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अलीज़ा की गांड

ब्यूटी पार्लर की आड़ में मैं कालगर्ल का धंधा भी कर लेती थी. एक नयी पुलिस वाली की भारती हुई और वो मेरे काम में रुकावट बनने लगी. तो मैंने उसका इलाज कैसे किया?

हाय मेरे दोस्तो, मैं आपकी अंजलि … मुझे फ्री सेक्स कहानी पर आप सभी से मिलना बहुत अच्छा लगा. मुझे आप लोगों के ईमेल मिले, लेकिन मैं सभी को जवाब नहीं कर सकी … सॉरी!

आज की ये सेक्स कहानी एक पुलिस वाली पर है कि कैसे उसने चुत चुदवाई और मेरी सैटिंग बन गई.

मैं जहां रहती हूँ, वहां के एक मकान में एक फैमिली रहने आयी. वो एक यादव फैमिली थी. उस फैमिली में 3 लोग रहते थे. यादव जी, उनकी पत्नी और बेटी. यादव जी की बेटी 23 साल की थी. यादव जी पुलिस में कांस्टेबल थे.

लेकिन अचानक हार्ट अटैक के कारण यादव जी की डेथ हो गई. अब उनकी बेटी और पत्नी अकेली बची थीं. यादव जी की पत्नी पहले से ही काफी बीमार रहती थी. इसलिए घर चलाने की जिम्मेदारी यादव जी की बेटी अलीज़ा पर आ गई.

अलीज़ा ने पुलिस में भर्ती होने के लिए एग्जाम दिया हुआ था. लेकिन जब रिजल्ट आया तो उसे निराशा हाथ लगी. मगर पिता की मृत्यु के चलते उसकी अनुकम्पा नियुक्ति का प्रार्थनापत्र स्वीकार हो गया और उसे भी एक कांस्टेबल की पोस्ट मिल गई.

अलीज़ा के मन में इस पोस्ट से संतुष्टि नहीं हुई, वो पुलिस विभाग में किसी बड़े पद के सपने देखती थी.

इससे पहले इस सेक्स कहानी को रूप दिया जाए, उससे पहले मैं आपको अलीज़ा के बारे में बता देती हूँ. अलीज़ा की उम्र 23 साल की थी. उसका फिगर 34-28-36 का था. उसे देख कर कोई कामुक हो जाए, ऐसी मस्त सुन्दरी थी वो. उसे देख कर किसी का भी मन उसे चोदने का हो जाए.

जब अलीज़ा पुलिस वर्दी में घर से निकलती, तो बड़ी ज़बरदस्त लगती थी. पीछे से उसकी गांड ऐसे ठुमकती थी, जैसे चुदवाने की चाह में कोई लौंडिया गांड मटका रही हो. अब आप लोग अलीज़ा की खूबसूरत जवानी को समझ गए होंगे कि कितनी वो कितनी सेक्सी और हॉट दिखती होगी.

अलीज़ा थी तो एक कांस्टेबल, लेकिन वो रौब इतना दिखाती थी, जैसे पुलिस इंस्पेक्टर हो.

आपको तो मालूम ही है कि मेरा पार्लर लड़कियों को मसाज के लिए ट्रेनिंग देता है. उसी की आड़ में मुझे बिजनेस भी मिल जाता है. एक दिन इसी बात को लेकर अलीज़ा ने मुझसे लड़ाई की. तब मैंने सोच लिया कि इसे मजे चखा कर ही रहूंगी.

मैं हमारे एरिया के एक एमएलए से मिली. उस एमएलए का नाम रोशन लाल था. उसका दबदबा भी बहुत था. मैं रोशन लाल से मिली और उसे अलीज़ा के बारे में बताया. रोशन लाल को मैं कई बार आइटम सप्लाई कर चुकी थी, तो वो मेरी बात मानता था.

रोशन लाल बोला- अरे अंजलि डार्लिंग, तेरा काम हो जाएगा, तू जा और सो जा. अभी जरा इलेक्शन आ रहे हैं. इलेक्शन के बाद तेरा काम हो जाएगा.
मैंने रोशन लाल को कुछ पैसे दिए, वो पैसे उसने मना करते करते रख लिए.

आप सब तो जानते ही हैं कि पैसा हर किसी को अच्छा लगता है और पैसे से ही हर काम चलता है.

कुछ समय बाद इलेक्शन हो चुके थे. तो मैंने रोशन लाल को फोन किया और उससे बोली- रोशन लाल इलेक्शन हो चुके हैं … अलीज़ा से कब बदला लेगा?
रोशन लाल बोला- मैं अभी दिल्ली जा रहा हूँ … तब तक इलेक्शन रिजल्ट आ जाएगा.

फिर वो दिन भी आ गया. इलेक्शन में रोशन लाल इस बार भी जीत गया और दिल्ली से आ गया था. उसने अलीज़ा की खबर ली और वो जिस थाने में थी, वहां से उसका ट्रांसफर करवा दिया.

इस बार रोशन लाल ने अलीज़ा की ड्यूटी अपने फार्महाउस पर लगवा दी, इधर वो मीटिंग करता था और सबको पार्टी देता था.

दूसरे दिन रोशन लाल मुझसे बोला- फार्महाउस आ जाना, कल से अलीज़ा की ड्यूटी वहीं करवा दी है.
मैंने कहा- ठीक किया साली को इधर से हटवा दिया.
रोशन लाल हंस कर बोला- अब मैं अलीज़ा की मां चोद दूंगा!
मैंने हैरान होकर कहा- वो कैसे?
रोशन लाल बोला- तू खुद आ कर देख ले ना … तू अन्दर रूम में रहना, रूम में सीसी टीवी कैमरा लगा है. तू इधर से ही अच्छे से उसकी मां चुदते देख लेगी.
मैं बोली- ठीक है, मैं आती हूँ.

फिर मैं रोशन लाल के फार्महाउस पहुंच गई और अन्दर जहां उसके ऑफिस में सीसी टीवी रूम था, वहां बैठ गई. मैं टीवी में देख रही थी कि रोशन लाल कब आएगा और अलीज़ा से बदला लेगा. इतने में अलीज़ा भी फ़ार्म पर आ गई. अलीज़ा वर्दी में थी. उसकी चुस्त वर्दी की वजह से उसके मम्मे एकदम उभर रहे थे और गांड एकदम टाईट थी.

लगभग दो घंटे बाद रोशन लाल आया.

कुछ देर बाद रोशन लाल ने अलीज़ा को अन्दर बुलाया. मैं सब कुछ सीसी टीवी से देख रही थी. मुझे उसकी आवाज भी आ रही थी. ये आवाज रोशन लाल के रूम से सुनाई दे रही थी.

रोशन लाल- और सुना अलीज़ा कैसी है?
अलीज़ा- जी सर … मैं ठीक हूँ.
रोशन लाल- मैंने सुना है कि तू कांस्टेबल से ऊपर की पोस्टिंग चाहती है.
अलीज़ा- जी सर, ये मेरा सपना है … काश सच हो जाए.
रोशन लाल- अरे तेरा सपना कितना सा है … ये तो बड़े आराम से हो सकता है. मैं करवा सकता हूँ लेकिन …

ये सब रोशन लाल अपने लंड मसलते हुए बोला था.

अलीज़ा- जी सर … करवा दो प्लीज़ … मैं कुछ भी कर सकती हूँ.
रोशन लाल- कुछ भी का मतलब समझती है न … अलीज़ा सोच ले तू क्या बोल रही है?

रोशन लाल ये कहते हुए फिर से अपने लंड पर हाथ घुमाया.

अलीज़ा हंस कर बोली- हां सर मैं समझती हूँ.

ये कहते हुए वो रोशन लाल की गोद में बैठ गई. अलीज़ा ने अपनी गांड रोशन लाल के लंड से टच कर दी और बोली- अब बोलो सर जी?

रोशन लाल ने ऊपर से पीछे हाथ डाल कर उसके मस्त बुब्बुओं को दबाना शुरू कर दिया. अलीज़ा ‘सीई … आ. … सीई … उफ्फ..’ की सिसकारी भर रही थी.

फिर रोशन लाल ने अलीज़ा की टोपी हटा दी और अलीज़ा के बाल खोल दिए. रोशन लाल अलीज़ा के बालों को सूंघने लगा. उसके बालों में सुगंध थी.

रोशन लाल लम्बी सांस भर कर खूशबू का मजा लेते हुए बोला- आह क्या मस्त जुल्फें हैं तेरी अलीज़ा जान.

मैं ये सब सीसी टीवी से देख रही थी. मुझे भी सनसनी होने लगी. मेरे सामने एक मर्द अलीज़ा जैसी सुन्दरी के साथ खेल रहा था.

कुछ पल बाद रोशन लाल ने अलीज़ा की शर्ट उतार दी. अलीज़ा ने अन्दर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी. वो अभी भी पैंट पहने हुए थी. रोशन लाल ने अलीज़ा को उठाया और आगे की ओर करके वो अलीज़ा के दूध दबाने लगा. साथ ही वो अपना एक हाथ अलीज़ा की चूत पर घुमाने लगा.

अलीज़ा मस्ती में ‘सीई … अहह … सीई … ऊ उह्ह … रोशन लाल जी … आज आप खूब एंजॉय कर लो … मगर मुझे पोस्टिंग हर हाल में चाहिए.

रोशन लाल ने यह सुनते ही अलीज़ा की ब्रा फाड़ दी और बोला- भोसड़ी वाली मादरचोदी … आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा.

इतना बोल कर रोशन लाल ने अब अलीज़ा की पैंट भी उतार दी. अलीज़ा की पैंट के साथ ही उसकी पैंटी भी निकल गई थी. अब अलीज़ा एकदम नंगी हो गई थी. रोशन लाल ने नंगी अलीज़ा को अपनी गोद में उठा कर सोफ़े पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोल दिया. उसके सामने अलीज़ा की चूत खुली पड़ी थी. वो अलीज़ा की चुत चाटने लगा.

रोशन लाल अलीज़ा की चुत पर ऊपर से नीचे तक जीभ फेरता हुआ कहने लगा- आह … क्या मस्त चूत है बहन की लौड़ी की … आह आज तो तेरी चुत को मस्त कर दूंगा.

ये बोल कर रोशन लाल अपनी पूरी जीभ चुत में डाल कर चाटने लगा. अलीज़ा मस्ती से मादक सिसकारियां भरने लगी थी.
उसकी गांड खुद ब खुद रोशन लाल के मुँह पर उठती जा रही थी. जिससे रोशन लाल भी अलीज़ा की चुत को खूब चाटने लगा.
कुछ ही पलों में अलीज़ा झड़ गई.

अलीज़ा की चूत मलाई से सं गई थी. जिसे रोशन लाल मस्ती से चाटता गया. इससे अलीज़ा की चुत एकदम चिकनी हो गई थी.

अब रोशन लाल ने अपने कपड़े उतार दिए और अलीज़ा के सीने पर बैठ गया.
रोशन लाल गुर्रा कर बोला- चल लंड हिला भोसड़ी की.

अलीज़ा ने रोशन लाल का लंड हिलाना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों में रोशन लाल का लंड खड़ा हो चुका था. मैं सीसीटीवी से देख रही थी. मुझे उसका लंड लगभग 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा दिख रहा था.

इसके बाद रोशन लाल ने अपना लंड अलीज़ा के होंठों पर रखा और अपना टोपा अलीज़ा के होंठों पर फेरने लगा. अलीज़ा ने अपने होंठ भींच रखे थे, शायद वो लंड चूसना नहीं चाह रही थी. मगर रोशन लाल ने उसके दोनों गाल दबा कर लंड को अलीज़ा के मुँह में घुसेड़ दिया.

अब अलीज़ा ने भी लंड पकड़ कर मुँह में चूसना चालू कर दिया. कोई 5 से 7 मिनट बाद रोशन लाल अलीज़ा के मुँह को मस्ती से चोदने लगा. वो अपना लंड पूरा अन्दर बाहर करने लगा था. रोशन लाल अलीज़ा रंडी के मुँह की चुदाई जम कर करने लगा. कुछ मिनट बाद रोशन लाल के लंड का पानी निकल गया और उसने सारा अलीज़ा के मुँह में ही छोड़ दिया. अलीज़ा भी जोश में थी, उसने रोशन लाल के लंड का पूरा पी लिया.

अब रोशन लाल ने उससे पूछा- पहले चुदी है या नहीं?
अलीज़ा मुस्कुरा कर बोली- जब मैं ट्रेनिंग में गई थी, तो वहां जो ट्रेनिंग ऑफिसर था … वो सारी लड़कियों को चोदता था. उसी ने मुझे भी चोदा था.

रोशन लाल ने हम्म की आवाज निकाली और अलीज़ा से फिर से लंड खड़ा करने को कहा.

अलीज़ा फिर से रोशन लाल का लंड हिलाने लगी. कोई 5 मिनट में फिर से रोशन लाल का लौड़ा खड़ा हो चुका.

अब रोशन लाल ने अलीज़ा को सोफ़े पर सीधा लेटा दिया और अपना लंड चूत पर सैट करके एक धक्का दे दिया. उसका पूरा लंड सरसराता हुआ चुत के अन्दर घुसता चला गया.

अलीज़ा एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी- आह मर गई … आआहह … मेरी फट गई … आह फाड़ दी चूतिए ने.

यह सुन कर रोशन लाल ने लंड फिर से बाहर निकाला और बिना देर किए फिर से अन्दर पेल डाला. अलीज़ा की चिल्लपौं को अनसुना करते हुए वो लंड चुत में अन्दर-बाहर करने लगा.

थोड़ी देर बाद अलीज़ा भी अपनी गांड उठा कर लंड से चुदवाने लगी. ये देख कर रोशन लाल भी जोर जोर से ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

लगभग 20 से 25 मिनट बाद रोशन लाल ने लंड चुत से बाहर निकाला और सोफ़े पर बैठ गया. मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी खड़ा था.

रोशन लाल अलीज़ा से बोला- चल रंडी … लंड पर बैठ और उछल उछल कर मजे दे. आज तुझे दरोगा बना कर ही छोडूंगा.

ये सुनकर अलीज़ा गांड मटकाते हुए उठी और रोशन लाल के सीने की तरफ मुँह करके बैठ गई. फिर उसने लंड को अपनी चुत में सैट किया और पूरा लंड चूत में ले लिया.

लंड अन्दर लेते ही उसकी एक बार सीत्कार निकली और वो अगले ही पल गांड उछाल उछाल कर रोशन लाल को मजे देने लगी.

रोशन लाल अलीज़ा की गांड पकड़े हुए उसकी चुत में लंड पेल रहा था. रोशन लाल अलीज़ा के दूध चूसता हुआ चुदाई का मजा ले रहा था. साथ ही वो अलीज़ा की गांड में भी उंगली डाल रहा था.

वो अलीज़ा को इसी पोज दस मिनट तक चोदता रहा. अलीज़ा अब थक गई थी और वो अपनी तरफ से जरा भी उछल कूद नहीं कर रही थी.

फिर रोशन लाल ने अलीज़ा को फिर से सोफ़े पर सीधा लेटा दिया और जोर जोर से ठोकने लगा.
अलीज़ा समझ गई कि रोशन लाल अब लंड का पानी छोड़ने वाला हो गया है. ये समझते ही अलीज़ा रोशन लाल से बोली- रोशन लाल, अपना पानी चूत में नहीं, बाहर छोड़ना.

लेकिन रोशन लाल कहां सुनने वाला था. वो बस धकापेल चोदता रहा. उसने अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी थी.

फिर रोशन लाल ने एकदम से एक करारा झटका दिया और लंड का पूरा पानी अलीज़ा की चूत में फेंकने लगा. वो अलीज़ा के ऊपर लेट गया था ताकि पानी बाहर ना निकलने पाए.

दो मिनट बाद रोशन लाल ने लंड बाहर निकाला, तब तक अलीज़ा की चूत में पानी घुस चुका था.

अलीज़ा तनिक गुस्सा हुए बोली- तुमने पानी अन्दर क्यों डाला?
रोशन लाल बोला- मादरचोदी पोस्टिंग करवाना है ना … तो ज्यादा चुदुर चुदुर नहीं कर.
अलीज़ा चुप हो गई.

रोशन लाल कुछ देर अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. अलीज़ा भी अपनी हांफी ठीक कर रही थी.
कुछ देर बाद रोशन लाल बोला- चल अब उल्टी लेट जा रांड … अब तेरी गांड का नम्बर है.

रोशन लाल के मुँह से ये सुन कर तो मैं भी सकते में आ गई. उधर अलीज़ा भी बिना चूं-चपड़ किए उल्टी लेट गई थी.

रोशन लाल ने अपने खड़े लंड सहला कर गांड मारने के लिए रेडी किया और अलीज़ा की गांड में लंड डालने लगा.

अलीज़ा लंड गांड में लेते ही चीख उठी- आह मर गई … रोशन लाल जी आपका लौड़ा है या लोहा की रॉड है.

रोशन लाल ने उसकी कोई परवाह नहीं की और उसकी मखमली गांड मारने लगा. रोशन लाल का लंड अलीज़ा की गांड में जाते समय बड़ी आवाज कर रहा था. कमरे में से ‘घप्पा घप्प … घप्पा घप्प..’ की आवाज आ रही थी.

कुछ देर बाद रोशन लाल का पानी फिर से छूटा और उसने पूरा पानी अलीज़ा की गांड में ही छोड़ दिया. अलीज़ा भी झड़ चुकी थी.

रोशन लाल ने पूरे दो बार अलीज़ा की चुदाई की और बैठ कर सिगरेट फूंकने लगा. उधर अलीज़ा मरी कुतिया सी कुनमुना रही थी.

तभी रोशन लाल के पास किसी का फोन आया, तो वो कपड़े पहन कर चला गया. उसके जाते ही अलीज़ा बाथरूम में चली गई और उधर नहा कर उसने अपनी वर्दी पहन ली.

जब वो रूम के बाहर निकली, तो उसने मुझे देखा.

अलीज़ा मुझे देख कर चौंक गई और बोली- अंजलि तू यहां?
मैं बोली- क्यों बहुत रौब झाड़ती थी ना … तूने मुझसे लड़ाई की थी … उस वक्त भी मैं तुझसे बोली थी कि तुझे छोडूँगी नहीं … मैंने सब देख लिया कि रोशन लाल तुझे कैसे रगड़ा है.

मैंने उसे सीसी टीवी वाली बात बताई और बोली- देख … मुझे सब मालूम है कि कैसे रोशन लाल तुझे चोद रहा था.
अलीज़ा मेरे पैर पकड़ कर बोली- अंजलि जी … प्लीज़ मुझे माफ कर दो, ये बात आप किसी से मत कहना, आप जो बोलोगी … मैं करूंगी.
मैं बोली- ठीक है … मैं तुझे माफ़ भी कर सकती हूँ … और तुझे किसी बड़ी पोस्ट पर भी सैट करवा सकती हूँ. लेकिन तू मेरा कहना माने तो!
अलीज़ा बोली- क्या काम!

मैं बोली- मुकेश जी को जानती है … जो डीएसपी हैं. बस तू उन्हें खुश कर दे. वो तुझे ऊंची पोस्ट पर सैट करवा सकते हैं और इस बात के लिए रोशन लाल उनसे तेरी सिफारिश भी कर देगा.

यह सुन कर अलीज़ा पहले तो गुस्सा हो गई और बोली कि मैं कोई ऐसी वैसी रंडी नहीं हूँ … पुलिस वाली हूँ.
मैं बोली- अरे वो मुकेश जी भी डीएसपी हैं. वैसे भी तू रोशन लाल के साथ चुद चुकी है … अब क्या शर्माना. तुम हां कर दोगी तो तुम्हारा ही काम बन जाएगा.

अलीज़ा बोली- तुम मुझसे बदला ले रही हो या मेरी मदद कर रही हो?
मैंने कहा- तेरी मदद इसलिए कर रही हूँ कि तू मेरे धंधे में सरदर्द न बने बल्कि मेरी मदद करे.

अलीज़ा ये सुनकर मेरी बात मान गई.

मैंने मुकेश जी को फोन किया- हैलो डीएसपी मुकेश जी से बात हो रही है?
मुकेश- हां जी … अंजलि जी बोलिये. मेरे से कुछ काम था या कुछ नयी माल सैट की है?
मैं- डीएसपी साहब माल ही के लिए फोन किया है … बड़ी हॉट है … कितना दोगे?
मुकेश- आप आधे घंटे में उसे उसी वाले होटल में पहुंचा दो … फिर देखता हूं.

उनका ये कहना था कि मैं समझ गई कि कौन से होटल के लिए कह रहे हैं.
मैंने फोन रख दिया और अलीज़ा से बोली- चल होटल चलते हैं.

हम लोग जब तक होटल पहुंचे, तब तक मुकेश जी होटल पहुंच चुके थे.
मैंने होटल में आकर मुकेश जी को कॉल किया- डीएसपी साहब किस रूम में आना है?
मुकेश- अपना वही 308 नम्बर है.

फिर मैं उस रूम में गई. मुकेश जी सिर्फ अंडरवियर में बैठे सिगरेट फूंक रहे थे … सामने व्हिस्की की बोतल और गिलास बना रखा था.

वो अलीज़ा को देख कर चौंक गए- अरे अंजलि जी … ये अलीज़ा यहां क्या कर रही है?
मैं बोली- अरे मुकेश जी यह तो आपके विभाग का ही माल है.
मुकेश जी बोले- ये क्या मज़ाक है?
मैं बोली- ये मज़ाक नहीं है. आज आपकी ही पुलिस वाली आपके नीचे होगी. ये आज आपसे चुदवाएगी.

मुकेश ने अलीज़ा की तरफ देखा, तो अलीज़ा बोली- जी सर मैं रेडी हूँ.
मुकेश- ओके ठीक है … मुझे भूख मिटानी है … चल आ जा.

मैंने अलीज़ा को छोड़ दिया और मुकेश ने खींच कर अलीज़ा को अपनी गोद में ले लिया. साथ ही मुकेश ने मुझे इशारा किया. मैं उनका इशारा समझ गई और टेबल पर रखे पर्स से बीस हजार रूपए निकाल कर मुकेश जी को दिखाते हुए कमरे से जाने का पूछा.

मुकेश ने आंख दबा कर हां कर दिया और मैं पैसे लेकर बाहर चली गई.

अलीज़ा और मुकेश जी उस कमरे में लगभग चार घंटे रुके और उन दोनों की मस्त चुदाई लीला चली.

एक पुलिस वाली, रंडी के जैसे चुद गई और अब अलीज़ा का प्रमोशन भी हो गया. अलीज़ा की अब एएसआई के पद पर पोस्टिंग हो गई है … लेकिन अलीज़ा अब लंड के बिना नहीं रह पाती है.

अब तो लंड की भूख होने पर अलीज़ा सीनियर जूनियर भी नहीं देखती है, उसे जो भा जाता है, उसी से चुदवा लेती है. उसने कई बार तो थाणे में बंद अपराधियों के लंड से भी अपनी चुत की खुजली मिटाई है.

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मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी

कॉलेज लाइफ में खूब लंड लिये. कॉलेज के बाद लंड नहीं मिला. मेरी सहेली ने सगे भाई बहन का सेक्स सुझाया. मैंने क्या किया? भाई बहन की चुदाई की कहानी में पढ़ें.

दोस्तो, मेरा नाम पारुल है. मैं 22 वर्ष की हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं- मम्मी-पापा, मैं और मेरा बड़ा भाई विक्रांत. जिसकी उम्र 24 वर्ष है.

अब मैं अपनी मुद्दे की बात पर आती हूँ. आज मैं आप सबको बताना चाहती हूँ कि 20 की उम्र के बाद लड़का हो, चाहे लड़की सभी को शारीरिक संतुष्टि के लिए सेक्स चाहिए होता है. यह भाई बहन की चुदाई की कहानी इसी सच्चाई को कहती है.

आगे बढ़ने से पहले मैं अपने बारे में आपको बता देती हूं. मेरा फिगर 34 28 36 का है. मेरे कॉलेज और गांव के लड़के सभी मुझ पर मरते थे. अपनी स्कूल लाइफ में भी लड़कों के साथ मैंने काफी मजे किये हैं.

उसके बाद कॉलेज में आने के बाद मैंने 2 लड़कों को पटा लिया और उनके साथ भी बहुत मस्ती की. मूवी देखते समय भी मैं अपनी चूची दबवाती थी. लड़कों को जवान लड़की की चूची बहुत ज्यादा आकर्षित करती हैं और चूचियों से खेलना और उनको दबाना वो बहुत पसंद करते हैं.

अपने बूब्स दबवा दबवा कर मैंने 34 के करवा लिये थे. सभी लड़कियां ऐसे ही बूब्स चाहती हैं.
जब मेरी कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो गयी तो मैं घर पर रहने लगी. अब मेरे बूब्स के साथ खेलने वाला कोई नहीं रह गया था मेरे पास.

एक दिन मैंने अपनी सहेली सपना को ये बात बताई. उसने मुझे मेरे भाई को पटाने का आइडिया दिया. सपना कहने लगी कि उसने भी अपने भाई को पटा रखा है और वो अपने भाई के साथ खूब मजे करती है. घर में ही उसको मस्त लंड मिल गया है.

सपना की बातें मुझे उत्तेजित करने लगी. मैंने अपने भाई को पटाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया. काम थोड़ा मुश्किल था लेकिन इतना भी नहीं कि मैं कर ही न सकूं. मैं देखने में बहुत ज्यादा सेक्सी हूं इसलिए मेरे लिए आसान था.

किसी भी लड़की को अपने भाई को पटाने में मुश्किल इसलिए होती है क्योंकि भाई-बहन के रिश्ते में हमें शर्म आती है. वरना सेक्स तो लड़के भी करना चाहते हैं जैसे कि हम लड़कियां चाहती हैं. लड़के पटा पटा कर मुझे लाइफ में इतना तजुरबा तो हो गया था कि मैं लड़कों की कमजोरी जान चुकी थी.

अब मुझे लंड चाहिए था. वो भी अपने ही भाई का लंड.

मेरे पापा की दुकान है और मेरी मां घर पर ही रहती है. हम लोग मिडल क्लास परिवार से हैं. मेरा भाई कॉलेज के थर्ड इयर में पढ़ रहा था उस वक्त. यह बात आज से साल भर पहले की ही है.

मेरे और विक्रांत के एग्जाम खत्म हो चुके थे. हम लोग अब घर पर ही रहते थे. पापा सुबह दुकान पर चले जाते थे. मां घर के काम में लगी रहती थी.

घर में मैं बोर हो रही थी और कॉलेज के लड़कों के साथ की हुई मस्ती की यादें मुझे परेशान करने लगीं. मैं अपनी सहेली सपना और उसके भाई के सेक्स रिश्तों के बारे में सोचने लगी. मैंने सपना को फोन किया और उससे कहा कि मैं भी अपने भाई को पटाना चाहती हूं.

सपना ने मुझे कुछ टिप्स दिये. मैं उसके सुझाव सुन कर खुश हो गयी. मुझे लगने लगा कि मैं भी अपने भाई को पटा सकती हूं. अगले दिन से मैंने उसकी बताई बातों पर अमल करना शुरू कर दिया.

पहला दिन:
पहली सीख के तौर पर मैंने डीप गोल गले के टॉप्स के साथ स्कर्ट या जीन्स पहनना शुरू किया. उस दिन जब सुबह विक्रांत बेड पर लेटा हुआ था तो मैं उसके रूम में झाड़ू लेकर पहुंच गयी. उसके सामने झुक कर झाड़ू देने लगी.

मेरा प्लान कामयाब भी हो रहा था. विक्रांत मुझे नोटिस कर रहा था. मैं भी जानबूझ कर अपने चूचे हिला रही थी. ये सब होने के बाद मैं बाहर आ गयी.

फिर दोपहर में मुझे पैसे चाहिए थे. मैं भाई के पास जाकर पैसे मांगने लगी और मजाक करते हुए उसकी पीठ पर चढ़ गयी. मैंने अपने बड़े बड़े बूब्स उसकी पीठ पर टच किये. उसने भी मुझे पीछे हाथ लाकर कस कर पकड़ लिया. जैसा सपना ने बताया था वैसा ही हो रहा था.

दूसरा दिन:
विक्रांत ड्राइंग रूम में बैठ कर टीवी देख रहा था. मैंने उसके सामने झुक कर बातें करना शुरू किया. जैसे जैसे मेरे बूब्स के दर्शन उसको हो रहे थे उसका लंड उसके शॉर्ट्स में उठने लगा था. मैं ये सब साफ नोटिस कर पा रही थी.

उसी रात को हम लोग टीवी देख रहे थे और मम्मी किचन में खाना बना रही थी. तभी अचानक लाइट चली गयी और अंधेरा हो गया. मेरे मन में एक तरकीब सूझी और मैं अपना मोबाइल ढूंढने लग गयी.

अंधेरे का फायदा उठा कर मैंने अपने भाई की जांघों के बीच में हाथ मारा और मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसने बोला कुछ नहीं लेकिन मुझे हटाने के लिए उसने मुझे भी हाथ मारा और मेरे बूब्स को छेड़ दिया. ये उसकी तरफ से पहला इशारा था.

तीसरा दिन:
तीसरे दिन मैं पढ़ाई कर रही थी. तभी विक्रांत बोला कि कुछ समझ नहीं आ रहा हो तो पूछ लेना. फिर मैंने भी मौका देख कर बोल दिया कि भाई एक थ्यौरी समझा दो.

उस दिन उसने मेरी गोद से नोटबुक उठाये बिना ही मेरी गोद में रखे हुए मुझे थ्यौरी समझाने लगा. वो बीच बीच में मेरी जांघ और चूत पर भी टच करने की कोशिश कर रहा था. मुझे भी अच्छा लग रहा था लेकिन डर भी था कि कहीं मां न आ जाये.

उसने मुझे थ्यौरी बता दी और दूसरे रूम में चला गया. मैंने उसको फिर से बुलाया और कहा- एक सवाल और भी है.
इस बार सवाल समझाते हुए विक्रांत ने मेरे बूब्स को कई बार टच किया. जब उससे रुका न गया तो उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. मुझे अच्छा लगने लगा.

मेरा भाई मेरे बूब्स दबा कर मजा ले रहा था और मैं भी गर्म हो रही थी. मैंने भी उसको रोका नहीं और वो भी नहीं रुका. फिर कुछ देर के बाद मां के आने की आहट हुई और हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर नॉर्मल हो गये.

अब विक्रांत मेरे जाल में पूरी तरह से फंस चुका था.

उसी दिन फिर शाम को मां खेत में चली गयी. हम भाई-बहन घर में अकेले थे. मैं अपने और विक्रांत के लिए रसोई में मैगी बनाने चली गयी.

पीछे से आकर विक्रांत ने मुझे हग कर लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा. मुझे भी बहुत मजा आने लगा. मैंने भी पीछे मुड़कर विक्रांत के होंठों को चूम लिया.

और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ये मेरे भाई के साथ मेरा पहला किस था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. हम दोनों काफी देर तक किस करते रहे.

फिर वो मुझे उठा कर बेड पर ले गया. हमने बहुत देर तक किस किया. उसके बाद विक्रांत ने मेरी टीशर्ट को उतार दिया. मैं ब्रा में रह गयी. विक्रांत मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी एक एक चूची को दबाते हुए चाटने लगा. मेरी ब्रा गीली होने लगी.

विक्रांत जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मैं सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … विक्रांत कोई आ जायेगा. बस करो … आह्हह… ओहह … रुको.
मगर विक्रांत नहीं रुक रहा था.

फिर उसने मेरी जीन्स भी निकाल दी. अब मैं ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. उसके बाद उसने मेरे बूब्स को नंगा कर दिया और पीने लगा. मुझे मजा आने लगा. मैं उसके बालों को सहलाने लगी.

मेरे चूचे पीने के बाद उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी. मेरे भाई के सामने मेरी चूत नंगी हो गयी. मुझे अलग ही रोमांच मिल रहा था उसके सामने नंगी होकर. वो मेरी चूत को चाटने और चूसने लगा.

मैं तड़प उठी. सपना के बारे में सोचने लगी कि वो सच में बहुत मजा लेती होगी अपने भाई के साथ! क्योंकि विक्रांत के साथ मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

हम दोनों ने काफी देर तक मजे किये लेकिन चुदाई नहीं हो पाई क्योंकि मम्मी के आने का डर था.

घर में चुदाई का मौका नहीं मिल पा रहा था. इसलिए हम दोनों ने कॉलेज का बहाना करने का सोचा.

कॉलेज खुलने के बाद हम दोनों घर से कॉलेज के लिए काम कह कर निकले लेकिन हमें कहीं और ही जाना था.
हम सीधे एक होटल में पहुंचे. वहां पर हमने रूम बुक किया. वहां सुबह 10 बजे पहुंच गये थे हम.

जैसे ही हम रूम में पहुंचे तो मैं विक्रांत की गोद में कूद गयी. उसने भी मुझे लपक लिया. उसके हाथ मेरे चूतड़ों को भींच रहे थे. हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गये थे.

कुछ देर के बाद जब भाई से रुका न गया तो उसने मुझे बेड पर पटक लिया. मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा. उसने मेरे टॉप को निकाल कर मेरे बूब्स को मुंह में ले लिया.

मेरा हाथ अपने आप ही विक्रांत की पैंट में घुस गया था. मेरा हाथ उसके अंडरवियर को टटोल रहा था. मैं उसके लंड को देखना चाह रही थी. मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसका लंड बहुत मोटा और लकड़ी की तरह एकदम से सख्त हो गया था.

बहुत दिनों के बाद मुझे लंड का टच मिला था. कॉलेज के लड़कों के लंड से खेलने के बाद अब भाई का लंड पकड़ना बहुत मजा दे रहा था. विक्रांत मेरी चूचियों को मसल मसल कर पी रहा था. उसके बाद विक्रांत ने मुझे पूरी नंगी कर दिया. वो मुझे निहारने लगा. मैंने भी उसको अपनी जवानी के खूब दर्शन करवाये.

विक्रांत ने मेरी चूत को छेड़ा तो मैं सिहर गयी. मैंने उसके सिर को नीचे की ओर दबाने लगी. वो मेरा इशारा समझ गया और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मस्ती में खो गयी. पागल होने लगी.

न जाने इन लड़कों को चूत चाटने में क्या मजा आता है. विक्रांत पागलों की तरह मेरी चूत तो पी रहा था.
बड़ी मुश्किल से मैंने उसको रोक कर कहा- मेरी जान … अब मेरी चूत को अपने लंड का स्वाद चखा दे. मैं और इंतजार नहीं कर सकती हूं अब.

उसने हां करते हुए बैग से कॉन्डम निकाल कर मुझे दे दिया. मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी. पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मुझे एक दो पल लंड का स्वाद थोड़ा अजीब लगा मगर फिर मजा आने लगा.

विक्रांत भी मजे से अपना लंड चुसवाने लगा. उसे भी लग रहा होगा कि उसकी बहन कितनी बड़ी रंडी है. अपने भाई के लंड को खा जाना चाहती है. मगर मुझे लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था.

पांच मिनट में ही विक्रांत मेरे मुंह में ही झड़ गया. हम रुक गये. हम दोनों फिर से किस करने लगे. मैं उसके लंड को सहलाते हुए खड़ा करने की कोशिश करने लगी. वो भी मेरी चूचियों और चूत से खेलने लगा.

कुछ देर के बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. उसने अपने लंड को हाथ से सहलाते हुए कॉन्डम लगाया. फिर मेरी चूत पर लंड को रख कर एक झटका मारा. एक ही झटके में आधा लंड अंदर चला गया. एक बार चीख तो निकली लेकिन मजा भी गजब का मिल गया.

बहुत दिनों के बाद मेरी चूत में लंड फंसा था. मैं स्वर्ग में थी. फिर विक्रांत ने मेरी चूत में लंड को चलाना शुरू कर दिया. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलनी चालू हो गयीं- आह्ह… आईई … आहह … आऊऊ … ओह्ह … करके मैं भाई के लंड से चुदने लगी.

झटके लगाते हुए भाई ने पूरा लंड अंदर दे दिया था. उसके झटके अब हर पल तेज हो रहे थे. मैं अपनी चूचियों को दबाने लगी. अपने ही हाथ निप्पलों को मसलने लगी. विक्रांत ने देखा तो उसने मेरी चूचियों को कस कर भींच दिया और मेरी चूत ने उसके लंड को भींच लिया.

वो तेजी से मेरी चूत को पेलने लगा और मजे में मेरी आंखें बंद होने लगीं. मैं भाई के लंड से चुद कर सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. 15 मिनट तक विक्रांत ने मेरी चूत को इसी स्पीड से चोदा और फिर हम दोनों साथ में ही झड़ गये.

उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गये और वहां पर रोमान्स करते हुए हमने एक बार फिर से बाथरूम सेक्स किया और भाई बहन की चुदाई का मजा लिया. मैंने बाथरूम में एक बार फिर से विक्रांत के लंड का माल पीया. उसने मेरी चूत का रस चाटा. हम दोनों बहुत खुश हो गये थे एक दूसरे को पाकर.

फिर हम दोनों वहां से घर आ गये. उस दिन के बाद से मेरे भाई और मेरे बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया. हम दोनों सप्ताह में एक या दो बार होटल में जरूर जाते हैं और चुदाई करते हैं. यदि घर पर भी मौका मिलता है तो हम भाई बहन का सेक्स का अवसर नहीं छोड़ते हैं.

इस कहानी के माध्यम से मैंने आपको यही बताना चाहा है कि जिन्दगी का असली मजा सेक्स में ही है. चाहे वो ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदाई हो या फिर अपने ही सगे भाई के साथ चुदाई हो. चुदाई में ही असली मजा है.

उस दिन मैंने सपना को थैंक्स बोला. उसने ही मुझे ये रास्ता बताया था.
दोस्तो, मुझे लिखना थोड़ा कम आता है. मैं कोई लेखिका नहीं हूं लेकिन अपनी भाई बहन की चुदाई की कहानी बताने के लिए लिखना पड़ा. गलती हुई हो तो इग्नोर करें.

अगर आप में से भी कोई भाई बहन का सेक्स का सोच रहा है तो मुझे जरूर बतायें. मैं आपकी मदद करूंगी. इसमें कुछ गलत भी नहीं है क्योंकि ये दोनों की सहमति से ही होता है. वैसे भी सेक्स एक प्राकृतिक जरूरत है और ये पूरी होनी ही चाहिए.

अपनी बात खत्म करने से पहले मैं जाते जाते कुछ टिप्स दे देती हूं. ताकि आपको अपने भाई को पटाने में आसानी हो.

टिप 1- जब आप दिन में नहाने जाओ तो एक ऐसे समय पर जाओ जब आपके घर में आपके और आपके भाई के अलावा कोई न हो. आप बाथरूम में ब्रा और पैंटी लेकर मत जाओ और फिर अंदर जाकर उसे अपने भाई से बहाना करके मंगवाओ. जब वो देने आये तो दरवाजा हल्का खुला छोड़ दो और उसको अपने जिस्म के नजारे दिखाओ. इससे उसे एक ग्रीन सिग्नल मिलेगा और उसका लंड चूत के लिए तड़प उठेगा.

टिप 2- नहाने के बाद आप इस्तेमाल की गयी ब्रा और पैंटी को धोना नहीं. उसको बिना धोये हुए बाथरूम में इस तरह से रख दो कि अगर कोई छुए तो तुम्हें पता लग जाये कि उनको छेड़ा गया है.

मेरा तजुरबा है कि लड़के अक्सर लड़कियों की ब्रा और पैंटी से खेलते हैं. ऐसे ही आप 2-3 दिन करना. आपको पता लग जायेगा कि वो आपकी ब्रा और पैंटी से खेलता कब है. अगर वो ब्रा और पैंटी से खेले तो इसका मतलब है कि वो भी आपके साथ मजे करना चाहता है.

दोस्तो, मेरे पास भाई बहन का सेक्स के ऐसे बहुत सारे टिप्स हैं. आप मुझे अपने सुझाव भेजें और यदि इस काम में सहायता चाहिए तो मैं आपको गाइड करने के लिए तैयार हूं.

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मेरा लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर

मैं अपनी पड़ोसन को चोद चुका था और खूब चोदता था. अब मेरी नजर उसकी बड़ी बेटी पर थी लेकिन कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था. फिर कैसे मैंने पड़ोसन की बेटियों को चोदा?

अपनी पड़ोसन की चुदाई करते हुए मुझे दो साल हो चुके थे.

तभी एक दिन रेखा ने बताया कि दिशा का ग्रेजुएशन हो गया है और आगे की पढ़ाई के लिए बंगलौर के क्राइस्ट कॉलेज से कॉल आई है. लेकिन मीतेश इंटरव्यू के लिए दिशा को भेजने को राजी नहीं है. मीतेश का कहना है कि इंटरव्यू क्लीयर नहीं हो पाया तो बीस हजार रुपये बिना मतलब के खर्च हो जायेंगे.
मैंने कहा- क्राइस्ट कॉलेज में मेरा कुछ जुगाड़ है तुम अगर चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ.

मीतेश से बात करने के बाद रेखा ने बताया कि मीतेश कह रहा था, अगर कपूर साहब जा रहे हैं तो तुम साथ जाकर क्या करोगी.
अंततः मैं और दिशा बंगलौर गये, वहां उसने इंटरव्यू क्लीयर कर लिया. उस दिन शुक्रवार था, सोमवार को एडमिशन की प्रक्रिया होनी थी इसलिए हमें दो दिन वहीं रुकना था. इंटरव्यू क्लीयर होने की खबर सुनकर रेखा बहुत खुश हुई.

शनिवार और रविवार ये दो दिन हमें घूम फिर कर गुजारने थे. शनिवार को घूमने के दौरान मैं दिशा को चोदने का प्रोग्राम बनाता रहा. रात का खाना खाकर हम लोग होटल के कमरे में लौटे तो मैं पलंग पर पसर गया और दिशा सोफे पर फैल गई. अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप चेक करते हुए दिशा बोली- अंकल, आपके सहयोग से मेरा एडमिशन हो रहा है, आपका एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी.

“हम अहसान को याद रखने या भूलने पर यकीन नहीं करते, हाथ के हाथ हिसाब करते हैं. तुमको अगर अहसान उतारना हो तो अभी उतार लो, मौका भी है और दस्तूर भी.”
“मैं आपका अहसान कैसे उतार सकती हूँ? आप आदेश करें?”
“कैसे उतारना है? पूरी रात पड़ी है, जैसे चाहो उतार लो.” इतना कहते हुए मैंने एक कुटिल मुस्कान दी.

मेरी कुटिल मुस्कान के जवाब में दिशा मुस्कुराते हुए बोली:
पापा, अगर आपको इसमें खुशी मिले तो मैं हाजिर हूँ. मेरे मुंह से पापा सुनकर आप हैरान न हों. पिछले दो साल से मैं और रिशा आपको पापा कहकर ही सम्बोधित करते हैं. हुआ यूं था कि एक दिन मम्मी के मोबाइल में मैंने आपके मैसेज देख लिये थे और मम्मी पर नजर रखे हुए थी. तभी एक रात मम्मी और आपकी बातचीत सुनी. आपने सुबह 11 बजे आने को कहा था.

अगले दिन डैडी दुकान चले गए और रिशा अपने स्कूल. इसके बाद सुबह 10 बजे मम्मी किचन में व्यस्त थी, मम्मी को बॉय कहकर मैं कॉलेज के लिए निकली. वास्तविकता यह थी कि मैं कॉलेज नहीं गई और दबे पांव ऊपर अपने कमरे में चली गई.

किचन का काम निपटा कर मम्मी नहाने चली गई. तभी आप आ गये, मम्मी तौलिया लपेटकर बाथरूम से निकली और दरवाजा खोला. आपने मम्मी को वहीं लॉबी में ही पकड़ लिया और चूमने लगे. मैं छिपकर सब देख रही थी. आप मम्मी को लेकर बेडरूम में चले गए. काफी देर बाद आप बेडरूम से निकले और बाथरूम में गये. उस समय आपके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.

यह सब देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. खुशी इसलिये हुई क्योंकि बीस साल मैं अपनी मां को तिल तिल मरते हुए देख रही थी, डैडी मम्मी की बिल्कुल केयर नहीं करते थे. मुझे खुशी थी कि मम्मी ने अपनी खुशी आपमें ढूंढ़ ली थी.

मैंने और रिशा ने मम्मी से बात की और उसके इस फैसले के साथ खड़े होते हुए आपको पापा मान लिया.

दिशा की बातें सुनकर मैं सन्न रह गया और उसे चोदने का विचार अपने दिमाग से निकाल दिया. तभी दिशा बेड पर आ गई और मुझसे चिपक कर बोली- पापा, मेरा एडमिशन कराने में सहयोग करके आपने जो अहसान किया है, उससे बहुत बड़ा अहसान आप मेरी मां को खुशी देकर कर चुके हैं. आपकी बांहों में रात गुजार कर मैं आप पर कोई उपकार नहीं करूंगी बल्कि आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी.

इतना कहकर दिशा ने अटैची से अपने कपड़े निकाले और बाथरूम चली गई. कुछ देर बाद दिशा बाथरूम से निकली. छोटी सी नेकर और टॉप पहने दिशा को देखकर मेरा दिमाग झन्ना गया.

करीब 21 साल की दिशा प्रीति जिंटा की कॉपी लग रही थी. नेकर से बाहर निकली उसकी जांघें मेरा लण्ड टनटना रही थीं. मैं यह याद भी नहीं करना चाहता था कि मेरी उम्र 62 साल है और दिशा की सिर्फ 21 साल.

मैं भी बाथरूम गया और शॉवर लेकर सिर्फ लोअर पहनकर आ गया.

दिशा अपने मोबाइल में मशगूल थी. दिशा के बगल में बैठ कर मैंने उसकी जांघों पर उंगलियां फेरीं तो दिशा ने मोबाइल रख दिया और ‘आई लव यू पापा’ कहकर मेरे सीने से लग गई.

मैंने दिशा का टॉप उतार दिया और संतरे के आकार की उसकी चूचियों से खेलने लगा. दिशा की चूची मुंह में लेकर मैं धीरे धीरे चूसने लगा. दिशा की नेकर का हूक खोलकर मैंने उसकी नेकर घुटनों तक खिसका दी और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

दिशा के होंठों पर होंठ रखकर मैंने दिशा को अपनी ओर खींचा तो अपनी नेकर को टांगों से अलग करते हुए दिशा मुझसे लिपट गई और मेरे बदन पर हाथ फेरने लगी. दिशा का हाथ मैंने अपने लण्ड पर रखा तो मेरा लण्ड अपनी मुठ्ठी में दबोच कर दिशा बोली- आई लव यू, पापा. मुझमें समा जाओ, पापा.

मैंने अपना लोअर उतार दिया और 69 की पोजीशन में आकर दिशा की चूत चाटने लगा. दिशा मेरे लण्ड का सुपारा चाटते हुए सॉफ्टी के मजे ले रही थी.

तभी मैंने दिशा को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर रख दिया. दिशा ने मेरे लण्ड का सुपारा सेट किया और उस पर बैठ गई. दिशा की कमर पकड़ कर मैंने उसे नीचे की ओर दबाया तो टप्प की आवाज हुई और मेरे लण्ड के सुपारे ने दिशा की चूत में जगह बना ली. दिशा ने और दबाव डाला तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया.

अपना लण्ड दिशा की चूत में बनाये रखते हुए हम पलट गये.
अब दिशा नीचे थी और मैं ऊपर. अपना लण्ड दिशा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने जोर से धक्का मारा तो दिशा की चूत की झिल्ली फट गई. चूत की झिल्ली फाड़ते हुए मेरा लण्ड दिशा की चूत की गहराई में उतर गया.

लण्ड को दिशा की चूत में फंसा कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. चूचियां चूसने से मेरे लण्ड में जोश बढ़ने लगा, मैंने चुदाई की तो दिशा की चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत गीली होने से मुझे आराम हो गया.

जब लण्ड को अन्दर बाहर करते काफी समय हो गया तो मैंने दिशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. चोदते चोदते दिशा की चूत का भुर्ता बन गया था लेकिन मेरा लण्ड पानी छोड़ने को तैयार नहीं था. दिशा की चूचियों को बेरहमी से मसलते हुए मैंने लाल कर दिया था. मेरे लण्ड का सुपारा फूलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है. पिचकारी छूटने पर मैं दिशा से लिपट गया.

उस रात मैंने दिशा को दो बार चोदा. अगले दिन रविवार था. शिलाजीत के कैप्सूल और वियाग्रा की गोली खाकर दिशा की जमकर चुदाई की. सोमवार को दिशा का एडमिशन करा कर उसको हॉस्टल में शिफ्ट करके मैं वापस लौट आया.

बंगलौर से वापस लौटकर अगले दिन मैं रेखा के घर गया तो रेखा ने बाहें फैला कर मेरा स्वागत किया.

दिशा की चुदाई का आनन्द लेने के बाद भी रेखा को चोदने का अलग ही मजा था. 100 किलो से भी अधिक वजन वाली भारी भरकम शरीर की मल्लिका रेखा जब नंगी होती तो हाथी का बच्चा लगती.

कई दिन बाद चुदने के कारण रेखा ने उछल उछल कर चुदवाया. रेखा को चोदने के बाद मेरे कहने पर रेखा चाय बना लाई. चाय की चुस्कियां लेते हुए रेखा ने बताया कि परसों रिशा का जन्मदिन है, वो 19 साल की हो जायेगी.

“तो चलो परसों गोल्डेन एप्पल में पार्टी करते हैं.”
“नहीं, घर पर ही केक काटेंगे.”

मेरे काफी जिद करने पर भी रेखा होटल में पार्टी करने पर राजी नहीं हुई. मेरे बहुत बार कहने पर रेखा इस बात पर राजी हुई कि आप रिशा को घुमाने ले जाना.

रिशा के जन्मदिन पर मैं और रिशा मॉल गये, घूमे फिरे, खाया पिया. मैंने रिशा को एक प्यारी सी ड्रेस भी खरीद दी. मॉल से लौटते समय मैंने रिशा से पूछा- कल तो तुम्हारा कॉलेज होगा?
रिशा के हाँ कहने पर मैंने उससे कहा- तुम्हारी आज की पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को है लेकिन डैडी को नहीं है. अब कल मेरी तरफ से फिर तुम्हारी पार्टी है और कल होने वाली पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को भी नहीं होनी चाहिये. यह एकदम सीक्रेट पार्टी होगी, बस हमारी और तुम्हारी. कल जब तुम कॉलेज के लिए निकलोगी तो मैं तुम्हें पिक कर लूंगा.

अगले दिन सुबह 9 बजे रिशा का फोन आया कि मैं घर से निकल चुकी हूँ.
मैंने जवाब दिया कि मैं लिबर्टी शोरूम के पास तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ.

कुछ ही देर में रिशा आई और मेरी कार में बैठ गई. मैंने कार ताज होटल की तरफ मोड़ दी जहां एक कमरा मैंने बुक करा रखा था.

होटल के कमरे में पहुंच कर मैंने केक ऑर्डर किया. करीब आधा घंटा तक इधर उधर की बातें करने में बीत गया, फिर केक आ गया.

रिशा का हाथ पकड़ कर मैंने केक कटवाया. मैंने रिशा को केक खिलाया और उसने मुझे. केक से क्रीम लेकर मैंने रिशा के गालों पर लगा दी. रिशा ने मिरर में खुद को देखा और हंस पड़ी. अपना मुंह साफ करने के लिए रिशा ने टॉवल उठाया तो मैंने उसे रोकते हुए कहा- बहुत महंगा केक है, इसे टॉवल से पोंछ कर बरबाद न करो, लाओ मैं चाट लेता हूँ.

रिशा को आगोश में लेकर मैं उसके गालों और गले पर लगा केक चाटने लगा. रिशा के गाल और गला साफ हो गये तो मैंने फिर से केक लगा दिया और चाटने लगा. जब रिशा के गले पर मैं अपनी जीभ फेरता तो वो गनगना जाती.

मैंने रिशा से कहा- मैंने तुम्हें कई बार गिफ्ट दिये हैं लेकिन तुमने कभी रिटर्न गिफ्ट नहीं दिया?
“मेरे पास ऐसा कुछ होता ही नहीं था कि मैं आपको दे सकूं!”
“अब तो है और तुम चाहो तो दे सकती हो.”
“मेरे पास ऐसा क्या है, जो मैं आपको गिफ्ट कर सकूं?”

तुम 19 साल की हो गई हो, बालिग हो. बालिग होने पर इस देश का कानून तुम्हें तमाम अधिकार देता है. एक अधिकार तुम्हारे पास है, अपना शरीर उस व्यक्ति को सौंपने का जिसे तुम प्यार करती हो. अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो आज मुझे रोकना मत. मैं यह सारा केक तुम्हारे बदन पर मल कर चाटना चाहता हूँ, तुम अपना टॉप उतार दो तो मैं यह केक तुम्हारी चूचियों पर मल कर चाट लूँ.”

मेरी बात सुनकर रिशा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया तो मैंने रिशा का टॉप और ब्रा उतार दी. 19 साल की दुबली पतली रिशा की चूचियां आलिया भट्ट की चूचियों जैसी थीं. छोटे छोटे संतरे जैसी चूचियों पर केक लगाकर मैंने चाटा तो रिशा के निप्पल टाइट हो गये.

दो तीन बार रिशा की चूचियों पर केक लगाकर चाटने के बाद मैंने रिशा की मिडी और पैन्टी उतारकर उसे नंगा कर दिया और उसकी नाभि से लेकर जांघों तक केक मल दिया. जांघों से चाटते चाटते मैं रिशा की चूत तक आ गया, फिर रिशा की नाभि से लेकर चूत तक आ गया. रिशा की चूत अब भी केक से ढकी हुई थी. रिशा की टांगें फैला कर मैं उसकी चूत चाटने लगा. चूत पर लगा केक जब साफ हो गया तो रिशा की चमकती चूत दिखने लगी.

अब मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये. अपने लण्ड को सहला कर लण्ड की खाल को आगे पीछे किया और उस पर केक मल दिया.

पना लण्ड रिशा के चेहरे के करीब ले जाकर मैंने रिशा से कहा- अब केक खाने की तुम्हारी बारी है.
रिशा मेरे लण्ड पर लगा केक चाटने लगी तो मैंने रिशा की चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

कच्ची कली को मसलने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हो चुका था. रिशा की चूत में ऊंगली चलाकर मैंने उसे भी चुदवाने के लिए तैयार कर दिया.

अपने बैग से कोल्ड क्रीम की शीशी और कॉण्डोम का पैकेट निकाल कर मैं बेड पर आ गया. अपना लण्ड रिशा के हाथ में देते हुए मैंने कहा- रिशा, ये तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट है, इसे अपने जिस्म में जाने दो. जब पहली बार यह तुम्हारे जिस्म में जायेगा तो हल्का सा दर्द होगा लेकिन बाद में बहुत आनन्द देगा, तुम्हें जन्नत का मजा देगा.

इसके बाद मैंने अपने लण्ड पर क्रीम लगाकर रिशा से लण्ड की मसाज करने को कहा और मैं उसकी चूत की मसाज करने लगा. जब मुझे लगा कि रिशा की चूत लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है तो अपने लण्ड के सुपारे पर क्रीम लगाकर मैंने रिशा की चूत के लब खोले.

रिशा की छोटी सी गुलाबी रंग की चूत देख कर मेरा लण्ड सलामी देने लगा. अपने लण्ड का सुपारा रिशा की चूत पर रखकर मैंने रिशा की नाजुक कमर पकड़ी और लण्ड को अन्दर धकेला.

रिशा की चूत काफी गीली हो चुकी थी और लण्ड पर क्रीम लगी हुई थी इसलिये पहले झटके में सुपारा और दूसरे झटके में आधे से ज्यादा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.
मैंने रिशा की जांघों और चूत के आसपास हाथ फेरते हुए धक्का मारा तो मेरा पूरा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.

चूत की झिल्ली फटने से जो दर्द हुआ रिशा बर्दाश्त कर गई. रिशा में गजब की हिम्मत थी. 50 किलो वजन की दुबली पतली रिशा 120 किलो वजन वाले भारी भरकम अंकल का लण्ड झेल गई थी और अंकल को अपने ऊपर लिटा कर चूम रही थी.

रिशा के ऊपर लेट कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. मेरा लण्ड रिशा की चूत में सेट हो चुका था और मैं चाहता था कि ताउम्र ऐसे ही पड़ा रहूँ. लेकिन ‘लण्ड है कि मानता नहीं’ कुछ ही देर में लण्ड ने अन्दर बाहर होना शुरू कर दिया.
पहली बार चूत में लण्ड जाने का दर्द अब रिशा के चेहरे से गायब हो चुका था.
रिशा के होंठों पर उंगली फेरते हुए मैंने पूछा- कैसा लग रहा है?

“जब से दीदी ने आपके और मम्मी के रिश्ते के बारे में बताया था, मैं यह नहीं समझ पा रही थी कि आपके सामने टांगें फैलाने में मम्मी को क्या मिलता है, मम्मी ऐसा क्यों करती है? आज मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया है. प्रकृति ने आदमी और औरत का शरीर इस तरह से बनाया है कि दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी करते हैं. इसमें जाति, धर्म, उम्र, रिश्ते जैसा कोई बन्धन नहीं होता. एक औरत जब बेड पर होती है तो उसके सामने सिर्फ एक मर्द होता है.”

“तुम बातें बहुत अच्छी कर लेती हो.” इतना कहकर मैंने अपने लण्ड की रफ्तार बढा़ई.

जब मुझे लगा कि मेरे डिस्चार्ज का समय करीब है तो मैंने अपना लण्ड रिशा की चूत से निकाला, लण्ड को टॉवल से साफ किया और उस पर कॉण्डोम चढ़ा दिया. अपने लण्ड पर कॉण्डोम चढ़ा कर मैं फिर से रिशा की चूत में घुस गया.

डॉटेड कॉण्डोम की रगड़ से रिशा सिसकारी भरने लगी. रिशा की सिसकारियां मेरे लण्ड में जोश भर रही थीं. अपने लण्ड की रफ्तार पर नियंत्रण रखते हुए मैंने चुदाई जारी रखी. मेरा लण्ड अकड़कर मूसल जैसा होने लगा और बहुत फंस कर अन्दर बाहर हो रहा था.

तभी मेरे लण्ड से फव्वारा फूटा. मैं निढाल होकर रिशा पर लुढ़क गया.

कुछ देर बाद हम अलग हुए और रिशा बाथरूम चली गई. रिशा बाथरूम से लौटी तो टांगें फैला कर चल रही थी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि हल्का सा दर्द है. मैंने रिशा को लिटा दिया और कोल्ड क्रीम से रिशा की जांघों और चूत की मसाज की. इसके बाद हमने कमरे में ही खाना मंगा लिया. कॉलेज से छुट्टी के समय तक रिशा घर पहुंच गई.

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मेरी गांड चुदाई

मेरे पति चूत चुदाई से ज्यादा मेरी गांड चुदाई करते हैं. मुझे पता लगा कि वो कई औरतों की गांड चोदते हैं. तो हमारा झगड़ा हो गया. फिर जब मेरी चूत में वासना की आग लगी तो …

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा हार्दिक अभिनन्दन. मैं एक स्कूल टीचर हूँ और अन्तर्वासना की बहुत बड़ी प्रशंसक हूँ और कई वर्षों से अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ रही हूँ. मेरी ये पहली कहानी है और मैं आप लोगों के साथ अपना सच्चा अनुभव साझा कर रही हूँ जिसमें मैंने अपने साथ पढ़ाने वाले एक टीचर से सेक्स किया.

मेरा नाम ममता है और मैं एक 37 वर्षीय शादीशुदा महिला हूँ. मैं गुरुग्राम में टीचर के तौर पर कार्य करती हूं. मेरी लम्बाई 5 फीट 5 इंच है और शरीर भरा हुआ है. मेरी फीगर 36-34-40 की है. मेरी गांड बहुत भारी है क्योंकि मेरे पति ने मेरी चूत से ज्यादा मेरी गांड बजाई है.

मेरे पति को गांड मारने का इतना शौक है कि उसने अपने ऑफिस की कई महिलाओं की गांड चुदाई कर रखी है. ये बात मुझे तब पता लगी जब एक दिन हमारा बहुत बुरा झगड़ा हो गया था. उसके बाद हमारे रिश्ते में बहुत ज्यादा खराबी आ गयी.

अब मैं काफी परेशान रहने लगी थी. अपनी ड्यूटी के दौरान भी उदास ही रहती थी. अपने काम को भी मैं ठीक से नहीं कर पा रही थी. अभी दो महीने पहले ही हमारे स्कूल में एक नया अध्यापक ट्रांसफर होकर आया था.

उसका नाम है मनोहर। वो स्कूल में अर्थशास्त्र के टीचर हैं. उनकी उम्र 29 साल और हाइट 5.5 फीट है मगर शरीर एकदम सुडौल और बनावट एकदम कसरती है. वो जितना आकर्षक दिखते हैं उतना ही सुन्दर पढ़ाते भी हैं.

धीरे धीरे मेरी उनसे ऑफिशियल कामों को लेकर बात होने लगी. कुछ ही समय के अंदर हम दोनों में दोस्ती हो गयी और धीरे धीरे हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गये. उसका एक कारण यह भी था कि वो अपने परिवार से दूर यहां पर अकेले रहते थे.

एक बार उन्होंने शाम में मुझे मिलने के लिए पूछा. मैंने अपने हस्बैंड का बहाना लेकर मिलने से मना कर दिया. अगले दिन फिर उन्होंने बातों ही बातों में कह दिया कि ममता तुम मुझे बहुत सुन्दर लगती हो. मैं आपको सिर्फ अपनी एक अच्छी दोस्त के नाते ही कॉफी पर बुला रहा था.

अपनी मजूबरी पर मेरा गला भर आया और आंखों में आंसू लिये मैं बोली- मनोहर, मेरे पति मुझ पर बहुत शक करते हैं. हमारे बीच के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे हैं, न तो शारीरिक तौर पर और न ही पारिवारिक तौर पर. हम पति पत्नी के झगड़े का असर अब हमारे बच्चों पर भी पड़ने लगा है.

उन्होंने बड़े अपनेपन से मुझसे पूरी बात पूछी तो मैंने अपनी पति के नाजायज़ संबंधों और मेरे साथ उनके द्वारा की जाने वाली मेरी मार-पिटाई के बारे में बताया. मनोहर ने मुझे सांत्वना देते हुए कहा कि अगर मैं इस अत्याचार के खिलाफ कुछ कदम उठाना चाहती हूँ तो वो मेरा साथ देने के लिए तैयार हैं.

उसके हिम्मत देने के बाद मार्च के महीने में एग्जाम के टाइम मैंने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा दिया जिसके बदले में मेरे पति मनीष ने मुझे घर से निकाल दिया. उस दिन मैं बहुत रो रही थी. पूरे स्कूल के स्टाफ में मेरे ही बारे में चर्चा हो रही थी.

मनोहर ने मुझे स्कूल टाइम के बाद अपने साथ में चलने के लिए कहा. मेरे मना करने के बाद भी वो जोर देकर मुझे अपने घर ले गया. मैं सोच रही थी कि शायद ये मेरी मजबूरी का फायदा उठाने की सोच रहा है. मगर मुझे उसकी इन्सानियत का पता तब लगा जब उसने मुझे अपने हाथ से खाना बना कर खिलाया.

उसके घर में एक ही बेड था. उसने मुझे बेड पर सोने के लिए कहा और खुद ज़मीन पर सो गया. उस दिन मुझे अपने पति मनीष और मनोहर के व्यक्तित्व का अंतर मालूम चला. मैंने पाया कि मनोहर एक अच्छा दोस्त ही नहीं बल्कि एक अच्छा इन्सान भी है.

ऐसे ही एक सप्ताह गुजर गया. मेरे पति मनीष ने इस एक हफ्ते के दौरान न तो मुझे कभी फोन किया और न ही मेरे स्कूल में आकर मुझसे मिलने की ही कोशिश की. अब कुछ दिन मैंने और इंतजार किया. फिर मुझे अपने बच्चों की फिक्र होने लगी.

मनोहर मुझे मेरे बच्चों से मिलवाने के लिए उनके स्कूल में ही ले गया. वहां मेरे बच्चों ने मुझे बताया कि पापा आपके नहीं होने के बाद से एक दूसरी आंटी को घर में बुला रहे हैं. वो आंटी पापा के साथ ही सोती है.

बच्चों के मुंह से ये बातें सुन कर मेरा दिमाग खराब हो गया. मैंने उसी क्षण निर्णय ले लिया कि अब मैं भी किसी की परवाह नहीं करूंगी. मनोहर और मैं उसके बाद घर आ गये.

उस शाम को मैंने मनोहर से कहा कि आज का खाना मैं बना दूंगी.
मनोहर मान गया. हमने खाना बनाया और दोनों ने साथ में खाया और फिर बैठ कर बातें करने लगे. फिर वो बर्तन उठा कर धोने के लिए चला गया.

जब वो बर्तन धोकर वापस आ गया तो मैंने पूछा- तुम शादी क्यों नहीं कर लेते मनोहर?
वो हंसते हुए बोला- अगर मैं शादी करूंगा तो मेरा हाल भी तुम्हारे जैसा ही हो जायेगा. जिस तरह से पति के होते हुए भी फिलहाल मैं तुम्हें संभाल रहा हूं वैसे ही शादी के बाद कोई दूसरी औरत फिर मुझे भी ऐसे ही संभाल रही होती.

उसकी इस बात पर हम दोनों हँस दिये. कुछ देर बैठ कर बातें करने के दौरान दोनों में हँसी मजाक काफी हुआ. फिर हम सोने की तैयारी करने लगे.
मैंने मनोहर से कहा- आओ, तुम भी बेड पर ही सो जाओ.

मनोहर ने मेरे पास सोने से मना कर दिया. वो कहने लगा कि औरत और मर्द के बीच में थोड़ी सी दूरी ही रहे तो अच्छा होता है.
मैंने कहा- अब तो दूरियां खत्म हो जानी चाहिएं. जो भी होगा वह हम दोनों की इच्छा से ही होगा. मैं तुम्हें जबरदस्ती अपने साथ सोने के लिए नहीं कह रही हूं. मगर चूंकि मैं एक औरत हूं और मेरी वजह से तुम्हें जमीन पर सोना पड़े, ये मुझे अच्छा नहीं लगता.

मेरे कहने पर मनोहर मान गया. उस दिन के बाद से मनोहर और मैं साथ में एक ही बेड पर सोने लगे. मगर पहल दोनों में से किसी की ओर से नहीं हो रही थी. कुछ दिन ऐसे ही बीत गये.

एक दिन मुझे लेटे लेटे नींद नहीं आ रही थी. मैं करवट बदल कर लेटी तो देखा कि मनोहर का लंड तना हुआ था. उसकी लोअर को उसके लंड ने ऊपर उठा रखा था. फिर उसने भी करवट बदल ली.

मेरे अंदर बेचैनी सी हो गयी थी. मैं मनोहर को काफी दिन पहले से ही पसंद करती थी. कुछ पल के बाद उसने फिर से करवट ली और उसका लंड वैसा का वैसा तना हुआ था. बार बार उसकी लोअर को ऊपर उछाल रहा था.

मनोहर को बार बार करवटें बदलता हुआ देख कर मैं बोली- क्या हुआ मनोहर?
उसने मेरी ओर देखा और फिर अपने तने हुए लंड की ओर देखा तो उसकी आंखें शर्म से नीचे हो गयीं.
आगे से पहल करते हुए मैंने पूछा- तुम्हें मेरे साथ लेट कर मेरे लिए कुछ फील हो रहा है क्या?

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. बस लेटा रहा.
मैं बोली- देखो मनोहर, मैं एक साइंस टीचर हूं. मैं अच्छी तरह जानती हूं कि जब मर्द और औरत के जिस्मों के बीच में इतना कम फासला हो तो इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक है.

मनोहर बोला- ममता, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. आपको देखकर मुझे अपनी माशूका की याद आ गयी.
मैंने कहा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी थी? तुमने कभी बताया भी नहीं मुझे.

वो बोला- कभी इस विषय पर बात करने का माहौल ही नहीं बना.
मैंने कहा- अब तो माहौल भी है. अब तो बता दो अपनी प्रेम कहानी?
फिर मनोहर ने अपनी सारी स्टोरी मुझे बताई कि कैसे उसको एक लड़की से प्यार था, जिसका नाम भूमि था और दो साल पहले उनका ब्रेक अप हो गया. उसके बाद से उसकी जिन्दगी में कोई लड़की नहीं आई और उसने किसी दूसरी लड़की को अपने करीब आने भी नहीं दिया.

मैं उसके साफ दिल प्यार से बहुत प्रभावित हुई और मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया.
मैं बोली- कोई बात नहीं, जो हुआ उसको याद करके अब कोई फायदा नहीं है. मैं ही तुम्हारे लिये तुम्हारी भूमि बन जाती हूं.

उसके बाद हम दोनों अलग हो गये और सोने लगे. अगली सुबह हम उठे और तैयार होकर स्कूल जाने लगे. फिर दिन भर स्कूल में काम रहा.
छुट्टी के समय उसके निकलने से पहले मैंने उसको कहा- घर आते हुए एक मेडिकल स्टोर से कॉन्डम का एक पैकेट ले आना.

वो मेरी ओर देख कर मुस्कराने लगा. उसके बाद मैं आ गयी और कुछ देर के बाद मनोहर भी आ गया. हम दोनों ने खाना खाया और फिर बिस्तर पर लेट कर बातें करने लगे.

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तो भूमि के साथ तुम क्या क्या करते थे?
वो बोला- क्या मतलब?
मैंने कहा- ज्यादा बनो मत. तुम जानते हो कि मैं सेक्स के बारे में पूछ रही हूं.

वो बोला- पहले तो भूमि अपने चूचे पिलाती थी और फिर चूत भी चुसवाती थी. उसके बाद वो मेरा हथियार अपनी चूत में लगा कर अंदर ले लेती और चुदवाती थी. आगे से चुदवाने के बाद फिर पीछे भी लेती थी. तब जाकर उसको और मुझे शांति मिलती थी.

मन ही मन मैं खुश हो गयी कि चोदू किस्म का जवान लौंडा फंस गया है. इसके साथ तो मैं भी फिर से जवान हो जाऊंगी. मैंने देखा कि उसका लंड उसकी लोअर में फनफना रहा था.

मैंने मनोहर के सीने पर अपने कोमल हाथ से फिराते हुए कहा- तुम्हें मेरी चूचियां कैसी लगती हैं?
वो बोला- मैं तो पहले दिन से ही आपको पसंद करता हूं लेकिन फिर पता चला कि आप शादीशुदा हैं इसलिए कभी कुछ कहा नहीं.

उसकी छाती के निप्पलों को छेड़ते हुए मैंने कहा- अब तो मेरे पति भी मुझसे कोसों दूर जा चुके हैं, अब किसलिए इतनी दूरी बना रखी है.
उसने मेरी चूचियों को छेड़ कर कहा- दूरी कहां है, पास में ही तो हूं.

इतना बोल कर हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और दोनों के होंठ मिल गये. दोनों एक दूसरे के होंठों के रस को एक दूसरे के मुंह से खींचने लगे. उसका लंड मेरी जांघों में चुभ रहा था. उसने मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए अपनी टांग मुझे पर चढ़ा ली थी. मैं भी उसके जिस्म से लिपटने लगी थी.

जल्दी ही दोनों गर्म हो गये और उठ कर मैंने अपनी मैक्सी और ब्रा को नीचे कर लिया. मनोहर के सामने मेरी चूची नंगी हो गयी. मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी नंगी चूचियों पर रखवा दिया और उसने मेरी दोनों चूचियों को दबा कर देखा. उसको मेरी चूची काफी मस्त लगीं और वो उनको मुंह लगा कर पीने लगा.

मनोहर को मैं भी पसंद करती थी इसलिए जब उसके होंठ मेरी चूचियों को चूस रहे थे तो मुझे भी उस पर बेपनाह प्यार आ रहा था. मैं मदहोश होकर उसके बालों में हाथ फिरा रही थी. उससे चूचियां चुसवाते हुए ऐसा लगने लगा था कि मेरी जवानी फिर से जवान हो रही है.

फिर मनोहर ने अपने सारे कपड़े निकाल दिये और मेरे बदन से लिपटने लगा. उसके बदन पर केवल एक अंडरवियर था और मेरे बदन पर मेरी चूत पर पहनी हुई मेरी पैंटी. मनोहर मेरी पैंटी को ऊपर से ही मसलने लगा था. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. मैं भी उसके लौड़े को ऊपर से ही सहला रही थी.

फिर उसने मुझे प्यार से नीचे लिटा लिया और हल्के हल्के चुम्बन देने लगा. पहले मेरे गालों पर, फिर गर्दन पर, फिर चूचियों पर, फिर पेट से होता हुआ नाभि पर और फिर मेरी पैंटी की इलास्टिक तक पहुंच गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने काफी समय से अपनी सेक्स की भूख को दबा कर रखा हुआ था.

फिर उसने मेरी पैंटी को किस करना शुरू कर दिया. मैं मस्त होने लगी. शायद मनोहर मेरी चूत को चाटना चाह रहा था. उसने मेरी पैंटी को खींच कर निकाल दिया. जैसे ही उसने पैंटी उतारी तो मेरी चूत नहीं दिखी बल्कि पैंटी के नीचे बालों का एक घोंसला उसको दिखा.

वो थोड़ा निराश हो गया.
वो बोला- बाल बहुत ज्यादा बढ़ गये हैं आपकी चूत पर. इसकी सफाई करनी पड़ेगी.
उसके बाद उठ कर वो अपना ट्रिमर ले आया और मेरी चूत की सफाई करने लगा.

दो मिनट में ही उसने मेरी चूत को साफ कर दिया.
मैं बोली- ये मेरी चूत के पहरेदार सैनिक थे. अब मेरी चूत सुरक्षित नहीं रही. इस पर हमला हो सकता है.
उसने कहा- अब सैनिक मारे गये हैं. अब इस रानी को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.

उसने मेरी चूत को धोया और फिर कपड़े से पौंछ कर मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को जोर जोर से जीभ देकर चाटने लगा.

मैं दो मिनट में ही पगला गयी. मेरी चूत तपने लगी. मनोहर अभी भी मेरी चूत को तेज तेज जीभ चलाते हुए चूस-चाट रहा था.

फिर उसने मेरी चूत में उंगली दे दी और मेरी चूत में उंगली करने लगा. वो तेजी से उंगली चलाने लगा. उसके बाद फिर से मेरी चूत में जीभ देकर चोदने लगा.

अब मुझसे भी बर्दाश्त न हुआ और मैं भी उठ कर उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी और उसके होंठों को चूसने लगी. मैंने उसे लिटा लिया और उसकी टांगों की ओर मुंह करके लेट गयी. मेरी चूत उसके मुंह पर जा लगी और मैंने उसके लंड को मुंह में भर लिया.

दोनों 69 की पोजीशन में हो गये और एक दूसरे को चूसने और चाटने लगे. उसका लंड चूसते हुए अब चूत चुसवाने में और ज्यादा मजा आने लगा मुझे. मनोहर भी पूरा मदहोश हो रहा था.
दस मिनट में उसने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया और मैं झड़ गयी. मेरा सारा शरीर ढीला पड़ गया.

मनोहर ने मुझे उठाया और कहा- बाथरूम में जाकर चूत को साफ कर लो.
जब मैं अपनी चूत को धोकर वापस आई तो मनोहर अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ा कर बैठा हुआ था.

मैं आकर बेड पर लेट गयी.
मनोहर ने मेरी टांगें फैला दीं और उनके बीच में बैठ गया. वो मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

मनोहर का लंड 6 इंच लम्बा और करीब करीब ढाई इंच मोटा था. मनोहर मेरे कंधों के पास हाथ रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मैं अपने हाथ में उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी और मनोहर मेरे होंठों को चूम रहा था.

अब मैंने मनोहर का लंड अपनी चूत में डाल लिया और एक झटके में ही सारा लंड अंदर चला गया और मनोहर जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा. दो मिनट बाद हमने पोजीशन बदल ली और अब मैं मनोहर के ऊपर बैठ कर लंड की सवारी कर रही थी.

मनोहर अपने हाथों में भर कर मेरे बड़े बड़े चूचे दबा रहा था और बीच बीच में मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. एक जवान मर्द से चुदाई करवा कर मुझे बहुत मजा आ रहा था. अपने पति के साथ मुझे सेक्स में इतना मजा कभी नहीं आया.

पांच मिनट के बाद हमने फिर से पोजीशन बदल ली. इस बार मनोहर ने मुझे उठाया और हम दोनों एक दूसरे की ओर मुंह करके बेड से नीचे जमीन पर खड़े हो गये. मनोहर ने मुझसे एक पैर बेड पर रखने के लिए कहा जिससे कि वो मेरी चूत में लंड डाल सके.

मैंने ऐसा ही किया और मनोहर ने मेरी चूत में फिर से अपना लंड पेल दिया. वो मुझे खड़ी खड़ी चोदने लगा.

मैंने भी उसकी पीठ को नोंचना खरोंचना शुरू कर दिया. मेरी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपकी हुई थीं और वो मेरी गांड को भींच भींच कर मेरी चूत में लंड को अंदर तक ठोक रहा था. हर ठोक के साथ मेरे मुंह से आह्ह-आहह् की आवाजें आ रही थी. लंड की ठुकाई से होने वाले उस दर्द में बहुत मजा मिला रहा था मुझे.

चार-पांच मिनट के बाद मनोहर ने मुझे कुतिया बनने को कहा और पीछे से मेरी चूत में लंड पेलने लगा. पांच सात मिनट तक मेरी चूत में जबरदस्त तरीके से झटके लगते रहे. उसके बाद एक बार फिर से मेरा पानी निकल गया. मगर मनोहर का लंड अभी भी वैसे ही खड़ा हुआ था.

मनोहर ने मुझसे कहा- ममता यार, किसी तरह तुम भी मेरा पानी निकालो.
मैं बोली- हाथ से हिला कर निकाल देती हूं.
वो बोला- नहीं, मैं तुम्हारी गांड में निकालना चाहता हूं. अपनी गांड चोदने दो मुझे.

मैं गांड चुदवाने के लिए तैयार हो गयी. मैं फिर से कुतिया बन गयी. मनोहर ने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और मैंने अपने हाथों से दोनों चूतड़ फैला दिये. फिर मनोहर ने अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया.

अपने पति से मैं अपनी गांड पहले भी काफी बार चुदवा चुकी थी. मगर मनोहर का लंड मेरे पति से मोटा था. उसका लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयी. मगर मैं दर्द को बर्दाश्त कर गयी. मनोहर मेरी चूचियों को दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी गांड में लंड चलाने लगा.

दो मिनट के अंदर ही मुझे मजा आने लगा और फिर जैसे ही उसने स्पीड पकड़ी तो उसके लंड से निकल रहे कामरस से मेरी गांड भी चिकनी हो गयी और क्रीम की चिकनाहट के साथ मिलने से गांड पच-पच की आवाज करने लगी.

मनोहर बोला- मुझे ये आवाज बहुत अच्छी लगती है. जब मैं अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई करता था तो ऐसे ही आवाजें आती थी. भूमि को भी मेरे लंड से चुद कर बहुत मजा आता था.
उसके बाद मनोहर तेजी से धक्के मारने लगा और दो मिनट के बाद उसने तीन चार जोरदार झटकों के साथ अपना माल मेरी गांड में कॉन्डम के अंदर छोड़ दिया.

जब लंड बाहर निकाला तो कॉन्डम में काफी सारा माल भरा हुआ था. उसके माल की इतनी मात्रा देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर ये मेरी चूत में छूट जाता तो मुझे गर्भवती बना देता और मैं मनोहर के बच्चे की मां बन जाती.

हम दोनों पूरी तरह से थक गये थे और लेट गये. उसके बाद हमने सुबह सुबह उठ कर एक बार फिर से चुदाई की. सुबह की चुदाई करने के बाद मूड बहुत ही फ्रेश हो गया. बहुत दिनों के बाद मुझे इतना फ्रेश और हल्का फील हो रहा था.

इस तरह मनोहर के साथ मेरी चुदाई का सीन अभी तक चल रहा है. अब हम दोनों सोच रहे हैं कि एक साथ कानूनी रूप से लिविंग रिलेशन में रहना शुरू कर दें.

मैं इंतजार कर रही हूं कि जैसे ही मेरे पति के साथ मेरे तलाक का फैसला आ जायेगा, मैं उसी दिन से मनोहर के साथ खुले रूप से रहना शुरू कर दूंगी.

तो दोस्तो, ये थी मेरे यार टीचर से सेक्स की मेरी रियल कहानी. आप लोगों को मेरी ये हिंदी कहानी कैसी लगी मुझे इसके बारे में अपने मैसेज के द्वारा अपनी राय जरूर बतायें.

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मेरी चुदाई

शुरू से जवान होने तक मेरी बहुत सारी ऐसी यादें हैं जिनके बारे में मुझे पता नहीं था कि मैं खेल खेल में ही, अनजाने में सेक्स सीख रही थी. वो सब खेल ही थे, जो हम सबको सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं.

हम इस साइट पर हैं और हम सब यंग हो गए हैं इसी लिए इस साइट पर हैं. हम सब जानते हैं कि सेक्स करने की उम्र और सेक्स के लिए दोनों तरफ की कोशिश जरूरी होती है. आप और मैं सेक्स के बारे में काफी कुछ जानते हैं. इस साइट पर कमेंट पढ़ने के बाद मुझे लगा कि कुछ लोग तो ज्यादा ही जानते हैं.

मुझे लगता है कि मैं जो कहानी आपको बताऊंगी, उससे आप सब कुछ गलत नहीं सोचेंगे और उसका कोई गलत मतलब नहीं निकालेंगे.

मैं मेरठ से एक शादीशुदा महिला हूं. अभी 25 वर्ष की हूँ. इससे ज्यादा और डिटेल्स देने की जरूरत नहीं होगी. या शायद मैं अपनी निजी जानकारी इससे अधिक दे भी नहीं सकती हूँ.

मेरी सोच सेक्स की समझ में बारे में आपसे अलग हो सकती है. मुझे लगता है कि हम कम उम्र से सेक्स के बारे में सीखते हैं. सेक्स करने की उम्र और जिस्म की गर्मी तक हम इंतजार करना चाहिए. छोटी उम्र में सेक्स करने से शरीर में बीमारी हो सकती है और अंग खराब हो सकते हैं. हमें इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

हम सब सेक्स करते हैं और किसी वीडियो से या किसी दोस्त की बात सुन कर या अब इस साइट पर पढ़ कर सेक्स करने के नई तरीके को जानने लगे हैं. पर क्या ये वीडियो या दोस्त हमें सेक्स करना सिखाते हैं. या हम कहीं और से सीखते हैं. एक बार इस बारे में आप सोचना और कमेंट करके अपनी राय देना.

मैं अपनी बात करूं, तो शुरू से जवान होने तक बहुत सारी ऐसी यादें हैं, जिनके बारे में मुझे पता नहीं था और खेल खेल में ही अनजाने में सेक्स सीख रही थी. अब जवान होने पर समझ आया कि वो सब खेल ही थे, जो हम सबको सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं.

ऐसे ही कुछ खेल या सेक्सी खेल के बारे में मैं आपसे शेयर कर रही हूं.

मैं एक बार भाई और मम्मी के साथ अपने मामा के यहां गई थी. वहां मामा के और कुछ पड़ोस के लड़के लड़कियां भी थी. जिनके साथ हम दोनों भाई बहन खेलते थे.

हम सब कभी डॉक्टर का खेल खेल कर चूतड़ पर सुई लगाते और डॉक्टर की तरह ही रगड़ कर मज़े करते थे. कभी कभी तो छोटे से लंड से ही इंजेक्शन लगाया जाता था. पर उस समय हम सब की उम्र एक समान ही थी, जिससे सेक्स तो नहीं होता था. बस हमारा खेल होता था.

कभी घर बनाकर उसमें कुछ लोग मम्मी पापा का किरदार करते और उनकी शादी होती. फिर एक दूसरे के ऊपर लेट कर सेक्स करने की कोशिश करते. ऐसा हम में से कई लोग ने किया होगा. शायद आप भी उस समय में ये सब करते रहे होंगे. हम सेक्स करते हुए अपने अंगों को जबरस्ती सेक्स करने की कोशिश में रगड़ते थे, पर होता कुछ नहीं था.

कई बार मैंने देखा कि हम उंगली से पकड़ कर छोटे से लंड को चूत में डालने की कोशिश करते थे, पर किसी भी लड़के का लंड चूत में जाता ही नहीं था. बिल्कुल छोटा सा नुन्नू जैसे लंड को साथ की लड़कियों की चूत के छेद के बाहर ही रगड़ते हुए मज़े लेते रहते थे. मेरे मामा की बेटी को ये करना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि वो हम सब से थोड़ी बड़ी थी.

मुझे एक और बात याद आती है. जब कोई लड़की पेशाब करती या लड़का पेशाब करता, तो हम एक दूसरे के अंगों को ध्यान से देखते कि हमारा ऐसा नहीं है. कभी कभी तो हाथ में पकड़ कर, हाथ से सहला कर देखते और एक दूसरे से पूछते कि तेरी सूसू मेरे जैसी क्यों नहीं है. तो दूसरा लड़का बोलता कि तेरी अभी उगी नहीं है. थोड़े दिन बाद तेरी भी सूसू बड़ी हो जाएगी. पर आज तक किसी भी लड़की का बड़ा नहीं हुआ क्योंकि असलियत में वो चूत थी, लंड नहीं.

ये सोच कर कभी कभी हंस देती हूं कि मेरी सूसू अभी तक बड़ी नहीं हुई है. हां चूत लंड जैसी कैसे बड़ी हो सकती है, वो तो सही से फ़ैल गई है. और सेक्स भी मजे से करती है.

एक और खेल हमने बहुत खेला था, जिसमें हम सब लड़कियां नंगी होकर कुत्ते की तरह हाथ और घुटने से चलती थीं और लड़के पीछे से नंगे होकर हमारे चूत और चूतड़ के छेद को जीभ से चूसते थे. हम लड़कियां, गुदगुदी होने पर आगे सरक जातीं. वो फिर से चाटते और फिर कुत्ते की तरह ऊपर चढ़ कर लंड अन्दर डालने की कोशिश करते. सच में इस खेल में बहुत मज़ा आता था.

मुझे बहुत बार की हुई ऐसी ही घटनाओं में याद है कि जब रात में हम सब सोते, तो मम्मी हमारे पास से उठ जाती थीं और पापा के पास लेट जाती थीं. वो समझते थे कि उनकी औलादें सो जाते हैं, पर हम उनकी सभी हरकतों पर ध्यान देते थे. कैसे वो किस करते हैं, चूची चूसते हैं और पापा मम्मी के ऊपर चढ़ कर उनकी चुदाई करते हैं.

मैंने कई बार तो मामी को मामा का लंड मुँह में चूसते हुए भी देखा था. मेरे मामा की संतानों ने भी ये देखा था. उसी को याद करते हुए हम दिन में खेलते हुए वैसे ही एक दूसरे की सूसू को चूसते थे और मज़े करते थे. पर उस समय इन सब बातों का पता नहीं था.

और एक खेल तो सबने खेला ही होगा. छुप्पन छुपाई वाला (हाइड एंड सीक). उस खेल में किसी के साथ कोने में छिपना और एक दूसरे के शरीर पर हाथ रगड़ना. चूची दबाना. लंड का किसी लड़की के हाथ में पकड़ा कर मज़े लेना. कभी कभी तो सेक्स करने के लिए अन्दर डाला.

अगर मैं ज्यादा बात करूं, तो सभी लड़के अपनी सेक्स की शुरुआत एक दूसरे की गांड मारने से ही करते हैं. अब भी और लड़कियां एक दूसरे की चूची दबा कर, या चूत चूस कर अपने जीवन के सेक्स की शुरुआत करते हैं.

मैंने भी जब अपनी जवान होते शरीर को महसूस किया, तो मामा की बेटी के साथ ही चूची दबा कर मस्ती की थी. पर ज्यादा जोर नहीं दिया था, क्योंकि घर वालों के बीच में समय नहीं मिलता था. प्राइवेसी की बहुत प्रॉब्लम होती थी. घर वाले भी हम पर ध्यान रखते थे. मगर ये सब करके बहुत अच्छा लगता था. ये बिल्कुल एडवेंचर की तरह ही था.

जब मैं जवान होने लगी, तो मम्मी, बुआजी, मामी सब बड़ी लेडीज ने मुझे मेरे शरीर में होने वाले बदलाव (पीरियड्स) के बारे में कई बार समझाया था.

मेरे चूची के उभार मैंने हर दिन महसूस किए हैं. कब वो नींबू की तरह छोटे छोटे थे. फिर संतरे बने और अब तो 34 साइज के हो गए हैं.

मेरे साथ पढ़ने वाली फ्रेंड्स के चूचे और चूतड़ देख कर मैं अजीब सा महसूस करती थी कि वो भी अब जवान हो गई हैं.

अपनी चूत पर आने वाले हल्के बाल और उन छोटे छोटे से बालों में टॉयलेट करते हुए चुत को सहलाना, फिर उन बालों की सफाई करना. फिर वो बाल घने और काले हो गए. बहुत मन होता था कि ये सब किसी लड़के के साथ किया जाए.. पर कभी हिम्मत नहीं हुई.

कई बार हमने सुना होगा कि वो वहां सेक्स करते पकड़े गए, उनकी पिटाई हुई. शायद इसीलिए हम सबको, घर वाले अच्छे से रहना सिखाते थे. कहीं कुछ बदनामी ना हो जाए.

मैंने अपने ही घर में बड़े भाई को भाभी के साथ कमरे में घुसते देखा. कमरे के अन्दर क्या चल रहा होगा, मैं ये भी जानती थी.

पड़ोस की आंटी कई बार मम्मी के पास बैठ कर सेक्स की बातें करती थीं. तो मम्मी मुझे वहां से जाने के लिए बोल देती थीं.
पर मैं उनकी बातों को छुप कर सुनती थी.
आप में कई लड़कियां भी ऐसे ही सुनती रही होंगी.

मम्मी और आंटियां बहुत खुल कर एक दूसरे से सेक्स डिस्कस करती थीं और अपनी चुदाई के बारे में भी बताती थीं.

एक बार आंटी ने मम्मी को बताया कि रात में अंकल ने उन्हें घोड़ी बना कर उनकी गांड में लंड पेल दिया. उन्हें बहुत दर्द हुआ. पर अब वो सोच रही हैं कि आज रात अंकल से बोल कर गांड में ही लंड डलवाएंगी.

काल्पनिकता की बात अलग है. यहां तो कहानी में सब साले भाई, बहन, मां पापा, दीदी, बुआ, मामी, चाची, चाचा, मामा पता नहीं किस किस रिश्ते में चुदाई कर देते हैं. पर ऐसा सच में नहीं होता है. और ऐसा सोचने से प्रॉब्लम हो जाती है. क्योंकि हमारे संस्कार हमें ये सब करने की इजाजत नहीं देते. हमारे देश में संस्कारों का बहुत महत्व है और होना भी चाहिए.

पर सच तो ये है कि हम अपनी उम्र के हिसाब से अपने शरीर की जरूरत पूरी करने के चक्कर में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बनाते हैं और कभी कभी तो किसी दूर के रिश्ते जैसे भाभी जीजा कजिन से भी चुदाई कर लेते हैं.

अब 2020 में तो बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड आम बात हो गई है. शादी से पहले ही लड़के लड़कियां अपनी प्यास बुझाते हैं. स्कूल, कॉलेज, पार्क, बस, रेल, शादी जहां भी जाते हैं, बस नई दोस्त बनाने की कोशिश करते हैं. असलियत में हम एक दूसरे में सेक्स ढूंढते हैं.

पर मुझे मालूम है कि मैंने पहली बार सेक्स अपने पति से ही सुहागरात में किया था. हमारी शादी लव मैरिज तो नहीं, पर मैं अपने पति को शादी से पहले ही जानती थी. फिर उनकी जॉब आर्मी में लग गई और हमारी शादी हो गई.

शादी की तैयारी के समय मेरे मामा बुआ की बेटियां आई हुई थीं. वो सब शादीशुदा थीं और उनकी संतानें भी थे. उन सबको सेक्स का अच्छा एक्सपीरिएंस हो चुका था.

उन्होंने मुझे अपनी सुहागरात की कहानी सुनाई. कैसे उन्होंने अपनी चूत में पहला लंड लिया और उनके पति उन्हें किस किस पोजिशन में चोदते हैं. हम सबने इन बातों का बहुत मज़ा लिया और अपने पुराने सब सेक्सी खेल याद किए.

बुआ जी की बेटी ने बताया कि वो शादी से पहले उंगली डाल कर अपना पानी निकालती थी.
तो मामा की बेटी बोली कि तूने हमको नहीं सिखाया, नहीं तो हम सब साथ में ही मज़े लेते.

इस तरह हंसते खेलते मेरी शादी हो गई. पति आर्मी में जॉब करता है. उसका अच्छा खासा शरीर है.. बिल्कुल पहलवान की तरह.

पर हमारी सुहागरात की कहानी बिल्कुल अलग है. हम दोनों किस्मत से पहली बार सेक्स कर रहे थे और हम दोनों को ही ज्यादा नॉलेज नहीं थी. मेरे हसबैंड ने मेरी चूत को पहली ही बार बुरी तरह चोदा. मैं तो बहुत देर तक रोई और पूरी रात सो भी नहीं पाई थी. कमरे में कोई दवाई भी नहीं थी दर्द कम करने की.

फिर सुबह जब हमने दोबारा सेक्स किया. तब मुझे अच्छा लगा और हमने सुबह दो बार चुदाई की.

अब तो मैं हसबैंड के छुट्टी आने का वेट करती हूं और फिर हम दोनों दबा कर चुदाई करते हैं. एक दिन में 3-4 बार से कम में आत्मा को शान्ति ही नहीं मिलती है.

कभी कभी तो वीडियो कॉल करते हुए भी मज़े ले लेते हैं. पर अब भी जब सेक्स करती हूं, तो अपने पुराने समय की वो सब बातें याद आती हैं.

मेरी तरह आपने कई ऐसे खेल खेले होंगे, मुझे कमेंट करके जरूर बताएं. मुझे आप सबके खेल के बारे में जान कर अच्छा लगेगा कि आपने किस के साथ, कब ऐसे खेल खेले, जो सेक्स से जुड़े हुए थे.

ये कोई मेरी सेक्स कहानी नहीं थी, मगर इसमें जीवन का सच्चा सेक्स छिपा था.

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