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मैंने उनके लंड को चूसा

मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं.

मेरी हाईट 5 फीट है और फिगर 33-28-34 है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं. मेरी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी.

बीते दिसंबर की एक रात को मुझे तेज प्यास लगी. आप जानते होंगे कि सर्दी में या तो प्यास लगती नहीं और लगती है तो फिर प्यास कितनी जोर से लगती है.

ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी मैं जल्दी से उठी रसोई में जाने लगी. मेरा ध्यान ससुर के कमरे की ओर गया तो मैंने पाया कि उनके रूम की लाइट जल रही थी.
मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?

उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे.
उनका लन्ड करीब 7 इंच का था। इतना बड़ा लंड मैंने कभी किसी मर्द का नहीं देखा था.

मैं आपको उनके बारे में बता दूं कि वो उम्र में 55 साल के करीब हैं. उनकी हाइट 6 फीट है.

मेरी सास की मृत्यु बहुत समय पहले हो गयी थी. शायद इसी वजह से ससुर जी का लंड इतना बेताब लग रहा था.

वो आंखें बंद किये लगातार अपने हाथ को अपने लंड पर चला रहे थे.
ये नजारा देखकर मैं तो सन्न रह गयी.
मगर मेरी नजर भी मेरे ससुर के लंड से हट नहीं रही थी. मेरे पति का लंड उनके लंड से कम था.

उनका लंड देखकर मेरे अंदर भी चुदास सी जागने लगी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी.

फिर मैं रसोई से पानी लेकर अपने कमरे में चली गयी. अब मुझे भी लंड चाहिए था तो मैंने पति को जगाया और उनको गर्म करने की कोशिश करने लगी.

मैंने पति के लंड को ऊपर से ही सहलाया. उनका हाथ मेरी चूत पर रखवाया और सहलवाने लगी.
थोड़ी देर में उनका लंड खड़ा होने लगा. फिर मैंने उनके लंड को चूसा और चुदाई के लिए पूरा तैयार कर दिया.

पति ने मेरी चूत में लंड डाला और चोदने लगे. उनका लंड 6 इंच के करीब था. मैं चुदाई का मजा लेने लगी.

मगर दिमाग में ससुर का लंड अभी भी घूम रहा था. उनका लंड बहुत मोटा था.

पति ने मुझे पांच मिनट तक चोदा और फिर वो झड़ गये. मुझे लंड तो मिल गया लेकिन वो संतुष्टि वाली चुदाई नहीं हुई. फिर भी मैंने पति को ज्यादा नहीं कहा क्योंकि वो नींद में थे और मैं भी अब सोना चाहती थी.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पति ने कहा कि वो जॉब करने दिल्ली जाने वाले हैं.
वो कहने लगे कि पहले वो वहां पर जम लेंगे और उसके बाद मुझे भी वहीं बुला लेंगे. मैं ये सोचकर परेशान हो रही थी.

मुझे पति के बिना कैसे चुदाई का मजा मिलने वाला था. 4 जनवरी को मेरे पति दिल्ली चले गये.

उनके जाने के बाद मेरा मन सूना हो गया.
एक दो दिन तो मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर ससुर का लंड मेरे दिमाग में घूमने लगा.

मैं उनका लंड देख चुकी थी और जब से मैंने उनका मोटा लंड देखा था मैं उसको अपनी चूत में लेने का सपना भी देख रही थी.
अब मैं किसी तरह ससुर जी का लंड खड़ा करके उनको खुद चुदाई के लिए तैयार करना चाहती थी.

इसके लिए मैंने बाजार से कुछ नये कपड़े ले लिये. नाइटी, पैंटी और ब्रा के सेट लिये. सेक्सी वाली नाइट ड्रेस ली ताकि अपने बदन को दिखाकर मैं ससुर जी के लौड़े की प्यास को और ज्यादा बढा़ सकूं.

शाम को जब मैं घर आयी तो मैंने जल्दी जल्दी खाना बनाया.

ससुर जी को भूख लगी तो वो बोले- बहू खाना लगा दो.
मैंने उनको बैठने को कहा और बोली- अभी लगा देती हूं.

मैं अपनी साड़ी बदल कर आ गयी और मैंने वो नयी ड्रेस पहनी जो मैं बाजार से लायी थी.

जब मैं खाना लेकर उनके पास पहुंची तो उनकी नजर मेरे बदन पर पड़ी और वहीं पर ठहर गयी.
इससे पहले मेरे ससुर ने मुझे इतने ध्यान से नहीं देखा था.

वो लगातार मुझे देख रहे थे और मैं खुश हो रही थी कि मेरा प्लान काम कर रहा है. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे.

ससुर ने खाना खाया और फिर वो सोने के लिए चले गये.

मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरे बदन की गर्मी मुझे चैन से लेटने नहीं दे रही थी.
आज मैंने ससुर की आंखों में मेरे जिस्म के लिए हवस भी देख ली थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

मैं फिर सोचते सोचते सो गयी.

मगर उस दिन के बाद से मैं किसी न किसी तरह अपने बदन और उसके उभार दिखाकर अपने ससुर को तड़पाने लगी.
वो अब अक्सर मेरी चूचियों और मेरी गांड को ताड़ते रहते थे.

कुछ दिन बीत गये. फिर 9 जनवरी की रात आयी.
उस रात को मैंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी जो चूचियों पर से जालीदार थी. उसको देखकर तो मेरे ससुर की आंखें ही फैल गयीं. वो जैसे पागल से हुए जा रहे थे.

उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया और थोड़ा सा ही खाकर रूम में चले गये.
मैंने भी जल्दी से काम खत्म किया और सोने के लिए जाने लगी.
मगर मेरा मन बेचैन था.

आज ससुर जी बहुत उतावले थे. मैं एक बार उनकी हालत देखना चाहती थी.

इसलिए मैंने दूध गर्म किया और उनके कमरे की ओर चल दी.
मैंने अंदर देखा तो वो लंड को लगातार हिला रहे थे और बार बार कह रहे थे- चूस साली मेरे लंड को … साली नेहा … चूस इसे.

ऐसे कहते हुए वो अपने लंड की मुठ मार रहे थे.
मैं बहुत उत्तेजित हो गयी उनकी ये हालत देखकर.

उसके बाद मैंने दरवाजा खटखटाया तो वो संभल गये. उन्होंने अपना लंड अंदर पजामे में किया और ढक लिया.

मगर जब मैं अंदर गयी तो तब भी उनके पजामे में वो लंड तना हुआ ऐसे ही उछल रहा था. उनके माथे पर पसीना आ गया था.

मैंने उनके लंड की ओर देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी और शर्माते हुए गिलास को उनके बेड के पास रख दिया.

जब मैं जाने लगी तो ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- कुछ देर बैठ जा बहू.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं पापा? ये सब ठीक नहीं है.

इस बात पर उनको गुस्सा आ गया और मेरा हाथ अपनी ओर खींचकर मुझे अपने पास बिठाते हुए बोले- साली रण्डी, जब से तेरा पति गया है तभी से तेरा नाटक देख रहा हूं. आज तुझे चोद चोद कर सब तेरी नौटंकी दूर कर दूंगा.

ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे ऊपर आ चढ़े.
वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों में मुंह मारने लगे. मेरी गर्दन को चूमने लगे.

पहले तो मैंने दिखावटी विरोध किया लेकिन फिर हार मानने का नाटक करके मैं आराम से लेट गयी.
फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगे लेकिन मैंने मुंह नहीं खोला. फिर वो मेरी चूचियों को दबाने लगे तो मेरी आह्ह निकल गयी और मेरे होंठ खुल गये.

इस मौके का फायदा उठाकर वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैं भी अंदर ही अंदर उनका साथ देने लगी लेकिन मैं ये नहीं दिखाया कि मुझे मजा आ रहा है.
मैं बस न चुदवाने का नाटक सा करती रही.

मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.
मैं अब सिसकारने लगी थी.

वो बोले- हां, साली रंडी, मैं जानता था कि तू ये सब नाटक चुदने के लिए ही कर रही है. मैं आज तेरी चूत को फाड़ दूंगा.
ये बोलकर मेरे ससुर ने मेरी नाइटी फाड़ डाली और मेरी चूचियों को जोर जोर से पीने लगे.

उनके मुंह की पकड़ इतनी तेज थी कि मेरे मुंह से जोर जोर की आहें निकलने लगीं.
मैं अपनी चुदास को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

इतने में ही ससुर का एक हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत में हल्का गीलापन आने लगा था. वो मेरी चूत को जोर जोर से रगड़ने लगे.

मेरी चूत में पानी आने लगा और वो चूत में उंगली से कुरेदने लगे.
मैं भी पागल सी हो रही थी अब.

इतने में ही ससुर ने अपने पजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में दे दिया.
उनका लंड मेरे मुंह में फंस गया और वो धक्के देते हुए बोले- चूस साली … यही है तेरा सपना … चूस ले इसे. चूस साली कुतिया।
मेरे मुंह में उनका लंड पूरा फंस गया था और मेरे गले में अटक गया था. मुझसे सांस नहीं ली जा रही थी लेकिन वो मेरे मुंह को चोदे जा रहे थे.

काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था.

फिर उन्होंने मुझे उल्टी तरफ लिटा दिया और मेरी गांड ऊपर आ गयी.
वो मेरी गांड में मुंह देकर चाटने लगे.

मैं डर गयी कि कहीं ये अपने इस मोटे मूसल को मेरी गांड में न धकेल दें. मैं उनका लंड गांड में नहीं ले सकती थी.

वो मेरी गांड को लगातार चाटे जा रहे थे. मुझे मजा भी आ रहा था लेकिन साथ में डर भी बना हुआ था.

इससे पहले मैंने कभी भी अपनी गांड नहीं चुदवाई थी. कई बार मेरे पति मेरी गांड में लंड देने की कोशिश करते थे लेकिन मैं मना कर देती थी.
अभी तक मेरी गांड कुंवारी ही थी.

उसके बाद वो मेरी चूत भी चाटने लगे तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी. वो मेरी चूत को चाटते हुए मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और मुझे अब बहुत मजा आ रहा था.
दोनों तरफ से मजा मिल रहा था.

कुछ देर तक वो मेरी चूत को काट काटकर खाते रहे.
मैं भी पानी छोड़ती रही और चुदने के लिए मचल उठी.

अब ससुर जी से भी नहीं रुका गया तो उन्होंने अचानक से मेरी चूत पर लंड रखा और एक धक्का दे दिया.
उनके लंड की चोट से मेरी जान निकल गयी.
एक बार में ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया उनके मोटे लंड ने.

उन्होंने मेरे मुंह पर थप्पड़ मारा और चुप रहने के लिए कहा.
मैं चुप हो गयी.

अब वो मुझे चोदने लगे. मैं तो बेहाल होने लगी.

कुछ देर तक तो लंड नहीं लिया गया लेकिन फिर जब चूत खुलने लगी तो मुझे मजा आने लगा.
अब मैं आराम से चुदवाने लगी.

लेकिन ससुर जी की स्पीड बढ़ रही थी. वो लगातार तेज तेज चोदे जा रहे थे.

बीस मिनट की चुदाई में मैं दो बार झड़ गयी. वो अभी भी मुझे तेजी से चोद रहे थे.

फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह पर उनके वीर्य की पिचकारी एकदम से आकर लगी.

कई बार उनके लंड से वीर्य की पिचकारी लगी और मेरा पूरा चेहरा सन गया.
मुझे मजा आ गया.
इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी.

झड़ने के बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गये.

हम दोनों फिर 69 में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.

कुछ देर की चुसाई के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. अब उन्होंने लंड पर तेल लगा लिया. मेरी चूत और गांड पर दोनों जगह तेल लगा दिया.

उसके बाद मुझे पेट की तरफ सुला दिया और नीचे तकिया लगा दिया.
फिर वो मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे.

मैं आह्ह आह्ह करते हुए चुदने लगी.

मगर अचानक से उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर तकिया लगा दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ.

जब एक जोर का झटका लगा तो मेरी जान निकल गयी.
मैं जोर से चीखी लेकिन मेरी आवाज तकिया के नीचे ही दब गयी.

ससुर का लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द से छटपटाने लगी.
मगर ससुर ने लंड को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल दिया.

वो मेरी गांड में धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे मगर मैं दर्द में तड़प रही थी.

मैं दर्द से रोने लगी तो वो बोले- साली … तेरी गान्ड कब से मारना चाह रहा था. आज तो फ़ाड़ डालूंगा इसे मैं!

अब मैं बेहोश होने वाली थी कि एक थप्पड़ जोर से मुंह पर उन्होंने मारा और फिर गांड में लंड को धकेलने लगे.
उसके बाद वो मेरी गांड को चोदने लगे.

धीरे धीरे मेरी गांड खुली और मैं चुदवाने लगी.
पांच मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में दे दिया.
मैं फिर से उनका लंड चूसने लगी.

फिर ससुर ने मेरे मुंह में ही अपना माल गिरा दिया. मैंने उस माल को पी लिया.

उनकी चुदाई से मेरी चूत और गांड दोनों ही फट गयी थी. मगर मुझे चुदाई में मजा भी बहुत मिला.
उन्होंने मेरी चूत और गांड पर मलहम लगाया और मेरा दर्द कम करने की कोशिश की.

अगले 2 दिन तक मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.

फिर उसके 20 दिन के बाद मेरा जन्मदिन था. मेरे जन्मदिन पर भी मेरे ससुर ने मुझे चुदाई का तोहफा दिया.
मगर उस दिन उनके साथ उनका एक दोस्त भी था.
उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदा.

9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं. पहली बार ससुर के लंड से चुदाई और उनका मोटा लंड आज भी जब मैं सोचती हूं तो मेरी चूत गीली हो जाती है.

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मैं गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी

नमस्कार मैं 41 साल की औरत हूं मेरा नाम सुरभि है।  आज मैं आपको अपने सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं यह मेरी कहानी सच्ची कहानी है आज मैं इस कहानी में आपको यह बता रही हूँ  कि मेरा दामाद कैसे मुझे प्रेग्नेंट कर दिया मेरी बेटी तो प्रेग्नेंट है ही मैं भी 2 महीने की प्रेग्नेंट हूं। यह सब कब कैसे और क्यों हो गया वह मैं आपको सिलसिलेवार तरीके से कहानी के माध्यम से इस वेबसाइट पर लिख रही हूं ताकि मैं अपना मन हल्का कर सकूं।

मेरी बेटी आकांक्षा की शादी दिल्ली के एक अच्छे खानदान मैं हो गई। मेरे दामाद जी एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और बहुत बड़े पद पर हैं पैसे भी खूब  है उनके पास उनके माता-पिता उनके साथ नहीं रहते मेरे दामाद जी नोएडा में रहते हैं और उनके मम्मी-पापा दोनों दिल्ली में रहते हैं । उनकी एक बहन है वह विदेश में रहते हैं जो शादीशुदा है। वह अपने मम्मी पापा को 6 महीने के लिए अपने यहां बुला ली तो दामाद जी का  मन नहीं लगने लगा था शादी पिछले साल ही हुई थी और मेरी बिटिया आकांक्षा को भी मन था कि मैं कुछ दिन के लिए उसके पास जाकर रहूं मेरी बेटी भी एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है ।

तो मैं उन दोनों के आग्रह पर मैं बेटी दामाद  के पास ही चली गई। लखनऊ में सिर्फ आकांक्षा के पापा और मेरी छोटी बेटी नेहा रहने लगे मेरे पति भी बोले कि जाओ थोड़े दिन तक अपनी बेटी के साथ रहकर आओ तुम्हें अच्छा लगेगा मैं और नेहा दोनों यहां पर रह लेंगे कोई दिक्कत नहीं होगा। और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गई . दामाद जी मुझे स्टेशन पर लेने के लिए आए हैं बेटी भी साथ आए वह दोनों बहुत खुश हुए और फिर मैं नोएडा के लिए निकल गई जहां पर वह लोग रहते थे ।

समय बीतता गया हम तीनों ही एक-दूसरे से काफी घुलमिल गए थे दामाद जी बहुत अच्छे स्वभाव के थे तो हंसी मजाक करते थे।  उसके बाद मैं मेरी बेटी और मेरा  दामाद ऐसे रहने लगे, जैसे कि दोस्त हो, मुझे अपने दामाद का आदत बहुत अच्छा लगा।  कुछ दिनों के बाद मेरी बेटी आकांक्षा को ऑफिस काम के लिए बेंगलुरु जाना हुआ।  और जाना भी जरूरी था इसलिए मैं और दामाद जी उसको रुक भी नहीं पाए क्योंकि वह भी एक अच्छी कंपनी में काम करते हैं।  जब आकांक्षा चली गई तो हम दोनों को भी मन नहीं लगने लगा था मेरे दामाद जी भी काफी उदास रहने लगे थे और मैं भी उदास रहने लगी।

दोस्तों एक बात तो सही है रिश्ते चाहे कोई भी हो अगर दिल मिल रहा हूं दोस्तों के बीच कोई दीवार नहीं होता वही हाल हुआ मैं और दामाद जी ऐसे रहने लगे जैसे कि एक दूसरे का हमसफर हो  दोस्त हो।  धीरे-धीरे हम दोनों करीब आ गए 1 दिन में जब खाना बना रही थी तो पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रख।  वहां से शुरू हो गया हम दोनों की जिंदगी का पहला अध्याय।

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मैं किचन में रोटियां  बना रहे थे वह पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रखकर बात करने लगे मैं भी कुछ नहीं बोली मुझे उनका हाथ रखना अच्छा लगने लगा इससे मुझे लगा अपनेपन का एहसास तो मैं मना भी नहीं करी।  धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए मेरे सिर पर भी रख दिया फिर वह साइड से मुझे पकड़ दिए और रोटी में जो बेल रही थी उसको वह देखने लगे।

मैं सर झुका के रोटियां बेल रही थी।  तभी दामाद जी बोले कि मम्मी जी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो आप लगती ही नहीं हो कि मेरी मम्मी नहीं आप मेरी दोस्त की तरह लगती हो।  तो मैं भी बोल दे कि हां मैं दोस्त ही हूं तुम्हारी।  उसके बाद में बोली की  चलो खाना खा लेते हैं।   और हम दोनों खाना खाने के लिए बैठ गए।

इतना सब होने के बाद वह मुझे बार-बार घूर कर देख रहे थे कभी वह मेरी चूचियों की तरफ देखते तो कभी मेरी गांड की तरफ देखते कभी मेरे होंठ की तरफ देखते तो कभी मेरे पूरे बदन को निहारते , मैं सब समझ रही थी मैं समझ रही थी कि इनका मन कहीं और डोल रहा है।

पर उनका देखना मुझे भी अच्छा लगने लगा था मुझे लग रहा था आज कुछ होने वाला है क्योंकि मेरे मन में भी कुछ कुछ होने लगा था।

खाना खाकर मैं अपना कपड़े चेंज कि मैं नाइटी पहनी पर उस दिन ऐसा हुआ दोस्तों कि मैं अंदर कुछ नहीं पहनी थी मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि गर्मी ज्यादा थी इसलिए मुझे लगा कि आराम मिलेगा इसलिए मैं अंदर कुछ भी नहीं पहनी ना ब्रा न पेंटी।

मैं बेड पर लेट कर नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर सेक्स कहानियां पढ़ने लगी थी।  एक हॉट कहानी  जो सास और दामाद की थी।  कहानी पढ़ते-पढ़ते लगा आज मेरे पास मौका है और अगर मुझे यह सुख मिल जाता है तो भी कोई बात नहीं।

असल में मेरे पति का उम्र भी हो गया था तो मेरी चुत ** कर नहीं पा रहे थे।  और मैं भी जवान थी तुम मुझे अभी लंड  चाहिए था।  पर मैं कहती कैसे कहानियां जैसे ही खत्म हुई थी मेरे कमरे में आ गए।  मैं जल्दी से अपने मोबाइल बंद की तुम मुझे देखकर कहने लगे कि मम्मी जी आज आप थकी लग रही हो।

तो मैं बोली हां सुबह से आज मैं काम कर रही थी इस वजह से थकान हो गया है।  तो मेरे दामाद से बेड पर बैठ गए और मेरे पैर को अपनी गोद में देखकर दबाने लगे मैं बोले नहीं नहीं ऐसा मत कीजिए आप मेरे पैर मत छुइए।  तो उन्होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं आपको तुम्हें पहले ही बोल चुका हूं कि आप मेरी दोस्त की तरह हो  तो आप भी बोले कि हां दोस्त मान सकते हो तो एक दोस्त दूसरे दोस्त की मदद क्यों नहीं करेगा।

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और वह मेरे पैर को दबाने लगे 10:15 मिनट हो दोनों पैर को मेरी दबाये और फिर नाइटी को ऊपर कर दिया।  जब जांघ  तक नहीं थी पहुंच गई तो मैं हाथ पकड़ कर रख दी उनको।  फिर उन्होंने मुझे कहा कि आप उलट जाओ मैं आपके पीठ दबा देता हूँ।  और मैं उलट गई।  वह मेरे पीछे दबाने लगे धीरे-धीरे चूतड़ दबाने लगे।  उसके बाद तो दोस्तों उनका हाथ मेरे जिस्म को टटोल रहा था।

मेरे चुत  से पानी निकलना शुरू हो गया था।  क्योंकि जब एक मर्द का हाथ लगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाए और मैं खुद काम होने लगे।  मैं सीधा हो गई और मैं उनको देखने लगे मेरी चूचियों को निहार रहे थे।  और धीरे-धीरे उनके कांपते हुए हाथ मेरी चूचियों को मसलने लगे।

मैं कुछ बोल नहीं पाई  मैं उनको नशीली निगाहों से देखने लगी।  उसके बाद तो दोस्तों में अपने बाहें फैला दी और वह मेरे बाहों में  सिमट गए।  अपना  होठ मेरे होंठ पर रख दिया और चूसने लगे। वह अपने हाथों से मेरे चूचियां दबा रहे थे और मेरे सोच को चोद रहे थे हम दोनों ही कामों को गए थे धीरे-धीरे उन्होंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और मेरे जिस्म को सहलाते  हुए मेरे नाइटी उतार दी।

मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां को देखकर वह पागल हो गए वह मेरे निप्पल को चूसने लगे एक हाथ से वह मेरे शरीर को टटोल रहे थे उन्होंने मेरे पैरों को अलग अलग किया मेरे होंठ को चूसते हुए मेरी एक हाथ से चूची को दबाते हुए और एक हाथ से मेरी चुत  पर हाथ फेरने लगे।

दोस्तों अब मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो गई थी मैं  सिसकारियां ले रही थी मैं अंगड़ाइयां ले रही थी।  उसके बाद मैंने तुरंत ही उनका लंबा मोटा सा लंड  पकड़ लिया।  पहले खूब हिलाई उसके बाद अपने मुंह में ले ली।   आइसक्रीम की तरह उनके लंड  को चूसने लगी।

अब मेरे चुत  से गर्म पानी निकलने लगा था।  मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई मैंने दोनों पैरों को फैला दिया और उनको नशीली आंखों से देखा और बोली थी आज मुझे चोद दो.  वह तुरंत ही मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए पहले तो उन्होंने खूब मेरी चुत  को चाहता।  फिर उन्होंने उंगली डाली।  गरम रस वह पी रहे थे उंगलियों में  लगा लगा कर।  उसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा।  अपना लंड  मेरी चुत  पर सेट किया।  और जोर से धक्का दे दिया दोस्तों पूरा का पूरा लंड  मेरी चुत  के अंदर चला गया।

मैं धन्य हो गई मोटे लंबे लंड  को अपने अंदर पाकर।  उसके बाद तो मैं हिला हिला कर  अपने गांड को उनके लंड  को चुत  के अंदर लेने लगे।  साथ में मैं उनके बदन को टटोल रही थी वह मेरी चूचियों को दबा रहे थे मुझे चूम रहे थे मुझे किस कर रहे थे।  मैं भी वही सब कर रही थी जो वह कर रहे थे।

जोर जोर से धक्के देने लगे मैं भी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। उसके बाद तो कभी उलट कर कभी पलटकर कभी ऊपर से कभी नीचे से कभी बैठाकर कभी झुका कर कभी घोड़ी बनाकर कभी कुत्तिया बना कर।

कहीं खड़ा करके कभी लिटा कर कभी टेढ़ा  करके कभी साइड से।  वह मुझे करीब 2 घंटे तक चोदते रहे।  मैं बहुत ज्यादा थक गई थी और वह भी थक गए थे अब मेरे से सहा नहीं जा रहा था।  मुझे दर्द होने लगा था।  मेरी चूचियों को उन्होंने इतनी जोर जोर से दबाया कर उनकी उंगली का निशान मेरी चूचियों पर साफ साफ दिखाई दे  रहा था।

मैं बोली थी दामाद जी आज बस करो मेरी चुत  फट गई है।  आज के लिए इतना ही काफी है।  अब  तो मैं आपकी हूं आप मुझे जैसे चोदो जो करूं अब मैं आपकी  हूं।  फिर उन्होंने जल्दी-जल्दी धक्के देने लगे जोर-जोर से मुझे चोदने लगे मैं भी नीचे गांड घुमा घुमा कर चुदवाने लगी।

और फिर दोनों एक साथ चीखने लगे चिल्लाने लगे और एकदम से हम दोनों  एक साथ ही एक दूसरे को अपनी बांहों में पकड़ कर अपनी पूरी ताकत लगा दी वह ऊपर से धक्के दे रहे थे मैं नीचे से धक्के देने लगी।

उसके बाद उनका सारा बढ़िया मेरी चुत  के अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों  शाम तो हो गए।

उस दिन के बाद से हम दोनों ही एक पति पत्नी की तरह रहने लगे साथ नहाते थे साथ खाते थे साथ सोते थे।  उसके बाद 1 महीने मेरा  मेंस नहीं आया।  मैं भूल गई थी कि मेरा मेंस कब आया था।  उसके बाद में  प्रेगनेंसी टेस्ट की तो पता चला मैं प्रेग्नेंट हूं।  दोस्तों उधर मेरी बेटी भी  3 महीने की प्रेग्नेंट है।  और  मेरा भी दूसरा महीना चल रहा है।

जाने कि मैं भी अपने दामाद के बच्चे की मां बनने वाली हूं।  शायद मेरे लिए कैसा रहेगा क्या बुरा रहेगा वह तो मुझे नहीं पता पर मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा है अब देखिए जो होगा देखा जाएगा।

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वो मुझे चोदने लगा

मेरा नाम निशा है और मैं 22 साल की हूं. मेरी हाईट 5.5 फीट है और मेरा रंग गोरा है. मेरा फिगर 35-28-34 है और मैं दिखने में बहुत सेक्सी हूं.

यह बात 4 साल पुरानी है जब मैं 12वीं में थी. मेरी क्लास के सारे लड़के मेरे बूब्स दबाने के लिए मरे जाते थे.

उन सबसे अलग मेरी क्लास में एक हैंडसम लड़का था. उसकी पर्सेनेलिटी बहुत अच्छी थी. मैं उसको देखा करती थी. उसकी पैंट में उसका लंड भी दिखता रहता था.

कई बार चलते हुए या क्लास में बैठे हुए भी उसका लंड दिखाई देता था. मेरी क्लास की अन्य लड़कियां भी उसको देखा करती थीं. उसकी पैंट की ओर उसके लंड को भी चोर नजर से देखती रहती थीं.

एक दिन टीचर ने हमारी सीट बदलवा दी और इत्तेफाक से उस लड़के की सीट मेरी सीट के पीछे ही आ गयी.

पीछे आकर बैठने के बाद वो बड़बड़ाता हुआ उसको गाली देने लगा- साली रंडी ने सीट बदलवा दी … इसकी मां की … साली ने सारा मूड खराब कर दिया.
मैं पीछे मुड़कर देखने लगी तो वो थोड़ा चुप हुआ.

फिर मैं बोली- ऐसे गाली मत दे उनको, टीचर है वो!
वो बोला- तुझे बड़ी लगी हुई है उसकी इज्जत की?
मैंने कहा- तो ठीक है, और गाली दे … अगर उसने सुन लिया तो तेरी खैर नहीं.

फिर वो चुप हो गया. उसके बाद उसने गाली नहीं दी.

बीच बीच में वो मुझसे बात करता रहा. मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं भी उसको पसंद करती थी.

फिर बातों ही बातों में उसने मुझसे पूछा- तेरा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने जवाब दिया- हां है.
वो बोला- फिर तो तूने उसके साथ किया भी होगा?
मैंने अन्जान बनते हुए कहा- क्या?

फिर वो बेशर्म होकर बोला- सेक्स.
मैं बोली- नहीं, मैंने कभी नहीं किया.
उसने कहा- तो फिर तेरे इतने बड़े (बूब्स) कैसे हैं?

मैं हंसकर बोली- पता नहीं.
उसके बाद मैंने उससे बात नहीं की क्योंकि टीचर देख रही थी.
फिर वो भी आराम से बैठ गया.

तभी लंच का समय हो गया. लंच के बाद हमारा खेल का पीरियड था लेकिन मुझे लंच के बाद पेट में हल्का दर्द होने लगा था.

मैंने टीचर को ये बात बताई.
वो बोली- ठीक है, तो तुम प्लेग्राऊंड में मत जाना.

जब पीरियड शुरू हुआ तो क्लास के सारे स्टूडेंट नीचे चले गये. मैं कमरे में अकेली बैठी रही.

क्लास खाली देखकर मैं बेंच पर लेट गयी क्योंकि मुझे बैठने में दिक्कत हो रही थी.

मैं आंखें बंद करके लेटी हुई थी कि अचानक से किसी ने मेरी चूची को सहला दिया.
मैं सकपका गयी और एकदम से उठी तो सामने वही लफंगा खड़ा हुआ था.
वो मेरा चेहरा देखकर हंसने लगा.

गुस्सा होते हुए मैंने कहा- पागल है क्या तू, क्या कर रहा था ये?
उस पर जैसे मेरे गुस्से का फर्क ही नहीं पड़ा.

वैसे तो मैं भी उसको पसंद करती थी लेकिन उसने बिना पूछे मुझे छू लिया इसलिए मैं नाराज थी.

वो बोला- तूने मेरी बात का जवाब नहीं दिया था तब.
मैंने कहा- कौन सी बात?
वो बोला- यही कि … तेरे इतने बड़े कैसे हो गये?

मैं बोली- उससे पहले तू ये बता कि तू क्लास में कैसे आ गया?
उसने कहा- मेरे भी पेट में दर्द है, मैं हम दोनों का दर्द मिटाने आया हूं.

मैं जान गयी कि ये उसने जानबूझकर किया है. उसने मेरी और टीचर की बातों को सुन लिया था.

फिर वो मेरे पास आ गया और मेरे हाथ को सहलाने लगा.
वो बोला- यार, एक बार तेरे टच करने का बहुत मन कर रहा है मेरा. बहुत बड़े हैं तेरे.

मैं मना करने लगी. मगर वो कहां मानने वाला था.

वो मेरे बहुत पास आ बैठा. मैं भी उसको पसंद करती थी. उसने आकर मेरी चूचियों को छूना और धीरे से सहलाना शुरू कर दिया.
मैंने भी उसका मन रखा और उसको कुछ नहीं कहा.

उस टाइम सर्दियां थीं तो मैंने स्वेटर पहना हुआ था. स्वेटर के नीचे से उसका हाथ आया और वो मेरे बूब्स को दबाने लगा.

मुझे शर्म आने लगी तो मैंने उसका हाथ हटा दिया.
मैं वहां से उठकर दूसरे बेंच पर जा बैठी.

मुझे खुद पर गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि मैं उसके चक्कर में अपने पहले वाले बॉयफ्रेंड को भी धोखा दे रही थी.
मगर वो मेरे बॉयफ्रेंड से देखने में कहीं ज्यादा अच्छा था और मैं उसको रोक नहीं पा रही थी.

वो फिर से मेरे पास आ गया और बोला- छू तो लिये मैंने, एक बार अब दिखा भी दे तेरे बूब्स?
मैंने कहा- नहीं. कोई आ जायेगा.
वो बोला- कोई नहीं आयेगा.

फिर उसने समीज समेत मेरे कुर्ते को उठा दिया और मेरी चूची नंगी हो गयी.
उसने नंगी चूचियों को हाथों में भरा और जोर से दबा दिया.

मैं एकदम से उठ गयी.

इतने में ही क्लास के दूसरे छात्र भी आ गये. मैं अपनी सीट पर आ गयी. वो भी अपनी सीट पर आ बैठा.
उसने चुपके से मेरे कान में कहा- कल आयेगी क्या?
मैं बोली- हां, आऊंगी.

उसने कहा- ठीक है, तो फिर कल तुम काली ब्रा और काली ही पैंटी पहन कर आना.
फिर वो वहां से हटकर अपनी सीट पर चला गया.

अगले दिन जब मैं स्कूल पहुंची तो वो पहले से ही क्लास में बैठा हुआ था.
मैं अपनी सीट पर जाती उससे पहले वो वहां बैठ गया.

फिर मैं शर्मा कर बोली- क्या? ये क्या है, मुझे बैठने दे.

वो बोला- आज का क्या प्लान है? अगर तू हां करे तो कुछ करते हैं आज?
फिर वो खड़ा हुआ और धीमे से मेरे कान में बोला- आज लायब्रेरी का पीरियड है. अगर कुछ मूड हो तो बताना.

फिर अचानक से उसने मेरे गाल पर किस कर दी और अपने हाथ से मेरी गान्ड पर हाथ फेर कर चला गया.
मैं वहां 2 मिनट तक शॉक में ही खड़ी थी. तभी क्लास में बाकी बच्चे भी आना शुरू हो गये.

उसके बाद क्लास शुरू हो गयी. सब अपनी अपनी सीट पर बैठे थे.
वो मेरे पीछे ही था. वो बार बार अपना हाथ मेरी गांड पर लगा रहा था. मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

उस दिन मैं शॉल लेकर आई थी. उसने इसी का फायदा उठाया और नीचे ही नीचे मेरी शॉल में हाथ देकर मेरी चूचियों तक पहुंच गया.
उसने एक दो बार मेरी चूची दबा दी और मैं असहज हो गयी क्योंकि क्लास में बाकी स्टूडेंट्स भी थे.

पहले एक दो पीरियड वो ऐसे ही करता रहा. फिर म्यूजिक का पीरियड आया तो ज्यादार बच्चे वहां चले गये.
मैं और वो वहीं क्लास में रह गये.

हमारे साथ ही 4-5 छात्र और भी थे क्लास में. वो सब अपना अपना समूह बनाकर गपशप में लग गये.

अब वो मेरी सीट पर मेरे साथ ही आ बैठा क्योंकि मेरे साथ बैठी लड़की भी म्यूजिक क्लास में चली गयी थी.

उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा.
मैंने शॉल ओढ़ा था तो कुछ दिख नहीं रहा था.

उसका हाथ धीरे धीरे मेरे सूट के नीचे मेरी नाभि तक पहुंच गया.
मुझे सिरहन हो रही थी.

फिर उसने मेरी सलवार में हाथ दे दिया और मेरी चड्डी के अंदर हाथ देते हुए मेरी चूत को छू लिया.

चूत पर हाथ लगते ही मुझे करंट सा लगा. मैं एकदम से सिहर गयी.
मगर उसने उसी वक्त मेरी चूत को जोर से रगड़ते हुए सहला दिया.
मैं कामुक होने लगी और वो मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब मेरी जांघें अपने आप ही खुलकर उसके हाथ को अच्छी तरह से रास्ता देने लगीं ताकि उसकी उंगलियां मेरी चूत में और अंदर तक जा सकें.
उसने पूरी उंगली घुसा दी और मुझे बहुत मजा आने लगा.

मेरी सांसें तेजी से चलने लगीं और मैंने उसकी जांघ को कस कर पकड़ लिया.
वो अब और तेजी से उंगली चलाने लगा और फिर मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई.
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

अच्छा हुआ कि मैंने अपने बैग में एक अतिरिक्त कपड़ा रखा हुआ था. मैंने कपड़ा निकाला और धीरे से शॉल के नीचे ही अपनी सलवार में कपड़ा डालकर अपनी चूत का पानी पौंछ दिया.

वो अब उठकर अपने दोस्त के पास चला गया और हाथ धुलवाने लगा.
मेरी चूत के रस में उसका हाथ भी गीला हो गया था. हाथ धुलते हुए वो मेरी तरफ देख रहा था और मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी.

उसके बाद लंच हुआ और फिर लाइब्रेरी का पीरियड आ गया.
सब बच्चे जाने लगे.

वो मेरे पास आया और बोला- चलेगी क्या?
मैंने कहा- कहां चलना है?
वो बोला- तू चल तो सही … मैं बताता हूं.

हम दोनों लाइब्रेरी न जाकर दूसरी तरफ चले गये.
वो मुझे लड़कों के वॉशरूम में ले गया.

वहां जाते ही हम दोनों एक वॉशरूम में घुस गये और दरवाजा बंद कर दिया.

मैंने कहा- कोई आ गया तो?
वो बोला- कोई नहीं आयेगा.

फिर उसने अपनी जेब से कॉन्डम निकाला.
मैं कॉन्डम देखकर चौंक गयी.
वो बोला- ऐसे क्या देख रही है, मेरी नजर तुझपर पहले दिन से ही थी. अब जाकर तू हाथ आयी है.

उसके बाद उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया.
उसका लंड पहले से ही तनाव में था. मैंने उसका लंड पकड़ लिया और वो कॉन्डम का रैपर फाड़ने लगा.

फिर उसने अपनी पैंट खोली और नीचे से सरका कर नंगा हो गया. मगर पैंट उसकी टांगों में ही फंसी रही.

उसने मुझे सलवार खोलने को कहा.
मैंने शॉल उतार कर एक तरफ रखा और फिर अपनी सलवार खोल दी.
उसने मेरी पैंटी नीचे कर दी. अपना लंड मेरी चूत पर लगाकर वो मुझसे लिपट गया.

मुझे किस करने लगा और नीचे ही नीचे मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा.

अब मैं एकदम से गर्म होने लगी. उसके होंठ मेरे होंठों पर और उसका लंड मेरी चूत पर कहर ढहा रहे थे.

उसने मेरा कुर्ता ऊपर किया और काली ब्रा निकाल कर फिर मेरी चूचियों को पीने लगा.

मैं पागल होने लगी. उसकी जीभ मेरे निप्पलों पर जादू कर रही थी. मेरे निप्पल तन गये और अब मैंने उसके सिर को चूचियों पर दबाना शुरू कर दिया.

फिर वो नीचे बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.
मैं बदहवास सी होने लगी. मेरी चूत में बहुत मजा आ रहा था.
पहली बार मैं किसी लड़के से चूत चटवाने का मजा ले रही थी मैं क्योंकि मेरे पहले बॉयफ्रेंड ने कभी मेरी चूत नहीं चाटी थी.

अब कुछ देर चाटने के बाद वो उठा और मुझे लंड चूसने के लिए कहने लगा.
मैंने मना कर दिया क्योंकि उस वक्त लंड मुझे बहुत गंदा लगता था.

फिर उसने अपने लंड पर कॉन्डम पहन लिया.
उसके बाद उसने लंड को मेरी चूत पर रख दिया और जोर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

फिर उसने मेरी टांग हल्की सी उठाई और एक धक्का लगा दिया.
उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में उतर गया.

मेरी आह्ह … निकल गयी और मैं उससे लिपट गयी.
वो मेरी पीठ को सहलाने लगा और फिर मेरी गर्दन और गालों को चूमने लगा.

फिर उसने दूसरा धक्का दे दिया और इससे पहले कि मैं चिल्लाती उसने मेरे मुंह को अपने होंठों से बंद कर दिया.
मेरी चीख अंदर ही रह गयी.

फिर उसने धीरे धीरे पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
मेरी आंखों से आंसू गिरने लगे.
वो मुझे चोदने लगा.
मुझे दर्द होता रहा लेकिन वो चोदता गया.

फिर कुछ देर बाद मुझे चुदने का मजा आने लगा और धीरे धीरे दर्द कम हो गया.
अब मैं भी मजा लेकर चुदने लगी.
मैंने उसको कस कर पकड़ लिया और अपनी चूत के धक्के भी बदले में लगाने लगी.

अब मैं खुद उसके होंठों को चूस रही थी.
वो भी मशीन की तरह मेरी चूत को पेलने में लगा हुआ था.

उसने 20 मिनट तक मेरी चूत वहीं वॉशरूम में चोदी.
मैं झड़ चुकी थी.

फिर वो अचानक से रुक गया. उसने लंड बाहर निकाला और कॉन्डम उतार दिया. उसको उसने नीचे टॉयलेट सीट में डालकर फ्लश कर दिया.

फिर उसने मेरे हाथ में लंड दे दिया और हिलाने को कहा.

मैं उसका लंड हिलाने लगी और दो मिनट बाद उसके लंड से सफेद वीर्य निकला. उसकी कई पिचकारी छूटी और फिर वो शांत होता चला गया.
मेरा हाथ उसके माल में सन गया.

उसके बाद उसने अपने लंड को धोया और मैंने अपना हाथ धो लिया.
फिर मैंने भी अपने कपड़े सही किये.

अब उसने धीरे से बाहर की ओर झांका. उसने मुझे निकलने का इशारा किया.

मैं निकली और चुपके से अपनी क्लास में चली गयी.

कुछ देर के बाद वो भी आ गया.

मैं काफी थकी हुई महसूस कर रही थी. मैं वहीं बेंच पर लेटकर सो गयी.

उस दिन के बाद अक्सर हम क्लास में मस्ती करने लगे. जब क्लास में कोई न होता तो वो मुझे चूसने लगता और मेरे बूब्स दबा देता था. मैं उसके लंड की मुठ मार देती थी.

अपने पुराने बॉयफ्रेंड को मैंने फिर छोड़ ही दिया. मैं अपने नये बॉयफ्रेंड के साथ मजे लेने लगी.

अभी भी हम दोनों बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड हैं और एक दूसरे के साथ पूरा मजा करते हैं और एक दूसरे की फंतासी भी पूरी करते हैं.

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मेरी पहली सील पैक चूत की चुदाई

मेरा फिगर 30-28-30 है। मैं 20 साल की हूं और चुदने के लिए बेचैन भी हूं। मैं आपको अपनी पहली चूत मराई की कहानी बताने जा रही हूं। मैं जो भी बताने जा रही हूं यह बिल्कुल एक सच्ची घटना है।

कुछ दिन पहले की बात है कि मैं हॉस्टल से अपने घर जा रही थी। मेरी बड़ी बहन की शादी तय हो गई थी। बहुत सारे दोस्त आ रहे थे और मैंने भी अपने कुछ दोस्तों को बुलाया हुआ था।

उनमें एक दोस्त मेरा बॉयफ्रेंड समीर भी था। वो शादी से दो दिन पहले ही आ गया था। अभी तक मेरी सील पैक चूत की चुदाई नहीं हुई थी। समीर का लंड भी मैंने अभी तक नहीं चखा था।

जब वो शादी में आ गया तो मुझसे अपने रहने का कमरा पूछने लगा।
मैंने उसको मेरा कमरा दिखा दिया। मैं दीदी के पास सोने वाली थी।

उसके बाद मैंने उसको हग किया और किस किया। फिर हम दोनों अपने अपने रूम में सोने चले गये।

रात को मेरी नींद खुल गयी। मुझे कुछ आवाजें आ रही थी। जब मैंने उठकर देखा तो मेरी आंखें फटी रह गयीं. मेरे मामा और मामी दोनों चुदाई में लगे हुए थे. मेरी मामी नीचे नंगी लेटी हुई थी और मामा मेरी मामी की चूत में लंड डाल रहे थे।

मामी मस्त होकर सेक्स के मजे वाली आवाजें निकाल रही थी।

ये देखकर मैं भी गर्म होने लगी. मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने वहीं पर अपनी पैंटी के अंदर हाथ डाल लिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।
मामी की चुदाई देखते हुए मैं चूत को सहला रही थी।

फिर मैंने तेजी से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

जब जब मामा का लंड मामी की चूत में जा रहा था तो मैं उनके लंड को अपनी चूत में जाता हुआ महसूस कर रही थी।
मैं सोच रही थी कि कोई मेरी चूत में भी ऐसे लंड डाल दे।

अब मामा तेजी से मामी को चोद रहे थे. मैं भी जोर से अपनी चूत को सहला रही थी।
इतने में ही मेरी चूत से एकदम पानी निकल गया। मेरी जांघें पूरी गीली हो गयीं।
मैं फिर वहां से वापस आ गयी.

मैंने बाथरूम में जाकर अपनी चूत को साफ किया और बेड पर आकर लेट गयी. उसके बाद मैं लेटी रही और सोचती रही।
मैं सोच रही थी कि काश कोई लंड मेरी चूत के लिए भी होता। मैं समीर के बारे में सोचने लगी। समीर का लंड मैंने नहीं लिया था।

ऐसे ही सोचते हुए मुझे नींद आ गयी.

फिर जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं मामी की चुदाई के बारे में ही सोच रही थी.
मेरा मन समीर से मिलने का कर रहा था। मैं उसके रूम में चली गयी।

मैं जब वहां पहुंची तो वह नहाकर बाहर आया था। उसने अपनी टांगों पर तौलिया लपेटा हुआ था. वो शायद अपना अंडरवियर ढूंढ रहा था।
फिर मैंने देखा कि उसका तौलिया बेड में अटक गया और खुलकर नीचे गिर गया। वो एकदम से नंगा हो गया.

उसने जल्दी से यहां वहां देखा और तौलिया लपेट लिया. फिर वो पलटा तो पीछे मैं खड़ी दिख गयी।
उसने पूछा- तुम कब आईं?

मैं बोली- मैं बस अभी आई हूँ।
वो बोला- कुछ देखा तो नहीं?
मैं बोली- नहीं।

ये बोलकर फिर मैं उसको तैयार होने के लिए कहकर वापस आ गयी।

मैंने समीर का लंड देख लिया था। उसका लंड 7 इंच के करीब था और 3 इंच का मोटा था। मैं उसका लंड लेना चाह रही थी।

फिर दोपहर में सब लोग शॉपिंग के लिए जाने लगे। मुझे भी चलने के लिए कहा लेकिन मैंने बीमारी का बहाना बनाकर मना कर दिया. मैं वहीं रुक गयी।

उन सबके जाने के बाद मैं समीर के रूम में गयी।
वो लेटा हुआ था.

मैं उसके बेड पर चली गयी और उसके ऊपर लेटकर उसको किस करने लगी। वो भी मुझे किस करने लगा।

फिर उसने मुझे हटाते हुए कहा कि कोई देख लेगा।
मैंने बोला- कोई नहीं देखेगा, सब लोग मार्केट में गये हुए हैं.

उसके बाद हम दोनों फिर से किस करने लगे। उसका हाथ मेरी पैंटी पर गया तो वो गीली हो गयी थी।
वो मेरी चूत को सहलाने लगा।

उसके ऐसे बर्ताव से मैं गर्म हो गयी थी और चुदना चाहती थी।

उसके बाद उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया.
मैं नाटक करने लगी कि कोई आ जायेगा।

वो कहने लगा कि मुझे पता है तू चुदना चाह रही है। ज्यादा नाटक मत कर!
फिर उसने मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और मेरे बूब्स को चूसने लगा।

मैं भी उसको चूची चुसवाने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था. पहली बार मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरे बूब्स को चूसा था।

फिर वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरी गांड को भी दबाने लगा.
मुझे मजा आ रहा था लेकिन दर्द भी हो रहा था।

उसका लंड उसकी पैंट को फाड़ने वाला था। मुझे उसके लंड का तनाव साफ महसूस हो रहा था।

वो मुझे सब जगह से चूमने चूसने लगा। मैं यही चाह रही थी. मुझे समीर के साथ बहुत मजा आ रहा था. उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। मेरे भी कपड़े उसने उतरवा दिये।

मैं बेड पर उसके सामने बिना ब्रा के लेटी थी। वो अंडरवियर में था औऱ मेरे ऊपर लेटकर मेरे बूब्स को पीने लगा. मैं अपने चूचे उसको पिलाने लगी।

फिर उसने मेरी चूत पर लंड लगाना शुरू कर दिया।

मुझे मजा आ रहा था। मैं चाहती थी कि वो लंड को जल्दी से मेरी सील पैक चूत के अंदर डाल दे.
मगर उसके लंड पर अंडरवियर था और मेरी चूत पर पैंटी थी।

वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबा रहा था। मेरे बूब्स लाल हो गये थे। मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था। दर्द भी हो रहा था।

फिर उसने मेरी पैंटी में हाथ देकर मेरी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया। मैं मचलने लगी।

वो मेरी चूत में उंगली से चोदने लगा।

मैं उसके होंठों को चूसने लगी। उसके लंड को पकड़ने लगी।

वो बोला- रुक जा साली रंडी, तेरी चूत में यही लौड़ा पेलना है मुझे। मुझे पता है कि तू मेरा लंड लेना चाह रही है।
मैं उसको किस करती रही और उसके लंड को पकड़ कर हिलाती रही।

उसके लंड को चूत पर लगवाकर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था.
वो तेजी से मेरी चूत में उंगली को अंदर बाहर किये जा रहा था.
मैं पागल हुई जा रही थी।

फिर मेरी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया. मेरी चूत पूरी बह निकली।
मुझे बहुत मजा आया।

अब वो मेरी चूत में जीभ से चाटने लगा और मैं पागल होने लगी।
मैं बोली- आज डाल दे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

वो बोला- हां मुझे पता था साली, आ गयी तू लाइन पर! आज तेरी चूत को चोद दूंगा. फाड़ दूंगा इसको साली। बहुत मन है तुझे लंड लेने का। मैं तुझे आज पूरा लंड दूंगा। तू याद करेगी।

फिर वो अपने लंड पर तेल लगाने लगा.
मैं खुश हो रही थी और डर भी लग रहा था।
मेरी चूत को आज लंड मिलने वाला था लेकिन डर लग रहा था कि समीर का लंड मेरी चूत की क्या हालत करेगा।

उसने मेरी चूत पर भी तेल लगा दिया। फिर उसने मेरी सील पैक चूत पर निशाना लगा दिया. उसने लंड को चूत पर रखा और धक्का देने लगा।

उसका थोड़ा सा लंड ही गया था कि मैं चिल्ला पड़ी- आईई … आह्ह … निकाल इसे … आह्ह … ऊई मां … मेरी चूत … फट गयी … आह्ह … निकाल ले समीर … आह्ह बहुत दर्द हो रहा है मेरी चूत में!

समीर ने मेरी एक न सुनी और मेरी चूत में लंड को डालता चला गया।
उसका पूरा लंड घुसते ही मैं तड़पने लगी।
वो मेरे होंठों को अपने मुंह से चूसने लगा। मेरी आवाजें अंदर ही दब गयीं।

फिर उसने मेरे होंठों से होंठों को हटा लिया और मेरे मुंह पर हाथ रख दिया. वो जोर जोर से मेरी चूत में लंड के धक्के लगाने लगा।
मैं दर्द से तड़प रही थी और रो रही थी।

मेरी चूत से खून निकलने लगा था. समीर मेरी चूत में लंड को पेलता ही जा रहा था।
दस मिनट तक मैं दर्द में कराहती रही और वो मुझे चोदता रहा।

फिर मुझे भी मजा आने लगा. मेरा दर्द चला गया और मैं उसका साथ देने लगी।
अब मैं समीर के लंड से चुदने का मजा ले रही थी.

वो हांफ रहा था. उसके पूरे बदन में पसीना आ गया था।
मैं उसको चूमने लगी और अपनी गांड को उठा उठाकर चुदवाने लगी।

फिर वो और स्पीड से चोदने लगा.
मैंने उसको कस कर पकड़ लिया और फिर मैं झड़ने लगी।

उसके लंड से चुदते हुए मैं झड़ गयी। मुझे बहुत मजा आया लेकिन समीर चोदता ही रहा।

वो मुझे बीस मिनट तक लगातार चोदता रहा। अब वो मेरी चूत को फाड़ने में लगा हुआ था.

मेरी चूत में जलन हो रही थी लेकिन समीर नहीं रुक रहा था।
मैं उसको पीछे धकेलना चाह रही थी।

वो चोदते हुए बोला- साली, जब लंड लेने का मन कर रहा था तब नहीं सोचा कि दर्द भी होगा चुदने में? आज मैं तेरी चूत को फाड़ता रहूंगा। मैं तेरी चूत की प्यास मिटा दूंगा।
ये बोलकर वो फिर से चोदने लगा.

मैं उसके लंड को अपनी चूत में बर्दाश्त करती रही।

फिर उसका निकलने को हो गया. वो बोला- कहां गिराना है?
मैं बोली- अंदर नहीं गिराना है।

जब तक वो लंड को बाहर निकालने की सोचता तब तक उसके लंड से माल छूट गया और उसका माल मेरी चूत में गिर गया।
मैंने गुस्सा होकर कहा- ये क्या किया कुत्ते?
वो बोला- कुछ नहीं होगा. दवाई खा लेना।

फिर वो मेरे ऊपर ही लेट गया.
मुझे अब उस पर प्यार आ रहा था.

वो मुझे चूमने लगा.
और मैं भी उसको चूमने लगी।

वो बोला- अब दर्द नहीं हो रहा है ना?
मैं बोली- जलन हो रही है।

वो लंड को डाले हुए ही मेरे ऊपर लेट गया.
हम दोनों दस मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। उसका लंड मेरी चूत में ही सिकुड़ कर बाहर आ गया था। अब वो उठ गया. मेरी चूत की हालत बहुत बुरी हो गयी थी।

चूत पर खून लगा था और समीर के लंड का माल भी बाहर आ रहा था. मैं उठी तो मेरी चूत में जलन हो रही थी. मैं मुश्किल से बाथरूम में गयी और चूत को साफ किया. समीर ने मेरी मदद की।

फिर उसने मुझे नहलाया। उसके बाद नहाते हुए उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. वो मेरी गीली चूचियों को वहीं पर पीने लगा और मैं भी फिर से गर्म हो गयी. समीर ने मुझे बाथरूम में ही चोद दिया।

इस तरह से उस दिन समीर ने दो बार मेरी चुदाई की। उसके बाद हम दोनों तैयार हो गये. मैं अपने रूम में आ गयी। उस दिन मेरी पहली चुदाई हुई थी।

मेरी कुंवारी चूत की चुदाई होने के बाद मैंने अपनी वर्जिनिटी खो दी थी। उसके बाद फिर मैं शादी के दिन भी चुदी। दीदी की सुहागरात के दिन ही मेरी भी सुहागरात हो गयी। अब मैं कुंवारी नहीं रह गयी थी।

दीदी की शादी के बाद समीर वहां से चला गया.
फिर मैं समीर से कई बार चुदी और अभी भी चुदवाती रहती हूं.

इस तरह से मैंने अपनी पहली चुदाई करवाई।

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मेरी गांड बड़ी होने की वजह

मेरा नाम निशु तिवारी है और मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली हूँ. मेरा रंग दूध सा गोरा है. मेरी उम्र 41 साल की है.
मेरी चुचियाँ 38-E नाप की हैं, जबकि मेरी कमर 30 की … और गांड 40 इंच की है.
मैं एक वर्किंग वूमेन हूँ और एक स्कूल में इंग्लिश की टीचर हूँ.

अभी भी मेरी जवानी मस्त हिलोरें मारती है. मेरे अंदर औरत की चुदाई की तमन्ना उफान पर है.

मैं अक्सर झीने कपड़े वाली साड़ी पहनती हूँ. इसके साथ मैं जो ब्लाउज पहनती हूँ, वो काफ़ी गहरे गले का रहता है.
मेरा ब्लाउज आगे से और पीछे से दोनों तरफ से काफी खुला सा रहता है, जिसमें मेरे मम्मे अच्छे ख़ासे दिखते हैं और सभी को कामुकता से भर देते हैं.

इस गहरे गले वाले ब्लाउज से मेरे मम्मों की क्लीवेज बड़ी ही दिलकश दिखती है. चूंकि मेरा ब्लाउज स्लीवलैस रहता है, तो ये और भी ज्यादा कामुकता बिखेरता है.

मैं साड़ी भी नाभि के नीचे बांधती हूँ, जिससे मेरी नाभि और पूरा पेट एकदम साफ दिखता है. मतलब ये कि साड़ी ब्लाउज पहनने से मेरे बदन का कमर तक का ज्यादातर हिस्सा साफ़ दिखता है.

मेरी गांड बड़ी होने की वजह से जब मैं कमर मटका कर चलती हूँ … तो पीछे से मैं और भी ज़्यादा सेक्सी दिखती हूँ.
जो भी मुझे एक बार मेरी इस हिलती हुई गांड को देख लेता है, तो बस देखते ही रह जाता है.

आज से 3-4 साल पहले मेरे पति का निधन हार्टअटैक से हो गया था. मेरी एक ही बेटी आरुषि है, जो तब जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी.

पति के गुज़र जाने के बाद शुरुआत के कुछ साल मेरे और मेरी बेटी के लिए बहुत मुश्किल के थे. हम दोनों इनकी मौत के सदमे से उभर भी नहीं पाए थे कि हमको पैसों की दिक्कत आने लगी थी. जिसके लिए मैंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया.

मैंने अपने इस काम की बदौलत एक साल पहले मेरी बेटी की शादी कर दी थी. ये सब मैंने अकेले के बल पर किया था और मैं अब अकेली ही अपना पेट पाल रही हूँ.

कुछ साल पति का सदमा. फिर घर और बेटी की ज़िम्मेदारी और उसकी शादी की. जिस वजह से मुझे कभी अपने लिए टाइम ही नहीं मिला.

लेकिन अब मुझे ये अकेलापन खाए जा रहा था. मैं रोज़ रात को अश्लील पिक्चर और अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ कर अपनी चूत में उंगली करके अपने आपको दिलासा दे रही थी.
लेकिन अब मुझसे ये झूठी सांत्वना चूत को रास नहीं आ रही थी.
अब मेरी चूत को एक असली लंड और एक मर्द की ज़रूरत थी.

मेरी चार पक्की सहेलियां हैं, जिनमें से एक का नाम आबिया है. वो भी मेरी ही उम्र की है.
दूसरी का नाम अनामिका ये 37 साल की है और तीसरी सुमेधा, जो 40 साल की और चौथी ममता है. ये 34 साल की है.

ये सब भी मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ाती हैं. इन सबसे मैं हर तरह की बात कर लेती हूं.

चूंकि इन सबके पति ढीले पोले हैं, इसलिए ये सब पैसे देकर लड़के बुलाती हैं और उनसे चुदवा कर अपनी भूख शांत करवा लेती हैं.

लेकिन अब इनका ये खेल बंद हो गया है क्योंकि जिस जगह से वो सब लड़के आते थे, उस पर एक दिन छापा पड़ गया था. तो अब ये सब भी मेरी तरह तड़पती रहती हैं.

एक दिन जब मैं अपने स्कूल से अपनी सहेलियों के साथ निकली, तो वो सब दूसरी तरफ को जाने लगीं. सड़क पर ट्रेफिक ज्यादा था तो वो सब सड़क के पार जाने के लिए कुछ पल रुक कर बात करने लगीं.

मैं रोड के इसी तरफ रुककर किसी ऑटो के रुकने का इंतजार करने लगी.

मैं ऑटो के इंतजार में थी और उसी समय मैंने देख लिया था कि सड़क की दूसरी तरफ एक 19 या 20 साल का बहुत स्मार्ट सा लड़का खड़ा था.

ममता ने मुझे इशारा करके दिखाया और बोली- काश ये लड़का मिल जाता, तो इसको अपनी सारी जवानी दे देती.

तब तक आबिया बोली- अबे यार, अब तुम जवान ही कहां रही हो.
इस पर सुमेधा बोली- अरे यार, अभी भी हम सब किसी 21-22 साल की लड़की से कम नहीं हैं, बस कोई मिले तो.

इतने में सड़क पर कुछ ट्रेफिक कम हुआ और मेरी सारी सहेलियां सड़क पार करके चली गईं.
तभी वो लड़का मेरी तरफ आ गया. शायद वो भी ऑटो लेने के लिए इस तरफ आ गया था.

मेरे साथ अब वो भी ऑटो का ही इंतज़ार कर रहा था. मैं वहां से उसी लड़के के बाजू में आकर खड़ी हो गयी.

कुछ देर बाद एक खाली ऑटो हमारे करीब रुकी, तो पहले मैं उसमें जाकर एक किनारे बैठ गयी और वो लड़का भी मेरी तरफ वाली सीट पर बैठ गया.
ये ऑटो छह सवारी वाली ऑटो थी.

जब ऑटो आगे चली, तो धीरे धीरे उसमें मेरे बीच में दो सवारी और आ गईं. उसमें से एक सवारी हमारी सीट पर बैठ गई और एक सामने वाली सीट पर बैठ गई. इस तरह आखिरकार वो लड़का मेरे ही बगल में को हो गया और सामने वाली सीट भर गई थी. अब मैं भी बस यही प्रार्थना कर रही थी कि इस तरफ भी कोई और आ जाए तो ये लड़का बिल्कुल मेरे पास आ जाएगा.

शायद ऊपर वाले ने मेरी ये बात सुन ली और तभी एक बूढ़ी और बहुत मोटी सी औरत चढ़ी, तो ऑटो वाला मुझसे बोला- आप ज़रा साइड हो जाइए, सवारी बैठने दीजिए.

मैं जानबूझकर और दब गई और वो लड़का भी अब एकदम मेरे बदन से सट गया.

जैसे ही वो औरत बैठी तो उसने और जगह ले ली. इससे उस लड़के मेरे सिर के पीछे से हाथ निकाल कर रख लिया और एकदम मेरे से लग कर बैठ गया.

ऑटो चली, तो कुछ देर बाद जब झटका लगा. इस झटके से उस लड़के का हाथ मेरी खुली हुई बांह पर लग गया. मुझे बड़ा अच्छा लगा.

फिर अगले झटके पर मैंने जानबूझ कर अपना हाथ थोड़ा उसके हाथ की तरफ कर दिया.
उसने भी मेरे हाथ से अपना हाथ सटा लिया.

इससे मुझे लगा कि ये लड़का शायद मेरे साथ कुछ करना चाह रहा है.

मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उठा लिया और सामने की खिड़की के पाइप को पकड़ लिया. इससे मेरी साड़ी का खुला हिस्सा उसके हाथ की तरफ आ गया था.

तीसरे झटके में उसका हाथ पहले मेरे बगल में पेट पर छुआ.
जब मैंने कोई विरोध नहीं किया, तो उसने अपना हाथ और अन्दर ले जाकर मेरी चुचियों से टकरा दिया.
उसका हाथ मेरी चूचियों से लगा तो मुझे भी मज़ा आने लगा.

इसी तरह वो अब हर झटके का फायदा ले रहा था और मेरी चूचियों से खेल रहा था.

कुछ देर तक चलने के बाद एक औरत और चढ़ी, तो ऑटो में जगह नहीं बची थी. ऑटो वाले ने उस लड़के को आगे बुला लिया, तो उसने अपना किराया वहीं दे दिया और मुझे देखने लगा.

एकाएक उसने मुझे ऑटो से उतरने का इशारा किया, तो मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूं.

ऑटो आगे बढ़ी, तो मैंने हल्का सा पीछे मुड़ कर देखा … तो वो मुझे बुला रहा था. मगर ऑटो आगे बढ़ गयी थी.

मगर कुछ दूर जाने के बाद मुझे लगा कि मुझे उतर जाना चाहिए था. शायद ये मेरा अच्छा मौका था, जो मैंने गंवा दिया.

मैंने तुरंत ऑटो रुकवाया और उसको पैसा देकर फिर उसी तरफ जाने वाली एक ऑटो पकड़ ली.

मैं उधर उतर गई, जिधर वो लड़का उतरा था. मैं उस लड़के को ढूँढते हुई जा रही थी कि कुछ दूर पर वो लड़का मुझे दिख गया.

उसने भी मुझे देख लिया था. वो लड़का हांफते हुए मेरे पास आया और बोला- मुझे तो लगा कि आप नहीं रुकोगी.
मैंने उससे पूछा- बताओ क्या काम है, जिसके लिए तुम मुझे बुला रहे थे?

लड़का- मुझे आपका नंबर चाहिए.
मैं- क्यों क्या काम है?

लड़का- क्योंकि आप मुझे अच्छी लगी इसी लिए.
मैं- अरे तुमको नहीं पता, मैं शादी शुदा हूँ और मेरी और तुम्हारी उम्र देखी है … पागल हो क्या तुम?

लड़का- अब देखो आप मुझे अच्छी लगीं, तो मैंने आपको बोल दिया. बस अब इसमें उम्र और इतना नहीं मतलब होता है.
इस वक्त हम दोनों जहां खड़े थे, उसी के पीछे एक गली थी.

मैंने उससे बोला कि तुम इस गली में आ जाओ, इसमें बात करते हैं.

शुरुआत में वो मुझे मक्खन लगाए जा रहा था और मैं भाव खा रही थी.

कुछ देर बाद वो बोला- ठीक है, आप मुझे आप अच्छी लगी थीं … लेकिन शायद मैं आपको अच्छा नहीं लगा. तो छोड़ो जाने दो, अब मैं जाता हूं.

इतना बोल कर वो जाने लगा, तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको रोका.
वो मुस्कुराने लगा.

मैंने उससे बोला- देखो मुझे भी तुम अच्छे लगे और पसंद हो, लेकिन हम दोनों की उम्र इस तरह की नहीं है कि हम ये सब करें.

वो मेरे थोड़ा पास आया और उसने मेरी नंगी कमर पर पीछे से हाथ डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा और बोला- जब पसंद हूँ … तब बात करने में क्या दिक्कत है.

मैंने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम सत्यम बताया.

वो एक जवान लड़का था और अभी मैंने उसको अपना नाम नहीं बताया था. बस उस लड़के से मैं नंबर लेकर चली आयी.

दो दिन तक मुझे उसी का ख्याल आता रहा. मैंने अपने आपको बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन उसको मैंने मैसेज कर दिया और उसने मुझे तुरंत पहचान लिया.

इसके बाद हमारी थोड़ी बहुत बात हुई, तो मैंने उससे उसकी कुछ फोटो मांग लीं.
लेकिन उसको अपनी फोटो अभी नहीं दी.

उस दिन रात में मैं उसी की फ़ोटो के सामने नंगी होकर अपनी चूत में उंगली की, तो आज मुझे एक अलग ही मज़ा मिला.

फिर कुछ दिनों तक मेरी उससे ऐसे ही बात चलती रही. वह एक 19 साल का लड़का था, जो कॉलेज में पढ़ता था.

इसी तरह बात करते हुए एक दिन उसने कहा कि मुझे तुमको देखने का बहुत मन कर रहा है.
मैंने बोला- ठीक है, उस दिन जिस गली में हम मिले थे … उसी गली में मिल लिया जाए!

उसने कहा- उस गली के आगे एक छोटा गार्डन है, जहां कोई आता जाता नहीं है. वहीं चला जाए और कुछ देर बैठ कर बात की जाए.
उसकी बात पर मैं भी राजी हो गई.

दो दिन के बाद वह अपने कॉलेज से जल्दी निकल आया और मेरी छुट्टी होने के बाद हम दोनों साथ में ऑटो से बैठ कर आए.
आज वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे चिपककर बैठा था और मेरी बांहों को सहला रहा था.

मैंने उसे रोका और उसका हाथ हटा दिया. यदि मैं नहीं हटाती तो शायद वो मेरी चूचियों को ही मसलना शुरू कर देता.

उस जगह पहुंचने के बाद हम दोनों उतरे और उसी गली से होकर उस गार्डन में आ गए. वो बहुत सुनसान इलाका था एकदम सन्नाटा था, वहां कोई आता जाता नहीं था.

उस गार्डन का दरवाजा बंद था, जिसको सत्यम ने खोला और मुझे अन्दर करके उसमें कुंडी लगा दी. हम दोनों एक पेड़ की आड़ में पत्थर पर बैठ गए.

वह मुझसे प्यार भरी बातें कर रहा था और मेरा हाल चाल पूछ रहा था. एकाएक बात करते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, जिससे मुझे भी अन्दर अन्दर गुदगुदी होने लगी, लेकिन मैंने सत्यम को यह चीज पता नहीं चलने दी.

फिर कुछ देर के बाद जब मैं जाने लगी तो सत्यम बोला- एक बार गले तो लगा लो.
मैंने हंस कर उसको गले से लगा लिया.

इससे मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां उसके सीने से चिपक गईं. उसने भी अपना हाथ पीछे करके मुझे पीठ और कमर से कसके जकड़ लिया.
इससे मुझे एक अलग ही सुरूर चढ़ने लगा तो मैंने अपना चेहरा उठा दिया.

उसका मुँह मेरे ही सामने था. मैंने अपने आपको बहुत रोका … लेकिन मेरे होंठ उसके होंठ पर छू गए और बिना रुके मैं उसके नर्म नाजुक गुलाबी होंठों को चूसने लगी.
वह भी मेरा बराबरी से साथ देने लगा. कुछ देर एक दूसरे को चूमने के बाद मैं उससे अलग हुई और घर चली आई.

आज उस लड़के के साथ जो हुआ था, उससे मेरे मन को बहुत प्रसन्नता मिली थी. अब हम दोनों खुली खुली बात करने लगे.

फिर एक दिन मेरी सहेली से मैंने अपनी यह बात बताई, तो वह बोली- निशु, तू तो बड़ी हरामी निकली. इतने दिनों से अकेले अकेले मजा ले रही थी और हम सबको आज बता रही हो.

उन लोगों ने मेरे मोबाइल पर उसकी फोटो देखी और सबने अपने अपने नंबर पर उसकी डिटेल ले ली.

तभी ममता बोली- क्या उसके साथ खाली चुम्मा चाटी ही करती रहोगी या आगे भी कुछ करोगी?
मैं बोली- यार तुम सब तो इस खेल में खिलाड़ी हो. मैं अभी इस खेल में नहीं हूं. मैंने उस लड़के को अभी अपना नाम तक नहीं बताया, मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं वह लड़का ऐसा वैसा ना निकले. कहीं मेरी पूरे समाज में बदनामी न हो जाए.

तब तक अनामिका बोल पड़ी- क्या तू पागल है? अगर ऐसा वैसा लड़का होता, तो इतनी बार मिलने पर तेरी चूचियां दबा देता. लेकिन उसने अब तक ऐसा कुछ नहीं किया. इसका मतलब वह लड़का ऐसा वैसा नहीं है. एक 19 साल का जवान लड़का तुझे मिला है यानि कि अभी उसकी पूरी जवानी तेरी है. तू जिस तरह चाहे, उसको अपने लिए इस्तेमाल कर सकती है. तू समझ ले कि तुझे एक चिकना लौंडा मिला है. तू उस पर जितना हाथ फ़ेरेगी, वह उतना ही तेरे लिए होता जाएगा. फिर तू तो घर पर अकेली ही रहती है, ले जा किसी दिन दोपहर में उसको अपने कमरे में और चैक कर उसका सामान कैसा है और कैसी परफॉर्मेंस देता है.

इस तरह से उन लोगों ने मुझे काफी उत्तेजित कर दिया और उसी वक्त मुझे सत्यम को फोन मिलाने को बोला.

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सील पैक चुत

मैं गौरव तीस वर्ष का एक जवान शादीशुदा आदमी हूँ.
ये टॉयलेट सेक्स कहानी मेरी शादी के एक साल बाद की ही है.

मेरी बीवी की एक सहेली थी, जिसका नाम अनुराधा था.
अनुराधा मुझे जीजा जी कहती थी. उसकी अभी शादी नहीं हुई थी.

उसका बदन गोरा, चेहरा गोल, छाती पर फूले और कसे हुए दो हाहाकारी मम्मे थे. उसके मम्मों का साइज़ बत्तीस इंच का था.
अनुराधा की गोरी कमर का साइज़ अट्ठाईस इंच और उभरे हुए मुलायम चूतड़ों का साइज़ चौंतीस इंच था.

जब भी मैं उसको देखता था, तो मेरा लंड तनकर खड़ा हो जाता था.

शादी के बाद जब भी मैं बीवी के पीहर जाता था, तो वो मुझसे मिलने आ जाया करती थी.

फिर कुछ ऐसा हुआ कि मेरी जॉब मेरी ससुराल के गांव में ही लग गई; मैं उधर ही रहने लगा.
अब अनुराधा अक्सर मुझसे मिलने आ जाया करती थी.

उसकी नशीली नजरें मुझे सदा ही उत्तेजित करती रहती थीं. मैं उसे किसी तरह चोदने के बहाने ढूँढता रहता था लेकिन मैं अभी तक उसे चोद नहीं पाया था.

एक बार गांव में सालाना मेला लगा था.
मेरी बीवी मुझसे मेले में ले चलने के लिए ज़िद करने लगी.

मैं उसे शाम को मेले में ले गया.

वहां पर हम लोग अभी घूम ही रहे थे कि तभी वहां अनुराधा दिख गयी.
वो भी अपने छोटे भाई के साथ मेले में आयी थी.

उसे देखते ही मेरे बदन में सिहरन सी उठने लगी और मेरे मन में कामवासना की आग धीरे धीरे भड़कने लगी क्योंकि वो उस दिन इतना सज-धज कर आयी थी जैसे वो मुझसे कह रही हो कि अब मैं उसके बदन की प्यास बुझा ही दूं.

उसकी चंचल निगाहें मुझे समझ आ रही थीं कि लौंडिया चुदने को मचल रही है.

उस दिन उसने सफ़ेद रंग की कसी हुई कुर्ती पहनी थी. उसका गला आगे पीछे दोनों तरफ से गहरा होने के कारण उसकी गोरी पीठ लगभग दिख रही थी और आगे उसकी कसी हुई चूचियों के उभार साफ़ दिख रहे थे.
जिससे वो और भी कामुक दिख रही थी.

उसने नीचे लाल रंग की कसी हुई लैगी पहनी थी जो बहुत ही चुस्त थी.

अपने होंठों पर उसने लाल लिपस्टिक लगायी थी जो कि मेरे औज़ार को बाहर आने पर मजबूर कर रही थी.
उसकी गोरी उंगलियों के नाखूनों पर लाल रंग की नेलपॉलिश लगी थी.

उसने मेरे करीब आते हुए मुझसे इठला कर कहा- चलिए न जीजा जी, मौत का कुआं देखते हैं.
मैंने कहा- हां चलो.

मेरी बीवी का भी मौत के कुंए की कलाबाजी देखने का मन था.
हम सब मौत के कुएं की तरफ़ चल दिए.

वहां पर पहले से ही काफी भीड़ थी.
मैंने भीड़ देख कर कहा- रुको, मैं टिकट लेकर आता हूँ.

वो सब वहीं रुक गए और मैं टिकट खिड़की से टिकट लेने लगा.

किसी तरह से टिकट लेने के बाद मैंने कहा- अब चलो चलते हैं.

मौत के कुएं में ऊपर जाने के लिए सीढ़ी बनी थी. मेरे आगे आगे अनुराधा और उसके भाई सीढ़ी चढ़ने लगे. मैं और मेरी बीवी उनके पीछे चलने लगे.

थोड़ा चढ़ने पर ही हवा से उसकी कुर्ती उड़ने लगी और मेरी नजर उसके हिलते हुए चूतड़ों पर टिक गयी.
सच में क्या कामुक नजारा था.

अनुराधा की मटकती गांड किसी भी मर्द को वासना से पागल कर देने के लिए काफी थी.

यदि अनुराधा इस समय सन्नाटे में होती, तो शायद मैं उसे उधर ही पटक कर चोद देता!

उसके हिलते चूतड़ों पर चिपकी हुई कसी लैगी में से उसकी पैंटी की लकीरें साफ़ दिख रही थीं.
मुझे देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी पैंटी अभी फट कर बाहर आ जाएगी.

मैं किसी तरह से अपना लंड दबाए ऊपर पहुंच गया.
हम सभी के ऊपर आते ही शो शुरू हो गया.

सभी लोग शो का मज़ा ले रहे थे लेकिन मैं अपनी सुधबुध खो चुका था; मेरे दिमाग़ में बस उसके कसे हुए चूतड़ ही घूम रहे थे.

बीस मिनट बाद शो खत्म हुआ, लेकिन मेरे कामुक मन की कामुकता शांत नहीं हो रही थी.

अब लोगों की भीड़ नीचे उतर रही थी. आगे अनुराधा थी, मैं उसके ठीक पीछे था. मैंने ठान लिया था कि आज इसके चूतड़ों को छूना ही है.

वो एक जीने पर खड़ी हो गयी क्योंकि आगे बहुत भीड़ थी.
लोग धीरे धीरे नीचे उतर रहे थे.

भीड़ के कारण लोग एक दूसरे से चिपक कर खड़े थे. मैं भी आगे खड़ी अनुराधा से चिपक गया. मेरा लंड उसके चूतड़ों के बीच की लकीर में चिपक गया.

उसी समय मैंने अपना दायां हाथ उसके दाहिने तरफ़ के चूतड़ पर धीरे से रख दिया.

उसके चूतड़ पर हाथ रखते ही मुझे ऐसा लगा मानो मैं किसी मख़मली गाव तकिया को छू रहा हूँ.
मेरा लंड मेरी जींस में और भी ज्यादा टाइट होकर अकड़ हो गया. लंड अनुराधा के चूतड़ों के बीच में घुसने की कोशिश करने लगा.
मुझे बहुत मज़ा आने लगा.

शायद उसे भी लंड के चुभने का अहसास होने लगा था.
एक दो मिनट तो उसने कुछ नहीं कहा.
फिर उसने मुझे एकदम से पलट कर देखा तो मैं डर गया.

उसी समय उसने धीरे से मुझे स्माइल दे दी.

उसकी मुस्कान से लगा कि वो भी मेरे लंड का आनन्द लेना चाह रही हो.
मैंने अब बिंदास उसकी गांड में अपना लंड सटा दिया.
उसने भी मेरे लंड को अपनी गांड हिला कर इशारा दे दिया कि ये छेद तेरे लिए रेडी है.

अनुराधा मुझसे सटी हुई नीचे उतरने लगी.
मैंने इसी समय उसकी कमर पर हाथ रख कर एक जोरदार ठुमका लगाते हुए उसकी आह निकाल दी.

वो धीरे से फुसफुसाई- जीजू मत करो न … मुझे कुछ कुछ हो रहा है.
मैंने उसकी गर्दन के पास अपना मुँह ले जाकर कहा- मुझे तो बहुत कुछ हो रहा है.

वो कुछ नहीं बोली, बस हंस दी.

फिर उतरते हुए ही उसने मुझे फ़ोन पर मैसेज किया कि आप टॉयलेट के पास मिलिए, मुझे आपसे अकेले में काम है.
मैं समझ गया कि आज काम हो जाएगा.

नीचे उतरते ही उसने मेरी बीवी से कहा- अच्छा तुम रुको, मैं ज़रा टॉयलेट से आती हूँ.
मेरी बीवी ने कहा- इधर टॉयलेट कहां है?

मैंने बताया कि मेला कमेटी ने टॉयलेट बाहर की तरफ बनाए हैं मुझे भी जाना है मैं अनुराधा के साथ चला जाता हूँ.
मेरी बात सुनकर मेरी बीवी ने कहा- ओके मैं तब तक कुछ सामान खरीद लेती हूँ.

अनुराधा तब तक अपनी गांड मटकाती हुई चली गयी.
मेरी बीवी मुझसे सामान ख़रीदने की ज़िद करने लगी.

मैंने कहा- ठीक है ये पैसे रख लो, तुम जब तक सामान ख़रीदो, तब तक मैं भी टॉयलेट जा रहा हूँ.

इसके बाद मैं टॉयलेट के पास आया.
वो बाहर खड़ी थी.

ये टॉयलेट सुनसान जगह पर बना था.

उसने जल्दी से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे एक टॉयलेट में खींच लिया.
अन्दर घुसते ही अनुराधा ने दरवाज़ा बंद कर दिया.

मुझे यह समझते देर ना लगी कि आज टॉयलेट में मेरी सेक्स की इच्छा पूरी होने वाली है.
मैंने उसका इशारा समझ लिया था.

उसने कहा- जीजा जी, मेरी प्यास बुझा दीजिए.
मैंने उसको अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसके दोनों चूतड़ों को हाथों से दबाने लगा.

वो आह आह करके आवाज निकालने लगी और कहने लगी- जीजू, थोड़ा धीरे दबाओ यार … दर्द होता है.

मैं उसकी मख़मली गांड को सहलाने लगा और उसके रसीले होंठों को अपने होंठों में भरके चूसने लगा.
अनुराधा के होंठों को चूसते चूसते मैं उसकी गर्दन को भी चूमने लगा.

वो मदहोश होने लगी.

कुछ पल के बाद मैं अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबाने लगा.
वो मस्ती से आह आह करके कामुक सिसकारियां भरने लगी.

फिर मैंने अपनी बीवी को फोन लगाया कि इधर एक ही टॉयलेट है और लोग ज्यादा हैं, तो हमें कुछ देर लग जाएगी. तुम मेला घूमो … मैं अनुराधा के साथ अभी आता हूँ.
मेरी बीवी ने ओके कहा और फोन काट दिया.

अब मैं बिंदास हो गया था.

अनुराधा मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी और बोली- समझने में बड़ी देर कर दी जीजू.
मैंने कहा- अब जो हुआ सो हुआ … अब देर न करो मेरी जान.

ये कहते हुए मैंने उसकी कुर्ती उतार दी.
उसका संगमरमर जैसा गोरा बदन मेरे सामने था. उसने अपने मम्मों पर सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी थी, जो बहुत सेक्सी लग रही थी.

मैंने जल्दी से उसकी ब्रा का हुक टटोला और धीरे से खोल कर ब्रा उतार दी. मैं अनुराधा की ब्रा के कप सूंघने लगा, जिसमें से मुझे उसके बदन की कामुक ख़ुशबू आ रही थी.

मैं उसकी चूचियों को जीभ से चाटने लगा. उसके भूरे निप्पल खड़े होने लगे. फिर मैंने उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से जीभ से जी भरके चाटा.

वो कहने लगी- जीजू अब देर मत करो … पहले मुझे ठंडी कर दो … जल्दी से मुझे एक बार चोद दो.
वह मेरे लंड को हाथ से पकड़ने लगी.

मैंने अपनी जींस उतार दी और चड्डी में से अपना छह इंच लम्बा लंड उसके हाथ में दे दिया.
वो मेरे लंड के नीचे हाथ चलाते हुए लंड की गोलियों को सहलाने लगी.

अगले ही पल वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे खड़े लंड के सुपाड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी.

अब मेरी आहें निकलना शुरू हो गई थीं.

अनुराधा ने जी भरके लंड चूसा और इसके बाद वो मेरी तरफ़ अपनी गोरी पीठ करके खड़ी हो गयी.

मैंने झट से उसकी लैगी नीचे सरका दी. उसने अन्दर गुलाबी पैंटी पहन रखी थी. मैंने उसकी पैंटी नीचे को कर दी.

उसकी पैंटी हल्की गीली हो गई थी.
वो अपनी लैगी और पैंटी को पूरी उतारने लगी.

मैंने उसके हाथ से उसकी पैंटी ले ली और उसे सूंघा. उसमें से उसकी चूत के रस की कामुक ख़ुशबू आ रही थी.

मैंने उसकी पैंटी में लगे थोड़े से रस को जीभ से चाटा, तो बहुत ही नमकीन स्वाद आ रहा था.

अब मुझसे रहा ना गया. मैंने झट से उसे घोड़ी के पोज में झुकाया और उसकी कसी चूत में अपनी जीभ घुसा कर चाटने लगा.

उसकी चुत अब तक फटी नहीं थी, एक सील पैक चुत थी. उसकी सील पैक चुत में से मस्त महक आ रही थी.

मैं उसकी कुंवारी चुत से निकलते हुए माल को चाटने लगा. चुत की मलाई चाट लेने के बाद मैंने तुरंत अपने लंड पर थूक लगा कर उसे चिकना किया और एकदम से उसकी चूत में घुसा दिया.

वो अपनी चुत में लंड लेते ही चीख पड़ी- आह्ह ऊई मां … मर गयी.

मैं उसकी चुत में धीरे धीरे धक्के लगाने लगा.
मैंने देखा उसकी चूत से कुछ बूंदें खून की भी गिर गई थीं.

कुछ देर के दर्द के बाद मेरे धीरे धीरे धक्के मारने से उसे मज़ा आने लगा.
वो कहने लगी- आह जीजू और ज़ोर से चोद दे मुझे … आह मादरचोद जीजू साले फाड़ दे मेरी चूत को. अपने इस गर्म लंड से इसका भोसड़ा बना दे … आह और ज़ोर ज़ोर से चोद हरामी ठरकी जीजू साले चोद दे.

मैं उसकी इस भाषा से और भी गर्मा गया और तेज तेज धक्के लगाने लगा.

धक्के लगाने से लंड की गोटियां अनुराधा के चूतड़ों के टकराने लगीं. इससे पक पक की आवाज़ आने लगी.

मुझे और उसे दोनों को ही अब चुदाई का आनन्द आने लगा था.

जल्दी ही वो चुदाई के चरम सुख पर पहुंच गयी थी. उसकी रस भरी चूत से अब पानी आने लगा था.
मैं और ज़ोर से झटके देने लगा और तभी मेरा गर्म माल उसकी चूत में छूट गया.

उसको चुदने में बहुत मज़ा आया. टॉयलेट सेक्स के बाद हम लोगों ने कपड़े पहने और अपने अपने घर को चले आए.

आज उसकी शादी को एक साल हो गया है मगर वो मेरे लंड की आज भी शैदाई है.
मैं उसे जब तब होटल में बुलाकर चोदता रहता हूँ. उसे मुझसे चुदकर बहुत मज़ा आता है.

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वो मेरी चूचियों को काटते हुए चोदने लगा

हैलो, मेरा नाम रिजवाना है। मेरी उम्र 40 साल है. मैं एक शादीशुदा औरत हूं. हमारी ज्वाइंट फैमिली थी और घर में मेरे और मेरे शौहर व बेटे के अलावा मेरा जेठ, जेठानी, उसकी बेटी और बेटा भी रहते थे.
मेरी शादी के बाद से ही मेरे शौहर ज्यादातर काम की वजह से बाहर ही रहते थे।

अब मैं आपको अपने बारे में बता दूं कि मेरा रंग गोरा है. मेरा साइज 38-32-36 का है.

बच्चा होने के बाद मेरे शौहर मुझे वो मजा नहीं दे रहे थे जो पहले दिया करते थे. अब उनको भी मेरी चूत में कम मजा आने लगा था. वो चुदाई भी कम करने लगे थे. मैं अब अक्सर प्यासी ही रहती थी.

वैसे भी मेरे शौहर ज्यादा समय तो काम के कारण बाहर ही रहते थे. जब घर में होते तब भी ज्यादा चुदाई नहीं करते थे.

जब मेरा मन चूत में उंगली करने का करता तो मैं अपने जेठ और जेठानी की चुदाई देखा करती थी. मैं उनकी चुदाई देखकर अपनी चूत में उंगली किया करती थी.

उनकी चुदाई देखने के लिए मैं देर रात तक जागा करती थी. मेरे शौहर के मुकाबले मेरे जेठ का लंड ज्यादा लम्बा और मोटा था और उसके शरीर में ताकत भी काफी ज्यादा थी।

कई बार मैंने अपने जेठ को पटाने की कोशिश भी की थी. उसकी बीवी यानि कि मेरी जेठानी उससे बहुत खुश रहती थी. इसलिए वो मेरी तरफ ज्यादा ध्यान भी नहीं देता था.

फिर ऐसे ही वक्त गुजरने लगा और हम दोनों के बच्चे बड़े होने लगे. मेरी चूत को मैं जैसे तैसे करके शांत करती रही. कभी गाजर मूली से काम चलाती तो कभी उंगली या बेलन से।

हमारी जवानी ढलने लगी और बच्चों में जवानी आने लगी.
मेरे जेठ का बेटा अब 19 साल का हो गया था. मेरा बेटा भी उसी की उम्र का हो गया था.

मेरी चूत की आग अभी भी वैसे ही जलती रहती थी.

मेरे जेठ की जवानी भी ढल गयी थी मगर अब घर में कई जवान बच्चे हो गये थे.

एक बार की बात है कि मेरी जेठानी उसके मायके में गयी हुई थी. उसकी बेटी भी साथ में गयी थी. जबकि उसका बेटा समर घर में ही था. वो मुझे चाची कहता था.
इधर मेरा बेटा अपने पिता के साथ ही कुछ दिन के लिए बाहर चला गया था.

मेरा जेठ सुबह जाता था और शाम को घर लौटता था. घर में मैं और समर ही रहते थे. मैं ही उसके लिए खाना बनाती थी. उसके कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं.

समर की आदत थी कि वो अक्सर वो जब नहाने के लिए जाता था तो तौलिया भूल जाता था. फिर वो अपनी अम्मी को आवाज लगाता था.

उस दिन भी ऐसा ही हुआ।
वो नहाने गया लेकिन तौलिया नहीं ले गया. उसकी अम्मी तो घर में थी नहीं तो उसने मुझे आवाज लगाई- चाची, मेरा तौलिया ला दो.

मैं उसका तौलिया लेकर गयी. उसने दरवाजा खोला और तौलिया ले लिया. उसने अपने लंड के सामने अपनी लोअर लगा रखी थी.
जैसे ही वो दरवाजा बंद करने लगा तो उसकी लोअर हाथ से छूटकर गिर गयी.

मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी तो वहीं ठहर गयी. उसका लंड बहुत ही लम्बा और मोटा था जो किसी खीरे की तरह उसकी जांघों के बीच में लटक रहा था.

मुझे वो लंड देखते ही ये सोचते देर न लगी कि इसका लंड तो इसके बाप से भी ज्यादा आगे निकल गया है.
मेरे जेठ का लंड भी बहुत मोटा-लम्बा था. मगर समर का लंड तो अभी से इतना लम्बा और मोटा हो गया था.

मैं वहीं पर ठिठक सी गयी और नजर वहां से हटी ही नहीं.
समर अपने लंड को तौलिया से ढकते हुए बोला- चाची जाइये. मैंने तौलिया ले लिया है.

उसने जब मेरा नाम लिया तो मुझे होश सा आया और मैं वहां से आ गयी.
मगर अब मेरी चूत में जबरदस्त खुजली होने लगी थी.

जेठानी का जवान बेटा घर में अकेला था. उसकी जवानी भी चुदाई के लिए तड़प रही होगी. उसको भी चूत चोदने की ललक मची होगी … क्यों न मैं अपनी चूत की प्यास उसी के लंड से ही बुझा लूं?

अब मेरे दिमाग में हर वक्त समर का लंड ही घूम रहा था. उसका मोटा लम्बा बैंगन जैसा लंड मैंने देख लिया था और मुझे अब किसी भी वक्त चैन नहीं था. मैं बस उसके लंड को अपनी चूत में चखना चाह रही थी.

अब मैंने समर को चेक करने का सोचा कि देखती हूं कि ये क्या सोचता है मेरे बारे में?

जब मैं नहाने के लिए गयी तो मैं जानबूझकर अपने कपड़े वहीं बाहर ही छोड़ गयी.

नहाने के बाद मैंने उसे आवाज लगाई.
फिर वो मेरे कपड़े लेकर आ गया.

मैंने उससे नये कपड़े ले लिये पर अपने उतारे हुए कपड़े उसे दे दिये, कहा कि वाशिंग मशीन में डाल दे.
मेरे पुराने पहने हुए कपड़ों में मेरी ब्रा और पैंटी भी थी.
मैंने जानबूझकर उसको वो पैंटी और ब्रा दी थी.

फिर मैंने उसके सामने दरवाजा बंद कर लिया मगर अंदर से लॉक नहीं किया.
मैं जाते हुए चुपके से उसको देखने लगी.

वो मेरी ब्रा और पैंटी को सूंघता हुआ जा रहा था और अपने लंड को सहला रहा था.
मुझे पता चल गया कि वो भी चूत के लिए प्यासा है. अब मेरा काम बहुत आसान था.

उस दिन तो मुझे फिर मौका नहीं मिला लेकिन उसने अपना मौका नहीं छोड़ा.
बाद में मैंने देखा कि मशीन में पड़ी उस पैंटी पर उसके लंड का माल लगा हुआ था और उसके लंड के माल की खुशबू भी आ रही थी उसमें से!

फिर अगले दिन मैंने वही किया.
मैं जानबूझकर अपने कपड़े भूल गयी. कुछ देर बाद मैंने दरवाजा खोल दिया. मैंने आधा दरवाजा खोला था ताकि उसको ये लगे कि दरवाजा अपने आप ही हल्का सा खुल गया है.
मैंने समर को मेरे कपड़े लाने के लिए कहा.

मैं अपनी गांड को उसकी ओर करके नहाने लगी. मैं जानती थी कि बाहर से वो मुझे देख सकता था. मैं नहाती रही और वो कुछ नहीं बोला.

फिर मैं अचानक से उसकी तरफ घूमी तो वो दूसरी ओर घूम गया और एकदम से बोला- चाची … ये … ये आपके कपड़े लीजिये.
मैंने दरवाजा ढालकर मुस्कराकर कपड़े उसके हाथ से ले लिये. मैंने उसको अपनी गांड के दर्शन करवा दिये थे और उसने वो पूरा नजारा लिया.

अगले दिन तकरीबन 10 बजे वो उठकर चाय पी रहा था। तब मैं उसके सामने झुक झुककर झाड़ू पौंछा लगा रही थी.
मैंने देखा कि वो घूर घूरकर मेरे चूचों को देख रहा था.

तो मैंने उससे कहा- समर, मुझे आजकल रात में डरावने सपने आते हैं. मैं अकेली हूं और डर जाती हूं. अपने पापा से बोलकर तुम आज मेरे रूम में ही सो जाना. नहीं तो मैं रातभर जागती रहूंगी.

वो बोला- ठीक है चाची. मैं सो जाऊंगा.
अब मेरा काम हो गया था. आज मैं किसी भी हाल में रात को उसका लंड अपनी चूत में लेने वाली थी.

फिर वो रात को शॉर्ट्स पहन कर मेरे रूम में आया.
वो पूछने लगा- मैं कहां सोऊंगा?
मैं बोली- मेरे बेड पर ही सो जाना. तुम तो मेरे बेटे जैसे ही हो. तुम्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए मेरे साथ एक ही बेड पर सोने में?

वो बोला- हां, बिल्कुल चाची, मुझे क्या तकलीफ हो सकती है. मैं सो जाऊंगा इसी बेड पर।

मैं कपड़े चेंज करने के लिए बाथरूम में चली गई.
मुझे पता था कि समर को लाल रंग बहुत अच्छा लगता है इसलिए मैंने लाल रंग की ब्रा-पैंटी और मैक्सी पहनी।

जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो वो मुझे देखता रह गया।

फिर मैं उसके पास जाकर बैठ गयी. वो टीवी देख रहा था. मैं भी टीवी देखने लगी.

मैं बीच बीच में उसके साथ बातें करने लगी. मैंने पूछा- समर कोई लड़की है तुम्हारी जिन्दगी में?
वो बोला- नहीं चाची, मेरी जिन्दगी में तो अभी कोई नहीं है.
ये कहते हुए भी उसकी नजर मेरे चूचों पर ही जा रही थी.

मैंने अपने चूचों को उसके सामने ही हाथों से एडजस्ट किया.
ऐसा करते ही उसने मेरे चूचों से नजर हटा ली.
मैं बोली- अरे शर्मा क्यों रहा है तू … अगर मन कर रहा है तो देख ले. मैं एक औरत हूं और तू एक जवान मर्द है … ये सब तो आम सी बात है.

वो शर्मा गया. फिर मैं उसके पास आकर बैठ गयी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगी.
मैं बोली- अगर तेरे दिल में कुछ बात है तो तू मुझसे बेझिझक कह सकता है. मैं किसी को नहीं कहूंगी. मुझे तू अपनी दोस्त ही मान ले.

इस पर भी वो कुछ नहीं बोला.
मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में लिये हुए ही अपना हाथ उसके शॉर्ट्स के ऊपर उसके लंड की जगह पर टिका दिया और मेरा हाथ ठीक उसके लंड पर जा टिका.

कुछ ही पलों के अंदर उसके लंड में आ रहा तनाव मुझे अपने हाथ पर महसूस होने लगा.
देखते ही देखते उसका लंड नीचे ही नीचे तन गया और मेरे हाथ पर दबाव बढ़ाने लगा.

उसकी सांसें तेज हो गयी थीं. वो अपने तनाव को रोक नहीं पा रहा था क्योंकि मेरी चूचियों की घाटी भी उसके सामने ही खुली हुई थी.
मैं बोली- तेरा मन कर रहा है ना?
वो कुछ नहीं बोल पा रहा था.

फिर मैंने उसका लंड अपने हाथ में उसके शॉर्ट्स के ऊपर से पकड़ लिया. उसका लंड हाथ में लेते ही मेरी चूत में तो खलबली मच गयी. इतना मोटा ताजा लंड था और वो भी एक 19 साल के जवान लड़के का।

मैं उसके लंड को सहलाने लगी और बोली- मुझे पता है तू मुझे चाहता है. तू शर्मा मत. कल मैंने तुझे मेरी पैंटी को सूँघते हुए देख लिया था.
उसने हैरानी से मेरी तरफ देखा और फिर मैं उसके करीब सरक गयी.

उसके दोनों हाथों को मैंने अपनी कमर पर लपेटा और उसकी गोद में जाकर उसके होंठों पर होंठों रखकर उसे किस करने लगी.
पहले तो उसने साथ नहीं दिया और शर्माता रहा.

फिर मैंने उसके हाथ अपने चूचों पर रखवा दिये और धीरे धीरे वो उनको दबाने लगा. अब उसके होंठ भी खुल गये और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे. वो मेरे पूरे बदन पर हाथ फिरा रहा था और मैंने उसके शॉर्ट्स में हाथ डालकर उसके लंड को पकड़ लिया था.

अब मैंने अपनी मैक्सी खोल दी. मैं उसके सामने लाल ब्रा पैंटी में थी.

वो मेरी चूचियों पर टूट पड़ा. नया नया जवान हुआ था और उससे इंतजार नहीं हो रहा था.

फिर उसने मेरी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाया. मेरी चूत को हाथ से सहलाया.
मेरी चूत पहले से ही गीली होना शुरू हो गयी थी.

फिर मैंने अपनी ब्रा उतार डाली. अब वो मेरे मम्मों को चूसने लगा बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह। बीच बीच में वो निप्पलों को काट भी लेता था।

तब हम दोनों पूरे नंगे हो गए। मैं उसका लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी।

वो बोला- मुंह में नहीं लोगी मेरी जान … मुंह में ले लो ना … एक बार इसको अपने मुंह की गर्मी दे दो. आज तक मैंने किसी के मुंह में लंड नहीं दिया है.

मैं बोली- ये तो है ही चूसने लायक. इसको कौन नहीं चूसना चाहेगी. ऐसा मोटा ताजा रसीला लंड बहुत ही कम मर्दों के पास होता है. तुम उन्हीं में से एक हो।

ये कहते ही मैं उसके लंड पर झुक गयी और उसके लंड को मुंह में पूरा भरकर चूसने लगी.
मैंने अपने शौहर का लंड बहुत चूसा था लेकिन कभी इतना बड़ा लंड मुंह में नहीं लिया था.

समर का लंड मेरे मुंह में समा भी नहीं रहा था. मैं उसे मुंह में लेने लगी. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
वो मेरे बाल पकड़ कर लंड को धकेलने लगा.
मैं पूरा लंड गले तक लेने की खुद ही कोशिश कर रही थी.

मगर समर को अभी भी चैन नहीं था; वो मेरे बालों को खींचते हुए पूरे लंड को अंदर धकेल देना चाहता जबकि उसका लंड पहले ही मेरे गले में जाकर फंसा हुआ था.

दम मिनट तक किसी तरह मैंने उसका लंड चूसा और मेरी हालत खराब हो गयी. फिर उसने मुझे जोर से धक्का देकर पटक लिया.

मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि जेठ के लंड से चुदाई का सपना आज उसका बेटा पूरा करेगा. मैं जानती थी कि समर आज मेरी चूत को फाड़कर रख देगा और मैं भी यही चाहती थी.

फिर उसने मेरी टांगों को पकड़ कर फैला दिया. उसने मेरी दोनों टांगों के बीच उसका मुंह डाला और मेरी चूत को बेतहाशा चूसने और चाटने लगा.

मेरे मुंह से एकदम से सीत्कार फूट पड़े- आह्ह … आह्ह … ओह्ह … समर … मेरे बच्चे … ओह्ह … यही तो चाहती थी मैं … आह्ह … हाह्ह … हाये … ओह्ह … स्स्स … आह्ह और जोर से चूस … आह्ह … मेरी चूत की प्यास मिटा दे … आह्ह … चोद दे … फाड़ दे … आह्ह।

उसके चाटने की वजह से मेरी चूत एकदम से धधक उठी. मैंने मुश्किल से कंट्रोल किया नहीं तो उस रात मैं समर को अपनी चूत में ही घुसा लेती.
मैं बोली- बस कर … अब चोद दे … अपने मोटे लंड से मेरी चूत फाड़ दे … चोद मुझे जल्दी.

वो बोला- हां चाची, मैं आपकी चूत का भोसड़ा कर दूंगा आज!
फिर उसने मुझे कुत्तिया की तरह खड़ी कर दिया और मेरी चूत पर उसका लंड सेट करने लगा।

लंड लगाकर उसने मेरी कमर से मुझे पकड़ लिया और एक जोर का धक्का दे मारा.
उसका लंड मेरी चूत में आधा जा घुसा.

मेरी तो बांछें खिल गयीं. इतने सालों के बाद कोई दमदार लंड चूत में गया था.

फिर उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया और मैंने अपनी चूत को पूरी तरह से ढीली छोड़ दिया ताकि उसका लंड जितना हो सके मेरी चूत में आ सके.
उसने दो तीन झटकों में पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया था.

उसका लंड मुझे मेरे पेट में चोट करता हुआ अलग से महसूस हो रहा था. मेरी चूत की दीवारें चरमरा गयी थीं लेकिन ऐसा सुकून मिल रहा था जो जन्नत में भी नसीब न हो.

चूत को केवल लंड चाहिए होता है. मेरी चूत को समर का लंड मिल गया था. लंड इतना दमदार था कि मेरी चूत से खुशी के आंसू गिरने लगे थे.
मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और वो पच पच की आवाज के साथ समर के लंड से चुद रही थी.

उसने दस मिनट तक मुझे कुतिया बनाकर चोदा.
फिर उसने मुझे बेड के नीचे धकेल दिया; मुझे दीवार के साथ ले गया और मेरी एक टांग उठाकर अपनी कमर पर रखवा ली और नीचे से अपना लंड मेरी चूत में चढ़ा दिया.

नीचे ही नीचे धक्के देते हुए वो मेरी चूत में लंड को नापने लगा. मेरी चूचियां उसके हर धक्के के साथ फुटबाल की तरह उछल जाती थीं.
मेरी चूत अंदर तक तृप्त हो रही थी.

फिर वो मेरी चूचियों को काटते हुए चोदने लगा.
अब मुझसे रुका न गया और मैं झर झर झरने की तरह कामरस की धारा बहाने लगी.
मेरी चूत का रस पच पच … होती चुदाई के साथ ही मेरी जांघों पर बह निकला.

अब समर ने मुझे बेड की ओर धक्का मारा और झुकाकर पीछे से मेरी चूत में लंड दे दिया.
वो पीछे से मुझे चोदने लगा. मेरा सिर बेड से टकराते हुए धम धम कर रहा था. मगर वो मुझे चोदे जा रहा था.

उसका लंड अब मुझे चूत में बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं दर्द से कराहने लगी थी.
फिर पांच मिनट तक किसी तरह मैंने उसको बर्दाश्त किया और वो भी मेरी चूत में झड़ता हुआ मेरे ऊपर लेट गया.

इस घमासान चुदाई के बाद मेरा अंग अंग समर को दुआ दे रहा था. ऐसी चुदाई न जाने कितने सालों के बाद हुई थी.
मैं तो समर की दीवानी हो गयी.

उसके बाद हम दोनों ऐसे ही नंगे लिपट कर सो गये.

तीन चार दिनों तक जब तक कि मेरा बेटा वापस न आ गया मैं अपने जेठ के बेटे से खूब चुदी.
हम दोनों ने खूब इंजॉय किया.

फिर सबके आने के बाद भी हम स्टोर रूम में चुदाई कर लेते थे.

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मैंने उनका मोटा लंड देखा था

मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं.

मेरी हाईट 5 फीट है और फिगर 33-28-34 है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं. मेरी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी.

बीते दिसंबर की एक रात को मुझे तेज प्यास लगी. आप जानते होंगे कि सर्दी में या तो प्यास लगती नहीं और लगती है तो फिर प्यास कितनी जोर से लगती है.

ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी मैं जल्दी से उठी रसोई में जाने लगी. मेरा ध्यान ससुर के कमरे की ओर गया तो मैंने पाया कि उनके रूम की लाइट जल रही थी.
मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?

उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे.
उनका लन्ड करीब 7 इंच का था। इतना बड़ा लंड मैंने कभी किसी मर्द का नहीं देखा था.

मैं आपको उनके बारे में बता दूं कि वो उम्र में 55 साल के करीब हैं. उनकी हाइट 6 फीट है.

मेरी सास की मृत्यु बहुत समय पहले हो गयी थी. शायद इसी वजह से ससुर जी का लंड इतना बेताब लग रहा था.

वो आंखें बंद किये लगातार अपने हाथ को अपने लंड पर चला रहे थे.
ये नजारा देखकर मैं तो सन्न रह गयी.
मगर मेरी नजर भी मेरे ससुर के लंड से हट नहीं रही थी. मेरे पति का लंड उनके लंड से कम था.

उनका लंड देखकर मेरे अंदर भी चुदास सी जागने लगी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी.

फिर मैं रसोई से पानी लेकर अपने कमरे में चली गयी. अब मुझे भी लंड चाहिए था तो मैंने पति को जगाया और उनको गर्म करने की कोशिश करने लगी.

मैंने पति के लंड को ऊपर से ही सहलाया. उनका हाथ मेरी चूत पर रखवाया और सहलवाने लगी.
थोड़ी देर में उनका लंड खड़ा होने लगा. फिर मैंने उनके लंड को चूसा और चुदाई के लिए पूरा तैयार कर दिया.

पति ने मेरी चूत में लंड डाला और चोदने लगे. उनका लंड 6 इंच के करीब था. मैं चुदाई का मजा लेने लगी.

मगर दिमाग में ससुर का लंड अभी भी घूम रहा था. उनका लंड बहुत मोटा था.

पति ने मुझे पांच मिनट तक चोदा और फिर वो झड़ गये. मुझे लंड तो मिल गया लेकिन वो संतुष्टि वाली चुदाई नहीं हुई. फिर भी मैंने पति को ज्यादा नहीं कहा क्योंकि वो नींद में थे और मैं भी अब सोना चाहती थी.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पति ने कहा कि वो जॉब करने दिल्ली जाने वाले हैं.
वो कहने लगे कि पहले वो वहां पर जम लेंगे और उसके बाद मुझे भी वहीं बुला लेंगे. मैं ये सोचकर परेशान हो रही थी.

मुझे पति के बिना कैसे चुदाई का मजा मिलने वाला था. 4 जनवरी को मेरे पति दिल्ली चले गये.

उनके जाने के बाद मेरा मन सूना हो गया.
एक दो दिन तो मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर ससुर का लंड मेरे दिमाग में घूमने लगा.

मैं उनका लंड देख चुकी थी और जब से मैंने उनका मोटा लंड देखा था मैं उसको अपनी चूत में लेने का सपना भी देख रही थी.
अब मैं किसी तरह ससुर जी का लंड खड़ा करके उनको खुद चुदाई के लिए तैयार करना चाहती थी.

इसके लिए मैंने बाजार से कुछ नये कपड़े ले लिये. नाइटी, पैंटी और ब्रा के सेट लिये. सेक्सी वाली नाइट ड्रेस ली ताकि अपने बदन को दिखाकर मैं ससुर जी के लौड़े की प्यास को और ज्यादा बढा़ सकूं.

शाम को जब मैं घर आयी तो मैंने जल्दी जल्दी खाना बनाया.

ससुर जी को भूख लगी तो वो बोले- बहू खाना लगा दो.
मैंने उनको बैठने को कहा और बोली- अभी लगा देती हूं.

मैं अपनी साड़ी बदल कर आ गयी और मैंने वो नयी ड्रेस पहनी जो मैं बाजार से लायी थी.

जब मैं खाना लेकर उनके पास पहुंची तो उनकी नजर मेरे बदन पर पड़ी और वहीं पर ठहर गयी.
इससे पहले मेरे ससुर ने मुझे इतने ध्यान से नहीं देखा था.

वो लगातार मुझे देख रहे थे और मैं खुश हो रही थी कि मेरा प्लान काम कर रहा है. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे.

ससुर ने खाना खाया और फिर वो सोने के लिए चले गये.

मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरे बदन की गर्मी मुझे चैन से लेटने नहीं दे रही थी.
आज मैंने ससुर की आंखों में मेरे जिस्म के लिए हवस भी देख ली थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

मैं फिर सोचते सोचते सो गयी.

मगर उस दिन के बाद से मैं किसी न किसी तरह अपने बदन और उसके उभार दिखाकर अपने ससुर को तड़पाने लगी.
वो अब अक्सर मेरी चूचियों और मेरी गांड को ताड़ते रहते थे.

कुछ दिन बीत गये. फिर 9 जनवरी की रात आयी.
उस रात को मैंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी जो चूचियों पर से जालीदार थी. उसको देखकर तो मेरे ससुर की आंखें ही फैल गयीं. वो जैसे पागल से हुए जा रहे थे.

उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया और थोड़ा सा ही खाकर रूम में चले गये.
मैंने भी जल्दी से काम खत्म किया और सोने के लिए जाने लगी.
मगर मेरा मन बेचैन था.

आज ससुर जी बहुत उतावले थे. मैं एक बार उनकी हालत देखना चाहती थी.

इसलिए मैंने दूध गर्म किया और उनके कमरे की ओर चल दी.
मैंने अंदर देखा तो वो लंड को लगातार हिला रहे थे और बार बार कह रहे थे- चूस साली मेरे लंड को … साली नेहा … चूस इसे.

ऐसे कहते हुए वो अपने लंड की मुठ मार रहे थे.
मैं बहुत उत्तेजित हो गयी उनकी ये हालत देखकर.

उसके बाद मैंने दरवाजा खटखटाया तो वो संभल गये. उन्होंने अपना लंड अंदर पजामे में किया और ढक लिया.

मगर जब मैं अंदर गयी तो तब भी उनके पजामे में वो लंड तना हुआ ऐसे ही उछल रहा था. उनके माथे पर पसीना आ गया था.

मैंने उनके लंड की ओर देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी और शर्माते हुए गिलास को उनके बेड के पास रख दिया.

जब मैं जाने लगी तो ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- कुछ देर बैठ जा बहू.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं पापा? ये सब ठीक नहीं है.

इस बात पर उनको गुस्सा आ गया और मेरा हाथ अपनी ओर खींचकर मुझे अपने पास बिठाते हुए बोले- साली रण्डी, जब से तेरा पति गया है तभी से तेरा नाटक देख रहा हूं. आज तुझे चोद चोद कर सब तेरी नौटंकी दूर कर दूंगा.

ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे ऊपर आ चढ़े.
वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों में मुंह मारने लगे. मेरी गर्दन को चूमने लगे.

पहले तो मैंने दिखावटी विरोध किया लेकिन फिर हार मानने का नाटक करके मैं आराम से लेट गयी.
फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगे लेकिन मैंने मुंह नहीं खोला. फिर वो मेरी चूचियों को दबाने लगे तो मेरी आह्ह निकल गयी और मेरे होंठ खुल गये.

इस मौके का फायदा उठाकर वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैं भी अंदर ही अंदर उनका साथ देने लगी लेकिन मैं ये नहीं दिखाया कि मुझे मजा आ रहा है.
मैं बस न चुदवाने का नाटक सा करती रही.

मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.
मैं अब सिसकारने लगी थी.

वो बोले- हां, साली रंडी, मैं जानता था कि तू ये सब नाटक चुदने के लिए ही कर रही है. मैं आज तेरी चूत को फाड़ दूंगा.
ये बोलकर मेरे ससुर ने मेरी नाइटी फाड़ डाली और मेरी चूचियों को जोर जोर से पीने लगे.

उनके मुंह की पकड़ इतनी तेज थी कि मेरे मुंह से जोर जोर की आहें निकलने लगीं.
मैं अपनी चुदास को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

इतने में ही ससुर का एक हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत में हल्का गीलापन आने लगा था. वो मेरी चूत को जोर जोर से रगड़ने लगे.

मेरी चूत में पानी आने लगा और वो चूत में उंगली से कुरेदने लगे.
मैं भी पागल सी हो रही थी अब.

इतने में ही ससुर ने अपने पजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में दे दिया.
उनका लंड मेरे मुंह में फंस गया और वो धक्के देते हुए बोले- चूस साली … यही है तेरा सपना … चूस ले इसे. चूस साली कुतिया।
मेरे मुंह में उनका लंड पूरा फंस गया था और मेरे गले में अटक गया था. मुझसे सांस नहीं ली जा रही थी लेकिन वो मेरे मुंह को चोदे जा रहे थे.

काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था.

फिर उन्होंने मुझे उल्टी तरफ लिटा दिया और मेरी गांड ऊपर आ गयी.
वो मेरी गांड में मुंह देकर चाटने लगे.

मैं डर गयी कि कहीं ये अपने इस मोटे मूसल को मेरी गांड में न धकेल दें. मैं उनका लंड गांड में नहीं ले सकती थी.

वो मेरी गांड को लगातार चाटे जा रहे थे. मुझे मजा भी आ रहा था लेकिन साथ में डर भी बना हुआ था.

इससे पहले मैंने कभी भी अपनी गांड नहीं चुदवाई थी. कई बार मेरे पति मेरी गांड में लंड देने की कोशिश करते थे लेकिन मैं मना कर देती थी.
अभी तक मेरी गांड कुंवारी ही थी.

उसके बाद वो मेरी चूत भी चाटने लगे तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी. वो मेरी चूत को चाटते हुए मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और मुझे अब बहुत मजा आ रहा था.
दोनों तरफ से मजा मिल रहा था.

कुछ देर तक वो मेरी चूत को काट काटकर खाते रहे.
मैं भी पानी छोड़ती रही और चुदने के लिए मचल उठी.

अब ससुर जी से भी नहीं रुका गया तो उन्होंने अचानक से मेरी चूत पर लंड रखा और एक धक्का दे दिया.
उनके लंड की चोट से मेरी जान निकल गयी.
एक बार में ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया उनके मोटे लंड ने.

उन्होंने मेरे मुंह पर थप्पड़ मारा और चुप रहने के लिए कहा.
मैं चुप हो गयी.

अब वो मुझे चोदने लगे. मैं तो बेहाल होने लगी.

कुछ देर तक तो लंड नहीं लिया गया लेकिन फिर जब चूत खुलने लगी तो मुझे मजा आने लगा.
अब मैं आराम से चुदवाने लगी.

लेकिन ससुर जी की स्पीड बढ़ रही थी. वो लगातार तेज तेज चोदे जा रहे थे.

बीस मिनट की चुदाई में मैं दो बार झड़ गयी. वो अभी भी मुझे तेजी से चोद रहे थे.

फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह पर उनके वीर्य की पिचकारी एकदम से आकर लगी.

कई बार उनके लंड से वीर्य की पिचकारी लगी और मेरा पूरा चेहरा सन गया.
मुझे मजा आ गया.
इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी.

झड़ने के बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गये.

हम दोनों फिर 69 में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.

कुछ देर की चुसाई के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. अब उन्होंने लंड पर तेल लगा लिया. मेरी चूत और गांड पर दोनों जगह तेल लगा दिया.

उसके बाद मुझे पेट की तरफ सुला दिया और नीचे तकिया लगा दिया.
फिर वो मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे.

मैं आह्ह आह्ह करते हुए चुदने लगी.

मगर अचानक से उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर तकिया लगा दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ.

जब एक जोर का झटका लगा तो मेरी जान निकल गयी.
मैं जोर से चीखी लेकिन मेरी आवाज तकिया के नीचे ही दब गयी.

ससुर का लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द से छटपटाने लगी.
मगर ससुर ने लंड को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल दिया.

वो मेरी गांड में धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे मगर मैं दर्द में तड़प रही थी.

मैं दर्द से रोने लगी तो वो बोले- साली … तेरी गान्ड कब से मारना चाह रहा था. आज तो फ़ाड़ डालूंगा इसे मैं!

अब मैं बेहोश होने वाली थी कि एक थप्पड़ जोर से मुंह पर उन्होंने मारा और फिर गांड में लंड को धकेलने लगे.
उसके बाद वो मेरी गांड को चोदने लगे.

धीरे धीरे मेरी गांड खुली और मैं चुदवाने लगी.
पांच मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में दे दिया.
मैं फिर से उनका लंड चूसने लगी.

फिर ससुर ने मेरे मुंह में ही अपना माल गिरा दिया. मैंने उस माल को पी लिया.

उनकी चुदाई से मेरी चूत और गांड दोनों ही फट गयी थी. मगर मुझे चुदाई में मजा भी बहुत मिला.
उन्होंने मेरी चूत और गांड पर मलहम लगाया और मेरा दर्द कम करने की कोशिश की.

अगले 2 दिन तक मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.

फिर उसके 20 दिन के बाद मेरा जन्मदिन था. मेरे जन्मदिन पर भी मेरे ससुर ने मुझे चुदाई का तोहफा दिया.
मगर उस दिन उनके साथ उनका एक दोस्त भी था.
उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदा.

9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं. पहली बार ससुर के लंड से चुदाई और उनका मोटा लंड आज भी जब मैं सोचती हूं तो मेरी चूत गीली हो जाती है.

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मेरी चूत की प्यास

सभी दोस्तो को मेरा हैलो। मेरा नाम ज्योति है. मैं अपनी ससुर बहू सेक्स स्टोरी बता रही हूँ. मजा लें.

मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं. घर पर सिर्फ मेरे पति, मैं, हमारा एक बच्चा और मेरे ससुर रहते हैं. हमारा घर दो बी.एच.के. का है जिसमें दो बेडरूम, एक हॉल, एक किचन है.

मेरे ससुर गवर्नमेंट जॉब पर हैं और उनकी उम्र पचपन के करीब है. मगर वो दिखने में 45 से ज्यादा के नहीं लगते हैं. अगर मैं अपने बारे में बात करूं तो मेरी शादी के समय मैं काफी स्लिम थी. मगर शादी और बच्चा होने के बाद मेरे शरीर में काफी बदलाव आ गये.

अब मेरा शरीर काफी फूल गया और मेरा फिगर 38-32-36 का हो गया. मेरे बाल मेरी कमर तक आते हैं. मेरी गांड काफी मस्त है और मेरे बूब्स का तो कहना ही क्या. मेरी ब्रा उनको संभाल नहीं पाती है.

जहां तक मेरी सेक्स लाइफ की बात है तो वो एकदम से नीरस हो चुकी थी. मेरे पति ने भी अब मेरे अंदर रूचि लेना करीब करीब बंद ही कर दिया था.

मगर मैं तो सेक्स के लिए हमेशा ही तैयार रहती थी. अपने पति से उम्मीद करती थी कि वो मेरी चूत को अपने लंड का स्पर्श देकर मेरी प्यास को शांत करेंगे लेकिन मेरी उम्मीद केवल एक उम्मीद ही बन कर रह गयी थी.

ऐसे में मैं आप लोगों से पूछना चाहती हूं कि मैं भला अपने आपको कब तक रोक कर रखती और कब तक अपने आप को शांत रख पाती?
मैंने अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए बहुत दिमाग दौड़ाया.

पड़ोसी का जवान लड़का, दूध वाला, गली का धोबी आदि सबके बारे में सोचा लेकिन कोई ऐसा मिल ही नहीं रहा था कि मेरी चूत को लंड का सुख दे सके. मैं काफी उदास और खिझी खिझी रहने लगी थी.

एक दिन मैं सुबह काम कर रही थी. मैं झाड़ू लगाती हुई अपने ससुर के कमरे में पहुंची तो वो उस वक्त अपने बेड पर सो रहे थे. उन्होंने रूम का दरवाजा खुला रखा हुआ था और मैंने उनको जगाना ठीक नहीं समझा. मैं नहीं चाहती थी कि उनकी नींद खराब हो.

मैंने देखा कि उन्होंने टांगों में कुछ नहीं पहना हुआ था. न धोती और न कोई पजामा. केवल अपने अंडरवियर को पहने हुए सो रहे थे. उनके अंडरवियर के फूले हुए भाग ने मेरा ध्यान खींच लिया.

उनका लिंग उनके ढीले कच्छे से एक ओर निकल कर बाहर झांक रहा था. मैंने गौर से उनके लिंग के अग्रभाग को देखा. उनका सुपारा गाजर के रंग का था. लिंग का रंग गहरा सांवला था. देखने में काफी रसीला लग रहा था इसलिए नजर भी वहीं पर जैसे चिपक रही थी बार बार.

मेरी चूत में सरसरी सी दौड़ने लगी. मगर मैं कुछ कर नहीं सकती थी इसलिए झाड़ू लगा कर बाहर आ गयी. बहुत कोशिश की मैंने कि ससुर के खयाल को मन से निकाल दूं. मगर ससुर का मोटा लिंग जिसके दर्शन मैंने सुबह सुबह किये थे उसके खयाल मन से नहीं निकल रहे थे.

बहुत सोच विचार के बाद आखिर मैं इसी निष्कर्ष पर पहुंची कि मेरी चूत की प्यास को ससुर के लंड से ही शांत करवाऊंगी.
अगले ही दिन से मैंने इसके लिए अपनी प्लानिंग भी शुरू कर दी.

अब मैं अपने ससुर के सामने अपने बदन की नुमाइश करने लगी थी. उनको अपनी कमर ज्यादा से ज्यादा दिखाने की कोशिश करती थी. मुझे नहीं पता कि वो ध्यान भी दे रहे थे या नहीं! लेकिन मैं बार बार उनके सामने जाती रहती थी.

भी तक मुझे ऐसा कोई सिग्नल ससुर की तरफ से नहीं मिला था जिससे मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे जिस्म में कुछ रूचि ले रहे हैं.

ये पैंतरा फेल होने के बाद मैंने सोचा कि उनको अपने क्लीवेज दिखाऊंगी. एक रोज जब मैं उनको दोपहर का खाना परोसने गयी तो मैंने पहले से ही अपने ब्लाउज का एक बटन खोल लिया. मैंने अपने बूब्स को हल्का सा बाहर कर लिया ताकि मेरी चूचियों की घाटी ससुर जी को आसानी से नजर आ जाये.

जब मैं सामने से खाना परोस रही थी तो मैंने घूँघट डाल लिया था. मैं सामने झुक कर खाना डालने लगी तो देखा कि उनकी नजर मेरी चूचियों की घाटी में झांक रही थी. जब तक मैं वापस सीधी न हो गयी तब तक वो मेरी चूचियों को ताड़ते रहे.

फिर दोबारा जब खाना दिया तो मैं कुछ ज्यादा ही नीचे झुक गयी और मैंने ससुर जी को अपनी चूचियों के दर्शन जी भर कर करवा दिये. अब वो मेरे जाल में फंस गये थे. तीर सही निशाने पर लगा था.

अब मैं कई बार दिन में उनसे जानबूझकर टकराने लगी ताकि उनके अंदर हवस के शोले भड़का सकूं.

एक एक करके दिन बीत रहे थे ससुर बहू सेक्स के लिए मेरी तड़प अब और तेज होती जा रही थी.

एक दिन मेरे पति मेरे बेटे को लेकर हमारी रिश्तेदारी में गये हुए थे. उस दिन घर पर मेरे ससुर जी और मैं अकेले थे.

उस दिन मैंने सोच लिया था कि आज की रात ससुर जी का लंड अपनी चूत में किसी भी तरह ले ही लूंगी. आज से ज्यादा अच्छा मौका ससुर बहू सेक्स का फिर नहीं मिलेगा.

एक बार ससुर को मेरी चूत की लत लग गयी तो फिर मेरे लिये अपनी चूत चुदवाने की राह बिल्कुल आसान हो जायेगी.

रात को मैंने ससुर जी को खाना दिया और फिर नहाने के लिए मैं बाथरूम में घुस गयी. मैंने अंदर जाकर अपने बालों को गीला किया. फिर साया पहन कर बाहर आ गयी. मैंने साया अपने बूब्स तक ऊंचा बांध रखा और नीचे घुटनों तक था.

अब मैं ससुर के आने का इंतजार कर रही थी. मैं जानती थी कि खाना खाने के बाद वो हाथ धोने के लिए इधर ही आयेंगे इसलिए मैं अपनी बारी का इंतजार करने लगी. मैंने सोच रखा था कि मुझे क्या करना है. मैं बाथरूम के दरवाजे को हल्का सा खोल कर देख रही थी.

जब वो मुझे आते हुए दिखाई दिये तो मैं बाथरूम से बाहर निकल कर दूसरी ओर घूम गयी. ससुर की ओर मेरी पीठ थी दरवाजे की ओर मेरा मुंह हो गया. जैसे ही वो करीब पहुंचे मैं घूम कर उनकी तरफ हो गयी और मेरी चूचियां उनकी छाती से टकरा गईं.

मैंने चौंकने का नाटक किया और वहां से घबरा कर भाग गयी. ससुर जी समझ नहीं पाये कि ये अचानक से क्या हो गया. मैं अपने रूम में छुपकर उनको देखने लगी. वो अभी भी उस घटना के बारे में सोच रहे थे.

फिर वो सोचते हुए ही हाथ धोकर वापस अपने रूम की ओर चले गये. अब मैंने दो पीस वाला एक जालीदार गाउन पहना और अपने बालों को संवार कर लिपस्टिक लगाई और 10.30 बजे के करीब उनके रूम की ओर चली. मुझे पता था कि वो इस समय तक सो जाते हैं.

मैं उनके रूम में पहुंची तो देखा कि वो सामने बेड पर सो रहे थे. उनकी टांगें फैली हुई थीं और उनके कच्छे में उनका नागराज तना हुआ था. शायद मेरे साथ हुई घटना के बारे में सोचकर ही तन रहा था. सपने में वो शायद मुझे ही चोद रहे होंगे.

अब मेरे पास अनुमान लगाने का समय नहीं था. मेरी चूत की आग अब मुझे खुद ही पहल करने के लिए आगे धकेल रही थी. मैं चुपचाप जाकर बेड पर बैठ गयी.

मैंने देखा कि उनके लिंग में झटके लग रहे थे. तड़पता लिंग देख कर ही मेरी चूत में पानी रिसना शुरू हो गया.

मैंने धीरे से ससुर के कच्छे को नीचे खींच दिया. उनका मोटा लम्बा 8 इंची लम्बाई वाला सांवला लिंग मेरे सामने तन कर खड़ा था. देखते ही मेरी हवस भभक गयी. मैंने उनके लिंग को हाथ में पकड़ा तो पूरे बदन में करंट दौड़ने लगा.

उनके लिंग को पकड़ कर मैंने दबा कर देखा. मेरे ससुर का लंड इस उम्र में भी इतना दमदार होगा मैंने इसका अंदाजा भी नहीं लगाया था. लिंग की शाफ्ट इतनी टाइट थी कि लग रहा था जैसे मैंने किसी रॉड को पकड़ रखा है.

ससुर के लंड के गहरे गुलाबी सुपारे से कामरस की एक बूंद अब बाहर निकल कर उनके मूतने वाले छेद पर आकर बैठ गयी थी.
मैंने नीचे झुक कर अपनी जीभ निकाली और उस बूंद को अपनी जीभ से चाट लिया.

उनका कामरस मुंह लगा तो मैं पागल हो गयी. मैंने अगले ही पल उनके लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

ससुर जी की टांगें अब हरकत में आ गयीं और पहले से ज्यादा फैल गयीं. कुछ पल तो मैं उनके लिंग को चूसती रही और फिर उनके हाथ मेरे सिर पर आ गये.

वो मेरे सिर को अपने लिंग पर दबाने लगे. ससुर का लंड मेरे गले में उतरने लगा. बहुत मजा आ रहा था. उनके चेहरे को देख कर नहीं लग रहा था कि वो जाग चुके हैं इसलिए मैं बेधड़क उनके लिंग को चूस रही थी.

फिर एकदम से उन्होंने आंखें खोलीं और हड़बड़ा गये.
अपनी टांगों को पीछे खींचते हुए बोले- बहू तुम? ये क्या कर रही हो? ये गलत है.
मैंने उनके लिंग को हाथ में लेकर सहलाते हुए कहा- कुछ गलत नहीं है ससुर जी, आप मजा लो. बस जो हो रहा है होने दो.

मैंने सोचा अभी लोहा गर्म है, जैसे चाहूं मोड़ सकती हूं. मैंने तुरंत अपने गाउन को नीचे कर दिया और उनके घुटनों के बीच में आकर बैठ गयी. मैंने उनके हाथों को अपनी चूचियों पर रखवा दिया और अपने ही हाथों से दबवाने लगी.

कुछ देर तो वो सोचते रहे कि क्या करें, आगे बढें या पीछे हट जायें? मगर कब तक खुद को रोक कर रखते? उनके लिंग में लग रहे लगातार झटके उनको आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहे थे.

फिर उन्होंने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. मैं समझ गयी कि अब ससुर का लिंग मेरी चूत की सवारी करने के लिए तैयार है.
वो जोर से मेरी चूचियों को भींचते हुए बोले- चल आज मैं तुझे बताता हूं कि मर्द को छेड़ने का अंजाम क्या होता है, आज तेरी शरारत की सजा मैं तुझे जरूर दूंगा.

मैं बोली- मैं तो कब से तैयार हूं बाबूजी, आप जो चाहे सजा दे लो. आपकी सजा में ही मजा है.

फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया. फिर अपनी कमीज उठाई और मेरे दोनों हाथ बेड पर बांध दिये.

वो मेरे बगल में लेटे और मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे. फिर मेरी चूचियों को दबाने और मसलने लगे. फिर मेरी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगे. एक को चूसने के बाद दूसरी को मुंह में भर लिया और पहली को दबाने लगे.

इतने में ही मेरी चूत बिल्कुल गीली हो गयी थी. अब वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगे और नीचे की ओर मेरे पेट को चूमते हुए बढ़ने लगे. मेरी नाभि को चूम कर मेरी चूत की ओर बढ़ रहे थे. मेरी चूत में आग लगी हुई थी.

जैसे ही ससुर ने मेरी चूत पर अपने होंठ रखे तो मेरी चूत की आग और भड़क गयी. मैंने उनके सिर को अपनी चूत में दबा लिया और जोर जोर से अपनी चूत को उनके मुंह पर रगड़ने लगी. मेरी चूत की प्यास को देख कर वो मेरी चूत में जीभ से चोदने लगे और मैं पागल होने लगी.

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैं बोली- बस ससुर जी … आह्ह … अब मेरी चूत में अपना नागराज डाल दो. मैं अब और नहीं रुक सकती हूं. मेरी चूत की चुदाई कर दो बाबूजी, नहीं तो मैं मर जाऊंगी. आपके लंड के बिना मैं मर जाऊंगी बाबूजी, जल्दी से मेरी चूत को चोद दो … आह्ह … जल्दी।

वो उठे और अपना लंड मेरी मुनिया पर रगड़ने लगे.
मैं बोली- बाबूजी जल्दी करो, ये खेलने का समय नहीं है, मैं चुदना चाहती हूं.
वो बोले- हां मेरी रंडी बहू, रुक तेरी चूत की प्यास आज मैं अच्छे से बुझा दूंगा. अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा.

उन्होंने मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक जोर का झटका दे मारा. मेरी चूत की हालत पहले ही पानी पानी हो रही थी. बाबूजी का लंड भी चुदाई के लिए गीला होकर बिल्कुल तैयार था. जैसे ही झटका मारा उनके 8 इंची लंड का मोटा सुपारा मेरी चूत में फंस गया.

मेरी चीख निकल गयी.
पति का लंड इतना मोटा नहीं था और बहुत दिनों से मेरी चुदाई भी नहीं हो पा रही थी. इसलिए बाबूजी का मोटा लंड मैं झेल नहीं पायी और चिल्लाने लगी.
उन्होंने तभी एक और झटका मारा और पूरा लंड मेरी चूत में उतर गया.

बाबूजी ने मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी चूत में हल्के हल्के लंड को चलाना शुरू कर दिया.

अब धीरे धीरे मुझे भी लंड लेकर मजा आने लगा.
मैंने बाबूजी का साथ देना शुरू किया और अब ससुर बहू दोनों ही एक दूसरे से नंगे लिपटे हुए एक दूसरे को चूमते हुए सेक्स का मजा देने और लेने लगे.

अब मेरे मुंह से भी सिसकारियां निकल रही थीं. अब उनकी स्पीड धीरे धीरे बढ़ने लगी. जोर जोर से झटके लगाते हुए वो मेरी चूत की ठुकाई करने लगे और मुझे ससुर के लंड से चुद कर पूरा मजा आने लगा.

मैंने अब आनंद के मारे उनके होंठों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया. उनका लंड मेरी चूत में चोद चोद कर मेरी चूत की खुजली मिटा रहा था और मैं उनकी पीठ को नोंचने लगी थी. मेरी चूत में लंड से जो मजा मिल रहा था उसके मारे मेरी आंखें भारी होने लगी थी.

बाबूजी के चोदने की स्पीड अब और तेज होती जा रही थी. मैंने अब अपने दोनों पैरों को हवा में उठा लिया. बाबूजी का लंड अब और गहराई तक मेरी चूत को ठोकने लगा. पूरे रूम में फच फच की आवाज होने लगी.

मेरी चूत में एक तूफान सा उठा हुआ था. अब मैं झड़ने के करीब पहुंच रही थी.
वो बोले- मेरा पानी भी निकलने वाला है.

फिर वो मेरे मुंह पर हाथ रख कर मुझे जोर जोर से पेलने लगे. बीस-पच्चीस झटकों के बाद बाबूजी के लंड और मेरी चूत ने एक साथ पानी छोड़ दिया. हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर झड़ने लगे. दोनों के बदन में झटके लग रहे थे.

उसके बाद बाबूजी मेरे ऊपर गिर गये. हम दोनों शांत हो गये थे. मैं भी शांत हो गयी थी और बाबूजी मेरी चूचियों में मुंह देकर लेटे हुए थे. कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे. उसके बाद वो उठे और बाथरूम में चले गये.

मैं भी उठने लगी तो मुझसे चला भी नहीं गया. पहली बार जिन्दगी में इतनी जबरदस्त चुदाई हुई थी.

मैं कराहने लगी तो वो नंगे ही बाहर आये. उनका लंड उनकी जांघों के बीच में इधर उधर झूल रहा था. मन कर रहा था एक बार फिर से उनके लंड को मुंह में ले लूं.

फिर वो मेरे पास आये और मुझे सहारा देने लगे. वो मेरे साथ बाथरूम में गये और फिर मुझे सहारा देकर बाहर ले आये. हम दोनों फिर से बेड पर लेट गये.

मैं अपने ससुर की बांहों में थी. वो मेरी चूत में उंगली देकर लेट गये और मैंने उनके लंड को हाथ में भर लिया. मैं बहुत थक गयी थी. मुझे कब नींद आई मुझे कुछ पता नहीं चला. उसके बाद सुबह ही मेरी आंख खुली.

सुबह मैं बेड में बाबूजी के साथ नंगी पड़ी हुई थी. वो उठे और फिर मेरे लिये चाय बना कर ले आये.
मैंने बेड में चाय पी और फिर वो बोले कि उठ कर फ्रश हो जाओ.

उस दिन के बाद उनके और मेरे बीच में सेक्स संबंध स्थापित हो गये. उन्होंने बोल दिया था कि जब भी उनकी जरूरत हो तो मैं उनको बुला लिया करूं. उस दिन के बाद से जब भी मेरा मन हुआ मैं अपने ससुर बहू सेक्स से अपनी चूत की प्यास को बुझवाने लगी. मुझे घर में एक दमदार लंड मिल गया था.

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उन्होंने अपना तगड़ा लंड मेरी चूत में पेल दिया

मेरा नाम लता है। अभी मेरी उम्र 38 साल है लेकिन फिगर ऐसा कि अच्छे-अच्छे मर्दो का लौड़ा खड़ा कर देती हूँ।

मेरे बदन का नाप इस समय 34-30-38 है। मेरा बदन दूध जैसा सफेद है। मेरी चूचियाँ बहुत अधिक उभरी हुई है और मेरी गांड भी काफी बड़ी व आकर्षक है। मर्द तो मुझे देखते ही मुझे चोदने के सपने देखने लगते हैं।

मैं तैयार भी इस प्रकार से होती हूँ जिससे मेरी चूचियाँ और मेरी गांड अधिक आकर्षक लगे। मैं ज्यादातर साड़ी ही पहनती हूँ। साड़ी को मैं अपनी नाभि के काफी नीचे से पहनती हूँ. जिससे मेरी नाभि स्पष्ट नजर आ जाती है।
साथ ही मेरी साड़ी का पल्लू जालीदार होने के कारण मेरा गोरा बदन भी साफ नजर आता है।

साड़ियों के साथ मैं हमेशा गहरे गले वाली ब्लाउज ही पहनती हूँ. जिससे मेरे चूचें और अधिक उभर कर अधिक बड़ी लगने लगते हैं। जब मैं बाहर निकलती हूँ तो सारे मर्द मुझे घूर-घूर कर देखने लगते हैं जैसे कि वो मुझे वहीं लिटा कर चोदने वाले हैं।

यह कहानी आज से लगभग 6 साल पहले की है। तब भी मेरा फिगर ऐसा ही था लेकिन उस समय मैं इस प्रकार से सजती-संवरती नहीं थी।
उस समय मेरे पति का देहांत हो चुका था। हमारे घर की स्थिति बिगड़ने लगी थी। घर में कोई भी कमाने वाला नहीं बचा रह गया था।

मेरा बेटा भी एक साल से घर में ही बैठा हुआ था। उस समय वो 9वीं कक्षा में था। यदि वह स्कूल जाना जारी रखता तो वह 10वीं का बोर्ड परीक्षा दे चुका होता। लेकिन बहुत दिन तक स्कूल न जाने के कारण उसे स्कूल न जाने के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया और वह बोर्ड की परीक्षा भी नहीं दे पाया।

अब मैं अपनी कहानी शुरू करती हूँ। मेरी कहानी यह है कि मैं अपने काम को पूरा करवाने के चक्कर में किस प्रकार विभिन्न लोगों से चुदती हूँ।

जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरा बेटा एक साल से स्कूल नहीं गया।
तो एक दिन मैं उससे बात करने उसके कमरे में गई। वो उस समय एक किताब ही पढ़ रहा था।

मैं उसके पास जाकर बैठ गई। मैंने कहा- बेटा! आगे का क्या सोचा है तुमने? स्कूल जाना है या नहीं? इस प्रकार घर में बैठे रहने से कोई काम नहीं बनेगा।
तो उसने कहा- हां माँ। स्कूल तो जाना है मगर क्या अब स्कूल वाले मुझे वापस भर्ती कर लेंगे।
फिर मैंने कहा- तुम उसकी चिंता मत करो। मैं कल तुम्हारे स्कूल जाकर बात कर लूंगी।

फिर रात को हम दोनों ने साथ में खाना खाया और हम अपने-अपने कमरे में चले गये सोने चले गये।

अपने कमरे में जा कर मैंने अपने कपड़े उतार दिये और ब्रा-पैंटी पहन कर अपने बैड पर लेट गई।

मैं आपको बता देती हूँ कि शादी के कुछ समय बाद से ही मैं अपने पति के साथ रात को ब्रा-पैंटी में सोने लगी थी। मेरे पति अक्सर मुझे चोदते थे और अगर न भी चोदते तो मेरी चूचियों को अपने हाथों से मसलते और मेरी चूत में उंगली तो किया ही करते थे।

रात को तो हम दोंनों एक-दूसरे को नंगा कर के ही सोते थे। उनके जाने के बाद भी मेरी यह आदत नहीं छुटी।

मैं अभी बस सोई ही थी कि कुछ सोचते-सोचते उठ गई और आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई। मैं खुद को निहारने लगी।

ब्रा और पैंटी में मैं बहुत-बहुत सेक्सी लग रही थी। कोई मर्द मुझे अगर ऐसे देख ले तो मुझ पर टूट ही पड़े। आईने में मैंने देखा कि ब्रा में मेरी चूचियाँ बहुत खिली हुई थी।
मैंने अपनी चूची पर हाथ रखा और उसे ऊपर धकेल कर देखा कि वो कितनी कातिलाना लग रही थी।

उसी वक्त मैंने सोचा कि क्यूं न मैं डीप गले वाली ब्लाउज पहन कर जाऊं जिससे मेरी चूचियों को देख कर मास्टर शायद जल्दी मान जायेगा।

अगले ही दिन से मैं ऐसे साड़ी पहनने लगी जैसे मैं आज पहनती हूँ। मैंने डीप गले वाली ब्लाउज पहनी और साड़ी को भी अपनी नाभि के काफि नीचे बांधा। उस दिन मैंने भी पहली बार खुद का ये हसीन रूप देखा। मैं बहुत ही हॉट एंड सेक्सी लग रही थी।

मैं सुबह साढ़े आठ बजे निकली। उस समय मेरा बेटा सो रहा था. तो उसने मुझे इस सेक्सी अवतार में नहीं देखा। मैं घर बाहर से लॉक कर के निकल गई।

बाहर निकलते ही काफी लोग मुझे घूरने लगे।

मैंने ऑटो किया और स्कूल चल दी। स्कूल में अंदर जाकर मैंने उस मास्टर के बारे में एक महिला कर्मचारी से पूछा तो उसने जवाब दिया कि उनकी क्लास चल रही है. तो आप उनकी कैबिन में जाकर बैठ जाओ, वो थोड़ी देर बाद आ जाएंगे।

मैं उनके कैबिन की ओर गई तो देखा कि उनके कैबिन से पहले के चार कैबिन में ताला लगा हुआ था और उनका कैबिन कोने में, सुनसान में था। मैं जाकर उनकी कैबिन मैं बैठ गई।

कुछ समय तक इंतजार करने के बाद मैं अपना मोबाईल चैक करने लगी।
ऐसे ही एक घंटा बीत गया।

थोड़ी ही देर बाद वह मास्टर आया तो मैं खड़ी हो गई। वो कोई नया ही मास्टर था जिसे मैं नहीं पहचानती था।
मैंने अपना परिचय दिया तो उन्होंने बैठते हुए मुझे भी बैठने को कहा।

उन्हें मैंने सारी बातें बताई तो उन्होंने भी कहा कि- हां, मैं आपके बेटे के बारे में जानता हूँ। पहले जो सर थे वो मुझे उसके बारे में बता के गए हैं।

तो मैंने उनसे पूछ लिया कि मेरे बेटे का दाखिला हो जायेगा न दोबारा?
उन्होंने कहा- यह मेरे हाथ में नहीं है। सिर्फ मेरे चाहने से उसका दाखिला नहीं हो सकता।
यह कहकर उसकी नजर मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों पर पड़ी जो मेरे ब्लाऊज से बाहर आने के लिए मचल रही थी।

ये देखकर मैं उसकी ओर थोड़ा झुक गई जिससे मेरी चूचियाँ और साफ दिखने लगी और मैंने कहा- कुछ करिए न सर! आप चाहो तो कुछ भी हो सकता है।
मैंने टीचेर को सेक्स के लिए उकसा रही थी कि मेरा काम बन जाये.

मेरी बात सुनने के बाद वो मेरे पास रखी कुर्सी में आकर बैठ गए और मेरी जाँघों पर अपना हाथ रखते हुए कहा- जी हो तो सकता है. लेकिन आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
मैं ये कहना तो नहीं चाहती थी लेकिन अनायास ही मेरे मुँह से निकल गया- मैं अपने बेटे के लिए कुछ भी कर सकती हूँ।

ये सुनते ही वो तो जैसे मुझ पर टूट पड़े। उन्होंने जोर से मेरे मुँह को अपने ओर खींचा और मुझे किस करने लगे।

शुरुआत मैं तो मैंने उनका विरोध किया लेकिन जैसे ही उन्होंने मेरी कमर में हाथ डाला तब से मैंने टीचर सेक्स में साथ देना शुरु कर दिया।
उन्होंने किस करना जारी रखा और धीरे-धीरे से अपना हाथ ऊपर करते हुए, मेरी कमर को सहलाते हुए मेरी साड़ी को पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरु कर दिया।

मैं भी गर्म होने लगी थी। मुझे भी लगभग डेढ़ साल हो चुके थे ऐसा आनन्द प्राप्त किये हुए! इसलिए मैं भी उनका साथ देने लगी।
वो मेरी चूचियों को अब जोर-जोर से दबाने और मसलने लगे।

तभी अचानक से उन्होंने मेरी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर खींच लिया और पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फेरने लगे।

लगभग दो मिनट तक हमारा चुम्बन चला. उतने देर में ही जब उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को मसलना शुरु किया तो एक मिनट के अंदर ही झड़ गई।

मास्टर ने जब मेरी पैंटी में कामरस का गीलापन महसूस किया तो वो समझ गया कि अब मैं चुदने के लिए तैयार हो चुकी हूँ.
और सच बोलूँ तो अब तो मुझसे भी सब्र नहीं हो पा रहा था और मुझे भी चुदना था।

अब मास्टर ने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए और ब्रा को भी खोलकर अलग कर दिया।

ब्रा खुलते ही मेरी दोनों चूचियाँ उछलकर मास्टर के सामने आ गई। अब मेरा ऊपर का बदन पूरा नंगा हो गया था मास्टर के सामने।

मास्टर ने दोनों चूचियों को अपने हाथों के ज़ोर से पकड़ा तो मेरे मुँह से एक सिसकारी निकली।
उसे सुनकर मास्टर और ज़ोश में आ गया. और उसने मेरी दोनों दूध जैसी सफेद चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से मसलना और चूसना शुरु कर दिया। वो एक चूची को हाथ में लेकर चूसते तो दूसरे को हाथ से मसलते और निप्पल को उंगली से कसकर निचोड़ते।

3-4 मिनट के बाद मास्टर ने अपनी पैंट का बटन और जिप खोलकर पैंट को अपने घुटनों तक नीचे कर दिया. साथ ही उसने अपना अंडरवियर भी नीचे कर दिया।
मैं तो उनके लौड़े को देखते ही हैरान हो गई।

लगभग 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा हथियार था उनका!
मेरी हैरानी मेरे चहरे पर साफ नजर आ रही थी।

मास्टर ने मेरी हैरानी भाँप ली और मुझसे पूछने लगे- कभी इतना लंबा अंदर ली हो?
मैंने ना में अपना सिर हिला दिया।
मास्टर ने कहा- कोई बात नहीं, आज इसका भी अनुभव कर लो।

यह कहकर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में धकेल दिया। पहले तो मुझे ये अच्छा नहीं लगा और मैंने विरोध करना चाहा लेकिन कर न सकी क्योंकि उनका लौड़ा काफी बड़ा था और वो बहुत तेज मेरे मुँह में अपना लौड़ा अंदर-बाहर कर रहे थे।

थोड़ी ही देर में मैं भी मजा लेने लगी और मजे से मास्टर का लौड़ा चूसने लगी।
पाँच मिनट जोरदार लौड़ा चुसाई के बाद वो मेरे मुंह में ही झड़ गए।

झड़ने के बाद वो कहने लगे- साली रंडी! कितने समय से लौड़ा नहीं लिया हैं। पाँच मिनट में ही ढेर कर दिया मुझे।
उनके मुँह से रंडी शब्द सुनकर मुझे अज़ीब पर इस स्थिति में अच्छा लगा।

उसके बाद उन्होंने मुझे उठाकर मेज़ पर बिठा दिया और मेरी बुर के ऊपर से मेरी पैंटी को निकालकर फेंक दिया.
उन्होंने देखा कि मेरी चूत के आसपास काफी झाँट उगी हुई हैं।
उसे देख टीचर ने कहा- आहह! क्या चूत पाई है तूने। ऐसी चूत का ही तो दीवाना हूँ मैं! आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बनाने में मज़ा आयेगा।

फिर उसने अपना मुँह मेरी झाँट से भरी चूत पर अपना मुँह लगाया. तो मुझे 440 वोल्ट का झटका लगा।
तकरीबन पाँच मिनट तक मेरी चूत की ज़ोरदार चुसाई की उसने और फिर मैं झड़ गई।

इसके बाद उसने अपना लंड हाथ में लेकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
मुझसे अब और नहीं रहा जा रहा था। मैंने उनसे कहा- अब और न तड़पाओ। चोदो मुझे!

इसके बाद तो उसने आव देखा न ताव और एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना आधा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी चूत काफी टाईट थी ये उन्हें पता लग गया था शायद इसलिए उन्होंने बहुत तेज़ धक्का मारा था। शायद वो ये भी समझ ही चुके थे कि मैं काफी दिनों से चुदी नहीं हूँ।

जब उन्होंने अपना तगड़ा लंड मेरी चूत में पेल दिया तो मुझे बहुत तेज़ दर्द का अहसास हुआ और मैं चिल्ला दी तो उन्होंने मुझे चिल्लाने से रोकने के लिए मुझे किस करने लगे।

थोड़ी देर उन्होंने अपना लंड वैसे ही मेरी चूत में रखे रखा और किस करते रहे।
जब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो उन्होंने अपने लंड पर थोड़ा थूक फेंका और धीरे से अपने लंड को आगे धकेलने लगे। दर्द तो अभी भी हो रहा था लेकिन अब थोड़ा मज़ा भी आने लगा था।

अब उन्होंने धीरे-धीरे अपना लंड आगे-पीछे करना शुरु कर दिया।
इस बीच वो मेरी नंगी कमर पर अपना हाथ फेरे जा रहे थे।

धीरे-धीरे चुदाई को मज़ा मुझे भी आ रहा था। मैंने भी एक समय उनके कंधों पर हाथ रखा और जब उन्होंने अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ानी शुरु की तो उसी वक्त मैंने उनके कंधें में अपने नाखून चुभा दिए।

वो तो मेरी चुदाई का इतना मज़ा ले रहे थे कि उनको इसका पता भी नहीं चला लेकिन इससे मेरी परेशानी जरुर बढ़ी। इसके बाद उन्होंने चुदाई काफी तेज़ कर दी।

चुदाई करते-करते वो कभी मुझे किस करते तो कभी मेरी चूची को हाथ से पकड़कर अपने मुँह से चूमने लगता।

वैसे उस मास्टर में स्टैमिना काफी था क्यूंकि लगभग 8 मिनट से वो मेरी चूत में तेज़ धक्के लगाए जा रहा था लेकिन तब भी वो अब तक झड़ा नहीं था।
जबकि इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी।

लगभग 12 मिनट चोदने के बाद जब वो झड़ने वाला था तो उसने धक्कों को थोड़ा और तेज़ करते हुए कहा- सॉरी मैडम! मुझे बाहर गिराने की आदत तो है नहीं! इसलिए आपके अंदर ही गिरा रहा हूँ।
मैं कह भी क्या सकती थी! इसलिए धीरे से हां में सिर को हिलाकर सिर नीचे कर लिया।

देखते ही देखते टीचर ने मेरे अंदर धार छोड़ना शुरु कर दिया और लगभग एक मिनट तक उसने अपना माल मेरी झांट वाली चुत में छोड़ता रहा। उसका सारा माल मेरे अंदर गिरने के बाद उसने एक हल्की सी आहहह भरी और मेरी चूचियों पर सिर रख दिया और अपने हाथ से अबकी बार प्यार से हाथ फेरने लगा।

हम दोनों ऐसे ही एक मिनट तक पड़े रहे। फिर वो अलग हुए तो मैंने देखा कि मेरी काली झांटों के बीच से एक सफेद धार बह रही है।

मैं उसे अपने हाथ से छूने ही जा रही थी कि तभी मास्टर एक कपड़ा ले आए और मेरे हाथ को अलग करके मेरी चूत पर कपड़ा लगाकर उसे पौंछने लगे।
तभी उन्होंने मेरी ओर देखा. तो मैं उन्हें देख मुस्कुरा दी.
उन्होंने भी मुस्कुरा कर अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरी एक चूची दबा दी।

फिर उठकर टीचर ने कहा- अब आप निश्चिंत रहे। आपका काम हो जाएगा। दो दिन बाद प्रिंसिपल साहब आ रहे हैं। मैं उनसे कहकर आपके बेटे का दाखिला करवा दूँगा।

वो कपड़े पहनने लगे और मैं भी कपड़े पहनकर वहां से चल दी।

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