Redirecting in 20 seconds...

मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी

मेरा नाम ममता है और मैं एक 37 वर्षीय शादीशुदा महिला हूँ. मैं गुरुग्राम में टीचर के तौर पर कार्य करती हूं. मेरी लम्बाई 5 फीट 5 इंच है और शरीर भरा हुआ है. मेरी फीगर 36-34-40 की है. मेरी गांड बहुत भारी है क्योंकि मेरे पति ने मेरी चूत से ज्यादा मेरी गांड बजाई है.

मेरे पति को गांड मारने का इतना शौक है कि उसने अपने ऑफिस की कई महिलाओं की गांड चुदाई कर रखी है. ये बात मुझे तब पता लगी जब एक दिन हमारा बहुत बुरा झगड़ा हो गया था. उसके बाद हमारे रिश्ते में बहुत ज्यादा खराबी आ गयी.

अब मैं काफी परेशान रहने लगी थी. अपनी ड्यूटी के दौरान भी उदास ही रहती थी. अपने काम को भी मैं ठीक से नहीं कर पा रही थी. अभी दो महीने पहले ही हमारे स्कूल में एक नया अध्यापक ट्रांसफर होकर आया था.

उसका नाम है मनोहर। वो स्कूल में अर्थशास्त्र के टीचर हैं. उनकी उम्र 29 साल और हाइट 5.5 फीट है मगर शरीर एकदम सुडौल और बनावट एकदम कसरती है. वो जितना आकर्षक दिखते हैं उतना ही सुन्दर पढ़ाते भी हैं.

धीरे धीरे मेरी उनसे ऑफिशियल कामों को लेकर बात होने लगी. कुछ ही समय के अंदर हम दोनों में दोस्ती हो गयी और धीरे धीरे हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गये. उसका एक कारण यह भी था कि वो अपने परिवार से दूर यहां पर अकेले रहते थे.

एक बार उन्होंने शाम में मुझे मिलने के लिए पूछा. मैंने अपने हस्बैंड का बहाना लेकर मिलने से मना कर दिया. अगले दिन फिर उन्होंने बातों ही बातों में कह दिया कि ममता तुम मुझे बहुत सुन्दर लगती हो. मैं आपको सिर्फ अपनी एक अच्छी दोस्त के नाते ही कॉफी पर बुला रहा था.

अपनी मजूबरी पर मेरा गला भर आया और आंखों में आंसू लिये मैं बोली- मनोहर, मेरे पति मुझ पर बहुत शक करते हैं. हमारे बीच के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे हैं, न तो शारीरिक तौर पर और न ही पारिवारिक तौर पर. हम पति पत्नी के झगड़े का असर अब हमारे बच्चों पर भी पड़ने लगा है.

उन्होंने बड़े अपनेपन से मुझसे पूरी बात पूछी तो मैंने अपनी पति के नाजायज़ संबंधों और मेरे साथ उनके द्वारा की जाने वाली मेरी मार-पिटाई के बारे में बताया. मनोहर ने मुझे सांत्वना देते हुए कहा कि अगर मैं इस अत्याचार के खिलाफ कुछ कदम उठाना चाहती हूँ तो वो मेरा साथ देने के लिए तैयार हैं.

उसके हिम्मत देने के बाद मार्च के महीने में एग्जाम के टाइम मैंने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा दिया जिसके बदले में मेरे पति मनीष ने मुझे घर से निकाल दिया. उस दिन मैं बहुत रो रही थी. पूरे स्कूल के स्टाफ में मेरे ही बारे में चर्चा हो रही थी.

मनोहर ने मुझे स्कूल टाइम के बाद अपने साथ में चलने के लिए कहा. मेरे मना करने के बाद भी वो जोर देकर मुझे अपने घर ले गया. मैं सोच रही थी कि शायद ये मेरी मजबूरी का फायदा उठाने की सोच रहा है. मगर मुझे उसकी इन्सानियत का पता तब लगा जब उसने मुझे अपने हाथ से खाना बना कर खिलाया.

उसके घर में एक ही बेड था. उसने मुझे बेड पर सोने के लिए कहा और खुद ज़मीन पर सो गया. उस दिन मुझे अपने पति मनीष और मनोहर के व्यक्तित्व का अंतर मालूम चला. मैंने पाया कि मनोहर एक अच्छा दोस्त ही नहीं बल्कि एक अच्छा इन्सान भी है.

ऐसे ही एक सप्ताह गुजर गया. मेरे पति मनीष ने इस एक हफ्ते के दौरान न तो मुझे कभी फोन किया और न ही मेरे स्कूल में आकर मुझसे मिलने की ही कोशिश की. अब कुछ दिन मैंने और इंतजार किया. फिर मुझे अपने बच्चों की फिक्र होने लगी.

मनोहर मुझे मेरे बच्चों से मिलवाने के लिए उनके स्कूल में ही ले गया. वहां मेरे बच्चों ने मुझे बताया कि पापा आपके नहीं होने के बाद से एक दूसरी आंटी को घर में बुला रहे हैं. वो आंटी पापा के साथ ही सोती है.

बच्चों के मुंह से ये बातें सुन कर मेरा दिमाग खराब हो गया. मैंने उसी क्षण निर्णय ले लिया कि अब मैं भी किसी की परवाह नहीं करूंगी. मनोहर और मैं उसके बाद घर आ गये.

उस शाम को मैंने मनोहर से कहा कि आज का खाना मैं बना दूंगी.
मनोहर मान गया. हमने खाना बनाया और दोनों ने साथ में खाया और फिर बैठ कर बातें करने लगे. फिर वो बर्तन उठा कर धोने के लिए चला गया.

जब वो बर्तन धोकर वापस आ गया तो मैंने पूछा- तुम शादी क्यों नहीं कर लेते मनोहर?
वो हंसते हुए बोला- अगर मैं शादी करूंगा तो मेरा हाल भी तुम्हारे जैसा ही हो जायेगा. जिस तरह से पति के होते हुए भी फिलहाल मैं तुम्हें संभाल रहा हूं वैसे ही शादी के बाद कोई दूसरी औरत फिर मुझे भी ऐसे ही संभाल रही होती.

उसकी इस बात पर हम दोनों हँस दिये. कुछ देर बैठ कर बातें करने के दौरान दोनों में हँसी मजाक काफी हुआ. फिर हम सोने की तैयारी करने लगे.
मैंने मनोहर से कहा- आओ, तुम भी बेड पर ही सो जाओ.

मनोहर ने मेरे पास सोने से मना कर दिया. वो कहने लगा कि औरत और मर्द के बीच में थोड़ी सी दूरी ही रहे तो अच्छा होता है.
मैंने कहा- अब तो दूरियां खत्म हो जानी चाहिएं. जो भी होगा वह हम दोनों की इच्छा से ही होगा. मैं तुम्हें जबरदस्ती अपने साथ सोने के लिए नहीं कह रही हूं. मगर चूंकि मैं एक औरत हूं और मेरी वजह से तुम्हें जमीन पर सोना पड़े, ये मुझे अच्छा नहीं लगता.

मेरे कहने पर मनोहर मान गया. उस दिन के बाद से मनोहर और मैं साथ में एक ही बेड पर सोने लगे. मगर पहल दोनों में से किसी की ओर से नहीं हो रही थी. कुछ दिन ऐसे ही बीत गये.

एक दिन मुझे लेटे लेटे नींद नहीं आ रही थी. मैं करवट बदल कर लेटी तो देखा कि मनोहर का लंड तना हुआ था. उसकी लोअर को उसके लंड ने ऊपर उठा रखा था. फिर उसने भी करवट बदल ली.

मेरे अंदर बेचैनी सी हो गयी थी. मैं मनोहर को काफी दिन पहले से ही पसंद करती थी. कुछ पल के बाद उसने फिर से करवट ली और उसका लंड वैसा का वैसा तना हुआ था. बार बार उसकी लोअर को ऊपर उछाल रहा था.

मनोहर को बार बार करवटें बदलता हुआ देख कर मैं बोली- क्या हुआ मनोहर?
उसने मेरी ओर देखा और फिर अपने तने हुए लंड की ओर देखा तो उसकी आंखें शर्म से नीचे हो गयीं.
आगे से पहल करते हुए मैंने पूछा- तुम्हें मेरे साथ लेट कर मेरे लिए कुछ फील हो रहा है क्या?

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. बस लेटा रहा.
मैं बोली- देखो मनोहर, मैं एक साइंस टीचर हूं. मैं अच्छी तरह जानती हूं कि जब मर्द और औरत के जिस्मों के बीच में इतना कम फासला हो तो इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक है.

मनोहर बोला- ममता, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. आपको देखकर मुझे अपनी माशूका की याद आ गयी.
मैंने कहा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी थी? तुमने कभी बताया भी नहीं मुझे.

वो बोला- कभी इस विषय पर बात करने का माहौल ही नहीं बना.
मैंने कहा- अब तो माहौल भी है. अब तो बता दो अपनी प्रेम कहानी?
फिर मनोहर ने अपनी सारी स्टोरी मुझे बताई कि कैसे उसको एक लड़की से प्यार था, जिसका नाम भूमि था और दो साल पहले उनका ब्रेक अप हो गया. उसके बाद से उसकी जिन्दगी में कोई लड़की नहीं आई और उसने किसी दूसरी लड़की को अपने करीब आने भी नहीं दिया.

मैं उसके साफ दिल प्यार से बहुत प्रभावित हुई और मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया.
मैं बोली- कोई बात नहीं, जो हुआ उसको याद करके अब कोई फायदा नहीं है. मैं ही तुम्हारे लिये तुम्हारी भूमि बन जाती हूं.

उसके बाद हम दोनों अलग हो गये और सोने लगे. अगली सुबह हम उठे और तैयार होकर स्कूल जाने लगे. फिर दिन भर स्कूल में काम रहा.
छुट्टी के समय उसके निकलने से पहले मैंने उसको कहा- घर आते हुए एक मेडिकल स्टोर से कॉन्डम का एक पैकेट ले आना.

वो मेरी ओर देख कर मुस्कराने लगा. उसके बाद मैं आ गयी और कुछ देर के बाद मनोहर भी आ गया. हम दोनों ने खाना खाया और फिर बिस्तर पर लेट कर बातें करने लगे.

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तो भूमि के साथ तुम क्या क्या करते थे?
वो बोला- क्या मतलब?
मैंने कहा- ज्यादा बनो मत. तुम जानते हो कि मैं सेक्स के बारे में पूछ रही हूं.

वो बोला- पहले तो भूमि अपने चूचे पिलाती थी और फिर चूत भी चुसवाती थी. उसके बाद वो मेरा हथियार अपनी चूत में लगा कर अंदर ले लेती और चुदवाती थी. आगे से चुदवाने के बाद फिर पीछे भी लेती थी. तब जाकर उसको और मुझे शांति मिलती थी.

मन ही मन मैं खुश हो गयी कि चोदू किस्म का जवान लौंडा फंस गया है. इसके साथ तो मैं भी फिर से जवान हो जाऊंगी. मैंने देखा कि उसका लंड उसकी लोअर में फनफना रहा था.

मैंने मनोहर के सीने पर अपने कोमल हाथ से फिराते हुए कहा- तुम्हें मेरी चूचियां कैसी लगती हैं?
वो बोला- मैं तो पहले दिन से ही आपको पसंद करता हूं लेकिन फिर पता चला कि आप शादीशुदा हैं इसलिए कभी कुछ कहा नहीं.

उसकी छाती के निप्पलों को छेड़ते हुए मैंने कहा- अब तो मेरे पति भी मुझसे कोसों दूर जा चुके हैं, अब किसलिए इतनी दूरी बना रखी है.
उसने मेरी चूचियों को छेड़ कर कहा- दूरी कहां है, पास में ही तो हूं.

इतना बोल कर हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और दोनों के होंठ मिल गये. दोनों एक दूसरे के होंठों के रस को एक दूसरे के मुंह से खींचने लगे. उसका लंड मेरी जांघों में चुभ रहा था. उसने मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए अपनी टांग मुझे पर चढ़ा ली थी. मैं भी उसके जिस्म से लिपटने लगी थी.

जल्दी ही दोनों गर्म हो गये और उठ कर मैंने अपनी मैक्सी और ब्रा को नीचे कर लिया. मनोहर के सामने मेरी चूची नंगी हो गयी. मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी नंगी चूचियों पर रखवा दिया और उसने मेरी दोनों चूचियों को दबा कर देखा. उसको मेरी चूची काफी मस्त लगीं और वो उनको मुंह लगा कर पीने लगा.

मनोहर को मैं भी पसंद करती थी इसलिए जब उसके होंठ मेरी चूचियों को चूस रहे थे तो मुझे भी उस पर बेपनाह प्यार आ रहा था. मैं मदहोश होकर उसके बालों में हाथ फिरा रही थी. उससे चूचियां चुसवाते हुए ऐसा लगने लगा था कि मेरी जवानी फिर से जवान हो रही है.

फिर मनोहर ने अपने सारे कपड़े निकाल दिये और मेरे बदन से लिपटने लगा. उसके बदन पर केवल एक अंडरवियर था और मेरे बदन पर मेरी चूत पर पहनी हुई मेरी पैंटी. मनोहर मेरी पैंटी को ऊपर से ही मसलने लगा था. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. मैं भी उसके लौड़े को ऊपर से ही सहला रही थी.

फिर उसने मुझे प्यार से नीचे लिटा लिया और हल्के हल्के चुम्बन देने लगा. पहले मेरे गालों पर, फिर गर्दन पर, फिर चूचियों पर, फिर पेट से होता हुआ नाभि पर और फिर मेरी पैंटी की इलास्टिक तक पहुंच गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने काफी समय से अपनी सेक्स की भूख को दबा कर रखा हुआ था.

फिर उसने मेरी पैंटी को किस करना शुरू कर दिया. मैं मस्त होने लगी. शायद मनोहर मेरी चूत को चाटना चाह रहा था. उसने मेरी पैंटी को खींच कर निकाल दिया. जैसे ही उसने पैंटी उतारी तो मेरी चूत नहीं दिखी बल्कि पैंटी के नीचे बालों का एक घोंसला उसको दिखा.

वो थोड़ा निराश हो गया.
वो बोला- बाल बहुत ज्यादा बढ़ गये हैं आपकी चूत पर. इसकी सफाई करनी पड़ेगी.
उसके बाद उठ कर वो अपना ट्रिमर ले आया और मेरी चूत की सफाई करने लगा.

दो मिनट में ही उसने मेरी चूत को साफ कर दिया.
मैं बोली- ये मेरी चूत के पहरेदार सैनिक थे. अब मेरी चूत सुरक्षित नहीं रही. इस पर हमला हो सकता है.
उसने कहा- अब सैनिक मारे गये हैं. अब इस रानी को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.

उसने मेरी चूत को धोया और फिर कपड़े से पौंछ कर मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को जोर जोर से जीभ देकर चाटने लगा.

मैं दो मिनट में ही पगला गयी. मेरी चूत तपने लगी. मनोहर अभी भी मेरी चूत को तेज तेज जीभ चलाते हुए चूस-चाट रहा था.

फिर उसने मेरी चूत में उंगली दे दी और मेरी चूत में उंगली करने लगा. वो तेजी से उंगली चलाने लगा. उसके बाद फिर से मेरी चूत में जीभ देकर चोदने लगा.

अब मुझसे भी बर्दाश्त न हुआ और मैं भी उठ कर उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी और उसके होंठों को चूसने लगी. मैंने उसे लिटा लिया और उसकी टांगों की ओर मुंह करके लेट गयी. मेरी चूत उसके मुंह पर जा लगी और मैंने उसके लंड को मुंह में भर लिया.

दोनों 69 की पोजीशन में हो गये और एक दूसरे को चूसने और चाटने लगे. उसका लंड चूसते हुए अब चूत चुसवाने में और ज्यादा मजा आने लगा मुझे. मनोहर भी पूरा मदहोश हो रहा था.
दस मिनट में उसने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया और मैं झड़ गयी. मेरा सारा शरीर ढीला पड़ गया.

मनोहर ने मुझे उठाया और कहा- बाथरूम में जाकर चूत को साफ कर लो.
जब मैं अपनी चूत को धोकर वापस आई तो मनोहर अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ा कर बैठा हुआ था.

मैं आकर बेड पर लेट गयी.
मनोहर ने मेरी टांगें फैला दीं और उनके बीच में बैठ गया. वो मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

मनोहर का लंड 6 इंच लम्बा और करीब करीब ढाई इंच मोटा था. मनोहर मेरे कंधों के पास हाथ रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मैं अपने हाथ में उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी और मनोहर मेरे होंठों को चूम रहा था.

अब मैंने मनोहर का लंड अपनी चूत में डाल लिया और एक झटके में ही सारा लंड अंदर चला गया और मनोहर जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा. दो मिनट बाद हमने पोजीशन बदल ली और अब मैं मनोहर के ऊपर बैठ कर लंड की सवारी कर रही थी.

मनोहर अपने हाथों में भर कर मेरे बड़े बड़े चूचे दबा रहा था और बीच बीच में मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. एक जवान मर्द से चुदाई करवा कर मुझे बहुत मजा आ रहा था. अपने पति के साथ मुझे सेक्स में इतना मजा कभी नहीं आया.

पांच मिनट के बाद हमने फिर से पोजीशन बदल ली. इस बार मनोहर ने मुझे उठाया और हम दोनों एक दूसरे की ओर मुंह करके बेड से नीचे जमीन पर खड़े हो गये. मनोहर ने मुझसे एक पैर बेड पर रखने के लिए कहा जिससे कि वो मेरी चूत में लंड डाल सके.

मैंने ऐसा ही किया और मनोहर ने मेरी चूत में फिर से अपना लंड पेल दिया. वो मुझे खड़ी खड़ी चोदने लगा.

मैंने भी उसकी पीठ को नोंचना खरोंचना शुरू कर दिया. मेरी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपकी हुई थीं और वो मेरी गांड को भींच भींच कर मेरी चूत में लंड को अंदर तक ठोक रहा था. हर ठोक के साथ मेरे मुंह से आह्ह-आहह् की आवाजें आ रही थी. लंड की ठुकाई से होने वाले उस दर्द में बहुत मजा मिला रहा था मुझे.

चार-पांच मिनट के बाद मनोहर ने मुझे कुतिया बनने को कहा और पीछे से मेरी चूत में लंड पेलने लगा. पांच सात मिनट तक मेरी चूत में जबरदस्त तरीके से झटके लगते रहे. उसके बाद एक बार फिर से मेरा पानी निकल गया. मगर मनोहर का लंड अभी भी वैसे ही खड़ा हुआ था.

मनोहर ने मुझसे कहा- ममता यार, किसी तरह तुम भी मेरा पानी निकालो.
मैं बोली- हाथ से हिला कर निकाल देती हूं.
वो बोला- नहीं, मैं तुम्हारी गांड में निकालना चाहता हूं. अपनी गांड चोदने दो मुझे.

मैं गांड चुदवाने के लिए तैयार हो गयी. मैं फिर से कुतिया बन गयी. मनोहर ने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और मैंने अपने हाथों से दोनों चूतड़ फैला दिये. फिर मनोहर ने अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया.

अपने पति से मैं अपनी गांड पहले भी काफी बार चुदवा चुकी थी. मगर मनोहर का लंड मेरे पति से मोटा था. उसका लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयी. मगर मैं दर्द को बर्दाश्त कर गयी. मनोहर मेरी चूचियों को दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी गांड में लंड चलाने लगा.

दो मिनट के अंदर ही मुझे मजा आने लगा और फिर जैसे ही उसने स्पीड पकड़ी तो उसके लंड से निकल रहे कामरस से मेरी गांड भी चिकनी हो गयी और क्रीम की चिकनाहट के साथ मिलने से गांड पच-पच की आवाज करने लगी.

मनोहर बोला- मुझे ये आवाज बहुत अच्छी लगती है. जब मैं अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई करता था तो ऐसे ही आवाजें आती थी. भूमि को भी मेरे लंड से चुद कर बहुत मजा आता था.
उसके बाद मनोहर तेजी से धक्के मारने लगा और दो मिनट के बाद उसने तीन चार जोरदार झटकों के साथ अपना माल मेरी गांड में कॉन्डम के अंदर छोड़ दिया.

जब लंड बाहर निकाला तो कॉन्डम में काफी सारा माल भरा हुआ था. उसके माल की इतनी मात्रा देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर ये मेरी चूत में छूट जाता तो मुझे गर्भवती बना देता और मैं मनोहर के बच्चे की मां बन जाती.

हम दोनों पूरी तरह से थक गये थे और लेट गये. उसके बाद हमने सुबह सुबह उठ कर एक बार फिर से चुदाई की. सुबह की चुदाई करने के बाद मूड बहुत ही फ्रेश हो गया. बहुत दिनों के बाद मुझे इतना फ्रेश और हल्का फील हो रहा था.

इस तरह मनोहर के साथ मेरी चुदाई का सीन अभी तक चल रहा है. अब हम दोनों सोच रहे हैं कि एक साथ कानूनी रूप से लिविंग रिलेशन में रहना शुरू कर दें.

मैं इंतजार कर रही हूं कि जैसे ही मेरे पति के साथ मेरे तलाक का फैसला आ जायेगा, मैं उसी दिन से मनोहर के साथ खुले रूप से रहना शुरू कर दूंगी.

 5,418 total views

Tagged : / / / /

मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी

ये बात तब की है, जब मैं 19 साल का था और बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, हमारे स्कूल में एक शिक्षिका हुआ करती थीं. जिनका नाम था ज्योत्सना.

दोस्तो, पहले मैं आपको मैडम के फिगर के बारे में बता देता हूँ. मैडम का फिगर 34-30-36 का था … वो बड़े गजब की माल लगती थीं. उनके बड़े ही तीखे नैन नक्श और मदमस्त जिस्म को देख कर उन्हें काम की मूर्ति कहा जा सकता था.

जब वो चलती थीं, तो उनके छत्तीस इंच के चूतड़ ऐसे मटकते थे कि बस ज़ोर से पकड़ कर मसल ही डालो सालों को … और अपना खड़ा लंड सीधा बिना झटके के अन्दर उतार दो.

दूसरी तरफ मैडम भी कुछ कम नहीं थीं. उन्हें स्कूल के लड़कों के इन इरादों का अच्छे से पता था, तभी वो जानबूझकर लड़कों को देखते ही अपनी चाल बदल देती थीं. उनकी चाल देख कर ही लौंडे समझ जाते थे कि मैडम जानबूझ कर गांड हिला रही हैं.
मगर प्रिंसीपल सर के डर के कारण कोई भी उनसे कुछ नहीं कह पाता था.

प्रिंसीपल सर का डर क्यों था ये आपको इस सेक्स कहानी में आगे पता चल जाएगा.

वो जब काले रंग के सूट में स्कूल आती थीं, तो मन करता था कि उसी वक़्त पकड़ कर मैडम को चोद दूं. … पर कर नहीं पाया. फिर कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ ओता चला गया. मुझे मालूम ही नहीं था मेरी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

गर्मियों का मौसम था, स्कूल की छुट्टी हुई ही थी. सारे टीचर अपना अपना बैग आदि समेट करके अपने घरों को जाने के लिए तैयार हो रहे थे. उसी समय मुझे प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनाई दी. वो ज्योत्सना मैडम को अपने केबिन में बुला रहे थे.

दरअसल हमारा स्कूल इतना बड़ा नहीं था कि अगर प्रिंसीपल किसी को भी बुलाएं और हम तक आवाज़ ना पहुंचे. अभी मैंने कुछ दिनों से लगातार ध्यान दिया हुआ था कि जैसे ही स्कूल खत्म होता था, ज्योत्सना मैडम के लिए प्रिंसीपल सर का बुलावा आ जाता था.

उस दिन मैंने सोचा कि आज तो मामला क्या है … ये जानने के बाद ही घर जाऊंगा. कुछ कुछ उड़ती हुई बातें भी मुझे उनके कमरे में झाँकने के लिए मजबूर कर रही थीं.

चूंकि सर और मैडम की आशिकी के चर्चे मेरे स्कूल में दाखिला लेने से पहले से ही चले आ रहे थे. बस उस दिन मैंने मन बना लिया.

प्रिंसीपल सर की आवाज़ सुनते ही मैडम जी ने अपना पर्स उठाया और उनके चेंबर में चली गईं. मैंने शुरू में बाहर रह कर ही इंतजार करना ठीक समझा और इंतजार करने के लिए बाहर पड़ी बेंच पर बैठ गया. इस दौरान मेरे कान कमरे में से आने वाली हर आवाज पर लगे हुए थे, मगर अन्दर से एक सुई गिरने तक की आवाज नहीं आ रही थी.

मैडम को प्रिंसीपल सर के कमरे में गए हुए एक घण्टा होने को आया पर अब तक ना मैडम बाहर आई थीं और ना ही प्रिंसीपल सर.

मैंने अन्तर्वासना पर पहले भी ऐसी अनेक कहानियां पढ़ी हुई थीं … इसलिए मुझे समझते हुए ज़रा भी देर नहीं लगी कि अन्दर क्या चल रहा होगा.

थोड़ी देर और इंतजार करने के बाद मैंने अपनी कॉपी खोने की शिकायत लिखवाने का बहाना करके प्रिंसीपल के कमरे जाने का मन बना लिया और मैं उनके कमरे तक पहुंच भी गया, पर उधर ना ही प्रिंसीपल सर नज़र आए और ना ही मैडम नज़र आईं. मैं कमरा खाली देख कर भौंचक्का था. मुझे लगा कि शायद ये दोनों पीछे के रास्ते से निकल कर कहीं चले गए हैं और बाद में रूम में आ जाएंगे.

मगर उस दिन काफी देर हो चुकी थी तो मैं स्कूल से वापस आ गया, पर मैं इन बातों से इतना भी अंजान नहीं था कि मैं समझ ना सकूँ कि मैडम और सर कहां चले गए होंगे.

अगले दिन जब मैं स्कूल में ज्योत्सना मैडम से मिला, तो उस दिन के बाद से मैंने उन्हें घूर कर देखना शुरू कर दिया.

मैडम भी मेरे बदले बदले तेवर को समझ सकती थीं. चूंकि मैं स्कूल का प्रेसीडेंट था, जिस वजह से स्कूल की प्रार्थना से लेकर स्कूल के नोटिस आदि तक सभी के लिए प्रिंसीपल सर सीधे मेरा नाम ही सुनिश्चित करते थे.

ऐसे ही देखते देखते स्कूल का वार्षिक समारोह का दिन आ गया. पूरा स्कूल सज-धज कर तैयार था. सारे बच्चे, टीचर, उस दिन सभी सज-धज कर आए थे.
आप समझ ही सकते हैं कि मैं किसकी तरफ इशारा कर रहा हूँ.

ज्योत्सना मैडम ने लंबा सा गाउन डाला था, वो भी सुर्ख लाल रंग का, जिसमें से उनके चुचे लगभग बाहर को निकलने को हो रहे थे. मैंने कई बार नोटिस किया कि प्रिंसीपल सर और मैडम के बीच आज बात बिल्कुल भी नहीं हो रही थी.

मैंने कारण जानने के लिए मैडम को टटोलने की कोशिश की, पर मैडम ने अपना मुँह नहीं खोला. उनके इस बर्ताव से मेरा आश्चर्य सातवें आसमान पर था कि आज मैडम इतना मस्त माल लग रही थीं और प्रिंसीपल सर कुछ घास ही नहीं डाल रहे हैं.

मैंने सोचा अपने संयम पर काबू रखने में ही भलाई है. वक़्त आने पर अपने संयम का सही फायदा मिल कर रहेगा. बस ये सोच कर मैं प्रोग्राम की बाकी तैयारियों में लग गया.

उस दिन छह सात प्रोग्राम्स के बाद वार्षिकोत्सव समाप्ति की ओर चला ही था और प्रिंसीपल सर उठ कर चले गए थे. तभी मेरे मन में एक उपाए सूझा. मैंने बाहर जाकर देखा तो पाया कि प्रिंसीपल सर प्रोग्राम को खत्म करने के बाद के कामों में लगे हुए थे और उनको अभी एक घंटा लग सकता था.

ये देख कर मेरे दिमाग में एक खतरनाक आईडिया आ गया. मैंने अपने एक साथी को ये कह कर मैडम के पास भेज दिया कि प्रिंसीपल सर ने आपको अपने ऑफिस में बुलाया है, उन्हें आपसे कुछ जरूरी काम है.

जितनी देर में मेरा साथी मैडम को ये बात बताता … उतनी देर में मैं प्रिंसीपल सर के ऑफिस में चला गया और कमरे की लाइट्स ऑफ करके मैं दरवाजे के पीछे छिप गया.

दो मिनट ही बीते होंगे कि मैंने किसी के आने की आहट सुनी. कुछ ही पलों में ज्योत्सना मैडम ऑफिस के अन्दर आ चुकी थीं. जैसे वो अन्दर आईं, मैंने झट से दरवाजा बंद करके उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने में लग गया.

मैडम की आवाज़ आई- सर, आज सारा कुछ यहीं कर लेंगे … या उसी वाले कमरे में चलेंगे.

किसी दूसरे कमरे का नाम सुन कर मेरा दिमाग़ ठनका और मुझे समझ में आ गया कि उस दिन जब मैं शिकायत के बहाने से आया था, तब मुझे इस ऑफिस में कोई क्यों नहीं मिला था.

मैडम ने दुबारा आवाज़ लगाई- सर अंदर वाले कमरे में चलो न.

मैंने ये सुनते ही मैडम को आगे की तरफ़ टेबल पर झुका कर उनकी ड्रेस ऊपर करके अपना लंड उनके चूतड़ों की दरार के बीच के छेद पर लगा दिया. जब तक वो कुछ सोच पातीं, इतनी देर में मेरा आधा लंड टीचर की गांड के अन्दर प्रवेश कर चुका था.

वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी थीं और कह रही थीं- आह सर आपको ये शौक कब चढ़ गया … कल तक तो आप बस चुत मार कर ही शांत हो जाते थे … आह आज शुरुआत ही इतनी ख़तरनाक है … क्या इरादे हैं आज हमारे प्रिंसीपल सर के..!

मैडम की बातें सुनकर मुझे मजा आने लगा था और मेरा जोश बढ़ भी रहा था. मैंने मैडम की गांड मारना चालू रखा और पन्द्रह मिनट की धक्कम पेलाई में मैंने मैडम की गांड में ही अपना वीर्य डाल दिया. जैसे ही मैं थोड़ा पीछे को हुआ, मैडम ने घूम कर मेरी ओर रूख़ कर लिया और वो मुझे देख कर सन्न रह गईं. मैं उनके सामने ही अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए दुबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा था.

तभी मैडम ने मुझ पर चिल्ला कर कहा- अरे राज … ये क्या कर रहे हो तुम … और तुम अन्दर कब आए?
मैंने उन्हें सारा सीन समझाया और कहा- मैडम देखो … मुझे आपके साथ वही सब कुछ करना है, जो आप प्रिंसीपल सर के साथ हर रोज करती हो. अगर आप राजी राजी करोगी, तो आपके लिए सही है. नहीं तो स्कूल इतना बड़ा भी नहीं है कि आपके कारनामे किसी से छिपे रह जाएं. बात फ़ैल जायेगी तो आपकी ही ज्यादा बदनामी होगी.

इतना कहते ही मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसको मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगीं.
वो कहने लगीं- मैं तो कब से तुझसे चुदना चाह रही थी. तू ही गंडफट था तो मैं क्या करती. तूने कभी मुझे दाना ही नहीं डाला.

मुझे समझ आ गया कि मैडम मस्त हो गई हैं और फिर से मजा देंगी. अब मैंने मैडम के दूध मसलने शुरू कर दिए.

मैडम बोलीं- यार राज, मेरा गाउन खराब हो जाएगा. इस पर सिलवटें पड़ जायेंगी.
मैंने कहा- तो गाउन को उतार दो ना मैडम … आपके पक्के आशिक को आज पूरी नंगी मैडम चोदने का मन है.

मैडम ने गाउन उतार दिया और ब्रा पैंटी में आ गई’. मैंने अगले ही पल उनकी ब्रा पैंटी भी हटा दी और कमरे में एक छोटी लाईट जला दी. मैडम इतना चुदने के बाद अब भी मस्त माल थीं. मैं उनके एक दूध को चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.

मैडम बोलीं- मुझे लंड ठीक से चूसने दे.
मैंने उनके दूध छोड़े और लंड से उनके मुँह को चोदना शुरू कर दिया.

थोड़ी ही देर में मैंने दुबारा अपना सारा माल मैडम के मुँह में डाल दिया.

इसके बाद मैंने मैडम को टेबल के ऊपर बिठाया और उनकी चूत चाटने लगा. दस मिनट के अन्दर ही उनकी चूत चुदने को तैयार थी.

मैडम ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थीं- राज आह … अब तो अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. मेरी चूत पानी छोड़ रही है लंड हड़पने के लिए. इसका पेट भर दो अपने गर्म लंड से.

पर मैं आज उनको तड़पा तड़पा कर मजा देना चाहता था. सो मैंने उन्हें ऐसे कुछ मिनट और तड़पाया. फिर अपना सात इंच का लंड उनकी चूत में एक बार में ही उतार दिया.

मैडम की गीली चूत चौड़ी हो गयी और मजे के कारण उनकी आह निकल गई और हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे.

टीचर मैडम के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थी. मैडम प्रिंसीपल को भी गालियाँ निकाल रही थी. कह रही थी – मादरचोद कुत्ता साला … रोज मुझे चुदाई के लिए दफ्तर में बुला लेता है. पर उससे होता जाता कुछ नहीं! दो मिनट पुच पुच करके झड़ जाता है. मुझे तो नौकरी करनी है तो मजबूरी में उसके नीचे लेटना पड़ता है. नहीं तो ऐसे चूहे को तो मैं अपना मूत भी ना पिलाऊँ.

लगभग बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा. फिर उन्होंने मुझे होठों पर किस किया और चुदाई के लिए थैंक्स कहा.
मैडम ने कहा- आज गांड और चूत मरवा कर मजा आ गया.

वो कहने लगीं- अब आज से साले प्रिंसीपल की माँ की चुत … आज के बाद मुझे जब भी मेरी चूत लंड मांगेगी, मुझे चुदना होगा तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लूंगी.

 9,525 total views,  1 views today

Tagged : / / / /

मेरी सील टूट चुकी थी

हैलो फ्रेंडज़, मेरा नाम नीलम है. मैं मध्यप्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं एक बहुत सेक्सी लड़की हूँ और मेरा साइज 28-30-32 है.

यह चूत स्टोरी उन दिनों की है, जब मैं बीएससी फर्स्ट ईयर में थी. मैं एक लड़के को बहुत चाहती थी, वो लड़का भी मुझे पसंद करता था.

एक दिन बात है, जब मैं कॉलेज जा रही थी. तब मैं बस स्टॉप पर खड़ी अपनी बस का इंतजार कर रही थी. तभी मेरा ब्वॉयफ्रेंड बाइक से आया और उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैं भी बड़ी खुशी से उसके साथ बाइक पर बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ी.

उसने बाइक को लम्बे वाले रास्ते से ले जाने का कहा. मैं उसके साथ मस्ती से चिपकी बैठी थी. मैंने भी उससे कह दिया कि जानी जब तू मेरे साथ है, तो क्या डर है, तू जिधर भी ले चल मैं तेरे साथ राजी हूँ.

वो हंस दिया और वोला- सोच ले मेरी जान … मैं तुझे जंगल के रास्ते से ले जाने वाला हूँ.
मैंने उसकी छाती से चिपकते हुए कहा- हां ले चल … मुझे कोई चिंता नहीं है.
उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

वो मुझे जंगल के रास्ते से ले आया. एक सुनसान जगह देख आकर उसने रास्ते से अलग हटते हुए एक कच्ची पगडंडी पर बाइक उतार दी.

कुछ आगे ले जाकर उसने साइड में बाइक रोकी और मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी उसका साथ देने साथ देने लगी. उसने मेरी चूची पर हाथ लगाया और चूची पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा. मैं आज उसके साथ इस घने जंगल में मतवाली हुई जा रही थी. मैं चुदास से पागल हो रही थी और मेरी चूत में पानी निकलने लगा था.

उसके बाद उसने मेरी पैन्ट का हुक खोला और पैन्टी सरका कर मेरी चूत में उंगली करने लगा. मैं मस्त होने लगी. अब मेरा भी मन हो रहा था कि आज मैं इसके लंड से यहीं पर चुद जाऊं. लेकिन रास्ते में कांटें होने की वजह से चुदाई नहीं हो सकती थी. मेरा मन बेक़ाबू हो रहा था, तो मैंने उसके पैंट के अन्दर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी. मैं उसके लंड को आगे पीछे करने लगी. वो भी मेरी चूत में लगातार उंगली पेले जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत से पानी निकलने को हो गया … मैं अकड़ने लगी. तभी मैंने जोश में उसका लंड मरोड़ दिया.
वो जोर से चीख़ उठा- आं आह … उई … क्या कर रही है … लंड उखाड़ेगी क्या.

मेरी हंसी छूट गई और मैंने उसका लंड छोड़ दिया. लेकिन उसी वक्त उसने भी मेरी चूत के दाने को पकड़ कर खींच दिया. मुझे भी बहुत दर्द हुआ. मैंने भी उसको धक्का दे दिया. फिर हम दोनों हंस दिए और फिर से एक दूसरे से खेलने लगे. उसने मेरी चूत में फिर से उंगली करना शुरू कर दी. मैंने भी उसके लंड की मुठ मारना चालू कर दी. कुछ देर के बाद उसका पानी निकल गया. मेरी चूत भी झड़ गई.

उसके बाद हम दोनों कुछ देर अपनी साँसें काबू में करते रहे. फिर हम वहां से निकल पड़े.

वो रास्ते में बोला- यार, मेरा मन शांत नहीं हुआ.
उसकी बात सुनकर मुझे भी चुदास भरने लगी. मैंने फिर भी उससे कहा- क्यों … मजा नहीं आया क्या?
वो बोला- पानी भर तो निकला है, ऐसा तो मैं मुठ मार कर भी निकाल लेता हूँ.
मैंने कहा- तो फिर क्या चाहते हो?
वो बोला- चलो एक दोस्त के फ्लैट में चलते हैं.
मैंने कहा- कोई परेशानी तो नहीं होगी न?
वो बोला- मैं पहले उससे बात कर लेता हूँ.
मैंने कहा- उसको फ्लैट से जाने की कह देना … तभी ठीक रहेगा.
उसने कहा- ठीक है.

उसने फोन पर अपने दोस्त से बात की, दोस्त ने हामी भर दी और वो बोला कि आ जा … मैं कुछ देर में वैसे भी जाने वाला हूँ.
अब मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझसे पूछा- अब तो ठीक है?
मैंने मुस्कुरा कर हां कर दी. हम दोनों उसके फ्लैट की तरफ चल दिया.

उसके फ्लैट में पहुँच कर उसके दोस्त ने पानी वगैरह दिया और बोला- यार, मुझे जाना है. तू ये चाभी ले ले और बंद करके बाहर एक जगह छिपा कर रख देना.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने उसको हां कहा और उसका दोस्त फ्लैट से चला गया.

दोस्त के जाते ही उसने फ्लैट का दरवाजा बंद किया और मुझे पकड़ कर मेरी चूची मसलने लगा. अब मैं भी बिंदास हो गई थी.

उसने मेरे कपड़ों को हाथ लगाया, तो मैंने उससे कहा- मैं उतार देती हूँ … मेरे पास यही ड्रेस है … तुम्हारी जल्दीबाजी में कहीं फट न जाए.
वो हंसने लगा और बोला- फटना तो है ही.
मैंने उसकी तरफ देखा और पूछा- फटना मतलब … मैं उतार तो रही हूँ.
वो फिर हंसने लगा.

मैं समझ गई और उसकी छाती पर प्यार से मुक्का मारने लगी. मैंने कहा- उसको फड़वाने के लिए ही तो तेरे साथ आई हूँ. आई लव यू जान.
उसने भी मुझे अपनी बांहों में भरा और मेरे होंठ चूमते हुए मुझसे कहा- आई लव यू टू मेरी जान.
यह कह कर वो मेरे कपड़े उतारने लगा.

कुछ ही पलों में उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया था. वो मेरी चूची को चूसने और चूमने लगा. मैं मस्त हो गई और उसके सर को अपनी छाती से दबाते हुए उसको अपना दूध पिलाने लगी.

वो मुझे चूमते चूमते बिस्तर पर ले आया और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया. मैं भी बेतहाशा चूम रही थी. उसका साथ मुझे बड़ा ही मस्त लग रहा था.

फिर वो मुझे चूमते चाटते हुए नीचे को होने लगा. उसने मेरी चूत को सहलाया और अपनी जीभ रखने लगा. मुझे उसकी जुबान का टच बहुत ही गर्म लगा और मैंने एकदम से सिहर उठी. वो मेरी चूत चाटने लगा.

तभी मुझे उसका लंड देखने मन किया. मैंने उसके लंड को हाथ लगाया और बोली- मुझे तुम्हारा देखना है.
वो बोला- क्या देखना है?
मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से मसला और कहा- इसको.
वो मुझे ठिठोली करने लगा- पैन्ट को क्या देखना है?
मैंने कहा- पैन्ट को नहीं, इसके अन्दर जो है, उसको देखना है.
वो बोला- पैन्ट के अन्दर तो चड्डी है. तुमको चड्डी देखना है?

मैंने झुझलाते हुए कहा- चड्डी के अन्दर जो छुपा रखा है न … उसको देखना है.
उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?
मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है.
उसने मेरी दूध दबाए और कहा- उसका कोई नाम भी तो होगा.

मैं समझ गई कि ये मुझसे लंड कहने के लिए कह रहा है. मैंने कहा- हाँ उसका नाम है न.
वो मेरी आंखों में आंखें डाल कर बोला- बताओ न क्या नाम है इसका?
मैंने भी उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा- मुझे तुम्हारा लंड देखना है.
उसने मुझे चूमा और कहा- अब ये मेरा नहीं है … ये तुम्हारा लंड है.
मैंने फिर उसको चूमा और कहा- हां मुझे अपना लंड देखना है.

उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. उसका लंड हवा में झूल रहा था.
वो बोला- लो, अपना लंड देख लो और इसे प्यार भी कर लो.

मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने पहली बार लंड देखा था. मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था. मैं जोर जोर से लंड हिलाने लगी. कुछ ही समय में उसका रस मेरी हथेली में ही निकल गया.

मैंने पूछा- ये कैसे निकल गया?
वो बोला- यार नीलम, मेरा जल्दी निकल जाता है … ये पहले से बीमारी है. हम कल मिलते हैं और चुदाई करेंगे.
ये बोल कर वो अपने कपड़े पहनने लगा.

मुझे उस वक्त तक लंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी कि ये दुबारा भी खड़ा हो सकता है, यदि कुछ देर कोशिश की जाए.

अपनी नाकाम चूत स्टोरी से मैं मायूस हो गई और हम दोनों वहां से निकल आए. इस वक्त मेरी तो चुत में आग लगी थी … मगर क्या कर सकती थी.

उसके बाद 3 दिन तक मेरी उससे बात नहीं हुई. फिर उसने कॉल किया, तो वो मुझसे फिर से बोला कि मिलना है.

मैंने हां तो बोल दी … लेकिन उससे नहीं मिली. उससे मेरा ब्रेकअप हो गया.

कुछ दिन बीत जाने के बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नम्बर से कॉल आई. उसने अपना नाम हेमंत बताया. मुझे उसकी बातें अच्छी लगीं. फिर हम दोस्त बन गए.

एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. उसके बाद हेमंत ने मुझे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया. मैंने भी हां कर दी और उससे मिलने होटल में चली गई. मैंने वहां जाकर हेमंत को देखा, तो वो बहुत ही हैंडसम था. उसकी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच की थी. हालांकि उसकी बॉडी औसत ही थी.

उसके बाद हम दोनों एक कमरे में चले गए. उधर कुछ देर बैठ कर बात हुई, फिर मैं कमरे के बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई. उसने मेरे साथ कोई जल्दबाजी नहीं की. इससे मुझ पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ा.

इसके बाद हम दोनों खाना खाने बाहर आ गए. खाना खाने के बाद वापस होटल के कमरे में आने के बाद उसने मुझे किस किया. मैंने भी उसको किस किया. हम दोनों में गर्मी बढ़ने लगी. कुछ देर बाद उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मुझे भी लगने लगा था कि अब मैं जल्दी से चुद जाऊं.

उसने मेरे कपड़े निकालने के बाद अपने भी निकाल दिए. अब मैं सिर्फ पैन्टी में उसके सामने बेड पर चित लेटी थी. वो अपने लंड को मेरे सामने निकाल कर हाथ से आगे पीछे करने लगा. उसका लंड काफी सुन्दर दिख रहा था. एकदम लाल सुपारा अपनी चमक से मेरी आग को भड़का रहा था. उसके लंड का साइज यही कोई 6 इंच का था.

मैं भी उसके लंड को देख कर मन ही मन खुश होने लगी थी. साथ ही मैं अपनी चूचियों के निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबा कर मींजने लगी थी. मेरी आंखों में वासना का खुमार चढ़ने लगा था. पर अभी भी मैं कुछ सोच रही थी कि कहीं इसके लंड का काम तमाम न जाए. मुझे पिछले अनुभव से अभी भी उसके लंड की ताकत को देखना था.

कुछ पल लौड़ा हिलाने के बाद वो मेरे पास आ गया. उसने मुझे किस किया और अपने होंठों में मेरी चुची को दबाकर चूसने लगा.
उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी.

उसने मेरी दोनों चूचियों को मन भर चूसा और मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. मुझे उसका लंड बड़ा सख्त सा लगा. मैं उसके लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी. उसने मेरी आंखों में अपनी आंखें डालीं और अपना लंड मेरे मुँह की तरफ बढ़ा दिया. मैंने खुद उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ खींचा तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया.

मैं उसके मस्त मोटे लंड को चूसने लगी. कुछ देर तक लंड चुसाने के बाद उसने मेरी चूत में लंड लगा दिया. वो मेरी चूत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा. मुझे इस वक्त बेहद आग लग चुकी थी और उसका कड़क लंड मुझे इस समय अपनी चूत की खुराक दिखने लगा था.

वो मेरी चूत में लंड डालने लगा. लेकिन चूत सील पैक थी और लंड मोटा था. इसलिए लंड चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. वो बार बार इधर उधर फिसला जा रहा था. उसके लंड की बेबसी पर मैं हंस रही थी.

वो बोला- हंस मत यार … मुझे गुस्सा आ रहा है.
मैं बोली- तो निकाल दो अपना सारा गुस्सा मेरी चूत में … फट क्यों रही है?
उसने कहा- ठीक है … देखता हूँ कि किसी फटती है.

उसने मुझे फिर से पकड़ा. अपना लंड पकड़ कर चूत में लगाया और एक बार में ही पूरा लंड चूत में उतार दिया. मैं दर्द से तड़पने लगी और उसे मना करने लगी.

मैंने कहने लगी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई … निकाल लो … मुझे नहीं चुदाई करवाना … आह मेरी फट रही है.
लेकिन इस बार उसने मेरी एक न सुनी और लंड से चूत की चुदाई करता रहा. उसका लंड अन्दर तक पेवस्त हो गया था, जिससे मेरी सील टूट चुकी थी और मैं दर्द से आह भर रही थी.

वो मस्त सांड सा मेरी चूत में पिला पड़ा रहा. कुछ समय बाद मेरा दर्द कम हुआ और मैं भी उसका साथ देने लगी. वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी चूत के चीथड़े उड़ाने में लगा था. जल्दी ही मैं निकल गई. मगर वो लगा रहा.

मेरे झड़ने के कोई दस मिनट बाद वो भी चरम पर आ गया. उसने मुझे कुछ कहा ही नहीं … बस सीधा मेरी चूत में अपना लावा निकाल कर मेरे ऊपर ढेर हो गया.
हम दोनों स्खलित हो चुके थे और एक दूसरे की बांहों में पड़े थे.

कुछ देर बाद मैं उठी और देखा तो बिस्तर पर खून ही खून के दाग लग गए थे. मैं घबराई, तो वो हंसने लगा.
फिर उसने मुझे समझाया कि तेरी सील टूट गई है … अब तू मजे लेने के लिए खुल गई है.

मुझे भी मजा आने लगा. मैंने सोचा कि अब खेल खत्म हो गया है. मगर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं हैरान थी कि इसका लंड तो फिर से खड़ा हो गया.
मैंने उससे पूछा- अब ये कैसे खड़ा हो गया?

उसकी समझ में नहीं आई, तो उसने मुझसे पूछा- ये खड़ा क्यों नहीं हो सकता?
मैं चुप थी, उससे कह भी नहीं सकती थी कि पिछली बार क्या हुआ था.

मैंने कुछ नहीं कहा … बस मुस्कुरा दी. उसने मुझे फिर से लंड चूसने के लिए कहा. मैंने लंड चूसा तो वो फिर से एकदम लोहा बन गया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है.
उस दिन हम दोनों ने चार बार चुदाई की. मैं आज पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

इसके बाद उसने मुझे कई बार चोदा और हर बार उसने मुझे चोद कर मस्त कर दिया.

 4,545 total views,  1 views today

Tagged : / / / / / /

लंड से पिचकारी

मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ.  सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था. आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है.

यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था.

उस वक़्त मैं उन्नीस साल का था. तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था. अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं.. पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था. स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था. इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी.

अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गयी थी. मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे. बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था.

मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था.

प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे. मेरा सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा. कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था.

प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी. शुरूआत में मैं प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था. लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था.

जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था.

हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी. मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया.

मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.
मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?
उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे.

मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था. क्यों जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझी चूचियों के दीदार हो जाते थे.

मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया.

प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी. उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था. मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था. उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था.

हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए. उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था. प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया. उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी मांसल जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया. उसके ऐसे करने से मेरे मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.

अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था. तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था, ये सिर्फ उसे ही पता था.

खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे. ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे.

तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ.
यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गयी. उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी. उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी.

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी. मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया. अब मेरी हालत पतली होने लगी. मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गयी. उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था.

प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया. अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई. सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी.

जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?
मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया.

दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला.

मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी. एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे.

हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए. आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था.

कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है.

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था. आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी. अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था. मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था.

थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं.
मैंने भी हामी भर दी.

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं.

इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.

मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी.

तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया. मैं मन मसोस कर रह गया. लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है.

दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.

जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है, वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना.

मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया.
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी.

मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है.

कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा.

मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है, आज तो और भी ज्यादा दर्द है. तू थोड़ा सा दबा दे.

मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा.

फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा. हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.

इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था. मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था.

इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी. मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा. हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे.

फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. मैंने भी झट से अपना पैंट नीचे करके अपना लंड उसको दे दिया.

अब हम दोनों की हालत काफी ख़राब हो रही थी. मैंने भी झट से उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी पैंटी नीचे कर दी. आखिरकार मुझे उसकी चुत के दर्शन हो ही गए. उसके फूली हुई चुत के ऊपर हल्के हल्के बाल भी थे.

जिस चुत के लिए मैं हमेशा से ही तड़प रहा था. वो चुत अब मेरे सामने थी. मैंने जैसे ही उसकी चुत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी. उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा. उसकी चुत गर्म भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी और चुत से धीरे धीरे सफ़ेद पानी निकल रहा था.

मैं अब उसकी चुत को सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी. अचानक से उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे कर दिया, इससे मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ.

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी और मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैंने भी उसको मेरा लंड चूसने बोला, तो उसने मना कर दिया. मैंने कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों को रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसके सीधा किया और उसकी चुत में धीरे से लंड डालने लगा. उसको भी लंड डलवाते हुए दर्द हो रहा था, पर वो भी अपने दर्द को सहते हुए पूरे दम से लंड डलवा रही थी. कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

इसके बाद वो मुझसे रुकने का बोल कर मुझसे अपनी चूचियों को चूसने की कहने लगी. मैं लंड डाले हुए ही उसकी चूचियों को चूसने लगा.

कुछ ही पलों में वो लंड को झेल गई और अपनी गांड मटकाने लगी. उसको अब दर्द नहीं हो रहा था. मैंने धक्का लगाया, तो वो काफी मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर बाहर करवाते हुए नीचे से गांड उछालने लगी.

उसके मुँह से ‘आह आह आह.. मुझे चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह मेरी चुत को फाड़ दो.. उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ निकलने लगा था. ये सब वो बार बार चिल्ला रही थी. मेरा भी लंड उसकी चुत को फाड़ने के लिए ही बना था, सो मैं भी पूरे जोरों शोरों से चुत फाड़ने में लगा हुआ था. मुझे पता चल चुका था कि शायद फिर प्रीति की चुत मिले न मिले. क्योंकि इसकी शादी होने वाली है.

मैं उसको फिर कभी न मिल पाने की सोच कर उसे धकापेल चोदने लगा. मस्त चुदाई होने लगी. करीब दस मिनट की चुदाई में प्रीति एक बार झड़ चुकी थी. आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने पूरा का पूरा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया.

हम दोनों ही पसीने से तरबतर हो गए थे और हांफते हुए एक दूसरे से चिपक कर पलंग में निढाल होकर गिर गए. हम दोनों को ही पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और बाथरूम जाकर एक दूसरे को साफ़ किया.

मैं उसके घर उसकी मम्मी के आने तक के लिए रुका था और उनको देर शाम तक वापस आना था.

इसके चलते कुछ ही देर बाद मैं फिर से चार्ज हो गया. वो बेड पर लेटे हुए मेरे लंड से खेलने लगी. लंड का सुपारा बार बार ऊपर नीचे करने लगी. शायद उसको भी समझ में आ गया कि लंड फिर कब मिले या हो सकता है कि न मिले, इसलिए वो भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती थी.

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया. वो मुझे चुत चाटने के कहने लगी, तो मैं उसके ऊपर आकर उसकी चुत को बड़े इत्मिनान से चाटने लगा. अब मुझे भी उसकी चुत का रस बहुत अच्छा लगने लगा. मैं उसकी चुत के भगोष्ठों पर काटने लगा. इससे वो कामांध हो गई. मैं उसकी चुत चाटते हुए उसको जन्नत में ले गया. थोड़ी देर में उसने काफी सारा पानी चुत से निकाल दिया. मैं उसका पूरा रस पी गया.

इसके बाद मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा, पर वो मना करने लगी.
वो बोली- इसे तुम चुत में ही डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती.

आखिरकार मैंने उसकी चुत में ही लंड डालना मुनासिब समझा और उसको चोदने लगा. इस बार की चुदाई बड़ी मस्त हुई. वो भी दो झड़ कर मुझे मजा दे रही थी.

मैंने उस दिन उसे चार बाद चोदा. रहा. दिन भर की चुदाई से उसकी चुत में सूजन आ गयी थी और मेरे लंड में भी काफी दर्द होने लगा था. पर हम दोनों को चुदाई करने में परम आनन्द आ रहा था.

उसके बाद उसको चोदने का मौका नहीं मिला क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गयी.
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है. मेरी भी शादी हो गयी है, लेकिन अब भी एक स्वप्न अधूरा ही रह गया कि कोई तो मेरे लंड को चूसे.

 3,151 total views

Tagged : / / / / / / / / / / / / / / / / / /

मेरी गांड फाड़ दी

असल में मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी शादी एक बड़े घर में हुआ है शादी करवाने वाली मेरी सौतेली माँ है। उसने पांच लाख लेकर मेरी शादी करवाई है। तो आपको समझ आ गया होगा। या तो मैं अपने ससुराल से भाग जाऊं या जो हो रहा है उसी का फायदा उठाऊं और ज़िंदगी जिऊँ। दोस्तों इसी कसमकस में सोची की शायद मुझे यही सही रहेगा की मैं ससुराल में ही रहूं। अगर मैं भाग जाती हूँ तो यहाँ मुझे तीन चोद रहा है। पता नहीं कितने लोगों के बिस्तर को गर्म करना होगा हालात से लड़कर और जीने के लिए। और रही बात वापस हरियाणा जाने की जहाँ एक चुड़क्कड़ सौतेली माँ हो वो मुझे वह भी बेचेगी। तो बार बार और कई लोगों से बिकने से अच्छा है की एक घर में ही चुदवा लूँ।

अब मैं आपको अपनी पूरी कहानी बता रही हूँ।

शादी के बाद मैं अपने ससुराल आ गई। रात में पति ने मेरे साथ खूब रंगरेलियां मनाई मैं भी खूब गांड उठा उठा कर चुदवाई। रात में मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया। मेरी गांड फाड़ दी थी चुत मार कर। मैं भी तैस में आ गई और खूब कूदी उसके लंड पर और खूब मजे ली पूरी रात। पर जब वो ठंढा पड़ा और मैं कपडे पहन ली तब वो मुझे रूल समझाने लगा की मेरे घर का क्या रूल है। उसने एक बात बोला की तुम कभी भी मेरे पापा को और मेरे भाई को नाराज नहीं करोगी ? मैं भी तैस में आकर पूछ ली। नाराज क्या ? क्या वो मेरी चूत मांगेगे तो वो भी देनी पड़ेगी। तो मेरा पति बोला हां सब कुछ।

मेरी सास नहीं है। वो पहले ही चल बसी शायद तीन तीनो ने चोद चोद कर ऊपर पहुंचा दिया था। 50 साल की उम्र के बच्चा होने वाला था। शायद इन तीनो का ही काम होगा, मैं इसके बारे में कुछ पूछी नहीं। मुझे लगा जो भी कह रहा है मेरा पति मान लेते हैं। आगे देखा जाएगा क्या करने है। पहले तो सौतेली माँ से ही मेरा पाला छूटा यही कम नहीं थी। रही बात ससुर का वो देख लुंगी और रही बात देवर का तो मजे लुंगी।

सुबह मेरा पति अपने ड्यूटी पर चला गया क्यों की उसे जाना जरुरी था। देवर भी उठा और वो भी चला गया अपने काम कर रह गया घर में बूढा। मैं नहाने गई बाथरूम में। नहा कर जैसे बाहर आई और अपने कमरे में गई तो बूढा मेरी पलंग पर बैठा था। मैं पूछी की बाबूजी आप यहाँ? तो वो बोला क्यों नहीं बहुरानी ये घर ऐसा है कोई भी कही जा सकता है। एक चीज को हम लोग बाँट कर खाते हैं। एक की शादी हो गई अब आप एक की नहीं हो हम तीनो की हो।

मैं सनझ गई, रात को जो मेरा पति बोला था वही हुआ। ससुर मुझे चोदने के लिए तैयार था। मैं बोली अभी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। रात भर उन्होंने मेरी चूत का भोंसड़ा बना दिया है। दर्द कर रहा है। तो उन्होंने बोला इसका मैं ख्याल रखूंगा। मैं अभी नहीं चोदता हूँ। मैं तुम्हारी चूत में तेल लगा देता हूँ ताकि दर्द ख़तम हो जाये। मैं मना की पर उन्होंने कहा नहीं नहीं मुझे ये दर्द पसंद नहीं। मैं आता हूँ तेल गरम करके।

तब तक मैं बाल झाड़ कर सिंदूर रही थी तभी ससुर जी। सरसों का गरम तेल ले आये और मुझे बोले लेट जा। मैं लेट गई। उन्होंने पेटीकोट ऊपर कर दिया। और पेंटी उतार दी। दोनों पैरों को फैला दिया और पहले चूत को सहला कर देखा और मुस्कराने लगे। बोले भगवान् में मेरी सुन ली। मैं भगवान् से माँगा रहा था की मुझे ऐसी बहू देना जिसके चूत में बाल नहीं हो। और ऐसा ही हुआ क्लीन है तुम्हरी चूत।

उसके बाद वो तेल लगाने लगे। करीब पांच मिनट तक तेल लगाए मेरी चूत गीली होने लगी। चूचियां भी तन गई थी। मुझे ऐसा लग रहा था इनसे चुद जाऊं। तभी उन्होंने कह दिया बहु हौले हौले घुसाऊ। मैं बोली ठीक है।

उन्होंने तुरंत धोती खोला और नीला अंडरवियर जो लाइन बाला होता है। खोल दिया और लैंड को हिलाने लगे और उसमे भी उन्होंने तेल लगा लिया और फिर से मेरी चूत में तेल लगा लिया और चूत पर लंड लगा कर घुसाने लगे। पर उनका लौड़ा घुस नहीं रहा था क्यों की दम नहीं था। खड़ा सही से नहीं हो रहा था। फिर उन्होंने हिलाया और फिर मेरी मुँह में दे दिया जब मैं थोड़े देर तक अपने मुँह में ली तो उनका लौड़ा मोटा और लंबा हो गया।

अब वो मेरी चूत में घुसा दिए और करीब दस मिनट तक चोदे और सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिए। मैं प्यासी ही थी अभी दर्द तो ख़तम हो गया था। अब दर्द नहीं हो रहा था। बाबूजी खेत चले गए। मैं सो गई क्यों की रात में चुदवा रही थी।

करीब तीन बजे नींद खुली वो भी जब घर का दरवाजा कोई पीट रहा था। जाकर खोली तो देखि देवर जी थे।

वो अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिए। और मुझे अपनी बाहों में ले लिए। मैं भी खुश खुश उनके बाहों में समा गई। क्यों की देवर जी को मैं पसंद करती थी वो मेरे लायक थे। वो मेरे होठ को चूसने लगे चूचियां दबाने लगे। मैं भी उनको किस करने लगी सहलाने लगी।

वो मुझे बैडरूम में लेकर आये और मेरी ब्लाउज खोल दिए मैं खुद ही ब्रा खोल दी पेटीकोट भी उतार दी। ये सब देखकर बोले मुझे बहुत ख़ुशी हुई आप मेरे घर के कायदे कानून को बिना झिझक के अपना लिए हैं। आप रानी बनकर रहेंगे इस घर में।

और वो मेरे ऊपर टूट पड़े मेरी चूचियां पिने लगे। दबाने लगे। होठ चूसने लगे। और फिर उन्होंने मेरी गांड चाटी और फिर चूत चाटने लगे। मैं बोली बस करो ऐसे चाटना अभी मुझे चोद दो। क्यों की ससुर जी मुझे गरम कर के चले गए। वो बोले अच्छा बाबूजी मजा ले लिए तो मैं बोली हां वो मुझे चोद दिए। तो देवर जी बोले और मैं ही पीछे रह गया।

और उन्होंने में टांग को अलग अलग किया और मोटा लौड़ा मेरी चूत पर लगा कर पेल दिया। अब मुझे दर्द होने लगा था क्यों की देवर का लौड़ा काफी मोटा और लंबा था। वो चोदना शुरू किये तो मैं पानी पानी हो गई। खूब चोदा उठा पर पटक कर ऊपर से निचे से बैठ कर खड़े होकर। करीब एक घंटे तक उन्होंने चोदा मुझे आखिर उनका भी गिर गया।

उन्होंने अपने जेब से एक सोने का चेन निकाला और मुझे दे दिया और बोले ये मेरे तरफ से।

दोस्तों पहले तो सात दिन तक मुझे काफी दर्द हुआ था। क्यों की मेरी चूत नाजुक थी। पर अब मैं तैयार हो गई है तीन मर्द से चुदने को तो अब कोई बात नहीं है। खूब चुद रही हूँ मजे ले रही हूँ। मैं अपनी दूसरी कहानी भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिखने जा रही हूँ। आप जरूर पढियेगा।

 5,824 total views

Tagged : / / / / / / / / / / / / / /

मेरा गदराया हुआ बदन

मेरा नाम रशिली है, कानपूर देहात की रहने वाली हु, मेरी उम्र २२ साल की है, लंड का स्वाद अपने पति से ही मिला वो भी उतना नहीं जितना मैं चाहती थी, मन भटकता था चाहती थी किसी किसी पडोश के लड़के से ही चुदवा लू पर डरती थी कही वो ब्लैकमेल ना करे इसलिए मन मार के रह गयी, मेरे दिमाग में एक विचार आया क्यों ना मैं ससुर से ही चुदवा लू, बूढ़े को भी तो बूर का मजा चाहिए क्यों की सास का देहांत हुए करीब १० साल हो गया था, तो मैंने अपने ससुर पे डोरे डालने लगी.

एक दिन ससुर का तबियत ख़राब हो गया था मैंने उनके लिए तेल गरम कर के पुरे शरीर में मालिश की उनके पुरे जिस्म को मैंने अपने हाथ से टटोला और ब्लाउज का ऊपर का हुक खोल के राखी ताकि वो मेरे गदराये हुए चूचियों को निहार सके हुआ भी ऐसा ही, ससुर ने तिरछी नज़र से खूब निहारा मैं मन ही मन खुश हुई, फिर कुछ ऐसी भी हरकत मैंने की जिससे मेरी चूची उनके हाथ को छुआ, मैं उनके हाव् भाव से समझ रही थी की वो ये सब नहीं चाह रहे थे, उनकी नियत ख़राब नहीं थी पर मैं चुदवाने के लिए व्याकुल थी.

मैंने दूसरे दिन आँगन में चापाकल पे नह रही थी और मैंने जानबूझ कर वही टाइम चुना जब वो खेत से घर आते है, बाहर का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया, और मैंने अपने ब्लाउज और ब्रा को खोल के नहाने लगी, पेटीकोट कमर पे ही बंधा था, चुचिया यु ही खुला था, मैं रगड़ रगड़ के नहाने लगी, उस दिन कुछ ज्यादा ही नही क्यों की ससुर देर से आये थे, जब वो दरवाजे के अंदर आये वो हैरान हो गए और मैं भी झूठ मुठ की परेशान हो गयी, वो मुझे नंगे देख लिए, मेरा गदराया हुआ बदन किसी के भी होश उड़ाने के लिए तैयार था, वो शरमाते हुए कमरे में चले गए और मैं भी कपडे पहन ली, मैं तिरछी निगाह से देखि तो उनके धोती फुला हुआ था शायद उनका लंड खड़ा हो गया था.

इस तरह से कई दिन हो गए पर मौक़ा नहीं मिला चुदवाने के लिए, एक दिन मैंने रात के करीब २ बजे पेट दर्द का बहाना बनाई और रोने लगी, मेरे ससुर परेशान हो गए कोई डॉक्टर भी नज़दीक में नहीं था, सुबह ही कुछ हो सकता था, मैंने कहा पिताजी आप चिंता ना करो पहले भी कई बार ऐसा हुआ था मेरी माँ गरम सर्सो का तेल मेरे पेट पे मालिश कर देती थी तो छूट जाता था, मैंने कराहते हुए बोली. पिताजी फ़ौरन ही रसोई में गए और चूल्हे से गरम तेल कर के ले आये, मैंने लगाने को कोशिश की पर मैं चाहती थी की वो लगाए, मैंने कहा मैं नहीं लगा पाउंगी, अगर आप लगा दे तो अच्छा हो जाएगा, उनके हाथ कापने लगे बोले बेटी मैं कैसे?

मैंने कहा कोई बात नहीं मैं किसी को नहीं बताउंगी, वो तैयार हो गए और मेरे पेट पे मालिश करने लगे, उसी वक्त मैंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और आँख बंद कर ली वो मेरे पेट पे तेल लगाते रहे और मेरी चूचियों को निहारते रहे, आकिहार मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने कहा, आप मुझे वो सुख दो जो आपका बेटा नहीं दिया अगर आप मना करोगे तो पुरे गाँव में बात फैलाडुंगी की जब मैं सो रही थी उस समय आपने मेरे साथ गलत हरकत किया, मेरे ससुर परेशान हो गए बोले नहीं नहीं ये सब गलत है मैं नहीं कर सकता, उसी समय मैंने कहा मैं अभी घर से बहार चली जाऊूँगी और चिल्लाऊंगी की आपने मेरी इज्जत लूट ली. उन्होंने बोला ठीक है जो तुम चाहो.

मैंने अपने ब्लाउज को उतार दिया और उनको अपने बाहों में ले ली, मैंने सबसे पहले उनको अपना दूध पिलाया फिर मैंने उनको अपना बूर चाटने के लिए कहा करीब १० मिनट बूर चटवाने के बाद मैं काफी कामुक हो गयी थी मेरे दांत पीस रहे थे, बूर से पानी निकल रहा था चूचियाँ टाइट हो चुकी थी, मैंने अपने ससुर का लंड अपने मुह में लेके मलाई बर्फ की तरफ चूसने लगी धीरे धीरे उनका लंड काफी बड़ा और टाइट हो गया फिर मैंने उनके लंड को पकड़ कर बूर के मुह पे रखी और मैंने उनसे पेल देने के लिए कहा,

फिर क्या था उस बूढ़े में जान आ गया वो झटके पे झटके दे रहा था मैं भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, उसने मुझे गांड भी मार और बूर का तो सत्यानाश कर दिया था उस दिन पर मैं खुश थी क्यों की मेरी वासना की आग को कुछ शांति मिली | करीब ४ महीने से वो मेरे साथ ही सोते है, अब तो मेरे पेट में २ महीने का बच्चा भी है वो भी ससुर का. आशा करती हु की आपको मेरी आपबीती अच्छी लगी होगी,

 4,104 total views

Tagged : / / / / / / / / / / / /

बूब्स दबवाने का मजा

हैल्लो दोस्तों,  में समीरा और मेरी उम्र 22 साल है, में दिखने में बहुत सुंदर, गोरी मेरा गदराया हुआ बदन, बड़ी बड़ी आंखे, गोल चेहरा, पतली कमर, बड़े ही सुडोल बड़े बड़े आकार के बूब्स, मस्त सेक्सी गांड को देखकर हर किसी का लंड पानी छोड़ने पर मजबूर हो जाता है, मेरी लम्बाई 5.7 इंच है.

दोस्तों यह घटना एक साल पुरानी है, जब मेरी उम्र 21 साल और मेरे भाई की उम्र 18 साल थी और उस दिन मेरे मम्मी और पापा किसी काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ स्टेशन गये हुए थे तो उस दिन में और मेरा छोटा भाई रूम में बैठे हुए थे और उस समय वो फोन पर गेम खेल रहा था और में बेड पर बैठी हुई थी और मैंने उस समय गहरे गले की नाईटी पहनी हुई थी और जिसमें से मेरे बूब्स बड़े आकार के होने की वजह से बहुत ही सुंदर और आधे से ज्यादा नंगे दिख रहे थे तो वो अब मेरी तरफ चोरी चोरी देख रहा था और मुझे बहुत अजीब सा लगा, लेकिन थोड़ा थोड़ा अच्छा भी लग रहा था और वैसे में घर पर ज्यादातर नाईटी ही पहना करती थी और बाहर जाते समय बिल्कुल टाईट जींस और टी-शर्ट पहना करती थी, जिसकी वजह से बाहर का हर एक लड़का मुझे देखकर लाईन मारता था.

फिर थोड़ी ही देर के बाद मैंने उससे कहा कि टीनू प्लीज मेरे पैर दबा दे बहुत दुख रहे है, उसने एकदम से बोला कि हाँ अभी दबा देता हूँ दीदी और अब उसकी आखें जैसे बिल्कुल चमक सी उठी हो. मैंने एक कंबल ले रखा था और अब वो मेरे पैर दबाने लगा और में बेड पर लेट गई. दोस्तों उसका व्यहवार पिछले कुछ दिनों से मेरे लिए एकदम बदल सा गया था, क्योंकि मैंने बहुत बार गौर किया कि वो मुझे किसी ना किसी बहाने से छूने की कोशिश किया करता था और मेरी छाती को घूर घूरकर देखता रहता तो कभी मेरे कूल्हों को पकड़कर छूने लगता और मुझे भी उसका यह सब करना बहुत अच्छा लगता था.

मैंने उससे कहा कि टीनू प्लीज थोड़ा और अंदर से दबा दे और अब वो बोला कि ठीक है दीदी तो वो कंबल के अंदर हाथ डालकर मेरे पैर दबाने लगा. मुझे धीरे धीरे थोड़ा आराम आने लगा और नींद भी और थोड़ी देर के बाद मुझे महसूस हुआ कि टीनू मेरे पैर दबा रहा है और जब मेरी आँख खुली तो मैंने उससे कहा कि पैर दबा. वो बोला कि ठीक है दीदी, लेकिन अब मुझे फिर से नींद नहीं आ रही थी, वो बार बार मेरी जांघ की तरफ आ रहा था और मेरी आंखे बंद थी.

फिर वो थोड़ी देर के बाद घुटनों के ऊपर से मेरी जांघे दबाने लगा, लेकिन मैंने उससे कुछ नहीं बोला, लेकिन मेरी पेंटी को उस बात का इंतजार हो रहा था. फिर मैंने कंट्रोल किया कि यह मेरा छोटा भाई है. फिर एकदम से उसने अपना हाथ मेरी पेंटी पर रख दिया और वो धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा. तभी में एकदम झट से उठ गई और उससे बोली कि तू यह क्या कर रहा है टीनू?

वो मुझसे बोला कि दीदी सॉरी वो सब ग़लती से हो गया. में तो सिर्फ़ आपको सुलाने की कोशिश कर रहा था. फिर में बिल्कुल शांत, चुपचाप होकर लेट गई और अब वो फिर से मेरे पैर दबाने लगा, लेकिन थोड़ी ही देर के बाद फिर उसने मेरी पेंटी पर हाथ रख दिया, लेकिन इस बार मैंने उससे कुछ नहीं बोला. फिर मैंने सोचा कि शायद इस बार भी वो मुझे सुलाने के लिए यह सब कर रहा है. वैसे दोस्तों में सच सच बताऊँ तो मुझे उसके हाथ का स्पर्श अपने जिस्म पर बहुत अच्छा लग रहा था और मेरे अंदर एक अजीब अहसास आने लगा था.

फिर वो अपना हाथ धीरे धीरे मेरी पेंटी पर रगड़ने लगा और में ऐसा व्यहवार कर रही थी कि जैसे में अब गहरी नींद में सो रही हूँ. तभी अचानक से उसने अपना एक हाथ मेरी पेंटी के अंदर डाल दिया और अपना दूसरा हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया, जिसकी वजह से मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी और अब में उसे रोकना चाहती थी, लेकिन पता नहीं क्यों रोक नहीं पा रही थी. वो मेरा छोटा भाई था और उसका स्पर्श मुझे बहुत मज़ा भी दे रहा था.

फिर में कुछ देर बाद थोड़ी हिम्मत करके एकदम से उठी और फिर उस पर ज़ोर से चिल्लाई कि टीनू क्या तुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आती, में तेरी बहन हूँ? लेकिन इसके चेहरे पर तो एक शरारती स्माईल थी और अब वो मुझसे कहने लगा कि दीदी तुम बहुत सुंदर हो. फिर मुझे बहुत गुस्सा आया और फिर वो मुझसे बोला कि दीदी तुम्हारा जिस्म बहुत सुंदर है और तुम्हारे बूब्स, चूत तो मुझे बहुत ही अच्छे लगते है. फिर मैंने गुस्से में उसे एक ज़ोर का थप्पड़ लगा दिया, लेकिन उसने अब मुझे कसकर पकड़ लिया. में उसके ऊपर चिल्लाई और अब वो मुझसे बोला कि चुप कर रंडी साली कुतिया बाहर के लोगो से मरवा सकती है तो फिर तुझे मेरे से क्या दिक्कत है?

फिर उसने भी मुझे एक थप्पड़ मारा और मुझे बेड पर पटक दिया और बोला कि आज तो तू मुझसे चुदेगी समीरा. फिर में ज़ोर ज़ोर से रोने लगी और उससे बोली कि प्लीज टीनू में तेरी बहन हूँ, प्लीज मुझे छोड़ दे और फिर वो बोला कि हाँ तो में भी बहनचोद हूँ और अब वो मेरे ऊपर लेट गया और मुझे किस करने लगा. फिर मैंने उसे अपने ऊपर से हटाने की बहुत नाकाम कोशिश की, लेकिन उसमें बहुत दम था. वो मुझसे बोला कि साली रांड रोना बंद कर और मेरे साथ साथ अपनी चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ले. फिर उसने अपना लंड पेंट से बाहर निकाला और मेरे सर के बालों को ज़ोर से पकड़कर मेरे मुहं में डाल दिया तो एकदम में कांप उठी और वो ज़ोर जोर से हंसने लगा.

फिर करीब दस मिनट में उसने मेरे मुहं में अपने लंड को आगे पीछे ज़ोर ज़ोर से धक्के देने के बाद अपना गरम गरम वीर्य डाल दिया और अब मुझे भी उसका ऐसा करना थोड़ा थोड़ा अच्छा लग रहा था. फिर उसने मुझे किस करना शुरू किया और अब मैंने भी उसका पूरा पूरा साथ दिया. अब वो मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने और दबाने लगा.

फिर मैंने उससे कहा कि प्लीज आईईईइ थोड़ा आराम से टीनू उह्ह्ह्ह प्लीज में तेरी बहन हूँ थोड़ा प्यार से कर. वो बोला कि चुपकर कुतिया भोसड़ी की और मेरे बूब्स बिल्कुल लाल हो गए और मेरी सिसकियों की आवाज़ अब धीरे धीरे तेज होती जा रही थी. फिर में उससे बोली कि प्लीज मेरे आह्ह्हह्ह्ह्ह भाई आराम से यह तेरी ऊईईईईईई बहन मर जाएगी, प्यार से कर मेरी जान.

फिर वो बोला कि हाँ हरामजादी में आज तुझे मार ही डालूँगा और तभी में बहुत ज़ोर से चिल्ला उठी, जब उसने मेरे बूब्स पर बहुत ज़ोर से काटा उफफफफफफफफफफ्फ़ टीनू मरररर गई आऐईईईई माँ बचाओ मुझे, प्लीज अब छोड़ दे मुझे, लेकिन उसने अब मुझे एक थप्पड़ मारा और बोला कि बिल्कुल चुप हो जा रंडी और अब वो मेरी चूत को चाटने लगा ऊऊईईइ माँ वाह दोस्तों मुझे ऐसा अहसास हुआ जैसे कि में आज जन्नत में थी, जब वो मेरी चूत को चाट रहा था और अपनी गरम गरम जीभ से मुझे चोद रहा था और में थोड़ी ही देर में झड़ गई.

तभी उसने बस एक मिनट लगाया और मेरी बैचेन चूत में एक ही बार में अपना पूरा का पूरा लंड अंदर घुसा दिया और अब ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, में बोल रही थी कि टीनू हरामी हाँ आज और ज़ोर से चोद अपनी उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बहन को साले और चोद हाँ और ज़ोर से धक्का अह्ह्ह्ह्ह दे देकर चोद मुझे आज. तभी उसकी चुदाई करने की स्पीड और भी तेज हो गई और हमने करीब आधे घंटे तक लगातार चुदाई की और फिर वो झड़ गया, लेकिन दोस्तों उसके बाद उस दिन हमने तीन बार और चुदाई की और उसके बाद मेरा सारा शरीर दर्द कर रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा रेप हुआ हो, लेकिन मुझे उस चुदाई मे बहुत मजा आया और उसने मेरी चूत को बहुत देर तक जमकर चोदा.

 3,992 total views,  7 views today

Tagged : / /

इतना बढियां लण्ड रोज़ रोज़ नहीं मिलता

देखो अब्बू मैं किसी जरुरी काम से बाहर जा रही हूँ . तब तक तुम आंटी की बिटिया चोदो .इसका नाम है मिस फ़िज़ा . यह जिस काम से आयी है वो मैंने कर दिया है . इस समय आंटी भी घर पर नहीं है . यह अपने घर जाकर बोर होगी, बिचारी ? इसलिए तुम बड़े मजे से इसे यहीं चोदो . मैं अभी आती हूँ . फ़िज़ा चुदवाने में बड़ी मस्त लड़की है . लौड़ा बड़ा मन लगाकर पीती है और अपनी गांड उठा उठा कर मस्ती से लण्ड पेलवाती है . अब्बू इसे चोद कर तेरे लण्ड को बड़ा मज़ा आएगा ? हां एक बात जरुर है की फ़िज़ा को गन्दी गन्दी बातें करने का और गाली बकने का बड़ा शौक है . उसका बिलकुल बुरा न मानना ?
ऐसा कह कर मैं बाहर चली गयी . वहाँ मुझे अचानक रुखसाना आंटी मिल गयी . रुखसाना फ़िज़ा की अम्मी है . मैंने आंटी से साफ साफ कह दिया की फ़िज़ा मेरे घर में मेरे अब्बू से चुदवा रही है . आंटी बड़ी खुश हुई वह बोली अरी मेरी रानी खुशबू तुमने यह बहुत अच्छा किया ? तेरे अब्बू जैसा लण्ड जब उसे मिलेगा तो उसे ज्यादा मज़ा आएगा और वह चुदाने में और एक्सपर्ट हो जायेगी . मुझे तो तेरे अब्बू का लौड़ा बहुत पसंद है . मैं जब रात को सोती हूँ तो सपने में भी तेरे अब्बू का लौड़ा देखती रहती हूँ . मैंने कहा हाय अल्ला, इतना प्यारा लगता है तुम्हे मेरे अब्बू का लण्ड ? तो फिर मेरे घर ही आ जाया करो और मेरे अब्बू के साथ ही सोया करो . वह बोली अरे ऐसा नहीं हो सकता बेटी ? मेरे घर में मेरी बेटी भी है ? मैंने पूंछा आंटी यह बताओ की फ़िज़ा तुमसे इतना खुल कैसे गयी ? उसकी शर्म कहाँ गायब हो गयी . उसकी हिचक कैसे ख़तम की तुमने आंटी ?

आंटी ने कहा :- सुनो खुशबू मैं तुम्हे सुनाती हूँ कि मैंने उसकी शर्म कैसे ख़तम की ?
फ़िज़ा इस समय २३ साल की हो गयी है . यह बात पिछले साल की है जब वह २२ साल की थी . मैंने एक दिन उसे घर में अकेले ब्लू फ़िल्म देखती हुई देख लिया था . मैंने देखा की फ़िज़ा अपने सारे कपडे उतार कर सोफे पर एकदम नंगी बैठी हुई है . मैंने पहली बार उसे बिना किसी कपड़ों के देखा . मैंने देखा की उसकी जांघें मोटी हो गयी है, उसकी बाहें गुन्दाज़ हो गयी है, उसके चूतड़ बड़े बड़े हो गये है, उसकी चूंचियों का साईज़ बढ़ गया है .निपल्स गुलाबी और खूबसूरत हो गये है, उसकी जाँघों के बीच में उभरी हुई मस्त जवानी बड़ी मनमोहक हो गयी है . उसमे घनी घनी काली काली झांटें उग आयी है . मैं समझ गयी की फ़िज़ा को अब लण्ड की बेहद जरुरत है . वह पूरी तरह जवान हो गयी है . मैंने उसे बिलकुल डिस्टर्ब नहीं किया और टी वी पर चल रही ब्लू फ़िल्म मैं भी बड़ी देर तक देखती रही . उसके बड़े बड़े लण्ड देख कर मैं भी गरम हो गयी . मेरे भी मुंह से लार टपकने लगी . फिज़ा का एक हाथ अपनी चूंची पर था और दूसरा चूत पर . ऊँगली बार बार चूत के अंदर का मज़ा ले रही थी . पहले तो मेरा मन हुआ की मैं भी अंदर घुस जाऊं लेकिन मैं वापस चली आयी .
मैंने यह बात अपनी ख़ास दोस्त आलिया को बताई . उसने कहा यार रुखसाना देखो अब तेरी बेटी सायानी हो गयी है . उसे जवानी का मज़ा लेने दो .मैंने कहा यही मैं भी चाहती हूँ पर जब घर में केवल हम दो लोग ही है तो छुप छुप कर कब तक मज़ा लेगी वो और मज़ा लूंगी मैं ? उसने कहा हां बात तो तुम्हारी ठीक है . अच्छा कल मैं तेरे घर आती हूँ और उसके सामने तुमसे खूब गन्दी गन्दी और अश्लील बातें करती हूँ . उसकी शर्म लिहाज़ सब मिटाना होगा . उसका संकोच और उसकी झिझक सब दूर करना होगा ?
दूसरे दिन मैं किचेन में काम कर रही थी . मेरे बगल में फ़िज़ा चावल बीन रही थी . इतने में आलिया आ गयी .

वह बोली :- क्या कर रही है तू भोसड़ी की रुखसाना ?
मैंने कहा :- अपनी झांटें बना रही हूँ बहन चोद ? अरे तुम्हे दिखाई नहीं पड़ता की मैं खाना बना रही हूँ . फिर तू पूंछती क्यों है माँ की लौड़ी, आलिया ?
तुम झांटें बनाओ चाहे अपनी गांड मराओ मुझे क्या ? मैं क्यों तेरी परवाह करूँ ?
आज क्या तेरा लड़ने का मूड है क्या बुर चोदी आलिया ?
मैं क्यों लडूंगी यार ? मैं तो तुमसे सीधे सीधे पूंछ रही हूँ ? तू ही ऊट पटांग जबाब दे रही है .
अच्छा बता कल किससे मरवाई तूने ?
इतने में फ़िज़ा उठ कर जाने लगी तो आलिया बोली अरी फ़िज़ा तू मादर चोद कहाँ जा रही है ?
फ़िज़ा बोली – मुझे शर्म आ रही है आंटी ?
आलिया बोली – अच्छा जब तू बहन चोद नंगी नंगी ब्लू फ़िल्म देखती है तब तुझे शर्म नहीं आती ? जब तू अपनी सहेलियों को गाली देती है , तब तुझे शर्म नहीं आती ? देख फ़िज़ा अब तू जवान हो गयी है . अब शरम वरम छोड़ दे और जवानी का पूरा मज़ा ले ? मैं जिस दिन जवान हुई थी उसी दिन शर्म की माँ चोद दी थी मैंने . संकोच, झिझक, डर सब मैंने गांड में घुसेड़ दिया था . मैं उसी दिन से पकड़ने लगी थी लण्ड और पेलने लगी थी अपनी चूत में लण्ड ? चल तू भी बैठ यहाँ हमारे सामने, मादर चोद और खुल कर बातें कर हम लोगों से ? कहीं जाने की जरुरत नहीं है .
मैंने कहा अच्छा फ़िज़ा लो थोड़े आलू छील दो ? वह आलू छीलने लगी .
आलिया आगे बोली :- यार रुखसाना तुम जुम्मन को जानती हो ? कितना बदमास है साला गांडू कही का ?
मैंने कहा :- क्या हुआ यार इतना नाराज़ क्यों हो उससे ?
वह बोली :- अरे उस दिन साले ने मेरी चूंची पकड़ ली . मैंने भी उसके लण्ड पर हाथ मार दिया . उसकी हिम्मत बढ़ गयी . वह मेरे कान में बोला भाभी बुर दो न मुझे अपनी ?
मैंने कहा :- अबे भोसड़ी के जुम्मन, बुर क्या यहीं सबके सामने लेगा ? घर में आना तब ले जाना मेरी बुर ?
वह बोला :- भाभी इंकार न करना . मैं कल जरुर आऊंगा .
मैंने (रुखसाना) पूंछा :- तो फिर आया वो तेरी बुर लेने ?
आलिया बोली :- हां यार आया न साला और आखिर कार बुर लेकर ही गया ? बड़ा हरामी है बहन चोद ?
तब तक फ़िज़ा बोली :- अरे आंटी उसकी बेटी भी हरामी है ?
आलिया बोली :- क्यों क्या करती है वो ? क्यों हरामी कहती हो उसे ?
फ़िज़ा ने बताया :- वह ससुरी लड़कों के लण्ड की फ़ोटो अपनी मोबाईल में रखती है और सबको दिखाती है ? यही नहीं सबके लण्ड की नाप भी लिख लेती है ? किसका कितना बड़ा है लण्ड ? यह सब अपने मोबाईल में रखती है . गाली बकने में बड़ी तेज है ? लड़के उसकी गालियां सुनने के लिए उसके आगे पीछे घूमते रहते है .

आलिया बोली :- तो फिर चुदाने में भी तेज होगी, ससुरी ?
फ़िज़ा बोली :- पता नहीं पर एक बात और सुनी है मैंने उसके बारे में ? बुरा नहीं मानना आंटी ? मुझे बताने में शर्म आ रही है ? झिझक हो रही है मुझे कहने में ?
आलिया बोली :- तुम खुल कर बताओ न ? शर्माने की कोई जरुरत नहीं है . ये देखो मेरा भोसड़ा ( आलिया ने अपना पेटीकोट उठा कर फ़िज़ा को अपना भोसड़ा दिखा दिया ) देखो मुझे कहीं शर्म आ रही है ?
फ़िज़ा मुस्कराने लगी . फिर वह बोली :- आंटी, मेरे कॉलेज की लड़कियां कहती है की जुम्मन की बेटी अपनी माँ चुदाने में बड़ी तेज है ?
आलियां बोली :- अरे इसमें शर्माने की क्या जरुरत है ? मेरी बेटी भी अपनी माँ चुदाती है ? तुम भी अपनी माँ चुदाना ? जितना मन हो उतना चुदाना ? घर में चुदाना बाहर चुदाना ?
सबकी हंसी छूट गयी .
रुखसाना आंटी बोली :- खुशबू, मेरी बेटी फ़िज़ा उसी दिन से मुझसे बिलकुल खुल गयी . मुझसे गालियों से बात करने लगी .गन्दी से गन्दी अश्लील बातें करने लगी . यहाँ तक की आजकल वह मेरे भोसड़ा में लण्ड भी घुसेड़ देती है . मैं भी कम नहीं हूँ . मैं भी उसकी चूत में पेल देती हूँ लण्ड ?
मैं बोली :- अरी आंटी अब मैं चलती हूँ . शायद मेरा अब्बू तेरी बेटी चोद चुका होगा ?
मैं जब घर पहुंची तो मुझे बेड रूम से कुछ आवाजें सुनायी पड़ी . हाय अंकल बड़ा मस्त लौड़ा है तेरा ? बड़ा मोटा है बहन चोद ? खूब मज़ा आ रहा है मुझे चुदाने में ? पूरा पेल दो लौड़ा साले को ? तेरे लण्ड की माँ का भोसड़ा साला कितना मज़ा देता है ? ये तो मादर चोद मेरी माँ की बुर चोदता है . तेज तेज चोदो अंकल ? गांड से जोर लगा के चोदो ? ओ हां ओहो, उई हाय रब्बा उई माँ कितना बेरहम है तेरा लण्ड अंकल ? मैं समझ गयी कि फ़िज़ा अभी चुदवा रही है . मैं कमरे में घुस गयी .
मैंने कहा :- अरी फ़िज़ा तू कब से चुदा रही है, भोसड़ी वाली ?
वह बोली :- अरे दीदी, तुम्हारे जाते ही मैंने अंकल का लौड़ा खोला तो देखा कि इसकी झांटें बड़ी बड़ी हो गयी है . मैं पहले इसे बाथ रूम ले गयी और कर झांटें बनाई , फिर नहलाया धुलाया और फिर बेड पर लायी . लण्ड में निखार आ गया था . मुझे बड़ा प्यार लगा लण्ड और मैं चूसने लगी . मैं बड़ी मस्त होती जा रही थी . इतने में अब्बू बोला :- अरी खुशबू , फ़िज़ा बिलकुल अपनी अम्मी की तरह ही लौड़ा चूसती है . मैंने कई बार कहा कि अब मुझे चोदने दो पर ये बोली नहीं अंकल अभी और चूस लेने दो लण्ड ? चाट लेने दो लण्ड ? इतना बढियां लण्ड रोज़ रोज़ नहीं मिलता चूसने को ? फिर चुदाऊंगी ? इसने अभी कुछ देर पहले ही चुदाना शुरू किया . थोड़ी देर में अब्बू बोला यार फ़िज़ा अब मैं निकलने वाला हूँ .
बस तभी रुखसाना आंटी आ गयी . उधर फ़िज़ा लण्ड पकड़ कर मुठ्ठ मारने लगी . इधर आंटी भी कूद पड़ी लौड़े पर . लण्ड ने जैसे ही पिचकारी फ़िज़ा के मुंह में मारी तो उसका कुछ हिस्सा आंटी ने भी कैच कर लिया . फिर दोनों ने मिलकर लौड़ा खूब चाटा और मैं देख कर तृप्त हो गयी .
एक दिन मेरी खाला मुमताज़ अपने मियां के साथ आ गयी . उनके साथ उनकी बेटी ज़िया भी थी . वे लोग पिछले १० साल से अमेरिका में रह रहे है . मैं उन्हें १० साल के बाद आज देख रही हूँ . मेरे अब्बू बहुत खुश हो गए . खाला मुझे देख कर अब्बू से बोली ओ’ मई गॉड ये खुशबू तो बहुत बड़ी हो गयी है बहन चोद जीजू . उस समय १३ साल कि थी जब मैं यहाँ से गयी थी . अब तो मासा अल्ला बड़ी खूबसूरत निकल आयी है . अब्बू बोला और ज़िया भी बहुत सुन्दर है मम्मू (खाला का घर का नाम मम्मू है )हमने फ़ौरन ड्रिंक्स का इंतज़ाम किया . मैंने देखा की सबसे ज्यादा शराब ज़िया पी रही थी .
दो पैग शराब पीने के बाद खाला बोली :- खुशबू को शराब पीने का बड़ा शौक है . इसको बहन चोद शराब के साथ लण्ड पीने का भी शौक है खुशबू ? मैं मना करती हूँ पर ये मानती नहीं भोसड़ी वाली ?
ज़िया बोली :- दीदी मुझे एक और शौक है . वह मेरी अम्मी नहीं बता रही है . पूंछो न इससे बहन चोद ?
तब तक खाला बोली :- हां इसे माँ चुदाने का भी शौक है . हर जगह माँ चुदवाती रहती है अपनी ?
ज़िया बोली :- दीदी मैं क्या करूँ ? मेरे कॉलेज की सभी लड़कियां अपनी माँ चुदवाती है . इसलिए मैं भी चुदाने लगी अपनी माँ ? वहाँ तो गांड मारने और मराने का भी चलन है . मैं भी वही करती हूँ . और तुम्हे अम्मी जो नहीं बता रही है वो मैं बताती हूँ . अम्मी को अपनी बेटी चुदाने का शौक है . मुझे सबका लौड़ा पकड़ाती रहती है

सभी लोग नशे आ गये . अचानक खाला अंदर गयीं और थोड़ी देर के बाद अब्बू भी अंदर चला गया . मैं उनके आने का इंतज़ार करती रही पर वे काफी देर तक नहीं आये . तब मैंने ज़िया से कहा जा ज़रा देख कर आ न वे लोग क्या कर रहे है ? वह गयी और फ़ौरन मेरे पास आकर बोली वाओ दीदी जानती हो क्या हो रहा है वहाँ ? मेरी अम्मी खालू का लौड़ा चूस रही है . लौड़ा देख कर मेरा भी मन हो गया है . मेरी चूत में आग लग गयी है दीदी ? मैं तेरे अब्बू का लौड़ा चूसने जा रही हूँ . तुम यहाँ मेरे अब्बू का लौड़ा चूसो ?
वह चली गयी और इधर मेरी भी चूत भड़क उठी . मैं आगे बढ़ी और खालू के कपडे खोल डाले . उसका टन टनाता हुआ लण्ड पकड़ लिया . उसने मेरे सारे कपडे एक एक करके उतार फेंकें ? मैं भी हो गयी मादर चोद नंगी ? इतने में लण्ड फुफकार मारने लगा . मैंने कहा वाओ तेरा लौड़ा तो मेरे अब्बू के लौड़े के टक्कर है खालू . आज मैं तेरा लण्ड चोदूँगी और तेरे लण्ड की माँ चोदूँगी ?
बस फिर क्या मैं इधर खालू से चुदाने लगी और उधर खाला और उसकी बेटी ज़िया मेरे अब्बू से चुदाने लगी . –

 4,209 total views,  1 views today

Tagged : / / / / /

मेरी चूत चाटने लगा

ये चुदाई की कहानियाँ तब की है जब में ग्रॅजुयेशन पास करके नौकरी ढूँढ रही थी.. मेरा फिगर 33-32-34 है और में दिखने में बहुत सुंदर और सेक्सी लगती हूँ और मेरे बूब्स बहुत सेक्सी और बड़े बड़े है। वैसे मेरे दोस्त कहते है कि में एक आईटम हूँ। अब में आपको स्टोरी सुनाती हूँ जो मेरे साथ घटी एक घटना है। दोस्तों मैंने अपनी पूरी पढ़ाई एक अच्छे कॉलेज से पास की और घर में पैसों की प्रॉब्लम्स की वजह से में आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई और मैंने एक अच्छी नौकरी ढूँढनी शुरू कर दी। फिर उन दिनों मेरा कज़िन अजीत हमारे घर आया। वो मुझसे उम्र में 2 साल बड़े है और उन्होंने अपना MBA पूरा किया है और उन्हें नयी नयी एक अच्छी सी नौकरी मिली थी और वो दिल्ली जा रहे थे। तभी मेरे घरवालों ने कहा कि वो मुझे भी अपने साथ ले जाए ताकि में एक बड़े शहर में अपने लिए एक अच्छी नौकरी ढूँढ सकूँ।

फिर में भी उनके साथ दिल्ली आ गयी और मैंने नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी.. लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी मुझे नौकरी नहीं मिली.. क्योंकि मेरी पड़ाई ज़्यादा अच्छी नहीं थी। फिर एक दिन में अपने भैया के घर पर बैठ कर सोच रही थी कि अब मुझे अपने घर चले जाना चाहिए उसी वक़्त डोर बेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि भैया आए थे और साथ में उनका बॉस भी था.. उनकी उम्र कोई 35-40 साल के बीच की होगी और दिखने में ठीक था। भैया ने अंदर आते ही बोला कि ये मेरी छोटी बहन है और ये एक नौकरी ढूँढ रही है.. उनका बॉस मुझे घूर घूर कर देख रहा था। उसकी नज़र मेरे बूब्स पर ही अटकी थी। तभी मैंने देखा कि वो बार बार मुझे देखकर अपनी पेंट पर हाथ लगा रहा था और भैया अंदर अपने कंप्यूटर से कुछ प्रिंट आउट्स ले रहे थे। उन्होंने अंदर से ही आवाज़ दी और कहा कि हमारे लिए दो कप चाय बना दो। तभी में चाय बनाने किचन में चली गयी तभी उनका बॉस मेरे पीछे किचन में आ गया और उसने मेरी गांड को हल्के से छू दिया मैंने पीछे मुड़कर उसे घूर दिया वो घबरा कर बोले कि मुझे एक ग्लास पानी चाहिए.. मैंने उसे पानी दे दिया। फिर वो बाहर चला गया में अंदर किचन में ये सोच रही थी कि शायद ये मुझे कोई नौकरी दे दे और अगर ऐसा है तो उनको खुश करने में मेरा क्या जाता है? फिर मैंने चाय बनाकर बाहर जाने से पहले अपने टॉप के दो बटन खोल दिया ताकि जब में चाय देने के लिए नीचे झुकूं तो उसे मेरे बूब्स आसानी से साफ साफ नज़र आए और मैंने वैसा ही किया। जब मैंने चाय दी तो उसे मेरे बूब्स दिखे और में हल्का सा मुस्कुरा दी..

जिससे उसे ग्रीन सिग्नल मिल गया उसने बैठकर चाय पी। फिर मेरे भैया भी अपना काम खत्म करके आ गये। फिर वो दोनों बाहर निकल गये लेकिन जाते जाते मैंने फिर से उन्हे एक हल्की सी स्माईल दे दी। फिर दूसरे दिन सुबह सुबह भैया के ऑफीस जाने के एक घंटे के बाद भैया का फोन आया कि उन्हें कुछ काम से बाहर जाना होगा और आज मुझे इंटरव्यू के लिए अकेले ही जाना होगा और वो ऑफीस से गाड़ी भेज देंगे। तभी मैंने कहा कि आप कब तक वापस आओगे? तो उन्होंने कहा कि अगर काम जल्दी ही खत्म हो गया तो आज ही आ जाऊंगा। फिर मैंने इंटरव्यू के लिए एक सुंदर सी साड़ी निकाली और नहाकर पहन ली। इतने में डोर बेल बजी तभी मुझे लगा कि ड्राइवर होगा इसलिए मैंने दरवाज़ा खोला और मैंने देखा कि सामने भैया के बॉस खड़े है और उनके हाथ में एक पॅकेट था.. जिसमे शायद खाने की कोई चीज़ होगी। तभी मैंने उनसे पूछा कि आप यहाँ कैसे? भैया तो आज बाहर गये हुए है।

बॉस : में इसलिए ही तो आया हूँ।
में : क्या मतलब में समझी नहीं?
बॉस : तुम अकेले इंटरव्यू देने जाओगी इसलिए मैंने सोचा कि में तुम्हे छोड़ दूँ और फिर मुझे कल से ही बहुत भूख लगी है इसलिए खाने को कुछ चीज़े ले ली आओ हम साथ में खाते है फिर इंटरव्यू देने चलेंगे। वैसे तुम्हे कैसा नौकरी चाहिए?
में : कोई भी अभी मुझे नौकरी की बहुत ज़रूरत है।
बॉस : अगर तुम चाहो तो में तुम्हे नौकरी दे सकता हूँ लेकिन पहले तुम्हे मुझे इंटरव्यू देना होगा।
में : कौन सी नौकरी है?
बॉस : में बहुत दिनों से एक पर्सनल सेक्रेटरी ढूँढ रहा हूँ और तुम तो बहुत होशियार, समझदार और सुंदर भी हो काश कि मेरी बीवी तुम्हारी तरह सुंदर होती।
में : (मुस्कुराते हुए) क्या मुझे नौकरी मिल सकती है?
बॉस : लेकिन तुम्हे पहले इंटरव्यू पास करना होगा.. क्या तुम तैयार हो?
में : हाँ में तैयार हूँ लेकिन सेलेरी क्या होगी?
बॉस : अगर तुम पास हो गयी तो बहुत अच्छी सेलेरी मिलेगी।
में : हाँ में तैयार हूँ। बॉस : तो तुम यहाँ पर आकर सोफे पर बैठो। फिर वो मेरे पास में आकर बैठ गये और मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोले कि तुम अपने बारे में कुछ बताओ। फिर में अपने बारे में बताने लगी तो वो बोले कि ये सब नहीं में जो पूछ रहा हूँ वो बताओ।

मैंने उनसे पूछा क्या? बॉस : तुम ये बताओ कि तुम्हारा साईज़ क्या है? तभी में हैरान हो गयी.. लेकिन तब तक में समझ गयी थी कि वो मुझसे क्या चाहता है? में भी सोचने लगी कि अगर इन सब के बदले वो मुझे एक अच्छी सी सेलेरी वाली नौकरी दे दे तो मुझे क्या प्रॉब्लम है? और मैंने शरमाते हुए कह दिया कि 32. बॉस : वाउ अगला सवाल क्या तुम इस नौकरी के लिए कुछ भी कर सकती हो? में : हाँ सर में सब कुछ कर सकती हूँ। बॉस : तो फिर तुम जाओ और दरवाजा बंद कर दो। तभी मैंने उठकर दरवाज़ा बंद कर दिया और अंदर आ कर उसके सामने बैठ गयी। वो मेरे पास आ गया और पीछे से उसने मेरी पीठ पर एक किस कर दिया मैंने कहा कि ये क्या कर रहे हो? बॉस : वही कर रहा हूँ जो एक आदमी और एक औरत के बीच होता है और ये मत कहना की तुम ऐसा कुछ करना नहीं चाहती हो.. तुझे भी तो खुजली हो रही है। में : ये ग़लत है हम ऐसा नहीं कर सकते। बॉस : सही और ग़लत का फ़ैसला हम क्यों करे.. अभी तो वो करो जो हमे आज करना चाहिए।

में : लेकिन सर कोई आ गया तो? और कहीं भैया को पता चल गया तो? बॉस : अरे तेरा भैया मेरा एक नौकर है ज़्यादा बोलेगा तो प्रमोशन देकर चुप करवा दूँगा। साला खुद लेकर आएगा तुझे चुदवाने के लिए। तू तो बस अब मेरी प्यास बुझा दे मेरी जान। साली में तो पहले दिन से ही तड़प रहा हूँ तुझे चोदने के लिए.. चल आज मेरी रांड बन जा। में : लेकिन सर ये सब कुछ बिल्कुल ग़लत है। फिर ये सब कहते कहते उसने मेरे होंठो पर अपने होंट रख दिया और वो पागलो की तरह मुझे चूमने लगा और पागलो की तरह मेरे कपड़े खुलवाने लगा। में और भी उसका साथ देने लगी। फिर मैंने धीरे से पूछा कि सर मेरी सेलेरी कितनी होगी? वो हंस कर बोला अगर आज में खुश हो गया तो 20-25 हजार रूपय तो दे ही दूँगा। लेकिन फिर तुझे हमेशा मेरी रांड बनकर रहना होगा.. बोलो मंजूर है? में : हाँ सर मुझे मंजूर है। बॉस : अब और मत तड़पा.. आ जाओ मेरी प्यास भुझा दो मेरी रानी और उन्होंने मुझे गोद में उठाकर बेड पर लेटा दिया। वो मेरे पूरे शरीर को चूम रहे थे और में उनका साथ पूरा पूरा दे रही थी.. धीरे धीरे उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे पूरा नंगा कर दिया। में बिल्कुल नंगी उनके नीचे लेटी हुई थी और मैंने अपने दोनों हाथो से अपने बूब्स छुपा लिए। फिर उन्होंने मेरे दोनों हाथ हटाकर मेरे बूब्स जोर ज़ोर से चूसने लगे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उसने मेरी चूत पर अपना हाथ रखा और उसे मसलने लगा और थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना अंडरवियर उतार कर मुझे अपना लंड दिखाया जो पहले से ही खड़ा था तभी मेरे तो होश ही उड़ गये। फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुहं में डाल दिया और खुद मेरी चूत चाटने लगा। में आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी। मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि में बता नहीं सकती। तभी थोड़ी देर बाद में झड़ गयी और उन्होंने पूरा रस पी लिया। तभी उन्होंने कहा कि मेरी जान अभी तो तेरी चुदाई बाकी है चल तैयार हो जा अपनी चुदाई के लिए साली रांड आज तुझे मज़ा चखाता हूँ। आज तेरी सारी गर्मी निकालता हूँ और हाँ तुझे कभी कभी हमारे ग्राहकों के साथ भी सोना पड़ेगा। उनको भी अपनी चूत का रस पिलाना होगा.. साली तेरे बूब्स तो बड़े मस्त है। तू तो असली माल है कहाँ छुपकर बैठी थी और फिर वो मेरे ऊपर चड़ गये और मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक झटके से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। तभी में ज़ोर से चिल्लाई और उन्होंने मेरा मुहं बंद कर दिया और थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। में ज़ोर और ज़ोर और ज़ोर चिल्लाने लगी.. बॉस ने कहा कि साली तू तो बहुत बड़ी वाली रांड

फिर उन्होंने स्पीड बढ़ाकर मेरी चुदाई शुरू की और उधर मेरी चूत चुदाई में व्यस्त थी.. लेकिन मुझे बहुत दर्द भी हो रहा था और वो बस चुदाई पर ध्यान दे रहे थे। उनकी स्पीड कम होने का नाम नहीं ले रही थी और वो आज मेरी चूत को फाड़ देना चाहते थे। फिर करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम लोग एक साथ झड़ गये। फिर उन्होंने मुझे कई बार चोदा और मेरी चूत को पूरा फाड़कर भोसड़ा बना दिया और फिर अपने एक फ्रेंड की कंपनी में नौकरी दिलाई और वहाँ पर उस फ्रेंड ने भी मेरा पूरा मज़ा लिया और वो दोनों मिलकर बारी बारी से मेरी चुदाई करते रहे और फिर ऐसे ही मेरी चुदाई के साथ साथ मेरी नौकरी भी चलती रही ।

 5,192 total views,  4 views today

Tagged : / / /

मैं एक लंडखोर लड़की हूँ

आप सभी को मेरा नमस्कार. मैं अंजलि शाह हूँ. मैं अपने कॉलेज की एक दिलकश हसीना हूँ और मुझे चोदने के लिए लौंडों की लाइन लगी रहती है. मैं भी एक लंडखोर लड़की हूँ और मुझे एक ही लंड से चुदने में मजा नहीं आता है. इसलिए मैं ज्यादा दिन एक लंड से बंधी नहीं रहती हूँ.

मेरी सेक्स कहानी में चुत चुदाई का रस कुछ यूं है कि पिछले साल हमारे कॉलेज में दीवाली के अवसर पर बीस अक्टूबर को एक कार्यक्रम किया जा रहा था, जिसमें मुझे लहंगा चोली पहन कर एक आइटम डांस करना था.

मैंने 16 तारीख तक बहुत कोशिश की कि बना बनाया मिल जाए, पर नहीं मिला.

मैंने मॉम से कहा, तो मॉम ने कपड़ा लाकर दिया और कहा- कल मोहन भाई के पास जाकर नाप दे आना, वो दो दिन में सिल देगा.
मैंने मॉम से कहा- ठीक है.

मोहन भाई शहर का एक बड़ा मशहूर लेडीज टेलर था, मगर वो जरा टेढ़े मिजाज का टेलर था.

अगले दिन मैं डेढ़ बजे मोहन टेलर की दुकान पर गई. उसकी दुकान बड़ी थी. काफी कारीगर काम करते थे.

जब मैं गई तब दुकान पर लंच टाईम हुआ था, तो सब लोग जा रहे थे. मैंने उस समय एक शर्ट और जींस पहनी थी. मैंने उसको लहंगा चोली सिलने की बात कही.

इस पर मोहन भाई ने मुझे देखते हुए कहा- इन कपड़ों में लहंगा चोली का नाप नहीं होता.
मैंने कहा- मोहन भाई प्लीज. मॉम ने कहा था कि आप सिल दोगे.
उसने कहा- ठीक है … तुम अन्दर जाओ और ट्रायल रूम के बाहर वाले कमरे में बैठो … मैं वहीं आता हूं.

मैं अन्दर गई. उस रूम में एक लम्बा सोफ़ा पड़ा था. थोड़ी देर में मैंने शटर गिरने की आवाज सुनी और अगले ही पल मोहन भाई कमरे में आ गया.

मोहन भाई 30-32 साल का रहा होगा. उसने कहा- ये सब मैं तेरी मां की वजह से कर रहा हूं … वरना वापस भेज देता.
मैंने राहत की सांस ली और शुक्रिया की नजरों से टेलर मास्टर को देखा.

उसने पूछा- कैसा लहंगा चोली सिलवाना है?
मैंने कहा- बैक लैस चोली डोरी के साथ और लहंगा कूल्हों से टाइट और नीचे घेरा वाला सिलवाना है.
उसने कहा- बैकलैस में ब्रा नहीं पहन सकते और इन कपड़ों में नाप नहीं हो सकता.
मैंने कहा- प्लीज मोहन भाई कुछ करो … मुझे 20 तारीख को पहनना है.

उसने कहा- ठीक है … अपनी शर्ट उतारो.
मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- क्या क्या … नाप लेना है … शर्ट में नाप नहीं लिया जा सकता.

मैं कुछ सोचने लगी.
तो उसने कड़क आवाज में कहा- दो दिन में चाहिये या नहीं!
मैंने कहा- हां हां दो दिन में ही चाहिए … ठीक है, मैं शर्ट उतारती हूँ.

ये कह कर मैंने शर्ट उतार दी. अन्दर ब्रा थी.

उसने मेरे दूध देखते हुए पूछा- बैकलैस चोली चाहिए न!
मैंने कहा- हां.
तो उसने कहा- ब्रा भी उतारो.
मैंने ‘नहीं..’ कहा … तो उसने गुस्से से कहा- भग बहन की लौड़ी यहां से … बड़ी आई … मोहन भाई को चूतिया समझ रही है.

उसकी इस बात से मैं डर गई और मैंने जल्दी से ब्रा उतार दी.

वो मेरे संतरों को भेड़िये की नजरों से देखने लगा. फिर उसने मेरे मम्मों को पकड़ा और इंची टेप से नाप लेने लगा. उसने कहा- तेरे दूध छोटे हैं … चोली में पैड लगेंगे, पूरी गोलाई हाथ से नापनी पड़ेगी.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने मेरे उल्टे हाथ की तरफ की चुची के चारों और इंची टेप लगाया … और चूची को नापा. फिर इसी तरह से सीधे हाथ की चुची की नाप ली.

उसने कहा- ब्रा लैस चोली में चूचुक खड़े होते हैं … वर्ना फिटिंग सही नहीं आती.
मेरे दोनों चूचुक तो दबे से थे.
उसने कहा- इन्हें रगड़ कर खड़ा करो.

अब तक मुझे इस खेल में सनसनी होने लगी थी. मुझे मोहन से चुदने की इच्छा होने लगी थी.

मेरे रगड़ने के बाद भी वो खड़े नहीं हुए. तो उसने मेरे चुची को कसके पकड़ा और दबा दिया. मेरे निप्पल फिर भी खड़े नहीं हुए.

वो मेरे पास आया और मेरे एक चूचुक को मुँह में लेकर चूसने लगा … मुझे बेहद चुदास सी फील हुई और मेरे चूचुक खड़े हो गए. हालांकि मैं मोहन की इस हरकत से एकदम से शॉक थी, पर न जाने क्यों मैंने उससे कुछ बोला नहीं.

फिर उसने कहा- अब तेरे लहंगे का नाप लेना है … जींस उतारो.
मैंने मना किया.
उसने कहा- तेरी मां की चूत … उतार साली, नहीं तो ऐसे ही भगा दूंगा.
मैंने जल्दी से जींस उतार दी.

जींस उतरते ही मैं केवल काले रंग की कच्छी में मोहन के सामने खड़ी थी.

उसने मेरा नाप लेना शुरू किया.

उसने कहा- तेरी गांड तो बहुत मोटी है.
मुझे बेहद सनसनी हो रही थी और मेरी चुत में रस आना शुरू हो गया था.

उसने मेरी कच्छी पर गीला निशान देखा और कहा- साली तेरी बुर तो पानी छोड़ रही है … देखूं तो सही.

ये कहते हुए उसने मेरी कच्छी नीचे खींच दी और अपना हाथ मेरी चूत पर डाल दिया.

मैं एकदम से गनगना उठी.

उसने मेरी चुत मसलते हुए कहा- बहन की लौड़ी … तू तो पका हुआ माल है.

ये कह कर उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया. चुत पर मर्द का मुँह लगते ही मैं तो सातवें आसमान पर पहुंच गई.

कुछ देर चुत चूसने के बाद वो खड़ा हुआ और मेरे एक चूचुक को मुँह में लेकर जोर से काटा.
मैंने उसे धक्का दे दिया.
उसने गुस्से में कहा- बहन की चूत, अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूं.

उसने अपना पजामा ढीला किया और उतार दिया. आठ इंच का काला लंड मेरे सामने हिनहिना रहा था. उसने मेरे बाल पकड़े और मुझे नीचे बिठाते हुए कहा- तेरी मां की चूत साली रंडी … चल मेरे लंड को मुँह में डाल.

मैंने टेलर मास्टर का लंड अपने मुँह में डाला और चूसने लगी. वो मस्ती से कराहें भरने लगा.
थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद उसने कहा- अब उधर चल सोफे पर साली बहन की लौड़ी … कुतिया बन जा.

मुझे भी अब चुदवाने की चुल्ल हो उठी थी. मैं जल्दी से उल्टी होकर कुतिया बन गई. उसने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और एक ही झटके में पूरा अन्दर तक पेल दिया.
मेरी चीख निकल गई. मैंने भी गाली बकना शुरू कर दी और उससे कहा- आह भैनचोद … मेरी चूत फाड़ दी मादरचोद … साले आराम के डाल.

उसने मेरे चूतड़ों पर दो चमाट खींच कर जड़ दिए और बोला- मां की लौड़ी … ऐसे ही लंड झेल.

उसने बेरहमी से लंड चुत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. वो बहुत तेज स्पीड से मुझे चोदने लगा. पांच मिनट में ही मेरी चुत से एक बार पानी निकल गया.

उसने मेरी चूत से लंड निकाला और आगे आकर मुँह में डाल दिया. वो लंड चुसवाते हुए मेरी गांड के छेद में उंगली करने लगा.

मैं उसका मोटा लंड चूसती रही. फिर उसने लंड मुँह से निकाला और पीछे आकर बहुत सारा थूक मेरी गांड के छेद पर थूक दिया. जब तक मैं सम्भलती, उसने एक ही झटके में मेरी गांड में लंड डाल दिया और गांड ठोकने लगा.

मैं कॉलेज में आगे पीछे दोनों तरफ से लंड ले चुकी थी, इसलिए मुझे चुत गांड मरवाने में कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन आठ इंच का मोटा लंड आज मैं पहली बार अपनी चुत गांड में ले रही थी. इससे मुझे दर्द होने लगा था.

साथ ही मेरी गांड कम चुदी होने की वजह से काफी टाइट थी, जिस वजह से मुझे काफी दर्द हो रहा था.

कुछ धक्कों के बाद मेरी गांड ने टेलर के मोटे लंड को झेल लिया था और अब मुझे गांड मराने में मजा आने लगा था. उसने मेरे दूध पकड़ कर मेरी गांड दबाकर चोदनी शुरू कर दी. कुछ ही देर में उसका सारा पानी मेरी गांड में ही निकल गया.

उसने अपना लंड गांड से निकाला और मेरे मुँह में देकर कहा- जल्दी से लंड साफ कर और कपड़े पहन ले.

मैंने लंड चूसा तो मुझे मोहन के माल का बड़ा मस्त स्वाद मिला. इसके बाद कपड़े पहनने के लिए अपनी ब्रा पैंटी उठाई, तो उसने कहा- अपनी ब्रा और कच्छी मुझको दे दे और भाग जा.

मैंने पूछा- लहंगा चोली कब दोगे?
उसने कहा- कल ट्रायल के लिए 12 बजे के करीब तेरे घर पर आऊंगा.
मैंने कहा- कल तो मैं कॉलेज जाऊंगी और कोई घर पर नहीं होगा.
उसने कहा- मां की लौड़ी कल कॉलेज मत जाना … वर्ना लहंगा चोली नहीं मिलेगा.

मैंने हां में सर हिला दिया और घर आ गई.

मोहन के मोटे लंड ने मेरी चुत और गांड को बड़ा सुकून दिया था. मैं अपनी चुदाई को याद करते हुए अपनी चुत मसल रही थी.

अगले दिन मैं कॉलेज नहीं गई क्योंकि मुझे पता था आज मोहन भाई ट्रायल के लिए आएगा. साथ ही मुझे ये भी पता था कि ट्रायल के बहाने वो मुझे चोदने के लिए भी आएगा.

मैं घर पर ज्यादा कपड़े नहीं पहनती हूं इसलिए मैंने बिना ब्रा के एक स्लीवलैस छोटा सा टॉप पहना था और छोटा सा लोअर, जो सिर्फ़ कूल्हे तक का था. घर में मैं कच्छी नहीं पहनती हूं.

मोहन भाई ने 12 बजे का टाईम दिया था. मॉम ऑफिस गई थीं और भाई बहन स्कूल में थे. मैं अकेली ही घर पर मोहन का इन्तजार कर रही थी.

तभी 11 बजे डोरबेल बजी. मैंने घड़ी देखी, तो अभी मोहन भाई के आने का टाइम नहीं हुआ था. मुझे लगा पता नहीं कौन आया होगा.

मैंने दरवाजा खोला, तो मोहन भाई ही आया था और उसके साथ एक 25-26 साल का युवक भी था.

मोहन भाई ने कहा- ये मेरा छोटा भाई चमन है. इसको फिटिंग के बारे में सिखाना था, इसलिए साथ ले आया.
उसने मुझे मेरा लहंगा चोली पकड़ाया और कहा- इसे पहन कर आओ और नीचे कुछ मत पहनना, वर्ना फिटिंग का पता नहीं चलेगा.

मैं अपने कमरे में गई और लहंगा चोली पहना. मैंने लहंगा तो पहन लिया, पर चोली की डोरी नहीं बंध सकी. मैं चोली पकड़े पकड़े बाहर आई और कहा- मोहन भाई, इसकी डोरी नहीं बंध रही है.

मोहन भाई ने चमन को डोरी बांधने को कहा और उसने आराम से बाँध दी.

मैंने कहा- मोहन भाई, फिटिंग ठीक नहीं लग रही.
उसने कहा- ऐसे पता नहीं चलेगा. कहीं फुल साइज़ आइना है क्या?
मैंने कहा- हां मेरे बेडरूम में है.
उसने कहा- चलो वहीं चलते हैं. तभी असली फिटिंग का पता चलेगा.
मैंने असली फिटिंग का मतलब समझते हुए कहा- ठीक है.

हम मेरे बेडरूम में आ गए. मोहन मेरे सामने खड़ा हो गया और कहा- आगे को झुको.

मैंने उसको देखा, तो उसने कहा- फिटिंग देखनी है.

मैं आगे झुक गई. उसने मेरे सामने आकर देखा, मेरी चुचियां बाहर आ रही थीं.

उसने गला 14 इंच का बनाया था.

उसने कहा- चोली तो ढीली लगती है.

मैं खड़ी होने लगी, तो उसने रोक दिया और चमन को बुलाया. चमन को सामने खड़ा करके कहा- देखो आगे से चोली ढीली होती है, तो पूरे चुचे साफ़ दिखते हैं.

 14,819 total views,  3 views today

Tagged : / / / / /