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उसका लन्ड मेरे मुंह में था

दोस्तो, मेरा नाम परिधि सारस्वत है और मैं दिल्ली से हूं।

इससे पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देती हूं। मेरी उम्र 26 साल है। मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है। मेरा रंग काफी गोरा हैं और शरीर भरा पूरा है। मेरा फिगर 33-28-33 का है। मतलब लड़कों की भाषा में मैं एक शानदार माल हूं।

तो चलिए अब आते हैं कहानी पर।

यह बात आज से लगभग 2 साल पहले की है। राहुल नाम का लड़का हमारा पड़ोसी है। हमारे परिवारों के बीच काफी आना – जाना है। स्कूल के समय में भी मैं और राहुल एक ही स्कूल में थे।

हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन हमारे बीच कभी भी ऐसा – वैसा कुछ नहीं था। हम दोनों आपस में खूब बातें करते थे और मज़े करते थे। मुझे भी राहुल के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था।
वो लगभग रोज मेरे घर पर आता था और कई बार मैं भी उसके घर पर चली जाती थी। लेकिन इससे हमारे परिवार को कभी भी कोई दिक्कत नहीं थी।

स्कूल के बाद हम दोनों ने अलग – अलग कॉलेज में एडमिशन ले लिया था।

एक दिन मेरी कॉलेज की छुट्टी थी और मेरी नानी की तबियत खराब हो गई थी। तो मेरे मम्मी – पापा नानी से मिलने के लिए चले गए। अब मैं घर पर अकेली रह गई थी।

कुछ देर तो मैं टाइम पास करती रही लेकिन फिर मैं भी बोर होने लग गई। तो मैंने सोचा कि क्यों न राहुल को बुला लिया जाए। इससे मेरा टाइम पास भी हो जाएगा और स्कूल की पुरानी यादें भी ताजा हो जायेंगी।

तो मैंने राहुल को फोन किया कि मैं आज घर पर अकेली हूं और बोर हो रही हूं। तुम मेरे घर पर आ जाओ और फिर गप्पे मारेंगे।
उसने कहा- ठीक है, मैं 15-20 मिनट में आता हूं।
मैं अब राहुल का इंतजार करने लगी।

लगभग 15 मिनट बाद घर की डोर बेल बजी। मुझे पता था कि राहुल है तो मैं गई और गेट खोल दिया और राहुल को अंदर बुला लिया।
राहुल अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया।

फिर मैं उसके लिए पानी लाने किचन में चली गई। मैंने उस दिन गहरे गले का टॉप पहना था।

जैसे ही पानी देने झुकी तो मैंने देखा कि राहुल की नजरें टॉप के अंदर झांक रही है।
मैंने ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए जल्दी से उसे पानी दिया और उसके बगल में सोफे पर बैठ गई।

फिर उसने वही पुरानी स्कूल कि बातें शुरू कर दी और हम दोनों गप्पें मारने लगे।

फिर कुछ देर बाद मैंने ही उससे पूछ लिया- ओय हीरो … कोई गर्लफ्रेंड वगेरह बनाई क्या?
तो वो बोला- नहीं यार … और तूने?
मैंने भी कहा- नहीं।

फिर वो मज़ाक करते हुए बोला- तो तू ही बन जा मेरी गर्लफ्रेंड।
तो मैंने भी हंसते हुए कह दिया- तेरी गर्लफ्रेंड बनेगी मेरी जूती।

वो मज़ाक-मज़ाक में मुझे तकिए से मारने लग गया और मैं भी उसे तकिए से मारने लग गई।

इसी बीच मुझे एहसास हुआ कि वो खेलते – खेलते मेरे बूब्स छू रहा है।
मज़ा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मैंने झूठा गुस्सा दिखाते हुए उसे खुद से दूर कर दिया।
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप बैठ गया।

फिर शाम को मेरे मम्मी – पापा आ गए और सब कुछ पहले की तरह चलना शुरू हो गया। मैं भी कॉलेज जाने लग गई। इस बीच मेरी राहुल से बहुत ही कम बात हुई या यूं कहें बात हुई ही नहीं।
बस ऐसे ही 2 महीने बीत गए पता ही नहीं चला।

अब मेरा एक पेपर भी आ गया था लेकिन ये पेपर जयपुर था। पापा को ऑफिस का काम था तो पापा बोले- मैं तो नहीं जा सकता हूं.
तो मम्मी बोली- अकेले नहीं जाना है।

अब बहुत सोच – विचार के बाद ये तय हुआ कि पापा राहुल के घरवालों से बात करेंगे कि राहुल मुझे जयपुर पेपर दिलवा कर ले आए।

तो पापा ने अगले दिन राहुल के पापा से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं। राहुल की भी छुट्टियां चल रही हैं। वो घर पर फ्री ही रहता है। वो परिधि के साथ जयपुर चला जाएगा।
तो अब तय हो चुका था कि राहुल मेरे साथ जयपुर जा रहा है।

मैं अब ये सोच रही थी कि उस दिन के बाद अब मैं कैसे राहुल से बात करूंगी? शायद मैंने उसे कुछ ज्यादा ही कह दिया था।
खैर जो होगा देखा जायेगा।

पापा ने कहा- तुम दोनों ट्रेन से चले जाना, सेफ भी रहेगा।

लेकिन उन दिनों जयपुर जाने वाली ट्रेन काफी लेट चल रही थी। तो सबने मिलकर ये फैसला किया कि हम स्लीपर बस से जयपुर जाएंगे।
पापा ने हमारी डबल स्लीपर की टिकट बुक करवा दी थी।

अगले दिन शाम को पापा हम दोनों को बस में बैठा आए। मैं खिड़की की और बैठी थी और राहुल मेरे बगल में ही बैठ गया।

मुझे बस में नींद नहीं आ रही थी तो मैं फोन देखते हुए टाइम पास कर रही थी।
तभी राहुल ने पूछा- पेपर की तैयारी कैसी है?
तो मैंने कहा- ठीक – ठाक ही है।

इस प्रकार हम दोनों में थोड़ी बहुत बातें शुरू हो गई थी।

कुछ देर बाद मैं फोन बन्द करके सो गई। हालांकि मुझे नींद नहीं आ रही थी बस मैंने आँखें बन्द की हुए थी।
उधर राहुल भी सो गया था।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि राहुल का हाथ मुझे टच कर रहा है।
मैंने सोचा कि जगह कम है इसलिए हो सकता है। मैंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। मैं बस दूसरी ओर मुंह करके लेट गई।

फिर कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि राहुल का हाथ मेरी कमर पर है लेकिन मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
उसका हाथ धीरे – धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया। अब उसका हाथ मेरी गान्ड पर था। वो मेरी गान्ड पर गोल – गोल हाथ घुमा रहा था। शायद उसे लगा कि मैं सो गई हूं।

लेकिन अब मुझे भी उसका टच अच्छा लग रहा था। कुछ देर बाद वो मुझसे सटकर चिपक गया और सोने का नाटक करने लग गया।
मैंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अब उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर लाया और धीरे – धीरे मेरे बूब्स मसलने लगा। अब मेरे अंदर की भी अन्तर्वासना जाग चुकी थी। मेरे निपल्स खड़े होने लग गए थे और मैं अपनी सिसकारियां बड़ी मुश्किल से रोक रही थी।

धीरे – धीरे उसने अपने हाथ का दवाब बढ़ा दिया और अपने दूसरा हाथ मेरी चूत के उपर ले आया और मेरी चूत सहलाने लग गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड को छू रहा था। मेरी गान्ड उसके लन्ड के कड़कपन को महसूस कर रही थी.

अब तक उसे भी पता चल गया था कि मैं बस सोने का नाटक कर रही हूं।
वो मेरे बूब्स को जोर से मसलते हुए बोला- परिधि आई लव यू!
तो मैं भी बोल उठी- आई लव यू।

अब तो उसे खुली छूट मिल चुकी थी। अब वो जोर – जोर से मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरी चूत सहला रहा था। मेरी भी सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थी। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी पैंट में डाला और मेरे चूत के दाने को सहलाने लगा।

मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उसका लन्ड मसलने लग गई थी। फिर उसने मुझे अपनी तरफ मोड़ा और मेरे होंठ चूमने लग गया और मैं भी उसका साथ देने लग गयी।

फिर उसने मेरी पैंट और टी-शर्ट भी निकाल दी। अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। फिर वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लग गया और मेरी चूत में उंगली करने लगा। मैंने भी उसकी शर्ट और पैंट निकाल कर उसे एकदम नंगा कर दिया और उसका लन्ड आगे – पीछे करने लगी।

उसका लन्ड काफी बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी और मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टांगें ऊपर की ओर मेरी चूत पर अपना मुंह लगा दिया। अब तो मैं आपे से बाहर हो गई थी। वो लगातार मेरी चूत के दाने को चाट रहा था और मैं उसके सिर को जोर – जोर से दबा रही थी।

कुछ ही देर बाद मेरी चूत में से गर्म – गर्म लावा निकलने लगा और राहुल उसे पी भी गया।

अब मैं शांत हो चुकी थी लेकिन उसने मेरी चूत को चाटना जारी रखा।
कुछ देर बाद मैं फिर से गर्म होने लग गई।

अब वो मेरे ऊपर आ गया और अपना बड़ा लन्ड मेरे होंठों के पास ले आया। वो अपने लन्ड से मेरे होटों को टच करने लगा तो मैं समझ गई और मैंने अपना मुंह खोल दिया। अब उसका लन्ड मेरे मुंह में था और मैं जोर – जोर से उसका लन्ड चूस रही थी।

उसका पूरा लन्ड गीला हो चुका था। अब राहुल ने अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला और उसे मेरी चूत पर मसलने लग गया।
तो मेरा बहुत ही बुरा हाल था। मैंने उसे आंखों से इशारा किया और उसने अपने लन्ड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया और मुझे अचानक दर्द हुआ।

मैंने उसे वहीं रोक दिया।

फिर वो मेरे निप्पल सहलाने लगा और होंठ चूसने लग गया।

अचानक ही उसने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लन्ड मेरी चूत में था।
मेरी आंखों से आंसू निकलने लग गए थे लेकिन वो मेरे होंठ चूस रहा था इसलिए मैं चीख नहीं सकी।

अब उसने धीरे धीरे अपने लन्ड को मेरी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया. फिर मुझे भी मज़ा आने लग गया। मैं भी उसका साथ देने लग गई। वो कभी मेरे बूब्स चूसता तो कभी होंठ।
लगभग 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए।

फिर जयपुर पहुँच कर हमने एक होटल में कमरा लिया. हमने रात को होटल के कमरे में एक बार और चुदाई की.

हम दोनों का ही मन था कि हम पूरी रात चुदाई करते रहें लेकिन अगले दिन मैंने पेपर देना था तो सोना भी जरूरी था.

और सुबह उठ कर मैं तैयार होकर पेपर देने गयी.

पेपर के बाद हमने होटल छोड़ दिया और बस से वापस दिल्ली आ गए।

उसके बाद से मुझे भी अपनी चुदाई में मजा आने लगा था, मुझे चुदाई की लत लग गयी थी. राहुल तो हर वक्त मुझे चोदने को तैयार रहता था. तो हमें जब भी मौका मिलता तो हम चुदाई कर लेते थे।

एक बार राहुल ने मेरी गान्ड भी मारी थी। लेकिन वो कहानी किसी और दिन।

फिर राहुल के पापा का ट्रान्सफर रांची हो गया। तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हो रही है।

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मेरा जिस्म

मेरे दोस्तो, मेरा नाम सिया है। मेरा बदन काफ़ी खूबसूरत है, रंग गोरा है और उभार भरा भी। मैंने हमेशा से ही अपने शरीर का बहुत ख्याल रखा है।
अपने शरीर को सुंदर और स्वस्थ रखने के लिए मैं सब कुछ करती रही हूँ। मेरे शरीर बहुत लुभावना है यही कारण है कि सभी हमेशा मेरी तरफ़ आकर्षित रहते रहे हैं।

मेरे पीछे हमेशा से ही सभी लड़के दीवाने रहे हैं। कईयों ने मुझे प्रोपोज़ भी किया। मैं भी अब तक कई लड़कों के साथ रिश्ते में रह चुकी हूँ. जो मुझे पसंद आये और उनमें से कई के साथ सेक्स भी कर चुकी हूँ।

अब तक मैं सेक्स के काफ़ी अनुभव कर चुकी हूँ. मुझे इसमें बहुत मज़ा आता है। आज मैं आप लोगों को अपने कई किस्सों में से एक किस्सा बताने जा रही हूँ जो बेहद यादगार है।

मैं पहली बार यहाँ अपनी सेक्सी स्टोरी इन हिंदी लिख रही हूँ।

यह बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में थी। मैं एक विवेक नाम के लड़के से बात किया करती थी जो मुंबई में रहता था। हम काफ़ी वक्त तक एक-दूसरे से बात करते थे।

हम पहली बार तब मिले थे जब वो मेरे पड़ोस में अपने रिश्तेदारों के घर आया था। पहले हम एक-दूसरे के ज्यादा करीब नहीं आए थे.

मेरी पड़ोस की सहेली जो कि उसकी बहन लगती थी उसकी वजह से हम मिले और हमारी दोस्ती हुई। फिर हम एक साथ घूमने लगे, बातें करने लगे और हम करीब होते गए।
तब से ही हम फोन पर भी बात करने लगे।

वो मुझसे उम्र में थोड़ा बड़ा था पर हमें कोई दिक्कत नहीं थी। जब हम मिले थे तब मैं उस वक्त बारहवीं में थी और उसकी पढ़ाई खत्म होने वाली थी. वो अपने होटल और रेस्टोरेंट के बिजनेस को आगे बढ़ाने वाला था।

कुछ दिन बाद वो वापस चला गया. फिर हम सिर्फ फोन पर बात करने लगे।

एक दिन बात करते हुए उसने मुझे मिलने के लिए पूछा. हम बहुत वक्त से नहीं मिले थे।
मैंने उसे कहा कि वो मेरे पास आ जाए.
तो उसने कहा कि वो नहीं आएगा बल्कि मैं उसके पास आऊँ।

उसकी पढ़ाई खत्म हो गई थी और अब वो बिजनेस सँभालता था।

तो मैं उससे मिलने उसके पास चली गई।

मेरे मम्मी-पापा मुझे कुछ करने से रोकते नहीं थे. पर फिर भी उनकी तसल्ली के लिए मैंने उन्हें कह दिया कि मैं कालेज ट्रिप पर जा रही हूँ.
और मेरी सहेलियों से कहा कि वो सब संभाल लें।

फिर मैं विवेक के पास चली गई। वो मुझे लेने एयरपोर्ट आया। हम एक-दूसरे को देखते ही जोड़ से गले लग गए।

वो मुझे लेकर अपने एक होटल ले गया और मुझे एक शानदार सा कमरा रहने के लिए दिया।

उसने बताया कि ये उसके सभी होटलों में सबसे शानदार कमरा है. इसे उसने मेरे लिए स्पेशल सजाया है।
वो कमरा बहुत खूबसूरत था और साथ ही वहाँ कई गिफ्ट थे जो वो मेरे लिए लाया था।

उसने मुझे स्पेशली एक वेस्टर्न शोर्ट ड्रेस दी। फिर उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और हम किस करने लगे।
किस करते हुए ही उसने मुझे उठा लिया और बेड पर ले गया।

हमने एक-दूसरे को जकड़ रखा था। काफ़ी देर तक हम लिपटे रहे और एक-दूसरे के साथ जीभ और होंठों से खेलते रहे।

काफ़ी देर तक किस करने के बाद उसने मुझे आराम करने कहा और कहा कि शाम को मैं उसकी दी ड्रेस में तैयार रहूँ।
फिर मैंने थोड़ा लंच किया और थोड़ी देर आराम किया।

शाम को मैं उसी ड्रेस को पहन कर तैयार हो गई।

थोड़ी देर में विवेक आया. वो तो मुझे बस देखता ही रह गया।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो वो मेरी तारीफ़ करने लगा।

फिर उसने मुझे फूल दिये, मैंने फूल ले लिये। फिर वो मुझे अपने साथ टैरेस पर ले कर गया.
मुझे कुछ समझ नहीं आया कि वो मुझे टैरेस पर क्यों ले जा रहा है।

पर मैंने वहाँ जाकर देखा कि विवेक ने वहाँ पर बहुत तैयारी की है। मैं ये सब देख कर बहुत हैरान थी और बहुत खुश भी।
वहाँ ऊपर से नज़ारा बहुत खूबसूरत था।

हमने डिनर किया. वहाँ काफ़ी रोमांटिक म्यूजिक बज रहा था जिस पर हमने साथ में डांस किया।
फिर उसने मुझे ड्रिंक दिया और हम नज़ारे देखने लगे और उस वक्त का मज़ा लेने लगे।

कुछ देर बाद उसने अचानक मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और टैरेस की दूसरी तरफ़ ले गया.
वहाँ उसने और भी तैयारी की थी. मुझे देखते ही सब समझ में आ गया।

वहाँ एक बड़ा सा बेड था और बहुत खूबसूरत सजावट थी।
मुझे ऐसा लगा कि जैसे आज मेरी सुहागरात की चुदाई कहानी लिखी जायेगी!

वो मुझे बेड पर ले गया और मुझे चूमने लगा. वो पूरे जोश में लग रहा था। वो धीरे-धीरे मेरे पूरे शरीर को चूमने लगा।

मुझे चूमते हुए वो मेरे कपड़े भी उतारने लगा। फिर वो मेरे बूब्ज़ चूसने लगा। मेरे बूब्ज़ देख कर तो वो पागल ही हो गया था. वो कभी मेरे बूब्ज़ को कभी आराम से सहलाता, चूमता और कभी जोर से दबा देता।

इन सब में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं जैसे अपना हनीमून मना रही थी. मैं उसका पूरा साथ दे रही थी।
जोश में मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन तोड़ दिये और शर्ट उतार दी।

फिर उसने मेरे पूरे कपड़े उतार दिये सिर्फ पैंटी को छोड़कर!
और वो धीरे-धीरे मेरे बदन को चूमता और चाटता हुआ नीचे बढ़ता गया।

वो मेरे पेट और नाभि को चाटने लगा. ये सब मुझे पागल कर रहे थे। वो मेरी जांघों से होता हुआ मेरे पैरों तक पहुँच गया और मेरे पैरों की उँगलियाँ चूसने लगा।

फिर वो मेरे जांघों को सहलाने लगा और फिर मेरी टाँगों को खोल कर मेरी चूत के आसपास चूमने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा।

मेरी पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी।

फिर उसने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी चूत पर उँगलियाँ टहलाने लगा. फिर मेरी चूत को उसने अपने मुँह में भर लिया और उसे चाटने लगा।
वो अपनी जीभ से मेरी चूत को अंदर से चाटने लगा।

फिर उसने अपनी एक उँगली भी मेरी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा।

मैं अपना आपा खो चुकी थी. मैं पूरे उफ़ान पर थी. मेरे मुँह से बस सिसकारियाँ और आहें निकल रही थी। मैंने अपने पंजों से उसके सर को अपनी चूत में पूरा जकड़ लिया।

थोड़ी ही देर में मेरी चूत से पानी झड़ गया और मैं निढाल हो गई।
मेरे शरीर में जैसे कोई ताकत नहीं थी।

पर विवेक का जोश कहीं नहीं गया था. वो अब भी मेरे जिस्म को चूम रहा था।

उसने मुझे उल्टा किया और मेरे बदन को पीछे से चूमने लगा. और फिर मेरी गाँड चाटने लगा।

कुछ देर तक ऐसे ही मेरे पूरे बदन और बूब्ज़ को चूमता रहा. और फिर मुझे बांहों में जकड़ कर मेरे होठों को चूमने लगा।

धीरे-धीरे मेरा भी जोश लोटने लगा और मैं भी उसे चूमने लगी।

अब मेरी बारी थी. मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ कर उसे चूमने लगी। फिर उसका जिस्म चूमते हुए मैं नीचे गई और उसका पैंट उतार दिया। उसके अंडरवियर के अंदर लंड का उभार मुझे नशा दिला रहा था।
मैंने ऊपर से ही उसके लंड को काटना और चाटना शुरु कर दिया।

उसका लंड मुझे काफ़ी दमदार लग रहा था।

फिर मैंने उसका अंडरवियर उतारा तो उसका लंड एकदम सलामी देने खड़ा हो गया। उस वक्त तक मैंने इतना अच्छा लंड नहीं देखा था। मुझे तो उस लंड से प्यार हो गया। मैंने उसे चूसना शुरु कर दिया, उसका टेस्ट भी बहुत अच्छा था।

मैं उसके लंड और बाल्स को चूस रही और वो सिसकारियाँ भर रहा था।

फिर वो जोश में आ के मेरे मुँह को ही चूत की तरह चोदने लगा। वो अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड को पूरा मेरे मुँह में धकेलने लगा। उसका लंड मेरे गले के अंदर तक जा रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करने के बाद उसने मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ दिया।

फिर कुछ देर हम पड़े रहे और किस करते रहे।

कुछ ही देर में उसका लंड फिर से तन के खड़ा हो गया। मुझे समझ आ गया कि अब मेरी चूत की खैर नहीं।

वो उठा. उसने मेरी टाँगों को खोल दिया. फिर मेरी चूत पर उँगलियाँ फेरने लगा।
फिर उसने मुझे उठा के एक किस किया. और तुरंत ही अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर अंदर-बाहर करने लगा. इस तरह उसने मेरे मुँह से अपना लंड गीला कर लिया.

तब मेरी टाँगें खींचकर उसने मेरी चूत पर थूका. फिर लंड टिका कर जोर से धक्का मारा और अपना लगभग आधा लंड अंदर डाल दिया।
इस अचानक और जोरदार वार से मेरी हालत खराब हो गई. मेरे मुँह से जोरदार चीँख निकल गई।

उसने मुझे पूरी तरह से जकड़ लिया और अपने होंठों से मेरे होंठों कैद कर लिया।

अभी तक मैं पहले वार से उभरी भी नहीं थी. उसने फिर एक जोरदार झटका देकर अपना पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया।

मैं उसकी बांहों में बेबस पड़ी थी और चाह के भी कुछ नहीं कर पा रही थी।

उसका बड़ा सा लंड मेरी चूत चीरता हुआ अंदर चला गया. मैं दर्द से तड़प रही थी पर कुछ नहीं कर पा रही थी।
मेरी चीख भी उसके होंठों तले दबी रह गई।
मैंने उससे पहले इतना बड़ा कभी नहीं लिया था।

फिर उसने आराम से धीरे-धीरे लंड बाहर निकलना शुरु किया तो मेरी जान में जान आने लगी.
पर लंड निकालते ही उसने फिर अपना लंड पूरी ताकत से अंदर डाल दिया।

अब मेरी हालत और बुरी हो गई। मेरी आँखों से आँसू आ गए।

उसने फिर तीन-चार बार ऐसा किया. फिर मुझे अच्छा लगने लगा। अब मैं भी उसका साथ देने लगी।

धीरे-धीरे उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी और मुझे तेज़ी से चोदने लगा। वो बेड भी अपनी उछाल की वजह से हमारी चुदाई में मदद कर रहा था। उसका लंड मेरी चूत में काफ़ी अंदर तक जा रहा था जितना अंदर पहले कोई नहीं पहुँचा था।

मैं इतने में झड़ गई. पर वो अभी भी लगा हुआ था।

फिर उसको नीचे लिटा के मैंने उसके ऊपर बैठ के घुड़सवारी की. उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना के चोदा।

फिर उसने मुझे उल्टा लिटाया और मेरे नीचे तकिया रख दिया. उसने मेरी गांड ऊँची की और पीछे से मेरी चूत चोदने लगा।

मैं उस बेड और विवेक के लंड के बीच फंस गई थी. विवेक पूरी ताकत से मेरी चूत को चीर रहा था. और वो बेड की उछाल जो मुझे वापस लंड की तरफ़ धकेल रही थी।

इस तरह मैं कई बार झड़ गई और वो भी मेरे अंदर ही झड़ गया।

पूरी रात हमने कई बार चुदाई की. उसने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदा।

सुहागरात की चुदाई के बाद न जाने कब हमारी आँख लग गई।

सुबह सूरज की चमकती रोशनी से मेरी आँख खुली। दिन निकल आया था. हम खुले टैरेस पर बिना कपड़ों के सो रहे थे. पर ऊँची बिल्डिंग होने की वजह से किसी के देखने का डर नहीं था।

विवेक मेरे ऊपर सोया हुआ था और अभी भी उसका लंड काफ़ी सख्त था. उसके लंड का सर अभी भी मेरी चूत में था।

मैंने उसे किस कर के उठाया. उसने मुझे भी किस करना शुरु कर दिया और लंड हल्के से अंदर-बाहर करने लगा।

कुछ दस-पंद्रह मिनट के बाद वो मुझे अपनी बांहों में उठा कर कमरे में ले गया।

रात भर की चुदाई के बाद मेरा जिस्म दर्द से टूट रहा था।

फिर हम साथ में नहाए और कुछ खा पीकर के कुछ देर सो गये।

मैं वहाँ पाँच दिन रही और इस बिना शादी के हनीमून के दौरान हमने खूब सेक्स किया.

साथ ही उसने मुझे पूरा शहर घुमाया. हमने नाइट पार्टी की, क्लब और बार वगैरा गये और बहुत मस्ती की।

ये मेरे यादगार पलों में से एक है।

आखिरी दिन मेरे लौटने से पहले भी हम कमरे के दरवाजे से लग कर एक-दूसरे से लिपट कर काफ़ी वक्त तक किस करते रहें।

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मेरी गीली चूत

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम अक़्सा है और मैं महाराष्ट्र की रहने वाली हूँ. यह मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स स्टोरी हिंदी में है. मैं इस वक़्त 21 साल की हूँ और मेरी शादी अभी हाल ही में हो गयी है. मेरा फिगर 36-26-36 का है और मैं काफी गोरी भी हूँ.

ये बात तब की है, जब मैं पढ़ती थी. मेरे घर में मम्मी पापा, बड़ी बहन और बड़ा भाई है. पर ये कहानी मेरे चचेरे भाई शिजू की है. वो मुझसे 3 साल बड़ा है और मेरे ही साथ पढ़ता था. पढ़ने के बाद हम साथ में घर वापस आते. हम दोनों घर पर ही खेलते थे.

मेरा घर काफी बड़ा है और मैं शुरू से ही लड़कों के साथ खेलती आई हूँ. जब सब लोग एक जगह जमा हो जाते, तो हम लोग छुपन छुपाई खेलते थे. उसमें शिजू के अलावा मेरी एक सहेली नाज़ भी थी. कुछ और लड़के भी हमारे खेल में शामिल होते थे. किसी एक की बारी छिप हुए बाकी को ढूँढने की आती थी और बाकी सब लोग छुप जाते थे.

शिजू हमेशा मेरे पास ही छिपता था और छिपने के बाद वो मेरे साथ मेरे दूध दबाना … मुझे उल्टा लिटाना, मेरे ऊपर चढ़ जाना. मेरी टांगें फैलाकर सलवार के ऊपर से खुद को घिसना … उसका हमेशा का काम था.

उसके इन सब कामों में मुझे भी बहुत मज़ा आता था, इसीलिए मैं उसे मना भी नहीं करती थी.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त भी मेरे मम्मे बाकी लड़कियों से काफी बड़े थे. जिनको शिजू दबाता ही रहता था.

मेरा कुछ न बोलना, उसकी हिम्मत बढ़ने का बहुत बड़ा कारण था. वो मुझे नीचे लिटाकर मेरी सलवार निकालकर मेरी चूत को चाटने भी लगा था. इसमें तो मुझे और भी सुकून मिलता था.

कई दिन तक चूत चाटने के बाद अब वो मुझे भी अपना लौड़ा चूसने के लिए कहने लगा था. पहले पहल तो मैंने मना किया, पर बाद में कुछ दिन बाद मैं भी उसका लंड चूसने लगी. हम दोनों खुद ब खुद सिस्टी नाइन का पोज सीख गए थे. शायद ये कुदरत ही सब सिखा देती है.

मैं उसके लंड की तरफ अपना मुँह कर देती और वो मेरी चुत पर अपना मुँह लगा कर जीभ से मेरी चुत को मस्ती से खूब चाटता. मेरी चूत को काफी देर देर तक चाटने के बाद उसने मुझे इससे आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया था.

जब उसकी जीभ मेरी चुत को गरम कर देती थी, तो मुझे खुद उसके लंड की जरूरत होने लगती और मैं सीधे होकर उसका लंड पकड़ने लगती.

वो मेरी सलवार को मेरी टांगों से पूरी निकालकर अलग कर देता और मेरी चूत में अपना लंड चुभाने लगता. मुझे उसके लंड से एक अलग सी तकलीफ होती, लेकिन उस टाइम मैंने उसे कभी पूरा लंड अपनी चुत के अन्दर डालने नहीं दिया.

सब कुछ ऐसे ही चलता रहा. वो मुझे एक औरत की तरह दबाता और मसलता रहा. मेरे सगे भी ने मेरे साथ फर्स्ट टाइम सेक्स … आधा अधूरा ही सही करके मेरी वासना की आग भड़कायी.

एक दिन हम ऐसे ही पलंग के नीचे छुपे थे, तब एक असलम नाम के लड़के ने ये सब देख लिया, वो इस समय राज दे रहा था, मतलब इस समय उसकी बारी सभी छिपे हुए को खोजने की थी. जब असलम ने हमको देखा, उस वक़्त मेरी सलवार निकली हुई थी और शिजू मेरी चूत चाट रहा था.

उसे देखकर मैं डर गई और खुद को छिपाने की कोशिश करने लगी. वो मेरे पास आकर मेरे मम्मों को दबाने लगा. शिजू ने भी उससे कुछ नहीं कहा. एक तरह से वे दोनों मेरे साथ मजा लेने लगे थे.

मैं भी चुप होकर उन दोनों से अपने मम्मों को मिंजवाती रही. उन दोनों ने मेरा कोई विरोध नहीं देखा, तो वे दोनों खुल कर मुझे ऐसे ही दबाते और मसलते रहे. अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था. एक तरह से ये हो गया था कि अब मैं उन दोनों के लिए एक जुगाड़ बन गई थी.

मुझे भी चूंकि मजा आने लगा था, तो मैंने भी कुछ कहना ठीक नहीं समझा. अब हम तीनों हमेशा साथ में छुप जाते और वो दोनों मुझे पागलों की तरह मसलते दबाते रहते.

ऐसा कुछ टाइम तक चला. इस बीच उन दोनों ने मेरी चुत में लंड पेलने की कोशिश भी की, मगर वो मैंने नहीं होने दिया.

फिर मैं गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आ गयी. नानी के घर पर मेरी बहुत सारी सहेलियां थीं.

हम सब नानी के घर के पीछे के खेत में खेलते थे. हमारे बीच में सिर्फ एक लड़का अरबाज था और बाकी बहुत सारी लड़कियां थीं. वहां पर हम आपा बाजी वाला खेल खेलते थे. अरबाज मेरा या कभी मेरी सहेली का दूल्हा बनता और उसके साथ सोना और उसके लंड को छूना … बस इतना ही चलता रहा.

फिर एक दिन मैं खेत में खेलने के लिए गयी, तब वहां पर एक भाईजान थे. उनका नाम मोहसिन था. मोहसिन भाई मुझे हमेशा चिढ़ाया और छेड़ा करते थे. वो उसी एरिया में रहते थे.

एक दिन मैं उनके पास गई, वो एक झाड़ से टिक कर बैठे थे. उन्होंने कुछ देर बैठने के बाद मुझे अपनी गोदी में बैठने के लिए कहा … मैं झट से बैठ गयी. वो मुझे सहलाते हुए प्यार करने लगे. फिर वो मुझसे आगे पीछे होने के लिए कह रहे थे … तो मैं होने लगी. इसमें एक मस्त रगड़ हो रही थी. जिससे मुझे भी मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला. भाई का लंड कुछ 6 या 7 इंच लंबा रहा होगा. मैं लंड देखने लगी तो उन्होंने मुझे हाथ में लंड पकड़ा दिया. मुझे लंड सहलाने मजा आता था, तो मैं उनके लंड को सहलाने लगी. भाई का लंड खड़ा हो गया.

अब उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी और मुझे लिटा दिया. फिर भाई ने अपनी टांगें सीधी की और मुझे अपने मुँह की तरफ मुँह करके अपने ऊपर बिठा लिया. इससे मेरी नंगी चूत उनके लंड से टकराने लगी. मुझे गर्मी चढ़ने लगी.

भाई भी अपने नंगे लंड के ऊपर मेरी चुत लगाने लगे. इस पोजीशन में मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था. मैं खुद अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए अपनी चुत को जोर जोर से भाई के लंड पर घिसती गयी.

नीचे लंड चुत की घिसाई चल रही थी और ऊपर भाई मुझे चूम रहे थे. मैंने भी उनके मुँह को चूमा, तो भाई ने मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा दिया. वो मुझे किस करने लगे.

मेरे होंठों को भाई के होंठों का स्वाद मिला तो मैं मदमस्त हो गई और मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया.

अब भाई मेरी चुत पर लंड रगड़ रहे थे, मेरे होंठों को मस्ती से चूस रहे थे और अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहे थे. मैं एकदम से चुदासी हो गई थी.

इतने प्यार से अब तक मुझे किसी ने गरम नहीं किया था. साथ के लौंडे तो अब तक मेरी चूचियों या मेरे चूतड़ों का भरता ही बनाते रहे थे. मैं आज खुद को भुला चुकी थी और भाई के साथ मस्ती करने में सब कुछ बिसरा चुकी थी.

कुछ देर बाद उन्होंने मेरे चूतड़ों को पकड़ कर मुझे जोर जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

इससे मेरी चुत एकदम से भट्टी सी तपने लगी थी. मैं सोच रही थी कि आज यदि भाई मेरी चुत में लंड पेलेंगे, तो मैं लंड अन्दर ले ही लूंगी. फर्स्ट टाइम सेक्स का मजा लूंगी.

मगर ऐसा नहीं हुआ … मेरी चुत से लंड की रगड़ से कुछ ही देर बाद उनके लंड से कुछ सफेद सा रस निकल गया. वो पूरा चीकट सा रस उनके पैरों पर … और मेरी चुत की हल्की हल्की झांटों में लग गया था.

भाई के लंड से पानी निकलते ही वो एकदम से थक से गए और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगे. मैं भी उनकी छाती से चिपक कर मजा लेने लगी.

फिर कुछ पल बाद वो उठने को हुए, तो मैं भी उठ गई और मैंने अपनी सलवार पहन ली. कपड़े ठीक करके मैंने भाई को देखा और मुस्कुरा कर घर चली गयी.

फिर एक दिन मैं अपने मुँह बोले मामू के घर गयी. उनका घर नानी के घर से कुछ थोड़ा दूर ही था. मैं वहां पर गई तो उनके घर पर कोई नहीं था.

मेरे ये मामू कुछ 23 या 24 साल के थे. मैं उनके घर खेल रही थी. वो अपने पलंग पर लेटे हुए थे. तभी उन्हें पता नहीं क्या हुआ … उन्होंने मुझे पास बुलाया और अपने ऊपर बिठा लिया. मैं उस वक़्त ठीक उनके लंड के ऊपर बैठी थी. वो मुझे आगे पीछे करने लगे. न उन्होंने अपने कपड़े उतारे थे … न मेरे, बस ऐसे ही कुछ देर अपने लंड पर मुझे हिलाते रहे.

मेरी चूचियां उनको मस्त कर रही थीं. मुझे भी उनका लंड अपनी चुत में गड़ता सा महसूस हो नरहा था. मैं खिलखिलाते हुए मामू के लंड पर कूद रही थी.

उन्होंने मुझसे पूछा- मजा आ रहा है?
मैं हां कहा.
तो बोले- अभी और मजा आएगा.

ये कह कर अपने पलंग पर ही मामू ने मुझे अपने नीचे उल्टा लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गए. फिर मामू ने मेरी गांड के ऊपर अपना लंड पेंट के ऊपर से रगड़ना चालू कर दिया. कुछ देर लंड घिसने के बाद वो मेरे ऊपर अपना पूरा वजन डाल कर थम से गए. शायद मामू झड़ गए थे.

जब मुझे उनके वजन से तकलीफ हुई, तो मैं कोशिश करके मामू के नीचे से निकली और वहां से घर चली गयी.

इस तरह कई लोगों ने मुझे अपने लंड के नीचे दबाया था. मुझे वो सब ठीक तरह से याद भी नहीं है कि किस किस ने मेरे जिस्म के साथ ऊपर ऊपर से खेला था.

फिर मैं एग्जाम के बाद अपनी खाला के घर गयी. वहां पर मुझे एक लड़का समीर दिखा, जो कि बहुत ही खूबसूरत था. वो मुझसे उम्र में 4-5 साल बड़ा था. पर मैं भी भरी पूरी छमिया बन चुकी थी, ये सब मेरे जिस्म के साथ हुई छेड़छाड़ के कारण हुआ था.

आप यकीन नहीं करोगे, उस वक़्त मेरी बॉडी किसी भी तरह से समीर के जिस्म के लिए कमसिन लड़की जैसी नहीं थी. उस वक़्त मेरे बूब्स 32 के हो गए थे और गांड कुछ 34 की थी. वो लड़का समीर भी जैसे मेरा दीवाना हो गया था.

फिर ऐसे ही कुछ दिन एक दूसरे को देखने के बाद उसने मुझे अपना नंबर दिया. मुझे भी समझ आ गया था कि समीर मुझे प्यार करना चाहता है.

अब चूंकि मुझे भी अपने जिस्म की आग सताने लगी थी और मैं अब किसी से भी अपने जिस्म को हाथ टच नहीं करने देती थी. तो मेरे जिस्म में किसी मर्द के हाथ की जरूरत महसूस होने लगी थी.

मुझे समीर अपने लिए मस्त लड़का लगा था, तो मैं अपने घर जाने के बाद अपने घर के मोबाइल से उसे कॉल करने लगी.
हमारे बीच इश्क शुरू हो गया था. कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा.

फिर उसने मुझसे मिलने की ज़िद की और मैंने उसे अपने गांव बुला लिया.

जिस दिन वो मेरे गांव आया, उस दिन मैंने कॉलेज की छुट्टी मार दी और उसके साथ चली गयी.

घूमते घूमते उसने गाड़ी एक खेत की तरफ ले ली और खेत के बीचों बीच एक छोटे से गड्डे जैसी खाई में हम दोनों चले गए. हम दोनों के जिस्म में जिस्म की आग लपलपा रही थी.

उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मैं बह गई. वो मेरे मम्मों को दबाने लगा और मैं मस्त होने लगी. आज बहुत दिन बाद किसी ने मेरे मम्मों को मसला था तो मेरे मम्मे एकदम से कड़क हो उठे.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उसने मेरा दुपट्टा नीचे बिछा दिया और उसके ऊपर मुझे लिटा दिया. मैं नीचे से पूरी गीली हो गयी थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

फिर उसने मेरी सलवार निकाली और खुद की पैंट निकाल दी. उसका लंड कुछ 6 इंच लंबा होगा और 3 इंच मोटा था. इतना मोटा लंड मैंने आज पहली बार देखा था. उसने मुझे चुदाई की पोजीशन में लिटाया और मेरी चूत पर लंड लगा कर अन्दर डालने की कोशिश करने लगा था.

मैं भी आज फर्स्ट टाइम सेक्स करती हुई चूत में लंड ले लेना चाहती थी. उसका लंड चूत में लेते समय मुझे एक मीठा सा दर्द हो रहा था. काफी कोशिशों के बाद भी उसका लंड चुत में अन्दर नहीं गया.

फिर उसने अपने लंड के टोपे पर थूक लगाया और मेरी चूत पर भी अपना थूक लगा कर लंड सैट कर दिया.
अभी मैं कुछ समझ पाती, समीर ने पूरी ताकत से झटका दे मारा.

उसका आधा लंड चूत के अन्दर चला गया और मैं मछली की तरह फड़फाड़ने लगी. मैं उसे अपने ऊपर से धक्का देकर हटाने लगी, पर उसने मेरी एक न सुनी … और जोर जोर से झटके मारने लगा. कुछ देर की चुदाई के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं बस उसके लंड के झटकों को सहने लगी.

फिर उसने मेरी चीख पुकार कम होते देखी, तो अब उसने मेरी टांगें पकड़ लीं और झटके पर झटके मारने लगा. कुछ देर बाद मुझे अपनी चुत में मजा आने लगा और मैंने अपनी टांगें हवा में उठा दीं.

कोई बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद समीर ने मेरे अन्दर ही अपना लंड झाड़ दिया. फर्स्ट टाइम सेक्स से मुझे बड़ा सुकून मिला. इस तरह से मैं समीर के लंड से अपनी चुत की सील तुड़वा बैठी.

फिर समीर ने मुझे बहुत दिनों तक चोदा और मैंने और उसने शादी कर ली.

समीर आज मेरा शौहर है और वो एक रंगीन किस्म का आदमी है. वो मुझे बहुत चोदता है. उसका लंड अभी 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा हो गया है. वो रोज़ मुझे 2 या 3 बार चोदता है. पर अब वो चाहता है कि हम कुछ अलग तरीके का सेक्स करें … जैसे अदला-बदली, थ्री-सम … या ग्रुप सेक्स. पर मैं उसके साथ चुदाई करते समय किसी और का नाम लूं … इसी में सुख ले लेती हूँ.

मैंने उसे अपने शुरू से जवानी तक के सारे सेक्स के किस्से बताए, वो सुनकर वो बहुत ही कामुक हो जाता है. फिर वो मेरे साथ भयंकर वाला सेक्स करता है.

वो चाहता है कि मैं किसी औऱ से चुदूं … पर अभी तक हमें कोई भरोसे का कोई कपल या आदमी नहीं मिला है. जब ऐसा होगा तब मैं आपको अपनी उस चुदाई का अनुभव एक सेक्स कहानी के माध्यम से लिखूंगी.

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