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मेरी गांड फाड़ दी

असल में मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी शादी एक बड़े घर में हुआ है शादी करवाने वाली मेरी सौतेली माँ है। उसने पांच लाख लेकर मेरी शादी करवाई है। तो आपको समझ आ गया होगा। या तो मैं अपने ससुराल से भाग जाऊं या जो हो रहा है उसी का फायदा उठाऊं और ज़िंदगी जिऊँ। दोस्तों इसी कसमकस में सोची की शायद मुझे यही सही रहेगा की मैं ससुराल में ही रहूं। अगर मैं भाग जाती हूँ तो यहाँ मुझे तीन चोद रहा है। पता नहीं कितने लोगों के बिस्तर को गर्म करना होगा हालात से लड़कर और जीने के लिए। और रही बात वापस हरियाणा जाने की जहाँ एक चुड़क्कड़ सौतेली माँ हो वो मुझे वह भी बेचेगी। तो बार बार और कई लोगों से बिकने से अच्छा है की एक घर में ही चुदवा लूँ।

अब मैं आपको अपनी पूरी कहानी बता रही हूँ।

शादी के बाद मैं अपने ससुराल आ गई। रात में पति ने मेरे साथ खूब रंगरेलियां मनाई मैं भी खूब गांड उठा उठा कर चुदवाई। रात में मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया। मेरी गांड फाड़ दी थी चुत मार कर। मैं भी तैस में आ गई और खूब कूदी उसके लंड पर और खूब मजे ली पूरी रात। पर जब वो ठंढा पड़ा और मैं कपडे पहन ली तब वो मुझे रूल समझाने लगा की मेरे घर का क्या रूल है। उसने एक बात बोला की तुम कभी भी मेरे पापा को और मेरे भाई को नाराज नहीं करोगी ? मैं भी तैस में आकर पूछ ली। नाराज क्या ? क्या वो मेरी चूत मांगेगे तो वो भी देनी पड़ेगी। तो मेरा पति बोला हां सब कुछ।

मेरी सास नहीं है। वो पहले ही चल बसी शायद तीन तीनो ने चोद चोद कर ऊपर पहुंचा दिया था। 50 साल की उम्र के बच्चा होने वाला था। शायद इन तीनो का ही काम होगा, मैं इसके बारे में कुछ पूछी नहीं। मुझे लगा जो भी कह रहा है मेरा पति मान लेते हैं। आगे देखा जाएगा क्या करने है। पहले तो सौतेली माँ से ही मेरा पाला छूटा यही कम नहीं थी। रही बात ससुर का वो देख लुंगी और रही बात देवर का तो मजे लुंगी।

सुबह मेरा पति अपने ड्यूटी पर चला गया क्यों की उसे जाना जरुरी था। देवर भी उठा और वो भी चला गया अपने काम कर रह गया घर में बूढा। मैं नहाने गई बाथरूम में। नहा कर जैसे बाहर आई और अपने कमरे में गई तो बूढा मेरी पलंग पर बैठा था। मैं पूछी की बाबूजी आप यहाँ? तो वो बोला क्यों नहीं बहुरानी ये घर ऐसा है कोई भी कही जा सकता है। एक चीज को हम लोग बाँट कर खाते हैं। एक की शादी हो गई अब आप एक की नहीं हो हम तीनो की हो।

मैं सनझ गई, रात को जो मेरा पति बोला था वही हुआ। ससुर मुझे चोदने के लिए तैयार था। मैं बोली अभी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। रात भर उन्होंने मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया है। दर्द कर रहा है। तो उन्होंने बोला इसका मैं ख्याल रखूंगा। मैं अभी नहीं चोदता हूँ। मैं तुम्हारी चूत में तेल लगा देता हूँ ताकि दर्द ख़तम हो जाये। मैं मना की पर उन्होंने कहा नहीं नहीं मुझे ये दर्द पसंद नहीं। मैं आता हूँ तेल गरम करके।

तब तक मैं बाल झाड़ कर सिंदूर रही थी तभी ससुर जी। सरसों का गरम तेल ले आये और मुझे बोले लेट जा। मैं लेट गई। उन्होंने पेटीकोट ऊपर कर दिया। और पेंटी उतार दी। दोनों पैरों को फैला दिया और पहले चूत को सहला कर देखा और मुस्कराने लगे। बोले भगवान् में मेरी सुन ली। मैं भगवान् से माँगा रहा था की मुझे ऐसी बहू देना जिसके चूत में बाल नहीं हो। और ऐसा ही हुआ क्लीन है तुम्हरी चूत।

उसके बाद वो तेल लगाने लगे। करीब पांच मिनट तक तेल लगाए मेरी चूत गीली होने लगी। चूचियां भी तन गई थी। मुझे ऐसा लग रहा था इनसे चुद जाऊं। तभी उन्होंने कह दिया बहु हौले हौले घुसाऊ। मैं बोली ठीक है।

उन्होंने तुरंत धोती खोला और नीला अंडरवियर जो लाइन बाला होता है। खोल दिया और लैंड को हिलाने लगे और उसमे भी उन्होंने तेल लगा लिया और फिर से मेरी चूत में तेल लगा लिया और चूत पर लंड लगा कर घुसाने लगे। पर उनका लौड़ा घुस नहीं रहा था क्यों की दम नहीं था। खड़ा सही से नहीं हो रहा था। फिर उन्होंने हिलाया और फिर मेरी मुँह में दे दिया जब मैं थोड़े देर तक अपने मुँह में ली तो उनका लौड़ा मोटा और लंबा हो गया।

अब वो मेरी चूत में घुसा दिए और करीब दस मिनट तक चोदे और सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिए। मैं प्यासी ही थी अभी दर्द तो ख़तम हो गया था। अब दर्द नहीं हो रहा था। बाबूजी खेत चले गए। मैं सो गई क्यों की रात में चुदवा रही थी।

करीब तीन बजे नींद खुली वो भी जब घर का दरवाजा कोई पीट रहा था। जाकर खोली तो देखि देवर जी थे।

वो अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिए। और मुझे अपनी बाहों में ले लिए। मैं भी खुश खुश उनके बाहों में समा गई। क्यों की देवर जी को मैं पसंद करती थी वो मेरे लायक थे। वो मेरे होठ को चूसने लगे चूचियां दबाने लगे। मैं भी उनको किस करने लगी सहलाने लगी।

वो मुझे बैडरूम में लेकर आये और मेरी ब्लाउज खोल दिए मैं खुद ही ब्रा खोल दी पेटीकोट भी उतार दी। ये सब देखकर बोले मुझे बहुत ख़ुशी हुई आप मेरे घर के कायदे कानून को बिना झिझक के अपना लिए हैं। आप रानी बनकर रहेंगे इस घर में।

और वो मेरे ऊपर टूट पड़े मेरी चूचियां पिने लगे। दबाने लगे। होठ चूसने लगे। और फिर उन्होंने मेरी गांड चाटी और फिर चूत चाटने लगे। मैं बोली बस करो ऐसे चाटना अभी मुझे चोद दो। क्यों की ससुर जी मुझे गरम कर के चले गए। वो बोले अच्छा बाबूजी मजा ले लिए तो मैं बोली हां वो मुझे चोद दिए। तो देवर जी बोले और मैं ही पीछे रह गया।

और उन्होंने में टांग को अलग अलग किया और मोटा लौड़ा मेरी चूत पर लगा कर पेल दिया। अब मुझे दर्द होने लगा था क्यों की देवर का लौड़ा काफी मोटा और लंबा था। वो चोदना शुरू किये तो मैं पानी पानी हो गई। खूब चोदा उठा पर पटक कर ऊपर से निचे से बैठ कर खड़े होकर। करीब एक घंटे तक उन्होंने चोदा मुझे आखिर उनका भी गिर गया।

उन्होंने अपने जेब से एक सोने का चेन निकाला और मुझे दे दिया और बोले ये मेरे तरफ से।

दोस्तों पहले तो सात दिन तक मुझे काफी दर्द हुआ था। क्यों की मेरी चूत नाजुक थी। पर अब मैं तैयार हो गई है तीन मर्द से चुदने को तो अब कोई बात नहीं है। खूब चुद रही हूँ मजे ले रही हूँ। मैं अपनी दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने जा रही हूँ। आप जरूर पढियेगा।

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मेरा गदराया हुआ बदन

मेरा नाम रशिली है, कानपूर देहात की रहने वाली हु, मेरी उम्र २२ साल की है, लंड का स्वाद अपने पति से ही मिला वो भी उतना नहीं जितना मैं चाहती थी, मन भटकता था चाहती थी किसी किसी पडोश के लड़के से ही चुदवा लू पर डरती थी कही वो ब्लैकमेल ना करे इसलिए मन मार के रह गयी, मेरे दिमाग में एक विचार आया क्यों ना मैं ससुर से ही चुदवा लू, बूढ़े को भी तो बूर का मजा चाहिए क्यों की सास का देहांत हुए करीब १० साल हो गया था, तो मैंने अपने ससुर पे डोरे डालने लगी.

एक दिन ससुर का तबियत ख़राब हो गया था मैंने उनके लिए तेल गरम कर के पुरे शरीर में मालिश की उनके पुरे जिस्म को मैंने अपने हाथ से टटोला और ब्लाउज का ऊपर का हुक खोल के राखी ताकि वो मेरे गदराये हुए चूचियों को निहार सके हुआ भी ऐसा ही, ससुर ने तिरछी नज़र से खूब निहारा मैं मन ही मन खुश हुई, फिर कुछ ऐसी भी हरकत मैंने की जिससे मेरी चूची उनके हाथ को छुआ, मैं उनके हाव् भाव से समझ रही थी की वो ये सब नहीं चाह रहे थे, उनकी नियत ख़राब नहीं थी पर मैं चुदवाने के लिए व्याकुल थी.

मैंने दूसरे दिन आँगन में चापाकल पे नह रही थी और मैंने जानबूझ कर वही टाइम चुना जब वो खेत से घर आते है, बाहर का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया, और मैंने अपने ब्लाउज और ब्रा को खोल के नहाने लगी, पेटीकोट कमर पे ही बंधा था, चुचिया यु ही खुला था, मैं रगड़ रगड़ के नहाने लगी, उस दिन कुछ ज्यादा ही नही क्यों की ससुर देर से आये थे, जब वो दरवाजे के अंदर आये वो हैरान हो गए और मैं भी झूठ मुठ की परेशान हो गयी, वो मुझे नंगे देख लिए, मेरा गदराया हुआ बदन किसी के भी होश उड़ाने के लिए तैयार था, वो शरमाते हुए कमरे में चले गए और मैं भी कपडे पहन ली, मैं तिरछी निगाह से देखि तो उनके धोती फुला हुआ था शायद उनका लंड खड़ा हो गया था.

इस तरह से कई दिन हो गए पर मौक़ा नहीं मिला चुदवाने के लिए, एक दिन मैंने रात के करीब २ बजे पेट दर्द का बहाना बनाई और रोने लगी, मेरे ससुर परेशान हो गए कोई डॉक्टर भी नज़दीक में नहीं था, सुबह ही कुछ हो सकता था, मैंने कहा पिताजी आप चिंता ना करो पहले भी कई बार ऐसा हुआ था मेरी माँ गरम सर्सो का तेल मेरे पेट पे मालिश कर देती थी तो छूट जाता था, मैंने कराहते हुए बोली. पिताजी फ़ौरन ही रसोई में गए और चूल्हे से गरम तेल कर के ले आये, मैंने लगाने को कोशिश की पर मैं चाहती थी की वो लगाए, मैंने कहा मैं नहीं लगा पाउंगी, अगर आप लगा दे तो अच्छा हो जाएगा, उनके हाथ कापने लगे बोले बेटी मैं कैसे?

मैंने कहा कोई बात नहीं मैं किसी को नहीं बताउंगी, वो तैयार हो गए और मेरे पेट पे मालिश करने लगे, उसी वक्त मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और आँख बंद कर ली वो मेरे पेट पे तेल लगाते रहे और मेरी चूचियों को निहारते रहे, आकिहार मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने कहा, आप मुझे वो सुख दो जो आपका बेटा नहीं दिया अगर आप मना करोगे तो पुरे गाँव में बात फैलाडुंगी की जब मैं सो रही थी उस समय आपने मेरे साथ गलत हरकत किया, मेरे ससुर परेशान हो गए बोले नहीं नहीं ये सब गलत है मैं नहीं कर सकता, उसी समय मैंने कहा मैं अभी घर से बहार चली जाऊूँगी और चिल्लाऊंगी की आपने मेरी इज्जत लूट ली. उन्होंने बोला ठीक है जो तुम चाहो.

मैंने अपने ब्लाउज को उतार दिया और उनको अपने बाहों में ले ली, मैंने सबसे पहले उनको अपना दूध पिलाया फिर मैंने उनको अपना बूर चाटने के लिए कहा करीब १० मिनट बूर चटवाने के बाद मैं काफी कामुक हो गयी थी मेरे दांत पीस रहे थे, बूर से पानी निकल रहा था चूचियाँ टाइट हो चुकी थी, मैंने अपने ससुर का लंड अपने मुह में लेके मलाई बर्फ की तरफ चूसने लगी धीरे धीरे उनका लंड काफी बड़ा और टाइट हो गया फिर मैंने उनके लंड को पकड़ कर बूर के मुह पे रखी और मैंने उनसे पेल देने के लिए कहा,

फिर क्या था उस बूढ़े में जान आ गया वो झटके पे झटके दे रहा था मैं भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, उसने मुझे गांड भी मार और बूर का तो सत्यानाश कर दिया था उस दिन पर मैं खुश थी क्यों की मेरी वासना की आग को कुछ शांति मिली | करीब ४ महीने से वो मेरे साथ ही सोते है, अब तो मेरे पेट में २ महीने का बच्चा भी है वो भी ससुर का. आशा करती हु की आपको मेरी आपबीती अच्छी लगी होगी,

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दारुबाज पति ने लॉक डाउन में दोस्तों से चुदवाया

दोस्तों कई रिश्ते ऐसे होते हैं जिसपर भरोसा होता है की वो जो भी करेगा भले के लिए करेगा पर कई बार ये बचाने वाला ही कई बार बेच देता है। ऐसा ही मेरे साथ आजकल हो रहा है। घर में खाने को नहीं है पति को दारू भी रोजाना चाहिए घर में राशन नहीं है। पति ने कहा आजकल मेरा काम नहीं चल रहा है। इसलिए अब तेरे पर ही आशा है। ये सब कहकर मुझे फंसा दिया और सौंप दिया अपने दोस्तों को। अब मेरी चुदाई रोज हो रही है। आह आह की आवाज और पलंग टूटने की आवाज शायद उसको भी सुनाई पड़ता होगा। क्यों की मैं कमरे में चुदती हूँ और वो बाहर सोया रहता है।

आप खुद सोचिये किसी की बीवी कमरे में आह आह आह ओह्ह ओह्ह ओह्ह और जोर से और जोर से चोदो कहे और उसका पति ये सब चुपचाप सुनता रहे उसको आप क्या कहेंगे।

दोस्तों एक बात और मैं आपको बता देना चाहती हूँ। ये सब मज़बूरी में उठाया गया कदम था पर ये मज़बूरी अब मुझे अच्छी लगने लगी है। मैं खुश हूँ चुद कर। क्यों की जब इसमें मजे आने लगे और मेरी जरुरत भी पूरी होने लगे और खुद मैं भी मजे करूँ तो क्या बुराई है।

अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ और बताती हूँ कैसे क्या हुआ।

रमेश गुर्जर मेरे पति के दोस्त हैं। बहुत पैसे वाले हैं। मेरा पति एक छोटी सी नौकरी करता है। आजकल काम बंद है तो घर पर ही है मालिक ने पैसे भी नहीं दिए मेरी कोई बच्चा अभी तक नहीं है शादी के तीन साल हो गए हैं। हॉट हूँ सुन्दर हूँ और ज्यादा उम्र भी नहीं हुआ है कम उम्र में शादी हो गई है। पर पति की उम्र ज्यादा है आजतक कभी भी वो मुझे चुदाई में खुश नहीं कर पाया जब तक मैं गरम होती हूँ तब तक वो ठंढा हो चुका होता है।

लॉक डाउन में रमेश जी मेरे घर का काफी ख़याल रखे हैं। पति को भरपूर मदद किये है। पति को दारु से लेकर घर के खर्चे और घर किराये तक का सभी का इंतज़ाम उन्होंने किया और नकद भी मदद किया।

रमेश जी की शादी इसी साल हुई है पर बीवी अब उनके साथ नहीं है पुराने यार के साथ भाग गई है। और मेरे पति को मदद करने का कारन शायद मैं हूँ। उनकी निगाहों जालिमो वाली मेरे ऊपर हमेशा से ही रहा है पर करीब नहीं आये शायद वो लम्बे रेस का घोडा बनना चाहते हैं इसलिए सब कुछ धीरे धीरे कर रहे हैं।

एक दिन उन्होंने पति को अपनी जाल में फंसा लिया और मुझे सौंपने के लिए राजी कर कर लिया। मेरे पति को भी शायद इसकी जरुरत थी। मेरे पति को भी लगता था की मैं भाग जाउंगी क्यों की वो ना मेरे खर्चे पूरा कर पा रहा था ना तो मेरी चुदाई कर पा रहा था। इसलिए सेफ साइड से वो रमेश जी को मेरी ज़िंदगी में घुसाना चाह रहा था। ताकि मैं भी रह जाऊं और सब काम भी हो जायेगा और आजकल का समय भी गुजर जाये।

एक दिन पति को खूब दारु पिलाया उन्होंने देर रात तक मेरे यहाँ भी रहे जब मेरा पति उलट गया पी कर तब वो मेरे करीब आ गए। और मेरा हाथ पकड़ लिए। और कहने लगे मैं वो सारी ख़ुशी आपको दूंगा जो आपके पति नहीं दे पाए और सच तो ये है की मैं उनको भी आगे बढ़ाऊंगा। आप इसको गलत मत लेना। पर मैं आपको बहुत चाहता हूँ और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ। पहले तो लगा की शायद ये गलत है पर सोची की गलत क्या है इसमें ? मुझे वो सारी खुशियां मिल जाएगी तो मैं भी राजी हो गई।

मैं चुप रह गई और अपने आँचल को निचे कर दी बड़ी बड़ी चूचियां गोल गोल और टाइट। होठ मेरे फड़फड़ा रहे थे मेरी साँसे तेज हो रही थी। ऐसा लग रहा था आज मेरी सुहागरात है। दोस्तों मैं डर भी रही थी और खुश भी थी। ये मौक़ा मैं खोना भी नहीं चाहती थी। पर एक कोने में ये भी बात था की ये गलत है। ये सब सोचते सोचते सोचते लेट गई।

रमेश जी दरवाजा बंद कर दिए मेरा पति बरामदे पर सो गया था पी कर। रमेश जी मेरे करीब आये और ब्लाउज का हुक खोलने लगे और एक ऊँगली को मेरे होठ पर फिराने लगे। मेरे रोम रोम सिहर रहे थे। अजीब सा लग रहा था कंठ सुख रहे थे। उन्होंने ब्लाउज का बटन खोल दिया मैं साइड उल्ट गई वो हुक ब्रा का भी खोल दिए मैं ब्रा खुद से उतार दी और निचे गिरा दी।

मेरी चूच ऐसी है जैसे किसी अठारह साल की लड़की का हो। ऐसा लगता है जैसे आजतक किसी ने टच नहीं किया हो। गुर्जर मेरी चूच देखकर ही फ़िदा हो गया। वो तो टूट पड़ा चूच पर पीने लगा दबाने लगा खेलने लगा। फिर मैं साडी निचे फेंक दी और पेटीकोट का नाडा खोल दिया। बाकी पेंटी तो रमेश जी खुद उतार दिए। और मेरी चूत की बाल को चाटने लगे और चूत में जीभ घुसाने लगे। मैं तर बतर होने लगी। पसीन निकलने लगे मेरे माथे से।

चूत गीली हो गई। अब वो अपने सारे कपडे उतार दिए। अपना मोटा लौड़ा मेरी दोनों चूचियों के बिच रगड़ने लगे फिर वो मेरी मुँह में दे दिया। करीब दो मिनट में ही उनका लौड़ा मोटा और करीब आठ इंच लंबा हो गया।

अब वो चुदाई के लिए तैयार थे और मैं भी अपनी चुदाई के लिए तैयार थी। मैं दोनों पैरों को अलग अलग कर दी। वो बिच में आ गए अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के बीचोबीच रखे और जोर से घुसा दिए। मैं तकिये को जोर से पकड़ ली। फरफरा गई दर्द से। कहा तीन इंच का छोटा लंड मेरे पति का और आज आठ इंच का लैंड और तीन इंच मोटा। पहली बार गया।

दो तीन चोट उन्होंने मारा और फिर चूत भी गीली हो गई थी। अब लौड़ा अंदर बाहर होने लगा। मैं आह आह करने लगी। करंट लग रहा था पुरे शरीर में। आज मुझे असली मर्द मिला था। लॉक डाउन में तो मेरी मनोकामना पूर्ण हो रही थी। और घर में खुशियां भी आ रही थी।

अब वो जोर जोर से चोदने लगे और मैं भी अपनी वासना की आग बुझाने लगी शर्म छोड़कर। मैं खुद ही चूचियां दबाती उनको किस करती। उनके छाती को सहलाती और चुदवाती। मैं काफी जोश में आ गई थी। इसलिए आवाज तेज हो गई और कहने लगी चोदो मुझे चोदो खूब चोदो। मैं चाहती हूँ मेरे बच्चे का बाप भी आप ही बनो। आह आह आह आह घुसाओ पूरा और घुसाओ। कितना मोटा लौड़ा है आपका गुर्जर जी मजा आ गया आज मेरी प्यास बुझ गई है।

आप मुझे रोजाना चोदना और मेरे घर पर भी ध्यान रखना पति को भी खुश रखना ताकि वो सौंपे आपको और आप मुझे खूब चोदो ऐसे ही चोदो मेरी रात आप ही रोजाना रंगीन करो। मैं आपको प्रेमिका आपकी रखैल बन्ना चाहती हूँ। अब मैं आपकी हूँ आप चाहे तो चूत मारो या गांड मैं मना नहीं करुँगी। और आह आह आह करने लगी।

तभी मेरा पति जग गया दरवाजा खटखटा कर बोला। धीरे बोल ले बाहर तक आवाज आ रही है। पर मैं कहा रुकने वाली मैं बोली सो जा तू। आज मुझे अपनी गर्मी बुझा लेने दे।

दोस्तों फिर उन्होंने उलट कर पलट कर खड़ा कर के निचे बैठा के ऊपर लेके खूब चोदा और मैं भी खूब चुदवाई। करीब रात के ढाई बज गए थे। फिर हम दोनों एक साथ ही नंगे सो गए।

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मैं लंड की प्यासी हूँ

दोस्तों आज मैं आपको अपनी व्यथा सुनाने जा रही हूँ। मुझे लंड चूसने की आदत है। और मुझे ऐसा कोई मर्द नहीं मिला जो मुझे २ घंटे तक चोद सकते। मैं लंड की प्यासी हूँ चुदाई की प्यासी हूँ। मैं क्या करूँ समझ नहीं आता है। जब तक चुदती नहीं हूँ तब तक मुझे मन नहीं लगता है। जी घबराने लगता है और चूत में खुजली होने लगती है।

आज मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रही हूँ। पति तो चोद सकता नहीं है तो कैसे अपनी प्यास कुमार जी से मिटा रही हूँ। और मैं कैसे उनको मजबूर कर देती हूँ चुदाई की लिए और क्या क्या करती हूँ जब वो मुझे चोदते हैं आपको पूरी कहानी बताने जा रही हूँ।

मेरे प्यार दोस्तों, मेरी शादी के आठ साल हो गए। मैं लव मैरिज की हूँ। शादी तक मुझे ऐसा नहीं लगता है यानी मैं ज्यादा चुड़क्कड़ स्वाभाव की नहीं थी पर इधर जब से इंटरनेट की दुनिया में कदम रखी हूँ तब से मैं बैचैन हूँ अपनी चुदाई को लेकर।

जब से मुझे पोर्न का चस्का लगा और जब से सेक्स कहानियां पढ़ने लगी हूँ तब से मेरी चूत गीली की गीली ही रहती है। और कोई चोदने वाला नहीं है। चुदाई तो अभी भी मेरी रोज होती है पर ऐसे मर्द की तलाश ही जो मुझे खुश कर सके मुझे चोद सके.

पति से आजतक संतुष्ट नहीं हुई तो। मैं अपने फ्लैट के निचे ही एक आदमी है हॉट और सेक्सी। उनसे मैं इंटरनेट मार्केटिंग सिखने के बहाने मैं जाने लगी पति भी मुझे जाने को कह दिए। उनके यहाँ उनकी पत्नी है वो स्कूल जाती है पढ़ने तो घर में होती नहीं है वो चार बजे आती है। मेरे पति भी दस बजे चले जाते हैं तो मैं भी फ्री हो जाती हूँ।

और कुमार जी का घर से ही काम है तो घर पर ही रहते हैं तो मेरे लिए तो ये सब अच्छा हुआ और मैं उनके यहाँ सिखने जाने लगी। धीरे धीरे बात आगे बढ़ी और मेरे जिस्म तक पहुंच गई। जिस्म तक पहुंचने में देर नहीं लगने का ये भी कारन था, की मैं खुद ही चुदाई की प्यासी तो मुझे तो लंड चूसने को मिलना चाहिए था। और चूत की गर्मी को शांत करने चाहिए थे। इसलिए मैं भी जल्द ही उनके करीब आ गई।

एक दिन की बात है। मेरे पति बाहर गए थे यानी दिल्ली से बाहर। और कुमार जी की पत्नी भी सरकारी काम से बाहर गई थी दो दिन के लिए। यानी कोई डर की बात नहीं था की कोई आ जायेगा।

बस ये दिन मेरे लिए बेहतरीन था। सुबह दस बजे उनके यहाँ गई तो वो नहा ही रहे थे। दरवाजा खुला हुआ था तो मैं अंदर चली गई। वो नहा कर आये। निचे तौलिया लपेटे थे, बदन पर कपडे नहीं थे। ऊपर से खुशबु डेनिम साबुन की मैं निहारने लगी और मेरे मन में उनको पानी की इच्छा होने लगी। वो मेरे करीब आने लगे और मेरी धड़कन तेज होने लगी।

वो मेरे करीब आ गए करीब से मेरे होठ को निहारने लगे। मेरे होठ लड़खड़ाने लगे। हिलने लगे मेरी नजरें झुकने ही वाली थी की वो मेरी ठुड्ढी को निचे से सपोर्ट देकर मुझे अपने और देखने को मजबूर करने लगे।

मैं रह नहीं पाई क्यों की मैं खो गई थी अपने आप में। मैं अपना होठ आगे कर दी और आँखे बंद कर ली। उन्होंने मेरे बाले पीछे से पकड़ लिए और अपने करीब ले आये मुझे मेरी साँसे तेज हो गई थी उनकी भी साँसे तेज तेज चल रही थी और फिर मेरे होठ को अपने मुँह में ले लिए और चूसने लगे।

मेरी गुलाबी होठ उनके मुँह में था मेरी साँसे तेज हो गई थी। आँखे बंद थी मैंने भी अपना हाथ उनके सर के पीछे लगाया और फिर उनके होठ को चूसने लगी। करीब पांच मिनट में ही हम दोनों वाइल्ड हो गए। उन्होंने मुझे पलंग पर लिटा दिया।

ऊपर चढ़ गए मेरे होठ को चूसते हुए अपने दोनों हाथों में मेरी दोनों हाथों की उँगलियों को जकड लिया और पीछे के तरफ कर दिया हम दोनों के हाथ लॉक हो चुके थे मुझे चूम रहे थे।

तभी उन्होंने मुझे बैठाया और मेरे कपडे उतारने लगे. मैं भी कुछ नहीं बोली उन्होने मेरी कुर्ती उतार दिया और मेरी ब्रा भी खोल दिया। उनका तौलिया खुल गया था वो मैं उनके लंड को देख पा रही थी सांप की तरह फनफना रहा था। मोटा और करीब आठ इंच लंबा। मैं देख कर पानी पानी हो गई। पहली बार इतने मोटे और लम्बे लंड को देख रही थी।

दोस्तों मैं खुद ही अपने से निचे के लेग्गिंग्स को उतार दी और चड्ढी भी खोल दी। दूधिया जिस्म जिसपर गोल गोल सुन्दर दो चूचियां। गोरे बदन पर काले काले बाल मेरी चूत पर ऐसा लग रहा था रेगिस्तान में घांस उग गया हो। दोस्तों उन्होंने मेरे जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया और मेरे होठ से लेकर मेरे पैर के अंगूठे तक चूमने लगे।

अब बर्दास्त नहीं हो पा रहा था तो खुद ही अपने पैरों को अलग अलग कर ली वो निचे हो गए अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया। और जोर से पेल दिया पूरा लौड़ा मेरी चूत के अंदर चला गया इससे कहते है देसी चुदाई दोस्तों मैं मजे में थी अंग अंग अंगड़ाइयां ले रही थी और वो हौले हौले धक्के देने लग। मैं आह आह आह आह आह कर रही थी होठ मेरे सुख रहे थे। मैं चुदाई का आनंद लेने लगी।

वो जोर जोर से देने लगे मेरा पूरा बदन हिल रहा था उनके जोर जोर से झटके से। मैं चुद रही थी उनको निहार रही थी अपनी चूचियां खुद ही दबा रही थी। दोस्तों फिर क्या था मैं जैसे जैसे कहती गई वो वैसे वैसे चोदते गए। कभी आगे से कभी पीछे से कभी खड़ा कर के कभी बैठ कर कभी मैं ऊपर कभी वो ऊपर।

दोस्तों पानी पानी हो गई। खूब चोदा उन्होंने।

अब दूसरे दिन से सीखना गया तेल लेने। उनके घर पहुंचते ही वाइल्ड तरीके से एक दूसरे को चूमने लगती। और फिर बिस्तर तक पहुंच जाती। दिन भर उनके बाहों में सोये रहती। मेरा समय होता है और मैं वापस अपने घर आ जाती।

अब उनकी बीवी भी आ गई है। तो उतना समय नहीं मिल पाता है फिर भी उन्हें सरकारी काम से अब भी जाना पड़ रहा है। जब वो बाहर रहती है तब तक मैं उनको अपनी जिस्म सौंपते रहती हूँ।

पर दोस्तों अब मुझे वह से भी पूरा नहीं हो पा रहा है। मैं ऐसे मर्द की तलाश में हूँ जो मुझे दिन भर चोदे देखिये अब मेरी मनोकामना कब पूर्ण होती है।

अपनी दूसरी कहानी जल्द ही आपको सुनाने वाली हूँ तब तक आप और भी कहानियां पढ़िए, मजे कीजिये मूठ मारिये।

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