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मेरी चूतड़ों की चुदाई

मेरी स्कूटी खराब होने पर एक ऑटो में मैंने लिफ्ट ली. रास्ते में ड्राईवर मेरी फुदी के साथ खेलता आया. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था. घर आयी तो ड्राईवर बहाना बना कर हमारे घर में रुक गया.
अब आगे:

मैंने टाइम देखा तो 11 बज चुके थे. मैंने पाजामा और टी-शर्ट पहन ली और ऊपर से एक चादर ओढ़ ली.
अपने कमरे से बाहर आकर देखा तो सास ससुर जी के कमरे का दरवाजा बंद था. बाहर की सभी लाइट्स भी बंद थी.

मैं दबे पैरों से घर के पीछे बने शेड की ओर चली गयी. वहाँ कमरे के दरवाजे को धीरे से धकेला. दरवाजा अपने आप खुल गया और फिर मैंने अंदर जाते ही दरवाजा बंद करके कुण्डी लगा दी.

कमरे में पूरी तरह से अंधेरा था मगर मुझे पता था कि चारपाई कहाँ है. इसलिए मैं अंधेरे में ही चारपाई के पास पहुँच गयी और बिस्तर पर टटोलने लगी.

ड्राइवर भी मेरा ही इंतजार कर रहा था. उसने अंधेरे में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे चारपाई पर खींच लिया और साथ ही बोला- आ गयी जानेमन! कब से तेरा इंतजार कर रहा था.
मैंने उसके बिस्तर में घुसकर उसके साथ लेटते हुए कहा- हाँ आ गयी. अब कर लो जो करना है. ऑटो में तो सब कुछ नहीं कर पाए.

ड्राइवर ने भी मुझे बांहों में लेकर अपनी ओर खींचते हुए कहा- क्या करता जानेमन, तेरी सास जो साथ में थी. वरना मैं तो तुमको उसी वक़्त अपनी बांहों में ले लेता.
और साथ ही साथ वो मेरे गालों और मेरी गर्दन पर अपने होंठ रगड़ने लगा.

वो अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ और मेरे बालों को सहलाने लगा. मैंने भी अपनी एक टाँग उसकी कमर पर चढ़ा दी और अपने हाथों से उसकी पीठ को मसलने लगी.
उसने अपने सभी कपड़े पहले से ही उतार रखे थे सिर्फ़ अंडरवीयर ही पहना हुआ था.

मेरी लंबी गर्दन गोरे गोरे गालों और मेरे चेहरे को चूमते हुए उसने मेरे होंठों को अपने मुँह में ले लिया और मेरे होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. फिर अपना लंड मेरी फुदी के साथ कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

ऐसी सर्दी में मर्द के आगोश में मुझे जो सुख मिल रहा था मैं बयान नहीं कर सकती.

हम दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपक रहे थे जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते हों. मेरे मम्मे उसकी छाती से रगड़ रहे थे और मैं वासना के समंदर में डूबती जा रही थी.

उसने मेरी टी-शर्ट को उपर उठा दिया और फिर मेरे गले और मेरी बाजू से निकाल कर अलग कर दिया. मेरे दोनों नंगे मम्मे उसकी नंगी छाती पर रगड़ने लगे. वो भी अपनी छाती मेरे मम्मों पर रगड़ रगड़ कर मज़ा लेने लगा.

एक हाथ से उसने मेरे एक मम्मे को पकड़ा और उसके निप्पल को मसलते हुए अपने मुँह में ले लिया.
मैंने भी अपने आप को थोड़ा ऊपर उठा कर उसके मुँह में अपना मम्मा डाल दिया और फिर उसके पेट पर बैठ गयी. मैं उसके मुँह पर अपने दोनों मम्मे दबाने लगी. मेरे बाल बिखर कर उसके चेहरे के इर्द गिर्द फैल गये और वो अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स को पकड़ कर बारी बारी अपने मुँह में डाल कर चूसने लगा.

मैं भी उसके सर के नीचे से अपने हाथ डालकर उसके सर को अपने मम्मों पर दबा रही थी..

फिर वो मम्मों को मुँह में डाले हुए ही अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर फेरने लगा. फिर अपने हाथ चूतड़ों की तरफ लाते हुए मेरे पजामे को भी नीचे सरकाने लगा.
मैंने भी उसका साथ देते हुए अपने पजामे को उतार दिया.

अब मैं बिल्कुल नंगी हो चुकी थी और उसका अकड़ा हुया लंड उसके अंडरवीयर में से ही मेरी फुदी पर महसूस हो रहा था. मैंने उसके लंड को अंडरवीयर के ऊपर से ही पकड़ा और उसको सहलाने लगी.

उसका लंड एकदम सख्त हो चुका था.

फिर मैं रज़ाई के बीचों बीच नीचे सरकती गयी और अपने चेहरे को उसके लंड के सामने ले आई. मैंने धीरे से उसके अंडरवीयर को नीचे सरकाते हुए उसका लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया.
ड्राइवर के मुँह से आहह … की आवाज़ निकल गयी और वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा. उसने अपनी दोनों टाँगों को फोल्ड करते हुए अपने घुटने उपर उठा लिए. मैं उसकी टाँगों को बीच में अपने मुँह में लंड लिए हुए ज़ोर ज़ोर से उसका लंड अंदर बाहर करने लगी.

ड्राइवर के मुँह से आह्ह ह्ह्ह आअह ह्ह्ह की आवाज़ें सुन कर मैं और भी उत्तेज़ित होकर उसके लंड को चूस रही थी. बीच बीच में मैं उसका लंड मुँह से निकाल कर अपने चेहरे, गर्दन और गालों पर भी रगड़ लेती.

काफ़ी देर तक मैंने उसका लंड चूसा और फिर मैं उसके ऊपर आकर लेट गयी और उसके लंड को अपनी फुदी पर सैट करने लगी. उसका तना हुया सख्त लंड मेरी गीली फुदी के होंठों का स्पर्श पाते ही हिचकोले मारने लगा और मेरी फुदी के अंदर जाने को बेताब होने लगा.

मैंने उसके लंड पर अपना थोड़ा सा वजन डाला और उसका लंड मेरी गीली फुदी की दीवारों को खोलता हुआ मेरे अंदर समाने लगा. ड्राइवर ने भी मेरी कमर को पकड़ते हुए नीचे से एक झटका लगा दिया जिससे उसका मोटा और विशाल लंड मेरी फुदी के भीतर तक समा गया.
मेरे मुख से संतोष और आनन्द से भारी सिसकारी निकली ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
एक अरसे के बाद मेरी फुदी को बढ़िया लंड मिला था.

अब मैं अपनी कमर को उपर नीचे हिला हिला कर उसका लंड अपनी फुदी में पेलने लगी. वो भी मेरे धक्कों से अपने धक्के मिला कर नीचे से ही मेरी फुदी चोदने लगा.

काफ़ी देर तक मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसका लंड अपनी फुदी के अंदर बाहर करती रही और फिर उसने मुझे पलट कर अपने नीचे कर दिया और अपना लंड मेरी फुदी में जड़ तक धकेलते हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

उसके दोनों हाथ मेरे कंधों के नीचे थे और वो मेरे उपर लेट कर मुझे ज़ोर ज़ोर से पेले जा रहा था.
मैं अपनी दोनों टांगें उसकी कमर से लिपटा कर उसके धक्कों का जवाब धक्कों से ही दे रही थी.

अब मेरी फुदी से रस की फुहारें छूटने वाली थी. मैंने उसकी कमर पर अपने नाख़ून गाड़ते हुए उसे अपने सीने से लगा लिया और फिर मेरी फुदी में से रस की फुहारें छूट पड़ी.
मैं उसके सीने से लिपट गयी और उसको रुकने को कहा.

वो अपना लंड मेरी फुदी में ही गाड़े हुए रुक गया. मेरे होंठों को चूमने लगा और बोला- क्या हुआ मेरी अनारकली? थक गयी?
मैंने कहा- हाँ … कुछ देर रुक जाओ, फिर दुबारा करते हैं.
तो वो मान गया और अपना लंड मेरी फुदी में से निकाल कर मेरे साथ ही लेट गया.

मैंने लेटे हुए ही उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया. उसका लंड मेरी फुदी की चिकनाहट से पूरी तरह से भीगा हुआ था. वो भी मेरी फुदी पर अपना हाथ रख कर मेरी फुदी को सहलाने लगा. कभी मेरी फुदी को अपनी मुट्ठी में भींचता और कभी मेरी फुदी के बीच अपनी उंगली डाल देता.

फिर वो उठा और मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया और मेरी दोनों जांघों को चूमने लगा.
मेरी फुदी में फिर से चुलबुलाहट होने लगी.

और धीरे धीरे वो मेरी फुदी की तरफ बढ़ने लगा. मेरी फुदी भी सकपकाने लगी.
फिर आख़िरकार उसने एक चुंबन मेरी फुदी के होंठों पर भी छोड़ दिया और फिर मेरी फुदी को नोच नोच कर चूसने लगा.

उसके इस वार से मेरा पूरा बदन कांप उठा और मैंने अपनी दोनों टाँगें उठा कर उसके कंधों पर रख दी. मैं उसके सिर को अपनी फुदी पर दबाने लगी. वो भी मेरी जांघों को पकड़ कर अपनी ज़ुबान को मेरी फुदी के अंदर तक घुसेड़ रहा था.

मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और मेरे मुँह से ज़ोर ज़ोर की सिसकारियाँ निकलने लगी. मैं आअहह आहह करते हुए अपनी कमर ऊपर नीचे हिला रही थी और उसके सिर को अपनी टाँगों में दबाए हुए दोहरी तिहरी हो रही थी.

एक बार फिर से मेरी फुदी में से पानी निकलने लगा था और ड्राइवर उसे चाट चाट कर मुझे और भी मज़ा दे रहा था.

अब ड्राइवर ने मुझे घोड़ी बन जाने को कहा.
तो मैंने उल्टी होकर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा दिया और अपनी कमर को आगे से नीचे झुका दिया. जिससे मेरी फुदी और गांड दोनों खुलकर उसके सामने आ गयी.

उसने हाथ से सहलाते हुए मेरी फुदी में अपना लंड डाल दिया और खड़े होकर मेरी कमर को पकड़ कर मुझे चोदना शुरू कर दिया.
वो मेरी ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था और मैं उसकी दमदार चुदाई का मज़ा ले रही थी.

मेरी प्यासी फुदी की प्यास अब ख़त्म हो रही थी. मैं अपनी कमर को उसके झटकों के साथ मिला कर हिला रही थी और एक आनंद के सागर में डूबती जा रही थी.

मेरी फुदी से मेरा लावा बह कर मेरी जांघों तक आ चुका था और मेरी फुदी से फ़च फ़च की आवाज़ें आ रही थी. वो भी मेरी पतली कमर को सहलाते हुए मेरे बालों को ऐसे पकड़ लेता जैसे वो किसी घोड़ी को हांक रहा हो.

बहुत देर तक वो मुझे ऐसे ही चोदता रहा. और फिर वो भी अपना माल निकालने के लिए तैयार हो गया. अपनी टाँगों को अकड़ाते हुए उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और फिर एक दो झटकों में ही उसने मेरी चीखें निकाल दी.
उसने अपना ढेर सारा माल मेरी फुदी के अंदर छोड़ दिया था और रुक रुक कर झटकों से अपने माल की एक एक बूँद मेरी फुदी में उड़ेल रहा था.

माल छूटने के बाद भी वो लंड फुदी में डाले हुए ही मुझे कितनी देर तक पकड़े हुए खड़ा रहा और मैं भी उसके सामने घोड़ी बन कर झुकी रही.

फिर उसका लंड ढीला होकर बाहर आने लगा तो हम लोग चारपाई के ऊपर ही लुढ़क गये और तेज तेज साँसें भरने लगे.

हमने टाइम देखा तो रात का एक बज चुका था. मैंने ड्राइवर से कहा- अब हमारे पास तीन घंटे और हैं. क्योंकि पाँच बज़े तक मेरी सासू माँ जाग जाएँगी और मैं चार बजे तक अपने कमरे में जाकर सो जाऊँगी.
उसने कहा- यार बस तीन घंटे? इतने टाइम में क्या होगा यार! मेरा तो मन भी नहीं भरेगा इतने टाइम में!
तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर सुबह तक तुम्हारे पास ही रहती हूँ. पकड़े गये तो कोई बात नहीं!

मेरी बात सुनकर वो भी मुस्करा दिया और बोला- अच्छा जैसा तेरा हुकम मगर यह तीन घंटे तो अच्छे से मज़ा दे दो.
मैंने कहा- अच्छे से ही तो मज़ा दे रही हूँ. और कैसे मज़ा दूं?
तो बोला- यार, अंधेरे में तेरी सूरत नहीं दिखती, मैं तेरी सूरत देखकर तुमको चोदना चाहता हूँ लाइट जला कर!
मैंने कहा- ठीक है जला लो लाइट!
अंधेरे में मुझे भी मज़ा नहीं आ रहा था.

और फिर मैंने खुद ही उठ कर लाइट जला दी और खिड़की के आगे अच्छी तरह से परदा कर दिया. वैसे तो खिड़की पहले ही बंद थी.

मैं फिर से ड्राइवर के बिस्तर में आकर लेट गयी.

अब वो मेरे चेहरे पर हाथ फेरते हुए मेरे हुस्न की तारीफ करने लगा और साथ ही मेरे बालों में मेरे मम्मों पर और मेरे गालों पर अपना हाथ घुमाने लगा. मैं लेटी हुई ही उसका लंड सहला रही थी.
कुछ ही देर में उसका लंड खड़ा हो गया. मैंने उसके लंड को दबाते हुए इशारा किया और वो मुस्कराते हुए मेरी टाँगों के बीच आ गया. अब उसने मेरी एक टाँग अपने कंधे पर रख ली और मेरी दूसरी टाँग अपनी दोनों टाँगों के बीच लेकर उस पर बैठ गया.

फिर मेरी फुदी पर अपना लंड गाड़ते हुए एक ही झटके में सारा लंड मेरी फुदी में घुसेड़ दिया. मेरे मुँह से मीठी मीठी सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी और वो मेरी एक टाँग को पकड़े हुए मेरी फुदी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.

हमारी चुदाई फिर से जोरों पर चलने लगी. हम पोज़िशन बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे. कभी वो मुझे गोद में उठा कर चोदता तो कभी लिटा कर चोदता.

ऐसे ही 3-4 बार और उसने मेरी चुदाई की.

सुबह के 4.30 बज चुके थे. मैंने अपने कपड़े पहने और उससे फिर मिलने का वादा करके अपने कमरे में आ गयी.

कमरे में आकर अकेली सोने में कोई मज़ा नहीं आ रहा था. मन कर रहा था कि किसी नंगे मर्द की बांहों में नंगी होकर आराम से सुबह तक सोती रहूं!

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