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मेरी चूत की सील

हेलो दोस्तो, कैसे हो?
मैं सोनिया राजस्थान से!

आज मैं एक बार फिर लाई हूँ अपनी सच्ची कहानी … जिसे पढ़कर आपका लंड खड़ा हो जायेगा.

मेरा एक बड़ा भाई जिसका नाम हेमराज है लोग प्यार से उन्हें हेमू कहते हैं … काफी स्मार्ट और हट्टे-कट्टे!

एक बार जब भाई गाँव आए हुए थे तो मैं बाथरूम में नहाने गयी और कुण्डी लगाना भूल गयी. मैं हमेशा नंगी नहाती हूँ, उस दिन भी नंगी थी.
और इतने में अचानक भैया अंदर आ गये; मुझे नंगी देखकर हक्के बक्के रहे गये.

मैं शर्म से लाल पीली थी क्यूंकि अभी तक नंगी मुझे मेरे बॉयफ्रेंड ने ही देखा था.

उस दिन के बाद भैया का नजरिया ही बदल गया.

एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे फोन करके कहा कि मैं अपनी मम्मी की साड़ी और ब्लाउज पहन कर उनको फोटो भेजूं … और उपर से अपने बूब्स दिखाऊं.
तो मैंने मम्मी की साड़ी और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन ली. उसके बाद मम्मी के कपड़ों में ही बाहर चौक में झाड़ू लगाने लग गयी.
जैसे ही मैं झाड़ू मार रही थी, उतने में भाई आ गए और सामने कुर्सी पर बैठ गये.

मेरा ब्लाउज ढीला होने के कारण मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर से साफ़ दिखने लग गयी यहाँ तक कि मेरे चुचियों के भूरे रंग के निप्पल भी दिख रहे थे.
मैंने तिरछी नजर देखा तो भाई बड़े गौर से देख रहे थे.

मैं समझ गयी कि भाई अब मेरी चूत बजाने के लिए उतावले हो रहे हैं. अब वो हर दिन में वासना की नज़र से देखने लग गये. मैं सब समझ रही थी … मन तो मेरा भी हो रहा था पर हिम्मत नहीं हुई ना उनकी और न मेरी!
अगले दिन भाई शहर चले गये जॉब के लिए!

6 महीने के बाद भाई ने फोन किया और कहा- मैं कल कुछ काम से गाँव वाले बाज़ार आ रहा हूँ, मुझे तुझसे मिलना है.
हमारे गाँव 15 किलोमीटर की दूरी पर ही बाज़ार है और वहीं मेरा कॉलेज भी. मैं तब बी ए सेकेंड इयर में थी.
मैंने कहा- ठीक है भाई!
भाई ने कहा- वहीं होटल में कमरा ले लेना. हम वहीं बैठ कर खाना खायेंगे और आराम भी करेंगे.
मैंने कहा- ठीक है भाई!

अगले दिन मैं बाज़ार चली गयी. पहले मैं कॉलेज गयी और उसके बाद आई और होटल में रूम बुक करने गयी. पर मुझे कहीं भी रूम नहीं मिला. मैं दो घंटे तक पूरे बाज़ार में रूम ढूंढती रही पर कहीं नहीं मिला.
सुबह के 10 चुके थे.

इतने में भाई भी आ गये.
मैंने भाई से कहा- कहीं भी रूम नहीं मिला.
तो भाई ने कहा- कोई बात नहीं.

फिर हमने एक दुकान में चाय पी और पकौड़े खाए.
उसके बाद हमने बाज़ार में ऐसी जगह तलाशनी शुरू की जहाँ कोई आता जाता ना हो. पर ऐसी जगह कहीं नहीं मिली.

फिर भाई की नज़र सामने की पहाड़ी पर पड़ी … वहां से एक रास्ता था जो ऊपर किसी गाँव की तरफ जा रहा था.
भाई ने कहा- चल वहां चलते हैं, वहां कोई नहीं आएगा.

मैं भाई की बातों को समझ चुकी थी कि आज मैं अपने भाई से चुदने वाली हूँ.
मेरा भी बहुत मन था अपनी चूत में लंड लेने का; दो महीने से बॉयफ्रेंड नहीं चोदा नहीं था.

हम दोनों भाई बहन उस पहाड़ी की तरफ चले गये … वहीं जाकर एक झाड़ी के सहारे बैठ गये. झाड़ी भी रास्ते के किनारे थी यानि आने जाने सभी हम साफ़ देख सकते थे.
पर क्या करते … और कुछ नहीं था … हम वहीं बैठ गये.

मैं उसने दिन हल्के नारंगी का कुर्ता और सफ़ेद रंग का सलवार पहन रखा था और भाई ने नीले रंग की कमीज और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी.

मेरा कुर्ता बहुत टाइट था जिसकी वजह से मेरी चूची उपर से दिख रही थी. बैठे बैठे भाई की नजर मेरी चूची पर पड़ती और बातें करते.

अब वो बड़े गौर से देखने लग गये.
मैंने कहा- क्या देख रहे हो भाई?
भाई ने कहा- कुछ नहीं.
मैंने कहा- कुछ तो देख रहे हो?
तो इस बार भाई ने हिम्मत करके कह ही दिया- तेरे सीने को देख रहा हूँ.

मैंने कहा- ऐसा क्या है मेरे सीने में?
तो भाई ने कहा- तेरे सीने ने ही तो मुझे पागल बना रखा है.
मैंने कहा- पर ऐसा क्या है?

तो भाई की झिझक अब कम हो चुकी थी, भाई ने कहा- तेरी कोमल और बड़ी बड़ी चूचियां जिनमें मुझे डूब जाने का मन कर रहा है.
मुझे थोड़ी सी शर्म आई मगर मैं फिर भी मुस्कुरा दी.

भाई की हिम्मत बढ़ गयी … अब भाई ने कहा- सोनिया तेरी इन चुचियों में ऐसा क्या जादू है … कितनी सेक्सी और हॉट हैं … मुझे इनको छूने का मन कर रहा है.
मैं कुछ ना बोली और आँखें नीचे कर ली.

उसके बाद भाई आगे बढ़ा और मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरी चूची पर हाथ रख दिया. पहली बार अपने भाई का हाथ अपने चुचियों पर महसूस करके बहुत अच्छा लग रहा था. एक अलग से हलचल हो रही थी, शरीर में एक कम्पन थी. ये अहसास बहुत अलग था.

उसके बाद भाई ने धीरे धीरे मेरी चूचियां मसलना शुरू किया. धीरे धीरे मेरा जोश भी बढ़ने लगा.
अबकी बार भाई ने अपने हाथ मेरे कुरते के अन्दर डाल कर मेरी चूचियां दबाना शुरू कर दिया. मैंने अपनी आँखें बंद कर दी.

इतने में उस रास्ते दो औरत और एक मर्द गुजरे तो भाई ने झट से अपना हाथ हटा लिया. शायद उन लोगों ने नहीं देखा.

उनके जाने के बाद भाई ने दोनों हाथ मेरे गालों पर रख कर मेरे फूल से ओंठ चूसना शुरू किया. मेरे गुलाब जैसे ओंठों को भाई ने खूब चूसे. मैंने भी उन्हें किस करना शुरू किया.

अब भाई खड़े हुए और मैं वहीं पत्थर पर बैठी रही. भाई ने अपनी जींस की जिप खोली और अपना अपना तनतनाता लंड बाहर निकाला.
ओह माय गॉड … क्या लंड था इतना मोटा और बड़ा तो मेरे बॉयफ्रेंड का भी नहीं था!

भाई ने लंड बाहर निकाला, कहा- सोनिया मेरा लंड चूस न!
मैंने भी बिना देरी किये भाई का लंड हाथ में लिया और मुंह में डाला पर ओ मुंह में गया ही नहीं.

फिर मैंने आगे का हिस्सा ही बस मुंह में डालकर उस मस्त लंड को चाटने और चूसने लग गयी.

अपने बॉयफ्रेंड का लंड तो मैंने कई बार चूसा था पर आज जो मजा जो आनंद भाई के लंड चूसने में आ रहा है वो कभी नहीं आया.
सच में क्या लंड था भाई का … ऐसे ही लंड की तो तलाश थी … ऐसा लंड जब मेरी चूत में जाएगा तो मुझे दुनिया का हर आनंद मिल जाएगा. अब तो मैं जल्दी से भाई का लंड अपनी चूत में लेने के लिय मचल रही थी.

काफी देर तक मैंने भाई का लंड ऐसे ही चूसा. इतने में उस रास्ते से एक अंकल और आंटी गुजरे. मैंने झट से भाई के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला. शायद उन्होंने भी हमें नहीं देखा.
उस रास्ते में हम ये करने को मजबूर थे क्यूंकि कहीं भी कोई रूम नहीं मिला.

उन लोगों के जाने के बाद भाई ने कहा- सोनिया ज्यादा समय नहीं … लोग आ जा रहे हैं. बस तू सलवार नीचे कर … मैं तुझसे अब चोदना चाहता हूँ.

मैंने कहा- भाई ऐसे कैसे? कितने लोग आ जा रहे हैं. दिक्कत हो जाएगी.
भाई ने कहा- सच कह कि तू चुदना नहीं चाहती.
मैंने कहा- भाई, कौन पागल लड़की होगी जो इतने मस्त लंड से चुदना नहीं चाहेगी?
तो भाई ने कहा- चुद ले और टेंशन ना ले. कोई आएगा तब की तब देख लेंगे.

तो मैंने भाई से कहा- तुम मुझे नंगी करोगे क्या यहाँ बीच रास्ते में?
भाई ने कहा- नहीं बस तेरी सलवार थोड़ा नीचे सरकाऊंगा और तेरी कच्छी को एक तरफ करके लंड डालूँगा.
फिर मैंने हामी भरी.

भाई ने मुझे खड़ा किया और पहले तो मुझे सीने से लगाया और कहा- सोनिया, मैं तुझे उसी दिन से चोदने के मूड में हूँ जब मैंने तुझे बाथरूम में नंगी देखा था … तेरे ये हसीन जिस्म देख कर मैं बहक गया. जब तेरा खुद का भाई ही बहक गया था तो सोच बाकियों का क्या हाल होता होगा.

उसके बाद मैंने भाई को खूब किस किया.

फिर भाई ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और घुटनों तक सरका दिया और मेरा कुर्ता ऊपर करके मेरी मासूम ही चूचियां बाहर निकाल दी.
अब भाई ने कहा- सोनिया, एक टांग नीचे रख और एक टांग पत्थर पर!
फिर मैंने ऐसा ही किया.

भाई नीचे से आये और मेरी चूत में अपनी जीभ डालकर चाटने लग गये.

“उईइ माँ …” मेरे मुंह से यही निकला. क्या आनंद था वो क्या पल था वो … ऐसा पल हर लड़की के जीवन में आये.
भाई कुछ देर तक मेरी चूत ऐसे ही चाटते रहे.

उसके बाद भाई ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी. जैसे ही भाई ने चूत में उंगली डाली मुझे पेशाब आने लगा.
मैंने भाई को कहा- हटो मुझे पेशाब आ रहा है.
भाई ने कहा- यही तो मैं चाहता था. तू पेशाब मेरे मुंह में कर दे.

मैंने कहा- ये क्या बोल रहे हो भाई?
भाई ने कहा- सुंदर और हॉट लड़कियों का पेशाब पीने में बहुत मजा आता है.

तो मैंने सारा पेशाब भाई के मुंह के अंदर कर दिया. भाई कहने लगे- सोनिया, तेरा पेशाब भी तो तेरे जैसा मस्त है. वाह … मेरी बहना बहुत मजा आ रहा है … तू भी कभी मेरा पेशाब पी कर देखना.
मैंने कहा- ठीक है भाई … फिर कभी!

फिर भाई ने मेरी कच्छी को एक तरफ सरका के अपना लंड मेरी चूत में डालने का प्रयास किया. पहली बार में लंड फिसल के दूसरी तरफ गया.
भाई ने कहा- सोनिया, अपने भाई का लंड अपने कोमल हाथों से पकड़कर अपनी मासूम सी चूत में घुसा न!

मैंने भाई का लंड अपने हाथों लेकर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और भाई को कहा- धक्का मारो.
भाई ने एक ही झटके में सारा लंड अंदर पेल दिया.

मेरी चूत की सील तो मेरे बॉयफ्रेंड तोड़ दी थी. फिर भी मुझे बहुत दर्द हुआ. मैंने भाई से कहा- भाई दर्द हो रहा है.
तो वो ठहर गये.

कुछ देर रुकने के बाद भाई फिर से हल्के हल्के धक्के मारने लग गये.
मैंने कहा- भाई, अब दर्द महसूस नहीं हो रहा है.
कुछ देर बाद भाई की धक्कों की स्पीड बढ़ गयी.

भाई के हर धक्के से मेरी सिसकारी निकल रही थी- आहहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह … चोदो और जोर से चोदो भाई … आहह हहह!
इस तरह मैं लगातार सिसकारियां ले रही थी.

भाई भी किसी माहिर खिलाड़ी की तरह अपनी छोटी बहन की चूत चोदे जा रहे थे.

मैं बहुत गर्म हो चुकी थी और भूल गयी थी कि मैं बीच रास्ते में अपने भाई से चुद रही हूँ … मैं सिसकारियां लेने लगी और भाई से कहने लगी- भाई चोदो ना आज अपनी सोनिया बहन को … चोद-चोद के आज मेरी चूत फाड़ दो.

मुझे अपने बड़े भाई के लंड से चुदने में कितना मजा आ रहा था आह हह … मैं बोली- भाई, आप तो बहुत मस्त मजा देते हो. चूत चाट कर भी और अपने लंड से चुदाई का भी!
फिर वो तेजी के साथ मेरी चूत में धक्के लगाने लगे … मुझे दुनिया का हर आनंद अनुभव हो रहा था … मैं कहने लगी- भाई, अब कोई भी आएगा तो अपना लंड बाहर मत निकालना, बस चोदते रहना अपनी बहन को!

भाई मुझे जोरों से चोद रहे थे. मेरी चूची दबा दबा कर उन्होंने लाल कर दिए. भाई कहने लगे- सोनिया, ऐसी चुदाई के लिए कब से तरस गया था … आज अपनी सोनिया बहन को चोद चोदकर रांड बना दूंगा.
मैं भी सेक्स के मजे में कहने लगी- हाँ भाई, आज से मैं आपकी रखैल हूँ … बना दो आज मुझे रांड … बना दो आज खूब चोदकर अपनी बहन को माँ … आज बीच रास्ते में आपकी बहन चुदकर माँ बनना चाहती है … आहहह उम्म्ह!

मेरी आवाजें तेज हो गयी थी और भाई की भी … हम भूल गये थे कि हम पब्लिक प्लेस में चुदाई कर रहे हैं.
भाई मुझे पेले जा रहे थे और मैं भी अपने भाई से पिलती रही.

इतने में वहां से एक सुंदर सी नयी नवेली दुल्हन और उसके साथ एक बुड्डा था या तो उसका पति रहा होगा या ससुर … हमने सच में अनदेखा कर दिया और चुदाई के सागर में गोते लगाते रहे. भाई उनके सामने ही मुझे चोदने में लगे रहे.( उसके बाद क्या हुआ, उन्होंने क्या कहा ये सब अगली कहानी में लिखूंगी)

मैं झड़ने लगी. मगर भैया अभी नहीं रुके. उन्होंने अगले पन्द्रह मिनट तक मेरी चूत को रगड़ा … खूब रगड़ा … जैसे कोई एक रंडी की चूत बजाता है भाई ने भी मेरी चूत ऐसी ही बजाई वो भी खुले में!
भाई पूरी स्पीड में अपनी बहन की चूत में लंड फंसा कर धक्के मारे जा रहे थे.

और फिर उनका वीर्य निकलने को हुआ तो उन्होंने पूछा- कहां गिराना है?
मैंने कह दिया- आह्ह … भैया, मेरी चूत में ही गिरा दो … बना दो आज अपनी सोनिया बहन को माँ!

उसके बाद भैया ने तीन-चार जोर के धक्के मारे और मेरी चूत में झड़ने लगे. उन्होंने सारा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिया. मुझे भैया का लंड अपनी चूत में लेकर बहुत मजा आया.

भाई ने कुछ देर अपना लंड मेरी चूत में ऐसे ही रखा, उसके बाद जबा लंड बाहर निकाला तो मैंने भाई का गीला लंड चाट चाट के साफ कर दिया.
उसके बाद भाई ने मुझे गये लगाया और मेरे ओंठ चूसे.

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पहली चुदाई

मैं 18+ गर्ल हो गयी थी पर फिर भी मैं पड़ोस के लड़के लड़कियों के साथ लुकाछिपी खेलती थी. मैं सेक्स के बारे में जानती थी और इसका मजा लेना चाहती थी. जब मुझे मौक़ा मिला तो …

दोस्तो, मेरा नाम राधिका है. मैं 24 साल की हूं. मैं पंजाब के एक शहर में रहती हूँ. मेरे घर में मां, पापा, और मेरा छोटा भाई रहते हैं. मेरा फिगर 30-30-32 है

तो चलिए कहानी बताती हूं. बात कुछ साल पहले की है जब मैं 18+ गर्ल बनी थी.
मैं शाम के समय अपने पड़ोस के लड़कों के साथ खेल रही थी. हम लोग तीन लड़कियां और 5 लड़के थे. उसमें एक का नाम था मनु. मनु दिखने में ठीक ठाक था, गोरा रंग, शरीर पर बाल ही बाल थे.

खेलते खेलते अंधेरा ज्यादा हो गया. हम लुका छिपी खेल रहे थे. मनु की बारी थी हम सब को ढूंढने की. पहले भी हम खेलते थे लेकिन वो शाम अलग ही थी. गर्मी ज्यादा होने के कारण सभी के कपड़े गीले हो गये थे. गर्मी में मैं सिर्फ कमीज सलवार पहनती थी.

उस शाम जब अंधेरा कुछ ज्यादा हो गया तो मैं घर जाने के लिए खेल छोड़ कर जाने लगी. तभी अंधेरे में मुझे ठोकर लगी और मैं गिर गयी. उस समय मनु ने मुझे देख लिया ओर आकर पकड़ लिया।
तभी बाकी दोस्त भी आ गये. मनु की बहन ने उसको पीछे से मारा तो उसका कंटरोल खो गया और वो मेरे ऊपर गिर गया. खुद को संभालते हुए मैंने उसके हाथ पकड़ लिए जिसकी वजह से उसका मुँह मेरे मुँह के पास और उसके हाथ मेरे चूची से लग गये.

जैसे कि पहले बताया गर्मी की वजह से मेरे कपड़े भीग गये थे और मैंने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी तो मनु के हाथ लगाते ही मेरी चूचियां दब गयी और मुझे गुदगुदी होने लगी.

मेरी चूची दबाते ही उसका लंड खड़ा होने लगा. वो मेरी जांघ से लगा हुआ था जिसे मैंने बड़ा होते हुए महसूस किया. तो मैंने उसको अपने ऊपर से उठाने के लिए जोर लगाया.
तो उसने उठते हुए अपना दाहिना हाथ मेरी चूची पे रख के उसे दबा दिया.

उसका तना हुआ लंड उसकी गुलाबी अंडरवियर से साफ दिख रहा था. आपको बता दूं कि मनु घर में सिलाई किए अंडरवियर पहनता था, जिसकी वजह से मुझे उसके लंड का स्पर्श पास से महसूस हुआ.

उस समय मैं घर चली गयी और खाना खाकर सोने के लिए गयी. और बिस्तर पर मुझे वो सब याद आया तो मैंने खुद से अपनी चूची दबाई. तो मुझे सब सामान्य महसूस हुआ.
मेरा फिगर उस समय 28-28-30 था.

अगले दिन से मनु मुझे अलग नजर से देखने लगा और ज्यादा से ज्यादा समय मेरे साथ रहने लगा. अब तो उसने मेरी पढ़ाई में भी सहायता करनी शुरु की. पढ़ाई में सहायता करने से मैं भी उसके साथ ज्यादा खुल गई और उसके घर भी आने जाने लगी. मनु घर पर केवल पतली बनियान और अंडरवियर में ही रहता था जिसकी वजह से मुझे बहुत बार उसका लंड दिख जाता. पर उस समय मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख्याल नहीं था.

एक बार उसके परिवार वाले बाहर गये हुए थे और मुझे मैथ का एक प्रश्न समझ नहीं आ रहा था. मैं उसके घर गयी तो दरवाज़ा खुला था.

मैं अंदर गयी तो बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी. शायद वो नहा रहा था. मैं वहीं बैठकर इंतज़ार करने लगी. तभी बाथरूम से कुछ बदली हुई आवाज आने लगी वो जोर जोर से आह उह हम्म मम्म आहह की आवाज़ कर रहा था.
उस समय भी मेरे मन में सेक्स का कुछ नहीं आया.

इतने में उसकी माँ आ गई और उनकी आवाज आई तो मैं बाहर चली गई. और इतने में मनु भी बाहर आ गया.
उसने मुझसे पूछा- इस समय यहाँ?
तो मैंने कहा- कुछ समझना था!

वो मेरे पास आया और समझाने लगा. साथ ही वो कभी अपने हाथ से मेरे हाथ को छू देता, कभी अपनी टांग मेरी टांग से लगा देता.
हमारे में ये सब पहले भी होता था इसलिए मैंने कुछ नहीं किया. इस बार उसका हाथ मेरी चूची से लग गया जिससे उसका लंड आकार में आने लगा.
मैंने देखा तो उसको चिढ़ाते हुए उसके लंड को छूने लगी.
पर उसने मना कर दिया.

उसके बाद मेरे घर से मेरा भाई मुझे बुलाने आ गया तो मैं घर चली गयी.

अगले दिन होली थी तो सभी पड़ोस के लड़के लड़कियां साथ में खेलते थे. उस दिन मैंने सफेद टाप पहना था और साथ में जींस कैपरी जो मेरी सिर्फ जांघों तक थी.
हम सब होली खेलने लगे जिससे मेरे सारे कपड़े रंगों से भर गए.

गली में सब लोग थे पर मनु नहीं था. उसकी बहन ने बताया कि वो घर में छुप के बैठा है.
तो मैं उसके घर गयी. वो बाहर ही खुले में नहा रहा था. उसने सिर्फ कछा पहना था और पूरा भीगा हुआ था. उसके बाल उसके शरीर से ऐसे चिपके हुए थे जैसे किसी चीज को मक्खी.
उसके गीले अंडरवियर से उसके लंड के घने बाल साफ दिख रहे थे.

पर मुझे तो उसको रंगना था तो मैं उसके पास जाने लगी.
तभी पानी में मेरा पैर फिसल गया और मैं उसके ऊपर गिर गई.

मैं इस तरह से गिरी कि मेरा हाथ उसके लंड पर लग गया और वहीं रह गया. मेरे छूते ही वो खड़ा होने लगा. पर मैंने खड़ी होते हुए उसके लंड को दबा दिया जिससे मेरे रंग वाले हाथ का छाप उसके लंड पर छप गई.

तो उसने भी बदला लेने के लिए अपने रंग से रंगना चाहा.
मैं भागने लगी तो उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया. उसने इतना जोर से पकड़ा कि अब उसका खड़ा लंड मुझे चुभने लगा और उसके हाथ मेरी चूचियों पर थे. उसने उनको जोर से दबा दिया और बोला- अब हिसाब बराबर हो गया.

उसके हाथ की छाप मेरे सीने पर छप गयी तो उसने साफ करने के लिए मेरे पे पानी डाल दिया जिससे मेरे गीले टाप से मेरे निप्पल दिखने लगे. वो तो मेरे सीने को देखता ही रह गया.
इतने में उसकी बहन आ गई तो मैं उसके साथ चली गई.

अगले दिन मेरे घर वालों को भाई का इलाज करवाने बाहर जाना था तो मेरी परिवार वाले मनु के घर पर बोल के गये थे कि मैं उनके घर पर रह लूंगी कुछ दिन!

मैं रात को उनके घर चली गई. तो वहाँ पता चला कि उसकी बहन अपने मामा के घर गई है और उसके ममी पापा बंगलौर जा रहे थे जरूरी काम से. उसकी मम्मी ने खाना बना के रखा हुआ था.
मनु मुझे खाना परोसने लगा.

उसने दाल का बर्तन मुझ पर गिरा दिया जिससे मेरे सारे कपड़े खराब हो गए. तो उसकी मम्मी ने बोला- राधिका, तू नहा कर रिया के कपड़े पहन ले.
तो मैं नहाने चली गई और उसके मम्मी पापा भी चले गए.

नहा कर जब मैं कपड़े पहनने लगी तो वो मुझे फिट आ नहीं रहे थे. उसकी शमीज तो किसी तरह पहन ली पर उसकी पजामी मुझे आ नहीं रही थी.

बाथरूम में मनु का वो रंग वाला अंडरवियर पड़ा था जिस पर उसका माल निकाले का दाग था. मैं वही पहन के बाहर आ गई. उसकी बहन की शमीज से भी मेरे आधे चूचे दिख रहे थे.

मुझे ऐसे देख वो चौंक गया तो मैंने कहा- तुम्हारी वजह से ही हुआ सब! और रिया के कपड़े आ नहीं रहे थे इस लिए तेरी अंडर वियर पहन ली.
उसके बाद हम आचार के साथ खाना खाकर एक साथ एक ही कमरे में सोने चले गए.

रात को बातें की तो उसने कहा- राधिका, मुझे एक बात बताओ.
मैं- क्या?
मनु- मेरा ये खड़ा क्यों हो जाता है?

मैं- मुझे नहीं पता!
यह कह कर मैं सो गयी.

मैं नाराज ना हो जाऊँ … यह सोच कर वो भी सो गया. हम दोनों एक ही बेड पर थे जिससे मेरी टांग उसकी टांग से छू जाती और उसके बाल मुझे गुदगुदी करते. क्योंकि वो भी बनियान और कच्छे में सोया हुआ था.

रात के करीब 2-3 बजे लाईट चली गई तो मैं जाग गई और मनु की तरफ से आवाज आ रही थी. मैंने फोन की लाईट से देखा तो उसका कच्छा उतरा हुआ था और वो आंखें बंद करके अपने लंड को सहला रहा था.
मुझे कुछ होने लगा और मैं फोन बंद करके उसकी ओर मुड़ गई और अपनी गोरी नंगी टांग उसकी लात पर रख के अपने लात से उसका लंड दबा दिया.
वो सिहर उठा.

फिर मनु ने अपनी कमर को उठा के अपना लंड मेरी लात से दबा दिया. उसने मुझे 2-3 बार हिलाया पर मैं सोने का नाटक कर रही थी और नहीं उठी. मैंने अपनी जांघ से उसका लंड फिर से दबा दिया.

इस बार उसका माल निकल गया और मेरी जांघ गीली हो गई, पर मैं वैसे ही लेटी रही.

थोड़ी देर बाद मनु ने करवट बदली और वो मेरी ओर मुड़ा. तो मैं भी करवट बदलते हुए उसकी ओर मुड़ी और अपनी जांघ उसके ऊपर रख ली. अपना एक हाथ उसकी जांघों के बीच लंड के पास रख लिया. मेरी उंगलियां उसकी झांटों में चली गई और मेरा हाथ उसके तन रहे लंड को महसूस कर रहा था. तो मैंने अपना हाथ जोर से वहां रख लिया.

उसने भी कोई विरोध नहीं किया और अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगा. मैं भी बीच में अपना हाथ इधर उधर कर रही थी पर उसके बाल ही मेरे हाथ आते, वो समझ रहा था कि मैं सो रही हूं.

फिर वो मेरी ओर खिसका और मेरा हाथ अपने लंड के नीचे दबा लिया. इस वक्त उसका लंड लोहे की तरह सख्त हो गया था.

अब इससे पहले कि वो कुछ और करता … लाईट आ गई हवा आने से मैंने खुद को हिलाया तो वो डर गया कि मैं जाग रही हूँ. वो जल्दी से अलग होकर बाथरूम में चला गया और करीब पंद्रह बाद बाहर आया.

मैं समझ गयी कि उसने क्या किया होगा. पर मैं बेखोफ थी क्योंकि मेरे पास 2 रातें और थी उससे चुदने के लिए और उसको तैयार करने के लिए!

उसके बाद मनु बाहर आकर सो गया और अगले दिन सुबह मैं अपने घर आ गई.

मैंने अपने कपड़े उतारे और नहाने के लिए जाने लगी तो मुझे वो रात याद आ गई तो मैं वही बेड पर लेट गई. फिर मैंने अपने आप को शीशे में देखा और अपनी चूत पर हाथ रख के सहलाने लगी. 18+ गर्ल इन हालत में और क्या कर सकती थी? कुछ समय बाद मैं झड़ गई.

फिर मुझे ख्याल आया कि क्यों ना मैं अभी मनु के घर चली जाऊँ और उसके साथ वक्त बिताऊँ. तो मैं जल्दी से नहाने गई और नहा कर नंगी ही बाहर आ गई. मैंने बिना ब्रा पहने सफेद रंग की टाप पहनी जिसमें से मेरे चूचे की शेप और साईज दिख रहा था. और नीचे बिना पैंटी के ही घर पर बनाया हुआ निकर पहन लिया जो मेरी जांघों तक आ रहा था और काफी पतला भी था.

मैंने उसके घर जाकर बैल बजाई तो वो जल्दी से भाग के आया.वो सिर्फ तौलिये में लिपटा हुआ था. शायद वो नहाने जा रहा था.
मुझे देख कर वो बोला- अभी यहां कैसे?
तो मैंने पढ़ाई का बहाना करते बोला- मुझे कुछ समझना है.

उसने मुझे हाल में बैठाया और नहाने चला गया.

करीब 15 मिनट बाद वो बाहर आया तो उसका बदन थोड़ा गीला था और उसके बदन के बाल चिपके हुए थे. उसने ढीली बनियान और खुला अंडरवियर पहना हुआ था.

वो मेरे पास आकर बैठा और मुझे पढ़ाने लगा. उसकी जांघ मेरी झांघ को छू रही थी.
मेरे मन में मस्ती सूझी, मैंने उसको बोला- मनु, तेरे शरीर पर इतने बाल क्यों हैं?
पहले तो वो मेरी और देखने लगा, फिर बोला- सब के ऐसे ही होते हैं.

मैं- कहाँ? मेरे तो नहीं है?
मनु- रे पगली, लड़कों के ऐसे ही होते हैं, तेरे भाई के तो इससे भी ज्यादा हैं.
मैं- ठीक है.

उसके बाद वो मुझे पढ़ाने लगा. मैंने कापी से कुछ समझते हुए अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया.

तभी लाईट गई और रूम में गर्मी होने लगी. धीरे धीरे हम भीगने लगे पसीने से!
तो मैंने उसको कहा- कुछ ठंडा मिलेगा? गर्मी लग रही है.

वो शरबत बनाने रसोई में गया. रसोई में तो वैसे भी ज्यादा गर्मी होती है तो वो पूरा भीग गया. जब वो वापस आया तो उसके चेहरे से पसीना टपक रहा था.

गर्मी की वजह से मेरा भी बुरा हाल था, मेरे भी कपड़े भीग गए थे.
जब वो मुझे शरबत देने लगा तो वो देखता ही रह गया. मेरी टाप अब ट्रासपेरंट हो गई और मेरी चूचियाँ साफ दिख रही थी.

उसका लंड खड़ा होने लगा.

किताब एक तरफ रख के मैंने उसको अपने पास बुलाया तो मेरी नंगी जांघें देख के उसका खड़ा लंड और तन गया और उसकी अंडरवियर से बाहर आने को हुआ.
मैंने गुस्सा होने का नाटक किया तो उसने खुद को संभाला और सॉरी बोलने लगा.
तो मैंने कहा- सॉरी तो ठीक है. पर ये क्या है?
मैंने उसके लंड की ओर इशारा करते हुए कहा.

वो शरम से झुक गया और हड़बड़ा कर शरबत मेरे ऊपर गिरा दिया. बर्फ से मुझे ठंडा अहसास हुआ.

मैंने उसको पास बिठाया और कहा- ये सब कुदरती है. तुम भी इंसान हो और ऊपर से लड़के तो किसी भी 18+ गर्ल को ऐसी हालत में देख कर किसी का भी खड़ा हो जाएगा.
ऐसा कहते हुए मैंने अपनी लात उसकी लात से लगा दी.

ऐसा करते ही उसका लंड जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगा और फिर मेरे सामने ही उसका माल निकल गया और उसके कपड़े गंदे हो गए.
मुझे ये देखकर अच्छा लगा.
वो शर्मिंदा होकर बैठ गया.

मैंने उसको कहा- मुझे नहाना है.
मेरे पास कपड़े नहीं थे तो मैंने उसके कपड़े मांगे.

पहले तो उसने मना किया.
फिर मैंने कहा- रात तक यहीं तो रहना है, तब तक ये सूख जायेंगे. और कल रात भी तो तेरे कपड़े पहने थे.
तो उसने दे दिए.

मैं वो लेकर नहाने गयी. उसके कपड़े मुझे ढीले थे पर मैंने पहन लिए. उसकी बनियान मेरी छाती को काफी खुली थी पर उसका अंडरवियर मुझे फिट बैठा.

मैंने रात वाला अहसास फिर से लेना था इसीलिए मैंने उसको पास नहीं आने दिया. फिर हमने नूडल्ज़ खाए और बत्ती बंद करके सोने लगे.
मैंने मनु को बोला- मैं एक बार सो जाती हूँ तो सीधा सुबह उठती हूँ.
मैंने यह जानबूझ कर कहा ताकि वो रात को दोबारा वो सब कर सके.

ऐसा ही हुआ. 12 बजे के करीब जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मनु ने सारे कपड़े उतारे हुए थे. वो मेरे बगल में नंगा पड़ा था.
कल की तरह फिर से नींद में हिलने का बहाना करते हुए मैंने अपनी जांघ उसके लंड पर रख दी. उसका लंड आग की तरह तप रहा था.

मनु मेरी ओर घूमा और मैंने अपनी जांघ हटाते हुए अपना हाथ उसकी जाँघों में घुसा दिया और अपनी उंगलियों को उसके लंड और झांटों की ओर किया.

वो अपनी कमर हिलाने लगा और उसने अपना हाथ सीधा मेरी चूत पर रख दिया. उसने अपना मुँह मेरी चूचियों में घुसा लिया.
मैंने अपना हाथ उसके लंड पर दबा दिया तो उसके लंड का पानी निकल गया. मेरा पूरा हाथ भीग गया पर मैंने अपना हाथ लगाए रखा.

मेरी चूत भी अब गर्म होने लगी और मैंने भी अपना पानी छोड़ दिया.

फिर हम दोनों उठ गए. उसने देर ना करते हुए मेरे कपड़े खीच के फाड़ दिए और मुझे अपनी गोद में बिठाकर चूसने लगा. साथ में उसने मेरी चूचियां जोर से दबा दी. मेरे मुँह से जोर से आह निकली पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ा.

थोड़ी देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और मुझे नीचे चुभने लगा.

उसने मुझे गोद में उठाया और अपने बाथरूम के बाथटब में ले गया. उसने कुते की तरह जोर से मेरी चुत चाटी और अपनी उंगलियां तेल लगा के मेरी चुत में घुसा दी. दर्द से मेरी जोर से चीख निकल गई और मेरा पानी बाहर आने लगा.

फिर उसने देर ना करते हुए अपने लंड पर तेल लगाया और मेरी 18+ चूत पे रख के जोरदार धक्का लगाया.
दर्द के मारे मेरी तेज आवाज में चीख निकली.

उसने पानी का नल खोल दिया. अब टब में पानी भरने लगा. मैं कुछ देर बाद शांत हुई तो उसने एक धक्का और लगाया. उसका पूरा लंड मेरी चुत में घुस गया और 18+ गर्ल की सील टूटने से टब का पानी खून से लाल हो गया.

फिर 2 मिनट बाद वो मुझे चोदने लगा और 15 मिनट चोदता रहा. इस बीच मैं एक बार झड़ गई. और फिर उसने अपना पानी मेरे अंदर निकाल दिया.
उस रात उसने मुझे 3 बार चोदा.

उसके बाद मेरे परिवार वाले और उसके परिवार वाले अगले दिन आ गए.

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मेरी पहली चुदाई

लड़कों की भाषा में मैं शानदार माल हूं। एक पड़ोसी लड़के से मेरी पारिवारिक दोस्ती थी. लेकिन कोई रिलेशशिप नहीं थी. उस लड़के ने कैसे मेरी चूत की पहली चुदाई की?

दोस्तो, मेरा नाम परिधि सारस्वत है और मैं दिल्ली से हूं। मैं अन्तर्वासना की एक नियमित पाठक हूं और मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सारी सेक्स कहानियां पढ़ी है और इसी से प्रेरित होकर मैं ये अपनी पहली और सच्ची कहानी लिख रही हूं।
इसमें आपको पता चलेगा कि कैसे मैंने अपने दोस्त के साथ बस में चुदाई की थी।

इससे पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देती हूं। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा हैं और शरीर भरा पूरा है। मेरा फिगर 33-28-33 का है। मतलब लड़कों की भाषा में मैं एक शानदार माल हूं।तो चलिए अब आते हैं कहानी पर।

यह बात आज से लगभग 2 साल पहले की है। राहुल नाम का लड़का हमारा पड़ोसी है। हमारे परिवारों के बीच काफी आना – जाना है। स्कूल के समय में भी मैं और राहुल एक ही स्कूल में थे।

हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन हमारे बीच कभी भी ऐसा – वैसा कुछ नहीं था। हम दोनों आपस में खूब बातें करते थे और मज़े करते थे। मुझे भी राहुल के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था।
वो लगभग रोज मेरे घर पर आता था और कई बार मैं भी उसके घर पर चली जाती थी। लेकिन इससे हमारे परिवार को कभी भी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्कूल के बाद हम दोनों ने अलग – अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।

एक दिन मेरी कॉलेज की छुट्टी थी और मेरी नानी की तबियत खराब हो गई थी। तो मेरे मम्मी – पापा नानी से मिलने के लिए चले गए। अब मैं घर पर अकेली रह गई थी।

कुछ देर तो मैं टाइम पास करती रही लेकिन फिर मैं भी बोर होने लग गई। तो मैंने सोचा कि क्यों न राहुल को बुला लिया जाए। इससे मेरा टाइम पास भी हो जाएगा और स्कूल की पुरानी यादें भी ताजा हो जायेंगी।

तो मैंने राहुल को फोन किया कि मैं आज घर पर अकेली हूं और बोर हो रही हूं। तुम मेरे घर पर आ जाओ और फिर गप्पे मारेंगे।
उसने कहा- ठीक है, मैं 15-20 मिनट में आता हूं।
मैं अब राहुल का इंतजार करने लगी।

लगभग 15 मिनट बाद घर की डोर बेल बजी। मुझे पता था कि राहुल है तो मैं गई और गेट खोल दिया और राहुल को अंदर बुला लिया।
राहुल अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया।

फिर मैं उसके लिए पानी लाने किचन में चली गई। मैंने उस दिन गहरे गले का टॉप पहना था।

जैसे ही पानी देने झुकी तो मैंने देखा कि राहुल की नजरें टॉप के अंदर झांक रही है।
मैंने ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए जल्दी से उसे पानी दिया और उसके बगल में सोफे पर बैठ गई।

फिर उसने वही पुरानी स्कूल कि बातें शुरू कर दी और हम दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर कुछ देर बाद मैंने ही उससे पूछ लिया- ओय हीरो … कोई गर्लफ्रेंड वगेरह बनाई क्या?
तो वो बोला- नहीं यार … और तूने?
मैंने भी कहा- नहीं।

फिर वो मज़ाक करते हुए बोला- तो तू ही बन जा मेरी गर्लफ्रेंड।
तो मैंने भी हंसते हुए कह दिया- तेरी गर्लफ्रेंड बनेगी मेरी जूती।

वो मज़ाक-मज़ाक में मुझे तकिए से मारने लग गया और मैं भी उसे तकिए से मारने लग गई।

इसी बीच मुझे एहसास हुआ कि वो खेलते – खेलते मेरे बूब्स छू रहा है।
मज़ा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए उसे खुद से दूर कर दिया।
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप बैठ गया।

फिर शाम को मेरे मम्मी – पापा आ गए और सब कुछ पहले की तरह चलना शुरू हो गया। मैं भी कॉलेज जाने लग गई। इस बीच मेरी राहुल से बहुत ही कम बात हुई या यूं कहें बात हुई ही नहीं।
बस ऐसे ही 2 महीने बीत गए पता ही नहीं चला।

अब मेरा एक पेपर भी आ गया था लेकिन ये पेपर जयपुर था। पापा को ऑफिस का काम था तो पापा बोले- मैं तो नहीं जा सकता हूं.
तो मम्मी बोली- अकेले नहीं जाना है।

अब बहुत सोच – विचार के बाद ये तय हुआ कि पापा राहुल के घरवालों से बात करेंगे कि राहुल मुझे जयपुर पेपर दिलवा कर ले आए।

तो पापा ने अगले दिन राहुल के पापा से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं। राहुल की भी छुट्टियां चल रही हैं। वो घर पर फ्री ही रहता है। वो परिधि के साथ जयपुर चला जाएगा।
तो अब तय हो चुका था कि राहुल मेरे साथ जयपुर जा रहा है।

मैं अब ये सोच रही थी कि उस दिन के बाद अब मैं कैसे राहुल से बात करूंगी? शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही कह दिया था।
खैर जो होगा देखा जायेगा।

पापा ने कहा- तुम दोनों ट्रेन से चले जाना, सेफ भी रहेगा।

लेकिन उन दिनों जयपुर जाने वाली ट्रेन काफी लेट चल रही थी। तो सबने मिलकर ये फैसला किया कि हम स्लीपर बस से जयपुर जाएंगे।
पापा ने हमारी डबल स्लीपर की टिकट बुक करवा दी थी।

अगले दिन शाम को पापा हम दोनों को बस में बैठा आए। मैं खिड़की की और बैठी थी और राहुल मेरे बगल में ही बैठ गया।

मुझे बस में नींद नहीं आ रही थी तो मैं फोन देखते हुए टाइम पास कर रही थी।
तभी राहुल ने पूछा- पेपर की तैयारी कैसी है?
तो मैंने कहा- ठीक – ठाक ही है।

इस प्रकार हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें शुरू हो गई थी।

कुछ देर बाद मैं फोन बन्द करके सो गई। हालांकि मुझे नींद नहीं आ रही थी बस मैंने आँखें बन्द की हुए थी।
उधर राहुल भी सो गया था।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि राहुल का हाथ मुझे टच कर रहा है।
मैंने सोचा कि जगह कम है इसलिए हो सकता है। मैंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं बस दूसरी ओर मुंह करके लेट गई।

फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि राहुल का हाथ मेरी कमर पर है लेकिन मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उसका हाथ धीरे – धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया। अब उसका हाथ मेरी गान्ड पर था। वो मेरी गान्ड पर गोल – गोल हाथ घुमा रहा था। शायद उसे लगा कि मैं सो गई हूं।

लेकिन अब मुझे भी उसका टच अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद वो मुझसे सटकर चिपक गया और सोने का नाटक करने लग गया।
मैंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर लाया और धीरे – धीरे मेरे बूब्स मसलने लगा। अब मेरे अंदर की भी अन्तर्वासना जाग चुकी थी। मेरे निपल्स खड़े होने लग गए थे और मैं अपनी सिसकारियां बड़ी मुश्किल से रोक रही थी।

धीरे – धीरे उसने अपने हाथ का दवाब बढ़ा दिया और अपने दूसरा हाथ मेरी चूत के उपर ले आया और मेरी चूत सहलाने लग गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड को छू रहा था। मेरी गान्ड उसके लन्ड के कड़कपन को महसूस कर रही थी.

अब तक उसे भी पता चल गया था कि मैं बस सोने का नाटक कर रही हूं।
वो मेरे बूब्स को जोर से मसलते हुए बोला- परिधि आई लव यू!
तो मैं भी बोल उठी- आई लव यू।

अब तो उसे खुली छूट मिल चुकी थी। अब वो जोर – जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरी चूत सहला रहा था। मेरी भी सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थी। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे चूत के दाने को सहलाने लगा।

मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उसका लन्ड मसलने लग गई थी। फिर उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ा और मेरे होंठ चूमने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लग गयी।

फिर उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट भी निकाल दी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लग गया और मेरी चूत में उंगली करने लगा। मैंने भी उसकी शर्ट और पैंट निकाल कर उसे एकदम नंगा कर दिया और उसका लन्ड आगे – पीछे करने लगी।

उसका लन्ड काफी बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें ऊपर की ओर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। अब तो मैं आपे से बाहर हो गई थी। वो लगातार मेरी चूत के दाने को चाट रहा था और मैं उसके सिर को जोर – जोर से दबा रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरी चूत में से गर्म – गर्म लावा निकलने लगा और राहुल उसे पी भी गया।

अब मैं शांत हो चुकी थी लेकिन उसने मेरी चूत को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म होने लग गई।

अब वो मेरे ऊपर आ गया और अपना बड़ा लन्ड मेरे होंठों के पास ले आया। वो अपने लन्ड से मेरे होटों को टच करने लगा तो मैं समझ गई और मैंने अपना मुंह खोल दिया। अब उसका लन्ड मेरे मुंह में था और मैं जोर – जोर से उसका लन्ड चूस रही थी।

उसका पूरा लन्ड गीला हो चुका था। अब राहुल ने अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला और उसे मेरी चूत पर मसलने लग गया।
तो मेरा बहुत ही बुरा हाल था। मैंने उसे आंखों से इशारा किया और उसने अपने लन्ड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे अचानक दर्द हुआ।

मैंने उसे वहीं रोक दिया।

फिर वो मेरे निप्पल सहलाने लगा और होंठ चूसने लग गया।

अचानक ही उसने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में था।
मेरी आंखों से आंसू निकलने लग गए थे लेकिन वो मेरे होंठ चूस रहा था इसलिए मैं चीख नहीं सकी।

अब उसने धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया. फिर मुझे भी मज़ा आने लग गया। मैं भी उसका साथ देने लग गई। वो कभी मेरे बूब्स चूसता तो कभी होंठ।
लगभग 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।

फिर जयपुर पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया. हमने रात को होटल के कमरे में एक बार और चुदाई की.

हम दोनों का ही मन था कि हम पूरी रात चुदाई करते रहें लेकिन अगले दिन मैंने पेपर देना था तो सोना भी जरूरी था.

और सुबह उठ कर मैं तैयार होकर पेपर देने गयी.

पेपर के बाद हमने होटल छोड़ दिया और बस से वापस दिल्ली आ गए।

उसके बाद से मुझे भी अपनी चुदाई में मजा आने लगा था, मुझे चुदाई की लत लग गयी थी. राहुल तो हर वक्त मुझे चोदने को तैयार रहता था. तो हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते थे।

एक बार राहुल ने मेरी गान्ड भी मारी थी। लेकिन वो कहानी किसी और दिन।

फिर राहुल के पापा का ट्रान्सफर रांची हो गया। तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।

तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली सच्ची सेक्स कहानी। आपको मेरी पहली बार सेक्स करने की कहानी अच्छी लगी या नहीं?

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ये सेक्स क्या होता है

नमस्कार दोस्तो, मैं रागिनी सिंह हाजिर हूँ आपके सामने अपनी पहली कहानी लेकर, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है जिसमें आपको भरपूर मज़ा मिलने वाला है। यह कोई कहानी नहीं बल्कि एक सच्चाई है जो की मेरे बारे में है। यह सच्ची कहानी बहुत बड़ी है जो की कई भागो में आप तक भेजी जाएगी।
तो दोस्तों तैयार हो जाइये मेरी सच्ची कहानी पढ़ने के लिए।

मेरा नाम रागिनी सिंह है मेरी उम्र 23 साल है मेरी फैमिली में मेरे पापा अजय सिंह (45 वर्ष) मेरी मम्मी अन्नू सिंह (43 वर्ष) और मेरा भाई आशू सिंह (18 वर्ष) है। मेरा परिवार दिल्ली में रहता है। मेरे पापा स्कूल टीचर हैं और मम्मी हाउसवाइफ है, मैं कॉलेज में एम एस सी की स्टूडेंट हूँ और मेरा भाई अभी 12वीं में है।

आप सबको मैं अपने पुराने समय के बारे में कुछ बता दूं तो ज्यादा अच्छा होगा। बचपन में जब मैं 5 साल की थी तब मेरे भाई का जन्म हुआ, धीरे-धीरे समय बीतता गया अब मैं 10 की तथा मेरा भाई 5 साल का हो गया। वह बचपन से ही मुझे बहुत प्यारा लगता था, हम दोनों का कमरा एक ही था। वह देखने में जितना क्यूट था उतना ही नटखट भी था, अक्सर वह मुझसे लड़ता झगड़ता था। आशू मेरे सामान को हमेशा इधर उधर बिखेर देता था जैसे- मेरी किताबें, कपड़े आदि।
अब वह स्कूल जाने लगा था घर पर मैं उसकी पढ़ने में मदद किया करती थी।

धीरे-धीरे हम बड़े होते गए, मैं जवानी की दहलीज पर खड़ी थी और आशू अब 13 साल का हो गया था। पर उसके बड़े होने के साथ साथ उसकी शैतानियाँ भी बढ़ गयी थी, वह मुझे परेशान करने का एक भी मौका नहीं छोड़ता था। अब मैं 18 की हो गयी थी, मेरी जवानी खूब निखर के आई थी मुझ पर। 18 की उम्र में 22 की लगती थी मेरे उरोजो में गजब की वृद्धी हुयी थी। 18 की उम्र में ही मेरा साइज़ 34-28-32 का हो गया था और अभी तक मैं कुंवारी थी पर सेक्स के बारे में पूरी जानकारी रखती थी। स्कूल में मेरी सहेलियां मुझसे मेरी जवानी देख के जलन रखने लगी थी। लड़के तो देख देख के ही आहें भरते थे, कइयों ने तो प्रपोज भी कर दिया था पर मुझे इन सब में कोई इंटरेस्ट नहीं था उस समय। मैं तो सिर्फ अपनी पढाई में ध्यान लगाये हुयी थी क्योंकि 12वीं बोर्ड का एग्जाम था।

घर पर अक्सर मैं कम्फर्टेबल रहना पसंद करती थी चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो जैसे- सोना, कपड़े पहनना आदि। मुझे ढीले कपड़े पहनना ज्यादा पसंद था, मैं घर पर अंडरगारमेंट बहुत कम पहनती थी। बिना अंडरगारमेंट के मैं बहुत अच्छा महसूस करती थी, सोते वक्त बिना कपड़ों के ही सो जाती थी। कपड़ों के बिना सोने का अपना ही मजा है और बिना अंडरगारमेंट के तो कुछ अलग ही आनंद है। कई बार तो मैं स्कूल में भी अंदर बिना कुछ पहने ही चली जाती हूँ, मेरे स्कूल का ड्रेस कोड है- नीले रंग का स्कर्ट जोकि घुटनों तक होता है, सफ़ेद रंग का शर्ट और धारीदार ग्रे कलर की टाई।

एक दिन रविवार को घर पर मैं अपने कमरे में बैठकर पढ़ रही थी, तभी मेरा भाई आशू आया और मेरी किताबें इधर उधर करने लगा.
मैंने उससे कहा- मुझे डिस्टर्ब न कर आशू, मुझे पढ़ने दे!
पर वह मेरी बात को अनसुना करके अपनी शरारत में मस्त था।
मैंने तेजी दिखाते हुए एक झटके से अपनी किताब उससे ले ली, ऐसा होते ही वह मुझ पर टूट पड़ा और मुझे गिराकर मेरे ऊपर बैठ गया तथा हाथापाई करने लगा। इस लड़ाई में उसके प्रहार से मैं अपने आप को बचा रही थी क्योंकि मैं उसे चोट नहीं पहुँचाना चाहती थी।

वह मेरे मम्मों पर बैठा था जिससे वे एकदम से दबे हुए थे मुझे तकलीफ हो रही थी। लेकिन वह उठने का नाम ही नहीं ले रहा था आखिर मुझे हारकर अपनी किताब उसे देनी पड़ी तब जाकर वह मेरे ऊपर से हटा। अब जाकर मुझे राहत महसूस हुई.

मेरे बगल में बैठ कर वह मुझे जीभ निकाल कर चिढ़ा रहा था। ऐसी ही मासूम सी हाथापाई हमेशा हम दोनों के बीच होती रहती है, जिसमें कभी कभी वह मजाक में मुझे गुदगुदी करने लिए मेरे मम्में भी दबा देता है। यह सिलसिला लगभग रोज का रूटीन बन गया है, सोने के समय तो वह जरूर मुझसे शैतानियाँ करता है। हमारा रूम छत पर होने की वजह से मम्मी पापा को इस के बारे में पता नहीं चल पाता। हम ज्यादातर छत पर ही रहते हैं, हमारे रूम के बगल में ही हमारा अलग बाथरूम भी है। नीचे वाले फ्लोर पर मम्मी पापा रहते हैं तथा किचन भी वही है और उनका बाथरूम भी। टीवी भी वही किचन के बगल में हाल में है।

एक दिन मैं बाथरूम में नहा रही थी, तभी मेरा भाई भी नहाने के लिए अंदर घुस आया. उसे पता नहीं था कि मैं अंदर नहा रही हूँ। नहाते वक्त मैं बाथरूम का दरवाजा लॉक नहीं करती थी क्योंकि ऊपर जल्दी कोई आता नहीं था, आशू ही ऊपर होता था जिससे मुझे कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि अभी वह छोटा था। तो आशू भी बाथरूम में घुस आया था नहाने के लिए!

मैं वहाँ पर नंगी होकर नहा रही थी. पहले तो मैं डर गयी कि कौन आ गया। जब देखा कि आशू है तो जान में जान आई।
अब डरने की बारी आशू की थी, वह मुझे पहली बार नंगी देख रहा था, मुझे बाथरूम में नंगी देखकर तो पहले तो उसकी आवाज ही नहीं निकल रही थी, वह मुझे एकटक घूरे जा रहा था। डर के मारे उसकी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी, मेरे डर से वह काम्प रहा था। वह डर इसीलिए रहा था कि कहीं मैं मम्मी पापा से उसकी शिकायत न कर दूँ कि यह मेरे बाथरूम में घुस गया था।
मुझे उसको देखकर हंसी आ गयी, मैंने पूछा- क्या हुआ आशू?
वह हकलाते हुए बोला- क..क..क.. कुउउउच्चछ… कुछ नहीं दीदी।
और इतना कहते ही वह जाने को हुआ तो मैंने पूछा- नहाना है तुमको?
तो वह बोला- जी दीदी।
मैंने कहा- ठीक है, आ जाओ साथ में नहाते हैं.

मैंने उससे कपड़े निकालने को कहा तो उसने धीरे धीरे अपने कपड़े निकाल कर अलग कर दिए और मेरी तरह बिल्कुल नंगा हो गया। अब हम साथ में बैठकर नहाने लगे, मैं उसको नहलाने लगी जैसे एक माँ अपने बच्चे को नहलाती है, वह भी चुपचाप बैठकर नहा रहा था।

आशू के शरीर पर मैंने साबुन लगाना शुरू किया और हर एक जगह मैंने अच्छी तरह साबुन लगाया, उसके नुन्नू पर भी। उसका नुन्नू अभी छोटा था तक़रीबन 3 इंच का रहा होगा। नहाने के बाद हमने अपने कपड़े पहने और अपने अपने काम में लग गए, मैं एग्जाम की तैयारी करने लगी और आशू अपना होमवर्क करने लगा। अब लगभग रोज ही हम दोनों साथ साथ नहाने लगे थे और एक दूसरे के अंगों को पकड़कर देखने भी लगे थे।

उस दिन के बाद से मैं अपने रूम में आशू के सामने ही कपड़े बदल लेती थी, नंगी हो जाती थी। आशू भी मेरे सामने ही अपने कपड़े बदल लेता था।

जैसा मैंने बताया था कि मुझे रात को सोते वक्त नंगी होकर सोना ज्यादा पसंद है। दिसम्बर का महीना था ठण्ड पड़ रही थी, मैं नंगी होकर रजाई में लेटी थी, आशू नीचे पापा के साथ टीवी देख रहा था। कुछ देर तक टीवी देखने के बाद वह ऊपर सोने के लिए आया.

मैं जाग रही थी, आते ही वह रजाई में घुस कर मुझसे चिपक गया। रजाई में घुसने पर उसको पता चल गया कि मैं नंगी हूँ, वह अपने हाथ मेरे ऊपर फिराने लगा। वह मेरे मम्मों को टटोल रहा था.
आशू को मेरे मम्मों से ज्यादा प्यार है.

मेरा भाई मेरे निप्पल को उमेठ रहा था, मैंने पूछा- ऐसा क्यों कर रहा है?
तो वह बोला- दीदी, मुझे आपका दूध पीना है।
मैंने कहा- मुझे अभी दूध नहीं आता!
तो वह बोला- क्यों? आपको दूध क्यों नहीं आता दीदी?

तब मैंने उसको दूध आने की पूरी प्रक्रिया बताई।
मेरी बात सुनने के बाद वह बोला- मुझे तो आपके दूध पीने हैं तो पीने हैं.
मैं उसकी बचकानी बात पर हंसने लगी और बोली- ठीक है पी ले जैसी तेरी इच्छा।

मेरे हां कहते ही आशू ने मेरे निप्पल चूसना शुरू कर दिया और बारी बारी से वह एक दुधमुंहे की तरह मेरे चूचियों को चूसता रहा, चूची चूसते चूसते कब उसे और मुझे नींद आ गयी, पता ही नहीं चला।
अब यही प्रक्रिया लगभग रोज होने लगी, अब आशू को बगैर मेरी चूची चूसे नींद ही नहीं आती थी. शायद मुझे भी अब चूची चुसाने की आदत पड़ गयी थी। लेकिन इस सब में सेक्स नाम की कोई चीज नहीं थी. यह तो भाई बहन का प्यार था.

धीरे धीरे हमारी उम्र बढती गयी अब मैं 23 साल की तथा आशू 18 साल का हो गया था।

अब आशू जवान हो गया था तथा उसका नुन्नू अब 3 इंच से 6 इंच का हो गया था। मेरे शरीर का साइज़ भी अब बदल चुका था इन 5 सालो में जो चूचियां कभी 34 की हुआ करती थी वह अब 36 की हो गयी थी। अब मेरा साइज़ 36-30-34 की हो गयी थी, मेरे सगे भाई ने मेरी चूचियां चूस चूस के बड़ी कर दी थी। इतनी चुसाई होने के बाद भी मेरे मम्में अभी भी पूरी तरह से टाइट थे, देखने में लगता था जैसे दो गोल गोल खरबूजे लटक रहे हो बिल्कुल हॉरर माडल डैनी डीवाइन की तरह।

एक दिन मैं घर पर अकेली थी, पापा स्कूल पढ़ाने गए थे, मम्मी भी मामा के यहाँ गयी थी और आशू स्कूल गया था। मैं घर का सब काम निपटा के नहाने चली गयी, नहाने से पहले मैंने पूरे शरीर पर वैक्स किया था।
नहाकर मैं नंगी ही वापस कमरे में गयी और बाल सुखाकर तथा मेकअप करके घर में उसी अवस्था में घूमने लगी। कुछ देर टीवी देखा और वहीं पर नंगी ही सो गयी.

नींद में ही डोरबेल की आवाज सुनाई पड़ी तो मेरी आँख खुली। मैंने कीहोल से बाहर देखा तो आशू था, मैंने कपड़ा पहनना मुनासिब नहीं समझा और दरवाजा खोल दिया।
जब वह अंदर आया तो मुझे नंगी देखकर बड़ा खुश हुआ, आशू तुरंत मेरी ओर लपक पड़ा। इससे पहले की वह मुझ तक पहुँचता, मैंने दरवाजा लॉक कर दिया, दरवाजा बंद होते ही वह मेरी चूचियों पर टूट पड़ा।

आशू बोला- दीदी, आपके दूध मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, मन करता है हरदम इन्हें पकड़ के चूसता रहूँ।
मैंने भी झट से बोल दिया- तो चूसो … मना किसने किया है।
आशू एक एक करके मेरे मम्मों को वही खड़े खड़े दबाने व चूसने लगा, मुझको भी मज़ा आने लगा।

15-20 मिनट चूसने के बाद जब उसका मन भर गया तो उसने मेरे मम्मों को छोड़ दिया और मुस्कुराते हुए कमरे की ओर जाने लगा. मैं भी उसको देखकर मुस्कुरा रही थी। आज तक हमारे दरमियान कभी भी सेक्स की फीलिंग नहीं थी, हम दोनों ऐसा करते हुए एक अलग ही लेवल के आनंद में डूब जाते थे। ऐसा करते हुए मुझे लगता कि मैं एक माँ हूँ और अपने बच्चे को दूध पिला रही हूँ। आशू को अभी तक सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था, हाँ इतना जरूर था कि जब वो मेरी चूचियों को चूसता तो उसका नुन्नू जो अब एक लंड बन गया था, जरूर तन जाता था।

जब भी उसका लंड तन जाता तो वह उसे पकड़ के मुझे दिखाता और कहता दीदी- ये देखो मेरे नुन्नू को क्या हो गया ये इतना बड़ा और मोटा हो गया।
मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती और कहती- कुछ नहीं हुआ, अभी ठीक हो जायेगा.

ऐसे ही चलता रहा, एक महीना बीत गया। अगस्त का महीना था एक रात को हम दोनों बिल्कुल नंगे लेटे लेटे बातें कर रहे थे उसका लंड तना हुआ था, वह उसको पकड़ के मुझे दिखाते हुए बोला- ऐसा क्यों होता है दीदी?
तब मैंने उसे समझाते हुए सब कुछ बताया तथा यह भी बताया कि यह पुरुष और महिला के अट्रैक्शन के कारण होता है। यह उत्तेजना के कारण होता है।
आशू बोला- इसको ठीक कैसे करते हैं?
मैंने कहा- सेक्स करके या फिर अपने हाथ से!

फिर उसने मुझसे पूछा- ये सेक्स क्या होता है दीदी?
तब मैंने उसको बताया- जब इस नुन्नू को किसी लड़की के (अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए) यहाँ पर डालते हैं तो उसको सेक्स करना कहते हैं।
आशू फिर पूछने लगा- ये हाथ से कैसे होता है?
तब मैंने उसको बताया- इसको मुट्ठी में पकड़ के आगे पीछे करते रहने से ये कुछ देर में शांत हो जाता है।

आशू कहने लगा- दीदी, मुझे आपके साथ सेक्स करना है.
मैंने उसे समझाया- ये सब भाई और बहन के बीच नहीं होता।
मैंने कहा- आशू जब तुम्हारी शादी हो जाएगी, तब तुम अपनी पत्नी के साथ सेक्स करना।

वह जिद करने लगा तो मैंने कहा- अच्छा इधर आओ, मैं अपने हाथों से तुम्हारे नुन्नू को शांत कर दूँ।
वह मेरे पास आ गया, मैंने उसको खड़ा होने को कह दिया वह मेरे चेहरे के सामने खड़ा हो गया। मैं घुटनों के बल बैठ गयी तथा उसके लंड को अपने हाथो में पकड़ा और आगे पीछे करते हुए हिलाने लगी, वह धीरे धीरे मदहोशी में खो गया और आँखें बंद कर ली।

आँखें बंद करके वह आहें भरने लगा- सस.. सस आह… उह.. सस एस्स.. आह दीदी, बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसे ही करती रहो।
तकरीबन 15-20 मिनट लंड हिलाने के बाद उसका लंड फूल गया.

इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उसके लंड से पिचकारी निकली जो सीधे मेरे माथे से जा टकराई, मैं संभल पाती इससे पहले दूसरी पिचकारी निकली जो मेरे होठों पर जा गिरी, फिर उसके लंड ने मेरी चूचियों पर अपना बचा हुआ माल उलट दिया, धीरे धीरे आशू का लंड झटके खा खा कर शांत हो गया।

अब मैंने अपने होंठों पर अपनी जीभ फिराई जहां आशू का माल गिरा था, मुझे उसका स्वाद नमकीन सा लगा जो थोड़ा अजीब था पर टेस्ट अच्छा था तो मैं पूरा चाट के साफ़ कर गयी।
आज आशू पहली बार झड़ा था तो माल भी बहुत ज्यादा निकला था जो मेरी चूचियों पर साफ़ देखा जा सकता था।

झड़ने के बाद आशू वही बेड पर लेट गया उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थी।

कुछ देर बाद जब उसकी आँखें खुली तो वह बहुत खुश दिखाई दे रहा था।
मैंने पूछा- कैसा लगा?
तो वह बोला- बहुत मज़ा आया।

अब हम दोनों भाई बहन वहीं बेड पर लेटे लेटे जो कुछ हुआ उसके बारे में बातें करने लगे।

कुछ देर बात करने के बाद आशू बोला- दीदी, अब मेरा नुन्नू आप रोज हिलाना, आज मुझे बहुत अच्छा लगा।
मैंने उसको समझाया- ये रोज रोज करना अच्छा नहीं है अभी से, अभी तुम छोटे हो सेहत पर बुरा असर पड़ेगा।
मेरी यह बात उसको अच्छी नहीं लगी।

कुछ देर चुप रहने के बाद आशू नाराज होते हुए बोला- अगर आप को नहीं करना तो ना करो, मैं खुद ही कर लूँगा।
मैंने उस टाइम उसको तसल्ली दिला दी- ठीक है, मैं ही कर दूंगी, पर अभी सो जाओ रात बहुत हो गयी है।

सुबह हम दोनों सोकर उठे, फ्रेश होने के बाद हम दोनों साथ में नहाये। आशू नाश्ता करके स्कूल चला गया, कुछ देर बाद मैं भी कॉलेज चली गयी।

रात को वह मेरे पास आया और अपने कपड़े निकाल के बिस्तर में घुस गया। मैं पहले से ही नंगी रजाई के अंदर पड़ी थी, रजाई में घुसते ही उसके हाथ मेरी चूचियों पर टहलने लगे। कुछ देर मेरी चूचियों को दबाने के बाद वह एक एक करके उन्हें चूसने लगा।

अनायास ही मेरा हाथ उसके लंड पर चला गया जो अब पूरी तरह से तन गया था।

आशू मेरी चूचियों को दबा दबा के चूस रहा था जिससे आज मेरी भी उत्तेजना जाग गयी थी, मुझे भी मज़ा आने लगा था। जोश में मैं भी उसके लंड को तेजी से आगे पीछे करने लगी, आशू की सिसकारियाँ निकलने लगी- आह.. हम्म… उम्म्ह… अहह… हय… याह… स्स्स्स… ऊह्ह… ओह्ह… दी… दी… आह। बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे ही करती जाओ।
आज तो मेरा भी मन डोल गया था, अब मेरे अंदर की वासना हिलोरें लेने लगी थी। मैं खुद को ना रोक पाई और रजाई में मैं आशू के लंड के पास पहुँच गयी थी।

लंड के पास पहुंचते ही मैंने तपाक से उसको मुंह में भर लिया और चूसने लगी। आशू अपने लंड पर मेरे होठों का स्पर्श होते ही चिहुँक पड़ा और बोला- ओह दीदी, ये क्या किया आपने … बहुत मजा आ रहा है। ऐसे ही चूसती रहो, मैं तो जन्नत की सैर कर रहा हूँ दीदी।

मैं भी पूरी पोर्न फिल्मो को रंडियों की तरह अपने भाई का लंड चूसे जा रही थी, मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था. अब मैं एक हाथ से लंड पकड़ के चूस रही थी तथा एक हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी।
10-12 मिनट लंड चूसने के बाद आशू को उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हुई और उसने मेरे मुंह में ही पिचकारी छोड़नी शुरू कर दी, मेरा मुंह उसके लंड के माल से भर गया जिसे मैं पूरा गटक गयी।

इसी दौरान मैं भी भाई के लंड का पानी पीने की उत्तेजना में मैं भी झड़ने लगी। मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगी- आह… ह्म्म्म… यस्सस… ओह्ह्ह… आशूशूशू… य्म्म्म!

अब यही प्रक्रिया रोज रोज होने लगी आशू मुझसे अपना लंड चुसा के मजा लेता और मैं अपनी उँगलियों से खुद को शांत कर लेती। हमें जब भी मौका मिलता हम दोनों नंगे होकर अपने काम में लग जाते। अब तो मुझे आशू के लंड के पानी लत लग गयी थी, घर का कोई ऐसा कोना नहीं बचा था जहां पर मैंने आशू का लंड न चूसा हो। यहाँ तक की घर के बाहर लॉन में भी मैंने उसके लंड को चूस के शांत किया था।
मैं ऐसे ही 2-3 महीनों तक अपने भाई का लंड चूसती रही। हम दोनों बहुत खुश थे।

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मैं प्यासी औरत हूँ

दोस्तो, आप सभी को मेरा नमस्कार, मेरा नाम सुनीता है. मैं थोड़ी प्यासी औरत हूँ. वैसे मेरे पति तो मुझे चोदते ही हैं लेकिन मुझे और ज्यादा चुदवाने का मन करता है. मेरा अन्दर बहुत सेक्स है. मेरे पति जब भी मुझे चोदते हैं तो वो जल्दी झड़ जाते हैं जबकि मैं और सेक्स के लिए तड़पती रहती हूँ.
मेरी सेक्स की तड़प ने ही मुझे अपनी चूत में उंगली करने के लिए मजबूर कर दिया और मैं अपनी चूत में उंगली करके अपनी चूत को शांत करती हूँ. मेरा मन जब नहीं लगता है तो कभी कभी अन्तर्वासना सेक्स कहानियां पढ़ती हूँ जिससे मुझे बहुत अच्छा लगता है.

मैं आप अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ जो मेरे और मेरे देवर की है.
जब पति से चुदकर मेरी चूत को शांति नहीं मिली तो मैं अपने देवर से अपनी चूत शांत करवाने लगी. वो भी क्या दिन थे जब मैं अविवाहिता थी तो मुझे बहुत लंड मिलते थे चुदवाने के लिए … लेकिन ससुराल में तो डर लगता है. किसी का लंड अपनी चूत में लेने से! अगर मेरे ससुराल वालों को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी.
वैसे मैं मौका देख कर किसी न किसी को पटा लेती हूँ और उससे चुदवा लेती हूँ. ज्यादातर लोग तो मुझे ही पटाते हैं मुझे चोदने के लिए. और मैं भी अपने जिस्म का बहुत ध्यान रखती हूँ.

मेरे पति थोड़ा पैसा भी कम कमाते हैं और मेरा देवर मेरे पति से ज्यादा पैसा कमाता है. वैसे मुझे यह पता था कि मेरा देवर मुझे शुरू से ही पसंद करता था क्योंकि वो हमेशा मेरे लिए कुछ न कुछ बाजार से लाता रहता था, मुझे त्योहार पर उपहार भी देता था.
मैं अपने देवर को कभी गलत नजरिये से नहीं देखती थी. मैं भी अपने देवर को बहुत मानती थी. मेरे पति मुझे अच्छे से नहीं चोद पाते थे या मैं ही थोड़ा ज्यादा चुदासी थी कि मुझे अपने पति के लंड के अलावा भी दूसरे के लंड से चुदवाने का मन करता था.

मैं अपने देवर से पहले से ज्यादा बातें करने लगी. मैं जब भी अपने देवर को सुबह में चाय देने जाती थी तो उनका खड़ा लंड देखती थी.

एक दिन देवर ने मुझे उनका खड़ा लंड देखते हुए देख लिया और बोले- भाभी क्या हुआ, आपको कुछ चाहिए?
मेरे देवर अपने लंड की तरफ देख कर मुझसे बातें कर रहे थे. मेरे देवर ने पहली बार मुझसे डबल मीनिंग में बात की थी.

अब तो उसी दिन से हम दोनों लोग गंदे गंदे मजाक करने लगे. अब तो मेरे पति जब जॉब करने जाते थे तो मैं घर का सारा काम करके अपने रूम में आराम से सोती थी. दोपहर में मेरा यही काम था कि मैं दोपहर में सोती थी.

एक दिन मैं दोपहर में अपने रूम में सो रही थी. उस दिन मेरे देवर अपने जॉब पर नहीं गए थे. मैं सोते समय अपनी साड़ी खोल एक ब्लाउज और पेटीकोट में सोती हूँ. इससे मुझे सोने में आराम रहता है और नींद भी अच्छी आती है. मैं रात को भी ब्लाउज और पेटीकोट में ही सोती हूँ.
मैं अपने रूम में दोपहर को सो रही थी और मेरी पेटीकोट मेरे जांघों तक आ गयी थी. मेरी पेंटी दिख रही थी और मैं सो रही थी. मेरा देवर मेरे कमर में आकर मेरी पेंटी को देख रहे थे. मैं जब थोड़ा नींद में उठी तो देखा कि मेरा देवर मेरी पेंटी को बहुत ध्यान से देख रहा है.

मैंने अपने देवर की तरफ देखा तो मेरा देवर मुझे देख कर मुस्कुराने लगा और बोलने लगा- भाभी, आप सोते समय बहुत सेक्सी लगती हो. आप कभी मेरे साथ भी सो लिया करिए.
मैं अपने देवर की डबल मीनिंग बात समझ गयी. मैं समझ गयी कि मेरा देवर भी मुझे चोदना चाहता है. मेरी उभरे हुए चुचे और बड़ी गांड जो थोड़ी सी उभरी हुई है.

मेरा देवर मेरे जिस्म को देख कर दीवाना हो गया. मेरा देवर मेरे जिस्म की तारीफ करने लगा- भाभी आप बहुत सुन्दर हो. भईया तो आपको खूब रात में प्यार करते होंगे.
मैं यह बात सुनकर थोड़ा उदास हो गयी क्योंकि मुझे अपने पति से चुदाई का सुख नहीं मिल पाता था जैसा मैं चाहती थी. वैसा मेरा पति मुझे नहीं चोदता था.

मेरे देवर मेरे पास आया और बोला- भाभी क्या बात है. आप मुझे बताओ मैं हूँ न आपकी सहायता करने के लिए!
मैंने अपने देवर को बताया- मेरे पति को अब ज्यादा मुझमे रूचि नहीं है. मेरे पति अब मुझसे ज्यादा प्यार नहीं करते हैं जैसा वो पहले करते थे.

मेरा देवर यह बात सुनकर बोला- भाभी मैं हूँ ना आपका देवर … मैं आपसे प्यार करूँगा.
मैं और मेरा देवर हम दोनों लोग एक दूसरे से नज़रें मिलाकर बात कर रहे थे. मेरा देवर मुझे देख कर थोड़ा हवस भरी नजरों से मुझसे बातें कर रहा था.

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अनदेखे लण्ड की चाह

मैंने बी एस सी पास कर ली थी, एक दिन मम्मी पापा की बात सुन ली। “यशू तो अब ग्रेजुएट हो गई है, अब उसका ब्याह कर देना चाहिये।” पापा ने मम्मी से कहा। हाँ, ठीक है, बी एड तो बाद में भी कर लेगी। आप संजीव की बात कर रहे हैं ना? हाँ वही ! खासी पैसे वाली पार्टी है, मुम्बई में अच्छा बिजनेस है। लड़का भी सुन्दर है देखा-भाला है। मैंने भी संजीव को देखा था वो तो बिल्कुल रणवीर कपूर की तरह स्मार्ट और सुन्दर था। उसके पास तो कई कारें थी। मेरा मन खुशी से भर गया। बात चल निकली थी, sexy stories पत्राचार होने लगा था, सगाई का समय दिवाली के बाद तय हुआ और शादी गर्मी के दिनों में तय हुई।

सभी कुछ अब तो निश्चित ही था, समय पास आता जा रहा था। वर्षा ॠतु भी बीत चुकी थी… नवरात्रे चल रहे रहे थे, मैं तो बस संजीव के ख्यालों में खोई रहने लगी थी। कभी कभी रात को मुझे उसके सलोने शरीर का भी विचार आ जाता था। उसका लण्ड कैसा होगा… उमेश की तरह…? उंह नहीं… अंकित की तरह होगा… ना ना वो तो ठिगना है तो फ़िर? मेरा संजीव तो लम्बा है… यानि कुछ कुछ राहुल जैसा होगा संजीव… उसका लण्ड भी राहुल की तरह मोटा और भारी होगा…? कैसा लगेगा जब वो मेरी फ़ुद्दी में घुसेगा तो…? मुझे पता है वो तो राहुल के लण्ड की तरह ही मस्त होगा।

फिर रात को जाने कब मैं चुदाई के बारे में सोच सोच कर झड़ तक जाती थी। उफ़… सत्यानाश हो इस जवानी का…। अभी तो दशहरा आने वाला था फिर दीवाली… कोशिश करूँगी कि सगाई के समय एक बार तो उससे चुदवा ही लूँ… पर दीवाली में तो अभी एक महीना है… धत्त… साला कैसे समय कटेगा।

उन्ही दिनों मेरा चचेरा भाई अशोक मेरे घर आया हुआ था। साधारण कद काठी का दुबला पतला सा… पर चंचल स्वभाव का था वो। उसने बस इसी साल कॉलेज में प्रवेश लिया ही था।

मेरा तो रोज ही संजीव के बारे में सोच सोच कर बुरा हाल हो रहा था। अब तो मुझे लगने लगा था कि बस वो एक बार आ कर मुझे जोर से चोद जाये। एक अनदेखे लण्ड की चाह में मेरी चूत बार बार टसुए बहा रही थी।

मुझे शादी के बारे में कुछ गुप्त बातें पता भी करनी थी कि कैसे मर्द को खुश रखा जाता है, उसे वास्तव में क्या क्या चाहिये होता है… और भी ना जाने क्या क्या मन में था। चुदाई के बारे में तो मैं सब कुछ जानती थी, शायद उसमें कुछ भी जानना बाकी नहीं था। फ़िलहाल अभी तो अशोक आंखो के सामने था। अभी तो मुझे संजीव जैसा तो अशोक ही नजर आ रहा था… । उसी से पूछूँगी… वो तो सब बता ही देगा। पर मेरे छोटे से मन को कौन समझाये कि अशोक तो खुद ही एक नासमझ लड़का था… जाने वो क्या समझ बैठे।

मैंने अशोक को जाते देख कर आवाज दी- कहाँ जा रहा है?

“बस मन्दिर तक… अभी आता हूँ।”

घर के सामने ही मन्दिर था। वो दस मिनट में ही आ गया- हाँ, बोल क्या बात है?

“अरे यार, कुछ प्राईवेट बात है, उधर चल…!”

मैं उसे अपने कमरे में ले आई और उससे धीरे से कहा- यार अशोक, तुझे तो मालूम ही है मेरी शादी होने वाली है।”

“वो तो सबकी होती है, इसमे परेशान होने वाली कौन सी बात है?”

“अरे शादी तो ठीक है… मुझे तो कुछ पूछना है।”

“अच्छा तो पूछ… क्या पूछना है।”

“मान लो यदि तेरी शादी होती तो तुझे तेरी पत्नी से क्या उम्मीदें होती?”

“अरे यशोदा… मेरी बहन… मत पूछ… बस सबसे पहले तो मैं चाहूँगा कि वो मुझे खूब प्यार करे…!”

“अच्छा और…?”

“फिर बस मस्ती से चुदवा ले ! अरे… सॉरी…”

“अरे कुछ नहीं… चलता है। मरवायेगा साला… धीरे बोल…”

उसके इस तरह ‘चुदवा ले’ कहने मुझे एक अजीब सा अहसास हुआ।

“क्या हुआ… ओह… मेरा मतलब है सुहागरात से था…”

“नहीं वो तो ठीक है… पर फिर तुम उससे क्या अपेक्षा रखोगे…?”

“यशू… रात को बताऊँगा… पर नाराज मत होना !”

“साला, तू क्या बतायेगा, ठीक है शाम को ही सही।”

मुझे तो उसकी बातों से लगा कि वो मुझे फ़्लर्ट करना चाह रहा है। साला कैसा बोला था मस्ती से चुदवा ले… फिर मुझे उसके लिये कुछ कशिश सी महसूस होने लगी। शायद यह संजीव के बारे में अधिक सोचने के कारण थी कि मैं अनजाने में ही चुदासी हो रही थी। मैं फिर से आकर बिस्तर पर लेट गई। मेरे मन में फिर से ऐसा लगने लगा कि संजीव मानो मुझे चोद रहा हो। मेरा काला टाईट पजामा मानो शरीर में चुभने लगा था। मेरी छोटी छोटी सी चूचियाँ कड़ी हो गई। निप्पल तो फ़ूल कर जैसे फ़ट जायेंगे। ओह्ह… मैंने जल्दी से अपनी टाईट पजमिया उतार दी और एक ढीला ढाला सा घर का पायजामा पहन लिया। पर तन तो जैसे अकड़ा जा रहा था। उसी समय वहाँ से अशोक गुजरा। ना चाहते हुये भी मैंने उसे आवाज दे कर अपने कमरे में बुला लिया, तुरन्त दरवाजे को बन्द कर दिया।

“वो तूने तो बताया ही नहीं कि…?”

“चुप… देख बताता हूँ… तूने कभी किसी लड़के से दोस्ती की है?”

“अरे ना बाबा ना… मैंने तो किसी लड़के के बारे में सोचा तक नहीं !” झूठ बोलने में तो मेरा क्या जाता। मैं क्यू बताऊँ कि मैं तो स्कूल के समय से ही चुदाती आ रही हूँ।

“तभी तो ये उतावलापन है… तुझे तो पूरा ही समझाना पड़ेगा।”

“तो समझा दे ना रे… मुझे भी कुछ तो पहले से ही मालूम रहेगा।”

“देख, तू यहाँ बिस्तर पर बैठ जा… हाँ ऐसे…”

उसके बताने पर मैं बिस्तर पर अपने पांव को समेट कर बैठ गई। उसने पास में पड़ी मेरी चुन्नी मेरे सर पर यूँ डाल दी जैसे कि घूंघट हो। मुझे तो ये सब पता था… पर उसके साथ ये सब करने में खेल जैसा लग रहा था।

“अब मान ले कि मैं संजीव हूँ… देख बीच में कोई गड़बड़ मत करना… मुझे संजीव ही समझना।”

“अरे ठीक है ना… अब आगे तो बोल।”

उसने आगे बढ़ कर धीरे से मेरा घूंघट उठाया और मेरी ठुड्डी पकड़ कर मेरा चेहरा ऊपर उठाया। मुझे तो वास्तव में अब शरम आने लगी थी।

“बहुत खूबसूरत लग रही हो।”

मेरी आँखे स्वतः ही झुक गई थी, शर्म सी भी आने लगी थी, मानो सच में संजीव ही हो।

“तुम्हारे गोरे गोरे गाल, ये सुन्दर आँखें, ये गुलाबी होंठ… चूमने को मन करता है।”

अरे बाप रे… मेरी तो सांसें अपने आप तेज होने लगी। छोटी छोटी छतियाँ लम्बी सांसों के कारण ऊपर नीचे होने लगी। उसका चेहरा मेरे नजदीक आ गया। उसने जानबूझ कर मेरे होंठो से अपने होंठ टकरा दिये। मेरी आँखें किसी दुल्हन की तरह बन्द सी होने लगी।

उसने थोड़ा सा इन्तजार किया… मेरे विरोध ना करने पर उसने मेरे होंठ अपने होंठों पर दबा दिये। मेरा मुख अपने आप खुल गया… उसने मेरे नीचे के होंठ अपने होंठों से चूस लिये। मैंने भी उसकी सहायता की। मुझे भी लग रहा था कि इस समय मुझे कोई रगड़ कर रख दे ! मेरा सारा तन झनझना रहा था, एक अनजानी कसक से तड़पने लगा था। मेरी चूचियाँ तन कर कठोर हो गई थी।

अचानक उसके हाथ मेरे छोटे से कठोर मम्मों पर आ गये। मुझे राहत सी लगी… बस अब जोर जोर से दबा दे मेरी तड़पती हुई चूचियों को…

उसने मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। वो मुझ पर तिरछा लेट गया। वो मुझे बेतहाशा चूमने लगा। मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगी थी। मेरा तन चुदासा होता जा रहा था… चूत को लण्ड खाने की जोर से लग रही थी। यह भूल गई थी कि ये सब मेरे साथ मेरा चचेरा भाई ही कर रहा था। उसने मेरी छातियाँ ज्यों ही दबाई, मेरे तन में चिंगारियाँ छूटने लगी। चूत सम्भोग के लिये अपने आप ही तैयार हो गई थी। उसमें से प्यार की बूंदें रिसने लगी थी। मैंने भी अनजाने में अपने हाथ उसकी कमर के इर्द गिर्द कस लिया था। मेरी टांगें चुदने के लिये बरबस ही उठने लगी थी। एक तेज मीठी सी खुजली चूत में होने लगी थी।

अचानक अशोक ने मेरा टॉप ऊपर से खींच कर उतार दिया। मैं और भी उन्मुक्त सी हो उठी। मेरी कठोर चूचियाँ खुली हवा में नंगी हो गई थी।

तभी अशोक ने भी अपनी कमीज उतार दी, उसने अपनी टांगें उठा कर मेरी कमर में फ़ंसा दी… फिर धीरे से सरक कर मेरे ऊपर आ गया और मुझे दबा लिया।

“उफ़्फ़… ये क्या… अह्ह्ह्ह… अशोक… उफ़्फ़ !!”

“बस तुम्हें संजीव के यही करना है।”

“अशोक… उह्ह्ह… कितना मजा आ रहा है…”

“अब चुदने की लग रही है ना… चोद दूँ…?”

“तू क्या कह रहा है? बहुत खराब है तू तो…?”

तब उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… दो नंगे जिस्म… आपस में मिल गये…

गर्म गर्म से शरीर का कितना सुखद स्पर्श लग रहा था, उसका भारी लण्ड मेरी पनियाई हुई चूत को रगड़ रहा था, उसका खिला हुआ सुपारा मेरी गीली चूत को रगड़ा मार रहा था।

मेरी तो सांसें सांसें बहुत तेज हो उठी थी। धड़कन भी तेजी लिये हुये थी।

“उफ़्फ़्फ़… जाने देर क्यूँ कर रहा है…”

उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… दो नंगे जिस्म… आपस में मिल गये…

गर्म गर्म से शरीर का कितना सुखद स्पर्श लग रहा था, उसका भारी लण्ड मेरी पनियाई हुई चूत को रगड़ रहा था, उसका खिला हुआ सुपारा मेरी गीली चूत को रगड़ा मार रहा था।

मेरी तो सांसें सांसें बहुत तेज हो उठी थी। धड़कन भी तेजी लिये हुये थी।

“उफ़्फ़्फ़… जाने देर क्यूँ कर रहा है…”

दोनों के शरीर चिपक गये थे, एक दूसरे को दबा रहे थे।

हम दोनों ही तेज वासना की अनुभूति में डूबे जा रहे थे। तभी मुझे उसके सुपारे का दबाव अपनी चूत पर महसूस किया। मारे गुदगुदी के मैंने भी अपनी चूत का दबाव उसके लण्ड पर डाल दिया। एक तेज कसाव के साथ उसका लण्ड मेरी चूत में उतरने लगा। तभी उसने मुझे एक जोर से शॉट मारा और भचाक से उसका पूरा लण्ड भीतर बैठ गया। मेरे मुख से एक आनन्द भरी चीख सी निकल गई।

“अरे अशोक… लगता है मेरी झिल्ली फ़ट गई…!”

मेरा यह नाटक हर एक नये लड़के के साथ हुआ करता था ताकि उसे लगे कि यह तो फ़्रेश माल है। मारे आनन्द के मैंने उसे जोर से दबा लिया। वो भी मुझे फ़्रेश लड़की जान कर रुक गया… पर मुझे तो जोर से लौड़ा लेने की इच्छा हो रही थी। जोश में मैंने अपनी चूत उछाल दी।

“धीरे से जान… लग जायेगी…”

“ओह, बहुत दर्द हो रहा है।” कहकर मैंने फिर से अपनी कमर चला दी।

फिर तो उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी। दुबला पतला लड़का था सो कमर उसकी तेजी से चल रही थी। मैं भी कस कस कर जवाब दे रही थी।

थप-थप की आवाजें तेज हो गई थी। तेज भचीड़ों से मैं निहाल होने लगी थी। मैं तो चरम सीमा को लांघने ही वाली थी… पर अशोक की अदा ने मुझे जोर से झड़ा दिया। उसने मेरे चूचक को खींच कर मसल दिया। मेरी चूत में एक आग सी उठी और… और मैं जोर से झड़ने लगी।

उसने भी किसी फ़िल्मी स्टाईल में अपना लण्ड चूत से बाहर निकाला और तेजी से मुठ्ठ मारते हुये अपना वीर्य हवा में उछाल दिया। उसकी पिचकारियाँ मन को मोह लेने वाली थी। एक के बाद एक पिचकारी ! धीमी पड़ती गई और अन्त में बून्द बून्द को निचोड़ कर उसने अपना कार्यक्रम सम्पन्न किया।

चोदने के बाद फिर वो उछल कर किसी खिलाड़ी की तरह बिस्तर के नीचे खड़ा हो गया। मैं भी जल्दी से अपने कपड़े खींच कर पहनने लगी।

“अब तुम्हें समझ में आ गया कि संजीव को क्या चाहिये?”

“उंहु, अभी पूरा समझ में नहीं आया…” मैं उसे टेढ़ी नज़र से देख कर मुस्कराई।

“अब क्या रह गया है…?”

“यह तो सामने स्वर्ग का दरवाजा खुला पड़ा था तो झण्डे गाड़ दिये… पाताल लोक में झण्डे गाड़ो तो पता चले कि जनाब कितने पानी में हैं।’

“वो क्या होता है…?”

रात को इसी कमरे में आ जाना… और पाताल लोक में झण्डे गाड़ देना। मेरी तिरछी निगाह उसे गाण्ड मारने का निमन्त्रण दे रही थी।

मैं रात को अशोक का इन्तजार करने लगी। जब रात के ग्यारह बजने लगे तो मुझे नींद सी आने लगी। चूत की खुजली भी तेज होने लगी थी। मैं चुदासी भी हो चली थी। तरह तरह के चुदने के विचार आ रहे थे। इन्हीं मधुर विचारों में न जाने कब मेरी आँख लग गई।सपने में भी मैं अशोक से चुद रही थी। तभी जैसे मेरी आँख खुल गई। अंधेरे में मुझे लगा कि अशोक आ गया है।

“कितनी देर कर दी?”

“श…श श… चुप रहो…!” उसके फ़ुसफ़ुसाने की सी आवाज आई।

वो चुप से मेरे बिस्तर पर आ कर लेट गया। उसने अपनी पैंट उतार दी। मैं तो पहले ही छोटी सी शमीज पहने हुए थी तो कमर से ऊपर उठा ली। मेरी खूबसूरत गोल गाण्ड से उसका लण्ड सट सा गया। मैंने तेल लगा कर पहले ही उसे चिकनी कर दी थी पर उसका लण्ड तो आगे बढ़ गया और मेरी चूत को टटोलने लगा।

“अरे ये क्या कर रहे हो? बात तो पाताल लोक की हुई थी, स्वर्ग लोक की नहीं।”

“श…श श…!” वो मुझे चुप ही कराता रहा। मैंने बहुत कोशिश की कि उसे अपनी चूत से दूर रखूँ पर क्या करती उसकी ताकत के आगे फिर मैंने समर्पण कर दिया और उसका सख्त लौड़ा मेरी चूत में घुसता चला गया।

इस बार कितना भारी लग रहा था उसका लण्ड, लग रहा था कि बहुत जोश में था। जाने उसका लण्ड इतना लम्बा कैसे हो गया था कि मेरी चूत की गहराई को वो आसानी से नाप रहा था। उसके धक्के भी चूत में कसे कसे से लग रहे थे।

“बहुत मजा आ रहा है जानू… जरा तेजी से चोदो !”

“हाँ रानी… तेरी चूत तो कितनी कसी है…!”

मेरा दिल धक से रह गया… हाय रे…! यह क्या हो गया… यह कौन है… कौन चोद रहा है मुझे… किसकी आवाज है ये…?

“कौन हो तुम… और तुम यहाँ कैसे आ गये…?”

“मैं रवि… वही अशोक के बचपन का दोस्त… यशोदा जी प्लीज… तुम्हें चोदने की मेरी दिली तमन्ना थी।”

“तो अशोक कहाँ है?”

उसके लण्ड में तो सवेरे चोदते समय चोट लग गई थी। जब मैंने अपने दिल की बात बताई तो उसने मुझे भेज दिया।

“ओह्ह, तो तुम हो रवि… साला मुझे तो डरा ही दिया था।”

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मैंने अब तसल्ली से अपनी टांगें चुदने के लिये फ़ैला दी। अब वो और मस्ती से गहराई तक शॉट लगाने लगा था। मेरी एक टांग उसने थाम रखी थी। मेरी नर्म चूत को वो कस कर पेल रहा था। मेरी चूत को अखिर तृप्ति मिल ही गई और मैं जोर से झड़ गई।

‘बस करो अब रवि… मुझे लग रही है…!”

“पीछे की मार दूँ…?”

“तो पहले क्या कह रही थी मैं… तुम तो सुन ही कहाँ रहे थे…”

“पहले यशोदा जी… आपको चोद कर मजे तो ले लेता फिर गाण्ड के मजे लेता…”

उसका मोटा लण्ड मेरी गाण्ड के छल्ले में फ़ंस सा गया। बहुत मोटा था…

“अरे धीरे से…बहुत मोटा है यह तो…!”

“यशोदा जी… आपको तकलीफ़ नहीं होने दूंगा…”

उसने इस बार हल्का सा जोर लगाया… लण्ड धीरे से अन्दर सरक गया।

“उफ़्फ़ ! साला, क्या मूसल जैसा है… ! उईईईई जरा धीरे ना… मेरी फ़ट जायेगी।”

उसने पहले तो बाहर निकाला फिर वापस अन्दर कर दिया। उफ़्फ़, पहले तो ऐसी तकलीफ़ कभी नहीं हुई थी। वो अब अपना लण्ड थोड़ा सा घुसा कर लेट गया। मुझे अपनी गाण्ड में लण्ड बहुत भारी सा लग रहा था… कुछ कुछ फ़ंसा हुआ सा… मैंने ही धीरे से गाण्ड का दबाव उसके लण्ड पर डाला। उसने भी दबाव महसूस किया और लण्ड को भीतर घुसेड़ दिया।

“ओ ओ… बस बस… यह तो बहुत मोटा है, इसे निकाल ही दो प्लीज !”

पर हुआ उल्टा ही… उसने लण्ड को और अन्दर दबा डाला।

“अरे ! अरे, क्या कर रहे हो…? बोला ना, बस करो…!”

“तेरी तो भेन की भोसड़ी… चुप से पड़ी रह…”

उसकी भाषा सुन कर मैं तो जैसे सुन्न सी रह गई पर उसने अपने आप पर काबू पाया और बोला- अरे, आराम से गाण्ड चोदने दे… देख तकलीफ़ नहीं होने दूंगा… अब रोक मत मुझे।

अब वह लण्ड को दबा कर भीतर घुसेड़ने लगा। दर्द तो नहीं हुआ पर लण्ड फ़ंसते हुये अन्दर जा रहा था।

“ले पूरा बैठ गया ना… नहीं हुई ना तकलीफ़?”

‘उफ़्फ़… सच कहते हो… मजा आ गया… अब चल चोद मेरी गाण्ड…!”

उसने मेरी कमर को थाम कर लण्ड को आहिस्ते से चलाना शुरू कर दिया। धीरे धीरे गाण्ड ने लण्ड के साईज के अनुसार खुद को सेट कर लिया। अब रवि मेरी गाण्ड आराम से चोद रहा था। इतनी देर में शायद मेरी चूत में भी गर्मी आ गई थी और चूत पानी छोड़ने लगी थी। अब तो मेरा पूरा शरीर लय में आगे पीछे हो कर गाण्ड की चुदाई में मदद कर रहा था। रवि भी मेरी कसी गाण्ड की मार कब तक झेलता। उसने मेरी गाण्ड में ही वीर्यपात कर दिया।

“मेरी चूत में तो आग लग गई है… अब क्या करूँ रवि? बुझा दो प्लीज।”

उसने तुरन्त मेरी चूत से अपना मुख चिपका दिया और मेरे दाने को चूस चूस कर मुझे झड़ा दिया। मैंने गहरी सांस ली और निढाल सी पड़ गई।

रवि अंधेरे में ही उठा और अपने कपड़े पहन कर चुपके बाहर निकल गया। मैं लेटी लेटी सोचती रही कि अशोक से तो ये रवि ही जोरदार है… इससे चुदवा कर बहुत मजा आया। ये संजीव तो मुझे हर जगह चुदवा कर ही छोड़ेगा देखना। कैसी आग लगा दी है मन में उसने… हाय कैसा है ये जालिम। लगता है संजीव तो जब चोदेगा तो तब देखा जायेगा… दुनिया तो मुझे पहले ही चोद डालेगी

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मैं बिल्कुल तैयार थी उनका लंड अंदर लेने के लिए

आकाश और मोहित ने चोद चोद कर मेरी चूत सुजा दी थी जिस कारण से मेरी और ज्यादा चुदवा पाने की हिम्मत नहीं बची थी।

जब मैं आकाश की चुदाई में मग्न थी तो मोहित भी हमें देखने लगा था और इसी लापरवाही के चलते कब हमारे इंग्लिश के टीचर आकर हमारी चुदाई देखने लगे, हम तीनों को खुद नहीं पता चला।

हमने जब देखा तो उनके हाथ में मोबाइल था और हमारे टीचर हमारा वीडियो बना रहे थे।

हम तीनों के होश उड़ गए जब हमने देखा कि हमें टीचर ने देख लिया।

हमने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और अपने आप को ठीक करके सर के सामने रोने गिड़गिड़ाने लगे- सर, प्लीज किसी को मत बताइएगा, सर गलती हो गई, प्लीज सर हमसे गलती हो गई।

लेकिन जब कोई एक जवान खूबसूरत लड़की की चूत देख लेता है तो अच्छे अच्छों की भी नजर फिसल जाती है। वही मेरे साथ भी हुआ मेरी डबल रोटी के जैसे फूली हुई चूत देखकर किसी का भी मन डोल जाए।

शायद सर भी मेरी चूत फाड़ने का जुगाड़ देख चुके थे लेकिन उन्होंने उस समय यह बिल्कुल नहीं महसूस होने दिया।

हमारे टीचर ने हम तीनों को डांटते हुए बोला- यह बात ऐसे खत्म नहीं होगी।
तुम लोगों ने एक क्लास में ऐसी घिनौनी हरकत करके यहां की मर्यादा को ठेस पहुंचाया है।
हम तीनों बहुत ज्यादा डर चुके थे इसलिए सर के सामने सर झुकाए खड़े थे।

मेरी आंखों में तो आंसू भी बह रहे थे कि पता नहीं अब क्या होगा। कहीं यह बात मेरे घर में ना पहुंच जाए।

सर ने आकाश और मोहित को बहुत डांटा और उन्हें धमकी भी दी कि अगर आइंदा से ऐसा कुछ भी तुमने किया तो मैं तुम लोगों के घर तक यह वीडियो जरूर पहुंचा दूंगा।

उन दोनों ने सर से प्रॉमिस किया की आगे से अब इस प्रकार की कोई भी हरकत नहीं करेंगे।
सर ने उन दोनों को धमकी देकर छोड़ दिया और वे दोनों वहां से तुरंत चले गए।

उसके बाद से उन दोनों ने ना मुझे कभी घूरा और ना ही मुझे कभी लाइन मारी।

एक दिन जब मैं स्कूल पहुंची तो हमारे हमारे इंग्लिश टीचर सर क्लास में आए और बोले- पायल, तुम मेरे कैबिन में आओ।
मैं घबरा गई कि अब क्या हो गया क्योंकि मैं उन सब को उस दिन की घटना के बाद से देखकर घबरा जाती थी।

मैं डरी सहमी सर के केबिन में पहुंची। सर का कैबिन बिल्कुल अलग और एकांत में बना हुआ था जहां बिना उनकी परमिशन के कोई नहीं जा सकता था।

जब मैं केबिन के अंदर पहुंची तो सर अपना कुछ काम कर रहे थे।
“जी सर, क्या बात है?” मैं बोली।

सर ने पहले तो मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा और अपने लोड़े को हाथों से सेट करते हुए बोले-
पायल, मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी जो तुम लोग उस दिन कर रहे थे. लेकिन अब तुमने अगर गलती की है तो गलती की सजा तो मिलनी ही चाहिए। क्योंकि जब तक कोई सजा नहीं मिलती गलती दोबारा भी होती है।

मैं सर झुकाए जो कि खड़ी हुई थी बोली- जी सर क्या सजा है मेरे लिए? लेकिन प्लीज घर में मत बताइएगा आप जो कहोगे मैं करूंगी।

मैंने तो बहुत साधारण तरीके से यह बात बोली थी लेकिन सर ने मेरी इस बात को दूसरे मतलब में ले जाकर बोले- जो बोलूंगा वह करोगी?
मैं समझ गई कि लगता है अब फिर से मुझे अपनी चूत फड़वानी पड़ेगी तो मैं बोली- जी सर, जो बोलोगे वही करूंगी।

सर बोले- मैं भी तुम्हें चोदना चाहता हूं। तुम्हारी जैसी कच्ची कली को मैं भी फूल बनाना चाहता हूं।
मैं रोती हुई बोली- सर प्लीज ऐसा मत करिए। मुझसे गलती हो गई। मैं बहक गई थी इसलिए ऐसा हो गया। आइंदा से मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी। सर प्लीज मुझे माफ कर दो।

सर का लंड तो पहले ही फूल चुका था। वे मेरी बात बिल्कुल भी सुनने के मूड में नहीं थे।
उन्होंने बोला- पायल, या तो मुझसे अपनी चूत चुदवा लो या फिर मैं यह बात तुम्हारे घर में बता दूं। तुम्हारे पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं और कोई विकल्प नहीं है।

जब मैं जान गई कि अब मेरे पास और कोई रास्ता नहीं बचा। मुझे इन्हीं में से कोई विकल्प चुनना ही पड़ेगा।
अगर घर में बताने वाला विकल्प चुनती तो मेरा बाहर आना जाना और मेरी आजादी सब बंद हो जाती। और मेरे घरवाले मेरी इस उम्र में शादी भी कर देते जिसके लिए मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी क्योंकि मुझे अभी बहुत सारे लौड़ों का मजा लेना था।

लेकिन सच बताऊं तो कहीं ना कहीं मेरी चूत में भी आग लगने लग गई थी कि चलो इसी बहाने एक और नया लंड चूसने को तो मिलेगा।
मैंने सर को दुखी भाव में बोला- ओके सर, मैं चूत चुदवाने के लिए तैयार हूं लेकिन आपको प्रॉमिस करना पड़ेगा कि आप वह वीडियो मेरे सामने पूरी तरह से डिलीट कर दोगे।
सर ने तुरंत मुझसे प्रॉमिस किया और बोले- कल मैं घर में अकेला हूं इसलिए कल मैं स्कूल नहीं आऊंगा और तुम भी घर से स्कूल के बहाने निकलकर मेरे घर आ जाना।
मैं भी तुरंत राजी हो गई।

जब स्कूल खत्म होने के बाद शाम को मैं घर पहुंची तो मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर सारे कपड़े उतार के पहले अपनी चूत को क्लीन शेव किया और थोड़ी देर निहारती रही।
और यह सोचती रही कि कल यही चूत फट कर फिर से भोसड़ा बनने वाली है।

लेकिन कहीं ना कहीं चुदाई के बारे में सोच कर मेरी चूत में सुरसुरी उठने लग गई थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं रसोई से एक मूली लेकर वहीं बाथरूम में अपनी चूत में डालने लगी।

10 मिनट तक मूली से चोदने के बाद जब मेरी चूत से पानी बहा, तब जाकर मुझे शांति मिली और मैं आकर कमरे में चूत पसार कर सो गई।

दूसरे दिन मैं बहुत खुश थी और अच्छे से तैयार हुई। मैंने एक सेट पेंटी और ब्रा एक्स्ट्रा अपने बैग में डालकर अच्छे से परफ्यूम लगाकर सर के घर की तरफ चल दी।

जब मैं टीचर के घर के पास पहुंची तो देखा सर दरवाजे के पास ही लगे सोफे पर बैठे मेरा इंतजार कर रहे हैं।
मैं जैसे ही घर के अंदर घुसी सर ने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया और मुझे अपने सीने से चिपका लिया।

मुझे सीने से चिपकने का तो पता नहीं लेकिन उनका ताना हुआ लंड मेरी चूत में जरूर महसूस हो गया कि सर तो बिल्कुल भरे बैठे हैं।

सर ने मुझे बिठाया और मुझे पानी दिया। मैं भी पानी पी कर सोफे पर बैठ गई।

2 मिनट तक सर मेरे बगल में बैठकर पहले मुझसे बातें करते रहे और फिर बोले- तो क्या तैयारी करके आई हो चुदने के लिए?

मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी पेंटी के अंदर घुसा दिया।

सर समझ गए कि मैं अपनी चूत बिल्कुल चिकनी करके आई हूं। उन्होंने तुरंत अपने होंठ मेरे होठों से चिपका दिये और मेरे होंठ चूसते चूसते अपनी गोद में उठाया, अपने मास्टर बेडरूम में ले जाकर पटक दिया।

सर तुरंत मेरे ऊपर आ गए और मुझे किस करने लग गए साथ में मेरी चूचियां भी दबाते रहे। उन्होंने मेरी चूची के काले दाने को ऐसे मसला कि मेरी पूरे शरीर में कम्पकपी सी मचने लगी।

मेरी चूत से पानी बहने लगा और मेरा मन करने लगा कि तुरंत लंड में बैठ जाऊं लेकिन तुरंत चोदने का मजा भी बेकार होता है इसलिए मैंने थोड़ा सब्र रखना सही समझा। क्योंकि थोड़ी देर बाद मेरी चूत का भोसड़ा बनने ही वाला था इसलिए मैंने आराम से करना सही समझा।

किस करने के बाद सर ने मेरी शर्ट उतार दी और ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियां दबाने लगे। दबाते दबाते वह इतने जोश में आ गए कि उन्होंने मेरी ब्रा उतारने के बजाय खींचकर फाड़ दी और मेरी चूचियों को नंगी कर दिया।

जब टीचर ने मेरी गोरी चूचियां देखी तो वे पागल हो गये और उन्हें जोर जोर से चूसने लगे। मैं इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि मैंने बिस्तर को मुट्ठी में भींच लिया।

5 मिनट चूची चूसने के बाद उन्होंने मेरी स्कर्ट ऊपर उठाई और पेंटी खींचकर फाड़ दी।

सर मेरी छोटी सी चूत देखकर इतने जोश में आ गए कि मेरे चूत में उंगली के बजाय मुंह से चूसने लगे और मेरे दाने को दांतों से काटने लगे।

मुझे इतना मजा आ रहा था जैसे मैं किसी जन्नत में पहुंच गई। मेरे पूरे शरीर में गूजबम्स आने लगे और मेरे शरीर में कंपकपी सी उठने लगी।
मैं सर की खोपड़ी पकड़कर अपनी चूत में दबाने लगी। सर ने अपनी पूरी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी।

मैंने सर से पूछा- सर इससे पहले आपने कितनी बार चुदाई कर रखी है?
टीचर से मैंने यह बात इसलिए पूछी थी क्योंकि सर अविवाहित थे।

सर बोले- तुमसे पहले भी मैं अंजलि और मधु की चूत की सील तोड़ चुका हूं।

अंजलि का नाम सुनते ही मैं भौचक्की रह गई क्योंकि वह तो क्लास की टॉपर थी और इतना एटीट्यूड दिखाती थी जैसे उनसे बड़ी पवित्र लड़की पूरे स्कूल में कोई नहीं है।
प्यार का नाम सुनते ही वह ऐसे उचक जाती थी जैसे किसी ने उसकी गांड में मिर्च लगा दी हो।
अब मुझे पता चला कि वह कुतिया तो मुझसे पहले ही अपनी चूत फड़वा कर टहल रही है।

खैर मैं अपनी कहानी पर आती हूं.

उसके बाद मैंने टीचर को बोला- सर, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्लीज जल्दी से अपना लौड़ा निकालो और मुझे चूसने दो।
सर ने कहा- इसमें देरी किस बात की … मेरा लंड तुम खुद ही निकाल कर चूस लो।

मैंने भी देर ना करते हुए तुरंत सर की शर्ट और पैन्ट उतार दिए। उनकी चड्डी के ऊपर से ही उनका लंड बिल्कुल सांप की तरह फनफना रहा था। मैंने जैसे ही उनकी चड्डी नीचे की कि उनका लण्ड फुफकार मारते हुए बाहर निकला और मेरे आंखों के सामने झूलने लगा।

सर की चड्डी उतार कर मैंने एक तरफ फेंकी और उनका मोटा लंड लेकर तुरंत मुंह में भर लिया। उनका लंड इतना मोटा और तगड़ा था कि मेरे मुंह में पूरा आ नहीं पा रहा था। मुझे उनका लंड चूसने में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं क्या बताऊं।

तभी मेरे मन में ख्याल आया कि कुछ अलग किया जाए तो मैं तुरंत उठी और उनकी रसोई की तरफ गई। वहां फ्रिज में देखा कि चॉकलेट रखी हुई है. मैं तुरंत चॉकलेट लेकर आई और उनके लंड के चारों तरफ लगाकर उसे चूसने लगी।

कभी-कभी बीच-बीच में मैं उनके लंड के टोपे में भी अपनी जीभ फिराने लगी।
ऐसे में सर को बहुत मजा आ रहा था।

जब लंड चूसते चूसते लगभग 15 मिनट हो चुके तो सर से रहा नहीं गया और मुझे तुरंत अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया।

सर ने मेरी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और अपना 8 इंच का लंड मेरी चूत में रखकर थोड़ा सा धक्का मारा।

मैंने पूरी चादर अपने हाथों में समेट ली और मेरे मुंह से जोर की चीख निकल गई- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ हहहह. हाय बाप रे … मैं मर गई, सर बहुत तेज दर्द हो रहा है. प्लीज बाहर निकालो।

सर यह सब सुनने के बिल्कुल भी मूड में नहीं थे। उन्होंने मुझे मेरे कंधों से पकड़ा और दूसरा धक्का तेजी से मार दिया। उनका लगभग आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत में घप्प से जड़ तक घुस गया। मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और आंसू बहने लगे।

लेकिन मुझे पता था कि अब मेरी चूत का अचार तो बनना ही है इसलिए चीखने चिल्लाने का कोई मतलब नहीं है।
मैं भी बस लेटे लेटे दर्द सहती रही और टांगें चौड़ी करके कोशिश करती रही कि उनका लंड आराम से मेरी चूत के अंदर तक घुस सके।

सर ने मेरे दर्द को समझते हुए 2 मिनट इंतजार किया और थोड़ा सा चूत में थूक डालकर 2 मिनट बाद तीसरा धक्का मारा. यह धक्का इतना तेज था कि उनका पूरा लंड जड़ तक मेरी चूत में समा गया।

मेरी जांघें बिल्कुल टाइट हो गई और मैंने सर को बहुत कस कर पकड़ कर बस दबा लिया और थोड़ी देर शांत लेटी रही।

5 मिनट बाद जब मुझे आराम मिला तो मैंने सर को कहा- अब जल्दी से चोद कर भोसड़ा बना दो।
सर यह सुनकर हंस दिए और तुरंत धक्के मारने शुरू कर दिए।

पहले तो उनके झटके बहुत सामान्य थे लेकिन दो-चार मिनट बाद ही उन्होंने इतनी तेज तेज धक्के मारने शुरू किए कि मैं बेड में 4 इंच ऊपर उछल जा रही थी।
मैं सर के सामने ऐसे चूत फैला कर लेटी थी जैसे कोई सांड के आगे छोटा सा गाय का बछड़ा।

सर के हर धक्के के साथ में मैं ऊपर उचट जाती थी और मेरे मुंह से चीख निकल जाती थी।

20 मिनट तक लगातार धक्कापेल चुदाई के बाद जब मुझे आराम मिला और मैंने चुदाई का मजा लेना शुरू किया तो मैं भी नीचे से धक्के मारने लगी।

सर को यह सब देख कर बहुत मजा आने लगा और सर ने तुरंत मुझे घोड़ी बना दिया। मैं उनके बेड के सिर वाले हिस्से को पकड़ कर घोड़ी बन गई। सर ने थोड़ा सा हाथ में थूक लेकर मेरी गांड के छेद पर लगा दिया और थोड़ा मेरी चूत में लगाया।

मुझे लगा शायद गलती से गांड में लग गया इसलिए मैंने कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया और शांत घोड़ी बनी रही और लंड घुसने का इंतजार करती रही. तभी सर ने अपने लोड़े को हाथ से पकड़ा और चूत के छेद में लगा दिया।

मैं बिल्कुल तैयार थी उनका लंड अंदर लेने के लिए!

कि तभी सब कुछ बदल गया और मेरे प्राण निकलते निकलते बचे.
क्योंकि सर ने तुरंत उस लंड को चूत से हटाकर गांड में रख दिया और बिना 1 सेकंड गंवाए हुए पूरी जोर का धक्का मार दिया।
उनका आधा लंड मेरी गांड में चीरता हुआ घुस गया।

मेरी जोर की चीख निकल गई ‘उउउईईई ईई ईईई … मांआआ आआ …’ और मैं बिस्तर में गिर गई और बेहोश हो गई।
2 मिनट बाद जब मैं होश में आई तो मेरी गांड में बहुत तेज दर्द हो रहा था और सर अपना लंड घुसेड कर वहीं पर खड़े हुए मुस्कुरा रहे थे।

मैंने सर को कहा- सर प्लीज बाहर निकाल लो। मैं इससे ज्यादा दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।
लेकिन मेरे टीचर तो पूरे हैवानों की तरह डटे रहे और उन्होंने धीरे धीरे धक्के मारने भी चालू कर दिए। मैं वहीं खड़ी चिल्लाती रही और वह मेरी गांड का छेद फाड़ते रहे।

5 मिनट तक में उनका पूरा लंड मेरी गांड में समा गया और मुझे मजा आने लगा।
अब तो मैं भी जी भर के पीछे धक्के मार मार के उनका लंड पूरा अंदर तक लेती रही और चुदाई के मजे लेने लगी।

धक्के मारते मरवाते जब हम दोनों थक गए तो मैंने कहा- सर, अब कोई दूसरी पोजीशन ट्राई करते हैं।
सर ने मेरी गान्ड से अपना मूसल लन्ड बाहर निकाल लिया।

जब मैंने सर का लंड देखा तो मेरी गांड का खून उनके लंड पर लगा हुआ था और मेरी गान्ड में जलन होने लगी थी।
मैं वहीं पर अपना पिछवाड़ा दबा कर बैठ गई।

तब तक सर बाहर से एक कुर्सी लेकर आए और उसमें बैठ गए। मैं भी अपनी चूत फैलाकर सर के लंड को हाथों से पकड़ कर अपनी चूत में डाल कर बैठ गई।

यह पोजीशन इतनी खतरनाक थी उनका पूरा लंड मेरे अंदर तक घुस गया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ लेकिन मैंने वह दर्द बर्दाश्त कर लिया और उनके गर्दन को पकड़कर अपने धक्के मारने शुरू कर दिए।
कमरे में बस मेरी चीखों की ही आवाज गूंज रही थी ‘आआआ आहह … ऊऊहह … उउम्म्म … पट पट पट!’

सर के लंड में इतना दम था कि आधे घंटे लगातार चोदने के बाद भी उनके लंड में कोई ढीलापन नहीं आया।

अब सर ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और नीचे से लौड़ा सेट करके मेरी चूत में डाल दिया और ऊपर नीचे करने लगे।

उस समय मुझे ऐसे लग रहा था कि सर ने कोई डंबल उठा कर अपने मसल्स बना रहे हो।

टीचर ने मुझे उस पोजीशन में 15 मिनट तक चोदा। इस दौरान मेरा दो बार चूत का पानी बह चुका था।

चूत चोदते चोदते जब सर थक गए तो उन्होंने अपने लंड निकाल कर तुरंत मेरे पीछे वाले छेद में सेट कर दिया और उस में धक्के मारने शुरू कर दिए।

मैं आप सबको एक बात तो बताना चाहूंगी कि चूत चुदाई से भी ज्यादा मजा तो गांड मरवाने में आता है। मुझे गांड मरवाने में इतना मजा आ रहा था कि मन कर रहा था दो तीन लंड और एक साथ अपने गांड में डलवा लूं।

मैं बस मजे लेती रही और सर मुझे वही चोदते रहे।

गांड चुदवाते चुदवाते मेरा चूत का पानी बह गया और मैंने सर को कहा- सर, अब और ज्यादा नहीं चुद सकती। मेरी चूत और गान्ड दोनों में ही जलन होने लगी है।

कहीं ना कहीं सर का भी हो ही गया था तो उन्होंने तुरंत मुझे बिस्तर में पटका और बोले- बस मेरी रानी, 10 मिनट में मेरा भी होने वाला है।

मैंने भी सोचा जब 1 घंटे से चुद ही रही हूं तो 10 मिनट और सही। और मैं भी तुरंत अपनी टांग फैला कर बिस्तर में लेट गई और बोली- सर चोदो अब।
सर ने अपना लंड हाथ से पकड़ कर मेरी चूत में रखा और एक झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया।
मैं तो बस आंखें बंद करके मजे लेटी रही।

10 मिनट तक सर ने मुझे ऐसे ही चोदा और जब पानी निकलने वाला हुआ तो उन्होंने कहा- बेबी कहां निकालूं?
क्योंकि 2 दिन पहले ही आकाश और मोहित की चुदाई के बाद मैंने दवा ली थी जो कि 3 दिन तक अपना असर दिखाती है तो मुझे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं थी इसलिए मैं बोली- सर, अपना पानी मेरी चूत के अंदर ही छोड़ो क्योंकि चुदाई का मजा तो तभी आता है जब लंड का पानी चूत के अंदर छूटे।

और मैं अपनी मेहनत की चुदाई को बर्बाद नहीं होने देना चाहती थी इसलिए मैं चुदाई का हर एक मजा लेना चाह रही थी।

2 मिनट चोदने के बाद जब सर ने अपना पानी छोड़ा तो उनका गर्म लावा मेरी चूत में भर गया।

मुझे इतना मजा आया कि बस मैंने सर को तेजी से दबा लिया और वैसे ही लेटी रही। दस मिनट तक सर अपना लंड मेरी चूत के अंदर डालकर मेरे ऊपर लेटे रहे और उनके लंड का एक-एक बूंद मेरी चूत में भर गया।

10 मिनट बाद जब सर उठे तो देखा मेरी चूत से खून और उनके लंड का पानी साथ बह रहे थे। और चादर गीली हो गयी थी। उनके लंड से बहुत ज्यादा पानी निकला था।

मैंने टीचर के लंड को हाथ में लेकर चूसना शुरू कर दिया; 5 मिनट तक चूसा और उसके बाद सर जाकर मेरे लिए जूस बनाया और पिलाया।

मेरी उठकर चल पाने की हिम्मत नहीं थी इसलिए मैं अपनी भोसड़ा बन चुकी चूत को लेकर लेटी रही।

लेकिन अभी एक और घटना घट गई। शायद मेरी किस्मत में ही चूत फड़वाना लिखा था।

सर का एक दोस्त जो कि मेरा ही पड़ोसी भी था और मुझे जानता भी था, कब अंदर आ गया और हमारी चुदाई देख ले गया हमें पता नहीं चला।

जूस पीने के बाद जब वह अचानक मेरे सामने आया तो हम दोनों के होश उड़ गए।

क्योंकि यह पहले भी कई बार मुझे लाइन मार चुका है और मैं कोई भाव नहीं देती थी और अब तो शायद अपनी चूत ही देनी पड़े।
उसने सर को एक दूसरे कमरे में ले जाकर कुछ बात की।
मैं नहीं सुन पाई क्योंकि मैं दूसरे कमरे में थी.

उसके बाद जब सर वापस आए तो मुझसे पूछने लगे- रानी, एक गड़बड़ हो गई है। मेरा दोस्त शुभम भी तुम्हें चोदना चाहता है और बोल रहा है कि अगर नहीं चुदी तो मैं सब को बता दूंगा।

क्या तुम प्लीज़ एक और राउंड चुदवा सकती हो?
वह बोल रहा है कि मुझे भी चोदना है वरना मैं सबको बता दूंगा।

क्योंकि मैं इतना ज्यादा चुद चुकी थी की और ज्यादा चुदवाने की हिम्मत नहीं थी तो मैंने मना कर दिया।

लेकिन तभी शुभम अंदर आया और मुझे गाली देने लगा
और बोला- मैं चाहूं तो अभी जाकर तुम्हारा तमाशा बना दूं।
इतना सुन कर मैं डर गई

इसलिए मैं बोली- ओके … लेकिन थोड़ी देर रुकने के बाद!
क्योंकि अभी अभी चुदी हूं तो चूत में जलन हो रही है।
उसने बोला- ठीक है।

1 घंटे बाद जब मुझे थोड़ा आराम मिला तो शुभम अंदर आया। मैं पहले से ही अन्दर नंगी लेटी थी सो उसने तुरंत मेरी चुदाई शुरू कर दी। उसने भी मुझे 1 घंटे तक पटक-पटक कर इतना चोदा कि ना तो मैं चलने लायक बची थी और ना ही बैठने लायक क्योंकि मेरे पिछवाड़े में भी बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था।

मेरी चूत का भोसड़ा बना कर शुभम वहां से चला गया और बोला- रण्डी, अब तो तेरी चूत मेरी। जब कहूंगा तब तुझे चूत चुदवानी पड़ेगी मुझसे।

खैर मैंने उसकी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

मैं बस पीठ के बल थोड़ी देर वहीं लेटी रही और जब स्कूल से घर जाने का समय हुआ तो तब तक मुझे थोड़ा थोड़ा आराम मिल चुका था।

मुझे पता था कि मेरे साथ यह सब होने वाला है इसलिए मैं एक सेट एक्स्ट्रा ब्रा और पेंटी लेकर आई हुई थी। मैंने उन्हें निकाला और पहन कर जाने को तैयार हो गई।

मैंने सर से वहीं पर अपना वीडियो डिलीट करवाया और वहां से अपने घर आ गई।

घर आते ही मैं तुरंत बाथरूम में घुसी और अपनी चूत को अच्छे से धोया। धोने के बाद देखा कि मेरी चूत की हालत बुरी तरह से खराब हो गई थी।
पूरी चूत खुल गई थी और ऐसे लग रहा था जैसे कोई चूहे का बिल हो।

मैं ऐसे ही नंगी जाकर अपने बिस्तर पर चूत पसार कर लेट गई और कब आंख लग गई मुझे पता नहीं चला।

उसके 2 महीने बाद मेरे एग्जाम हो गए और मैंने अपना स्कूल बदल दिया।

क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं इस स्कूल में और रही तो जल्दी ही मेरे वीडियोज़ लोगों के फोन में आ जाएंगे।

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एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिया है, और मैं ग्वालियर की रहने वाली हूँ। शुरुआत से ही मेरी जिंदगी में कुछ भी अच्छा नही चल रहा था। मैं काफी परेशान रहने लगी थी। शादी के बाद तो मेरी जिंदगी और भी बर्बाद हो चुकी थी, लेकिन फिर मेरी जिंदगी में मेरी मुलाकात एक ऐसे इंसान के साथ हुई जिसने मेरी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया था। आज मैं आपको अपनी जिंदगी के कुछ बुरे लम्हों के साथ ही आपको अपनी सच्ची सेक्स स्टोरी भी सुनाने जा रही हूं, तो आप इसे जरा ध्यान से सुनियेगा।

मेरा जन्म ग्वालियर के एक गरीब परिवार में हुआ था। मैं भले ही गरीब थी, लेकिन मेरे घर वालों ने मुझे किसी शहजादी की तरह पाला ओर बड़ा किया था। मैं स्कूल के समय से ही काफी खूबसूरत लड़की थी। मेरा रंग गोरा ओर साफ था और मेरे शरीर की बनावट को देख कर तो लोगों का दिमाग ही खराब हो जाया करता था। जो भी मुझे एक बार देख लेता था, तो बस देखता ही रह जाया करता था। मुझे लड़कों के साथ बिल्कुल भी रहने नही दिया जाता था। मुझे काफी संस्कारों से पाला गया था, इसलिए में पूरी तरह से एक संस्कारी लड़की थी। स्कूल खत्म हो जाने के बाद अब मुझे कॉलेज में प्रवेश लेना था। उस समय मेरा शरीर और भी ज्यादा उभर गया था। मेरी पूरी जवानी बाहर निकलती हुई दिखाई पड़ती थी। मेरे घर वाले गरीब थे, ओर हर गरीब परिवार की तरह मेरे परिवार वाले भी बदनामी होने से काफी डरते भी थे। यही वजह थी कि मुझे कॉलेज जाने से पूरी तरह से मना कर दिया गया था। लेकिन कॉलेज जाने का मेरा काफी मन था, इसलिए काफी जिद करने के बाद आखिरकार, मेरे घर वाले मुझे कॉलेज भेजने के लिए मान गए थे। कॉलेज में सभी लड़के मुझे काफी गंदी निगाहों से देखते थे। वे सभी मुझे ऐसे घूरा करते थे, जैसे मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी हूँ। कॉलेज में एक लड़का मेरे काफी पीछे पड़ा हुआ था। जब मैने उसकी हरकतों के बारे में घर पर बताया तो उल्टा घर वालों ने मुझे ही चिल्ला कर मेरा जाना बंद करवा दिया था।

मैं बड़ी हो चुकी थी, इसलिए परिवार का मेरे प्रति दबाव बढ़ता ही जा रहा था। हम गरीब परिवार के थे, इसलिए हमारे परिवार के कुछ लोग मेरी शादी के लिए भी हमारे परिवार पर दबाव बनाए जा रहे थे। काफी समय से हमारे परिवार पर कर्जा भी बढ़ता ही जा रहा था। परिवार पर कर्जा हो जाने के कारण मैं भी काफी परेशान रहने लग गयी थी। कुछ दिन बाद ही हमारे घर में एक अमीर परिवार का रिश्ता आया था। रिश्ता लेकर आये लड़के के माँ बाप को मैं काफी पसंद आ गयी थी। लेकिन मुझे वह लड़का बिल्कुल भी पसंद नही आया था। कुछ दिन मेने लड़के से अकेले में मिल कर बातचीत की जिससे कि हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से जान सकें। वो लड़का मेरे शरीर को बहुत ही गंदी निगाहों से देखता था, ओर उसके इरादें भी मुझे बिल्कुल भी अच्छे नही लग रहे थे। वो मुझे किसी भी तरह हासिल करना चाहता था, इसलिए वो मेरे परिवार को पैसे का दिखावा किये जा रहा था। मेरे परिवार को खुश करने के लिए उसने हमारे कर्जे को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया था।

मुझे उस लड़के के इरादे बिल्कुल भी अच्छे नही लग रहे थे, ओर मैं उस लड़के से शादी करने के लिए परिवार को मना करना चाहती थी। लेकिन मैंं परिवार के बोझ के तले काफी ज्यादा दब चुकी थी। यही वजह थी कि मैने उस लड़के से शादी करने के लिए परिवार को हाँ कह दी थी। कुछ दिन बाद ही हमारी शादी हो चुकी थी। शादी के कुछ दिन बाद ही हम हनीमून के लिए नेपाल गए हुए थे। नेपाल के बहाने उस लड़के को मेरे शरीर के साथ खेलने का मौका मिल गया था, जो वो इतने समय से मेरे साथ करना चाहता था। हनीमून के पहले दिन ही जब हम दोनों थक कर रात को सो रहे थे। तभी उस लड़के यानी की मेरे पति ने मुझे कमर पर हाथ फेरना शरू कर दिया था। मैं जैसे ही उसकी तरफ पलट के सोई उसने मुझे देख कर किस करना शुरू कर दिया था। उसने दारू पी रखी हुई थी और वह काफी नशे में भी था। इसलिए वह मेरी इजाज़त नही होने के बाद भी मेरे शरीर को चूमता ही जा रहा था।

कुछ ही देर में उसने मेरे ब्लाउज को भी खोल दिया था। वह मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को चूमता जा रहा था। यह सब मेरी मर्जी के बिना हो रहा था। लेकिन फिर भी मेरे शरीर की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, जो कि मेरे चेहरे से साफ झलक रही थी। कुछ देर बाद उसने मेरी ब्रा को उतार कर मेरे बूब्स को भी आजाद कर दिया था। वह बिल्कुल बेरहमी से मेरे बूब्स को चूमता ही जा रहा था। वो जोर-जोर से मेरे बूब्स को मसले जा रहा था, जिससे मेरी सांस बहुत गहरी ओर तेज होती जा रही थी। मेरी साँसों की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। कुछ देर बाद उसने मुझे चूमते हुए मेरे पेटीकोट ओर पेंटी को भी उतार दिया था। अब वह मेरे पेट को चूमते हुए मेरी योनि को चाटते जा रहा था। इस सब से मैं काफी ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी। करीब ऐसे ही 20 मिनट तक वह मेरी चुत को अपने जीभ से चाटता रहा और फिर वह अपनी उंगली से मेरी चुत में तेजी से उंगली करने लग गया था। मेरी आँखों मे से आंसू निकल रहे थे, क्योंकि मैं समझ चुकी थी की उसने मुझसे मेरी खूबसूरती की वजह से शादी की थी।

कुछ देर बाद ही उसने अपने कड़क लंड को बाहर निकाल दिया था। अब शादी हो चुकी थी, इसलिए मैं कुछ कह भी नही सकती थी। कुछ ही देर मैं उसने मेरे योनि की दिवार पर अपना लंड रख दिया था। इसके बाद उसने एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था। इस कार्यवाही से मेरी तेज चीख निकल गयी थी, ओर मुझे रोना ही आ गया था। लेकिन वो मुझे काफी बेरहमी से चोदता ही जा रहा था। वह मेरी मर्जी के बिना मुझे अलग अलग पोजिशन में चोदे जा रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी जबरदस्त चुदाई की मुझे उस दिन मेरी सभी भूल याद आ रही थी। वो काफी नशे में था और मुझे बहुत ही बुरी तरह से चोदता ही जा रहा था। मेरी चीख पूरे होटल में गूंज रही थी। कुछ 2 घंटे के ब्रेक में उसने मेरे साथ रात भर करीब दो बार चुदाई की थी। जिसके बाद उसने अपने गर्म वीर्य मेरी चुत में ही छोड़ दिया था। हनीमून मनाने के बाद हम अब घर लौट चुके थे। शादी के बाद ही धीरे-धीरे उस लड़के ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए थे। वो अक्सर शराब पीकर घर आया करता था, ओर मेरे साथ गाली गलौच किया करता था। अगर मैं गलती से किसी पडौसी के साथ बात भी कर लेती थी, तो वह मेरे साथ मारपीट करने लग जाया करता था। मैं अपने परिवार को कभी परेशान नही करना चाहती थी, इसलिए मैंने कभी इस बारे में अपने परिवार वालों को नही बताया था।

मेरी जिंदगी पूरी तरह से बरबाद हो चुकी थी। मैं बस अपने पति के लिए चुदाई की एक मशीन ही बनकर रह गयी थी। मेरे पति रोज शराब पीकर आते थे, ओर बस मुझे चौदने के लिए ही मेरे साथ रहते थे, वरना वे कुछ दिनों तक बाहर ही रहा करते थे। ऐसा करीब 2 साल तक चलता रहा और अब तक हमारा एक छोटा बच्चा भी हो गया था। एक दिन मेरी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने मेरी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया था। एक दिन हमारे पड़ोस में ही राजीव नाम के एक सज्जन व्यक्ति अपने काम के सिलसिले में रहने के लिए आये हुए थे। पेशे से वे एक राइटर थे। अपनी मीठी बातों से उन्होंने पूरे मौहल्ले में कुछ ही दिनों में अपनी पहचान बना ली थी। मैं अक्सर जब कपड़े सुखाने के लिए अपनी छत पर जाया करती थी, ठीक उसी समय राजीव भी उनकी छत पर किताबें पड़ा कड़ते थे। उनकी छत हमारी छत से काफी करीब थी। कुछ दिन बाद मेने देखा कि जब भी मैं कपड़े सुखाने के लिए छत पर आती थी, तो राजीव मुझे चुपके से देखा करते थे। वैसे तो मुझे भी राजीव अच्छे लगते थे, लेकिन शादी शुदा होने के कारण मैं उन पर ज्यादा ध्यान नही दिया करती थी।

ऐसे ही कुछ दिनों बाद मेरी भी राजीव को देखने की आदत लग गयी थी। पहले तो हम मुस्कुरा कर एक दूसरे को देखा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे राजीव ओर मैं एक दूसरे से छत पर ही बातें भी करने लग गए थे। राजीव काफी अच्छे इंसान थे, उन्होंने मेरे बारे में सबकुछ जाने के बाद मुझे काफी समझाया ओर सहानुभूति भी दी। कुछ दिन तक हम फ़ोन पर एक दूसरे से बातें करने लगे और फिर कुछ ही दिनों में हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया था। उस दिन के बाद स मेरी दुःख से भरी हुई जिंदगी तुरंत ही सुख में बदल गयी थी। मेरे पति जब बाहर रहते थे, तब मैं रोजाना राजीव के साथ फ़िल्म देखने और बाहर घूमने चले जाया करती थी। राजीव के साथ मेरी जिंदगी बिल्कुल वैसी ही चल रही थी, जैसा कि मैं हमेशा से चाहती थी। अब जाकर मैं बिल्कुल खुश थी। जब कुछ दिनों के लिए मेरे पति कही बाहर गए हुए थे, तभी एक दिन मेने राजीव को अपने घर पर रात रुकने के लिए बुला लिया था। राजीव उस दिन अपने साथ वोदका की एक बड़ी बोतल लाया हुआ था। उस दिन हमने रात में काफी ज्यादा नशे कर लिए थे।

नशे करने के बाद हमने एक दूसरे के साथ काफी बातें की ओर फिर मेने अपने बच्चे को सुला देने के बाद में राजीव के साथ एक रूम में चली गयी थी। रूम के अंदर पहले राजीव ने मुझे कुछ देर तक मुस्कुराते हुए देखा और फिर बातें करते हुए उन्होंने मुझे होंठों पर चूमना शुरू कर दिया था। पहली बार मुझे किसी का इस तरह से चूमना काफी अच्छा लग रहा था। अब मैं पहली बार किसी के साथ खुशी से ओर अपनी मर्जी से संभोग सुख का आनंद लेने वाली थी। राजीव के चूमने के बाद मेने भी उसकी जांगों पर हाथ फेरतें हुए उसे चूमना शुरू कर दिया था। राजीव मेरे पल्लू को गिराते हुए मुझे गले, गाल ओर बूब्स के ऊपरी हिस्से पर चूमते ही जा रहे थे। उन्होंने कुछ ही देर में मेरी उत्तेजना को पूरी तरह से जगा दिया था। मेने बिना इंतजार करते हुए राजीव की शर्ट को उतार कर उसे ऊपर से नँगा कर दिया था। उसका शरीर काफी दमदार था। उसकी कमर ओर छाती पर हाथ फेरतें हुए मैं उसके दमदार शरीर को अच्छे से महसूस कर सकती थी। इस दौरान राजीव मुझे प्यार से मुझे चूमते हुए उत्तेजित ही करते जा रहे थे।

राजीव ने कुछ ही देर में मेरे ब्लाउज ओर ब्रा को उतार के मेरे बूब्स को आजाद कर दिया था। मेरे लटकते हुए बड़े और टाइड बूब्स मेरी खूबसूरती को ओर भी ज्यादा बड़ा रहे थे। मुझे देख कर राजीव की पेंट में भी एक बड़ा तम्बू तन चुका था। मैं राजीव की पेंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ कर सहला रही थी। इस दौरान राजीव मेरे बूब्स को दबा रहा था और उसे चूमता ही जा रहा था। मुझे काफी मजा आ रहा था। कुछ देर बाद राजीव ने मुझे पूरी तरह से नँगा कर दिया था। राजीव मुझे चौदने के लिए पूरी तरह से तैयार था। राजीव का लंड काफी मोटा ओर कड़क था। उसने मेरी चुत में एक ही झटके में अपना लण्ड उतार दिया था। मुझे पहले तो हल्का सा दर्द हुआ और फिर में भी “आह आह ओह ओर जोर से” बोलते हुए मजे से राजीव से चुदने लग गयी थी। कुछ देर तक राजीव ने मुझे अलग-अलग पोजिशन में चुदाई की ओर फिर मैं राजीव को उपर बैठकर उपर नीचे होकर मजे से चुदने लगी। इस दौरान ही मेने राजीव का लण्ड भी पूरी तरह से अपने मुंह मे उतार लिया था। उसका लंड काफी लाजवाब था। कुछ देर बाद ही राजीव मेरे मुंह मे ही अपने वीर्य को ढोलकर झड़ गया था। उस दिन के बाद से जब भी मेरे पति कुछ दिनों के लिए बाहर जाते थे, तो राघव ओर मैं जमकर चुदाई किया करते थे। कुछ दिनों बाद मेने अपने पति को तलाक दे दिया था और फिर मैं अपने बच्चे के साथ हमेशा के लिए राजीव के साथ ही रहने लगे गयी थी। राजीव काफी अच्छे इंसान है मैं आज भी उनके साथ अच्छा महसूस करती हूं।

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मैंने अपनी चूत चटवाई

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम साक्षी है.. मेरी उम्र 26 साल है और में शादीशुदा हूँ. मेरे पति का नाम अजय है और वो एक प्राईवेट कम्पनी में प्रॉजेक्ट मैंनेजर है. में और मेरे पति अजय एकदम खुले विचारों के है और उन्हें मुझे बहुत ही सेक्सी ड्रेस में देखना और दिखाना बहुत पसंद करता है. हमारे शादी के तीन साल हो गये और हमारी सेक्स लाईफ बहुत ही अच्छी है. हम एक दिन में तीन, चार बार सेक्स करते है.. लेकिन में तो बताना ही भूल गयी थी कि मेरे फिगर का साईज 34-30-34 है और में हर टाईम बहुत ही सेक्सी कपड़े पहनती हूँ और मुझे अपना शरीर सभी लोगो को दिखाना बहुत अच्छा लगता है.

दोस्तों यह उस समय की बात है.. जब अजय कम्पनी के किसी जरूरी काम के सिलसिले में 40 दिन के लिए दुबई गये हुए थे और में उन दिनों घर पर बहुत ही अकेली हो गयी थी और में सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी.. मेरी चूत में जैसे आग सी लगी हुई थी. मुझे अब कैसे भी अपनी चूत की आग ठंडी करनी थी. तो रोज रात को अजय से मेरा नेट पर चेट होता था और हम दोनों नंगे पूरे होकर चेट करते थे.. लेकिन चेट करने से भी मुझे सन्तुष्टि नहीं थी और मेरी चूत दिनों दिन और बेकाबू होती जा रही थी. में सेक्स के लिए पूरी तरह से पागल हो चुकी थी और अपनी चूत में उगलियाँ करके चूत का सारा पानी निकालकर दिन गुजर रही थी.

फिर उस टाईम हमारे पड़ोस में एक फेमिली रहने के लिए आई.. उस फेमिली में पति, पत्नी और उनका एक 20 सक का लड़का था. फिर धीरे धीरे मुझे मालूम पड़ा कि उनका जो लड़का है उसका थोड़ा दिमाग़ ठीक नहीं है और उसका शरीर तो 20 साल का है.. लेकिन उसका दिमाग़ 10 साल के लड़के जैसा है और वो लोग इस बात से बहुत परेशान रहते थे. तो कुछ दिनों में मेरी उनसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी और वो जो औरत थी वो बहुत ही अच्छी थी. फिर में अपने रोज के पहनावे की तरह उसके सामने भी छोटे छोटे कपड़े पहनती थी और उनको कोई प्राब्लम नहीं थी. हमारी दोस्ती बहुत ही अच्छी हो गयी और फिर एक दिन अचानक ही वो औरत मेरे पास आई और मुझसे बोली कि उनको भी एक अच्छी नौकरी मिल गयी है और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है.. क्योंकि मैंने ही उस औरत को नौकरी करने की सलाह दी थी और फिर वो कहने लगी कि अब तुम्हे मेरा एक और काम करना पड़ेगा.. क्या तुम मेरे लड़के को सम्भाल सकती हो? तो मैंने थोड़ी देर सोचा और में भी राज़ी हो गयी.

तो एक हफ्ते के बाद उसने नौकरी पर जाना शुरू कर दिया और वो अपने पागल लड़के को मेरा पास देखभाल करने के लिए छोड़ गयी. एक दो दिन में मुझसे उस लड़के की दोस्ती होने लगी.. लेकिन वो वैसे बिल्कुल ही पागल था. में उसके सामने भी हर रोज की तरह सेक्सी कपड़े पहनती थी. तो एक दिन अचानक वो मुझे बोला कि आंटी आप मम्मी जैसी क्यों नहीं रहती? तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी मम्मी कैसे रहती है क्या पहनती है?

विशाल : ( उसका नाम विशाल था ) मेरी मम्मी घर में हमेशा गाऊन पहनती है.. लेकिन आप तो बच्ची जैसी छोटी स्कर्ट पहनती हो.

में : हाँ में इसलिए यह सभी पहनती हूँ.. क्योंकि अभी गर्मी का टाईम है और मुझे बहुत गर्मी लगती है.. इसी वजह से में छोटी छोटी कपड़े पहनती हूँ.. क्यों तुम्हे यह सभी कपड़े अच्छे नहीं लगते?

विशाल : नहीं मुझे बहुत अच्छा लगता है और आप इन सभी कपड़ो में बहुत सुंदर लगती हो.

फिर ऐसे ही कुछ दिन बीत गये में देख रही थी कि वो मुझे बहुत घूरता था और में भी उसे उतना ही चाहने करने लगी थी. एक दिन उसकी मम्मी हर दिन की तरह उसको मेरे पास छोड़कर ऑफिस चली गयी तो वो रोने लगा. में उसके पास जाकर उसका सर अपने सीने पर लेकर सहलाने लगी और उससे पूछने लगी कि तुम क्यों रो रहे हो?

विशाल : मम्मी मुझे प्यार नहीं करती है.. वो सिर्फ़ पापा को प्यार करती है.

में : तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?

विशाल : क्योंकि मैंने कल रात को देखा कि मम्मी, पापा को बहुत प्यार कर रही थी.

में : लेकिन वो कैसे?

विशाल : पापा ने मम्मी को बहुत देर तक चूम रही थी और उसके बाद मम्मी के सारे कपड़े उतार दिए और मम्मी ने पापा को अपना दूध पिलाया.. लेकिन सुबह जब मैंने मम्मी से कहा कि मुझे भी प्यार करो और मुझे भी अपना दूध पिलाओ तो उसने मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारा और मुझे दूध भी नहीं पिलाया.

तो में समझ गयी कि वो अभी भी बिल्कुल बच्चा ही है और बिल्कुल पागल है और उसको दूध भी पीना है और में भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और फिर मैंने भी सोच लिया कि उसको में अपनी जरूरत बनाऊंगी और सेक्स का मज़ा लूँगी.

में : कोई बात नहीं.. में तुम्हे बहुत प्यार करूंगी और दूध भी पिलाऊंगी.

तो मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके बाल सहलाने लगी उसके मुहं मेरे बूब्स पर दब रहे थे. मुझे जोश चड़ रहा था और वो एकदम चुपचाप मेरे बूब्स के ऊपर सर रखकर लेटा था.. में उसको चूमने लगी तो उसने पूछा कि आंटी यह क्या कर रहे हो?

में : क्यों तुमको प्यार कर रही हूँ.. क्या तुम को अच्छा नहीं लगा?

विशाल : हाँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मुझे और प्यार करो.

तो में उसको और चूमने लगी और मैंने धीरे से उसके लंड को छू दिया.. उसका लंड बहुत बड़ा था.

विशाल : आंटी आज में नहाया नहीं हूँ.. क्या आप मुझे नहला दोगे?

फिर में भी यह मौका छोड़ना नहीं चाहती थी.. क्योंकि में भी यह चाहती थी कि और फिर मैंने बोला कि ठीक है चलो आज में तुम्हे नहलाती हूँ.

में : तुम बाथरूम में जाओ में चेंज करके आती हूँ.

तो वो बाथरूम में चली गई और मैंने अपनी ड्रेस उतार कर एक टावल लपेट लिया और बाथरूम में गयी. फिर जब में बाथरूम में घुसी तो देखी कि वो सिर्फ़ अंडरवियर में खड़ा था. मैंने उसको पानी से भिगोया और साबुन लगाकर मसलने लगी. तभी अचानक उसने मुझसे पूछा कि तुम टावल में क्यों हो?

में : अगर में तुम्हे कपड़े पहनकर नहलाऊँगी तो मेरे भी कपड़े गीली हो जाएगे.

विशाल : तो तुम भी मम्मी कि तरह ब्रा और पेंटी पहन लो.

में : क्या तुम्हारी माँ तुम को ब्रा और पेंटी पहन कर नहलाती है?

विशाल : हाँ और कभी कभी तो वो ब्रा भी नहीं पहनती.

मुझे सेक्स चड़ने लगा और में बोली कि ठीक है.. तुम थोड़ा और रूको में दोबारा से चेंज करके आती हूँ. तो मेरी निप्पल टाईट होने लगी और मैंने बाहर आकर एक सफेद कलर की ब्रा और पेंटी पहन ली और फिर से बाथरूम में चली गयी. वो अब भी वैसे ही खड़ा था तो में उसको साबुन लगाने लगी और चिपकने लगी.. मेरा और उसका बदन एक दूसरे से घिसने लगे में पूरी गीली हो चुकी थी.. मेरी ब्रा और पेंटी पारदर्शी हो चुके थे. तभी उसने अचानक से अपनी अंडरवियर को उतार दिया और कहने लगा कि थोड़ा इसको भी साबुन लगा दो.

में : क्या मम्मी तुम्हारे साथ ऐसा भी करती है?

विशाल : हाँ मम्मी मेरे पूरे बदन को साबुन लगाकर अच्छे से साफ करती है.

तो में भी उसकी गांड और लंड में साबुन लगाकर रगड़ने लगी और फिर थोड़ी ही देर में उसका लंड खड़ा होने लगा.

में : तुम यह क्या हो रहा है?

विशाल : मालूम नहीं आंटी.. लेकिन ऐसा तो रोज होता है.. आप भी नहा लो फिर एक साथ बाहर जाएँगे.

तो में भी नहाने लगी और जितना सेक्सी पोज़ हो सकता है देने लगी और बोली कि तुम भी मुझे साबुन लगा दो. फिर उसने साबुन लिया और मेरे सारे बदन को लगाने लगा.. मेरे बूब्स के ऊपर, मेरी गांड में साबुन लगाया और बोला कि आंटी तुम्हारे दूध कितनी अच्छे है.. में तो इनको देखकर पागल हो रहा हूँ फिर उसने मेरे पेंटी के अंदर हाथ डाला और बोला कि आंटी तुम्हारे पास तो मेरे जैसा नहीं है.

में : नहीं बेटा.. लडकियों को वैसा नहीं होता.. विशाल अब तुम बाहर जाओ में अभी आती हूँ. तो वो बाहर चला गया और में नहाकर टावल लपेटकर बाहर आई और मैंने बेडरूम में आकर देखा तो वो अभी भी नंगा बैठा था.

विशाल : आंटी में क्या पहनूं? मेरी तो अंडरवियर पूरी गीली हो गई है.

में : कोई बात नहीं.. तुम ऐसे ही रहो.. में तुम्हे कुछ पहनने के लिए देती हूँ.

तो उसके बाद मैंने उसको मेरी एक मिनी स्कर्ट दी और बोली कि तुम इसको पहन लो. तो उसने वो मिनी स्कर्ट पहन ली और में भी चेंज करने लगी मैंने एक लाल कलर की ब्रा और पेंटी पहनी और ऊपर एक पारदर्शी गाऊन पहना वो गाऊन बहुत ही छोटा था और उससे सिर्फ मेरी गांड ढक रही थी.. तब तक मैंने मन बना लिया था कि कैसे भी मुझे उससे चुदवाना है. उसका लंड बहुत बड़ा था और मोटा भी था. फिर हम दोनों ने एक साथ लंच किया और बेड पर सोने के लिए गये. उसने मेरी स्कर्ट पहनी था और उसका लंड साफ साफ दिख रहा था. फिर मैंने अपना गाऊन उतार दिया और सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में बिस्तर पर लेट गयी और उसको बोली कि आओ आज में तुम्हे प्यार करती हूँ.. वो मेरे पास आ गया और में उसको बहुत चूमने लगी और उसका लंड सहलाने लगी.

विशाल : क्या आंटी मुझे दूध पिलाओगे?

में : क्यों नहीं बेटा आओ अभी पिलाती हूँ?

में कुछ करने से पहले ही उसने मेरी चूची को दबाया और ब्रा से बाहर कर दिया. फिर चूची से खेलने लगा. में पागल हो रही थी और मैंने अपनी ब्रा उतार दी.. अब में सिर्फ़ पेंटी मे थी.

फिर वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. में भी पागलों की तरह उसके लंड को ऊपर नीचे करने लगी. तो थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गया और में पूरी गीली हो चुकी थी.

विशाल : आंटी यह क्या हो रहा है?

में : कुछ नहीं बेटा ज़्यादा प्यार करने से ऐसा ही होता है.

विशाल : ठीक है आंटी. फिर से वो मेरे बूब्स को चूसने लगा और दबाने लगा.

में : विशाल आओ में तुम्हे और प्यार करना सिखाती हूँ.

विशाल : ठीक है आंटी.

फिर मैंने विशाल को पूरा नंगा कर दिया और अपनी भी पेंटी उतार दी.

विशाल : आंटी आप बिल्कुल मम्मी जैसी लग रही हो.. मम्मी भी ऐसे ही पापा को प्यार करती है.

में : हाँ में जानती हूँ.. अब से रोज हम दोनों ऐसे ही रहेंगे और बहुत प्यार करेंगे.

विशाल : ठीक है आंटी अब में क्या करूँ?

में : तुमने आज मेरा बहुत दूध पी लिया.. अब तुम अपना मुहं मेरी चूत में ले जाओ और चूत का रस पियो.

विशाल : ठीक है आंटी.

तो विशाल मेरी चूत चाटने लगा और में पागल हो रही थी मैंने एक बार पानी भी छोड़ दिया था.

में : आओ विशाल अब हम एक दूसरे को प्यार करें.

विशाल : आंटी वो कैसे?

में : तुम मेरी चूत का रस पियो और में तुम्हारे लंड का रस पीती हूँ.

विशाल : आंटी ठीक है.

हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गये और एक दूसरे को बहुत चूसने लगे.. वो मेरी चूत में अपनी जीभ घुसा घुसाकर जोर जोर से चूसने लगा और कहने लगा कि आंटी आपके छेद से नमकीन नमकीन पानी निकल रहा है तो में कहने लगी कि विशाल चूसो और जोर से चूसो यह पानी तुम्हारे लिए ही है तो वो और जोर से चूसने लगा और अपनी ऊँगली चूत में डालकर उँगलियाँ चाटने लगा. फिर करीब आधे घंटे के बाद हम दोनों एक एक करके झड़ गये. उसको बहुत मज़ा आ रहा था और फिर मैंने भी उसका लंड करीब बीस मिनट तक चूसा और बहुत मजे किए और हम एक दूसरे को बाहों में लेकर नंगे ही सो गये.. लेकिन बीच में जब भी उसकी नींद खुली तो वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर चूसने लगा.. बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह और इसके बाद से रोज सुबह उसके आते ही हम दोनों नंगे हो जाते थे और साथ में सेक्स गेम खेलते थे. एक दिन मैंने उसको बोला कि आज तुम मुझे वैसे ही प्यार करोगे जैसे तुम्हारे पापा तुम्हारी मम्मी को प्यार करते है.

विशाल : वो कैसे?

में : बताती हूँ

फिर मैंने उसके लंड को चूस चूसकर खड़ा कर दिया और बोली कि अब तुम इसको मेरी चूत के अंदर डाल दो और अंदर बाहर करो और वो इसको नया खेल समझ कर जोश के साथ तैयार हो गया और मुझे चोदने लगा. उसका लंड बहुत ज़्यादा बड़ा था और उसने मुझे करीब 25 मिनट तक चोदा और फिर झड़ गया. तो मुझे बहुत आनंद मिलने लगा था और में उससे अलग अलग पोज़ में चुदवाती रही और वो इसको प्यार का गेम समझकर खेलता रहा. तब से हम दोनों घर में हमेशा ही नंगे रहने लगे और मेरे पति आने तक हम लोग रोज 5-6 बार सेक्स करते रहे. अब वो मेरी जरूरत बन चुका था और उसको में जैसे चाहे इस्तमाल करती थी. हम हर जगह पर और अलग अलग तरीके से कभी रसोई में, कभी बाथरूम में, कभी सोफे पर, कभी बालकनी में भी सेक्स किया और यह करीब एक महीने तक चला. वो मेरे लिए इतना पागल था कि जब भी उसका लंड खड़ा होता था वो मुझे चोद देता था.

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आह चोद दे साले कमीने

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू श्रीवास्तव है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ. मेरी उम्र 34 साल है. मेरी साइज़ 36-32-38 की है. मेरा बदन पूरा भरा हुआ है. मेरे घर में मैं और मेरे नामर्द पति और मेरे दो बच्चे रहते हैं. मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं. वो मुझे बिस्तर में खुश नहीं कर पाते हैं.

एक दिन की बात मेरे पति ऑफिस गए थे और मैं नहा कर कपड़े ही पहन रही थी कि इतने में एक सब्जी वाला बाहर मेरे दरवाजे पर आवाज़ दे रहा था.
“मैडम सब्जी ले लो … हरी ताज़ी सब्जी है.”

मैंने साड़ी पहन कर बाहर जाकर देखा तो एक बड़ा मस्त मर्द सब्जी बेच रहा था. इसे मैंने पहले कभी अपने एरिया में नहीं देखा था. शायद नया सब्जी वाला था.

मैंने इधर-उधर देख कर उसको अपने पास बुलाया.
वो करीब आया तो मैंने पूछा- भैया आपकी उसका क्या रेट है?

मेरी इस दो अर्थी बात सुनकर वो मुझे ध्यान से देखने लगा. वो मैडम से सीधे भाभी पर आया और बोला- भाभी जी, आपके लिए तो सब रेट कम ही हैं.. आप तो बस बोलो कि क्या लोगी.
मैंने इठलाते हुए अपने चूचे हिलाए और बोला कहा- बड़े बड़े से वो दे दो.
वो बोला- क्या दे दूँ बड़े बड़े से?
मैंने- आलू दे दो … दो किलो.

उसने भी अपनी लुंगी में अपना लंड जरा सा सहलाया और मेरी तरफ देखता हुआ बोला- कैसे लोगी भाभी जी?
मैंने मन ने सोचा कि कह दूँ कि जैसे तुम देना चाहो.
फिर मैंने पूछा- कैसे लोगी से … तुम्हारा क्या मतलब है भैया?
वो बोला- मतलब कुछ डलिया वगैरह में लोगी.. या मैं थैली में दे दूँ?
मैंने कहा- थैली में ही दे दो.

उसने आलू तौल दिए, मैंने उससे आलू ले लिए. उससे आलू लेते वक्त मैं जरा झुक गई, जिससे उसको मेरे गहरे गले वाले ब्लाउज में से मेरी मस्त चूचियों की भरपूर झलक दिख गई. मेरी निगाह उसकी लुंगी पर थी, उसकी लुंगी ने उठना शुरू कर दिया था.
फिर मैंने उसको ध्यान से देखा. वो एक 40 साल का हट्टा-कट्टा पहलवान टाइप का मर्द दिख रहा था.

उससे सब्जी लेकर मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो मुझसे बोला- भाभी जी पैसे?
मैंने कहा- भैया अभी अन्दर से लाकर देती हूँ.
वो बोला- ठीक है.
मैं अन्दर जाने लगी, तभी मैंने पलट कर देखा, वो मेरे पिछवाड़े को बड़ी मस्त निगाहों से देख रहा था.
मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर चली गई.

जब मैं वापस आई, तो मैंने देखा कि उसकी कामुक नज़र मेरे गदराए हुए जिस्म पर टिकी थीं और वो मेरे मम्मों को बड़ी ध्यान से देख रहा था.

मैंने उसको पैसे दिये और अन्दर जाने के लिए मुड़ी तो उसी समय न जाने कैसे मेरे पैर में मोच आ गई और मैं वहीं गिर पड़ी. मुझे गिरता देख कर वो सब्जी वाला मुझे उठाने लगा. मैंने उसको मना किया, लेकिन वो नहीं माना. वो मुझे उठा कर घर के अन्दर ले आया. जब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था, उस वक़्त मैंने महसूस किया था कि उसका फौलादी लंड मेरी गांड के ऊपरी हिस्से में मतलब मेरी कमर को टच कर रहा है. उसने मुझे कसके पकड़ा हुआ था.

वो मुझे बेड के नजदीक लाया और मुझे बड़े हौले से बेड पर लिटा दिया. फिर वो मुझसे बोला- भाभी जी … मूव किधर रखी है, बता दीजिए … मैं आपके पैर में मूव लगा देता हूँ.
मैंने उससे बोला- तुम रहने दो … तुम बाहर चले जाओ, तुम्हारा ठेला बाहर खड़ा है … मैं अपने आप मूव लगा लूँगी.
वो बोला- नहीं … आपको दर्द है … मैं आपको इस हालत में ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकता … मेरे ठेले की चिंता आप न करें.

मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो खुद से सामने की टेबल पर रखी मूव उठा लाया और मेरी साड़ी को थोड़ा ऊपर करके पैर में मूव लगाने लगा.

उसके हाथों में बड़ी नफासत थी … मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा. उसके हाथों से थोड़ी ही देर में मुझे आराम मिल गया और मैं पैर फैला कर लेट गई. वो अब और भी अच्छे से मेरे पैर की मालिश करने लगा.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि वो साड़ी को कुछ और ऊपर कर रहा था. अब वो अपना हाथ मेरी जांघों तक ले जा रहा. मैं आंखें खोल कर उठ कर बैठ गई.

पहले तो मैंने सोचा कि शायद ये मालिश से भी कुछ आगे बढ़ेगा, तो हो सकता है कि आज मुझे शान्ति मिल जाए.

मैं उसकी मर्दाना छाती देख कर बड़ी चुदासी हुई जा रही थी. साथ ही मेरा दिमाग काम करने लगा था कि कैसे भी करके इसे फंसाना ही है. ये मुझे मस्त चोद सकता है. मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि अगर आज ये सैट हो गया तो इसके लंड की चुदाई से मेरी चुत की आग शांत हो जाएगी जो आज तक मेरे पति नहीं कर पाए थे.

मैंने उससे कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?
वो बोला- भाभी जी … मैं मालिश कर रहा हूँ.
मैं बोली- मोच तो नीचे वाले हिस्से में आई थी, तो तुम ऊपर क्यों मालिश कर रहे हो?
वो बोला- अरे मोच को मालिश करने के बाद पूरे पैर को अच्छे से मालिश करना पड़ता है … नहीं तो दर्द नहीं जाएगा.
मैं बोली- तुम रहने दो … अब जाओ. मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही मुझे सहला रहे हो.
वो बोला- नहीं भाभी जी, मैं आपकी मालिश कर रहा हूँ.

मैंने उसे उकसाया- कहीं तुम मुझे अकेली पाकर मेरे साथ गलत काम तो नहीं कर दोगे.
ये कहते हुए मैंने उठने की कोशिश की और अपना पल्लू ढलक जाने दिया. मेरे गहरे गले के ब्लाउज से उसको मेरी अधनंगी चूचियां गर्म करने लगी थीं. मैं देख रही थी कि उसका लंड फूलने लगा था.

वो मेरी चूचियों की तरफ देख कर बोला- अगर आप मुझसे कुछ गलत काम करने के लिए कहेंगी, तो मैं जरूर कर दूंगा. वैसे आप अपनी गेंदें दिखा कर मुझे भड़का रही हैं.
मैंने पूछा- गेंदें मतलब?
वो लंड सहला कर मुझसे बोला- भाभी जी गेंदें नहीं समझती हो. मैं आपके दूधों की बात कर रहा हूँ.

यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे सीने से लगा कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया. साथ ही मेरी साड़ी भी खींच दी थी. हालांकि मेरी साड़ी अब भी मेरे बदन से लिपटी हुई थी. मैं समझ गई कि लंड काबू में आ गया है. अब मैंने नाटक करना शुरू किया.

“ये क्या कर रहे हो तुम … इधर से चले जाओ तुम!”
वो- एक तो तेरे लिए इतनी मेहनत की और बिना कुछ दिए बोल रही हो कि अब जाओ.
मैं घबरा कर बोली- ये तुम क्या बोल रहे हो … तुम तुम्हारा दिमाग़ खराब है क्या?
वो बोला- हां तुझे देख कर मेरा दिमाग़ और हालत दोनों खराब हो गए हैं. अब तुझे पहले जी भर कर चोदूंगा, फिर मेरा दिमाग सही होगा.

मैंने उसको भगाने की कोशिश की नौटंकी की लेकिन मैं नाकामयाब रही.

वो मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. पहले तो उसने मेरी साड़ी पूरी तरह से खींच कर मेरे जिस्म से अलग कर दी. मैं उसके सामने रोने का ड्रामा रही थी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो.

लेकिन उसकी आंखों में अलग ही चमक थी. वो मुझको देख कर बोला- साली तुम चुदासी औरतें ऐसे गांड मटका मटका कर चलती हो कि हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता होता. जब चोदने की बारी आती है, तो साली नखरे दिखाने लगती हो … एकमद चुप रह साली रंडी … आज तेरी चुत का मैं भोसड़ा बना दूँगा. आज अपने फौलादी लंड से तेरी चुत के चिथड़े उड़ा दूँगा … तू बस आज देखती जा.

उसने मेरी साड़ी तो खींच ही दी थी. अब मैं उसके सामने ब्लाउज पेटीकोट में रह गई थी.

मुझे इस हालत में देख कर वो अपना लौड़ा सहला कर बोला- साली कितनी बड़ी रांड लग रही है तू … तेरी चुचियां कितनी बड़ी हैं. आज में इनका सारा रस पी जाऊंगा.

मैं उसके सामने छोड़ देने की कहती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था. उसने एक झटके में मेरा साया भी फाड़ कर अलग कर दिया और अगले झपट्टे में मेरा ब्लाउज भी मेरी चुचियों का साथ छोड़ चुका था. अब मैं उसके सामने ब्रा और पेंटी में थी और उसे मना कर रही थी.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और मेरा सामने पूरा नंगा हो गया. उसका लंड देख कर मैं हैरान हो गई. मैंने आज तक जीवन में कभी लंड के इतना बड़ा होने की कल्पना ही नहीं की थी. उसका 8 इंच लंबा था और गोलाई में 3 इंच मोटा था. मुझे तो ऐसा लगा कि ये तो गधे का लंड लगवा कर पैदा हुआ है और आज तो यह कमीना मेरी चुत को सचमुच फाड़ ही देगा.

उसने मेरी तरफ आते हुए मेरी मेरी ब्रा और पेंटी को उतार फेंका और मेरी चूचियों को तेज़ी से दबाने लगा.

मेरी धीरे से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी और मैं उससे कहती रही- मुझे छोड़ दो प्लीज़.
लेकिन वो मुझसे बोला- चुप साली कमीनी … आज बस तू मेरे लंड का मजा ले … मैं तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा … चुप रह रंडी कहीं की.

थोड़ी देर बाद मेरा विरोध कम होने लगा और मैं उसके सामने शांत होने लगी. मुझे भी मजा आने लगा था.

वो मेरे मम्मों को अपनी बड़ी बड़ी हथेलियों में भींच कर पूरी दम से मसल और रगड़ रहा था. वो इतनी तेज़ी से मेरे मम्मों का मलीदा बना रहा था, जैसे कोई राक्षस हो. वो मेरे ऊपर लदा हुआ था और मैं अपने नीचे उसका लंड महसूस कर रही थी.

कोई 15 मिनट बाद वो मम्मों को अच्छे से रगड़ने के बाद मुझसे बोला- चल साली रंडी … मेरा लंड मुँह में लेकर इसे चूस.

पहले तो मैंने मना किया लेकिन उसने जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. थोड़ी देर में उसके लंड का साइज़ और भी ज्यादा बढ़ने लगा और मुँह से बाहर आने लगा. जब उसका लंड अच्छे से बड़ा हो गया तब उसने अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल लिया.

मैं उसके पूरी तरह से खड़े लंड को देख कर गहरा गई लेकिन मुझे मेरी चुत की आग लगातार गर्म कर रही थी.

वो लंड को मेरी चुत पर ले गया और सुपारा घिसते हुए बोला- साली रंडी कितनी मस्त है तेरी चुत … लगता है तेरा पति तुझे अच्छे चोद नहीं पाता … चल कोई बात नहीं … आज मैं इसको भोसड़ा बना दूँगा … तू चिंता मत कर.

वो अपना लंबा लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया. उसने मेरी तरफ देखा मैं घबरा कर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. मुझे मालूम था कि जैसे ही इसका लंड अन्दर जाएगा मेरी चुत एक कबाड़खाना बन जाएगी.
लेकिन चुत की सारी आग भी ठंडी करवाने की ललक मुझे उसके लंड से चुदवाने के लिए उकसा रही थी.

उसने लंड चुत पर रख कर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. उसका लंड मेरी चुत में अन्दर घुसा और उसी पल मेरे मुँह से एक चीख निकल पड़ी- अया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … मर गई.
वो मुझे डांटता हुआ बोला- चुप साली रंडी … अभी थोड़ी देर में तुझको भी मजा आने लगेगा.

इसके बाद उसने एक और धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी चुत के अन्दर चला गया. मैं फिर से दर्द से चीख उठी- आह मर गई … प्लीज़ प्लीज़ … अब रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है … आ … अया … अया.

वो कमीना मेरी एक ना सुनने वाला था. दूसरे ही पल उसने एक और धक्का दे मारा. इस बार उसका लंड पूरा मेरी चुत में चला गया. मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था. क्योंकि पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड अपनी चुत में लिया था.

वो थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रुका रहा. फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. अब मुझे भी दर्द कम होने लगा था और मैं मजे लेने लगी थी. वो अब अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल कर चुदाई कर रहा था. वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को अब भी जानवरों की तरह रगड़ रहा था.
मुझे मजा आने लगा और मेरे मुँह से आनन्द भरी सिसकारियां निकलने लगी थी- आह … ससस्स … आहह. … सस्सस्स.

फिर वो मुझसे बोला- साली रंडी पहले तो नखरे दिखा रही थी और अब लंड के मज़े ले रही है. आज तू देख … तेरी चुत का में गड्डा बना दूँगा.
तब मैं बोली- चोद कमीने … और ज़ोर से चोद … फाड़ दे मेरी चुत को मादरचोद … आज मुझे रगड़ रगड़ कर चोद ताकि मैं 2 दिन तक सही से चल ना पाऊं.
वो धक्के देते हुए बोला- साली रंडी आज तुझको ऐसे ही चोदूंगा … तू देखती जा बस … आज के बाद तू मुझसे ही चुदाएगी रोज … ले रंडी ले.

और उसने धक्कों की स्पीड तेज़ कर कर दी और मेरे मुँह से ‘स्सा … आ … अया … इस्स … इस्स्स्स.’ की आवाज़ तेज़ी से आने लगी और मैं कमर उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी. मैं भी चुदाई की जन्नत की सैर का मजा लेने लगी- आह चोद दे साले कमीने … आ … आह … ऐसे … ही … पेल पूरा … हां … ऐसे चोद मादरचोद मुझे … फाड़ दे मेरी चुत को!

कोई 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गया और ढेर हो गया. इस बीच मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

वो मुझसे बोला- बता मेरी जान … मजा आया कि नहीं?
मैं उसे चूमते हुए बोली- बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा.

फिर दस मिनट के बाद उसका लंड वैसे ही तन गया और मुझे इस बार अपने ऊपर बैठने को बोला. वो बेड पर चित लेट गया. मैं उसके खड़े लंड के ऊपर चुत फंसा कर बैठ गई. मैंने उसके मूसल लंड को अपने अन्दर ले लिया.

अब वो मुझे हवा में उठा उठा कर चोद रहा था. अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहा था.

मुझे उसके लंड से चुदने में बहुत मजा आ रहा था. मैं लगातार 20 मिनट तक ऐसे ही चुदती रही. फिर हम दोनों झड़ गए और ऐसे ही 20 मिनट तक पड़े रहे. आज उसने मुझे जन्नत की सैर करवा दी थी. आज मैं बहुत खुश थी.

मैं उससे बोली- तुम मुझे ऐसे ही रोज चोदा करो … मेरा नामर्द पति कुछ नहीं कर पाता.
वो मेरी चूची दबा कर बोला- तू चिंता मत मेरी रांड … मैं अब तेरी चुत को भोसड़ा बना दूँगा. मैं अपने साथ अपने दोस्तों से भी तुझे चुदवाऊंगा और तेरी चुत को चबूतरा बना दूँगा.

उसकी बात से मैं पहले तो डर गई और बोली- नहीं तुम अकेले ही आना … किसी और को मत लाना … कहीं मेरे पति को पता चल गया, तो उन्हें बहुत गुस्सा आएगा.
वो बोला- साली रांड मुझसे चुदवा रही है, तब तेरा पति क्या तेरी आरती उतारेगा. होने दो भोसड़ी वाले को गुस्सा. अब चुपचाप जो मैं बोलूं, वही करना. मैं जिसको भी तेरी चुत चुदाई के लिए लाऊंगा, तुम बस उससे अपनी चुत चुदवा लेना.

मैं एक बार को तो खुश हो गई कि अब तो बदल बदल कर लंड मिलेंगे.

वो कहता जा रहा था- जो भी तुमको चोदना चाहेगा … उससे हजार रूपए भी वसूल लेना. समझो अब तुम मेरी रंडी हो गई हो.
मैं कुछ नहीं बोली और वो मुझे किस करके चला गया.

फिर बाद में वो अपने दोस्तों को लाता और वो लोग मुझे रंडी बना कर चोद देते.

कुछ ही दिनों में सब्जी वाले और उसके दोस्तों ने मेरी चुत का भोसड़ा बना दिया. उनका जब भी मन होता, वे आ जाते और मुझे चोद कर चले जाते. मुझे भी लम्बे लम्बे बड़े बड़े लंड से चुदने में मजा आने लगा था. मैं बहुत खुश रहती थी. मैं समझती हूँ कि एक नामर्द की बीवी को सही मायने में औरत होने की ख़ुशी इन्हीं लोगों से चुदने से मिलती थी.

मैं चुद चुद कर इन लोगों की रंडी बन गई थी … मेरे पति को अब तक पता नहीं चला था.

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