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सेक्स का मज़ा

दोस्तो, मेरा नाम प्रियल है और मेरी उम्र 19 साल है. यह कहानी एक सच्ची कहानी है जो मेरी आपबीती भी है. इस कहानी में आपको बताऊंगी के कैसे हमने सेक्स का मज़ा लिया.

बात 2 महीने पहले की है. मैं बस से जा रही थी. तभी बस रुकी और एक हॉट लड़का चढ़ने लगा. उसे देखकर मेरे मन में हलचल होने लगी. मैं उससे अपनी चूत चुदवाने की सोचने लगी. इसी के चलते मेरा हाथ कब मेरी चूत के ऊपर चला गया मुझे पता नहीं चला.

वैसे मैं एक बात बता दूं … मुझे पोर्न देखने शौक है और मैं पोर्न देखते हुए अपनी चूत को सहला लेती हूं. मैंने कभी लंड नहीं लिया. मैं चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूं पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता है.

अचानक बस रुक गई और मेरे सीट के बगल में जो औरत बैठी थी, उतरने लगी. वो लड़का मेरे बगल में बैठ गया. उसके स्पर्श से मैं सिहर उठी … मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी.

थोड़ी देर में वो मुझसे बात करने लगा. उसने अपना नाम पवन बताया. वो भी वहीं जा रहा था जहां मैं जा रही थी. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे.
सफर के दौरान हमने बहुत बातें की. फिर मेरा स्टेशन आ गया और मुझे उतारना पड़ा. पर पवन ख्याल मेरे दिमाग से जा नहीं रहा था. रात भर उसके बारे ही सोच रही थी.

फिर 1 महीने बाद एक दिन मैं बाज़ार गई थी. तभी पीछे से किसी ने आवाज़ दी. मैंने पीछे मुड़ के देखा तो वो पवन था.
मैं बहुत खुश हुई. फिर हमने साथ में गुपचुप खाया.

उसने मुझसे नंबर मांगा तो मैंने बिना रुके अपना नंबर दिया. उस दिन से हम लोग रोज बात करते. कभी कभी रात के 2-3 बज जाते. इसी तरह 1 महीना बीत गया. मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था क्योंकि मुझे उससे प्यार जो हो गया था.

फिर हमने एक दिन मिलने की सोची. मैं बहुत खुश हुई. मैने अपनी चूचों पर क्रीम से मालिश की और अपनी चूत के बाल साफ किये क्योंकि मुझे पता था पवन मुझे चोदना चाहता है. मैंने कई बार उसके लंड को मेरे सामने खड़ा होते हुए देखा है जिसे वो छुपाते हुए बहुत सेक्सी लगता है.

उसने मुझे रास्ते से पिक किया और बोला- कहां जाना है?
मैंने कहा- जहां आपकी मर्ज़ी!
फिर हम उसके दोस्त के घर गए जहां पहले से ही तैयारी पूरी हो चुकी थी.

उसने मुझे जूस दिया और स्वयं भी पीने लगा. बीच बीच में वो मुझे छू रहा था. मेरी तो चूत गीली हो रही थी.

तभी उसने जानबूझकर अपना जूस मेरे कपड़ों पर गिरा दिया. मैं उसके इरादे समझ रही थी. फिर मैं वॉशरूम चली गई. वो मेरे पीछे पीछे गया.
और जैसे ही मैं पलटी उसने मुझे जोर से किस कर दिया. मैंने उसे छुड़ाने का नाटक किया … फिर मैं खुद उसका साथ देने लगी.

उसके हाथ मेरे चूचे पर आ गए जिससे मेरी सिसकारियां निकल गई- उंह … आह … अय!

लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने पागलों की तरह किस किया. पवन का एक हाथ मेरे चूचे पर और दूसरा मेरी चूत के ऊपर था. मैं गर्म हो रही थी.
फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पे लेकर आया. उसने अपने कपड़े उतार दिए. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था.

उसका 8 इंच का लंड पूरा तन गया था. मैंने पहली बार किसी का लंड देखा था, वो भी इतना बड़ा!

फिर वो मेरे कपड़े निकालने लगा. उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. अब मैं भी उसके सामने नंगी थी. वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी. उसने अपना हाथ मेरे चूचों पर रखा और मसलने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी.

15 मिनट चूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह के सामने खड़ा कर दिया और चूसने को बोला.
मैंने मना कर दिया … तो उसने ज़िद की. मैंने उसका सुपारा मुंह के अंदर लिया. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैंने निकाल दिया.
वो कुछ न बोला और मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब जैसा मैंने पहले भी बताया था कि मुझे सेक्स से बहुत डर लगता है, तो मेरी सिसकारियां डर में बदल गई. मुझे पसीना आने लगा.
और जब वो अपने लंड को हिलाने लगा तो डर से मेरी पूरी तरह फट चुकी थी.

उसने अपना सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और हल्का सा धक्का लगाया. मेरी तो दर्द से हालात खराब हो गई.
मैंने जैसे तैसे करके उसे हटाया और कपड़े पहनने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगा- आई लवयू प्रियल … प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ!
मैंने सोचा कि अगर मैंने हां कर दी तो पवन मुझे चोदे बिना रुकेगा नहीं. और मेरी तो हालत खराब थी … मैंने उसे ना चाहते हुए भी मना कर दिया.
मैं वहां से सीधे अपने घर आ गई और उसके बारे में सोच कर रोने लगी.

दोस्तो, भले ही मैं उस दिन भाग के आ गई थी पर मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी. साथ ही मेरी चुदास भी बढ़ती जा रही थी. मैं मन ही मन अपने आप को गाली दे रही थी कि क्या जरूरत थी वहां से जाने की.
और ऊपर से पवन का वो चेहरा मेरी नज़रों के सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. उससे भी ज्यादा मुझे उसके लंड की याद सता रही थी.
मुझे रात भर नींद नहीं आई और मैं सिर्फ करवटें बदलते रह गई.

फिर जैसे तैसे रात कटी. मैंने सुबह उठ के देखा तो पवन का मेसेज आया था. उसमें लिखा था- आई एम् सॉरी प्रियल … प्लीज मुझसे बात करो … आई लव यू यार … मैं प्रॉमिस करता हूं कि आज के बाद आपको टच भी नहीं करूंगा … पर प्लीज़ मुझसे बात करो.

मेसेज पढ़ के मेरी आँखें भर आई … मन करने लगा कि अभी भाग के उसके पास जाऊं और गले से लिपट जाऊं.
पर मैं किस मुंह से उसके पास जाऊं, ये समझ नहीं आ रहा था.

एक दिन मैंने निश्चय कर ही लिया कि आज उसे प्रपोज कर के ही रहूंगी और अपनी चूत चुदवा कर रहूंगी.
मैं उससे मिलने चली गई. मैंने उसे एक होटल में बुलाया.

जैसे ही उसने मुझे देखा … बस देखता ही रह गया.
उस दिन मैंने टाइट जीन्स पहन रखी थी और सफ़ेद टॉप वो भी नाभि के ऊपर से … जिसमें मेरे चूचे साफ दिख रहे थे.

मुझे देख के उसका लन्ड आकार लेने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश कर रहा था.

फिर मैंने उसके पास जाकर बोला- क्या देख रहे?
वो थोड़ा शरमा गया और मुझे जोर से गले लगा लिया.

जैसे ही उसने मुझे गले लगाया … उसका लन्ड मेरी चूत से टकराने लगा. मेरी तो जान निकल गई … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
और शायद उसे भी ये समझ आ गया था. उसने अपना हाथ मेरे गान्ड पर रख दिया. मेरी सिसकारियां छूटने को हुई जिसे मैंने जैसे तैसे करके रोका.

फिर हम दोनों अन्दर गये. हम दोनों ने वहां खाना खाया. उसके इरादे ठीक नहीं लग रहे थे. मैं फिर से नर्वस हो रही थी. तभी उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. मैं एकदम सकपका गई. मेरा रोम-रोम तड़प उठा और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.

उसके एक मात्र स्पर्श से मैं गर्म हो चुकी थी. फिर उसने मुझसे प्यार भरी बातें की. मैंने उससे ऊपर कमरे में चलने को कहा. मुझे ये कहते हुए थोड़ा अटपटा लग रहा था पर मैं और कंट्रोल नहीं कर सकती थी.
उसने कहा- आप आगे चलो.
मैं आगे हो गई.

जब हम थोड़ी दूर चले गए, तब मैं जानबूझकर फिसल गई और पैर में मोच आने की नाटक करने लगी. उसने शायद ये भांप लिया था … उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और रूम में ले आया. उसने मुझे इस तरह उठाया था जिससे उसका लन्ड मेरी गान्ड को टच कर रहा था.
मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी.

मुझे बिस्तर में लिटा के वो जाने लगा.
मैं उसके इस व्यवहार से हैरान थी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. वो छुड़ाने लगा.

पर आज मैं पूरी तैयारी करके आई थी ऐसे बिना चुदवाये उसे कैसे जाने देती.

मैंने उसके हाथों को अपने चूचों पर रखा. वो मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखने लगा. मैं बिना समय गंवाए उसे किस करने लगी. मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया था.
थोड़ी देर तक तो वो मुझसे छूटने नाटक करने लगा … फिर खुद मेरा साथ देने लगा.

इसी तरह लगभग 10 मिनट के लंबी धुएँदार किस करने बाद उसने अचानक से मेरा हाथ छुड़ा लिया और मुझसे दूर हो गया.
मैं वापस उसे किस करने की कोशिश करने लगी. पर आज ना जाने उसे क्या हो गया था … उसने एक बार मुझे देखा और बिना कुछ बोले चला गया.
उसकी आँखों में कुछ नमी थी.

मैं पूरी उदास हो गई. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं उसकी खामोशी समझ नहीं पा रही थी कि उसने ऐसा क्यों किया. यह सोच सोच के मैं पागल हो रही थी.
मैं वहीं बिस्तर पे बैठ गई … पर रो रो के मेरा बुरा हाल हो गया था.
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है. मैं अब क्या करूं … सब मेरे हाथ से छूट रहा था.

मैंने पवन के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि उसके घर वालों ने उसे मुझसे दूर रहने के लिए कहा है क्योंकि मेरा स्टेटस और उसका स्टेटस अलग अलग है.
मैं ऊंचे खानदान से हूं और वो थोड़ा गरीब है. ऊपर से हम दोनों अलग अलग जाति के हैं इसलिए उसके घरवालों ने उसे मना किया है.

पर मुझे और मेरी फैमिली को इससे कोई फर्क नही पड़ता … उन्हें तो बस एक पढ़ा लिखा समझदार दामाद चाहिए जो उनकी बेटी को खुश रख सके. और मुझे तो पवन ही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ पति लगता है.

ये बात जानने के बाद मैं सीधा पवन के घर गई. पहले तो वो लोग चौंक गए. पर फिर उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.
मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने उनसे सीधी बात कह दी कि मैं उनके बेटे से प्यार करती हूं और उससे शादी करना चाहती हूं.

इस पर वे हैरान थे. उन्होंने अपनी मुश्किलें बताई.
मैंने उन्हें समझाया … अंत में वो लोग मान गए.

अब बारी पवन की थी … मैंने उसे रात में सोने के लिए अपने घर बुलाया क्योंकि मेरे घरवाले बाहर किसी की शादी में गए थे और दोपहर से पहले आने वाले नहीं थे.
मैंने सोच लिया था कि आज तो बात बनानी ही होगी.

पहले तो उसने मना किया फिर मेरे ज़ोर देने पर मान गया.
वो करीब 9 बजे के आसपास आया. मैं उसी का इंतज़ार कर रही थी.

फिर हमने खाना खाया.
उसने कहा- मेरा कमरा कहां है … मुझे सोना है नींद आ रही है. मेरा मूड खराब हो गया मैं उसे अपने कमरे में ले गई.

मैं- ये मेरा कमरा है और तुम मेरे साथ मेरे बेड पर सोने वाले हो.
पवन- नहीं, आप ये क्या कह रही … मैं ये नहीं कर सकता.
मैं- क्यों? क्या समस्या है इसमें?

पवन- ये ग़लत है. मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगा, आप यहां सो जाइए.
मैं- इसमें क्या ग़लत है बस सोने को बोल रही हूँ … मुझे चोदने को नहीं. तुम इतना रिएक्ट क्यों कर रहे हो?
पवन- वो … म् … म … म … मैं … व … वो!

मैं- तुम कह क्यों नहीं देते कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो … ऐसे चुप रहने से क्या होगा?
पवन- न … न … नहीं … अ … आप गलत समझ रही हैं.
मैं- अच्छा … तो तुम्हारी जबान क्यों लड़खड़ा रही है … बताओगे मुझे?
पवन- वो … म … मैं … अम … मैं जा रहा बाहर सोने आप भी सो जाओ.
मैं- नहीं … रुको.

वो जाने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
इससे पहले के वो मेरा हाथ छुड़ा पाता … मैंने उसे किस कर लिया वो मेरी पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश करता रहा पर मैं लगी रही. 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उसको छोड़ा.
वो सिर झुकाए हुए था.

मैंने उसका एक हाथ अपने बूब्स पर और दूसरा अपनी गांड पर रख दिया. वो कुछ बोल पाता इससे पहले मैंने उसे दोबारा किस करना चालू किया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी गांड पर सहलाना शुरु किया. मैं खुश हो गई मेरा काम जो बन गया था.

वो मुझे ज़ोर से किस करने लगा, मैं भी उसका साथ दे रही थी. फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और एक एक करके मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए. उसने मेरी चूत को सहलाना शुरु किया. मैं मदहोश होने लगी. मेरी मुंह से मादक सिसकारियां निकलने लगी- आह उम अह.
मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी इसलिए हमें बहुत मज़ा आ रहा था.

उसके बाद उसने अपनी जीभ मेरे चूत में डाला … वो अहसास मैं बयां नहीं कर सकती … मुझे जन्नत का सुख मिल रहा था.
उसने मुझे जीभ से चोदना जारी रखा. धीरे धीरे हम 69 की पोजिशन में आ गए. मैं पहली बार लंड चूस रही थी वो भी इतना बड़ा लौड़ा … लगभग 7-8 इंच का तो होगा ही!
मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मेरी जिंदगी का पहला अहसास था.

धीरे धीरे मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं उसके मुंह में ही झड़ गई. उसने मेरा सारा पानी पी लिया. मुझे ऐसी खुशी कभी नहीं मिली जो उस समय मिल रही थी.

अब बारी मेरी चूत की चुदाई की थी. उसने अपना लन्ड मेरी चूत पर रखा और रगड़ने लगा.
मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी. मैंने उससे कहा- अब देर मत करो पवन … जल्दी से डाल दो … मेरी जान निकल रही है … अब और मत तड़पा … अब बस चोद दे मुझे … बहुत दिन बाद मिला है.

उसने देर न करते हुए अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर से धक्का मारा. उसका आधा लंड मेरी चूत में चला गया.
मेरी तो चीख निकल गई. मुझे लगा कोई गर्म रॉड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया है. दर्द से मेरा हाल बेहाल हो गया.

फिर उसने अपना हाथ मेरे चूचियों पर रखा और मुझे किस करने लगा. जब मेरा दर्द कम हुआ तब उसने दोबारा धक्का मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना लन्ड आगे पीछे करना चालू किया.
फिर क्या … हम दोनों को जन्नत का सुख मिलने लगा.
ये उसका भी पहली बार ही था … वो बड़ी मस्ती से चुदाई कर रहा था.

पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था ‘आह … अम्म … हम … अह … अय … आह!’

वो धड़ाधड़ अपना लन्ड मेरी चूत में पेल रहा था. पूरा बेड हम दोनों के चुदाई से हिलने लगा.

इतनी धकापेल चुदाई के बाद मेरा होने वाला था. उसने ये भांप लिया और वो ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा. थोड़ी ही देर बाद मेरा पानी निकल गया जिसे उसने चाट कर साफ कर दिया.

फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लन्ड डाल दिया. मेरी आह निकल गई.

उसने गपागप लंड डालना शुरू किया. मेरी चूत गीली हो चुकी थी जिससे कुछ फच फच आवाजें भी आ रही थी.
मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी- चोदो मुझे पवन … और ज़ोर से चोदो … जान निकाल दे मेरी … आह … फॅक मी बेबी … और ज़ोर से चोदो … आह … अम्म … अह … उन्ह.

लगभग 15 मिनट के ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो झड़ने वाला था उसने मुझसे पूछा- कहां निकालूं?
मैंने कहा- चूत में ही निकाल दो.
क्योंकि मैं उसे फील करना चाहती थी.

8-10 शॉट लगाने के बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गया.

उसका गर्मागर्म वीर्य पाकर मेरी चूत खिल उठी थी. वो एहसास अभी भी मेरे दिमाग से निकल नहीं पा रहा … वो मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

उसने मुझे आई लव यू कहा और मेरा धन्यवाद करने लगा.
मैंने भी उसे आई लव यू टू कहा और इस अनोखे अहसास के लिए धन्यवाद दिया.
हम दोनों के चेहरे पर खुशी और सुकून झलक रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका लन्ड फिर से खड़ा होने लगा. इस तरह हमने उस रात 5 बार चुदाई की कभी बिस्तर में तो कभी सोफे पे.
हमने अलग अलग पोजिशन ट्राई किया और हमारी चुदाई रात भर चलती रही.

दोपहर में जाने से पहले उसने मुझे एक बार और चोदा.
इस तरह से हम दोनों ने चुदाई का पूरा पूरा मज़ा लिया.

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मेरी कुंवारी बुर

मेरा नाम दिव्या है, मैं दिल्ली से हूं।
आज मेरी शादी को पूरा एक साल हो गया है. मेरे हस्बैंड मुझसे प्यार करते हैं, मैं भी उनसे प्यार करती हूं.

लेकिन आज यहां मैं आई हूं आप लोगों को अपनी जिन्दगी की एक ख़ास घटना सुनाने को। यह मेरी प्रेम कहानी है शादी से पहले की.

उस समय का बात है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी. एक लड़का था जो हमेशा मुझे देखता था. जब मैं उसकी तरफ देखती थी तो मुझे उसकी आंखों में मेरे लिए सच्चा प्यार झलकता था.

बहुत समय तक हमारे बीच यही चलता रहा। एक दूसरे से कुछ कहते नहीं थे … बस देख लिया करते थे। हम चाहते थे पास आना … पर डरते थे।
मैंने सोचा कि वह ही शुरुआत करेगा. पर उसने कुछ नहीं किया.

बहुत समय तक मैंने उसका इन्तजार किया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. फिर मैंने ही कुछ सोचा, मैंने किसी बहाने उसके पास जाना था क्योंकि उसकी आंखों में मुझे मेरे लिए सच्चा प्यार और भरोसा नजर आता था।

फिर एक दिन मैंने एक कागज पर अपना नंबर लिखा और कॉलेज जाते ही उसकी बेंच पर रख दिया. मैं जानती थी कि उसका कॉल जरूर आएगा.

और ऐसा ही हुआ. शाम को उसका कॉल आया. मैं अपने घर की छत पर उसके फोन का इन्तजार कर रही थी.
नया नंबर देखकर मैंने फोन उठाया और बहुत धीमी सी आवाज में हेलो बोली।

बस यही पहली शुरुआत थी हमारे प्यार की!

तब हमारे बीच बहुत सारी बातें हुई. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे; हम मिलने भी लगे।
एक दूसरे का हाथ थामे वह सड़क पर घूमना … प्यार भरी नजरों से एक दूसरे को देखना।

एक दिन मुझे बुखार हो गया। मैं उससे कॉल पर बात नहीं कर पाई। मैं जानती थी कि उसने मेरे फोन का बहुत इन्तजार किया होगा.

जब मेरी हालत में थोड़ा सुधार हुआ तो मैंने उसको कॉल किया. उसने मुझसे सारी बातें पूछी, मेरी तबीयत … मेरे हालात।
मैंने उससे कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिएँ.
उसने मुझसे कहा- बताओ कितने चाहिएँ?

मैंने कहा- सिर्फ दो हजार भेज दो.
उसने कहा- ठीक है, भेज रहा हूं. पर तुम अपना ध्यान रखना।

मेरा इतना ध्यान रखना सिर्फ उसको आता था.

कुछ दिनों बाद मैं ठीक हो गई, मैंने उसको कॉल किया और एक जगह मिलने के लिए बुलाया. मेरा मन उसको अपनी बांहों में भरने का कर रहा था. मैं जाकर सीधे उसके गले लग गई. मैं और वो एक दूसरे की बांहों में बहुत देर तक चिपके रहे।

आज मेरा उससे बहुत प्यार करने का मन कर रहा था. मैंने उससे कहा- आज मैं पूरा दिन फ्री हूं, चलो किसी होटल में चलते हैं.
उसने आंखें झुका कर हम्म ही कर दी.

अब इसे हम दोनों का प्यार कह लीजिए या प्यार में हुआ सेक्स! पर हम एक दूसरे को और नजदीक से जानना चाहते थे, एक दूसरे को टूट कर प्यार करना चाहते थे।

हमने एक होटल में रूम लिया और हम पूरा दिन वहां रहे। होटल में जाकर हम दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक गए.

मैंने धीरे धीरे उसकी शर्ट को उतारा, उसकी नंगी बालों वाली छाती पर अपने हाथों को फिराना शुरू किया. उसने आनन्द से आंखें बंद कर ली थी.

फिर मैंने उसके माथे पर किस किया और उसके सारे जिस्म पर किस करती चली गई. मुझे बस आज उसकी और मेरी एक नई कहानी बनानी थी.
हम दोनों प्यार में इतने डूबे थे।

फिर उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. मेरे शर्ट और सलवार को धीरे-धीरे करके उतारा. मेरा सारा गोरा बदन उसके सामने था. अब मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में उसके सामने लेटी थी। उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया। मेरे सारे बदन पर अपनी उंगलियों फिर आई मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और मेरे बूब्स को हल्के हल्के चूसने लगा. मैंने अपने हाथ को उसके सिर पर फिराना शुरू कर दिया. वो कभी कभी मेरी नंगी कमर पर भी अपना हाथ फिरा रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

यह पहली बार था कि मैं सेक्स कर रही थी, वरना आज तक सिर्फ सेक्स विडियो में ही देखा था।

फिर उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। और अपना लंड मेरी कुंवारी बुर पर लगाने लगा. उसने थोड़ी कोशिश की अपने लंड को मेरी कसी बुर के अंदर डालने की!
पर लंड अंदर गया नहीं!

मैंने उससे कहा- बेबी, पहले मुंह से करो ना … गीली हो जाएगी तो फिर आराम से करना … तब चला जाएगा.
उसने ऐसे ही किया. मेरे बूब्स से किस करते करते नीचे मेरी बुर तक चला गया. वह मेरी सारी बुर को मुंह में लेकर चूसने लगा.

मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अच्छा भी लग रहा था. मैंने यह बुर चटायी का सीन वीडियो में देखा था तो मुझे भी एक बार करना भी था, इसलिए मैंने उससे बोला था.

मैं बेड पर बाल खोलकर लेटी थी और बस उसके नंगे जिस्म को देख कर आनंद ले रही थी. मैं कभी उसको देखती तो कभी बुर चटायी में मिलने वाले मजे के कारण आंखें बंद कर के लेट जाती.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको अपनी ओर खींचा. अब तक उसके मुख की लार से मेरी बुर पूरी गीली हो गई थी. उसका लंड भी प्रिकम छोड़ कर हल्का गीला हो गया था.

हम दोनों प्रेमी इस पोजीशन में आ चुके थे कि अब एक दूसरे में समा जाएं. वो मेरे ऊपर आक र अपने लंड को मेरी बुर के छेद पर सेट करने लगा और मैंने उसकी मदद की.
फिर उसने सीधा हल्के से धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे बहुत दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को पीछे की तरफ धकेला चाहा ताकि ज्यादा अंदर तक ना जा सके.

लेकिन धीरे-धीरे फिर मुझे मजा आने लगा. अब मैंने अपनी पूरी टांगें अपने प्रेमी के लंड के स्वागत में खोल दी थी और मैंने उसकी कोली भर ली।
वह भी ‘दिव्या दिव्या’ कर रहा था और मुझे बहुत प्यार कर रहा था.

हमने सिर्फ इसी पोजीशन में सेक्स किया और हम दोनों झड़ गए.

फिर हम दोनों ने अपने अंडर गारमेंट्स पहन लिए और ऐसे ही एक दूसरे के पास बैठ गए. बहुत सारी फिर प्यारी बातें की।

अबकी बार उसको मैंने बेड की तरफ धक्का दे दिया उसके लंड पर अपना हाथ फिराने लगी. मैंने पोर्न वीडियो में देखा था और उसी तरह मुझे एक बार लंड मुंह में लेना था.
फिर मैंने उसको मुंह से मजा दिलाया, मैंने उसका लंड अपने मुंह में ले लिया. धीरे-धीरे मैं उसको मजा दिलाने लगी.
वह मेरे बालों पर और मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रहा था.

फिर से हम दोनों तैयार थे एक दूसरे में खोने के लिए। फिर वह पीछे की तरफ लेट गया और मुझे अपनी ओर खींचा. वह बेड पर सीधा लेट गया, मैं अपने घुटनों को मोड़कर उसके ऊपर जाकर बैठ गई. फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ऐसे ही किस करते करते कब उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे पता ही नहीं चला. बस मजा आ रहा था, पहली बार किसी के साथ मैं सेक्स कर रही थी.

उसने मेरे बालों को पीछे से खोल दिया. मेरी नंगी कमर पर मेरे बाल बिखरे पड़े थे और मेरी कमर पर उसके हाथ चल रहे थे. हम दोनों एक दूसरे को ऐसे ही किस करते रहे.

कुछ देर बाद उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटा दिया और पीछे से मेरी चूत में ही लंड डाला. मेरे बालों को मेरे कंधे से हटाकर वहां किस करने लगा. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था … हम एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.

हमने इसी तरह मजा लिया. वह इसी तरह मेरी चूत में झड़ गया और मैं भी ऐसे ही उल्टी लेटे-लेटे झड़ रही थी तो मैंने बेड की चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपने मुंह की आवाज को रोकने के लिए अपना मुंह बेड में धंसा दिया।

कुछ देर तक हम दो प्रेमी चुदाई के बाद वैसे ही तेज तेज सांसें भरते रहे. फिर मैंने हल्के से अपना चेहरा उसकी तरफ किया, उसने मेरे चेहरे पर किस किया.

उसने पीछे से मुझे अपनी बांहों में भर रखा था. झड़ने के बाद भी बहुत देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

बहुत समय बीत गया था तो अब मुझे घर जाना था. मेरी मम्मी पापा मेरी बाट देख रहे होंगे.
मैंने उससे कहा- डियर मुझे जाना होगा.
उसने कहा- ठीक है, जाओ. और मैं भी चलता हूं.

उसने मुझे घर के पास छोड़ दिया और वह भी अपने घर चला गया.

फिर हमने रात को कॉल पर बात की. उस पूरे दिन का नजारा हमारी आंखों के सामने घूम रहा था. उस पूरी रात हमने उस दिन के बारे में ही बात की कि हमने कैसे कैसे इंजॉय किया.

उस दिन सेक्स करने के बाद मैं भी और वह भी एक दूसरे के बहुत दीवाने हो गए थे. ऐसा लगता था जैसे अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाएंगे.

लेकिन हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कुछ समय बाद मेरा कॉलेज कंप्लीट हो गया. कॉलेज कंप्लीट होते ही पापा ने मेरे लिए लड़का देख लिया. हमारे घर का माहौल कुछ ऐसा था कि मैं पापा की बात को कभी ना नहीं कह सकती थी.
जहां पापा ने चाहा … मुझे शादी करनी पड़ी.

आज मैं अपने हस्बैंड के साथ हूं … खुश हूं. पर शायद जैसे उसके साथ रहती वैसे नहीं।

प्यार तो करते हैं हम एक दूसरे को हस्बैंड वाइफ … लेकिन कुछ वैसा प्यार नहीं है जैसा उसके साथ था।

‘मैं शादी कर रही हूं.’ सुनते ही उसने सिर्फ एक बार मुझसे पूछा था कि यह सच है क्या?
फिर उसके बाद उसने मुझे कभी संपर्क नहीं किया. मैं भी नहीं कर पाई।
किस मुंह से करती?

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मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो

दोस्तो, मेरा नाम शोनू है. मेरी उम्र 22 साल है. मैं ग्रेजुएशन कर रही हूँ. मेरा बदन बहुत गोरा है और मेरा साईज कुछ यूं है बड़े बड़े 34 इंच के मम्मे हैं. लचीली सी कमर 30 इंच की है और पीछे थिरकती हुई बड़ी सी गांड 36 इंच की है. जिसे देख कर लड़कों के लंड खड़े हो जाते हैं.

पहले तो मैं एक सीधी लड़की थी, पर अब मैं एक रंडी बन गई हूँ. मुझे लड़कों के बड़े बड़े लंड चूत में लेने की आदत पड़ गई है.

ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में थी. तब मेरी उम्र 19 साल थी. मेरा बहुत ही खूबसूरत और कसा हुआ बदन है. मेरे बड़े बड़े मम्मे और बड़ी गांड मेरी मचलती जवानी को साफ जाहिर कर रहे थे.

मुझे क्लास में कई लड़कों ने प्रपोज भी किया था, पर मैंने किसी को भाव नहीं दिया.

कुछ दिन बीते और मेरी 12 वीं कक्षा की परीक्षा शुरू हो गई.

पहला पेपर शुरू हुआ, तो वहां मेरा रोल नंबर एक लड़के के पीछे था … जिसका नाम शिबू था. वह बहुत ही स्मार्ट और खूबसूरत था. उसका कसा हुआ बदन और फिट बॉडी पर सारी लड़कियां फ़िदा थीं.
सब उसे देखतीं, पर वो किसी को नहीं देखता था.

मेरा भी दिल उस पर आ गया था. मैं सोचने लगी कि इससे कैसे बात शुरू करूं … पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

अब दूसरे पेपर का दिन आया, तो मैंने सोचा कि आज तो इससे बात करके ही रहूंगी.

उस दिन मैंने रेड कलर में बड़े गले का टॉप पहना हुआ था, जिसमें से मेरे 36 इंच के चूचे साफ नजर आ रहे थे. मैंने पेपर के दौरान ही उससे पेंसिल मांगी. उसने मुझे पीछे मुड़ कर देखा और उसकी नजर मेरे मम्मों पर जा पड़ी. मैं कुछ ज्यादा ही झुक कर बैठी थी तो उसे मेरे मम्मे साफ़ दिखने लगे थे. वो मेरे दूध देखता ही रह गया.

उसने मुझे देखा और पेन्सिल दे दी.

अब इसके बाद मैंने हर पेपर में उससे बात की और आखिरी में हमने एक दूसरे के नम्बर ले लिए. वो भी मेरी तरफ आकर्षित हो गया था. ऐसा कैसे हुआ ये मुझे समझ नहीं आया.

खैर … हम दोनों में धीरे धीरे प्यार हो गया और हमने अकेले में मिल कर सेक्स कर लिया.
इसके बाद तो उसने मुझे कई बार चोदा.

मुझे भी उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा था. उसी के साथ मुझे सिगरेट और शराब की आदत भी लग गई थी. मेरे बिंदास स्वभाव को देख कर वो भी मेरे साथ खूब मजे लेता था.

फिर एक दिन शिबु और मैं ड्रिंक कर रहे थे. एक बार चुदाई हो चुकी थी और मैं एक सिगरेट पी रही थी.

तभी शिबु ने मुझसे कहा- शोनू क्या हम दोनों ग्रुप चुदाई करें?
मैंने साफ मना कर दिया.
वो बोला- जान ग्रुप चुदाई में बहुत मजा आता है … मान जाओ ना!

उसके बहुत मनाने के बाद मैंने उससे हां कर दी. वह बहुत खुश हुआ.

मैंने उससे पूछा- ग्रुप में कौन कौन रहेगा?
तो उसने कहा- मेरे 3 दोस्त और उनकी गर्लफ्रेंड रहेंगी … हम सब बहुत मस्त चुदाई करेंगे.
मैंने भी कहा- हां बाबू … चोद लेना … मुझे भी जम कर चुदने का मन है.

ये तय हो गया तो शिबु प्लान बनाने लगा.

फिर उस दिन की बात है, जब मुझे पता ही नहीं था कि मेरे साथ क्या होने वाला है. तब भी मैं ये मान चुकी थी कि मेरी चूत के लिए कुछ और लंड भी मिलने वाले हैं.

हमारी ग्रुप चुदाई एक होटल में होनी तय हुई थी. मैंने उस दिन ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी थी. ऊपर एक बहुत ही खुला और चुस्त सा सलवार सूट पहना था … जिसमें मैं एकदम रंडी लग रही थी.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने मुझे अपनी बाइक पर बिठाया और मुझसे बोला- आह जान आज तो मस्त माल लग रही हो. तुम्हें तो आज मेरे दोस्त बहुत चोदेंगे.
उसकी बात से मैं शरमा गई.

कुछ ही देर में हम दोनों उस होटल के कमरे में पहुंच गए, जहां उसके 3 दोस्त हमारा इंतजार कर रहे थे.

राज, हरि, विशाल ये तीनों दोस्त मेरी जवानी देख कर एकदम से हॉट हो गए. वो तीनों मुझे ऐसे देख रहे थे, जैसे मुझे अभी ही पकड़ कर चोद देंगे. उनकी आंखों में चूत चुदाई की हवस साफ दिखाई दे रही थी.

मैंने उनसे पूछा- आप लोगों की गर्लफ्रेंड कहां हैं?
तो उन्होंने कहा- वो आज नहीं आएंगी.
मैंने पूछा- फिर हम चुदाई कैसे करेंगे?
राज बोला- चुदाई तो होगी भाभी …
मैं- कैसे?
हरि- भाभी हम सब मिलकर आपके साथ xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.

ये सुनकर मैं बहुत डर गई- क्या मतलब है तुम्हारा?

मैंने अपने शिबु की तरफ देखा. शिबु मुस्कुरा दिया. मैं समझ गई कि यह इनकी कोई चाल है.

मैं वहां से जाने लगी, तभी शिबु ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और गले में किस करने लगा.

वो बोला- बेबी मान जाओ ना प्लीज. आई लव यू जान.

शिबु बहुत जिद करने लगा. मैं भी क्या करती. उसके प्यार के लिए मैं मान गई तो वो सभी बहुत खुश हुए. हमारे बीच हंसी मजाक चलने लगा. दारू की बोतल खुल गई और सभी ने ड्रिंक करना शुरू कर दिया.

फिर शिबू मुझे पकड़ कर मेरे बड़े बड़े मम्मों को दबाने लगा. मुझे चार लौंडों के सामने अपने दूध दबवाने में बहुत शर्म आ रही थी.

फिर थोड़ी ही देर में दारू के असर से मेरी जवानी की गर्मी बाहर आने लगी. मुझे आज कुछ अलग सा लग रहा था. मैंने शिबु की तरफ देखा तो उसने आंख मार दी. मैं समझ गई कि इसने मेरे गिलास में कोई उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा डाली है.

खैर … मैं तो चुदने को आई ही थी. शिबू मेरे मम्मों को दबा रहा था और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

‘आहह … ऊऊहह …’

शिबू ने मुझे बेड पर बैठा दिया और उसके दोस्त कुर्सी लगा कर सामने बैठ गए. शिबू ने मेरा कुर्ता निकाल दिया और मेरे चूचे काली ब्रा में उन सबके सामने आ गए. शिबू मेरे पीछे आया और मेरी काली ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा.

मुझे भी मजा आने लगा था.

फिर वो तीनों उठ कर पास आ गए और हरि ने मेरी ब्रा खींच दी. ब्रा हटते ही मेरे चूचे उछल कर बाहर उन सबके सामने आ गए.

उन सबने बारी बारी से मेरे मम्मों पर हाथ फेरने शुरू किए. इतने लोगों के हाथ मेरे बूब्स पर थे … इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.

उन सबके लंड भी खड़े हो चुके थे.

हरि मेरे नरम नरम मम्मों को सहलाते हुए बोला- शिबु क्या मस्त माल है तेरी गर्लफ्रेंड … आज ये मस्त मजा देगी.
शिबु- हां भाई, एकदम रंडी की तरह है.

अपने प्रेमी के मुँह से ये सुन कर मुझे अजीब लगा. शिबु ने आज तक मुझे कभी ऐसा शब्द नहीं बोला था.

मैंने भी नशे में सोचा कि आज तो मैं वैसे भी रंडी बनने वाली हूँ … कह लेने दो.

हरि- भाभी, आप बहुत सेक्सी हो … आपको चोदने में बहुत मजा आएगा.
मैं कुछ नहीं बोली.

शिबु- आओ मेरी रंडी शोनू … मेरा लौड़ा मुँह में ले लो.

मैंने भी सब के सामने बिना हिचकिचाहट के मेरे शिबु का पेन्ट निकाला और चड्डी में हाथ डाल कर उसके 6 इंच का लंड पकड़ कर हिलाने लगी. लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया. शिबु को बहुत मजा आने लगा.

शिबु- आहह … मेरी रंडी क्या लंड चूसती हो … मजा आ जाता है.
विशाल- भाभी जी हमारा भी लंड चूस लो.
मैं- हां देवर जी … सब लाइन में खड़े हो जाओ … सबको मस्त कर दूंगी.

मेरी बात सुनकर वो तीनों लाइन में खड़े हो गए और मैं शिबु का लंड छोड़ कर उन तीनों के पैंट निकालने लगी.

उनके लंड खड़े थे … सबसे पहले मैंने हरि की पैंट उतारी, तो मैं दंग रह गई. उसका लंड उसकी चड्डी में बहुत बड़ा दिख रहा था. जब मैंने उसकी चड्डी निकाली, तो उसका मूसल लंड देख आकर मैं डर गई. उसका लंड करीब 8-9 इंच का था और काफी मोटा.

हरि के बाद विशाल और राज की पैंट उतारी तो उन सबके लंड भी बहुत बड़े बड़े थे … मेरे शिबु से सभी के लंड काफी बड़े थे.

राज- भाभी आज आप हमारी रंडी बनने वाली हो … पता है न आपको!
मैं- हां, मेरा शिबू मुझे रंडी बनाना चाहता है … तो मैं भी रंडी बनने को तैयार हूं.

उन चारों ने मेरी सलवार निकाल दी और सभी मुझ पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े. शिबु मेरी ब्लैक पैंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा. हरि और राज मेरे बूब्स चूसने लगे और विशाल ने मेरी गांड पर काटना और चूमना शुरू कर दिया.

मैं चार मर्दों के बीच अकेली रांड सी पागल हुई जा रही थी. मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी थीं- आआहहह इस्स … उन्हह.
xxx ग्रुप सेक्स में मुझे बहुत आनन्द मिल रहा था.

उन चारों ने मुझे घुटने के बल बैठा दिया और सब मेरे पास आकर खड़े हो गए. सबसे पहले विशाल अपना 8 इंच का लंड मेरे मुँह के सामने ले आया. मैंने उसका लंड पकड़ा और चूसने लगी. उसका लंड एकदम लॉलीपॉप की तरह रसीला था और उसेक लंड से निकलते प्रीकम कोई चाटने में मुझे भी बहुत मजा रहा था.

मैंने विशाल का पूरा लंड अन्दर ले लिया और मस्ती से चूसने लगी.

विशाल- आआआह … क्या लंड चूसती है शिबु तेरी रंडी भाभी..

उसके बाद हरि और राज ने अपने 9-9 इंच के मोटे मोटे लंड मेरे दोनों हाथ में दे दिए और शिबु मुझे ये सब करते हुए देख रहा था.

मैं भी उसे देख देख कर उन तीनों के लंड के साथ खेलने लगी.

थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद विशाल ने मेरे मुँह में ही अपना पानी डाल दिया. उसका स्वाद अजीब था … पहले मैंने कभी भी लंड का रस नहीं पिया था.

वो झड़ते हुए बोला- आंह पी जा मेरा पानी रंडी!

मैंने नाक बंद की और उसके लंड का पूरा पानी पी गई. वे सब बारी बारी से मेरे मुँह में लंड डालने के बाद रस छोड़ने लगे. मेरा मुँह दुखने लगा था.

इसके बाद फिर से दारू और सिगरेट का दौर चलने लगा. मुझे भी दारू पीने की चुल्ल हो रही थी. मैं अब बहुत अधिक चुदासी हो गई थी.

जब मैंने उन सबके लंड सहलाए तो दुबारा से लंड खड़े हो गए. वो तीनों मुझे पलंग पर ले गए. सामने मेरा शिबु शराब पीते हुए सब देख कर अपना लंड हिला रहा था.

मुझे बिस्तर पर लेटा दिया गया. विशाल ने मेरी पैंटी निकाल दी. हरि मुझे चूमने लगा और राज मेरे मम्मों से खेल रहा था.

अचानक से विशाल ने मेरी चूत में उंगली डाल दी … मुझे बहुत मजा आने लगा. वह अपनी उंगली मेरी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था.

इधर हरि का मुँह मेरे मुँह में था. मैं मादक सिसकारियां ले रही थी. वो मुझे भूखे शेर की तरह मेरे मुँह में मुँह डाल कर चाट रहा था. मैं भी उसका सिर दोनों हाथों से पकड़ कर उसका साथ देने लगी.

राज भी मेरे बड़े मम्मों को खूब काटते सहलाते हुए मुझे मजा देने लगा था.

फिर राज मेरी चूत के पास गया … जहां विशाल लगा था. उसने विशाल को हटा कर अपना मुँह मेरी चूत में लगा दिया.

मेरी वासना भरी सिसकारियां निकलने लगीं- आहह उन्ह … अह … मजा रहा मुझे … ऐसे ही चूसो मेरी चूत.

उधर हरि मेरे मम्मों से खेल रहा था और विशाल ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया था.

शिबु- शोनू मेरी रांड मजा आ रहा है न तुझे!
मैं- हां भड़वे, बहुत मजा आ रहा है.
शिबू- अभी और मजा आएगा … रुक जा बहन की लौड़ी … तेरी फुद्दी की चटनी बनने वाली है.
राज- अब सब लोग हटो … इस रंडी की चुदाई पहले मैं करूंगा.

उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड डालने लगा. जब वह मेरी चूत पर लंड रगड़ने लगा, तो मुझे बहुत मजा आ रहा था. उसने अपना लंड जोर से मेरी चूत पेल डाला. उसका टोपी ही अन्दर गई थी कि मैं जोर से चिल्लाई दी.

‘ऊ … मर गई … साले हरामी धीरे पेल मादरचोद … आह … फाड़ दी कुत्ते … निकालो इसे … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.’

पर उसने मेरी एक नहीं सुनी. बल्कि एक और जोर का धक्का लगा दिया. मुझे ऐसा लगा मानो मेरी चूत पूरी फ़ट गई हो. मेरी आंख से आंसू आने लगे थे.

मैं- आआहह … उन्ह … रुक जा साले … मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मुझे जाने दो … मैं मर जाऊँगी.

इतने में शिबु ने आगे आकर मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और बोला- रंडी मादरचोदी … तेरी मां का भोसड़ा … अभी तो बहुत मजे ले रही थी … अब क्या हुआ कुत्ती..!

कुछ देर ऐसे ही चुदने के बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मेरा दर्द अब मजे में बदल गया और मैं जोर जोर से सिसकारियां भरने लगी- आहहहह उन्ह..ह और जोर से चोदो मुझे आहह … बहुत मजा रहा है … आह चोदो अपनी रंडी को … ऐसे ही.

कुछ ही देर में मैं झड़ गई.

मेरे झड़ने के बाद हरि ने मुझे एक पैग पिलाया, जिससे मुझे राहत मिल गई.

उसके बाद राज मेरी चूत में लंड डाल कर जोर जोर से धक्का मारने लगा. बाकी सब अपने लंड हिला रहे थे. दस मिनट बाद राज भी मेरी चूत में ही झड़ गया और दूर हट गया. मैं अभी नहीं झड़ी थी … मुझे राज पर गुस्सा आने लगा था.

हरि- कुतिया … कैसा लगा तुझे इतना बड़ा लंड लेकर … आज तक तो तू तेरे शिबू का ही 6 इंच का लंड लेती थी.
मैं- बहुत मजा आया भोसड़ी के … चल अब तू आजा चोद दे भड़वे मुझे रंडी की तरह.

मेरी गालियां सुनकर उसे गुस्सा आ गया- भड़वा बोलेगी साली … कुतिया छिनाल … तेरी मां का भोसड़ा … रुक रंडी अभी बताता हूं.

अब उसने मुझे सीधा लेटा दिया और अपना लंड एक ही झटके में मेरी चूत में पूरा डाल दिया.
मैं दर्द के मारे तड़फ गई- आह … नहीं धीरे कर ले … अब नहीं बोलूंगी … आहह … आहहहह … मर गई … आहहह.

लेकिन हरि जोर जोर से पूरी स्पीड में मेरी चुदाई कर रहा था और मैं दर्द से मरी जा रही थी. इसी बीच मेरी चूत का दो बार पानी निकल गया था. फिर वो लंड निकाल कर सीधा लेट गया.

हरि- चल रंडी … आ मेरे लंड के ऊपर बैठ जा.

मैं भी गांड हिलाते हुए जाकर उसके लंड पर बैठ गई. मैंने उसके मोटे लंड को अपनी चूत पर टिका लिया और नीचे बैठने लगी. मुझे ऐसे में चुदने में बहुत मजा रहा था. मैं पूरा लंड चूत में लेकर जोर जोर से अपनी चूत मरवाने लगी थी.

‘आआह … आआहह..’

मैं हरि के लंड पर ऊपर नीचे होने लगी. उसने मुझे अपनी छाती की तरफ खींचा तो मेरी गांड पीछे से खुल गई.

तभी पीछे से विशाल आया और उसने मुझे हरि के ऊपर सीधा लेटा दिया. हरि का लंड अभी भी मेरी चूत में था.

विशाल- देखो तो साली की क्या मस्त गांड है … रंडी की गांड मारने में कितना मजा आएगा.

मैं डर गई.

मैं- नहीं नहीं विशाल प्लीज गांड में नहीं … बहुत दर्द होगा.

पर वो नहीं माना और उसने मेरी कमर को कसके पकड़ लिया. मैं झटपटाने लगी … पर नीचे से हरि ने भी मेरे हाथ पकड़ लिए.

वे सब हंसने लगे.

फिर विशाल ने मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश करने लगा. पर मेरी गांड का छेद बहुत छोटा था. उसने जबरदस्ती लंड गांड में घुसाने की कोशिश की और उसके लंड की टोपी गांड में अन्दर गुस गई.

मैं दर्द से कंप उठी. मैं रोई चिल्लाई- आंह … नहीं मेरी गांड मत मारो.

मगर वो लंड डालता ही गया.

मैं- विशाल मेरी गांड बहुत छोटी है … प्लीज ज्यादा जोर मत लगाओ … तुम्हें गांड मारनी ही है न तो मेरे बैग मैं एक क्रीम रखी है … वो लगा लो.

तब शिबु ने मेरे बैग से क्रीम निकाल कर विशाल को दे दी. विशाल ने अपनी उंगली से क्रीम मेरी गांड में अन्दर तक लगा दी और अपने लंड पर भी लगा ली.

अब वो फिर से अपने लंड को मेरी गांड में डालने लगा. अब लंड थोड़ा आसानी से गांड में घुस रहा था, पर उसका लंड इतना मोटा था कि मुझे बहुत दर्द हो रहा था.

वो मेरी गांड में लंड डालने की स्पीड बढ़ाने लगा. नीचे से हरि भी अपना लंड मेरी चूत में डाल रहा था. मेरी गांड और चूत दोनों एक साथ चुद रही थीं.

कुछ देर के दर्द के बाद मुझे भी अब मजा आने लगा था.
मैं मुस्कुराते हुए चिल्लाने लगी- अंह उन्ह … आह … हहहह हह … चोदो मुझे … और जोर से चोद दो … आह बना दो आज मुझे रंडी … मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दो … आआहह ऊऊऊहह …

मैं जोर जोर से चिल्लाकर सैंडविच चुदाई के मजे ले रही थी. तभी राज आया और उसने सामने से मेरे मुँह में लंड दे दिया. अब मेरे सारे छेदों में लंड था.

शिबू- अब बन गई मेरी शोनू रंडी … तुझे मैं ऐसे ही चुदता हुआ देखना चाहता था … तुझे मैं बाजारू रंडी बना दूंगा.

मैं भी उसकी बातें सुन कर और मजे से चुदवा रही थी.

कोई बीस मिनट बाद मैं बहुत थक चुकी थी. सबके सब झड़ने वाले थे … तो जोर जोर से धक्के मारने लगे थे. मैं फिर से झड़ गई थी. मेरी चूत से पानी बहने लगा था. तभी हरि मेरी चूत में झड़ गया.

उसके बाद राज मेरे मुँह में झड़ गया. मैं उसका पूरा पानी पी गई. थोड़ी ही देर में विशाल भी मेरी गांड में ही झड़ गया.

हम सब बहुत थक चुके थे, तो ऐसे ही लेट गए.

थोड़ी देर बाद सब उठे और सबने दारू के पैग लगाए और मुझे एक बार फिर से चोदना शुरू कर दिया.

इस बार मुझे xxx ग्रुप सेक्स में बहुत मजा आ रहा था.

शिबु ने भी मेरी गांड मारी और सबने अपना अपना पानी मेरे ऊपर गिराया. फिर हम साथ में नहाए और तैयार हो गए. सबने घर जाते समय मुझे होंठों पर किस की.

हरि बोला- रंडी अब जब भी मौका मिलेगा … हम ऐसे ही xxx ग्रुप सेक्स करेंगे.
मैंने भी कहा- तुम जब बुलाओगे तब अपनी गांड और चूत लेकर आ जाऊंगी.

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उसका लन्ड मेरे मुंह में था

दोस्तो, मेरा नाम परिधि सारस्वत है और मैं दिल्ली से हूं।

इससे पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देती हूं। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा हैं और शरीर भरा पूरा है। मेरा फिगर 33-28-33 का है। मतलब लड़कों की भाषा में मैं एक शानदार माल हूं।

तो चलिए अब आते हैं कहानी पर।

यह बात आज से लगभग 2 साल पहले की है। राहुल नाम का लड़का हमारा पड़ोसी है। हमारे परिवारों के बीच काफी आना – जाना है। स्कूल के समय में भी मैं और राहुल एक ही स्कूल में थे।

हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन हमारे बीच कभी भी ऐसा – वैसा कुछ नहीं था। हम दोनों आपस में खूब बातें करते थे और मज़े करते थे। मुझे भी राहुल के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था।
वो लगभग रोज मेरे घर पर आता था और कई बार मैं भी उसके घर पर चली जाती थी। लेकिन इससे हमारे परिवार को कभी भी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्कूल के बाद हम दोनों ने अलग – अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।

एक दिन मेरी कॉलेज की छुट्टी थी और मेरी नानी की तबियत खराब हो गई थी। तो मेरे मम्मी – पापा नानी से मिलने के लिए चले गए। अब मैं घर पर अकेली रह गई थी।

कुछ देर तो मैं टाइम पास करती रही लेकिन फिर मैं भी बोर होने लग गई। तो मैंने सोचा कि क्यों न राहुल को बुला लिया जाए। इससे मेरा टाइम पास भी हो जाएगा और स्कूल की पुरानी यादें भी ताजा हो जायेंगी।

तो मैंने राहुल को फोन किया कि मैं आज घर पर अकेली हूं और बोर हो रही हूं। तुम मेरे घर पर आ जाओ और फिर गप्पे मारेंगे।
उसने कहा- ठीक है, मैं 15-20 मिनट में आता हूं।
मैं अब राहुल का इंतजार करने लगी।

लगभग 15 मिनट बाद घर की डोर बेल बजी। मुझे पता था कि राहुल है तो मैं गई और गेट खोल दिया और राहुल को अंदर बुला लिया।
राहुल अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया।

फिर मैं उसके लिए पानी लाने किचन में चली गई। मैंने उस दिन गहरे गले का टॉप पहना था।

जैसे ही पानी देने झुकी तो मैंने देखा कि राहुल की नजरें टॉप के अंदर झांक रही है।
मैंने ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए जल्दी से उसे पानी दिया और उसके बगल में सोफे पर बैठ गई।

फिर उसने वही पुरानी स्कूल कि बातें शुरू कर दी और हम दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर कुछ देर बाद मैंने ही उससे पूछ लिया- ओय हीरो … कोई गर्लफ्रेंड वगेरह बनाई क्या?
तो वो बोला- नहीं यार … और तूने?
मैंने भी कहा- नहीं।

फिर वो मज़ाक करते हुए बोला- तो तू ही बन जा मेरी गर्लफ्रेंड।
तो मैंने भी हंसते हुए कह दिया- तेरी गर्लफ्रेंड बनेगी मेरी जूती।

वो मज़ाक-मज़ाक में मुझे तकिए से मारने लग गया और मैं भी उसे तकिए से मारने लग गई।

इसी बीच मुझे एहसास हुआ कि वो खेलते – खेलते मेरे बूब्स छू रहा है।
मज़ा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए उसे खुद से दूर कर दिया।
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप बैठ गया।

फिर शाम को मेरे मम्मी – पापा आ गए और सब कुछ पहले की तरह चलना शुरू हो गया। मैं भी कॉलेज जाने लग गई। इस बीच मेरी राहुल से बहुत ही कम बात हुई या यूं कहें बात हुई ही नहीं।
बस ऐसे ही 2 महीने बीत गए पता ही नहीं चला।

अब मेरा एक पेपर भी आ गया था लेकिन ये पेपर जयपुर था। पापा को ऑफिस का काम था तो पापा बोले- मैं तो नहीं जा सकता हूं.
तो मम्मी बोली- अकेले नहीं जाना है।

अब बहुत सोच – विचार के बाद ये तय हुआ कि पापा राहुल के घरवालों से बात करेंगे कि राहुल मुझे जयपुर पेपर दिलवा कर ले आए।

तो पापा ने अगले दिन राहुल के पापा से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं। राहुल की भी छुट्टियां चल रही हैं। वो घर पर फ्री ही रहता है। वो परिधि के साथ जयपुर चला जाएगा।
तो अब तय हो चुका था कि राहुल मेरे साथ जयपुर जा रहा है।

मैं अब ये सोच रही थी कि उस दिन के बाद अब मैं कैसे राहुल से बात करूंगी? शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही कह दिया था।
खैर जो होगा देखा जायेगा।

पापा ने कहा- तुम दोनों ट्रेन से चले जाना, सेफ भी रहेगा।

लेकिन उन दिनों जयपुर जाने वाली ट्रेन काफी लेट चल रही थी। तो सबने मिलकर ये फैसला किया कि हम स्लीपर बस से जयपुर जाएंगे।
पापा ने हमारी डबल स्लीपर की टिकट बुक करवा दी थी।

अगले दिन शाम को पापा हम दोनों को बस में बैठा आए। मैं खिड़की की और बैठी थी और राहुल मेरे बगल में ही बैठ गया।

मुझे बस में नींद नहीं आ रही थी तो मैं फोन देखते हुए टाइम पास कर रही थी।
तभी राहुल ने पूछा- पेपर की तैयारी कैसी है?
तो मैंने कहा- ठीक – ठाक ही है।

इस प्रकार हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें शुरू हो गई थी।

कुछ देर बाद मैं फोन बन्द करके सो गई। हालांकि मुझे नींद नहीं आ रही थी बस मैंने आँखें बन्द की हुए थी।
उधर राहुल भी सो गया था।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि राहुल का हाथ मुझे टच कर रहा है।
मैंने सोचा कि जगह कम है इसलिए हो सकता है। मैंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं बस दूसरी ओर मुंह करके लेट गई।

फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि राहुल का हाथ मेरी कमर पर है लेकिन मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उसका हाथ धीरे – धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया। अब उसका हाथ मेरी गान्ड पर था। वो मेरी गान्ड पर गोल – गोल हाथ घुमा रहा था। शायद उसे लगा कि मैं सो गई हूं।

लेकिन अब मुझे भी उसका टच अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद वो मुझसे सटकर चिपक गया और सोने का नाटक करने लग गया।
मैंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर लाया और धीरे – धीरे मेरे बूब्स मसलने लगा। अब मेरे अंदर की भी अन्तर्वासना जाग चुकी थी। मेरे निपल्स खड़े होने लग गए थे और मैं अपनी सिसकारियां बड़ी मुश्किल से रोक रही थी।

धीरे – धीरे उसने अपने हाथ का दवाब बढ़ा दिया और अपने दूसरा हाथ मेरी चूत के उपर ले आया और मेरी चूत सहलाने लग गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड को छू रहा था। मेरी गान्ड उसके लन्ड के कड़कपन को महसूस कर रही थी.

अब तक उसे भी पता चल गया था कि मैं बस सोने का नाटक कर रही हूं।
वो मेरे बूब्स को जोर से मसलते हुए बोला- परिधि आई लव यू!
तो मैं भी बोल उठी- आई लव यू।

अब तो उसे खुली छूट मिल चुकी थी। अब वो जोर – जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरी चूत सहला रहा था। मेरी भी सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थी। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे चूत के दाने को सहलाने लगा।

मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उसका लन्ड मसलने लग गई थी। फिर उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ा और मेरे होंठ चूमने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लग गयी।

फिर उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट भी निकाल दी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लग गया और मेरी चूत में उंगली करने लगा। मैंने भी उसकी शर्ट और पैंट निकाल कर उसे एकदम नंगा कर दिया और उसका लन्ड आगे – पीछे करने लगी।

उसका लन्ड काफी बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें ऊपर की ओर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। अब तो मैं आपे से बाहर हो गई थी। वो लगातार मेरी चूत के दाने को चाट रहा था और मैं उसके सिर को जोर – जोर से दबा रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरी चूत में से गर्म – गर्म लावा निकलने लगा और राहुल उसे पी भी गया।

अब मैं शांत हो चुकी थी लेकिन उसने मेरी चूत को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म होने लग गई।

अब वो मेरे ऊपर आ गया और अपना बड़ा लन्ड मेरे होंठों के पास ले आया। वो अपने लन्ड से मेरे होटों को टच करने लगा तो मैं समझ गई और मैंने अपना मुंह खोल दिया। अब उसका लन्ड मेरे मुंह में था और मैं जोर – जोर से उसका लन्ड चूस रही थी।

उसका पूरा लन्ड गीला हो चुका था। अब राहुल ने अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला और उसे मेरी चूत पर मसलने लग गया।
तो मेरा बहुत ही बुरा हाल था। मैंने उसे आंखों से इशारा किया और उसने अपने लन्ड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे अचानक दर्द हुआ।

मैंने उसे वहीं रोक दिया।

फिर वो मेरे निप्पल सहलाने लगा और होंठ चूसने लग गया।

अचानक ही उसने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में था।
मेरी आंखों से आंसू निकलने लग गए थे लेकिन वो मेरे होंठ चूस रहा था इसलिए मैं चीख नहीं सकी।

अब उसने धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया. फिर मुझे भी मज़ा आने लग गया। मैं भी उसका साथ देने लग गई। वो कभी मेरे बूब्स चूसता तो कभी होंठ।
लगभग 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।

फिर जयपुर पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया. हमने रात को होटल के कमरे में एक बार और चुदाई की.

हम दोनों का ही मन था कि हम पूरी रात चुदाई करते रहें लेकिन अगले दिन मैंने पेपर देना था तो सोना भी जरूरी था.

और सुबह उठ कर मैं तैयार होकर पेपर देने गयी.

पेपर के बाद हमने होटल छोड़ दिया और बस से वापस दिल्ली आ गए।

उसके बाद से मुझे भी अपनी चुदाई में मजा आने लगा था, मुझे चुदाई की लत लग गयी थी. राहुल तो हर वक्त मुझे चोदने को तैयार रहता था. तो हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते थे।

एक बार राहुल ने मेरी गान्ड भी मारी थी। लेकिन वो कहानी किसी और दिन।

फिर राहुल के पापा का ट्रान्सफर रांची हो गया। तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।

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मेरा जिस्म

मेरे दोस्तो, मेरा नाम सिया है। मेरा बदन काफ़ी खूबसूरत है, रंग गोरा है और उभार भरा भी। मैंने हमेशा से ही अपने शरीर का बहुत ख्याल रखा है।
अपने शरीर को सुंदर और स्वस्थ रखने के लिए मैं सब कुछ करती रही हूँ। मेरे शरीर बहुत लुभावना है यही कारण है कि सभी हमेशा मेरी तरफ़ आकर्षित रहते रहे हैं।

मेरे पीछे हमेशा से ही सभी लड़के दीवाने रहे हैं। कईयों ने मुझे प्रोपोज़ भी किया। मैं भी अब तक कई लड़कों के साथ रिश्ते में रह चुकी हूँ. जो मुझे पसंद आये और उनमें से कई के साथ सेक्स भी कर चुकी हूँ।

अब तक मैं सेक्स के काफ़ी अनुभव कर चुकी हूँ. मुझे इसमें बहुत मज़ा आता है। आज मैं आप लोगों को अपने कई किस्सों में से एक किस्सा बताने जा रही हूँ जो बेहद यादगार है।

मैं पहली बार यहाँ अपनी सेक्सी स्टोरी इन हिंदी लिख रही हूँ।

यह बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में थी। मैं एक विवेक नाम के लड़के से बात किया करती थी जो मुंबई में रहता था। हम काफ़ी वक्त तक एक-दूसरे से बात करते थे।

हम पहली बार तब मिले थे जब वो मेरे पड़ोस में अपने रिश्तेदारों के घर आया था। पहले हम एक-दूसरे के ज्यादा करीब नहीं आए थे.

मेरी पड़ोस की सहेली जो कि उसकी बहन लगती थी उसकी वजह से हम मिले और हमारी दोस्ती हुई। फिर हम एक साथ घूमने लगे, बातें करने लगे और हम करीब होते गए।
तब से ही हम फोन पर भी बात करने लगे।

वो मुझसे उम्र में थोड़ा बड़ा था पर हमें कोई दिक्कत नहीं थी। जब हम मिले थे तब मैं उस वक्त बारहवीं में थी और उसकी पढ़ाई खत्म होने वाली थी. वो अपने होटल और रेस्टोरेंट के बिजनेस को आगे बढ़ाने वाला था।

कुछ दिन बाद वो वापस चला गया. फिर हम सिर्फ फोन पर बात करने लगे।

एक दिन बात करते हुए उसने मुझे मिलने के लिए पूछा. हम बहुत वक्त से नहीं मिले थे।
मैंने उसे कहा कि वो मेरे पास आ जाए.
तो उसने कहा कि वो नहीं आएगा बल्कि मैं उसके पास आऊँ।

उसकी पढ़ाई खत्म हो गई थी और अब वो बिजनेस सँभालता था।

तो मैं उससे मिलने उसके पास चली गई।

मेरे मम्मी-पापा मुझे कुछ करने से रोकते नहीं थे. पर फिर भी उनकी तसल्ली के लिए मैंने उन्हें कह दिया कि मैं कालेज ट्रिप पर जा रही हूँ.
और मेरी सहेलियों से कहा कि वो सब संभाल लें।

फिर मैं विवेक के पास चली गई। वो मुझे लेने एयरपोर्ट आया। हम एक-दूसरे को देखते ही जोड़ से गले लग गए।

वो मुझे लेकर अपने एक होटल ले गया और मुझे एक शानदार सा कमरा रहने के लिए दिया।

उसने बताया कि ये उसके सभी होटलों में सबसे शानदार कमरा है. इसे उसने मेरे लिए स्पेशल सजाया है।
वो कमरा बहुत खूबसूरत था और साथ ही वहाँ कई गिफ्ट थे जो वो मेरे लिए लाया था।

उसने मुझे स्पेशली एक वेस्टर्न शोर्ट ड्रेस दी। फिर उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और हम किस करने लगे।
किस करते हुए ही उसने मुझे उठा लिया और बेड पर ले गया।

हमने एक-दूसरे को जकड़ रखा था। काफ़ी देर तक हम लिपटे रहे और एक-दूसरे के साथ जीभ और होंठों से खेलते रहे।

काफ़ी देर तक किस करने के बाद उसने मुझे आराम करने कहा और कहा कि शाम को मैं उसकी दी ड्रेस में तैयार रहूँ।
फिर मैंने थोड़ा लंच किया और थोड़ी देर आराम किया।

शाम को मैं उसी ड्रेस को पहन कर तैयार हो गई।

थोड़ी देर में विवेक आया. वो तो मुझे बस देखता ही रह गया।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो वो मेरी तारीफ़ करने लगा।

फिर उसने मुझे फूल दिये, मैंने फूल ले लिये। फिर वो मुझे अपने साथ टैरेस पर ले कर गया.
मुझे कुछ समझ नहीं आया कि वो मुझे टैरेस पर क्यों ले जा रहा है।

पर मैंने वहाँ जाकर देखा कि विवेक ने वहाँ पर बहुत तैयारी की है। मैं ये सब देख कर बहुत हैरान थी और बहुत खुश भी।
वहाँ ऊपर से नज़ारा बहुत खूबसूरत था।

हमने डिनर किया. वहाँ काफ़ी रोमांटिक म्यूजिक बज रहा था जिस पर हमने साथ में डांस किया।
फिर उसने मुझे ड्रिंक दिया और हम नज़ारे देखने लगे और उस वक्त का मज़ा लेने लगे।

कुछ देर बाद उसने अचानक मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और टैरेस की दूसरी तरफ़ ले गया.
वहाँ उसने और भी तैयारी की थी. मुझे देखते ही सब समझ में आ गया।

वहाँ एक बड़ा सा बेड था और बहुत खूबसूरत सजावट थी।
मुझे ऐसा लगा कि जैसे आज मेरी सुहागरात की चुदाई कहानी लिखी जायेगी!

वो मुझे बेड पर ले गया और मुझे चूमने लगा. वो पूरे जोश में लग रहा था। वो धीरे-धीरे मेरे पूरे शरीर को चूमने लगा।

मुझे चूमते हुए वो मेरे कपड़े भी उतारने लगा। फिर वो मेरे बूब्ज़ चूसने लगा। मेरे बूब्ज़ देख कर तो वो पागल ही हो गया था. वो कभी मेरे बूब्ज़ को कभी आराम से सहलाता, चूमता और कभी जोर से दबा देता।

इन सब में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं जैसे अपना हनीमून मना रही थी. मैं उसका पूरा साथ दे रही थी।
जोश में मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन तोड़ दिये और शर्ट उतार दी।

फिर उसने मेरे पूरे कपड़े उतार दिये सिर्फ पैंटी को छोड़कर!
और वो धीरे-धीरे मेरे बदन को चूमता और चाटता हुआ नीचे बढ़ता गया।

वो मेरे पेट और नाभि को चाटने लगा. ये सब मुझे पागल कर रहे थे। वो मेरी जांघों से होता हुआ मेरे पैरों तक पहुँच गया और मेरे पैरों की उँगलियाँ चूसने लगा।

फिर वो मेरे जांघों को सहलाने लगा और फिर मेरी टाँगों को खोल कर मेरी चूत के आसपास चूमने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा।

मेरी पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी।

फिर उसने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी चूत पर उँगलियाँ टहलाने लगा. फिर मेरी चूत को उसने अपने मुँह में भर लिया और उसे चाटने लगा।
वो अपनी जीभ से मेरी चूत को अंदर से चाटने लगा।

फिर उसने अपनी एक उँगली भी मेरी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा।

मैं अपना आपा खो चुकी थी. मैं पूरे उफ़ान पर थी. मेरे मुँह से बस सिसकारियाँ और आहें निकल रही थी। मैंने अपने पंजों से उसके सर को अपनी चूत में पूरा जकड़ लिया।

थोड़ी ही देर में मेरी चूत से पानी झड़ गया और मैं निढाल हो गई।
मेरे शरीर में जैसे कोई ताकत नहीं थी।

पर विवेक का जोश कहीं नहीं गया था. वो अब भी मेरे जिस्म को चूम रहा था।

उसने मुझे उल्टा किया और मेरे बदन को पीछे से चूमने लगा. और फिर मेरी गाँड चाटने लगा।

कुछ देर तक ऐसे ही मेरे पूरे बदन और बूब्ज़ को चूमता रहा. और फिर मुझे बांहों में जकड़ कर मेरे होठों को चूमने लगा।

धीरे-धीरे मेरा भी जोश लोटने लगा और मैं भी उसे चूमने लगी।

अब मेरी बारी थी. मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ कर उसे चूमने लगी। फिर उसका जिस्म चूमते हुए मैं नीचे गई और उसका पैंट उतार दिया। उसके अंडरवियर के अंदर लंड का उभार मुझे नशा दिला रहा था।
मैंने ऊपर से ही उसके लंड को काटना और चाटना शुरु कर दिया।

उसका लंड मुझे काफ़ी दमदार लग रहा था।

फिर मैंने उसका अंडरवियर उतारा तो उसका लंड एकदम सलामी देने खड़ा हो गया। उस वक्त तक मैंने इतना अच्छा लंड नहीं देखा था। मुझे तो उस लंड से प्यार हो गया। मैंने उसे चूसना शुरु कर दिया, उसका टेस्ट भी बहुत अच्छा था।

मैं उसके लंड और बाल्स को चूस रही और वो सिसकारियाँ भर रहा था।

फिर वो जोश में आ के मेरे मुँह को ही चूत की तरह चोदने लगा। वो अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड को पूरा मेरे मुँह में धकेलने लगा। उसका लंड मेरे गले के अंदर तक जा रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करने के बाद उसने मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ दिया।

फिर कुछ देर हम पड़े रहे और किस करते रहे।

कुछ ही देर में उसका लंड फिर से तन के खड़ा हो गया। मुझे समझ आ गया कि अब मेरी चूत की खैर नहीं।

वो उठा. उसने मेरी टाँगों को खोल दिया. फिर मेरी चूत पर उँगलियाँ फेरने लगा।
फिर उसने मुझे उठा के एक किस किया. और तुरंत ही अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर अंदर-बाहर करने लगा. इस तरह उसने मेरे मुँह से अपना लंड गीला कर लिया.

तब मेरी टाँगें खींचकर उसने मेरी चूत पर थूका. फिर लंड टिका कर जोर से धक्का मारा और अपना लगभग आधा लंड अंदर डाल दिया।
इस अचानक और जोरदार वार से मेरी हालत खराब हो गई. मेरे मुँह से जोरदार चीँख निकल गई।

उसने मुझे पूरी तरह से जकड़ लिया और अपने होंठों से मेरे होंठों कैद कर लिया।

अभी तक मैं पहले वार से उभरी भी नहीं थी. उसने फिर एक जोरदार झटका देकर अपना पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया।

मैं उसकी बांहों में बेबस पड़ी थी और चाह के भी कुछ नहीं कर पा रही थी।

उसका बड़ा सा लंड मेरी चूत चीरता हुआ अंदर चला गया. मैं दर्द से तड़प रही थी पर कुछ नहीं कर पा रही थी।
मेरी चीख भी उसके होंठों तले दबी रह गई।
मैंने उससे पहले इतना बड़ा कभी नहीं लिया था।

फिर उसने आराम से धीरे-धीरे लंड बाहर निकलना शुरु किया तो मेरी जान में जान आने लगी.
पर लंड निकालते ही उसने फिर अपना लंड पूरी ताकत से अंदर डाल दिया।

अब मेरी हालत और बुरी हो गई। मेरी आँखों से आँसू आ गए।

उसने फिर तीन-चार बार ऐसा किया. फिर मुझे अच्छा लगने लगा। अब मैं भी उसका साथ देने लगी।

धीरे-धीरे उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी और मुझे तेज़ी से चोदने लगा। वो बेड भी अपनी उछाल की वजह से हमारी चुदाई में मदद कर रहा था। उसका लंड मेरी चूत में काफ़ी अंदर तक जा रहा था जितना अंदर पहले कोई नहीं पहुँचा था।

मैं इतने में झड़ गई. पर वो अभी भी लगा हुआ था।

फिर उसको नीचे लिटा के मैंने उसके ऊपर बैठ के घुड़सवारी की. उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना के चोदा।

फिर उसने मुझे उल्टा लिटाया और मेरे नीचे तकिया रख दिया. उसने मेरी गांड ऊँची की और पीछे से मेरी चूत चोदने लगा।

मैं उस बेड और विवेक के लंड के बीच फंस गई थी. विवेक पूरी ताकत से मेरी चूत को चीर रहा था. और वो बेड की उछाल जो मुझे वापस लंड की तरफ़ धकेल रही थी।

इस तरह मैं कई बार झड़ गई और वो भी मेरे अंदर ही झड़ गया।

पूरी रात हमने कई बार चुदाई की. उसने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदा।

सुहागरात की चुदाई के बाद न जाने कब हमारी आँख लग गई।

सुबह सूरज की चमकती रोशनी से मेरी आँख खुली। दिन निकल आया था. हम खुले टैरेस पर बिना कपड़ों के सो रहे थे. पर ऊँची बिल्डिंग होने की वजह से किसी के देखने का डर नहीं था।

विवेक मेरे ऊपर सोया हुआ था और अभी भी उसका लंड काफ़ी सख्त था. उसके लंड का सर अभी भी मेरी चूत में था।

मैंने उसे किस कर के उठाया. उसने मुझे भी किस करना शुरु कर दिया और लंड हल्के से अंदर-बाहर करने लगा।

कुछ दस-पंद्रह मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में उठा कर कमरे में ले गया।

रात भर की चुदाई के बाद मेरा जिस्म दर्द से टूट रहा था।

फिर हम साथ में नहाए और कुछ खा पीकर के कुछ देर सो गये।

मैं वहाँ पाँच दिन रही और इस बिना शादी के हनीमून के दौरान हमने खूब सेक्स किया.

साथ ही उसने मुझे पूरा शहर घुमाया. हमने नाइट पार्टी की, क्लब और बार वगैरा गये और बहुत मस्ती की।

ये मेरे यादगार पलों में से एक है।

आखिरी दिन मेरे लौटने से पहले भी हम कमरे के दरवाजे से लग कर एक-दूसरे से लिपट कर काफ़ी वक्त तक किस करते रहें।

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मेरी गीली चूत

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम अक़्सा है और मैं महाराष्ट्र की रहने वाली हूँ. यह मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स स्टोरी हिंदी में है. मैं इस वक़्त 21 साल की हूँ और मेरी शादी अभी हाल ही में हो गयी है. मेरा फिगर 36-26-36 का है और मैं काफी गोरी भी हूँ.

ये बात तब की है, जब मैं पढ़ती थी. मेरे घर में मम्मी पापा, बड़ी बहन और बड़ा भाई है. पर ये कहानी मेरे चचेरे भाई शिजू की है. वो मुझसे 3 साल बड़ा है और मेरे ही साथ पढ़ता था. पढ़ने के बाद हम साथ में घर वापस आते. हम दोनों घर पर ही खेलते थे.

मेरा घर काफी बड़ा है और मैं शुरू से ही लड़कों के साथ खेलती आई हूँ. जब सब लोग एक जगह जमा हो जाते, तो हम लोग छुपन छुपाई खेलते थे. उसमें शिजू के अलावा मेरी एक सहेली नाज़ भी थी. कुछ और लड़के भी हमारे खेल में शामिल होते थे. किसी एक की बारी छिप हुए बाकी को ढूँढने की आती थी और बाकी सब लोग छुप जाते थे.

शिजू हमेशा मेरे पास ही छिपता था और छिपने के बाद वो मेरे साथ मेरे दूध दबाना … मुझे उल्टा लिटाना, मेरे ऊपर चढ़ जाना. मेरी टांगें फैलाकर सलवार के ऊपर से खुद को घिसना … उसका हमेशा का काम था.

उसके इन सब कामों में मुझे भी बहुत मज़ा आता था, इसीलिए मैं उसे मना भी नहीं करती थी.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त भी मेरे मम्मे बाकी लड़कियों से काफी बड़े थे. जिनको शिजू दबाता ही रहता था.

मेरा कुछ न बोलना, उसकी हिम्मत बढ़ने का बहुत बड़ा कारण था. वो मुझे नीचे लिटाकर मेरी सलवार निकालकर मेरी चूत को चाटने भी लगा था. इसमें तो मुझे और भी सुकून मिलता था.

कई दिन तक चूत चाटने के बाद अब वो मुझे भी अपना लौड़ा चूसने के लिए कहने लगा था. पहले पहल तो मैंने मना किया, पर बाद में कुछ दिन बाद मैं भी उसका लंड चूसने लगी. हम दोनों खुद ब खुद सिस्टी नाइन का पोज सीख गए थे. शायद ये कुदरत ही सब सिखा देती है.

मैं उसके लंड की तरफ अपना मुँह कर देती और वो मेरी चुत पर अपना मुँह लगा कर जीभ से मेरी चुत को मस्ती से खूब चाटता. मेरी चूत को काफी देर देर तक चाटने के बाद उसने मुझे इससे आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया था.

जब उसकी जीभ मेरी चुत को गरम कर देती थी, तो मुझे खुद उसके लंड की जरूरत होने लगती और मैं सीधे होकर उसका लंड पकड़ने लगती.

वो मेरी सलवार को मेरी टांगों से पूरी निकालकर अलग कर देता और मेरी चूत में अपना लंड चुभाने लगता. मुझे उसके लंड से एक अलग सी तकलीफ होती, लेकिन उस टाइम मैंने उसे कभी पूरा लंड अपनी चुत के अन्दर डालने नहीं दिया.

सब कुछ ऐसे ही चलता रहा. वो मुझे एक औरत की तरह दबाता और मसलता रहा. मेरे सगे भी ने मेरे साथ फर्स्ट टाइम सेक्स … आधा अधूरा ही सही करके मेरी वासना की आग भड़कायी.

एक दिन हम ऐसे ही पलंग के नीचे छुपे थे, तब एक असलम नाम के लड़के ने ये सब देख लिया, वो इस समय राज दे रहा था, मतलब इस समय उसकी बारी सभी छिपे हुए को खोजने की थी. जब असलम ने हमको देखा, उस वक़्त मेरी सलवार निकली हुई थी और शिजू मेरी चूत चाट रहा था.

उसे देखकर मैं डर गई और खुद को छिपाने की कोशिश करने लगी. वो मेरे पास आकर मेरे मम्मों को दबाने लगा. शिजू ने भी उससे कुछ नहीं कहा. एक तरह से वे दोनों मेरे साथ मजा लेने लगे थे.

मैं भी चुप होकर उन दोनों से अपने मम्मों को मिंजवाती रही. उन दोनों ने मेरा कोई विरोध नहीं देखा, तो वे दोनों खुल कर मुझे ऐसे ही दबाते और मसलते रहे. अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. एक तरह से ये हो गया था कि अब मैं उन दोनों के लिए एक जुगाड़ बन गई थी.

मुझे भी चूंकि मजा आने लगा था, तो मैंने भी कुछ कहना ठीक नहीं समझा. अब हम तीनों हमेशा साथ में छुप जाते और वो दोनों मुझे पागलों की तरह मसलते दबाते रहते.

ऐसा कुछ टाइम तक चला. इस बीच उन दोनों ने मेरी चुत में लंड पेलने की कोशिश भी की, मगर वो मैंने नहीं होने दिया.

फिर मैं गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आ गयी. नानी के घर पर मेरी बहुत सारी सहेलियां थीं.

हम सब नानी के घर के पीछे के खेत में खेलते थे. हमारे बीच में सिर्फ एक लड़का अरबाज था और बाकी बहुत सारी लड़कियां थीं. वहां पर हम आपा बाजी वाला खेल खेलते थे. अरबाज मेरा या कभी मेरी सहेली का दूल्हा बनता और उसके साथ सोना और उसके लंड को छूना … बस इतना ही चलता रहा.

फिर एक दिन मैं खेत में खेलने के लिए गयी, तब वहां पर एक भाईजान थे. उनका नाम मोहसिन था. मोहसिन भाई मुझे हमेशा चिढ़ाया और छेड़ा करते थे. वो उसी एरिया में रहते थे.

एक दिन मैं उनके पास गई, वो एक झाड़ से टिक कर बैठे थे. उन्होंने कुछ देर बैठने के बाद मुझे अपनी गोदी में बैठने के लिए कहा … मैं झट से बैठ गयी. वो मुझे सहलाते हुए प्यार करने लगे. फिर वो मुझसे आगे पीछे होने के लिए कह रहे थे … तो मैं होने लगी. इसमें एक मस्त रगड़ हो रही थी. जिससे मुझे भी मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला. भाई का लंड कुछ 6 या 7 इंच लंबा रहा होगा. मैं लंड देखने लगी तो उन्होंने मुझे हाथ में लंड पकड़ा दिया. मुझे लंड सहलाने मजा आता था, तो मैं उनके लंड को सहलाने लगी. भाई का लंड खड़ा हो गया.

अब उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी और मुझे लिटा दिया. फिर भाई ने अपनी टांगें सीधी की और मुझे अपने मुँह की तरफ मुँह करके अपने ऊपर बिठा लिया. इससे मेरी नंगी चूत उनके लंड से टकराने लगी. मुझे गर्मी चढ़ने लगी.

भाई भी अपने नंगे लंड के ऊपर मेरी चुत लगाने लगे. इस पोजीशन में मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था. मैं खुद अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए अपनी चुत को जोर जोर से भाई के लंड पर घिसती गयी.

नीचे लंड चुत की घिसाई चल रही थी और ऊपर भाई मुझे चूम रहे थे. मैंने भी उनके मुँह को चूमा, तो भाई ने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिया. वो मुझे किस करने लगे.

मेरे होंठों को भाई के होंठों का स्वाद मिला तो मैं मदमस्त हो गई और मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया.

अब भाई मेरी चुत पर लंड रगड़ रहे थे, मेरे होंठों को मस्ती से चूस रहे थे और अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहे थे. मैं एकदम से चुदासी हो गई थी.

इतने प्यार से अब तक मुझे किसी ने गरम नहीं किया था. साथ के लौंडे तो अब तक मेरी चूचियों या मेरे चूतड़ों का भरता ही बनाते रहे थे. मैं आज खुद को भुला चुकी थी और भाई के साथ मस्ती करने में सब कुछ बिसरा चुकी थी.

कुछ देर बाद उन्होंने मेरे चूतड़ों को पकड़ कर मुझे जोर जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

इससे मेरी चुत एकदम से भट्टी सी तपने लगी थी. मैं सोच रही थी कि आज यदि भाई मेरी चुत में लंड पेलेंगे, तो मैं लंड अन्दर ले ही लूंगी. फर्स्ट टाइम सेक्स का मजा लूंगी.

मगर ऐसा नहीं हुआ … मेरी चुत से लंड की रगड़ से कुछ ही देर बाद उनके लंड से कुछ सफेद सा रस निकल गया. वो पूरा चीकट सा रस उनके पैरों पर … और मेरी चुत की हल्की हल्की झांटों में लग गया था.

भाई के लंड से पानी निकलते ही वो एकदम से थक से गए और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगे. मैं भी उनकी छाती से चिपक कर मजा लेने लगी.

फिर कुछ पल बाद वो उठने को हुए, तो मैं भी उठ गई और मैंने अपनी सलवार पहन ली. कपड़े ठीक करके मैंने भाई को देखा और मुस्कुरा कर घर चली गयी.

फिर एक दिन मैं अपने मुँह बोले मामू के घर गयी. उनका घर नानी के घर से कुछ थोड़ा दूर ही था. मैं वहां पर गई तो उनके घर पर कोई नहीं था.

मेरे ये मामू कुछ 23 या 24 साल के थे. मैं उनके घर खेल रही थी. वो अपने पलंग पर लेटे हुए थे. तभी उन्हें पता नहीं क्या हुआ … उन्होंने मुझे पास बुलाया और अपने ऊपर बिठा लिया. मैं उस वक़्त ठीक उनके लंड के ऊपर बैठी थी. वो मुझे आगे पीछे करने लगे. न उन्होंने अपने कपड़े उतारे थे … न मेरे, बस ऐसे ही कुछ देर अपने लंड पर मुझे हिलाते रहे.

मेरी चूचियां उनको मस्त कर रही थीं. मुझे भी उनका लंड अपनी चुत में गड़ता सा महसूस हो नरहा था. मैं खिलखिलाते हुए मामू के लंड पर कूद रही थी.

उन्होंने मुझसे पूछा- मजा आ रहा है?
मैं हां कहा.
तो बोले- अभी और मजा आएगा.

ये कह कर अपने पलंग पर ही मामू ने मुझे अपने नीचे उल्टा लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गए. फिर मामू ने मेरी गांड के ऊपर अपना लंड पेंट के ऊपर से रगड़ना चालू कर दिया. कुछ देर लंड घिसने के बाद वो मेरे ऊपर अपना पूरा वजन डाल कर थम से गए. शायद मामू झड़ गए थे.

जब मुझे उनके वजन से तकलीफ हुई, तो मैं कोशिश करके मामू के नीचे से निकली और वहां से घर चली गयी.

इस तरह कई लोगों ने मुझे अपने लंड के नीचे दबाया था. मुझे वो सब ठीक तरह से याद भी नहीं है कि किस किस ने मेरे जिस्म के साथ ऊपर ऊपर से खेला था.

फिर मैं एग्जाम के बाद अपनी खाला के घर गयी. वहां पर मुझे एक लड़का समीर दिखा, जो कि बहुत ही खूबसूरत था. वो मुझसे उम्र में 4-5 साल बड़ा था. पर मैं भी भरी पूरी छमिया बन चुकी थी, ये सब मेरे जिस्म के साथ हुई छेड़छाड़ के कारण हुआ था.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त मेरी बॉडी किसी भी तरह से समीर के जिस्म के लिए कमसिन लड़की जैसी नहीं थी. उस वक़्त मेरे बूब्स 32 के हो गए थे और गांड कुछ 34 की थी. वो लड़का समीर भी जैसे मेरा दीवाना हो गया था.

फिर ऐसे ही कुछ दिन एक दूसरे को देखने के बाद उसने मुझे अपना नंबर दिया. मुझे भी समझ आ गया था कि समीर मुझे प्यार करना चाहता है.

अब चूंकि मुझे भी अपने जिस्म की आग सताने लगी थी और मैं अब किसी से भी अपने जिस्म को हाथ टच नहीं करने देती थी. तो मेरे जिस्म में किसी मर्द के हाथ की जरूरत महसूस होने लगी थी.

मुझे समीर अपने लिए मस्त लड़का लगा था, तो मैं अपने घर जाने के बाद अपने घर के मोबाइल से उसे कॉल करने लगी.
हमारे बीच इश्क शुरू हो गया था. कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा.

फिर उसने मुझसे मिलने की ज़िद की और मैंने उसे अपने गांव बुला लिया.

जिस दिन वो मेरे गांव आया, उस दिन मैंने कॉलेज की छुट्टी मार दी और उसके साथ चली गयी.

घूमते घूमते उसने गाड़ी एक खेत की तरफ ले ली और खेत के बीचों बीच एक छोटे से गड्डे जैसी खाई में हम दोनों चले गए. हम दोनों के जिस्म में जिस्म की आग लपलपा रही थी.

उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मैं बह गई. वो मेरे मम्मों को दबाने लगा और मैं मस्त होने लगी. आज बहुत दिन बाद किसी ने मेरे मम्मों को मसला था तो मेरे मम्मे एकदम से कड़क हो उठे.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उसने मेरा दुपट्टा नीचे बिछा दिया और उसके ऊपर मुझे लिटा दिया. मैं नीचे से पूरी गीली हो गयी थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

फिर उसने मेरी सलवार निकाली और खुद की पैंट निकाल दी. उसका लंड कुछ 6 इंच लंबा होगा और 3 इंच मोटा था. इतना मोटा लंड मैंने आज पहली बार देखा था. उसने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत पर लंड लगा कर अन्दर डालने की कोशिश करने लगा था.

मैं भी आज फर्स्ट टाइम सेक्स करती हुई चूत में लंड ले लेना चाहती थी. उसका लंड चूत में लेते समय मुझे एक मीठा सा दर्द हो रहा था. काफी कोशिशों के बाद भी उसका लंड चुत में अन्दर नहीं गया.

फिर उसने अपने लंड के टोपे पर थूक लगाया और मेरी चूत पर भी अपना थूक लगा कर लंड सैट कर दिया.
अभी मैं कुछ समझ पाती, समीर ने पूरी ताकत से झटका दे मारा.

उसका आधा लंड चूत के अन्दर चला गया और मैं मछली की तरह फड़फाड़ने लगी. मैं उसे अपने ऊपर से धक्का देकर हटाने लगी, पर उसने मेरी एक न सुनी … और जोर जोर से झटके मारने लगा. कुछ देर की चुदाई के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं बस उसके लंड के झटकों को सहने लगी.

फिर उसने मेरी चीख पुकार कम होते देखी, तो अब उसने मेरी टांगें पकड़ लीं और झटके पर झटके मारने लगा. कुछ देर बाद मुझे अपनी चुत में मजा आने लगा और मैंने अपनी टांगें हवा में उठा दीं.

कोई बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद समीर ने मेरे अन्दर ही अपना लंड झाड़ दिया. फर्स्ट टाइम सेक्स से मुझे बड़ा सुकून मिला. इस तरह से मैं समीर के लंड से अपनी चुत की सील तुड़वा बैठी.

फिर समीर ने मुझे बहुत दिनों तक चोदा और मैंने और उसने शादी कर ली.

समीर आज मेरा शौहर है और वो एक रंगीन किस्म का आदमी है. वो मुझे बहुत चोदता है. उसका लंड अभी 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा हो गया है. वो रोज़ मुझे 2 या 3 बार चोदता है. पर अब वो चाहता है कि हम कुछ अलग तरीके का सेक्स करें … जैसे अदला-बदली, थ्री-सम … या ग्रुप सेक्स. पर मैं उसके साथ चुदाई करते समय किसी और का नाम लूं … इसी में सुख ले लेती हूँ.

मैंने उसे अपने शुरू से जवानी तक के सारे सेक्स के किस्से बताए, वो सुनकर वो बहुत ही कामुक हो जाता है. फिर वो मेरे साथ भयंकर वाला सेक्स करता है.

वो चाहता है कि मैं किसी औऱ से चुदूं … पर अभी तक हमें कोई भरोसे का कोई कपल या आदमी नहीं मिला है. जब ऐसा होगा तब मैं आपको अपनी उस चुदाई का अनुभव एक सेक्स कहानी के माध्यम से लिखूंगी.

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जोर से चोदो

दोस्तो, मेरा नाम आदित्य है और मुझे घर में सब आदी कह कर बुलाते हैं। मैं 21 साल का हूं और बी.फार्मा. के तीसरे वर्ष में हूं. जब से मैंने जवानी में कदम रखा है मुझे बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक रहा है. मैं जिम करता हूं तो मेरी बॉडी अच्छी बनी हुई है.

मगर ये तो हुई मेरे शौक की बात. अब मैं आपको एक राज की बताता हूं. बनाने वाले ने मुझे एक खास तोहफा दिया है. वो तोहफा है मेरे लंड का साइज़. जी हां दोस्तो, मेरे लंड का साइज 8 इंच से कुछ ज्यादा ही है. इतना बड़ा लंड मिलना वाकई किस्मत की बात है.

जब मेरा लंड पूरे तनाव में होता है तो उसकी मोटाई 3 इंच हो जाती है. इतना मोटा और लम्बा लंड लेकर कोई भी लड़की तो क्या एक से एक चुदक्कड़ औरत भी खुश हो जायेगी. मगर मैं जो कहानी आप लोगों को बताने जा रहा हूं वो किसी अन्जान की नहीं बल्कि मेरी ही भाभी की कहानी है.

मेरी भाभी का नाम सलोनी है. घर में मेरी भाभी को सब सुलु कह कर पुकारते हैं. मैं भी अपनी भाभी को सुलु भाभी कह कर बुलाता हूं. यह बात तब की है जब मेरी भाभी सुलु दूसरी बार अपनी ससुराल यानि कि हमारे घर पर आई थी.

इससे पहले कि मैं भाभी की चोदाई कहानी को आगे बढ़ाऊं मैं आपको अपने भाई का परिचय भी दे देता हूं. मेरा भाई मुझसे उम्र में तीन साल बड़ा है. उसके लंड का साइज 6 इंच के करीब है. अब आप ये सोच रहे होंगे कि मुझे उसके लंड का साइज कैसे पता चल गया.

अगर आप कहानी को आगे पढ़ेंगे तो आपको भी पता लग जायेगा कि मेरे भाई के लंड के बारे में मुझे कैसे पता लगा. इसलिए अभी मैं इस बात को यहीं खत्म कर देता हूं और अपनी भाभी के बारे में आपको बताता हूं.

मेरी भाभी की उम्र 22 साल है. वो एक गजब के शरीर की मालकिन है. उसका फिगर इतना मस्त है कि मुझे अपने भाई से जलन होने लगी थी कि कैसी माल हाथ लगी है उनको. एकदम फिट और गजब की शेप वाले बदन की मालकिन. कभी कभी मेरा मन करने लगता था भाभी की चोदाई करने का!
पढ़ाई में उसने स्नातक किया हुआ है.

उसका गोरा बदन, गोल चूचे और बाहर निकली हुई मस्त सी गांड को देख कर तो पहले दिन ही मेरा लंड पानी छोड़ने लगा था. मगर अभी वो घर में नई दुल्हन थी तो मैं बस अपने अंदर की प्यास को लौड़ा हिला कर ही शांत कर लेता था. शादी से पहले भाभी जीन्स और टॉप वगैरह भी पहनती थी लेकिन शादी के बाद ज्यादातर साड़ी या सूट में ही रहने लगी थी.

मगर साड़ी में भी वो गजब की सेक्सी दिखती थी. कई बार जब मेरे मम्मी-पापा घर पर नहीं रहते थे तो वो जीन्स और टॉप भी पहन लेती थी. मैंने उसको बस एक बार ही इस तरह के लिबास में देखा था. उस दिन उसके चूचों की शेप को देख कर मुझे तुरंत जाकर बाथरूम में मुठ मारनी पड़ी थी.

आप समझ ही गये होंगे कि कितनी मस्त गोलाई वाले चूचे होंगे उसके. फिर एक दिन मेरी किस्मत भी मुझ पर मेहरबान हो ही गई. भाई को दो या तीन दिन के लिए किसी काम से बेंगलुरू जाना पड़ रहा था. वो तीन दिन के बाद ही आने वाले थे. यहां तक तो सब ठीक था लेकिन किस्मत की बात ये हुई कि उसी दिन मेरे नाना की तबियत बिगड़ गई.

मेरी मां और पापा नाना का हाल-चाल जानने के लिए गांव में चले गये. वो दोनों भी अगले दिन वापस आने वाले थे. मगर गांव में जाने के बाद मां का फोन आया कि उनको अभी एक-दो दिन का वक्त और लगने वाला है. इसलिए मां अब दो-तीन दिन तक नहीं आने वाली थी.

अब घर में मैं और भाभी ही रह गये थे. मैं भी थोड़ा मजाकिया किस्म का बंदा हूं तो भाभी और मेरे बीच में मजाक हो जाता था. भाभी भी मेरे साथ काफी कम्फर्टेबल फील करती थी. जब घर में कोई नहीं था तो पहली रात को तो सब कुछ ठीक रहा. अब तक मेरे मन में भी चुदाई का प्लान करने का विचार नहीं आया था.

अगली सुबह उठ कर मैं बाथरूम में नहाने के लिए चला गया. घर में भाभी और मेरे अलावा कोई नहीं था. मैं जानता था कि घर में भाभी और मेरे अलावा कोई नहीं है. उस वक्त भाभी भी अपने कमरे में थी इसलिए मैंने बाथरूम का दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था.

मगर यहां पर एक बात यह भी थी कि भाभी को नहीं पता था कि मैं उठ गया हूं. उनके लिए तो मैं अभी सो रहा था. भाभी रोज सुबह मुझे उठाने के लिए मेरे कमरे में आती थी. मैं बाथरूम में था. मुझे नहीं पता था कि भाभी एकदम से मेरे कमरे में आ जायेगी.

मैं नंगा होकर बाथरूम में नहा रहा था. अपनी ही मस्ती में था. मुझे अंदर गये हुए काफी देर हो चुकी थी. शायद भाभी ने मुझे आवाज भी दी होगी लेकिन मुझे पानी के शोर के कारण कुछ सुनाई ही नहीं दिया. फिर भाभी मेरे बेड के पास आ गई. मेरे बेड के पास आने पर बाथरूम के अंदर का नजारा साफ दिखाई देता था.

भाभी ने मुझे नहाते हुए देख लिया. उस वक्त मैं अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मसल रहा था. जब मेरी नजर भाभी पर पड़ी तो मैं एकदम से सकपका गया. मैंने तुरंत बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया. मुझे नहीं पता भाभी ने मेरे शरीर में क्या क्या देखा और कितनी देर देखा. लेकिन जब मैंने उनको देखा तो मैंने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया था.

उसके बाद मैं नहा कर बाहर आ गया. मैंने नाश्ता किया और मैं तैयार होकर अपने कॉलेज चला गया. जब मैं वापस आया तो दोपहर के तीन बज चुके थे. वापस आने के बाद मैंने नोटिस किया कि भाभी का अंदाज कुछ बदला बदला सा लग रहा था.

शाम को खाना खाते समय भाभी ने कहा कि रात को तुम मेरे कमरे में आकर ही पढ़ाई कर लेना. मुझे अकेले डर लगता है. तुम्हारे भैया भी घर में नहीं हैं और मां जी भी गांव में हैं.
मैंने कहा- ठीक है भाभी. मैं आपके रूम में आकर ही पढ़ाई कर लूंगा.

रात के 9 बजे के करीब मैं भाभी के रूम में चला गया और अपनी किताब लेकर बैठ गया. फिर कुछ देर पढ़ाई करने के बाद भाभी और मैं बातें करने लगे. बातें करते करते बात बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड तक पहुंच गई. मैं भाभी के साथ काफी खुल गया था इसलिए भाभी के साथ इस तरह की बातें करने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी और भाभी का व्यवहार भी काफी दोस्ताना था.

फिर भाभी ने पूछा- कितनी गर्लफ्रेंड बना रखी हैं तुमने कॉलेज में?
मैंने कहा- एक ही थी भाभी, उससे भी ब्रेक-अप हो गया है. अब तो मैं बिल्कुल अकेला हूं.
वो बोली- तो फिर उसके बाद कोई दूसरी नहीं मिली?
मैंने कहा- नहीं, अभी तक तो नहीं मिली.

वो बोली- तो फिर बना लो कोई दूसरी. तुम तो जवान हो काफी.
मैंने कहा- आपके जैसी कोई कहां मिलेगी.
वो बोली- ओह्ह, तो मेरे जैसी चाहिए!
मैं बोला- जी!

फिर वो बोली- देखो, मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो नहीं बन सकती लेकिन फ्रेंड जरूर बन सकती हूं.
मैं बोला- सोच लो भाभी, मैं अपनी दोस्तों के साथ बहुत मस्करी करता हूं. कहीं बाद में आप शिकायत करने लगो.
वो बोली- नहीं करूंगी. मगर जरा अपने भैया और मम्मी पापा के सामने ख्याल रखना. कहीं वे गलत न सोचने लग जायें.

मैंने कहा- ठीक है. मैं ख्याल रखूंगा. तो आज से हम फ्रेंड्स?
मैंने भाभी की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा.
भाभी ने अपना हाथ मेरे हाथ में दे दिया और हमने हाथ मिला लिया. भाभी के कोमल हाथों को छूकर मैंने उनको छेड़ना शुरू कर दिया और उनके हाथों को दबाने लगा.

सुलु भाभी ने अपना हाथ वापस खींच लिया और बोली- अब रात काफी हो गई है. हम लोगों को सोना चाहिए.
मैंने कहा- थोड़ी देर और पढ़ लेता हूं भाभी. अभी मुझे नींद नहीं आ रही है.
वो बोली- ठीक है, तुम पढ़ाई करो. तब तक मैं कपड़े चेंज करके आती हूं.

कुछ देर के बाद भाभी टी-शर्ट और लोअर पहन कर आ गई. उस लिबास में भाभी के चूचे एकदम मस्त तरीके से उभर कर दिख रहे थे. पहली बार मैंने भाभी को एक हवस भरी चुदाई करने की नजर से देखा था उस दिन. वो आकर मेरे पास बेड पर लेट गई और टीवी देखने लगी.

भाभी टीवी में मग्न थी तो फिर मुझे भी अब नींद आने लगी थी. कुछ देर के बाद मैं भी उठ कर अपने कमरे में चला गया. रात काफी हो चुकी थी और सुबह उठ कर मुझे कॉलेज भी जाना था. मैं अपने कमरे में जाकर सो गया. उस दिन मैं अपने लंड को सहलाकर सो गया.

अगली सुबह भाभी ने मेरे कमरे में आकर मुझे जगाया. जब वो मुझे जगा रही थी तो झुकी होने के कारण उसके चूचों के क्लिवेज ब्लाउज के अंदर से साफ दिखाई दे रहे थे. फिर वो पलट कर जाने लगी. जब दरवाजे के पास पहुंच गई तो मैंने उनको आवाज देकर कहा- भाभी, आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हो. भाभी पलट कर मुस्कराई और फिर अपनी गांड मटकाते हुए चली गई.

उसके बाद मैं फ्रेश होकर नाश्ता करने के लिए चला गया. उस वक्त भाभी किचन में बर्तन सेट कर रही थी. मैंने टेबल पड़ा हुआ अखबार उठा कर भाभी की गांड पर मार दिया.
भाभी बोली- ये क्या बद्तमीजी है?
मैं बोला- मैंने आपको कल भी बताया था कि अगर मुझसे दोस्ती करोगी तो आपको ये सब बर्दाश्त करना पड़ेगा.

फिर वो बोली- हां, मैं तो ये भूल ही गई थी.
मैंने कहा- अब नाश्ता तो दे दो भाभी, बहुत भूख लगी है.
भाभी मेरे लिए नाश्ता लेकर आ गई और हमने साथ में बैठ कर ही नाश्ता किया.
मेरी नजर भाभी के सुन्दर चेहरे से फिसल कर उसके गले के नीचे उसकी चूचियों को टटोल रही थी.

अचानक भाभी बोली- आज मुझे बाजार से सामान लाने के लिए तुम्हारी जरूरत है. तुम चल सकते हो क्या?
मैं बोला- भाभी, वैसे मुझे कॉलेज जाना था लेकिन अगर आपको जरूरी काम है तो फिर मैं आज कॉलेज की छुट्टी कर लेता हूं.
यह सुन कर भाभी मुस्कराने लगी. फिर बोली- ठीक है, मैं भी नहा धोकर तैयार हो जाती हूं.

जब भाभी तैयार हो चुकी उसने मुझे आवाज दी. मैं उसके कमरे में गया तो देखता ही रह गया. उसने सफेद टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहनी हुई थी.
मैंने कहा- भाभी आप तो बिल्कुल हीरोइन लग रही हो इन कपड़ों में।
भाभी बोली- हां, मम्मी पापा घर पर नहीं है तो इसलिए पहन लिया मैंने. अब चलो. हमें देर हो रही है.

वो पूछने लगी- कैसे जायेंगे हम?
मैंने कहा- स्कूटी पर.
वो बोली- चलायेगा कौन?
मैंने कहा- आज आप चलाओगी.
वो बोली- ठीक है.

उसके बाद हम शॉपिंग के लिए निकल गये. रास्ते में मैंने भाभी के कंधे पर हाथ रख लिया और फिर उनकी कमर पर हाथ रख लिया. भाभी ने कुछ नहीं बोला. उसके बाद मैं हिम्मत करके भाभी की कमर को भी सहलाने लगा. तब भी भाभी ने कुछ नहीं कहा. अब मुझे यकीन हो गया था कि भाभी को कोई प्रॉब्लम नहीं है.

बाजार जाकर हमने शॉपिंग की और फिर दोपहर तक वापस आ गये. हम दोनों ही थक गये थे.
भाभी बोली- मैं अपने कमरे में सोने के लिए जा रही हूं. शाम को मम्मी-पापा भी आने वाले हैं.
मैंने सोचा कि उनके आने से पहले भाभी के साथ थोड़ी सी मस्ती कर ली जाये. क्योंकि उसके बाद मौका नहीं मिल पाता.

मैंने कहा- भाभी, मैं भी आपके रूम में ही आपके साथ लेट जाता हूं.
वो बोली- ठीक है चलो.
अंदर जाकर भाभी ने ड्रेस बदल ली. उसने लोअर पहन ली और घर वाली टी-शर्ट पहन ली. उसमें उसके बदन की शेप मस्त लग रही थी. फिर वो बेड पर आकर लेट गई.
भाभी ठीक मेरी बगल में लेटी हुई थी. कुछ देर के बाद ही उनको नींद आ गई.

जब हमें लेटे हुए थोड़ा वक्त बीत गया तो मैंने देखा कि भाभी की टी-शर्ट पेट के ऊपर से हट गई है. उनका गोरा बदन दिखने लगा था. उसको देखते ही मेरे अंदर सेक्स जागने लगा. मैंने हल्के हाथ से भाभी के पेट को छूकर देखा. भाभी नींद में थी. फिर मैंने भाभी की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. उसने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी थी इसलिए उसके चूचे मेरे सामने नंगे हो गये.

सुलु भाभी के नंगे चूचे देख कर मेरा लंड फटने को हो गया. मैं अपने हाथों को रोक नहीं पाया और भाभी के गोरे चूचों को छू कर देखने लगा. भाभी के नर्म चूचे हाथ में लेकर पूरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा. मैंने अब भाभी के बूब्स पर दबाव देना शुरू कर दिया. भाभी की आंखें अभी भी बंद थीं.

उसके बाद अचानक से भाभी ने करवट ली और उसकी गांड मेरी तरफ हो गई. मेरा लंड तो पहले से तना हुआ था. मैंने धीरे से सोई हुई भाभी की गांड पर अपना तना हुआ लंड लगा दिया. धीरे-धीरे लंड को भाभी की गांड पर रगड़ने लगा. बहुत मजा आने लगा. हर पल मेरी हवस बढ़ रही थी.

अपने तने हुए लंड को मैंने भाभी की गांड से चिपका दिया. आगे हाथ ले जाकर उसकी चूचियों को दबाने लगा. अभी भी भाभी सो रही थी या फिर हो सकता है कि सोने का नाटक कर रही थी. मगर मुझे बहुत मजा आ रहा था और भाभी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होते देख मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी.

मैं डरते हुए ही उनके चूचे दबा रहा था.
फिर भाभी एकदम से उठ कर बोली- करना है तो सही से कर ले. मैं मना कर रही हूं क्या?
मैं सुन कर हैरान हो गया लेकिन साथ ही खुश भी. मेरे मन की मुराद जैसे पूरी हो गई. मैंने भाभी की टी-शर्ट को निकाल कर उसको ऊपर से पूरी नंगी कर दिया.

उसके चूचों को मुंह में लेकर पीने लगा. उसके बाद मैंने भाभी की लोअर को भी निकाल दिया. उसने नीचे से पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. भाभी की चूत गीली हो चुकी थी. मैंने भाभी की चूत में उंगली डाल दी. अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा और अब भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.

काफी देर तक मैं सुलु भाभी की चूत में उंगली करता रहा और उसकी चूत ने एकदम से पानी छोड़ दिया और मेरा पूरा हाथ भाभी की चूत के रस में भीग गया. उसके बाद मैंने अपने कपड़े निकाल कर एक तरफ डाल दिये और नंगा होकर भाभी के बूब्स को पीने लगा. मेरा लंड तन कर फटने वाला था. भाभी की गीली चूत मेरे लंड पर टच हो रही थी. मेरा लंड चूत से लगने के बाद कहीं अंदर घुसना चाह रहा था.

अगर मैं चाहता तो भाभी की चूत में उसी वक्त लंड को डाल देता लेकिन अभी मैं भाभी के जिस्म के और मजे लेना चाह रहा था. मैंने उठ कर भाभी को बैठने के लिए कहा. मेरे कहने पर भाभी बैठ गई. उसके बैठने के बाद मैंने देखा कि उसके चूचे एकदम से टाइट होकर नुकीले हो चुके थे.

भाभी के तने हुए चूचों को दबाते हुए मैंने उनको फिर से मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा. भाभी तेज सिसकारियां लेते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी. अब मेरा लंड बुरी तरह से तड़पने लगा. मैंने भाभी के मुंह के पास लंड को कर दिया और चूसने के लिए कहा. मगर भाभी ने मना कर दिया.

बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद सुलु भाभी ने मेरे लंड के टोपे को मुंह में लिया और चूसने लगी. इतना लम्बा लंड भाभी के मुंह में आधा ही आ रहा था. मैंने एक धक्का देकर भाभी के गले तक लंड को उतार दिया. भाभी की सांस रुकने लगी और वो मुझे पीछे धकेलने लगी.

भाभी की हालत देख कर मैंने वापस से लंड को आधा बाहर निकाल लिया और भाभी अब मजे लेकर मेरे लंड को चूसने लगी. दस मिनट तक मैं भाभी को लंड चुसवाने का मजा लेता रहा. फिर एकदम से मेरा कंट्रोल छूट गया और मैंने भाभी के मुंह को अपने माल से भर दिया.

उसके बाद मैंने उसको वापस लिटा दिया और उसकी चूत में जीभ देकर तेजी से अंदर बाहर करने लगा. भाभी तड़पने लगी. मेरी जीभ पूरी की पूरी भाभी की चूत में अंदर जाकर उसको मजा दे रही थी. भाभी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं और वो बार-बार अपनी टांगों को मेरी गर्दन पर लपेट रही थी.

फिर वो बोली- बस आदी … अब रहा नहीं जा रहा. मेरी चूत में अपना लम्बा और मोटा लंड घुसा दो.
अब तक मेरा लंड भी दोबारा से तनाव में आना शुरू हो गया था. मैंने फिर से भाभी के मुंह में लंड को दे दिया और 2 मिनट चुसवाने के बाद मेरा लंड पूरे जोश में आ गया.

अपना लन्ड भाभी की चूत पर सेट किया और धीरे से एक धक्का दिया तो मेरे लन्ड का सुपारा भाभी की चूत में चला गया जिससे भाभी को दर्द होने लगा.
भाभी बोली- आदी धीरे करो, तुम्हारे भाई का लन्ड छोटा और पतला है. तुम्हारा लंड मेरी चूत को फाड़ देगा और तुम्हारे भाई को भी पता लग जायेगा कि मैं किसी मोटे लंड से चूत चुदवा रही हूं.

एक बार तो मैं रुका लेकिन फिर मुझसे रहा न गया. मैंने एक झटका और दिया तो मेरा लन्ड भाभी की चूत में आधा चला गया और भाभी के मुंह से चीख निकल गयी. मैं भाभी की आवाज को अंदर दबाने के लिए उसके होंठों को चूसने लगा. कुछ पल रुकने के बाद मैंने फिर से धक्का मारा तो मेरा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ अंदर समा गया.

दर्द के कारण सुलु भाभी की आंखों से आंसू निकल आये. चूत में लंड को फंसा कर मैंने भाभी को चूमना शुरू कर दिया. जब भाभी नॉर्मल हो गई तो मैंने चूत में धक्के लगाना शुरू किया. कुछ ही देर के बाद भाभी का दर्द मजे में बदल गया. अब वो अपनी गांड को हिला-हिलाकर मेरे लंड से चुदने लगी. उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … आदी चोदो मुझे और जोर से चोदो।

इस तरह करीब 20 मिनट तक मैं भाभी की चोदाई करता रहा. इस बीच भाभी 2 बार झड़ गयी और मैंने भी अपना माल भाभी भी की चूत में ही गिरा दिया. मैं बुरी तरह थक गया था. मैं भाभी के ऊपर लेट कर ही सो गया. शाम को 6 बजे नींद खुली तो मैंने देखा कि मैं भाभी के बेड पर नंगा ही सोया हुआ था और भाभी भी कमरे में नहीं थी।

उठ कर मैंने कपड़े पहने और फ्रेश होकर हॉल में गया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर के बाद भाभी चाय लेकर आ गई. वो शर्म के मारे नजर भी नहीं मिला पा रही थी. उसके कुछ देर के बाद मम्मी और पापा भी आ गये. फिर अगले दिन भैया भी आ गये.

इस दौरान हम देवर-भाभी के बीच में कुछ नहीं हो पाया. फिर पंद्रह दिन के बाद भाभी अपने मायके चली गयी. उसके कई महीनों के बाद मुझे भाभी की चूत की चोदाई का मौका मिला. मेरे लंड से खुश होकर भाभी ने अपनी छोटी बहन की चूत भी मुझसे चुदवाई. वह कहानी मैं आपको अगली बार बताऊंगा.

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चूत चटायी का मजा

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रमेश है और मैं उत्तराखंड के नैनीताल जिले से हूं.

काफी दिन से मैं चाह रहा था कि अपने साथ घटी घटना को आप लोगों के साथ शेयर करूं. लेकिन टाइम नहीं मिल पाने के कारण मैं अपनी कहानी शेयर नहीं कर पा रहा था. तो आज टाइम निकाल कर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती सुनाने जा रहा हूं. यह मेरी पहली कहानी है अगर इसमें कोई त्रुटि हो तो मैं क्षमा चाहता हूं.

अब आप लोगों का ज्यादा समय नष्ट ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आता हूं।

बात आज से करीब 8 साल पहले की है मैं एक रिश्तेदार की शादी में गया था.

वहां मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई जो हाइट से थोड़ा छोटी और रंग एकदम साफ था। उसका नाम गरिमा (बदला हुआ नाम) है वह भी दूल्हे की तरफ से थी और हम साथ-साथ बाराती गए इसी बीच हमारी काफी बार आंख लड़ी और हम एक दूसरे में खो गए।

इस शादी में ज्यादा कुछ नहीं हो पाया और मैंने उसका नंबर ले लिया और हम फोन पर बातें करने लगे। पहले तो नॉर्मल बातें फिर धीरे-धीरे सेक्सी बातें भी करने लगे।

वो मुझे जी … जी … कहकर बात करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने को बेताब थे लेकिन किसी कारण बस मिल नहीं पा रहे थे.
कई बार मुझसे कहती कि मुझसे मिलने आ जाओ.
लेकिन वो हमारे गांव से बहुत दूर होने के कारण मैं उससे मिलने नहीं जा पा रहा था. क्योंकि मुझे उससे मिलने जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाना बनाकर घर से निकलना था।

आखिरकार वह दिन भी आ ही गया जब ऊपर वाले ने हमारा मिलन करवा दिया. मैं उसके गांव में एक जागरण में गया हुआ था. हमारी पहले ही बात हो गई थी यानि कि मैंने उसको बता दिया था कि मैं आ रहा हूं.
तो बहुत खुशी से उसने कहा- तब तो आप से मुलाकात होगी।

उस दिन मैं करीब 12:00 बजे घर से निकला और वहां के लिए रवाना हुआ. क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण वहां जाने के लिए गाड़ी का कोई साधन नहीं था तो मैं पैदल ही निकल पड़ा.

मैं देर शाम वहां पहुंचा. वहां मेरे एक रिश्तेदार भी रहते थे जिनके यहां रुक कर मैंने खाना खाया और मैं जागरण में चला गया।

वहां जाकर मैं अपनी नजरों से उसे ढूंढने लगा. तो वह भी जैसे मुझे ही ढूंढ रही थी. हमारी नजरें जैसे ही मिली तो एक ऐसा झटका लगा कि क्या बताऊं!
हमारी नजरों ही नजरों में बातें हुई और मैं जाकर उसी के पास बैठ गया।

थोड़ी देर में वहां जाकर चुपचाप बैठा रहा क्योंकि मैं किसी दूसरे गांव में आया हुआ था तो थोड़ा डर भी लगता है. आप लोग समझ सकते हैं.

थोड़ी देर बाद उसने बातचीत शुरू की. वह भी धीरे-धीरे बोल रही थी कि ठीक-ठाक पहुंच गए वगैरह वगैरह!
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.

थोड़ी देर पश्चात वह मेरे और नजदीक आई और मेरी जांघों में हाथ फेरने लगी. मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था और मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. मुझे अजीब महसूस हो रहा था.

देखते ही देखते उसने सबके सामने ही मेरी जेब में हाथ डाला और मेरा पर्स निकाल कर उसमें से उसमें पड़े फोटो वगैरह देखने लगी और उसने चुन्नी से उसको ढक रखा था लेकिन वो टॉर्च दिखाकर उसे देख रही थी तो सब कुछ दिख रहा था बाकी सारे लोगों का ध्यान उसी पर था तो मुझे तो काफी डर लग रहा था कि लोग क्या समझेंगे। वहां पर कई सारे लोग मुझे भी जानते थे.

और कई मेरे दोस्त भी थे जो बार-बार इशारों में मुझे कह रहे थे कि सब देख रहे हैं थोड़ा ध्यान से।

यह सब होने के बाद मेरी तो डर के मारे हालत ही खराब होने लगी. उसके बाद जागरण खत्म हुआ. और वह मेरा पर्स भी नहीं दे पाई क्योंकि सारे लोग उसकी एक्टिविटी को देख रहे थे और शक कर रहे थे.
तो मुझे दिक्कत हो रही थी. सुबह मुझे कुछ सामान भी ले जाना था तो मेरे सारे पैसे पर्स में ही थे।

अब जागरण खत्म हो गया था तो सारे लोग अपने घरों को जा रहे थे. मैं भी अपने दोस्तों के साथ अपने रिश्तेदारों के घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में उसका फोन आया- बाबू, तुम क्या करोगे? तुम्हारा पर्स तो मेरे पास ही है।

मैंने कहा- चलो कोई बात नहीं, तुम बाद में स्कूल जाते समय दे देना मुझे.
तब वो 12वीं में पढ़ती थी।

उसने कहा- नहीं, एक काम करो. तुम इधर को आओ और अपना पर्स ले जाओ.
उसका रास्ता और हमारा रास्ता बहुत अलग था।

लेकिन वह अकेली थी तो उसने कहा- तुम आओ और अपना पर्स ले जाओ.
तो मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं वह स्कूल तो जाएगी ही मैं बाद में ही ले लूंगा.

लेकिन मेरे दोस्तों ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता. तुम जाकर अपना पर्स ले आओ. और हो सकता है कुछ काम बन जाए तुम्हारा!

दोस्तों के कहने पर मैंने उसे फिर फोन किया और उससे कहा- तुम आ रही हो तो आओ, मैं आता हूं और पर्स दे जाओ।
अब मेरे दोस्तों के उकसाने पर मेरे अंदर का शैतान जाग रहा था. यानि कि मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था. और मैं चला गया. मेरे दोस्त वहीं के थे. तो मैंने उनसे रास्ता पूछा और निकल गया.

मेरे दोस्तों ने कहा- हम तुम्हारा इंतजार करेंगे, जल्दी आना.
मैंने कहा- ठीक है।

दूर से ही रास्ते में मुझे वो अपने घर की तरफ से वापस आती हुई दिखाई दे रही थी क्योंकि पहाड़ों में रास्ते दूर से ही दिखाई देते हैं। अगर कोई पहाड़ों में रहा है तो वो जान सकता है इस बात को।

मैं भी फटाफट नीचे उतर गया क्योंकि मुझे नीचे उतरना था और वो ऊपर को आ रही थी. तो हमारी मुलाकात एक नाले में हुई.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- ये लो आपका पर्स!
मैंने अपना पर्स लिया और उससे बोला- थोड़ी देर बैठकर बात करते हैं.
तो वह बोली- यह तो आम रास्ता है, यहां पर कोई भी आ सकता है. यहां पर कैसे बैठ सकते हैं, कोई गलत समझेगा।

मैंने कहा- कोई बात नहीं, यहां झाड़ियों में कहीं बैठ कर आराम से बात करते हैं.
तो उसने कहा- ठीक है.

और हम दोनों झाड़ियों के अंदर घुस गए. अब मेरी धड़कनें बहुत तेज तेज चल रही थी.

मैंने उसको अपने पास बिठाकर अपनी बांहों में पकड़ लिया। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने लगा. उसकी चूचियां बहुत टाइट थी अंदर से! पता नहीं मुझे ऐसा पहली बार फील हो रहा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूचियों को दबा रहा था.

उसकी चूचियों में अंदर से गांठ थी मैंने उससे पूछा- तुम्हारी चूचियों में गांठ क्यों है?
उसने कहा- ऐसी ही होती है।

मुझे उसकी चूचियां दबाने में मजा आ रहा था साथ-साथ वह भी मजे ले रही थी.

मैंने कहा- दबाने में दर्द तो नहीं हो रहा है?
उसने कहा- नहीं अच्छा लग रहा है.
तो मैं बहुत अच्छी तरह से अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी कमीज को ऊपर किया और अंदर हाथ डालकर उसकी चूचियों को बाहर निकाला और पीने लगा. बहुत मजा आ रहा था … मैं बता नहीं सकता. मैंने पहली बार किसी लड़की की चूचियों को चूसा था.

और मैंने उसकी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया. फिर धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके सलवार की तरफ पर पढ़ाया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे.

धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने अंदर हाथ डालकर उसकी चूत को महसूस किया।
मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत पर हाथ लगाया था तो मुझे बहुत अजीब फील हो रहा था और अंदर से मेरा लन्ड खड़ा हो रहा था।

अब वह भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मैं अपना हाथ पकड़ कर मेरे लन्ड पर ले जाने लगी. मुझे बहुत ज्यादा अच्छा फील हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूं।

मैं उसकी सलवार को पूरा उतार कर उसकी चूत को देखने लगा. वो मेरे सामने नंगी पड़ी थी.

उसकी चूत पर बहुत सारे बाल थे जैसे कि मैं आप लोगों को बता चुका हूं और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर मुंह लगाकर उसको चूसने लगा.

चूत चटायी का मजा तो जैसे उसे पागल कर रहा था।

दोस्तो, आप सोचोगे कि मैं पहली बार किसी लड़की के साथ चुदाई कर रहा हूं. तो मैंने यह कहां से सीखा? तो आजकल तो आप जानते हैं कि पोर्न मूवी में सब कुछ देखने को मिल जाता है।

तभी मुझे ध्यान आया अब तो बहुत टाइम हो गया मेरे दोस्त भी मेरा इंतजार कर रहे हैं. कहीं मेरा काम अधूरा न रह जाए. वैसे भी उजाला भी बहुत हो गया था.
और मैंने देखा कि ऊपर से काफी सारे लोग रास्ते से जा भी रहे थे. वो तो हम झाड़ियों में थे तो हमें कोई देख नहीं सकता था. सिर्फ मेरे दोस्तों को पता था कि मैं यहां पर हूं।

अब मैंने देर न करते हुए सीधा अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में रगड़ने लगा उसकी चूत पूरी तरह से गीली हुई थी मैंने जैसे ही हल्का अंदर को डालने की कोशिश की तो वह एकदम से चीख पड़ी.

मेरा लिंग 7″ के लगभग है तो उसे काफी दर्द हो रहा था। वो भी पहली बार किसी का लन्ड ले रही थी.

मैंने सोचा ‘यार पता नहीं, बहुत दर्द हो रहा है. मैं पहली बार किसी लड़की की चूत में अपने लन्ड डालने जा रहा था तो मैंने सोचा आराम से करें, कहीं भागी थोड़ी जा रही है.’
फिर उसने कहा- कोई बात नहीं, आप आराम से करो.

तो मैंने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया. वह एकदम दर्द से चीख पड़ी. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा कर उसकी आवाज को रोक लिया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और मैंने देखा तो उसकी चूत से भी खून निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम होने लगा तो मैं धीरे-धीरे हल्के हल्के झटके लगाने लगा. और थोड़ी देर बाद तो पूरा का पूरा अंदर लेने लगी। अब उसके मुंह से आह जैसी आवाजें निकल रही थी।

हम खुले में थे क्योंकि ऊपर रास्ता भी था तो मैंने उसके मुंह पर मुंह लगाकर उसकी आवाज को रोक लिया और आराम से धक्के लगाने लगा.

मैं उसकी चूत को चोदता रहा और साथ में उसका होंठों को चूसता रहा और उसकी चूचियों को भी दबा रहा था. मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं.

लगभग 5 मिनट की चुदाई के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लगभग दो मिनट बाद मेरा भी पानी निकल गया. मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

हम वैसे ही पड़े रहे. मैंने फोन उठाकर टाइम देखा तो 7:30 बज रहे थे. मेरे दोस्तो की बहुत कॉल आई हुई थी. मैं रिसीव नहीं कर पाया क्योंकि मेरा फोन वाईबरेशन में था.

तो मेरे दोस्तों ने सोचा कि पता नहीं कहां चला गया। और उन्होंने ऊपर से पत्थर फेंकने शुरू किए.
जैसे ही पत्थर पड़े, मेरी तो गांड फट गई.
मैंने कहा- पता नहीं किसी ने देख लिया शायद हमें! और हम पकड़े गए.

चुपके से मैंने अपने दोस्तों को फोन लगाया और मैंने कहा कि यहां कोई पत्थर फेंक रहा है.
तो उन्होंने कहा- हम ही पत्थर फेंक रहे हैं. यार तेरे को कितनी बार कॉल कर लिया, तू कॉल तो उठाता नहीं है. तो क्या करते?
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूं, वेट करो।

उसने अपनी चूत को घास से साफ किया और हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने और वहां से निकल गए.

वो ढंग से चल भी नहीं पा रही थी, उसकी सील जो टूटी थी.

उसके बाद हम अपने अपने रास्ते चले गए.

बाद में उसने बताया कि उसकी चूत से बहुत खून निकल रहा था. वो घर जाते ही नहायी और फ्रेश होकर स्कूल गई.

अब उसकी शादी हो गई है. एक बेटा भी है और दूसरा बच्चा होने वाला है।

ये बात उसने सबसे पहले मुझे ही बताई थी. वो आज भी मुझे बहुत मिस करती है और मुझे मिलने को बुलाती है।

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मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका कौर है. मैं 20 साल की जवान लड़की हूं. आज मैं आप लोगों के सामने सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं। यह मेरी पहली कहानी है तो कृपया करके मेरी गलतियों को माफ करें।

कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देती हूं. मैं एक सेक्सी जिस्म की मालकिन हूं. मेरा रंग गोरा है और मेरे बूब्स का साइज 32बी है. मेरी कमर 26 की है और मेरी गांड 34 की है.
अपने जिस्म की इस सेक्सी फिगर को मेंटेन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैंने योगा ट्रेनर रखने की सोची.

मैं कई बार नोटिस किया करती थी कि मेरे मौहल्ले के लड़के और मर्द मेरी ओर हवस भरी निगाहों से देखा करते थे. मुझे ये देख कर खुशी होती थी कि मैं इतनी सेक्सी हूं कि लोगों के मुंह से लार टपकवा सकती हूं. मगर मैं चेहरे पर ये सब जाहिर नहीं होने देती थी.

मेरी सेक्सी गांड को देखकर जवान तो क्या, बूढों का लंड भी सलामी देने लगता था. सभी लोग मुझे भोगने के लिए प्यासे दिखते थे. मगर मुझे सबको तड़पाने में बहुत मजा आता था. इसलिए मैं अपने फिगर की ओर बहुत ध्यान देती थी.

मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे माता-पिता और एक छोटी बहन भी है. पिताजी काम के कारण ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. मेरी मां की तबियत ज्यादा ठीक नहीं रहती है इसलिए घर का काम हम दोनों बहनें ही करती हैं. मेरी छोटी बहन स्कूल चली जाती है. उसके बाद घर को मैं ही संभालती हूं.

कुछ दिन पहले ही मैंने योगा सीखने का सोचा. मैंने एक योगा ट्रेनर ढूंढा जो मुझे बहुत ही मुश्किल से मिला. वो मेरे घर आया और हमने बैठ कर सब कुछ तय कर लिया. उसने अपना नाम रवि बताया. मैंने उसे सुबह 7 बजे आने के लिए कह दिया.

वो बात करके चला गया. मैं खुश हो गयी कि कल से मेरी योगा क्लास शुरू होने जा रही है. रात को मैं काफी उत्साहित थी. अगली सुबह जब उठी तो छोटी बहन तैयार होकर स्कूल चली गयी. मैं फ्रेश होकर तैयार हो गयी.

7 बजे योगा ट्रेनर आ गया. मैंने दरवाजा खोला तो उसकी नजर मेरी नाइटी पर गयी. मैंने जालीदार नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से मेरी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ झलक रही थी.

योगा ट्रेनर की नजर मेरे आधे बाहर झांक रहे बूब्स पर जम गयी थी. मैं अपनी नाईटी को ठीक करते हुए खांसी तो उसका ध्यान हटा. फिर मैंने उसे अपने पीछे आने के लिए कहा. मैं आगे की ओर मुड़ी तो उसका ध्यान मेरी गांड पर गया.

उसके मुंह से हल्की सी आवाज आयी- हाय … क्या माल है!
मैं बोली- जी? आपने कुछ कहा क्या?
वो बोली- नहीं मैडम, मैंने तो कुछ नहीं कहा.
फिर मैं आगे चलने लगी. हम लोग हॉल में आ गये.

मैंने उसको हॉल में सोफे पर बैठ कर इंतजार करने के लिए कहा. वो मेरे जिस्म को ऊपर से नीचे तक देख रहा था. वो देखने में अच्छा था लेकिन बहुत ही ठरकी किस्म का इन्सान लग रहा था.

मैं बोली- मैं एक बार जरा अपनी योगा पैंट्स पहन कर आती हूं. आप थोड़ा वेट करो.
वो बोला- योगा पैंट्स की कोई जरूरत नहीं है. आप इस तरह के कपड़ों में भी कर सकती हैं. बल्कि खुले कपड़ों में तो और ज्यादा अच्छा रहता है योगा करना.

उसकी बात मैंने सोच कर कहा- अच्छा ठीक है. तो फिर शुरू करते हैं.
वो बोला- जी. ठीक है.
कहकर उसने मैट नीचे वहीं फर्श पर बिछा दिया. वो मुझे पहले कुछ वार्म-अप एक्सरसाइज करवाने लगा.

जैसे जैसे वो कहता गया वैसे वैसे मैं करती गयी. वो भी मेरे साथ साथ कर रहा था. काफी देर तक एक्सरसाइज करने के बाद मेरी चूचियां मेरी ब्रा से बाहर आने को हो गयी थीं. उसकी नजर मेरी चूचियों को ही घूर रही थी.

उसके बदन में पसीना आ गया था. उसने अपना टीशर्ट उतार दिया.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं?
वो बोला- मैडम कपड़े खराब हो जायेंगे, अभी तो पूरी प्रैक्टिस बची हुई है.
मैंने फिर कुछ नहीं कहा.

हम दोनों फिर एक्सरसाइज करने लगे. मैट पर कूदते हुए मेरे बूब्स भी ऊपर नीचे उछल रहे थे. अपने उछलते बूब्स को फील करके मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी. सामने रवि का कसरती बदन देख कर मुझे सेक्स की फीलिंग भी आ रही थी.

कुछ देर के बाद उसने अपनी लोअर भी निकाल दी. वह केवल शॉर्ट्स में ही एक्सरसाइज करने लगा. मैं उसको देख रही थी.
फिर वो बोला- अब काफी वार्म अप हो गया है. अब योगा प्रैक्टिस करते हैं.

उसके बाद उसने मुझे कई सारे आसन करवाये. आखिर में फिर सेतुबन्धासन (ब्रिज पोज़) की प्रैक्टिस करवाने लगा. इस पोज में कमर को उठाते हुए पेट को ऊपर करते हुए शरीर को पुल के आकार में करना होता है.

इस पोजीशन में आने के बाद मेरी चूत ऊपर उठ गयी. रवि मेरी टांगों के बीच में आकर मुझे कमर से सपोर्ट दे रहा था. इस पोजीशन में उसका लंड उसके शॉर्ट्स में से मुझे मेरी पैंटी पर छूता हुआ महसूस हो रहा था. मैं फील कर पा रही थी कि उसका लंड टाइट हो रहा था.

उसके हाथ मेरी कमर पर थे और धीरे धीरे मेरे बूब्स के नीचे आ गये थे. उसके हाथों के अंगूठे मेरे बूब्स को दबा रहे थे. उसका लंड और ज्यादा कड़ा होकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा था. वो मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

जब मुझे लगा कि बात बहुत आगे जा रही है तो मैंने बोला- बस… आज के लिये यह काफी है. बाकी कल करेंगे.
वो बोला- ठीक है, प्रियंका. मैं कल आपको ज्यादा देर तक प्रैक्टिस करवाऊंगा.

उसके बाद वो चला गया.

अगले दिन फिर वो अपने टाइम पर आ गया. छोटी बहन स्कूल चली गयी थी. मां हॉल में लेटी हुई थी. उनकी कमर में बहुत दर्द था. उनको डिस्टर्ब ना हो इसलिए हम वहां पर योगा प्रैक्टिस नहीं कर सकते थे.

मैंने कहा- आज तो यहां पर जगह नहीं है.
वो तपाक से बोला- कोई बात नहीं, अंदर किसी रूम में कर लेते हैं अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो.
मैंने कहा- ठीक है. अंदर रूम में आ जाओ.

हम दोनों रूम में चले गये. मैं अपनी योगा ड्रेस निकालने लगी.
वो बोला- अगर आपको जल्दी से अच्छे रिजल्ट्स चाहिएं तो आपको कम से कम कपड़ों में योगा करना चाहिए. आप चाहें तो ब्रा और पैंटी में ही कीजिये.

मैं बोली- लेकिन आपके सामने?
वो बोला- मेरी बाकी सभी क्लाइंट्स भी करती हैं. वो लोग तो बहुत ओपन माइंडेड हैं. अगर आपको ठीक नहीं लग रहा तो कोई बात नहीं.
मैंने सोचा कि अगर मैंने मना किया तो ये मुझे गंवार समझेगा. इसलिए मैंने उसको हां बोल दिया. मुझे नहीं पता था कि मेरे जैसी सेक्सी लड़की की चुदाई की तैयारी कर रहा है मेरा ट्रेनर.

अपनी नाइटी मैं उसके सामने ही उतारने लगी. उसकी नजरों से हवस टपक रही थी. उसके सामने मैं ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने उस दिन ब्लैक ब्रा और ब्लैक ही पैंटी पहनी थी. उसके बॉर्डर पर जाली लगी हुई थी जिससे मेरी चूत और चूचियों को बहुत ही सेक्सी लुक मिल रहा था.

मैंने देखा कि मुझे इस रूप में देख कर रवि का लंड उसकी लोअर में ही अलग से दिखने लगा था. फिर हम दोनों वार्म अप करने लगे. कुछ देर वार्म करने के बाद वो पसीना पसीना हो गया और उसने अपनी बनियान और लोअर को निकाल दिया.

आज उसने एक वी-शेप का अंडरवियर पहना हुआ था. उसका लंड उसमें अलग से ही उठा हुआ दिख रहा था. उसके लंड को देख कर लग रहा था कि वो कम से कम 8 इंच लम्बा तो होगा ही. उसके लंड को इस तरह से देखकर मेरी चूत में भी कुछ कुछ होने लगा. मगर मैंने कुछ जाहिर नहीं होने दिया.

वो बोला- आज मैं आपको भुजंगासन (कोबरा पोज) करवाऊंगा. इसके लिए आपको बेड पर चलना होगा. यहां जमीन पर ठीक से नहीं होगा.
मैं उसकी बात मान गयी और उसने मुझे बेड पर पेट के बल लेटने के लिए कहा.

फिर वो मेरे पास पीछे आकर बैठ गया. उसने मुझे आगे से छाती उठाने के लिए कहा. मैं उठाने लगी लेकिन मेरे पैर भी पीछे से उठ रहे थे.
वो बोला- मैं आपके पैरो पर बैठ जाता हूं जिससे केवल छाती ही उठेगी.

वो मेरी गांड के ठीक बीच में मेरी जांघों पर बैठ गया. उसके अंडरवियर में से उसका लंड मेरी गांड पर टच होने लगा. उसने मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा.

मैं उठाने लगी तो नहीं उठा पाई. उसने मेरे कंधों को पकड़ लिया और मेरी मदद करने लगा. अब उसका लंड मेरी गांड की दरार में पहले से ज्यादा अंदर घुसता सा लगने लगा. मुझे मजा आने लगा. मेरी नर्म नर्म गोल गांड में लंड लगाने में उसको भी मजा आ रहा था.

वो बोला- ऊपर देखो.
मैं ऊपर देखने लगी. उसका लंड मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटाने की कोशिश कर रहा था. फिर उसने मुझे वापस नीचे आने को कहा. मैं सिर नीचे रख कर आराम से लेट गयी. कमर दर्द करने लगी.

मैं बोली- मेरी कमर में दर्द हो रहा है.
वो बोला- मैं मसाज कर देता हूं. वो मेरी कमर को मसाज देने लगा. उसके हाथ मेरी गांड को भी दबाने लगे. वो मेरे गोरे गोरे चूतड़ों से मेरी पैंटी की स्ट्रिप को हटा कर अपनी उंगलियों से मेरी गांड को सहलाने की कोशिश कर रहा था.

मुझे भी अच्छा लग रहा था. बीच बीच में वो मेरी जांघों के अंदर मेरी चूत के पास अपने लंड को भी टच कर रहा था. मेरी चूत में गीलापन आने लगा था.
मैं थोड़ा कसमसाने लगी थी.

उसको शायद पता लग गया था कि मैं गर्म हो रही हूं.
उसके बाद वो बोला- मैडम, इतना आराम नहीं करना है. शरीर ठंडा पड़ा जायेगा. चलिए, फिर से प्रैक्टिस करते हैं.

उसने फिर से मुझे आगे से धड़ उठाने के लिए कहा. इस बार जब उसकी जांघें मेरी जांघों के बीच में मेरी गांड के पास टच हुई तो मैंने पाया कि उसका लंड नंगा होकर मेरी गांड को छू रह था. पता नहीं कब उसने अपना अंडरवियर निकाल दिया था.

वो अपने लंड को मेरी पैंटी में घुसाने लगा. मैं कुछ नहीं बोली. हिम्मत पाकर उसने मेरी पैंटी खींच दी और मेरी चूत पर लंड को रगड़ने लगा. मेरी आंखें बंद होने लगीं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मेरे योगा ट्रेनर का गर्म गर्म लंड मेरी चूत को छू रहा था.

इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाती उसने मेरी चूत में एक जोर का धक्का लगा दिया. उसका 8 इंच का लंड मेरी चूत में जा घुसा और मेरी आंखों के सामने अंधेरा हो गया. मेरी कुंवारी चूत में जान निकाल देने वाला दर्द हुआ.

मैं बेसुध सी हो गयी. इसी का फायदा उठा कर उसने मेरी ब्रा भी खोल दी और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया. अब मैं ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी पड़ी हुई थी.

फिर वो मेरी चूचियों को आह्ह … आह्ह करते हुए दबाने लगा. मैं आधे होश में थी. जब पूरे होश में आयी तो उसके हाथ मेरी दोनों चूचियों को जोर जोर से भींच रहे थे. उसका लंड मेरी चूत में और अंदर घुसता जा रहा था.

धीरे धीरे करके उसने मेरी चूत में पूरा लंड घुसा दिया और मुझे चोदने लगा. मैं उठने लगी तो उसने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा मुंह को बेड में दबा लिया और मेरी चूत को पेलने लगा. फिर उसने मेरी गांड को ऊपर खींचा और नीचे एक तकिया दे दिया.

मैं बोली- रुको, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
वो बोला- नहीं रुक सकता मेरी जान … दर्द से ज्यादा अब तुम्हें मजा देने की बारी है. एक बार लंड का स्वाद चख लिया तो रोज ही मेरे लंड से खुद ही चुदने लगोगी.

तकिया रख देने से मेरी चूत उठ कर एकदम सही पोजीशन में आ गयी. उसने मेरे बालों से मुझे पकड़ लिया जैसे घोड़ी की लगाम पकड़ते हैं. रवि ने फिर से धक्का मारा और मेरी चूत में लंड फंसा कर उसको आगे पीछे करने लगा. मेरी चूत ने अब लंड को एडजस्ट कर लिया था और मैं चुदने का मजा लूटने लगी.

मेरे मुंह से कामुक सीत्कार आने लगा- आह्ह… ओहह … फक मी रवि … यस … आह्ह लव यू … फक मी हार्ड … आह्ह और जोर से. कमॉन .. आ्हह … करके मैं उसके लंड को चूत में लेती रही और वो मुझे चोदता रहा.

उसके धक्के इतने ताकतवर थे कि मेरी बच्चेदानी तक उसका लंड टक्कर मार रहा था. मेरी आंखें बंद होने लगी थीं. उसने सच ही कहा था. अब तो मेरा मन करने लगा था कि वो मुझे ऐसे ही चोदता रहे. मैं आंखें बंद करके उसके लंड का मजा लेने लगी.

वो मुझे घपाघप चोदता रहा. उसके मुंह से भी मस्त कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … ओह्ह … हाय सेक्सी … आह्ह … ऐसी टाइट कुंवारी चूत बहुत दिनों के बाद नसीब हुई है. तुझे तो मैं अपनी रानी बना लूंगा मेरी जान … आह … ले मेरे लंड को, पूरा ले ले. आह्ह.. तुझे चूत की रानी न बना दिया तो मेरा नाम नहीं.

उसकी चुदाई इतनी मजेदार थी कि कुछ ही देर में मेरा पूरा जिस्म अकड़ने लगा. मैं उसके लंड पर ही झड़ने लगी. मेरी चूत से निकले रस ने उसके लंड को भिगो दिया और अब पच-पच की जोरदार आवाज होने लगी.

रवि का लंड अब चिकना होकर और ज्यादा अंदर तक मेरी चूत को फाड़ने लगा. वो मेरी चूत की गर्मी को अब ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और फिर मेरी चूत में ही झड़ने लगा. उसका गर्म गर्म वीर्य मुझे मेरी बच्चेदानी तक महसूस हुआ.

रवि थक कर मेरे ऊपर ही गया. मेरी हालत भी खराब हो गयी थी. हम दोनों हांफ रहे थे. फिर धीरे धीरे उसका लंड सिकुड़ने लगा और मेरी चूत से बाहर आने लगा. मैंने उठ कर देखा तो उसके लंड पर खूब सारा वीर्य और काफी सारा खून लगा हुआ था.

मैं खून देख कर डर गयी.
वो बोला- घबराओ नहीं, तुमने पहली बार सेक्स किया है. तुम्हारी चूत का ताला मैंने खोल दिया है. अब तुम आराम से सेक्स का मजा ले सकती हो. पहली बार में सभी लड़कियों का खून निकलता है जिनकी सील नहीं टूटी होती है.

उसके बाद वो मुझे चूमने लगा. मुझे प्यार करने लगा. फिर उसने मुझे साफ किया और वहीं बेड पर मेरे साथ लेट गया.
मैं बोली- अब तुम्हें जाना चाहिए. योगा टाइम खत्म हो गया है. अगर मां उठ कर आ गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी.

वो बोला- ठीक है डार्लिंग, अब मैं जा रहा हूं. मगर कल से मैं सेक्सी लड़की की चुदाई घर के हर एक कोने में करूंगा. तुमको चोद चोद कर अपनी रानी बना लूंगा.

उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गया. मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

इस तरह मेरे योगा ट्रेनर ने मुझे चुदाई की ट्रेनिंग भी बखूबी दी. उसने मुझे चोद चोद कर मेरी चूत को अपने लंड की रानी बना लिया. मुझे पहले ही सेक्स में इतना दमदार लंड मिल गया.

मैं अपने योगा ट्रेनर से अब रोज ही अपनी चूत चुदवाती हूं. मुझे बहुत मजा आता है. उसके लंड से चुद चुद कर मेरी गांड और ज्यादा मोटी और रसीली हो गयी है. मेरी चूचियों का साइज भी बढ़ गया है. मैं पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी हूं और बहुत खुश हूं.

दोस्तो, ये थी मेरी अपनी रियल सेक्स स्टोरी. आपको यह सेक्सी लड़की की चुदाई स्टोरी पढ़ने में मजा आया होगा. मुझे जरूर बतायें. अगर आप लोगों ने सही रेस्पोन्स दिया तो मैं आगे भी आप लोगों के लिए अपनी आपबीती लेकर आती रहूंगी.

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फोन सेक्स

मेरा नाम पल्लवी है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं परियो की तरह बहुत ही खूबसूरत हूँ। मेरा कद भी लंबा है। मैं 5 फीट 8 इंच की हूँ जो की लड़कियों की के लिए काफी है। मैं जब चलती हूँ तो मेरे बड़े बड़े मम्मे बहुत ही तेजी से उछल उछल कर लड़कों का लंड खड़ा कराये रहते है। मैं भी एक लड़की हूँ। मेरा भी  मन चुदने को बहुत करता था। लेकिन मैं अपने आस पास के लड़को से नहीं चुदवाती। चोदने के बाद वही रंडी और पता नहीं क्या शुभ शुभ नाम रखने लगते है। मेरी  गांड भी बहुत जबरदस्त गोल मटोल दिखती है। चूंचियो की तरह वो भी बहुत ही सॉफ्ट है। मेरी चूत की तो बात ही अलग है। वो भी फूली हुई गद्दे की तरह है। ढेर सारा माल उसमें उसमे भरा हैं।  दोस्तों मै अब अपनी कहानी पर आती हूँ।

बात एक साल पहले की है। मैं अपनी कहानी आप लोगो की खिदमद में पेश करने को परेशान थी। ये मेरे साथ घटित सच्ची घटना है। जो की एक सफर के दौरान घटित हुई। मै उस समय तैयारी करने कानपुर जा रही थी। छुट्टियां थी तो मैं अपने घर देवरिया आयी हुई थीं। मै ट्रेन में सिंगल शीट पर बैठी हुई थी।खिड़कियों से आती हवाओ का मजा ले रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। चुदने का भी मन उन हवाओ ने बना डाला। इतने सुहाने मौसम में अब मुझे अपने चूत के राजकुमार का इंतजार होंने लगा। मै चुदने को तड़पने लगी। मेरी चूत के कीड़े जाग गये। वो काट काट कर खुजली करने लगे। मै कहने लगी- “हे भगवान मेरे लिए भी किसी लंड का इंतजाम कर दो” भगवान ने मेरी सुन भी ली।

यही सब मै सोच कर मन ही मन कह ही रही थी कि अगला स्टेशन आ गया। मै स्टेशन की तरफ देख रही थी। मुझे एक लगभग 25 साल का लड़का मेरे ही डिब्बे की तरफ बढ़ता दिखाई दिया। उसका लंबा शरीर और गठीला बदन बहुत ही आकर्षक लग रहा था। मैं पहली बार सुंदरता के साथ किसी लड़के को इस तरह देख रही थी। मैने उसके लिए तो अपनी जान रख दी। वो अंदर की तरफ शीट को ढूंढता हुआ आ रहा था। मेरे सामने वाली शीट खाली थी। उसकी पर आकर वो बैठ गया। मै अपने कान में एअरफोंन लगाए गाने का मजा ले रही थी। वो भी अपनी गांड को शीट पर टिकाकर बैठ गया। मेरी तो उस लड़के से नजर ही नहीं हट रही थी। उसने भी अपना सामान रख कर फुरसत पाई तो उसकी नजर मुझ पर पड़ ही गई। हम दोनो नैंन मटक्का करने लगे। मै भी कोई कम स्मार्ट थोड़ी थी। कुछ देर बाद हमने बोलना शुरू किया।

मै- “हाय आई ऍम पल्लवी”

वो- “निशांत…. निशांत मिश्रा”

मुझे उसके इस तरह से बोलने की स्टाइल बहुत अच्छी लगी।

मै- “आप को भी कानपुर जाना है क्या”

निशांत- “हॉ। मुझे भी वही अपनी बुआ के यहाँ जाना है। कुछ दोस्त सरकारी नौकरी की भी करते है, तो उनसे मिलने भी जाना है”

मै- “आप क्या करते हो???”

निशांत- “मैं भी मेडिकल की तैयारी कर रहा हूँ लेकिन खुद ही। कही कोचिंग के लिए नहीं गया”

धीरे धीरे उससे बात करते करते मैंने उसके लंड की तरफ अपनी नजर नीचे करके देखी। उसका लंड खड़ा हो चुका था। उसने देखते ही अपना बैग लंड पर पेंट के उपर रख लिया। मैंने उसका प्रेसर बढ़ाने के लिए अपना दुपट्टा अपने सीने से हटा दिया। मै झुक कर उससे बात करने लगी। मेरी लटकती चूंचिया  मेरे वी शेप गले में साफ़ साफ़ दिखने लगी। उसका लंड तो देखते ही मीनार बन गया । निशांत थोड़ा रोमांटिक होकर बात करने के मूड में आने लगा। अपना बैगअपनी शीट पर रख कर हम दोनो दरवाजे के पावदान पर जाकर बैठ गए। आप लोगो को तो पता ही होगा। पावदान पर कितनी जगह होती है। हम दोनों चिपक कर बैठे हुए थे। ट्रेन सरपट सरपट पटरियों पर दौड़ रही थी। उसके शरीर के स्पर्श से ही मुझे बहुत मजा आ रहा था। आज जिंदगी में पहली बार किसी लड़के के इतनी पास चिपक कर बैठी थी। आज मुझे ईश्वर ने लंड के साथ उसका ड्राइवर भी दे दिया।

निशांत- “कानपुर में अकेली ही रहती हो”

मैं- “हाँ”

निशांत शक भरी नजरों से- “फिर तो तुम्हारा बॉयफ्रेंड होगा”

मै- “नहीं मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। मैंने आज तक किसी लड़के से बात तक नही की है”

निशांत- “ये तो सभी कहती है”

मै- “तुमको मै ऐसी वैसी लड़की दिखती हूँ” इतना कहकर मै गुस्से से उठकर चलने लगी। निशांत ने मुझे पकड़ कर बैठा लिया। उसके बाद मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख कर एक हाथ मेरा पकड़ कर। मुझे अपने दिल का हाल बताने लगा। कहने लगा- “लडकियां तो बहुत देखी। लेकिन तुम्हे देखकर दिल में हलचल होने लगी। अभी तक मुझे लड़कियां प्रपोज़ करती थी। लेकिन आज पहली बार मैं किसी लड़की को प्रपोज़ करने जा रहा हूँ” मै मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। आज मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी बनने वाला था। मैं ख़ुशी से झूम उठी।  उसने फ़िल्मी स्टाइल में मेरे हाथों को पकड़ कर कहने लगा- “पल्लवी मै तुम्हेदेखते ही बहुत चाहनें लगा हूँ। मै तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ। क्या तुम मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाओगी???”

मै- “सच तो ये भी हैं कि मैं भी कुछ इसी तरह का ख्याल अपने दिल में रखे हूँ। जो आग तुम्हारे दिल में लगी है। वो मेरे दिल में भी है” उसने समझ लिया की मैने उसे अपना बॉयफ्रेंड बना लिया है। लेकिन अब कौन बताये की आग कहाँ कहाँ लगी हुई है। उसने मुझे गाल पर किस किया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने भी तुरंत जबाब दे डाला। मैंने भी किस करके पूरा कर दिया। उसने कहा-” मै तुम्हे मिलना चाहता हूं”  मैनें अपना पता उसे बता दिया मै कहाँ रहती हूँ। वो भी मुझे अपना फ़ोन नम्बर वगैरह बताने लगा। उसने पूछा- “मै तुम्हारे रूम पर आऊं तो कोई कुछ बोलेगा तो नहीं”

मै- “बता दूँगी की भैया है” इतना कहकर मै हँसने लगी…

वो मुझे चिपका कर होंठ पर किस करने लगा। मै भी उसका साथ दे रही थी। कुछ ही पल में पीछे कोई आ गया। दोनों लोग एक दुसरे को देखकर हसते हुए अलग हुए। बाद में मौक़ा मिलते ही वो एक मिनट कभी दो मिनट किस करते करते पूरा रास्ता कट गया। चलते चलते निशांत ने मेरे मम्मो को दबा ही दिया। मम्मो को दबाते ही गाडी ने  आवाज की और स्टेशन आ गया। हम दोनो को अधूरी चुदाई की प्यास बहुत ही तड़पा रही थी। स्टेशन से नीचे आते ही दूसरे दी मिलने का वादा किया। मैंने अपने कोचिंग जाने से मना भी कर दिया था। मैं तुम्हारा पूरा दिन इन्तजार करूंगा।  इतनी बात करके वो अपनी बुआ के घर चल दिया। मै भी अपने रूम पर आई। रात को नींद ही नहीं आ रही थी। मैंने अपने सारे कपडे भी उतारे दिये।

सोच सोच करके अपनी चूंचियो को मसल रही थी। मै बहुत ही गर्म हो चुकी थी। पहले सब्जियों से ही चुदाई कर लेती थी। आज भी टोकरी में जाकर देखा तो सूखा सूखा बैगन पड़ा था। आज हाथ से ही काम चलाना पड़ रहा था। मैंने किसी तरह से रात भर हाथ से काम चलाकर अपनी रात काटी। सुबह से मेरी बेचैनी और भी बढ़ने लगी। पूरा दिन भी बीत गया। निशांत नहीं आया। मेरे सारे सपनो पर लग रहा था पानी फिर जाएगा। मै दुखी होकर बैठ गई। आज कितना मेक अप किया था मैंने। लेकिन मेरे सपनों के राजकुमार का तो पता ही नहीं था। मैंने बाहर जाकर एक बार फिर से देखा तो निशांत मुझे पास ही गली में खड़ा दिखाई दिया। मै तो ख़ुशी से पागल हो गई। मैंने उसे अपने साथ लाकर रूम में अंदर आते ही दरवाजा बंद किया। उससे चिपक कर मैं किस करने लगी।

मै- “निशांत!! इतना देर क्यों करके आये। पता है मैं सुबह से ही तुम्हारा इन्तजार कर रही हूँ। तुम थे कहाँ अभी तक”

निशांत- “मेरी जान मै तुम्हारे लिए ही तो रात में आया हूँ। जिससे ज्यादा देर तक मैं तुम्हारे साथ रह सकूं”

मै- “आज तुम मेरे साथ पूरी रात रहोगे??”

निशांत- “हाँ इसीलिए तो शाम को आया हूँ। घर पर बुआ को बता दूंगा। मै अपने दोस्त के रूम पर रूक गया हूँ”

अब तो मेरी ख़ुशी बहुत ज्यादा हो गई थी। मुझे भी पता था कि वो मुझे चोदने के लिए ही आज रुका है। मैं भी खाना बनाने के लिए जा रही थी। उससे पहले ही मुझे उसने पकड़ लिया। मै उससे कहने लगीं- “निशांत अभी नहीं पहले मैं खाना बना लू”

निशांत- “मुझे भूख नहीं है। तुम्हे हो तो बना लेना अभी”

इतना कहकर मेरे होंठो पर अपना होंठ लगा दिया। ट्रैन से जबरदस्त चुसाई करने लगा। मेरी मुलायम गुलाबी गुलाब जैसी होंठो की पंखुड़ियों को चूस कर उसका रस निचोड़ने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मै भी उसका सर पकड़ कर साथ देने लगी। मै गर्म होने लगी। अब सब कुछ बड़ी तेजी से होने लगा। मेरी साँसे तेज हो गई। मै कांपने लगी। वो मेरी गांड पर एक दे मारी। मै तिलमिला उठी। कहने लगा- “इतनी काँप क्यों रही है”

मै- “मुझे नहीं पता मै क्यों काँप रही हूँ। लेकिन मुझे बहुत अजीब लग रहा है”

निशांत- “पहली बार है ना इसीलिए काँप रही हो”

मुझे घसीट कर बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया। मैं भी मूड बना चुकी थी। मैंने उसके सामने सलवार कुर्ता पहना हुआ था। मैने कहा- “निशांत थोड़ा धीमे धीमे करो मेरी धड़कने बढ़ जाती है। मैंने निशांत को पकड़ लिया। वो मेरे ऊपर ही लेट गया। मेरी चूंचियो को ऊपर से ही चूमते हुए। मेरी टांगो में टाँगे फसाकर बहुत ही मजा ले रहा था। गले को चूमते ही मैं बहुत ही जोश में आ गई। मैंने उसे कस के जकड लिया। वो समझ गया मै गर्म हो रही हूँ। उसने चूंचियो को दबाते हुए। मेरा कुर्ता निकाल दिया। मै गुलाबी रंग की ब्रा में उसके सामने मॉडल की तरह बैठी थी।  वो मुझे देखते ही अपने मुह में हाथ लगा लिए। मेरी चूंचियो की चमक से उसकी आँखे चौंधिया गई। मेरे दोनों कबूतर ब्रा की जाल में फसे हुए थे। उसने निकाल कर आजाद कर दिया। फिर उनके साथ किसी छोटे बच्चे की तरह खेलने लगा। उसने मेरी कबूतरों के साथ अपने होंठ लगा कर किस करके चूसने लगा। अब वो मुसम्मी की तरह निचोड़ रहा था। मुझे ये सब सहन नहीं हों पा रहा था। मैं उसको अपने दबाते हुए“..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की सिसकारी भरने लगी। उसने मेरी चूत पर अपना हाथ रख कर मसलने लगा। आह आह के साथ मैंने उसके हाथों को पकड़ कर और जल्दी जल्दी अपनी चूत को मलने लगी। उसने मुझे आजाद करते हुए। मेरे ऊपर से उठ कर खड़ा हो गया।

अपने पैंट को निकालते हुए उसने अपने लंड के दर्शन करवाया। मैंने अभी तक किसी का लंड नही छुआ था। उसने मेरा हाथ पकड़ कर उसको अपने लंड पे राजा पर रख दिया। पहले तो वो मुझे कुछ नरम नरम लगा। उसके बाद वो बहुत ही टाइट हो गया। बिल्कुल आइसक्रीम की कोन की तरह। उसने कहा- “अब इसे लॉलीपॉप की तरह चूसो”

मैंने चूसने से मना कर दिया। मैंने बताया मुझे उल्टी हो जायेगी। उसने कुछ नहीं कहा। मेरे गालो पर ही अपना लंड रगड़ने लगा। उसने मेरी सलवार के नाड़े को खींचकर खोल दिया। पैंटी सहित उसको निकाल कर मुझे नंगा कर दिया।  मै तड़पती हुई बिस्तर के चादर को हाथो में लपेट कर दबा रही थी। उसने मेरी टांगो को फैलाकर चूत के दर्शन किया। चिकनी चूत को देखते ही उसकी जीभ लपलपाने लगी। उसने मेरी चूत को चाट कर साफ़ करने लगा। दोनों टुकड़ो के बीच में अपनी जीभ को फसाकर मेरी गांड को दबा रहा था। मैं उसका मुह अपनी योनि में दबा रही थी। अंदर तक जीभ डाल कर उसने चूत की साफ़ सफाई कर डाली। मेरी चूत ने भी लंड के आने की ख़ुशी में थोड़ा बहुत जल छिड़क डाला। उसने अपना मुह हटाकर मेरी चूत में अपना लंड रगड़ने लगा। मै अब बहुत बेकरार हो गई थी। उसने गर्म गर्म अपना लंड मेरी चूत में डालने के लिए छेद पर रख दिया। मै तडप उठी। उसने मेरी चूत में लंड को धकेल दिया। मेरी चूत में उसका टोपा जाकर फस गया। मै जोर जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीख निकाल दी।

मुझे बहुत दर्द हो रहा था। उसका बड़ा मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ डाला। बिना मेरा  दर्द समझे वो धक्के पर धक्का मार कर मेरी चूत में अपना लंड जड़ तक घुसा कर जोर जोर से मेरी टांगो को पकड़ कर चोदने लगा। घच घच पच की आवाज एक लय में सुनाई दे रही थी। मैं भी “….उंह उंह” की आवाज से सुर ताल मिला रही थी। उसने मुझे उठा लिया। उसके बाद मेरी एक टांग उठाकर धका धक् पेल रहा था। मेरी चूंचिया हिल रही थी। उसके लंड की गोलियां मेरी टांगो पर कभी कभी लग रही थीं। उसने मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता बना डाला। जोर जोर से चुदाई का माहौल बन गया।

उसने भीं अपनी गाड़ी तेज चलाई। हचक हचक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे  दर्द दे रहा था। मैं भी बहुत उत्तेजित होने लगी। मुझे भी उस दर्द में मजा आने लगा। वो कुछ ही देर में थक गया। वो बिस्तर पर लेट गया। मै भले ही अभी तक चुदी न थी। लेकिंन फिर भी काफी स्टाइल मैने ब्लू फिल्मो से सीखा था। मै उसके लंड को खड़ा करके चूत रख के बैठने लगी। धीरे धीरे मेरी चूत ने उसका पूरा लंड जड़ तक ले लिया। मै भी उछल उछल कर चुदवाने लगी। वो मेरी चूत में अपना लंड कमर उठा उठा कर पेलने लगा। मेरी चूत में अब दुगनी स्पीड से लंड अंदर बाहर हो रहा था। मैं बहुत ही जोर जोर से उछलने लगी। मै झड़ने की स्थिति में पहुचती। उससे पहले मेरी चूत से उसने लंड निकाल लिया। मै भी झड़ने से बच गई। उसने मुझे कुतिया बनाकर कुत्तो की तरह मेरे पीछे चूत चुदाई करने लगा।

मेरी कमर पकड़ कर उसने जोर जोर से झटके पर झटका लगाना शुरू किया। मै बहुत ही तेज तेज चीखने लगी। वो भी झड़ने वाला था। उसके चोदने की रफ़्तार का कुछ पता ही नहीं चल रहा था। मेरी चूत ने भी अपना माल निकाल दिया। उसने माल चूत में लगे लगें ही कुछ देर तक चोदा। उसके बाद मेरी चूत से अपना लंड निकाल कर वो भी मुठ मार कर मेरी चूंचियो पर ही झड़ दिया। उसके बाद पूरी रात चुदाई की। फिर आज तक उसके साथ सिर्फ फोन सेक्स कर पाती हूँ। अगर गॉड ने चाहा तो मुझे फिर से उसका लंड खाने का मौका मिल जाएगा।

 

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