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मैं प्यासी औरत हूँ

दोस्तो, आप सभी को मेरा नमस्कार, मेरा नाम सुनीता है. मैं थोड़ी प्यासी औरत हूँ. वैसे मेरे पति तो मुझे चोदते ही हैं लेकिन मुझे और ज्यादा चुदवाने का मन करता है. मेरा अन्दर बहुत सेक्स है. मेरे पति जब भी मुझे चोदते हैं तो वो जल्दी झड़ जाते हैं जबकि मैं और सेक्स के लिए तड़पती रहती हूँ.
मेरी सेक्स की तड़प ने ही मुझे अपनी चूत में उंगली करने के लिए मजबूर कर दिया और मैं अपनी चूत में उंगली करके अपनी चूत को शांत करती हूँ. मेरा मन जब नहीं लगता है तो कभी कभी अन्तर्वासना सेक्स कहानियां पढ़ती हूँ जिससे मुझे बहुत अच्छा लगता है.

मैं आप अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ जो मेरे और मेरे देवर की है.
जब पति से चुदकर मेरी चूत को शांति नहीं मिली तो मैं अपने देवर से अपनी चूत शांत करवाने लगी. वो भी क्या दिन थे जब मैं अविवाहिता थी तो मुझे बहुत लंड मिलते थे चुदवाने के लिए … लेकिन ससुराल में तो डर लगता है. किसी का लंड अपनी चूत में लेने से! अगर मेरे ससुराल वालों को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी.
वैसे मैं मौका देख कर किसी न किसी को पटा लेती हूँ और उससे चुदवा लेती हूँ. ज्यादातर लोग तो मुझे ही पटाते हैं मुझे चोदने के लिए. और मैं भी अपने जिस्म का बहुत ध्यान रखती हूँ.

मेरे पति थोड़ा पैसा भी कम कमाते हैं और मेरा देवर मेरे पति से ज्यादा पैसा कमाता है. वैसे मुझे यह पता था कि मेरा देवर मुझे शुरू से ही पसंद करता था क्योंकि वो हमेशा मेरे लिए कुछ न कुछ बाजार से लाता रहता था, मुझे त्योहार पर उपहार भी देता था.
मैं अपने देवर को कभी गलत नजरिये से नहीं देखती थी. मैं भी अपने देवर को बहुत मानती थी. मेरे पति मुझे अच्छे से नहीं चोद पाते थे या मैं ही थोड़ा ज्यादा चुदासी थी कि मुझे अपने पति के लंड के अलावा भी दूसरे के लंड से चुदवाने का मन करता था.

मैं अपने देवर से पहले से ज्यादा बातें करने लगी. मैं जब भी अपने देवर को सुबह में चाय देने जाती थी तो उनका खड़ा लंड देखती थी.

एक दिन देवर ने मुझे उनका खड़ा लंड देखते हुए देख लिया और बोले- भाभी क्या हुआ, आपको कुछ चाहिए?
मेरे देवर अपने लंड की तरफ देख कर मुझसे बातें कर रहे थे. मेरे देवर ने पहली बार मुझसे डबल मीनिंग में बात की थी.

अब तो उसी दिन से हम दोनों लोग गंदे गंदे मजाक करने लगे. अब तो मेरे पति जब जॉब करने जाते थे तो मैं घर का सारा काम करके अपने रूम में आराम से सोती थी. दोपहर में मेरा यही काम था कि मैं दोपहर में सोती थी.

एक दिन मैं दोपहर में अपने रूम में सो रही थी. उस दिन मेरे देवर अपने जॉब पर नहीं गए थे. मैं सोते समय अपनी साड़ी खोल एक ब्लाउज और पेटीकोट में सोती हूँ. इससे मुझे सोने में आराम रहता है और नींद भी अच्छी आती है. मैं रात को भी ब्लाउज और पेटीकोट में ही सोती हूँ.
मैं अपने रूम में दोपहर को सो रही थी और मेरी पेटीकोट मेरे जांघों तक आ गयी थी. मेरी पेंटी दिख रही थी और मैं सो रही थी. मेरा देवर मेरे कमर में आकर मेरी पेंटी को देख रहे थे. मैं जब थोड़ा नींद में उठी तो देखा कि मेरा देवर मेरी पेंटी को बहुत ध्यान से देख रहा है.

मैंने अपने देवर की तरफ देखा तो मेरा देवर मुझे देख कर मुस्कुराने लगा और बोलने लगा- भाभी, आप सोते समय बहुत सेक्सी लगती हो. आप कभी मेरे साथ भी सो लिया करिए.
मैं अपने देवर की डबल मीनिंग बात समझ गयी. मैं समझ गयी कि मेरा देवर भी मुझे चोदना चाहता है. मेरी उभरे हुए चुचे और बड़ी गांड जो थोड़ी सी उभरी हुई है.

मेरा देवर मेरे जिस्म को देख कर दीवाना हो गया. मेरा देवर मेरे जिस्म की तारीफ करने लगा- भाभी आप बहुत सुन्दर हो. भईया तो आपको खूब रात में प्यार करते होंगे.
मैं यह बात सुनकर थोड़ा उदास हो गयी क्योंकि मुझे अपने पति से चुदाई का सुख नहीं मिल पाता था जैसा मैं चाहती थी. वैसा मेरा पति मुझे नहीं चोदता था.

मेरे देवर मेरे पास आया और बोला- भाभी क्या बात है. आप मुझे बताओ मैं हूँ न आपकी सहायता करने के लिए!
मैंने अपने देवर को बताया- मेरे पति को अब ज्यादा मुझमे रूचि नहीं है. मेरे पति अब मुझसे ज्यादा प्यार नहीं करते हैं जैसा वो पहले करते थे.

मेरा देवर यह बात सुनकर बोला- भाभी मैं हूँ ना आपका देवर … मैं आपसे प्यार करूँगा.
मैं और मेरा देवर हम दोनों लोग एक दूसरे से नज़रें मिलाकर बात कर रहे थे. मेरा देवर मुझे देख कर थोड़ा हवस भरी नजरों से मुझसे बातें कर रहा था.

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अनदेखे लण्ड की चाह

मैंने बी एस सी पास कर ली थी, एक दिन मम्मी पापा की बात सुन ली। “यशू तो अब ग्रेजुएट हो गई है, अब उसका ब्याह कर देना चाहिये।” पापा ने मम्मी से कहा। हाँ, ठीक है, बी एड तो बाद में भी कर लेगी। आप संजीव की बात कर रहे हैं ना? हाँ वही ! खासी पैसे वाली पार्टी है, मुम्बई में अच्छा बिजनेस है। लड़का भी सुन्दर है देखा-भाला है। मैंने भी संजीव को देखा था वो तो बिल्कुल रणवीर कपूर की तरह स्मार्ट और सुन्दर था। उसके पास तो कई कारें थी। मेरा मन खुशी से भर गया। बात चल निकली थी, sexy stories पत्राचार होने लगा था, सगाई का समय दिवाली के बाद तय हुआ और शादी गर्मी के दिनों में तय हुई।

सभी कुछ अब तो निश्चित ही था, समय पास आता जा रहा था। वर्षा ॠतु भी बीत चुकी थी… नवरात्रे चल रहे रहे थे, मैं तो बस संजीव के ख्यालों में खोई रहने लगी थी। कभी कभी रात को मुझे उसके सलोने शरीर का भी विचार आ जाता था। उसका लण्ड कैसा होगा… उमेश की तरह…? उंह नहीं… अंकित की तरह होगा… ना ना वो तो ठिगना है तो फ़िर? मेरा संजीव तो लम्बा है… यानि कुछ कुछ राहुल जैसा होगा संजीव… उसका लण्ड भी राहुल की तरह मोटा और भारी होगा…? कैसा लगेगा जब वो मेरी फ़ुद्दी में घुसेगा तो…? मुझे पता है वो तो राहुल के लण्ड की तरह ही मस्त होगा।

फिर रात को जाने कब मैं चुदाई के बारे में सोच सोच कर झड़ तक जाती थी। उफ़… सत्यानाश हो इस जवानी का…। अभी तो दशहरा आने वाला था फिर दीवाली… कोशिश करूँगी कि सगाई के समय एक बार तो उससे चुदवा ही लूँ… पर दीवाली में तो अभी एक महीना है… धत्त… साला कैसे समय कटेगा।

उन्ही दिनों मेरा चचेरा भाई अशोक मेरे घर आया हुआ था। साधारण कद काठी का दुबला पतला सा… पर चंचल स्वभाव का था वो। उसने बस इसी साल कॉलेज में प्रवेश लिया ही था।

मेरा तो रोज ही संजीव के बारे में सोच सोच कर बुरा हाल हो रहा था। अब तो मुझे लगने लगा था कि बस वो एक बार आ कर मुझे जोर से चोद जाये। एक अनदेखे लण्ड की चाह में मेरी चूत बार बार टसुए बहा रही थी।

मुझे शादी के बारे में कुछ गुप्त बातें पता भी करनी थी कि कैसे मर्द को खुश रखा जाता है, उसे वास्तव में क्या क्या चाहिये होता है… और भी ना जाने क्या क्या मन में था। चुदाई के बारे में तो मैं सब कुछ जानती थी, शायद उसमें कुछ भी जानना बाकी नहीं था। फ़िलहाल अभी तो अशोक आंखो के सामने था। अभी तो मुझे संजीव जैसा तो अशोक ही नजर आ रहा था… । उसी से पूछूँगी… वो तो सब बता ही देगा। पर मेरे छोटे से मन को कौन समझाये कि अशोक तो खुद ही एक नासमझ लड़का था… जाने वो क्या समझ बैठे।

मैंने अशोक को जाते देख कर आवाज दी- कहाँ जा रहा है?

“बस मन्दिर तक… अभी आता हूँ।”

घर के सामने ही मन्दिर था। वो दस मिनट में ही आ गया- हाँ, बोल क्या बात है?

“अरे यार, कुछ प्राईवेट बात है, उधर चल…!”

मैं उसे अपने कमरे में ले आई और उससे धीरे से कहा- यार अशोक, तुझे तो मालूम ही है मेरी शादी होने वाली है।”

“वो तो सबकी होती है, इसमे परेशान होने वाली कौन सी बात है?”

“अरे शादी तो ठीक है… मुझे तो कुछ पूछना है।”

“अच्छा तो पूछ… क्या पूछना है।”

“मान लो यदि तेरी शादी होती तो तुझे तेरी पत्नी से क्या उम्मीदें होती?”

“अरे यशोदा… मेरी बहन… मत पूछ… बस सबसे पहले तो मैं चाहूँगा कि वो मुझे खूब प्यार करे…!”

“अच्छा और…?”

“फिर बस मस्ती से चुदवा ले ! अरे… सॉरी…”

“अरे कुछ नहीं… चलता है। मरवायेगा साला… धीरे बोल…”

उसके इस तरह ‘चुदवा ले’ कहने मुझे एक अजीब सा अहसास हुआ।

“क्या हुआ… ओह… मेरा मतलब है सुहागरात से था…”

“नहीं वो तो ठीक है… पर फिर तुम उससे क्या अपेक्षा रखोगे…?”

“यशू… रात को बताऊँगा… पर नाराज मत होना !”

“साला, तू क्या बतायेगा, ठीक है शाम को ही सही।”

मुझे तो उसकी बातों से लगा कि वो मुझे फ़्लर्ट करना चाह रहा है। साला कैसा बोला था मस्ती से चुदवा ले… फिर मुझे उसके लिये कुछ कशिश सी महसूस होने लगी। शायद यह संजीव के बारे में अधिक सोचने के कारण थी कि मैं अनजाने में ही चुदासी हो रही थी। मैं फिर से आकर बिस्तर पर लेट गई। मेरे मन में फिर से ऐसा लगने लगा कि संजीव मानो मुझे चोद रहा हो। मेरा काला टाईट पजामा मानो शरीर में चुभने लगा था। मेरी छोटी छोटी सी चूचियाँ कड़ी हो गई। निप्पल तो फ़ूल कर जैसे फ़ट जायेंगे। ओह्ह… मैंने जल्दी से अपनी टाईट पजमिया उतार दी और एक ढीला ढाला सा घर का पायजामा पहन लिया। पर तन तो जैसे अकड़ा जा रहा था। उसी समय वहाँ से अशोक गुजरा। ना चाहते हुये भी मैंने उसे आवाज दे कर अपने कमरे में बुला लिया, तुरन्त दरवाजे को बन्द कर दिया।

“वो तूने तो बताया ही नहीं कि…?”

“चुप… देख बताता हूँ… तूने कभी किसी लड़के से दोस्ती की है?”

“अरे ना बाबा ना… मैंने तो किसी लड़के के बारे में सोचा तक नहीं !” झूठ बोलने में तो मेरा क्या जाता। मैं क्यू बताऊँ कि मैं तो स्कूल के समय से ही चुदाती आ रही हूँ।

“तभी तो ये उतावलापन है… तुझे तो पूरा ही समझाना पड़ेगा।”

“तो समझा दे ना रे… मुझे भी कुछ तो पहले से ही मालूम रहेगा।”

“देख, तू यहाँ बिस्तर पर बैठ जा… हाँ ऐसे…”

उसके बताने पर मैं बिस्तर पर अपने पांव को समेट कर बैठ गई। उसने पास में पड़ी मेरी चुन्नी मेरे सर पर यूँ डाल दी जैसे कि घूंघट हो। मुझे तो ये सब पता था… पर उसके साथ ये सब करने में खेल जैसा लग रहा था।

“अब मान ले कि मैं संजीव हूँ… देख बीच में कोई गड़बड़ मत करना… मुझे संजीव ही समझना।”

“अरे ठीक है ना… अब आगे तो बोल।”

उसने आगे बढ़ कर धीरे से मेरा घूंघट उठाया और मेरी ठुड्डी पकड़ कर मेरा चेहरा ऊपर उठाया। मुझे तो वास्तव में अब शरम आने लगी थी।

“बहुत खूबसूरत लग रही हो।”

मेरी आँखे स्वतः ही झुक गई थी, शर्म सी भी आने लगी थी, मानो सच में संजीव ही हो।

“तुम्हारे गोरे गोरे गाल, ये सुन्दर आँखें, ये गुलाबी होंठ… चूमने को मन करता है।”

अरे बाप रे… मेरी तो सांसें अपने आप तेज होने लगी। छोटी छोटी छतियाँ लम्बी सांसों के कारण ऊपर नीचे होने लगी। उसका चेहरा मेरे नजदीक आ गया। उसने जानबूझ कर मेरे होंठो से अपने होंठ टकरा दिये। मेरी आँखें किसी दुल्हन की तरह बन्द सी होने लगी।

उसने थोड़ा सा इन्तजार किया… मेरे विरोध ना करने पर उसने मेरे होंठ अपने होंठों पर दबा दिये। मेरा मुख अपने आप खुल गया… उसने मेरे नीचे के होंठ अपने होंठों से चूस लिये। मैंने भी उसकी सहायता की। मुझे भी लग रहा था कि इस समय मुझे कोई रगड़ कर रख दे ! मेरा सारा तन झनझना रहा था, एक अनजानी कसक से तड़पने लगा था। मेरी चूचियाँ तन कर कठोर हो गई थी।

अचानक उसके हाथ मेरे छोटे से कठोर मम्मों पर आ गये। मुझे राहत सी लगी… बस अब जोर जोर से दबा दे मेरी तड़पती हुई चूचियों को…

उसने मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। वो मुझ पर तिरछा लेट गया। वो मुझे बेतहाशा चूमने लगा। मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगी थी। मेरा तन चुदासा होता जा रहा था… चूत को लण्ड खाने की जोर से लग रही थी। यह भूल गई थी कि ये सब मेरे साथ मेरा चचेरा भाई ही कर रहा था। उसने मेरी छातियाँ ज्यों ही दबाई, मेरे तन में चिंगारियाँ छूटने लगी। चूत सम्भोग के लिये अपने आप ही तैयार हो गई थी। उसमें से प्यार की बूंदें रिसने लगी थी। मैंने भी अनजाने में अपने हाथ उसकी कमर के इर्द गिर्द कस लिया था। मेरी टांगें चुदने के लिये बरबस ही उठने लगी थी। एक तेज मीठी सी खुजली चूत में होने लगी थी।

अचानक अशोक ने मेरा टॉप ऊपर से खींच कर उतार दिया। मैं और भी उन्मुक्त सी हो उठी। मेरी कठोर चूचियाँ खुली हवा में नंगी हो गई थी।

तभी अशोक ने भी अपनी कमीज उतार दी, उसने अपनी टांगें उठा कर मेरी कमर में फ़ंसा दी… फिर धीरे से सरक कर मेरे ऊपर आ गया और मुझे दबा लिया।

“उफ़्फ़… ये क्या… अह्ह्ह्ह… अशोक… उफ़्फ़ !!”

“बस तुम्हें संजीव के यही करना है।”

“अशोक… उह्ह्ह… कितना मजा आ रहा है…”

“अब चुदने की लग रही है ना… चोद दूँ…?”

“तू क्या कह रहा है? बहुत खराब है तू तो…?”

तब उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… दो नंगे जिस्म… आपस में मिल गये…

गर्म गर्म से शरीर का कितना सुखद स्पर्श लग रहा था, उसका भारी लण्ड मेरी पनियाई हुई चूत को रगड़ रहा था, उसका खिला हुआ सुपारा मेरी गीली चूत को रगड़ा मार रहा था।

मेरी तो सांसें सांसें बहुत तेज हो उठी थी। धड़कन भी तेजी लिये हुये थी।

“उफ़्फ़्फ़… जाने देर क्यूँ कर रहा है…”

उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… दो नंगे जिस्म… आपस में मिल गये…

गर्म गर्म से शरीर का कितना सुखद स्पर्श लग रहा था, उसका भारी लण्ड मेरी पनियाई हुई चूत को रगड़ रहा था, उसका खिला हुआ सुपारा मेरी गीली चूत को रगड़ा मार रहा था।

मेरी तो सांसें सांसें बहुत तेज हो उठी थी। धड़कन भी तेजी लिये हुये थी।

“उफ़्फ़्फ़… जाने देर क्यूँ कर रहा है…”

दोनों के शरीर चिपक गये थे, एक दूसरे को दबा रहे थे।

हम दोनों ही तेज वासना की अनुभूति में डूबे जा रहे थे। तभी मुझे उसके सुपारे का दबाव अपनी चूत पर महसूस किया। मारे गुदगुदी के मैंने भी अपनी चूत का दबाव उसके लण्ड पर डाल दिया। एक तेज कसाव के साथ उसका लण्ड मेरी चूत में उतरने लगा। तभी उसने मुझे एक जोर से शॉट मारा और भचाक से उसका पूरा लण्ड भीतर बैठ गया। मेरे मुख से एक आनन्द भरी चीख सी निकल गई।

“अरे अशोक… लगता है मेरी झिल्ली फ़ट गई…!”

मेरा यह नाटक हर एक नये लड़के के साथ हुआ करता था ताकि उसे लगे कि यह तो फ़्रेश माल है। मारे आनन्द के मैंने उसे जोर से दबा लिया। वो भी मुझे फ़्रेश लड़की जान कर रुक गया… पर मुझे तो जोर से लौड़ा लेने की इच्छा हो रही थी। जोश में मैंने अपनी चूत उछाल दी।

“धीरे से जान… लग जायेगी…”

“ओह, बहुत दर्द हो रहा है।” कहकर मैंने फिर से अपनी कमर चला दी।

फिर तो उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी। दुबला पतला लड़का था सो कमर उसकी तेजी से चल रही थी। मैं भी कस कस कर जवाब दे रही थी।

थप-थप की आवाजें तेज हो गई थी। तेज भचीड़ों से मैं निहाल होने लगी थी। मैं तो चरम सीमा को लांघने ही वाली थी… पर अशोक की अदा ने मुझे जोर से झड़ा दिया। उसने मेरे चूचक को खींच कर मसल दिया। मेरी चूत में एक आग सी उठी और… और मैं जोर से झड़ने लगी।

उसने भी किसी फ़िल्मी स्टाईल में अपना लण्ड चूत से बाहर निकाला और तेजी से मुठ्ठ मारते हुये अपना वीर्य हवा में उछाल दिया। उसकी पिचकारियाँ मन को मोह लेने वाली थी। एक के बाद एक पिचकारी ! धीमी पड़ती गई और अन्त में बून्द बून्द को निचोड़ कर उसने अपना कार्यक्रम सम्पन्न किया।

चोदने के बाद फिर वो उछल कर किसी खिलाड़ी की तरह बिस्तर के नीचे खड़ा हो गया। मैं भी जल्दी से अपने कपड़े खींच कर पहनने लगी।

“अब तुम्हें समझ में आ गया कि संजीव को क्या चाहिये?”

“उंहु, अभी पूरा समझ में नहीं आया…” मैं उसे टेढ़ी नज़र से देख कर मुस्कराई।

“अब क्या रह गया है…?”

“यह तो सामने स्वर्ग का दरवाजा खुला पड़ा था तो झण्डे गाड़ दिये… पाताल लोक में झण्डे गाड़ो तो पता चले कि जनाब कितने पानी में हैं।’

“वो क्या होता है…?”

रात को इसी कमरे में आ जाना… और पाताल लोक में झण्डे गाड़ देना। मेरी तिरछी निगाह उसे गाण्ड मारने का निमन्त्रण दे रही थी।

मैं रात को अशोक का इन्तजार करने लगी। जब रात के ग्यारह बजने लगे तो मुझे नींद सी आने लगी। चूत की खुजली भी तेज होने लगी थी। मैं चुदासी भी हो चली थी। तरह तरह के चुदने के विचार आ रहे थे। इन्हीं मधुर विचारों में न जाने कब मेरी आँख लग गई।सपने में भी मैं अशोक से चुद रही थी। तभी जैसे मेरी आँख खुल गई। अंधेरे में मुझे लगा कि अशोक आ गया है।

“कितनी देर कर दी?”

“श…श श… चुप रहो…!” उसके फ़ुसफ़ुसाने की सी आवाज आई।

वो चुप से मेरे बिस्तर पर आ कर लेट गया। उसने अपनी पैंट उतार दी। मैं तो पहले ही छोटी सी शमीज पहने हुए थी तो कमर से ऊपर उठा ली। मेरी खूबसूरत गोल गाण्ड से उसका लण्ड सट सा गया। मैंने तेल लगा कर पहले ही उसे चिकनी कर दी थी पर उसका लण्ड तो आगे बढ़ गया और मेरी चूत को टटोलने लगा।

“अरे ये क्या कर रहे हो? बात तो पाताल लोक की हुई थी, स्वर्ग लोक की नहीं।”

“श…श श…!” वो मुझे चुप ही कराता रहा। मैंने बहुत कोशिश की कि उसे अपनी चूत से दूर रखूँ पर क्या करती उसकी ताकत के आगे फिर मैंने समर्पण कर दिया और उसका सख्त लौड़ा मेरी चूत में घुसता चला गया।

इस बार कितना भारी लग रहा था उसका लण्ड, लग रहा था कि बहुत जोश में था। जाने उसका लण्ड इतना लम्बा कैसे हो गया था कि मेरी चूत की गहराई को वो आसानी से नाप रहा था। उसके धक्के भी चूत में कसे कसे से लग रहे थे।

“बहुत मजा आ रहा है जानू… जरा तेजी से चोदो !”

“हाँ रानी… तेरी चूत तो कितनी कसी है…!”

मेरा दिल धक से रह गया… हाय रे…! यह क्या हो गया… यह कौन है… कौन चोद रहा है मुझे… किसकी आवाज है ये…?

“कौन हो तुम… और तुम यहाँ कैसे आ गये…?”

“मैं रवि… वही अशोक के बचपन का दोस्त… यशोदा जी प्लीज… तुम्हें चोदने की मेरी दिली तमन्ना थी।”

“तो अशोक कहाँ है?”

उसके लण्ड में तो सवेरे चोदते समय चोट लग गई थी। जब मैंने अपने दिल की बात बताई तो उसने मुझे भेज दिया।

“ओह्ह, तो तुम हो रवि… साला मुझे तो डरा ही दिया था।”

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मैंने अब तसल्ली से अपनी टांगें चुदने के लिये फ़ैला दी। अब वो और मस्ती से गहराई तक शॉट लगाने लगा था। मेरी एक टांग उसने थाम रखी थी। मेरी नर्म चूत को वो कस कर पेल रहा था। मेरी चूत को अखिर तृप्ति मिल ही गई और मैं जोर से झड़ गई।

‘बस करो अब रवि… मुझे लग रही है…!”

“पीछे की मार दूँ…?”

“तो पहले क्या कह रही थी मैं… तुम तो सुन ही कहाँ रहे थे…”

“पहले यशोदा जी… आपको चोद कर मजे तो ले लेता फिर गाण्ड के मजे लेता…”

उसका मोटा लण्ड मेरी गाण्ड के छल्ले में फ़ंस सा गया। बहुत मोटा था…

“अरे धीरे से…बहुत मोटा है यह तो…!”

“यशोदा जी… आपको तकलीफ़ नहीं होने दूंगा…”

उसने इस बार हल्का सा जोर लगाया… लण्ड धीरे से अन्दर सरक गया।

“उफ़्फ़ ! साला, क्या मूसल जैसा है… ! उईईईई जरा धीरे ना… मेरी फ़ट जायेगी।”

उसने पहले तो बाहर निकाला फिर वापस अन्दर कर दिया। उफ़्फ़, पहले तो ऐसी तकलीफ़ कभी नहीं हुई थी। वो अब अपना लण्ड थोड़ा सा घुसा कर लेट गया। मुझे अपनी गाण्ड में लण्ड बहुत भारी सा लग रहा था… कुछ कुछ फ़ंसा हुआ सा… मैंने ही धीरे से गाण्ड का दबाव उसके लण्ड पर डाला। उसने भी दबाव महसूस किया और लण्ड को भीतर घुसेड़ दिया।

“ओ ओ… बस बस… यह तो बहुत मोटा है, इसे निकाल ही दो प्लीज !”

पर हुआ उल्टा ही… उसने लण्ड को और अन्दर दबा डाला।

“अरे ! अरे, क्या कर रहे हो…? बोला ना, बस करो…!”

“तेरी तो भेन की भोसड़ी… चुप से पड़ी रह…”

उसकी भाषा सुन कर मैं तो जैसे सुन्न सी रह गई पर उसने अपने आप पर काबू पाया और बोला- अरे, आराम से गाण्ड चोदने दे… देख तकलीफ़ नहीं होने दूंगा… अब रोक मत मुझे।

अब वह लण्ड को दबा कर भीतर घुसेड़ने लगा। दर्द तो नहीं हुआ पर लण्ड फ़ंसते हुये अन्दर जा रहा था।

“ले पूरा बैठ गया ना… नहीं हुई ना तकलीफ़?”

‘उफ़्फ़… सच कहते हो… मजा आ गया… अब चल चोद मेरी गाण्ड…!”

उसने मेरी कमर को थाम कर लण्ड को आहिस्ते से चलाना शुरू कर दिया। धीरे धीरे गाण्ड ने लण्ड के साईज के अनुसार खुद को सेट कर लिया। अब रवि मेरी गाण्ड आराम से चोद रहा था। इतनी देर में शायद मेरी चूत में भी गर्मी आ गई थी और चूत पानी छोड़ने लगी थी। अब तो मेरा पूरा शरीर लय में आगे पीछे हो कर गाण्ड की चुदाई में मदद कर रहा था। रवि भी मेरी कसी गाण्ड की मार कब तक झेलता। उसने मेरी गाण्ड में ही वीर्यपात कर दिया।

“मेरी चूत में तो आग लग गई है… अब क्या करूँ रवि? बुझा दो प्लीज।”

उसने तुरन्त मेरी चूत से अपना मुख चिपका दिया और मेरे दाने को चूस चूस कर मुझे झड़ा दिया। मैंने गहरी सांस ली और निढाल सी पड़ गई।

रवि अंधेरे में ही उठा और अपने कपड़े पहन कर चुपके बाहर निकल गया। मैं लेटी लेटी सोचती रही कि अशोक से तो ये रवि ही जोरदार है… इससे चुदवा कर बहुत मजा आया। ये संजीव तो मुझे हर जगह चुदवा कर ही छोड़ेगा देखना। कैसी आग लगा दी है मन में उसने… हाय कैसा है ये जालिम। लगता है संजीव तो जब चोदेगा तो तब देखा जायेगा… दुनिया तो मुझे पहले ही चोद डालेगी

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मैं बिल्कुल तैयार थी उनका लंड अंदर लेने के लिए

आकाश और मोहित ने चोद चोद कर मेरी चूत सुजा दी थी जिस कारण से मेरी और ज्यादा चुदवा पाने की हिम्मत नहीं बची थी।

जब मैं आकाश की चुदाई में मग्न थी तो मोहित भी हमें देखने लगा था और इसी लापरवाही के चलते कब हमारे इंग्लिश के टीचर आकर हमारी चुदाई देखने लगे, हम तीनों को खुद नहीं पता चला।

हमने जब देखा तो उनके हाथ में मोबाइल था और हमारे टीचर हमारा वीडियो बना रहे थे।

हम तीनों के होश उड़ गए जब हमने देखा कि हमें टीचर ने देख लिया।

हमने जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और अपने आप को ठीक करके सर के सामने रोने गिड़गिड़ाने लगे- सर, प्लीज किसी को मत बताइएगा, सर गलती हो गई, प्लीज सर हमसे गलती हो गई।

लेकिन जब कोई एक जवान खूबसूरत लड़की की चूत देख लेता है तो अच्छे अच्छों की भी नजर फिसल जाती है। वही मेरे साथ भी हुआ मेरी डबल रोटी के जैसे फूली हुई चूत देखकर किसी का भी मन डोल जाए।

शायद सर भी मेरी चूत फाड़ने का जुगाड़ देख चुके थे लेकिन उन्होंने उस समय यह बिल्कुल नहीं महसूस होने दिया।

हमारे टीचर ने हम तीनों को डांटते हुए बोला- यह बात ऐसे खत्म नहीं होगी।
तुम लोगों ने एक क्लास में ऐसी घिनौनी हरकत करके यहां की मर्यादा को ठेस पहुंचाया है।
हम तीनों बहुत ज्यादा डर चुके थे इसलिए सर के सामने सर झुकाए खड़े थे।

मेरी आंखों में तो आंसू भी बह रहे थे कि पता नहीं अब क्या होगा। कहीं यह बात मेरे घर में ना पहुंच जाए।

सर ने आकाश और मोहित को बहुत डांटा और उन्हें धमकी भी दी कि अगर आइंदा से ऐसा कुछ भी तुमने किया तो मैं तुम लोगों के घर तक यह वीडियो जरूर पहुंचा दूंगा।

उन दोनों ने सर से प्रॉमिस किया की आगे से अब इस प्रकार की कोई भी हरकत नहीं करेंगे।
सर ने उन दोनों को धमकी देकर छोड़ दिया और वे दोनों वहां से तुरंत चले गए।

उसके बाद से उन दोनों ने ना मुझे कभी घूरा और ना ही मुझे कभी लाइन मारी।

एक दिन जब मैं स्कूल पहुंची तो हमारे हमारे इंग्लिश टीचर सर क्लास में आए और बोले- पायल, तुम मेरे कैबिन में आओ।
मैं घबरा गई कि अब क्या हो गया क्योंकि मैं उन सब को उस दिन की घटना के बाद से देखकर घबरा जाती थी।

मैं डरी सहमी सर के केबिन में पहुंची। सर का कैबिन बिल्कुल अलग और एकांत में बना हुआ था जहां बिना उनकी परमिशन के कोई नहीं जा सकता था।

जब मैं केबिन के अंदर पहुंची तो सर अपना कुछ काम कर रहे थे।
“जी सर, क्या बात है?” मैं बोली।

सर ने पहले तो मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा और अपने लोड़े को हाथों से सेट करते हुए बोले-
पायल, मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी जो तुम लोग उस दिन कर रहे थे. लेकिन अब तुमने अगर गलती की है तो गलती की सजा तो मिलनी ही चाहिए। क्योंकि जब तक कोई सजा नहीं मिलती गलती दोबारा भी होती है।

मैं सर झुकाए जो कि खड़ी हुई थी बोली- जी सर क्या सजा है मेरे लिए? लेकिन प्लीज घर में मत बताइएगा आप जो कहोगे मैं करूंगी।

मैंने तो बहुत साधारण तरीके से यह बात बोली थी लेकिन सर ने मेरी इस बात को दूसरे मतलब में ले जाकर बोले- जो बोलूंगा वह करोगी?
मैं समझ गई कि लगता है अब फिर से मुझे अपनी चूत फड़वानी पड़ेगी तो मैं बोली- जी सर, जो बोलोगे वही करूंगी।

सर बोले- मैं भी तुम्हें चोदना चाहता हूं। तुम्हारी जैसी कच्ची कली को मैं भी फूल बनाना चाहता हूं।
मैं रोती हुई बोली- सर प्लीज ऐसा मत करिए। मुझसे गलती हो गई। मैं बहक गई थी इसलिए ऐसा हो गया। आइंदा से मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी। सर प्लीज मुझे माफ कर दो।

सर का लंड तो पहले ही फूल चुका था। वे मेरी बात बिल्कुल भी सुनने के मूड में नहीं थे।
उन्होंने बोला- पायल, या तो मुझसे अपनी चूत चुदवा लो या फिर मैं यह बात तुम्हारे घर में बता दूं। तुम्हारे पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं और कोई विकल्प नहीं है।

जब मैं जान गई कि अब मेरे पास और कोई रास्ता नहीं बचा। मुझे इन्हीं में से कोई विकल्प चुनना ही पड़ेगा।
अगर घर में बताने वाला विकल्प चुनती तो मेरा बाहर आना जाना और मेरी आजादी सब बंद हो जाती। और मेरे घरवाले मेरी इस उम्र में शादी भी कर देते जिसके लिए मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं थी क्योंकि मुझे अभी बहुत सारे लौड़ों का मजा लेना था।

लेकिन सच बताऊं तो कहीं ना कहीं मेरी चूत में भी आग लगने लग गई थी कि चलो इसी बहाने एक और नया लंड चूसने को तो मिलेगा।
मैंने सर को दुखी भाव में बोला- ओके सर, मैं चूत चुदवाने के लिए तैयार हूं लेकिन आपको प्रॉमिस करना पड़ेगा कि आप वह वीडियो मेरे सामने पूरी तरह से डिलीट कर दोगे।
सर ने तुरंत मुझसे प्रॉमिस किया और बोले- कल मैं घर में अकेला हूं इसलिए कल मैं स्कूल नहीं आऊंगा और तुम भी घर से स्कूल के बहाने निकलकर मेरे घर आ जाना।
मैं भी तुरंत राजी हो गई।

जब स्कूल खत्म होने के बाद शाम को मैं घर पहुंची तो मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर सारे कपड़े उतार के पहले अपनी चूत को क्लीन शेव किया और थोड़ी देर निहारती रही।
और यह सोचती रही कि कल यही चूत फट कर फिर से भोसड़ा बनने वाली है।

लेकिन कहीं ना कहीं चुदाई के बारे में सोच कर मेरी चूत में सुरसुरी उठने लग गई थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं रसोई से एक मूली लेकर वहीं बाथरूम में अपनी चूत में डालने लगी।

10 मिनट तक मूली से चोदने के बाद जब मेरी चूत से पानी बहा, तब जाकर मुझे शांति मिली और मैं आकर कमरे में चूत पसार कर सो गई।

दूसरे दिन मैं बहुत खुश थी और अच्छे से तैयार हुई। मैंने एक सेट पेंटी और ब्रा एक्स्ट्रा अपने बैग में डालकर अच्छे से परफ्यूम लगाकर सर के घर की तरफ चल दी।

जब मैं टीचर के घर के पास पहुंची तो देखा सर दरवाजे के पास ही लगे सोफे पर बैठे मेरा इंतजार कर रहे हैं।
मैं जैसे ही घर के अंदर घुसी सर ने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया और मुझे अपने सीने से चिपका लिया।

मुझे सीने से चिपकने का तो पता नहीं लेकिन उनका ताना हुआ लंड मेरी चूत में जरूर महसूस हो गया कि सर तो बिल्कुल भरे बैठे हैं।

सर ने मुझे बिठाया और मुझे पानी दिया। मैं भी पानी पी कर सोफे पर बैठ गई।

2 मिनट तक सर मेरे बगल में बैठकर पहले मुझसे बातें करते रहे और फिर बोले- तो क्या तैयारी करके आई हो चुदने के लिए?

मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी पेंटी के अंदर घुसा दिया।

सर समझ गए कि मैं अपनी चूत बिल्कुल चिकनी करके आई हूं। उन्होंने तुरंत अपने होंठ मेरे होठों से चिपका दिये और मेरे होंठ चूसते चूसते अपनी गोद में उठाया, अपने मास्टर बेडरूम में ले जाकर पटक दिया।

सर तुरंत मेरे ऊपर आ गए और मुझे किस करने लग गए साथ में मेरी चूचियां भी दबाते रहे। उन्होंने मेरी चूची के काले दाने को ऐसे मसला कि मेरी पूरे शरीर में कम्पकपी सी मचने लगी।

मेरी चूत से पानी बहने लगा और मेरा मन करने लगा कि तुरंत लंड में बैठ जाऊं लेकिन तुरंत चोदने का मजा भी बेकार होता है इसलिए मैंने थोड़ा सब्र रखना सही समझा। क्योंकि थोड़ी देर बाद मेरी चूत का भोसड़ा बनने ही वाला था इसलिए मैंने आराम से करना सही समझा।

किस करने के बाद सर ने मेरी शर्ट उतार दी और ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियां दबाने लगे। दबाते दबाते वह इतने जोश में आ गए कि उन्होंने मेरी ब्रा उतारने के बजाय खींचकर फाड़ दी और मेरी चूचियों को नंगी कर दिया।

जब टीचर ने मेरी गोरी चूचियां देखी तो वे पागल हो गये और उन्हें जोर जोर से चूसने लगे। मैं इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि मैंने बिस्तर को मुट्ठी में भींच लिया।

5 मिनट चूची चूसने के बाद उन्होंने मेरी स्कर्ट ऊपर उठाई और पेंटी खींचकर फाड़ दी।

सर मेरी छोटी सी चूत देखकर इतने जोश में आ गए कि मेरे चूत में उंगली के बजाय मुंह से चूसने लगे और मेरे दाने को दांतों से काटने लगे।

मुझे इतना मजा आ रहा था जैसे मैं किसी जन्नत में पहुंच गई। मेरे पूरे शरीर में गूजबम्स आने लगे और मेरे शरीर में कंपकपी सी उठने लगी।
मैं सर की खोपड़ी पकड़कर अपनी चूत में दबाने लगी। सर ने अपनी पूरी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी।

मैंने सर से पूछा- सर इससे पहले आपने कितनी बार चुदाई कर रखी है?
टीचर से मैंने यह बात इसलिए पूछी थी क्योंकि सर अविवाहित थे।

सर बोले- तुमसे पहले भी मैं अंजलि और मधु की चूत की सील तोड़ चुका हूं।

अंजलि का नाम सुनते ही मैं भौचक्की रह गई क्योंकि वह तो क्लास की टॉपर थी और इतना एटीट्यूड दिखाती थी जैसे उनसे बड़ी पवित्र लड़की पूरे स्कूल में कोई नहीं है।
प्यार का नाम सुनते ही वह ऐसे उचक जाती थी जैसे किसी ने उसकी गांड में मिर्च लगा दी हो।
अब मुझे पता चला कि वह कुतिया तो मुझसे पहले ही अपनी चूत फड़वा कर टहल रही है।

खैर मैं अपनी कहानी पर आती हूं.

उसके बाद मैंने टीचर को बोला- सर, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है प्लीज जल्दी से अपना लौड़ा निकालो और मुझे चूसने दो।
सर ने कहा- इसमें देरी किस बात की … मेरा लंड तुम खुद ही निकाल कर चूस लो।

मैंने भी देर ना करते हुए तुरंत सर की शर्ट और पैन्ट उतार दिए। उनकी चड्डी के ऊपर से ही उनका लंड बिल्कुल सांप की तरह फनफना रहा था। मैंने जैसे ही उनकी चड्डी नीचे की कि उनका लण्ड फुफकार मारते हुए बाहर निकला और मेरे आंखों के सामने झूलने लगा।

सर की चड्डी उतार कर मैंने एक तरफ फेंकी और उनका मोटा लंड लेकर तुरंत मुंह में भर लिया। उनका लंड इतना मोटा और तगड़ा था कि मेरे मुंह में पूरा आ नहीं पा रहा था। मुझे उनका लंड चूसने में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं क्या बताऊं।

तभी मेरे मन में ख्याल आया कि कुछ अलग किया जाए तो मैं तुरंत उठी और उनकी रसोई की तरफ गई। वहां फ्रिज में देखा कि चॉकलेट रखी हुई है. मैं तुरंत चॉकलेट लेकर आई और उनके लंड के चारों तरफ लगाकर उसे चूसने लगी।

कभी-कभी बीच-बीच में मैं उनके लंड के टोपे में भी अपनी जीभ फिराने लगी।
ऐसे में सर को बहुत मजा आ रहा था।

जब लंड चूसते चूसते लगभग 15 मिनट हो चुके तो सर से रहा नहीं गया और मुझे तुरंत अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया।

सर ने मेरी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और अपना 8 इंच का लंड मेरी चूत में रखकर थोड़ा सा धक्का मारा।

मैंने पूरी चादर अपने हाथों में समेट ली और मेरे मुंह से जोर की चीख निकल गई- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ हहहह. हाय बाप रे … मैं मर गई, सर बहुत तेज दर्द हो रहा है. प्लीज बाहर निकालो।

सर यह सब सुनने के बिल्कुल भी मूड में नहीं थे। उन्होंने मुझे मेरे कंधों से पकड़ा और दूसरा धक्का तेजी से मार दिया। उनका लगभग आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत में घप्प से जड़ तक घुस गया। मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और आंसू बहने लगे।

लेकिन मुझे पता था कि अब मेरी चूत का अचार तो बनना ही है इसलिए चीखने चिल्लाने का कोई मतलब नहीं है।
मैं भी बस लेटे लेटे दर्द सहती रही और टांगें चौड़ी करके कोशिश करती रही कि उनका लंड आराम से मेरी चूत के अंदर तक घुस सके।

सर ने मेरे दर्द को समझते हुए 2 मिनट इंतजार किया और थोड़ा सा चूत में थूक डालकर 2 मिनट बाद तीसरा धक्का मारा. यह धक्का इतना तेज था कि उनका पूरा लंड जड़ तक मेरी चूत में समा गया।

मेरी जांघें बिल्कुल टाइट हो गई और मैंने सर को बहुत कस कर पकड़ कर बस दबा लिया और थोड़ी देर शांत लेटी रही।

5 मिनट बाद जब मुझे आराम मिला तो मैंने सर को कहा- अब जल्दी से चोद कर भोसड़ा बना दो।
सर यह सुनकर हंस दिए और तुरंत धक्के मारने शुरू कर दिए।

पहले तो उनके झटके बहुत सामान्य थे लेकिन दो-चार मिनट बाद ही उन्होंने इतनी तेज तेज धक्के मारने शुरू किए कि मैं बेड में 4 इंच ऊपर उछल जा रही थी।
मैं सर के सामने ऐसे चूत फैला कर लेटी थी जैसे कोई सांड के आगे छोटा सा गाय का बछड़ा।

सर के हर धक्के के साथ में मैं ऊपर उचट जाती थी और मेरे मुंह से चीख निकल जाती थी।

20 मिनट तक लगातार धक्कापेल चुदाई के बाद जब मुझे आराम मिला और मैंने चुदाई का मजा लेना शुरू किया तो मैं भी नीचे से धक्के मारने लगी।

सर को यह सब देख कर बहुत मजा आने लगा और सर ने तुरंत मुझे घोड़ी बना दिया। मैं उनके बेड के सिर वाले हिस्से को पकड़ कर घोड़ी बन गई। सर ने थोड़ा सा हाथ में थूक लेकर मेरी गांड के छेद पर लगा दिया और थोड़ा मेरी चूत में लगाया।

मुझे लगा शायद गलती से गांड में लग गया इसलिए मैंने कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया और शांत घोड़ी बनी रही और लंड घुसने का इंतजार करती रही. तभी सर ने अपने लोड़े को हाथ से पकड़ा और चूत के छेद में लगा दिया।

मैं बिल्कुल तैयार थी उनका लंड अंदर लेने के लिए!

कि तभी सब कुछ बदल गया और मेरे प्राण निकलते निकलते बचे.
क्योंकि सर ने तुरंत उस लंड को चूत से हटाकर गांड में रख दिया और बिना 1 सेकंड गंवाए हुए पूरी जोर का धक्का मार दिया।
उनका आधा लंड मेरी गांड में चीरता हुआ घुस गया।

मेरी जोर की चीख निकल गई ‘उउउईईई ईई ईईई … मांआआ आआ …’ और मैं बिस्तर में गिर गई और बेहोश हो गई।
2 मिनट बाद जब मैं होश में आई तो मेरी गांड में बहुत तेज दर्द हो रहा था और सर अपना लंड घुसेड कर वहीं पर खड़े हुए मुस्कुरा रहे थे।

मैंने सर को कहा- सर प्लीज बाहर निकाल लो। मैं इससे ज्यादा दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।
लेकिन मेरे टीचर तो पूरे हैवानों की तरह डटे रहे और उन्होंने धीरे धीरे धक्के मारने भी चालू कर दिए। मैं वहीं खड़ी चिल्लाती रही और वह मेरी गांड का छेद फाड़ते रहे।

5 मिनट तक में उनका पूरा लंड मेरी गांड में समा गया और मुझे मजा आने लगा।
अब तो मैं भी जी भर के पीछे धक्के मार मार के उनका लंड पूरा अंदर तक लेती रही और चुदाई के मजे लेने लगी।

धक्के मारते मरवाते जब हम दोनों थक गए तो मैंने कहा- सर, अब कोई दूसरी पोजीशन ट्राई करते हैं।
सर ने मेरी गान्ड से अपना मूसल लन्ड बाहर निकाल लिया।

जब मैंने सर का लंड देखा तो मेरी गांड का खून उनके लंड पर लगा हुआ था और मेरी गान्ड में जलन होने लगी थी।
मैं वहीं पर अपना पिछवाड़ा दबा कर बैठ गई।

तब तक सर बाहर से एक कुर्सी लेकर आए और उसमें बैठ गए। मैं भी अपनी चूत फैलाकर सर के लंड को हाथों से पकड़ कर अपनी चूत में डाल कर बैठ गई।

यह पोजीशन इतनी खतरनाक थी उनका पूरा लंड मेरे अंदर तक घुस गया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ लेकिन मैंने वह दर्द बर्दाश्त कर लिया और उनके गर्दन को पकड़कर अपने धक्के मारने शुरू कर दिए।
कमरे में बस मेरी चीखों की ही आवाज गूंज रही थी ‘आआआ आहह … ऊऊहह … उउम्म्म … पट पट पट!’

सर के लंड में इतना दम था कि आधे घंटे लगातार चोदने के बाद भी उनके लंड में कोई ढीलापन नहीं आया।

अब सर ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और नीचे से लौड़ा सेट करके मेरी चूत में डाल दिया और ऊपर नीचे करने लगे।

उस समय मुझे ऐसे लग रहा था कि सर ने कोई डंबल उठा कर अपने मसल्स बना रहे हो।

टीचर ने मुझे उस पोजीशन में 15 मिनट तक चोदा। इस दौरान मेरा दो बार चूत का पानी बह चुका था।

चूत चोदते चोदते जब सर थक गए तो उन्होंने अपने लंड निकाल कर तुरंत मेरे पीछे वाले छेद में सेट कर दिया और उस में धक्के मारने शुरू कर दिए।

मैं आप सबको एक बात तो बताना चाहूंगी कि चूत चुदाई से भी ज्यादा मजा तो गांड मरवाने में आता है। मुझे गांड मरवाने में इतना मजा आ रहा था कि मन कर रहा था दो तीन लंड और एक साथ अपने गांड में डलवा लूं।

मैं बस मजे लेती रही और सर मुझे वही चोदते रहे।

गांड चुदवाते चुदवाते मेरा चूत का पानी बह गया और मैंने सर को कहा- सर, अब और ज्यादा नहीं चुद सकती। मेरी चूत और गान्ड दोनों में ही जलन होने लगी है।

कहीं ना कहीं सर का भी हो ही गया था तो उन्होंने तुरंत मुझे बिस्तर में पटका और बोले- बस मेरी रानी, 10 मिनट में मेरा भी होने वाला है।

मैंने भी सोचा जब 1 घंटे से चुद ही रही हूं तो 10 मिनट और सही। और मैं भी तुरंत अपनी टांग फैला कर बिस्तर में लेट गई और बोली- सर चोदो अब।
सर ने अपना लंड हाथ से पकड़ कर मेरी चूत में रखा और एक झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया।
मैं तो बस आंखें बंद करके मजे लेटी रही।

10 मिनट तक सर ने मुझे ऐसे ही चोदा और जब पानी निकलने वाला हुआ तो उन्होंने कहा- बेबी कहां निकालूं?
क्योंकि 2 दिन पहले ही आकाश और मोहित की चुदाई के बाद मैंने दवा ली थी जो कि 3 दिन तक अपना असर दिखाती है तो मुझे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं थी इसलिए मैं बोली- सर, अपना पानी मेरी चूत के अंदर ही छोड़ो क्योंकि चुदाई का मजा तो तभी आता है जब लंड का पानी चूत के अंदर छूटे।

और मैं अपनी मेहनत की चुदाई को बर्बाद नहीं होने देना चाहती थी इसलिए मैं चुदाई का हर एक मजा लेना चाह रही थी।

2 मिनट चोदने के बाद जब सर ने अपना पानी छोड़ा तो उनका गर्म लावा मेरी चूत में भर गया।

मुझे इतना मजा आया कि बस मैंने सर को तेजी से दबा लिया और वैसे ही लेटी रही। दस मिनट तक सर अपना लंड मेरी चूत के अंदर डालकर मेरे ऊपर लेटे रहे और उनके लंड का एक-एक बूंद मेरी चूत में भर गया।

10 मिनट बाद जब सर उठे तो देखा मेरी चूत से खून और उनके लंड का पानी साथ बह रहे थे। और चादर गीली हो गयी थी। उनके लंड से बहुत ज्यादा पानी निकला था।

मैंने टीचर के लंड को हाथ में लेकर चूसना शुरू कर दिया; 5 मिनट तक चूसा और उसके बाद सर जाकर मेरे लिए जूस बनाया और पिलाया।

मेरी उठकर चल पाने की हिम्मत नहीं थी इसलिए मैं अपनी भोसड़ा बन चुकी चूत को लेकर लेटी रही।

लेकिन अभी एक और घटना घट गई। शायद मेरी किस्मत में ही चूत फड़वाना लिखा था।

सर का एक दोस्त जो कि मेरा ही पड़ोसी भी था और मुझे जानता भी था, कब अंदर आ गया और हमारी चुदाई देख ले गया हमें पता नहीं चला।

जूस पीने के बाद जब वह अचानक मेरे सामने आया तो हम दोनों के होश उड़ गए।

क्योंकि यह पहले भी कई बार मुझे लाइन मार चुका है और मैं कोई भाव नहीं देती थी और अब तो शायद अपनी चूत ही देनी पड़े।
उसने सर को एक दूसरे कमरे में ले जाकर कुछ बात की।
मैं नहीं सुन पाई क्योंकि मैं दूसरे कमरे में थी.

उसके बाद जब सर वापस आए तो मुझसे पूछने लगे- रानी, एक गड़बड़ हो गई है। मेरा दोस्त शुभम भी तुम्हें चोदना चाहता है और बोल रहा है कि अगर नहीं चुदी तो मैं सब को बता दूंगा।

क्या तुम प्लीज़ एक और राउंड चुदवा सकती हो?
वह बोल रहा है कि मुझे भी चोदना है वरना मैं सबको बता दूंगा।

क्योंकि मैं इतना ज्यादा चुद चुकी थी की और ज्यादा चुदवाने की हिम्मत नहीं थी तो मैंने मना कर दिया।

लेकिन तभी शुभम अंदर आया और मुझे गाली देने लगा
और बोला- मैं चाहूं तो अभी जाकर तुम्हारा तमाशा बना दूं।
इतना सुन कर मैं डर गई

इसलिए मैं बोली- ओके … लेकिन थोड़ी देर रुकने के बाद!
क्योंकि अभी अभी चुदी हूं तो चूत में जलन हो रही है।
उसने बोला- ठीक है।

1 घंटे बाद जब मुझे थोड़ा आराम मिला तो शुभम अंदर आया। मैं पहले से ही अन्दर नंगी लेटी थी सो उसने तुरंत मेरी चुदाई शुरू कर दी। उसने भी मुझे 1 घंटे तक पटक-पटक कर इतना चोदा कि ना तो मैं चलने लायक बची थी और ना ही बैठने लायक क्योंकि मेरे पिछवाड़े में भी बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था।

मेरी चूत का भोसड़ा बना कर शुभम वहां से चला गया और बोला- रण्डी, अब तो तेरी चूत मेरी। जब कहूंगा तब तुझे चूत चुदवानी पड़ेगी मुझसे।

खैर मैंने उसकी बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

मैं बस पीठ के बल थोड़ी देर वहीं लेटी रही और जब स्कूल से घर जाने का समय हुआ तो तब तक मुझे थोड़ा थोड़ा आराम मिल चुका था।

मुझे पता था कि मेरे साथ यह सब होने वाला है इसलिए मैं एक सेट एक्स्ट्रा ब्रा और पेंटी लेकर आई हुई थी। मैंने उन्हें निकाला और पहन कर जाने को तैयार हो गई।

मैंने सर से वहीं पर अपना वीडियो डिलीट करवाया और वहां से अपने घर आ गई।

घर आते ही मैं तुरंत बाथरूम में घुसी और अपनी चूत को अच्छे से धोया। धोने के बाद देखा कि मेरी चूत की हालत बुरी तरह से खराब हो गई थी।
पूरी चूत खुल गई थी और ऐसे लग रहा था जैसे कोई चूहे का बिल हो।

मैं ऐसे ही नंगी जाकर अपने बिस्तर पर चूत पसार कर लेट गई और कब आंख लग गई मुझे पता नहीं चला।

उसके 2 महीने बाद मेरे एग्जाम हो गए और मैंने अपना स्कूल बदल दिया।

क्योंकि मुझे पता था कि अगर मैं इस स्कूल में और रही तो जल्दी ही मेरे वीडियोज़ लोगों के फोन में आ जाएंगे।

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एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिया है, और मैं ग्वालियर की रहने वाली हूँ। शुरुआत से ही मेरी जिंदगी में कुछ भी अच्छा नही चल रहा था। मैं काफी परेशान रहने लगी थी। शादी के बाद तो मेरी जिंदगी और भी बर्बाद हो चुकी थी, लेकिन फिर मेरी जिंदगी में मेरी मुलाकात एक ऐसे इंसान के साथ हुई जिसने मेरी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया था। आज मैं आपको अपनी जिंदगी के कुछ बुरे लम्हों के साथ ही आपको अपनी सच्ची सेक्स स्टोरी भी सुनाने जा रही हूं, तो आप इसे जरा ध्यान से सुनियेगा।

मेरा जन्म ग्वालियर के एक गरीब परिवार में हुआ था। मैं भले ही गरीब थी, लेकिन मेरे घर वालों ने मुझे किसी शहजादी की तरह पाला ओर बड़ा किया था। मैं स्कूल के समय से ही काफी खूबसूरत लड़की थी। मेरा रंग गोरा ओर साफ था और मेरे शरीर की बनावट को देख कर तो लोगों का दिमाग ही खराब हो जाया करता था। जो भी मुझे एक बार देख लेता था, तो बस देखता ही रह जाया करता था। मुझे लड़कों के साथ बिल्कुल भी रहने नही दिया जाता था। मुझे काफी संस्कारों से पाला गया था, इसलिए में पूरी तरह से एक संस्कारी लड़की थी। स्कूल खत्म हो जाने के बाद अब मुझे कॉलेज में प्रवेश लेना था। उस समय मेरा शरीर और भी ज्यादा उभर गया था। मेरी पूरी जवानी बाहर निकलती हुई दिखाई पड़ती थी। मेरे घर वाले गरीब थे, ओर हर गरीब परिवार की तरह मेरे परिवार वाले भी बदनामी होने से काफी डरते भी थे। यही वजह थी कि मुझे कॉलेज जाने से पूरी तरह से मना कर दिया गया था। लेकिन कॉलेज जाने का मेरा काफी मन था, इसलिए काफी जिद करने के बाद आखिरकार, मेरे घर वाले मुझे कॉलेज भेजने के लिए मान गए थे। कॉलेज में सभी लड़के मुझे काफी गंदी निगाहों से देखते थे। वे सभी मुझे ऐसे घूरा करते थे, जैसे मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी हूँ। कॉलेज में एक लड़का मेरे काफी पीछे पड़ा हुआ था। जब मैने उसकी हरकतों के बारे में घर पर बताया तो उल्टा घर वालों ने मुझे ही चिल्ला कर मेरा जाना बंद करवा दिया था।

मैं बड़ी हो चुकी थी, इसलिए परिवार का मेरे प्रति दबाव बढ़ता ही जा रहा था। हम गरीब परिवार के थे, इसलिए हमारे परिवार के कुछ लोग मेरी शादी के लिए भी हमारे परिवार पर दबाव बनाए जा रहे थे। काफी समय से हमारे परिवार पर कर्जा भी बढ़ता ही जा रहा था। परिवार पर कर्जा हो जाने के कारण मैं भी काफी परेशान रहने लग गयी थी। कुछ दिन बाद ही हमारे घर में एक अमीर परिवार का रिश्ता आया था। रिश्ता लेकर आये लड़के के माँ बाप को मैं काफी पसंद आ गयी थी। लेकिन मुझे वह लड़का बिल्कुल भी पसंद नही आया था। कुछ दिन मेने लड़के से अकेले में मिल कर बातचीत की जिससे कि हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से जान सकें। वो लड़का मेरे शरीर को बहुत ही गंदी निगाहों से देखता था, ओर उसके इरादें भी मुझे बिल्कुल भी अच्छे नही लग रहे थे। वो मुझे किसी भी तरह हासिल करना चाहता था, इसलिए वो मेरे परिवार को पैसे का दिखावा किये जा रहा था। मेरे परिवार को खुश करने के लिए उसने हमारे कर्जे को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया था।

मुझे उस लड़के के इरादे बिल्कुल भी अच्छे नही लग रहे थे, ओर मैं उस लड़के से शादी करने के लिए परिवार को मना करना चाहती थी। लेकिन मैंं परिवार के बोझ के तले काफी ज्यादा दब चुकी थी। यही वजह थी कि मैने उस लड़के से शादी करने के लिए परिवार को हाँ कह दी थी। कुछ दिन बाद ही हमारी शादी हो चुकी थी। शादी के कुछ दिन बाद ही हम हनीमून के लिए नेपाल गए हुए थे। नेपाल के बहाने उस लड़के को मेरे शरीर के साथ खेलने का मौका मिल गया था, जो वो इतने समय से मेरे साथ करना चाहता था। हनीमून के पहले दिन ही जब हम दोनों थक कर रात को सो रहे थे। तभी उस लड़के यानी की मेरे पति ने मुझे कमर पर हाथ फेरना शरू कर दिया था। मैं जैसे ही उसकी तरफ पलट के सोई उसने मुझे देख कर किस करना शुरू कर दिया था। उसने दारू पी रखी हुई थी और वह काफी नशे में भी था। इसलिए वह मेरी इजाज़त नही होने के बाद भी मेरे शरीर को चूमता ही जा रहा था।

कुछ ही देर में उसने मेरे ब्लाउज को भी खोल दिया था। वह मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को चूमता जा रहा था। यह सब मेरी मर्जी के बिना हो रहा था। लेकिन फिर भी मेरे शरीर की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, जो कि मेरे चेहरे से साफ झलक रही थी। कुछ देर बाद उसने मेरी ब्रा को उतार कर मेरे बूब्स को भी आजाद कर दिया था। वह बिल्कुल बेरहमी से मेरे बूब्स को चूमता ही जा रहा था। वो जोर-जोर से मेरे बूब्स को मसले जा रहा था, जिससे मेरी सांस बहुत गहरी ओर तेज होती जा रही थी। मेरी साँसों की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। कुछ देर बाद उसने मुझे चूमते हुए मेरे पेटीकोट ओर पेंटी को भी उतार दिया था। अब वह मेरे पेट को चूमते हुए मेरी योनि को चाटते जा रहा था। इस सब से मैं काफी ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी। करीब ऐसे ही 20 मिनट तक वह मेरी चुत को अपने जीभ से चाटता रहा और फिर वह अपनी उंगली से मेरी चुत में तेजी से उंगली करने लग गया था। मेरी आँखों मे से आंसू निकल रहे थे, क्योंकि मैं समझ चुकी थी की उसने मुझसे मेरी खूबसूरती की वजह से शादी की थी।

कुछ देर बाद ही उसने अपने कड़क लंड को बाहर निकाल दिया था। अब शादी हो चुकी थी, इसलिए मैं कुछ कह भी नही सकती थी। कुछ ही देर मैं उसने मेरे योनि की दिवार पर अपना लंड रख दिया था। इसके बाद उसने एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था। इस कार्यवाही से मेरी तेज चीख निकल गयी थी, ओर मुझे रोना ही आ गया था। लेकिन वो मुझे काफी बेरहमी से चोदता ही जा रहा था। वह मेरी मर्जी के बिना मुझे अलग अलग पोजिशन में चोदे जा रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी जबरदस्त चुदाई की मुझे उस दिन मेरी सभी भूल याद आ रही थी। वो काफी नशे में था और मुझे बहुत ही बुरी तरह से चोदता ही जा रहा था। मेरी चीख पूरे होटल में गूंज रही थी। कुछ 2 घंटे के ब्रेक में उसने मेरे साथ रात भर करीब दो बार चुदाई की थी। जिसके बाद उसने अपने गर्म वीर्य मेरी चुत में ही छोड़ दिया था। हनीमून मनाने के बाद हम अब घर लौट चुके थे। शादी के बाद ही धीरे-धीरे उस लड़के ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए थे। वो अक्सर शराब पीकर घर आया करता था, ओर मेरे साथ गाली गलौच किया करता था। अगर मैं गलती से किसी पडौसी के साथ बात भी कर लेती थी, तो वह मेरे साथ मारपीट करने लग जाया करता था। मैं अपने परिवार को कभी परेशान नही करना चाहती थी, इसलिए मैंने कभी इस बारे में अपने परिवार वालों को नही बताया था।

मेरी जिंदगी पूरी तरह से बरबाद हो चुकी थी। मैं बस अपने पति के लिए चुदाई की एक मशीन ही बनकर रह गयी थी। मेरे पति रोज शराब पीकर आते थे, ओर बस मुझे चौदने के लिए ही मेरे साथ रहते थे, वरना वे कुछ दिनों तक बाहर ही रहा करते थे। ऐसा करीब 2 साल तक चलता रहा और अब तक हमारा एक छोटा बच्चा भी हो गया था। एक दिन मेरी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने मेरी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया था। एक दिन हमारे पड़ोस में ही राजीव नाम के एक सज्जन व्यक्ति अपने काम के सिलसिले में रहने के लिए आये हुए थे। पेशे से वे एक राइटर थे। अपनी मीठी बातों से उन्होंने पूरे मौहल्ले में कुछ ही दिनों में अपनी पहचान बना ली थी। मैं अक्सर जब कपड़े सुखाने के लिए अपनी छत पर जाया करती थी, ठीक उसी समय राजीव भी उनकी छत पर किताबें पड़ा कड़ते थे। उनकी छत हमारी छत से काफी करीब थी। कुछ दिन बाद मेने देखा कि जब भी मैं कपड़े सुखाने के लिए छत पर आती थी, तो राजीव मुझे चुपके से देखा करते थे। वैसे तो मुझे भी राजीव अच्छे लगते थे, लेकिन शादी शुदा होने के कारण मैं उन पर ज्यादा ध्यान नही दिया करती थी।

ऐसे ही कुछ दिनों बाद मेरी भी राजीव को देखने की आदत लग गयी थी। पहले तो हम मुस्कुरा कर एक दूसरे को देखा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे राजीव ओर मैं एक दूसरे से छत पर ही बातें भी करने लग गए थे। राजीव काफी अच्छे इंसान थे, उन्होंने मेरे बारे में सबकुछ जाने के बाद मुझे काफी समझाया ओर सहानुभूति भी दी। कुछ दिन तक हम फ़ोन पर एक दूसरे से बातें करने लगे और फिर कुछ ही दिनों में हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया था। उस दिन के बाद स मेरी दुःख से भरी हुई जिंदगी तुरंत ही सुख में बदल गयी थी। मेरे पति जब बाहर रहते थे, तब मैं रोजाना राजीव के साथ फ़िल्म देखने और बाहर घूमने चले जाया करती थी। राजीव के साथ मेरी जिंदगी बिल्कुल वैसी ही चल रही थी, जैसा कि मैं हमेशा से चाहती थी। अब जाकर मैं बिल्कुल खुश थी। जब कुछ दिनों के लिए मेरे पति कही बाहर गए हुए थे, तभी एक दिन मेने राजीव को अपने घर पर रात रुकने के लिए बुला लिया था। राजीव उस दिन अपने साथ वोदका की एक बड़ी बोतल लाया हुआ था। उस दिन हमने रात में काफी ज्यादा नशे कर लिए थे।

नशे करने के बाद हमने एक दूसरे के साथ काफी बातें की ओर फिर मेने अपने बच्चे को सुला देने के बाद में राजीव के साथ एक रूम में चली गयी थी। रूम के अंदर पहले राजीव ने मुझे कुछ देर तक मुस्कुराते हुए देखा और फिर बातें करते हुए उन्होंने मुझे होंठों पर चूमना शुरू कर दिया था। पहली बार मुझे किसी का इस तरह से चूमना काफी अच्छा लग रहा था। अब मैं पहली बार किसी के साथ खुशी से ओर अपनी मर्जी से संभोग सुख का आनंद लेने वाली थी। राजीव के चूमने के बाद मेने भी उसकी जांगों पर हाथ फेरतें हुए उसे चूमना शुरू कर दिया था। राजीव मेरे पल्लू को गिराते हुए मुझे गले, गाल ओर बूब्स के ऊपरी हिस्से पर चूमते ही जा रहे थे। उन्होंने कुछ ही देर में मेरी उत्तेजना को पूरी तरह से जगा दिया था। मेने बिना इंतजार करते हुए राजीव की शर्ट को उतार कर उसे ऊपर से नँगा कर दिया था। उसका शरीर काफी दमदार था। उसकी कमर ओर छाती पर हाथ फेरतें हुए मैं उसके दमदार शरीर को अच्छे से महसूस कर सकती थी। इस दौरान राजीव मुझे प्यार से मुझे चूमते हुए उत्तेजित ही करते जा रहे थे।

राजीव ने कुछ ही देर में मेरे ब्लाउज ओर ब्रा को उतार के मेरे बूब्स को आजाद कर दिया था। मेरे लटकते हुए बड़े और टाइड बूब्स मेरी खूबसूरती को ओर भी ज्यादा बड़ा रहे थे। मुझे देख कर राजीव की पेंट में भी एक बड़ा तम्बू तन चुका था। मैं राजीव की पेंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ कर सहला रही थी। इस दौरान राजीव मेरे बूब्स को दबा रहा था और उसे चूमता ही जा रहा था। मुझे काफी मजा आ रहा था। कुछ देर बाद राजीव ने मुझे पूरी तरह से नँगा कर दिया था। राजीव मुझे चौदने के लिए पूरी तरह से तैयार था। राजीव का लंड काफी मोटा ओर कड़क था। उसने मेरी चुत में एक ही झटके में अपना लण्ड उतार दिया था। मुझे पहले तो हल्का सा दर्द हुआ और फिर में भी “आह आह ओह ओर जोर से” बोलते हुए मजे से राजीव से चुदने लग गयी थी। कुछ देर तक राजीव ने मुझे अलग-अलग पोजिशन में चुदाई की ओर फिर मैं राजीव को उपर बैठकर उपर नीचे होकर मजे से चुदने लगी। इस दौरान ही मेने राजीव का लण्ड भी पूरी तरह से अपने मुंह मे उतार लिया था। उसका लंड काफी लाजवाब था। कुछ देर बाद ही राजीव मेरे मुंह मे ही अपने वीर्य को ढोलकर झड़ गया था। उस दिन के बाद से जब भी मेरे पति कुछ दिनों के लिए बाहर जाते थे, तो राघव ओर मैं जमकर चुदाई किया करते थे। कुछ दिनों बाद मेने अपने पति को तलाक दे दिया था और फिर मैं अपने बच्चे के साथ हमेशा के लिए राजीव के साथ ही रहने लगे गयी थी। राजीव काफी अच्छे इंसान है मैं आज भी उनके साथ अच्छा महसूस करती हूं।

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मैंने अपनी चूत चटवाई

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम साक्षी है.. मेरी उम्र 26 साल है और में शादीशुदा हूँ. मेरे पति का नाम अजय है और वो एक प्राईवेट कम्पनी में प्रॉजेक्ट मैंनेजर है. में और मेरे पति अजय एकदम खुले विचारों के है और उन्हें मुझे बहुत ही सेक्सी ड्रेस में देखना और दिखाना बहुत पसंद करता है. हमारे शादी के तीन साल हो गये और हमारी सेक्स लाईफ बहुत ही अच्छी है. हम एक दिन में तीन, चार बार सेक्स करते है.. लेकिन में तो बताना ही भूल गयी थी कि मेरे फिगर का साईज 34-30-34 है और में हर टाईम बहुत ही सेक्सी कपड़े पहनती हूँ और मुझे अपना शरीर सभी लोगो को दिखाना बहुत अच्छा लगता है.

दोस्तों यह उस समय की बात है.. जब अजय कम्पनी के किसी जरूरी काम के सिलसिले में 40 दिन के लिए दुबई गये हुए थे और में उन दिनों घर पर बहुत ही अकेली हो गयी थी और में सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी.. मेरी चूत में जैसे आग सी लगी हुई थी. मुझे अब कैसे भी अपनी चूत की आग ठंडी करनी थी. तो रोज रात को अजय से मेरा नेट पर चेट होता था और हम दोनों नंगे पूरे होकर चेट करते थे.. लेकिन चेट करने से भी मुझे सन्तुष्टि नहीं थी और मेरी चूत दिनों दिन और बेकाबू होती जा रही थी. में सेक्स के लिए पूरी तरह से पागल हो चुकी थी और अपनी चूत में उगलियाँ करके चूत का सारा पानी निकालकर दिन गुजर रही थी.

फिर उस टाईम हमारे पड़ोस में एक फेमिली रहने के लिए आई.. उस फेमिली में पति, पत्नी और उनका एक 20 सक का लड़का था. फिर धीरे धीरे मुझे मालूम पड़ा कि उनका जो लड़का है उसका थोड़ा दिमाग़ ठीक नहीं है और उसका शरीर तो 20 साल का है.. लेकिन उसका दिमाग़ 10 साल के लड़के जैसा है और वो लोग इस बात से बहुत परेशान रहते थे. तो कुछ दिनों में मेरी उनसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी और वो जो औरत थी वो बहुत ही अच्छी थी. फिर में अपने रोज के पहनावे की तरह उसके सामने भी छोटे छोटे कपड़े पहनती थी और उनको कोई प्राब्लम नहीं थी. हमारी दोस्ती बहुत ही अच्छी हो गयी और फिर एक दिन अचानक ही वो औरत मेरे पास आई और मुझसे बोली कि उनको भी एक अच्छी नौकरी मिल गयी है और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है.. क्योंकि मैंने ही उस औरत को नौकरी करने की सलाह दी थी और फिर वो कहने लगी कि अब तुम्हे मेरा एक और काम करना पड़ेगा.. क्या तुम मेरे लड़के को सम्भाल सकती हो? तो मैंने थोड़ी देर सोचा और में भी राज़ी हो गयी.

तो एक हफ्ते के बाद उसने नौकरी पर जाना शुरू कर दिया और वो अपने पागल लड़के को मेरा पास देखभाल करने के लिए छोड़ गयी. एक दो दिन में मुझसे उस लड़के की दोस्ती होने लगी.. लेकिन वो वैसे बिल्कुल ही पागल था. में उसके सामने भी हर रोज की तरह सेक्सी कपड़े पहनती थी. तो एक दिन अचानक वो मुझे बोला कि आंटी आप मम्मी जैसी क्यों नहीं रहती? तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी मम्मी कैसे रहती है क्या पहनती है?

विशाल : ( उसका नाम विशाल था ) मेरी मम्मी घर में हमेशा गाऊन पहनती है.. लेकिन आप तो बच्ची जैसी छोटी स्कर्ट पहनती हो.

में : हाँ में इसलिए यह सभी पहनती हूँ.. क्योंकि अभी गर्मी का टाईम है और मुझे बहुत गर्मी लगती है.. इसी वजह से में छोटी छोटी कपड़े पहनती हूँ.. क्यों तुम्हे यह सभी कपड़े अच्छे नहीं लगते?

विशाल : नहीं मुझे बहुत अच्छा लगता है और आप इन सभी कपड़ो में बहुत सुंदर लगती हो.

फिर ऐसे ही कुछ दिन बीत गये में देख रही थी कि वो मुझे बहुत घूरता था और में भी उसे उतना ही चाहने करने लगी थी. एक दिन उसकी मम्मी हर दिन की तरह उसको मेरे पास छोड़कर ऑफिस चली गयी तो वो रोने लगा. में उसके पास जाकर उसका सर अपने सीने पर लेकर सहलाने लगी और उससे पूछने लगी कि तुम क्यों रो रहे हो?

विशाल : मम्मी मुझे प्यार नहीं करती है.. वो सिर्फ़ पापा को प्यार करती है.

में : तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?

विशाल : क्योंकि मैंने कल रात को देखा कि मम्मी, पापा को बहुत प्यार कर रही थी.

में : लेकिन वो कैसे?

विशाल : पापा ने मम्मी को बहुत देर तक चूम रही थी और उसके बाद मम्मी के सारे कपड़े उतार दिए और मम्मी ने पापा को अपना दूध पिलाया.. लेकिन सुबह जब मैंने मम्मी से कहा कि मुझे भी प्यार करो और मुझे भी अपना दूध पिलाओ तो उसने मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारा और मुझे दूध भी नहीं पिलाया.

तो में समझ गयी कि वो अभी भी बिल्कुल बच्चा ही है और बिल्कुल पागल है और उसको दूध भी पीना है और में भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और फिर मैंने भी सोच लिया कि उसको में अपनी जरूरत बनाऊंगी और सेक्स का मज़ा लूँगी.

में : कोई बात नहीं.. में तुम्हे बहुत प्यार करूंगी और दूध भी पिलाऊंगी.

तो मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके बाल सहलाने लगी उसके मुहं मेरे बूब्स पर दब रहे थे. मुझे जोश चड़ रहा था और वो एकदम चुपचाप मेरे बूब्स के ऊपर सर रखकर लेटा था.. में उसको चूमने लगी तो उसने पूछा कि आंटी यह क्या कर रहे हो?

में : क्यों तुमको प्यार कर रही हूँ.. क्या तुम को अच्छा नहीं लगा?

विशाल : हाँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मुझे और प्यार करो.

तो में उसको और चूमने लगी और मैंने धीरे से उसके लंड को छू दिया.. उसका लंड बहुत बड़ा था.

विशाल : आंटी आज में नहाया नहीं हूँ.. क्या आप मुझे नहला दोगे?

फिर में भी यह मौका छोड़ना नहीं चाहती थी.. क्योंकि में भी यह चाहती थी कि और फिर मैंने बोला कि ठीक है चलो आज में तुम्हे नहलाती हूँ.

में : तुम बाथरूम में जाओ में चेंज करके आती हूँ.

तो वो बाथरूम में चली गई और मैंने अपनी ड्रेस उतार कर एक टावल लपेट लिया और बाथरूम में गयी. फिर जब में बाथरूम में घुसी तो देखी कि वो सिर्फ़ अंडरवियर में खड़ा था. मैंने उसको पानी से भिगोया और साबुन लगाकर मसलने लगी. तभी अचानक उसने मुझसे पूछा कि तुम टावल में क्यों हो?

में : अगर में तुम्हे कपड़े पहनकर नहलाऊँगी तो मेरे भी कपड़े गीली हो जाएगे.

विशाल : तो तुम भी मम्मी कि तरह ब्रा और पेंटी पहन लो.

में : क्या तुम्हारी माँ तुम को ब्रा और पेंटी पहन कर नहलाती है?

विशाल : हाँ और कभी कभी तो वो ब्रा भी नहीं पहनती.

मुझे सेक्स चड़ने लगा और में बोली कि ठीक है.. तुम थोड़ा और रूको में दोबारा से चेंज करके आती हूँ. तो मेरी निप्पल टाईट होने लगी और मैंने बाहर आकर एक सफेद कलर की ब्रा और पेंटी पहन ली और फिर से बाथरूम में चली गयी. वो अब भी वैसे ही खड़ा था तो में उसको साबुन लगाने लगी और चिपकने लगी.. मेरा और उसका बदन एक दूसरे से घिसने लगे में पूरी गीली हो चुकी थी.. मेरी ब्रा और पेंटी पारदर्शी हो चुके थे. तभी उसने अचानक से अपनी अंडरवियर को उतार दिया और कहने लगा कि थोड़ा इसको भी साबुन लगा दो.

में : क्या मम्मी तुम्हारे साथ ऐसा भी करती है?

विशाल : हाँ मम्मी मेरे पूरे बदन को साबुन लगाकर अच्छे से साफ करती है.

तो में भी उसकी गांड और लंड में साबुन लगाकर रगड़ने लगी और फिर थोड़ी ही देर में उसका लंड खड़ा होने लगा.

में : तुम यह क्या हो रहा है?

विशाल : मालूम नहीं आंटी.. लेकिन ऐसा तो रोज होता है.. आप भी नहा लो फिर एक साथ बाहर जाएँगे.

तो में भी नहाने लगी और जितना सेक्सी पोज़ हो सकता है देने लगी और बोली कि तुम भी मुझे साबुन लगा दो. फिर उसने साबुन लिया और मेरे सारे बदन को लगाने लगा.. मेरे बूब्स के ऊपर, मेरी गांड में साबुन लगाया और बोला कि आंटी तुम्हारे दूध कितनी अच्छे है.. में तो इनको देखकर पागल हो रहा हूँ फिर उसने मेरे पेंटी के अंदर हाथ डाला और बोला कि आंटी तुम्हारे पास तो मेरे जैसा नहीं है.

में : नहीं बेटा.. लडकियों को वैसा नहीं होता.. विशाल अब तुम बाहर जाओ में अभी आती हूँ. तो वो बाहर चला गया और में नहाकर टावल लपेटकर बाहर आई और मैंने बेडरूम में आकर देखा तो वो अभी भी नंगा बैठा था.

विशाल : आंटी में क्या पहनूं? मेरी तो अंडरवियर पूरी गीली हो गई है.

में : कोई बात नहीं.. तुम ऐसे ही रहो.. में तुम्हे कुछ पहनने के लिए देती हूँ.

तो उसके बाद मैंने उसको मेरी एक मिनी स्कर्ट दी और बोली कि तुम इसको पहन लो. तो उसने वो मिनी स्कर्ट पहन ली और में भी चेंज करने लगी मैंने एक लाल कलर की ब्रा और पेंटी पहनी और ऊपर एक पारदर्शी गाऊन पहना वो गाऊन बहुत ही छोटा था और उससे सिर्फ मेरी गांड ढक रही थी.. तब तक मैंने मन बना लिया था कि कैसे भी मुझे उससे चुदवाना है. उसका लंड बहुत बड़ा था और मोटा भी था. फिर हम दोनों ने एक साथ लंच किया और बेड पर सोने के लिए गये. उसने मेरी स्कर्ट पहनी था और उसका लंड साफ साफ दिख रहा था. फिर मैंने अपना गाऊन उतार दिया और सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में बिस्तर पर लेट गयी और उसको बोली कि आओ आज में तुम्हे प्यार करती हूँ.. वो मेरे पास आ गया और में उसको बहुत चूमने लगी और उसका लंड सहलाने लगी.

विशाल : क्या आंटी मुझे दूध पिलाओगे?

में : क्यों नहीं बेटा आओ अभी पिलाती हूँ?

में कुछ करने से पहले ही उसने मेरी चूची को दबाया और ब्रा से बाहर कर दिया. फिर चूची से खेलने लगा. में पागल हो रही थी और मैंने अपनी ब्रा उतार दी.. अब में सिर्फ़ पेंटी मे थी.

फिर वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. में भी पागलों की तरह उसके लंड को ऊपर नीचे करने लगी. तो थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गया और में पूरी गीली हो चुकी थी.

विशाल : आंटी यह क्या हो रहा है?

में : कुछ नहीं बेटा ज़्यादा प्यार करने से ऐसा ही होता है.

विशाल : ठीक है आंटी. फिर से वो मेरे बूब्स को चूसने लगा और दबाने लगा.

में : विशाल आओ में तुम्हे और प्यार करना सिखाती हूँ.

विशाल : ठीक है आंटी.

फिर मैंने विशाल को पूरा नंगा कर दिया और अपनी भी पेंटी उतार दी.

विशाल : आंटी आप बिल्कुल मम्मी जैसी लग रही हो.. मम्मी भी ऐसे ही पापा को प्यार करती है.

में : हाँ में जानती हूँ.. अब से रोज हम दोनों ऐसे ही रहेंगे और बहुत प्यार करेंगे.

विशाल : ठीक है आंटी अब में क्या करूँ?

में : तुमने आज मेरा बहुत दूध पी लिया.. अब तुम अपना मुहं मेरी चूत में ले जाओ और चूत का रस पियो.

विशाल : ठीक है आंटी.

तो विशाल मेरी चूत चाटने लगा और में पागल हो रही थी मैंने एक बार पानी भी छोड़ दिया था.

में : आओ विशाल अब हम एक दूसरे को प्यार करें.

विशाल : आंटी वो कैसे?

में : तुम मेरी चूत का रस पियो और में तुम्हारे लंड का रस पीती हूँ.

विशाल : आंटी ठीक है.

हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गये और एक दूसरे को बहुत चूसने लगे.. वो मेरी चूत में अपनी जीभ घुसा घुसाकर जोर जोर से चूसने लगा और कहने लगा कि आंटी आपके छेद से नमकीन नमकीन पानी निकल रहा है तो में कहने लगी कि विशाल चूसो और जोर से चूसो यह पानी तुम्हारे लिए ही है तो वो और जोर से चूसने लगा और अपनी ऊँगली चूत में डालकर उँगलियाँ चाटने लगा. फिर करीब आधे घंटे के बाद हम दोनों एक एक करके झड़ गये. उसको बहुत मज़ा आ रहा था और फिर मैंने भी उसका लंड करीब बीस मिनट तक चूसा और बहुत मजे किए और हम एक दूसरे को बाहों में लेकर नंगे ही सो गये.. लेकिन बीच में जब भी उसकी नींद खुली तो वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर चूसने लगा.. बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह और इसके बाद से रोज सुबह उसके आते ही हम दोनों नंगे हो जाते थे और साथ में सेक्स गेम खेलते थे. एक दिन मैंने उसको बोला कि आज तुम मुझे वैसे ही प्यार करोगे जैसे तुम्हारे पापा तुम्हारी मम्मी को प्यार करते है.

विशाल : वो कैसे?

में : बताती हूँ

फिर मैंने उसके लंड को चूस चूसकर खड़ा कर दिया और बोली कि अब तुम इसको मेरी चूत के अंदर डाल दो और अंदर बाहर करो और वो इसको नया खेल समझ कर जोश के साथ तैयार हो गया और मुझे चोदने लगा. उसका लंड बहुत ज़्यादा बड़ा था और उसने मुझे करीब 25 मिनट तक चोदा और फिर झड़ गया. तो मुझे बहुत आनंद मिलने लगा था और में उससे अलग अलग पोज़ में चुदवाती रही और वो इसको प्यार का गेम समझकर खेलता रहा. तब से हम दोनों घर में हमेशा ही नंगे रहने लगे और मेरे पति आने तक हम लोग रोज 5-6 बार सेक्स करते रहे. अब वो मेरी जरूरत बन चुका था और उसको में जैसे चाहे इस्तमाल करती थी. हम हर जगह पर और अलग अलग तरीके से कभी रसोई में, कभी बाथरूम में, कभी सोफे पर, कभी बालकनी में भी सेक्स किया और यह करीब एक महीने तक चला. वो मेरे लिए इतना पागल था कि जब भी उसका लंड खड़ा होता था वो मुझे चोद देता था.

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आह चोद दे साले कमीने

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू श्रीवास्तव है और मैं एक हाउसवाइफ हूँ. मेरी उम्र 34 साल है. मेरी साइज़ 36-32-38 की है. मेरा बदन पूरा भरा हुआ है. मेरे घर में मैं और मेरे नामर्द पति और मेरे दो बच्चे रहते हैं. मेरे पति एक प्राइवेट जॉब करते हैं. वो मुझे बिस्तर में खुश नहीं कर पाते हैं.

एक दिन की बात मेरे पति ऑफिस गए थे और मैं नहा कर कपड़े ही पहन रही थी कि इतने में एक सब्जी वाला बाहर मेरे दरवाजे पर आवाज़ दे रहा था.
“मैडम सब्जी ले लो … हरी ताज़ी सब्जी है.”

मैंने साड़ी पहन कर बाहर जाकर देखा तो एक बड़ा मस्त मर्द सब्जी बेच रहा था. इसे मैंने पहले कभी अपने एरिया में नहीं देखा था. शायद नया सब्जी वाला था.

मैंने इधर-उधर देख कर उसको अपने पास बुलाया.
वो करीब आया तो मैंने पूछा- भैया आपकी उसका क्या रेट है?

मेरी इस दो अर्थी बात सुनकर वो मुझे ध्यान से देखने लगा. वो मैडम से सीधे भाभी पर आया और बोला- भाभी जी, आपके लिए तो सब रेट कम ही हैं.. आप तो बस बोलो कि क्या लोगी.
मैंने इठलाते हुए अपने चूचे हिलाए और बोला कहा- बड़े बड़े से वो दे दो.
वो बोला- क्या दे दूँ बड़े बड़े से?
मैंने- आलू दे दो … दो किलो.

उसने भी अपनी लुंगी में अपना लंड जरा सा सहलाया और मेरी तरफ देखता हुआ बोला- कैसे लोगी भाभी जी?
मैंने मन ने सोचा कि कह दूँ कि जैसे तुम देना चाहो.
फिर मैंने पूछा- कैसे लोगी से … तुम्हारा क्या मतलब है भैया?
वो बोला- मतलब कुछ डलिया वगैरह में लोगी.. या मैं थैली में दे दूँ?
मैंने कहा- थैली में ही दे दो.

उसने आलू तौल दिए, मैंने उससे आलू ले लिए. उससे आलू लेते वक्त मैं जरा झुक गई, जिससे उसको मेरे गहरे गले वाले ब्लाउज में से मेरी मस्त चूचियों की भरपूर झलक दिख गई. मेरी निगाह उसकी लुंगी पर थी, उसकी लुंगी ने उठना शुरू कर दिया था.
फिर मैंने उसको ध्यान से देखा. वो एक 40 साल का हट्टा-कट्टा पहलवान टाइप का मर्द दिख रहा था.

उससे सब्जी लेकर मैं घर के अन्दर जाने लगी, तो वो मुझसे बोला- भाभी जी पैसे?
मैंने कहा- भैया अभी अन्दर से लाकर देती हूँ.
वो बोला- ठीक है.
मैं अन्दर जाने लगी, तभी मैंने पलट कर देखा, वो मेरे पिछवाड़े को बड़ी मस्त निगाहों से देख रहा था.
मैं मन ही मन मुस्कुरा दी और अपनी गांड हिलाते हुए अन्दर चली गई.

जब मैं वापस आई, तो मैंने देखा कि उसकी कामुक नज़र मेरे गदराए हुए जिस्म पर टिकी थीं और वो मेरे मम्मों को बड़ी ध्यान से देख रहा था.

मैंने उसको पैसे दिये और अन्दर जाने के लिए मुड़ी तो उसी समय न जाने कैसे मेरे पैर में मोच आ गई और मैं वहीं गिर पड़ी. मुझे गिरता देख कर वो सब्जी वाला मुझे उठाने लगा. मैंने उसको मना किया, लेकिन वो नहीं माना. वो मुझे उठा कर घर के अन्दर ले आया. जब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया हुआ था, उस वक़्त मैंने महसूस किया था कि उसका फौलादी लंड मेरी गांड के ऊपरी हिस्से में मतलब मेरी कमर को टच कर रहा है. उसने मुझे कसके पकड़ा हुआ था.

वो मुझे बेड के नजदीक लाया और मुझे बड़े हौले से बेड पर लिटा दिया. फिर वो मुझसे बोला- भाभी जी … मूव किधर रखी है, बता दीजिए … मैं आपके पैर में मूव लगा देता हूँ.
मैंने उससे बोला- तुम रहने दो … तुम बाहर चले जाओ, तुम्हारा ठेला बाहर खड़ा है … मैं अपने आप मूव लगा लूँगी.
वो बोला- नहीं … आपको दर्द है … मैं आपको इस हालत में ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकता … मेरे ठेले की चिंता आप न करें.

मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो खुद से सामने की टेबल पर रखी मूव उठा लाया और मेरी साड़ी को थोड़ा ऊपर करके पैर में मूव लगाने लगा.

उसके हाथों में बड़ी नफासत थी … मुझे थोड़ा अच्छा लगने लगा. उसके हाथों से थोड़ी ही देर में मुझे आराम मिल गया और मैं पैर फैला कर लेट गई. वो अब और भी अच्छे से मेरे पैर की मालिश करने लगा.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि वो साड़ी को कुछ और ऊपर कर रहा था. अब वो अपना हाथ मेरी जांघों तक ले जा रहा. मैं आंखें खोल कर उठ कर बैठ गई.

पहले तो मैंने सोचा कि शायद ये मालिश से भी कुछ आगे बढ़ेगा, तो हो सकता है कि आज मुझे शान्ति मिल जाए.

मैं उसकी मर्दाना छाती देख कर बड़ी चुदासी हुई जा रही थी. साथ ही मेरा दिमाग काम करने लगा था कि कैसे भी करके इसे फंसाना ही है. ये मुझे मस्त चोद सकता है. मैं मन ही मन खुश हो रही थी कि अगर आज ये सैट हो गया तो इसके लंड की चुदाई से मेरी चुत की आग शांत हो जाएगी जो आज तक मेरे पति नहीं कर पाए थे.

मैंने उससे कहा- यह क्या कर रहे हो तुम?
वो बोला- भाभी जी … मैं मालिश कर रहा हूँ.
मैं बोली- मोच तो नीचे वाले हिस्से में आई थी, तो तुम ऊपर क्यों मालिश कर रहे हो?
वो बोला- अरे मोच को मालिश करने के बाद पूरे पैर को अच्छे से मालिश करना पड़ता है … नहीं तो दर्द नहीं जाएगा.
मैं बोली- तुम रहने दो … अब जाओ. मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही मुझे सहला रहे हो.
वो बोला- नहीं भाभी जी, मैं आपकी मालिश कर रहा हूँ.

मैंने उसे उकसाया- कहीं तुम मुझे अकेली पाकर मेरे साथ गलत काम तो नहीं कर दोगे.
ये कहते हुए मैंने उठने की कोशिश की और अपना पल्लू ढलक जाने दिया. मेरे गहरे गले के ब्लाउज से उसको मेरी अधनंगी चूचियां गर्म करने लगी थीं. मैं देख रही थी कि उसका लंड फूलने लगा था.

वो मेरी चूचियों की तरफ देख कर बोला- अगर आप मुझसे कुछ गलत काम करने के लिए कहेंगी, तो मैं जरूर कर दूंगा. वैसे आप अपनी गेंदें दिखा कर मुझे भड़का रही हैं.
मैंने पूछा- गेंदें मतलब?
वो लंड सहला कर मुझसे बोला- भाभी जी गेंदें नहीं समझती हो. मैं आपके दूधों की बात कर रहा हूँ.

यह कहते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे सीने से लगा कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया. साथ ही मेरी साड़ी भी खींच दी थी. हालांकि मेरी साड़ी अब भी मेरे बदन से लिपटी हुई थी. मैं समझ गई कि लंड काबू में आ गया है. अब मैंने नाटक करना शुरू किया.

“ये क्या कर रहे हो तुम … इधर से चले जाओ तुम!”
वो- एक तो तेरे लिए इतनी मेहनत की और बिना कुछ दिए बोल रही हो कि अब जाओ.
मैं घबरा कर बोली- ये तुम क्या बोल रहे हो … तुम तुम्हारा दिमाग़ खराब है क्या?
वो बोला- हां तुझे देख कर मेरा दिमाग़ और हालत दोनों खराब हो गए हैं. अब तुझे पहले जी भर कर चोदूंगा, फिर मेरा दिमाग सही होगा.

मैंने उसको भगाने की कोशिश की नौटंकी की लेकिन मैं नाकामयाब रही.

वो मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा. पहले तो उसने मेरी साड़ी पूरी तरह से खींच कर मेरे जिस्म से अलग कर दी. मैं उसके सामने रोने का ड्रामा रही थी- प्लीज़ मुझे छोड़ दो.

लेकिन उसकी आंखों में अलग ही चमक थी. वो मुझको देख कर बोला- साली तुम चुदासी औरतें ऐसे गांड मटका मटका कर चलती हो कि हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता होता. जब चोदने की बारी आती है, तो साली नखरे दिखाने लगती हो … एकमद चुप रह साली रंडी … आज तेरी चुत का मैं भोसड़ा बना दूँगा. आज अपने फौलादी लंड से तेरी चुत के चिथड़े उड़ा दूँगा … तू बस आज देखती जा.

उसने मेरी साड़ी तो खींच ही दी थी. अब मैं उसके सामने ब्लाउज पेटीकोट में रह गई थी.

मुझे इस हालत में देख कर वो अपना लौड़ा सहला कर बोला- साली कितनी बड़ी रांड लग रही है तू … तेरी चुचियां कितनी बड़ी हैं. आज में इनका सारा रस पी जाऊंगा.

मैं उसके सामने छोड़ देने की कहती रही, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था. उसने एक झटके में मेरा साया भी फाड़ कर अलग कर दिया और अगले झपट्टे में मेरा ब्लाउज भी मेरी चुचियों का साथ छोड़ चुका था. अब मैं उसके सामने ब्रा और पेंटी में थी और उसे मना कर रही थी.

फिर उसने अपने कपड़े उतारे और मेरा सामने पूरा नंगा हो गया. उसका लंड देख कर मैं हैरान हो गई. मैंने आज तक जीवन में कभी लंड के इतना बड़ा होने की कल्पना ही नहीं की थी. उसका 8 इंच लंबा था और गोलाई में 3 इंच मोटा था. मुझे तो ऐसा लगा कि ये तो गधे का लंड लगवा कर पैदा हुआ है और आज तो यह कमीना मेरी चुत को सचमुच फाड़ ही देगा.

उसने मेरी तरफ आते हुए मेरी मेरी ब्रा और पेंटी को उतार फेंका और मेरी चूचियों को तेज़ी से दबाने लगा.

मेरी धीरे से दर्द भरी आवाज़ निकलने लगी और मैं उससे कहती रही- मुझे छोड़ दो प्लीज़.
लेकिन वो मुझसे बोला- चुप साली कमीनी … आज बस तू मेरे लंड का मजा ले … मैं तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा … चुप रह रंडी कहीं की.

थोड़ी देर बाद मेरा विरोध कम होने लगा और मैं उसके सामने शांत होने लगी. मुझे भी मजा आने लगा था.

वो मेरे मम्मों को अपनी बड़ी बड़ी हथेलियों में भींच कर पूरी दम से मसल और रगड़ रहा था. वो इतनी तेज़ी से मेरे मम्मों का मलीदा बना रहा था, जैसे कोई राक्षस हो. वो मेरे ऊपर लदा हुआ था और मैं अपने नीचे उसका लंड महसूस कर रही थी.

कोई 15 मिनट बाद वो मम्मों को अच्छे से रगड़ने के बाद मुझसे बोला- चल साली रंडी … मेरा लंड मुँह में लेकर इसे चूस.

पहले तो मैंने मना किया लेकिन उसने जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. थोड़ी देर में उसके लंड का साइज़ और भी ज्यादा बढ़ने लगा और मुँह से बाहर आने लगा. जब उसका लंड अच्छे से बड़ा हो गया तब उसने अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल लिया.

मैं उसके पूरी तरह से खड़े लंड को देख कर गहरा गई लेकिन मुझे मेरी चुत की आग लगातार गर्म कर रही थी.

वो लंड को मेरी चुत पर ले गया और सुपारा घिसते हुए बोला- साली रंडी कितनी मस्त है तेरी चुत … लगता है तेरा पति तुझे अच्छे चोद नहीं पाता … चल कोई बात नहीं … आज मैं इसको भोसड़ा बना दूँगा … तू चिंता मत कर.

वो अपना लंबा लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर मुझे चोदने के लिए तैयार हो गया. उसने मेरी तरफ देखा मैं घबरा कर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. मुझे मालूम था कि जैसे ही इसका लंड अन्दर जाएगा मेरी चुत एक कबाड़खाना बन जाएगी.
लेकिन चुत की सारी आग भी ठंडी करवाने की ललक मुझे उसके लंड से चुदवाने के लिए उकसा रही थी.

उसने लंड चुत पर रख कर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. उसका लंड मेरी चुत में अन्दर घुसा और उसी पल मेरे मुँह से एक चीख निकल पड़ी- अया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह … मर गई.
वो मुझे डांटता हुआ बोला- चुप साली रंडी … अभी थोड़ी देर में तुझको भी मजा आने लगेगा.

इसके बाद उसने एक और धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी चुत के अन्दर चला गया. मैं फिर से दर्द से चीख उठी- आह मर गई … प्लीज़ प्लीज़ … अब रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है … आ … अया … अया.

वो कमीना मेरी एक ना सुनने वाला था. दूसरे ही पल उसने एक और धक्का दे मारा. इस बार उसका लंड पूरा मेरी चुत में चला गया. मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था. क्योंकि पहली बार मैंने इतना बड़ा लंड अपनी चुत में लिया था.

वो थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रुका रहा. फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. अब मुझे भी दर्द कम होने लगा था और मैं मजे लेने लगी थी. वो अब अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल कर चुदाई कर रहा था. वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को अब भी जानवरों की तरह रगड़ रहा था.
मुझे मजा आने लगा और मेरे मुँह से आनन्द भरी सिसकारियां निकलने लगी थी- आह … ससस्स … आहह. … सस्सस्स.

फिर वो मुझसे बोला- साली रंडी पहले तो नखरे दिखा रही थी और अब लंड के मज़े ले रही है. आज तू देख … तेरी चुत का में गड्डा बना दूँगा.
तब मैं बोली- चोद कमीने … और ज़ोर से चोद … फाड़ दे मेरी चुत को मादरचोद … आज मुझे रगड़ रगड़ कर चोद ताकि मैं 2 दिन तक सही से चल ना पाऊं.
वो धक्के देते हुए बोला- साली रंडी आज तुझको ऐसे ही चोदूंगा … तू देखती जा बस … आज के बाद तू मुझसे ही चुदाएगी रोज … ले रंडी ले.

और उसने धक्कों की स्पीड तेज़ कर कर दी और मेरे मुँह से ‘स्सा … आ … अया … इस्स … इस्स्स्स.’ की आवाज़ तेज़ी से आने लगी और मैं कमर उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी. मैं भी चुदाई की जन्नत की सैर का मजा लेने लगी- आह चोद दे साले कमीने … आ … आह … ऐसे … ही … पेल पूरा … हां … ऐसे चोद मादरचोद मुझे … फाड़ दे मेरी चुत को!

कोई 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गया और ढेर हो गया. इस बीच मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

वो मुझसे बोला- बता मेरी जान … मजा आया कि नहीं?
मैं उसे चूमते हुए बोली- बहुत मजा आया मेरे चोदू राजा.

फिर दस मिनट के बाद उसका लंड वैसे ही तन गया और मुझे इस बार अपने ऊपर बैठने को बोला. वो बेड पर चित लेट गया. मैं उसके खड़े लंड के ऊपर चुत फंसा कर बैठ गई. मैंने उसके मूसल लंड को अपने अन्दर ले लिया.

अब वो मुझे हवा में उठा उठा कर चोद रहा था. अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसल रहा था.

मुझे उसके लंड से चुदने में बहुत मजा आ रहा था. मैं लगातार 20 मिनट तक ऐसे ही चुदती रही. फिर हम दोनों झड़ गए और ऐसे ही 20 मिनट तक पड़े रहे. आज उसने मुझे जन्नत की सैर करवा दी थी. आज मैं बहुत खुश थी.

मैं उससे बोली- तुम मुझे ऐसे ही रोज चोदा करो … मेरा नामर्द पति कुछ नहीं कर पाता.
वो मेरी चूची दबा कर बोला- तू चिंता मत मेरी रांड … मैं अब तेरी चुत को भोसड़ा बना दूँगा. मैं अपने साथ अपने दोस्तों से भी तुझे चुदवाऊंगा और तेरी चुत को चबूतरा बना दूँगा.

उसकी बात से मैं पहले तो डर गई और बोली- नहीं तुम अकेले ही आना … किसी और को मत लाना … कहीं मेरे पति को पता चल गया, तो उन्हें बहुत गुस्सा आएगा.
वो बोला- साली रांड मुझसे चुदवा रही है, तब तेरा पति क्या तेरी आरती उतारेगा. होने दो भोसड़ी वाले को गुस्सा. अब चुपचाप जो मैं बोलूं, वही करना. मैं जिसको भी तेरी चुत चुदाई के लिए लाऊंगा, तुम बस उससे अपनी चुत चुदवा लेना.

मैं एक बार को तो खुश हो गई कि अब तो बदल बदल कर लंड मिलेंगे.

वो कहता जा रहा था- जो भी तुमको चोदना चाहेगा … उससे हजार रूपए भी वसूल लेना. समझो अब तुम मेरी रंडी हो गई हो.
मैं कुछ नहीं बोली और वो मुझे किस करके चला गया.

फिर बाद में वो अपने दोस्तों को लाता और वो लोग मुझे रंडी बना कर चोद देते.

कुछ ही दिनों में सब्जी वाले और उसके दोस्तों ने मेरी चुत का भोसड़ा बना दिया. उनका जब भी मन होता, वे आ जाते और मुझे चोद कर चले जाते. मुझे भी लम्बे लम्बे बड़े बड़े लंड से चुदने में मजा आने लगा था. मैं बहुत खुश रहती थी. मैं समझती हूँ कि एक नामर्द की बीवी को सही मायने में औरत होने की ख़ुशी इन्हीं लोगों से चुदने से मिलती थी.

मैं चुद चुद कर इन लोगों की रंडी बन गई थी … मेरे पति को अब तक पता नहीं चला था.

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मेरी चूतड़ों की चुदाई

मेरी स्कूटी खराब होने पर एक ऑटो में मैंने लिफ्ट ली. रास्ते में ड्राईवर मेरी फुदी के साथ खेलता आया. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था. घर आयी तो ड्राईवर बहाना बना कर हमारे घर में रुक गया.
अब आगे:

मैंने टाइम देखा तो 11 बज चुके थे. मैंने पाजामा और टी-शर्ट पहन ली और ऊपर से एक चादर ओढ़ ली.
अपने कमरे से बाहर आकर देखा तो सास ससुर जी के कमरे का दरवाजा बंद था. बाहर की सभी लाइट्स भी बंद थी.

मैं दबे पैरों से घर के पीछे बने शेड की ओर चली गयी. वहाँ कमरे के दरवाजे को धीरे से धकेला. दरवाजा अपने आप खुल गया और फिर मैंने अंदर जाते ही दरवाजा बंद करके कुण्डी लगा दी.

कमरे में पूरी तरह से अंधेरा था मगर मुझे पता था कि चारपाई कहाँ है. इसलिए मैं अंधेरे में ही चारपाई के पास पहुँच गयी और बिस्तर पर टटोलने लगी.

ड्राइवर भी मेरा ही इंतजार कर रहा था. उसने अंधेरे में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे चारपाई पर खींच लिया और साथ ही बोला- आ गयी जानेमन! कब से तेरा इंतजार कर रहा था.
मैंने उसके बिस्तर में घुसकर उसके साथ लेटते हुए कहा- हाँ आ गयी. अब कर लो जो करना है. ऑटो में तो सब कुछ नहीं कर पाए.

ड्राइवर ने भी मुझे बांहों में लेकर अपनी ओर खींचते हुए कहा- क्या करता जानेमन, तेरी सास जो साथ में थी. वरना मैं तो तुमको उसी वक़्त अपनी बांहों में ले लेता.
और साथ ही साथ वो मेरे गालों और मेरी गर्दन पर अपने होंठ रगड़ने लगा.

वो अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ और मेरे बालों को सहलाने लगा. मैंने भी अपनी एक टाँग उसकी कमर पर चढ़ा दी और अपने हाथों से उसकी पीठ को मसलने लगी.
उसने अपने सभी कपड़े पहले से ही उतार रखे थे सिर्फ़ अंडरवीयर ही पहना हुआ था.

मेरी लंबी गर्दन गोरे गोरे गालों और मेरे चेहरे को चूमते हुए उसने मेरे होंठों को अपने मुँह में ले लिया और मेरे होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. फिर अपना लंड मेरी फुदी के साथ कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

ऐसी सर्दी में मर्द के आगोश में मुझे जो सुख मिल रहा था मैं बयान नहीं कर सकती.

हम दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपक रहे थे जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते हों. मेरे मम्मे उसकी छाती से रगड़ रहे थे और मैं वासना के समंदर में डूबती जा रही थी.

उसने मेरी टी-शर्ट को उपर उठा दिया और फिर मेरे गले और मेरी बाजू से निकाल कर अलग कर दिया. मेरे दोनों नंगे मम्मे उसकी नंगी छाती पर रगड़ने लगे. वो भी अपनी छाती मेरे मम्मों पर रगड़ रगड़ कर मज़ा लेने लगा.

एक हाथ से उसने मेरे एक मम्मे को पकड़ा और उसके निप्पल को मसलते हुए अपने मुँह में ले लिया.
मैंने भी अपने आप को थोड़ा ऊपर उठा कर उसके मुँह में अपना मम्मा डाल दिया और फिर उसके पेट पर बैठ गयी. मैं उसके मुँह पर अपने दोनों मम्मे दबाने लगी. मेरे बाल बिखर कर उसके चेहरे के इर्द गिर्द फैल गये और वो अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स को पकड़ कर बारी बारी अपने मुँह में डाल कर चूसने लगा.

मैं भी उसके सर के नीचे से अपने हाथ डालकर उसके सर को अपने मम्मों पर दबा रही थी..

फिर वो मम्मों को मुँह में डाले हुए ही अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर फेरने लगा. फिर अपने हाथ चूतड़ों की तरफ लाते हुए मेरे पजामे को भी नीचे सरकाने लगा.
मैंने भी उसका साथ देते हुए अपने पजामे को उतार दिया.

अब मैं बिल्कुल नंगी हो चुकी थी और उसका अकड़ा हुया लंड उसके अंडरवीयर में से ही मेरी फुदी पर महसूस हो रहा था. मैंने उसके लंड को अंडरवीयर के ऊपर से ही पकड़ा और उसको सहलाने लगी.

उसका लंड एकदम सख्त हो चुका था.

फिर मैं रज़ाई के बीचों बीच नीचे सरकती गयी और अपने चेहरे को उसके लंड के सामने ले आई. मैंने धीरे से उसके अंडरवीयर को नीचे सरकाते हुए उसका लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह में ले लिया.
ड्राइवर के मुँह से आहह … की आवाज़ निकल गयी और वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा. उसने अपनी दोनों टाँगों को फोल्ड करते हुए अपने घुटने उपर उठा लिए. मैं उसकी टाँगों को बीच में अपने मुँह में लंड लिए हुए ज़ोर ज़ोर से उसका लंड अंदर बाहर करने लगी.

ड्राइवर के मुँह से आह्ह ह्ह्ह आअह ह्ह्ह की आवाज़ें सुन कर मैं और भी उत्तेज़ित होकर उसके लंड को चूस रही थी. बीच बीच में मैं उसका लंड मुँह से निकाल कर अपने चेहरे, गर्दन और गालों पर भी रगड़ लेती.

काफ़ी देर तक मैंने उसका लंड चूसा और फिर मैं उसके ऊपर आकर लेट गयी और उसके लंड को अपनी फुदी पर सैट करने लगी. उसका तना हुया सख्त लंड मेरी गीली फुदी के होंठों का स्पर्श पाते ही हिचकोले मारने लगा और मेरी फुदी के अंदर जाने को बेताब होने लगा.

मैंने उसके लंड पर अपना थोड़ा सा वजन डाला और उसका लंड मेरी गीली फुदी की दीवारों को खोलता हुआ मेरे अंदर समाने लगा. ड्राइवर ने भी मेरी कमर को पकड़ते हुए नीचे से एक झटका लगा दिया जिससे उसका मोटा और विशाल लंड मेरी फुदी के भीतर तक समा गया.
मेरे मुख से संतोष और आनन्द से भारी सिसकारी निकली ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
एक अरसे के बाद मेरी फुदी को बढ़िया लंड मिला था.

अब मैं अपनी कमर को उपर नीचे हिला हिला कर उसका लंड अपनी फुदी में पेलने लगी. वो भी मेरे धक्कों से अपने धक्के मिला कर नीचे से ही मेरी फुदी चोदने लगा.

काफ़ी देर तक मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसका लंड अपनी फुदी के अंदर बाहर करती रही और फिर उसने मुझे पलट कर अपने नीचे कर दिया और अपना लंड मेरी फुदी में जड़ तक धकेलते हुए मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

उसके दोनों हाथ मेरे कंधों के नीचे थे और वो मेरे उपर लेट कर मुझे ज़ोर ज़ोर से पेले जा रहा था.
मैं अपनी दोनों टांगें उसकी कमर से लिपटा कर उसके धक्कों का जवाब धक्कों से ही दे रही थी.

अब मेरी फुदी से रस की फुहारें छूटने वाली थी. मैंने उसकी कमर पर अपने नाख़ून गाड़ते हुए उसे अपने सीने से लगा लिया और फिर मेरी फुदी में से रस की फुहारें छूट पड़ी.
मैं उसके सीने से लिपट गयी और उसको रुकने को कहा.

वो अपना लंड मेरी फुदी में ही गाड़े हुए रुक गया. मेरे होंठों को चूमने लगा और बोला- क्या हुआ मेरी अनारकली? थक गयी?
मैंने कहा- हाँ … कुछ देर रुक जाओ, फिर दुबारा करते हैं.
तो वो मान गया और अपना लंड मेरी फुदी में से निकाल कर मेरे साथ ही लेट गया.

मैंने लेटे हुए ही उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया. उसका लंड मेरी फुदी की चिकनाहट से पूरी तरह से भीगा हुआ था. वो भी मेरी फुदी पर अपना हाथ रख कर मेरी फुदी को सहलाने लगा. कभी मेरी फुदी को अपनी मुट्ठी में भींचता और कभी मेरी फुदी के बीच अपनी उंगली डाल देता.

फिर वो उठा और मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया और मेरी दोनों जांघों को चूमने लगा.
मेरी फुदी में फिर से चुलबुलाहट होने लगी.

और धीरे धीरे वो मेरी फुदी की तरफ बढ़ने लगा. मेरी फुदी भी सकपकाने लगी.
फिर आख़िरकार उसने एक चुंबन मेरी फुदी के होंठों पर भी छोड़ दिया और फिर मेरी फुदी को नोच नोच कर चूसने लगा.

उसके इस वार से मेरा पूरा बदन कांप उठा और मैंने अपनी दोनों टाँगें उठा कर उसके कंधों पर रख दी. मैं उसके सिर को अपनी फुदी पर दबाने लगी. वो भी मेरी जांघों को पकड़ कर अपनी ज़ुबान को मेरी फुदी के अंदर तक घुसेड़ रहा था.

मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और मेरे मुँह से ज़ोर ज़ोर की सिसकारियाँ निकलने लगी. मैं आअहह आहह करते हुए अपनी कमर ऊपर नीचे हिला रही थी और उसके सिर को अपनी टाँगों में दबाए हुए दोहरी तिहरी हो रही थी.

एक बार फिर से मेरी फुदी में से पानी निकलने लगा था और ड्राइवर उसे चाट चाट कर मुझे और भी मज़ा दे रहा था.

अब ड्राइवर ने मुझे घोड़ी बन जाने को कहा.
तो मैंने उल्टी होकर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा दिया और अपनी कमर को आगे से नीचे झुका दिया. जिससे मेरी फुदी और गांड दोनों खुलकर उसके सामने आ गयी.

उसने हाथ से सहलाते हुए मेरी फुदी में अपना लंड डाल दिया और खड़े होकर मेरी कमर को पकड़ कर मुझे चोदना शुरू कर दिया.
वो मेरी ताबड़तोड़ चुदाई कर रहा था और मैं उसकी दमदार चुदाई का मज़ा ले रही थी.

मेरी प्यासी फुदी की प्यास अब ख़त्म हो रही थी. मैं अपनी कमर को उसके झटकों के साथ मिला कर हिला रही थी और एक आनंद के सागर में डूबती जा रही थी.

मेरी फुदी से मेरा लावा बह कर मेरी जांघों तक आ चुका था और मेरी फुदी से फ़च फ़च की आवाज़ें आ रही थी. वो भी मेरी पतली कमर को सहलाते हुए मेरे बालों को ऐसे पकड़ लेता जैसे वो किसी घोड़ी को हांक रहा हो.

बहुत देर तक वो मुझे ऐसे ही चोदता रहा. और फिर वो भी अपना माल निकालने के लिए तैयार हो गया. अपनी टाँगों को अकड़ाते हुए उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और फिर एक दो झटकों में ही उसने मेरी चीखें निकाल दी.
उसने अपना ढेर सारा माल मेरी फुदी के अंदर छोड़ दिया था और रुक रुक कर झटकों से अपने माल की एक एक बूँद मेरी फुदी में उड़ेल रहा था.

माल छूटने के बाद भी वो लंड फुदी में डाले हुए ही मुझे कितनी देर तक पकड़े हुए खड़ा रहा और मैं भी उसके सामने घोड़ी बन कर झुकी रही.

फिर उसका लंड ढीला होकर बाहर आने लगा तो हम लोग चारपाई के ऊपर ही लुढ़क गये और तेज तेज साँसें भरने लगे.

हमने टाइम देखा तो रात का एक बज चुका था. मैंने ड्राइवर से कहा- अब हमारे पास तीन घंटे और हैं. क्योंकि पाँच बज़े तक मेरी सासू माँ जाग जाएँगी और मैं चार बजे तक अपने कमरे में जाकर सो जाऊँगी.
उसने कहा- यार बस तीन घंटे? इतने टाइम में क्या होगा यार! मेरा तो मन भी नहीं भरेगा इतने टाइम में!
तो मैंने हंसते हुए कहा- तो फिर सुबह तक तुम्हारे पास ही रहती हूँ. पकड़े गये तो कोई बात नहीं!

मेरी बात सुनकर वो भी मुस्करा दिया और बोला- अच्छा जैसा तेरा हुकम मगर यह तीन घंटे तो अच्छे से मज़ा दे दो.
मैंने कहा- अच्छे से ही तो मज़ा दे रही हूँ. और कैसे मज़ा दूं?
तो बोला- यार, अंधेरे में तेरी सूरत नहीं दिखती, मैं तेरी सूरत देखकर तुमको चोदना चाहता हूँ लाइट जला कर!
मैंने कहा- ठीक है जला लो लाइट!
अंधेरे में मुझे भी मज़ा नहीं आ रहा था.

और फिर मैंने खुद ही उठ कर लाइट जला दी और खिड़की के आगे अच्छी तरह से परदा कर दिया. वैसे तो खिड़की पहले ही बंद थी.

मैं फिर से ड्राइवर के बिस्तर में आकर लेट गयी.

अब वो मेरे चेहरे पर हाथ फेरते हुए मेरे हुस्न की तारीफ करने लगा और साथ ही मेरे बालों में मेरे मम्मों पर और मेरे गालों पर अपना हाथ घुमाने लगा. मैं लेटी हुई ही उसका लंड सहला रही थी.
कुछ ही देर में उसका लंड खड़ा हो गया. मैंने उसके लंड को दबाते हुए इशारा किया और वो मुस्कराते हुए मेरी टाँगों के बीच आ गया. अब उसने मेरी एक टाँग अपने कंधे पर रख ली और मेरी दूसरी टाँग अपनी दोनों टाँगों के बीच लेकर उस पर बैठ गया.

फिर मेरी फुदी पर अपना लंड गाड़ते हुए एक ही झटके में सारा लंड मेरी फुदी में घुसेड़ दिया. मेरे मुँह से मीठी मीठी सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी और वो मेरी एक टाँग को पकड़े हुए मेरी फुदी में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.

हमारी चुदाई फिर से जोरों पर चलने लगी. हम पोज़िशन बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे. कभी वो मुझे गोद में उठा कर चोदता तो कभी लिटा कर चोदता.

ऐसे ही 3-4 बार और उसने मेरी चुदाई की.

सुबह के 4.30 बज चुके थे. मैंने अपने कपड़े पहने और उससे फिर मिलने का वादा करके अपने कमरे में आ गयी.

कमरे में आकर अकेली सोने में कोई मज़ा नहीं आ रहा था. मन कर रहा था कि किसी नंगे मर्द की बांहों में नंगी होकर आराम से सुबह तक सोती रहूं!

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वो लंड के सुपारे को मेरी चूत पर रगड़ने लगा.

मेरा नाम मन्नत मेहरा है, मेरी उम्र 35 साल की है, फिगर साइज 38-32-40 का है, पर एकदम पटाखा माल जैसी लगती हूँ. मैं कहां से हूँ, आपको यह नहीं बता सकती हूँ. मैं एक तलाकशुदा औरत हूँ. पति के तलाक के बाद मेरी जिंदगी कुछ खास नहीं थी, तलाक के 2 साल तक मैं चुदी नहीं थी, अपने जिस्म की आग को बस यूं हाथ से ही बुझा कर काम चला रही थी.

एक दिन मैं अपने लिए ब्रा पैंटी खरीदने गयी. मुझे वहां एक फैंसी ब्रा पैंटी के सैट बहुत पसंद आया, तो मैंने वो खरीद लिया. वहां का जो मालिक का था, वो मुझे काफी घूर रहा था. शायद वो यही सोच रहा था कि इतनी बड़ी ब्रा क्या सच में इसे आती होगी या नहीं.
मुझे भी मस्त लग रहा था क्योंकि मुझे ये सब अच्छा लगता था.

उस दिन मैं साड़ी पहन कर गयी थी … जिसमें मेरी बॉडी काफी खुली दिख रही थी. खैर … मैं ब्रा पैंटी खरीद घर आ गयी.

अगले दिन उस सैट को मैंने यूज किया, लेकिन शाम होते होते पता नहीं क्यों ब्रा की स्ट्रिप टूट गयी, इससे मुझे बहुत गुस्सा आया. अगले दिन मैं फिर उस दुकान पर गयी, उस दिन उस दुकान का सिर्फ मालिक ही था.

मैं गुस्से में बोली- आप लोग क्या सामान बेचते हैं, इतने मंहगे सामान देते हैं और घटिया क्वालिटी का सामान बेचते हैं.
इस पर उस दुकानदार ने पूछा- क्या हुआ मैडम … आप पूरी बात तो बताएं?

मैंने उसे अपनी बात बताई. उसने ब्रा को देखा और मेरी चूचियों को देखने लगा. फिर उसने कहा- मैं आपको नया सैट देता हूँ, आप ये ले कर जाइए, ये हमारी दुकान का सबसे अच्छा माल है … आपकी तरह.

‘आपकी तरह’ ये शब्द उसने धीरे से कहे थे, लेकिन मैंने सुन लिए.
उसकी बात को सुनकर भी मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. बस उसे देख कर रह गई.

उसने कहा- अगर इसमें कोई प्रॉब्लम हुई, तो आप मुझे इस नंबर पर कॉल कीजिएगा.
यह कहते हुए उसने अपना नंबर मुझे लिख कर दे दिया.

मैंने दुकानदार से उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम राहुल बताया. राहुल दिखने में काफी स्मार्ट था. देखने में लंबा और हट्टा-कट्टा भी लग रहा था. एक बार के लिए तो मुझे न जाने क्यों मन में हेनू हेनू हुई. मैं मन ही मन उससे आकर्षित हो गई थी.

मैं उससे ब्रा पैंटी का सैट लेकर घर आ गयी.

घर आकर मैं न जाने क्यों राहुल के बारे में ही सोच रही थी. पता नहीं उस राहुल ने मेरे ऊपर क्या जादू कर दिया था. मैं सच में उसकी तरफ मोहित हो गयी थी.

इस बार मैंने ब्रा पहनी और जोर से अपने मम्मों को कुछ इस तरह से फुलाते हुए अंगड़ाई ली कि ब्रा पर जरूरत से ज्यादा जोर पड़ गया. मैंने जानबूझकर फिर से ब्रा की स्ट्रिप तोड़ दी.

फिर अगले दिन उसे कॉल किया, तब उससे बात हुई. उस मैंने बताया कि आप तो कह रहे थे कि आप बहुत बढ़िया माल दे रहे हैं, लेकिन इस बार तो ब्रा पहनते ही इसकी स्ट्रिप टूट गई.

उसने कहा- ऐसा नहीं हो सकता, आप आज हमारी दुकान पर 3 बजे आइए, मैं देखता हूं कि क्या प्रॉब्लम है.
मैं बोली- मैं इतनी फ्री नहीं हूँ, जो रोज रोज आपकी दुकान पर आऊं. जब मुझे टाइम मिलेगा, तब आऊँगी.
ये बोल कर मैंने फ़ोन काट दिया.

बस अब उसको मेरा नंबर मिल चुका था.
इस बात को मैंने कुछ समय देने का फैसला किया. धीरे धीरे मोबाइल पर उसके कुछ हल्के फुल्के सन्देश आने लगे. मैं भी उससे कभी कभी बात करने लगी.

हम दोनों दोस्त बन चुके थे. हमारी बातों में धीरे धीरे थोड़ा सेक्स वाले मैसेज आने लगे थे. फिर एडल्ट जोक्स और गरम फोटोज के बाद चुदाई वाली क्लिप्स भी आने लगी थीं.

एक दिन उसने बोला- आप कभी समय निकाल कर दुकान पर आइए न.
मैंने कहा- किस समय फ्री रहते हो?
उसने कहा- कल ऑफ है, लेकिन आपके लिए दुकान खोलूंगा. आप ऐसा कीजिए, कल 3 बजे आइए.
मैं बोली- कल तो मेरा जन्म दिन है … इसलिए मैं नहीं आ सकती.

उसने मुझे एडवांस में बर्थडे की बधाई थी और दुकान पर आने के लिए जोर दिया.
इस पर मैं मान गयी.

अगले दिन मैं जींस टॉप पहन कर उसकी दुकान गयी. उसने मुझे बर्थडे विश किया और बड़ी गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया. उस दिन ऑफ होने की वजह से दुकान पर कोई नहीं था.

उसने मुझे एक बहुत ही सेक्सी सैट दिया और बोला- अगर चाहो तो यहीं पहन कर चैक कर सकती हो.
मैं- यहाँ कैसे..! यहाँ कोई आ जाएगा राहुल!

उसने झट से दुकान का शटर गिरा दिया और बोला- अब कोई नहीं आएगा. बस एक बार पहन कर दिखा दो.

मैं समझ गयी कि आज मेरी चूत को एक लंड मिल जाएगा, जिसकी मुझे भी जरूरत है. मैं चेंजरूम में चली गई और चेंज करके उसे अन्दर बुलाने के लिए आवाज दी. उसे खुद को ब्रा पेंटी में दिखाने में मुझे थोड़ी शर्म आयी.

उसने नजर भर कर मुझे पूरा से नीचे से ऊपर तक देखा, फिर घुटनों पर बैठ कर मुझे एक रिंग दिया और कहा- आई लव यू.

मैं उसकी इस हरकत को देख कर एकदम से हैरत में पड़ गयी. मैंने उसे अपने बारे में बता रखा था कि मैं एक तलाक़शुदा औरत हूँ … मैं अभी कुछ सोच ही रही थी कि उसी समय उसने मुझे बांहों में भर लिया.

उसने कहा- मुझे तुमसे शादी नहीं करनी है, बस चोदना है.

ये कह कर वो मुझे किस करने लगा. मैं भी कब से यही सब चाहती थी. सो उसका साथ देने लगी. अधनंगी तो मैं पहले से ही थी … बस नंगी होना बाकी था.

उसने मेरी ब्रा को निकाला और मुझे घूर कर देखने लगा.
‘उफ्फ्फ मन्नत, तेरी चूचियां तो बहुत बड़ी हैं..’

ये बोल कर वो मेरी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को दबाने लगा. मैं भी पूरे जोश में उसका सर पकड़ कर सहला रही थी. न जाने कितने दिन के बाद कोई मेरी चूचियों के साथ खिलवाड़ कर रहा था.

फिर उसने अचानक से एक हाथ मेरी पैंटी में डाल दिया और चूत को सहलाने लगा.

उफ्फ्फ्फ … अपनी चूत पर एक मर्दाना हाथ पाते ही मैं तो समझो, मर ही गयी. वो लगातार मेरी चूत के दाने के साथ खेल रहा था.

‘जब से तुझे देखा है, मेरा लंड तुझे चोदने को बेकरार है … मेरी जान..’

ये कहते हुए उसने अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया. मैंने जैसे ही उसके लंड को हाथ में लिया, मैं चौंक गई. उसका लंड 3 इंच जितना मोटा लग रहा था. तभी उसने मुझे छोड़ा और अपनी जींस खोल कर नीचे गिरा दी.

उफ्फ्फ 8 इंच का लंबा काला लंड देख कर मेरी आंखें तो फटी की फटी रह गईं. इतना बड़ा लंड तो मेरे पति का भी नहीं था.

मैंने हैरत से देखते हुए ऐसे इजहार किया जैसे उसका लंड को बड़ा लम्बा समझ आया था. ये सही भी था.

उसने मेरी भाव-भंगिमा समझते हुए कहा- मेरी रानी … चल अब जल्दी से इसे चूस कर और बड़ा कर दे … मैं तुम्हें चोद कर खुश करना चाहता हूँ … और तेरी ख़ुशी तुझे इसी लंड से मिलेगी.

मैं इतना कुछ बोले उसके लंड को पकड़ कर देखने लगी, फिर घुटने पर बैठ कर मैं लंड सहलाने लगी. उसने मेरे एक दूध को जोर से दबाया … तो मेरा मुँह दर्द से खुल गया. उसी समय उसने अपने लंड को मेरे मुँह में धकेल दिया. मैं भी मोटे लंड का स्वाद ले कर मस्त हो गई और उसके लंड को चूसने लगी.

वो भी मस्त हो गया और मेरे मुँह को चूत समझ तेज तेज चोदने लगा.

कुछ ही मिनट मैं वो एक तेज आह के साथ मेरे मुँह में ही झड़ गया. मैंने उसके लंड के रस को उगल दिया … क्योंकि उसने एक झटके में अपना लंड मेरे गले में उतार कर अपना लावा निकाल दिया था, जिससे मुझे उबकाई आ गयी थी.

फिर उसने मुझे फर्श पर लेटाया, जिस पर मैट बिछा हुआ था. उसने मेरी पैंटी निकाल कर फेंक दी और मेरी चूत को देखने लगा.

“उफ्फ्फ मेरी जान तुम्हारी चूत तो बहुत मस्त है.”
ये कह कर वो मेरी चूत चाटने लगा.

मन्नत तो मानो जन्नत में पहुँच गयी थी क्योंकि बहुत दिनों के बाद किसी ने मेरी चूत चाटी थी. वो दो उंगली मेरी चूत में पेल रहा था और जीभ से मेरी चूत के दाने के साथ खेल रहा था. मैं एक हाथ उसके सर को सहला रही थी और दूसरे हाथ से अपनी एक चूची को मसल रही थी.

कुछ मिनट की चुसाई के बाद मैं उसके मुँह में झड़ गयी. वो मेरी चूत के रस को अपने मुँह में भर पी गया और उसके तुरंत बाद मेरी चूत को फैला कर अपना लंड लगा दिया. वो लंड के सुपारे को मेरी चूत पर रगड़ने लगा.

मैं चुदासी हो गई थी. मैं बोली- आंह अब मत तड़पाओ राहुल … बस जल्दी से मुझे चोद दो.

उसने हल्का सा जोर लगाया, जिससे उसका 8 इंच का आधा लंड मेरी चूत में उतर गया. लंड घुसवाते ही मुझे बहुत दर्द हुआ … क्योंकि बहुत दिनों के बाद मेरी चूत ने लंड लिया था.

वो मेरे ऊपर चढ़ गया था और मेरी चूचियों को दबाते हुए मेरे होंठों को चूसने लगा. फिर उसने एक और झटका मारा, जिससे मेरी चूत में उसका लंड अन्दर चला गया. मैं रो दी. वो लंड पेल कर रुक गया गया और मेरी चूचियों के साथ खेलने लगा.

थोड़ी देर रुकने के बाद मैं खुद लंड लेने के लिए गांड उठाने लगी. बस फिर क्या था, वो धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करने लगा. धीरे धीरे मुझे भी मजा आने लगा.
मैं भी गांड उठा कर बोलने लगी- आह चोदो चोदो मुझे … और जोर से.

वो भी मुझे तेज तेज चोदने लगा. वो कभी अपना लंड पूरा बाहर निकालता, फिर एक झटके में पूरा मेरी चूत में अपना लंड घुसा देता. इससे मेरे अन्दर और वासना जग जाती. मैं अपनी गांड उठा उठा उससे चुदने लगी. धकापेल चुदाई का खेल होने लगा. हम दोनों ही सुध बुध खो कर पूरी तल्लीनता से चुदाई का मजा लेने में लगे थे. जालिम का लंड बड़ा मस्त था, साला अन्दर तक जाकर चोट मार रहा था.

बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई में मैं दो बार झड़ गई थी. फिर वो थक कर नीचे लेट गया. मैं समझ गई कि मुझे क्या करना है. मैं उसके ऊपर अपनी चूत में लंड फंसा कर उसके ऊपर कूदने लगी.

इस बार जब मैं नीचे आती, तो वो अपना लंड और अन्दर धकेल देता और जब मैं ऊपर उठती, तो वो भी पूरा लंड बाहर निकाल देता.

इसी पोजीशन में 10 मिनट चुदाई करने के बाद वो मेरी चूत में झड़ गया. मैं भी उसके साथ झड़ गयी.

कुछ देर ऊपर पड़े रहने के बाद मैं उठी, तो उसके लंड पर मेरी चूत और लंड का पानी लगा हुआ था.

उसने कहा- मस्त मलाई है, चाट ले न!

मैं उसके लंड को मजे से चाटने लगी. इस समय मैंने अपनी गांड राहुल के मुँह की तरफ की हुई थी. वो मेरी गांड को कुरेद रहा था.

:मन्नत, मैं तेरी गांड मारना चाहता हूँ.”
“मैंने कभी गांड नहीं मरवाई.”
वो बोला- कुछ नहीं होगा … मैं धीरे धीरे करूँगा.

मैं मान गयी. दस मिनट बाद हम दोनों फिर से गर्म हो गए. अब उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड को चाट कर पूरा गीला किया और अपने लंड पर खूब सारा थूक लगा लिया.

लंड को मेरी गांड पर लंड रखकर उसने एक झटका मार दिया. उसके लंड टोपा मेरी गांड के अभी अन्दर गया ही था कि मैं आगे को हो गयी. दर्द से मेरी आंखों में आंसू आ गए.

पर लंड जब खड़ा रहता है, तो बिना छेद चोदे नहीं छोड़ता … यही हुआ उसने मुझे फिर से पकड़ा और आराम से टोपे को अन्दर पेल दिया. इस बार थोड़ी देर रुकने के बाद उसने लंड पर थूक गिराया. फिर मुझे कमर से अच्छे से जकड़ कर एक तेज झटका दे दिया. मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया. मैं थोड़ी देर के लिए होश खो बैठी.

कुछ पल बाद जब मैं होश में आयी, तो वो मेरी गांड में थूक डाल कर मेरी गांड मार रहा था. अब गांड चुदाई से मुझे भी मजा आने लगा था. मैं भी गांड पीछे कर करके चुदने लगी. उसने मुझे कुतिया बनाए हुए कोई 20 मिनट तक बिना रुके चोदा … मेरी गांड हचक कर मारी.

मेरी गांड से बदबू आने लगी, चूंकि गांड चुदाई में ये सब नार्मल सी बात होती है. सो हम दोनों पूरी मस्ती से गुदामैथुन का सुख लेते रहे.

अंत में उसने अपना सारा रस मेरी गांड में निकाल दिया और मेरे ऊपर निढाल हो कर लेट गया.

इस दौरान मैं चूत का दाना सहलाती रही थी जिस वजह से मैं 3 बार झड़ चुकी थी.

थोड़ी देर पड़े रहने के बात मुझे बाथरूम जाना था. उसने मुझे बाथरूम बताया, वहां जा कर मैं फ्रेश हुई. उधर मैं अपनी चूत और गांड को देख बहुत खुश हुई. बेशक दोनों लाल हो गयी थीं … दुःख भी रही थीं … पर जो सुख मिला था, वो बहुत बड़ी बात थी.

मैंने घड़ी में टाइम देखा, तो शाम के 5 बज रहे थे. फिर हम दोनों ने कपड़े पहन लिए. मैंने उसे गिफ्ट के लिए थैंक्स कहा.
वो बोला- कौन सा गिफ्ट जान?
मैंने आंख दबा कर उसका लंड हिला दिया- ये वाला गिफ्ट … जो आज मुझे दिया है.

उसने मुझे अपनी बांहों में भरा, तो मैंने भी उसके लंड और होंठों पर किस किया.

इसके बाद राहुल ने मुझे दुकान के पिछले गेट से बाहर निकाला और आगे जा कर शटर उठा दिया.

अब उससे मेरी आशनाई हो गई थी. मैं उससे कई बार चुदी, अभी भी वो मुझे पेलता है.

ये थी तलाक के बाद मेरी चूत और गांड की चुदाई की कहानी.

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बेकाबू जवानी की मजबूरी

कॉलेज के सेकंड ईयर के एग्जाम खत्म होने के बाद मैं घर में ही थी. मुझे घर में बहुत बोरियत लग रही थी.

एक दिन में सुबह न्यूज़ पेपर पढ़ रही थी, तो उस न्यूज़ पेपर में एक पंपलेट निकला जो स्विमिंग क्लासेज को लेकर था. उसे पढ़कर मेरे मन में आया क्यों न मैं स्विमिंग क्लासेज जॉइन कर लूं, इससे मेरा टाइम भी पास हो जाएगा और मैं स्विमिंग भी सीख लूंगी.

बस मैंने मम्मी से पूछा कि मुझे स्विमिंग सीखनी है … ये एक पंपलेट निकला है … क्या मैं इसे ज्वाइन कर लूं?
मम्मी ने भी हां कर दी.

अगले दिन मैं उस स्विमिंग इंस्टीटूट में अपना एड्मिशन करवाने के लिए गई. वहां रिसेप्शन पर एक लड़की बैठी थी. मेरी उससे सारी बातें हुईं. उसने मुझे स्विमिंग फीस के बारे में बताया. उसके साथ मेरी कुछ और भी बहुत सारी बातें हुईं. मैंने अपना एड्मिशन करवा लिया.

मैंने उससे टाइमिंग पूछा, तो उसने मुझे दोपहर में दो से चार की टाइमिंग बताते हुए कहा कि ये टाइमिंग लड़कियों के लिए है. इसके लिए स्विमिंग ट्रेनर भी एक लड़की ही है.

ये सुनकर मेरा तो जैसे दिल ही टूट गया था. सच कहूं दोस्तो … तो मैं ये स्विमिंग क्लासेज नए लंड की तलाश में ही जॉइन कर रही थी कि कहीं से मुझे कोई नया लंड मिल जाए, पर मुझे ये नहीं पता था कि इसमें सच में कोई लंड मिल जाएगा.

मुझे अगले दिन से स्विमिंग ड्रेस साथ लेकर आने के लिए कहा गया.

जब स्विमिंग ड्रेस की बात सामने आई तो मैंने सोचा कि क्यों न स्विमिंग ड्रेस ले ली जाए.

मैं उधर से सीधे मार्किट चली गई. मैंने एक स्विमिंग ड्रेस ली और घर आ गई. अगले दिन से मुझे स्विमिंग के लिए जाना था, पर वहां लड़के तो होने नहीं वाले थे, फिर भी मैं एक्साईटिड थी.

अगले दिन मैं समय से पहले घर से निकली. स्विमिंग इंस्टिट्यूट मेरे घर से थोड़ा दूर था, तो मैं एक ऑटो लेकर स्विमिंग इंस्टिट्यूट की ओर निकली और कुछ समय बाद वहां पहुंच गई.

रिसेप्शनिस्ट ने मुझे स्विमिंग पूल की तरफ ले गई और उसने मुझे मेरी स्विमिंग ट्रेनर से मिलवाया. मेरी उस ट्रेनर से थोड़ी बातचीत हुई. फिर उसने मुझसे कहा- जाओ … आप चेंज करके आओ.
उसने मुझे चेंजिंग रूम का रास्ता बताया, तो मैं चेंज करने चली गई.

जब मैं चेंज करके बाहर आई, तो मुझे ट्रेनर ने कहा- चलिए अब आप पूल में आ जाइए.
मैं पूल में चली गयी.

ट्रेनर ने मुझसे कहा- पहले आप अपना पैर चलना सीख लीजिये, ये किनारा पकड़ कर अपने शरीर को ऊपर उठाइए और पानी में पैर चलाइए.
मैं पैर चलाने लगी.
ट्रेनर ने कहा कि मुझे कुछ दिन ऐसे ही प्रैक्टिस करनी होगी. ट्रेनर ने कुछ और प्रैक्टिस रोज करने के लिए भी कहा.

कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा. मेरी दो से चार की टाइमिंग में बहुत ही कम लोग आते थे. सिर्फ 3-4 लड़कियां ही थीं. उनमें से एक लड़की से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई. उसका नाम शेफाली था, वो शादीशुदा थी और काफी अमीर घराने की लगती थी.

देखते ही देखते हम दोनों काफी अच्छी सहेलियां बन गईं. वो मुझे स्विमिंग सीखने में काफी मदद करती थी. उसे काफी अच्छी स्विमिंग आती थी.

एक दिन मैंने उससे पूछा- आपको तो इतनी अच्छी स्विमिंग आती है, तो फिर भी आप यहां सीखने क्यों आती हैं?
इस पर उसने मुझे बताया- मैं यहां सीखने नहीं, सिर्फ स्विमिंग के लिए ही आती हूं. मेरे हस्बैंड पूरा दिन ऑफिस में होते हैं … तो मैं घर में बोर होती हूं. इसलिए यहां मैं स्विमिंग के लिए आती हूं. स्विमिंग से बॉडी फिट रहती है … बस इसलिए.

मैंने पूछा- आपके हस्बैंड क्या करते हैं?
उसने बताया- वो एक बहुत बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.
इसी तरह की कुछ और बातचीत के बाद हम दोनों जुदा हो गयी.

एक दिन मैं स्विमिंग इंस्टिट्यूट से घर जाने के लिए निकली और ऑटो के लिए इन्तजार कर रही थी कि तभी शेफाली अपनी कार लेकर आई.
उसने मुझसे कहा- चलो मैं तुम्हें ड्राप कर देती हूं.
मैंने उसे मना किया.
उसने मुझसे पूछा- अच्छा ये तो बताओ तुम्हारा घर किस तरफ है?
मैंने उसे अपने घर की लोकेशन बताई, तो उसने कहा कि मैं भी तो उसी तरफ से आती हूँ … चलो मैं तुम्हें ड्राप कर दूंगी.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी कार में बैठ गई. उसने मुझे बताया कि उसका घर भी मेरे घर से करीब दो किलोमीटर और आगे है.
मैं उसे शुक्रिया कहने लगी.

इस पर उसने कहा- अब से तुम ऑटो से मत आया करो. मैं ही तुमको रोज लेने आ जाऊंगी … और छोड़ भी दूंगी.

इसी तरह उसके साथ मेरी गहरी छनने लगी.

दिन बीतने लगे. अब तो कभी कभी मैं उसे अपने घर भी ले आती मम्मी से मिलाती और अपने कमरे में ले जाकर उससे काफी देर तक बातें करती रहती.

एक दिन वो मुझे लेने नहीं आई, तो मैंने उसे फोन किया. उसने मुझे बताया कि आज मेरी कार खराब हो गई है … लेकिन तुम चिंता मत करो … मैं अपने हस्बैंड के साथ आ रही हूँ.

करीब 15-20 मिनट के बाद वो आई. कार उसके हस्बैंड चला रहे थे.

तब पहली बार मैंने शेफाली के हस्बैंड को देखा था. शेफाली का हस्बैंड बहुत ही स्मार्ट था. बड़ी ही स्ट्रांग पर्सनैलिटी थी. उसकी उम्र करीब 30 साल की होगी. वो बहुत ही हॉट लग रहा था. उसने ग्रे कलर का थ्री-पीस समर सूट पहन हुआ था. उसे देख कर मेरी तो चूत मचल उठी थी.

वो दोनों कार से नीचे उतरे. शेफाली ने मुझे अपने हस्बैंड से मिलवाया.

शेफाली- अंकुश ये रोमा है, मैंने तुम्हें बताया था न कि ये मेरे साथ स्विमिंग के लिए जाती है.
अंकुश- हैलो रोमा … नाइस टू मीट यू.
मैं- हैलो सर.
अंकुश- डोंट कॉल मी सर, जस्ट कॉल मी अंकुश.
मैं- ओके अंकुश.

हमारी ऐसे ही कुछ नार्मल सी बातें हुईं. फिर शेफाली ने कहा- चलो रोमा, स्विमिंग का टाइम हो रहा है. हम वैसे ही लेट हो गए हैं.
अंकुश- शेफाली अभी मेरी एक मीटिंग है. मैं चार बजे तुम दोनों को लेने के लिए आ जाऊंगा.
शेफाली- ओके हनी.

अंकुश हम दोनों को छोड़ कर जा चुका था, पर मेरे मन में उसी का चेहरा सामने आ रहा था.

फिर शाम चार बजे अंकुश हमें लेने भी आया.

अब तो कभी कभी अंकुश ही हमें स्विमिंग के लिए छोड़ने और लेने आता था.

कुछ दिन ऐसे ही और निकल गए.

फिर एक दिन संडे को शेफाली मेरे घर आई और उसने मुझसे कहा- चलो स्विमिंग के लिए चलते हैं.
हालांकि संडे को स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता था तो मैंने उससे कहा- शेफाली तुम भूल रही हो, आज संडे है. आज स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता है.

उसने कहा कि हां मुझे याद है, पर संडे के दिन स्विमिंग इंस्टीट्यूट में फैमिली अलॉउड होती है … और आज अंकुश भी हमारे साथ स्विमिंग के लिए चल रहा है. वो नीचे कार में इन्तजार कर रहा है. तुम जल्दी से तैयार हो कर आ जाओ.

ये सुन कर कि अंकुश भी स्विमिंग के लिए आ रहा है, मैं बहुत खुश हो गई. मैं जल्दी से तैयार होकर बाहर आई और कार में बैठ गई.
फिर हम स्विमिंग इंस्टीट्यूट पहुंचे.

उधर हम तीनों चेंजिंग रूम की तरफ बढ़े. जेन्ट्स ओर लेडीज चेंजिंग रूम दोनों अगल बगल में ही थे. मैं और शेफाली लेडीज चेंजिंग रूम की तरफ बढ़ गए और अंकुश अपना बैग लिए जेन्ट्स में चल गया.

चूंकि आज संडे होने की वजह सिर्फ फैमिली ही अलाउड रहती थीं. मगर तब भी आज स्विमिंग पूल में ज्यादा कोई नहीं थे. बस तीन कपल और एक फैमिली थी, जिनके साथ दो बच्चे थे.

हम तीन थे, मैं और शेफाली तो चेंज करके पूल में उतर गए थे, पर मुझे अंकुश अभी तक दिखाई नहीं दिया था.

मैं उसी की तरफ मतलब जेन्ट्स के चेंजिंग रूम की ओर नजरें गड़ाए हुए थी.

जैसे ही वो निकला, तो मैं उसे देखती ही रह गई. अंकुश सुपर हॉट लग रहा था. उसका गठीला बदन देख कर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था. उसने सिर्फ एक छोटी सी स्विमिंग वाली अंडरवियर ही पहने हुई थी, जिसमें से उसका उभरा हुआ बड़ा सा लंड अलग से ही दिखाई दे रहा था.

मैं तो उसे देखते दखते ही पूल के किनारे बैठी बैठी पूल में गिर पड़ी. मुझे गिरता देख शेफाली जोर जोर से हंसने लगी. मुझे भी हंसी आ गई.

फिर अंकुश भी पूल में उतरा और स्विमिंग करता हुआ हमारे पास आ गया.
मैं- अरे आपको तो काफी अच्छी स्विमिंग आती है.
अंकुश- जी हां … मैंने स्विमिंग में कभी मेडल्स भी जीते हैं और शेफाली को भी तो स्विमिंग मैंने ही सिखाई है.

शेफाली- हां रोमा, मुझे स्विमिंग अंकुश ने ही सिखाई है.
मैं- तो अंकुश जी मुझे भी सिखा दीजिए.

अंकुश- अरे तुम तो यहां स्विमिंग सीखने के लिए ही आती हो न … तो यहां के ट्रेनर ने अब तक तुम्हें तैरना नहीं सिखाया क्या?
मैं- हां वो ट्रेनर सिखाती तो है, पर मुझे तो लगता है कि उसे खुद ही ठीक से स्विमिंग नहीं आती है. मुझे तो शेफाली ही थोड़ा बहुत सिखा रही है.
अंकुश- ये तो गलत बात है. ट्रेनर को तो ठीक से सिखाना चाहिए. चलो कोई बात नहीं मैं आपको सिखा देता हूं.

तब अंकुश ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे पानी में उतारा और मुझे पानी में अच्छे से पैर चलना सिखाया, तो मैं पूल की वाल पकड़ कर पैर चलाने लगी. अब अंकुश ने मेरे पेट को सहारा दिया. शायद अंकुश को संकोच हो रहा था, पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था. मैं तो बस पैर चलाने में मस्त थी.

कुछ देर बाद मैंने अंकुश से कहा- प्लीज़, अब तुम मुझे फ्लोट करना सिखाओ न.
अंकुश ने मेरी तरफ देखा और जोर जोर से हंसने लगा. वो हंसते हुए कहने लगा कि इस स्विमिंग ड्रेस में या तो तुम फ्लोट कर सकती हो … या तो ये तुम्हारी स्विमिंग ड्रेस … दोनों एक साथ नहीं.

मैंने नाराज होते हुए कहा- क्यों क्या बुराई है इस ड्रेस में!
अंकुश बोला- सॉरी रोमा मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा रहा हूं … पर तुम्हारी ड्रेस ही इतनी बड़ी है कि तुम चाह कर भी इस ड्रेस में फ्लोटिंग नहीं कर पाओगी. स्विमिंग के लिए स्विमिंग ड्रेस जितनी छोटी होती है, उस ड्रेस में उतना ही स्विमिंग करना आसान होता है. जब मैं शेफाली को स्विमिंग सिखाता था, तो वो भी इतनी ही बड़ी ड्रेस पहनती थी. फिर मैंने उसे ये बिकिनी स्टाइल की टू-पीस स्विमिंग ड्रेस दिलाई थी. ये बहुत फ्री रहती है … इसमें स्विमिंग करना आसान होता है.

इस पर शेफाली बोली- रोमा, अंकुश ठीक बोल रहे हैं. पहले मुझसे भी स्विमिंग करते नहीं बनता था, पर अब देखो मैं भी काफी अच्छी स्विमिंग कर लेती हूं.

वहां 2-3 कपल भी थे, जो अपनी मस्ती कर रहे थे. फिर अचानक अंकुश को पता नहीं क्या सूझी, उसने शेफाली को पकड़ कर पूल में खींच लिया और वो दोनों मस्ती करने लगे.

उन दोनों की मस्ती कोई ऐसी वैसी मस्ती नहीं थी. वे दोनों एकदम कामुकता से भरी हुई मस्ती करने लगे थे. कभी अंकुश शेफाली की दोनों टांगों में हाथ डाल कर उसे ऊपर उठा देता तो कभी शेफाली खुद को बचाने के लिए अंकुश के शरीर का सहारा लेने के लिए उसके लंड को पकड़ ले रही थी.

उन दोनों की मस्ती देख कर मेरी चुत में तो मानो आग लग गई थी. मुझे अब किसी भी तरह अंकुश का लंड अपनी चुत में लेने का दिल करने लगा था. मगर ये सब कैसे होगा, ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.

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उनका लंड मेरी चूत में चला गया।

हैलो दोस्तो, मेरा नाम प्रीति है और मैं शामली की रहने वाली हूँ.. मैं अक्सर यहाँ हिंदी सेक्स कहानी और भैया से चुदाई कहानी पढ़ने आती हु..  आज आपके साथ मैं अपनी सच्ची कहानी बाँटने जा रही हूँ। सबसे पहले मैं आपको आपने बारे मैं बता दूँ.. मेरा फिगर 34-30-34 है। हम 3 बहनें और 1 भाई हैं। एक बहन मुझसे बड़ी है और एक मुझसे छोटी है.. भाई सबसे छोटा है।

यह बात आज से 3 साल पहले की है। जब मैं अपनी बुआजी के यहाँ घूमने गई थी और बुआजी बीमार भी थीं.. तो मैं वहाँ एक महीना रहने के लिए आई थी।

ठंड के दिन थे.. जनवरी का महीना था।

वहाँ मेरे भैया यानि की बुआजी के लड़के थे.. जो मुझे देख कर बहुत खुश हुए।

उनका नाम सचिन है.. वो मुझे अपनी सबसे अच्छी बहन मानते थे और मुझे बहुत प्यार करते थे।

जब मैं बुआ के घर पहुँच गई तो फूफा जी बुआ को हस्पताल दिखाने ले गए और उनको वहीं भरती कर देना पड़ा और वो घर वापस नहीं आ पाईं और उस रात को घर में सिर्फ हम दोनों ही थे, वो भी अकेले..

रात को खाना खा कर जब हम दोनों सोने चल दिए तो भैया ने कहा- दो बिस्तर की क्या जरूरत है.. आज एक बिस्तर में ही सो जाते हैं।

तो हम दोनों एक बिस्तर में ही लेट गए।

भैया को कपड़े निकाल कर सोने की आदत है.. तो वो कपड़े निकाल कर मेरे पास आ कर लेट गए।

मुझे बहुत अजीब सा लगा.. क्योंकि मैं आज तक किसी लड़के के साथ ऐसे नहीं लेटी थी।

भैया मेरी पढ़ाई के बारे में पूछने लगे और अपनी पढ़ाई के बारे में बताने लगे।

थोड़ी दर बात करने के बाद मुझे नींद आने लगी तो मैं भैया से कह कर सोने लगी।

वे भी सोने लगे।

अभी कुछ ही देर हुई होगी कि भैया का लंड मेरे पीछे मेरी गाण्ड में घुसने तो तैयार सा लगा।

तो मैंने अपने हाथ से हटाने के बहाने उसे छू कर देखा.. तो वो बहुत मोटा और लंबा था और गरम भी हो रहा था।

भैया भी अभी तक सोए नहीं थे।

जैसे ही मैंने उनके लंड को छुआ तो उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मुझे चुम्बन करने लगे।

मुझे भी अच्छा लग रहा था क्योंकि ये सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था।

मैं भी उनको चुम्बन करने लगी।

भैया ने पूछा- तेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड है क्या?

तो मैंने मना कर दिया। वैसे भी मेरा कोई ब्वॉय-फ्रेण्ड था भी नहीं..

भैया मुझे चुम्बन करते रहे, वे कभी गालों पर चूमते, कभी मेरे होंठों पर.. कभी पेट पर..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत गीली हो गई थी।

थोड़ी देर बाद भैया ने मेरी सलवार में अपना हाथ डाल दिया। मुझसे भी रहा नहीं गया तो मैंने भी उनके अंडरवियर में हाथ डाल दिया।

फिर भैया ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैन्टी नीचे करके मेरी चूत को चाटने लगे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर भैया ने मुझसे कमीज उतारने को कहा तो मैंने बिना देर किए अपना कमीज उतार दिया और ब्रा भी उतार दी।

अब मैं बिल्कुल नंगी भैया की बाँहों में थी। वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और पी भी रहे थे।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर बाद भैया अपना लंड हाथों में लेकर बोले- अब इसे अपने मुँह में ले ले।

मैंने कभी ऐसा किया नहीं था तो मैंने मना कर दिया।

उन्होंने अपनी कसम दी.. तो मैंने उनका लंड अपने मुँह में ले लिया।

थोड़ी देर चुसवाने के बाद उन्होंने अपना सारा माल मेरे मुँह में निकाल दिया।

फिर हम थोड़ी देर चुम्बन करते रहे।

चूमा-चाटी के बाद भैया का लंड फिर से खड़ा हो गया और वो मेरी चूत पर लवड़ा रख कर मुझसे बोले- मुझे होंठों से चुम्बन कर और नीचे अपनी जाँघों को ढीला कर..

मैंने ऐसा ही किया.. कुछ पलों तक चुम्बन करने के बाद उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा उनका आधा लंड मेरी चूत में चला गया।

मुझे बहुत दर्द हुआ.. मेरी चीख निकल जाती.. अगर भैया के होंठ मेरे होंठों में ना चिपके होते।

मेरी चूत से खून भी निकल रहा था..
इससे पहले मुझे थोड़ा आराम मिलता.. कि भैया ने एक और धक्का मारा.. अब पूरे का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।

फिर थोड़ी देर बाद जब मैं सामान्य हुई तो उन्होंने मुझसे पूछ कर धक्के मारने शुरू कर दिए।

करीब 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैं और भैया एक साथ झड़ गए।

भैया ने अपना लंड और मेरी चूत मेरी पैन्टी से साफ़ की और मुझे दर्द की गोली ला कर दी।

उस रात भैया ने मुझे 3 बार चोदा.. चुदाई करने के बाद हम नंगे ही सो गए।

बुआजी दो दिन बाद आईं.. इन दो दिनों में हमने खूब मज़े किए।

एक बार तो मैं दिन में रसोई में भी चुदी…

उस दिन के बाद भैया मेरे लवर बन गए और भी एक साल बाद मैं दोबारा बुआजी के घर गई तो बुआजी और फूफाजी कहीं बाहर चले गए तो भैया ने मेरी माँग भर दी और मुझे अपनी घरवाली बना लिया.. वे मुझे साड़ी पहनाने लगे।

मुझे साड़ी पहना कर उन्होंने मुझसे कहा- आज हमारी सुहागरात है।

हमने सुहागरात मनाई।

आज भी हम दोनों सब के सामने भाई-बहन हैं और अकेले में पति-पत्नी की तरह रहते हैं।

अब मेरे भैया मेरी जान बन गए हैं।

मैंने उनका नाम प्यार में ‘जानू’ रखा है। हमें जब भी मौका मिलता है चुदाई जरूर करते हैं।

तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। कैसी लगी आपको..

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