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मेरी गांड बड़ी होने की वजह

मेरा नाम निशु तिवारी है और मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली हूँ. मेरा रंग दूध सा गोरा है. मेरी उम्र 41 साल की है.
मेरी चुचियाँ 38-E नाप की हैं, जबकि मेरी कमर 30 की … और गांड 40 इंच की है.
मैं एक वर्किंग वूमेन हूँ और एक स्कूल में इंग्लिश की टीचर हूँ.

अभी भी मेरी जवानी मस्त हिलोरें मारती है. मेरे अंदर औरत की चुदाई की तमन्ना उफान पर है.

मैं अक्सर झीने कपड़े वाली साड़ी पहनती हूँ. इसके साथ मैं जो ब्लाउज पहनती हूँ, वो काफ़ी गहरे गले का रहता है.
मेरा ब्लाउज आगे से और पीछे से दोनों तरफ से काफी खुला सा रहता है, जिसमें मेरे मम्मे अच्छे ख़ासे दिखते हैं और सभी को कामुकता से भर देते हैं.

इस गहरे गले वाले ब्लाउज से मेरे मम्मों की क्लीवेज बड़ी ही दिलकश दिखती है. चूंकि मेरा ब्लाउज स्लीवलैस रहता है, तो ये और भी ज्यादा कामुकता बिखेरता है.

मैं साड़ी भी नाभि के नीचे बांधती हूँ, जिससे मेरी नाभि और पूरा पेट एकदम साफ दिखता है. मतलब ये कि साड़ी ब्लाउज पहनने से मेरे बदन का कमर तक का ज्यादातर हिस्सा साफ़ दिखता है.

मेरी गांड बड़ी होने की वजह से जब मैं कमर मटका कर चलती हूँ … तो पीछे से मैं और भी ज़्यादा सेक्सी दिखती हूँ.
जो भी मुझे एक बार मेरी इस हिलती हुई गांड को देख लेता है, तो बस देखते ही रह जाता है.

आज से 3-4 साल पहले मेरे पति का निधन हार्टअटैक से हो गया था. मेरी एक ही बेटी आरुषि है, जो तब जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी.

पति के गुज़र जाने के बाद शुरुआत के कुछ साल मेरे और मेरी बेटी के लिए बहुत मुश्किल के थे. हम दोनों इनकी मौत के सदमे से उभर भी नहीं पाए थे कि हमको पैसों की दिक्कत आने लगी थी. जिसके लिए मैंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया.

मैंने अपने इस काम की बदौलत एक साल पहले मेरी बेटी की शादी कर दी थी. ये सब मैंने अकेले के बल पर किया था और मैं अब अकेली ही अपना पेट पाल रही हूँ.

कुछ साल पति का सदमा. फिर घर और बेटी की ज़िम्मेदारी और उसकी शादी की. जिस वजह से मुझे कभी अपने लिए टाइम ही नहीं मिला.

लेकिन अब मुझे ये अकेलापन खाए जा रहा था. मैं रोज़ रात को अश्लील पिक्चर और अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ कर अपनी चूत में उंगली करके अपने आपको दिलासा दे रही थी.
लेकिन अब मुझसे ये झूठी सांत्वना चूत को रास नहीं आ रही थी.
अब मेरी चूत को एक असली लंड और एक मर्द की ज़रूरत थी.

मेरी चार पक्की सहेलियां हैं, जिनमें से एक का नाम आबिया है. वो भी मेरी ही उम्र की है.
दूसरी का नाम अनामिका ये 37 साल की है और तीसरी सुमेधा, जो 40 साल की और चौथी ममता है. ये 34 साल की है.

ये सब भी मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ाती हैं. इन सबसे मैं हर तरह की बात कर लेती हूं.

चूंकि इन सबके पति ढीले पोले हैं, इसलिए ये सब पैसे देकर लड़के बुलाती हैं और उनसे चुदवा कर अपनी भूख शांत करवा लेती हैं.

लेकिन अब इनका ये खेल बंद हो गया है क्योंकि जिस जगह से वो सब लड़के आते थे, उस पर एक दिन छापा पड़ गया था. तो अब ये सब भी मेरी तरह तड़पती रहती हैं.

एक दिन जब मैं अपने स्कूल से अपनी सहेलियों के साथ निकली, तो वो सब दूसरी तरफ को जाने लगीं. सड़क पर ट्रेफिक ज्यादा था तो वो सब सड़क के पार जाने के लिए कुछ पल रुक कर बात करने लगीं.

मैं रोड के इसी तरफ रुककर किसी ऑटो के रुकने का इंतजार करने लगी.

मैं ऑटो के इंतजार में थी और उसी समय मैंने देख लिया था कि सड़क की दूसरी तरफ एक 19 या 20 साल का बहुत स्मार्ट सा लड़का खड़ा था.

ममता ने मुझे इशारा करके दिखाया और बोली- काश ये लड़का मिल जाता, तो इसको अपनी सारी जवानी दे देती.

तब तक आबिया बोली- अबे यार, अब तुम जवान ही कहां रही हो.
इस पर सुमेधा बोली- अरे यार, अभी भी हम सब किसी 21-22 साल की लड़की से कम नहीं हैं, बस कोई मिले तो.

इतने में सड़क पर कुछ ट्रेफिक कम हुआ और मेरी सारी सहेलियां सड़क पार करके चली गईं.
तभी वो लड़का मेरी तरफ आ गया. शायद वो भी ऑटो लेने के लिए इस तरफ आ गया था.

मेरे साथ अब वो भी ऑटो का ही इंतज़ार कर रहा था. मैं वहां से उसी लड़के के बाजू में आकर खड़ी हो गयी.

कुछ देर बाद एक खाली ऑटो हमारे करीब रुकी, तो पहले मैं उसमें जाकर एक किनारे बैठ गयी और वो लड़का भी मेरी तरफ वाली सीट पर बैठ गया.
ये ऑटो छह सवारी वाली ऑटो थी.

जब ऑटो आगे चली, तो धीरे धीरे उसमें मेरे बीच में दो सवारी और आ गईं. उसमें से एक सवारी हमारी सीट पर बैठ गई और एक सामने वाली सीट पर बैठ गई. इस तरह आखिरकार वो लड़का मेरे ही बगल में को हो गया और सामने वाली सीट भर गई थी. अब मैं भी बस यही प्रार्थना कर रही थी कि इस तरफ भी कोई और आ जाए तो ये लड़का बिल्कुल मेरे पास आ जाएगा.

शायद ऊपर वाले ने मेरी ये बात सुन ली और तभी एक बूढ़ी और बहुत मोटी सी औरत चढ़ी, तो ऑटो वाला मुझसे बोला- आप ज़रा साइड हो जाइए, सवारी बैठने दीजिए.

मैं जानबूझकर और दब गई और वो लड़का भी अब एकदम मेरे बदन से सट गया.

जैसे ही वो औरत बैठी तो उसने और जगह ले ली. इससे उस लड़के मेरे सिर के पीछे से हाथ निकाल कर रख लिया और एकदम मेरे से लग कर बैठ गया.

ऑटो चली, तो कुछ देर बाद जब झटका लगा. इस झटके से उस लड़के का हाथ मेरी खुली हुई बांह पर लग गया. मुझे बड़ा अच्छा लगा.

फिर अगले झटके पर मैंने जानबूझ कर अपना हाथ थोड़ा उसके हाथ की तरफ कर दिया.
उसने भी मेरे हाथ से अपना हाथ सटा लिया.

इससे मुझे लगा कि ये लड़का शायद मेरे साथ कुछ करना चाह रहा है.

मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उठा लिया और सामने की खिड़की के पाइप को पकड़ लिया. इससे मेरी साड़ी का खुला हिस्सा उसके हाथ की तरफ आ गया था.

तीसरे झटके में उसका हाथ पहले मेरे बगल में पेट पर छुआ.
जब मैंने कोई विरोध नहीं किया, तो उसने अपना हाथ और अन्दर ले जाकर मेरी चुचियों से टकरा दिया.
उसका हाथ मेरी चूचियों से लगा तो मुझे भी मज़ा आने लगा.

इसी तरह वो अब हर झटके का फायदा ले रहा था और मेरी चूचियों से खेल रहा था.

कुछ देर तक चलने के बाद एक औरत और चढ़ी, तो ऑटो में जगह नहीं बची थी. ऑटो वाले ने उस लड़के को आगे बुला लिया, तो उसने अपना किराया वहीं दे दिया और मुझे देखने लगा.

एकाएक उसने मुझे ऑटो से उतरने का इशारा किया, तो मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूं.

ऑटो आगे बढ़ी, तो मैंने हल्का सा पीछे मुड़ कर देखा … तो वो मुझे बुला रहा था. मगर ऑटो आगे बढ़ गयी थी.

मगर कुछ दूर जाने के बाद मुझे लगा कि मुझे उतर जाना चाहिए था. शायद ये मेरा अच्छा मौका था, जो मैंने गंवा दिया.

मैंने तुरंत ऑटो रुकवाया और उसको पैसा देकर फिर उसी तरफ जाने वाली एक ऑटो पकड़ ली.

मैं उधर उतर गई, जिधर वो लड़का उतरा था. मैं उस लड़के को ढूँढते हुई जा रही थी कि कुछ दूर पर वो लड़का मुझे दिख गया.

उसने भी मुझे देख लिया था. वो लड़का हांफते हुए मेरे पास आया और बोला- मुझे तो लगा कि आप नहीं रुकोगी.
मैंने उससे पूछा- बताओ क्या काम है, जिसके लिए तुम मुझे बुला रहे थे?

लड़का- मुझे आपका नंबर चाहिए.
मैं- क्यों क्या काम है?

लड़का- क्योंकि आप मुझे अच्छी लगी इसी लिए.
मैं- अरे तुमको नहीं पता, मैं शादी शुदा हूँ और मेरी और तुम्हारी उम्र देखी है … पागल हो क्या तुम?

लड़का- अब देखो आप मुझे अच्छी लगीं, तो मैंने आपको बोल दिया. बस अब इसमें उम्र और इतना नहीं मतलब होता है.
इस वक्त हम दोनों जहां खड़े थे, उसी के पीछे एक गली थी.

मैंने उससे बोला कि तुम इस गली में आ जाओ, इसमें बात करते हैं.

शुरुआत में वो मुझे मक्खन लगाए जा रहा था और मैं भाव खा रही थी.

कुछ देर बाद वो बोला- ठीक है, आप मुझे आप अच्छी लगी थीं … लेकिन शायद मैं आपको अच्छा नहीं लगा. तो छोड़ो जाने दो, अब मैं जाता हूं.

इतना बोल कर वो जाने लगा, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको रोका.
वो मुस्कुराने लगा.

मैंने उससे बोला- देखो मुझे भी तुम अच्छे लगे और पसंद हो, लेकिन हम दोनों की उम्र इस तरह की नहीं है कि हम ये सब करें.

वो मेरे थोड़ा पास आया और उसने मेरी नंगी कमर पर पीछे से हाथ डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा और बोला- जब पसंद हूँ … तब बात करने में क्या दिक्कत है.

मैंने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम सत्यम बताया.

वो एक जवान लड़का था और अभी मैंने उसको अपना नाम नहीं बताया था. बस उस लड़के से मैं नंबर लेकर चली आयी.

दो दिन तक मुझे उसी का ख्याल आता रहा. मैंने अपने आपको बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन उसको मैंने मैसेज कर दिया और उसने मुझे तुरंत पहचान लिया.

इसके बाद हमारी थोड़ी बहुत बात हुई, तो मैंने उससे उसकी कुछ फोटो मांग लीं.
लेकिन उसको अपनी फोटो अभी नहीं दी.

उस दिन रात में मैं उसी की फ़ोटो के सामने नंगी होकर अपनी चूत में उंगली की, तो आज मुझे एक अलग ही मज़ा मिला.

फिर कुछ दिनों तक मेरी उससे ऐसे ही बात चलती रही. वह एक 19 साल का लड़का था, जो कॉलेज में पढ़ता था.

इसी तरह बात करते हुए एक दिन उसने कहा कि मुझे तुमको देखने का बहुत मन कर रहा है.
मैंने बोला- ठीक है, उस दिन जिस गली में हम मिले थे … उसी गली में मिल लिया जाए!

उसने कहा- उस गली के आगे एक छोटा गार्डन है, जहां कोई आता जाता नहीं है. वहीं चला जाए और कुछ देर बैठ कर बात की जाए.
उसकी बात पर मैं भी राजी हो गई.

दो दिन के बाद वह अपने कॉलेज से जल्दी निकल आया और मेरी छुट्टी होने के बाद हम दोनों साथ में ऑटो से बैठ कर आए.
आज वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे चिपककर बैठा था और मेरी बांहों को सहला रहा था.

मैंने उसे रोका और उसका हाथ हटा दिया. यदि मैं नहीं हटाती तो शायद वो मेरी चूचियों को ही मसलना शुरू कर देता.

उस जगह पहुंचने के बाद हम दोनों उतरे और उसी गली से होकर उस गार्डन में आ गए. वो बहुत सुनसान इलाका था एकदम सन्नाटा था, वहां कोई आता जाता नहीं था.

उस गार्डन का दरवाजा बंद था, जिसको सत्यम ने खोला और मुझे अन्दर करके उसमें कुंडी लगा दी. हम दोनों एक पेड़ की आड़ में पत्थर पर बैठ गए.

वह मुझसे प्यार भरी बातें कर रहा था और मेरा हाल चाल पूछ रहा था. एकाएक बात करते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, जिससे मुझे भी अन्दर अन्दर गुदगुदी होने लगी, लेकिन मैंने सत्यम को यह चीज पता नहीं चलने दी.

फिर कुछ देर के बाद जब मैं जाने लगी तो सत्यम बोला- एक बार गले तो लगा लो.
मैंने हंस कर उसको गले से लगा लिया.

इससे मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां उसके सीने से चिपक गईं. उसने भी अपना हाथ पीछे करके मुझे पीठ और कमर से कसके जकड़ लिया.
इससे मुझे एक अलग ही सुरूर चढ़ने लगा तो मैंने अपना चेहरा उठा दिया.

उसका मुँह मेरे ही सामने था. मैंने अपने आपको बहुत रोका … लेकिन मेरे होंठ उसके होंठ पर छू गए और बिना रुके मैं उसके नर्म नाजुक गुलाबी होंठों को चूसने लगी.
वह भी मेरा बराबरी से साथ देने लगा. कुछ देर एक दूसरे को चूमने के बाद मैं उससे अलग हुई और घर चली आई.

आज उस लड़के के साथ जो हुआ था, उससे मेरे मन को बहुत प्रसन्नता मिली थी. अब हम दोनों खुली खुली बात करने लगे.

फिर एक दिन मेरी सहेली से मैंने अपनी यह बात बताई, तो वह बोली- निशु, तू तो बड़ी हरामी निकली. इतने दिनों से अकेले अकेले मजा ले रही थी और हम सबको आज बता रही हो.

उन लोगों ने मेरे मोबाइल पर उसकी फोटो देखी और सबने अपने अपने नंबर पर उसकी डिटेल ले ली.

तभी ममता बोली- क्या उसके साथ खाली चुम्मा चाटी ही करती रहोगी या आगे भी कुछ करोगी?
मैं बोली- यार तुम सब तो इस खेल में खिलाड़ी हो. मैं अभी इस खेल में नहीं हूं. मैंने उस लड़के को अभी अपना नाम तक नहीं बताया, मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं वह लड़का ऐसा वैसा ना निकले. कहीं मेरी पूरे समाज में बदनामी न हो जाए.

तब तक अनामिका बोल पड़ी- क्या तू पागल है? अगर ऐसा वैसा लड़का होता, तो इतनी बार मिलने पर तेरी चूचियां दबा देता. लेकिन उसने अब तक ऐसा कुछ नहीं किया. इसका मतलब वह लड़का ऐसा वैसा नहीं है. एक 19 साल का जवान लड़का तुझे मिला है यानि कि अभी उसकी पूरी जवानी तेरी है. तू जिस तरह चाहे, उसको अपने लिए इस्तेमाल कर सकती है. तू समझ ले कि तुझे एक चिकना लौंडा मिला है. तू उस पर जितना हाथ फ़ेरेगी, वह उतना ही तेरे लिए होता जाएगा. फिर तू तो घर पर अकेली ही रहती है, ले जा किसी दिन दोपहर में उसको अपने कमरे में और चैक कर उसका सामान कैसा है और कैसी परफॉर्मेंस देता है.

इस तरह से उन लोगों ने मुझे काफी उत्तेजित कर दिया और उसी वक्त मुझे सत्यम को फोन मिलाने को बोला.

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वो मेरी चूचियों को काटते हुए चोदने लगा

हैलो, मेरा नाम रिजवाना है। मेरी उम्र 40 साल है. मैं एक शादीशुदा औरत हूं. हमारी ज्वाइंट फैमिली थी और घर में मेरे और मेरे शौहर व बेटे के अलावा मेरा जेठ, जेठानी, उसकी बेटी और बेटा भी रहते थे.
मेरी शादी के बाद से ही मेरे शौहर ज्यादातर काम की वजह से बाहर ही रहते थे।

अब मैं आपको अपने बारे में बता दूं कि मेरा रंग गोरा है. मेरा साइज 38-32-36 का है.

बच्चा होने के बाद मेरे शौहर मुझे वो मजा नहीं दे रहे थे जो पहले दिया करते थे. अब उनको भी मेरी चूत में कम मजा आने लगा था. वो चुदाई भी कम करने लगे थे. मैं अब अक्सर प्यासी ही रहती थी.

वैसे भी मेरे शौहर ज्यादा समय तो काम के कारण बाहर ही रहते थे. जब घर में होते तब भी ज्यादा चुदाई नहीं करते थे.

जब मेरा मन चूत में उंगली करने का करता तो मैं अपने जेठ और जेठानी की चुदाई देखा करती थी. मैं उनकी चुदाई देखकर अपनी चूत में उंगली किया करती थी.

उनकी चुदाई देखने के लिए मैं देर रात तक जागा करती थी. मेरे शौहर के मुकाबले मेरे जेठ का लंड ज्यादा लम्बा और मोटा था और उसके शरीर में ताकत भी काफी ज्यादा थी।

कई बार मैंने अपने जेठ को पटाने की कोशिश भी की थी. उसकी बीवी यानि कि मेरी जेठानी उससे बहुत खुश रहती थी. इसलिए वो मेरी तरफ ज्यादा ध्यान भी नहीं देता था.

फिर ऐसे ही वक्त गुजरने लगा और हम दोनों के बच्चे बड़े होने लगे. मेरी चूत को मैं जैसे तैसे करके शांत करती रही. कभी गाजर मूली से काम चलाती तो कभी उंगली या बेलन से।

हमारी जवानी ढलने लगी और बच्चों में जवानी आने लगी.
मेरे जेठ का बेटा अब 19 साल का हो गया था. मेरा बेटा भी उसी की उम्र का हो गया था.

मेरी चूत की आग अभी भी वैसे ही जलती रहती थी.

मेरे जेठ की जवानी भी ढल गयी थी मगर अब घर में कई जवान बच्चे हो गये थे.

एक बार की बात है कि मेरी जेठानी उसके मायके में गयी हुई थी. उसकी बेटी भी साथ में गयी थी. जबकि उसका बेटा समर घर में ही था. वो मुझे चाची कहता था.
इधर मेरा बेटा अपने पिता के साथ ही कुछ दिन के लिए बाहर चला गया था.

मेरा जेठ सुबह जाता था और शाम को घर लौटता था. घर में मैं और समर ही रहते थे. मैं ही उसके लिए खाना बनाती थी. उसके कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं.

समर की आदत थी कि वो अक्सर वो जब नहाने के लिए जाता था तो तौलिया भूल जाता था. फिर वो अपनी अम्मी को आवाज लगाता था.

उस दिन भी ऐसा ही हुआ।
वो नहाने गया लेकिन तौलिया नहीं ले गया. उसकी अम्मी तो घर में थी नहीं तो उसने मुझे आवाज लगाई- चाची, मेरा तौलिया ला दो.

मैं उसका तौलिया लेकर गयी. उसने दरवाजा खोला और तौलिया ले लिया. उसने अपने लंड के सामने अपनी लोअर लगा रखी थी.
जैसे ही वो दरवाजा बंद करने लगा तो उसकी लोअर हाथ से छूटकर गिर गयी.

मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी तो वहीं ठहर गयी. उसका लंड बहुत ही लम्बा और मोटा था जो किसी खीरे की तरह उसकी जांघों के बीच में लटक रहा था.

मुझे वो लंड देखते ही ये सोचते देर न लगी कि इसका लंड तो इसके बाप से भी ज्यादा आगे निकल गया है.
मेरे जेठ का लंड भी बहुत मोटा-लम्बा था. मगर समर का लंड तो अभी से इतना लम्बा और मोटा हो गया था.

मैं वहीं पर ठिठक सी गयी और नजर वहां से हटी ही नहीं.
समर अपने लंड को तौलिया से ढकते हुए बोला- चाची जाइये. मैंने तौलिया ले लिया है.

उसने जब मेरा नाम लिया तो मुझे होश सा आया और मैं वहां से आ गयी.
मगर अब मेरी चूत में जबरदस्त खुजली होने लगी थी.

जेठानी का जवान बेटा घर में अकेला था. उसकी जवानी भी चुदाई के लिए तड़प रही होगी. उसको भी चूत चोदने की ललक मची होगी … क्यों न मैं अपनी चूत की प्यास उसी के लंड से ही बुझा लूं?

अब मेरे दिमाग में हर वक्त समर का लंड ही घूम रहा था. उसका मोटा लम्बा बैंगन जैसा लंड मैंने देख लिया था और मुझे अब किसी भी वक्त चैन नहीं था. मैं बस उसके लंड को अपनी चूत में चखना चाह रही थी.

अब मैंने समर को चेक करने का सोचा कि देखती हूं कि ये क्या सोचता है मेरे बारे में?

जब मैं नहाने के लिए गयी तो मैं जानबूझकर अपने कपड़े वहीं बाहर ही छोड़ गयी.

नहाने के बाद मैंने उसे आवाज लगाई.
फिर वो मेरे कपड़े लेकर आ गया.

मैंने उससे नये कपड़े ले लिये पर अपने उतारे हुए कपड़े उसे दे दिये, कहा कि वाशिंग मशीन में डाल दे.
मेरे पुराने पहने हुए कपड़ों में मेरी ब्रा और पैंटी भी थी.
मैंने जानबूझकर उसको वो पैंटी और ब्रा दी थी.

फिर मैंने उसके सामने दरवाजा बंद कर लिया मगर अंदर से लॉक नहीं किया.
मैं जाते हुए चुपके से उसको देखने लगी.

वो मेरी ब्रा और पैंटी को सूंघता हुआ जा रहा था और अपने लंड को सहला रहा था.
मुझे पता चल गया कि वो भी चूत के लिए प्यासा है. अब मेरा काम बहुत आसान था.

उस दिन तो मुझे फिर मौका नहीं मिला लेकिन उसने अपना मौका नहीं छोड़ा.
बाद में मैंने देखा कि मशीन में पड़ी उस पैंटी पर उसके लंड का माल लगा हुआ था और उसके लंड के माल की खुशबू भी आ रही थी उसमें से!

फिर अगले दिन मैंने वही किया.
मैं जानबूझकर अपने कपड़े भूल गयी. कुछ देर बाद मैंने दरवाजा खोल दिया. मैंने आधा दरवाजा खोला था ताकि उसको ये लगे कि दरवाजा अपने आप ही हल्का सा खुल गया है.
मैंने समर को मेरे कपड़े लाने के लिए कहा.

मैं अपनी गांड को उसकी ओर करके नहाने लगी. मैं जानती थी कि बाहर से वो मुझे देख सकता था. मैं नहाती रही और वो कुछ नहीं बोला.

फिर मैं अचानक से उसकी तरफ घूमी तो वो दूसरी ओर घूम गया और एकदम से बोला- चाची … ये … ये आपके कपड़े लीजिये.
मैंने दरवाजा ढालकर मुस्कराकर कपड़े उसके हाथ से ले लिये. मैंने उसको अपनी गांड के दर्शन करवा दिये थे और उसने वो पूरा नजारा लिया.

अगले दिन तकरीबन 10 बजे वो उठकर चाय पी रहा था। तब मैं उसके सामने झुक झुककर झाड़ू पौंछा लगा रही थी.
मैंने देखा कि वो घूर घूरकर मेरे चूचों को देख रहा था.

तो मैंने उससे कहा- समर, मुझे आजकल रात में डरावने सपने आते हैं. मैं अकेली हूं और डर जाती हूं. अपने पापा से बोलकर तुम आज मेरे रूम में ही सो जाना. नहीं तो मैं रातभर जागती रहूंगी.

वो बोला- ठीक है चाची. मैं सो जाऊंगा.
अब मेरा काम हो गया था. आज मैं किसी भी हाल में रात को उसका लंड अपनी चूत में लेने वाली थी.

फिर वो रात को शॉर्ट्स पहन कर मेरे रूम में आया.
वो पूछने लगा- मैं कहां सोऊंगा?
मैं बोली- मेरे बेड पर ही सो जाना. तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो. तुम्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए मेरे साथ एक ही बेड पर सोने में?

वो बोला- हां, बिल्कुल चाची, मुझे क्या तकलीफ हो सकती है. मैं सो जाऊंगा इसी बेड पर।

मैं कपड़े चेंज करने के लिए बाथरूम में चली गई.
मुझे पता था कि समर को लाल रंग बहुत अच्छा लगता है इसलिए मैंने लाल रंग की ब्रा-पैंटी और मैक्सी पहनी।

जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो वो मुझे देखता रह गया।

फिर मैं उसके पास जाकर बैठ गयी. वो टीवी देख रहा था. मैं भी टीवी देखने लगी.

मैं बीच बीच में उसके साथ बातें करने लगी. मैंने पूछा- समर कोई लड़की है तुम्हारी जिन्दगी में?
वो बोला- नहीं चाची, मेरी जिन्दगी में तो अभी कोई नहीं है.
ये कहते हुए भी उसकी नजर मेरे चूचों पर ही जा रही थी.

मैंने अपने चूचों को उसके सामने ही हाथों से एडजस्ट किया.
ऐसा करते ही उसने मेरे चूचों से नजर हटा ली.
मैं बोली- अरे शर्मा क्यों रहा है तू … अगर मन कर रहा है तो देख ले. मैं एक औरत हूं और तू एक जवान मर्द है … ये सब तो आम सी बात है.

वो शर्मा गया. फिर मैं उसके पास आकर बैठ गयी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगी.
मैं बोली- अगर तेरे दिल में कुछ बात है तो तू मुझसे बेझिझक कह सकता है. मैं किसी को नहीं कहूंगी. मुझे तू अपनी दोस्त ही मान ले.

इस पर भी वो कुछ नहीं बोला.
मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में लिये हुए ही अपना हाथ उसके शॉर्ट्स के ऊपर उसके लंड की जगह पर टिका दिया और मेरा हाथ ठीक उसके लंड पर जा टिका.

कुछ ही पलों के अंदर उसके लंड में आ रहा तनाव मुझे अपने हाथ पर महसूस होने लगा.
देखते ही देखते उसका लंड नीचे ही नीचे तन गया और मेरे हाथ पर दबाव बढ़ाने लगा.

उसकी सांसें तेज हो गयी थीं. वो अपने तनाव को रोक नहीं पा रहा था क्योंकि मेरी चूचियों की घाटी भी उसके सामने ही खुली हुई थी.
मैं बोली- तेरा मन कर रहा है ना?
वो कुछ नहीं बोल पा रहा था.

फिर मैंने उसका लंड अपने हाथ में उसके शॉर्ट्स के ऊपर से पकड़ लिया. उसका लंड हाथ में लेते ही मेरी चूत में तो खलबली मच गयी. इतना मोटा ताजा लंड था और वो भी एक 19 साल के जवान लड़के का।

मैं उसके लंड को सहलाने लगी और बोली- मुझे पता है तू मुझे चाहता है. तू शर्मा मत. कल मैंने तुझे मेरी पैंटी को सूँघते हुए देख लिया था.
उसने हैरानी से मेरी तरफ देखा और फिर मैं उसके करीब सरक गयी.

उसके दोनों हाथों को मैंने अपनी कमर पर लपेटा और उसकी गोद में जाकर उसके होंठों पर होंठों रखकर उसे किस करने लगी.
पहले तो उसने साथ नहीं दिया और शर्माता रहा.

फिर मैंने उसके हाथ अपने चूचों पर रखवा दिये और धीरे धीरे वो उनको दबाने लगा. अब उसके होंठ भी खुल गये और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे. वो मेरे पूरे बदन पर हाथ फिरा रहा था और मैंने उसके शॉर्ट्स में हाथ डालकर उसके लंड को पकड़ लिया था.

अब मैंने अपनी मैक्सी खोल दी. मैं उसके सामने लाल ब्रा पैंटी में थी.

वो मेरी चूचियों पर टूट पड़ा. नया नया जवान हुआ था और उससे इंतजार नहीं हो रहा था.

फिर उसने मेरी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाया. मेरी चूत को हाथ से सहलाया.
मेरी चूत पहले से ही गीली होना शुरू हो गयी थी.

फिर मैंने अपनी ब्रा उतार डाली. अब वो मेरे मम्मों को चूसने लगा बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह। बीच बीच में वो निप्पलों को काट भी लेता था।

तब हम दोनों पूरे नंगे हो गए। मैं उसका लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी।

वो बोला- मुंह में नहीं लोगी मेरी जान … मुंह में ले लो ना … एक बार इसको अपने मुंह की गर्मी दे दो. आज तक मैंने किसी के मुंह में लंड नहीं दिया है.

मैं बोली- ये तो है ही चूसने लायक. इसको कौन नहीं चूसना चाहेगी. ऐसा मोटा ताजा रसीला लंड बहुत ही कम मर्दों के पास होता है. तुम उन्हीं में से एक हो।

ये कहते ही मैं उसके लंड पर झुक गयी और उसके लंड को मुंह में पूरा भरकर चूसने लगी.
मैंने अपने शौहर का लंड बहुत चूसा था लेकिन कभी इतना बड़ा लंड मुंह में नहीं लिया था.

समर का लंड मेरे मुंह में समा भी नहीं रहा था. मैं उसे मुंह में लेने लगी. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
वो मेरे बाल पकड़ कर लंड को धकेलने लगा.
मैं पूरा लंड गले तक लेने की खुद ही कोशिश कर रही थी.

मगर समर को अभी भी चैन नहीं था; वो मेरे बालों को खींचते हुए पूरे लंड को अंदर धकेल देना चाहता जबकि उसका लंड पहले ही मेरे गले में जाकर फंसा हुआ था.

दम मिनट तक किसी तरह मैंने उसका लंड चूसा और मेरी हालत खराब हो गयी. फिर उसने मुझे जोर से धक्का देकर पटक लिया.

मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि जेठ के लंड से चुदाई का सपना आज उसका बेटा पूरा करेगा. मैं जानती थी कि समर आज मेरी चूत को फाड़कर रख देगा और मैं भी यही चाहती थी.

फिर उसने मेरी टांगों को पकड़ कर फैला दिया. उसने मेरी दोनों टांगों के बीच उसका मुंह डाला और मेरी चूत को बेतहाशा चूसने और चाटने लगा.

मेरे मुंह से एकदम से सीत्कार फूट पड़े- आह्ह … आह्ह … ओह्ह … समर … मेरे बच्चे … ओह्ह … यही तो चाहती थी मैं … आह्ह … हाह्ह … हाये … ओह्ह … स्स्स … आह्ह और जोर से चूस … आह्ह … मेरी चूत की प्यास मिटा दे … आह्ह … चोद दे … फाड़ दे … आह्ह।

उसके चाटने की वजह से मेरी चूत एकदम से धधक उठी. मैंने मुश्किल से कंट्रोल किया नहीं तो उस रात मैं समर को अपनी चूत में ही घुसा लेती.
मैं बोली- बस कर … अब चोद दे … अपने मोटे लंड से मेरी चूत फाड़ दे … चोद मुझे जल्दी.

वो बोला- हां चाची, मैं आपकी चूत का भोसड़ा कर दूंगा आज!
फिर उसने मुझे कुत्तिया की तरह खड़ी कर दिया और मेरी चूत पर उसका लंड सेट करने लगा।

लंड लगाकर उसने मेरी कमर से मुझे पकड़ लिया और एक जोर का धक्का दे मारा.
उसका लंड मेरी चूत में आधा जा घुसा.

मेरी तो बांछें खिल गयीं. इतने सालों के बाद कोई दमदार लंड चूत में गया था.

फिर उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया और मैंने अपनी चूत को पूरी तरह से ढीली छोड़ दिया ताकि उसका लंड जितना हो सके मेरी चूत में आ सके.
उसने दो तीन झटकों में पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया था.

उसका लंड मुझे मेरे पेट में चोट करता हुआ अलग से महसूस हो रहा था. मेरी चूत की दीवारें चरमरा गयी थीं लेकिन ऐसा सुकून मिल रहा था जो जन्नत में भी नसीब न हो.

चूत को केवल लंड चाहिए होता है. मेरी चूत को समर का लंड मिल गया था. लंड इतना दमदार था कि मेरी चूत से खुशी के आंसू गिरने लगे थे.
मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और वो पच पच की आवाज के साथ समर के लंड से चुद रही थी.

उसने दस मिनट तक मुझे कुतिया बनाकर चोदा.
फिर उसने मुझे बेड के नीचे धकेल दिया; मुझे दीवार के साथ ले गया और मेरी एक टांग उठाकर अपनी कमर पर रखवा ली और नीचे से अपना लंड मेरी चूत में चढ़ा दिया.

नीचे ही नीचे धक्के देते हुए वो मेरी चूत में लंड को नापने लगा. मेरी चूचियां उसके हर धक्के के साथ फुटबाल की तरह उछल जाती थीं.
मेरी चूत अंदर तक तृप्त हो रही थी.

फिर वो मेरी चूचियों को काटते हुए चोदने लगा.
अब मुझसे रुका न गया और मैं झर झर झरने की तरह कामरस की धारा बहाने लगी.
मेरी चूत का रस पच पच … होती चुदाई के साथ ही मेरी जांघों पर बह निकला.

अब समर ने मुझे बेड की ओर धक्का मारा और झुकाकर पीछे से मेरी चूत में लंड दे दिया.
वो पीछे से मुझे चोदने लगा. मेरा सिर बेड से टकराते हुए धम धम कर रहा था. मगर वो मुझे चोदे जा रहा था.

उसका लंड अब मुझे चूत में बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं दर्द से कराहने लगी थी.
फिर पांच मिनट तक किसी तरह मैंने उसको बर्दाश्त किया और वो भी मेरी चूत में झड़ता हुआ मेरे ऊपर लेट गया.

इस घमासान चुदाई के बाद मेरा अंग अंग समर को दुआ दे रहा था. ऐसी चुदाई न जाने कितने सालों के बाद हुई थी.
मैं तो समर की दीवानी हो गयी.

उसके बाद हम दोनों ऐसे ही नंगे लिपट कर सो गये.

तीन चार दिनों तक जब तक कि मेरा बेटा वापस न आ गया मैं अपने जेठ के बेटे से खूब चुदी.
हम दोनों ने खूब इंजॉय किया.

फिर सबके आने के बाद भी हम स्टोर रूम में चुदाई कर लेते थे.

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मैंने उनका मोटा लंड देखा था

मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं.

मेरी हाईट 5 फीट है और फिगर 33-28-34 है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं. मेरी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी.

बीते दिसंबर की एक रात को मुझे तेज प्यास लगी. आप जानते होंगे कि सर्दी में या तो प्यास लगती नहीं और लगती है तो फिर प्यास कितनी जोर से लगती है.

ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी मैं जल्दी से उठी रसोई में जाने लगी. मेरा ध्यान ससुर के कमरे की ओर गया तो मैंने पाया कि उनके रूम की लाइट जल रही थी.
मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?

उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे.
उनका लन्ड करीब 7 इंच का था। इतना बड़ा लंड मैंने कभी किसी मर्द का नहीं देखा था.

मैं आपको उनके बारे में बता दूं कि वो उम्र में 55 साल के करीब हैं. उनकी हाइट 6 फीट है.

मेरी सास की मृत्यु बहुत समय पहले हो गयी थी. शायद इसी वजह से ससुर जी का लंड इतना बेताब लग रहा था.

वो आंखें बंद किये लगातार अपने हाथ को अपने लंड पर चला रहे थे.
ये नजारा देखकर मैं तो सन्न रह गयी.
मगर मेरी नजर भी मेरे ससुर के लंड से हट नहीं रही थी. मेरे पति का लंड उनके लंड से कम था.

उनका लंड देखकर मेरे अंदर भी चुदास सी जागने लगी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी.

फिर मैं रसोई से पानी लेकर अपने कमरे में चली गयी. अब मुझे भी लंड चाहिए था तो मैंने पति को जगाया और उनको गर्म करने की कोशिश करने लगी.

मैंने पति के लंड को ऊपर से ही सहलाया. उनका हाथ मेरी चूत पर रखवाया और सहलवाने लगी.
थोड़ी देर में उनका लंड खड़ा होने लगा. फिर मैंने उनके लंड को चूसा और चुदाई के लिए पूरा तैयार कर दिया.

पति ने मेरी चूत में लंड डाला और चोदने लगे. उनका लंड 6 इंच के करीब था. मैं चुदाई का मजा लेने लगी.

मगर दिमाग में ससुर का लंड अभी भी घूम रहा था. उनका लंड बहुत मोटा था.

पति ने मुझे पांच मिनट तक चोदा और फिर वो झड़ गये. मुझे लंड तो मिल गया लेकिन वो संतुष्टि वाली चुदाई नहीं हुई. फिर भी मैंने पति को ज्यादा नहीं कहा क्योंकि वो नींद में थे और मैं भी अब सोना चाहती थी.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पति ने कहा कि वो जॉब करने दिल्ली जाने वाले हैं.
वो कहने लगे कि पहले वो वहां पर जम लेंगे और उसके बाद मुझे भी वहीं बुला लेंगे. मैं ये सोचकर परेशान हो रही थी.

मुझे पति के बिना कैसे चुदाई का मजा मिलने वाला था. 4 जनवरी को मेरे पति दिल्ली चले गये.

उनके जाने के बाद मेरा मन सूना हो गया.
एक दो दिन तो मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर ससुर का लंड मेरे दिमाग में घूमने लगा.

मैं उनका लंड देख चुकी थी और जब से मैंने उनका मोटा लंड देखा था मैं उसको अपनी चूत में लेने का सपना भी देख रही थी.
अब मैं किसी तरह ससुर जी का लंड खड़ा करके उनको खुद चुदाई के लिए तैयार करना चाहती थी.

इसके लिए मैंने बाजार से कुछ नये कपड़े ले लिये. नाइटी, पैंटी और ब्रा के सेट लिये. सेक्सी वाली नाइट ड्रेस ली ताकि अपने बदन को दिखाकर मैं ससुर जी के लौड़े की प्यास को और ज्यादा बढा़ सकूं.

शाम को जब मैं घर आयी तो मैंने जल्दी जल्दी खाना बनाया.

ससुर जी को भूख लगी तो वो बोले- बहू खाना लगा दो.
मैंने उनको बैठने को कहा और बोली- अभी लगा देती हूं.

मैं अपनी साड़ी बदल कर आ गयी और मैंने वो नयी ड्रेस पहनी जो मैं बाजार से लायी थी.

जब मैं खाना लेकर उनके पास पहुंची तो उनकी नजर मेरे बदन पर पड़ी और वहीं पर ठहर गयी.
इससे पहले मेरे ससुर ने मुझे इतने ध्यान से नहीं देखा था.

वो लगातार मुझे देख रहे थे और मैं खुश हो रही थी कि मेरा प्लान काम कर रहा है. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे.

ससुर ने खाना खाया और फिर वो सोने के लिए चले गये.

मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरे बदन की गर्मी मुझे चैन से लेटने नहीं दे रही थी.
आज मैंने ससुर की आंखों में मेरे जिस्म के लिए हवस भी देख ली थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

मैं फिर सोचते सोचते सो गयी.

मगर उस दिन के बाद से मैं किसी न किसी तरह अपने बदन और उसके उभार दिखाकर अपने ससुर को तड़पाने लगी.
वो अब अक्सर मेरी चूचियों और मेरी गांड को ताड़ते रहते थे.

कुछ दिन बीत गये. फिर 9 जनवरी की रात आयी.
उस रात को मैंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी जो चूचियों पर से जालीदार थी. उसको देखकर तो मेरे ससुर की आंखें ही फैल गयीं. वो जैसे पागल से हुए जा रहे थे.

उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया और थोड़ा सा ही खाकर रूम में चले गये.
मैंने भी जल्दी से काम खत्म किया और सोने के लिए जाने लगी.
मगर मेरा मन बेचैन था.

आज ससुर जी बहुत उतावले थे. मैं एक बार उनकी हालत देखना चाहती थी.

इसलिए मैंने दूध गर्म किया और उनके कमरे की ओर चल दी.
मैंने अंदर देखा तो वो लंड को लगातार हिला रहे थे और बार बार कह रहे थे- चूस साली मेरे लंड को … साली नेहा … चूस इसे.

ऐसे कहते हुए वो अपने लंड की मुठ मार रहे थे.
मैं बहुत उत्तेजित हो गयी उनकी ये हालत देखकर.

उसके बाद मैंने दरवाजा खटखटाया तो वो संभल गये. उन्होंने अपना लंड अंदर पजामे में किया और ढक लिया.

मगर जब मैं अंदर गयी तो तब भी उनके पजामे में वो लंड तना हुआ ऐसे ही उछल रहा था. उनके माथे पर पसीना आ गया था.

मैंने उनके लंड की ओर देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी और शर्माते हुए गिलास को उनके बेड के पास रख दिया.

जब मैं जाने लगी तो ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- कुछ देर बैठ जा बहू.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं पापा? ये सब ठीक नहीं है.

इस बात पर उनको गुस्सा आ गया और मेरा हाथ अपनी ओर खींचकर मुझे अपने पास बिठाते हुए बोले- साली रण्डी, जब से तेरा पति गया है तभी से तेरा नाटक देख रहा हूं. आज तुझे चोद चोद कर सब तेरी नौटंकी दूर कर दूंगा.

ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे ऊपर आ चढ़े.
वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों में मुंह मारने लगे. मेरी गर्दन को चूमने लगे.

पहले तो मैंने दिखावटी विरोध किया लेकिन फिर हार मानने का नाटक करके मैं आराम से लेट गयी.
फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगे लेकिन मैंने मुंह नहीं खोला. फिर वो मेरी चूचियों को दबाने लगे तो मेरी आह्ह निकल गयी और मेरे होंठ खुल गये.

इस मौके का फायदा उठाकर वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैं भी अंदर ही अंदर उनका साथ देने लगी लेकिन मैं ये नहीं दिखाया कि मुझे मजा आ रहा है.
मैं बस न चुदवाने का नाटक सा करती रही.

मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.
मैं अब सिसकारने लगी थी.

वो बोले- हां, साली रंडी, मैं जानता था कि तू ये सब नाटक चुदने के लिए ही कर रही है. मैं आज तेरी चूत को फाड़ दूंगा.
ये बोलकर मेरे ससुर ने मेरी नाइटी फाड़ डाली और मेरी चूचियों को जोर जोर से पीने लगे.

उनके मुंह की पकड़ इतनी तेज थी कि मेरे मुंह से जोर जोर की आहें निकलने लगीं.
मैं अपनी चुदास को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

इतने में ही ससुर का एक हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत में हल्का गीलापन आने लगा था. वो मेरी चूत को जोर जोर से रगड़ने लगे.

मेरी चूत में पानी आने लगा और वो चूत में उंगली से कुरेदने लगे.
मैं भी पागल सी हो रही थी अब.

इतने में ही ससुर ने अपने पजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में दे दिया.
उनका लंड मेरे मुंह में फंस गया और वो धक्के देते हुए बोले- चूस साली … यही है तेरा सपना … चूस ले इसे. चूस साली कुतिया।
मेरे मुंह में उनका लंड पूरा फंस गया था और मेरे गले में अटक गया था. मुझसे सांस नहीं ली जा रही थी लेकिन वो मेरे मुंह को चोदे जा रहे थे.

काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था.

फिर उन्होंने मुझे उल्टी तरफ लिटा दिया और मेरी गांड ऊपर आ गयी.
वो मेरी गांड में मुंह देकर चाटने लगे.

मैं डर गयी कि कहीं ये अपने इस मोटे मूसल को मेरी गांड में न धकेल दें. मैं उनका लंड गांड में नहीं ले सकती थी.

वो मेरी गांड को लगातार चाटे जा रहे थे. मुझे मजा भी आ रहा था लेकिन साथ में डर भी बना हुआ था.

इससे पहले मैंने कभी भी अपनी गांड नहीं चुदवाई थी. कई बार मेरे पति मेरी गांड में लंड देने की कोशिश करते थे लेकिन मैं मना कर देती थी.
अभी तक मेरी गांड कुंवारी ही थी.

उसके बाद वो मेरी चूत भी चाटने लगे तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी. वो मेरी चूत को चाटते हुए मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और मुझे अब बहुत मजा आ रहा था.
दोनों तरफ से मजा मिल रहा था.

कुछ देर तक वो मेरी चूत को काट काटकर खाते रहे.
मैं भी पानी छोड़ती रही और चुदने के लिए मचल उठी.

अब ससुर जी से भी नहीं रुका गया तो उन्होंने अचानक से मेरी चूत पर लंड रखा और एक धक्का दे दिया.
उनके लंड की चोट से मेरी जान निकल गयी.
एक बार में ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया उनके मोटे लंड ने.

उन्होंने मेरे मुंह पर थप्पड़ मारा और चुप रहने के लिए कहा.
मैं चुप हो गयी.

अब वो मुझे चोदने लगे. मैं तो बेहाल होने लगी.

कुछ देर तक तो लंड नहीं लिया गया लेकिन फिर जब चूत खुलने लगी तो मुझे मजा आने लगा.
अब मैं आराम से चुदवाने लगी.

लेकिन ससुर जी की स्पीड बढ़ रही थी. वो लगातार तेज तेज चोदे जा रहे थे.

बीस मिनट की चुदाई में मैं दो बार झड़ गयी. वो अभी भी मुझे तेजी से चोद रहे थे.

फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह पर उनके वीर्य की पिचकारी एकदम से आकर लगी.

कई बार उनके लंड से वीर्य की पिचकारी लगी और मेरा पूरा चेहरा सन गया.
मुझे मजा आ गया.
इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी.

झड़ने के बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गये.

हम दोनों फिर 69 में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.

कुछ देर की चुसाई के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. अब उन्होंने लंड पर तेल लगा लिया. मेरी चूत और गांड पर दोनों जगह तेल लगा दिया.

उसके बाद मुझे पेट की तरफ सुला दिया और नीचे तकिया लगा दिया.
फिर वो मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे.

मैं आह्ह आह्ह करते हुए चुदने लगी.

मगर अचानक से उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर तकिया लगा दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ.

जब एक जोर का झटका लगा तो मेरी जान निकल गयी.
मैं जोर से चीखी लेकिन मेरी आवाज तकिया के नीचे ही दब गयी.

ससुर का लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द से छटपटाने लगी.
मगर ससुर ने लंड को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल दिया.

वो मेरी गांड में धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे मगर मैं दर्द में तड़प रही थी.

मैं दर्द से रोने लगी तो वो बोले- साली … तेरी गान्ड कब से मारना चाह रहा था. आज तो फ़ाड़ डालूंगा इसे मैं!

अब मैं बेहोश होने वाली थी कि एक थप्पड़ जोर से मुंह पर उन्होंने मारा और फिर गांड में लंड को धकेलने लगे.
उसके बाद वो मेरी गांड को चोदने लगे.

धीरे धीरे मेरी गांड खुली और मैं चुदवाने लगी.
पांच मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में दे दिया.
मैं फिर से उनका लंड चूसने लगी.

फिर ससुर ने मेरे मुंह में ही अपना माल गिरा दिया. मैंने उस माल को पी लिया.

उनकी चुदाई से मेरी चूत और गांड दोनों ही फट गयी थी. मगर मुझे चुदाई में मजा भी बहुत मिला.
उन्होंने मेरी चूत और गांड पर मलहम लगाया और मेरा दर्द कम करने की कोशिश की.

अगले 2 दिन तक मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.

फिर उसके 20 दिन के बाद मेरा जन्मदिन था. मेरे जन्मदिन पर भी मेरे ससुर ने मुझे चुदाई का तोहफा दिया.
मगर उस दिन उनके साथ उनका एक दोस्त भी था.
उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदा.

9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं. पहली बार ससुर के लंड से चुदाई और उनका मोटा लंड आज भी जब मैं सोचती हूं तो मेरी चूत गीली हो जाती है.

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