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बिना कंडोम की चुदाई

मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में रहता हु, मैं आपको शहर का नाम नहीं बताऊंगा क्यों की मैं अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहता, मेरे घर में मैं मेरी बहन सरिता दीदी मेरे पापा और मेरी माँ है. पापा को ढाबा है जीटी रोड पर वो अक्सर ढाबा में ही रहते है और वही सोते है. ये जो चुदाई की शुरुआत है वो तब की है जब मेरी माँ नानी घर गयी थी क्यों की नानी की तबियत ख़राब थी, हम घर में दोनों भाई बहन थे, मैं २१ साल का हु और मेरी बहन २६ साल की है. उसके लिए काफी लड़का ढूढ़ रहे है पर अभी तक कोई काबिल नहीं मिला है.जब से उसके लिए लड़का ढूंढने का काम शुरू हुआ था तब से वो ना जाने किस ख्वाब में रहने लगी, देर रात तक जागती, कभी कभी उसका पलंग से आवाज आने लगता, मैंने धीरे धीरे नोटिस करना चालू किया की वो आखिर रात में करती क्या है की जोर जोर से पलंग हिलता और आवाज आती. मुझे ऐसा लगने लगा की वो शायद अपने चूत में कुछ डालती है और थोड़े देर में शांत होती है और फिर सो जाती है.ये सारे कारनामा हम रोज रोज देखते थे, क्यों की हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे, पर अलग अलग पलंग पर सोते थे, कुछ दिन बाद मैंने नोटिस किया की वो रात में अपनी पेंटी और ब्रा खोल कर सोने लगी. क्यों की उसकी चूचियां साफ़ साफ़ नजर आती थी उसकी नाईटी से, बड़ी बड़ी सॉलिड सॉलिड, दोस्तों मेरा भी मन ख़राब होने लगा, अपनी बहन की इस हरकत से, है भी बहूत ही हॉट, सरिता दीदी की साइज ३६-२४- ३६ है, दोस्तों किसी का भी दिमाग ख़राब हो जाये उसके चूतड़ को पीछे से देखकर और आगे से उनकी चूचियों को देखकर, बड़े बड़े लंबे लंबे बाल गुलाबी होठ, लंबी और गोरी जबरदस्त दिखती है. जब वो काजल और होठ को गुलाबी रंग से रंगती है तब तो वो सेक्स की देबि लगती है.

दोस्तों ऐसे ही दिन बीतने लगा. मैं भी रात में मजे लेने लगी. अब मैं भी अपनी आँख अपनी बहन को देखकर सेकने लगा. उस दिन की बात है जब माँ नानी के यहाँ गई थी. रात के करीब ११ बजे थे गर्मी का दिन था. वो हल्का सा बेडशीट ओढे थी. मैं सोने का नाटक करने लगा. तभी फिर से उसका पलंग हिलने लगा. फिर करीब दस मिनट में ही शांत हो गई. मैं समझ गया की मेरी दीदी आज भी अपने चूत में शायद बैगन पेल रही है. तभी वो उठी, उसकी चुचिया साफ़ साफ़ टाइट दिख रही थी. निप्पल भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. जब वो उठी और बाथरूम के तरफ जाने लगी. उसकी चूतड़ हिलोरे मारते हुए चलने लगी. गजब की लग रही थी बाल निचे तक थे खुला हुआ, मैं तो मर गया दोस्तों, मेरा लंड खड़ा हो गया, ऐसा लग रहा था की मैं चोद दू,तभी वो वापस आने लगी. मैं चुपचापहो गया, शांत हो गया पर मेरा लंड शांत नहीं था, वो तम्बू बना कर खड़ा था. सरिता दीदी जैसे ही आई बोली आलोक तुम जाग रहे हो. मैं कुछ भी नहीं बोला, वो फिर से बोली तू जाग रहे हो. मैं फिर भी चुप था. उसने फिर से कहा मैं सब समझ रही हु, तुम क्या देख रहे थे, तुम्हे शर्म नहीं आई एक जवान बहन को रात में ऐसे घूरते हुए. मैंने जाग गया, मैं डर गया था की पता नहीं वो माँ से तो नहीं कह देगी, तभी वो मेरे पलंग पर बैठ गई और मेरा लौड़ा पकड़ ली. मेरा लौड़ा काफी मोटा और तना हुआ था. वो भी ये है सबूत मुझे घूरने का, मैंने कहा सॉरी दीदी, गलती हो गई अब ऐसा नहीं होगा.ये चुदाई की कहानियाँ,रियल सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।वो मेरे ऊपर चढ़ गई. और मेरा पेंटी निचे कर दिया. और मेरे लंड को पकड़ कर बोली, इसका कीमत तुम्हे चुकानी पड़ेगी. मैंने कहा कैसी कीमत, उसने अपने सारे कपडे उतार दिए, दोस्तों पहले तो मेरा लंड थोड़ा डर से छोटा भी हो गया था पर, जैसे उसने कपडे उतारी, मेरा लंड तो और भी मोटा और लंबा हो गया, मैंने कहा ये क्या कर रही हो दीदी मैंने तुम्हारा भाई हु, तो वो बोली जब भाई बहन की चूचियां और गांड को घूर रहा हो तब वो भाई नहीं बचता है. वो बॉय फ्रेंड हो जाता है. मैंने कहा पर मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा, तो वो बोली नहीं कर देख मैं क्या करती हु, मैं माँ और पापा को बोलूंगी की जब मैं सो रही थी तब तुम मेरे प्राइवेट पार्ट को सहला रहा था. दोस्तों मैं डर गया, बहूत ही ज्यादा डर गया.

उसने कहा जैसा मैं कहती हु, वैसा कर मैं कुछ भी नही बोलूंगी और मेरी दीदी मेरे लंड को अपने मुह में लेके चूसने लगी. धीरे थोड़े देर बाद वो ऊपर आ गई और मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे होठ को चूसने लगी. दोस्तों मैं बहूत ही ज्यादा कामुक हो गया था. और जब दीदी ने अपनी चूचियां मेरे मुह में दी. और बोली ले चूस, मैं अपने बहन की चूचियों को चूसने लगा, मेरे तन बदन में आग लग गई. और मैंने जोर जोर से अपनी बहन की चुचिओं को पिने लगा और दबाने लगा. थोड़े देर बाद वो मेरे मुह के पास बैठ गई उसके चूत मेरे मुह के पास था. उसने कहा मेरे चूत की पानी को अपने जीभ से साफ़ कर और पि जा.दोस्तों मैंने अपने बहन की चूत को चाटने लगा. वो अपने चूत से नमकीन पानी निकाल रही थी और मैं तुरंत ही चट कर जा रहा था. वो आह आह आह आह आह कर रही थी. और मैं दोनों हाथो से चूचियों को मसल रहा था और जीभ से चूत को चाट रहा था. उसके थोड़े देर बाद वो निचे हो गई और मेरा लंड जो की अब करीब नौ इंच का हो गया था मेरा लंड पकड़ कर अपने चूत पे रख कर बैठ गई. दोस्तों मेरा लंड पूरा उसके चूत के अंदर समा गया. अब वो जोर जोर से बैठने लगी और उठने लगी. लंड अंदर बाहर जा रहा था और मेरी बहन के मुह से सिर्फ आह आह आह आह आह निकल रहा था। वो खूब जोर जोर से चुदवाने लगी. फिर वो निचे हो गई और मैं ऊपर हो गया और फिर मैंने उसके दोनों पेअर को अपने कंधे पर रख कर, जोर जोर से उसके चूत में अपने लंड को डालने लगा. इस तरह से वो मुझे रात भर मेरे से अलग अलग पोजीशन में चुदवाने लगी. उसके फिर मेरे साथ ही नंगे ही सो गई.दोस्तों दूसरे दिन मेरी दीदी मुझे २०० रूपये दी और बोली कंडोम ले आना, मैंने कंडोम शाम को बाजार से कंडोम भी लेके आ गया. रात में फिर से वो मुझेसे चुदवाने के लिए अपने सारे कपडे उतार दी. और मेरा भी कपडे उतार दी. और फिर से चुदवाने लगी, जब हम दोनों झड़ गए तो मैंने कहा दीदी ये सब गलत हो रहा था. उसने कहा क्या गलत हो रहा है. जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती तुम मुझे ऐसे ही चोदते रहो, नहीं तो मैं मम्मी को क्या क्या बताउंगी तुम्हे समझ भी नहीं आएगा और बे मतलब में बदनाम हो जायेगा.दोस्तों उसके बाद वो मझसे बिना कंडोम के ही चुदवाने लगी. कहती है की कंडोम में मजा नहीं आता है. दोस्तों अब मैं क्या बताऊँ आपको मुझे डर है की कही वो प्रेग्नेंट ना हो जाये, अब मैं रोज रोज अपने बहन को चोदता हु और वो मुझसे खूब मजे लेती है अलग अलग पोजीशन में.

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मैं झड़ गयी

मैं भारी पूरी जवान हो चुकी थी. सभी लोग ड्रिंक्स ले रहे थे, मैने भी एक बियर लिट ही हालाँकि मुझे पीना पसंद नही है पर सबका साथ देना था. वैसे भी मुझे बोहोट जल्दी चढ़ जाती है. मेरी बुआ की ननंद का बेटा जो की मुझसे करीब 10 साल बड़ा है, भी वहाँ था. वो मर्चेंट नेवी मे काम करते है. उनकी हाइट 5.10” थी और बोहोट गातीला बदन था. उन्होने मुझे करीब 6 साल बाद देखा था, मैने एक नूडल स्ट्रॅप टॉप पहना था स्कर्ट के साथ जो की मेरे बूब्स को पूरी तरह दिखा रहा था. वो काफ़ी देर से मुझे चोर नज़रो से देख रहे थे,मैने धीर्रे से पूछा क्या देख रहे हो भैया पहचाना नही क्या? वो चौक गये, बोले शारी तू कितनी बड़ी हो गयी है पहचान ही नही आती. हमारी बातो का सिलसिला निकल चला था. शोर के कारण हम एक दूसरे के बोहोट कर्रेब हो कर बात कर रहे थे. अपनी लंबाई का फयडा उठा कर वो मेरे बूब्स को बड़ी आराम से देख पा रहे थे. हम दोनो एक दूसरे की तरफ होकर बैठे थे और हमारे चेहरे बोहोट करीब थे , इतने करीब की मैं उनकी साँसे महसूस कर सकती थी. वो बातो बातो मे मुजसे बिल्कुल सात कर बैठ गये और अपना एक हाथ मे कंधे पर रख लिया.

वो मुझे धीरे धीरे अपनी तरफ खीच रहे थे. तेज़ बजता म्यूज़िक, धीमी रोशनी और कुछ शराब का असर, हम सब कुछ भूलते जा रहे थे. मेरे हाथ उनकी थाइस पे थे और उनका हाथ मेरे कंधे से होकर अब मेरे बूब्स के करीब था. मैने अपना सर उनके कंधे पर यू रखा की हमारे हूँठ एक दूसरे के बिल्कुल करीब हो गये. मुझपर बियर से ज़्यादा भैया का नशा छा रहा था. उन्होने मेरे माथे पे एक किस करते हुए मेरे बूब्स हल्के से दबा दिए.मैने चिहुनकते हुए कहा भैया यहाँ कोई देख लेगा. ये सुनकर वो मुस्कुरा दिए और कहा की यहाँ नही तो और कहाँ? मैने सरक कर खुद को उनसे लिप्ताते हुए उनके कानो मे कहा आप बस जल्दी से यहाँ से निकालने का प्लान बनाओ. वो कहने लगे बोहोट बदमाश हो गयी है तू शारी, और मेरे गालो पे किस कर दिया. मैं मस्ती मे इतरते हुए उन्हे डॅन्स फ्लोर पे ले गयी, स्लो म्यूज़िक तो नई था पर हम क्लोज़ डॅन्स कर रहे थे. वो मेरी पीठ से लग के खड़े थे और उनके हाथ मेरे शरीर पर रेंग रहे थे. मैने उनसे चिपकते हुए अपनी गंद उनके खड़े लंड पे टीका दी.ऐसा लग रहा था की उनका लंड पंत फाड़ के बाहर आ जाएगा. उन्होने मेरी कमर मे हाथ डालकर कासके पकड़ लिया और अपना लंड मेरी गंद पे रगड़ने लगे. धीरे धीरे उनका एक हाथ मेरे बूब्स मसालने लगा. मैं इतनी गर्म हो चुकी थी वहीं सबके सामने उनका लंड अपनी छूट मे पिलवा लेती. मैने अपनी गंद ज़ोरो से उनके लंड पे रगड़नी शुरू कर दी और धीरे से एक हाथ उनके लंड पे फेरने लगी, उन्होने कस के मेरे बूब्स मसालने शुरू कर दिए. मैं समझ गयी की वो भी छोड़ने को मचल रहे हैं. उनका एक हाथ मेरे बूब्स और दूसरा मेरे पंत के उपर से छूट से खेल रहा था. अंधेरे के कारण कोई ह्यूम देख नही पा रहा था. उन्होने मुझे अपनी तरफ पलटा कर कहा- अब और नही रुक सकता शारी, कहीं चल नही तो यहीं कुछ कर दूँगा. मैने मस्ती मे अपने हाथ उनकी गार्डेन मे डाल कर कहा-ना मेरे प्यारे भैया, यहाँ नही बुआ के घर मिलो 15 मीं मे. और अपने होंठ उनके होंठो से लगा के बिना किस किए हट गयी. मैं पागल सी हुई जा रही थी और उनका भी यही हाल था.मेरी छूट से तो पानी राइज़ जर रहा था, मुझे डार्ट हा कहीं पंत के उपर से दिखने ना लगे. मैं धीरे से मौका देख कर वहाँ से बुआ के घर आ गयी, जो की होटेल के पास ही था. वहाँ पे मैं और मेरी एक कज़िन एक ही कमरे को शेर करते थे, पर सब लोग होटेल मे थे इसलिए किसी को पता चलने का दर ही नही था. घर पोोचते ही मैने भैया को पीयेच कर दिया की वो सीधे उपर वेल गेस्ट रूम मे आ जाए. उनके आने के पहले मे रूम मे धीमी रोशनी कर दी और जल्दी से अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ एक गांजी पहें ली. तभी दरवाज़ा खुला, भैया थे.

मैं दरवाज़े के पीछे छुपी थी, उनके आते ही पीछे से आके मैने उनके लंड को रगड़ना शुरू कर दिया. वो मुझे खीच के बेड पे ले गये. मुझे ऐसे गांजी मे देख के पागल हुए जा रहे थे. मेरे बूब्स पे टूट पड़े, उन्हे दबाते, उन्हे चूस्ते, उन्हे काटते जा रहे थे.. इतना मज़ा तो कभी नही आया मुझे.. मैने धीरे से उनकी शर्ट निकल दी और उन्होने मुझे गांजी से आज़ाद कर दिया.. भाई का एक हाथ मेरी चिकनी चूत पे चल रहा था.वो धीरे से उसमे उंगली करने लगे.. मुझसे रहा नही जा रहा था, मैं उछाल उछाल के उंगली से ही छुड़वाने लगी. वो मेरे निपल्स पर काट रहे थे और मुझे उंगली से छोड़ रहे थे. थोड़ी देर मे ही मेरा पानी छ्छूट गया, मैने उन्हे बेड पे लिटाया और उनकी जीन्स निकल दी. उनके उपर बैठ के मैं उन्हे पागलो की तरफ चूम रही थे. होंठो पे, गले पे, चेस्ट पे, नाभि पे और फिर अंडरवेर के उपर से ही मैने उनके लंड को धीरे से काट लिया.उन्होने झट से लंड निकल के मेरे मूह मे एक मोटी सी धार छ्चोड़ दी. वो भी झाड़ गये थे. पर उनका लंड अभी भी कड़क था. मैने उसे मूह मे लेके चूसना शुरू किया. कभी जीभ से छत लेती, कभी उसे गले तक अंदर ले जाती, कभी टोपे को कस के चुस्ती, तो कभी अंदो को चुस्ती. थोड़ी देर मे ही वो फिर तनटना गया. उन्होने कहा अब चढ़ भी जा. मैने उनके बात सुनके उसे अपनी छूट पे रखा और टोपे को अपने दाने पे रगड़ने लगी.आप ये चुदाई रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
भाई ने मेरा हाथ हटा के अपने 7इंच ले लंड को एक झटके मे मेरी छूट मे घुसा दिया. फिर तो मैने उचक उचक के छुड़वाना शुरू कर दिया. मैने उन्हे बैठा लिया ताकि लंड छूट के अंदर तक जाए, मुझे ऐसे चूड़ने मे बड़ा मज़ा आता है. वो मेरे बूब्स चूसे जा रहे थे और मैं हिल हिल के चुड रही थी. थोड़ी देर मे उन्होने मुझे नीचे लिटाया और मेरे छूट को छोड़ना शुरू कर दिया… मैं मस्ती ना जाने क्या क्या बक रही थी.भैया और ज़ोर से छोड़ो, फाड़ तो मेरी छूट, मेरी छूट का भोसड़ा बना दो.. आआहह… कितना प्यारा लॉडा है तुम्हारा… और ज़ोर से… अंदर तक छोड़ो… आअहह….. ज़ोर से मारो… और ज़ोर से… अपनी बहें को अननी रंडी बना लो.. जी भर के छोड़ो… आआहह….वो पूरी ताक़त से अपना लंड मेरी छूट मे मार रहे थे. मैने झड़ने वाली थी. मैने कहा छोड़ो मैं झड़ने वाली हूँ.. और छोड़ो मेरे भैया.. अपनी बहें को झाड़ दो मेरे भैया.. छोड़ो.. आअहह….. और मैं झड़ गयी..मैं उठकर घुटनो के बाल हो गयी. वो मुझे पीछे से कुत्ते की तरह छोड़ रहे थे.. अपने भी खड़ने वेल थे, कहने लगे ले कुटिया बन के अपने भाई का लंड ले.. सारा अपनी छूट मे ले ले… आअहह… तेरी छूट तो अब मैं रोज़ छोड़ूँगा… ले ले सारा पानी…उन्होने सारा माल मेरी पीठ पे निकल दिया. और वहीं पस्त हो के लेट गये.थोड़ी देर लेटने के बाद कपड़े पहेने और जाने लगे. मुझे एक बड़ी सी किस देते हुए मेरे बूब्स मसल कर कहा. मैं अपने दोस्त के फ्लॅट पे रुका हूँ वो बाहर गया है. कल वहीं मिलेंगे. अब तो तेरी गंद भी मारूँगा. मैने मिलने का वाडा करके विदा ली.अगर 

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