी.
लोग धीरे धीरे नीचे उतर रहे थे.

भीड़ के कारण लोग एक दूसरे से चिपक कर खड़े थे. मैं भी आगे खड़ी अनुराधा से चिपक गया. मेरा लंड उसके चूतड़ों के बीच की लकीर में चिपक गया.

उसी समय मैंने अपना दायां हाथ उसके दाहिने तरफ़ के चूतड़ पर धीरे से रख दिया.

उसके चूतड़ पर हाथ रखते ही मुझे ऐसा लगा मानो मैं किसी मख़मली गाव तकिया को छू रहा हूँ.
मेरा लंड मेरी जींस में और भी ज्यादा टाइट होकर अकड़ हो गया. लंड अनुराधा के चूतड़ों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.
मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

शायद उसे भी लंड के चुभने का अहसास होने लगा था.
एक दो मिनट तो उसने कुछ नहीं कहा.
फिर उसने मुझे एकदम से पलट कर देखा तो मैं डर गया.

उसी समय उसने धीरे से मुझे स्माइल दे दी.

उसकी मुस्कान से लगा कि वो भी मेरे लंड का आनन्द लेना चाह रही हो.
मैंने अब बिंदास उसकी गांड में अपना लंड सटा दिया.
उसने भी मेरे लंड को अपनी गांड हिला कर इशारा दे दिया कि ये छेद तेरे लिए रेडी है.

अनुराधा मुझसे सटी हुई नीचे उतरने लगी.
मैंने इसी समय उसकी कमर पर हाथ रख कर एक जोरदार ठुमका लगाते हुए उसकी आह निकाल दी.

वो धीरे से फुसफुसाई- जीजू मत करो न … मुझे कुछ कुछ हो रहा है.
मैंने उसकी गर्दन के पास अपना मुँह ले जाकर कहा- मुझे तो बहुत कुछ हो रहा है.

वो कुछ नहीं बोली, बस हंस दी.

फिर उतरते हुए ही उसने मुझे फ़ोन पर मैसेज किया कि आप टॉयलेट के पास मिलिए, मुझे आपसे अकेले में काम है.
मैं समझ गया कि आज काम हो जाएगा.

नीचे उतरते ही उसने मेरी बीवी से कहा- अच्छा तुम रुको, मैं ज़रा टॉयलेट से आती हूँ.
मेरी बीवी ने कहा- इधर टॉयलेट कहां है?

मैंने बताया कि मेला कमेटी ने टॉयलेट बाहर की तरफ बनाए हैं मुझे भी जाना है मैं अनुराधा के साथ चला जाता हूँ.
मेरी बात सुनकर मेरी बीवी ने कहा- ओके मैं तब तक कुछ सामान खरीद लेती हूँ.

अनुराधा तब तक अपनी गांड मटकाती हुई चली गयी.
मेरी बीवी मुझसे सामान ख़रीदने की ज़िद करने लगी.

मैंने कहा- ठीक है ये पैसे रख लो, तुम जब तक सामान ख़रीदो, तब तक मैं भी टॉयलेट जा रहा हूँ.

इसके बाद मैं टॉयलेट के पास आया.
वो बाहर खड़ी थी.

ये टॉयलेट सुनसान जगह पर बना था.

उसने जल्दी से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे एक टॉयलेट में खींच लिया.
अन्दर घुसते ही अनुराधा ने दरवाज़ा बंद कर दिया.

मुझे यह समझते देर ना लगी कि आज टॉयलेट में मेरी सेक्स की इच्छा पूरी होने वाली है.
मैंने उसका इशारा समझ लिया था.

उसने कहा- जीजा जी, मेरी प्यास बुझा दीजिए.
मैंने उसको अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसके दोनों चूतड़ों को हाथों से दबाने लगा.

वो आह आह करके आवाज निकालने लगी और कहने लगी- जीजू, थोड़ा धीरे दबाओ यार … दर्द होता है.

मैं उसकी मख़मली गांड को सहलाने लगा और उसके रसीले होंठों को अपने होंठों में भरके चूसने लगा.
अनुराधा के होंठों को चूसते चूसते मैं उसकी गर्दन को भी चूमने लगा.

वो मदहोश होने लगी.

कुछ पल के बाद मैं अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबाने लगा.
वो मस्ती से आह आह करके कामुक सिसकारियां भरने लगी.

फिर मैंने अपनी बीवी को फोन लगाया कि इधर एक ही टॉयलेट है और लोग ज्यादा हैं, तो हमें कुछ देर लग जाएगी. तुम मेला घूमो … मैं अनुराधा के साथ अभी आता हूँ.
मेरी बीवी ने ओके कहा और फोन काट दिया.

अब मैं बिंदास हो गया था.

अनुराधा मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी और बोली- समझने में बड़ी देर कर दी जीजू.
मैंने कहा- अब जो हुआ सो हुआ … अब देर न करो मेरी जान.

ये कहते हुए मैंने उसकी कुर्ती उतार दी.
उसका संगमरमर जैसा गोरा बदन मेरे सामने था. उसने अपने मम्मों पर सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी थी, जो बहुत सेक्सी लग रही थी.

मैंने जल्दी से उसकी ब्रा का हुक टटोला और धीरे से खोल कर ब्रा उतार दी. मैं अनुराधा की ब्रा के कप सूंघने लगा, जिसमें से मुझे उसके बदन की कामुक ख़ुशबू आ रही थी.

मैं उसकी चूचियों को जीभ से चाटने लगा. उसके भूरे निप्पल खड़े होने लगे. फिर मैंने उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से जीभ से जी भरके चाटा.

वो कहने लगी- जीजू अब देर मत करो … पहले मुझे ठंडी कर दो … जल्दी से मुझे एक बार चोद दो.
वह मेरे लंड को हाथ से पकड़ने लगी.

मैंने अपनी जींस उतार दी और चड्डी में से अपना छह इंच लम्बा लंड उसके हाथ में दे दिया.
वो मेरे लंड के नीचे हाथ चलाते हुए लंड की गोलियों को सहलाने लगी.

अगले ही पल वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे खड़े लंड के सुपाड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी.

अब मेरी आहें निकलना शुरू हो गई थीं.

अनुराधा ने जी भरके लंड चूसा और इसके बाद वो मेरी तरफ़ अपनी गोरी पीठ करके खड़ी हो गयी.

मैंने झट से उसकी लैगी नीचे सरका दी. उसने अन्दर गुलाबी पैंटी पहन रखी थी. मैंने उसकी पैंटी नीचे को कर दी.

उसकी पैंटी हल्की गीली हो गई थी.
वो अपनी लैगी और पैंटी को पूरी उतारने लगी.

मैंने उसके हाथ से उसकी पैंटी ले ली और उसे सूंघा. उसमें से उसकी चूत के रस की कामुक ख़ुशबू आ रही थी.

मैंने उसकी पैंटी में लगे थोड़े से रस को जीभ से चाटा, तो बहुत ही नमकीन स्वाद आ रहा था.

अब मुझसे रहा ना गया. मैंने झट से उसे घोड़ी के पोज में झुकाया और उसकी कसी चूत में अपनी जीभ घुसा कर चाटने लगा.

उसकी चुत अब तक फटी नहीं थी, एक सील पैक चुत थी. उसकी सील पैक चुत में से मस्त महक आ रही थी.

मैं उसकी कुंवारी चुत से निकलते हुए माल को चाटने लगा. चुत की मलाई चाट लेने के बाद मैंने तुरंत अपने लंड पर थूक लगा कर उसे चिकना किया और एकदम से उसकी चूत में घुसा दिया.

वो अपनी चुत में लंड लेते ही चीख पड़ी- आह्ह ऊई मां … मर गयी.

मैं उसकी चुत में धीरे धीरे धक्के लगाने लगा.
मैंने देखा उसकी चूत से कुछ बूंदें खून की भी गिर गई थीं.

कुछ देर के दर्द के बाद मेरे धीरे धीरे धक्के मारने से उसे मज़ा आने लगा.
वो कहने लगी- आह जीजू और ज़ोर से चोद दे मुझे … आह मादरचोद जीजू साले फाड़ दे मेरी चूत को. अपने इस गर्म लंड से इसका भोसड़ा बना दे … आह और ज़ोर ज़ोर से चोद हरामी ठरकी जीजू साले चोद दे.

मैं उसकी इस भाषा से और भी गर्मा गया और तेज तेज धक्के लगाने लगा.

धक्के लगाने से लंड की गोटियां अनुराधा के चूतड़ों के टकराने लगीं. इससे पक पक की आवाज़ आने लगी.

मुझे और उसे दोनों को ही अब चुदाई का आनन्द आने लगा था.

जल्दी ही वो चुदाई के चरम सुख पर पहुंच गयी थी. उसकी रस भरी चूत से अब पानी आने लगा था.
मैं और ज़ोर से झटके देने लगा और तभी मेरा गर्म माल उसकी चूत में छूट गया.

उसको चुदने में बहुत मज़ा आया. टॉयलेट सेक्स के बाद हम लोगों ने कपड़े पहने और अपने अपने घर को चले आए.

आज उसकी शादी को एक साल हो गया है मगर वो मेरे लंड की आज भी शैदाई है.
मैं उसे जब तब होटल में बुलाकर चोदता रहता हूँ. उसे मुझसे चुदकर बहुत मज़ा आता है.

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सेक्स का मज़ा

दोस्तो, मेरा नाम प्रियल है और मेरी उम्र 19 साल है. यह कहानी एक सच्ची कहानी है जो मेरी आपबीती भी है. इस कहानी में आपको बताऊंगी के कैसे हमने सेक्स का मज़ा लिया.

बात 2 महीने पहले की है. मैं बस से जा रही थी. तभी बस रुकी और एक हॉट लड़का चढ़ने लगा. उसे देखकर मेरे मन में हलचल होने लगी. मैं उससे अपनी चूत चुदवाने की सोचने लगी. इसी के चलते मेरा हाथ कब मेरी चूत के ऊपर चला गया मुझे पता नहीं चला.

वैसे मैं एक बात बता दूं … मुझे पोर्न देखने शौक है और मैं पोर्न देखते हुए अपनी चूत को सहला लेती हूं. मैंने कभी लंड नहीं लिया. मैं चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूं पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता है.

अचानक बस रुक गई और मेरे सीट के बगल में जो औरत बैठी थी, उतरने लगी. वो लड़का मेरे बगल में बैठ गया. उसके स्पर्श से मैं सिहर उठी … मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी.

थोड़ी देर में वो मुझसे बात करने लगा. उसने अपना नाम पवन बताया. वो भी वहीं जा रहा था जहां मैं जा रही थी. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे.
सफर के दौरान हमने बहुत बातें की. फिर मेरा स्टेशन आ गया और मुझे उतारना पड़ा. पर पवन ख्याल मेरे दिमाग से जा नहीं रहा था. रात भर उसके बारे ही सोच रही थी.

फिर 1 महीने बाद एक दिन मैं बाज़ार गई थी. तभी पीछे से किसी ने आवाज़ दी. मैंने पीछे मुड़ के देखा तो वो पवन था.
मैं बहुत खुश हुई. फिर हमने साथ में गुपचुप खाया.

उसने मुझसे नंबर मांगा तो मैंने बिना रुके अपना नंबर दिया. उस दिन से हम लोग रोज बात करते. कभी कभी रात के 2-3 बज जाते. इसी तरह 1 महीना बीत गया. मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था क्योंकि मुझे उससे प्यार जो हो गया था.

फिर हमने एक दिन मिलने की सोची. मैं बहुत खुश हुई. मैने अपनी चूचों पर क्रीम से मालिश की और अपनी चूत के बाल साफ किये क्योंकि मुझे पता था पवन मुझे चोदना चाहता है. मैंने कई बार उसके लंड को मेरे सामने खड़ा होते हुए देखा है जिसे वो छुपाते हुए बहुत सेक्सी लगता है.

उसने मुझे रास्ते से पिक किया और बोला- कहां जाना है?
मैंने कहा- जहां आपकी मर्ज़ी!
फिर हम उसके दोस्त के घर गए जहां पहले से ही तैयारी पूरी हो चुकी थी.

उसने मुझे जूस दिया और स्वयं भी पीने लगा. बीच बीच में वो मुझे छू रहा था. मेरी तो चूत गीली हो रही थी.

तभी उसने जानबूझकर अपना जूस मेरे कपड़ों पर गिरा दिया. मैं उसके इरादे समझ रही थी. फिर मैं वॉशरूम चली गई. वो मेरे पीछे पीछे गया.
और जैसे ही मैं पलटी उसने मुझे जोर से किस कर दिया. मैंने उसे छुड़ाने का नाटक किया … फिर मैं खुद उसका साथ देने लगी.

उसके हाथ मेरे चूचे पर आ गए जिससे मेरी सिसकारियां निकल गई- उंह … आह … अय!

लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने पागलों की तरह किस किया. पवन का एक हाथ मेरे चूचे पर और दूसरा मेरी चूत के ऊपर था. मैं गर्म हो रही थी.
फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पे लेकर आया. उसने अपने कपड़े उतार दिए. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था.

उसका 8 इंच का लंड पूरा तन गया था. मैंने पहली बार किसी का लंड देखा था, वो भी इतना बड़ा!

फिर वो मेरे कपड़े निकालने लगा. उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. अब मैं भी उसके सामने नंगी थी. वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी. उसने अपना हाथ मेरे चूचों पर रखा और मसलने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी.

15 मिनट चूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह के सामने खड़ा कर दिया और चूसने को बोला.
मैंने मना कर दिया … तो उसने ज़िद की. मैंने उसका सुपारा मुंह के अंदर लिया. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैंने निकाल दिया.
वो कुछ न बोला और मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब जैसा मैंने पहले भी बताया था कि मुझे सेक्स से बहुत डर लगता है, तो मेरी सिसकारियां डर में बदल गई. मुझे पसीना आने लगा.
और जब वो अपने लंड को हिलाने लगा तो डर से मेरी पूरी तरह फट चुकी थी.

उसने अपना सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और हल्का सा धक्का लगाया. मेरी तो दर्द से हालात खराब हो गई.
मैंने जैसे तैसे करके उसे हटाया और कपड़े पहनने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगा- आई लवयू प्रियल … प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ!
मैंने सोचा कि अगर मैंने हां कर दी तो पवन मुझे चोदे बिना रुकेगा नहीं. और मेरी तो हालत खराब थी … मैंने उसे ना चाहते हुए भी मना कर दिया.
मैं वहां से सीधे अपने घर आ गई और उसके बारे में सोच कर रोने लगी.

दोस्तो, भले ही मैं उस दिन भाग के आ गई थी पर मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी. साथ ही मेरी चुदास भी बढ़ती जा रही थी. मैं मन ही मन अपने आप को गाली दे रही थी कि क्या जरूरत थी वहां से जाने की.
और ऊपर से पवन का वो चेहरा मेरी नज़रों के सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. उससे भी ज्यादा मुझे उसके लंड की याद सता रही थी.
मुझे रात भर नींद नहीं आई और मैं सिर्फ करवटें बदलते रह गई.

फिर जैसे तैसे रात कटी. मैंने सुबह उठ के देखा तो पवन का मेसेज आया था. उसमें लिखा था- आई एम् सॉरी प्रियल … प्लीज मुझसे बात करो … आई लव यू यार … मैं प्रॉमिस करता हूं कि आज के बाद आपको टच भी नहीं करूंगा … पर प्लीज़ मुझसे बात करो.

मेसेज पढ़ के मेरी आँखें भर आई … मन करने लगा कि अभी भाग के उसके पास जाऊं और गले से लिपट जाऊं.
पर मैं किस मुंह से उसके पास जाऊं, ये समझ नहीं आ रहा था.

एक दिन मैंने निश्चय कर ही लिया कि आज उसे प्रपोज कर के ही रहूंगी और अपनी चूत चुदवा कर रहूंगी.
मैं उससे मिलने चली गई. मैंने उसे एक होटल में बुलाया.

जैसे ही उसने मुझे देखा … बस देखता ही रह गया.
उस दिन मैंने टाइट जीन्स पहन रखी थी और सफ़ेद टॉप वो भी नाभि के ऊपर से … जिसमें मेरे चूचे साफ दिख रहे थे.

मुझे देख के उसका लन्ड आकार लेने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश कर रहा था.

फिर मैंने उसके पास जाकर बोला- क्या देख रहे?
वो थोड़ा शरमा गया और मुझे जोर से गले लगा लिया.

जैसे ही उसने मुझे गले लगाया … उसका लन्ड मेरी चूत से टकराने लगा. मेरी तो जान निकल गई … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
और शायद उसे भी ये समझ आ गया था. उसने अपना हाथ मेरे गान्ड पर रख दिया. मेरी सिसकारियां छूटने को हुई जिसे मैंने जैसे तैसे करके रोका.

फिर हम दोनों अन्दर गये. हम दोनों ने वहां खाना खाया. उसके इरादे ठीक नहीं लग रहे थे. मैं फिर से नर्वस हो रही थी. तभी उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. मैं एकदम सकपका गई. मेरा रोम-रोम तड़प उठा और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.

उसके एक मात्र स्पर्श से मैं गर्म हो चुकी थी. फिर उसने मुझसे प्यार भरी बातें की. मैंने उससे ऊपर कमरे में चलने को कहा. मुझे ये कहते हुए थोड़ा अटपटा लग रहा था पर मैं और कंट्रोल नहीं कर सकती थी.
उसने कहा- आप आगे चलो.
मैं आगे हो गई.

जब हम थोड़ी दूर चले गए, तब मैं जानबूझकर फिसल गई और पैर में मोच आने की नाटक करने लगी. उसने शायद ये भांप लिया था … उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और रूम में ले आया. उसने मुझे इस तरह उठाया था जिससे उसका लन्ड मेरी गान्ड को टच कर रहा था.
मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी.

मुझे बिस्तर में लिटा के वो जाने लगा.
मैं उसके इस व्यवहार से हैरान थी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. वो छुड़ाने लगा.

पर आज मैं पूरी तैयारी करके आई थी ऐसे बिना चुदवाये उसे कैसे जाने देती.

मैंने उसके हाथों को अपने चूचों पर रखा. वो मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखने लगा. मैं बिना समय गंवाए उसे किस करने लगी. मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया था.
थोड़ी देर तक तो वो मुझसे छूटने नाटक करने लगा … फिर खुद मेरा साथ देने लगा.

इसी तरह लगभग 10 मिनट के लंबी धुएँदार किस करने बाद उसने अचानक से मेरा हाथ छुड़ा लिया और मुझसे दूर हो गया.
मैं वापस उसे किस करने की कोशिश करने लगी. पर आज ना जाने उसे क्या हो गया था … उसने एक बार मुझे देखा और बिना कुछ बोले चला गया.
उसकी आँखों में कुछ नमी थी.

मैं पूरी उदास हो गई. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं उसकी खामोशी समझ नहीं पा रही थी कि उसने ऐसा क्यों किया. यह सोच सोच के मैं पागल हो रही थी.
मैं वहीं बिस्तर पे बैठ गई … पर रो रो के मेरा बुरा हाल हो गया था.
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है. मैं अब क्या करूं … सब मेरे हाथ से छूट रहा था.

मैंने पवन के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि उसके घर वालों ने उसे मुझसे दूर रहने के लिए कहा है क्योंकि मेरा स्टेटस और उसका स्टेटस अलग अलग है.
मैं ऊंचे खानदान से हूं और वो थोड़ा गरीब है. ऊपर से हम दोनों अलग अलग जाति के हैं इसलिए उसके घरवालों ने उसे मना किया है.

पर मुझे और मेरी फैमिली को इससे कोई फर्क नही पड़ता … उन्हें तो बस एक पढ़ा लिखा समझदार दामाद चाहिए जो उनकी बेटी को खुश रख सके. और मुझे तो पवन ही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ पति लगता है.

ये बात जानने के बाद मैं सीधा पवन के घर गई. पहले तो वो लोग चौंक गए. पर फिर उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.
मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने उनसे सीधी बात कह दी कि मैं उनके बेटे से प्यार करती हूं और उससे शादी करना चाहती हूं.

इस पर वे हैरान थे. उन्होंने अपनी मुश्किलें बताई.
मैंने उन्हें समझाया … अंत में वो लोग मान गए.

अब बारी पवन की थी … मैंने उसे रात में सोने के लिए अपने घर बुलाया क्योंकि मेरे घरवाले बाहर किसी की शादी में गए थे और दोपहर से पहले आने वाले नहीं थे.
मैंने सोच लिया था कि आज तो बात बनानी ही होगी.

पहले तो उसने मना किया फिर मेरे ज़ोर देने पर मान गया.
वो करीब 9 बजे के आसपास आया. मैं उसी का इंतज़ार कर रही थी.

फिर हमने खाना खाया.
उसने कहा- मेरा कमरा कहां है … मुझे सोना है नींद आ रही है. मेरा मूड खराब हो गया मैं उसे अपने कमरे में ले गई.

मैं- ये मेरा कमरा है और तुम मेरे साथ मेरे बेड पर सोने वाले हो.
पवन- नहीं, आप ये क्या कह रही … मैं ये नहीं कर सकता.
मैं- क्यों? क्या समस्या है इसमें?

पवन- ये ग़लत है. मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगा, आप यहां सो जाइए.
मैं- इसमें क्या ग़लत है बस सोने को बोल रही हूँ … मुझे चोदने को नहीं. तुम इतना रिएक्ट क्यों कर रहे हो?
पवन- वो … म् … म … म … मैं … व … वो!

मैं- तुम कह क्यों नहीं देते कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो … ऐसे चुप रहने से क्या होगा?
पवन- न … न … नहीं … अ … आप गलत समझ रही हैं.
मैं- अच्छा … तो तुम्हारी जबान क्यों लड़खड़ा रही है … बताओगे मुझे?
पवन- वो … म … मैं … अम … मैं जा रहा बाहर सोने आप भी सो जाओ.
मैं- नहीं … रुको.

वो जाने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
इससे पहले के वो मेरा हाथ छुड़ा पाता … मैंने उसे किस कर लिया वो मेरी पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश करता रहा पर मैं लगी रही. 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उसको छोड़ा.
वो सिर झुकाए हुए था.

मैंने उसका एक हाथ अपने बूब्स पर और दूसरा अपनी गांड पर रख दिया. वो कुछ बोल पाता इससे पहले मैंने उसे दोबारा किस करना चालू किया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी गांड पर सहलाना शुरु किया. मैं खुश हो गई मेरा काम जो बन गया था.

वो मुझे ज़ोर से किस करने लगा, मैं भी उसका साथ दे रही थी. फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और एक एक करके मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए. उसने मेरी चूत को सहलाना शुरु किया. मैं मदहोश होने लगी. मेरी मुंह से मादक सिसकारियां निकलने लगी- आह उम अह.
मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी इसलिए हमें बहुत मज़ा आ रहा था.

उसके बाद उसने अपनी जीभ मेरे चूत में डाला … वो अहसास मैं बयां नहीं कर सकती … मुझे जन्नत का सुख मिल रहा था.
उसने मुझे जीभ से चोदना जारी रखा. धीरे धीरे हम 69 की पोजिशन में आ गए. मैं पहली बार लंड चूस रही थी वो भी इतना बड़ा लौड़ा … लगभग 7-8 इंच का तो होगा ही!
मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मेरी जिंदगी का पहला अहसास था.

धीरे धीरे मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं उसके मुंह में ही झड़ गई. उसने मेरा सारा पानी पी लिया. मुझे ऐसी खुशी कभी नहीं मिली जो उस समय मिल रही थी.

अब बारी मेरी चूत की चुदाई की थी. उसने अपना लन्ड मेरी चूत पर रखा और रगड़ने लगा.
मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी. मैंने उससे कहा- अब देर मत करो पवन … जल्दी से डाल दो … मेरी जान निकल रही है … अब और मत तड़पा … अब बस चोद दे मुझे … बहुत दिन बाद मिला है.

उसने देर न करते हुए अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर से धक्का मारा. उसका आधा लंड मेरी चूत में चला गया.
मेरी तो चीख निकल गई. मुझे लगा कोई गर्म रॉड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया है. दर्द से मेरा हाल बेहाल हो गया.

फिर उसने अपना हाथ मेरे चूचियों पर रखा और मुझे किस करने लगा. जब मेरा दर्द कम हुआ तब उसने दोबारा धक्का मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना लन्ड आगे पीछे करना चालू किया.
फिर क्या … हम दोनों को जन्नत का सुख मिलने लगा.
ये उसका भी पहली बार ही था … वो बड़ी मस्ती से चुदाई कर रहा था.

पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था ‘आह … अम्म … हम … अह … अय … आह!’

वो धड़ाधड़ अपना लन्ड मेरी चूत में पेल रहा था. पूरा बेड हम दोनों के चुदाई से हिलने लगा.

इतनी धकापेल चुदाई के बाद मेरा होने वाला था. उसने ये भांप लिया और वो ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा. थोड़ी ही देर बाद मेरा पानी निकल गया जिसे उसने चाट कर साफ कर दिया.

फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लन्ड डाल दिया. मेरी आह निकल गई.

उसने गपागप लंड डालना शुरू किया. मेरी चूत गीली हो चुकी थी जिससे कुछ फच फच आवाजें भी आ रही थी.
मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी- चोदो मुझे पवन … और ज़ोर से चोदो … जान निकाल दे मेरी … आह … फॅक मी बेबी … और ज़ोर से चोदो … आह … अम्म … अह … उन्ह.

लगभग 15 मिनट के ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो झड़ने वाला था उसने मुझसे पूछा- कहां निकालूं?
मैंने कहा- चूत में ही निकाल दो.
क्योंकि मैं उसे फील करना चाहती थी.

8-10 शॉट लगाने के बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गया.

उसका गर्मागर्म वीर्य पाकर मेरी चूत खिल उठी थी. वो एहसास अभी भी मेरे दिमाग से निकल नहीं पा रहा … वो मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

उसने मुझे आई लव यू कहा और मेरा धन्यवाद करने लगा.
मैंने भी उसे आई लव यू टू कहा और इस अनोखे अहसास के लिए धन्यवाद दिया.
हम दोनों के चेहरे पर खुशी और सुकून झलक रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका लन्ड फिर से खड़ा होने लगा. इस तरह हमने उस रात 5 बार चुदाई की कभी बिस्तर में तो कभी सोफे पे.
हमने अलग अलग पोजिशन ट्राई किया और हमारी चुदाई रात भर चलती रही.

दोपहर में जाने से पहले उसने मुझे एक बार और चोदा.
इस तरह से हम दोनों ने चुदाई का पूरा पूरा मज़ा लिया.

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उसका लन्ड मेरे मुंह में था

दोस्तो, मेरा नाम परिधि सारस्वत है और मैं दिल्ली से हूं।

इससे पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देती हूं। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा हैं और शरीर भरा पूरा है। मेरा फिगर 33-28-33 का है। मतलब लड़कों की भाषा में मैं एक शानदार माल हूं।

तो चलिए अब आते हैं कहानी पर।

यह बात आज से लगभग 2 साल पहले की है। राहुल नाम का लड़का हमारा पड़ोसी है। हमारे परिवारों के बीच काफी आना – जाना है। स्कूल के समय में भी मैं और राहुल एक ही स्कूल में थे।

हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन हमारे बीच कभी भी ऐसा – वैसा कुछ नहीं था। हम दोनों आपस में खूब बातें करते थे और मज़े करते थे। मुझे भी राहुल के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था।
वो लगभग रोज मेरे घर पर आता था और कई बार मैं भी उसके घर पर चली जाती थी। लेकिन इससे हमारे परिवार को कभी भी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्कूल के बाद हम दोनों ने अलग – अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।

एक दिन मेरी कॉलेज की छुट्टी थी और मेरी नानी की तबियत खराब हो गई थी। तो मेरे मम्मी – पापा नानी से मिलने के लिए चले गए। अब मैं घर पर अकेली रह गई थी।

कुछ देर तो मैं टाइम पास करती रही लेकिन फिर मैं भी बोर होने लग गई। तो मैंने सोचा कि क्यों न राहुल को बुला लिया जाए। इससे मेरा टाइम पास भी हो जाएगा और स्कूल की पुरानी यादें भी ताजा हो जायेंगी।

तो मैंने राहुल को फोन किया कि मैं आज घर पर अकेली हूं और बोर हो रही हूं। तुम मेरे घर पर आ जाओ और फिर गप्पे मारेंगे।
उसने कहा- ठीक है, मैं 15-20 मिनट में आता हूं।
मैं अब राहुल का इंतजार करने लगी।

लगभग 15 मिनट बाद घर की डोर बेल बजी। मुझे पता था कि राहुल है तो मैं गई और गेट खोल दिया और राहुल को अंदर बुला लिया।
राहुल अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया।

फिर मैं उसके लिए पानी लाने किचन में चली गई। मैंने उस दिन गहरे गले का टॉप पहना था।

जैसे ही पानी देने झुकी तो मैंने देखा कि राहुल की नजरें टॉप के अंदर झांक रही है।
मैंने ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए जल्दी से उसे पानी दिया और उसके बगल में सोफे पर बैठ गई।

फिर उसने वही पुरानी स्कूल कि बातें शुरू कर दी और हम दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर कुछ देर बाद मैंने ही उससे पूछ लिया- ओय हीरो … कोई गर्लफ्रेंड वगेरह बनाई क्या?
तो वो बोला- नहीं यार … और तूने?
मैंने भी कहा- नहीं।

फिर वो मज़ाक करते हुए बोला- तो तू ही बन जा मेरी गर्लफ्रेंड।
तो मैंने भी हंसते हुए कह दिया- तेरी गर्लफ्रेंड बनेगी मेरी जूती।

वो मज़ाक-मज़ाक में मुझे तकिए से मारने लग गया और मैं भी उसे तकिए से मारने लग गई।

इसी बीच मुझे एहसास हुआ कि वो खेलते – खेलते मेरे बूब्स छू रहा है।
मज़ा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए उसे खुद से दूर कर दिया।
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप बैठ गया।

फिर शाम को मेरे मम्मी – पापा आ गए और सब कुछ पहले की तरह चलना शुरू हो गया। मैं भी कॉलेज जाने लग गई। इस बीच मेरी राहुल से बहुत ही कम बात हुई या यूं कहें बात हुई ही नहीं।
बस ऐसे ही 2 महीने बीत गए पता ही नहीं चला।

अब मेरा एक पेपर भी आ गया था लेकिन ये पेपर जयपुर था। पापा को ऑफिस का काम था तो पापा बोले- मैं तो नहीं जा सकता हूं.
तो मम्मी बोली- अकेले नहीं जाना है।

अब बहुत सोच – विचार के बाद ये तय हुआ कि पापा राहुल के घरवालों से बात करेंगे कि राहुल मुझे जयपुर पेपर दिलवा कर ले आए।

तो पापा ने अगले दिन राहुल के पापा से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं। राहुल की भी छुट्टियां चल रही हैं। वो घर पर फ्री ही रहता है। वो परिधि के साथ जयपुर चला जाएगा।
तो अब तय हो चुका था कि राहुल मेरे साथ जयपुर जा रहा है।

मैं अब ये सोच रही थी कि उस दिन के बाद अब मैं कैसे राहुल से बात करूंगी? शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही कह दिया था।
खैर जो होगा देखा जायेगा।

पापा ने कहा- तुम दोनों ट्रेन से चले जाना, सेफ भी रहेगा।

लेकिन उन दिनों जयपुर जाने वाली ट्रेन काफी लेट चल रही थी। तो सबने मिलकर ये फैसला किया कि हम स्लीपर बस से जयपुर जाएंगे।
पापा ने हमारी डबल स्लीपर की टिकट बुक करवा दी थी।

अगले दिन शाम को पापा हम दोनों को बस में बैठा आए। मैं खिड़की की और बैठी थी और राहुल मेरे बगल में ही बैठ गया।

मुझे बस में नींद नहीं आ रही थी तो मैं फोन देखते हुए टाइम पास कर रही थी।
तभी राहुल ने पूछा- पेपर की तैयारी कैसी है?
तो मैंने कहा- ठीक – ठाक ही है।

इस प्रकार हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें शुरू हो गई थी।

कुछ देर बाद मैं फोन बन्द करके सो गई। हालांकि मुझे नींद नहीं आ रही थी बस मैंने आँखें बन्द की हुए थी।
उधर राहुल भी सो गया था।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि राहुल का हाथ मुझे टच कर रहा है।
मैंने सोचा कि जगह कम है इसलिए हो सकता है। मैंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं बस दूसरी ओर मुंह करके लेट गई।

फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि राहुल का हाथ मेरी कमर पर है लेकिन मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उसका हाथ धीरे – धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया। अब उसका हाथ मेरी गान्ड पर था। वो मेरी गान्ड पर गोल – गोल हाथ घुमा रहा था। शायद उसे लगा कि मैं सो गई हूं।

लेकिन अब मुझे भी उसका टच अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद वो मुझसे सटकर चिपक गया और सोने का नाटक करने लग गया।
मैंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर लाया और धीरे – धीरे मेरे बूब्स मसलने लगा। अब मेरे अंदर की भी अन्तर्वासना जाग चुकी थी। मेरे निपल्स खड़े होने लग गए थे और मैं अपनी सिसकारियां बड़ी मुश्किल से रोक रही थी।

धीरे – धीरे उसने अपने हाथ का दवाब बढ़ा दिया और अपने दूसरा हाथ मेरी चूत के उपर ले आया और मेरी चूत सहलाने लग गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड को छू रहा था। मेरी गान्ड उसके लन्ड के कड़कपन को महसूस कर रही थी.

अब तक उसे भी पता चल गया था कि मैं बस सोने का नाटक कर रही हूं।
वो मेरे बूब्स को जोर से मसलते हुए बोला- परिधि आई लव यू!
तो मैं भी बोल उठी- आई लव यू।

अब तो उसे खुली छूट मिल चुकी थी। अब वो जोर – जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरी चूत सहला रहा था। मेरी भी सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थी। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे चूत के दाने को सहलाने लगा।

मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उसका लन्ड मसलने लग गई थी। फिर उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ा और मेरे होंठ चूमने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लग गयी।

फिर उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट भी निकाल दी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लग गया और मेरी चूत में उंगली करने लगा। मैंने भी उसकी शर्ट और पैंट निकाल कर उसे एकदम नंगा कर दिया और उसका लन्ड आगे – पीछे करने लगी।

उसका लन्ड काफी बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें ऊपर की ओर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। अब तो मैं आपे से बाहर हो गई थी। वो लगातार मेरी चूत के दाने को चाट रहा था और मैं उसके सिर को जोर – जोर से दबा रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरी चूत में से गर्म – गर्म लावा निकलने लगा और राहुल उसे पी भी गया।

अब मैं शांत हो चुकी थी लेकिन उसने मेरी चूत को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म होने लग गई।

अब वो मेरे ऊपर आ गया और अपना बड़ा लन्ड मेरे होंठों के पास ले आया। वो अपने लन्ड से मेरे होटों को टच करने लगा तो मैं समझ गई और मैंने अपना मुंह खोल दिया। अब उसका लन्ड मेरे मुंह में था और मैं जोर – जोर से उसका लन्ड चूस रही थी।

उसका पूरा लन्ड गीला हो चुका था। अब राहुल ने अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला और उसे मेरी चूत पर मसलने लग गया।
तो मेरा बहुत ही बुरा हाल था। मैंने उसे आंखों से इशारा किया और उसने अपने लन्ड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे अचानक दर्द हुआ।

मैंने उसे वहीं रोक दिया।

फिर वो मेरे निप्पल सहलाने लगा और होंठ चूसने लग गया।

अचानक ही उसने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में था।
मेरी आंखों से आंसू निकलने लग गए थे लेकिन वो मेरे होंठ चूस रहा था इसलिए मैं चीख नहीं सकी।

अब उसने धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया. फिर मुझे भी मज़ा आने लग गया। मैं भी उसका साथ देने लग गई। वो कभी मेरे बूब्स चूसता तो कभी होंठ।
लगभग 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।

फिर जयपुर पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया. हमने रात को होटल के कमरे में एक बार और चुदाई की.

हम दोनों का ही मन था कि हम पूरी रात चुदाई करते रहें लेकिन अगले दिन मैंने पेपर देना था तो सोना भी जरूरी था.

और सुबह उठ कर मैं तैयार होकर पेपर देने गयी.

पेपर के बाद हमने होटल छोड़ दिया और बस से वापस दिल्ली आ गए।

उसके बाद से मुझे भी अपनी चुदाई में मजा आने लगा था, मुझे चुदाई की लत लग गयी थी. राहुल तो हर वक्त मुझे चोदने को तैयार रहता था. तो हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते थे।

एक बार राहुल ने मेरी गान्ड भी मारी थी। लेकिन वो कहानी किसी और दिन।

फिर राहुल के पापा का ट्रान्सफर रांची हो गया। तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।

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चूत चटायी का मजा

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

काफी दिन से मैं चाह रहा था कि अपने साथ घटी घटना को आप लोगों के साथ शेयर करूं. लेकिन टाइम नहीं मिल पाने के कारण मैं अपनी कहानी शेयर नहीं कर पा रहा था. तो आज टाइम निकाल कर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती सुनाने जा रहा हूं. यह मेरी पहली कहानी है अगर इसमें कोई त्रुटि हो तो मैं क्षमा चाहता हूं.

अब आप लोगों का ज्यादा समय नष्ट ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आता हूं।

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

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मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं। यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें।

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.
अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.

कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!
मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?
वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.
फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.
वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.
वो बोला- जी. ठीक है.
कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?
वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.
मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.
फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.
वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.

अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.
वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.
मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.
वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?
वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.
मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.

आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.
मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.
वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.
मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.
वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.
मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.

उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.
उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.

उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.
वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.
मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

दोस्तो, ये थी मेरी अपनी रियल सेक्स स्टोरी. आपको यह सेक्सी लड़की की चुदाई स्टोरी पढ़ने में मजा आया होगा. मुझे जरूर बतायें. अगर आप लोगों ने सही रेस्पोन्स दिया तो मैं आगे भी आप लोगों के लिए अपनी आपबीती लेकर आती रहूंगी.

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लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

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अपना लंड डाल दो

सभी लड़कियों और भाभियों को मेरा प्यार, उनकी चूतों को मेरा दुलार. मेरा नाम आयुष अग्रवाल है और मैं नैनीताल (उत्तराखंड) का रहने वाला हूं. मेरी उम्र अभी 25 वर्ष है और मैं अभी कुंवारा ही हूं. मेरे लंड का साइज 7 इंच है.

आप लोगों का समय खराब न करते हुए मैं सीधे मुद्दे पर आता हूं. मतलब मेरी सेक्स स्टोरी पर.

यह घटना आज से करीब 4 साल पहले की है. उस वक्त मैं नैनीताल में ही एक ऑफिस में जॉब किया करता था.

मेरे ऑफिस में वहां पर एक माही (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की भी जॉब करती थी, जो पहाड़ी थी. दोस्तो, पहाड़ी लड़की कैसी भी हो लेकिन वो दिखने में एकदम माल होती हैं. उनका रंग और फिगर कमाल का होता है. माही भी वैसी ही थी.

माही का फिगर 34-28-32 का था. उसको जो एक बार देख ले तो देखने वाला तो समझो पागल हुए बिना न रह पाये. ऐसे ही देखा देखी में मुझे भी उससे कब प्यार हो गया मुझे पता भी नहीं चला.

मैंने उसको ये बात बोलने की सोची. हिम्मत करके मैंने उसे अपने दिल की बात कही. वो गुस्सा तो नहीं हुई लेकिन वो हम दोनों के इस रिश्ते को दोस्ती से ज्यादा नहीं समझती थी.
मैंने उसको बहुत बार बोला कि मैं उसे बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड वाला प्यार करता हूं लेकिन वो हर बार बात को यही कर टाल देती थी कि हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.

मुझे ऐसा लगता था कि वो भी मुझे चाहती थी लेकिन वो खुल कर अपने प्यार को सामने नहीं लाना चाह रही थी इसलिए दोस्ती का बहाना बना देती थी. वो थोड़ी शर्मीली किस्म की थी. शायद उसको डर था कि कहीं उसके किसी घरवाले तक बात न पहुंच जाये.

ऐसे ही करते करते दिन बीत रहे थे. फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जिसे मैं कभी नहीं भूल पाया.

वह दिन था 31 दिसम्बर का. उस दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी होनी थी. वह अपनी एक सहेली के साथ रूम पर रहती थी.

माही की सहेली एक दिन पहले ही अपने घर चली गयी थी. माही अब रूम पर अकेली रहने वाली थी. मुझे उसकी चिंता हो रही थी. वैसे सच कहूं तो मैं उसको चोदना चाह रहा था. इसलिए मेरा मन बार बार उसके साथ रहने को कर रहा था.

मैंने माही को बोला भी कि तुम्हारी सहेली तो घर चली गयी है और तुम रूम पर अकेली रहोगी.
वो कहने लगी कि वो रह लेगी.
मैंने उसको चिंता जताई और कहा कि अगर उसको सही लगे तो एक रात के लिए मैं ही उसके रूम पर आ जाता हूं.
माही ने मना कर दिया.

ये सुन कर मेरा मुंह उतर गया. वो भी मेरा उदास चेहरा देख कर सोच में पड़ गयी थी. मैं दरअसल उसकी किसी बात का बुरा नहीं मानता था. बस उसके सामने नाराज होने का नाटक कर रहा था.

मेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर वो मान गयी. बाद में उसने मुझे अपने रूम पर आने के लिए परमिशन दे दी.
मैं खुश हो गया. मैं उसके साथ ही उसके रूम पर चला गया.

रूम पर जाकर उसने हम दोनों के लिए खाना बनाया. हम दोनों ने साथ में डिनर किया और फिर उसने हम दोनों के लिए दो बिस्तर लगा दिये. दो बिस्तर देख कर मेरा माथा ठनक गया. कहां मैं उसको चोदने की प्लानिंग कर रहा था और वो मेरे लिए अलग से बिस्तर लगा रही थी.

फिर कुछ बहाना बना कर मैं उसके पास ही लेट गया. उसके पूछने पर मैंने कह दिया कि मुझे रात में अकेले सोने की आदत नहीं है. मेरे ऐसा कहने पर उसने कुछ नहीं कहा. साथ ही मैंने ये भी बोल दिया कि अभी जब तक नींद नहीं आती तो एक ही बिस्तर पर लेट लेते हैं उसके बाद मैं अपने बिस्तर पर जाकर सो जाऊंगा. उसको मेरी बात से थोड़ी तसल्ली हो गयी.

कुछ देर तक हम दोनों ऑफिस की बातें करते रहे. उसने अपनी सहेली के बॉयफ्रेंड्स के बारे में भी बताया. ये सब सुन कर मेरा लंड भी मेरी पैंट में उठने लगा था. मगर मैंने ये माही को महसूस नहीं होने दिया.

बातें करते हुए उसको नींद आ गयी. जब उसने बोलना बंद कर दिया तो मैंने देखा कि वो सो चुकी है. उसकी नाइट ड्रेस में उसकी उभरी हुई चूचियां देख कर मेरा मन बहकने लगा. मैंने उसकी चूचियों पर हल्के से छूकर देखा. उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

फिर मैंने उसकी चूचियों को धीरे से दबा कर देखा. उसने तभी भी कोई रिएक्शन नहीं दिया. अब मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने उसकी दोनों चूचियों पर एक एक हाथ रख दिया.

धीरे धीरे उसकी चूचियों को दबाते हुए मैं मजा लेने लगा और मेरा लंड टन्न से खड़ा हो गया. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने उसकी नाइट टॉप में हाथ दे दिया. उसकी चूचियों को अंदर हाथ देकर दबाने लगा. मेरे हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबा रहे थे.

अचानक ही उसने एक गहरी सी सांस ली और वो दूसरी तरफ घूमने लगी. मेरे दिल में धक धक हो गयी. मुझे लगा कि शायद ये जाग गयी है. मैंने उसके करवट लेने से पहले ही अपने हाथ को बाहर खींच लिया.

उसके बाद मैंने थोड़ा इंतजार किया. जब एक दो मिनट तक कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने दोबारा से ट्राई करने की सोची. आप तो जानते ही हो दोस्तो, सामने जब जवान लड़की सो रही हो तो कंट्रोल करना कितना मुश्किल हो जाता है.

दो मिनट इंतजार करने के बाद जब मुझे सब कुछ सही लगा तो मैंने फिर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. अब मैं पहले से ज्यादा जोर से उसके बूब्स को सहला रहा था और मसल रहा था. ये भी भूल गया था कि वो मेरी दोस्त है.

जब मैंने तेजी के साथ उसकी चूचियों को दबाया तो वो जाग गयी. जैसे ही उसने देखा कि मैं उसके बूब्स को छेड़ रहा हूं तो वो उठ कर बैठ गयी. उसने अपने टॉप को देखा और उसको पेट पर फिर से नीचे कर लिया.

ये जान कर कि मैं उसको छेड़ रहा था उसने मेरी ओर गुस्से से देखा. मगर फिर उसने रोना शुरू कर दिया. मैं तो डर गया कि अब ये चिल्ला चिल्ला कर सबको बता देगी. मेरी गांड फट रही थी.

तभी मैंने बात को संभालते हुए कहा- सॉरी माही, ये सब गलती से हो गया. मुझसे रुका नहीं गया. मैं तुमको बहुत प्यार करता हूं. मैं तुम्हारा गलत फायदा नहीं उठाना चाहता हूं.
मेरी बात सुन कर उसे थोड़ी तसल्ली हुई.

बड़ी मुश्किल से उसको समझा बुझा कर मैंने चुप करवाया. फिर उसने मेरी ओर देखा और मैंने उसकी ओर देखा. हम दोनों के होंठ आपस में एक बार के लिए मिल गये. मगर पता नहीं एकदम से उसको क्या हुआ कि उसने मुझे पीछे धकेल दिया.

मगर अब तो मैं बेकाबू हो गया था. मैंने उसको फिर से पकड़ा और उसकी गर्दन को पकड़ कर जोर से उसके होंठों पर अपने होंठों से चूसने लगा. पहले तो वो छटपटाई मगर कुछ सेकेण्ड में ही उसको मजा आने लगा. अब वो मेरा साथ देने लगी.

धीरे धीरे उसके होंठों को चूसने का मजा लेते हुए मैं फिर से उसके चूचों को दबाने लगा. वो अब गर्म हो रही थी. वह हल्के से सिसकार करने लगी थी और मैं उसकी चूचियों को भींच रहा था.

उसके बाद मैंने उसकी नाईट ड्रेस को भी उसके हाथ ऊपर करके उतार दिया. मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध दबाने लगा. एक तरफ से मैं उसकी चूचियों को दबा रहा था और दूसरी तरफ मैं उसके होंठों को चूस रहा था. उसके होंठ चूसते चूसते मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी.

माही की चूचियों को मैंने नंगी कर दिया. एक चूची को हाथ में लेकर दूसरी को अपने मुंह में ले लिया. आह्ह … जब उसकी चूची पर मुंह लगा तो मजा आ गया. मैं मस्ती में उसकी चूचियों को पीने लगा. कुछ ही देर में मैंने उसकी चूचियां चूस चूस कर लाल कर दीं.

अब उसके स्तन एकदम से कड़क हो गये थे. अब उसको मजा आ रहा था. थोड़ा दर्द भी हो रहा था उसे क्योंकि मैं काफी जोर से उसके बूब्स दबा और मसल रहा था. उसके निप्पल तन कर एकदम से टाइट हो गये थे.

ऐसे ही धीरे धीरे करके मैं उसके पूरे बदन को चूमने लगा. कभी उसके पेट पर तो कभी नाभि पर. कभी उसके कंधों पर तो कभी उसके गालों पर. ऐसा मन कर रहा था कि मैं उसको खा ही जाऊंगा.

उसकी गर्दन को चूसते हुए मेरा लंड उसकी चूत के बिल्कुल ऊपर था. मैंने उसके बदन को खूब चूसा और सहलाया. मेरा लंड बार बार उसकी चूत के छेद को टटोल रहा था. उसकी पैंटी के ऊपर रगड़ रहा था.

अब मुझसे रुका न गया और मैंने उसकी पैंटी निकाल दी. उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. उसकी चूत बाहर तक गीली दिख रही थी. मैंने उसकी चूत को सूंघा और फिर एक किस कर दी. किस करते ही वो सिहर सी गयी. उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया.

अपनी पैंट मैंने इसी बीच उतार ली और मैंने उसका हाथ अपने लंड पर लगवा दिया. वो हाथ को पहले तो हटाने लगी लेकिन फिर बाद में उसने मेरे लंड को पकड़ लिया. अब उसका हाथ मेरे लंड को सहलाने लगा था.

मेरा मन कर रहा था कि उसके मुंह में लंड दे दूं. मैंने उसको उठाया और अपने लंड को उसके मुंह के सामने कर दिया. वो नखरा करने लगी. मगर मैंने हार नहीं मानी.

मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और तेजी के साथ उसकी चूत में उंगली करने लगा. माही के मुंह से जोर जोर की सिसकारियां निकलने लगीं. पूरा कमरा गर्म हो गया था. हम दोनों के जिस्मों में पसीना आने लगा था.

जब उससे रहा न गया तो वो उठी और उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. उसने मेरे होंठों को चूसा और मैंने उसकी चूत पर लंड को रगड़ दिया. फिर मैंने दोबारा से उसके मुंह के पास लंड को किया और उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया.

जब उसने मुंह में लंड लिया तो मुझे बहुत मजा आया. मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और उसको अपना लंड चुसवाने लगा. अब मेरे मुंह से आह्ह … आह्ह करके सिसकारी निकल रही थी और जब लंड उसके मुंह में जा रहा था तो उसके मुंह में गूं-गूं की आवाज हो रही थी.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गये. मैंने उसकी चूत में जीभ दे दी और वो मेरे लंड को चूसने लगी. जल्दी ही वो काबू से बाहर हो गया. मेरा मन भी उसकी चुदाई करने के लिए मचल गया था.

वो बोली- आह्ह … अब रहा नहीं जा रहा आयुष, अब अंदर डाल दो.
मैंने कहा- क्या अंदर डाल दूं मेरी जान?
वो बोली- अपना वो डाल दो.
मैंने कहा- उसको क्या बोलते हैं, एक बार कहो तो.
वो बोली- अपना लंड डाल दो.

मैंने पूछा- कहां डाल दूं? अपना लंड।
वो बोली- मेरी चूत में अपना लंड डाल दो.
उसकी ये बात सुनकर मुझे चैन सा मिला. जो लड़की मुझे पहले मना कर रही थी अब वो ही मेरा लंड अपनी चूत में लेने के तड़प रही थी.

उसकी चूत पर लंड रख कर मैंने पूछा- पहले लिया है क्या जानू?
वो बोली- नहीं, बस उंगली से सहला देती थी.
मैंने कहा- ठीक है, तो फिर आज मैं तुम्हारी कुंवारी चूत का उद्घाटन करने जा रहूं. तैयार हो जाओ.
वो बोली- हां डालो, मैं तैयार हूं.

मैंने कहा- मगर कॉन्डम तो है ही नहीं.
वो बोली- ऐसे ही डाल दो.
मैंने कहा- ठीक है जान.

अपने लंड को मैंने उसकी कुंवारी चूत पर रखा और एक धक्का लगा दिया. चूत टाइट थी इसलिए पहली बार में लंड का सुपाड़ा अंदर न जाकर चूत पर से फिसल गया.

मैंने दोबारा से जोर का धक्का मारा तो लंड उसकी चूत में घुस गया. वो दर्द से चिल्ला उठी लेकिन मैंने तभी उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया. अब मैं रुक गया. उसकी चूत की पहली चुदाई थी इसलिए उसको इतना दर्द देना ठीक नहीं था.

कुछ देर रुक कर मैंने फिर से उसकी चूत में लंड को अंदर सरकाना शुरू किया. मैं उसके होंठों को चूस रहा था और उसकी चूत में नीचे से लंड को भी सरका रहा था. धीरे धीरे करके मैंने आधा लंड उसकी चूत में घुसा दिया था.

फिर मैंने एक झटका दिया और पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. वो एक बार फिर से उछली और मैंने उसके होंठों को दबा लिया. कुछ देर रुक कर मैंने फिर से लंड के धक्के चूत में लगाने शुरू किये. दो-तीन मिनट लगे उसका दर्द कम होने में. अब मैं धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा.

हम दोनों के बदन पूरे नंगे थे. मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत में धक्का दे रहा था और वो मेरे होंठों को चूस रही थी. कुछ ही देर में उसकी गांड ऊपर की ओर आने लगी. उसको चूत चुदवाने में अब मजा आ रहा था.

अब मैंने अपने धक्के तेज कर दिये और तेजी के साथ उसकी चूत को चोदने लगा. वो भी मस्त होकर चुदवाने लगी. तीन-चार मिनट में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत से पानी निकलने के कारण जब चूत में लंड जा रहा था तो रूम में पच-पच की आवाज होने लगी. अब मेरा लंड मलाई की तरह उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था.

मजे में सिसकारते हुए उसने कहा- आह्ह … चोद दो यार आज … अब तक ये चूत कुंवारी थी और मैं भी कुंवारी थी.
मैंने कहा- हां मेरी जान, मेरी नजर तो तेरी चूत पर बहुत पहले से थी.
उसने मेरे होंठों को चूसते हुए गांड ऊपर उठाना जारी रखा. मुझे भी उसकी टाइट सी चूत मारने में बहुत मजा आ रहा था.

दस मिनट के बाद वो एक बार फिर से झड़ गयी. अब मेरा माल भी निकलने को हो गया था. मैंने उसकी चूत में दो-चार धक्के तेजी के साथ लगाये और जब माल एकदम आने लगा तो मैंने जल्दी से लंड को निकाल कर उसके मुंह में दे दिया.

उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और एक दो बार चूसा था कि मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूटने लगी. मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा. झटके दे देकर मैंने अपना सारा माल उसके मुंह में गिरा दिया और वो उसे पी भी गयी.

फिर हम दोनों नंगे पड़े रहे. थोड़ी देर के बाद उसने खुद ही मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी. फिर उसने बिना कहे ही मेरे लंड को मुंह में लेकर पांच मिनट तक चूसा और मेरा लंड फिर से अकड़ गया.

एक बार फिर से मैंने उसकी चूत मारी. अबकी बार मैंने उसको डॉगी स्टाइल में चोदा. कुतिया की तरह चोदने में बहुत मजा आया. उसने भी इस पोजीशन को बहुत इंजॉय किया.

उस रात मैंने तीन बार उसकी चूत चोदी. इस तरह से मैंने एक कुंवारी चूत चोद कर अपना नया साल मनाया. जब वो सुबह सोकर उठी तो उसके पूरे बदन पर लाल निशान हो गये थे. मैंने उसके बदन को जी भर कर चूसा था.

माही उस रात के बाद जैसे मेरी दीवानी सी हो गयी थी. उस दिन पहली जनवरी के दिन मैंने नैनीताल में मस्ती करते हुए फिर से उसकी चूत मारी. उसके बाद उसकी गांड की चुदाई भी की. दोस्तो, लड़की की गांड चुदाई का भी अपना ही मजा है.

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चूत ने पानी छोड़ दिया

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

मुझे समझ नहीं आता कि मुझे उससे मिलने जाना चाहिए या नहीं कृपया अपनी राय दें।

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पहली चुदाई

मैं 18+ गर्ल हो गयी थी पर फिर भी मैं पड़ोस के लड़के लड़कियों के साथ लुकाछिपी खेलती थी. मैं सेक्स के बारे में जानती थी और इसका मजा लेना चाहती थी. जब मुझे मौक़ा मिला तो …

दोस्तो, मेरा नाम राधिका है. मैं 24 साल की हूं. मैं पंजाब के एक शहर में रहती हूँ. मेरे घर में मां, पापा, और मेरा छोटा भाई रहते हैं. मेरा फिगर 30-30-32 है

तो चलिए कहानी बताती हूं. बात कुछ साल पहले की है जब मैं 18+ गर्ल बनी थी.
मैं शाम के समय अपने पड़ोस के लड़कों के साथ खेल रही थी. हम लोग तीन लड़कियां और 5 लड़के थे. उसमें एक का नाम था मनु. मनु दिखने में ठीक ठाक था, गोरा रंग, शरीर पर बाल ही बाल थे.

खेलते खेलते अंधेरा ज्यादा हो गया. हम लुका छिपी खेल रहे थे. मनु की बारी थी हम सब को ढूंढने की. पहले भी हम खेलते थे लेकिन वो शाम अलग ही थी. गर्मी ज्यादा होने के कारण सभी के कपड़े गीले हो गये थे. गर्मी में मैं सिर्फ कमीज सलवार पहनती थी.

उस शाम जब अंधेरा कुछ ज्यादा हो गया तो मैं घर जाने के लिए खेल छोड़ कर जाने लगी. तभी अंधेरे में मुझे ठोकर लगी और मैं गिर गयी. उस समय मनु ने मुझे देख लिया ओर आकर पकड़ लिया।
तभी बाकी दोस्त भी आ गये. मनु की बहन ने उसको पीछे से मारा तो उसका कंटरोल खो गया और वो मेरे ऊपर गिर गया. खुद को संभालते हुए मैंने उसके हाथ पकड़ लिए जिसकी वजह से उसका मुँह मेरे मुँह के पास और उसके हाथ मेरे चूची से लग गये.

जैसे कि पहले बताया गर्मी की वजह से मेरे कपड़े भीग गये थे और मैंने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी तो मनु के हाथ लगाते ही मेरी चूचियां दब गयी और मुझे गुदगुदी होने लगी.

मेरी चूची दबाते ही उसका लंड खड़ा होने लगा. वो मेरी जांघ से लगा हुआ था जिसे मैंने बड़ा होते हुए महसूस किया. तो मैंने उसको अपने ऊपर से उठाने के लिए जोर लगाया.
तो उसने उठते हुए अपना दाहिना हाथ मेरी चूची पे रख के उसे दबा दिया.

उसका तना हुआ लंड उसकी गुलाबी अंडरवियर से साफ दिख रहा था. आपको बता दूं कि मनु घर में सिलाई किए अंडरवियर पहनता था, जिसकी वजह से मुझे उसके लंड का स्पर्श पास से महसूस हुआ.

उस समय मैं घर चली गयी और खाना खाकर सोने के लिए गयी. और बिस्तर पर मुझे वो सब याद आया तो मैंने खुद से अपनी चूची दबाई. तो मुझे सब सामान्य महसूस हुआ.
मेरा फिगर उस समय 28-28-30 था.

अगले दिन से मनु मुझे अलग नजर से देखने लगा और ज्यादा से ज्यादा समय मेरे साथ रहने लगा. अब तो उसने मेरी पढ़ाई में भी सहायता करनी शुरु की. पढ़ाई में सहायता करने से मैं भी उसके साथ ज्यादा खुल गई और उसके घर भी आने जाने लगी. मनु घर पर केवल पतली बनियान और अंडरवियर में ही रहता था जिसकी वजह से मुझे बहुत बार उसका लंड दिख जाता. पर उस समय मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख्याल नहीं था.

एक बार उसके परिवार वाले बाहर गये हुए थे और मुझे मैथ का एक प्रश्न समझ नहीं आ रहा था. मैं उसके घर गयी तो दरवाज़ा खुला था.

मैं अंदर गयी तो बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी. शायद वो नहा रहा था. मैं वहीं बैठकर इंतज़ार करने लगी. तभी बाथरूम से कुछ बदली हुई आवाज आने लगी वो जोर जोर से आह उह हम्म मम्म आहह की आवाज़ कर रहा था.
उस समय भी मेरे मन में सेक्स का कुछ नहीं आया.

इतने में उसकी माँ आ गई और उनकी आवाज आई तो मैं बाहर चली गई. और इतने में मनु भी बाहर आ गया.
उसने मुझसे पूछा- इस समय यहाँ?
तो मैंने कहा- कुछ समझना था!

वो मेरे पास आया और समझाने लगा. साथ ही वो कभी अपने हाथ से मेरे हाथ को छू देता, कभी अपनी टांग मेरी टांग से लगा देता.
हमारे में ये सब पहले भी होता था इसलिए मैंने कुछ नहीं किया. इस बार उसका हाथ मेरी चूची से लग गया जिससे उसका लंड आकार में आने लगा.
मैंने देखा तो उसको चिढ़ाते हुए उसके लंड को छूने लगी.
पर उसने मना कर दिया.

उसके बाद मेरे घर से मेरा भाई मुझे बुलाने आ गया तो मैं घर चली गयी.

अगले दिन होली थी तो सभी पड़ोस के लड़के लड़कियां साथ में खेलते थे. उस दिन मैंने सफेद टाप पहना था और साथ में जींस कैपरी जो मेरी सिर्फ जांघों तक थी.
हम सब होली खेलने लगे जिससे मेरे सारे कपड़े रंगों से भर गए.

गली में सब लोग थे पर मनु नहीं था. उसकी बहन ने बताया कि वो घर में छुप के बैठा है.
तो मैं उसके घर गयी. वो बाहर ही खुले में नहा रहा था. उसने सिर्फ कछा पहना था और पूरा भीगा हुआ था. उसके बाल उसके शरीर से ऐसे चिपके हुए थे जैसे किसी चीज को मक्खी.
उसके गीले अंडरवियर से उसके लंड के घने बाल साफ दिख रहे थे.

पर मुझे तो उसको रंगना था तो मैं उसके पास जाने लगी.
तभी पानी में मेरा पैर फिसल गया और मैं उसके ऊपर गिर गई.

मैं इस तरह से गिरी कि मेरा हाथ उसके लंड पर लग गया और वहीं रह गया. मेरे छूते ही वो खड़ा होने लगा. पर मैंने खड़ी होते हुए उसके लंड को दबा दिया जिससे मेरे रंग वाले हाथ का छाप उसके लंड पर छप गई.

तो उसने भी बदला लेने के लिए अपने रंग से रंगना चाहा.
मैं भागने लगी तो उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया. उसने इतना जोर से पकड़ा कि अब उसका खड़ा लंड मुझे चुभने लगा और उसके हाथ मेरी चूचियों पर थे. उसने उनको जोर से दबा दिया और बोला- अब हिसाब बराबर हो गया.

उसके हाथ की छाप मेरे सीने पर छप गयी तो उसने साफ करने के लिए मेरे पे पानी डाल दिया जिससे मेरे गीले टाप से मेरे निप्पल दिखने लगे. वो तो मेरे सीने को देखता ही रह गया.
इतने में उसकी बहन आ गई तो मैं उसके साथ चली गई.

अगले दिन मेरे घर वालों को भाई का इलाज करवाने बाहर जाना था तो मेरी परिवार वाले मनु के घर पर बोल के गये थे कि मैं उनके घर पर रह लूंगी कुछ दिन!

मैं रात को उनके घर चली गई. तो वहाँ पता चला कि उसकी बहन अपने मामा के घर गई है और उसके ममी पापा बंगलौर जा रहे थे जरूरी काम से. उसकी मम्मी ने खाना बना के रखा हुआ था.
मनु मुझे खाना परोसने लगा.

उसने दाल का बर्तन मुझ पर गिरा दिया जिससे मेरे सारे कपड़े खराब हो गए. तो उसकी मम्मी ने बोला- राधिका, तू नहा कर रिया के कपड़े पहन ले.
तो मैं नहाने चली गई और उसके मम्मी पापा भी चले गए.

नहा कर जब मैं कपड़े पहनने लगी तो वो मुझे फिट आ नहीं रहे थे. उसकी शमीज तो किसी तरह पहन ली पर उसकी पजामी मुझे आ नहीं रही थी.

बाथरूम में मनु का वो रंग वाला अंडरवियर पड़ा था जिस पर उसका माल निकाले का दाग था. मैं वही पहन के बाहर आ गई. उसकी बहन की शमीज से भी मेरे आधे चूचे दिख रहे थे.

मुझे ऐसे देख वो चौंक गया तो मैंने कहा- तुम्हारी वजह से ही हुआ सब! और रिया के कपड़े आ नहीं रहे थे इस लिए तेरी अंडर वियर पहन ली.
उसके बाद हम आचार के साथ खाना खाकर एक साथ एक ही कमरे में सोने चले गए.

रात को बातें की तो उसने कहा- राधिका, मुझे एक बात बताओ.
मैं- क्या?
मनु- मेरा ये खड़ा क्यों हो जाता है?

मैं- मुझे नहीं पता!
यह कह कर मैं सो गयी.

मैं नाराज ना हो जाऊँ … यह सोच कर वो भी सो गया. हम दोनों एक ही बेड पर थे जिससे मेरी टांग उसकी टांग से छू जाती और उसके बाल मुझे गुदगुदी करते. क्योंकि वो भी बनियान और कच्छे में सोया हुआ था.

रात के करीब 2-3 बजे लाईट चली गई तो मैं जाग गई और मनु की तरफ से आवाज आ रही थी. मैंने फोन की लाईट से देखा तो उसका कच्छा उतरा हुआ था और वो आंखें बंद करके अपने लंड को सहला रहा था.
मुझे कुछ होने लगा और मैं फोन बंद करके उसकी ओर मुड़ गई और अपनी गोरी नंगी टांग उसकी लात पर रख के अपने लात से उसका लंड दबा दिया.
वो सिहर उठा.

फिर मनु ने अपनी कमर को उठा के अपना लंड मेरी लात से दबा दिया. उसने मुझे 2-3 बार हिलाया पर मैं सोने का नाटक कर रही थी और नहीं उठी. मैंने अपनी जांघ से उसका लंड फिर से दबा दिया.

इस बार उसका माल निकल गया और मेरी जांघ गीली हो गई, पर मैं वैसे ही लेटी रही.

थोड़ी देर बाद मनु ने करवट बदली और वो मेरी ओर मुड़ा. तो मैं भी करवट बदलते हुए उसकी ओर मुड़ी और अपनी जांघ उसके ऊपर रख ली. अपना एक हाथ उसकी जांघों के बीच लंड के पास रख लिया. मेरी उंगलियां उसकी झांटों में चली गई और मेरा हाथ उसके तन रहे लंड को महसूस कर रहा था. तो मैंने अपना हाथ जोर से वहां रख लिया.

उसने भी कोई विरोध नहीं किया और अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगा. मैं भी बीच में अपना हाथ इधर उधर कर रही थी पर उसके बाल ही मेरे हाथ आते, वो समझ रहा था कि मैं सो रही हूं.

फिर वो मेरी ओर खिसका और मेरा हाथ अपने लंड के नीचे दबा लिया. इस वक्त उसका लंड लोहे की तरह सख्त हो गया था.

अब इससे पहले कि वो कुछ और करता … लाईट आ गई हवा आने से मैंने खुद को हिलाया तो वो डर गया कि मैं जाग रही हूँ. वो जल्दी से अलग होकर बाथरूम में चला गया और करीब पंद्रह बाद बाहर आया.

मैं समझ गयी कि उसने क्या किया होगा. पर मैं बेखोफ थी क्योंकि मेरे पास 2 रातें और थी उससे चुदने के लिए और उसको तैयार करने के लिए!

उसके बाद मनु बाहर आकर सो गया और अगले दिन सुबह मैं अपने घर आ गई.

मैंने अपने कपड़े उतारे और नहाने के लिए जाने लगी तो मुझे वो रात याद आ गई तो मैं वही बेड पर लेट गई. फिर मैंने अपने आप को शीशे में देखा और अपनी चूत पर हाथ रख के सहलाने लगी. 18+ गर्ल इन हालत में और क्या कर सकती थी? कुछ समय बाद मैं झड़ गई.

फिर मुझे ख्याल आया कि क्यों ना मैं अभी मनु के घर चली जाऊँ और उसके साथ वक्त बिताऊँ. तो मैं जल्दी से नहाने गई और नहा कर नंगी ही बाहर आ गई. मैंने बिना ब्रा पहने सफेद रंग की टाप पहनी जिसमें से मेरे चूचे की शेप और साईज दिख रहा था. और नीचे बिना पैंटी के ही घर पर बनाया हुआ निकर पहन लिया जो मेरी जांघों तक आ रहा था और काफी पतला भी था.

मैंने उसके घर जाकर बैल बजाई तो वो जल्दी से भाग के आया.वो सिर्फ तौलिये में लिपटा हुआ था. शायद वो नहाने जा रहा था.
मुझे देख कर वो बोला- अभी यहां कैसे?
तो मैंने पढ़ाई का बहाना करते बोला- मुझे कुछ समझना है.

उसने मुझे हाल में बैठाया और नहाने चला गया.

करीब 15 मिनट बाद वो बाहर आया तो उसका बदन थोड़ा गीला था और उसके बदन के बाल चिपके हुए थे. उसने ढीली बनियान और खुला अंडरवियर पहना हुआ था.

वो मेरे पास आकर बैठा और मुझे पढ़ाने लगा. उसकी जांघ मेरी झांघ को छू रही थी.
मेरे मन में मस्ती सूझी, मैंने उसको बोला- मनु, तेरे शरीर पर इतने बाल क्यों हैं?
पहले तो वो मेरी और देखने लगा, फिर बोला- सब के ऐसे ही होते हैं.

मैं- कहाँ? मेरे तो नहीं है?
मनु- रे पगली, लड़कों के ऐसे ही होते हैं, तेरे भाई के तो इससे भी ज्यादा हैं.
मैं- ठीक है.

उसके बाद वो मुझे पढ़ाने लगा. मैंने कापी से कुछ समझते हुए अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया.

तभी लाईट गई और रूम में गर्मी होने लगी. धीरे धीरे हम भीगने लगे पसीने से!
तो मैंने उसको कहा- कुछ ठंडा मिलेगा? गर्मी लग रही है.

वो शरबत बनाने रसोई में गया. रसोई में तो वैसे भी ज्यादा गर्मी होती है तो वो पूरा भीग गया. जब वो वापस आया तो उसके चेहरे से पसीना टपक रहा था.

गर्मी की वजह से मेरा भी बुरा हाल था, मेरे भी कपड़े भीग गए थे.
जब वो मुझे शरबत देने लगा तो वो देखता ही रह गया. मेरी टाप अब ट्रासपेरंट हो गई और मेरी चूचियाँ साफ दिख रही थी.

उसका लंड खड़ा होने लगा.

किताब एक तरफ रख के मैंने उसको अपने पास बुलाया तो मेरी नंगी जांघें देख के उसका खड़ा लंड और तन गया और उसकी अंडरवियर से बाहर आने को हुआ.
मैंने गुस्सा होने का नाटक किया तो उसने खुद को संभाला और सॉरी बोलने लगा.
तो मैंने कहा- सॉरी तो ठीक है. पर ये क्या है?
मैंने उसके लंड की ओर इशारा करते हुए कहा.

वो शरम से झुक गया और हड़बड़ा कर शरबत मेरे ऊपर गिरा दिया. बर्फ से मुझे ठंडा अहसास हुआ.

मैंने उसको पास बिठाया और कहा- ये सब कुदरती है. तुम भी इंसान हो और ऊपर से लड़के तो किसी भी 18+ गर्ल को ऐसी हालत में देख कर किसी का भी खड़ा हो जाएगा.
ऐसा कहते हुए मैंने अपनी लात उसकी लात से लगा दी.

ऐसा करते ही उसका लंड जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगा और फिर मेरे सामने ही उसका माल निकल गया और उसके कपड़े गंदे हो गए.
मुझे ये देखकर अच्छा लगा.
वो शर्मिंदा होकर बैठ गया.

मैंने उसको कहा- मुझे नहाना है.
मेरे पास कपड़े नहीं थे तो मैंने उसके कपड़े मांगे.

पहले तो उसने मना किया.
फिर मैंने कहा- रात तक यहीं तो रहना है, तब तक ये सूख जायेंगे. और कल रात भी तो तेरे कपड़े पहने थे.
तो उसने दे दिए.

मैं वो लेकर नहाने गयी. उसके कपड़े मुझे ढीले थे पर मैंने पहन लिए. उसकी बनियान मेरी छाती को काफी खुली थी पर उसका अंडरवियर मुझे फिट बैठा.

मैंने रात वाला अहसास फिर से लेना था इसीलिए मैंने उसको पास नहीं आने दिया. फिर हमने नूडल्ज़ खाए और बत्ती बंद करके सोने लगे.
मैंने मनु को बोला- मैं एक बार सो जाती हूँ तो सीधा सुबह उठती हूँ.
मैंने यह जानबूझ कर कहा ताकि वो रात को दोबारा वो सब कर सके.

ऐसा ही हुआ. 12 बजे के करीब जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मनु ने सारे कपड़े उतारे हुए थे. वो मेरे बगल में नंगा पड़ा था.
कल की तरह फिर से नींद में हिलने का बहाना करते हुए मैंने अपनी जांघ उसके लंड पर रख दी. उसका लंड आग की तरह तप रहा था.

मनु मेरी ओर घूमा और मैंने अपनी जांघ हटाते हुए अपना हाथ उसकी जाँघों में घुसा दिया और अपनी उंगलियों को उसके लंड और झांटों की ओर किया.

वो अपनी कमर हिलाने लगा और उसने अपना हाथ सीधा मेरी चूत पर रख दिया. उसने अपना मुँह मेरी चूचियों में घुसा लिया.
मैंने अपना हाथ उसके लंड पर दबा दिया तो उसके लंड का पानी निकल गया. मेरा पूरा हाथ भीग गया पर मैंने अपना हाथ लगाए रखा.

मेरी चूत भी अब गर्म होने लगी और मैंने भी अपना पानी छोड़ दिया.

फिर हम दोनों उठ गए. उसने देर ना करते हुए मेरे कपड़े खीच के फाड़ दिए और मुझे अपनी गोद में बिठाकर चूसने लगा. साथ में उसने मेरी चूचियां जोर से दबा दी. मेरे मुँह से जोर से आह निकली पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ा.

थोड़ी देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और मुझे नीचे चुभने लगा.

उसने मुझे गोद में उठाया और अपने बाथरूम के बाथटब में ले गया. उसने कुते की तरह जोर से मेरी चुत चाटी और अपनी उंगलियां तेल लगा के मेरी चुत में घुसा दी. दर्द से मेरी जोर से चीख निकल गई और मेरा पानी बाहर आने लगा.

फिर उसने देर ना करते हुए अपने लंड पर तेल लगाया और मेरी 18+ चूत पे रख के जोरदार धक्का लगाया.
दर्द के मारे मेरी तेज आवाज में चीख निकली.

उसने पानी का नल खोल दिया. अब टब में पानी भरने लगा. मैं कुछ देर बाद शांत हुई तो उसने एक धक्का और लगाया. उसका पूरा लंड मेरी चुत में घुस गया और 18+ गर्ल की सील टूटने से टब का पानी खून से लाल हो गया.

फिर 2 मिनट बाद वो मुझे चोदने लगा और 15 मिनट चोदता रहा. इस बीच मैं एक बार झड़ गई. और फिर उसने अपना पानी मेरे अंदर निकाल दिया.
उस रात उसने मुझे 3 बार चोदा.

उसके बाद मेरे परिवार वाले और उसके परिवार वाले अगले दिन आ गए.

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मेरी चूत में लंड डालकर मुझे खूब चोदा

मैंने छोटे शहर से बड़े शहर में आकर कॉलेज ज्वाइन किया तो मेरे अंदर जवानी का जोश था. पहले ही दिन एक बांके जवान लड़के से मुलाक़ात हुई और मैं उस पर मोहित हो गयी.

दोस्तो, उम्मीद करती हूँ कि आप सभी अच्छे और स्वस्थ होंगे.
मेरा नाम पल्लवी है और मैं अन्तर्वासना पर बहुत दिनों से कहानियाँ पढ़ रही हूँ और खुद भी कहानियाँ लिखना चाहती थी.

और आज मैं यह पहली कहानी लिख रही हूँ. उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आयेगी. यह मेरी पहली कहानी है इसीलिए अगर कोई गलती हो लिखने में तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा.

सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूं. मेरा नाम पल्लवी है, मेरी उम्र 21 साल है, मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 32-26-33 है. ये कहानी 2 साल पहले की है तब मेरी उम्र 19 साल थी, तभी मैंने अपनी 12वीं की परीक्षा पास की थी और क्यूंकि मेरा घर यूपी में पूर्वांचल के एक गाँव में है इसीलिए वहां कोई अच्छा कॉलेज न होने के कारण मैंने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अपनी बुआ, जो गोरखपुर में रहती हैं, के घर जाने का फैसला किया.

मई माह में 12वीं के रिजल्ट आने के बाद मैं बुआ के घर आ गयी और वह एक कॉलेज ज्वाइन कर लिया.

बुआ का घर 3 मंजिल का था. उसमें से मैंने सबसे ऊपर वाले मंजिल का कमरा ले लिया जो घर की छत पर ही था.

पहले दिन जब मैं दोपहर को बुआ के घर पहुंची तो बुआ ने मेरा सारा सामान कमरे में रखवा दिया. और क्यूंकि मैं भी थकी हुई थी लम्बे सफ़र के बाद तो रूम में जाकर कपड़े बदल कर शॉर्ट्स और टॉप पहना और बेड पर सो गयी.

मेरी नींद करीब शाम के 8 बजे खुली और अँधेरा हो चुका था. मैं अपने कमरे से बाहर निकली और और वहीं छत पर टहलने लगी.

तभी बगल वाले घर में, जिनकी छत मेरी छत से लगी हुई थी, उसमें एक आदमी आया वो करीब 6 फुट का था लम्बा चौड़ा … देखने में किसी जिम का ट्रेनर लग रहा था.

मैं अपने छत पर टहल रही थी और वो अपने छत पर टहल रहा था. और क्यूंकि मैंने शॉर्ट्स और टॉप पहना हुआ था और शॉर्ट्स भी काफी मुश्किल से मेरी गांड को छुपा पा रहे थे इसीलिए वो लगातार मेरी गांड और बूब्स देख रहा था.

वैसे तो मुझे कोई इस तरह देखे तो अच्छा नहीं लगता मगर मैं भी उसकी जानदार बॉडी को देख रही थी.

हम करीब आधा घंटा यों ही टहलते रहे.

8:30 बजे बुआ मुझे खाना खाने के लिए बुलाने छत पर आ गयी. उनके ऊपर आते ही उस आदमी ने बुआ को नमस्ते कहा.
तो बुआ ने भी नमस्ते की और पूछा- और अनिल कैसे हो?
तब मुझे पता चला कि उसका नाम अनिल है.

बुआ ने अनिल को मेरे बारे में बताया और कहा- यह मेरी भतीजी पल्लवी है, और यहाँ पढ़ने के लिए आई है.
उसने मुझसे हाथ मिलाया और कहने लगा- मैं भी उसी कॉलेज में पढ़ा हूँ. और अब चौराहे पर जो जिम है वो मेरा ही है.
मैंने कहा- ओह … आप जिम के ट्रेनर हैं क्या?
अनिल बोला- ट्रेनर भी हूँ और जिम का मालिक भी हूँ.

तभी बुआ ने कहा- हाँ … तभी तो इतनी बॉडी बना रखी है.
और सभी हंसने लगे.

तभी अनिल ने कहा- अगर कॉलेज में कोई दिक्कत हो या कोई हेल्प चाहिए हो तो मुझे बताना, मैं वहां के बारे में सब जानता हूँ.
मैंने कहा- वैसे मुझे वहां के सिलेबस, क्लासेज और टीचर्स के बारे में जानना था.
अनिल ने कहा- हाँ जरुर … अभी बताता हूँ.

लेकिन तभी बुआ ने हम दोनों को टोक दिया और कहा- जो बात करनी है, खाने के बाद करना. चलो पहले खाना खा लो. और अनिल जाओ तुम भी खाना खा लो.
तभी उसके घर के नीचे वाले कमरे से किसी औरत की आवाज़ आई- अनिल आओ खाना खा लो.

मैं बुआ के साथ नीचे जाने लगी तो मैंने उनसे पूछा- बुआ वो आवाज़ किसकी थी?
उन्होंने बताया- वो आवाज तो उसकी बीवी अंजलि की थी.
मैंने कहा- अच्छा उसकी शादी हो चुकी है.
बुआ ने कहा- हाँ, 9 साल हो गए शादी को उसकी.
मैंने कहा- क्या 9 साल तो वो कितने साल का है?
बुआ ने कहा- 35 साल का है. वैसे लगता 25 साल का है, है ना?
मैंने कहा- हां वो तो सही कहा आपने.
और फिर हम दोनों हंसने लगी.

खाना खाने और उसके बाद बुआ के साथ बर्तन धुलने के बाद मैं 10 बजे तक छत पर आ गयी और वहीं पर टहलने लगी.

कुछ देर बाद अनिल के घर से लड़ने की आवाज़ आने लगी और फिर अनिल ऊपर छत आ गया.
मैंने उससे कहा- क्या हुआ? घर में चिल्ला चिल्ली क्यों मची है?
तो अनिल ने कहा- कुछ नहीं बस रोजमर्रा की लड़ाई चल रही थी.
और फिर हम दोनों हंसने लगे.

तभी उसकी बीवी अंजलि ऊपर आ गयी और उसने कहा- मैं घर जा रही हूँ. और खुद खाना बनाओ और खाओ.
अनिल ने भी गुस्से में कहा- जो करना है, कर! अब निकल यहाँ से.

उसके बाद अंजलि वहां से चली गयी और घर चला गयी और अनिल वही खड़ा रहा.
मैंने कहा- अरे उसको रोकोगे नहीं क्या?
तो उसने कहा- अरे खुद आ जाएगी. उसका रोज़ का है ये! और तुम बताओ क्या हाल है, खाना खा लिया?
मैंने कहा- हाँ खा लिया.

अनिल ने कहा- अपना नंबर दो, मैं तुम्हें सिलेबस दे देता हूँ.
मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और अनिल ने मुझे सिलेबस भेज दिया.

मैंने उससे कहा- यार तुमने बॉडी बहुत अच्छी बनायी है.
अनिल ने उसके बाद अपनी शर्ट उतार दी और अपने सिक्स पैक दिखने लगा.

मैं छत की दीवार लांघ कर उसकी छत पर चली गयी और उसके सिक्स पैक छूकर देखने लगी.
अनिल ने कहा- कैसे लगे? बहुत मेहनत करने पर बनी है.
मैंने कहा- बहुत अच्छे हैं.

अनिल ने कहा- वैसे तुम्हारा फिगर भी लाजवाब है, शॉर्ट्स और टॉप में मस्त लगती हो.
मैंने कहा- रहने दो, मोटी हो रही हूँ यार.
तो उसने मुझे घुमाया और मेरे पीछे आ गया और पीछे से मेरे पेट पर हाथ फेरने लगा और पीछे से चिपक गया.

मुझे भी मजा आ रहा था और उसको कुछ नहीं कहा. अनिल पेट पर हाथ फेरते फेरते ऊपर मेरे बूब्स पर हाथ ले आया और बूब्स को मसलने लगा.

उसके बाद मेरे टॉप के अन्दर अपने हाथ डाला और मेरे निप्पल को अपनी दो उंगली से खूब जोर से मसलने लगा और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.
अनिल अपने लंड को मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से ही मेरी गांड पर घुसेड़ने लगा.

तभी बुआ की आवाज़ आने लगी तो मैं जल्दी से अपने छत पर आ गयी और अनिल ने भी तुरंत शर्ट डाल ली.

बुआ ऊपर आई मुझे पानी देने लगी और कहा- चलो, अब सो जाओ.
मैंने बुआ को गुड नाईट बोला और कमरे में सोने चली गयी.

अनिल ने भी बुआ को गुड नाईट बोला और सोने चला गया.

अगले दिन सुबह मेरा कॉलेज था और कॉलेज की ड्रेस नीला शर्ट और सफ़ेद सलवार पहन कर सिटी की लोकल बस पकड़ कर कॉलेज पहुँच गयी.

कॉलेज में मैं जब पहुंची तो क्लास में मैं सबसे ज्यादा सुन्दर थी. सब मुझे ही देख रहे थे. लड़के मेरे पीछे वाली सीट पर बैठ गए और अपनी आँखों से मेरे फिगर का एक्सरे करने लगे, मुझसे बात करने की कोशिश करने लगे.

करीब 3 बजे मेरी छुट्टी हुई और घर जाने के लिए कॉलेज से निकली और बस का इंतज़ार करने लगी.

कॉलेज के बाहर कुछ लड़के खड़े थे और कॉलेज से निकल रही हर लड़की का एक्सरे अपनी आँखों से कर रहे थे. जब करीब आधा घंटा बीत चुका था और बस अभी तक नहीं मिली थी मुझे और कॉलेज के सभी छात्र भी जा चुके थे.

तभी उन्ही लड़कों में से एक लड़का अपनी मोटरसाइकिल पर 2 लड़कों को बिठाये हुए मेरी तरफ आया और मेरे पास आकर गाड़ी रोक कर बोला- हेल्लो … मेरा नाम सुमित है. आपका नाम क्या है?
मैंने उसके सवाल का कुछ जवाब नहीं दिया तो सुमित ने कहा- क्या हुआ मैडम? सिर्फ नाम ही तो पूछा है यार … उसमें क्या दिक्कत है?
तो मैंने फिर मैंने गुस्से में कहा- मेरा नाम पल्लवी है कोई प्रॉब्लम?
सुमित ने कहा- अरे यार पल्लवी … क्या हुआ … इतना क्यूँ गुस्सा हो, क्या बात है कोई टेंशन?

मैंने कहा- यार, आधा घंटा हो गया बस का इंतज़ार करते … लेकिन बस नहीं आई. इसीलिए दिमाग ख़राब हो रहा है.
सुमित बोला- यार अभी तो 1:30 घंटे बाद बस आयेगी.
मैंने अचंभित होकर कहा- क्या सच बताओ यार … फिर तो बहुत लेट हो जायेगा यार.
सुमित बोला- टेंशन न लो मैं तुम्हें घर छोड़ दूंगा आओ बैठो.
मैंने कहा- रहने दो तुम्हारी बाइक पर वैसे ही जगह नहीं है. मैं कहाँ बैठूंगी.

सुमित मोटरसाइकिल से उतरा और अपने दोस्तों को जो पीछे बैठे थे उनसे बोला- अरे यार वो तो उतर जायेंगे तुम हां तो बोलो पहले. मैंने “हां” कह दी.
उसके बाद सुमित ने अपने दोस्तों को बाइक से गरियाते हुए कहा- उतरो बेहनचोदो!
और उसके दोस्त बेचारे उतर गए और कहने लगे- अच्छा बच्चू … लड़की मिली तो दोस्तों को भूल गए.

सुमित बोला- भक्क साले … मदद नाम की भी कोई चीज़ होती है.
और मैंने कहा- सही कहा सुमित ने!
मैं उसी बाइक पर बैठ गयी.

उसने एकदम से बाइक चलायी और मैं पीछे की तरफ धक्का लगा तभी मैंने उसकी कमर पकड़ ली और गिरते गिरते बच गयी. उसके बाद मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और उससे चिपक कर बैठ गयी. वो भी एक दम मदहोशी से गाडी चला रहा था बहुत तेज़ी से चला रहा था.

उसने मेरे बारे में सब पूछा कि ‘कहाँ से हो और क्या कर रही हो?’
मैंने सब बता दिया.
फिर मैंने उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो 29 साल का है और ठेकेदारी का काम करता है. उसका अब इस दुनिया में कोई नहीं है. इसीलिए या तो काम में व्यस्त रहता है या घूमता रहता है.

बात करते करते मैं घर के पास आ गयी थी और मैंने उसे घर से दूर ही रोक दिया और कहा- घर तक मत चलो, नहीं लोग गलत समझेंगे.
सुमित बोला- जैसा तुम कहो.
और उसने गाड़ी रोक दी.

मैं घर जाने लगी तभी वो बोला- कल सुबह कैसे जाओगी?
मैंने कहा- बस से जाऊँगी.
तो उसने कहा- ये बताओ अब हम फ्रेंड हैं न?
मैंने कहा- हां यार, ये भी कोई पूछने वाली बात है?

सुमित ने कहा- तो सुमित सिंह के होते हुए उसकी दोस्त बस से जाएगी मेरी क्या इज्ज़त रह जाएगी.
मैंने कहा- तो क्या करें, बताओ?
सुमित बोला- कुछ नहीं, बस अपना नंबर दो मुझे और सुबह कॉल कर देना. मैं तुम्हें यहीं मिलूँगा सुबह.
मैंने कहा- सच में, थैंक्स यार!
और उसको गले लगा लिया.

सुमित ने भी खूब जोर से मुझे गले लगा लिया. लगता है पहली बार किसी लड़की के गले लग रहा था. फिर उसके बाद उसका लंड खड़ा हो गया हो जो मुझे महसूस होने लगा.
हम दोनों अलग हो गए. फिर मैं अपने घर के लिए निकल गयी.

घर पहुँचने पर बुआ के साथ में बिजी हो गयी और शाम को खाना खाने के बाद करीब 10 बजे छत पर आ गयी.
उसी समय अनिल भी छत पर आ गया.

अनिल बोला- और पल्लवी, कॉलेज का पहला दिन कैसा गया?
मैंने कहा- न ज्यादा अच्छा न बेकार, तुम बताओ बीवी वापस आई या नहीं?
अनिल बोला- वो मादरचोद आना होगा तो आयेगी, मुझे उसकी जरूरत नहीं.

मैंने कहा- अच्छा मूड ऑफ न करो तुम अपना. ये बताओ मुझे तुम्हारा जिम ज्वाइन करना है चार्जेज क्या हैं?
अनिल बोला- अरे तुम्हें भी जिम ज्वाइन करना है क्या?
मैंने कहा- हां क्यूँ …. नहीं कर सकती क्या?
अनिल बोला- नहीं यार, ऐसी बात नहीं, चार्जेज वाली लिस्ट नीचे रखी है, आओ मैं तुम्हें दिखता हूँ.

मैं दीवार लांघ कर उसके घर चली गयी और नीचे उसने कमरे में जाकर उसने मुझे बेड पर बिठा दिया और लिस्ट देख कर कहा- 5000 रुपया प्रतिमाह.
तो मैंने कहा- यार, इतना तो मैं नहीं दे पाऊँगी.

मैंने वही शॉर्ट्स और टॉप पहना था जो उस दिन पहना था. अनिल मेरी जाँघों पे हाथ फेर रहा था. उसने कहा- अरे यार, ये तो दूसरे के लिए है. तुम्हारे लिये तो स्पेशल डिस्काउंट है.
ये बोलते हुए वो मेरे साथ बेड पर ही लेट गया और मेरे टॉप के अन्दर हाथ डालने लगा.

मुझे भी मज़ा आ रहा था तो मैंने कुछ कहा नहीं.
मैं बोली- अच्छा कितना डिस्काउंट दोगे मुझे?
अब उसका हाथ मेरे टॉप के अन्दर बूब्स तक पहुँच गया और मेरे निप्प्लेस को अपनी दो उंगली से दबाने लगा.

मैंने कहा- मुझे तो 100% डिस्काउंट चाहिए.
अनिल बोला- जैसा तुम कहो जानेमन!
और मुझे किस करने लगा.

मैं भी बहुत चुदासी थी. मैं उसके ऊपर चढ़ गयी और किस करने लगी. वो मेरे होंठ को ऐसे चूस रहा था जैसे उन्हें खा जायेगा.

उसका जोश देख कर मेरा जोश और भी बढ़ गया और उसे किस करते हुए उसके होंठ को अपने दांतों से काट लिया.
वो गुस्सा गया और बोला- रुक मादरचोद … आज तुझे ऐसा चोदूँगा कि जिंदगी भर याद रहेगा.

उसने मुझे पकड़े हुए उठाया और बेड पर पटक दिया और खुद नंगा हो गया. उसी बीच मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.

अनिल मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे बूब्स को चूसने लगा. और उसके बाद तो उसने मेरे निप्पल को इतनी जोर से काटा कि मेरी चीख निकल गयी.
मगर वो रुकने वाला था नहीं. लगता है उसे निप्पल से कुछ ज्यादा ही लगाव था. उसने करीब 20 मिनट तक मेरे निप्पल को काटा और चूसा.

उसके बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटा कर खुद उसके ऊपर आ गयी और उसके निप्पलों को मैंने चूसना शुरू किया. मैंने भी उसके निप्पलों को खूब काटा और उसके सिक्स पैक को अपनी जीभ से चाटा और फिर उसके लंड को चूसना शुरू किया.

मैं बता दूं उसका लंड 7 इंच का था, मेरे मुँह के अन्दर जा ही नहीं पा रहा था. पर किसी तरह मैंने उसे चूसना शुरू किया.

करीब 10 मिनट चूसने के बाद उसने फिर से मुझे उठाया और बेड पर पटक दिया. उसने मेरी टांगों को पकड़ के उन्हें फैलाया और फिर अपनी तरफ खींचा और अपना लंड मेरी चूत पर रखा और मुझसे पूछा- बता पहले कभी चुदी हो या सील पैक हो?
मैंने कहा- नहीं, अभी मैं वर्जिन हूँ.

मैं इतना बोली ही थी कि हरामी ने एकदम से पूरा लंड मेरे चूत में डाल दिया.
मैंने कहा- अरे मादरचोद, आराम से डालते.
अनिल बोला- मुझे तेरा ये दिन यादगार बनाना है.

मेरी चूत की सील टूट चुकी थी और उसके बेड पर उसका निशान भी लग चुका था.

उसके बाद अनिल मेरे ऊपर चढ़ मुझे बहुत चोदा और कुछ देर दर्द होने के बाद मुझे भी मज़ा आ रहा था.

5 मिनट वैसे ही चोदने के बाद उसने मुझे उठा लिया और खड़े होकर मुझे अपने ऊपर बिठा कर चोदने लगा. करीब 5 मिनट बाद वैसे ही चोदने के बाद उसने मुझे बेड पर उल्टा लेटा दिया और मेरे ऊपर पीछे से लेट गया.

उसके बाद उसने पीछे से मेरी चूत में लंड डालकर मुझे खूब चोदा. इसी बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी.

अब उसने मुझे उठाया और उठा कर डाइनिंग रूम में ले जाकर डाइनिंग टेबल पर बिठा दिया. उसने मेरी चूत में फिर से लंड डाल दिया और खूब जोर जोर से चोदने लगा.

फिर करीब 10 मिनट बाद वैसे ही चोदने के बाद वो भी झड़ गया और अपना पूरा पानी मेरी चूत के अन्दर ही डाल दिया.

उसके बाद हम दोनों किस करने लगे और कुछ देर किस करने के बाद मैंने अपने कपड़े पहने और अपने कमरे में आ गयी.

अपने कमरे में आने के बाद मैं सोने ही जा रही थी कि तभी मेरे मोबाइल पर सुमित का मेसेज आया.
उस मेसेज में क्या लिखा था और उसके बाद क्या क्या मस्ती की मैंने!

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