Redirecting in 20 seconds...

मेरी चूतड़ों की चुदाई

मेरी स्कूटी खराब होने पर एक ऑटो में मैंने लिफ्ट ली. रास्ते में ड्राईवर मेरी फुदी के साथ खेलता आया. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था. घर आयी तो ड्राईवर बहाना बना कर हमारे घर में रुक गया.
अब आगे:

मैंने टाइम देखा तो 11 बज चुके थे. मैंने पाजामा और टी-शर्ट पहन ली और ऊपर से एक चादर ओढ़ ली.
अपने कमरे से बाहर आकर देखा तो सास ससुर जी के कमरे का दरवाजा बंद था. बाहर की सभी लाइट्स भी बंद थी.

मैं दबे पैरों से घर के पीछे बने शेड की ओर चली गयी. वहाँ कमरे के दरवाजे को धीरे से धकेला. दरवाजा अपने आप खुल गया और फिर मैंने अंदर जाते ही दरवाजा बंद करके कुण्डी लगा दी.

कमरे में पूरी तरह से अंधेरा था मगर मुझे पता था कि चारपाई कहाँ है. इसलिए मैं अंधेरे में ही चारपाई के पास पहुँच गयी और बिस्तर पर टटोलने लगी.

ड्राइवर भी मेरा ही इंतजार कर रहा था. उसने अंधेरे में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे चारपाई पर खींच लिया और साथ ही बोला- आ गयी जानेमन! कब से तेरा इंतजार कर रहा था.
मैंने उसके बिस्तर में घुसकर उसके साथ लेटते हुए कहा- हाँ आ गयी. अब कर लो जो करना है. ऑटो में तो सब कुछ नहीं कर पाए.

ड्राइवर ने भी मुझे बांहों में लेकर अपनी ओर खींचते हुए कहा- क्या करता जानेमन, तेरी सास जो साथ में थी. वरना मैं तो तुमको उसी वक़्त अपनी बांहों में ले लेता.
और साथ ही साथ वो मेरे गालों और मेरी गर्दन पर अपने होंठ रगड़ने लगा.

वो अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ और मेरे बालों को सहलाने लगा. मैंने भी अपनी एक टाँग उसकी कमर पर चढ़ा दी और अपने हाथों से उसकी पीठ को मसलने लगी.
उसने अपने सभी कपड़े पहले से ही उतार रखे थे सिर्फ़ अंडरवीयर ही पहना हुआ था.

मेरी लंबी गर्दन गोरे गोरे गालों और मेरे चेहरे को चूमते हुए उसने मेरे होंठों को अपने मुँह में ले लिया और मेरे होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. फिर अपना लंड मेरी फुदी के साथ कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

ऐसी सर्दी में मर्द के आगोश में मुझे जो सुख मिल रहा था मैं बयान नहीं कर सकती.

हम दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपक रहे थे जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते हों. मेरे मम्मे उसकी छाती से रगड़ रहे थे और मैं वासना के समंदर में डूबती जा रही थी.

उसने मेरी टी-शर्ट को उपर उठा दिया और फिर मेरे गले और मेरी बाजू से निकाल कर अलग कर दिया. मेरे दोनों नंगे मम्मे उसकी नंगी छाती पर रगड़ने लगे. वो भी अपनी छाती मेरे मम्मों पर रगड़ रगड़ कर मज़ा लेने लगा.

एक हाथ से उसने मेरे एक मम्मे को पकड़ा और उसके निप्पल को मसलते हुए अपने मुँह में ले लिया.
मैंने भी अपने आप को थोड़ा ऊपर उठा कर उसके मुँह में अपना मम्मा डाल दिया और फिर उसके पेट पर बैठ गयी. मैं उसके मुँह पर अपने दोनों मम्मे दबाने लगी. मेरे बाल बिखर कर उसके चेहरे के इर्द गिर्द फैल गये और वो अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स को पकड़ कर बारी बारी अपने मुँह में डाल कर चूसने लगा.

मैं भी उसके सर के नीचे से अपने हाथ डालकर उसके सर को अपने मम्मों पर दबा रही थी..

फिर वो मम्मों को मुँह में डाले हुए ही अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर फेरने लगा. फिर अपने हाथ चूतड़ों की तरफ लाते हुए मेरे पजामे को भी नीचे सरकाने लगा.
मैंने भी उसका साथ देते हुए अपने पजामे को उतार दिया.

अब मैं बिल्कुल नंगी हो चुकी थी और उसका अकड़ा हुया लंड उसके अंडरवीयर में से ही मेरी फुदी पर महसूस हो रहा था. मैंने उसके लंड को अंडरवीयर के ऊपर से ही पकड़ा और उसको सहलाने लगी.

उसका लंड एकदम सख्त हो चुका था.

फिर मैं रज़ाई के बीचों बीच नीचे सरकती गयी और अपने चेहरे को उसके लंड के सामने ले आई. मैंने धीरे से उसके अंडरवीयर को नीचे सरकाते हुए उसका लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया.
ड्राइवर के मुँह से आहह … की आवाज़ निकल गयी और वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा. उसने अपनी दोनों टाँगों को फोल्ड करते हुए अपने घुटने उपर उठा लिए. मैं उसकी टाँगों को बीच में अपने मुँह में लंड लिए हुए ज़ोर ज़ोर से उसका लंड अंदर बाहर करने लगी.

ड्राइवर के मुँह से आह्ह ह्ह्ह आअह ह्ह्ह की आवाज़ें सुन कर मैं और भी उत्तेज़ित होकर उसके लंड को चूस रही थी. बीच बीच में मैं उसका लंड मुँह से निकाल कर अपने चेहरे, गर्दन और गालों पर भी रगड़ लेती.

काफ़ी देर तक मैंने उसका लंड चूसा और फिर मैं उसके ऊपर आकर लेट गयी और उसके लंड को अपनी फुदी पर सैट करने लगी. उसका तना हुया सख्त लंड मेरी गीली फुदी के होंठों का स्पर्श पाते ही हिचकोले मारने लगा और मेरी फुदी के अंदर जाने को बेताब होने लगा.

मैंने उसके लंड पर अपना थोड़ा सा वजन डाला और उसका लंड मेरी गीली फुदी की दीवारों को खोलता हुआ मेरे अंदर समाने लगा. ड्राइवर ने भी मेरी कमर को पकड़ते हुए नीचे से एक झटका लगा दिया जिससे उसका मोटा और विशाल लंड मेरी फुदी के भीतर तक समा गया.
मेरे मुख से संतोष और आनन्द से भारी सिसकारी निकली ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
एक अरसे के बाद मेरी फुदी को बढ़िया लंड मिला था.

अब मैं अपनी कमर को उपर नीचे हिला हिला कर उसका लंड अपनी फुदी में पेलने लगी. वो भी मेरे धक्कों से अपने धक्के मिला कर नीचे से ही मेरी फुदी चोदने लगा.

काफ़ी देर तक मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसका लंड अपनी फुदी के अंदर बाहर करती रही और फिर उसने मुझे पलट कर अपने नीचे कर दिया और अपना लंड मेरी फुदी में जड़ तक धकेलते हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

उसके दोनों हाथ मेरे कंधों के नीचे थे और वो मेरे उपर लेट कर मुझे ज़ोर ज़ोर से पेले जा रहा था.
मैं अपनी दोनों टांगें उसकी कमर से लिपटा कर उसके धक्कों का जवाब धक्कों से ही दे रही थी.

अब मेरी फुदी से रस की फुहारें छूटने वाली थी. मैंने उसकी कमर पर अपने नाख़ून गाड़ते हुए उसे अपने सीने से लगा लिया और फिर मेरी फुदी में से रस की फुहारें छूट पड़ी.
मैं उसके सीने से लिपट गयी और उसको रुकने को कहा.

वो अपना लंड मेरी फुदी में ही गाड़े हुए रुक गया. मेरे होंठों को चूमने लगा और बोला- क्या हुआ मेरी अनारकली? थक गयी?
मैंने कहा- हाँ … कुछ देर रुक जाओ, फिर दुबारा करते हैं.
तो वो मान गया और अपना लंड मेरी फुदी में से निकाल कर मेरे साथ ही लेट गया.

मैंने लेटे हुए ही उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया. उसका लंड मेरी फुदी की चिकनाहट से पूरी तरह से भीगा हुआ था. वो भी मेरी फुदी पर अपना हाथ रख कर मेरी फुदी को सहलाने लगा. कभी मेरी फुदी को अपनी मुट्ठी में भींचता और कभी मेरी फुदी के बीच अपनी उंगली डाल देता.

फिर वो उठा और मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया और मेरी दोनों जांघों को चूमने लगा.
मेरी फुदी में फिर से चुलबुलाहट होने लगी.

और धीरे धीरे वो मेरी फुदी की तरफ बढ़ने लगा. मेरी फुदी भी सकपकाने लगी.
फिर आख़िरकार उसने एक चुंबन मेरी फुदी के होंठों पर भी छोड़ दिया और फिर मेरी फुदी को नोच नोच कर चूसने लगा.

उसके इस वार से मेरा पूरा बदन कांप उठा और मैंने अपनी दोनों टाँगें उठा कर उसके कंधों पर रख दी. मैं उसके सिर को अपनी फुदी पर दबाने लगी. वो भी मेरी जांघों को पकड़ कर अपनी ज़ुबान को मेरी फुदी के अंदर तक घुसेड़ रहा था.

मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और मेरे मुँह से ज़ोर ज़ोर की सिसकारियाँ निकलने लगी. मैं आअहह आहह करते हुए अपनी कमर ऊपर नीचे हिला रही थी और उसके सिर को अपनी टाँगों में दबाए हुए दोहरी तिहरी हो रही थी.

एक बार फिर से मेरी फुदी में से पानी निकलने लगा था और ड्राइवर उसे चाट चाट कर मुझे और भी मज़ा दे रहा था.

अब ड्राइवर ने मुझे घोड़ी बन जाने को कहा.
तो मैंने उल्टी होकर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा दिया और अपनी कमर को आगे से नीचे झुका दिया. जिससे मेरी फुदी और गांड दोनों खुलकर उसके सामने आ गयी.

उसने हाथ से सहलाते हुए मेरी फुदी में अपना लंड डाल दिया और खड़े होकर मेरी कमर को पकड़ कर मुझे चोदना शुरू कर दिया.
वो मेरी ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था और मैं उसकी दमदार चुदाई का मज़ा ले रही थी.

मेरी प्यासी फुदी की प्यास अब ख़त्म हो रही थी. मैं अपनी कमर को उसके झटकों के साथ मिला कर हिला रही थी और एक आनंद के सागर में डूबती जा रही थी.

मेरी फुदी से मेरा लावा बह कर मेरी जांघों तक आ चुका था और मेरी फुदी से फ़च फ़च की आवाज़ें आ रही थी. वो भी मेरी पतली कमर को सहलाते हुए मेरे बालों को ऐसे पकड़ लेता जैसे वो किसी घोड़ी को हांक रहा हो.

बहुत देर तक वो मुझे ऐसे ही चोदता रहा. और फिर वो भी अपना माल निकालने के लिए तैयार हो गया. अपनी टाँगों को अकड़ाते हुए उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और फिर एक दो झटकों में ही उसने मेरी चीखें निकाल दी.
उसने अपना ढेर सारा माल मेरी फुदी के अंदर छोड़ दिया था और रुक रुक कर झटकों से अपने माल की एक एक बूँद मेरी फुदी में उड़ेल रहा था.

माल छूटने के बाद भी वो लंड फुदी में डाले हुए ही मुझे कितनी देर तक पकड़े हुए खड़ा रहा और मैं भी उसके सामने घोड़ी बन कर झुकी रही.

फिर उसका लंड ढीला होकर बाहर आने लगा तो हम लोग चारपाई के ऊपर ही लुढ़क गये और तेज तेज साँसें भरने लगे.

हमने टाइम देखा तो रात का एक बज चुका था. मैंने ड्राइवर से कहा- अब हमारे पास तीन घंटे और हैं. क्योंकि पाँच बज़े तक मेरी सासू माँ जाग जाएँगी और मैं चार बजे तक अपने कमरे में जाकर सो जाऊँगी.
उसने कहा- यार बस तीन घंटे? इतने टाइम में क्या होगा यार! मेरा तो मन भी नहीं भरेगा इतने टाइम में!
तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर सुबह तक तुम्हारे पास ही रहती हूँ. पकड़े गये तो कोई बात नहीं!

मेरी बात सुनकर वो भी मुस्करा दिया और बोला- अच्छा जैसा तेरा हुकम मगर यह तीन घंटे तो अच्छे से मज़ा दे दो.
मैंने कहा- अच्छे से ही तो मज़ा दे रही हूँ. और कैसे मज़ा दूं?
तो बोला- यार, अंधेरे में तेरी सूरत नहीं दिखती, मैं तेरी सूरत देखकर तुमको चोदना चाहता हूँ लाइट जला कर!
मैंने कहा- ठीक है जला लो लाइट!
अंधेरे में मुझे भी मज़ा नहीं आ रहा था.

और फिर मैंने खुद ही उठ कर लाइट जला दी और खिड़की के आगे अच्छी तरह से परदा कर दिया. वैसे तो खिड़की पहले ही बंद थी.

मैं फिर से ड्राइवर के बिस्तर में आकर लेट गयी.

अब वो मेरे चेहरे पर हाथ फेरते हुए मेरे हुस्न की तारीफ करने लगा और साथ ही मेरे बालों में मेरे मम्मों पर और मेरे गालों पर अपना हाथ घुमाने लगा. मैं लेटी हुई ही उसका लंड सहला रही थी.
कुछ ही देर में उसका लंड खड़ा हो गया. मैंने उसके लंड को दबाते हुए इशारा किया और वो मुस्कराते हुए मेरी टाँगों के बीच आ गया. अब उसने मेरी एक टाँग अपने कंधे पर रख ली और मेरी दूसरी टाँग अपनी दोनों टाँगों के बीच लेकर उस पर बैठ गया.

फिर मेरी फुदी पर अपना लंड गाड़ते हुए एक ही झटके में सारा लंड मेरी फुदी में घुसेड़ दिया. मेरे मुँह से मीठी मीठी सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी और वो मेरी एक टाँग को पकड़े हुए मेरी फुदी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.

हमारी चुदाई फिर से जोरों पर चलने लगी. हम पोज़िशन बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे. कभी वो मुझे गोद में उठा कर चोदता तो कभी लिटा कर चोदता.

ऐसे ही 3-4 बार और उसने मेरी चुदाई की.

सुबह के 4.30 बज चुके थे. मैंने अपने कपड़े पहने और उससे फिर मिलने का वादा करके अपने कमरे में आ गयी.

कमरे में आकर अकेली सोने में कोई मज़ा नहीं आ रहा था. मन कर रहा था कि किसी नंगे मर्द की बांहों में नंगी होकर आराम से सुबह तक सोती रहूं!

 942 total views,  2 views today

Tagged : / / / / / / /

वो लंड के सुपारे को मेरी चूत पर रगड़ने लगा.

मेरा नाम मन्नत मेहरा है, मेरी उम्र 35 साल की है, फिगर साइज 38-32-40 का है, पर एकदम पटाखा माल जैसी लगती हूँ. मैं कहां से हूँ, आपको यह नहीं बता सकती हूँ. मैं एक तलाकशुदा औरत हूँ. पति के तलाक के बाद मेरी जिंदगी कुछ खास नहीं थी, तलाक के 2 साल तक मैं चुदी नहीं थी, अपने जिस्म की आग को बस यूं हाथ से ही बुझा कर काम चला रही थी.

एक दिन मैं अपने लिए ब्रा पैंटी खरीदने गयी. मुझे वहां एक फैंसी ब्रा पैंटी के सैट बहुत पसंद आया, तो मैंने वो खरीद लिया. वहां का जो मालिक का था, वो मुझे काफी घूर रहा था. शायद वो यही सोच रहा था कि इतनी बड़ी ब्रा क्या सच में इसे आती होगी या नहीं.
मुझे भी मस्त लग रहा था क्योंकि मुझे ये सब अच्छा लगता था.

उस दिन मैं साड़ी पहन कर गयी थी … जिसमें मेरी बॉडी काफी खुली दिख रही थी. खैर … मैं ब्रा पैंटी खरीद घर आ गयी.

अगले दिन उस सैट को मैंने यूज किया, लेकिन शाम होते होते पता नहीं क्यों ब्रा की स्ट्रिप टूट गयी, इससे मुझे बहुत गुस्सा आया. अगले दिन मैं फिर उस दुकान पर गयी, उस दिन उस दुकान का सिर्फ मालिक ही था.

मैं गुस्से में बोली- आप लोग क्या सामान बेचते हैं, इतने मंहगे सामान देते हैं और घटिया क्वालिटी का सामान बेचते हैं.
इस पर उस दुकानदार ने पूछा- क्या हुआ मैडम … आप पूरी बात तो बताएं?

मैंने उसे अपनी बात बताई. उसने ब्रा को देखा और मेरी चूचियों को देखने लगा. फिर उसने कहा- मैं आपको नया सैट देता हूँ, आप ये ले कर जाइए, ये हमारी दुकान का सबसे अच्छा माल है … आपकी तरह.

‘आपकी तरह’ ये शब्द उसने धीरे से कहे थे, लेकिन मैंने सुन लिए.
उसकी बात को सुनकर भी मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. बस उसे देख कर रह गई.

उसने कहा- अगर इसमें कोई प्रॉब्लम हुई, तो आप मुझे इस नंबर पर कॉल कीजिएगा.
यह कहते हुए उसने अपना नंबर मुझे लिख कर दे दिया.

मैंने दुकानदार से उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम राहुल बताया. राहुल दिखने में काफी स्मार्ट था. देखने में लंबा और हट्टा-कट्टा भी लग रहा था. एक बार के लिए तो मुझे न जाने क्यों मन में हेनू हेनू हुई. मैं मन ही मन उससे आकर्षित हो गई थी.

मैं उससे ब्रा पैंटी का सैट लेकर घर आ गयी.

घर आकर मैं न जाने क्यों राहुल के बारे में ही सोच रही थी. पता नहीं उस राहुल ने मेरे ऊपर क्या जादू कर दिया था. मैं सच में उसकी तरफ मोहित हो गयी थी.

इस बार मैंने ब्रा पहनी और जोर से अपने मम्मों को कुछ इस तरह से फुलाते हुए अंगड़ाई ली कि ब्रा पर जरूरत से ज्यादा जोर पड़ गया. मैंने जानबूझकर फिर से ब्रा की स्ट्रिप तोड़ दी.

फिर अगले दिन उसे कॉल किया, तब उससे बात हुई. उस मैंने बताया कि आप तो कह रहे थे कि आप बहुत बढ़िया माल दे रहे हैं, लेकिन इस बार तो ब्रा पहनते ही इसकी स्ट्रिप टूट गई.

उसने कहा- ऐसा नहीं हो सकता, आप आज हमारी दुकान पर 3 बजे आइए, मैं देखता हूं कि क्या प्रॉब्लम है.
मैं बोली- मैं इतनी फ्री नहीं हूँ, जो रोज रोज आपकी दुकान पर आऊं. जब मुझे टाइम मिलेगा, तब आऊँगी.
ये बोल कर मैंने फ़ोन काट दिया.

बस अब उसको मेरा नंबर मिल चुका था.
इस बात को मैंने कुछ समय देने का फैसला किया. धीरे धीरे मोबाइल पर उसके कुछ हल्के फुल्के सन्देश आने लगे. मैं भी उससे कभी कभी बात करने लगी.

हम दोनों दोस्त बन चुके थे. हमारी बातों में धीरे धीरे थोड़ा सेक्स वाले मैसेज आने लगे थे. फिर एडल्ट जोक्स और गरम फोटोज के बाद चुदाई वाली क्लिप्स भी आने लगी थीं.

एक दिन उसने बोला- आप कभी समय निकाल कर दुकान पर आइए न.
मैंने कहा- किस समय फ्री रहते हो?
उसने कहा- कल ऑफ है, लेकिन आपके लिए दुकान खोलूंगा. आप ऐसा कीजिए, कल 3 बजे आइए.
मैं बोली- कल तो मेरा जन्म दिन है … इसलिए मैं नहीं आ सकती.

उसने मुझे एडवांस में बर्थडे की बधाई थी और दुकान पर आने के लिए जोर दिया.
इस पर मैं मान गयी.

अगले दिन मैं जींस टॉप पहन कर उसकी दुकान गयी. उसने मुझे बर्थडे विश किया और बड़ी गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया. उस दिन ऑफ होने की वजह से दुकान पर कोई नहीं था.

उसने मुझे एक बहुत ही सेक्सी सैट दिया और बोला- अगर चाहो तो यहीं पहन कर चैक कर सकती हो.
मैं- यहाँ कैसे..! यहाँ कोई आ जाएगा राहुल!

उसने झट से दुकान का शटर गिरा दिया और बोला- अब कोई नहीं आएगा. बस एक बार पहन कर दिखा दो.

मैं समझ गयी कि आज मेरी चूत को एक लंड मिल जाएगा, जिसकी मुझे भी जरूरत है. मैं चेंजरूम में चली गई और चेंज करके उसे अन्दर बुलाने के लिए आवाज दी. उसे खुद को ब्रा पेंटी में दिखाने में मुझे थोड़ी शर्म आयी.

उसने नजर भर कर मुझे पूरा से नीचे से ऊपर तक देखा, फिर घुटनों पर बैठ कर मुझे एक रिंग दिया और कहा- आई लव यू.

मैं उसकी इस हरकत को देख कर एकदम से हैरत में पड़ गयी. मैंने उसे अपने बारे में बता रखा था कि मैं एक तलाक़शुदा औरत हूँ … मैं अभी कुछ सोच ही रही थी कि उसी समय उसने मुझे बांहों में भर लिया.

उसने कहा- मुझे तुमसे शादी नहीं करनी है, बस चोदना है.

ये कह कर वो मुझे किस करने लगा. मैं भी कब से यही सब चाहती थी. सो उसका साथ देने लगी. अधनंगी तो मैं पहले से ही थी … बस नंगी होना बाकी था.

उसने मेरी ब्रा को निकाला और मुझे घूर कर देखने लगा.
‘उफ्फ्फ मन्नत, तेरी चूचियां तो बहुत बड़ी हैं..’

ये बोल कर वो मेरी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को दबाने लगा. मैं भी पूरे जोश में उसका सर पकड़ कर सहला रही थी. न जाने कितने दिन के बाद कोई मेरी चूचियों के साथ खिलवाड़ कर रहा था.

फिर उसने अचानक से एक हाथ मेरी पैंटी में डाल दिया और चूत को सहलाने लगा.

उफ्फ्फ्फ … अपनी चूत पर एक मर्दाना हाथ पाते ही मैं तो समझो, मर ही गयी. वो लगातार मेरी चूत के दाने के साथ खेल रहा था.

‘जब से तुझे देखा है, मेरा लंड तुझे चोदने को बेकरार है … मेरी जान..’

ये कहते हुए उसने अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया. मैंने जैसे ही उसके लंड को हाथ में लिया, मैं चौंक गई. उसका लंड 3 इंच जितना मोटा लग रहा था. तभी उसने मुझे छोड़ा और अपनी जींस खोल कर नीचे गिरा दी.

उफ्फ्फ 8 इंच का लंबा काला लंड देख कर मेरी आंखें तो फटी की फटी रह गईं. इतना बड़ा लंड तो मेरे पति का भी नहीं था.

मैंने हैरत से देखते हुए ऐसे इजहार किया जैसे उसका लंड को बड़ा लम्बा समझ आया था. ये सही भी था.

उसने मेरी भाव-भंगिमा समझते हुए कहा- मेरी रानी … चल अब जल्दी से इसे चूस कर और बड़ा कर दे … मैं तुम्हें चोद कर खुश करना चाहता हूँ … और तेरी ख़ुशी तुझे इसी लंड से मिलेगी.

मैं इतना कुछ बोले उसके लंड को पकड़ कर देखने लगी, फिर घुटने पर बैठ कर मैं लंड सहलाने लगी. उसने मेरे एक दूध को जोर से दबाया … तो मेरा मुँह दर्द से खुल गया. उसी समय उसने अपने लंड को मेरे मुँह में धकेल दिया. मैं भी मोटे लंड का स्वाद ले कर मस्त हो गई और उसके लंड को चूसने लगी.

वो भी मस्त हो गया और मेरे मुँह को चूत समझ तेज तेज चोदने लगा.

कुछ ही मिनट मैं वो एक तेज आह के साथ मेरे मुँह में ही झड़ गया. मैंने उसके लंड के रस को उगल दिया … क्योंकि उसने एक झटके में अपना लंड मेरे गले में उतार कर अपना लावा निकाल दिया था, जिससे मुझे उबकाई आ गयी थी.

फिर उसने मुझे फर्श पर लेटाया, जिस पर मैट बिछा हुआ था. उसने मेरी पैंटी निकाल कर फेंक दी और मेरी चूत को देखने लगा.

“उफ्फ्फ मेरी जान तुम्हारी चूत तो बहुत मस्त है.”
ये कह कर वो मेरी चूत चाटने लगा.

मन्नत तो मानो जन्नत में पहुँच गयी थी क्योंकि बहुत दिनों के बाद किसी ने मेरी चूत चाटी थी. वो दो उंगली मेरी चूत में पेल रहा था और जीभ से मेरी चूत के दाने के साथ खेल रहा था. मैं एक हाथ उसके सर को सहला रही थी और दूसरे हाथ से अपनी एक चूची को मसल रही थी.

कुछ मिनट की चुसाई के बाद मैं उसके मुँह में झड़ गयी. वो मेरी चूत के रस को अपने मुँह में भर पी गया और उसके तुरंत बाद मेरी चूत को फैला कर अपना लंड लगा दिया. वो लंड के सुपारे को मेरी चूत पर रगड़ने लगा.

मैं चुदासी हो गई थी. मैं बोली- आंह अब मत तड़पाओ राहुल … बस जल्दी से मुझे चोद दो.

उसने हल्का सा जोर लगाया, जिससे उसका 8 इंच का आधा लंड मेरी चूत में उतर गया. लंड घुसवाते ही मुझे बहुत दर्द हुआ … क्योंकि बहुत दिनों के बाद मेरी चूत ने लंड लिया था.

वो मेरे ऊपर चढ़ गया था और मेरी चूचियों को दबाते हुए मेरे होंठों को चूसने लगा. फिर उसने एक और झटका मारा, जिससे मेरी चूत में उसका लंड अन्दर चला गया. मैं रो दी. वो लंड पेल कर रुक गया गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

थोड़ी देर रुकने के बाद मैं खुद लंड लेने के लिए गांड उठाने लगी. बस फिर क्या था, वो धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करने लगा. धीरे धीरे मुझे भी मजा आने लगा.
मैं भी गांड उठा कर बोलने लगी- आह चोदो चोदो मुझे … और जोर से.

वो भी मुझे तेज तेज चोदने लगा. वो कभी अपना लंड पूरा बाहर निकालता, फिर एक झटके में पूरा मेरी चूत में अपना लंड घुसा देता. इससे मेरे अन्दर और वासना जग जाती. मैं अपनी गांड उठा उठा उससे चुदने लगी. धकापेल चुदाई का खेल होने लगा. हम दोनों ही सुध बुध खो कर पूरी तल्लीनता से चुदाई का मजा लेने में लगे थे. जालिम का लंड बड़ा मस्त था, साला अन्दर तक जाकर चोट मार रहा था.

बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई में मैं दो बार झड़ गई थी. फिर वो थक कर नीचे लेट गया. मैं समझ गई कि मुझे क्या करना है. मैं उसके ऊपर अपनी चूत में लंड फंसा कर उसके ऊपर कूदने लगी.

इस बार जब मैं नीचे आती, तो वो अपना लंड और अन्दर धकेल देता और जब मैं ऊपर उठती, तो वो भी पूरा लंड बाहर निकाल देता.

इसी पोजीशन में 10 मिनट चुदाई करने के बाद वो मेरी चूत में झड़ गया. मैं भी उसके साथ झड़ गयी.

कुछ देर ऊपर पड़े रहने के बाद मैं उठी, तो उसके लंड पर मेरी चूत और लंड का पानी लगा हुआ था.

उसने कहा- मस्त मलाई है, चाट ले न!

मैं उसके लंड को मजे से चाटने लगी. इस समय मैंने अपनी गांड राहुल के मुँह की तरफ की हुई थी. वो मेरी गांड को कुरेद रहा था.

:मन्नत, मैं तेरी गांड मारना चाहता हूँ.”
“मैंने कभी गांड नहीं मरवाई.”
वो बोला- कुछ नहीं होगा … मैं धीरे धीरे करूँगा.

मैं मान गयी. दस मिनट बाद हम दोनों फिर से गर्म हो गए. अब उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड को चाट कर पूरा गीला किया और अपने लंड पर खूब सारा थूक लगा लिया.

लंड को मेरी गांड पर लंड रखकर उसने एक झटका मार दिया. उसके लंड टोपा मेरी गांड के अभी अन्दर गया ही था कि मैं आगे को हो गयी. दर्द से मेरी आंखों में आंसू आ गए.

पर लंड जब खड़ा रहता है, तो बिना छेद चोदे नहीं छोड़ता … यही हुआ उसने मुझे फिर से पकड़ा और आराम से टोपे को अन्दर पेल दिया. इस बार थोड़ी देर रुकने के बाद उसने लंड पर थूक गिराया. फिर मुझे कमर से अच्छे से जकड़ कर एक तेज झटका दे दिया. मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया. मैं थोड़ी देर के लिए होश खो बैठी.

कुछ पल बाद जब मैं होश में आयी, तो वो मेरी गांड में थूक डाल कर मेरी गांड मार रहा था. अब गांड चुदाई से मुझे भी मजा आने लगा था. मैं भी गांड पीछे कर करके चुदने लगी. उसने मुझे कुतिया बनाए हुए कोई 20 मिनट तक बिना रुके चोदा … मेरी गांड हचक कर मारी.

मेरी गांड से बदबू आने लगी, चूंकि गांड चुदाई में ये सब नार्मल सी बात होती है. सो हम दोनों पूरी मस्ती से गुदामैथुन का सुख लेते रहे.

अंत में उसने अपना सारा रस मेरी गांड में निकाल दिया और मेरे ऊपर निढाल हो कर लेट गया.

इस दौरान मैं चूत का दाना सहलाती रही थी जिस वजह से मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

थोड़ी देर पड़े रहने के बात मुझे बाथरूम जाना था. उसने मुझे बाथरूम बताया, वहां जा कर मैं फ्रेश हुई. उधर मैं अपनी चूत और गांड को देख बहुत खुश हुई. बेशक दोनों लाल हो गयी थीं … दुःख भी रही थीं … पर जो सुख मिला था, वो बहुत बड़ी बात थी.

मैंने घड़ी में टाइम देखा, तो शाम के 5 बज रहे थे. फिर हम दोनों ने कपड़े पहन लिए. मैंने उसे गिफ्ट के लिए थैंक्स कहा.
वो बोला- कौन सा गिफ्ट जान?
मैंने आंख दबा कर उसका लंड हिला दिया- ये वाला गिफ्ट … जो आज मुझे दिया है.

उसने मुझे अपनी बांहों में भरा, तो मैंने भी उसके लंड और होंठों पर किस किया.

इसके बाद राहुल ने मुझे दुकान के पिछले गेट से बाहर निकाला और आगे जा कर शटर उठा दिया.

अब उससे मेरी आशनाई हो गई थी. मैं उससे कई बार चुदी, अभी भी वो मुझे पेलता है.

ये थी तलाक के बाद मेरी चूत और गांड की चुदाई की कहानी.

 612 total views

Tagged : / / / / / / / /

बेकाबू जवानी की मजबूरी

कॉलेज के सेकंड ईयर के एग्जाम खत्म होने के बाद मैं घर में ही थी. मुझे घर में बहुत बोरियत लग रही थी.

एक दिन में सुबह न्यूज़ पेपर पढ़ रही थी, तो उस न्यूज़ पेपर में एक पंपलेट निकला जो स्विमिंग क्लासेज को लेकर था. उसे पढ़कर मेरे मन में आया क्यों न मैं स्विमिंग क्लासेज जॉइन कर लूं, इससे मेरा टाइम भी पास हो जाएगा और मैं स्विमिंग भी सीख लूंगी.

बस मैंने मम्मी से पूछा कि मुझे स्विमिंग सीखनी है … ये एक पंपलेट निकला है … क्या मैं इसे ज्वाइन कर लूं?
मम्मी ने भी हां कर दी.

अगले दिन मैं उस स्विमिंग इंस्टीटूट में अपना एड्मिशन करवाने के लिए गई. वहां रिसेप्शन पर एक लड़की बैठी थी. मेरी उससे सारी बातें हुईं. उसने मुझे स्विमिंग फीस के बारे में बताया. उसके साथ मेरी कुछ और भी बहुत सारी बातें हुईं. मैंने अपना एड्मिशन करवा लिया.

मैंने उससे टाइमिंग पूछा, तो उसने मुझे दोपहर में दो से चार की टाइमिंग बताते हुए कहा कि ये टाइमिंग लड़कियों के लिए है. इसके लिए स्विमिंग ट्रेनर भी एक लड़की ही है.

ये सुनकर मेरा तो जैसे दिल ही टूट गया था. सच कहूं दोस्तो … तो मैं ये स्विमिंग क्लासेज नए लंड की तलाश में ही जॉइन कर रही थी कि कहीं से मुझे कोई नया लंड मिल जाए, पर मुझे ये नहीं पता था कि इसमें सच में कोई लंड मिल जाएगा.

मुझे अगले दिन से स्विमिंग ड्रेस साथ लेकर आने के लिए कहा गया.

जब स्विमिंग ड्रेस की बात सामने आई तो मैंने सोचा कि क्यों न स्विमिंग ड्रेस ले ली जाए.

मैं उधर से सीधे मार्किट चली गई. मैंने एक स्विमिंग ड्रेस ली और घर आ गई. अगले दिन से मुझे स्विमिंग के लिए जाना था, पर वहां लड़के तो होने नहीं वाले थे, फिर भी मैं एक्साईटिड थी.

अगले दिन मैं समय से पहले घर से निकली. स्विमिंग इंस्टिट्यूट मेरे घर से थोड़ा दूर था, तो मैं एक ऑटो लेकर स्विमिंग इंस्टिट्यूट की ओर निकली और कुछ समय बाद वहां पहुंच गई.

रिसेप्शनिस्ट ने मुझे स्विमिंग पूल की तरफ ले गई और उसने मुझे मेरी स्विमिंग ट्रेनर से मिलवाया. मेरी उस ट्रेनर से थोड़ी बातचीत हुई. फिर उसने मुझसे कहा- जाओ … आप चेंज करके आओ.
उसने मुझे चेंजिंग रूम का रास्ता बताया, तो मैं चेंज करने चली गई.

जब मैं चेंज करके बाहर आई, तो मुझे ट्रेनर ने कहा- चलिए अब आप पूल में आ जाइए.
मैं पूल में चली गयी.

ट्रेनर ने मुझसे कहा- पहले आप अपना पैर चलना सीख लीजिये, ये किनारा पकड़ कर अपने शरीर को ऊपर उठाइए और पानी में पैर चलाइए.
मैं पैर चलाने लगी.
ट्रेनर ने कहा कि मुझे कुछ दिन ऐसे ही प्रैक्टिस करनी होगी. ट्रेनर ने कुछ और प्रैक्टिस रोज करने के लिए भी कहा.

कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा. मेरी दो से चार की टाइमिंग में बहुत ही कम लोग आते थे. सिर्फ 3-4 लड़कियां ही थीं. उनमें से एक लड़की से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई. उसका नाम शेफाली था, वो शादीशुदा थी और काफी अमीर घराने की लगती थी.

देखते ही देखते हम दोनों काफी अच्छी सहेलियां बन गईं. वो मुझे स्विमिंग सीखने में काफी मदद करती थी. उसे काफी अच्छी स्विमिंग आती थी.

एक दिन मैंने उससे पूछा- आपको तो इतनी अच्छी स्विमिंग आती है, तो फिर भी आप यहां सीखने क्यों आती हैं?
इस पर उसने मुझे बताया- मैं यहां सीखने नहीं, सिर्फ स्विमिंग के लिए ही आती हूं. मेरे हस्बैंड पूरा दिन ऑफिस में होते हैं … तो मैं घर में बोर होती हूं. इसलिए यहां मैं स्विमिंग के लिए आती हूं. स्विमिंग से बॉडी फिट रहती है … बस इसलिए.

मैंने पूछा- आपके हस्बैंड क्या करते हैं?
उसने बताया- वो एक बहुत बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.
इसी तरह की कुछ और बातचीत के बाद हम दोनों जुदा हो गयी.

एक दिन मैं स्विमिंग इंस्टिट्यूट से घर जाने के लिए निकली और ऑटो के लिए इन्तजार कर रही थी कि तभी शेफाली अपनी कार लेकर आई.
उसने मुझसे कहा- चलो मैं तुम्हें ड्राप कर देती हूं.
मैंने उसे मना किया.
उसने मुझसे पूछा- अच्छा ये तो बताओ तुम्हारा घर किस तरफ है?
मैंने उसे अपने घर की लोकेशन बताई, तो उसने कहा कि मैं भी तो उसी तरफ से आती हूँ … चलो मैं तुम्हें ड्राप कर दूंगी.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी कार में बैठ गई. उसने मुझे बताया कि उसका घर भी मेरे घर से करीब दो किलोमीटर और आगे है.
मैं उसे शुक्रिया कहने लगी.

इस पर उसने कहा- अब से तुम ऑटो से मत आया करो. मैं ही तुमको रोज लेने आ जाऊंगी … और छोड़ भी दूंगी.

इसी तरह उसके साथ मेरी गहरी छनने लगी.

दिन बीतने लगे. अब तो कभी कभी मैं उसे अपने घर भी ले आती मम्मी से मिलाती और अपने कमरे में ले जाकर उससे काफी देर तक बातें करती रहती.

एक दिन वो मुझे लेने नहीं आई, तो मैंने उसे फोन किया. उसने मुझे बताया कि आज मेरी कार खराब हो गई है … लेकिन तुम चिंता मत करो … मैं अपने हस्बैंड के साथ आ रही हूँ.

करीब 15-20 मिनट के बाद वो आई. कार उसके हस्बैंड चला रहे थे.

तब पहली बार मैंने शेफाली के हस्बैंड को देखा था. शेफाली का हस्बैंड बहुत ही स्मार्ट था. बड़ी ही स्ट्रांग पर्सनैलिटी थी. उसकी उम्र करीब 30 साल की होगी. वो बहुत ही हॉट लग रहा था. उसने ग्रे कलर का थ्री-पीस समर सूट पहन हुआ था. उसे देख कर मेरी तो चूत मचल उठी थी.

वो दोनों कार से नीचे उतरे. शेफाली ने मुझे अपने हस्बैंड से मिलवाया.

शेफाली- अंकुश ये रोमा है, मैंने तुम्हें बताया था न कि ये मेरे साथ स्विमिंग के लिए जाती है.
अंकुश- हैलो रोमा … नाइस टू मीट यू.
मैं- हैलो सर.
अंकुश- डोंट कॉल मी सर, जस्ट कॉल मी अंकुश.
मैं- ओके अंकुश.

हमारी ऐसे ही कुछ नार्मल सी बातें हुईं. फिर शेफाली ने कहा- चलो रोमा, स्विमिंग का टाइम हो रहा है. हम वैसे ही लेट हो गए हैं.
अंकुश- शेफाली अभी मेरी एक मीटिंग है. मैं चार बजे तुम दोनों को लेने के लिए आ जाऊंगा.
शेफाली- ओके हनी.

अंकुश हम दोनों को छोड़ कर जा चुका था, पर मेरे मन में उसी का चेहरा सामने आ रहा था.

फिर शाम चार बजे अंकुश हमें लेने भी आया.

अब तो कभी कभी अंकुश ही हमें स्विमिंग के लिए छोड़ने और लेने आता था.

कुछ दिन ऐसे ही और निकल गए.

फिर एक दिन संडे को शेफाली मेरे घर आई और उसने मुझसे कहा- चलो स्विमिंग के लिए चलते हैं.
हालांकि संडे को स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता था तो मैंने उससे कहा- शेफाली तुम भूल रही हो, आज संडे है. आज स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता है.

उसने कहा कि हां मुझे याद है, पर संडे के दिन स्विमिंग इंस्टीट्यूट में फैमिली अलॉउड होती है … और आज अंकुश भी हमारे साथ स्विमिंग के लिए चल रहा है. वो नीचे कार में इन्तजार कर रहा है. तुम जल्दी से तैयार हो कर आ जाओ.

ये सुन कर कि अंकुश भी स्विमिंग के लिए आ रहा है, मैं बहुत खुश हो गई. मैं जल्दी से तैयार होकर बाहर आई और कार में बैठ गई.
फिर हम स्विमिंग इंस्टीट्यूट पहुंचे.

उधर हम तीनों चेंजिंग रूम की तरफ बढ़े. जेन्ट्स ओर लेडीज चेंजिंग रूम दोनों अगल बगल में ही थे. मैं और शेफाली लेडीज चेंजिंग रूम की तरफ बढ़ गए और अंकुश अपना बैग लिए जेन्ट्स में चल गया.

चूंकि आज संडे होने की वजह सिर्फ फैमिली ही अलाउड रहती थीं. मगर तब भी आज स्विमिंग पूल में ज्यादा कोई नहीं थे. बस तीन कपल और एक फैमिली थी, जिनके साथ दो बच्चे थे.

हम तीन थे, मैं और शेफाली तो चेंज करके पूल में उतर गए थे, पर मुझे अंकुश अभी तक दिखाई नहीं दिया था.

मैं उसी की तरफ मतलब जेन्ट्स के चेंजिंग रूम की ओर नजरें गड़ाए हुए थी.

जैसे ही वो निकला, तो मैं उसे देखती ही रह गई. अंकुश सुपर हॉट लग रहा था. उसका गठीला बदन देख कर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था. उसने सिर्फ एक छोटी सी स्विमिंग वाली अंडरवियर ही पहने हुई थी, जिसमें से उसका उभरा हुआ बड़ा सा लंड अलग से ही दिखाई दे रहा था.

मैं तो उसे देखते दखते ही पूल के किनारे बैठी बैठी पूल में गिर पड़ी. मुझे गिरता देख शेफाली जोर जोर से हंसने लगी. मुझे भी हंसी आ गई.

फिर अंकुश भी पूल में उतरा और स्विमिंग करता हुआ हमारे पास आ गया.
मैं- अरे आपको तो काफी अच्छी स्विमिंग आती है.
अंकुश- जी हां … मैंने स्विमिंग में कभी मेडल्स भी जीते हैं और शेफाली को भी तो स्विमिंग मैंने ही सिखाई है.

शेफाली- हां रोमा, मुझे स्विमिंग अंकुश ने ही सिखाई है.
मैं- तो अंकुश जी मुझे भी सिखा दीजिए.

अंकुश- अरे तुम तो यहां स्विमिंग सीखने के लिए ही आती हो न … तो यहां के ट्रेनर ने अब तक तुम्हें तैरना नहीं सिखाया क्या?
मैं- हां वो ट्रेनर सिखाती तो है, पर मुझे तो लगता है कि उसे खुद ही ठीक से स्विमिंग नहीं आती है. मुझे तो शेफाली ही थोड़ा बहुत सिखा रही है.
अंकुश- ये तो गलत बात है. ट्रेनर को तो ठीक से सिखाना चाहिए. चलो कोई बात नहीं मैं आपको सिखा देता हूं.

तब अंकुश ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे पानी में उतारा और मुझे पानी में अच्छे से पैर चलना सिखाया, तो मैं पूल की वाल पकड़ कर पैर चलाने लगी. अब अंकुश ने मेरे पेट को सहारा दिया. शायद अंकुश को संकोच हो रहा था, पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था. मैं तो बस पैर चलाने में मस्त थी.

कुछ देर बाद मैंने अंकुश से कहा- प्लीज़, अब तुम मुझे फ्लोट करना सिखाओ न.
अंकुश ने मेरी तरफ देखा और जोर जोर से हंसने लगा. वो हंसते हुए कहने लगा कि इस स्विमिंग ड्रेस में या तो तुम फ्लोट कर सकती हो … या तो ये तुम्हारी स्विमिंग ड्रेस … दोनों एक साथ नहीं.

मैंने नाराज होते हुए कहा- क्यों क्या बुराई है इस ड्रेस में!
अंकुश बोला- सॉरी रोमा मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा रहा हूं … पर तुम्हारी ड्रेस ही इतनी बड़ी है कि तुम चाह कर भी इस ड्रेस में फ्लोटिंग नहीं कर पाओगी. स्विमिंग के लिए स्विमिंग ड्रेस जितनी छोटी होती है, उस ड्रेस में उतना ही स्विमिंग करना आसान होता है. जब मैं शेफाली को स्विमिंग सिखाता था, तो वो भी इतनी ही बड़ी ड्रेस पहनती थी. फिर मैंने उसे ये बिकिनी स्टाइल की टू-पीस स्विमिंग ड्रेस दिलाई थी. ये बहुत फ्री रहती है … इसमें स्विमिंग करना आसान होता है.

इस पर शेफाली बोली- रोमा, अंकुश ठीक बोल रहे हैं. पहले मुझसे भी स्विमिंग करते नहीं बनता था, पर अब देखो मैं भी काफी अच्छी स्विमिंग कर लेती हूं.

वहां 2-3 कपल भी थे, जो अपनी मस्ती कर रहे थे. फिर अचानक अंकुश को पता नहीं क्या सूझी, उसने शेफाली को पकड़ कर पूल में खींच लिया और वो दोनों मस्ती करने लगे.

उन दोनों की मस्ती कोई ऐसी वैसी मस्ती नहीं थी. वे दोनों एकदम कामुकता से भरी हुई मस्ती करने लगे थे. कभी अंकुश शेफाली की दोनों टांगों में हाथ डाल कर उसे ऊपर उठा देता तो कभी शेफाली खुद को बचाने के लिए अंकुश के शरीर का सहारा लेने के लिए उसके लंड को पकड़ ले रही थी.

उन दोनों की मस्ती देख कर मेरी चुत में तो मानो आग लग गई थी. मुझे अब किसी भी तरह अंकुश का लंड अपनी चुत में लेने का दिल करने लगा था. मगर ये सब कैसे होगा, ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.

 1,996 total views,  4 views today

Tagged : / / / / / / /