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दारुबाज पति ने लॉक डाउन में दोस्तों से चुदवाया

दोस्तों कई रिश्ते ऐसे होते हैं जिसपर भरोसा होता है की वो जो भी करेगा भले के लिए करेगा पर कई बार ये बचाने वाला ही कई बार बेच देता है। ऐसा ही मेरे साथ आजकल हो रहा है। घर में खाने को नहीं है पति को दारू भी रोजाना चाहिए घर में राशन नहीं है। पति ने कहा आजकल मेरा काम नहीं चल रहा है। इसलिए अब तेरे पर ही आशा है। ये सब कहकर मुझे फंसा दिया और सौंप दिया अपने दोस्तों को। अब मेरी चुदाई रोज हो रही है। आह आह की आवाज और पलंग टूटने की आवाज शायद उसको भी सुनाई पड़ता होगा। क्यों की मैं कमरे में चुदती हूँ और वो बाहर सोया रहता है।

आप खुद सोचिये किसी की बीवी कमरे में आह आह आह ओह्ह ओह्ह ओह्ह और जोर से और जोर से चोदो कहे और उसका पति ये सब चुपचाप सुनता रहे उसको आप क्या कहेंगे।

दोस्तों एक बात और मैं आपको बता देना चाहती हूँ। ये सब मज़बूरी में उठाया गया कदम था पर ये मज़बूरी अब मुझे अच्छी लगने लगी है। मैं खुश हूँ चुद कर। क्यों की जब इसमें मजे आने लगे और मेरी जरुरत भी पूरी होने लगे और खुद मैं भी मजे करूँ तो क्या बुराई है।

अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ और बताती हूँ कैसे क्या हुआ।

रमेश गुर्जर मेरे पति के दोस्त हैं। बहुत पैसे वाले हैं। मेरा पति एक छोटी सी नौकरी करता है। आजकल काम बंद है तो घर पर ही है मालिक ने पैसे भी नहीं दिए मेरी कोई बच्चा अभी तक नहीं है शादी के तीन साल हो गए हैं। हॉट हूँ सुन्दर हूँ और ज्यादा उम्र भी नहीं हुआ है कम उम्र में शादी हो गई है। पर पति की उम्र ज्यादा है आजतक कभी भी वो मुझे चुदाई में खुश नहीं कर पाया जब तक मैं गरम होती हूँ तब तक वो ठंढा हो चुका होता है।

लॉक डाउन में रमेश जी मेरे घर का काफी ख़याल रखे हैं। पति को भरपूर मदद किये है। पति को दारु से लेकर घर के खर्चे और घर किराये तक का सभी का इंतज़ाम उन्होंने किया और नकद भी मदद किया।

रमेश जी की शादी इसी साल हुई है पर बीवी अब उनके साथ नहीं है पुराने यार के साथ भाग गई है। और मेरे पति को मदद करने का कारन शायद मैं हूँ। उनकी निगाहों जालिमो वाली मेरे ऊपर हमेशा से ही रहा है पर करीब नहीं आये शायद वो लम्बे रेस का घोडा बनना चाहते हैं इसलिए सब कुछ धीरे धीरे कर रहे हैं।

एक दिन उन्होंने पति को अपनी जाल में फंसा लिया और मुझे सौंपने के लिए राजी कर कर लिया। मेरे पति को भी शायद इसकी जरुरत थी। मेरे पति को भी लगता था की मैं भाग जाउंगी क्यों की वो ना मेरे खर्चे पूरा कर पा रहा था ना तो मेरी चुदाई कर पा रहा था। इसलिए सेफ साइड से वो रमेश जी को मेरी ज़िंदगी में घुसाना चाह रहा था। ताकि मैं भी रह जाऊं और सब काम भी हो जायेगा और आजकल का समय भी गुजर जाये।

एक दिन पति को खूब दारु पिलाया उन्होंने देर रात तक मेरे यहाँ भी रहे जब मेरा पति उलट गया पी कर तब वो मेरे करीब आ गए। और मेरा हाथ पकड़ लिए। और कहने लगे मैं वो सारी ख़ुशी आपको दूंगा जो आपके पति नहीं दे पाए और सच तो ये है की मैं उनको भी आगे बढ़ाऊंगा। आप इसको गलत मत लेना। पर मैं आपको बहुत चाहता हूँ और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ। पहले तो लगा की शायद ये गलत है पर सोची की गलत क्या है इसमें ? मुझे वो सारी खुशियां मिल जाएगी तो मैं भी राजी हो गई।

मैं चुप रह गई और अपने आँचल को निचे कर दी बड़ी बड़ी चूचियां गोल गोल और टाइट। होठ मेरे फड़फड़ा रहे थे मेरी साँसे तेज हो रही थी। ऐसा लग रहा था आज मेरी सुहागरात है। दोस्तों मैं डर भी रही थी और खुश भी थी। ये मौक़ा मैं खोना भी नहीं चाहती थी। पर एक कोने में ये भी बात था की ये गलत है। ये सब सोचते सोचते सोचते लेट गई।

रमेश जी दरवाजा बंद कर दिए मेरा पति बरामदे पर सो गया था पी कर। रमेश जी मेरे करीब आये और ब्लाउज का हुक खोलने लगे और एक ऊँगली को मेरे होठ पर फिराने लगे। मेरे रोम रोम सिहर रहे थे। अजीब सा लग रहा था कंठ सुख रहे थे। उन्होंने ब्लाउज का बटन खोल दिया मैं साइड उल्ट गई वो हुक ब्रा का भी खोल दिए मैं ब्रा खुद से उतार दी और निचे गिरा दी।

मेरी चूच ऐसी है जैसे किसी अठारह साल की लड़की का हो। ऐसा लगता है जैसे आजतक किसी ने टच नहीं किया हो। गुर्जर मेरी चूच देखकर ही फ़िदा हो गया। वो तो टूट पड़ा चूच पर पीने लगा दबाने लगा खेलने लगा। फिर मैं साडी निचे फेंक दी और पेटीकोट का नाडा खोल दिया। बाकी पेंटी तो रमेश जी खुद उतार दिए। और मेरी चूत की बाल को चाटने लगे और चूत में जीभ घुसाने लगे। मैं तर बतर होने लगी। पसीन निकलने लगे मेरे माथे से।

चूत गीली हो गई। अब वो अपने सारे कपडे उतार दिए। अपना मोटा लौड़ा मेरी दोनों चूचियों के बिच रगड़ने लगे फिर वो मेरी मुँह में दे दिया। करीब दो मिनट में ही उनका लौड़ा मोटा और करीब आठ इंच लंबा हो गया।

अब वो चुदाई के लिए तैयार थे और मैं भी अपनी चुदाई के लिए तैयार थी। मैं दोनों पैरों को अलग अलग कर दी। वो बिच में आ गए अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के बीचोबीच रखे और जोर से घुसा दिए। मैं तकिये को जोर से पकड़ ली। फरफरा गई दर्द से। कहा तीन इंच का छोटा लंड मेरे पति का और आज आठ इंच का लैंड और तीन इंच मोटा। पहली बार गया।

दो तीन चोट उन्होंने मारा और फिर चूत भी गीली हो गई थी। अब लौड़ा अंदर बाहर होने लगा। मैं आह आह करने लगी। करंट लग रहा था पुरे शरीर में। आज मुझे असली मर्द मिला था। लॉक डाउन में तो मेरी मनोकामना पूर्ण हो रही थी। और घर में खुशियां भी आ रही थी।

अब वो जोर जोर से चोदने लगे और मैं भी अपनी वासना की आग बुझाने लगी शर्म छोड़कर। मैं खुद ही चूचियां दबाती उनको किस करती। उनके छाती को सहलाती और चुदवाती। मैं काफी जोश में आ गई थी। इसलिए आवाज तेज हो गई और कहने लगी चोदो मुझे चोदो खूब चोदो। मैं चाहती हूँ मेरे बच्चे का बाप भी आप ही बनो। आह आह आह आह घुसाओ पूरा और घुसाओ। कितना मोटा लौड़ा है आपका गुर्जर जी मजा आ गया आज मेरी प्यास बुझ गई है।

आप मुझे रोजाना चोदना और मेरे घर पर भी ध्यान रखना पति को भी खुश रखना ताकि वो सौंपे आपको और आप मुझे खूब चोदो ऐसे ही चोदो मेरी रात आप ही रोजाना रंगीन करो। मैं आपको प्रेमिका आपकी रखैल बन्ना चाहती हूँ। अब मैं आपकी हूँ आप चाहे तो चूत मारो या गांड मैं मना नहीं करुँगी। और आह आह आह करने लगी।

तभी मेरा पति जग गया दरवाजा खटखटा कर बोला। धीरे बोल ले बाहर तक आवाज आ रही है। पर मैं कहा रुकने वाली मैं बोली सो जा तू। आज मुझे अपनी गर्मी बुझा लेने दे।

दोस्तों फिर उन्होंने उलट कर पलट कर खड़ा कर के निचे बैठा के ऊपर लेके खूब चोदा और मैं भी खूब चुदवाई। करीब रात के ढाई बज गए थे। फिर हम दोनों एक साथ ही नंगे सो गए।

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