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मैं गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी

नमस्कार मैं 41 साल की औरत हूं मेरा नाम सुरभि है।  आज मैं आपको अपने सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं यह मेरी कहानी सच्ची कहानी है आज मैं इस कहानी में आपको यह बता रही हूँ  कि मेरा दामाद कैसे मुझे प्रेग्नेंट कर दिया मेरी बेटी तो प्रेग्नेंट है ही मैं भी 2 महीने की प्रेग्नेंट हूं। यह सब कब कैसे और क्यों हो गया वह मैं आपको सिलसिलेवार तरीके से कहानी के माध्यम से इस वेबसाइट पर लिख रही हूं ताकि मैं अपना मन हल्का कर सकूं।

मेरी बेटी आकांक्षा की शादी दिल्ली के एक अच्छे खानदान मैं हो गई। मेरे दामाद जी एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और बहुत बड़े पद पर हैं पैसे भी खूब  है उनके पास उनके माता-पिता उनके साथ नहीं रहते मेरे दामाद जी नोएडा में रहते हैं और उनके मम्मी-पापा दोनों दिल्ली में रहते हैं । उनकी एक बहन है वह विदेश में रहते हैं जो शादीशुदा है। वह अपने मम्मी पापा को 6 महीने के लिए अपने यहां बुला ली तो दामाद जी का  मन नहीं लगने लगा था शादी पिछले साल ही हुई थी और मेरी बिटिया आकांक्षा को भी मन था कि मैं कुछ दिन के लिए उसके पास जाकर रहूं मेरी बेटी भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है ।

तो मैं उन दोनों के आग्रह पर मैं बेटी दामाद  के पास ही चली गई। लखनऊ में सिर्फ आकांक्षा के पापा और मेरी छोटी बेटी नेहा रहने लगे मेरे पति भी बोले कि जाओ थोड़े दिन तक अपनी बेटी के साथ रहकर आओ तुम्हें अच्छा लगेगा मैं और नेहा दोनों यहां पर रह लेंगे कोई दिक्कत नहीं होगा। और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गई . दामाद जी मुझे स्टेशन पर लेने के लिए आए हैं बेटी भी साथ आए वह दोनों बहुत खुश हुए और फिर मैं नोएडा के लिए निकल गई जहां पर वह लोग रहते थे ।

समय बीतता गया हम तीनों ही एक-दूसरे से काफी घुलमिल गए थे दामाद जी बहुत अच्छे स्वभाव के थे तो हंसी मजाक करते थे।  उसके बाद मैं मेरी बेटी और मेरा  दामाद ऐसे रहने लगे, जैसे कि दोस्त हो, मुझे अपने दामाद का आदत बहुत अच्छा लगा।  कुछ दिनों के बाद मेरी बेटी आकांक्षा को ऑफिस काम के लिए बेंगलुरु जाना हुआ।  और जाना भी जरूरी था इसलिए मैं और दामाद जी उसको रुक भी नहीं पाए क्योंकि वह भी एक अच्छी कंपनी में काम करते हैं।  जब आकांक्षा चली गई तो हम दोनों को भी मन नहीं लगने लगा था मेरे दामाद जी भी काफी उदास रहने लगे थे और मैं भी उदास रहने लगी।

दोस्तों एक बात तो सही है रिश्ते चाहे कोई भी हो अगर दिल मिल रहा हूं दोस्तों के बीच कोई दीवार नहीं होता वही हाल हुआ मैं और दामाद जी ऐसे रहने लगे जैसे कि एक दूसरे का हमसफर हो  दोस्त हो।  धीरे-धीरे हम दोनों करीब आ गए 1 दिन में जब खाना बना रही थी तो पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रख।  वहां से शुरू हो गया हम दोनों की जिंदगी का पहला अध्याय।

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मैं किचन में रोटियां  बना रहे थे वह पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रखकर बात करने लगे मैं भी कुछ नहीं बोली मुझे उनका हाथ रखना अच्छा लगने लगा इससे मुझे लगा अपनेपन का एहसास तो मैं मना भी नहीं करी।  धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए मेरे सिर पर भी रख दिया फिर वह साइड से मुझे पकड़ दिए और रोटी में जो बेल रही थी उसको वह देखने लगे।

मैं सर झुका के रोटियां बेल रही थी।  तभी दामाद जी बोले कि मम्मी जी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो आप लगती ही नहीं हो कि मेरी मम्मी नहीं आप मेरी दोस्त की तरह लगती हो।  तो मैं भी बोल दे कि हां मैं दोस्त ही हूं तुम्हारी।  उसके बाद में बोली की  चलो खाना खा लेते हैं।   और हम दोनों खाना खाने के लिए बैठ गए।

इतना सब होने के बाद वह मुझे बार-बार घूर कर देख रहे थे कभी वह मेरी चूचियों की तरफ देखते तो कभी मेरी गांड की तरफ देखते कभी मेरे होंठ की तरफ देखते तो कभी मेरे पूरे बदन को निहारते , मैं सब समझ रही थी मैं समझ रही थी कि इनका मन कहीं और डोल रहा है।

पर उनका देखना मुझे भी अच्छा लगने लगा था मुझे लग रहा था आज कुछ होने वाला है क्योंकि मेरे मन में भी कुछ कुछ होने लगा था।

खाना खाकर मैं अपना कपड़े चेंज कि मैं नाइटी पहनी पर उस दिन ऐसा हुआ दोस्तों कि मैं अंदर कुछ नहीं पहनी थी मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि गर्मी ज्यादा थी इसलिए मुझे लगा कि आराम मिलेगा इसलिए मैं अंदर कुछ भी नहीं पहनी ना ब्रा न पेंटी।

मैं बेड पर लेट कर नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सेक्स कहानियां पढ़ने लगी थी।  एक हॉट कहानी  जो सास और दामाद की थी।  कहानी पढ़ते-पढ़ते लगा आज मेरे पास मौका है और अगर मुझे यह सुख मिल जाता है तो भी कोई बात नहीं।

असल में मेरे पति का उम्र भी हो गया था तो मेरी चुत ** कर नहीं पा रहे थे।  और मैं भी जवान थी तुम मुझे अभी लंड  चाहिए था।  पर मैं कहती कैसे कहानियां जैसे ही खत्म हुई थी मेरे कमरे में आ गए।  मैं जल्दी से अपने मोबाइल बंद की तुम मुझे देखकर कहने लगे कि मम्मी जी आज आप थकी लग रही हो।

तो मैं बोली हां सुबह से आज मैं काम कर रही थी इस वजह से थकान हो गया है।  तो मेरे दामाद से बेड पर बैठ गए और मेरे पैर को अपनी गोद में देखकर दबाने लगे मैं बोले नहीं नहीं ऐसा मत कीजिए आप मेरे पैर मत छुइए।  तो उन्होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं आपको तुम्हें पहले ही बोल चुका हूं कि आप मेरी दोस्त की तरह हो  तो आप भी बोले कि हां दोस्त मान सकते हो तो एक दोस्त दूसरे दोस्त की मदद क्यों नहीं करेगा।

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और वह मेरे पैर को दबाने लगे 10:15 मिनट हो दोनों पैर को मेरी दबाये और फिर नाइटी को ऊपर कर दिया।  जब जांघ  तक नहीं थी पहुंच गई तो मैं हाथ पकड़ कर रख दी उनको।  फिर उन्होंने मुझे कहा कि आप उलट जाओ मैं आपके पीठ दबा देता हूँ।  और मैं उलट गई।  वह मेरे पीछे दबाने लगे धीरे-धीरे चूतड़ दबाने लगे।  उसके बाद तो दोस्तों उनका हाथ मेरे जिस्म को टटोल रहा था।

मेरे चुत  से पानी निकलना शुरू हो गया था।  क्योंकि जब एक मर्द का हाथ लगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाए और मैं खुद काम होने लगे।  मैं सीधा हो गई और मैं उनको देखने लगे मेरी चूचियों को निहार रहे थे।  और धीरे-धीरे उनके कांपते हुए हाथ मेरी चूचियों को मसलने लगे।

मैं कुछ बोल नहीं पाई  मैं उनको नशीली निगाहों से देखने लगी।  उसके बाद तो दोस्तों में अपने बाहें फैला दी और वह मेरे बाहों में  सिमट गए।  अपना  होठ मेरे होंठ पर रख दिया और चूसने लगे। वह अपने हाथों से मेरे चूचियां दबा रहे थे और मेरे सोच को चोद रहे थे हम दोनों ही कामों को गए थे धीरे-धीरे उन्होंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और मेरे जिस्म को सहलाते  हुए मेरे नाइटी उतार दी।

मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां को देखकर वह पागल हो गए वह मेरे निप्पल को चूसने लगे एक हाथ से वह मेरे शरीर को टटोल रहे थे उन्होंने मेरे पैरों को अलग अलग किया मेरे होंठ को चूसते हुए मेरी एक हाथ से चूची को दबाते हुए और एक हाथ से मेरी चुत  पर हाथ फेरने लगे।

दोस्तों अब मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो गई थी मैं  सिसकारियां ले रही थी मैं अंगड़ाइयां ले रही थी।  उसके बाद मैंने तुरंत ही उनका लंबा मोटा सा लंड  पकड़ लिया।  पहले खूब हिलाई उसके बाद अपने मुंह में ले ली।   आइसक्रीम की तरह उनके लंड  को चूसने लगी।

अब मेरे चुत  से गर्म पानी निकलने लगा था।  मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई मैंने दोनों पैरों को फैला दिया और उनको नशीली आंखों से देखा और बोली थी आज मुझे चोद दो.  वह तुरंत ही मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए पहले तो उन्होंने खूब मेरी चुत  को चाहता।  फिर उन्होंने उंगली डाली।  गरम रस वह पी रहे थे उंगलियों में  लगा लगा कर।  उसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा।  अपना लंड  मेरी चुत  पर सेट किया।  और जोर से धक्का दे दिया दोस्तों पूरा का पूरा लंड  मेरी चुत  के अंदर चला गया।

मैं धन्य हो गई मोटे लंबे लंड  को अपने अंदर पाकर।  उसके बाद तो मैं हिला हिला कर  अपने गांड को उनके लंड  को चुत  के अंदर लेने लगे।  साथ में मैं उनके बदन को टटोल रही थी वह मेरी चूचियों को दबा रहे थे मुझे चूम रहे थे मुझे किस कर रहे थे।  मैं भी वही सब कर रही थी जो वह कर रहे थे।

जोर जोर से धक्के देने लगे मैं भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। उसके बाद तो कभी उलट कर कभी पलटकर कभी ऊपर से कभी नीचे से कभी बैठाकर कभी झुका कर कभी घोड़ी बनाकर कभी कुत्तिया बना कर।

कहीं खड़ा करके कभी लिटा कर कभी टेढ़ा  करके कभी साइड से।  वह मुझे करीब 2 घंटे तक चोदते रहे।  मैं बहुत ज्यादा थक गई थी और वह भी थक गए थे अब मेरे से सहा नहीं जा रहा था।  मुझे दर्द होने लगा था।  मेरी चूचियों को उन्होंने इतनी जोर जोर से दबाया कर उनकी उंगली का निशान मेरी चूचियों पर साफ साफ दिखाई दे  रहा था।

मैं बोली थी दामाद जी आज बस करो मेरी चुत  फट गई है।  आज के लिए इतना ही काफी है।  अब  तो मैं आपकी हूं आप मुझे जैसे चोदो जो करूं अब मैं आपकी  हूं।  फिर उन्होंने जल्दी-जल्दी धक्के देने लगे जोर-जोर से मुझे चोदने लगे मैं भी नीचे गांड घुमा घुमा कर चुदवाने लगी।

और फिर दोनों एक साथ चीखने लगे चिल्लाने लगे और एकदम से हम दोनों  एक साथ ही एक दूसरे को अपनी बांहों में पकड़ कर अपनी पूरी ताकत लगा दी वह ऊपर से धक्के दे रहे थे मैं नीचे से धक्के देने लगी।

उसके बाद उनका सारा बढ़िया मेरी चुत  के अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों  शाम तो हो गए।

उस दिन के बाद से हम दोनों ही एक पति पत्नी की तरह रहने लगे साथ नहाते थे साथ खाते थे साथ सोते थे।  उसके बाद 1 महीने मेरा  मेंस नहीं आया।  मैं भूल गई थी कि मेरा मेंस कब आया था।  उसके बाद में  प्रेगनेंसी टेस्ट की तो पता चला मैं प्रेग्नेंट हूं।  दोस्तों उधर मेरी बेटी भी  3 महीने की प्रेग्नेंट है।  और  मेरा भी दूसरा महीना चल रहा है।

जाने कि मैं भी अपने दामाद के बच्चे की मां बनने वाली हूं।  शायद मेरे लिए कैसा रहेगा क्या बुरा रहेगा वह तो मुझे नहीं पता पर मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा है अब देखिए जो होगा देखा जाएगा।

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फोन सेक्स

मेरा नाम पल्लवी है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं परियो की तरह बहुत ही खूबसूरत हूँ। मेरा कद भी लंबा है। मैं 5 फीट 8 इंच की हूँ जो की लड़कियों की के लिए काफी है। मैं जब चलती हूँ तो मेरे बड़े बड़े मम्मे बहुत ही तेजी से उछल उछल कर लड़कों का लंड खड़ा कराये रहते है। मैं भी एक लड़की हूँ। मेरा भी  मन चुदने को बहुत करता था। लेकिन मैं अपने आस पास के लड़को से नहीं चुदवाती। चोदने के बाद वही रंडी और पता नहीं क्या शुभ शुभ नाम रखने लगते है। मेरी  गांड भी बहुत जबरदस्त गोल मटोल दिखती है। चूंचियो की तरह वो भी बहुत ही सॉफ्ट है। मेरी चूत की तो बात ही अलग है। वो भी फूली हुई गद्दे की तरह है। ढेर सारा माल उसमें उसमे भरा हैं।  दोस्तों मै अब अपनी कहानी पर आती हूँ।

बात एक साल पहले की है। मैं अपनी कहानी आप लोगो की खिदमद में पेश करने को परेशान थी। ये मेरे साथ घटित सच्ची घटना है। जो की एक सफर के दौरान घटित हुई। मै उस समय तैयारी करने कानपुर जा रही थी। छुट्टियां थी तो मैं अपने घर देवरिया आयी हुई थीं। मै ट्रेन में सिंगल शीट पर बैठी हुई थी।खिड़कियों से आती हवाओ का मजा ले रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। चुदने का भी मन उन हवाओ ने बना डाला। इतने सुहाने मौसम में अब मुझे अपने चूत के राजकुमार का इंतजार होंने लगा। मै चुदने को तड़पने लगी। मेरी चूत के कीड़े जाग गये। वो काट काट कर खुजली करने लगे। मै कहने लगी- “हे भगवान मेरे लिए भी किसी लंड का इंतजाम कर दो” भगवान ने मेरी सुन भी ली।

यही सब मै सोच कर मन ही मन कह ही रही थी कि अगला स्टेशन आ गया। मै स्टेशन की तरफ देख रही थी। मुझे एक लगभग 25 साल का लड़का मेरे ही डिब्बे की तरफ बढ़ता दिखाई दिया। उसका लंबा शरीर और गठीला बदन बहुत ही आकर्षक लग रहा था। मैं पहली बार सुंदरता के साथ किसी लड़के को इस तरह देख रही थी। मैने उसके लिए तो अपनी जान रख दी। वो अंदर की तरफ शीट को ढूंढता हुआ आ रहा था। मेरे सामने वाली शीट खाली थी। उसकी पर आकर वो बैठ गया। मै अपने कान में एअरफोंन लगाए गाने का मजा ले रही थी। वो भी अपनी गांड को शीट पर टिकाकर बैठ गया। मेरी तो उस लड़के से नजर ही नहीं हट रही थी। उसने भी अपना सामान रख कर फुरसत पाई तो उसकी नजर मुझ पर पड़ ही गई। हम दोनो नैंन मटक्का करने लगे। मै भी कोई कम स्मार्ट थोड़ी थी। कुछ देर बाद हमने बोलना शुरू किया।

मै- “हाय आई ऍम पल्लवी”

वो- “निशांत…. निशांत मिश्रा”

मुझे उसके इस तरह से बोलने की स्टाइल बहुत अच्छी लगी।

मै- “आप को भी कानपुर जाना है क्या”

निशांत- “हॉ। मुझे भी वही अपनी बुआ के यहाँ जाना है। कुछ दोस्त सरकारी नौकरी की भी करते है, तो उनसे मिलने भी जाना है”

मै- “आप क्या करते हो???”

निशांत- “मैं भी मेडिकल की तैयारी कर रहा हूँ लेकिन खुद ही। कही कोचिंग के लिए नहीं गया”

धीरे धीरे उससे बात करते करते मैंने उसके लंड की तरफ अपनी नजर नीचे करके देखी। उसका लंड खड़ा हो चुका था। उसने देखते ही अपना बैग लंड पर पेंट के उपर रख लिया। मैंने उसका प्रेसर बढ़ाने के लिए अपना दुपट्टा अपने सीने से हटा दिया। मै झुक कर उससे बात करने लगी। मेरी लटकती चूंचिया  मेरे वी शेप गले में साफ़ साफ़ दिखने लगी। उसका लंड तो देखते ही मीनार बन गया । निशांत थोड़ा रोमांटिक होकर बात करने के मूड में आने लगा। अपना बैगअपनी शीट पर रख कर हम दोनो दरवाजे के पावदान पर जाकर बैठ गए। आप लोगो को तो पता ही होगा। पावदान पर कितनी जगह होती है। हम दोनों चिपक कर बैठे हुए थे। ट्रेन सरपट सरपट पटरियों पर दौड़ रही थी। उसके शरीर के स्पर्श से ही मुझे बहुत मजा आ रहा था। आज जिंदगी में पहली बार किसी लड़के के इतनी पास चिपक कर बैठी थी। आज मुझे ईश्वर ने लंड के साथ उसका ड्राइवर भी दे दिया।

निशांत- “कानपुर में अकेली ही रहती हो”

मैं- “हाँ”

निशांत शक भरी नजरों से- “फिर तो तुम्हारा बॉयफ्रेंड होगा”

मै- “नहीं मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। मैंने आज तक किसी लड़के से बात तक नही की है”

निशांत- “ये तो सभी कहती है”

मै- “तुमको मै ऐसी वैसी लड़की दिखती हूँ” इतना कहकर मै गुस्से से उठकर चलने लगी। निशांत ने मुझे पकड़ कर बैठा लिया। उसके बाद मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख कर एक हाथ मेरा पकड़ कर। मुझे अपने दिल का हाल बताने लगा। कहने लगा- “लडकियां तो बहुत देखी। लेकिन तुम्हे देखकर दिल में हलचल होने लगी। अभी तक मुझे लड़कियां प्रपोज़ करती थी। लेकिन आज पहली बार मैं किसी लड़की को प्रपोज़ करने जा रहा हूँ” मै मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। आज मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी बनने वाला था। मैं ख़ुशी से झूम उठी।  उसने फ़िल्मी स्टाइल में मेरे हाथों को पकड़ कर कहने लगा- “पल्लवी मै तुम्हेदेखते ही बहुत चाहनें लगा हूँ। मै तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ। क्या तुम मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाओगी???”

मै- “सच तो ये भी हैं कि मैं भी कुछ इसी तरह का ख्याल अपने दिल में रखे हूँ। जो आग तुम्हारे दिल में लगी है। वो मेरे दिल में भी है” उसने समझ लिया की मैने उसे अपना बॉयफ्रेंड बना लिया है। लेकिन अब कौन बताये की आग कहाँ कहाँ लगी हुई है। उसने मुझे गाल पर किस किया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने भी तुरंत जबाब दे डाला। मैंने भी किस करके पूरा कर दिया। उसने कहा-” मै तुम्हे मिलना चाहता हूं”  मैनें अपना पता उसे बता दिया मै कहाँ रहती हूँ। वो भी मुझे अपना फ़ोन नम्बर वगैरह बताने लगा। उसने पूछा- “मै तुम्हारे रूम पर आऊं तो कोई कुछ बोलेगा तो नहीं”

मै- “बता दूँगी की भैया है” इतना कहकर मै हँसने लगी…

वो मुझे चिपका कर होंठ पर किस करने लगा। मै भी उसका साथ दे रही थी। कुछ ही पल में पीछे कोई आ गया। दोनों लोग एक दुसरे को देखकर हसते हुए अलग हुए। बाद में मौक़ा मिलते ही वो एक मिनट कभी दो मिनट किस करते करते पूरा रास्ता कट गया। चलते चलते निशांत ने मेरे मम्मो को दबा ही दिया। मम्मो को दबाते ही गाडी ने  आवाज की और स्टेशन आ गया। हम दोनो को अधूरी चुदाई की प्यास बहुत ही तड़पा रही थी। स्टेशन से नीचे आते ही दूसरे दी मिलने का वादा किया। मैंने अपने कोचिंग जाने से मना भी कर दिया था। मैं तुम्हारा पूरा दिन इन्तजार करूंगा।  इतनी बात करके वो अपनी बुआ के घर चल दिया। मै भी अपने रूम पर आई। रात को नींद ही नहीं आ रही थी। मैंने अपने सारे कपडे भी उतारे दिये।

सोच सोच करके अपनी चूंचियो को मसल रही थी। मै बहुत ही गर्म हो चुकी थी। पहले सब्जियों से ही चुदाई कर लेती थी। आज भी टोकरी में जाकर देखा तो सूखा सूखा बैगन पड़ा था। आज हाथ से ही काम चलाना पड़ रहा था। मैंने किसी तरह से रात भर हाथ से काम चलाकर अपनी रात काटी। सुबह से मेरी बेचैनी और भी बढ़ने लगी। पूरा दिन भी बीत गया। निशांत नहीं आया। मेरे सारे सपनो पर लग रहा था पानी फिर जाएगा। मै दुखी होकर बैठ गई। आज कितना मेक अप किया था मैंने। लेकिन मेरे सपनों के राजकुमार का तो पता ही नहीं था। मैंने बाहर जाकर एक बार फिर से देखा तो निशांत मुझे पास ही गली में खड़ा दिखाई दिया। मै तो ख़ुशी से पागल हो गई। मैंने उसे अपने साथ लाकर रूम में अंदर आते ही दरवाजा बंद किया। उससे चिपक कर मैं किस करने लगी।

मै- “निशांत!! इतना देर क्यों करके आये। पता है मैं सुबह से ही तुम्हारा इन्तजार कर रही हूँ। तुम थे कहाँ अभी तक”

निशांत- “मेरी जान मै तुम्हारे लिए ही तो रात में आया हूँ। जिससे ज्यादा देर तक मैं तुम्हारे साथ रह सकूं”

मै- “आज तुम मेरे साथ पूरी रात रहोगे??”

निशांत- “हाँ इसीलिए तो शाम को आया हूँ। घर पर बुआ को बता दूंगा। मै अपने दोस्त के रूम पर रूक गया हूँ”

अब तो मेरी ख़ुशी बहुत ज्यादा हो गई थी। मुझे भी पता था कि वो मुझे चोदने के लिए ही आज रुका है। मैं भी खाना बनाने के लिए जा रही थी। उससे पहले ही मुझे उसने पकड़ लिया। मै उससे कहने लगीं- “निशांत अभी नहीं पहले मैं खाना बना लू”

निशांत- “मुझे भूख नहीं है। तुम्हे हो तो बना लेना अभी”

इतना कहकर मेरे होंठो पर अपना होंठ लगा दिया। ट्रैन से जबरदस्त चुसाई करने लगा। मेरी मुलायम गुलाबी गुलाब जैसी होंठो की पंखुड़ियों को चूस कर उसका रस निचोड़ने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मै भी उसका सर पकड़ कर साथ देने लगी। मै गर्म होने लगी। अब सब कुछ बड़ी तेजी से होने लगा। मेरी साँसे तेज हो गई। मै कांपने लगी। वो मेरी गांड पर एक दे मारी। मै तिलमिला उठी। कहने लगा- “इतनी काँप क्यों रही है”

मै- “मुझे नहीं पता मै क्यों काँप रही हूँ। लेकिन मुझे बहुत अजीब लग रहा है”

निशांत- “पहली बार है ना इसीलिए काँप रही हो”

मुझे घसीट कर बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया। मैं भी मूड बना चुकी थी। मैंने उसके सामने सलवार कुर्ता पहना हुआ था। मैने कहा- “निशांत थोड़ा धीमे धीमे करो मेरी धड़कने बढ़ जाती है। मैंने निशांत को पकड़ लिया। वो मेरे ऊपर ही लेट गया। मेरी चूंचियो को ऊपर से ही चूमते हुए। मेरी टांगो में टाँगे फसाकर बहुत ही मजा ले रहा था। गले को चूमते ही मैं बहुत ही जोश में आ गई। मैंने उसे कस के जकड लिया। वो समझ गया मै गर्म हो रही हूँ। उसने चूंचियो को दबाते हुए। मेरा कुर्ता निकाल दिया। मै गुलाबी रंग की ब्रा में उसके सामने मॉडल की तरह बैठी थी।  वो मुझे देखते ही अपने मुह में हाथ लगा लिए। मेरी चूंचियो की चमक से उसकी आँखे चौंधिया गई। मेरे दोनों कबूतर ब्रा की जाल में फसे हुए थे। उसने निकाल कर आजाद कर दिया। फिर उनके साथ किसी छोटे बच्चे की तरह खेलने लगा। उसने मेरी कबूतरों के साथ अपने होंठ लगा कर किस करके चूसने लगा। अब वो मुसम्मी की तरह निचोड़ रहा था। मुझे ये सब सहन नहीं हों पा रहा था। मैं उसको अपने दबाते हुए“..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की सिसकारी भरने लगी। उसने मेरी चूत पर अपना हाथ रख कर मसलने लगा। आह आह के साथ मैंने उसके हाथों को पकड़ कर और जल्दी जल्दी अपनी चूत को मलने लगी। उसने मुझे आजाद करते हुए। मेरे ऊपर से उठ कर खड़ा हो गया।

अपने पैंट को निकालते हुए उसने अपने लंड के दर्शन करवाया। मैंने अभी तक किसी का लंड नही छुआ था। उसने मेरा हाथ पकड़ कर उसको अपने लंड पे राजा पर रख दिया। पहले तो वो मुझे कुछ नरम नरम लगा। उसके बाद वो बहुत ही टाइट हो गया। बिल्कुल आइसक्रीम की कोन की तरह। उसने कहा- “अब इसे लॉलीपॉप की तरह चूसो”

मैंने चूसने से मना कर दिया। मैंने बताया मुझे उल्टी हो जायेगी। उसने कुछ नहीं कहा। मेरे गालो पर ही अपना लंड रगड़ने लगा। उसने मेरी सलवार के नाड़े को खींचकर खोल दिया। पैंटी सहित उसको निकाल कर मुझे नंगा कर दिया।  मै तड़पती हुई बिस्तर के चादर को हाथो में लपेट कर दबा रही थी। उसने मेरी टांगो को फैलाकर चूत के दर्शन किया। चिकनी चूत को देखते ही उसकी जीभ लपलपाने लगी। उसने मेरी चूत को चाट कर साफ़ करने लगा। दोनों टुकड़ो के बीच में अपनी जीभ को फसाकर मेरी गांड को दबा रहा था। मैं उसका मुह अपनी योनि में दबा रही थी। अंदर तक जीभ डाल कर उसने चूत की साफ़ सफाई कर डाली। मेरी चूत ने भी लंड के आने की ख़ुशी में थोड़ा बहुत जल छिड़क डाला। उसने अपना मुह हटाकर मेरी चूत में अपना लंड रगड़ने लगा। मै अब बहुत बेकरार हो गई थी। उसने गर्म गर्म अपना लंड मेरी चूत में डालने के लिए छेद पर रख दिया। मै तडप उठी। उसने मेरी चूत में लंड को धकेल दिया। मेरी चूत में उसका टोपा जाकर फस गया। मै जोर जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीख निकाल दी।

मुझे बहुत दर्द हो रहा था। उसका बड़ा मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ डाला। बिना मेरा  दर्द समझे वो धक्के पर धक्का मार कर मेरी चूत में अपना लंड जड़ तक घुसा कर जोर जोर से मेरी टांगो को पकड़ कर चोदने लगा। घच घच पच की आवाज एक लय में सुनाई दे रही थी। मैं भी “….उंह उंह” की आवाज से सुर ताल मिला रही थी। उसने मुझे उठा लिया। उसके बाद मेरी एक टांग उठाकर धका धक् पेल रहा था। मेरी चूंचिया हिल रही थी। उसके लंड की गोलियां मेरी टांगो पर कभी कभी लग रही थीं। उसने मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता बना डाला। जोर जोर से चुदाई का माहौल बन गया।

उसने भीं अपनी गाड़ी तेज चलाई। हचक हचक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे  दर्द दे रहा था। मैं भी बहुत उत्तेजित होने लगी। मुझे भी उस दर्द में मजा आने लगा। वो कुछ ही देर में थक गया। वो बिस्तर पर लेट गया। मै भले ही अभी तक चुदी न थी। लेकिंन फिर भी काफी स्टाइल मैने ब्लू फिल्मो से सीखा था। मै उसके लंड को खड़ा करके चूत रख के बैठने लगी। धीरे धीरे मेरी चूत ने उसका पूरा लंड जड़ तक ले लिया। मै भी उछल उछल कर चुदवाने लगी। वो मेरी चूत में अपना लंड कमर उठा उठा कर पेलने लगा। मेरी चूत में अब दुगनी स्पीड से लंड अंदर बाहर हो रहा था। मैं बहुत ही जोर जोर से उछलने लगी। मै झड़ने की स्थिति में पहुचती। उससे पहले मेरी चूत से उसने लंड निकाल लिया। मै भी झड़ने से बच गई। उसने मुझे कुतिया बनाकर कुत्तो की तरह मेरे पीछे चूत चुदाई करने लगा।

मेरी कमर पकड़ कर उसने जोर जोर से झटके पर झटका लगाना शुरू किया। मै बहुत ही तेज तेज चीखने लगी। वो भी झड़ने वाला था। उसके चोदने की रफ़्तार का कुछ पता ही नहीं चल रहा था। मेरी चूत ने भी अपना माल निकाल दिया। उसने माल चूत में लगे लगें ही कुछ देर तक चोदा। उसके बाद मेरी चूत से अपना लंड निकाल कर वो भी मुठ मार कर मेरी चूंचियो पर ही झड़ दिया। उसके बाद पूरी रात चुदाई की। फिर आज तक उसके साथ सिर्फ फोन सेक्स कर पाती हूँ। अगर गॉड ने चाहा तो मुझे फिर से उसका लंड खाने का मौका मिल जाएगा।

 

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मेरी गांड फाड़ दी

असल में मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी शादी एक बड़े घर में हुआ है शादी करवाने वाली मेरी सौतेली माँ है। उसने पांच लाख लेकर मेरी शादी करवाई है। तो आपको समझ आ गया होगा। या तो मैं अपने ससुराल से भाग जाऊं या जो हो रहा है उसी का फायदा उठाऊं और ज़िंदगी जिऊँ। दोस्तों इसी कसमकस में सोची की शायद मुझे यही सही रहेगा की मैं ससुराल में ही रहूं। अगर मैं भाग जाती हूँ तो यहाँ मुझे तीन चोद रहा है। पता नहीं कितने लोगों के बिस्तर को गर्म करना होगा हालात से लड़कर और जीने के लिए। और रही बात वापस हरियाणा जाने की जहाँ एक चुड़क्कड़ सौतेली माँ हो वो मुझे वह भी बेचेगी। तो बार बार और कई लोगों से बिकने से अच्छा है की एक घर में ही चुदवा लूँ।

अब मैं आपको अपनी पूरी कहानी बता रही हूँ।

शादी के बाद मैं अपने ससुराल आ गई। रात में पति ने मेरे साथ खूब रंगरेलियां मनाई मैं भी खूब गांड उठा उठा कर चुदवाई। रात में मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया। मेरी गांड फाड़ दी थी चुत मार कर। मैं भी तैस में आ गई और खूब कूदी उसके लंड पर और खूब मजे ली पूरी रात। पर जब वो ठंढा पड़ा और मैं कपडे पहन ली तब वो मुझे रूल समझाने लगा की मेरे घर का क्या रूल है। उसने एक बात बोला की तुम कभी भी मेरे पापा को और मेरे भाई को नाराज नहीं करोगी ? मैं भी तैस में आकर पूछ ली। नाराज क्या ? क्या वो मेरी चूत मांगेगे तो वो भी देनी पड़ेगी। तो मेरा पति बोला हां सब कुछ।

मेरी सास नहीं है। वो पहले ही चल बसी शायद तीन तीनो ने चोद चोद कर ऊपर पहुंचा दिया था। 50 साल की उम्र के बच्चा होने वाला था। शायद इन तीनो का ही काम होगा, मैं इसके बारे में कुछ पूछी नहीं। मुझे लगा जो भी कह रहा है मेरा पति मान लेते हैं। आगे देखा जाएगा क्या करने है। पहले तो सौतेली माँ से ही मेरा पाला छूटा यही कम नहीं थी। रही बात ससुर का वो देख लुंगी और रही बात देवर का तो मजे लुंगी।

सुबह मेरा पति अपने ड्यूटी पर चला गया क्यों की उसे जाना जरुरी था। देवर भी उठा और वो भी चला गया अपने काम कर रह गया घर में बूढा। मैं नहाने गई बाथरूम में। नहा कर जैसे बाहर आई और अपने कमरे में गई तो बूढा मेरी पलंग पर बैठा था। मैं पूछी की बाबूजी आप यहाँ? तो वो बोला क्यों नहीं बहुरानी ये घर ऐसा है कोई भी कही जा सकता है। एक चीज को हम लोग बाँट कर खाते हैं। एक की शादी हो गई अब आप एक की नहीं हो हम तीनो की हो।

मैं सनझ गई, रात को जो मेरा पति बोला था वही हुआ। ससुर मुझे चोदने के लिए तैयार था। मैं बोली अभी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। रात भर उन्होंने मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया है। दर्द कर रहा है। तो उन्होंने बोला इसका मैं ख्याल रखूंगा। मैं अभी नहीं चोदता हूँ। मैं तुम्हारी चूत में तेल लगा देता हूँ ताकि दर्द ख़तम हो जाये। मैं मना की पर उन्होंने कहा नहीं नहीं मुझे ये दर्द पसंद नहीं। मैं आता हूँ तेल गरम करके।

तब तक मैं बाल झाड़ कर सिंदूर रही थी तभी ससुर जी। सरसों का गरम तेल ले आये और मुझे बोले लेट जा। मैं लेट गई। उन्होंने पेटीकोट ऊपर कर दिया। और पेंटी उतार दी। दोनों पैरों को फैला दिया और पहले चूत को सहला कर देखा और मुस्कराने लगे। बोले भगवान् में मेरी सुन ली। मैं भगवान् से माँगा रहा था की मुझे ऐसी बहू देना जिसके चूत में बाल नहीं हो। और ऐसा ही हुआ क्लीन है तुम्हरी चूत।

उसके बाद वो तेल लगाने लगे। करीब पांच मिनट तक तेल लगाए मेरी चूत गीली होने लगी। चूचियां भी तन गई थी। मुझे ऐसा लग रहा था इनसे चुद जाऊं। तभी उन्होंने कह दिया बहु हौले हौले घुसाऊ। मैं बोली ठीक है।

उन्होंने तुरंत धोती खोला और नीला अंडरवियर जो लाइन बाला होता है। खोल दिया और लैंड को हिलाने लगे और उसमे भी उन्होंने तेल लगा लिया और फिर से मेरी चूत में तेल लगा लिया और चूत पर लंड लगा कर घुसाने लगे। पर उनका लौड़ा घुस नहीं रहा था क्यों की दम नहीं था। खड़ा सही से नहीं हो रहा था। फिर उन्होंने हिलाया और फिर मेरी मुँह में दे दिया जब मैं थोड़े देर तक अपने मुँह में ली तो उनका लौड़ा मोटा और लंबा हो गया।

अब वो मेरी चूत में घुसा दिए और करीब दस मिनट तक चोदे और सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिए। मैं प्यासी ही थी अभी दर्द तो ख़तम हो गया था। अब दर्द नहीं हो रहा था। बाबूजी खेत चले गए। मैं सो गई क्यों की रात में चुदवा रही थी।

करीब तीन बजे नींद खुली वो भी जब घर का दरवाजा कोई पीट रहा था। जाकर खोली तो देखि देवर जी थे।

वो अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिए। और मुझे अपनी बाहों में ले लिए। मैं भी खुश खुश उनके बाहों में समा गई। क्यों की देवर जी को मैं पसंद करती थी वो मेरे लायक थे। वो मेरे होठ को चूसने लगे चूचियां दबाने लगे। मैं भी उनको किस करने लगी सहलाने लगी।

वो मुझे बैडरूम में लेकर आये और मेरी ब्लाउज खोल दिए मैं खुद ही ब्रा खोल दी पेटीकोट भी उतार दी। ये सब देखकर बोले मुझे बहुत ख़ुशी हुई आप मेरे घर के कायदे कानून को बिना झिझक के अपना लिए हैं। आप रानी बनकर रहेंगे इस घर में।

और वो मेरे ऊपर टूट पड़े मेरी चूचियां पिने लगे। दबाने लगे। होठ चूसने लगे। और फिर उन्होंने मेरी गांड चाटी और फिर चूत चाटने लगे। मैं बोली बस करो ऐसे चाटना अभी मुझे चोद दो। क्यों की ससुर जी मुझे गरम कर के चले गए। वो बोले अच्छा बाबूजी मजा ले लिए तो मैं बोली हां वो मुझे चोद दिए। तो देवर जी बोले और मैं ही पीछे रह गया।

और उन्होंने में टांग को अलग अलग किया और मोटा लौड़ा मेरी चूत पर लगा कर पेल दिया। अब मुझे दर्द होने लगा था क्यों की देवर का लौड़ा काफी मोटा और लंबा था। वो चोदना शुरू किये तो मैं पानी पानी हो गई। खूब चोदा उठा पर पटक कर ऊपर से निचे से बैठ कर खड़े होकर। करीब एक घंटे तक उन्होंने चोदा मुझे आखिर उनका भी गिर गया।

उन्होंने अपने जेब से एक सोने का चेन निकाला और मुझे दे दिया और बोले ये मेरे तरफ से।

दोस्तों पहले तो सात दिन तक मुझे काफी दर्द हुआ था। क्यों की मेरी चूत नाजुक थी। पर अब मैं तैयार हो गई है तीन मर्द से चुदने को तो अब कोई बात नहीं है। खूब चुद रही हूँ मजे ले रही हूँ। मैं अपनी दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने जा रही हूँ। आप जरूर पढियेगा।

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दारुबाज पति ने लॉक डाउन में दोस्तों से चुदवाया

दोस्तों कई रिश्ते ऐसे होते हैं जिसपर भरोसा होता है की वो जो भी करेगा भले के लिए करेगा पर कई बार ये बचाने वाला ही कई बार बेच देता है। ऐसा ही मेरे साथ आजकल हो रहा है। घर में खाने को नहीं है पति को दारू भी रोजाना चाहिए घर में राशन नहीं है। पति ने कहा आजकल मेरा काम नहीं चल रहा है। इसलिए अब तेरे पर ही आशा है। ये सब कहकर मुझे फंसा दिया और सौंप दिया अपने दोस्तों को। अब मेरी चुदाई रोज हो रही है। आह आह की आवाज और पलंग टूटने की आवाज शायद उसको भी सुनाई पड़ता होगा। क्यों की मैं कमरे में चुदती हूँ और वो बाहर सोया रहता है।

आप खुद सोचिये किसी की बीवी कमरे में आह आह आह ओह्ह ओह्ह ओह्ह और जोर से और जोर से चोदो कहे और उसका पति ये सब चुपचाप सुनता रहे उसको आप क्या कहेंगे।

दोस्तों एक बात और मैं आपको बता देना चाहती हूँ। ये सब मज़बूरी में उठाया गया कदम था पर ये मज़बूरी अब मुझे अच्छी लगने लगी है। मैं खुश हूँ चुद कर। क्यों की जब इसमें मजे आने लगे और मेरी जरुरत भी पूरी होने लगे और खुद मैं भी मजे करूँ तो क्या बुराई है।

अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ और बताती हूँ कैसे क्या हुआ।

रमेश गुर्जर मेरे पति के दोस्त हैं। बहुत पैसे वाले हैं। मेरा पति एक छोटी सी नौकरी करता है। आजकल काम बंद है तो घर पर ही है मालिक ने पैसे भी नहीं दिए मेरी कोई बच्चा अभी तक नहीं है शादी के तीन साल हो गए हैं। हॉट हूँ सुन्दर हूँ और ज्यादा उम्र भी नहीं हुआ है कम उम्र में शादी हो गई है। पर पति की उम्र ज्यादा है आजतक कभी भी वो मुझे चुदाई में खुश नहीं कर पाया जब तक मैं गरम होती हूँ तब तक वो ठंढा हो चुका होता है।

लॉक डाउन में रमेश जी मेरे घर का काफी ख़याल रखे हैं। पति को भरपूर मदद किये है। पति को दारु से लेकर घर के खर्चे और घर किराये तक का सभी का इंतज़ाम उन्होंने किया और नकद भी मदद किया।

रमेश जी की शादी इसी साल हुई है पर बीवी अब उनके साथ नहीं है पुराने यार के साथ भाग गई है। और मेरे पति को मदद करने का कारन शायद मैं हूँ। उनकी निगाहों जालिमो वाली मेरे ऊपर हमेशा से ही रहा है पर करीब नहीं आये शायद वो लम्बे रेस का घोडा बनना चाहते हैं इसलिए सब कुछ धीरे धीरे कर रहे हैं।

एक दिन उन्होंने पति को अपनी जाल में फंसा लिया और मुझे सौंपने के लिए राजी कर कर लिया। मेरे पति को भी शायद इसकी जरुरत थी। मेरे पति को भी लगता था की मैं भाग जाउंगी क्यों की वो ना मेरे खर्चे पूरा कर पा रहा था ना तो मेरी चुदाई कर पा रहा था। इसलिए सेफ साइड से वो रमेश जी को मेरी ज़िंदगी में घुसाना चाह रहा था। ताकि मैं भी रह जाऊं और सब काम भी हो जायेगा और आजकल का समय भी गुजर जाये।

एक दिन पति को खूब दारु पिलाया उन्होंने देर रात तक मेरे यहाँ भी रहे जब मेरा पति उलट गया पी कर तब वो मेरे करीब आ गए। और मेरा हाथ पकड़ लिए। और कहने लगे मैं वो सारी ख़ुशी आपको दूंगा जो आपके पति नहीं दे पाए और सच तो ये है की मैं उनको भी आगे बढ़ाऊंगा। आप इसको गलत मत लेना। पर मैं आपको बहुत चाहता हूँ और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ। पहले तो लगा की शायद ये गलत है पर सोची की गलत क्या है इसमें ? मुझे वो सारी खुशियां मिल जाएगी तो मैं भी राजी हो गई।

मैं चुप रह गई और अपने आँचल को निचे कर दी बड़ी बड़ी चूचियां गोल गोल और टाइट। होठ मेरे फड़फड़ा रहे थे मेरी साँसे तेज हो रही थी। ऐसा लग रहा था आज मेरी सुहागरात है। दोस्तों मैं डर भी रही थी और खुश भी थी। ये मौक़ा मैं खोना भी नहीं चाहती थी। पर एक कोने में ये भी बात था की ये गलत है। ये सब सोचते सोचते सोचते लेट गई।

रमेश जी दरवाजा बंद कर दिए मेरा पति बरामदे पर सो गया था पी कर। रमेश जी मेरे करीब आये और ब्लाउज का हुक खोलने लगे और एक ऊँगली को मेरे होठ पर फिराने लगे। मेरे रोम रोम सिहर रहे थे। अजीब सा लग रहा था कंठ सुख रहे थे। उन्होंने ब्लाउज का बटन खोल दिया मैं साइड उल्ट गई वो हुक ब्रा का भी खोल दिए मैं ब्रा खुद से उतार दी और निचे गिरा दी।

मेरी चूच ऐसी है जैसे किसी अठारह साल की लड़की का हो। ऐसा लगता है जैसे आजतक किसी ने टच नहीं किया हो। गुर्जर मेरी चूच देखकर ही फ़िदा हो गया। वो तो टूट पड़ा चूच पर पीने लगा दबाने लगा खेलने लगा। फिर मैं साडी निचे फेंक दी और पेटीकोट का नाडा खोल दिया। बाकी पेंटी तो रमेश जी खुद उतार दिए। और मेरी चूत की बाल को चाटने लगे और चूत में जीभ घुसाने लगे। मैं तर बतर होने लगी। पसीन निकलने लगे मेरे माथे से।

चूत गीली हो गई। अब वो अपने सारे कपडे उतार दिए। अपना मोटा लौड़ा मेरी दोनों चूचियों के बिच रगड़ने लगे फिर वो मेरी मुँह में दे दिया। करीब दो मिनट में ही उनका लौड़ा मोटा और करीब आठ इंच लंबा हो गया।

अब वो चुदाई के लिए तैयार थे और मैं भी अपनी चुदाई के लिए तैयार थी। मैं दोनों पैरों को अलग अलग कर दी। वो बिच में आ गए अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के बीचोबीच रखे और जोर से घुसा दिए। मैं तकिये को जोर से पकड़ ली। फरफरा गई दर्द से। कहा तीन इंच का छोटा लंड मेरे पति का और आज आठ इंच का लैंड और तीन इंच मोटा। पहली बार गया।

दो तीन चोट उन्होंने मारा और फिर चूत भी गीली हो गई थी। अब लौड़ा अंदर बाहर होने लगा। मैं आह आह करने लगी। करंट लग रहा था पुरे शरीर में। आज मुझे असली मर्द मिला था। लॉक डाउन में तो मेरी मनोकामना पूर्ण हो रही थी। और घर में खुशियां भी आ रही थी।

अब वो जोर जोर से चोदने लगे और मैं भी अपनी वासना की आग बुझाने लगी शर्म छोड़कर। मैं खुद ही चूचियां दबाती उनको किस करती। उनके छाती को सहलाती और चुदवाती। मैं काफी जोश में आ गई थी। इसलिए आवाज तेज हो गई और कहने लगी चोदो मुझे चोदो खूब चोदो। मैं चाहती हूँ मेरे बच्चे का बाप भी आप ही बनो। आह आह आह आह घुसाओ पूरा और घुसाओ। कितना मोटा लौड़ा है आपका गुर्जर जी मजा आ गया आज मेरी प्यास बुझ गई है।

आप मुझे रोजाना चोदना और मेरे घर पर भी ध्यान रखना पति को भी खुश रखना ताकि वो सौंपे आपको और आप मुझे खूब चोदो ऐसे ही चोदो मेरी रात आप ही रोजाना रंगीन करो। मैं आपको प्रेमिका आपकी रखैल बन्ना चाहती हूँ। अब मैं आपकी हूँ आप चाहे तो चूत मारो या गांड मैं मना नहीं करुँगी। और आह आह आह करने लगी।

तभी मेरा पति जग गया दरवाजा खटखटा कर बोला। धीरे बोल ले बाहर तक आवाज आ रही है। पर मैं कहा रुकने वाली मैं बोली सो जा तू। आज मुझे अपनी गर्मी बुझा लेने दे।

दोस्तों फिर उन्होंने उलट कर पलट कर खड़ा कर के निचे बैठा के ऊपर लेके खूब चोदा और मैं भी खूब चुदवाई। करीब रात के ढाई बज गए थे। फिर हम दोनों एक साथ ही नंगे सो गए।

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