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बॉयफ्रेंड से पहली चुदाई का मज़ा

एक दिन बस में मेरी दोस्ती एक खूबसूरत लड़के से हुई. मैं उससे चुदाई करवाने की सोचने लगी पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता था. तो मैंने अपनी पहली चुदाई का मज़ा कैसे लिया?

दोस्तो, मेरा नाम प्रियल है और मेरी उम्र 19 साल है. मैं अन्तर्वासना की नियमित पाठिका हूं … और आज आपके सामने अपनी कहानी कहना चाहती हूं. यह कहानी एक सच्ची कहानी है जो मेरी आपबीती भी है. इस कहानी में आपको बताऊंगी के कैसे हमने सेक्स का मज़ा लिया.

बात 2 महीने पहले की है. मैं बस से जा रही थी. तभी बस रुकी और एक हॉट लड़का चढ़ने लगा. उसे देखकर मेरे मन में हलचल होने लगी. मैं उससे अपनी चूत चुदवाने की सोचने लगी. इसी के चलते मेरा हाथ कब मेरी चूत के ऊपर चला गया मुझे पता नहीं चला.

वैसे मैं एक बात बता दूं … मुझे पोर्न देखने शौक है और मैं पोर्न देखते हुए अपनी चूत को सहला लेती हूं. मैंने कभी लंड नहीं लिया. मैं चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूं पर मुझे चुदाई से बहुत डर लगता है.

अचानक बस रुक गई और मेरे सीट के बगल में जो औरत बैठी थी, उतरने लगी. वो लड़का मेरे बगल में बैठ गया. उसके स्पर्श से मैं सिहर उठी … मेरी चूत एकदम गीली हो गई थी.

थोड़ी देर में वो मुझसे बात करने लगा. उसने अपना नाम पवन बताया. वो भी वहीं जा रहा था जहां मैं जा रही थी. मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे.
सफर के दौरान हमने बहुत बातें की. फिर मेरा स्टेशन आ गया और मुझे उतारना पड़ा. पर पवन ख्याल मेरे दिमाग से जा नहीं रहा था. रात भर उसके बारे ही सोच रही थी.

फिर 1 महीने बाद एक दिन मैं बाज़ार गई थी. तभी पीछे से किसी ने आवाज़ दी. मैंने पीछे मुड़ के देखा तो वो पवन था.
मैं बहुत खुश हुई. फिर हमने साथ में गुपचुप खाया.

उसने मुझसे नंबर मांगा तो मैंने बिना रुके अपना नंबर दिया. उस दिन से हम लोग रोज बात करते. कभी कभी रात के 2-3 बज जाते. इसी तरह 1 महीना बीत गया. मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था क्योंकि मुझे उससे प्यार जो हो गया था.

फिर हमने एक दिन मिलने की सोची. मैं बहुत खुश हुई. मैने अपनी चूचों पर क्रीम से मालिश की और अपनी चूत के बाल साफ किये क्योंकि मुझे पता था पवन मुझे चोदना चाहता है. मैंने कई बार उसके लंड को मेरे सामने खड़ा होते हुए देखा है जिसे वो छुपाते हुए बहुत सेक्सी लगता है.

उसने मुझे रास्ते से पिक किया और बोला- कहां जाना है?
मैंने कहा- जहां आपकी मर्ज़ी!
फिर हम उसके दोस्त के घर गए जहां पहले से ही तैयारी पूरी हो चुकी थी.

उसने मुझे जूस दिया और स्वयं भी पीने लगा. बीच बीच में वो मुझे छू रहा था. मेरी तो चूत गीली हो रही थी.

तभी उसने जानबूझकर अपना जूस मेरे कपड़ों पर गिरा दिया. मैं उसके इरादे समझ रही थी. फिर मैं वॉशरूम चली गई. वो मेरे पीछे पीछे गया.
और जैसे ही मैं पलटी उसने मुझे जोर से किस कर दिया. मैंने उसे छुड़ाने का नाटक किया … फिर मैं खुद उसका साथ देने लगी.

उसके हाथ मेरे चूचे पर आ गए जिससे मेरी सिसकारियां निकल गई- उंह … आह … अय!

लगभग 5 मिनट तक हम दोनों ने पागलों की तरह किस किया. पवन का एक हाथ मेरे चूचे पर और दूसरा मेरी चूत के ऊपर था. मैं गर्म हो रही थी.
फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पे लेकर आया. उसने अपने कपड़े उतार दिए. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था.

उसका 8 इंच का लंड पूरा तन गया था. मैंने पहली बार किसी का लंड देखा था, वो भी इतना बड़ा!

फिर वो मेरे कपड़े निकालने लगा. उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. अब मैं भी उसके सामने नंगी थी. वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी. उसने अपना हाथ मेरे चूचों पर रखा और मसलने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी.

15 मिनट चूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह के सामने खड़ा कर दिया और चूसने को बोला.
मैंने मना कर दिया … तो उसने ज़िद की. मैंने उसका सुपारा मुंह के अंदर लिया. मुझे अच्छा नहीं लग रहा था तो मैंने निकाल दिया.
वो कुछ न बोला और मेरी चूत में उंगली करने लगा.

अब जैसा मैंने पहले भी बताया था कि मुझे सेक्स से बहुत डर लगता है, तो मेरी सिसकारियां डर में बदल गई. मुझे पसीना आने लगा.
और जब वो अपने लंड को हिलाने लगा तो डर से मेरी पूरी तरह फट चुकी थी.

उसने अपना सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और हल्का सा धक्का लगाया. मेरी तो दर्द से हालात खराब हो गई.
मैंने जैसे तैसे करके उसे हटाया और कपड़े पहनने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगा- आई लवयू प्रियल … प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ!
मैंने सोचा कि अगर मैंने हां कर दी तो पवन मुझे चोदे बिना रुकेगा नहीं. और मेरी तो हालत खराब थी … मैंने उसे ना चाहते हुए भी मना कर दिया.
मैं वहां से सीधे अपने घर आ गई और उसके बारे में सोच कर रोने लगी.

दोस्तो, भले ही मैं उस दिन भाग के आ गई थी पर मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी. साथ ही मेरी चुदास भी बढ़ती जा रही थी. मैं मन ही मन अपने आप को गाली दे रही थी कि क्या जरूरत थी वहां से जाने की.
और ऊपर से पवन का वो चेहरा मेरी नज़रों के सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. उससे भी ज्यादा मुझे उसके लंड की याद सता रही थी.
मुझे रात भर नींद नहीं आई और मैं सिर्फ करवटें बदलते रह गई.

फिर जैसे तैसे रात कटी. मैंने सुबह उठ के देखा तो पवन का मेसेज आया था. उसमें लिखा था- आई एम् सॉरी प्रियल … प्लीज मुझसे बात करो … आई लव यू यार … मैं प्रॉमिस करता हूं कि आज के बाद आपको टच भी नहीं करूंगा … पर प्लीज़ मुझसे बात करो.

मेसेज पढ़ के मेरी आँखें भर आई … मन करने लगा कि अभी भाग के उसके पास जाऊं और गले से लिपट जाऊं.
पर मैं किस मुंह से उसके पास जाऊं, ये समझ नहीं आ रहा था.

एक दिन मैंने निश्चय कर ही लिया कि आज उसे प्रपोज कर के ही रहूंगी और अपनी चूत चुदवा कर रहूंगी.
मैं उससे मिलने चली गई. मैंने उसे एक होटल में बुलाया.

जैसे ही उसने मुझे देखा … बस देखता ही रह गया.
उस दिन मैंने टाइट जीन्स पहन रखी थी और सफ़ेद टॉप वो भी नाभि के ऊपर से … जिसमें मेरे चूचे साफ दिख रहे थे.

मुझे देख के उसका लन्ड आकार लेने लगा जिसे वो छुपाने की कोशिश कर रहा था.

फिर मैंने उसके पास जाकर बोला- क्या देख रहे?
वो थोड़ा शरमा गया और मुझे जोर से गले लगा लिया.

जैसे ही उसने मुझे गले लगाया … उसका लन्ड मेरी चूत से टकराने लगा. मेरी तो जान निकल गई … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
और शायद उसे भी ये समझ आ गया था. उसने अपना हाथ मेरे गान्ड पर रख दिया. मेरी सिसकारियां छूटने को हुई जिसे मैंने जैसे तैसे करके रोका.

फिर हम दोनों अन्दर गये. हम दोनों ने वहां खाना खाया. उसके इरादे ठीक नहीं लग रहे थे. मैं फिर से नर्वस हो रही थी. तभी उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. मैं एकदम सकपका गई. मेरा रोम-रोम तड़प उठा और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.

उसके एक मात्र स्पर्श से मैं गर्म हो चुकी थी. फिर उसने मुझसे प्यार भरी बातें की. मैंने उससे ऊपर कमरे में चलने को कहा. मुझे ये कहते हुए थोड़ा अटपटा लग रहा था पर मैं और कंट्रोल नहीं कर सकती थी.
उसने कहा- आप आगे चलो.
मैं आगे हो गई.

जब हम थोड़ी दूर चले गए, तब मैं जानबूझकर फिसल गई और पैर में मोच आने की नाटक करने लगी. उसने शायद ये भांप लिया था … उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और रूम में ले आया. उसने मुझे इस तरह उठाया था जिससे उसका लन्ड मेरी गान्ड को टच कर रहा था.
मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी.

मुझे बिस्तर में लिटा के वो जाने लगा.
मैं उसके इस व्यवहार से हैरान थी. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. वो छुड़ाने लगा.

पर आज मैं पूरी तैयारी करके आई थी ऐसे बिना चुदवाये उसे कैसे जाने देती.

मैंने उसके हाथों को अपने चूचों पर रखा. वो मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखने लगा. मैं बिना समय गंवाए उसे किस करने लगी. मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया था.
थोड़ी देर तक तो वो मुझसे छूटने नाटक करने लगा … फिर खुद मेरा साथ देने लगा.

इसी तरह लगभग 10 मिनट के लंबी धुएँदार किस करने बाद उसने अचानक से मेरा हाथ छुड़ा लिया और मुझसे दूर हो गया.
मैं वापस उसे किस करने की कोशिश करने लगी. पर आज ना जाने उसे क्या हो गया था … उसने एक बार मुझे देखा और बिना कुछ बोले चला गया.
उसकी आँखों में कुछ नमी थी.

मैं पूरी उदास हो गई. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं उसकी खामोशी समझ नहीं पा रही थी कि उसने ऐसा क्यों किया. यह सोच सोच के मैं पागल हो रही थी.
मैं वहीं बिस्तर पे बैठ गई … पर रो रो के मेरा बुरा हाल हो गया था.
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रहा है. मैं अब क्या करूं … सब मेरे हाथ से छूट रहा था.

मैंने पवन के दोस्तों से पूछताछ की तो पता चला कि उसके घर वालों ने उसे मुझसे दूर रहने के लिए कहा है क्योंकि मेरा स्टेटस और उसका स्टेटस अलग अलग है.
मैं ऊंचे खानदान से हूं और वो थोड़ा गरीब है. ऊपर से हम दोनों अलग अलग जाति के हैं इसलिए उसके घरवालों ने उसे मना किया है.

पर मुझे और मेरी फैमिली को इससे कोई फर्क नही पड़ता … उन्हें तो बस एक पढ़ा लिखा समझदार दामाद चाहिए जो उनकी बेटी को खुश रख सके. और मुझे तो पवन ही मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ पति लगता है.

ये बात जानने के बाद मैं सीधा पवन के घर गई. पहले तो वो लोग चौंक गए. पर फिर उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.
मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने उनसे सीधी बात कह दी कि मैं उनके बेटे से प्यार करती हूं और उससे शादी करना चाहती हूं.

इस पर वे हैरान थे. उन्होंने अपनी मुश्किलें बताई.
मैंने उन्हें समझाया … अंत में वो लोग मान गए.

अब बारी पवन की थी … मैंने उसे रात में सोने के लिए अपने घर बुलाया क्योंकि मेरे घरवाले बाहर किसी की शादी में गए थे और दोपहर से पहले आने वाले नहीं थे.
मैंने सोच लिया था कि आज तो बात बनानी ही होगी.

पहले तो उसने मना किया फिर मेरे ज़ोर देने पर मान गया.
वो करीब 9 बजे के आसपास आया. मैं उसी का इंतज़ार कर रही थी.

फिर हमने खाना खाया.
उसने कहा- मेरा कमरा कहां है … मुझे सोना है नींद आ रही है. मेरा मूड खराब हो गया मैं उसे अपने कमरे में ले गई.

मैं- ये मेरा कमरा है और तुम मेरे साथ मेरे बेड पर सोने वाले हो.
पवन- नहीं, आप ये क्या कह रही … मैं ये नहीं कर सकता.
मैं- क्यों? क्या समस्या है इसमें?

पवन- ये ग़लत है. मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगा, आप यहां सो जाइए.
मैं- इसमें क्या ग़लत है बस सोने को बोल रही हूँ … मुझे चोदने को नहीं. तुम इतना रिएक्ट क्यों कर रहे हो?
पवन- वो … म् … म … म … मैं … व … वो!

मैं- तुम कह क्यों नहीं देते कि तुम भी मुझे चोदना चाहते हो … ऐसे चुप रहने से क्या होगा?
पवन- न … न … नहीं … अ … आप गलत समझ रही हैं.
मैं- अच्छा … तो तुम्हारी जबान क्यों लड़खड़ा रही है … बताओगे मुझे?
पवन- वो … म … मैं … अम … मैं जा रहा बाहर सोने आप भी सो जाओ.
मैं- नहीं … रुको.

वो जाने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
इससे पहले के वो मेरा हाथ छुड़ा पाता … मैंने उसे किस कर लिया वो मेरी पकड़ से छूटने की नाकाम कोशिश करता रहा पर मैं लगी रही. 5 मिनट किस करने के बाद मैंने उसको छोड़ा.
वो सिर झुकाए हुए था.

मैंने उसका एक हाथ अपने बूब्स पर और दूसरा अपनी गांड पर रख दिया. वो कुछ बोल पाता इससे पहले मैंने उसे दोबारा किस करना चालू किया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ मेरी गांड पर सहलाना शुरु किया. मैं खुश हो गई मेरा काम जो बन गया था.

वो मुझे ज़ोर से किस करने लगा, मैं भी उसका साथ दे रही थी. फिर उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और एक एक करके मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए. उसने मेरी चूत को सहलाना शुरु किया. मैं मदहोश होने लगी. मेरी मुंह से मादक सिसकारियां निकलने लगी- आह उम अह.
मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी इसलिए हमें बहुत मज़ा आ रहा था.

उसके बाद उसने अपनी जीभ मेरे चूत में डाला … वो अहसास मैं बयां नहीं कर सकती … मुझे जन्नत का सुख मिल रहा था.
उसने मुझे जीभ से चोदना जारी रखा. धीरे धीरे हम 69 की पोजिशन में आ गए. मैं पहली बार लंड चूस रही थी वो भी इतना बड़ा लौड़ा … लगभग 7-8 इंच का तो होगा ही!
मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मेरी जिंदगी का पहला अहसास था.

धीरे धीरे मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं उसके मुंह में ही झड़ गई. उसने मेरा सारा पानी पी लिया. मुझे ऐसी खुशी कभी नहीं मिली जो उस समय मिल रही थी.

अब बारी मेरी चूत की चुदाई की थी. उसने अपना लन्ड मेरी चूत पर रखा और रगड़ने लगा.
मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी. मैंने उससे कहा- अब देर मत करो पवन … जल्दी से डाल दो … मेरी जान निकल रही है … अब और मत तड़पा … अब बस चोद दे मुझे … बहुत दिन बाद मिला है.

उसने देर न करते हुए अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर से धक्का मारा. उसका आधा लंड मेरी चूत में चला गया.
मेरी तो चीख निकल गई. मुझे लगा कोई गर्म रॉड मेरी चूत को फाड़ते हुए अन्दर चला गया है. दर्द से मेरा हाल बेहाल हो गया.

फिर उसने अपना हाथ मेरे चूचियों पर रखा और मुझे किस करने लगा. जब मेरा दर्द कम हुआ तब उसने दोबारा धक्का मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया.

थोड़ी देर बाद उसने अपना लन्ड आगे पीछे करना चालू किया.
फिर क्या … हम दोनों को जन्नत का सुख मिलने लगा.
ये उसका भी पहली बार ही था … वो बड़ी मस्ती से चुदाई कर रहा था.

पूरा कमरा हम दोनों की सिसकारियों से गूंज रहा था ‘आह … अम्म … हम … अह … अय … आह!’

वो धड़ाधड़ अपना लन्ड मेरी चूत में पेल रहा था. पूरा बेड हम दोनों के चुदाई से हिलने लगा.

इतनी धकापेल चुदाई के बाद मेरा होने वाला था. उसने ये भांप लिया और वो ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा. थोड़ी ही देर बाद मेरा पानी निकल गया जिसे उसने चाट कर साफ कर दिया.

फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लन्ड डाल दिया. मेरी आह निकल गई.

उसने गपागप लंड डालना शुरू किया. मेरी चूत गीली हो चुकी थी जिससे कुछ फच फच आवाजें भी आ रही थी.
मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी- चोदो मुझे पवन … और ज़ोर से चोदो … जान निकाल दे मेरी … आह … फॅक मी बेबी … और ज़ोर से चोदो … आह … अम्म … अह … उन्ह.

लगभग 15 मिनट के ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो झड़ने वाला था उसने मुझसे पूछा- कहां निकालूं?
मैंने कहा- चूत में ही निकाल दो.
क्योंकि मैं उसे फील करना चाहती थी.

8-10 शॉट लगाने के बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गया.

उसका गर्मागर्म वीर्य पाकर मेरी चूत खिल उठी थी. वो एहसास अभी भी मेरे दिमाग से निकल नहीं पा रहा … वो मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

उसने मुझे आई लव यू कहा और मेरा धन्यवाद करने लगा.
मैंने भी उसे आई लव यू टू कहा और इस अनोखे अहसास के लिए धन्यवाद दिया.
हम दोनों के चेहरे पर खुशी और सुकून झलक रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका लन्ड फिर से खड़ा होने लगा. इस तरह हमने उस रात 5 बार चुदाई की कभी बिस्तर में तो कभी सोफे पे.
हमने अलग अलग पोजिशन ट्राई किया और हमारी चुदाई रात भर चलती रही.

दोपहर में जाने से पहले उसने मुझे एक बार और चोदा.
इस तरह से हम दोनों ने चुदाई का पूरा पूरा मज़ा लिया.

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उसने मेरे बालों को पकड़कर अपना पूरा लंड मेरे मुंह में डाल दिया

घणी खम्मा दोस्तो,

हम भाई बहन को मौका मिलता हम भरपूर एन्जॉय करते और हर तरह से चुदाई करते। मम्मी जब भी बाहर होती और हमें पता होता कि वो कुछ दिन आने वाली नहीं है तो हम घर पर नंगे ही रहते। और घर में किसी भी जगह सेक्स कर लेते। मम्मी के यार मम्मी को खूब पैसे और गिफ्ट देते रहते तो हमें कोई काम करने की जरूरत तो थी ही नहीं। बस पूरा दिन गैंग बैंग चुदाई या फ़ॉर प्लये।

और जब मम्मी घर पर होती तो सयाने बने रहते क्योंकि कभी मम्मी को शक ना हो। मम्मी जब भी घर पर होती तो उनके आशिक भी घर में आते रहते थे और मम्मी के साथ मज़े करते।

एक दिन मम्मी ऐसे ही घर पर थी और वो ही रात वाले अंकल हमारे घर आये।

वो जैसे ही घर में आये तो सबसे पहले मेरी तरफ अजीब तरह से देखने लगे।

मुझे वो रात याद आ गयी और मन ही मन डर गई कि अंकल मम्मी को कुछ बता ना दें.
और इसी डर से मैंने मम्मी से कहा कि मैं और भाई बाहर हो कर आते हैं।

मैं अपने भाई के साथ बाहर घूमने निकल गयी। हम भाई बहन एक रेस्टोरेंट में गए और एक एक चाय ली। चाय पीते हुए मैंने भाई को पूरी बात बताई कि कैसे अंकल ने उस दिन मुझे फटे हुए कपड़ों में देखा था और आज भी मुझे घूर रहे थे।

भाई बोला- दीदी आप हो ही इतनी सुंदर कि कोई आपको देखे बिना रह ही नहीं सकता. और ऊपर से हमारे घर का माहौल ही ऐसा है। तुम डरो नहीं तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ है।

इस तरह चाय पीकर हम भाई बहन 2 -3 घंटे तक बाहर इधर उधर घूमे और कुछ देर में घर आ गए।
जब घर आये तो अंकल जा चुके थे और मम्मी खाना बना रही थी।
हम सब ने हाथ मुँह धोये और साथ बैठकर खाना खाया।

इसी तरह से दिन निकल रहे थे और हम भाई बहन मजे कर रहे थे।

एक दिन वो अंकल हमारे घर आये। उस वक्त मम्मी घर पर नहीं थी तो दरवाजा मैंने खोला और अंकल को बोला- मम्मी घर पर नहीं हैं.
तो अंकल बोले- मुझे पता है … पर आज मैं तुमसे मिलने आया हूँ।
मैं डर गई और जल्दी से भाई को बुलाया।

भाई को आया देखकर भी अंकल पर कोई असर नहीं हुआ और अंदर आकर सोफ़े पर बैठ गए।

उन्होंने मुझे और भाई को भी अपने पास बैठाया और बोले- तुम दोनों को कुछ दिखाना है। अपने व्हाट्सएप नंबर दो।
हमने उन्हें अपने नंबर दिए और अंकल ने हमें कुछ सेंड किया।

हम दोनों ने अपना व्हाट्सएप खोला तो वो एक वीडियो क्लिप था। जब हमने वीडियो डाउनलोड किया तो हमारे पैरों तले जमीन ही खिसक गई। वीडियो एक CCTV फुटेज था जो कि हम भाई बहन का था।

दरअसल अंकल ने एक हिडन कैमरा हमारे हॉल में लगा दिया था जब हम भाई बहन बाहर गए थे।

वीडियो देखकर मैं और भाई अंकल के पैरों में गिर गए और गिड़गिड़ाने लगे- अंकल हमें माफ़ कर दो, हमसे गलती हो गयी। यह सब आगे से नहीं करेंगे। अंकल आप यह वीडियो डिलीट कर दो. और प्लीज़ मम्मी को कुछ मत बताना।

अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों को ऊपर उठाया और बोले- इस तरह गिड़गिड़ाने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने यह वीडियो ना तो तुम्हारी मम्मी को दिखाया है ना कुछ कहा है। और ना ही तुम्हें यह सब करने से रोक रहा हूँ। जवानी का जोश है तो यह सब हो जाता है। अपनी जवानी में मैंने भी अपनी बहन और मम्मी के साथ भरपूर सेक्स किया था। और तुम्हारी मम्मी जैसी तो कितनी ही चोदी। यह सब तो अब नार्मल है।

अंकल की बात सुन कर हमें कुछ राहत मिली पर वो राहत बस कुछ देर के लिए ही थी।

अंकल बोले- तुम भी जवान हो … मजे करो, कोई रोक है ना टोक। पर इस जवानी का कुछ हिस्सा तो मुझे भी मिलना चाहिए। तुम्हें उस दिन फटे कपड़ों में और हाँफते हुए देखकर ही मेरे अनुभव ने मुझे बता दिया था कि दाल में कुछ काला तो है।

इतना सुनते ही हम दोनों तो हतप्रभ हो गए- अंकल आप इतने बड़े और हमारे साथ?
अंकल- हाँ बेटा, मैं बड़ा तो हूँ पर बूढ़ा नहीं हुआ हूँ। तुम्हें उतना ही मज़ा दूँगा जितना तुम्हारा भाई देता है. और साथ में पैसे भी। अब तुम्हारी मम्मी में वो मजा नहीं आता। और यदि कहना नहीं मानोगी तो तुम समझदार हो; फिर कुछ भी हो सकता है।

मैं अपने भाई के सामने देखने लगी।

भाई ने अंकल से कहा- अभी हम कुछ तय नहीं कर पा रहे हैं। आप मुझे दो दिन की मोहलत दें। मैं आपको जवाब दे दूँगा। तब तक आप प्लीज़ यह वीडियो डिलीट कर दो।
अंकल- इतना बेवकूफ नहीं हूँ मैं! चलो तुम्हारी बात मानता हूँ और दो की जगह तीन दिन का समय देता हूँ. पर वीडियो तो काम होने के बाद ही डिलीट करूँगा।
और अंकल चले गए।

अंकल के जाने के बाद मैं जोर जोर से रोने लगी और भाई को कहा- तुम कह रहे थे कि मैं देख लूँगा। अब क्या करें?
भाई ने मुझे समझाया- अभी हमारे पास तीन दिन का समय है … कुछ सोचते हैं।

इसी तरह बातों बातों में 2 दिन निकल गए पर हम कोई निवारण नहीं ढूंढ पाए।

कई दिनों बाद यह पहला मौका था कि हम भाई बहन घर में अकेले थे और सेक्स का मजा ना लिया हो।
पर इस टेन्शन में सेक्स किसे याद आये।

भाई को भी परेशान देखकर मैंने कहा- मुझे अंकल को हाँ कहना ही पड़ेगा; और कोई चारा नहीं है।
तो भाई बोला- ऐसे कैसे हाँ बोल दें? कल को हमारा नाजायज़ फायदा भी तो उठा सकता है।

मैंने और भाई ने एक योजना बनाई और अंकल को कॉल करके हाँ बोल दिया।

और अगली बार जब मम्मी बाहर गयी तब अंकल को अपने घर बुला लिया।

अंकल दोपहर में ही हमारे घर आ गए। उस वक्त भाई घर पर ही था। हमने अंकल को बिठाया और पानी पिलाया। अंकल ने पानी की गिलास के साथ मेरा हाथ भी नोंच लिया।
मैं अंकल के इरादे समझ गयी। मैंने भाई से इशारा किया और अंकल को अपने कमरे में ले गयी।

अंकल के आने से पहले अंकल का कैमरा हमने हटा दिया था और मेरे रूम में दूसरा कैमरा लगा दिया था।

जब मैं और अंकल रूम में गये तब तक वो कैमरा बन्द था। मैं अंकल को अपने बेड पर ले गयी। अब अंकल अपनी मस्ती में आ चुके थे। वो मेरे साथ छेड़खानी करने लगे।

तभी भाई रूम में आया तो अंकल बोले- अपनी दीदी को चुदती हुए देखना चाहते हो?
पर भाई कुछ नहीं बोला और पँखा करने के बहाने कैमरे का स्विच भी ऑन कर दिया और वहीं बैठ गया।

अब अंकल ने अपने हाथ मेरी चूचियों पर रखे और उन्हें सहलाने लगे।
मैंने कुछ ऐसा रिएक्ट किया जैसे वो जबरदस्ती कर रहे हो।

धीरे धीरे अंकल मेरे होंठ चूमने लगे। उन्होंने मेरे कपड़े उसी तरह फाड़ने शुरू किए जैसे उस दिन फटे हुए देखे थे। पर मैं इस सब में बिल्कुल साथ नहीं दे रही थी।

अंकल ने मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया और खुद भी नंगे हो गए।

उनका काला मोटा लन्ड देखकर और इस फॉरप्ले से मैं भी गर्म तो हो गयी पर अपने पर कंट्रोल कर के बिल्कुल ऐसा ही बर्ताव कर रही थी कि अंकल मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे हों।

जैसे ही अंकल मेरे ऊपर चढ़ने लगे मैं जोर से चिल्लाई।

मेरी आवाज सुनकर भाई मेरे कमरे में आया और कैमरे का स्विच ऑफ कर दिया।

भाई ने अंकल को हाथ पकड़ कर मेरे से अलग किया और उसे अपने मोबाइल में CCTV की रिकॉर्डिंग दिखाई जिसमे वो मेरे साथ जबरन करने के जैसा दिख रहा था।

अंकल डर के मारे पसीना पसीना हो रहे थे।

भाई अंकल से बोला- हमारी रेकॉर्डिंग अपने मोबाइल से डिलीट कर दो वर्ना हम तुम्हारे पर जबरदस्ती का केस कर देंगे।
अंकल ने डरते हुए हमारी सारी रिकॉर्डिंग उड़ा दी।

पर अब मेरा प्रॉब्लम शुरू हो गया। मेरा मन अंकल के लन्ड के लिए डगमगा गया।

डरते डरते मैंने अपने भाई से अपने मन की बात कही तो भाई हँस के बोला- दीदी तुम्हारी यही इच्छा है तो कर लो अपने मन की!
मैंने अंकल के सामने देखा तो वो तो डर के मारे नर्वस हो गए थे और उनका मोटा लण्ड भी सिकुड़ के लूली ही रह गया था।

अंकल को हाथ पकड़ कर बेड पर खींचा मैंने और उनका लण्ड मुँह में ले लिया। अब अंकल को भी कुछ मजा आने लगा था।

थोड़ी देर चूसने से ही अंकल का लन्ड टनटनाने लगा। अब अंकल ने मेरे दूध अपने मुँह में लेकर चूसना चालू किया।
अंकल की चुसाई से मेरी चूत बरसने लगी।

मैं एकदम गर्म हो गयी और अंकल को गालियाँ बकने लगी- अबे बूढ़े … अब क्या बोबों में ही पड़ा रहेगा या ऊपर भी चढ़ेगा। मादरचोद दूध ही पीना है तो मम्मी का पी लेना. अभी तेरा यह मोटा लण्ड दे मेरी चूत को।

अंकल- ले भोसड़ी की भेन की लोड़ी … चख मेरे लौंडे का स्वाद … मिटा दे मेरे लन्ड की आग अपनी चूत से! आज तुझे पता चलेगा कि क्यों तेरी मम्मी मेरे नीचे सोती है। इतना मजा दूँगा कि अपने भाई को भी भूल जाएगी।

बड़बड़ाते हुए अंकल ने अपना लण्ड मेरे चूत में पेल दिया और घचाघच मुझे चोदने लगे।

उनकी चुदाई से सचमुच एक अलग ही आनन्द आ रहा था। पता नहीं यह उनके लण्ड का कमाल था या एक्सपीरियंस का।
पर इतना मजा मुझे भाई के ताजे लण्ड में भी नहीं आया।

अंकल ने करीब 15 मिनट तक मुझे चोदा। तब तक मेरा भाई वहीं बैठा हमारी लाइव चुदाई देख रहा था।

अब उसका भी लण्ड टनाटन करने लगा। अंकल के उतरते ही भाई आशा भरी नजरों से मुझे देखने लगा पर चूत की बैंड अंकल बजा चुके थे। अब उसमें भाई को झेलने की शक्ति बची नहीं थी।

पर अपने जान से ज्यादा प्यारे भाई को यूँ तड़फता हुआ छोड़ भी नहीं सकती थी। इसलिए मैं नंगी ही उसके पास गई उसकी पैंट की जिप खोली और लण्ड बाहर निकालकर मुँह में ले लिया।

कुछ ही देर में भाई का लण्ड पिघल गया और मैंने उसका पूरा वीर्य पीकर उसे संतुष्ट कर दिया।

तब तक अंकल ने कपड़े पहन लिए थे।

अंकल भाई को 5000 रुपये देते हुए मिन्नतें करने लगे कि वो अपने फोन से वो क्लिप हटा दे।
भाई बोला- इतने बेवकूफ हम भी नहीं हैं.

और उसने वह क्लिप नहीं हटाई और अंकल से कह दिया- आगे से कभी दीदी को आपकी या पैसे की जरूरत हो तो तैयार रहना।
अंकल ने हमसे प्रोमिस लिया और खुद भी वादा किया कि ये सब बातें हमारे तक ही सीमित रहेगी।

इस तरह हम भाई बहन ने अंकल को उसी के जाल में फ़ांस कर अपना काम भी निकलवाया और खर्चे का बंदोबस्त भी कर दिया।

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गैर मर्द से चुदाई की चाह

मेरी पति मेरी चूत खूब चोदते हैं. लेकिन अब हम दोनों का मन इस चुदाई से भर गया है. हमने कुछ नया करने की चाह में गैर लड़की और मर्द से सेक्स की कल्पना करनी शुरू की.

मेरे प्यारे मित्रो, मेरा नाम सुरभि है। मैं एक भरे हुए जिस्म की औरत हूं। मेरी उम्र 30 साल के आसपास है. आप लोग मुझे देखोगे तो मैं आपको एक बेबी डॉल लगूंगी।

अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है। मैं अपनी लाइफ में हुई कुछ सेक्स की बातें आप लोगों के साथ शेयर करना चाहती हूं. मैं आपको आज अपना एक सच्चा किस्सा बताना चाहती हूं।

यह एक सच्ची कहानी है अन्तर्वासना पर जब मैं कहानियां पढ़ती हूं तो मुझे कुछ कहानियां पढ़ कर एकदम से फील होता है कि कहानियां रियल नहीं है जिनको फिर मुझे पढ़ने में मजा नहीं आता लेकिन मैं आप लोगों के सामने अपना यह रियल किस्सा पेश कर रही हूं।

मेरा जिस्म एकदम मस्त है मेरा जिस्म देखते ही लोगों को मुझे चोदने का ख्याल आने लगता है।

मैं एक हाउसवाइफ हूं. मेरी शादी को एक साल हो चुका है। जब मेरी शादी हुई तो मेरे हस्बैंड ने मुझे सुहागरात वाले दिन 5 बार चोदा था। मुझे भी उस रात बहुत मजा आया था।

मेरे हस्बैंड और मैं खूब सेक्स करने लगे. शादी के कुछ समय बाद तक हम दोनों ने खूब मजे लूटे एक दूसरे के साथ सेक्स के खेल खेल के और चुदाई करके!

फिर सेक्स हमारा सामान्य होने लगा जो कि आम जीवन में होता भी है। एक जैसा सेक्स रोज करने से इंसान रोज बोर होने लगता है। तो फिर मेरे हस्बैंड और मैंने कुछ नया करने की सोची।

हमने सिर्फ एक दूसरे को किसी गैर औरत या मर्द के साथ सेक्स करने जैसा फील करने की सोची। हम रियल में किसी के पास नहीं गए।
बस उन्होंने मुझसे कहा- बस फील करो कि मैं तुम्हें किसी और आदमी से चुदवा रहा हूं।

शुरू में मुझे यह बहुत अजीब लगा लेकिन जब वे मेरे साथ सेक्स करते थे और तो मुझसे ऐसी गैर मर्द से चुदाई वाली बातें करते थे तब मुझे बहुत अच्छा लगता था।

उनका एक दोस्त है राज. वह अक्सर घर पर आया करता था.
और मेरे पति ने मुझसे बताया- राज मजाक मजाक में मुझे कहता है कि भाभी बहुत मस्त है। मैं एक बार भाभी के साथ सेक्स करना चाहता हूं. मैं भी इनकी जवानी के मजे लेना चाहता हूं।

मुझे भी राज देखने में एकदम अच्छा लगता था. मैं उसके साथ मजे लेना चाहती थी लेकिन कहीं मेरे हस्बैंड मुझे करैक्टरलेस ना सोचें, इसलिए मैंने कभी अपने मुंह से यह बात नहीं कहीं।
एक रात जब मेरे पति मुझे चोद रहे थे तो उन्होंने मुझसे कहा- आज हम राज को लेकर फील करते हैं कि तुम राज से चुदवा रही हो और मैं तुम्हें देख रहा हूं.
मैंने कहा- ठीक है।

फिर मेरे हस्बैंड ने मुझसे कहा:

मानो एक रात मैंने राज को तुम्हारी चूत चोदने के लिए आमंत्रित किया।
डोर बेल बजी!
और तुमने एक सक्सी नाइटी ड्रेस पहनकर दरवाजा खोला।

तुम्हारी गोरी जांघें बिल्कुल साफ दिख रही हैं. तुम्हें देखते ही राज को लगा कि मानो तुम्हें चोदने के सपने उसके पूरे होने वाले हों।

फिर तुमने सेक्सी नाइट ड्रेस पहनकर हम सबके लिए उस रात खाना बनाया और हम तीनों ने साथ बैठकर खाना खाया।
खाना खाते वक्त भी राज तुम्हें घूर रहा है क्योंकि आज मेरी ब्यूटीफुल वाइफ को चोदने का उसका सपना पूरा होने वाला है।

फिर हम सब रूम में चले गए. वहां जाकर राज तुम्हारे साथ बेड पर बैठ गया और तुम्हारा हाथ अपने हाथ में ले लिया और फिर तुम्हारी गर्दन पर धीरे-धीरे किस करने लगा।

मैं आप लोगों को जानकारी के लिए बता दूं कि जब हम दोनों ये बातें कर रहे थे तो मेरे हस्बैंड का लंड मेरी चूत में था।

फिर उन्होंने मुझसे कहा:

राज तुम्हारे कपड़े उतार रहा है और उसने तुम्हारी नाइटी को तुम्हारे बदन से अलग कर दिया है. अब तुम उसके सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में हो.
उसने दोनों हाथों से तुम्हारे बूब्स को पकड़ लिया है और कह रहा है ‘भाभी … आप तो माल हो. आज आप को चोदने में बहुत मजा आएगा।
और वह प्यार में तुमसे पूछ रहा है ‘भाभी, आज तुम मुझसे चुदवाओगी ना?’
तो तुम भी हां में सर हिला कर जवाब दे रही हो.

और फिर उसने तुम्हें बेड की तरफ धक्का दे दिया और तुम्हारे बूब्स को पागलों की तरह चूमने चाटने और चूसने लगा. उसने तुम्हारे सारे बदन पर थूक लगा दिया. तुम्हारा सारा बदन गीला कर दिया और मैं अपनी वाइफ को किसी और से चुदते हुए देख रहा हूं. तुम पूरे जोश में उसका साथ दे रही हो.

और फिर मेरे हस्बैंड ने मुझसे कहा- अब तुम बताओ कि तुम उसके साथ क्या-क्या करोगी?
तो मैं अपने हस्बैंड से चुदती चुदती कहने लगी:

मैं पूरे जोश में आ गई और मैंने राज को बेड की तरफ धक्का देकर सीधा लेटा दिया. मैंने अपने दोनों हाथों से उसके उसके लंड को पकड़ कर अपने मुंह में डालने लगी। उसके लंड को चूसने लगी.

फिर मैं अपने हस्बैंड से कहने लगी- मुझे राज से चुदना है … मुझे राज से चुदवाओ प्लीज!
मेरे हस्बैंड ने कहा- चल मेरी रानी, आज तुझे दो लंड का भोग लगावाता हूं।

फिर से मैं बोलने लगी:
अब राज ने मुझे सीधा लिटा लिया और अपने लंड को एक ही बार में मेरी चूत में डाल दिया.
मैं चिल्ला पड़ी लेकिन उसने मेरे चिल्लाने की कोई परवाह नहीं की और बहुत तेज तेज धक्के लगाने लगा.

कुछ देर के लिए तो उसके धक्के सहपाना मेरे लिए मुश्किल हो गया लेकिन धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा।

फिर मैंने राज को अपनी बांहों में भर लिया, अपनी दोनों टांगें उठा कर उसके ऊपर रख ली और उसकी कमर पर अपने दोनों हाथ चलाने लगी जैसे मैं उसको उत्साहित कर रही हूँ।
और तेज चोदने के लिए और वह मेरे होठों को अपने होंठों में डालने लगा.
उसने मुझसे कहा- भाभी अपनी जीभ निकालो.

और उसने मेरी जीभ को अपने मुंह में ले लिया. हम दोनों एक दूसरे की पागलों की तरह चूमने और चाट रहे थे और आप हमें दूर से देख रहे थे.

फिर राज ने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल कर घोड़ी की तरह मुझे चोदने लगा. वह मेरे मोटे मोटे चूतड़ों पर दबाकर धक्के मारने लगा. मेरी चीख निकल रही थी. मेरी कमर को पकड़ कर पीछे की तरफ खींचता और अपने लंड से आगे की तरफ जोर लगाता तो पूरा लंड चूत के अंदर चला जाता.
जिससे मुझे बहुत दर्द होता और मैं चिल्ला रही थी.
आप मुझे ऐसे दर्द में चिलाते हुए देख रहे थे।

फिर राज बेड पर सीधा खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने का इशारा किया. मैं भी बेड पर घुटनों के बल बैठ गई और अपने पति के दोस्त का लंड चूसने लगी.
उसने मेरे बालों को पकड़कर अपना पूरा लंड मेरे मुंह में डाल दिया जिससे मेरे मुंह से थूक निकलने लगा।
और वह मेरे मुंह को धकाधक चोदने लगा.

फिर उसने मुझे बेड पर पेट के बल लिटा कर पीछे से मेरी कोली भर ली और अपना लंड मेरी चूत में घुसाकर चोदने लगा. वह मुझे ऐसे चोद रहा था मानो जैसे पूरी खा जाएगा.
और मैं जैसे बस उसकी होती जा रही थी. राज का एक-एक धक्का मुझे पागल कर रहा है।

थोड़ी देर में मुझे मजा आने लगा. अब मैं झड़ने वाली हूं। तो मेरे हसबैंड मेरी चूत में और तेज धक्के लगाने लगे और उन्होंने मुझे ऐसे ही झड़वा दिया। फिर वे खुद भी झड़ गए.

दोस्तो यह थी मेरी और मेरे पति की एक छोटी सी केमिस्ट्री जो शायद आप लोगों को बहुत पसंद आएगी।

दोस्तो, यह मेरे हस्बैंड और मेरे बीच की सेक्स के वक्त के बीच की बातचीत थी।

फिर हमारे बीच में लगभग लगभग रोज ही ऐसा होने लगा हम किसी दूसरे को फील करके सेक्स करने लगे. लेकिन फिर कुछ समय बाद मुझे अब सामान्य लगने लगा मेरे हस्बैंड इससे आगे नहीं बढ़ते थे. वह सिर्फ इस बातचीत और इस फील तक ही सीमित थे.

लेकिन मेरा मन तो अब सच में किसी और से चुदने का करने लगा था। लेकिन आज के समय पर किसी में भरोसा करना बहुत मुश्किल है। मुझे ऐसा व्यक्ति चाहिए जो मुझे चोद कर मेरी चूत की वासना को ठंडी करे. वह हमेशा मेरी मेरी चूत चोदता रहे. वह मुझसे बढ़कर किसी और चीज को अहमियत ना दे।

बात यह भी है कि यह बात मैं अपने पति से कह भी नहीं सकती कि सच में मुझे किसी दोस्त की तलाश है.

मुझे अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साईट के बारे में अपने कॉलेज टाइम से पता है. तो मैंने अपनी यह फेंटेसी सेक्स स्टोरी आप लोगों के साथ शेयर करने की सोची. मैं अन्तर्वासना पर अपनी काल्पनिक ख्यालों वाली कहानी लिख रही हूं यह बात मेरे हस्बैंड को नहीं पता है।

मैं अपने पति से छिपाकर अपनी लाइफ में एक दोस्त चाहती हूं जो हमेशा मेरा साथ दे सेक्स में! और मेरी गर्म जवानी को खूब चूसे. मैं उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती रहूं और वह मेरी चूत को अपने मुंह में लेकर चूसता रहे। वह मेरी चूत में आपना लंड डालकर मुझे खूब चोदे। जिसके साथ में पूरी जिंदगी चुदाई के मजे ले सकूं।

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भाई के दोस्त को पटाकर चूत चुदवा ली

सेक्सी जवान लड़की की कुंवारी चूत में जब लंड लेने की ललक लगती है तो वो वासना पूरी करने का हरसंभव जुगाड़ करने लगती है. ऐसी ही एक हॉट गर्ल ने क्या किया?

जवानी के जोश में अक्सर हो जाता है जैसा कि आलिया के साथ भी हुआ. आलिया एक 19 साल की बहुत ही खूबसूरत लड़की है. देखने में बिल्कुल पोर्न स्टार वैलेरी के जैसी लगती है. उसके 36 के बूब्स 38 के हिप्स अगर कोई बूढ़ा भी देख ले तो उसका लंड भी खड़ा होने पर मजबूर हो जाये.

आलिया दिल्ली यूनिवर्सिटी में बी.ए. की स्टूडेंट है जो कि स्वभाव से बहुत ही चंचल है. वह अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती करती है. उसके परिवार में उसके पापा और मॉम के अलावा उसका एक बड़ा भाई भी है.
उसके पिता जी का अपना एक बिजनेस है जो अच्छा चल रहा है. उसकी मां भी बिजनेस में हेल्प करवाती है. उसका भाई वरुण अभी पढ़ाई कर रहा है जो कि देहरादून में रहता है.

चूंकि ये लोग बहुत पैसे वाले थे तो इनके घर में हर तरह की सुख सुविधा मौजूद थी. आलिया के घर में एक जिम भी है. आप सोच सकते हैं कि घर में ही जिम भी बनाया गया है तो कितनी पैसे वाली पार्टी होगी.

बिंदास होने के बाद भी हॉट गर्ल आलिया ने अभी तक सेक्स नहीं किया था. उसके दिमाग में अभी तक ऐसे ख्याल आये ही नहीं थे. वो अपने दोस्तों के साथ ही मस्ती में बिजी रहती थी. उसको अच्छी अच्छी ड्रेस पहनने का शौक था.

आलिया को उसके कॉलेज के कई लड़के प्रपोज भी कर चुके थे लेकिन आलिया किसी को घास नहीं डालती थी. ऐसा नहीं था कि उसको अपने जिस्म या हुस्न पर घमंड था लेकिन वो हमेशा दोस्त बनाना पसंद करती थी.

उस दिन रविवार था. आलिया अपने रूम में शॉर्टस में सो रही थी. फिर अचानक डोर बेल बजी तो उसकी मां ने दरवाजा खोला तो दरवाजे पर वरूण खड़ा हुआ था.

सात महीने के बाद वरूण अपने घर लौटा था. मां उसको देख कर खुश हो गयी. फिर वरूण आलिया को सरप्राइज़ देने के लिए गया. आलिया के रूम का दरवाजा खुला हुआ था. वो नींद में थी.

आलिया की टीशर्ट ऊपर उठी हुई थी और उसके शार्ट्स में से उसकी लाल रंग की पैंटी उसकी गांड पर चढ़ी हुई दिख रही थी. वरूण की नजर जब आलिया पर गयी तो उस गोरे संगमरमर जैसे सफेद बदन पर उसकी नजर फिसलने लगी. उससे भी ज्यादा आलिया की लाल पैंटी कहर बरपा रही थी.
पहली बार वरूण का ध्यान अपनी बहन के जिस्म पर इस तरह से गया था. उसने इतनी हॉट लड़की आज तक नहीं देखी थी.

आलिया को आहट सी सुनाई दी तो उसकी आंख खुली. वरूण को सामने खड़ा देख कर वो चौंक गयी- भैया! आप?
वो पहले तो खुशी से उछल पड़ी और उसको गले से लगा लिया. फिर उसके साथ लड़ने लगी.

आलिया बोली- क्या भाई? इतने दिन के बाद शक्ल दिखा रहे हो? जाओ मैं आपसे बात नहीं करूंगी.
वरूण- यार मेरे एग्जाम्स थे. इसलिए आना पॉसीबल नहीं था. अब मैं हर महीने तुझसे मिलने के लिए आया करूंगा. ये रूठना छोड़ा और देख मैं तेरे लिए क्या लेकर आया हूं मेरे बच्चे!
तभी वरूण ने अपने बैग से एक सेक्सी सी ड्रेस निकाल कर आलिया को दी.

आलिया खुश हो गयी. मगर वरूण सच में हैरान था कि उसकी बहन बहुत ही सेक्सी हो गयी है.
एक दिन आलिया अपने भाई वरूण का मोबाइल चेक कर रही थी. उसके दिमाग में पता नहीं क्या आया कि वो वरूण के मोबाइल की हिस्ट्री चेक करने लगी.

हिस्ट्री में उसने पाया कि उसके भाई के फोन में अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी साइट लिंक खुला हुआ था. उसमें वो हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ने लगी. आलिया के लिए सेक्स स्टोरी जैसा साहित्य एकदम से नया था. उसने कभी सेक्स कहानी के बारे में नहीं पढ़ा था.

कहानी पढ़ते हुए उसे एक कहानी ऐसी भी मिली जिसमें एक लड़की अपने भाई और उसके दोस्तों के साथ सेक्स करती है. आलिया को इस तरह की कहानी पढ़ कर काफी बुरा लगा और उसने मोबाइल वहीं पर बंद कर दिया.

उसके बाद वो जिम में जाकर एक्सरसाइज करने लगी. मगर जिम करने में भी उसका मन नहीं लग रहा था. इतने में ही वरूण भी आ गया. वरूण उसको जिम करने में हेल्प करने लगा और उसको जिम के टिप्स देने लगा.

भाई-बहन की सेक्स स्टोरी पढ़ने के बाद अब आलिया के मन में एक उथल पुथल मच गयी थी. जब वरूण उसके साथ जिम में था तो आलिया के मन में उस वक्त भी ऐसे ही ख्याल आ रहे थे कि पता नहीं उसका भाई उसके बदन को किस नजर से देख रहा होगा. पता नहीं वो भी अपनी बहन के साथ सेक्स करना तो नहीं चाह रहा?

जाहिर सी बात थी कि भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ने के बाद हॉट गर्ल के मन में इस तरह के ख्याल आना लाजमी था. उसका दिमाग उसका साथ नहीं दे पा रहा था.

वो असमंजस में थी कि इसके बारे में कैसे पता करे. अब आलिया इस बात की जांच करना चाह रही थी कि उसका भाई उसके बारे में क्या सोच रहा है. वो जानना चाहती थी कि वरूण के दिल में क्या है.

इसलिए वरुण का ध्यान खींचने के लिए वो बोली- भैया, मेरे बटक (चूतड़) काफी बड़े हो गये हैं. कोई ऐसी एक्सरसाइज बताओ जिससे मैं अपने बटक्स को मेंटेन कर सकूं.

आलिया जानबूझ कर वरूण को उकसाना चाहती थी. वो ऐसा इसलिए बोल रही थी कि वरूण ही कुछ पहल करे. मगर वरूण ने आलिया को नॉर्मल एक्सरसाइज ही बताई. बताते हुए भी वरूण ने अपनी बहन के बदन को ज्यादा टच करने की कोशिश नहीं की.

तब आलिया को लगने लगा कि उसका भाई अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स स्टोरी साइट पर शायद टाइम पास करने के लिए कहानियां पढ़ता है. वो दिल का अच्छा लड़का है. अपनी बहन के बारे में ऐसा नहीं सोचेगा.

आलिया खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका दिमाग अब भी उसका साथ नहीं दे रहा था. उसके मन में हलचल थी. अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उस दिन आलिया ने रात भर अन्तर्वासना की गर्म सेक्सी कहानियां पढ़ीं.

कहानी पढ़ते हुए ही हॉट गर्ल आलिया की कुंवारी चूत गीली होने लगी थी. उस दिन पहली बार आलिया के मन में चुदाई का मजा लेने का ख्याल आया. जब से उसने सेक्स स्टोरी पढ़ना शुरू किया था अब वो मर्दों के साथ सम्भोग का आनंद लेने के लिए उत्सुक सी रहने लगी थी.

जवान लड़की की कुंवारी चूत अब अपने अंदर लंड लेने के लिए मचलने लगी थी. ऐसे ही एक महीना बीत गया था. अब वरूण भी हॉस्टल में जा चुका था. उसके जाने के बाद अब आलिया घर में अकेली सी हो गयी थी.

फिर उसने एक ऑनलाइन साइट से एक डिल्डो मंगवा लिया. फिर उसने रात को अन्तर्वासना साइट खोली और अपनी चूत में उंगली से सहलाने लगी. उसकी कुंवारी चूत मचलने लगी.

कुछ कहानियां पढ़ने तक आलिया की चूत काफी गर्म हो गयी थी. उसकी चूत से पानी चूने लगा. उसने अपनी चूत का पानी उंगली पर लगाया और उसको चाट कर देखा. उसको अलग ही अहसास हुआ और उसके जिस्म में कामुकता हिलौरियां लेने लगी. अब उसका मन ऐसा कर रहा था कि वो अपनी चूत में कोई लंड ले ले.

उसने अपना डिल्डो निकाला और कहानी पढ़ते हुए चूत में लेने लगी. उसकी चूत को मजा आने लगा. वो धीरे धीरे अपनी स्पीड तेज करने लगी. जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे उसका हाथ उसकी चूत में डिल्डो को तेजी से अंदर बाहर करने लगा था.

आलिया ने अपने शॉर्ट्स को पूरा निकाल दिया और अपनी पैंटी को भी नीचे करके अपनी टांगों से अलग कर दिया. अब वो अपनी टांगों को फैला कर लेट गयी और चूत को खोल कर डिल्डो को चूत में लेने लगी.

उसकी कुंवारी चूत की फांकों को खोल कर डिल्डो उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. आलिया की चूत ऊपर उठ कर आने लगी थी. अब आलिया ने एक हाथ से डिल्डो लेते हुए दूसरे हाथ से फोन को नीचे रख कर दूसरे हाथ को फ्री कर लिया.

अब आलिया का दूसरा हाथ उसकी मोटी मोटी तनी हुई चूचियों को दबाने लगा. आलिया को बहुत मजा आ रहा था ये सब करने में. फिर उसने अपने टॉप को उतार दिया और पूरी नंगी होकर लेट गयी.

आलिया का जिस्म तपने लगा था. उसकी चूत में तेजी से डिल्डो अंदर बाहर हो रहा था. वो अपनी चूची के निप्पलों को उंगलियों में भींच कर मसल रही थी. अब उसके हाथ की स्पीड और तेज हो गयी.

तेजी से डिल्डो लेते हुए आलिया के बदन में एक लहर सी उठी और उसकी चूत से पहला स्खलन हुआ. आलिया की चूत ने डिल्डो को अपने रस में भिगो दिया. आलिया ने उस रस लगे डिल्डो को अपने मुंह में लेकर चाट लिया.

डिल्डो पर लगे कुंवारी चूत के रस को चाटते हुए वो उसको लंड का रस समझ कर अपनी प्यास को शांत करने की कोशिश कर रही थी. लंड के रस का स्वाद लेना अब उसके लिए और भी जरूरी हो गया था.

डिल्डो से चूत की चुदाई करने में आलिया को बहुत मजा आया. इस आनंद से वो अब तक अन्जान थी. डिल्डो को चूत में लेकर वो जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. अब रोज ही डिल्डो से मन बहलाना आलिया की आदत बन गयी.

अब आलम ये था कि आलिया सेक्स के बारे में और ज्यादा देखने और पढ़ने लगी थी. जिस साइट से उसने डिल्डो ऑर्डर किया था उसी साइट पर वो सेक्स से संबंधित और भी उपकरण खोजती रहती थी. अब आलिया का ज्यादातर समय मोबाइल पोर्न वीडियो और सेक्सी वीडियो क्लिप साइट्स देखने में व्यतीत होता था.

पोर्न फिल्म देखना भी अब आलिया की आदत बन चुकी थी. अब रात में उसको उसकी तन्हाई चैन से लेटने नहीं देती थी. उसकी चूत अब डिल्डो से भी संतुष्ट नहीं हो रही थी और वो अपनी कुंवारी चूत में अब असली लंड का मजा लेना चाहती थी.

कॉलेज में आलिया के एग्जाम्स खत्म हो चुके थे. उसके दिमाग में एक आइडिया आया. उसने सोचा कि अगर मैं अपने ही कॉलेज में किसी लड़के का लंड लूंगी तो वह अपने दोस्तों को भी इस बारे में बतायेगा. फिर उसके दोस्त भी उसकी चूत मारने की कोशिश करेंगे.

वो लड़कों की आदत से भली भांति परिचित थी. उसने सोचा कि कॉलेज के लड़के को पटाने में रिस्क है. पूरे कॉलेज में बदनामी होगी और इमेज का कचरा हो जायेगा वो अलग.

इसलिए उसने एक दूसरा प्लान बनाया. उसके मन में विचार आया कि वरूण का दोस्त रोहित जयपुर में रह कर पढ़ाई कर रहा है. रोहित कई बार वरूण के घर भी आ चुका था और आलिया की फैमिली रोहित से परिचित थी.

सुबह नाश्ते की टेबल पर आलिया ने अपने मॉम डैड से कहा कि वो जयपुर में एक महीने का कोर्स करना चाह रही है. आलिया के माता पिता भी खुश हो गये कि चलो अच्छा है कि बेटी अपने खाली समय का सही उपयोग करना चाह रही है. अगर फ्री समय को अच्छे काम में लगायेगी तो कोई हर्ज नहीं है.

मगर उसके पापा के सामने एक समस्या थी.
वो बोले- बेटी तू वहां पर ऐसे अकेली कैसे रहेगी? हमारा तो वहां पर कोई रिश्तेदार भी नहीं है कि हम तुझे उसके भरोसे ही वहां पर छोड़ दें. तू जवान हो रही है, तेरी फिक्र होगी हमें.

आलिया बोली- आपको इसकी इतनी फिक्र करने की जरूरत नहीं है. जयपुर में रोहित भैया भी रहते हैं. वो अपना अलग फ्लैट लेकर रहते हैं. मैं उनके साथ ही रह लूंगी. वो मुझे अपनी बहन ही मानते हैं.

पापा ने रोहित का नाम सुना तो उनको भी थोड़ी तसल्ली हुई. रोहित के नाम पर मॉम डैड ने आलिया को परमिशन दे दी. हॉट गर्ल आलिया भी मन ही मन खुश हो रही थी कि उसकी चूत को अब लंड जल्दी ही मिल जायेगा.

उसने फिर जयपुर में एडमिशन ले लिया. जल्दी ही जयपुर जाने का दिन भी आ गया. आलिया जयपुर के लिए निकल पड़ी. चूंकि वरूण से पहले ही फोन पर बात हो चुकी थी तो उसने रोहित को बोल दिया था कि वो उसकी बहन का ख्याल रखे.

आलिया के पहुंचने से पहले ही रोहित ने उसके लिए इंतजाम कर दिये थे. रोहित के साथ ही उसका एक दोस्त निखिल भी फ्लैट पर रहता था. उसका फ्लैट दो रूम का सेट था. मगर फ्लैट में बाथरूम केवल एक ही था.

बाथरूम कुछ ऐसे बना हुआ था कि दोनों रूम के साथ में बीच में अटैच था. एक तरफ से एक रूम का दरवाजा बाथरूम में खुलता था और दूसरी ओर से दूसरे रूम का दरवाजा बाथरूम में खुलता था.

शाम के करीब 7 बजे के आसपास ट्रेन जयपुर पहुंच गयी थी. आलिया के आने की खबर रोहित को मिल चुकी थी इसलिए वो तय समय पर आलिया को लेने के लिए स्टेशन पर पहुंच गया था.

आलिया ने उस दिन ब्लू कलर की जीन्स पहनी थी और उस पर एक सफेद रंग का टॉप पहना हुआ था. उस ड्रेस में आलिया एकदम से सेक्स बॉम्ब लग रही थी. वैसे भी आलिया अब जवानी के चरम पर थी इसलिए उसके बदन में एक अलग ही आकर्षण आ गया था.

इसलिए जब रोहित ने आलिया को देखा तो उसकी नजर भी आलिया के बदन को ऊपर से नीचे तक नापने लगी. रोहित उसको देखता ही रह गया.

आलिया भी रोहित के बारे में ऐसा ही सोच रही थी. वो आई ही थी रोहित को पटाने के लिए. मगर रोहित को देख कर लग रहा था कि आलिया को अपने मकसद को अंजाम देने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.

उसके बाद वो दोनों फ्लैट पर आ गये.

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मेरी चुत चाटने लगा

मेरे भाई का लंड आठ इंच का था. अपने भाई के लंड से कई बार चुदवा लेने से मेरी फिगर भी भरने लगी थी और मेरा जिस्म मस्त हो गया था.

कॉलेज में मेरी सहेलियां मुझे छेड़ने लगी थीं कि ऐसा क्या लेने लगी हो, जिससे तेरा जिस्म भरने लगा है.

इस पर मेरी एक सहेली मुझे छेड़ते हुए बोली- लगता है जलेबी शीरा पी गई.
उसकी बात मेरी समझ में नहीं आई मगर बाकी की सहेलियां जो कुछ चुदक्कड़ किस्म की थीं, हंसने लगीं.

मैंने उस सहेली से पूछा- जलेबी शीरा पी लेती है, तो इसमें हंसने की क्या बात है?
वो और जोर से हंसने लगी.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था.
तभी एक सहेली ने मुझसे कहा- तू बिल्कुल चूतियम सल्फेट है … अबे जलेबी शीरा पीने का मतलब भी नहीं समझती है.
मैंने उसकी तरफ देख कर कहा- अगर मैं समझ गई होती, तो पूछती ही क्यों … बता न जलेबी शीरा पीने से क्या मतलब होता है?
तभी एक दूसरी चुदक्कड़ सहेली ने मेरी चूची दबाई और कहा- आह मेरी जलेबी बाई … तूने किसके लंड का शीरा पी लिया … जो तेरे इतने कड़क मम्मे हो गए.

उसकी बात सुनते ही मुझे समझ आ गया कि कमीनी की जलेबी शीरा पीने की बात का क्या मतलब हुआ.

वैसे साली सही ही तो कह रही थी कि मेरी चुत ने भाई के लंड का शीरा पी लिया था इसलिए तो मेरी चूचियां भरने लगी थीं. चुदाई के वक्त मेरा भाई मेरी चूचियों को खूब चूसता है, जिस वजह से मेरे दूध फलने फूलने लगे थे.

मैं हंस दी और वहां से अपनी एक पक्की सहेली के साथ क्लास की तरफ बढ़ गई. मेरी इस सहेली का नाम तान्या था. वो कॉलेज में मेरी बेस्ट फ्रेंड है.

उसने मुझसे कहा- ये लड़कियाँ इतनी गंदी बातें करती हैं कि मेरी तो चुत में पानी ही आ जाता है.
मैंने उससे पूछा- तेरी चुत में पानी आ गया है … तो अब तू क्या करेगी?

वो मेरी तरफ देख कर हंसने लगी. मैंने हंस मत कुतिया … बता न कि चुत के पानी का क्या करेगी?
पहले तो वो बोली- क्या करूंगी, बाथरूम में जाकर उंगली करके पूरा शीरा निकाल लूंगी और सूसू करके वापस आ जाऊंगी.
मैंने उसकी चूची दबाते हुए कहा- कमीनी शीरा तो लंड से निकलता है … तेरी चुत से शीरा कैसे निकलेगा.

वो हंसने लगी और बातों ही बातों में उसने मुझे बताया- मैं भी शीरा ले लेती हूँ.
मैंने आंख मार कर उससे पूछा- तू किसका शीरा लेती है?
वो मेरी चूची दबाते हुए बोली- साली, अभी तू ही तो कह रही थी कि शीरा तो लंड से निकलता है, तो मैं भी लंड का शीरा ही लेती हूँ.
मैंने अपना सर पीटते हुए पूछा- अरी मूरख ये तो मालूम है कि लंड का शीरा लेती है … लेकिन किसके लंड का शीरा लेती है, ये तो बता?

पहले तो वो आनाकानी करने लगी. फिर मुझे कसम देते हुए बोली- किसी से कहना मत!
मैंने उसके सर पर हाथ रखा कि तू मेरी सबसे पक्की सहेली है, मैं किसी से नहीं कहूँगी. अब तू जल्दी बता कि किसका लंड लेती है?
उसने मुझे बताया- मैं अपने भाई का लंड लेती हूँ.

मैं उसकी बात सुनकर अवाक थी.

वो मेरी तरफ देख कर बोली- अब तू बता कि तू किसका शीरा लेती है?
मैंने भी दबी जुबान में बता दिया- मैं भी अपने भाई के लंड का शीरा लेती हूँ.

वो मेरी शक्ल देखने लगी. एक पल के लिए हम दोनों की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी. मगर अगले ही पल हम दोनों हंस पड़ी और एक दूसरी से लिपट गई. वो मुझे ऐसे चूमने लगी, जैसे हम दो रंडियां अपनी चुदाई की बात से खुश हो रही हों.

इस तरह हम दोनों ने ओपन होते ही एक दूसरे को सब बता दिया.

तान्या ने अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में ली हुई थी. उसने मुझे अपने भाई के लंड की फोटो दिखाते हुए कहा- ये मेरे भाई के लंड की फोटो है … तेरे भाई का लंड कैसा है?
मैं भी अपने भाई के लंड की फोटो अपने मोबाइल में रखे थी. मैंने भी उसको अपने भाई के लंड की पिक दिखाई.

मेरे भाई का आठ इंच का मोटा लंड देख कर तान्या बोली- वाओ तेरे भैया का लंड तो बड़ा मस्त है … मुझे भी इस लंड को अपनी चुत में लेना है … प्लीज़ तू कुछ जुगाड़ कर न!
मैंने उससे बोला- मैं भाई से बात करके बताती हूँ.

अब इधर मैं आपको थोड़ा तान्या के बारे में बता देती हूँ. तान्या का फिगर बड़े कमाल का है उसके फिगर का साइज़ 32-28-34 का था. वो एकदम दूध के जैसे गोरी थी और उसे लंबे लंबे लंड लेने का बड़ा शौक था. साथ ही वो गंदी गंदी बातें करने में मानो एक्सपर्ट थी. साली एक लाइन में दस गाली निकालती थी.

साथ ही वो मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड भी थी. अब तो हम दोनों के बीच में अपने भाइयों से चुदने का राज भी साझा हो गया था, तो हम दोनों एक दूसरे के पक्के राजदार बन गयी थी.

उस दिन उसने मुझे क्लास से बाहर खींचा और मुझे वाशरूम की तरफ ले आई. उधर उसने मुझसे कहा- चल कुतिया आज हम दोनों अन्दर चल कर लेस्बो करती हैं.

मैंने कहा- साली मरवाएगी क्या? जानती भी है … कोई लड़का आ गया तो क्या होगा?
वो बोली- साली तेरी इतनी गांड फटती है … मुझे आज ही मालूम हुआ है. भोसड़ी वाली … सभी जगह लेडीज जेंट्स टॉयलेट अलग अलग होते हैं. और तेरी मर्जी हो तो चल मैं तो जेंट्स टॉयलेट में चल कर भी तेरे साथ लेस्बियन करने को रेडी हूँ. कोई आ भी गया तो उसके लंड को भी मजा दे दूंगी.

मैंने उसकी बात सुनकर माथा पीट लिया कि किस कमीनी से दोस्ती कर ली.

खैर वो नहीं मानी और लेडिज टॉयलेट में जाकर उसने मेरी चुत में उंगली की, मेरे दूध मसले और मैंने भी उसकी चुत में उंगली करके एक दूसरे का पानी निकलवा दिया. फिर सूसू करके मैं अपनी पैंटी और सलवार ऊपर करने लगी, तो देखा उसने अपने बैग में से एक सिगरेट निकाली और लाईटर से जला कर कश लेने लगी. उसने अभी भी अपनी चुत नंगी खोल रखी थी.

मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसने मुझे आंख मारी और मेरी तरफ सिगरेट बढ़ा दी.

मैंने भी कामवासना के मद में उसके हाथ से सिगरेट लेकर अपने होंठों में लगा ली और एक कश खींचा … मगर मुझे खांसी आ गई और वो हंसने लगी. उसने अपनी चड्डी और सलवार ऊपर की और मुझे सिगरेट पीने का तरीका बताने लगी.

दोस्तो, ये कॉलेज ही होता है, जिधर हर तरह का ज्ञान दोस्तों के द्वारा मिलता है. खैर … हम दोनों बाथरूम में मस्ती करने के बाद वापस आ गयी.

शाम को मैं घर आ गई. उस समय मेरा भाई अपने रूम में था. मैं फ्रेश होकर भाई के पास गई और भाई को अपनी बांहों में लेकर उसे किस किया.

उसने भी मुझे अपनी बांहों में कस लिया. वो इस समय सिर्फ एक फ्रेंची में था. मैंने उसकी चड्डी में हाथ डालकर उसके लंड को हाथ में ले लिया. भाई मेरी इस हरकत से गर्म होने लगा और मेरी चूचियां मसलने लगा.

कुछ ही देर में मैंने भाई को बिल्कुल गर्म कर दिया.
भाई ने अपना आठ इंच का लंड बाहर निकाल लिया और बोला- चल तू बड़ी गर्म होकर आई है … पहले सेक्स कर लेते हैं.

मैं बोली- भाई अभी घर पर सब हैं, रात तो अपनी है ही मेरी जान.

मगर भाई नहीं माना. उसने जिद करके अपना लंड मेरे मुँह में दे ही दिया.

मैं बैठ कर उसका लंड चूसने लगी. मेरे अन्दर आज पहले से ही सेक्स का खुमार चढ़ा था … लंड चूसने से और नशा छा गया. मैं ज़ोर ज़ोर से भाई का लंड चूस रही थी. तभी किसी के आने के आवाज़ आई, तो मैं झट से अलग हो गई और भाई ने सब ठीक कर लिया. हम दोनों आमने सामने बैठ गए और बात करने लगे.

मेरा मन भी अब उससे चुदने को करने लगा था. भाई का लंड तो ले नहीं सकती थी … तो बाथरूम में जाकर मैंने अपने आपको शांत किया.

जैसे जैसे रात गहरी होती गई … सब सो गए. मैं सबसे छिप कर भाई का लंड चुत में लेने के लिए अपने भाई के पास आ गई. मेरा भाई अब तक सो चुका था.

मैंने उसके कमरे के दरवाजे को धीरे से बंद किया और सिटकनी लगा कर घूम गई. मैं इस समय बहुत चुदासी हो रही थी. मैंने जल्दी से अपने ऊपरी कपड़े उतार कर एक तरफ फेंक दिए. मैं अब ब्रा और पैंटी में रह गई थी. मैंने भाई के पास जाकर उसका लोअर खींच कर उतार दिया. साथ साथ में उसका अंडरवियर भी खिंचा चला आया. मैंने देखा कि भाई का सोया हुआ लंड भी मस्त लग रहा था. मैं भाई के लंड को चूसने लगी. लंड चूसते समय भाई को गीला गीला सा लगा तो उसकी आंखें खुल गईं.

भाई मुझे गाली देते हुए बोला- भैन की लौड़ी … साली आ गई अपने आदमी के पास लंड लेने.

मैं हंस दी और उसका लंड चूसने लगी. धीरे धीरे भाई का लंड एकदम खड़ा हो गया. पूरा फूल कर लंड अपनी औकात में आ गया. मैं जल्दी से अपनी चड्डी और ब्रा उतार कर भाई के लंड के ऊपर आकर अपनी चुत में लेने लगी.

मैं अपने भाई का पूरा लंड अन्दर ले गई, तो भाई बोला- साली बड़ी जल्दी लंड खा गई … किसी और का भी लेने लग गई क्या?
मैं हंस दी और बोली- भाई मेरी चुत के लिए तो आपका लंड ही बहुत है.

ये बोल कर मैं अपनी भैया के मोटे लंड से चुदने लगी.

‘आआह … आआहह … भाई चोदो ज़ोर से चोदो … बड़ा मजा आ रहा है.’

पूरे रूम में पट् फट् की आवाज़ आ रही थी.

‘आह बसस्स भाई … बहुत अन्दर तक जा रहा है … आह मैं मर जाऊंगी … आह धीरे..’
मेरी बात सुनकर भाई मुझे और ज़ोर से चोदने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने मुझको डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और ज़ोर से पीछे से लंड पेल कर मुझे चोदने लगा.

बीस मिनट की चुदाई के बाद भाई ने अपना सारा लंड रस मेरी चुत में छोड़ दिया.

वो अपने लंड की पिचकारियां मेरी चुत में छोड़ते हुए बोला- आआहह … मज़ा आ गया यार. … कल तेरी गांड मारूंगा.

मैं बोली- भाई नहीं … गांड नहीं … उधर बहुत दर्द होता है.
भाई बोला- नहीं मेरी बहना … मैं प्यार से तेरी गांड मारूंगा.
मैं बोली- यहां नहीं … मैं दिल्ली आऊंगी … तब मार लेना.

भाई ने मुझको किस किया. मैं भाई की बांहों में नंगी ही लेट गई.

मुझे अपनी फ्रेंड की बात याद थी.

मैंने भाई को बताया कि मेरी एक फ्रेंड आपसे चुदवाना चाहती है.

भाई ने मेरी सहेली के बारे में मुझसे बात की और उसका फिगर कैसा है, ये सब पूछा.

मैंने तान्या के सेक्सी शरीर की बात भाई को बताई, तो भाई का लंड तान्या की चुदाई करने के लिए खड़ा हो गया.
वो बोला- ठीक है … कब चुदवाएगी तान्या. मैं बोली- जब आप बोलो.

तान्या की चुत मिलने का सुनते ही भाई ने कहा- उसकी चुदाई पहली फुर्सत करूंगा. मगर अभी तेरी एक बार फिर से लेने का मन हो गया है.
मैं भी अपने भाई के लंड से दुबारा चुदने को बेचैन हो गई थी.

इस बार भाई से सुपरफास्ट और बहुत हार्ड तरीके से मेरी चुत चुदाई कर डाली. उसने इतनी स्पीड में चुदाई की थी कि मेरी चुत भी दर्द करने लगी थी.

भाई बोला- यार तान्या को जल्दी चुदवाना … तेरी बात सुनकर मेरे लंड में आग लग गई है.
मैं थोड़ी दुखी हो गई.

वो बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- तान्या के बाद आप मुझको तो चोदोगे नहीं?
भाई बोला- अरे नहीं यार … तान्या को एक बार खुश कर देता हूँ. उसके बाद मैं तो तेरा ही हूँ. जब तू बोलेगी तब तुझे चोद दूंगा.
मैं बोली- ओके भाई.

मैं कपड़े पहन कर अपने रूम में चली गई. सुबह कॉलेज में मैंने तान्या को रात की चुदाई के बारे में सब बता दिया.

वो गाली देते हुए बोली- साली अकेली ही चुद कर आ गई भोसड़ी वाली. मेरी चुत का क्या होगा?
मैं बोली- मर मत. … भाई से बात हो गई है … तू बता तुझे उससे कब चुदना है.
वो बोली- कल ही बुला ले.
मैंने कहा- किधर चुदेगी?
वो बोली- हां यार … ये तो दिक्कत है … उसे कहाँ बुला लूं … मादरचोद कोई प्लेस भी नहीं है.

मैं उसकी तरफ देखने लगी.
वो बोली- होटल में चली जाऊंगी.
मैंने ओके कह दिया और घर आ गई.

घर आकर मैंने भाई को बता दिया और कल उसके साथ चलने का कहा.
भाई भी राजी हो गया.

अगले दिन मैंने तान्या को भाई से मिलवाया, तो दोनों बिना किसी की शर्म के ऐसे मिल रहे थे … जैसे दोनों पहले ही एक दूसरे जानते हों.
थोड़ी देर में मैं कॉलेज आ गई.

अब आगे की स्टोरी तान्या से सुनिए.

हैलो मैं तान्या … मैं शिवानी के भाई के साथ होटल के रूम में आ गई. ये रूम मैंने ही बुक किया था. कमरे में जाते ही मैं शिवानी के भाई से चिपक गई. पागलों के जैसे उसको किस करने लगी. वो भी गर्म हो गया और मेरा पूरा साथ दे रहा था. मेरे चूचे दबा रहा था. वो दो तीन मिनट में ही पूरा पागल हो गया.

उसने धीरे धीरे करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, मैंने उसके कपड़े हटा दिए.

उसका आठ इंच कर खड़ा लंड देख कर मेरी तो गांड फट गई. मैं उससे बोली- कैसे जाएगा … ये तो बहुत मोटा और लंबा है.
वो बोला- तू मेरा कमाल देख … इस लंड को तो तू उछल उछल कर चुत में लेगी.
मैं हंस दी.

उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगा. मैं पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी ‘आआहह … आआहह … चाटो … डियर मज़ा आ रहा है … आआह..’

कुछ देर मैं भी उसका लंड चूसने लगी. फिर मैंने उससे कहा- अब नहीं रहा जा रहा … मुझे चोद दो प्लीज़.

उसने मुझे बिस्तर में चित्त लेटा दिया और मेरी टांगें ऊपर करके लंड चुत की फांकों में सैट कर दिया. उसके मलंद का सुपारा एकदम दहक रहा था. उसने मेरी चुत में लंड का एक शॉट मारा … तो उसका आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया

मेरी मैया चुद गई … ऐसा लगा जैसे किसी ने गर्म सलाख चुत में ठांस दी हो. मेरी दर्द से भरी तेज चीख निकल गई- आआहह … आआहह … निकालो.

और मेरी आँखों से आंसू निकल गए. मैंने इतना मोटा लंड अब तक नहीं लिया था. हालांकि मेरे भाई का लंड भी सात इंच का है … लेकिन शिवानी के भाई का लंड मोटा बहुत था.

थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हुआ तो वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.
मैं भी ‘आआहह … आआहह..’ करके चुद रही थी. वो ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदे जा रहा था.

कोई बीस मिनट की चुदाई में मेरी जान निकल गई. उसने मेरी चुत में ही सारा रस छोड़ दिया और मेरे ऊपर लेट गया.
थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटा रहा. फिर बोला- तेरी लेने में मज़ा आ गया.
मैं उसको किस करने लगी.

उस दिन उसने मुझको तीन बार चोदा. शाम को घर आकर मैंने शिवानी को फोन पर सब बता दिया और सो गई.

तो दोस्तो, मेरी सहेली तान्या मेरे भाई से चुद कर खुश हो गई थी. भाई को भी उसे चोदने में मज़ा आ गया था.

भाई ने घर आकर मुझे गले से लगाया और बोला- सच में तान्या बड़ी टेस्टी थी … आज उसकी चूत लेने में बड़ा मज़ा आया.

मैंने कहा- उसकी तो ले ली … मेरी कब लोगे?
भाई- तुम्हारी कल लूंगा … कल तुमको और भी मस्त चोदूंगा.

उस दिन के बाद मैं और तान्या भाई से चुद रही हैं. तान्या और मैं अपने भाई से एक साथ भी चुद चुकी हैं. तान्या के भाई से भी मैं चुद चुकी हूँ. हम चारों ने एक बार ग्रुप सेक्स भी किया है. वो सारी बातें अगली मदमस्त सेक्स कहानी में लिखूंगी. लव यू फ्रेंड्स आप भी चोदते रहिए और लड़कियों तुम सब भी चुदती रहो. जवानी एक बार ही आती है … इसके पूरे मजे लो.

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मेरी चूची अमरूद जैसी

गांव से मैं कॉलेज की पढ़ाई के लिये शहर गयी. जवान हो रही थी, मेरी कुंवारी चूत ने मुझे बेचैन करना शुरू कर दिया. एक बॉयफ्रेंड बना तो वो मेरी चूत मांगने लगा. तो मैंने क्या किया?

मेरा नाम डिम्पल है और मैं 28 साल की हूं. मेरा फिगर 36-30-36 का है. मेरी शादी भी हो चुकी है. आज मैं आपको अपनी जिन्दगी का एक अनछुआ लम्हा बताने जा रही हूं. मेरे एक फ्रेंड के कहने पर मैं ये वाकया आपके साथ बांट रही हूं.

ये घटना अब तक मेरे मन को कचोट रही थी. मैंने आज तक इसके बारे में किसी से जिक्र नहीं किया था. आज मेरा बहुत मन किया मैं इसको आप लोगों को बताऊं.

मैं इस साइट पर बिल्कुल नयी हूं. अगर मुझसे यह कहानी लिखने में कोई गलती हो जाये तो मुझे माफ करें.
अब मैं अपनी कहानी की शुरूआत करती हूं.

शादी से पहले ही मैं तीन लड़कों के साथ सम्भोग का सुख ले चुकी थी. इसलिए मैं उन तीनों के बारे में आपको एक एक करके बताऊंगी. आप थोडा़ सा धैर्य रखें.

मैं बहुत ही इज्जतदार फैमिली से हूं. 12 वीं तक तो मेरी पढ़ाई भी वैसे ही हुई जैसे कि सब लोग करते हैं अपने लोकल एरिया में. मैंने भी अपना स्कूल अपने गांव में ही पूरा किया.

उसके बाद आगे की पढ़ाई का सवाल था. मेरे मां-पापा मुझ पर काफी भरोसा करते थे. मैंने आज तक कोई गलत काम नहीं किया था और हमेशा अपनी इज्जत को बरकरार रखा. इसी भरोसे पापा ने मुझे पटना सिटी भेजने का फैसला किया.

पटना के एक अच्छे कॉलेज में मेरा एडमिशन हुआ और मैं वहीं पर हॉस्टल में रहने लगी. शुरू शुरू में सब कुछ ठीक चल रहा था. मैं भी पढ़ाई में मन लगा रही थी. मगर मैं जवान भी हो रही थी इसलिए कभी कभी नजर भटक जाया करती थी.

फिर मेरी मुलाकात कॉलेज के एक लड़के से हुई. उसका रियल नाम मैं यहां पर नहीं बता सकती हूं. मैं उसको सुमित नाम दे रही हूं.
सुमित देखने में बहुत ही स्मार्ट और हैंडसम था.

एक दिन कुछ लड़के मुझे और मेरी सहेलियों को परेशान कर रहे थे. सुमित पास आया और उसने उन लड़कों को डांट कर भगा दिया. उस दिन के बाद से मैं उसको अच्छा मानने लगी.

मेरी अभी तक उससे बात नहीं हुई थी. बस एक बार हैलो हुई थी. उसके बाद जब कभी भी वो मेरे सामने होता था तो मैं उसको स्माइल करके निकल जाया करती थी. वो भी बदले में स्माइल से जवाब देता था.

इस तरह से धीरे धीरे हम दोनों की फ्रेंडशिप बढ़ने लगी.

एक दिन उसने मुझे उसके साथ घूमने चलने का ऑफर दिया. मैं सोच नहीं पाई कि उसको क्या जवाब दूं. एकदम से किसी के इतने करीब जाने में मुझे डर लग रहा था. मैं जब गांव में थी तो लड़कों से बच कर रहती और मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड भी नहीं था.

सुमित को मैंने मना कर दिया. मैं इसके लिए कम्फर्टेबल नहीं थी. घरवालों से मुझे बहुत डर लगता था. अगर मेरे साथ कुछ भी गलत हुआ तो मेरे घरवालों का विश्वास टूट जाता.

मेरे मना करने पर सुमित ने मेरी बात का बुरा भी नहीं माना.
वो बोला- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारी इच्छा नहीं है तो रहने देते हैं. मैंने तो इसलिए पूछा था कि तुम पटना में नयी हो इसलिए तुम्हें शहर दिखा ले आता हूं.

वैसे मेरा बहुत मन करता था सुमित से बात करने के लिए. मगर मैं खुद को कंट्रोल करके रख रही थी. अब हम दोनों की दोस्ती आगे बढ़ रही थी.
सुमित ने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर मांगा. मैंने कह दिया कि मैं मोबाइल फोन नहीं रखती हूं.

वो बोला- तो फिर घर पर कैसे बात करती हो?
मैंने कहा- हॉस्टल के नम्बर पर बात हो जाती है.
वो बोला- ओह्ह, ठीक है.

इस तरह से वक्त बीतता गया और फिर मेरा बर्थडे आ गया. मेरे बर्थडे गिफ्ट के रूप में उसने मुझे एक मोबाइल फोन दिया.
मैंने वह फोन का गिफ्ट लेने से मना कर दिया.
मगर वो जिद करने लगा; कहने लगा कि अगर मोबाइल नहीं लिया तो वो मुझसे बात नहीं करेगा.
उसकी जिद के आगे मुझे मानना पड़ा और मैंने मोबाइल ले लिया.

मेरे पास मोबाइल आने के बाद रोज सुमित का फोन आता था. वो रोज मुझसे बातें करने लगा और मुझे भी उसके साथ बातें करना अच्छा लग रहा था.

उससे बात होते होते पता नहीं कब हमारी ये दोस्ती प्यार में बदल गयी. फिर एक दिन उसने मुझे प्रपोज भी कर दिया. सुमित से मेरा लगाव काफी बढ़ चुका था इसलिए मैं भी उसको मना नहीं कर पाई.
इस तरह हम दोनों ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बन गये.

उसके बाद रोज उससे घंटों बातें होने लगीं. रात रात भर उसके साथ मैं फोन पर बातें करती रहती थी. कॉलेज में भी उसके साथ टाइम स्पेंड किया करती थी. मगर अभी तक हम दोनों कहीं बाहर नहीं गये थे.

एक दिन उसने बोला कि चलो घूमने चलते हैं. मैं भी पटना में इतने दिनों से रह रही थी लेकिन अभी तक कहीं घूमी नहीं थी. इसलिए मैंने चलने के लिए हां कर दी.

मैं अपने साथ अपनी रूम मेट को भी ले गयी. हमने बाहर काफी अच्छा वक्त बिताया और मस्ती की. उसके बाद हम फिर से हॉस्टल लौट कर आ गये. कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा.

एक रात की बात है कि हम दोनों फोन पर बातें कर रहे थे. बात करते हुए सुमित थोड़ा नॉटी होने लगा. एक दो बार मना करने के बाद मेरा भी मन करने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

उस दिन के बाद से हम दोनों काफी खुलने लगे थे. अक्सर वो फोन पर मुझसे सेक्स चैट किया करता था. मैं भी उसको मना नहीं करती थी. अब हम दोनों के बीच में वो सब बातें होने लगी थीं जो एक नॉर्मल ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के बीच में होती है. हम दोनों के बीच में भी वो सब होने लगा.

फिर एक दिन उसने चिड़ियाघर में घूमने के लिए बोला. हम दोनों ज़ू में घूमने के लिए गये. इस बार केवल मैं और सुमित ही थे. मैंने उस दिन सलवार और सूट पहना हुआ था. उसके ऊपर एक दुपट्टा डाला हुआ था.

मैंने कभी जीन्स नहीं पहनी थी और न ही मैं ब्रा पहनती थी क्योंकि उस वक्त मेरे मम्में इतने बड़े नहीं थे कि उनको थामने के लिए मुझे ब्रा की जरूरत पड़े. अब मैं सुमित के साथ काफी ज्यादा कंफर्टेबल हो गयी थी.

सुमित ने मेरे हाथ को अपने हाथ में थाम रखा था और हम दोनों साथ में चलते हुए ज़ू में घूम रहे थे. काफी देर चलने के बाद हम दोनों एक जगह जाकर बैठ गये.

उस जगह पर काफी सुनसान सा था. हम दोनों एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे. हम दोनों बातें कर रहे थे कि बीच में ही सुमित ने एक किस की डिमांड कर दी.
मैं आनाकानी करने लगी.
काफी जोर देने के बाद मैं गाल पर किस देने के लिए राजी हुई.
सुमित मेरे होंठों पर किस करना चाहता था. मगर आखिर में उसने मेरे गाल पर ही हल्का सा किस किया.

फिर वो मेरी गोद में अपना सिर रख कर लेट गया. बात करते करते उसने मेरे पेट पर सूट के ऊपर से ही चूमना शुरू कर दिया. कभी मेरे पेट पर उंगली घुमाने लगा. मैंने भी उसको रोकने की कोशिश नहीं की क्योंकि अगर मैं कुछ हरकत करती तो किसी को पता चल जाता. इसलिए वो जो करता रहा मैंने करने दिया.

सुमित ने फिर धीरे से मेरे शर्ट को साइड से हटा लिया और मेरे नंगे पेट के बीच में मेरी नाभि पर किस कर दिया. मेरे बदन में जैसे चीटियां रेंगने लगी और मैं उत्तेजित होने लगी. मैं उसको रोकने लगी मगर वो रुक नहीं रहा था. फिर मैंने उसे हटाया और अपनी कुर्ती ठीक कर ली और अपने पेट के नंगे पार्ट को ढक लिया.

कुछ देर वो चुपचाप बैठा रहा. मेरा ध्यान उसकी पैंट में बनी गोल और लम्बी सी डंडे के आकार की आकृति पर गया. उसकी जिप के पास में एक लम्बा सा खीरे जैसा कुछ उठा हुआ था. शायद ये उसका सेक्स ऑर्गन था. मैंने पहली बार किसी लड़के के लिंग को ऐसे इतने करीब से उठा हुआ देखा था.

अपने ही खयालों में मैं बैठी थी कि तभी सुमित ने मेरी चूचियों पर हाथ रख कर उनको दबा दिया. उस वक्त मेरी चूची अमरूद जैसी ही थी. दो-तीन बार उसने ऐसा ही किया और मैं भी एक्साइटेड हो गयी.

यह सब कुछ मेरे साथ पहली बार हो रहा था. मगर मैं कुछ भी जाहिर नहीं कर रही थी. फिर उसने ई-पॉड निकाला और कुछ फनी वीडियो मुझे दिखाने लगा. बीच बीच में उसने उसके अंदर पोर्न वीडियो भी डाले हुए थे. उसने मुझे भी वो पोर्न वीडियो दिखा दिये.

मैंने पहली बार सेक्स वीडियो देखा था. उसमें मैंने देखा कि एक लड़की एक लड़के के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी.
सुमित बोला- तुम भी ऐसा करना चाहोगी?
मैंने मना कर दिया.

मगर फिर वो जिद करने लगा.
मैं बोली- मैं मुंह में नहीं लूंगी, हां बस हाथ में पकड़ सकती हूं.
मेरे हां करने पर उसके चेहरे पर एक हवस दिखाई देने लगी.

हम दोनों फिर थोड़ा और अंदर चले गये. वहां पर दूर दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था. वैसे भी दोपहर का टाइम हो चुका था. वहां पर ऐसे समय पर हमारे जैसे कपल ही ज्यादा रहते हैं.

उसके बाद सुमित ने अपना औजार अपनी पैंट से बाहर निकाल लिया. मैं उसके टूल को देखती ही रह गयी. मुझे काफी घबराहट हो रही थी. मैंने पहली बार लिंग ऐसे अपनी आंखों के सामने देखा था.

सुमित ने मुझे उसका लंड पकड़ने के लिये कहा. मैं शरमा रही थी. मगर फिर मैंने कांपते हाथ से उसके लंड को पकड़ लिया. उसका लंड काफी गर्म था. उसको हाथ में भर कर मैं उसे हिलाने लगी.
वो सिसकारते हुए बोला- आह्ह… डिम्पल डार्लिंग, एक बार इसको मुंह में भी ले लो.

मैंने उसको मना कर दिया. उसके बाद सुमित मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फिराने लगा. वो मेरी सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करने लगा. मैं मना करने लगी कि कोई देख लेगा.
वो बोला- दूर दूर तक यहां पर कोई भी नहीं है.
मैं आसपास देखने लगी तो सच में वहां पर कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था.

इतने में ही सुमित ने मेरी सलवार का नाड़ा खींच दिया. नाड़ा खुलते ही मेरी सलवार नीचे सरक गयी क्योंकि मैं खड़ी हुई थी.
मैंने कहा- नहीं, ये सही नहीं है सुमित.
वो बोला- जान, बस एक बार दर्शन करने दो मुझे इसके.

मैं मना करती रही लेकिन वो मानने वाला नहीं था. मैं उसकी जिद को पूरा करने के लिए मान गयी. मेरे हां करते ही वो घुटनों के बल बैठ गया और मेरी पैंटी को नीचे करने लगा. उसने मेरी पैंटी को खींच दिया और मेरी चूत को देखने लगा.

फिर मैं सलवार ऊपर खींचने लगी लेकिन उसने इसी बीच मेरी चूत पर होंठों से किस कर दिया. डर के मारे मैंने एकदम से सलवार ऊपर कर ली और बोली- चलो अब. यहां पर कोई देख लेगा.
मैंने अपनी सलवार का नाड़ा बांध लिया था.

उस दिन के बाद से जब भी मैं उससे कॉलेज में मिलती थी तो मौका पाकर वो मेरे मम्मों को दबा देता था या फिर हाथ से मसल देता था. बार बार ऐसा करने से मेरी चूचियों का साइज अब धीरे धीरे बढ़ने लगा था जो कि मैं साफ साफ नोटिस कर पा रही थी.

सुमित ने कई बार मुझे उसके रूम पर बुलाने की कोशिश की. मगर मैं टालती रही. मैं जानती थी कि अगर वो पार्क में इतना कुछ कर सकता है, कॉलेज टाइम में भी मेरी चूची पकड़ सकता है तो फिर अगर मैं अकेले में मिली तो वो बहुत कुछ कर देगा. इसलिए मैंने टाल दिया. मैं बार बार उसको मना कर देती थी.

कुछ दिन के बाद इस बात को लेकर हम दोनों का झगड़ा भी होने लगा. वो कहता था कि मैं उसको प्यार ही नहीं करती हूं, उस पर भरोसा ही नहीं करती हूं.

मैं बोली- देखो, तुम ऊपर से कुछ भी कर लो लेकिन उससे ज्यादा तो मैं शादी के बाद ही करने दूंगी. मैं शादी से पहले ये सब नहीं करना चाहती हूं. ये सब गलत है अभी.

इस तरह वक्त बीत रहा था. मैं उसको मौका नहीं दे रही थी. इसी बीच मेरी बड़ी दीदी की शादी होने लगी. लड़का यानि कि मेरा होने वाला जीजा पटना में ही जॉब करता था. फिर शादी के बाद मेरी दीदी पटना में ही रहने के लिए आ गयी.

बीच बीच में टाइम निकाल कर मैं भी दीदी के पास चली जाया करती थी मिलने के लिए. एक बार मैं दीदी के यहां पर गयी हुई थी. रात को काफी लेट हो गयी थी इसलिए मैं हॉस्टल में नहीं आई और रात में वहीं पर रुक गयी.

मेरी दीदी और जीजा का रूम साथ में ही था. वो साथ वाले रूम में ही सोये हुए थे. रात में काफी टाइम के बाद मेरी आंख खुली. मेरे कानों में कुछ आवाजें आईं.

उत्सुक होकर मैं देखने के लिए उठी कि ये कैसी आवाजें आ रही हैं इतनी रात में. मैं दीवार पर कान लगा कर सुनने लगी. वो अजीब सी आवाजें थीं.

फिर मैंने खिड़की के छेद से देखा तो दीदी और जीजा का प्रोग्राम चल रहा था. मेरे जीजा ने मेरी दीदी को नंगी किया हुआ था और वो खुद भी नंगे थे. जीजा ने दीदी की टांगों को उठा कर कंधे पर टांगा हुआ था और वो दीदी की चूत में अपना लिंग घुसा रहे थे.

दीदी के मुंह से मस्ती भरी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं और वह अपनी मोटी मोटी चूचियों को मसलते हुए आह्ह आह्ह करते हुए जीजू के लंड को अपनी चूत में ले रही थी.

दीदी की चूत में जीजा का मोटा लंड घुसते हुए देख कर मेरी धड़कन धक धक होने लगी. ये सब हो क्या रहा था. मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी. ऐसा नहीं था कि मुझे मर्द और औरत के बीच के शारीरिक रिश्ते के बारे में नहीं पता था, मगर मेरी आंखों के सामने ऐसा कुछ पहली बार मैं होते हुए देख रही थी.

फिर जीजू ने दीदी को उठने के लिए कहा. दीदी उठ गयी और जीजू नीचे लेट गये. दीदी फिर जीजू के ऊपर अपनी चूत खोल कर लंड पर बैठने लगी. दीदी ने धीरे धीरे बैठते हुए जीजा का लंड अपनी चूत में ले लिया.

लंड अंदर उतारने के बाद वो जीजा के लंड पर उछलने लगी. जीजा भी उसकी चूत में नीचे से लंड के धक्के लगाने लगे. जीजू दीदी की चूचियों को अपने हाथों से जोर जोर से दबा रहे थे. जीजू के हाथों में दीदी के मोटे मोटे चूचे उछल रहे थे.

ये सब देख कर मेरा गला सूखने लगा मगर मेरी चूत में गीलापन होने लगा. फिर जीजू ने उनको घोड़ी बना लिया और पीछे से उनकी चूत को पेलने लगे. दस मिनट हो गये थे चुदाई चलते हुए. मेरे पैर भारी हो रहे थे. मुझसे खड़ा नहीं रहा जा रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे शरीर में ताकत नहीं बची है.

फिर मैंने देखा कि जीजू ने एकदम से अपनी स्पीड बढ़ा दी और वो फिर रुकते चले गये और दीदी के ऊपर ढेर हो गये. फिर वो साइड में होकर लेट गये. दोनों हांफ रहे थे.

अब मैं वहां से साइड हो गयी. मैं अपने रूम में आकर लेट गयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ ये क्या हो रहा है. मेरी धड़कन बहुत तेजी से चल रही थी. मेरी सांस फूल सी गयी थी. पूरा बदन कांप रहा था. मगर एक एक्साइटमेंट भी थी, कुछ मदहोश कर देने वाली सी फीलिंग आ रही थी इसलिए वो सब मुझे अच्छा भी लग रहा था. मैंने चूत को कपड़ों के ऊपर से छूकर देखा तो मेरी चूत का गीलापन कपड़े तक आ चुका था.

कहानी की लम्बाई अधिक होने की वजह से बाकी का वाकया मैं आपके अगले भाग में बताऊंगी. मेरी रियल सेक्स स्टोरी के बारे में आप मुझे अपने कमेंट्स के जरिये अपनी राय बतायें.

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अलीज़ा की गांड

ब्यूटी पार्लर की आड़ में मैं कालगर्ल का धंधा भी कर लेती थी. एक नयी पुलिस वाली की भारती हुई और वो मेरे काम में रुकावट बनने लगी. तो मैंने उसका इलाज कैसे किया?

हाय मेरे दोस्तो, मैं आपकी अंजलि … मुझे फ्री सेक्स कहानी पर आप सभी से मिलना बहुत अच्छा लगा. मुझे आप लोगों के ईमेल मिले, लेकिन मैं सभी को जवाब नहीं कर सकी … सॉरी!

आज की ये सेक्स कहानी एक पुलिस वाली पर है कि कैसे उसने चुत चुदवाई और मेरी सैटिंग बन गई.

मैं जहां रहती हूँ, वहां के एक मकान में एक फैमिली रहने आयी. वो एक यादव फैमिली थी. उस फैमिली में 3 लोग रहते थे. यादव जी, उनकी पत्नी और बेटी. यादव जी की बेटी 23 साल की थी. यादव जी पुलिस में कांस्टेबल थे.

लेकिन अचानक हार्ट अटैक के कारण यादव जी की डेथ हो गई. अब उनकी बेटी और पत्नी अकेली बची थीं. यादव जी की पत्नी पहले से ही काफी बीमार रहती थी. इसलिए घर चलाने की जिम्मेदारी यादव जी की बेटी अलीज़ा पर आ गई.

अलीज़ा ने पुलिस में भर्ती होने के लिए एग्जाम दिया हुआ था. लेकिन जब रिजल्ट आया तो उसे निराशा हाथ लगी. मगर पिता की मृत्यु के चलते उसकी अनुकम्पा नियुक्ति का प्रार्थनापत्र स्वीकार हो गया और उसे भी एक कांस्टेबल की पोस्ट मिल गई.

अलीज़ा के मन में इस पोस्ट से संतुष्टि नहीं हुई, वो पुलिस विभाग में किसी बड़े पद के सपने देखती थी.

इससे पहले इस सेक्स कहानी को रूप दिया जाए, उससे पहले मैं आपको अलीज़ा के बारे में बता देती हूँ. अलीज़ा की उम्र 23 साल की थी. उसका फिगर 34-28-36 का था. उसे देख कर कोई कामुक हो जाए, ऐसी मस्त सुन्दरी थी वो. उसे देख कर किसी का भी मन उसे चोदने का हो जाए.

जब अलीज़ा पुलिस वर्दी में घर से निकलती, तो बड़ी ज़बरदस्त लगती थी. पीछे से उसकी गांड ऐसे ठुमकती थी, जैसे चुदवाने की चाह में कोई लौंडिया गांड मटका रही हो. अब आप लोग अलीज़ा की खूबसूरत जवानी को समझ गए होंगे कि कितनी वो कितनी सेक्सी और हॉट दिखती होगी.

अलीज़ा थी तो एक कांस्टेबल, लेकिन वो रौब इतना दिखाती थी, जैसे पुलिस इंस्पेक्टर हो.

आपको तो मालूम ही है कि मेरा पार्लर लड़कियों को मसाज के लिए ट्रेनिंग देता है. उसी की आड़ में मुझे बिजनेस भी मिल जाता है. एक दिन इसी बात को लेकर अलीज़ा ने मुझसे लड़ाई की. तब मैंने सोच लिया कि इसे मजे चखा कर ही रहूंगी.

मैं हमारे एरिया के एक एमएलए से मिली. उस एमएलए का नाम रोशन लाल था. उसका दबदबा भी बहुत था. मैं रोशन लाल से मिली और उसे अलीज़ा के बारे में बताया. रोशन लाल को मैं कई बार आइटम सप्लाई कर चुकी थी, तो वो मेरी बात मानता था.

रोशन लाल बोला- अरे अंजलि डार्लिंग, तेरा काम हो जाएगा, तू जा और सो जा. अभी जरा इलेक्शन आ रहे हैं. इलेक्शन के बाद तेरा काम हो जाएगा.
मैंने रोशन लाल को कुछ पैसे दिए, वो पैसे उसने मना करते करते रख लिए.

आप सब तो जानते ही हैं कि पैसा हर किसी को अच्छा लगता है और पैसे से ही हर काम चलता है.

कुछ समय बाद इलेक्शन हो चुके थे. तो मैंने रोशन लाल को फोन किया और उससे बोली- रोशन लाल इलेक्शन हो चुके हैं … अलीज़ा से कब बदला लेगा?
रोशन लाल बोला- मैं अभी दिल्ली जा रहा हूँ … तब तक इलेक्शन रिजल्ट आ जाएगा.

फिर वो दिन भी आ गया. इलेक्शन में रोशन लाल इस बार भी जीत गया और दिल्ली से आ गया था. उसने अलीज़ा की खबर ली और वो जिस थाने में थी, वहां से उसका ट्रांसफर करवा दिया.

इस बार रोशन लाल ने अलीज़ा की ड्यूटी अपने फार्महाउस पर लगवा दी, इधर वो मीटिंग करता था और सबको पार्टी देता था.

दूसरे दिन रोशन लाल मुझसे बोला- फार्महाउस आ जाना, कल से अलीज़ा की ड्यूटी वहीं करवा दी है.
मैंने कहा- ठीक किया साली को इधर से हटवा दिया.
रोशन लाल हंस कर बोला- अब मैं अलीज़ा की मां चोद दूंगा!
मैंने हैरान होकर कहा- वो कैसे?
रोशन लाल बोला- तू खुद आ कर देख ले ना … तू अन्दर रूम में रहना, रूम में सीसी टीवी कैमरा लगा है. तू इधर से ही अच्छे से उसकी मां चुदते देख लेगी.
मैं बोली- ठीक है, मैं आती हूँ.

फिर मैं रोशन लाल के फार्महाउस पहुंच गई और अन्दर जहां उसके ऑफिस में सीसी टीवी रूम था, वहां बैठ गई. मैं टीवी में देख रही थी कि रोशन लाल कब आएगा और अलीज़ा से बदला लेगा. इतने में अलीज़ा भी फ़ार्म पर आ गई. अलीज़ा वर्दी में थी. उसकी चुस्त वर्दी की वजह से उसके मम्मे एकदम उभर रहे थे और गांड एकदम टाईट थी.

लगभग दो घंटे बाद रोशन लाल आया.

कुछ देर बाद रोशन लाल ने अलीज़ा को अन्दर बुलाया. मैं सब कुछ सीसी टीवी से देख रही थी. मुझे उसकी आवाज भी आ रही थी. ये आवाज रोशन लाल के रूम से सुनाई दे रही थी.

रोशन लाल- और सुना अलीज़ा कैसी है?
अलीज़ा- जी सर … मैं ठीक हूँ.
रोशन लाल- मैंने सुना है कि तू कांस्टेबल से ऊपर की पोस्टिंग चाहती है.
अलीज़ा- जी सर, ये मेरा सपना है … काश सच हो जाए.
रोशन लाल- अरे तेरा सपना कितना सा है … ये तो बड़े आराम से हो सकता है. मैं करवा सकता हूँ लेकिन …

ये सब रोशन लाल अपने लंड मसलते हुए बोला था.

अलीज़ा- जी सर … करवा दो प्लीज़ … मैं कुछ भी कर सकती हूँ.
रोशन लाल- कुछ भी का मतलब समझती है न … अलीज़ा सोच ले तू क्या बोल रही है?

रोशन लाल ये कहते हुए फिर से अपने लंड पर हाथ घुमाया.

अलीज़ा हंस कर बोली- हां सर मैं समझती हूँ.

ये कहते हुए वो रोशन लाल की गोद में बैठ गई. अलीज़ा ने अपनी गांड रोशन लाल के लंड से टच कर दी और बोली- अब बोलो सर जी?

रोशन लाल ने ऊपर से पीछे हाथ डाल कर उसके मस्त बुब्बुओं को दबाना शुरू कर दिया. अलीज़ा ‘सीई … आ. … सीई … उफ्फ..’ की सिसकारी भर रही थी.

फिर रोशन लाल ने अलीज़ा की टोपी हटा दी और अलीज़ा के बाल खोल दिए. रोशन लाल अलीज़ा के बालों को सूंघने लगा. उसके बालों में सुगंध थी.

रोशन लाल लम्बी सांस भर कर खूशबू का मजा लेते हुए बोला- आह क्या मस्त जुल्फें हैं तेरी अलीज़ा जान.

मैं ये सब सीसी टीवी से देख रही थी. मुझे भी सनसनी होने लगी. मेरे सामने एक मर्द अलीज़ा जैसी सुन्दरी के साथ खेल रहा था.

कुछ पल बाद रोशन लाल ने अलीज़ा की शर्ट उतार दी. अलीज़ा ने अन्दर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई थी. वो अभी भी पैंट पहने हुए थी. रोशन लाल ने अलीज़ा को उठाया और आगे की ओर करके वो अलीज़ा के दूध दबाने लगा. साथ ही वो अपना एक हाथ अलीज़ा की चूत पर घुमाने लगा.

अलीज़ा मस्ती में ‘सीई … अहह … सीई … ऊ उह्ह … रोशन लाल जी … आज आप खूब एंजॉय कर लो … मगर मुझे पोस्टिंग हर हाल में चाहिए.

रोशन लाल ने यह सुनते ही अलीज़ा की ब्रा फाड़ दी और बोला- भोसड़ी वाली मादरचोदी … आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा.

इतना बोल कर रोशन लाल ने अब अलीज़ा की पैंट भी उतार दी. अलीज़ा की पैंट के साथ ही उसकी पैंटी भी निकल गई थी. अब अलीज़ा एकदम नंगी हो गई थी. रोशन लाल ने नंगी अलीज़ा को अपनी गोद में उठा कर सोफ़े पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगों को खोल दिया. उसके सामने अलीज़ा की चूत खुली पड़ी थी. वो अलीज़ा की चुत चाटने लगा.

रोशन लाल अलीज़ा की चुत पर ऊपर से नीचे तक जीभ फेरता हुआ कहने लगा- आह … क्या मस्त चूत है बहन की लौड़ी की … आह आज तो तेरी चुत को मस्त कर दूंगा.

ये बोल कर रोशन लाल अपनी पूरी जीभ चुत में डाल कर चाटने लगा. अलीज़ा मस्ती से मादक सिसकारियां भरने लगी थी.
उसकी गांड खुद ब खुद रोशन लाल के मुँह पर उठती जा रही थी. जिससे रोशन लाल भी अलीज़ा की चुत को खूब चाटने लगा.
कुछ ही पलों में अलीज़ा झड़ गई.

अलीज़ा की चूत मलाई से सं गई थी. जिसे रोशन लाल मस्ती से चाटता गया. इससे अलीज़ा की चुत एकदम चिकनी हो गई थी.

अब रोशन लाल ने अपने कपड़े उतार दिए और अलीज़ा के सीने पर बैठ गया.
रोशन लाल गुर्रा कर बोला- चल लंड हिला भोसड़ी की.

अलीज़ा ने रोशन लाल का लंड हिलाना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों में रोशन लाल का लंड खड़ा हो चुका था. मैं सीसीटीवी से देख रही थी. मुझे उसका लंड लगभग 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा दिख रहा था.

इसके बाद रोशन लाल ने अपना लंड अलीज़ा के होंठों पर रखा और अपना टोपा अलीज़ा के होंठों पर फेरने लगा. अलीज़ा ने अपने होंठ भींच रखे थे, शायद वो लंड चूसना नहीं चाह रही थी. मगर रोशन लाल ने उसके दोनों गाल दबा कर लंड को अलीज़ा के मुँह में घुसेड़ दिया.

अब अलीज़ा ने भी लंड पकड़ कर मुँह में चूसना चालू कर दिया. कोई 5 से 7 मिनट बाद रोशन लाल अलीज़ा के मुँह को मस्ती से चोदने लगा. वो अपना लंड पूरा अन्दर बाहर करने लगा था. रोशन लाल अलीज़ा रंडी के मुँह की चुदाई जम कर करने लगा. कुछ मिनट बाद रोशन लाल के लंड का पानी निकल गया और उसने सारा अलीज़ा के मुँह में ही छोड़ दिया. अलीज़ा भी जोश में थी, उसने रोशन लाल के लंड का पूरा पी लिया.

अब रोशन लाल ने उससे पूछा- पहले चुदी है या नहीं?
अलीज़ा मुस्कुरा कर बोली- जब मैं ट्रेनिंग में गई थी, तो वहां जो ट्रेनिंग ऑफिसर था … वो सारी लड़कियों को चोदता था. उसी ने मुझे भी चोदा था.

रोशन लाल ने हम्म की आवाज निकाली और अलीज़ा से फिर से लंड खड़ा करने को कहा.

अलीज़ा फिर से रोशन लाल का लंड हिलाने लगी. कोई 5 मिनट में फिर से रोशन लाल का लौड़ा खड़ा हो चुका.

अब रोशन लाल ने अलीज़ा को सोफ़े पर सीधा लेटा दिया और अपना लंड चूत पर सैट करके एक धक्का दे दिया. उसका पूरा लंड सरसराता हुआ चुत के अन्दर घुसता चला गया.

अलीज़ा एकदम से लंड घुसने से जोर से चीख पड़ी- आह मर गई … आआहह … मेरी फट गई … आह फाड़ दी चूतिए ने.

यह सुन कर रोशन लाल ने लंड फिर से बाहर निकाला और बिना देर किए फिर से अन्दर पेल डाला. अलीज़ा की चिल्लपौं को अनसुना करते हुए वो लंड चुत में अन्दर-बाहर करने लगा.

थोड़ी देर बाद अलीज़ा भी अपनी गांड उठा कर लंड से चुदवाने लगी. ये देख कर रोशन लाल भी जोर जोर से ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.

लगभग 20 से 25 मिनट बाद रोशन लाल ने लंड चुत से बाहर निकाला और सोफ़े पर बैठ गया. मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी खड़ा था.

रोशन लाल अलीज़ा से बोला- चल रंडी … लंड पर बैठ और उछल उछल कर मजे दे. आज तुझे दरोगा बना कर ही छोडूंगा.

ये सुनकर अलीज़ा गांड मटकाते हुए उठी और रोशन लाल के सीने की तरफ मुँह करके बैठ गई. फिर उसने लंड को अपनी चुत में सैट किया और पूरा लंड चूत में ले लिया.

लंड अन्दर लेते ही उसकी एक बार सीत्कार निकली और वो अगले ही पल गांड उछाल उछाल कर रोशन लाल को मजे देने लगी.

रोशन लाल अलीज़ा की गांड पकड़े हुए उसकी चुत में लंड पेल रहा था. रोशन लाल अलीज़ा के दूध चूसता हुआ चुदाई का मजा ले रहा था. साथ ही वो अलीज़ा की गांड में भी उंगली डाल रहा था.

वो अलीज़ा को इसी पोज दस मिनट तक चोदता रहा. अलीज़ा अब थक गई थी और वो अपनी तरफ से जरा भी उछल कूद नहीं कर रही थी.

फिर रोशन लाल ने अलीज़ा को फिर से सोफ़े पर सीधा लेटा दिया और जोर जोर से ठोकने लगा.
अलीज़ा समझ गई कि रोशन लाल अब लंड का पानी छोड़ने वाला हो गया है. ये समझते ही अलीज़ा रोशन लाल से बोली- रोशन लाल, अपना पानी चूत में नहीं, बाहर छोड़ना.

लेकिन रोशन लाल कहां सुनने वाला था. वो बस धकापेल चोदता रहा. उसने अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी थी.

फिर रोशन लाल ने एकदम से एक करारा झटका दिया और लंड का पूरा पानी अलीज़ा की चूत में फेंकने लगा. वो अलीज़ा के ऊपर लेट गया था ताकि पानी बाहर ना निकलने पाए.

दो मिनट बाद रोशन लाल ने लंड बाहर निकाला, तब तक अलीज़ा की चूत में पानी घुस चुका था.

अलीज़ा तनिक गुस्सा हुए बोली- तुमने पानी अन्दर क्यों डाला?
रोशन लाल बोला- मादरचोदी पोस्टिंग करवाना है ना … तो ज्यादा चुदुर चुदुर नहीं कर.
अलीज़ा चुप हो गई.

रोशन लाल कुछ देर अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा. अलीज़ा भी अपनी हांफी ठीक कर रही थी.
कुछ देर बाद रोशन लाल बोला- चल अब उल्टी लेट जा रांड … अब तेरी गांड का नम्बर है.

रोशन लाल के मुँह से ये सुन कर तो मैं भी सकते में आ गई. उधर अलीज़ा भी बिना चूं-चपड़ किए उल्टी लेट गई थी.

रोशन लाल ने अपने खड़े लंड सहला कर गांड मारने के लिए रेडी किया और अलीज़ा की गांड में लंड डालने लगा.

अलीज़ा लंड गांड में लेते ही चीख उठी- आह मर गई … रोशन लाल जी आपका लौड़ा है या लोहा की रॉड है.

रोशन लाल ने उसकी कोई परवाह नहीं की और उसकी मखमली गांड मारने लगा. रोशन लाल का लंड अलीज़ा की गांड में जाते समय बड़ी आवाज कर रहा था. कमरे में से ‘घप्पा घप्प … घप्पा घप्प..’ की आवाज आ रही थी.

कुछ देर बाद रोशन लाल का पानी फिर से छूटा और उसने पूरा पानी अलीज़ा की गांड में ही छोड़ दिया. अलीज़ा भी झड़ चुकी थी.

रोशन लाल ने पूरे दो बार अलीज़ा की चुदाई की और बैठ कर सिगरेट फूंकने लगा. उधर अलीज़ा मरी कुतिया सी कुनमुना रही थी.

तभी रोशन लाल के पास किसी का फोन आया, तो वो कपड़े पहन कर चला गया. उसके जाते ही अलीज़ा बाथरूम में चली गई और उधर नहा कर उसने अपनी वर्दी पहन ली.

जब वो रूम के बाहर निकली, तो उसने मुझे देखा.

अलीज़ा मुझे देख कर चौंक गई और बोली- अंजलि तू यहां?
मैं बोली- क्यों बहुत रौब झाड़ती थी ना … तूने मुझसे लड़ाई की थी … उस वक्त भी मैं तुझसे बोली थी कि तुझे छोडूँगी नहीं … मैंने सब देख लिया कि रोशन लाल तुझे कैसे रगड़ा है.

मैंने उसे सीसी टीवी वाली बात बताई और बोली- देख … मुझे सब मालूम है कि कैसे रोशन लाल तुझे चोद रहा था.
अलीज़ा मेरे पैर पकड़ कर बोली- अंजलि जी … प्लीज़ मुझे माफ कर दो, ये बात आप किसी से मत कहना, आप जो बोलोगी … मैं करूंगी.
मैं बोली- ठीक है … मैं तुझे माफ़ भी कर सकती हूँ … और तुझे किसी बड़ी पोस्ट पर भी सैट करवा सकती हूँ. लेकिन तू मेरा कहना माने तो!
अलीज़ा बोली- क्या काम!

मैं बोली- मुकेश जी को जानती है … जो डीएसपी हैं. बस तू उन्हें खुश कर दे. वो तुझे ऊंची पोस्ट पर सैट करवा सकते हैं और इस बात के लिए रोशन लाल उनसे तेरी सिफारिश भी कर देगा.

यह सुन कर अलीज़ा पहले तो गुस्सा हो गई और बोली कि मैं कोई ऐसी वैसी रंडी नहीं हूँ … पुलिस वाली हूँ.
मैं बोली- अरे वो मुकेश जी भी डीएसपी हैं. वैसे भी तू रोशन लाल के साथ चुद चुकी है … अब क्या शर्माना. तुम हां कर दोगी तो तुम्हारा ही काम बन जाएगा.

अलीज़ा बोली- तुम मुझसे बदला ले रही हो या मेरी मदद कर रही हो?
मैंने कहा- तेरी मदद इसलिए कर रही हूँ कि तू मेरे धंधे में सरदर्द न बने बल्कि मेरी मदद करे.

अलीज़ा ये सुनकर मेरी बात मान गई.

मैंने मुकेश जी को फोन किया- हैलो डीएसपी मुकेश जी से बात हो रही है?
मुकेश- हां जी … अंजलि जी बोलिये. मेरे से कुछ काम था या कुछ नयी माल सैट की है?
मैं- डीएसपी साहब माल ही के लिए फोन किया है … बड़ी हॉट है … कितना दोगे?
मुकेश- आप आधे घंटे में उसे उसी वाले होटल में पहुंचा दो … फिर देखता हूं.

उनका ये कहना था कि मैं समझ गई कि कौन से होटल के लिए कह रहे हैं.
मैंने फोन रख दिया और अलीज़ा से बोली- चल होटल चलते हैं.

हम लोग जब तक होटल पहुंचे, तब तक मुकेश जी होटल पहुंच चुके थे.
मैंने होटल में आकर मुकेश जी को कॉल किया- डीएसपी साहब किस रूम में आना है?
मुकेश- अपना वही 308 नम्बर है.

फिर मैं उस रूम में गई. मुकेश जी सिर्फ अंडरवियर में बैठे सिगरेट फूंक रहे थे … सामने व्हिस्की की बोतल और गिलास बना रखा था.

वो अलीज़ा को देख कर चौंक गए- अरे अंजलि जी … ये अलीज़ा यहां क्या कर रही है?
मैं बोली- अरे मुकेश जी यह तो आपके विभाग का ही माल है.
मुकेश जी बोले- ये क्या मज़ाक है?
मैं बोली- ये मज़ाक नहीं है. आज आपकी ही पुलिस वाली आपके नीचे होगी. ये आज आपसे चुदवाएगी.

मुकेश ने अलीज़ा की तरफ देखा, तो अलीज़ा बोली- जी सर मैं रेडी हूँ.
मुकेश- ओके ठीक है … मुझे भूख मिटानी है … चल आ जा.

मैंने अलीज़ा को छोड़ दिया और मुकेश ने खींच कर अलीज़ा को अपनी गोद में ले लिया. साथ ही मुकेश ने मुझे इशारा किया. मैं उनका इशारा समझ गई और टेबल पर रखे पर्स से बीस हजार रूपए निकाल कर मुकेश जी को दिखाते हुए कमरे से जाने का पूछा.

मुकेश ने आंख दबा कर हां कर दिया और मैं पैसे लेकर बाहर चली गई.

अलीज़ा और मुकेश जी उस कमरे में लगभग चार घंटे रुके और उन दोनों की मस्त चुदाई लीला चली.

एक पुलिस वाली, रंडी के जैसे चुद गई और अब अलीज़ा का प्रमोशन भी हो गया. अलीज़ा की अब एएसआई के पद पर पोस्टिंग हो गई है … लेकिन अलीज़ा अब लंड के बिना नहीं रह पाती है.

अब तो लंड की भूख होने पर अलीज़ा सीनियर जूनियर भी नहीं देखती है, उसे जो भा जाता है, उसी से चुदवा लेती है. उसने कई बार तो थाणे में बंद अपराधियों के लंड से भी अपनी चुत की खुजली मिटाई है.

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मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी

कॉलेज लाइफ में खूब लंड लिये. कॉलेज के बाद लंड नहीं मिला. मेरी सहेली ने सगे भाई बहन का सेक्स सुझाया. मैंने क्या किया? भाई बहन की चुदाई की कहानी में पढ़ें.

दोस्तो, मेरा नाम पारुल है. मैं 22 वर्ष की हूँ. मेरे परिवार में हम 4 लोग हैं- मम्मी-पापा, मैं और मेरा बड़ा भाई विक्रांत. जिसकी उम्र 24 वर्ष है.

अब मैं अपनी मुद्दे की बात पर आती हूँ. आज मैं आप सबको बताना चाहती हूँ कि 20 की उम्र के बाद लड़का हो, चाहे लड़की सभी को शारीरिक संतुष्टि के लिए सेक्स चाहिए होता है. यह भाई बहन की चुदाई की कहानी इसी सच्चाई को कहती है.

आगे बढ़ने से पहले मैं अपने बारे में आपको बता देती हूं. मेरा फिगर 34 28 36 का है. मेरे कॉलेज और गांव के लड़के सभी मुझ पर मरते थे. अपनी स्कूल लाइफ में भी लड़कों के साथ मैंने काफी मजे किये हैं.

उसके बाद कॉलेज में आने के बाद मैंने 2 लड़कों को पटा लिया और उनके साथ भी बहुत मस्ती की. मूवी देखते समय भी मैं अपनी चूची दबवाती थी. लड़कों को जवान लड़की की चूची बहुत ज्यादा आकर्षित करती हैं और चूचियों से खेलना और उनको दबाना वो बहुत पसंद करते हैं.

अपने बूब्स दबवा दबवा कर मैंने 34 के करवा लिये थे. सभी लड़कियां ऐसे ही बूब्स चाहती हैं.
जब मेरी कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो गयी तो मैं घर पर रहने लगी. अब मेरे बूब्स के साथ खेलने वाला कोई नहीं रह गया था मेरे पास.

एक दिन मैंने अपनी सहेली सपना को ये बात बताई. उसने मुझे मेरे भाई को पटाने का आइडिया दिया. सपना कहने लगी कि उसने भी अपने भाई को पटा रखा है और वो अपने भाई के साथ खूब मजे करती है. घर में ही उसको मस्त लंड मिल गया है.

सपना की बातें मुझे उत्तेजित करने लगी. मैंने अपने भाई को पटाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया. काम थोड़ा मुश्किल था लेकिन इतना भी नहीं कि मैं कर ही न सकूं. मैं देखने में बहुत ज्यादा सेक्सी हूं इसलिए मेरे लिए आसान था.

किसी भी लड़की को अपने भाई को पटाने में मुश्किल इसलिए होती है क्योंकि भाई-बहन के रिश्ते में हमें शर्म आती है. वरना सेक्स तो लड़के भी करना चाहते हैं जैसे कि हम लड़कियां चाहती हैं. लड़के पटा पटा कर मुझे लाइफ में इतना तजुरबा तो हो गया था कि मैं लड़कों की कमजोरी जान चुकी थी.

अब मुझे लंड चाहिए था. वो भी अपने ही भाई का लंड.

मेरे पापा की दुकान है और मेरी मां घर पर ही रहती है. हम लोग मिडल क्लास परिवार से हैं. मेरा भाई कॉलेज के थर्ड इयर में पढ़ रहा था उस वक्त. यह बात आज से साल भर पहले की ही है.

मेरे और विक्रांत के एग्जाम खत्म हो चुके थे. हम लोग अब घर पर ही रहते थे. पापा सुबह दुकान पर चले जाते थे. मां घर के काम में लगी रहती थी.

घर में मैं बोर हो रही थी और कॉलेज के लड़कों के साथ की हुई मस्ती की यादें मुझे परेशान करने लगीं. मैं अपनी सहेली सपना और उसके भाई के सेक्स रिश्तों के बारे में सोचने लगी. मैंने सपना को फोन किया और उससे कहा कि मैं भी अपने भाई को पटाना चाहती हूं.

सपना ने मुझे कुछ टिप्स दिये. मैं उसके सुझाव सुन कर खुश हो गयी. मुझे लगने लगा कि मैं भी अपने भाई को पटा सकती हूं. अगले दिन से मैंने उसकी बताई बातों पर अमल करना शुरू कर दिया.

पहला दिन:
पहली सीख के तौर पर मैंने डीप गोल गले के टॉप्स के साथ स्कर्ट या जीन्स पहनना शुरू किया. उस दिन जब सुबह विक्रांत बेड पर लेटा हुआ था तो मैं उसके रूम में झाड़ू लेकर पहुंच गयी. उसके सामने झुक कर झाड़ू देने लगी.

मेरा प्लान कामयाब भी हो रहा था. विक्रांत मुझे नोटिस कर रहा था. मैं भी जानबूझ कर अपने चूचे हिला रही थी. ये सब होने के बाद मैं बाहर आ गयी.

फिर दोपहर में मुझे पैसे चाहिए थे. मैं भाई के पास जाकर पैसे मांगने लगी और मजाक करते हुए उसकी पीठ पर चढ़ गयी. मैंने अपने बड़े बड़े बूब्स उसकी पीठ पर टच किये. उसने भी मुझे पीछे हाथ लाकर कस कर पकड़ लिया. जैसा सपना ने बताया था वैसा ही हो रहा था.

दूसरा दिन:
विक्रांत ड्राइंग रूम में बैठ कर टीवी देख रहा था. मैंने उसके सामने झुक कर बातें करना शुरू किया. जैसे जैसे मेरे बूब्स के दर्शन उसको हो रहे थे उसका लंड उसके शॉर्ट्स में उठने लगा था. मैं ये सब साफ नोटिस कर पा रही थी.

उसी रात को हम लोग टीवी देख रहे थे और मम्मी किचन में खाना बना रही थी. तभी अचानक लाइट चली गयी और अंधेरा हो गया. मेरे मन में एक तरकीब सूझी और मैं अपना मोबाइल ढूंढने लग गयी.

अंधेरे का फायदा उठा कर मैंने अपने भाई की जांघों के बीच में हाथ मारा और मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसने बोला कुछ नहीं लेकिन मुझे हटाने के लिए उसने मुझे भी हाथ मारा और मेरे बूब्स को छेड़ दिया. ये उसकी तरफ से पहला इशारा था.

तीसरा दिन:
तीसरे दिन मैं पढ़ाई कर रही थी. तभी विक्रांत बोला कि कुछ समझ नहीं आ रहा हो तो पूछ लेना. फिर मैंने भी मौका देख कर बोल दिया कि भाई एक थ्यौरी समझा दो.

उस दिन उसने मेरी गोद से नोटबुक उठाये बिना ही मेरी गोद में रखे हुए मुझे थ्यौरी समझाने लगा. वो बीच बीच में मेरी जांघ और चूत पर भी टच करने की कोशिश कर रहा था. मुझे भी अच्छा लग रहा था लेकिन डर भी था कि कहीं मां न आ जाये.

उसने मुझे थ्यौरी बता दी और दूसरे रूम में चला गया. मैंने उसको फिर से बुलाया और कहा- एक सवाल और भी है.
इस बार सवाल समझाते हुए विक्रांत ने मेरे बूब्स को कई बार टच किया. जब उससे रुका न गया तो उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. मुझे अच्छा लगने लगा.

मेरा भाई मेरे बूब्स दबा कर मजा ले रहा था और मैं भी गर्म हो रही थी. मैंने भी उसको रोका नहीं और वो भी नहीं रुका. फिर कुछ देर के बाद मां के आने की आहट हुई और हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर नॉर्मल हो गये.

अब विक्रांत मेरे जाल में पूरी तरह से फंस चुका था.

उसी दिन फिर शाम को मां खेत में चली गयी. हम भाई-बहन घर में अकेले थे. मैं अपने और विक्रांत के लिए रसोई में मैगी बनाने चली गयी.

पीछे से आकर विक्रांत ने मुझे हग कर लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा. मुझे भी बहुत मजा आने लगा. मैंने भी पीछे मुड़कर विक्रांत के होंठों को चूम लिया.

और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. ये मेरे भाई के साथ मेरा पहला किस था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. हम दोनों काफी देर तक किस करते रहे.

फिर वो मुझे उठा कर बेड पर ले गया. हमने बहुत देर तक किस किया. उसके बाद विक्रांत ने मेरी टीशर्ट को उतार दिया. मैं ब्रा में रह गयी. विक्रांत मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी एक एक चूची को दबाते हुए चाटने लगा. मेरी ब्रा गीली होने लगी.

विक्रांत जोर जोर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मैं सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … विक्रांत कोई आ जायेगा. बस करो … आह्हह… ओहह … रुको.
मगर विक्रांत नहीं रुक रहा था.

फिर उसने मेरी जीन्स भी निकाल दी. अब मैं ब्लैक ब्रा और पैंटी में थी. उसके बाद उसने मेरे बूब्स को नंगा कर दिया और पीने लगा. मुझे मजा आने लगा. मैं उसके बालों को सहलाने लगी.

मेरे चूचे पीने के बाद उसने मेरी पैंटी भी निकाल दी. मेरे भाई के सामने मेरी चूत नंगी हो गयी. मुझे अलग ही रोमांच मिल रहा था उसके सामने नंगी होकर. वो मेरी चूत को चाटने और चूसने लगा.

मैं तड़प उठी. सपना के बारे में सोचने लगी कि वो सच में बहुत मजा लेती होगी अपने भाई के साथ! क्योंकि विक्रांत के साथ मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

हम दोनों ने काफी देर तक मजे किये लेकिन चुदाई नहीं हो पाई क्योंकि मम्मी के आने का डर था.

घर में चुदाई का मौका नहीं मिल पा रहा था. इसलिए हम दोनों ने कॉलेज का बहाना करने का सोचा.

कॉलेज खुलने के बाद हम दोनों घर से कॉलेज के लिए काम कह कर निकले लेकिन हमें कहीं और ही जाना था.
हम सीधे एक होटल में पहुंचे. वहां पर हमने रूम बुक किया. वहां सुबह 10 बजे पहुंच गये थे हम.

जैसे ही हम रूम में पहुंचे तो मैं विक्रांत की गोद में कूद गयी. उसने भी मुझे लपक लिया. उसके हाथ मेरे चूतड़ों को भींच रहे थे. हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गये थे.

कुछ देर के बाद जब भाई से रुका न गया तो उसने मुझे बेड पर पटक लिया. मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा. उसने मेरे टॉप को निकाल कर मेरे बूब्स को मुंह में ले लिया.

मेरा हाथ अपने आप ही विक्रांत की पैंट में घुस गया था. मेरा हाथ उसके अंडरवियर को टटोल रहा था. मैं उसके लंड को देखना चाह रही थी. मेरा हाथ उसके लंड पर जा लगा. उसका लंड बहुत मोटा और लकड़ी की तरह एकदम से सख्त हो गया था.

बहुत दिनों के बाद मुझे लंड का टच मिला था. कॉलेज के लड़कों के लंड से खेलने के बाद अब भाई का लंड पकड़ना बहुत मजा दे रहा था. विक्रांत मेरी चूचियों को मसल मसल कर पी रहा था. उसके बाद विक्रांत ने मुझे पूरी नंगी कर दिया. वो मुझे निहारने लगा. मैंने भी उसको अपनी जवानी के खूब दर्शन करवाये.

विक्रांत ने मेरी चूत को छेड़ा तो मैं सिहर गयी. मैंने उसके सिर को नीचे की ओर दबाने लगी. वो मेरा इशारा समझ गया और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं मस्ती में खो गयी. पागल होने लगी.

न जाने इन लड़कों को चूत चाटने में क्या मजा आता है. विक्रांत पागलों की तरह मेरी चूत तो पी रहा था.
बड़ी मुश्किल से मैंने उसको रोक कर कहा- मेरी जान … अब मेरी चूत को अपने लंड का स्वाद चखा दे. मैं और इंतजार नहीं कर सकती हूं अब.

उसने हां करते हुए बैग से कॉन्डम निकाल कर मुझे दे दिया. मैं उसके लंड को पकड़ कर कॉन्डम लगाने लगी. पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मुझे एक दो पल लंड का स्वाद थोड़ा अजीब लगा मगर फिर मजा आने लगा.

विक्रांत भी मजे से अपना लंड चुसवाने लगा. उसे भी लग रहा होगा कि उसकी बहन कितनी बड़ी रंडी है. अपने भाई के लंड को खा जाना चाहती है. मगर मुझे लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था.

पांच मिनट में ही विक्रांत मेरे मुंह में ही झड़ गया. हम रुक गये. हम दोनों फिर से किस करने लगे. मैं उसके लंड को सहलाते हुए खड़ा करने की कोशिश करने लगी. वो भी मेरी चूचियों और चूत से खेलने लगा.

कुछ देर के बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. उसने अपने लंड को हाथ से सहलाते हुए कॉन्डम लगाया. फिर मेरी चूत पर लंड को रख कर एक झटका मारा. एक ही झटके में आधा लंड अंदर चला गया. एक बार चीख तो निकली लेकिन मजा भी गजब का मिल गया.

बहुत दिनों के बाद मेरी चूत में लंड फंसा था. मैं स्वर्ग में थी. फिर विक्रांत ने मेरी चूत में लंड को चलाना शुरू कर दिया. मेरे मुंह से सिसकारियां निकलनी चालू हो गयीं- आह्ह… आईई … आहह … आऊऊ … ओह्ह … करके मैं भाई के लंड से चुदने लगी.

झटके लगाते हुए भाई ने पूरा लंड अंदर दे दिया था. उसके झटके अब हर पल तेज हो रहे थे. मैं अपनी चूचियों को दबाने लगी. अपने ही हाथ निप्पलों को मसलने लगी. विक्रांत ने देखा तो उसने मेरी चूचियों को कस कर भींच दिया और मेरी चूत ने उसके लंड को भींच लिया.

वो तेजी से मेरी चूत को पेलने लगा और मजे में मेरी आंखें बंद होने लगीं. मैं भाई के लंड से चुद कर सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी. 15 मिनट तक विक्रांत ने मेरी चूत को इसी स्पीड से चोदा और फिर हम दोनों साथ में ही झड़ गये.

उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गये और वहां पर रोमान्स करते हुए हमने एक बार फिर से बाथरूम सेक्स किया और भाई बहन की चुदाई का मजा लिया. मैंने बाथरूम में एक बार फिर से विक्रांत के लंड का माल पीया. उसने मेरी चूत का रस चाटा. हम दोनों बहुत खुश हो गये थे एक दूसरे को पाकर.

फिर हम दोनों वहां से घर आ गये. उस दिन के बाद से मेरे भाई और मेरे बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया. हम दोनों सप्ताह में एक या दो बार होटल में जरूर जाते हैं और चुदाई करते हैं. यदि घर पर भी मौका मिलता है तो हम भाई बहन का सेक्स का अवसर नहीं छोड़ते हैं.

इस कहानी के माध्यम से मैंने आपको यही बताना चाहा है कि जिन्दगी का असली मजा सेक्स में ही है. चाहे वो ब्वॉयफ्रेंड के साथ चुदाई हो या फिर अपने ही सगे भाई के साथ चुदाई हो. चुदाई में ही असली मजा है.

उस दिन मैंने सपना को थैंक्स बोला. उसने ही मुझे ये रास्ता बताया था.
दोस्तो, मुझे लिखना थोड़ा कम आता है. मैं कोई लेखिका नहीं हूं लेकिन अपनी भाई बहन की चुदाई की कहानी बताने के लिए लिखना पड़ा. गलती हुई हो तो इग्नोर करें.

अगर आप में से भी कोई भाई बहन का सेक्स का सोच रहा है तो मुझे जरूर बतायें. मैं आपकी मदद करूंगी. इसमें कुछ गलत भी नहीं है क्योंकि ये दोनों की सहमति से ही होता है. वैसे भी सेक्स एक प्राकृतिक जरूरत है और ये पूरी होनी ही चाहिए.

अपनी बात खत्म करने से पहले मैं जाते जाते कुछ टिप्स दे देती हूं. ताकि आपको अपने भाई को पटाने में आसानी हो.

टिप 1- जब आप दिन में नहाने जाओ तो एक ऐसे समय पर जाओ जब आपके घर में आपके और आपके भाई के अलावा कोई न हो. आप बाथरूम में ब्रा और पैंटी लेकर मत जाओ और फिर अंदर जाकर उसे अपने भाई से बहाना करके मंगवाओ. जब वो देने आये तो दरवाजा हल्का खुला छोड़ दो और उसको अपने जिस्म के नजारे दिखाओ. इससे उसे एक ग्रीन सिग्नल मिलेगा और उसका लंड चूत के लिए तड़प उठेगा.

टिप 2- नहाने के बाद आप इस्तेमाल की गयी ब्रा और पैंटी को धोना नहीं. उसको बिना धोये हुए बाथरूम में इस तरह से रख दो कि अगर कोई छुए तो तुम्हें पता लग जाये कि उनको छेड़ा गया है.

मेरा तजुरबा है कि लड़के अक्सर लड़कियों की ब्रा और पैंटी से खेलते हैं. ऐसे ही आप 2-3 दिन करना. आपको पता लग जायेगा कि वो आपकी ब्रा और पैंटी से खेलता कब है. अगर वो ब्रा और पैंटी से खेले तो इसका मतलब है कि वो भी आपके साथ मजे करना चाहता है.

दोस्तो, मेरे पास भाई बहन का सेक्स के ऐसे बहुत सारे टिप्स हैं. आप मुझे अपने सुझाव भेजें और यदि इस काम में सहायता चाहिए तो मैं आपको गाइड करने के लिए तैयार हूं.

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मेरा लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर

मैं अपनी पड़ोसन को चोद चुका था और खूब चोदता था. अब मेरी नजर उसकी बड़ी बेटी पर थी लेकिन कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था. फिर कैसे मैंने पड़ोसन की बेटियों को चोदा?

अपनी पड़ोसन की चुदाई करते हुए मुझे दो साल हो चुके थे.

तभी एक दिन रेखा ने बताया कि दिशा का ग्रेजुएशन हो गया है और आगे की पढ़ाई के लिए बंगलौर के क्राइस्ट कॉलेज से कॉल आई है. लेकिन मीतेश इंटरव्यू के लिए दिशा को भेजने को राजी नहीं है. मीतेश का कहना है कि इंटरव्यू क्लीयर नहीं हो पाया तो बीस हजार रुपये बिना मतलब के खर्च हो जायेंगे.
मैंने कहा- क्राइस्ट कॉलेज में मेरा कुछ जुगाड़ है तुम अगर चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ.

मीतेश से बात करने के बाद रेखा ने बताया कि मीतेश कह रहा था, अगर कपूर साहब जा रहे हैं तो तुम साथ जाकर क्या करोगी.
अंततः मैं और दिशा बंगलौर गये, वहां उसने इंटरव्यू क्लीयर कर लिया. उस दिन शुक्रवार था, सोमवार को एडमिशन की प्रक्रिया होनी थी इसलिए हमें दो दिन वहीं रुकना था. इंटरव्यू क्लीयर होने की खबर सुनकर रेखा बहुत खुश हुई.

शनिवार और रविवार ये दो दिन हमें घूम फिर कर गुजारने थे. शनिवार को घूमने के दौरान मैं दिशा को चोदने का प्रोग्राम बनाता रहा. रात का खाना खाकर हम लोग होटल के कमरे में लौटे तो मैं पलंग पर पसर गया और दिशा सोफे पर फैल गई. अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप चेक करते हुए दिशा बोली- अंकल, आपके सहयोग से मेरा एडमिशन हो रहा है, आपका एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी.

“हम अहसान को याद रखने या भूलने पर यकीन नहीं करते, हाथ के हाथ हिसाब करते हैं. तुमको अगर अहसान उतारना हो तो अभी उतार लो, मौका भी है और दस्तूर भी.”
“मैं आपका अहसान कैसे उतार सकती हूँ? आप आदेश करें?”
“कैसे उतारना है? पूरी रात पड़ी है, जैसे चाहो उतार लो.” इतना कहते हुए मैंने एक कुटिल मुस्कान दी.

मेरी कुटिल मुस्कान के जवाब में दिशा मुस्कुराते हुए बोली:
पापा, अगर आपको इसमें खुशी मिले तो मैं हाजिर हूँ. मेरे मुंह से पापा सुनकर आप हैरान न हों. पिछले दो साल से मैं और रिशा आपको पापा कहकर ही सम्बोधित करते हैं. हुआ यूं था कि एक दिन मम्मी के मोबाइल में मैंने आपके मैसेज देख लिये थे और मम्मी पर नजर रखे हुए थी. तभी एक रात मम्मी और आपकी बातचीत सुनी. आपने सुबह 11 बजे आने को कहा था.

अगले दिन डैडी दुकान चले गए और रिशा अपने स्कूल. इसके बाद सुबह 10 बजे मम्मी किचन में व्यस्त थी, मम्मी को बॉय कहकर मैं कॉलेज के लिए निकली. वास्तविकता यह थी कि मैं कॉलेज नहीं गई और दबे पांव ऊपर अपने कमरे में चली गई.

किचन का काम निपटा कर मम्मी नहाने चली गई. तभी आप आ गये, मम्मी तौलिया लपेटकर बाथरूम से निकली और दरवाजा खोला. आपने मम्मी को वहीं लॉबी में ही पकड़ लिया और चूमने लगे. मैं छिपकर सब देख रही थी. आप मम्मी को लेकर बेडरूम में चले गए. काफी देर बाद आप बेडरूम से निकले और बाथरूम में गये. उस समय आपके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.

यह सब देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. खुशी इसलिये हुई क्योंकि बीस साल मैं अपनी मां को तिल तिल मरते हुए देख रही थी, डैडी मम्मी की बिल्कुल केयर नहीं करते थे. मुझे खुशी थी कि मम्मी ने अपनी खुशी आपमें ढूंढ़ ली थी.

मैंने और रिशा ने मम्मी से बात की और उसके इस फैसले के साथ खड़े होते हुए आपको पापा मान लिया.

दिशा की बातें सुनकर मैं सन्न रह गया और उसे चोदने का विचार अपने दिमाग से निकाल दिया. तभी दिशा बेड पर आ गई और मुझसे चिपक कर बोली- पापा, मेरा एडमिशन कराने में सहयोग करके आपने जो अहसान किया है, उससे बहुत बड़ा अहसान आप मेरी मां को खुशी देकर कर चुके हैं. आपकी बांहों में रात गुजार कर मैं आप पर कोई उपकार नहीं करूंगी बल्कि आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी.

इतना कहकर दिशा ने अटैची से अपने कपड़े निकाले और बाथरूम चली गई. कुछ देर बाद दिशा बाथरूम से निकली. छोटी सी नेकर और टॉप पहने दिशा को देखकर मेरा दिमाग झन्ना गया.

करीब 21 साल की दिशा प्रीति जिंटा की कॉपी लग रही थी. नेकर से बाहर निकली उसकी जांघें मेरा लण्ड टनटना रही थीं. मैं यह याद भी नहीं करना चाहता था कि मेरी उम्र 62 साल है और दिशा की सिर्फ 21 साल.

मैं भी बाथरूम गया और शॉवर लेकर सिर्फ लोअर पहनकर आ गया.

दिशा अपने मोबाइल में मशगूल थी. दिशा के बगल में बैठ कर मैंने उसकी जांघों पर उंगलियां फेरीं तो दिशा ने मोबाइल रख दिया और ‘आई लव यू पापा’ कहकर मेरे सीने से लग गई.

मैंने दिशा का टॉप उतार दिया और संतरे के आकार की उसकी चूचियों से खेलने लगा. दिशा की चूची मुंह में लेकर मैं धीरे धीरे चूसने लगा. दिशा की नेकर का हूक खोलकर मैंने उसकी नेकर घुटनों तक खिसका दी और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

दिशा के होंठों पर होंठ रखकर मैंने दिशा को अपनी ओर खींचा तो अपनी नेकर को टांगों से अलग करते हुए दिशा मुझसे लिपट गई और मेरे बदन पर हाथ फेरने लगी. दिशा का हाथ मैंने अपने लण्ड पर रखा तो मेरा लण्ड अपनी मुठ्ठी में दबोच कर दिशा बोली- आई लव यू, पापा. मुझमें समा जाओ, पापा.

मैंने अपना लोअर उतार दिया और 69 की पोजीशन में आकर दिशा की चूत चाटने लगा. दिशा मेरे लण्ड का सुपारा चाटते हुए सॉफ्टी के मजे ले रही थी.

तभी मैंने दिशा को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर रख दिया. दिशा ने मेरे लण्ड का सुपारा सेट किया और उस पर बैठ गई. दिशा की कमर पकड़ कर मैंने उसे नीचे की ओर दबाया तो टप्प की आवाज हुई और मेरे लण्ड के सुपारे ने दिशा की चूत में जगह बना ली. दिशा ने और दबाव डाला तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया.

अपना लण्ड दिशा की चूत में बनाये रखते हुए हम पलट गये.
अब दिशा नीचे थी और मैं ऊपर. अपना लण्ड दिशा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने जोर से धक्का मारा तो दिशा की चूत की झिल्ली फट गई. चूत की झिल्ली फाड़ते हुए मेरा लण्ड दिशा की चूत की गहराई में उतर गया.

लण्ड को दिशा की चूत में फंसा कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. चूचियां चूसने से मेरे लण्ड में जोश बढ़ने लगा, मैंने चुदाई की तो दिशा की चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत गीली होने से मुझे आराम हो गया.

जब लण्ड को अन्दर बाहर करते काफी समय हो गया तो मैंने दिशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. चोदते चोदते दिशा की चूत का भुर्ता बन गया था लेकिन मेरा लण्ड पानी छोड़ने को तैयार नहीं था. दिशा की चूचियों को बेरहमी से मसलते हुए मैंने लाल कर दिया था. मेरे लण्ड का सुपारा फूलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है. पिचकारी छूटने पर मैं दिशा से लिपट गया.

उस रात मैंने दिशा को दो बार चोदा. अगले दिन रविवार था. शिलाजीत के कैप्सूल और वियाग्रा की गोली खाकर दिशा की जमकर चुदाई की. सोमवार को दिशा का एडमिशन करा कर उसको हॉस्टल में शिफ्ट करके मैं वापस लौट आया.

बंगलौर से वापस लौटकर अगले दिन मैं रेखा के घर गया तो रेखा ने बाहें फैला कर मेरा स्वागत किया.

दिशा की चुदाई का आनन्द लेने के बाद भी रेखा को चोदने का अलग ही मजा था. 100 किलो से भी अधिक वजन वाली भारी भरकम शरीर की मल्लिका रेखा जब नंगी होती तो हाथी का बच्चा लगती.

कई दिन बाद चुदने के कारण रेखा ने उछल उछल कर चुदवाया. रेखा को चोदने के बाद मेरे कहने पर रेखा चाय बना लाई. चाय की चुस्कियां लेते हुए रेखा ने बताया कि परसों रिशा का जन्मदिन है, वो 19 साल की हो जायेगी.

“तो चलो परसों गोल्डेन एप्पल में पार्टी करते हैं.”
“नहीं, घर पर ही केक काटेंगे.”

मेरे काफी जिद करने पर भी रेखा होटल में पार्टी करने पर राजी नहीं हुई. मेरे बहुत बार कहने पर रेखा इस बात पर राजी हुई कि आप रिशा को घुमाने ले जाना.

रिशा के जन्मदिन पर मैं और रिशा मॉल गये, घूमे फिरे, खाया पिया. मैंने रिशा को एक प्यारी सी ड्रेस भी खरीद दी. मॉल से लौटते समय मैंने रिशा से पूछा- कल तो तुम्हारा कॉलेज होगा?
रिशा के हाँ कहने पर मैंने उससे कहा- तुम्हारी आज की पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को है लेकिन डैडी को नहीं है. अब कल मेरी तरफ से फिर तुम्हारी पार्टी है और कल होने वाली पार्टी की जानकारी तुम्हारी मम्मी को भी नहीं होनी चाहिये. यह एकदम सीक्रेट पार्टी होगी, बस हमारी और तुम्हारी. कल जब तुम कॉलेज के लिए निकलोगी तो मैं तुम्हें पिक कर लूंगा.

अगले दिन सुबह 9 बजे रिशा का फोन आया कि मैं घर से निकल चुकी हूँ.
मैंने जवाब दिया कि मैं लिबर्टी शोरूम के पास तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ.

कुछ ही देर में रिशा आई और मेरी कार में बैठ गई. मैंने कार ताज होटल की तरफ मोड़ दी जहां एक कमरा मैंने बुक करा रखा था.

होटल के कमरे में पहुंच कर मैंने केक ऑर्डर किया. करीब आधा घंटा तक इधर उधर की बातें करने में बीत गया, फिर केक आ गया.

रिशा का हाथ पकड़ कर मैंने केक कटवाया. मैंने रिशा को केक खिलाया और उसने मुझे. केक से क्रीम लेकर मैंने रिशा के गालों पर लगा दी. रिशा ने मिरर में खुद को देखा और हंस पड़ी. अपना मुंह साफ करने के लिए रिशा ने टॉवल उठाया तो मैंने उसे रोकते हुए कहा- बहुत महंगा केक है, इसे टॉवल से पोंछ कर बरबाद न करो, लाओ मैं चाट लेता हूँ.

रिशा को आगोश में लेकर मैं उसके गालों और गले पर लगा केक चाटने लगा. रिशा के गाल और गला साफ हो गये तो मैंने फिर से केक लगा दिया और चाटने लगा. जब रिशा के गले पर मैं अपनी जीभ फेरता तो वो गनगना जाती.

मैंने रिशा से कहा- मैंने तुम्हें कई बार गिफ्ट दिये हैं लेकिन तुमने कभी रिटर्न गिफ्ट नहीं दिया?
“मेरे पास ऐसा कुछ होता ही नहीं था कि मैं आपको दे सकूं!”
“अब तो है और तुम चाहो तो दे सकती हो.”
“मेरे पास ऐसा क्या है, जो मैं आपको गिफ्ट कर सकूं?”

तुम 19 साल की हो गई हो, बालिग हो. बालिग होने पर इस देश का कानून तुम्हें तमाम अधिकार देता है. एक अधिकार तुम्हारे पास है, अपना शरीर उस व्यक्ति को सौंपने का जिसे तुम प्यार करती हो. अगर तुम मुझे प्यार करती हो तो आज मुझे रोकना मत. मैं यह सारा केक तुम्हारे बदन पर मल कर चाटना चाहता हूँ, तुम अपना टॉप उतार दो तो मैं यह केक तुम्हारी चूचियों पर मल कर चाट लूँ.”

मेरी बात सुनकर रिशा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया तो मैंने रिशा का टॉप और ब्रा उतार दी. 19 साल की दुबली पतली रिशा की चूचियां आलिया भट्ट की चूचियों जैसी थीं. छोटे छोटे संतरे जैसी चूचियों पर केक लगाकर मैंने चाटा तो रिशा के निप्पल टाइट हो गये.

दो तीन बार रिशा की चूचियों पर केक लगाकर चाटने के बाद मैंने रिशा की मिडी और पैन्टी उतारकर उसे नंगा कर दिया और उसकी नाभि से लेकर जांघों तक केक मल दिया. जांघों से चाटते चाटते मैं रिशा की चूत तक आ गया, फिर रिशा की नाभि से लेकर चूत तक आ गया. रिशा की चूत अब भी केक से ढकी हुई थी. रिशा की टांगें फैला कर मैं उसकी चूत चाटने लगा. चूत पर लगा केक जब साफ हो गया तो रिशा की चमकती चूत दिखने लगी.

अब मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये. अपने लण्ड को सहला कर लण्ड की खाल को आगे पीछे किया और उस पर केक मल दिया.

पना लण्ड रिशा के चेहरे के करीब ले जाकर मैंने रिशा से कहा- अब केक खाने की तुम्हारी बारी है.
रिशा मेरे लण्ड पर लगा केक चाटने लगी तो मैंने रिशा की चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

कच्ची कली को मसलने के लिए मैं पूरी तरह से तैयार हो चुका था. रिशा की चूत में ऊंगली चलाकर मैंने उसे भी चुदवाने के लिए तैयार कर दिया.

अपने बैग से कोल्ड क्रीम की शीशी और कॉण्डोम का पैकेट निकाल कर मैं बेड पर आ गया. अपना लण्ड रिशा के हाथ में देते हुए मैंने कहा- रिशा, ये तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट है, इसे अपने जिस्म में जाने दो. जब पहली बार यह तुम्हारे जिस्म में जायेगा तो हल्का सा दर्द होगा लेकिन बाद में बहुत आनन्द देगा, तुम्हें जन्नत का मजा देगा.

इसके बाद मैंने अपने लण्ड पर क्रीम लगाकर रिशा से लण्ड की मसाज करने को कहा और मैं उसकी चूत की मसाज करने लगा. जब मुझे लगा कि रिशा की चूत लण्ड लेने के लिए तैयार हो गई है तो अपने लण्ड के सुपारे पर क्रीम लगाकर मैंने रिशा की चूत के लब खोले.

रिशा की छोटी सी गुलाबी रंग की चूत देख कर मेरा लण्ड सलामी देने लगा. अपने लण्ड का सुपारा रिशा की चूत पर रखकर मैंने रिशा की नाजुक कमर पकड़ी और लण्ड को अन्दर धकेला.

रिशा की चूत काफी गीली हो चुकी थी और लण्ड पर क्रीम लगी हुई थी इसलिये पहले झटके में सुपारा और दूसरे झटके में आधे से ज्यादा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.
मैंने रिशा की जांघों और चूत के आसपास हाथ फेरते हुए धक्का मारा तो मेरा पूरा लण्ड रिशा की चूत में चला गया.

चूत की झिल्ली फटने से जो दर्द हुआ रिशा बर्दाश्त कर गई. रिशा में गजब की हिम्मत थी. 50 किलो वजन की दुबली पतली रिशा 120 किलो वजन वाले भारी भरकम अंकल का लण्ड झेल गई थी और अंकल को अपने ऊपर लिटा कर चूम रही थी.

रिशा के ऊपर लेट कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. मेरा लण्ड रिशा की चूत में सेट हो चुका था और मैं चाहता था कि ताउम्र ऐसे ही पड़ा रहूँ. लेकिन ‘लण्ड है कि मानता नहीं’ कुछ ही देर में लण्ड ने अन्दर बाहर होना शुरू कर दिया.
पहली बार चूत में लण्ड जाने का दर्द अब रिशा के चेहरे से गायब हो चुका था.
रिशा के होंठों पर उंगली फेरते हुए मैंने पूछा- कैसा लग रहा है?

“जब से दीदी ने आपके और मम्मी के रिश्ते के बारे में बताया था, मैं यह नहीं समझ पा रही थी कि आपके सामने टांगें फैलाने में मम्मी को क्या मिलता है, मम्मी ऐसा क्यों करती है? आज मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया है. प्रकृति ने आदमी और औरत का शरीर इस तरह से बनाया है कि दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी करते हैं. इसमें जाति, धर्म, उम्र, रिश्ते जैसा कोई बन्धन नहीं होता. एक औरत जब बेड पर होती है तो उसके सामने सिर्फ एक मर्द होता है.”

“तुम बातें बहुत अच्छी कर लेती हो.” इतना कहकर मैंने अपने लण्ड की रफ्तार बढा़ई.

जब मुझे लगा कि मेरे डिस्चार्ज का समय करीब है तो मैंने अपना लण्ड रिशा की चूत से निकाला, लण्ड को टॉवल से साफ किया और उस पर कॉण्डोम चढ़ा दिया. अपने लण्ड पर कॉण्डोम चढ़ा कर मैं फिर से रिशा की चूत में घुस गया.

डॉटेड कॉण्डोम की रगड़ से रिशा सिसकारी भरने लगी. रिशा की सिसकारियां मेरे लण्ड में जोश भर रही थीं. अपने लण्ड की रफ्तार पर नियंत्रण रखते हुए मैंने चुदाई जारी रखी. मेरा लण्ड अकड़कर मूसल जैसा होने लगा और बहुत फंस कर अन्दर बाहर हो रहा था.

तभी मेरे लण्ड से फव्वारा फूटा. मैं निढाल होकर रिशा पर लुढ़क गया.

कुछ देर बाद हम अलग हुए और रिशा बाथरूम चली गई. रिशा बाथरूम से लौटी तो टांगें फैला कर चल रही थी. मेरे पूछने पर उसने बताया कि हल्का सा दर्द है. मैंने रिशा को लिटा दिया और कोल्ड क्रीम से रिशा की जांघों और चूत की मसाज की. इसके बाद हमने कमरे में ही खाना मंगा लिया. कॉलेज से छुट्टी के समय तक रिशा घर पहुंच गई.

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मेरी गांड चुदाई

मेरे पति चूत चुदाई से ज्यादा मेरी गांड चुदाई करते हैं. मुझे पता लगा कि वो कई औरतों की गांड चोदते हैं. तो हमारा झगड़ा हो गया. फिर जब मेरी चूत में वासना की आग लगी तो …

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा हार्दिक अभिनन्दन. मैं एक स्कूल टीचर हूँ और अन्तर्वासना की बहुत बड़ी प्रशंसक हूँ और कई वर्षों से अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ रही हूँ. मेरी ये पहली कहानी है और मैं आप लोगों के साथ अपना सच्चा अनुभव साझा कर रही हूँ जिसमें मैंने अपने साथ पढ़ाने वाले एक टीचर से सेक्स किया.

मेरा नाम ममता है और मैं एक 37 वर्षीय शादीशुदा महिला हूँ. मैं गुरुग्राम में टीचर के तौर पर कार्य करती हूं. मेरी लम्बाई 5 फीट 5 इंच है और शरीर भरा हुआ है. मेरी फीगर 36-34-40 की है. मेरी गांड बहुत भारी है क्योंकि मेरे पति ने मेरी चूत से ज्यादा मेरी गांड बजाई है.

मेरे पति को गांड मारने का इतना शौक है कि उसने अपने ऑफिस की कई महिलाओं की गांड चुदाई कर रखी है. ये बात मुझे तब पता लगी जब एक दिन हमारा बहुत बुरा झगड़ा हो गया था. उसके बाद हमारे रिश्ते में बहुत ज्यादा खराबी आ गयी.

अब मैं काफी परेशान रहने लगी थी. अपनी ड्यूटी के दौरान भी उदास ही रहती थी. अपने काम को भी मैं ठीक से नहीं कर पा रही थी. अभी दो महीने पहले ही हमारे स्कूल में एक नया अध्यापक ट्रांसफर होकर आया था.

उसका नाम है मनोहर। वो स्कूल में अर्थशास्त्र के टीचर हैं. उनकी उम्र 29 साल और हाइट 5.5 फीट है मगर शरीर एकदम सुडौल और बनावट एकदम कसरती है. वो जितना आकर्षक दिखते हैं उतना ही सुन्दर पढ़ाते भी हैं.

धीरे धीरे मेरी उनसे ऑफिशियल कामों को लेकर बात होने लगी. कुछ ही समय के अंदर हम दोनों में दोस्ती हो गयी और धीरे धीरे हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गये. उसका एक कारण यह भी था कि वो अपने परिवार से दूर यहां पर अकेले रहते थे.

एक बार उन्होंने शाम में मुझे मिलने के लिए पूछा. मैंने अपने हस्बैंड का बहाना लेकर मिलने से मना कर दिया. अगले दिन फिर उन्होंने बातों ही बातों में कह दिया कि ममता तुम मुझे बहुत सुन्दर लगती हो. मैं आपको सिर्फ अपनी एक अच्छी दोस्त के नाते ही कॉफी पर बुला रहा था.

अपनी मजूबरी पर मेरा गला भर आया और आंखों में आंसू लिये मैं बोली- मनोहर, मेरे पति मुझ पर बहुत शक करते हैं. हमारे बीच के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे हैं, न तो शारीरिक तौर पर और न ही पारिवारिक तौर पर. हम पति पत्नी के झगड़े का असर अब हमारे बच्चों पर भी पड़ने लगा है.

उन्होंने बड़े अपनेपन से मुझसे पूरी बात पूछी तो मैंने अपनी पति के नाजायज़ संबंधों और मेरे साथ उनके द्वारा की जाने वाली मेरी मार-पिटाई के बारे में बताया. मनोहर ने मुझे सांत्वना देते हुए कहा कि अगर मैं इस अत्याचार के खिलाफ कुछ कदम उठाना चाहती हूँ तो वो मेरा साथ देने के लिए तैयार हैं.

उसके हिम्मत देने के बाद मार्च के महीने में एग्जाम के टाइम मैंने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा दिया जिसके बदले में मेरे पति मनीष ने मुझे घर से निकाल दिया. उस दिन मैं बहुत रो रही थी. पूरे स्कूल के स्टाफ में मेरे ही बारे में चर्चा हो रही थी.

मनोहर ने मुझे स्कूल टाइम के बाद अपने साथ में चलने के लिए कहा. मेरे मना करने के बाद भी वो जोर देकर मुझे अपने घर ले गया. मैं सोच रही थी कि शायद ये मेरी मजबूरी का फायदा उठाने की सोच रहा है. मगर मुझे उसकी इन्सानियत का पता तब लगा जब उसने मुझे अपने हाथ से खाना बना कर खिलाया.

उसके घर में एक ही बेड था. उसने मुझे बेड पर सोने के लिए कहा और खुद ज़मीन पर सो गया. उस दिन मुझे अपने पति मनीष और मनोहर के व्यक्तित्व का अंतर मालूम चला. मैंने पाया कि मनोहर एक अच्छा दोस्त ही नहीं बल्कि एक अच्छा इन्सान भी है.

ऐसे ही एक सप्ताह गुजर गया. मेरे पति मनीष ने इस एक हफ्ते के दौरान न तो मुझे कभी फोन किया और न ही मेरे स्कूल में आकर मुझसे मिलने की ही कोशिश की. अब कुछ दिन मैंने और इंतजार किया. फिर मुझे अपने बच्चों की फिक्र होने लगी.

मनोहर मुझे मेरे बच्चों से मिलवाने के लिए उनके स्कूल में ही ले गया. वहां मेरे बच्चों ने मुझे बताया कि पापा आपके नहीं होने के बाद से एक दूसरी आंटी को घर में बुला रहे हैं. वो आंटी पापा के साथ ही सोती है.

बच्चों के मुंह से ये बातें सुन कर मेरा दिमाग खराब हो गया. मैंने उसी क्षण निर्णय ले लिया कि अब मैं भी किसी की परवाह नहीं करूंगी. मनोहर और मैं उसके बाद घर आ गये.

उस शाम को मैंने मनोहर से कहा कि आज का खाना मैं बना दूंगी.
मनोहर मान गया. हमने खाना बनाया और दोनों ने साथ में खाया और फिर बैठ कर बातें करने लगे. फिर वो बर्तन उठा कर धोने के लिए चला गया.

जब वो बर्तन धोकर वापस आ गया तो मैंने पूछा- तुम शादी क्यों नहीं कर लेते मनोहर?
वो हंसते हुए बोला- अगर मैं शादी करूंगा तो मेरा हाल भी तुम्हारे जैसा ही हो जायेगा. जिस तरह से पति के होते हुए भी फिलहाल मैं तुम्हें संभाल रहा हूं वैसे ही शादी के बाद कोई दूसरी औरत फिर मुझे भी ऐसे ही संभाल रही होती.

उसकी इस बात पर हम दोनों हँस दिये. कुछ देर बैठ कर बातें करने के दौरान दोनों में हँसी मजाक काफी हुआ. फिर हम सोने की तैयारी करने लगे.
मैंने मनोहर से कहा- आओ, तुम भी बेड पर ही सो जाओ.

मनोहर ने मेरे पास सोने से मना कर दिया. वो कहने लगा कि औरत और मर्द के बीच में थोड़ी सी दूरी ही रहे तो अच्छा होता है.
मैंने कहा- अब तो दूरियां खत्म हो जानी चाहिएं. जो भी होगा वह हम दोनों की इच्छा से ही होगा. मैं तुम्हें जबरदस्ती अपने साथ सोने के लिए नहीं कह रही हूं. मगर चूंकि मैं एक औरत हूं और मेरी वजह से तुम्हें जमीन पर सोना पड़े, ये मुझे अच्छा नहीं लगता.

मेरे कहने पर मनोहर मान गया. उस दिन के बाद से मनोहर और मैं साथ में एक ही बेड पर सोने लगे. मगर पहल दोनों में से किसी की ओर से नहीं हो रही थी. कुछ दिन ऐसे ही बीत गये.

एक दिन मुझे लेटे लेटे नींद नहीं आ रही थी. मैं करवट बदल कर लेटी तो देखा कि मनोहर का लंड तना हुआ था. उसकी लोअर को उसके लंड ने ऊपर उठा रखा था. फिर उसने भी करवट बदल ली.

मेरे अंदर बेचैनी सी हो गयी थी. मैं मनोहर को काफी दिन पहले से ही पसंद करती थी. कुछ पल के बाद उसने फिर से करवट ली और उसका लंड वैसा का वैसा तना हुआ था. बार बार उसकी लोअर को ऊपर उछाल रहा था.

मनोहर को बार बार करवटें बदलता हुआ देख कर मैं बोली- क्या हुआ मनोहर?
उसने मेरी ओर देखा और फिर अपने तने हुए लंड की ओर देखा तो उसकी आंखें शर्म से नीचे हो गयीं.
आगे से पहल करते हुए मैंने पूछा- तुम्हें मेरे साथ लेट कर मेरे लिए कुछ फील हो रहा है क्या?

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. बस लेटा रहा.
मैं बोली- देखो मनोहर, मैं एक साइंस टीचर हूं. मैं अच्छी तरह जानती हूं कि जब मर्द और औरत के जिस्मों के बीच में इतना कम फासला हो तो इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक है.

मनोहर बोला- ममता, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो. आपको देखकर मुझे अपनी माशूका की याद आ गयी.
मैंने कहा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी थी? तुमने कभी बताया भी नहीं मुझे.

वो बोला- कभी इस विषय पर बात करने का माहौल ही नहीं बना.
मैंने कहा- अब तो माहौल भी है. अब तो बता दो अपनी प्रेम कहानी?
फिर मनोहर ने अपनी सारी स्टोरी मुझे बताई कि कैसे उसको एक लड़की से प्यार था, जिसका नाम भूमि था और दो साल पहले उनका ब्रेक अप हो गया. उसके बाद से उसकी जिन्दगी में कोई लड़की नहीं आई और उसने किसी दूसरी लड़की को अपने करीब आने भी नहीं दिया.

मैं उसके साफ दिल प्यार से बहुत प्रभावित हुई और मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया.
मैं बोली- कोई बात नहीं, जो हुआ उसको याद करके अब कोई फायदा नहीं है. मैं ही तुम्हारे लिये तुम्हारी भूमि बन जाती हूं.

उसके बाद हम दोनों अलग हो गये और सोने लगे. अगली सुबह हम उठे और तैयार होकर स्कूल जाने लगे. फिर दिन भर स्कूल में काम रहा.
छुट्टी के समय उसके निकलने से पहले मैंने उसको कहा- घर आते हुए एक मेडिकल स्टोर से कॉन्डम का एक पैकेट ले आना.

वो मेरी ओर देख कर मुस्कराने लगा. उसके बाद मैं आ गयी और कुछ देर के बाद मनोहर भी आ गया. हम दोनों ने खाना खाया और फिर बिस्तर पर लेट कर बातें करने लगे.

मैंने उसके कंधे को सहलाते हुए कहा- तो भूमि के साथ तुम क्या क्या करते थे?
वो बोला- क्या मतलब?
मैंने कहा- ज्यादा बनो मत. तुम जानते हो कि मैं सेक्स के बारे में पूछ रही हूं.

वो बोला- पहले तो भूमि अपने चूचे पिलाती थी और फिर चूत भी चुसवाती थी. उसके बाद वो मेरा हथियार अपनी चूत में लगा कर अंदर ले लेती और चुदवाती थी. आगे से चुदवाने के बाद फिर पीछे भी लेती थी. तब जाकर उसको और मुझे शांति मिलती थी.

मन ही मन मैं खुश हो गयी कि चोदू किस्म का जवान लौंडा फंस गया है. इसके साथ तो मैं भी फिर से जवान हो जाऊंगी. मैंने देखा कि उसका लंड उसकी लोअर में फनफना रहा था.

मैंने मनोहर के सीने पर अपने कोमल हाथ से फिराते हुए कहा- तुम्हें मेरी चूचियां कैसी लगती हैं?
वो बोला- मैं तो पहले दिन से ही आपको पसंद करता हूं लेकिन फिर पता चला कि आप शादीशुदा हैं इसलिए कभी कुछ कहा नहीं.

उसकी छाती के निप्पलों को छेड़ते हुए मैंने कहा- अब तो मेरे पति भी मुझसे कोसों दूर जा चुके हैं, अब किसलिए इतनी दूरी बना रखी है.
उसने मेरी चूचियों को छेड़ कर कहा- दूरी कहां है, पास में ही तो हूं.

इतना बोल कर हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा और दोनों के होंठ मिल गये. दोनों एक दूसरे के होंठों के रस को एक दूसरे के मुंह से खींचने लगे. उसका लंड मेरी जांघों में चुभ रहा था. उसने मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए अपनी टांग मुझे पर चढ़ा ली थी. मैं भी उसके जिस्म से लिपटने लगी थी.

जल्दी ही दोनों गर्म हो गये और उठ कर मैंने अपनी मैक्सी और ब्रा को नीचे कर लिया. मनोहर के सामने मेरी चूची नंगी हो गयी. मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी नंगी चूचियों पर रखवा दिया और उसने मेरी दोनों चूचियों को दबा कर देखा. उसको मेरी चूची काफी मस्त लगीं और वो उनको मुंह लगा कर पीने लगा.

मनोहर को मैं भी पसंद करती थी इसलिए जब उसके होंठ मेरी चूचियों को चूस रहे थे तो मुझे भी उस पर बेपनाह प्यार आ रहा था. मैं मदहोश होकर उसके बालों में हाथ फिरा रही थी. उससे चूचियां चुसवाते हुए ऐसा लगने लगा था कि मेरी जवानी फिर से जवान हो रही है.

फिर मनोहर ने अपने सारे कपड़े निकाल दिये और मेरे बदन से लिपटने लगा. उसके बदन पर केवल एक अंडरवियर था और मेरे बदन पर मेरी चूत पर पहनी हुई मेरी पैंटी. मनोहर मेरी पैंटी को ऊपर से ही मसलने लगा था. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. मैं भी उसके लौड़े को ऊपर से ही सहला रही थी.

फिर उसने मुझे प्यार से नीचे लिटा लिया और हल्के हल्के चुम्बन देने लगा. पहले मेरे गालों पर, फिर गर्दन पर, फिर चूचियों पर, फिर पेट से होता हुआ नाभि पर और फिर मेरी पैंटी की इलास्टिक तक पहुंच गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने काफी समय से अपनी सेक्स की भूख को दबा कर रखा हुआ था.

फिर उसने मेरी पैंटी को किस करना शुरू कर दिया. मैं मस्त होने लगी. शायद मनोहर मेरी चूत को चाटना चाह रहा था. उसने मेरी पैंटी को खींच कर निकाल दिया. जैसे ही उसने पैंटी उतारी तो मेरी चूत नहीं दिखी बल्कि पैंटी के नीचे बालों का एक घोंसला उसको दिखा.

वो थोड़ा निराश हो गया.
वो बोला- बाल बहुत ज्यादा बढ़ गये हैं आपकी चूत पर. इसकी सफाई करनी पड़ेगी.
उसके बाद उठ कर वो अपना ट्रिमर ले आया और मेरी चूत की सफाई करने लगा.

दो मिनट में ही उसने मेरी चूत को साफ कर दिया.
मैं बोली- ये मेरी चूत के पहरेदार सैनिक थे. अब मेरी चूत सुरक्षित नहीं रही. इस पर हमला हो सकता है.
उसने कहा- अब सैनिक मारे गये हैं. अब इस रानी को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.

उसने मेरी चूत को धोया और फिर कपड़े से पौंछ कर मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को जोर जोर से जीभ देकर चाटने लगा.

मैं दो मिनट में ही पगला गयी. मेरी चूत तपने लगी. मनोहर अभी भी मेरी चूत को तेज तेज जीभ चलाते हुए चूस-चाट रहा था.

फिर उसने मेरी चूत में उंगली दे दी और मेरी चूत में उंगली करने लगा. वो तेजी से उंगली चलाने लगा. उसके बाद फिर से मेरी चूत में जीभ देकर चोदने लगा.

अब मुझसे भी बर्दाश्त न हुआ और मैं भी उठ कर उसके लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी और उसके होंठों को चूसने लगी. मैंने उसे लिटा लिया और उसकी टांगों की ओर मुंह करके लेट गयी. मेरी चूत उसके मुंह पर जा लगी और मैंने उसके लंड को मुंह में भर लिया.

दोनों 69 की पोजीशन में हो गये और एक दूसरे को चूसने और चाटने लगे. उसका लंड चूसते हुए अब चूत चुसवाने में और ज्यादा मजा आने लगा मुझे. मनोहर भी पूरा मदहोश हो रहा था.
दस मिनट में उसने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया और मैं झड़ गयी. मेरा सारा शरीर ढीला पड़ गया.

मनोहर ने मुझे उठाया और कहा- बाथरूम में जाकर चूत को साफ कर लो.
जब मैं अपनी चूत को धोकर वापस आई तो मनोहर अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ा कर बैठा हुआ था.

मैं आकर बेड पर लेट गयी.
मनोहर ने मेरी टांगें फैला दीं और उनके बीच में बैठ गया. वो मेरी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

मनोहर का लंड 6 इंच लम्बा और करीब करीब ढाई इंच मोटा था. मनोहर मेरे कंधों के पास हाथ रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मैं अपने हाथ में उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी और मनोहर मेरे होंठों को चूम रहा था.

अब मैंने मनोहर का लंड अपनी चूत में डाल लिया और एक झटके में ही सारा लंड अंदर चला गया और मनोहर जोर जोर से लंड को अंदर बाहर करने लगा. दो मिनट बाद हमने पोजीशन बदल ली और अब मैं मनोहर के ऊपर बैठ कर लंड की सवारी कर रही थी.

मनोहर अपने हाथों में भर कर मेरे बड़े बड़े चूचे दबा रहा था और बीच बीच में मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार रहा था. एक जवान मर्द से चुदाई करवा कर मुझे बहुत मजा आ रहा था. अपने पति के साथ मुझे सेक्स में इतना मजा कभी नहीं आया.

पांच मिनट के बाद हमने फिर से पोजीशन बदल ली. इस बार मनोहर ने मुझे उठाया और हम दोनों एक दूसरे की ओर मुंह करके बेड से नीचे जमीन पर खड़े हो गये. मनोहर ने मुझसे एक पैर बेड पर रखने के लिए कहा जिससे कि वो मेरी चूत में लंड डाल सके.

मैंने ऐसा ही किया और मनोहर ने मेरी चूत में फिर से अपना लंड पेल दिया. वो मुझे खड़ी खड़ी चोदने लगा.

मैंने भी उसकी पीठ को नोंचना खरोंचना शुरू कर दिया. मेरी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपकी हुई थीं और वो मेरी गांड को भींच भींच कर मेरी चूत में लंड को अंदर तक ठोक रहा था. हर ठोक के साथ मेरे मुंह से आह्ह-आहह् की आवाजें आ रही थी. लंड की ठुकाई से होने वाले उस दर्द में बहुत मजा मिला रहा था मुझे.

चार-पांच मिनट के बाद मनोहर ने मुझे कुतिया बनने को कहा और पीछे से मेरी चूत में लंड पेलने लगा. पांच सात मिनट तक मेरी चूत में जबरदस्त तरीके से झटके लगते रहे. उसके बाद एक बार फिर से मेरा पानी निकल गया. मगर मनोहर का लंड अभी भी वैसे ही खड़ा हुआ था.

मनोहर ने मुझसे कहा- ममता यार, किसी तरह तुम भी मेरा पानी निकालो.
मैं बोली- हाथ से हिला कर निकाल देती हूं.
वो बोला- नहीं, मैं तुम्हारी गांड में निकालना चाहता हूं. अपनी गांड चोदने दो मुझे.

मैं गांड चुदवाने के लिए तैयार हो गयी. मैं फिर से कुतिया बन गयी. मनोहर ने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाई और मैंने अपने हाथों से दोनों चूतड़ फैला दिये. फिर मनोहर ने अपना लंड मेरी गांड में पेल दिया.

अपने पति से मैं अपनी गांड पहले भी काफी बार चुदवा चुकी थी. मगर मनोहर का लंड मेरे पति से मोटा था. उसका लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयी. मगर मैं दर्द को बर्दाश्त कर गयी. मनोहर मेरी चूचियों को दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी गांड में लंड चलाने लगा.

दो मिनट के अंदर ही मुझे मजा आने लगा और फिर जैसे ही उसने स्पीड पकड़ी तो उसके लंड से निकल रहे कामरस से मेरी गांड भी चिकनी हो गयी और क्रीम की चिकनाहट के साथ मिलने से गांड पच-पच की आवाज करने लगी.

मनोहर बोला- मुझे ये आवाज बहुत अच्छी लगती है. जब मैं अपनी गर्लफ्रेंड की चुदाई करता था तो ऐसे ही आवाजें आती थी. भूमि को भी मेरे लंड से चुद कर बहुत मजा आता था.
उसके बाद मनोहर तेजी से धक्के मारने लगा और दो मिनट के बाद उसने तीन चार जोरदार झटकों के साथ अपना माल मेरी गांड में कॉन्डम के अंदर छोड़ दिया.

जब लंड बाहर निकाला तो कॉन्डम में काफी सारा माल भरा हुआ था. उसके माल की इतनी मात्रा देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर ये मेरी चूत में छूट जाता तो मुझे गर्भवती बना देता और मैं मनोहर के बच्चे की मां बन जाती.

हम दोनों पूरी तरह से थक गये थे और लेट गये. उसके बाद हमने सुबह सुबह उठ कर एक बार फिर से चुदाई की. सुबह की चुदाई करने के बाद मूड बहुत ही फ्रेश हो गया. बहुत दिनों के बाद मुझे इतना फ्रेश और हल्का फील हो रहा था.

इस तरह मनोहर के साथ मेरी चुदाई का सीन अभी तक चल रहा है. अब हम दोनों सोच रहे हैं कि एक साथ कानूनी रूप से लिविंग रिलेशन में रहना शुरू कर दें.

मैं इंतजार कर रही हूं कि जैसे ही मेरे पति के साथ मेरे तलाक का फैसला आ जायेगा, मैं उसी दिन से मनोहर के साथ खुले रूप से रहना शुरू कर दूंगी.

तो दोस्तो, ये थी मेरे यार टीचर से सेक्स की मेरी रियल कहानी. आप लोगों को मेरी ये हिंदी कहानी कैसी लगी मुझे इसके बारे में अपने मैसेज के द्वारा अपनी राय जरूर बतायें.

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