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बेकाबू जवानी की मजबूरी

कॉलेज के सेकंड ईयर के एग्जाम खत्म होने के बाद मैं घर में ही थी. मुझे घर में बहुत बोरियत लग रही थी.

एक दिन में सुबह न्यूज़ पेपर पढ़ रही थी, तो उस न्यूज़ पेपर में एक पंपलेट निकला जो स्विमिंग क्लासेज को लेकर था. उसे पढ़कर मेरे मन में आया क्यों न मैं स्विमिंग क्लासेज जॉइन कर लूं, इससे मेरा टाइम भी पास हो जाएगा और मैं स्विमिंग भी सीख लूंगी.

बस मैंने मम्मी से पूछा कि मुझे स्विमिंग सीखनी है … ये एक पंपलेट निकला है … क्या मैं इसे ज्वाइन कर लूं?
मम्मी ने भी हां कर दी.

अगले दिन मैं उस स्विमिंग इंस्टीटूट में अपना एड्मिशन करवाने के लिए गई. वहां रिसेप्शन पर एक लड़की बैठी थी. मेरी उससे सारी बातें हुईं. उसने मुझे स्विमिंग फीस के बारे में बताया. उसके साथ मेरी कुछ और भी बहुत सारी बातें हुईं. मैंने अपना एड्मिशन करवा लिया.

मैंने उससे टाइमिंग पूछा, तो उसने मुझे दोपहर में दो से चार की टाइमिंग बताते हुए कहा कि ये टाइमिंग लड़कियों के लिए है. इसके लिए स्विमिंग ट्रेनर भी एक लड़की ही है.

ये सुनकर मेरा तो जैसे दिल ही टूट गया था. सच कहूं दोस्तो … तो मैं ये स्विमिंग क्लासेज नए लंड की तलाश में ही जॉइन कर रही थी कि कहीं से मुझे कोई नया लंड मिल जाए, पर मुझे ये नहीं पता था कि इसमें सच में कोई लंड मिल जाएगा.

मुझे अगले दिन से स्विमिंग ड्रेस साथ लेकर आने के लिए कहा गया.

जब स्विमिंग ड्रेस की बात सामने आई तो मैंने सोचा कि क्यों न स्विमिंग ड्रेस ले ली जाए.

मैं उधर से सीधे मार्किट चली गई. मैंने एक स्विमिंग ड्रेस ली और घर आ गई. अगले दिन से मुझे स्विमिंग के लिए जाना था, पर वहां लड़के तो होने नहीं वाले थे, फिर भी मैं एक्साईटिड थी.

अगले दिन मैं समय से पहले घर से निकली. स्विमिंग इंस्टिट्यूट मेरे घर से थोड़ा दूर था, तो मैं एक ऑटो लेकर स्विमिंग इंस्टिट्यूट की ओर निकली और कुछ समय बाद वहां पहुंच गई.

रिसेप्शनिस्ट ने मुझे स्विमिंग पूल की तरफ ले गई और उसने मुझे मेरी स्विमिंग ट्रेनर से मिलवाया. मेरी उस ट्रेनर से थोड़ी बातचीत हुई. फिर उसने मुझसे कहा- जाओ … आप चेंज करके आओ.
उसने मुझे चेंजिंग रूम का रास्ता बताया, तो मैं चेंज करने चली गई.

जब मैं चेंज करके बाहर आई, तो मुझे ट्रेनर ने कहा- चलिए अब आप पूल में आ जाइए.
मैं पूल में चली गयी.

ट्रेनर ने मुझसे कहा- पहले आप अपना पैर चलना सीख लीजिये, ये किनारा पकड़ कर अपने शरीर को ऊपर उठाइए और पानी में पैर चलाइए.
मैं पैर चलाने लगी.
ट्रेनर ने कहा कि मुझे कुछ दिन ऐसे ही प्रैक्टिस करनी होगी. ट्रेनर ने कुछ और प्रैक्टिस रोज करने के लिए भी कहा.

कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा. मेरी दो से चार की टाइमिंग में बहुत ही कम लोग आते थे. सिर्फ 3-4 लड़कियां ही थीं. उनमें से एक लड़की से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई. उसका नाम शेफाली था, वो शादीशुदा थी और काफी अमीर घराने की लगती थी.

देखते ही देखते हम दोनों काफी अच्छी सहेलियां बन गईं. वो मुझे स्विमिंग सीखने में काफी मदद करती थी. उसे काफी अच्छी स्विमिंग आती थी.

एक दिन मैंने उससे पूछा- आपको तो इतनी अच्छी स्विमिंग आती है, तो फिर भी आप यहां सीखने क्यों आती हैं?
इस पर उसने मुझे बताया- मैं यहां सीखने नहीं, सिर्फ स्विमिंग के लिए ही आती हूं. मेरे हस्बैंड पूरा दिन ऑफिस में होते हैं … तो मैं घर में बोर होती हूं. इसलिए यहां मैं स्विमिंग के लिए आती हूं. स्विमिंग से बॉडी फिट रहती है … बस इसलिए.

मैंने पूछा- आपके हस्बैंड क्या करते हैं?
उसने बताया- वो एक बहुत बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.
इसी तरह की कुछ और बातचीत के बाद हम दोनों जुदा हो गयी.

एक दिन मैं स्विमिंग इंस्टिट्यूट से घर जाने के लिए निकली और ऑटो के लिए इन्तजार कर रही थी कि तभी शेफाली अपनी कार लेकर आई.
उसने मुझसे कहा- चलो मैं तुम्हें ड्राप कर देती हूं.
मैंने उसे मना किया.
उसने मुझसे पूछा- अच्छा ये तो बताओ तुम्हारा घर किस तरफ है?
मैंने उसे अपने घर की लोकेशन बताई, तो उसने कहा कि मैं भी तो उसी तरफ से आती हूँ … चलो मैं तुम्हें ड्राप कर दूंगी.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी कार में बैठ गई. उसने मुझे बताया कि उसका घर भी मेरे घर से करीब दो किलोमीटर और आगे है.
मैं उसे शुक्रिया कहने लगी.

इस पर उसने कहा- अब से तुम ऑटो से मत आया करो. मैं ही तुमको रोज लेने आ जाऊंगी … और छोड़ भी दूंगी.

इसी तरह उसके साथ मेरी गहरी छनने लगी.

दिन बीतने लगे. अब तो कभी कभी मैं उसे अपने घर भी ले आती मम्मी से मिलाती और अपने कमरे में ले जाकर उससे काफी देर तक बातें करती रहती.

एक दिन वो मुझे लेने नहीं आई, तो मैंने उसे फोन किया. उसने मुझे बताया कि आज मेरी कार खराब हो गई है … लेकिन तुम चिंता मत करो … मैं अपने हस्बैंड के साथ आ रही हूँ.

करीब 15-20 मिनट के बाद वो आई. कार उसके हस्बैंड चला रहे थे.

तब पहली बार मैंने शेफाली के हस्बैंड को देखा था. शेफाली का हस्बैंड बहुत ही स्मार्ट था. बड़ी ही स्ट्रांग पर्सनैलिटी थी. उसकी उम्र करीब 30 साल की होगी. वो बहुत ही हॉट लग रहा था. उसने ग्रे कलर का थ्री-पीस समर सूट पहन हुआ था. उसे देख कर मेरी तो चूत मचल उठी थी.

वो दोनों कार से नीचे उतरे. शेफाली ने मुझे अपने हस्बैंड से मिलवाया.

शेफाली- अंकुश ये रोमा है, मैंने तुम्हें बताया था न कि ये मेरे साथ स्विमिंग के लिए जाती है.
अंकुश- हैलो रोमा … नाइस टू मीट यू.
मैं- हैलो सर.
अंकुश- डोंट कॉल मी सर, जस्ट कॉल मी अंकुश.
मैं- ओके अंकुश.

हमारी ऐसे ही कुछ नार्मल सी बातें हुईं. फिर शेफाली ने कहा- चलो रोमा, स्विमिंग का टाइम हो रहा है. हम वैसे ही लेट हो गए हैं.
अंकुश- शेफाली अभी मेरी एक मीटिंग है. मैं चार बजे तुम दोनों को लेने के लिए आ जाऊंगा.
शेफाली- ओके हनी.

अंकुश हम दोनों को छोड़ कर जा चुका था, पर मेरे मन में उसी का चेहरा सामने आ रहा था.

फिर शाम चार बजे अंकुश हमें लेने भी आया.

अब तो कभी कभी अंकुश ही हमें स्विमिंग के लिए छोड़ने और लेने आता था.

कुछ दिन ऐसे ही और निकल गए.

फिर एक दिन संडे को शेफाली मेरे घर आई और उसने मुझसे कहा- चलो स्विमिंग के लिए चलते हैं.
हालांकि संडे को स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता था तो मैंने उससे कहा- शेफाली तुम भूल रही हो, आज संडे है. आज स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हॉलिडे होता है.

उसने कहा कि हां मुझे याद है, पर संडे के दिन स्विमिंग इंस्टीट्यूट में फैमिली अलॉउड होती है … और आज अंकुश भी हमारे साथ स्विमिंग के लिए चल रहा है. वो नीचे कार में इन्तजार कर रहा है. तुम जल्दी से तैयार हो कर आ जाओ.

ये सुन कर कि अंकुश भी स्विमिंग के लिए आ रहा है, मैं बहुत खुश हो गई. मैं जल्दी से तैयार होकर बाहर आई और कार में बैठ गई.
फिर हम स्विमिंग इंस्टीट्यूट पहुंचे.

उधर हम तीनों चेंजिंग रूम की तरफ बढ़े. जेन्ट्स ओर लेडीज चेंजिंग रूम दोनों अगल बगल में ही थे. मैं और शेफाली लेडीज चेंजिंग रूम की तरफ बढ़ गए और अंकुश अपना बैग लिए जेन्ट्स में चल गया.

चूंकि आज संडे होने की वजह सिर्फ फैमिली ही अलाउड रहती थीं. मगर तब भी आज स्विमिंग पूल में ज्यादा कोई नहीं थे. बस तीन कपल और एक फैमिली थी, जिनके साथ दो बच्चे थे.

हम तीन थे, मैं और शेफाली तो चेंज करके पूल में उतर गए थे, पर मुझे अंकुश अभी तक दिखाई नहीं दिया था.

मैं उसी की तरफ मतलब जेन्ट्स के चेंजिंग रूम की ओर नजरें गड़ाए हुए थी.

जैसे ही वो निकला, तो मैं उसे देखती ही रह गई. अंकुश सुपर हॉट लग रहा था. उसका गठीला बदन देख कर मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था. उसने सिर्फ एक छोटी सी स्विमिंग वाली अंडरवियर ही पहने हुई थी, जिसमें से उसका उभरा हुआ बड़ा सा लंड अलग से ही दिखाई दे रहा था.

मैं तो उसे देखते दखते ही पूल के किनारे बैठी बैठी पूल में गिर पड़ी. मुझे गिरता देख शेफाली जोर जोर से हंसने लगी. मुझे भी हंसी आ गई.

फिर अंकुश भी पूल में उतरा और स्विमिंग करता हुआ हमारे पास आ गया.
मैं- अरे आपको तो काफी अच्छी स्विमिंग आती है.
अंकुश- जी हां … मैंने स्विमिंग में कभी मेडल्स भी जीते हैं और शेफाली को भी तो स्विमिंग मैंने ही सिखाई है.

शेफाली- हां रोमा, मुझे स्विमिंग अंकुश ने ही सिखाई है.
मैं- तो अंकुश जी मुझे भी सिखा दीजिए.

अंकुश- अरे तुम तो यहां स्विमिंग सीखने के लिए ही आती हो न … तो यहां के ट्रेनर ने अब तक तुम्हें तैरना नहीं सिखाया क्या?
मैं- हां वो ट्रेनर सिखाती तो है, पर मुझे तो लगता है कि उसे खुद ही ठीक से स्विमिंग नहीं आती है. मुझे तो शेफाली ही थोड़ा बहुत सिखा रही है.
अंकुश- ये तो गलत बात है. ट्रेनर को तो ठीक से सिखाना चाहिए. चलो कोई बात नहीं मैं आपको सिखा देता हूं.

तब अंकुश ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे पानी में उतारा और मुझे पानी में अच्छे से पैर चलना सिखाया, तो मैं पूल की वाल पकड़ कर पैर चलाने लगी. अब अंकुश ने मेरे पेट को सहारा दिया. शायद अंकुश को संकोच हो रहा था, पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था. मैं तो बस पैर चलाने में मस्त थी.

कुछ देर बाद मैंने अंकुश से कहा- प्लीज़, अब तुम मुझे फ्लोट करना सिखाओ न.
अंकुश ने मेरी तरफ देखा और जोर जोर से हंसने लगा. वो हंसते हुए कहने लगा कि इस स्विमिंग ड्रेस में या तो तुम फ्लोट कर सकती हो … या तो ये तुम्हारी स्विमिंग ड्रेस … दोनों एक साथ नहीं.

मैंने नाराज होते हुए कहा- क्यों क्या बुराई है इस ड्रेस में!
अंकुश बोला- सॉरी रोमा मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ा रहा हूं … पर तुम्हारी ड्रेस ही इतनी बड़ी है कि तुम चाह कर भी इस ड्रेस में फ्लोटिंग नहीं कर पाओगी. स्विमिंग के लिए स्विमिंग ड्रेस जितनी छोटी होती है, उस ड्रेस में उतना ही स्विमिंग करना आसान होता है. जब मैं शेफाली को स्विमिंग सिखाता था, तो वो भी इतनी ही बड़ी ड्रेस पहनती थी. फिर मैंने उसे ये बिकिनी स्टाइल की टू-पीस स्विमिंग ड्रेस दिलाई थी. ये बहुत फ्री रहती है … इसमें स्विमिंग करना आसान होता है.

इस पर शेफाली बोली- रोमा, अंकुश ठीक बोल रहे हैं. पहले मुझसे भी स्विमिंग करते नहीं बनता था, पर अब देखो मैं भी काफी अच्छी स्विमिंग कर लेती हूं.

वहां 2-3 कपल भी थे, जो अपनी मस्ती कर रहे थे. फिर अचानक अंकुश को पता नहीं क्या सूझी, उसने शेफाली को पकड़ कर पूल में खींच लिया और वो दोनों मस्ती करने लगे.

उन दोनों की मस्ती कोई ऐसी वैसी मस्ती नहीं थी. वे दोनों एकदम कामुकता से भरी हुई मस्ती करने लगे थे. कभी अंकुश शेफाली की दोनों टांगों में हाथ डाल कर उसे ऊपर उठा देता तो कभी शेफाली खुद को बचाने के लिए अंकुश के शरीर का सहारा लेने के लिए उसके लंड को पकड़ ले रही थी.

उन दोनों की मस्ती देख कर मेरी चुत में तो मानो आग लग गई थी. मुझे अब किसी भी तरह अंकुश का लंड अपनी चुत में लेने का दिल करने लगा था. मगर ये सब कैसे होगा, ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.

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73 thoughts on “बेकाबू जवानी की मजबूरी

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