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एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिया है, और मैं ग्वालियर की रहने वाली हूँ। शुरुआत से ही मेरी जिंदगी में कुछ भी अच्छा नही चल रहा था। मैं काफी परेशान रहने लगी थी। शादी के बाद तो मेरी जिंदगी और भी बर्बाद हो चुकी थी, लेकिन फिर मेरी जिंदगी में मेरी मुलाकात एक ऐसे इंसान के साथ हुई जिसने मेरी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया था। आज मैं आपको अपनी जिंदगी के कुछ बुरे लम्हों के साथ ही आपको अपनी सच्ची सेक्स स्टोरी भी सुनाने जा रही हूं, तो आप इसे जरा ध्यान से सुनियेगा।

मेरा जन्म ग्वालियर के एक गरीब परिवार में हुआ था। मैं भले ही गरीब थी, लेकिन मेरे घर वालों ने मुझे किसी शहजादी की तरह पाला ओर बड़ा किया था। मैं स्कूल के समय से ही काफी खूबसूरत लड़की थी। मेरा रंग गोरा ओर साफ था और मेरे शरीर की बनावट को देख कर तो लोगों का दिमाग ही खराब हो जाया करता था। जो भी मुझे एक बार देख लेता था, तो बस देखता ही रह जाया करता था। मुझे लड़कों के साथ बिल्कुल भी रहने नही दिया जाता था। मुझे काफी संस्कारों से पाला गया था, इसलिए में पूरी तरह से एक संस्कारी लड़की थी। स्कूल खत्म हो जाने के बाद अब मुझे कॉलेज में प्रवेश लेना था। उस समय मेरा शरीर और भी ज्यादा उभर गया था। मेरी पूरी जवानी बाहर निकलती हुई दिखाई पड़ती थी। मेरे घर वाले गरीब थे, ओर हर गरीब परिवार की तरह मेरे परिवार वाले भी बदनामी होने से काफी डरते भी थे। यही वजह थी कि मुझे कॉलेज जाने से पूरी तरह से मना कर दिया गया था। लेकिन कॉलेज जाने का मेरा काफी मन था, इसलिए काफी जिद करने के बाद आखिरकार, मेरे घर वाले मुझे कॉलेज भेजने के लिए मान गए थे। कॉलेज में सभी लड़के मुझे काफी गंदी निगाहों से देखते थे। वे सभी मुझे ऐसे घूरा करते थे, जैसे मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी हूँ। कॉलेज में एक लड़का मेरे काफी पीछे पड़ा हुआ था। जब मैने उसकी हरकतों के बारे में घर पर बताया तो उल्टा घर वालों ने मुझे ही चिल्ला कर मेरा जाना बंद करवा दिया था।

मैं बड़ी हो चुकी थी, इसलिए परिवार का मेरे प्रति दबाव बढ़ता ही जा रहा था। हम गरीब परिवार के थे, इसलिए हमारे परिवार के कुछ लोग मेरी शादी के लिए भी हमारे परिवार पर दबाव बनाए जा रहे थे। काफी समय से हमारे परिवार पर कर्जा भी बढ़ता ही जा रहा था। परिवार पर कर्जा हो जाने के कारण मैं भी काफी परेशान रहने लग गयी थी। कुछ दिन बाद ही हमारे घर में एक अमीर परिवार का रिश्ता आया था। रिश्ता लेकर आये लड़के के माँ बाप को मैं काफी पसंद आ गयी थी। लेकिन मुझे वह लड़का बिल्कुल भी पसंद नही आया था। कुछ दिन मेने लड़के से अकेले में मिल कर बातचीत की जिससे कि हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से जान सकें। वो लड़का मेरे शरीर को बहुत ही गंदी निगाहों से देखता था, ओर उसके इरादें भी मुझे बिल्कुल भी अच्छे नही लग रहे थे। वो मुझे किसी भी तरह हासिल करना चाहता था, इसलिए वो मेरे परिवार को पैसे का दिखावा किये जा रहा था। मेरे परिवार को खुश करने के लिए उसने हमारे कर्जे को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया था।

मुझे उस लड़के के इरादे बिल्कुल भी अच्छे नही लग रहे थे, ओर मैं उस लड़के से शादी करने के लिए परिवार को मना करना चाहती थी। लेकिन मैंं परिवार के बोझ के तले काफी ज्यादा दब चुकी थी। यही वजह थी कि मैने उस लड़के से शादी करने के लिए परिवार को हाँ कह दी थी। कुछ दिन बाद ही हमारी शादी हो चुकी थी। शादी के कुछ दिन बाद ही हम हनीमून के लिए नेपाल गए हुए थे। नेपाल के बहाने उस लड़के को मेरे शरीर के साथ खेलने का मौका मिल गया था, जो वो इतने समय से मेरे साथ करना चाहता था। हनीमून के पहले दिन ही जब हम दोनों थक कर रात को सो रहे थे। तभी उस लड़के यानी की मेरे पति ने मुझे कमर पर हाथ फेरना शरू कर दिया था। मैं जैसे ही उसकी तरफ पलट के सोई उसने मुझे देख कर किस करना शुरू कर दिया था। उसने दारू पी रखी हुई थी और वह काफी नशे में भी था। इसलिए वह मेरी इजाज़त नही होने के बाद भी मेरे शरीर को चूमता ही जा रहा था।

कुछ ही देर में उसने मेरे ब्लाउज को भी खोल दिया था। वह मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को चूमता जा रहा था। यह सब मेरी मर्जी के बिना हो रहा था। लेकिन फिर भी मेरे शरीर की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, जो कि मेरे चेहरे से साफ झलक रही थी। कुछ देर बाद उसने मेरी ब्रा को उतार कर मेरे बूब्स को भी आजाद कर दिया था। वह बिल्कुल बेरहमी से मेरे बूब्स को चूमता ही जा रहा था। वो जोर-जोर से मेरे बूब्स को मसले जा रहा था, जिससे मेरी सांस बहुत गहरी ओर तेज होती जा रही थी। मेरी साँसों की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। कुछ देर बाद उसने मुझे चूमते हुए मेरे पेटीकोट ओर पेंटी को भी उतार दिया था। अब वह मेरे पेट को चूमते हुए मेरी योनि को चाटते जा रहा था। इस सब से मैं काफी ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी। करीब ऐसे ही 20 मिनट तक वह मेरी चुत को अपने जीभ से चाटता रहा और फिर वह अपनी उंगली से मेरी चुत में तेजी से उंगली करने लग गया था। मेरी आँखों मे से आंसू निकल रहे थे, क्योंकि मैं समझ चुकी थी की उसने मुझसे मेरी खूबसूरती की वजह से शादी की थी।

कुछ देर बाद ही उसने अपने कड़क लंड को बाहर निकाल दिया था। अब शादी हो चुकी थी, इसलिए मैं कुछ कह भी नही सकती थी। कुछ ही देर मैं उसने मेरे योनि की दिवार पर अपना लंड रख दिया था। इसके बाद उसने एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था। इस कार्यवाही से मेरी तेज चीख निकल गयी थी, ओर मुझे रोना ही आ गया था। लेकिन वो मुझे काफी बेरहमी से चोदता ही जा रहा था। वह मेरी मर्जी के बिना मुझे अलग अलग पोजिशन में चोदे जा रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी जबरदस्त चुदाई की मुझे उस दिन मेरी सभी भूल याद आ रही थी। वो काफी नशे में था और मुझे बहुत ही बुरी तरह से चोदता ही जा रहा था। मेरी चीख पूरे होटल में गूंज रही थी। कुछ 2 घंटे के ब्रेक में उसने मेरे साथ रात भर करीब दो बार चुदाई की थी। जिसके बाद उसने अपने गर्म वीर्य मेरी चुत में ही छोड़ दिया था। हनीमून मनाने के बाद हम अब घर लौट चुके थे। शादी के बाद ही धीरे-धीरे उस लड़के ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए थे। वो अक्सर शराब पीकर घर आया करता था, ओर मेरे साथ गाली गलौच किया करता था। अगर मैं गलती से किसी पडौसी के साथ बात भी कर लेती थी, तो वह मेरे साथ मारपीट करने लग जाया करता था। मैं अपने परिवार को कभी परेशान नही करना चाहती थी, इसलिए मैंने कभी इस बारे में अपने परिवार वालों को नही बताया था।

मेरी जिंदगी पूरी तरह से बरबाद हो चुकी थी। मैं बस अपने पति के लिए चुदाई की एक मशीन ही बनकर रह गयी थी। मेरे पति रोज शराब पीकर आते थे, ओर बस मुझे चौदने के लिए ही मेरे साथ रहते थे, वरना वे कुछ दिनों तक बाहर ही रहा करते थे। ऐसा करीब 2 साल तक चलता रहा और अब तक हमारा एक छोटा बच्चा भी हो गया था। एक दिन मेरी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने मेरी जिंदगी को बदल कर ही रख दिया था। एक दिन हमारे पड़ोस में ही राजीव नाम के एक सज्जन व्यक्ति अपने काम के सिलसिले में रहने के लिए आये हुए थे। पेशे से वे एक राइटर थे। अपनी मीठी बातों से उन्होंने पूरे मौहल्ले में कुछ ही दिनों में अपनी पहचान बना ली थी। मैं अक्सर जब कपड़े सुखाने के लिए अपनी छत पर जाया करती थी, ठीक उसी समय राजीव भी उनकी छत पर किताबें पड़ा कड़ते थे। उनकी छत हमारी छत से काफी करीब थी। कुछ दिन बाद मेने देखा कि जब भी मैं कपड़े सुखाने के लिए छत पर आती थी, तो राजीव मुझे चुपके से देखा करते थे। वैसे तो मुझे भी राजीव अच्छे लगते थे, लेकिन शादी शुदा होने के कारण मैं उन पर ज्यादा ध्यान नही दिया करती थी।

ऐसे ही कुछ दिनों बाद मेरी भी राजीव को देखने की आदत लग गयी थी। पहले तो हम मुस्कुरा कर एक दूसरे को देखा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे राजीव ओर मैं एक दूसरे से छत पर ही बातें भी करने लग गए थे। राजीव काफी अच्छे इंसान थे, उन्होंने मेरे बारे में सबकुछ जाने के बाद मुझे काफी समझाया ओर सहानुभूति भी दी। कुछ दिन तक हम फ़ोन पर एक दूसरे से बातें करने लगे और फिर कुछ ही दिनों में हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया था। उस दिन के बाद स मेरी दुःख से भरी हुई जिंदगी तुरंत ही सुख में बदल गयी थी। मेरे पति जब बाहर रहते थे, तब मैं रोजाना राजीव के साथ फ़िल्म देखने और बाहर घूमने चले जाया करती थी। राजीव के साथ मेरी जिंदगी बिल्कुल वैसी ही चल रही थी, जैसा कि मैं हमेशा से चाहती थी। अब जाकर मैं बिल्कुल खुश थी। जब कुछ दिनों के लिए मेरे पति कही बाहर गए हुए थे, तभी एक दिन मेने राजीव को अपने घर पर रात रुकने के लिए बुला लिया था। राजीव उस दिन अपने साथ वोदका की एक बड़ी बोतल लाया हुआ था। उस दिन हमने रात में काफी ज्यादा नशे कर लिए थे।

नशे करने के बाद हमने एक दूसरे के साथ काफी बातें की ओर फिर मेने अपने बच्चे को सुला देने के बाद में राजीव के साथ एक रूम में चली गयी थी। रूम के अंदर पहले राजीव ने मुझे कुछ देर तक मुस्कुराते हुए देखा और फिर बातें करते हुए उन्होंने मुझे होंठों पर चूमना शुरू कर दिया था। पहली बार मुझे किसी का इस तरह से चूमना काफी अच्छा लग रहा था। अब मैं पहली बार किसी के साथ खुशी से ओर अपनी मर्जी से संभोग सुख का आनंद लेने वाली थी। राजीव के चूमने के बाद मेने भी उसकी जांगों पर हाथ फेरतें हुए उसे चूमना शुरू कर दिया था। राजीव मेरे पल्लू को गिराते हुए मुझे गले, गाल ओर बूब्स के ऊपरी हिस्से पर चूमते ही जा रहे थे। उन्होंने कुछ ही देर में मेरी उत्तेजना को पूरी तरह से जगा दिया था। मेने बिना इंतजार करते हुए राजीव की शर्ट को उतार कर उसे ऊपर से नँगा कर दिया था। उसका शरीर काफी दमदार था। उसकी कमर ओर छाती पर हाथ फेरतें हुए मैं उसके दमदार शरीर को अच्छे से महसूस कर सकती थी। इस दौरान राजीव मुझे प्यार से मुझे चूमते हुए उत्तेजित ही करते जा रहे थे।

राजीव ने कुछ ही देर में मेरे ब्लाउज ओर ब्रा को उतार के मेरे बूब्स को आजाद कर दिया था। मेरे लटकते हुए बड़े और टाइड बूब्स मेरी खूबसूरती को ओर भी ज्यादा बड़ा रहे थे। मुझे देख कर राजीव की पेंट में भी एक बड़ा तम्बू तन चुका था। मैं राजीव की पेंट के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ कर सहला रही थी। इस दौरान राजीव मेरे बूब्स को दबा रहा था और उसे चूमता ही जा रहा था। मुझे काफी मजा आ रहा था। कुछ देर बाद राजीव ने मुझे पूरी तरह से नँगा कर दिया था। राजीव मुझे चौदने के लिए पूरी तरह से तैयार था। राजीव का लंड काफी मोटा ओर कड़क था। उसने मेरी चुत में एक ही झटके में अपना लण्ड उतार दिया था। मुझे पहले तो हल्का सा दर्द हुआ और फिर में भी “आह आह ओह ओर जोर से” बोलते हुए मजे से राजीव से चुदने लग गयी थी। कुछ देर तक राजीव ने मुझे अलग-अलग पोजिशन में चुदाई की ओर फिर मैं राजीव को उपर बैठकर उपर नीचे होकर मजे से चुदने लगी। इस दौरान ही मेने राजीव का लण्ड भी पूरी तरह से अपने मुंह मे उतार लिया था। उसका लंड काफी लाजवाब था। कुछ देर बाद ही राजीव मेरे मुंह मे ही अपने वीर्य को ढोलकर झड़ गया था। उस दिन के बाद से जब भी मेरे पति कुछ दिनों के लिए बाहर जाते थे, तो राघव ओर मैं जमकर चुदाई किया करते थे। कुछ दिनों बाद मेने अपने पति को तलाक दे दिया था और फिर मैं अपने बच्चे के साथ हमेशा के लिए राजीव के साथ ही रहने लगे गयी थी। राजीव काफी अच्छे इंसान है मैं आज भी उनके साथ अच्छा महसूस करती हूं।

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One thought on “एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चुद में डाल दिया था

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