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मेरी चूत की प्यास

सभी दोस्तो को मेरा हैलो। मेरा नाम ज्योति है. मैं अपनी ससुर बहू सेक्स स्टोरी बता रही हूँ. मजा लें.

मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं. घर पर सिर्फ मेरे पति, मैं, हमारा एक बच्चा और मेरे ससुर रहते हैं. हमारा घर दो बी.एच.के. का है जिसमें दो बेडरूम, एक हॉल, एक किचन है.

मेरे ससुर गवर्नमेंट जॉब पर हैं और उनकी उम्र पचपन के करीब है. मगर वो दिखने में 45 से ज्यादा के नहीं लगते हैं. अगर मैं अपने बारे में बात करूं तो मेरी शादी के समय मैं काफी स्लिम थी. मगर शादी और बच्चा होने के बाद मेरे शरीर में काफी बदलाव आ गये.

अब मेरा शरीर काफी फूल गया और मेरा फिगर 38-32-36 का हो गया. मेरे बाल मेरी कमर तक आते हैं. मेरी गांड काफी मस्त है और मेरे बूब्स का तो कहना ही क्या. मेरी ब्रा उनको संभाल नहीं पाती है.

जहां तक मेरी सेक्स लाइफ की बात है तो वो एकदम से नीरस हो चुकी थी. मेरे पति ने भी अब मेरे अंदर रूचि लेना करीब करीब बंद ही कर दिया था.

मगर मैं तो सेक्स के लिए हमेशा ही तैयार रहती थी. अपने पति से उम्मीद करती थी कि वो मेरी चूत को अपने लंड का स्पर्श देकर मेरी प्यास को शांत करेंगे लेकिन मेरी उम्मीद केवल एक उम्मीद ही बन कर रह गयी थी.

ऐसे में मैं आप लोगों से पूछना चाहती हूं कि मैं भला अपने आपको कब तक रोक कर रखती और कब तक अपने आप को शांत रख पाती?
मैंने अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए बहुत दिमाग दौड़ाया.

पड़ोसी का जवान लड़का, दूध वाला, गली का धोबी आदि सबके बारे में सोचा लेकिन कोई ऐसा मिल ही नहीं रहा था कि मेरी चूत को लंड का सुख दे सके. मैं काफी उदास और खिझी खिझी रहने लगी थी.

एक दिन मैं सुबह काम कर रही थी. मैं झाड़ू लगाती हुई अपने ससुर के कमरे में पहुंची तो वो उस वक्त अपने बेड पर सो रहे थे. उन्होंने रूम का दरवाजा खुला रखा हुआ था और मैंने उनको जगाना ठीक नहीं समझा. मैं नहीं चाहती थी कि उनकी नींद खराब हो.

मैंने देखा कि उन्होंने टांगों में कुछ नहीं पहना हुआ था. न धोती और न कोई पजामा. केवल अपने अंडरवियर को पहने हुए सो रहे थे. उनके अंडरवियर के फूले हुए भाग ने मेरा ध्यान खींच लिया.

उनका लिंग उनके ढीले कच्छे से एक ओर निकल कर बाहर झांक रहा था. मैंने गौर से उनके लिंग के अग्रभाग को देखा. उनका सुपारा गाजर के रंग का था. लिंग का रंग गहरा सांवला था. देखने में काफी रसीला लग रहा था इसलिए नजर भी वहीं पर जैसे चिपक रही थी बार बार.

मेरी चूत में सरसरी सी दौड़ने लगी. मगर मैं कुछ कर नहीं सकती थी इसलिए झाड़ू लगा कर बाहर आ गयी. बहुत कोशिश की मैंने कि ससुर के खयाल को मन से निकाल दूं. मगर ससुर का मोटा लिंग जिसके दर्शन मैंने सुबह सुबह किये थे उसके खयाल मन से नहीं निकल रहे थे.

बहुत सोच विचार के बाद आखिर मैं इसी निष्कर्ष पर पहुंची कि मेरी चूत की प्यास को ससुर के लंड से ही शांत करवाऊंगी.
अगले ही दिन से मैंने इसके लिए अपनी प्लानिंग भी शुरू कर दी.

अब मैं अपने ससुर के सामने अपने बदन की नुमाइश करने लगी थी. उनको अपनी कमर ज्यादा से ज्यादा दिखाने की कोशिश करती थी. मुझे नहीं पता कि वो ध्यान भी दे रहे थे या नहीं! लेकिन मैं बार बार उनके सामने जाती रहती थी.

भी तक मुझे ऐसा कोई सिग्नल ससुर की तरफ से नहीं मिला था जिससे मुझे पता लग सके कि वो भी मेरे जिस्म में कुछ रूचि ले रहे हैं.

ये पैंतरा फेल होने के बाद मैंने सोचा कि उनको अपने क्लीवेज दिखाऊंगी. एक रोज जब मैं उनको दोपहर का खाना परोसने गयी तो मैंने पहले से ही अपने ब्लाउज का एक बटन खोल लिया. मैंने अपने बूब्स को हल्का सा बाहर कर लिया ताकि मेरी चूचियों की घाटी ससुर जी को आसानी से नजर आ जाये.

जब मैं सामने से खाना परोस रही थी तो मैंने घूँघट डाल लिया था. मैं सामने झुक कर खाना डालने लगी तो देखा कि उनकी नजर मेरी चूचियों की घाटी में झांक रही थी. जब तक मैं वापस सीधी न हो गयी तब तक वो मेरी चूचियों को ताड़ते रहे.

फिर दोबारा जब खाना दिया तो मैं कुछ ज्यादा ही नीचे झुक गयी और मैंने ससुर जी को अपनी चूचियों के दर्शन जी भर कर करवा दिये. अब वो मेरे जाल में फंस गये थे. तीर सही निशाने पर लगा था.

अब मैं कई बार दिन में उनसे जानबूझकर टकराने लगी ताकि उनके अंदर हवस के शोले भड़का सकूं.

एक एक करके दिन बीत रहे थे ससुर बहू सेक्स के लिए मेरी तड़प अब और तेज होती जा रही थी.

एक दिन मेरे पति मेरे बेटे को लेकर हमारी रिश्तेदारी में गये हुए थे. उस दिन घर पर मेरे ससुर जी और मैं अकेले थे.

उस दिन मैंने सोच लिया था कि आज की रात ससुर जी का लंड अपनी चूत में किसी भी तरह ले ही लूंगी. आज से ज्यादा अच्छा मौका ससुर बहू सेक्स का फिर नहीं मिलेगा.

एक बार ससुर को मेरी चूत की लत लग गयी तो फिर मेरे लिये अपनी चूत चुदवाने की राह बिल्कुल आसान हो जायेगी.

रात को मैंने ससुर जी को खाना दिया और फिर नहाने के लिए मैं बाथरूम में घुस गयी. मैंने अंदर जाकर अपने बालों को गीला किया. फिर साया पहन कर बाहर आ गयी. मैंने साया अपने बूब्स तक ऊंचा बांध रखा और नीचे घुटनों तक था.

अब मैं ससुर के आने का इंतजार कर रही थी. मैं जानती थी कि खाना खाने के बाद वो हाथ धोने के लिए इधर ही आयेंगे इसलिए मैं अपनी बारी का इंतजार करने लगी. मैंने सोच रखा था कि मुझे क्या करना है. मैं बाथरूम के दरवाजे को हल्का सा खोल कर देख रही थी.

जब वो मुझे आते हुए दिखाई दिये तो मैं बाथरूम से बाहर निकल कर दूसरी ओर घूम गयी. ससुर की ओर मेरी पीठ थी दरवाजे की ओर मेरा मुंह हो गया. जैसे ही वो करीब पहुंचे मैं घूम कर उनकी तरफ हो गयी और मेरी चूचियां उनकी छाती से टकरा गईं.

मैंने चौंकने का नाटक किया और वहां से घबरा कर भाग गयी. ससुर जी समझ नहीं पाये कि ये अचानक से क्या हो गया. मैं अपने रूम में छुपकर उनको देखने लगी. वो अभी भी उस घटना के बारे में सोच रहे थे.

फिर वो सोचते हुए ही हाथ धोकर वापस अपने रूम की ओर चले गये. अब मैंने दो पीस वाला एक जालीदार गाउन पहना और अपने बालों को संवार कर लिपस्टिक लगाई और 10.30 बजे के करीब उनके रूम की ओर चली. मुझे पता था कि वो इस समय तक सो जाते हैं.

मैं उनके रूम में पहुंची तो देखा कि वो सामने बेड पर सो रहे थे. उनकी टांगें फैली हुई थीं और उनके कच्छे में उनका नागराज तना हुआ था. शायद मेरे साथ हुई घटना के बारे में सोचकर ही तन रहा था. सपने में वो शायद मुझे ही चोद रहे होंगे.

अब मेरे पास अनुमान लगाने का समय नहीं था. मेरी चूत की आग अब मुझे खुद ही पहल करने के लिए आगे धकेल रही थी. मैं चुपचाप जाकर बेड पर बैठ गयी.

मैंने देखा कि उनके लिंग में झटके लग रहे थे. तड़पता लिंग देख कर ही मेरी चूत में पानी रिसना शुरू हो गया.

मैंने धीरे से ससुर के कच्छे को नीचे खींच दिया. उनका मोटा लम्बा 8 इंची लम्बाई वाला सांवला लिंग मेरे सामने तन कर खड़ा था. देखते ही मेरी हवस भभक गयी. मैंने उनके लिंग को हाथ में पकड़ा तो पूरे बदन में करंट दौड़ने लगा.

उनके लिंग को पकड़ कर मैंने दबा कर देखा. मेरे ससुर का लंड इस उम्र में भी इतना दमदार होगा मैंने इसका अंदाजा भी नहीं लगाया था. लिंग की शाफ्ट इतनी टाइट थी कि लग रहा था जैसे मैंने किसी रॉड को पकड़ रखा है.

ससुर के लंड के गहरे गुलाबी सुपारे से कामरस की एक बूंद अब बाहर निकल कर उनके मूतने वाले छेद पर आकर बैठ गयी थी.
मैंने नीचे झुक कर अपनी जीभ निकाली और उस बूंद को अपनी जीभ से चाट लिया.

उनका कामरस मुंह लगा तो मैं पागल हो गयी. मैंने अगले ही पल उनके लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

ससुर जी की टांगें अब हरकत में आ गयीं और पहले से ज्यादा फैल गयीं. कुछ पल तो मैं उनके लिंग को चूसती रही और फिर उनके हाथ मेरे सिर पर आ गये.

वो मेरे सिर को अपने लिंग पर दबाने लगे. ससुर का लंड मेरे गले में उतरने लगा. बहुत मजा आ रहा था. उनके चेहरे को देख कर नहीं लग रहा था कि वो जाग चुके हैं इसलिए मैं बेधड़क उनके लिंग को चूस रही थी.

फिर एकदम से उन्होंने आंखें खोलीं और हड़बड़ा गये.
अपनी टांगों को पीछे खींचते हुए बोले- बहू तुम? ये क्या कर रही हो? ये गलत है.
मैंने उनके लिंग को हाथ में लेकर सहलाते हुए कहा- कुछ गलत नहीं है ससुर जी, आप मजा लो. बस जो हो रहा है होने दो.

मैंने सोचा अभी लोहा गर्म है, जैसे चाहूं मोड़ सकती हूं. मैंने तुरंत अपने गाउन को नीचे कर दिया और उनके घुटनों के बीच में आकर बैठ गयी. मैंने उनके हाथों को अपनी चूचियों पर रखवा दिया और अपने ही हाथों से दबवाने लगी.

कुछ देर तो वो सोचते रहे कि क्या करें, आगे बढें या पीछे हट जायें? मगर कब तक खुद को रोक कर रखते? उनके लिंग में लग रहे लगातार झटके उनको आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहे थे.

फिर उन्होंने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. मैं समझ गयी कि अब ससुर का लिंग मेरी चूत की सवारी करने के लिए तैयार है.
वो जोर से मेरी चूचियों को भींचते हुए बोले- चल आज मैं तुझे बताता हूं कि मर्द को छेड़ने का अंजाम क्या होता है, आज तेरी शरारत की सजा मैं तुझे जरूर दूंगा.

मैं बोली- मैं तो कब से तैयार हूं बाबूजी, आप जो चाहे सजा दे लो. आपकी सजा में ही मजा है.

फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया. फिर अपनी कमीज उठाई और मेरे दोनों हाथ बेड पर बांध दिये.

वो मेरे बगल में लेटे और मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे. फिर मेरी चूचियों को दबाने और मसलने लगे. फिर मेरी एक चूची को मुंह में भर कर चूसने लगे. एक को चूसने के बाद दूसरी को मुंह में भर लिया और पहली को दबाने लगे.

इतने में ही मेरी चूत बिल्कुल गीली हो गयी थी. अब वो जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगे और नीचे की ओर मेरे पेट को चूमते हुए बढ़ने लगे. मेरी नाभि को चूम कर मेरी चूत की ओर बढ़ रहे थे. मेरी चूत में आग लगी हुई थी.

जैसे ही ससुर ने मेरी चूत पर अपने होंठ रखे तो मेरी चूत की आग और भड़क गयी. मैंने उनके सिर को अपनी चूत में दबा लिया और जोर जोर से अपनी चूत को उनके मुंह पर रगड़ने लगी. मेरी चूत की प्यास को देख कर वो मेरी चूत में जीभ से चोदने लगे और मैं पागल होने लगी.

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैं बोली- बस ससुर जी … आह्ह … अब मेरी चूत में अपना नागराज डाल दो. मैं अब और नहीं रुक सकती हूं. मेरी चूत की चुदाई कर दो बाबूजी, नहीं तो मैं मर जाऊंगी. आपके लंड के बिना मैं मर जाऊंगी बाबूजी, जल्दी से मेरी चूत को चोद दो … आह्ह … जल्दी।

वो उठे और अपना लंड मेरी मुनिया पर रगड़ने लगे.
मैं बोली- बाबूजी जल्दी करो, ये खेलने का समय नहीं है, मैं चुदना चाहती हूं.
वो बोले- हां मेरी रंडी बहू, रुक तेरी चूत की प्यास आज मैं अच्छे से बुझा दूंगा. अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा.

उन्होंने मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक जोर का झटका दे मारा. मेरी चूत की हालत पहले ही पानी पानी हो रही थी. बाबूजी का लंड भी चुदाई के लिए गीला होकर बिल्कुल तैयार था. जैसे ही झटका मारा उनके 8 इंची लंड का मोटा सुपारा मेरी चूत में फंस गया.

मेरी चीख निकल गयी.
पति का लंड इतना मोटा नहीं था और बहुत दिनों से मेरी चुदाई भी नहीं हो पा रही थी. इसलिए बाबूजी का मोटा लंड मैं झेल नहीं पायी और चिल्लाने लगी.
उन्होंने तभी एक और झटका मारा और पूरा लंड मेरी चूत में उतर गया.

बाबूजी ने मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरी चूत में हल्के हल्के लंड को चलाना शुरू कर दिया.

अब धीरे धीरे मुझे भी लंड लेकर मजा आने लगा.
मैंने बाबूजी का साथ देना शुरू किया और अब ससुर बहू दोनों ही एक दूसरे से नंगे लिपटे हुए एक दूसरे को चूमते हुए सेक्स का मजा देने और लेने लगे.

अब मेरे मुंह से भी सिसकारियां निकल रही थीं. अब उनकी स्पीड धीरे धीरे बढ़ने लगी. जोर जोर से झटके लगाते हुए वो मेरी चूत की ठुकाई करने लगे और मुझे ससुर के लंड से चुद कर पूरा मजा आने लगा.

मैंने अब आनंद के मारे उनके होंठों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया. उनका लंड मेरी चूत में चोद चोद कर मेरी चूत की खुजली मिटा रहा था और मैं उनकी पीठ को नोंचने लगी थी. मेरी चूत में लंड से जो मजा मिल रहा था उसके मारे मेरी आंखें भारी होने लगी थी.

बाबूजी के चोदने की स्पीड अब और तेज होती जा रही थी. मैंने अब अपने दोनों पैरों को हवा में उठा लिया. बाबूजी का लंड अब और गहराई तक मेरी चूत को ठोकने लगा. पूरे रूम में फच फच की आवाज होने लगी.

मेरी चूत में एक तूफान सा उठा हुआ था. अब मैं झड़ने के करीब पहुंच रही थी.
वो बोले- मेरा पानी भी निकलने वाला है.

फिर वो मेरे मुंह पर हाथ रख कर मुझे जोर जोर से पेलने लगे. बीस-पच्चीस झटकों के बाद बाबूजी के लंड और मेरी चूत ने एक साथ पानी छोड़ दिया. हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर झड़ने लगे. दोनों के बदन में झटके लग रहे थे.

उसके बाद बाबूजी मेरे ऊपर गिर गये. हम दोनों शांत हो गये थे. मैं भी शांत हो गयी थी और बाबूजी मेरी चूचियों में मुंह देकर लेटे हुए थे. कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे. उसके बाद वो उठे और बाथरूम में चले गये.

मैं भी उठने लगी तो मुझसे चला भी नहीं गया. पहली बार जिन्दगी में इतनी जबरदस्त चुदाई हुई थी.

मैं कराहने लगी तो वो नंगे ही बाहर आये. उनका लंड उनकी जांघों के बीच में इधर उधर झूल रहा था. मन कर रहा था एक बार फिर से उनके लंड को मुंह में ले लूं.

फिर वो मेरे पास आये और मुझे सहारा देने लगे. वो मेरे साथ बाथरूम में गये और फिर मुझे सहारा देकर बाहर ले आये. हम दोनों फिर से बेड पर लेट गये.

मैं अपने ससुर की बांहों में थी. वो मेरी चूत में उंगली देकर लेट गये और मैंने उनके लंड को हाथ में भर लिया. मैं बहुत थक गयी थी. मुझे कब नींद आई मुझे कुछ पता नहीं चला. उसके बाद सुबह ही मेरी आंख खुली.

सुबह मैं बेड में बाबूजी के साथ नंगी पड़ी हुई थी. वो उठे और फिर मेरे लिये चाय बना कर ले आये.
मैंने बेड में चाय पी और फिर वो बोले कि उठ कर फ्रश हो जाओ.

उस दिन के बाद उनके और मेरे बीच में सेक्स संबंध स्थापित हो गये. उन्होंने बोल दिया था कि जब भी उनकी जरूरत हो तो मैं उनको बुला लिया करूं. उस दिन के बाद से जब भी मेरा मन हुआ मैं अपने ससुर बहू सेक्स से अपनी चूत की प्यास को बुझवाने लगी. मुझे घर में एक दमदार लंड मिल गया था.

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उन्होंने अपना तगड़ा लंड मेरी चूत में पेल दिया

मेरा नाम लता है। अभी मेरी उम्र 38 साल है लेकिन फिगर ऐसा कि अच्छे-अच्छे मर्दो का लौड़ा खड़ा कर देती हूँ।

मेरे बदन का नाप इस समय 34-30-38 है। मेरा बदन दूध जैसा सफेद है। मेरी चूचियाँ बहुत अधिक उभरी हुई है और मेरी गांड भी काफी बड़ी व आकर्षक है। मर्द तो मुझे देखते ही मुझे चोदने के सपने देखने लगते हैं।

मैं तैयार भी इस प्रकार से होती हूँ जिससे मेरी चूचियाँ और मेरी गांड अधिक आकर्षक लगे। मैं ज्यादातर साड़ी ही पहनती हूँ। साड़ी को मैं अपनी नाभि के काफी नीचे से पहनती हूँ. जिससे मेरी नाभि स्पष्ट नजर आ जाती है।
साथ ही मेरी साड़ी का पल्लू जालीदार होने के कारण मेरा गोरा बदन भी साफ नजर आता है।

साड़ियों के साथ मैं हमेशा गहरे गले वाली ब्लाउज ही पहनती हूँ. जिससे मेरे चूचें और अधिक उभर कर अधिक बड़ी लगने लगते हैं। जब मैं बाहर निकलती हूँ तो सारे मर्द मुझे घूर-घूर कर देखने लगते हैं जैसे कि वो मुझे वहीं लिटा कर चोदने वाले हैं।

यह कहानी आज से लगभग 6 साल पहले की है। तब भी मेरा फिगर ऐसा ही था लेकिन उस समय मैं इस प्रकार से सजती-संवरती नहीं थी।
उस समय मेरे पति का देहांत हो चुका था। हमारे घर की स्थिति बिगड़ने लगी थी। घर में कोई भी कमाने वाला नहीं बचा रह गया था।

मेरा बेटा भी एक साल से घर में ही बैठा हुआ था। उस समय वो 9वीं कक्षा में था। यदि वह स्कूल जाना जारी रखता तो वह 10वीं का बोर्ड परीक्षा दे चुका होता। लेकिन बहुत दिन तक स्कूल न जाने के कारण उसे स्कूल न जाने के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया और वह बोर्ड की परीक्षा भी नहीं दे पाया।

अब मैं अपनी कहानी शुरू करती हूँ। मेरी कहानी यह है कि मैं अपने काम को पूरा करवाने के चक्कर में किस प्रकार विभिन्न लोगों से चुदती हूँ।

जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरा बेटा एक साल से स्कूल नहीं गया।
तो एक दिन मैं उससे बात करने उसके कमरे में गई। वो उस समय एक किताब ही पढ़ रहा था।

मैं उसके पास जाकर बैठ गई। मैंने कहा- बेटा! आगे का क्या सोचा है तुमने? स्कूल जाना है या नहीं? इस प्रकार घर में बैठे रहने से कोई काम नहीं बनेगा।
तो उसने कहा- हां माँ। स्कूल तो जाना है मगर क्या अब स्कूल वाले मुझे वापस भर्ती कर लेंगे।
फिर मैंने कहा- तुम उसकी चिंता मत करो। मैं कल तुम्हारे स्कूल जाकर बात कर लूंगी।

फिर रात को हम दोनों ने साथ में खाना खाया और हम अपने-अपने कमरे में चले गये सोने चले गये।

अपने कमरे में जा कर मैंने अपने कपड़े उतार दिये और ब्रा-पैंटी पहन कर अपने बैड पर लेट गई।

मैं आपको बता देती हूँ कि शादी के कुछ समय बाद से ही मैं अपने पति के साथ रात को ब्रा-पैंटी में सोने लगी थी। मेरे पति अक्सर मुझे चोदते थे और अगर न भी चोदते तो मेरी चूचियों को अपने हाथों से मसलते और मेरी चूत में उंगली तो किया ही करते थे।

रात को तो हम दोंनों एक-दूसरे को नंगा कर के ही सोते थे। उनके जाने के बाद भी मेरी यह आदत नहीं छुटी।

मैं अभी बस सोई ही थी कि कुछ सोचते-सोचते उठ गई और आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई। मैं खुद को निहारने लगी।

ब्रा और पैंटी में मैं बहुत-बहुत सेक्सी लग रही थी। कोई मर्द मुझे अगर ऐसे देख ले तो मुझ पर टूट ही पड़े। आईने में मैंने देखा कि ब्रा में मेरी चूचियाँ बहुत खिली हुई थी।
मैंने अपनी चूची पर हाथ रखा और उसे ऊपर धकेल कर देखा कि वो कितनी कातिलाना लग रही थी।

उसी वक्त मैंने सोचा कि क्यूं न मैं डीप गले वाली ब्लाउज पहन कर जाऊं जिससे मेरी चूचियों को देख कर मास्टर शायद जल्दी मान जायेगा।

अगले ही दिन से मैं ऐसे साड़ी पहनने लगी जैसे मैं आज पहनती हूँ। मैंने डीप गले वाली ब्लाउज पहनी और साड़ी को भी अपनी नाभि के काफि नीचे बांधा। उस दिन मैंने भी पहली बार खुद का ये हसीन रूप देखा। मैं बहुत ही हॉट एंड सेक्सी लग रही थी।

मैं सुबह साढ़े आठ बजे निकली। उस समय मेरा बेटा सो रहा था. तो उसने मुझे इस सेक्सी अवतार में नहीं देखा। मैं घर बाहर से लॉक कर के निकल गई।

बाहर निकलते ही काफी लोग मुझे घूरने लगे।

मैंने ऑटो किया और स्कूल चल दी। स्कूल में अंदर जाकर मैंने उस मास्टर के बारे में एक महिला कर्मचारी से पूछा तो उसने जवाब दिया कि उनकी क्लास चल रही है. तो आप उनकी कैबिन में जाकर बैठ जाओ, वो थोड़ी देर बाद आ जाएंगे।

मैं उनके कैबिन की ओर गई तो देखा कि उनके कैबिन से पहले के चार कैबिन में ताला लगा हुआ था और उनका कैबिन कोने में, सुनसान में था। मैं जाकर उनकी कैबिन मैं बैठ गई।

कुछ समय तक इंतजार करने के बाद मैं अपना मोबाईल चैक करने लगी।
ऐसे ही एक घंटा बीत गया।

थोड़ी ही देर बाद वह मास्टर आया तो मैं खड़ी हो गई। वो कोई नया ही मास्टर था जिसे मैं नहीं पहचानती था।
मैंने अपना परिचय दिया तो उन्होंने बैठते हुए मुझे भी बैठने को कहा।

उन्हें मैंने सारी बातें बताई तो उन्होंने भी कहा कि- हां, मैं आपके बेटे के बारे में जानता हूँ। पहले जो सर थे वो मुझे उसके बारे में बता के गए हैं।

तो मैंने उनसे पूछ लिया कि मेरे बेटे का दाखिला हो जायेगा न दोबारा?
उन्होंने कहा- यह मेरे हाथ में नहीं है। सिर्फ मेरे चाहने से उसका दाखिला नहीं हो सकता।
यह कहकर उसकी नजर मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों पर पड़ी जो मेरे ब्लाऊज से बाहर आने के लिए मचल रही थी।

ये देखकर मैं उसकी ओर थोड़ा झुक गई जिससे मेरी चूचियाँ और साफ दिखने लगी और मैंने कहा- कुछ करिए न सर! आप चाहो तो कुछ भी हो सकता है।
मैंने टीचेर को सेक्स के लिए उकसा रही थी कि मेरा काम बन जाये.

मेरी बात सुनने के बाद वो मेरे पास रखी कुर्सी में आकर बैठ गए और मेरी जाँघों पर अपना हाथ रखते हुए कहा- जी हो तो सकता है. लेकिन आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
मैं ये कहना तो नहीं चाहती थी लेकिन अनायास ही मेरे मुँह से निकल गया- मैं अपने बेटे के लिए कुछ भी कर सकती हूँ।

ये सुनते ही वो तो जैसे मुझ पर टूट पड़े। उन्होंने जोर से मेरे मुँह को अपने ओर खींचा और मुझे किस करने लगे।

शुरुआत मैं तो मैंने उनका विरोध किया लेकिन जैसे ही उन्होंने मेरी कमर में हाथ डाला तब से मैंने टीचर सेक्स में साथ देना शुरु कर दिया।
उन्होंने किस करना जारी रखा और धीरे-धीरे से अपना हाथ ऊपर करते हुए, मेरी कमर को सहलाते हुए मेरी साड़ी को पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरु कर दिया।

मैं भी गर्म होने लगी थी। मुझे भी लगभग डेढ़ साल हो चुके थे ऐसा आनन्द प्राप्त किये हुए! इसलिए मैं भी उनका साथ देने लगी।
वो मेरी चूचियों को अब जोर-जोर से दबाने और मसलने लगे।

तभी अचानक से उन्होंने मेरी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर खींच लिया और पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फेरने लगे।

लगभग दो मिनट तक हमारा चुम्बन चला. उतने देर में ही जब उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को मसलना शुरु किया तो एक मिनट के अंदर ही झड़ गई।

मास्टर ने जब मेरी पैंटी में कामरस का गीलापन महसूस किया तो वो समझ गया कि अब मैं चुदने के लिए तैयार हो चुकी हूँ.
और सच बोलूँ तो अब तो मुझसे भी सब्र नहीं हो पा रहा था और मुझे भी चुदना था।

अब मास्टर ने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए और ब्रा को भी खोलकर अलग कर दिया।

ब्रा खुलते ही मेरी दोनों चूचियाँ उछलकर मास्टर के सामने आ गई। अब मेरा ऊपर का बदन पूरा नंगा हो गया था मास्टर के सामने।

मास्टर ने दोनों चूचियों को अपने हाथों के ज़ोर से पकड़ा तो मेरे मुँह से एक सिसकारी निकली।
उसे सुनकर मास्टर और ज़ोश में आ गया. और उसने मेरी दोनों दूध जैसी सफेद चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से मसलना और चूसना शुरु कर दिया। वो एक चूची को हाथ में लेकर चूसते तो दूसरे को हाथ से मसलते और निप्पल को उंगली से कसकर निचोड़ते।

3-4 मिनट के बाद मास्टर ने अपनी पैंट का बटन और जिप खोलकर पैंट को अपने घुटनों तक नीचे कर दिया. साथ ही उसने अपना अंडरवियर भी नीचे कर दिया।
मैं तो उनके लौड़े को देखते ही हैरान हो गई।

लगभग 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा हथियार था उनका!
मेरी हैरानी मेरे चहरे पर साफ नजर आ रही थी।

मास्टर ने मेरी हैरानी भाँप ली और मुझसे पूछने लगे- कभी इतना लंबा अंदर ली हो?
मैंने ना में अपना सिर हिला दिया।
मास्टर ने कहा- कोई बात नहीं, आज इसका भी अनुभव कर लो।

यह कहकर उन्होंने अपना लौड़ा मेरे मुँह में धकेल दिया। पहले तो मुझे ये अच्छा नहीं लगा और मैंने विरोध करना चाहा लेकिन कर न सकी क्योंकि उनका लौड़ा काफी बड़ा था और वो बहुत तेज मेरे मुँह में अपना लौड़ा अंदर-बाहर कर रहे थे।

थोड़ी ही देर में मैं भी मजा लेने लगी और मजे से मास्टर का लौड़ा चूसने लगी।
पाँच मिनट जोरदार लौड़ा चुसाई के बाद वो मेरे मुंह में ही झड़ गए।

झड़ने के बाद वो कहने लगे- साली रंडी! कितने समय से लौड़ा नहीं लिया हैं। पाँच मिनट में ही ढेर कर दिया मुझे।
उनके मुँह से रंडी शब्द सुनकर मुझे अज़ीब पर इस स्थिति में अच्छा लगा।

उसके बाद उन्होंने मुझे उठाकर मेज़ पर बिठा दिया और मेरी बुर के ऊपर से मेरी पैंटी को निकालकर फेंक दिया.
उन्होंने देखा कि मेरी चूत के आसपास काफी झाँट उगी हुई हैं।
उसे देख टीचर ने कहा- आहह! क्या चूत पाई है तूने। ऐसी चूत का ही तो दीवाना हूँ मैं! आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बनाने में मज़ा आयेगा।

फिर उसने अपना मुँह मेरी झाँट से भरी चूत पर अपना मुँह लगाया. तो मुझे 440 वोल्ट का झटका लगा।
तकरीबन पाँच मिनट तक मेरी चूत की ज़ोरदार चुसाई की उसने और फिर मैं झड़ गई।

इसके बाद उसने अपना लंड हाथ में लेकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
मुझसे अब और नहीं रहा जा रहा था। मैंने उनसे कहा- अब और न तड़पाओ। चोदो मुझे!

इसके बाद तो उसने आव देखा न ताव और एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना आधा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी चूत काफी टाईट थी ये उन्हें पता लग गया था शायद इसलिए उन्होंने बहुत तेज़ धक्का मारा था। शायद वो ये भी समझ ही चुके थे कि मैं काफी दिनों से चुदी नहीं हूँ।

जब उन्होंने अपना तगड़ा लंड मेरी चूत में पेल दिया तो मुझे बहुत तेज़ दर्द का अहसास हुआ और मैं चिल्ला दी तो उन्होंने मुझे चिल्लाने से रोकने के लिए मुझे किस करने लगे।

थोड़ी देर उन्होंने अपना लंड वैसे ही मेरी चूत में रखे रखा और किस करते रहे।
जब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो उन्होंने अपने लंड पर थोड़ा थूक फेंका और धीरे से अपने लंड को आगे धकेलने लगे। दर्द तो अभी भी हो रहा था लेकिन अब थोड़ा मज़ा भी आने लगा था।

अब उन्होंने धीरे-धीरे अपना लंड आगे-पीछे करना शुरु कर दिया।
इस बीच वो मेरी नंगी कमर पर अपना हाथ फेरे जा रहे थे।

धीरे-धीरे चुदाई को मज़ा मुझे भी आ रहा था। मैंने भी एक समय उनके कंधों पर हाथ रखा और जब उन्होंने अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ानी शुरु की तो उसी वक्त मैंने उनके कंधें में अपने नाखून चुभा दिए।

वो तो मेरी चुदाई का इतना मज़ा ले रहे थे कि उनको इसका पता भी नहीं चला लेकिन इससे मेरी परेशानी जरुर बढ़ी। इसके बाद उन्होंने चुदाई काफी तेज़ कर दी।

चुदाई करते-करते वो कभी मुझे किस करते तो कभी मेरी चूची को हाथ से पकड़कर अपने मुँह से चूमने लगता।

वैसे उस मास्टर में स्टैमिना काफी था क्यूंकि लगभग 8 मिनट से वो मेरी चूत में तेज़ धक्के लगाए जा रहा था लेकिन तब भी वो अब तक झड़ा नहीं था।
जबकि इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी।

लगभग 12 मिनट चोदने के बाद जब वो झड़ने वाला था तो उसने धक्कों को थोड़ा और तेज़ करते हुए कहा- सॉरी मैडम! मुझे बाहर गिराने की आदत तो है नहीं! इसलिए आपके अंदर ही गिरा रहा हूँ।
मैं कह भी क्या सकती थी! इसलिए धीरे से हां में सिर को हिलाकर सिर नीचे कर लिया।

देखते ही देखते टीचर ने मेरे अंदर धार छोड़ना शुरु कर दिया और लगभग एक मिनट तक उसने अपना माल मेरी झांट वाली चुत में छोड़ता रहा। उसका सारा माल मेरे अंदर गिरने के बाद उसने एक हल्की सी आहहह भरी और मेरी चूचियों पर सिर रख दिया और अपने हाथ से अबकी बार प्यार से हाथ फेरने लगा।

हम दोनों ऐसे ही एक मिनट तक पड़े रहे। फिर वो अलग हुए तो मैंने देखा कि मेरी काली झांटों के बीच से एक सफेद धार बह रही है।

मैं उसे अपने हाथ से छूने ही जा रही थी कि तभी मास्टर एक कपड़ा ले आए और मेरे हाथ को अलग करके मेरी चूत पर कपड़ा लगाकर उसे पौंछने लगे।
तभी उन्होंने मेरी ओर देखा. तो मैं उन्हें देख मुस्कुरा दी.
उन्होंने भी मुस्कुरा कर अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरी एक चूची दबा दी।

फिर उठकर टीचर ने कहा- अब आप निश्चिंत रहे। आपका काम हो जाएगा। दो दिन बाद प्रिंसिपल साहब आ रहे हैं। मैं उनसे कहकर आपके बेटे का दाखिला करवा दूँगा।

वो कपड़े पहनने लगे और मैं भी कपड़े पहनकर वहां से चल दी।

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